UTIs | Unit 4 | Immunostimulants & Immunosuppressants | Anticancer Agents | Pharmacology 6th Sem
https://www.youtube.com/watch?v=0Dea1gDx0pQ
[00:04] तो आज की वीडियो में हम लोग यहां पे बात
[00:06] तो आज की वीडियो में हम लोग यहां पे बात करेंगे अपने फार्माकोलॉजी के यूनिट नंबर
[00:07] फोर के बारे में जिसमें हम लोग यहां पे
[00:09] फोर के बारे में जिसमें हम लोग यहां पे यूनिट फोर के सभी टॉपिक्स को इस सिंगल
[00:10] यूनिट फोर के सभी टॉपिक्स को इस सिंगल वीडियो में कंप्लीट कवर करेंगे। अब देखिए
[00:13] वीडियो में कंप्लीट कवर करेंगे। अब देखिए यहां पे बहुत लेट हो चुकी है। तो यहां पे
[00:15] यहां पे बहुत लेट हो चुकी है। तो यहां पे देखिए थोड़ा सा एक चीज़ ध्यान रखिए कि हम
[00:16] देखिए थोड़ा सा एक चीज़ ध्यान रखिए कि हम यहां पे सिर्फ इंपॉर्टेंट इंपोर्टेंट
[00:18] यहां पे सिर्फ इंपॉर्टेंट इंपोर्टेंट चीजों पर ही फोकस करेंगे और थोड़ा सा यहां
[00:20] चीजों पर ही फोकस करेंगे और थोड़ा सा यहां पे मेरा समझाने पे ज्यादा फोकस रहेगा।
[00:22] पे मेरा समझाने पे ज्यादा फोकस रहेगा। नोट्स आप लोग को स्क्रीन पे दिख ही रही है
[00:23] नोट्स आप लोग को स्क्रीन पे दिख ही रही है तो आप लोग यहां पे नोट्स देख लीजिएगा।
[00:25] तो आप लोग यहां पे नोट्स देख लीजिएगा। टॉपिक्स जो है आप लोग को अंडरस्टैंड कराने
[00:27] टॉपिक्स जो है आप लोग को अंडरस्टैंड कराने की मेरी ज्यादा कोशिश रहेगी और जो एडवर्स
[00:30] की मेरी ज्यादा कोशिश रहेगी और जो एडवर्स इफेक्ट है और जो भी चीजें हैं वो सब आप
[00:32] इफेक्ट है और जो भी चीजें हैं वो सब आप लोग यहां पे देख लीजिएगा। इतना हम लोगों
[00:34] लोग यहां पे देख लीजिएगा। इतना हम लोगों ने समझा दिया है ऑलरेडी कि अब आप यहां पे
[00:36] ने समझा दिया है ऑलरेडी कि अब आप यहां पे जो भी एडवर्स इफेक्ट हैं यूजेज हैं वो आप
[00:38] जो भी एडवर्स इफेक्ट हैं यूजेज हैं वो आप लोग खुद से समझ सकते हो। तो देखिए अगर हम
[00:40] लोग खुद से समझ सकते हो। तो देखिए अगर हम लोग यहां पे सबसे पहले टॉपिक की बात करें
[00:42] लोग यहां पे सबसे पहले टॉपिक की बात करें तो सबसे पहला टॉपिक हमारा आ जाता है
[00:43] तो सबसे पहला टॉपिक हमारा आ जाता है यूटीआई यानी कि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन।
[00:45] यूटीआई यानी कि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन। अब देखिए यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का
[00:47] अब देखिए यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का मतलब है कि जो हमारा यूरिनरी सिस्टम है तो
[00:49] मतलब है कि जो हमारा यूरिनरी सिस्टम है तो यूरिनरी सिस्टम में अगर कहीं भी हमारा कुछ
[00:51] यूरिनरी सिस्टम में अगर कहीं भी हमारा कुछ भी बैक्टीरियल इंफेक्शन देखने को मिलता है
[00:53] भी बैक्टीरियल इंफेक्शन देखने को मिलता है तो उसी को हम लोग बोलते हैं यूरिनरी
[00:55] तो उसी को हम लोग बोलते हैं यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन। अब ये हमारा किडनी में
[00:57] ट्रैक्ट इंफेक्शन। अब ये हमारा किडनी में हो सकता है। यूरेटर, ब्लैडर, यूरेथरा कहीं
[00:59] हो सकता है। यूरेटर, ब्लैडर, यूरेथरा कहीं भी हो सकता है। अगर इन सब में कहीं भी
[01:00] भी हो सकता है।
[01:02] अगर इन सब में कहीं भी हमारा इंफेक्शन होता है तो इसको हम लोग हमारा इंफेक्शन होता है तो इसको हम लोग यहां पे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन बोलते हैं।
[01:04] यहां पे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन बोलते हैं।
[01:05] और ये मेनली हमारा एक बैक्टीरिया होता है ई कोलाई उसी की वजह से वो देखने को मिलता है।
