# Video 2 सहअस्तित्ववादी विज्ञान

https://www.youtube.com/watch?v=5uJZoNc5_30
Translation: en

[00:01] मेरे बंधु।
  My brothers.

[00:03] मेधावी हूं।
  I am intelligent.

[00:06] और जिज्ञासा।
  And curiosity.

[00:13] मैं विश्वास करता हूं।
  I believe.

[00:16] आप लोगों के जिज्ञासाएं।
  Your curiosities.

[00:20] बहुत सारे बहुत सर।
  Many, many sir.

[00:24] सवाल।
  Questions.

[00:27] ऑन से।
  From them.

[00:29] सवालों का बहुत सर दर्दन से भरकर आप लोग भी कैसा कर रहे हैं।
  Filled with many pains of questions, how are you all doing?

[00:48] किसी दर्द भरे।
  Of some pain.

[01:22] मैंने हम जितने तरीके से भी जीते रहते हैं
  However we live, in whatever ways we live.

[01:25] किसी की यह पॉइंट का एक ही कीमत है किसी
  For some, this point has the same value, for some.

[01:30] की डर से किसी की 25 किसी की 90 ऐसा कीमत
  Out of fear, for some 25, for some 90, such a price.

[01:34] से हम जो वरीयता को आगे रहते हैं उसे कम
  From this, we prioritize what is ahead, and reduce it.

[01:38] में यह हमारा जिज्ञासा सबसे ऊपर हो जाति
  Our curiosity becomes the highest.

[01:41] है तब उसका समाधान समिति हो जाता है
  Then its solution is found.

[01:46] उसका कोई एक प्रकार नहीं है
  There is no single type of it.

[01:49] जैसा मैं अभी आपको उपलब्ध हूं हम मैं यदि
  Just as I am available to you now, if I

[01:53] उपलब्ध नहीं रहूंगा तो संसार में अस्तित्व
  am not available, then in the world, existence

[01:57] में सवाल का उत्तर राहत ही है
  is the answer to the question of existence.

[02:04] तो अभी अपने एक बात बताई थी स्मरण में की
  So, you just told me something, I recall that

[02:09] सवाल है तो उसका समाधान राहत है
  there is a question, so its solution is relief.

[02:23] दर्द अर्थ का मतलब दर्द
  Pain means the meaning of pain.

[02:26] परिस्थितियों नहीं बंटी है यदि सवाल नहीं
  Circumstances are not divided if there is no question.

[02:30] सवाल का जवाब ना हो ऐसा कोई यदि सवाल करता है
  If there is no answer to the question, someone asks such a question.

[02:33] वह दर्द भरे
  He is full of pain.

[03:34] अभी के वर्तमान में हम जो परेशान हो गए हैं।
  In the current present, we have become troubled.

[03:37] सवालों को पैदा करने से विद्वान हो गया ऐसा हम सोचते हैं।
  We think that by raising questions, one becomes knowledgeable.

[03:44] वह सवालों को पैदा करने पर धनी नहीं है।
  He is not rich in raising questions.

[03:46] विद्वान नहीं है ना मेधावी है।
  He is not knowledgeable, nor is he intelligent.

[03:56] सवाल का जवाब चाहना मेधावियों का कम है पहले।
  Seeking the answer to a question is less common among the intelligent, initially.

[04:03] और वह समिति इन्होंने से उसको जीवन में अपना मेधावियों का दूसरा वर्चस्व है।
  And that committee, by them, in life, has another dominance of the intelligent.

[04:32] उसके बाद जो मूलता है अभी पहले जिज्ञासा।
  After that, what is fundamental is curiosity first.

[04:36] यही है अभी हमको आप लोगों ने जो समझाएं हैं उसके अनुसार तो मध्य दर्शन मैंने प्रस्तुत किया है आप जैसे मेधावियों के और इसको प्रस्तुत करने के लिए प्रस्तुतों कर दिया इसका मतलब को यहां आप लोग सुना चाहते हैं ऐसा आप लोगों का मूल मतलब यही है जो विज्ञान से और अध्यात्म से अर्थात अथवा आदर्शवाद से दोनों के हाथ में जो नहीं लगी थी वह चीज हमारे हाथ ग गई उसका नाम मध्य स्टेशन अध्यात्म जो प्रतिपादन नहीं हो पी आध्यात्मिक प्रमाणित नहीं कर पाया आध्या दूसरों को समझने की तरीका या ताकत पैदा नहीं कर पाया या पहचान नहीं कर पाया उसका इसका नाम है मध्यस्थ इस बात ही जो मैं आगे भौतिकवाद है वो पहचान नहीं पाया

[05:39] यह प्रमाणित नहीं कर पाया बता नहीं पाया
  I could not prove it, I could not tell.

[05:42] सोच नहीं पाया इसी का नाम मध्यस्थ दर्शन
  I could not think, this is the name of mediating philosophy.

[05:46] अर्थात विज्ञान और आदर्शवक अभी तक तो दो
  That is, science and idealism, so far there are two.

[05:51] ही चिंतन आई है तो आदर्शवादी चिंतन का
  Only contemplation has come, so of idealistic contemplation.

[05:54] नजरिया तो रहस्य मुल्क ईश्वर केंद्र चिंतन
  The perspective is a mysterious, God-centered contemplation.

[05:58] ईश्वर से सब कुछ होता है यह नजरिया है
  Everything happens by God, this is the perspective.

[06:01] इसको अपने को अच्छी तरह से
  This, one must well.

[06:05] इसको ध्यान में रखना की आवश्यकता
  There is a need to keep this in mind.

[06:11] स्वीकृति के रूप में अपने के लिए इसको याद
  As acceptance, for oneself, remember this.

[06:16] क्या हुआ आदर्शवाद
  What happened to idealism?

[06:19] ईश्वर के रहस्य मलक ईश्वर केंद्र चिंतन का
  Of God's mysterious, God-centered contemplation.

[06:23] अभिव्यक्ति हर बात को हम ईश्वर की ईश्वर
  Expression, we connect every matter to God, to God.

[06:28] के साथ जोड़ना चाहते हैं ईश्वर से ही पैदा
  We want to connect with, born from God.

[06:31] हुआ ईश्वर में ही मारेगा ईश्वर में भी
  He will die in God, also in God.

[06:33] रहेगा ईश्वर में ही ईश्वर की कृपा से ही
  He will remain, only by God's grace.

[06:36] हम संभल पाएंगे इस प्रकार की सारे बात आई
  We will be able to manage, all such things came.

[06:40] है हम यदि बहुत बड़ी धनी होते हैं ईश्वर की कृपा से होते हैं और बहुत बड़ी भारी होते हैं तो भी हम ईश्वर कृपा से होते हैं
  If we are very rich, we are by God's grace, and if we are very great, we are by God's grace.

[06:49] बहुत बड़ी भारी विद्वान होते हैं तो भी हम ईश्वर कृपा से होते हैं बहुत बड़ी वाली और यश मिल जाता है ईश्वर कृपा से होता है
  If we are very great scholars, we are by God's grace. If we achieve great fame, it is by God's grace.

[07:02] अच्छे मकान मिल गया ईश्वर कृपा से मिल गया अच्छा कपड़ा मिल गया ईश्वर कृपा से मिल गया
  If we get a good house, it is by God's grace. If we get good clothes, it is by God's grace.

[07:08] हर बात को ईश्वर की जोली से जोड़ना चाहते हैं और उसके मॉल में का रहे हैं इसमें कोई आपत्ती भी बहुत ज्यादा दिन तक पता भी नहीं लगा है
  We want to connect every matter to God's bag and are in its grip. Even if there is any objection, it is not known for many days.

