Individuals seeking spiritual growth and detachment from worldly desires, regardless of their life stage.
भगवत मार्ग के पथिक को 10 बातें त्याग देनी चाहिए। यह जीवन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक है।
दूसरे के धन का अपहरण या चिंतन मन से भी नहीं करना चाहिए। यह अनिष्ट का कारण बनता है।
साधक को मिथ्या भाषण, निंदा और असंबद्ध प्रलाप से बचना चाहिए। ये वाणी में नहीं होने चाहिए।
बिना दिए किसी वस्तु को न छुएं। परस्त्री के प्रति लगाव और काम भाव पतन का कारण है।
दोषों को स्वीकार करके मार्ग में चलने से पतन होता है। सभी प्रकार के मैथुनों से बचना चाहिए।
दूसरे को कभी दुख न दें। अन्याय पूर्वक धन ग्रहण नास्तिकता पैदा करता है और भगवान से विमुख करता है।
दुर्जनों का संग अत्यंत हानिकारक है। यह सत्संग से प्राप्त उज्ज्वलता को नष्ट कर देता है।
भगवत मार्ग में मान, बड़ाई, प्रशंसा और सम्मान सबसे बड़े बाधक हैं। इन्हें त्यागने से ही तत्व बोध होता है।