[01:07] और इसमें देखिए इसमें हमारा जो है जो मोस्ट कॉमन टाइप है वो हमारा ब्लैडर यानी कि देखिए ज्यादातर तो वैसे कहीं भी हो सकता है।
[01:10] जो है जो मोस्ट कॉमन टाइप है वो हमारा ब्लैडर यानी कि देखिए ज्यादातर तो वैसे कहीं भी हो सकता है।
[01:12] लेकिन जो हमारा ब्लैडर वाला एरिया आप लोगों को दिख रहा है।
[01:14] लेकिन जो हमारा ब्लैडर वाला एरिया आप लोगों को दिख रहा है।
[01:15] यहां पे हमारा सबसे ज्यादा जो है देखने को मिलता है।
[01:17] देखने को मिलता है।
[01:19] और अगर हम लोग यहां पे बात करें तो देखिए जो हमारी वुमेन है वो ज्यादा प्रोन होती है।
[01:20] बात करें तो देखिए जो हमारी वुमेन है वो ज्यादा प्रोन होती है।
[01:22] मतलब कि मेल के कंपेयर में वुमेन में ज्यादा चांसेस देखने को मिलते हैं यूटीआई के।
[01:24] कंपेयर में वुमेन में ज्यादा चांसेस देखने को मिलते हैं यूटीआई के।
[01:26] अब कॉजेस की बात करें तो देखिए पुअर हजीन हो सकता है।
[01:28] करें तो देखिए पुअर हजीन हो सकता है।
[01:30] अगर ज्यादा अच्छे से हजीन वगैरह नहीं मेंटेन हो पा रही है और हमारा इकोलाई सेक्सुअल इंटरकोर्स भी हो सकता है।
[01:32] हो पा रही है और हमारा इकोलाई सेक्सुअल इंटरकोर्स भी हो सकता है।
[01:33] अगर मान लीजिए जिसको यूटीआई है अगर वो सेक्सुअल इंटरकोर्स कर रहा है दूसरे पार्टनर के साथ तो उसको भी हो सकता है।
[01:35] जिसको यूटीआई है अगर वो सेक्सुअल इंटरकोर्स कर रहा है दूसरे पार्टनर के साथ तो उसको भी हो सकता है।
[01:37] तो उसको भी हो सकता है।
[01:39] यूरिनरी रिटेंशन ज्यादा देर तक यूरिन को रिटेन करना।
[01:40] ज्यादा देर तक यूरिन को रिटेन करना।
[01:42] ठीक है? लॉन्ग टर्म हमारा यहां पे कैथेटर यूज़ है।
[01:44] उसके बाद हमारा वीक इम्यून सिस्टम, हार्मोनल चेंजेस, मेनोपॉज इन सब की वजह से हमारा यहां पे कहीं ना कहीं यूटीआई देखने को मिल सकते हैं।
[01:47] हार्मोनल चेंजेस, मेनोपॉज इन सब की वजह से हमारा यहां पे कहीं ना कहीं यूटीआई देखने को मिल सकते हैं।
[01:48] बाकी अगर हम लोग यहां पे इसके सिम्टम्स की बात करें तो यहां पे जो है यूरिनेशन के टाइम पे बहुत ज्यादा बर्निंग हो सकती है।
[01:50] इसके सिम्टम्स की बात करें तो यहां पे जो है यूरिनेशन के टाइम पे बहुत ज्यादा बर्निंग हो सकती है।
[01:52] यूरिनेशन के टाइम पे बहुत ज्यादा बर्निंग हो सकती है।
[01:53] स्ट्रांग स्मेल हो सकती है।
[01:55] पेल्विक पेन, पेल्विक एरिया में पेन हो सकता है।
[01:56] पेल्विक पेन, पेल्विक एरिया में पेन हो सकता है।
[01:58] लोअर एब्डोमेन में पेन हो सकता है।
[02:01] सकता है।
[02:01] टायर्ड फडीक फील होना, फीवर आना, अर्जेंसी मतलब बहुत बार-बार जो है यूरिन
[02:03] अर्जेंसी मतलब बहुत बार-बार जो है यूरिन करने की अर्जेंसी, बैक पेन ये सारे हमारे
[02:05] इसके कुछ सिम्टम्स हो सकते हैं।
[02:06] बाकी देखिए यूडीआई हमारे मेनली दो टाइप के हो
[02:08] देखिए यूडीआई हमारे मेनली दो टाइप के हो सकते हैं।
[02:09] हो सकता है। एक्यूट हो सकता है क्रॉनिक।
[02:11] एक्यूट मतलब कि जो थोड़ा सा कम टाइम के लिए हो और यहां पे इसका ट्रीटमेंट
[02:13] भी पॉसिबल हो जाता है जल्दी।
[02:15] और यह हमारा सडन जो है देखने को मिलता है।
[02:17] क्रॉनिक मतलब कि जो काफी लंबे टाइम से बैक्टीरियल
[02:19] इनफेक्शन देखने को मिले और ये लगभग जो है
[02:21] वीक्स या फिर मल्टीपल टाइम्स भी देखने को
[02:23] मिल सकता है।
[02:23] और इसमें यहां पे जो है इसकी
[02:26] कैरेक्टराइजेशन की बात करें तो यहां पे
[02:27] अर्जेंसी फ्रीक्वेंसी मतलब कि यूरिन की
[02:29] फ्रीक्वेंसी बढ़ जाना, यूरिन को डिस्चार्ज
[02:31] करने की अर्जेंसी बढ़ जाना और यूरिनरी
[02:34] ट्रैक्ट एब्नॉर्मेलिटीज जो है ब्लैडर
[02:36] आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन।
[02:37] ठीक है?