[07:18] इतिहास के अनुसार कुछ बाद में कुछ पता लगेगा ईश्वर का जोली कहां से जोली में कैसा डाला जाए इसके भी काफी चर्चाएं होगी उसका कोई उत्तर नहीं करना है
  According to history, something will be known later. Where does God's bag come from, how to put it in the bag? There will be much discussion about this too, but there is no answer to it.

[07:31] इस ढंग से बात हो गई उसका प्रश्न चिन्ह पर कोई चीज है ही नहीं है सबका उत्तर होना ही है वो इसका अभी मैं
  The matter has been discussed in this way, there is nothing on its question mark. Everything has to have an answer, which I am now...

[07:42] देश-दर्शन निष्पन होने का करण मैं से एक ये हुआ उसके बाद जैसा ही वैज्ञानिक गया
  One of the reasons for the country's sightseeing to be completed was this. After that, as soon as the scientist went,

[07:48] अपने ढंग से आदमी को पटना शुरू किया अभी हम समझना हूं
  He started to study people in his own way. Now I understand.

[07:54] आदर्शवाद से अधिक संसार में यदि शिक्षा स्वीकृत हुई शिक्षा में स्वीकृत हुई वह विज्ञान वादी भौतिकवाद है
  If education has been accepted more in the world than idealism, it is the scientific materialism that has been accepted in education.

[08:06] सभी देश में एक ही प्रकार से विज्ञान को पटना देखा गया किंतु मनुष्य में आता नहीं
  Science has been seen to be studied in the same way in all countries, but it does not come to humans.

[08:14] कैसा नहीं आता है तो यह वास्तु से सब कुछ होता है रासायनिक भौतिक वास्तु से सब कुछ होता है
  How does it not come? So, everything happens from matter. Everything happens from chemical and physical matter.

[08:36] और जीवन का पहचान नहीं हो पी इसीलिए वह आदर्शवादियों ने कहा है जीव और जगत
  And the identity of life could not be established. That is why the idealists have said, 'life and the world'.

[08:45] का मतलब को साधारण रूप में यही आप भी अनुभव कर सकते हैं।
  In simple terms, you too can experience this.

[08:49] भौतिक रासायनिक संसार को जगत के नाम से अपन अपने अवधारणा में का सकते हैं।
  The physical and chemical world can be called the universe in our own concepts.

[09:37] है तो यह जीवन में भाई की स्वाभाविक प्रवृत्ति बताए गए।
  So this is described as a natural tendency in life.

[09:40] वह भाई के लिए कोई आश्रय की आवश्यकता बताई गई।
  The need for shelter for that brother was mentioned.

[09:42] वो आश्रय मूल्य
  That shelter value

[09:46] श्रे ईश्वर बताए गए हैं ईश्वर ही सबका भाई को दूर करने वाला है उनका कृपा होने की आवश्यकता है ऐसा लेकर गए हैं इस की दोष का पहले ज्ञान का ज्ञान ही एक मंत्र बात थी
  Shri Ishwar is described as Ishwar, the one who removes everyone's suffering. His grace is needed. This was taken with the idea that the knowledge of this fault, the knowledge itself, was a mantra.

[09:57] उसके बाद भक्ति को भी मां लोक मान्यता मिली और लोगों ने भक्ति से भी ये जो भाईसाहब भाई का मुक्ति हो जाति है यह अंतिम ऐसा कुछ परिकल्प नहीं है
  After that, devotion also gained popular recognition, and people believed that devotion also leads to liberation, brother. This is not a final concept.

[10:07] कौन छुड़ाएगा वाला बात आता है उसमें भी ईश्वर के स्थान पर एक देवता थे
  The question of who will liberate arises, and in that, there was a deity in place of God.

[10:13] देवता को प्रमाणित करने वाला कोई नहीं है और देवता से भाई दूर हो जाएगा यह हम सबके मां में भरे हैं
  There is no one to prove the deity, and the idea that the deity will remove suffering is ingrained in all our minds.

[10:23] ऐसा कुछ नहीं मिला
  Nothing like that was found.

[11:05] क्या फर्क पड़ा इसमें
  What difference did it make?

[11:07] सर दुख डर इधर से छुड़ाने के लिए वह
  To get rid of the headache and fear from here, that

[11:10] सिद्धार्थ में भी वही प्रार्थना करना है
  In Siddhartha too, the same prayer has to be made.

[11:13] और जो आप हम हैं
  And who are you and I?

[11:24] अभी तक जीव जगत के बड़े में
  Until now, about the living world,

[11:27] आदर्शवादियों का नजरिया
  the perspective of idealists.

[12:00] तो इस ढंग से पहले फेल करके हम कहानी की
  So in this way, failing first, we are of the story

[12:05] नहीं र गए
  did not remain.

[12:06] भाषा में बहुत फाइल किंतु प्रमाण के रूप में कहानी नहीं रहे इस्तान से अब उसके बाद आई है तो यह दोनों के बाद जो इन दोनों से हम पीड़ित होकर जब मनुष्य जब समझना वाला है रन वाला है जान वाला है हंसने वाला है और अपने वाला है कोन वाला है तो इसमें ईश्वर कौन सा चीज को चुडा के ले जाता है कैसा ले जाता है और कौन ऐसा छोड़के ले जान वाला ईश्वर के अलावा और कोई चीज होगा तो क्या चीज है उसको यह प्रकार से खोजना की इच्छा हो ईश्वर है तो क्या यह चीज क्या है
  There are many files in the language, but the story is not in proof. From Istanbul, after that, it has come. So after these two, who from these two, when humans are victimized, when humans are understanding, running, knowing, laughing, and belonging, who is it? So in this, what does God take away, how does he take it away, and who is there besides God who takes it away? If there is something else, what is it? The desire to find it in this way is God. So what is this thing?

[12:53] वास्तु को प्रमाण मां में नहीं वास्तु को जैसा आप कौन हैं आपका नाम परेशान है ऐसा बात हो गई इस प्रकार की चीज आने से मनुष्य और भी
  The object is not in the proof in the mind. The object, like who are you, your name is troubled. Such a thing has happened. With the arrival of such things, humans are even more

[13:07] गुमराह हो गया तो मैं इसमें इसको
  If I get misguided, then I in this it

[13:13] अथवा
  Or

[13:15] स्थिति वर्ष या हमारे
  Situation year or our

[13:33] मनुष्य में दूरी स्पष्ट है वह दूरी का
  The distance is clear in humans, that distance's

[13:37] रेखा कहां है
  Where is the line?

[13:42] ईश्वर और जीव के बीच में क्या संबंध है
  What is the relationship between God and the soul?

[13:45] यदि ईश्वर है तो उसे वास्तु के रूप में
  If God exists, then as an object

[13:48] क्या चीज है यह हमारा
  What is this thing, our

[13:55] मोक्ष और बंधन के बड़े में काफी बात किया
  Much has been said about liberation and bondage.

[13:59] जाता है जैक रहे उपनिषदों में बहुत की गई
  It is done. Much has been done in the Upanishads.

[14:01] है ब्रह्म सूत्रों में किया गया है
  It has been done in the Brahma Sutras.

[14:04] और योगसूत्र में भी किया गया सभी के
  And it has also been done in the Yoga Sutras, by all.

[14:07] अपने-अपने ढंग से जो कर सकते थे उसे समय में वो सब किया हैं और वो हमारे लिए तो स्पष्ट नहीं हुआ हमको बहुत नहीं हुआ तो तत्कालीन विद्वानों से हमको बहुत करने के दिशा करने के लिए हमारे तत्कालीन विद्वान नहीं हुए पूरा नहीं पड़े|
  They did everything they could in their own ways at that time, and it was not clear to us, it did not happen much for us, so our contemporary scholars did not do much to guide us, they did not become complete.