[02:37] मतलब कि यूरिन बाहर निकालने में प्रॉब्लम होना।
[02:40] तो ये सारी चीजें हमारी यहां पे इनकंप्लीट
[02:42] ब्लैडर इंपटिंग मतलब कि यूरिन डिस्चार्ज
[02:44] करने के बाद भी ऐसा लगना कि अभी-अभी पूरा
[02:46] पूरी तरीके से लाइक यूरिन डिस्चार्ज नहीं
[02:50] हुआ है।
[02:50] ठीक है?
[02:52] लगता है कि अभी भी और करना है।
[02:55] तो ये सारी चीजें यहां पे हमारी क्रॉनिक इंफेक्शन में देखने को मिल सकती
[02:56] हैं।
[02:56] अब अगर हम लोग यहां पे इसके
[02:58] पैथोफिजियोलॉजी की बात करें तो यहां पे
[02:59] देखिए पैथोफिजोलॉजी मतलब कि भाई जैसे मान
[03:01] देखिए पैथोफिजियोलॉजी मतलब कि भाई जैसे मान लीजिए हमारा जो जर्म है वो हमारा यूटीआई
[03:03] लीजिए हमारा जो जर्म है वो हमारा यूटीआई में एंटर हुआ यानी कि यूरिनरी ट्रैक्ट में
[03:05] में एंटर हुआ यानी कि यूरिनरी ट्रैक्ट में एंटर हुआ।
[03:07] सॉरी यूटी यूरिनरी ट्रैक मेंटर हुआ।
[03:08] उसके बाद देखिए जो भी हमारा ब्लैडर या फिर यूरेथ्रा है ये इसकी वॉल पे जाके
[03:11] स्टिक हो गया।
[03:12] उसके बाद यहां पे अपना कह सकते हो उसने अपनी ग्रोथ करना स्टार्ट कर
[03:14] दी।
[03:16] उसके बाद यहां पे बॉडी ने कह सकते हो रिएक्ट किया डब्ल्यूबीसी।
[03:18] भाई देखिए हमारी बॉडी में कुछ भी इनफेक्शन वगैरह होगा तो
[03:19] हमारे बॉडी का इम्यून सिस्टम एक्टिवेट
[03:20] होगा।
[03:22] डब्ल्यूबीसी फाइट करने आएगा।
[03:24] लेकिन जब डब्ल्यूबीसी फाइट करेगा तो उस फाइटिंग
[03:25] की वजह से क्या होगा?
[03:27] हमारा इनफ्लेमेशन होगा।
[03:29] बर्निंग होगी।
[03:31] और इसी की वजह से क्या होता इसी की वजह से हमारा यहां पे कह सकते हो एक बर्न यहां पे इंफेक्शन डेवलप
[03:33] हो जाता है जो कि हमारे किडनी को फ़दर यहां पे हार्म किया कर सकता है।
[03:35] तो देखिए जब स्टार्टिंग होती है तो हमारा एक्यूट होता
[03:36] है और अगर यहां पे इसको ट्रीट नहीं किया
[03:38] गया तो ये यहां पे फर्दर जो है किडनी तक
[03:40] पहुंच सकता है।
[03:41] है ना?
[03:43] यहां पे स्टार्टिंग हो सकता है ब्लैडर से हो लेकिन धीरे अगर किडनी तक पहुंच गया तो देखिए किडनी तक
[03:44] पहुंचने का मतलब है बहुत ही सीरियस और
[03:46] क्रॉनिक इनफेक्शन हो जाए।
[03:48] तो किडनी तक अगर पहुंच जाता है तो वहां पे काफी सीरियस
[03:50] फॉर्म हमें देखने को मिल जाता है।
[03:51] अब अगर हम लोग यहां पे इसके ट्रीटमेंट की बात
[03:53] करें तो हम लोग यहां पे
[03:53] बैक्टीरियोस्टेटिक, बैक्टोसाइडल और हमारा
[03:55] यूरिनरी एंटीसेप्टिक्स इन सब का यूज़ कर
[03:57] सकते हैं।
[03:59] अब देखिए इसमें से हम लोग कुछ
[04:00] का ही देखेंगे जो कि एग्जाम में ज्यादातर
[04:02] पूछ लिए जाते हैं और उतना सफिशिएंट रहेगा।
[04:03] पूछ लिए जाते हैं और उतना सफिशिएंट रहेगा।
[04:04] जैसे बात करें हम लोग यहां पे बैक्टीरियोस्टेटिक एजेंट्स के बारे में।
[04:06] बैक्टीरियोस्टेटिक एजेंट्स के बारे में।
[04:07] तो सिंपल सी बात है हम लोगों ने ऑलरेडी बहुत डिस्कस कर लिया है कि हमारे ये वो एजेंट है जो कि बैक्टीरिया को कह सकते हो इसकी ग्रोथ को रोकते हैं।
[04:10] एजेंट है जो कि बैक्टीरिया को कह सकते हो इसकी ग्रोथ को रोकते हैं।
[04:12] इसकी ग्रोथ को रोकते हैं।
[04:13] उनको किल नहीं करते। की ग्रोथ को रोकते हैं। अब नाइट्रोफ्लोरेंट की बात करें तो ये हमारा बैक्टरियल एंजाइम्स को यहां पे जो है इनबिट करते हैं और यहां पे बैक्टीरिया की जो रिप्रोड रिप्रोडक्शन की एबिलिटी है उसको यहां पे खत्म कर देते हैं।
[04:15] नाइट्रोफ्लोरेंट की बात करें तो ये हमारा बैक्टरियल एंजाइम्स को यहां पे जो है इनबिट करते हैं और यहां पे बैक्टीरिया की जो रिप्रोड रिप्रोडक्शन की एबिलिटी है उसको यहां पे खत्म कर देते हैं।