[14:55] आगे चलकर के एक संयुक्त से 40 आए 47 में हमारा देशवासियों के लिए और उसे समय में एक संविधान बनाने की आवश्यकता आई उसमें जो
  Later, 40 came from a joint, in 47, for our countrymen, and at that time the need arose to make a constitution, in which

[15:12] पहले जैसा संविधान था उसको लिया था।
  It took the constitution as it was before.

[15:14] स्वीकार गया उसमें तीन बात को उधर दिया।
  It was accepted, and three things were given there.

[15:17] गया।
  Went.

[16:05] हमारा संकट इस सब के ऊपर चले गए हमारा सर।
  Our crisis went above all this, our head.

[16:09] सुविधा सारे संग्रह सारे हमारा जो मैंने
  Convenience, all collections, all that I have

[16:13] हदीस इन सबके ऊपर यह पहुंच गए पहुंच गए तो ये इसका वर्चस्व हो गया सबके ऊपर बाकी सब इसके प्रभाव से प्रभावित हो गए अंत होगा
  Hadith, above all these, they reached, they reached, so this became dominant over all, the rest were all influenced by its effect, it will end.

[16:24] मैं अपने को मानसिक रूप में तैयार किया इसके ऊपर सोचा जाए इसका निष्कर्ष निकाला जाए भाटिया मूल में क्या केंद्र थे एक तो स्वर्ग में बने बंधन के पक्ष में संविधान का द्रब्यकरण होता ही नहीं होता है
  I prepared myself mentally, thought about it, drew a conclusion from it. What were the central points in Bhatia's origin? One is the bondage created in heaven, the constitution is not materialized in favor of it.

[17:05] यह अस्तित्व में जीवन नाम की चीज सबसे बड़ी वाली बात क्या हो गए करामत जो वी आदर्शवादियों के हाथ में नहीं लगी थी
  This thing called life in existence, what became the biggest matter, the miracle that was not achieved by idealists.

[17:14] विज्ञान एवं विज्ञानों का हाथ में नहीं लगा है वह चीज है जीवन
  The thing that is not in the hands of science and sciences is life.

[17:20] दोनों के हाथ में नहीं लगाते वह जीवन हाथ में ग गए जीवन हमको समझ में ए गई मैं जीवन हूं इस बात की यकीन मुझमें स्थापित हो गई
  If you don't put both in your hands, that life is in your hands. I understood life. The conviction that I am life was established in me.

[17:31] मैं कल मिलकर के अस्तित्व में दृष्टा करता भौंकता हूं
  Tomorrow, I will see myself existing.

[17:34] हमको जो कुछ भी बाकी संसार है जैसा सर घर से लेकर सर सूरज चंद से लेकर और आकाशगंगा से लेकर यह धरती से लेकर हवा से लेकर पानी से लेकर मिट्टी से लेकर जितने भी चीज हमारा चारों तरफ फैली हुई है इसके साथ में राहत हूं इसको छोड़कर कहता हूं
  Whatever the rest of the world is, from the head of the house to the sun and moon, from the galaxy to this earth, from the air, from the water, from the soil, all the things spread around us, I live with them, I say by leaving them.

[17:58] इसलिए एक सहस्तृत्व है साथ-साथ में होना है इसका प्रमाण हम को समझ में ए गए
  Therefore, there is a co-existence, a being together. We understood the proof of this.

[18:06] उसके बाद यह भी ए गए ईश्वर और जगत के बड़े में जब बात करते थे ईश्वर के बारे में यह पता
  After that, we also came to know about God and the world when we talked about God.

[18:17] लगा पहले से एक उपकार तो किया थे हमारे बुजुर्गों ने ईश्वर व्यापक उसको पूछा गया था जो उपनिषदों में चर्चा किया हैं व्यापक का क्या मतलब है ईश्वर ईश्वर में व्यापक राहत है।
  It seems our elders have already done a favor, God is omnipresent. He was asked, what does omnipresent mean in the Upanishads? God is omnipresent, there is relief in God.

[18:39] ठीक है।
  Okay.

[18:50] तो उसके बाद जब हम देखें जो व्यापक रूप में फैला हुआ है इसी में सभी प्रकृति मैंने चैतन्य प्रकृति जीवन ना जीवन को हम चैतन्य प्रकृति नाम दिया है तो चैतन्य प्रकृति भी किसी व्यापक वस्तुओं
  So after that, when we see that which is spread in an omnipresent form, all nature within this, I mean conscious nature, life, no, we have given the name conscious nature to life, so conscious nature is also some omnipresent thing.

[19:19] में नहीं थे
  Were not in.

[19:22] रासायनिक भौतिक वस्तुएं हैं ये भी इसी में
  These are also chemical physical objects in this.

[19:26] नहीं थे ये पता चला इसको अच्छे तरह से
  Were not, this was found out well.

[19:29] हमने समझा यह दोनों समझ में आने की बात यह
  We understood, this matter of understanding both.

[19:33] पता चला है की मूलता शहर स्थित ही है
  It has been found out that it is fundamentally city-located.

[19:37] प्रकृति और व्यापक वास्तु एक-एक वास्तु
  Nature and vast architecture, each architecture.

[19:40] में नित्य
  In daily.

[19:42] सहस्थित यह बात समझ में आया
  Co-existence, this matter was understood.

[19:48] इसको
  This.

[19:52] अलग किया
  Separated.

[20:02] तो इस के साथ-साथ यह अभी दूसरा भाग कहा था
  So along with this, this was called the second part.

[20:06] आकाश गंगा से धरती तक दूरी तक है ना पानी
  From the Milky Way to the Earth, up to the distance, right? Water.

[20:10] तक हवा तक सबके साथ हम रहते हैं तो यह
  Up to air, we live with everyone, so this.

[20:13] दोनों लेकर के दोनों जब प्रमाणित हो गई ये
  Taking both, when both were proven, these.

[20:16] इसमें भी सहासित हुई है बंता है और ये
  Co-existence has also happened in this, it is formed, and this.

[20:20] मूलत मूल में भी सहज स्थित है फल भी सहासित भी है मूल भी सहस्थित रहे एक बात स्पष्ट हो गई इस ढंग से हम जो भौतिकवाद और आदर्शवाद से जो छुट्टी हुई जीवन ज्ञान हासिल होने से यह मध्यस्थ दर्शन जो भौतिकवाद और आदर्शवाद दोनों से छुट्टी हुई थी इसीलिए स्पष्ट करने के लिए कई वीडियो से प्रेरित किया है उसका उसका जो कर अध्यायों में पूरा मध्यदर्शन को लिखा है पहले अध्याय है मानव व्यवहार दर्शन दूसरा अध्याय है मानव अभ्यास दर्शन

[21:24] अनुभव के बड़े में यह बात पहले विगत में

[21:27] यह बात सोचा जाता था की अनुभव को बताया

[21:31] नहीं जा सकता

[21:33] बिल्कुल उसका उल्टा हुआ यदि सही ढंग से

[21:36] सटीक ढंग से उचित ढंग से कारीगर ढंग से और

[21:40] जीने की ढंग से प्रमाण की ढंग से कोई चीज

[21:43] बताया जा सकता है तो और हम यहां ए गए

[21:46] कितना उल्टा हो गया एकदम पलटी का गए

[22:06] करने के स्वरूप में हर मोड मुद्दा आने लगी

[22:09] वह प्रतीक आने लगे

[22:14] तो बहुत सारे अभ्यास साधना योग है

[22:28] ना की यह समझदार का समझदार होने का प्रमाण

[22:32] नहीं है कहां पहुंच गए

[22:34] कहां पहुंच गए यह सारे बकरम समझदार होने

[22:39] के लिए इसका प्रयोग करना कोई अंशित नहीं

[22:42] है समझदारी यदि लक्ष्य है

[22:46] यही समझदारी है क्या चीज योग अभ्यास तब

[22:52] हवन पूजा पाठ प्रार्थना पत्र यही हमारा

[22:57] समझदारी का यदि गवाही प्रमाण बताना

[23:00] चाहेंगे यह सार्थक नहीं है

[23:03] यह भी हमको समझ में ए गया

[23:14] संबंध

[23:22] हो गए

[23:27] तो क्या क्या परिवर्तन हो गए भाई हम हर

[23:31] समस्या का समाधान हमारे पास

[23:34] हर स्थिति में हम अपने में

[23:40] हम पराधीन कुछ नहीं हम भयभीत होने का कोई

[23:43] जगह नहीं है हम अपने पुरुषेर से हम समर्थी

[23:47] को अनुभव करते हैं अपने परमार्थिक असवारथ

[23:51] अभ्यास विधि से हम समझदारी को से संपन्न

[23:55] हो जाते हैं समाधान से परिपूर्ण हो जाति

[23:57] है

[24:01] बनी समझदार बने के लिए अभ्यास करिए

[24:05] उसको हम जिज्ञासा कहते हैं

[24:08] ठीक है और दूसरा समझदारी को प्रमाणित करने

[24:12] में अभ्यास करिए ध्यान दीजिए

[25:08] उदय होने लगी उसमें और भी हम

[25:12] जो समझा हो इसका प्रमाण हम किसी को समझना

[25:16] वो दूसरे को समझने पर वह अंतरित हो जाना

[25:19] अर्पित हो जाना इस स्थिति में हम प्रमाणित

[25:23] होते हैं हम समझ गए हम हमारे में कोई

[25:26] प्रमाण नहीं है

[25:27] सहस्रमी ही प्रमाण होगा इस ढंग से समझकर

[25:32] समझा करके हम समझदार प्रमाणित होता हूं

[25:34] क्या होते हैं मैं किसी को समझा करके हम

[25:39] समझदार होना प्रमाण प्रमाणित होना पड़ता

[25:42] है हम किसी को शिखा करके ही हम शिखा हुआ

[25:46] हूं इस बात का प्रमाण पत्र

[25:49] किसी ने उपलब्ध कर दिया

[25:52] हमारा उपलब्धि होना भी प्रमाणित हो जाति

[25:56] है

[26:16] ईश्वरवाद का क्या मतलब है ईश्वर सब कुछ

[26:20] करते हैं इस ब्रह्म को छोड़ देना चाहिए

[26:23] ईश्वर की ताकत से हम सब भरे हैं इसको

[26:27] उपयोग करके हम समर्थन सकते हैं समाधान

[26:30] सकते हैं इस ढंग से सोने की आवश्यकता है

[26:38] विचार का मूल मूल रूप ऐसा

[26:43] कहते हैं भाई उसका जो बहुत साधारण बात है

[26:47] जैसा आप हमारे बीच में जो रिक्त स्थल है

[26:51] यही स्वयं में व्यापक वास्तु

[26:55] हर पर

[26:57] रहती है

[27:35] अली से मुक्त कोई होता ही नहीं कितने भी

[27:39] टुकड़ा करिए वह सभी टुकड़े की सभी और यही

[27:42] यही रिक्त स्थल रहेगी

[27:44] इसीलिए टुकड़ा माना जाता है नहीं तो कोई

[27:47] दूसरे रास्ता ही नहीं है तुक्रमण देंगे

[27:49] आप हम कल्पना करने का भी आधार बंता है ये

[27:53] तो कल्पना में ही आता है संख्या से हमित

[27:55] करना इसमें यही कल्पना आई है हर टुकड़े के

[27:59] सभी वो ये रिक्त स्थल रहती है तभी हम

[28:03] टुकड़ा करते हैं नहीं तो कहानी नहीं सकते

[28:05] ये कुंडा कोई भाग करता है भाग में भाग

[28:07] करते हैं टुकड़ा करते हैं वो इसीलिए उसको

[28:10] टुकड़ा किया मानते हैं की उसके सभी वो

[28:12] तसल्ली दिखती है ठीक है पहले कैसा था वो

[28:16] कमरे में

[28:18] बनाई था उसके बाद आपका सहयोग से वह

[28:22] प्रदर्शित हो गए हैं

[28:29] तब पता लगता है

[28:49] चुंबकीय बाल संपन्न होने का क्या प्रमाण

[28:51] मिला प्रमाणिया मिला एक-एक परमाणु आवेश एक

[28:56] से अधिक से मिलकर व्यवस्था को प्रमाणित

[28:58] किया

[29:00] एक से अधिक परमाणु मिलकर यह कानों को

[29:03] प्रमाणित किया और एक से अधिक अनु मिलकर एक

[29:08] रचना को प्रमाणित किया और वही अनु है

[29:11] प्राण कोश बनकर अनेक प्रकार के रचना कर

[29:14] दिया ये रासायनिक भौतिक कार्यक्रम का यही

[29:17] लंबाई चौड़ाई जो आप हमको पार्वती के रूप

[29:20] में मिलता है

[29:21] फल के रूप में मिलने वाले इतने

[29:24] इसके ऊपर कितने भी प्रश्न हो सकता है उसका

[29:28] उत्तर हमारे पास है

[29:37] विश्वास की धरती तक पहचाने की विधि

[30:14] जो ज्ञान से विवेक मैंने समझदारी से विवेक

[30:20] विवेचना करने की विधि बंटी है उसे लक्ष्मी

[30:23] निर्धारित होता है

[30:25] क्या लक्ष्य

[30:27] जीवन का लक्ष्य वनस्पतियों का लक्ष्य और

[30:31] पदार्थ संसार का लक्ष्य सब समय में आता है

[30:35] निर्धारित विधि से सभी पदार्थ संसार अपना

[30:39] कार्य कभी रहे इसका नाम है पदार्थ संसार

[30:42] में जो कम करते हैं

[30:45] नियंत्रण पूर्वक करते हैं

[30:59] पहले से भी आया है अभी भी कर रहा है

[31:17] प्रयोग कर रहा है

[31:25] उसमें सफलता का अनुभव करता है उसके विपरीत

[31:28] करता है

[31:30] असफलता के फलस्वरूप नाना प्रकार की

[31:34] परेशानियां को हम नहीं सफलता के आधार पर

[31:37] अपने छतिया फूलती है यह दोनों को मनुष्य

[31:40] नहीं करता था

[31:45] मतलब क्या हुई जो हम व्यापक वास्तु एक-एक

[31:50] वास्तु साथ-साथ में हैं यह विभक्ति हो

[31:53] नहीं सकता इसीलिए सहज सिद्ध

[31:57] हमारा जो कुछ भी विज्ञान विधि से तारक

[32:00] वहां पर प्रोड्यूस करते हैं प्रस्तुत करता

[32:03] हूं और इसका पूरा तारक विधि इसी से जुड़ा

[32:08] हुआ है

[32:20] मूल तत्व उसको मध्य दर्शन

[32:56] [संगीत]