[04:17] बैक्टरियल एंजाइम्स को यहां पे जो है इनबिट करते हैं और यहां पे बैक्टीरिया की जो रिप्रोड रिप्रोडक्शन की एबिलिटी है उसको यहां पे खत्म कर देते हैं।
[04:19] जो रिप्रोड रिप्रोडक्शन की एबिलिटी है उसको यहां पे खत्म कर देते हैं।
[04:21] उसको यहां पे खत्म कर देते हैं।
[04:23] और बाकी इसका मेनली यूज़ हम लोग जो है अपने इ कोलाई बैक्टीरिया के ट्रीटमेंट में करते हैं।
[04:25] बैक्टीरिया के ट्रीटमेंट में करते हैं।
[04:27] अब फार्माकोइनेटिक्स वगैरह देखिए आप लोग देख लीजिएगा कुछ खास नहीं है।
[04:29] फार्माकोइनेटिक्स वगैरह देखिए आप लोग देख लीजिएगा कुछ खास नहीं है।
[04:31] सिंपल सा ही है। और अगर हम लोग यहां पे एडवर्स इफेक्ट बात करें थेरेपेटिक यूजेस तो ये सब आप लोग देख लीजिएगा।
[04:32] और अगर हम लोग यहां पे एडवर्स इफेक्ट बात करें थेरेपेटिक यूजेस तो ये सब आप लोग देख लीजिएगा।
[04:34] थेरेपेटिक यूजेस तो ये सब आप लोग देख लीजिएगा।
[04:36] ये सारे हमारे अलग-अलग टाइप हैं। हमारे यूटीआई के अलग-अलग टाइप हैं।
[04:38] हमारे यूटीआई के अलग-अलग टाइप हैं। जैसे पाइलो नेफ्राइटिस हमारा यहां पे किडनी का हो गया।
[04:40] जैसे पाइलो नेफ्राइटिस हमारा यहां पे किडनी का हो गया। ठीक है?
[04:42] ठीक है? यूरेथराइटिस मतलब यूरेथ्रा का हो गया।
[04:44] यूरेथराइटिस मतलब यूरेथ्रा का हो गया। प्रोस्टेटिस मतलब प्रोस्टेट ग्लैंड में इंफेक्शन हो गया।
[04:45] प्रोस्टेटिस मतलब प्रोस्टेट ग्लैंड में इंफेक्शन हो गया। तो ये सारे हमारे अलग-अलग टाइप हमें देखने को मिल जाते हैं।
[04:47] तो ये सारे हमारे अलग-अलग टाइप हमें देखने को मिल जाते हैं।
[04:49] मिल जाते हैं। बाकी बैक्टीरसाइडल एजेंट्स की बात करें तो भाई देखिए ये हमारी वो एजेंट है जो कि पूरी तरीके से बैक्टीरिया को किल कर देते हैं।
[04:50] की बात करें तो भाई देखिए ये हमारी वो एजेंट है जो कि पूरी तरीके से बैक्टीरिया को किल कर देते हैं।
[04:51] एजेंट है जो कि पूरी तरीके से बैक्टीरिया को किल कर देते हैं।
[04:54] यहां पे जो है कह सकते हो ये उनको रोकते नहीं है बल्कि उनको किल ही कर देते हैं।
[04:56] सकते हो ये उनको रोकते नहीं है बल्कि उनको किल ही कर देते हैं।
[04:59] किल ही कर देते हैं। और इसमें अगर हम लोग यहां पे बात करें तो एक हमारा बहुत अच्छा हमारा हो जाता है कॉट्रिमोक्सजोल।
[05:00] यहां पे बात करें तो एक हमारा बहुत अच्छा हमारा हो जाता है कॉट्रिमोक्सजोल।
[05:02] अब इसके बारे में हम लोगों ने सल्फोनामाइड्स में
[05:04] बारे में हम लोगों ने सल्फोनामाइड्स में यूनिट टू में बहुत डिटेल में डिस्कस कर लिया है।
[05:06] तो यहां हम लोग दोबारा नहीं देखेंगे।
[05:08] आप लोगों को पता होना चाहिए कि हमारे दो दवाओं का कॉम्बिनेशन होती है सल्फोमेथ्सोल और ट्राइमेथोपन और यहां पे कैसे काम करती है फोलिक एसिड को रोक के।
[05:13] ठीक है?
[05:15] ये सब चीजें हम लोगों ने काफी डिटेल में ऑलरेडी इसके बारे में देख रखी हैं।
[05:16] तो सेम ही है।
[05:18] आप लोगों ने वहां देख लीजिएगा।
[05:19] यूजेज की बात करें तो हमारा वही निमोनिया यूडीआई यही सब में हमें देखने को मिलता है।
[05:23] फिर नेक्स्ट हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के बारे में।
[05:26] अब देखिए सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज आप लोग समझ रहे होंगे।
[05:28] एड्स का नाम आप लोगों ने सुना होगा।
[05:29] ये हमारी एसटीडीज के अंदर ही आती हैं।
[05:31] बाकी देखिए एड्स के अलावा भी बहुत सारे टाइप के एस स्टडीज होती हैं।
[05:35] इन सभी को हम लोग यहां पे देखते हैं।
[05:36] अब ये हमारा मेनली जो है सेक्सुअल इंटरकोर्स के टाइम पे ही ट्रांसफर होती हैं।
[05:39] ठीक है?