[33:06] इन दोनों से हाथ से छूटक छठ गया था इसीलिए

[33:09] मैं देश दर्शन

[33:12] क्या हुआ एक वाक्य

[33:20] छठ गई थी क्या चीज छोटा भाई जीवन

[33:25] जीवन का प्रतिपादन इन दोनों वृद्धा से

[33:28] छुट्टी थी इसीलिए यह मधेश दर्शन हमें तो

[33:32] यह निरंतर व्यवस्था में जीता है इसीलिए

[33:36] सहायता हुआ था

[33:46] व्यवस्था के रूप में वर्तमान में हर

[33:48] वर्तमान में नीति वर्तमान में प्रमाणित

[33:51] होती जाति है

[33:58] हमको समझ में आता है आपको भी समझ में आएगी

[34:02] हमको भी विश्वास होता है आपको भी विश्वास

[34:05] होता है इसके आधार पर

[34:22] अभी हम जितने

[34:24] यहां उपस्थित

[34:28] हैं इनके बीच में मध्य दर्शन के संबंध में

[34:33] जो कुछ भी बातें हुई

[34:36] और शंकाएं इस प्रकार से अद्भुत हुई

[34:44] मध्य मार्ग नाम दिया है

[34:48] यह

[34:51] मध्य मार्ग

[35:19] यद्यपि इसका आधार भिन्न है इसके बावजूद भी

[35:23] आपका ऐसा पूछना है इसका आगे और भी जो

[35:27] दर्शन में जो प्रतिपादित किया हैं उन

[35:31] मुद्दे पर ध्यान का ध्यान करना चाहते हैं

[35:34] वो ये आगे चलकर के दर्शन में यह प्रतिपादन

[35:39] हुए हैं ये मध्य सक्रिय अध्यक्ष दर्शन

[35:43] मध्य जीवन मध्य शक्ति

[35:59] यह होते हैं

[36:47] तो इसमें इस बात के लिए धन्यवाद है आप

[36:51] लोगों को जो आप लोग सोने के लिए भी तत्पर

[36:55] हैं आप लोगों में यह गहराई विधि से सोने

[37:00] के बड़े में जो अभी जैसा व्यक्त किया हैं

[37:02] इसको बनाए रखेंगे ऐसा मैं विश्वास करूंगा

[37:06] हम बारंबार आपको धन्यवाद देते रहो जय हो

[37:10] मंगल रहो कल्याण

[37:14] बाबा जी आपने इस चिंतन को

[37:18] अस्तित्व मलक मानव केंद्रित चिंतन ऐसा

[37:22] क्यों कहा

[37:24] मानव को केंद्र में रखकर सोने की क्या

[37:28] जरूर थी और स्थित मलक होने से आपका क्या

[37:31] आश्रय और पुरानी विचारधाराए जो हमको माना

[37:35] जाति की मिलती हैं उसमें क्या कमी र गई थी

[37:39] जिसके लिए जिसकी वजह से आपको इस नाम से एक

[37:42] चिंतन को मनुष्य जाति के सामने रखना पड़ा

[37:54] ने के लिए कहा है

[38:03] अपने आप में यह प्रतिपादन किया

[38:08] है की अस्तित्व मलक मानव केंद्र चिंतन

[38:16] मानव के अंदर चिंतन से यह मध्य दर्शन शहर

[38:20] स्थित है

[38:26] इसमें आपका

[38:30] प्रश्न किया है क्यों अभी विगत में जो दो

[38:35] बात ए गई थी और उसके बाद भी आप तीसरी

[38:39] प्रकार से आपके इस प्रकार से अस्तित्व

[38:42] मूलत मानव केंद्र चेतन बताने की क्या

[38:45] आवश्यकता ए गई

[39:27] मनुष्य अपने जीवन को ही पहचान में कोई

[39:30] रास्ता नहीं निकाला था यह बात आपको बताएं

[39:37] दृष्टा करता भगत है

[39:40] वो दृष्टा पद को करता पद को भोक्ता पर

[39:43] मानव परंपरा में ही जीवन प्रमाण करता है

[39:46] मूल मुद्दे

[39:48] तो दूसरा कोई

[39:51] स्थिति में जैसा की जीव संसार में भी जीवन

[39:55] होता है होते हुए दृष्टा करता पद को

[39:59] प्रमाणित नहीं करता है

[40:08] इस विधि से अस्तित्व मलक अस्तित्व तो नीति

[40:13] वर्तमान नहीं है

[40:41] यह इस प्रश्न के अर्थ में तो पहले कुछ

[40:44] पहचाना गया तो ईश्वर परमात्मा देवता इस

[40:48] प्रकार की परिकल्पनाएं हुई और उसके बाद जो

[40:51] है ना वास्तु रसायन

[40:53] भौतिकता ठोस तरह वायरल ये सभी बातें शुरू

[40:57] हुई इसके आधार पर कुछ बातें ये प्रस्तुत

[41:01] किया प्रस्तुत करने पर इनका कम्यस्थली और

[41:05] संघर्ष के जगह में पहुंचा भौतिक प्रतिनिधि

[41:09] से वो पूरा होने वाला नहीं है इसीलिए यह

[41:13] कहानी भी परिवार या समाज व्यवस्था होने का

[41:18] तरीके की आधार नहीं बना कितनी बात है

[41:26] सब कुछ करता है हमारा कोई जिम्मेदारी नहीं

[41:30] रहा

[41:31] हर जगह

[41:36] प्रार्थना करते रहो जो कुछ भी घटित होता

[41:40] है उन्हें की कृपा से हो रहा है मानो मा

[41:42] गए तो उन्हें से होने के रूठ गए और जी गए

[41:56] तो यह लिखा ही है तो उसको थोड़ा स्पष्ट कर

[42:00] दो

[42:09] अनार

[42:17] लिखी गई है इसका मतलब बहुत नहीं जो

[42:21] आदर्शवादी विधि

[42:27] एक प्रकार से लिखित रूप में ए चुकी है आप

[42:31] लोग देख भी सकते हैं

[42:40] डरना रहे

[42:42] तो हर मनुष्य चाहता है

[42:55] तो कहां से विश्वास करेगा भाई

[42:58] तो इसके लिए दलबहै के स्थान पर समाधान

[43:01] समधिन उपस्थित हो सके और यह स्थिति को

[43:05] हमने देख लिया जी लिया उसके बाद हमने सोचा

[43:09] मैं अस्तित्व मोलर मानव शरीर चिंतन नहीं

[43:12] है ये चिंतन कहां से ए गए अस्तित्व तथा ही

[43:16] मानवता ही किंतु यह सीधा अस्तित्व से सर

[43:21] सर सूत्र को किस सूत्र को जीने के सोच

[43:25] नंबर है जीने में सुख को अनुभव करने की

[43:29] सूत्र समाधानी तो होने के स्रोत समर्थ

[43:32] होने के स्रोत वर्तमान में विश्वास करने

[43:34] का सूत्र और सहस्ट्रूमेंट जी रहे हैं इस

[43:38] बात को प्रमाणित करने का सुपरों को हासिल

[43:41] कहां से करता है

[43:45] और प्रकाशित कौन करता है मानव ही करता है

[43:47] दूसरा कोई करने वाला नहीं है

[44:05] यह तो करेंगे

[44:07] इस ढंग से यह बात अस्तित्व मलक मानव के

[44:11] अंदर चिंतन का आधार बना क्या चीज से जो

[44:16] वर्तमान में प्रमाणित होने की धरती से यह

[44:20] भी नहीं की तो आपको बात बता दिया ऐसा नहीं

[44:23] है वर्तमान में प्रमाणित होने की धरती से

[44:26] ये नाम पड़ा