[05:41] जब कोई हमारा एसटीडी से ऑलरेडी इनफेक्टेड है और अगर वो किसी के साथ इंटरकोर्स कर रहा है।
[05:45] ठीक है?
[05:48] तो वहां पे अपने सामने वाले पार्टनर को भी ट्रांसफर कर सकता है और यह बहुत ही सीरियस डिजीज हो जाती है और इसका जो है अगर यह एड्स के फॉर्म में कन्वर्ट हो जाती है तो यहां पे इसका फिर कोई ट्रीटमेंट नहीं होता है।
[05:56] पेशेंट की डेथ ही होती है।
[05:58] आप लोग को पता होना चाहिए पता भी होगा।
[06:00] और बाकी देखिए ये हमारा जो है कह सकते हो सेक्सुअल सबसे मेजर रूट सेक्सुअल रूट ही होता है।
[06:04] सबसे मेजर रूट सेक्सुअल रूट ही होता है।
[06:05] लेकिन इसके अलावा मान लीजिए अगर किसी को एसटीडी है और उसकी यूज़ की हुई नीडल्स या
[06:08] एसटीडी है और उसकी यूज़ की हुई नीडल्स या फिर उसका यूज़ किया हुआ उसका जो ब्लड है
[06:09] फिर उसका यूज़ किया हुआ उसका जो ब्लड है अगर वो यहां पे किसी को जाता है।
[06:11] ठीक है?
[06:11] अगर वो यहां पे किसी को जाता है।
[06:14] ठीक है? ब्रेस्ट फीडिंग मान लीजिए जो फीमेल है अगर उसको एस्टडी है और वो अपने बच्चे को
[06:15] उसको एस्टडी है और वो अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीड करा रही है तो वहां पे भी
[06:17] ब्रेस्ट फीड करा रही है तो वहां पे भी हमारा ब्रेस्ट मिल्क के थ्रू यहां पे
[06:19] हमारा ब्रेस्ट मिल्क के थ्रू यहां पे ट्रांसफर हो सकता है।
[06:20] तो ये सारे हमारे कुछ अलग रूट भी हो सकते हैं।
[06:22] बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो ये देखिए ये जो
[06:23] लोग यहां पे बात करें तो ये देखिए ये जो एसटीडीज हैं इनके पीछे हमारा बैक्टीरिया
[06:26] एसटीडीज हैं इनके पीछे हमारा बैक्टीरिया वायरस या फिर पैरासाइट्स भी हो सकते हैं।
[06:27] वायरस या फिर पैरासाइट्स भी हो सकते हैं।
[06:29] और ये मेनली
[06:29] और ये मेनली हमारा कह सकते हो जो ओरल सेक्स होता है
[06:32] हमारा कह सकते हो जो ओरल सेक्स होता है वजाइनल सेक्स एन मतलब ये सारे जो सेक्स
[06:34] वजाइनल सेक्स एन मतलब ये सारे जो सेक्स होते हैं।
[06:35] ठीक है?
[06:35] तो इन सबके थ्रू हमारा
[06:37] यहां पे ट्रांसमिट हो सकता है।
[06:37] और टाइप्स
[06:39] ऑफ एसटीडीज की बात करें तो यहां पे देखिए
[06:39] जो हमारे टाइप्स हैं तो इसमें हम लोग यहां
[06:41] पे बैक्टीरियल वायरल और पैरासाइटिक साइड्स
[06:44] टाइप्स के थ्रू देखेंगे।
[06:44] सबसे पहला हमारा
[06:46] बैक्टीरियल।
[06:46] अब बैक्टीरियल में देखिए
[06:47] अलग-अलग टाइप होता है।
[06:47] जैसे हमारा एक हो
[06:49] जाता है हमारा में क्लाइमाइडिया।
[06:49] तो देखिए
[06:50] क्लाइमाइडिया में क्या होता है?
[06:51] क्लाइमेडिया हमारा क्लमेडिया
[06:53] क्लाइमेडिया हमारा क्लमेडिया ट्रैकियोमेटिस हमारा एक बैक्टीरिया होता
[06:54] है।
[06:54] इसी की वजह से कॉज होता है
[06:55] और ये
[06:55] हमारा मैन ओवेन दोनों में हो सकता है।
[06:57] और
[06:57] ये मेनली जो हमारा जेाइटा ट्रैक्ट होता
[06:59] है।
[06:59] ठीक है?
[06:59] वहां पे देखने को मिलता है
[07:01] और
[07:01] बाकी इसके अलावा हमारा थ्रोटा टाइज रेक्टम
[07:03] यहां भी देखने को मिल सकता है
[07:03] और सबसे
[07:04] इंपॉर्टेंट चीज ये है कि जो एसटीडीज होते
[07:05] इंपॉर्टेंट चीज ये है कि जो एसटीडीज होते हैं ज्यादातर स्टडीज के ना कोई सिम्टम्स हैं।
[07:07] ज्यादातर स्टडीज के ना कोई सिम्टम्स नहीं होते स्टार्टिंग में।
[07:09] इसीलिए लोगों को बहुत ही लेट स्टेज में पता चलता है जब तक बहुत यहां पे लेट हो चुकी होती है।
[07:12] लेकिन अगर यहां पे मान लीजिए थोड़े बहुत सिम्टम्स होते हैं तो वहां पे जेाइटल से एब्नॉर्मल डिस्चार्ज हो सकता है।
[07:15] ठीक है? और बर्निंग हो सकती है यूरिनेशन के टाइम पे और यूरिन करते समय पी यूरिनेशन के टाइम पे यहां पे पेन भी हो सकता है।
[07:19] तो ये सारे हमारे कुछ सिम्टम्स हो सकते हैं।
[07:25] फिर नेक्स्ट हमारा गोरिया आ जाता है जो कि हमारा निसेरिया गोनोरिया हमारा एक बैक्टीरिया होता है उसके थ्रू कॉज होता है।
[07:30] और ये भी हमारा लगभग सेम ही है।
[07:31] दोनों जेंडर को कॉज कर सकता है।
[07:33] वैसे तो जेाइटल ट्रैक्ट को इनफेक्ट करता है लेकिन हमारा थ्रोट आई रेक्टम को भी इनफेक्ट कर सकता है।
[07:36] और इसके अलावा यहां पे देखिए अगर हम लोग बात करें तो ये भी हमारा लगभग जो है एसिं्टोमेटिक होता है।
[07:40] मतलब इसके भी सिम्टम्स स्टार्टिंग में नहीं दिखते हैं।
[07:43] लेकिन अगर यहां पे होते हैं तो यहां पे देखिए वजाइनल डिस्चार्ज बढ़ सकता है।
[07:44] पेनफुल यूरिनेशन, पेल्विक पेन, डिस्चार्ज यूरिनेशन, समटाइम्स स्वेलिन और पेनफुल टेस्टिकल्स।
[07:48] तो टेस्टिस जो है जो मेल्स के अंदर होते हैं।
[07:50] सो वो भी यहां पे पेनफुल हो सकते हैं।
[07:52] तो ये सारे हमारे कुछ सिम्टम्स हो सकते हैं।
[07:55] बाकी हम लोग बात करें सिफलेस के बारे में।
[07:56] तो देखिए सिफलिस भी हमारा एक टाइप का स्टडी होता है जो कि हमारा ट्राइपेनोमिया, पैलेडियम बैक्टिया के थ्रू कॉज होता है।
[08:02] और ये भी हमारा देखिए ये हमारा बहुत ही अलग-अलग स्टेज में प्रोग्रेस करता है।
[08:03] प्राइमरी, सेकेंडरी,
[08:06] प्रोग्रेस करता है।
[08:06] प्राइमरी, सेकेंडरी, लेटेंट।
[08:08] लेटेंट मतलब कि कह सकते हो यहां पे ये थोड़ा सा इनक्टिव स्टेज में होता है।
[08:12] लेकिन ये फर्दर यहां पे एक्टिव हो सकता है।
[08:14] और उसके बाद हमारा टर्शरी स्टेज और ये सारे हमारे सीरियस हेल्थ कॉम्प्लिकेशंस कॉज कर सकते हैं अगर यहां पे इनको ट्रीट नहीं किया गया और सिम्टम्स की बात करें तो यहां पे देखिए हमारा सिम्टम्स में देखिए यहां पे पेनलेस सोर मतलब कि सो मतलब कि जैसे घाव होता है तो घाव होगा लेकिन यहां पे पेन नहीं होगा या फिर अल्सर वगैरह भी हो सकता है और इसके अलावा हमारा जो हमारा इंफेक्शन है ठीक है वो हमारा मेनली जो है जेाइटल एनल या फिर ओरल एरिया में देखने को मिलता है फीवर भी देखने को मिल सकता है हमारा लिंफ नोट्स वैलेंट हो सकते हैं हमारा थ्रोट में स्टोर हो सकते हैं और हमारा यहां पे ऑर्गन इशूज़ भी देखने को मिल सकते हैं ठीक है?
[08:45] जिसकी वजह से हमारा न्यूरोलॉजिकल, कार्डियोवस्कुलर ऑर्गन फेलियर भी हो सकता है टर्शरी स्टेज में।
[08:50] तो ये सारे हमारे यहां पे कह सकते हो कुछ सिम्टम्स हमें देखने को मिल जाते हैं।
[08:53] नाउ बात करें हम लोग यहां पे वायरल एसडीज के बारे में।
[08:57] यानी कि ये वो एसटीडीज है जो कि हमारा वायरस के थ्रू होती हैं।
[08:58] तो इसमें देखिए इसमें सबसे मोस्ट कॉमन आ जाता है एचआईवी एड्स।
[09:03] सबसे मोस्ट कॉमन सबसे मोस्ट डेंजरस।
[09:05] तो ये हमारा जो है इम्यून सिस्टम को अटैक करता है।
[09:05] देखिए एचआईवी में क्या होता है?
[09:06] करता है।
[09:06] देखिए एचआईवी में क्या होता है?