[44:28] तो अस्तित्व मानव केंद्र चिंतन विधि से ही

[44:32] हर मानव समाधान है

[45:08] आदमी जिम्मेवार बंता है इस आधार पर वह बन

[45:12] जाति है समझदारी के बाद जिम्मेवार ईमानदार

[45:15] होता है ईमानदारी के बाद जिम्मेवार होता

[45:17] है जिम्मेवारी के बाद भागीदारी करता है

[45:21] समाधान

[45:28] केंद्र चिंतन का जो नाम रखना उचित समझा

[45:32] इसमें और भी जो मेधावियों का

[45:36] सर मैंने एक सुझाव सभी मैंने संभावित है

[45:41] और उसको हम स्वागत करते ही हैं और इसमें

[45:45] यदि कोई न्यूनतम हो उसको पूरा करने के लिए

[45:48] हम पूरा तट पर है

[45:53] जितने भी प्रश्न होगा

[46:23] मानव में ही जागृति प्रमाणित होगी और कोई

[46:26] जीव जानवर और ये दीवार इससे प्रमाणित होने

[46:31] वाला नहीं है

[46:33] जागृति हर मानव में प्रमाणित होने की

[46:36] स्थिति में समाधान समरसेबल

[46:39] निरंतर वर्तमान में प्रमाणित होगी

[46:41] फलस्वरूप माध्यमिक जो आमंत्रण से आता रहा

[46:45] सुख समृद्धि चाहता रहा

[46:48] जान माल का सुरक्षा चाहता र आदिकाल से वो

[46:52] सार्थक हो जाता है

[47:07] इसको मैंने देखा है इसमें मैं जिया है

[47:12] इसके आधार पर उसका नाम जय हो

[47:35] समझदारी का जो जो आ एक आ थोर है समझदारी

[47:41] पर विश्वास करने का थोर है वह बहुत ही है

[47:52] वास्तु के साथ

[47:55] बना राहत है शब्द के साथ अर्थ बना राहत है

[47:59] शब्द के साथ जो अर्थ बना राहत है वह

[48:02] वास्तु सहित अर्थ सहित

[48:48] ठीक है यह मुख्यमंत्री

[48:51] तो इस ढंग से क्या हुआ प्रमाण क्या होगा

[48:54] वास्तु होगा की शब्द होगा

[48:59] इसको यहां हम सोच सकते हैं स्वप्न पर पता

[49:02] लगता है वास्तु ही प्रमाण है अस्तित्व

[49:07] से इंगित वास्तु मिलने पर प्रमाण है

[49:11] प्रमाण का स्वरूप वास्तु है ना की शब्द

[49:15] ऐसा हमको समझ में आया है शब्द ज्ञान

[49:51] में रहेगा

[50:04] सारे अस्तित्व को कर अवस्था में पढ़ें

[50:07] एक पदार्थ अवस्था एक प्रणाम

[50:13] को प्रकार के मानव का रूप स्वभाव धर्म को

[50:17] एक संपूर्ण करें शरीर और जीवन के अस्तित्व

[50:22] में सहस्ट्रूमेंट उसके बाद जीवन के रूप

[50:25] में पुनः अध्ययन के

[50:27] जीवन के रूप में जीवन क्या कार्यकर्ता है

[50:30] उसको भी हम

[50:32] अध्ययन के अनुभव किया और उसके बाद शरीर के

[50:36] रूप में क्या कार्य होता है क्या कार्य

[50:39] कार्य

[51:13] ठीक है ना यह जीवन कैसा थी संवेदनाएं शुरू

[51:17] होते हैं जो जीवन सर्जरी शरीर को पहले

[51:20] जीवंत बनाए रखना है और ज्ञानवाही तंत्र पर

[51:24] अपने संकेत को प्रमाणित विज्ञानित करता है

[51:27] संकेत करता है प्लस रोग शरीर में वो

[51:31] संवेदनाएं प्रमाणित होते हैं हर व्यक्ति

[51:34] इसको अनुभव करता है

[51:35] शहर व्यक्ति का

[51:39] इस कम में आपको ये बताया

[51:41] संवेदनशीलता पूर्वक मनुष्य योजना व्यवस्था

[51:44] में जीना बताना है कितने दिन की हजारों

[51:47] लाखों वर्ष की इतिहास के अनुसार व्यवस्था

[51:50] में जीना बनाना

[52:00] चाहता है

[52:10] अध्यात्म मार्ग के अनुसार आदर्शवाद के

[52:13] अनुसार समय तनाव को सीनेट देकर के मृत्यु

[52:17] से हमें सलाह हूं यह कहते हैं संवेदनाएं

[52:20] ना हो ऐसा वो कहते हैं

[52:23] भौतिकवादी यह कहते हैं संवेदनाओं में डूबी

[52:27] रहो बोलिए साहब हम कहां जाए

[52:34] यह कहते हैं इस में दुबे रहो अब इसमें

[52:37] कहां जाए आदमी एक सोने की बात है

[52:56] इसमें कोई मानव परंपरा में एडिशन नहीं है

[53:05] यह जो आज भोग रहे हैं

[53:08] एक प्रकार की जातियां यह कहते हैं सबको

[53:10] मार डेल हमारा जाति पैदा करें एक बहुत

[53:14] पहले तो चीन रसिया में एक उनका रिपब्लिकन

[53:18] दे नाम की चीज होता है चीन एक संदेश भेजो

[53:21] संसार में नाम कम्युनिस्ट सबको मार दिया

[53:24] जाए कम से कम्युनिस्ट प्रजा को पैदा किया

[53:26] जाए इस प्रकार से वो शुभ संदेश

[53:32] नहीं हो पाया इसी प्रकार से मनुष्य में

[53:36] अनेक अनेक ऐसा अध्ययन का आवेशित उदगार

[53:39] निकलते है उसको करने

[53:42] काटते हुए इसको मित दें इस प्रकार की चीज

[53:45] जाते हैं यह

[53:48] संवेदनाओं का आशीर्वाद कहलाता है

[54:11] की नहीं दूरी को पटना जरूरी है की नहीं यह

[54:15] सोने की मुद्दा बंता है

[54:36] कितना छोटी सी बात है

[54:42] रोना का नाचना है ना और सर विलाप करना

[54:47] प्रलाप करना सीखना चिल्लाना

[54:50] पर पटकन यह सब तो हम करके देखें मेरी उसे

[54:55] कुछ भी नहीं निकाला

[54:58] तब हमको यह पता लगा होना क्या चाहिए होगा

[55:02] यह चाहिए की हम हम कम से कम समय का दृष्टा

[55:06] बना रहना चाहिए इस बात को

[55:19] देखते रहने के लिए दृष्टापन

[55:29] मेरे अनुसार दृष्टात प्रतिष्ठा तभी होता

[55:32] है तो संवेदनाएं जो करते हैं उसको हम

[55:35] देखने मंत्र से हम भ्रष्ट नहीं हुए

[55:38] संवेदनशीलता में संज्ञानशीलता में

[55:41] संवेदनाएं जब नियंत्रित होते हैं तब समय

[55:44] संज्ञानशीलता का हम दृष्टा बनते हैं

[55:49] ज्ञान जीवन ज्ञान का दृष्टा जीवन ही है ये

[55:54] बात हम समझे इसलिए हम दृष्टा ज्ञात और

[55:59] करता भोक्ता जीवन ही होता है इस बात को

[56:03] हमने घोषणा की है तो भोगनी वाला भी जीवन

[56:07] है

[56:09] दर्द को जब जीवन राहत है शरीर तब तक दर्द

[56:14] उसके बाद कहां दर्द

[56:16] मारा हुआ आदमी को कहां दर्द रहा है भाई

[56:23] संपूर्ण कर्म करते हुए हम देख ही रहे हैं

[56:26] तो इसीलिए जो शरीर को दर्द होता है यह बात

[56:31] हमको समझ में नहीं आया पहले हम ऐसे ही

[56:34] सोचते रहे जबकि शरीर को दर्द नहीं होता है

[56:36] जीवनी दर्द का दर्द को पहचानता है फॉल्स

[56:40] रोग डर से मुक्ति का उपाय खोजना है यह कल

[56:43] मिलकर के बाद आए इस कम में पहले से हम

[56:46] आयुर्वेद को सोचा है ज्योतिषी को सोचा है

[56:49] ये सभी बटन को सोचते हुए चले आए हैं अभी

[56:52] भी सोचते रहते हैं कुछ ना कुछ इस कम में

[56:55] हमारा सोचना ऐसा हुई

[56:58] संज्ञानशीलतापूर्वक हम संवेदनाओं को

[57:01] नियंत्रित होता हुआ देख पाते हैं

[57:03] संज्ञानशीलता है सार्थक होता हुआ प्रमाणित

[57:05] होता हुआ देखते हैं यही दृष्टि पर

[57:08] प्रतिष्ठा का मतलब ऐसे दृष्टात प्रतिष्ठा

[57:11] में

[57:22] पहचान लेना है और अनुभव का मतलब

[57:26] क्या है

[57:28] स्वयं को दृष्टा पद में पहचान लेना और

[57:33] उसको प्रमाणित कर लेना यह दृष्टा पद

[57:36] प्रतिष्ठा का मतलब

[57:37] जागृति का मतलब यही है

[57:41] प्रमाणित होने का मतलब यही है और सोनू

[57:45] शासित होने का मतलब भी यही है इस ढंग से

[57:48] मानव महपयोग की सरवटे मुख उपयोगी होने

[57:52] वाला जो बात भी जगत मानव में ही आता है

[57:55] नहीं तो संकीर्णता कुछ भाग में हम उपयोगी

[57:58] होने दौड़ते हैं वो भी अधूरा हो जाता है

[58:00] कहानी नाक काटा राहत है कहानी कान काटा

[58:03] राहत है और भद्दी से भारत राहत है कई

[58:06] कार्यों को हम संवेदना के साथ जितने भी कम

[58:09] करते हैं सर्वांग सुंदर तो कोई होता नहीं

[58:11] यह आपको बताना चाहते हैं सभी अंग से हम

[58:15] सुंदर रूप में कोई कम करना नहीं सकते कोई

[58:18] प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते ना कोई

[58:21] व्यवस्था को हम गढ़ नहीं सकते ना जी सकते

[58:25] संवेदनों के सीमा में यह तो बात सही वही

[58:29] चीज आज धरती पर टंडन

[58:35] में जीने के लिए जो बातें किया है तो आज

[58:39] तक वह बाध्यता है इसी बात को प्रमाणित

[58:41] करता रहा है

[58:45] और इसको मूल्यांकन करने योग्य मानव ही है

[58:48] वो मूल्यांकन मानव जागृति पूर्वक की करेगा

[58:52] ब्रह्मपुत्र करेगा

[59:54] इसीलिए लिखा कल मिला करके संज्ञानशीलता

[59:58] संवेदनशीलता के साथ नियंत्रित राहत हुआ

[01:00:01] संवेंद्र राहत हुआ देखने की दृष्टि से

[01:00:05] समझने की दृष्टि से समझना की बात प्रमाणित

[01:00:09] होने की दृष्टि से इसको ऐसा

[01:00:13] पूरा दर्शन विचार

[01:00:16] शास्त्र और योजना निष्पादन

[01:00:19] यह पूरा शहर

[01:00:22] में ही हम सभी प्रमाणों को सभी अवस्था में

[01:00:26] प्रस्तुत कर पाते हैं अनुभव को भी

[01:00:29] प्रमाणित कर पाते हैं और न्याय को भी

[01:00:33] प्रमाणित कर पाते हैं समाधान को भी अनुभव

[01:00:35] कर मैं कमेंट कर पाते हैं व्यवस्था

[01:00:54] में विश्वास निर्वाह हो सकता है

[01:00:59] शास्त्र

[01:01:05] का मतलब भी है की दृष्टा पर प्रतिष्ठा में

[01:01:09] जीवन है संपूर्ण यवत वास्तु को स्वीकार

[01:01:12] लेना है यथावत मैंने सत्ता में संपर्क

[01:01:15] प्रकृति को स्वीकार संपूर्ण क्रियो को

[01:01:18] स्वीकार विकास को स्वीकार भी कर्म को

[01:01:21] स्वीकार है जीवन को स्वीकार और जीवन अवश्य

[01:01:24] का संयुक्त स्वरूप में जागृति को स्वीकार

[01:01:27] है जागृति को प्रमाणित करने की विधि को

[01:01:29] प्राप्त कर लिया यही कल मिलकर के

[01:01:33] शास्त्रों में विधि को मैंने सेंड किया

[01:01:36] गया है किस विधि से हम जागृति को प्रमाणित

[01:01:39] करते हैं

[01:01:41] हम जागृति को कैसा व्यवहार में प्रमाणित

[01:01:44] करते थे व्यवस्था में कैसा प्रमाण करते

[01:01:46] हैं उत्पादन में कैसा प्रमाण करते हैं

[01:01:49] इसको

[01:01:51] स्पष्ट रूप में पहचान के लिए अध्ययन कराया

[01:01:55] है

[01:02:02] के लिए पुस्तिका होता है समझना के लिए

[01:02:05] आदमी होता है

[01:02:11] कोई आदमी के इस आदमी के समझ ही आदमी के

[01:02:15] सानिध्य में ही सही चीज सही ढंग से दूसरे

[01:02:18] आदमी को समझ में आता है

[01:02:20] इस ढंग से अध्ययन को हम मनुष्य को हटा

[01:02:24] करके कोई अध्ययन नहीं कर सकते हैं सूचना

[01:02:27] दे सकते हैं सोचना शब्द होते हैं उसे

[01:02:31] उत्साह उत्साह बाढ़ सकते हैं जिनकी ऐसा भी

[01:02:34] ए सकता है

[01:02:35] किसी-किसी को बहुत कम लोगों को जिज्ञासा

[01:02:38] आएगी किंतु सूचना सबको हो जाति है इसको

[01:02:42] देखा गया है तो इसको हमारे सर कार्यक्रम

[01:03:07] दर्शन का मतलब है समझना समझना की सर भीम

[01:03:11] मिलकर के दर्शन

[01:03:13] ठीक है और उसको बाद में ले

[01:03:17] तर्कसंगत विधि से प्रस्तुत किया तर्कसंगत

[01:03:21] विधि से प्रस्तुत करने की बात विज्ञान एवं

[01:03:24] उसके पहले तारक को एंटरटेन नहीं करते

[01:03:29] थे नास्तिक कहते थे इस प्रकार से कुछ का

[01:03:33] लेते थे

[01:04:12] ठीक है विज्ञान सिस्टमैटिक स्टडी है

[01:04:21] ये तारक करने की विधि में काफी लोग रहेंगे

[01:04:25] और काफी लोग तार्किक हुए भी बहुत तारक कभी

[01:04:28] भी प्रस्तुत करते हैं ठीक बात है इस टाइम

[01:04:31] से तारक तर्कसंगत करना भी एक कार्य आवश्यक

[01:04:35] है ऐसा महसूस

[01:04:38] मुद्दे पर अभी तक भौतिकवाद के अनुसार

[01:04:43] दोनों बात मत भौतिकवाद प्रस्तुत किया थे

[01:04:46] उसको तर्कसंगत विधि