[09:08] एचआईवी एड्स में होता है जो हमारा इम्यून सिस्टम है भाई वो हमारा बहुत ही वीक हो जाता है।
[09:12] तो इसमें आप ऐसा समझिए कि एचआईवी एड्स की वजह से इंसान कम मरता है लेकिन अगर उसको एचआईवी एड्स हो रखा है उसको कोई और प्रॉब्लम होती है तो उसका इम्यून सिस्टम बिल्कुल भी किसी और प्रॉब्लम से लड़ नहीं पाता और यहां पे उसकी डेथ हो जाती है और या फिर मतलब कि बहुत ही प्रॉब्लम हो जाती है।
[09:24] तो यहां पे इम्यून सिस्टम बहुत ही सीवियरली वीकन हो जाता है।
[09:26] बिल्कुल भी काम का नहीं रहता है धीरे-धीरे।
[09:27] और फिर हमारा नेक्स्ट आ जाता है हेयर पेस।
[09:29] तो देखिए जो हमारा हेयरपेस सिंप्लेक्स वायरस है तो ये भी हमारा दो दो टाइप दो दो टाइप के होता है।
[09:34] एक होता है एचएसपी वन एक होता है एचएसपी2।
[09:36] तो ये हमारा जो एचएसवी वन हमारा बेसिकली जो ओरल सोर्स होते हैं।
[09:38] ठीक है?
[09:40] हमारे माउथ में घाव वगैरह होता है वहां कॉज करता है।
[09:42] और एचएसवी टू हमारा जेाइटल को सोर्स कौन कॉज करता है।
[09:45] और एचपीवी की बात करें तो हमारा एक और भी होता है ह्यूमन ह्यूमन पैपिलोमरस पैपिलोमा वायरस।
[09:55] तो ये भी हमारा देखिए अभी ये हमारे ग्रुप ऑफ वायरस होते हैं जो कि हमारे जेाइटल जेाइटल वर्ड्स देखिए जेाइटल वर्ड्स का मतलब है कि वर्ड्स का मतलब आप ऐसे समझिए कि
[10:12] देखिए वर्ड्स का मतलब यहां
[10:16] देखिए वर्ड्स का मतलब यहां पे देखिए वर्ड्स का मतलब यहां पे देखिए
[10:19] पे देखिए वर्ड्स का मतलब यहां पे देखिए वर्ड्स का मतलब यहां पे देखिए वर्ड्स का
[10:22] वर्ड्स का मतलब यहां पे देखिए वर्ड्स का मतलब यहां पे मस्से से होता है।
[10:23] आप लोगों को अगर थोड़ा बहुत पता हो तो ये हमारा
[10:25] जेाइटल वर्ड्स कॉज कर सकता है और हमारा
[10:27] कैंसर वगैरह में से भी थोड़ा बहुत एसोसिएट
[10:29] होता है। उसके बाद पैरासाइटिक की बात करें
[10:31] तो ये देखिए ये हमारी वो स्टडीज है जो कि
[10:32] पैरासाइट्स के थ्रू होती हैं। यहां पे
[10:34] देखिए हमारा
[10:35] ट्राइकोनो
[10:37] ट्राइकोमोनियासिस तो ये हमारा एक जो है
[10:39] टाइप होता है पैरासाइटिक स्टडी का तो ये
[10:41] हमारा ट्राइकोमोनस वजी वजिनलिस वजिनालिस
[10:45] के थ्रू होता है और ये हमारा बेसिकली जो है
[10:47] है फीमेल्स की वजाइनल वाइना को इनफेक्ट
[10:50] करता है जहां पे इनफेक्शन वगैरह कॉज कर
[10:51] सकता है। नाउ अगर हम लोग यहां पे
[10:53] ट्रीटमेंट की बात करें तो यहां पे देखिए
[10:54] जो हमारा ट्रीटमेंट में हमारा बैक्टीरियल
[10:56] स्टीज में भाई देखिए सिंपल सी बात है
[10:57] बैक्टीरिया में हम लोग यहां पे
[10:58] एंटीबायोटिक्स का यूज़ करेंगे। वायरल में
[11:00] हम लोग यहां पे एंटी वायरल एजेंट्स का यूज़
[11:01] करेंगे और पैरासाइटिक में हम लोग यहां पे
[11:03] जो है अपने एंटी पैरासाइट्स मेडिकेशंस का
[11:05] यूज़ करेंगे। अब ये सभी चीजें हम लोगों ने
[11:07] ऑलरेडी डिस्कस करी हुई हैं। एंटी वायरल,
[11:10] एंटीबक्टीरियल और एंटीपरासाइटिक की बात
[11:12] करें तो जो हमारा कह सकते हो एंथलमेंटिक
[11:14] करें तो जो हमारा कह सकते हो एंथलमेंटिक था उसके अंदर जो भी मेडिकेशनंस थी वो सारी
[11:16] था उसके अंदर जो भी मेडिकेशनंस थी वो सारी हमारी यहां पे इंक्लूड हो जाती हैं।
[11:17] हमारी यहां पे इंक्लूड हो जाती हैं।
[11:19] तो अगर मान लीजिए आप लोग को और डिटेल में जाना है तो आप लोग यहां पे किसी के बारे
[11:20] में लिख सकते हो।
[11:21] जैसे देखिए भाई बैक्टीरिया में आप लोग टेट्रासाइक्लिन
[11:22] पेनिसिलिन सब तो आप लोगों ने पढ़ा है।
[11:24] आप लोग लिख लीजिए उनके बारे में।
[11:26] एंटीवायरल में आप लोग यहां पे एंटी रेट्रो वायरल
[11:28] और एंटी नॉन रेट्रोवायरल।
[11:31] ठीक है?