[01:04:48] संघर्ष का केंद्र बिंदु बंता है

[01:05:24] तर्कसंगत है जब नहीं होता है तो व्यवहार

[01:05:27] संगत का होने वाला है इसीलिए वह धीरे-धीरे

[01:05:31] सर्वाधिक लोगों के मां में अस्वीकृत नहीं

[01:05:33] हुआ है यह भी बात हुआ है करने जाते हैं

[01:05:37] जिन्हें जाते हैं कहानी ना कहानी

[01:05:38] हस्तक्षेप के साथ ही जीना है यह बात को भी

[01:05:40] स्वीकार है

[01:05:42] कोई ना कोई हस्तक्षेप के साथी हम जिएंगे

[01:05:44] ये भी बात स्वीकार है आदमी भौतिक शास्त्र

[01:05:46] के अनुसार उसमें

[01:05:49] संघर्ष को लिखा उन्होंने द्वंद्वात्मक

[01:05:52] भौतिकवाद उसके आधार पर हमने लिखा उसके

[01:05:55] समाधान आत्मक होती है

[01:06:22] इस ढंग से समाधान आत्मक भौतिकवाद का

[01:06:25] सार्थक था हमको समझ में आया और उसके आगे

[01:06:29] व्यवहार आत्म जनमत था तो अभी अभी जो हमारे

[01:06:33] पास है जो जो इसका

[01:06:36] [संगीत]

[01:06:42] करो तुम जीते रहो बाकी को मिटते रहो बस

[01:06:47] यहां बोलते हैं हम कहते हैं

[01:06:51] समृद्धि है और वर्तमान में विश्वास है

[01:06:56] सहस्ट्रूमेंट

[01:07:07] कर सकते हैं

[01:07:17] तारक का जो क्या कर दिया हमने विवेक और

[01:07:21] विज्ञान विवेक समर्थ विज्ञान विज्ञान

[01:07:25] का मतलब है हम लक्ष्य को पहचान की

[01:07:28] कार्यक्रम पहचान की विधि लक्ष्य की

[01:07:31] स्थिरता की बड़े में

[01:07:33] पूर्ण विश्वास करने की विधि को तर्कसंगत

[01:07:37] विधि से जोड़ दिया कौन तार कहे वो विज्ञान

[01:07:40] से मत विवेक विवेक समर्थ विज्ञान विधि से

[01:07:44] जोड़ा है उसके बाद उसको जोड़ने की पश्चात

[01:07:47] एक स्वतंत्र बन गई हम व्यवस्था के प्रति

[01:07:50] विश्वास होने के आधार बन गए

[01:08:41] लक्ष्य से जुड़कर हम तारक को प्रायोजित कर

[01:08:44] देते हैं अनुभूत हो जाते हैं वही तारक को

[01:08:47] हम इधर समाधान से जोड़ने हैं व्यवहार में

[01:08:51] प्रमाणित हो जाते हैं इसीलिए

[01:08:53] अनुभव आत्मा का अध्यात्मवाद व्यवहारिक है

[01:08:56] इसको अध्ययन करने की आवश्यकता है ऐसा शुरू

[01:09:01] किया पहले जो थी और हास्य आत्मा का अध्ययन

[01:09:05] अध्यात्म जो है ना व्यवहार में प्रमाणित

[01:09:08] नहीं होता है यहां वहां छोड़ें थे हम उसको

[01:09:11] आगे बताया अध्यात्म यदि कोई वास्तु है वो

[01:09:15] व्यवहार में ही प्रमाणित होगी सबसे ज्यादा

[01:09:17] विश्वसदायक वास्तु व्यवहार में प्रमाणित

[01:09:20] होना ही है यह इसको प्रतीत किया

[01:09:24] मदद करेगा

[01:09:40] जैसा अभी हमारे पास लाभन महादेव

[01:09:50] अर्थशास्त्र ठीक है उसका मूल सिद्धांत है

[01:09:54] तो आवश्यकता है

[01:09:59] इसीलिए संघर्ष करना जरूरी है मतलब लोटपोट

[01:10:03] करना जरूरी है ऐसा यहां से अर्थशास्त्र को

[01:10:06] शुरू करते हैं ठीक है हम कहां से शुरू

[01:10:09] करते हैं

[01:10:16] मतलब मैं यह बताई गई है प्रतिपादन किया

[01:10:19] गया है

[01:10:25] निश्चित होते हैं संयुक्त होते हैं

[01:10:28] निर्धारित होते हैं सीमित होते हैं

[01:10:37] हमारा आवश्यकता कम हो जाता है

[01:11:02] की बात कहीं गई

[01:11:07] पद्धति के लिए मैं एक पद्धति हूं सूचना

[01:11:11] में सूचना के रूप में दिशा के रूप में

[01:11:14] अध्ययन के रूप में दिया है वैदिक में हो

[01:11:17] जाता है आदमी को स्वीकार हो जाता है ये

[01:11:19] चोरी चमारी सब समाप्त हो गई कुछ हो ही

[01:11:22] नहीं सकता

[01:11:24] ये इसको यहां से रॉक जा सकता है जो अभी जो

[01:11:28] वर्तमान में जो व्यापार संसार में उत्पादन

[01:11:31] से व्यापार संस्कार तक जो एडल्टरेशन बने

[01:11:34] हुए हैं ना ये दूर हो सकता है अच्छे अच्छे

[01:11:38] हम वस्तुओं को निर्मित कर सकते हैं

[01:11:42] हस्तांतरित कर सकते हैं

[01:12:01] भोगवादी समस्या उसके स्थान पर हम

[01:12:04] व्यवहारवादी समाजशास्त्र

[01:12:08] का मतलब है न्याय को प्रमाणित करना उसमें

[01:12:12] बहुत लंबी चौड़ी सिद्धांत कुछ भी नहीं है

[01:12:14] तो संबंधों का पहचान मूल्य का निर्वाह

[01:12:17] मूल्यांकन उपत्रति विधि से हम सामाजिक

[01:12:20] होते हैं यह इसका प्रमाण में बहुत सारे

[01:12:25] मॉडल प्रस्तुत किया हैं उसका अध्ययन से

[01:12:28] मनुष्य को काफी मदद होगी आश्वस्त होगा आगे

[01:12:32] की मैन पीढ़ी में अभिनय हो सकता है ऐसा

[01:12:36] मेरा सोचना

[01:12:40] पक्ष ये रहा की हमारा

[01:12:47] विज्ञान

[01:12:48] मनोविज्ञान में इस बात को दर्शाने की

[01:12:51] कोशिश किया है मानव जो है ना संज्ञानशीलता

[01:12:53] के संज्ञान खेलते संवेदनशीलता इन दोनों के

[01:12:57] संयुक्त में स्केट वादी व्यक्ति होता है

[01:13:01] संचेतना में क्या समाहित है

[01:13:04] संवेदनाशीलता और संज्ञानशीलता यह दोनों

[01:13:08] एकत्रित है इसको संवेदन संज्ञानशीलता में

[01:13:12] निरंतर समय संवेदनाओं को यदि हम प्रयोग

[01:13:15] करते हैं किस प्रकार से हम व्यवहार कार्य

[01:13:17] करते हैं किस कितने

[01:13:21] आयाम में करते हैं कितने कोनो में करते

[01:13:24] हैं उसे बात को तर्कसंगत विधि से बोधगया

[01:13:29] विधि से प्रस्तुत किया है इस ढंग से दर्शन

[01:13:33] विचार और शास्त्र को प्रस्तुत करने की

[01:13:37] कोशिश किया इस के आधार पर तीन योजनाओं को

[01:13:41] प्रस्तुत करती है वह है

[01:13:43] जीवन विद्या योजना

[01:13:56] के बड़े में

[01:13:58] विचार करेंगे