[11:32] तो यहां पे उन सभी के बारे में आप लोग लिख सकते हो।
[11:34] यूनिट थ्री में हम लोगों ने काफी डिटेल में देख लिया है।
[11:36] और इसके अलावा अगर हम लोग यहां पे बात करें तो नेक्स्ट टॉपिक
[11:37] हमारा आता है इम्यूनोफार्माकोलॉजी।
[11:39] अब देखिए इम्यूनोफार्माकोलॉजी की बात करें तो
[11:41] इसमें इसमें देखिए ये हमारी स्पेशलाइज
[11:44] ब्रांच होती है जिसमें हम लोग यहां पे कह
[11:45] सकते हो जो भी हमारी ड्रग्स है वो हमारे
[11:46] इम्यून सिस्टम को कैसे अफेक्ट करती है उस
[11:48] उसप पे हम लोग फोकस करते हैं।
[11:50] बाकी देखिए ये हमारे देखिए इसमें हमारी कुछ ड्रग्स
[11:51] होती हैं जो कि हमारे इम्यून सिस्टम को या
[11:53] तो बढ़ाती है या तो सप्रेस करती है या तो
[11:55] उसको कम कर देती है उसके रिस्पांस को।
[11:57] तो देखिए इस तरीके से हमारे दो टाइप के हो
[11:58] जाते हैं।
[12:00] एक हमारा इम्यूनोस्टिमुलेंट्स एक हो जाता है इम्यूनो सप्रेसेंट्स।
[12:02] अब देखिए इन दोनों को हम लोग कंबाइन फॉर्म
[12:03] में इम्यूनोम मॉड्यूलेटर्स भी बोलते हैं।
[12:06] तो एग्जाम में इम्यूनो मॉड्यूलेटर्स के
[12:07] नाम से भी क्वेश्चन आता है।
[12:09] तो वहां पे कंफ्यूज नहीं होना है।
[12:10] मॉड्यूलेटर्स मतलब जो मॉड्यूलेट मॉड्यूल करें है ना यानी कि
[12:13] जो चेंज करें तो चेंज दो दो टाइप से कर
[12:15] जो चेंज करें तो चेंज दो दो टाइप से कर सकते हैं।
[12:15] या तो बढ़ा सकते हो तो घटा सकते सकते हैं।
[12:16] या तो बढ़ा सकते हो तो घटा सकते हैं।
[12:18] तो ये दोनों हमारे इम्यूनो ममलेटर्स हैं।
[12:18] तो ये दोनों हमारे इम्यूनो ममलेटर्स में आ जाते हैं।
[12:19] अब देखिए थोड़ा सा अगर हम लोग इम्यूनिटी को समझे तो इम्यूनिटी क्या होती है?
[12:21] भाई इम्यूनिटी आप लोगों ने इम्यूनिटी इम्यूनिटी बहुत सुना होगा।
[12:23] इम्युनिटी का मतलब क्या होता है?
[12:24] कि आप लोग को अगर कोई प्रॉब्लम हो गई है तो जो हमारी बॉडी की नेचुरल इम्यूनिटी होती है
[12:26] तो वो अगर स्ट्रांग होती है तो आप लोग को जो भी बुखार वगैरह होता है तो अगर मान लीजिए किसी पेशेंट की इम्युनिटी बहुत स्ट्रांग है
[12:27] तो पहली बात उसको बुखार वगैरह होने के चांसेस ही बहुत कम है।
[12:29] लेकिन अगर हो भी जाता है तो बहुत जल्दी रिकवर हो जाता है पेशेंट बिना दवा के भी।
[12:31] है ना?
[12:33] तो उसको ज्यादातर बीमारियां हमारी होती ही नहीं है।
[12:34] और जिसकी इम्यूनिटी वीक होती है उसको क्या होता है?
[12:36] उसको बहुत सारी बीमारियां हो जाती हैं।
[12:38] तो इम्यूनिटी हमारा क्या होता इम्यूनिटी बेसिकली हमारी जो हमारी बॉडी का जो इम्यून सिस्टम होता है
[12:39] या फिर कह सकते हो हमारी इम्यून सिस्टम में हमारी जो डब्ल्यूबीसीस होती हैं वो हमारी यहां पे क्या होता है हमारी जो भी हार्मफुल बैक्टीरिया वगैरह होते हैं
[12:42] अगर वो हमारी बॉडी में एंटर भी करता है तो हमारा जो इम्यून सिस्टम है उनको वहीं पे किल कर देता है
[12:43] तो यही हमारी बॉडी की इम्युनिटी होती है हमारी स्ट्रांग होती है तो हम लोग यहां पे जल्दी बीमार वगैरह नहीं होते हैं
[12:45] या फिर जल्दी हम लोग बेटर फास्ट रिकवरी हो जाती है हमारी
[12:46] अब ये हमारी देखिए हमारी दो टाइप की होती है इम्युनिटी भी
[12:48] एक होती है इनेट इम्यूनिटी एक होती है एडप्टिव इम्यूनिटी
[12:49] अच्छा देखिए इनेट मतलब
[13:15] एडप्टिव इम्यूनिटी अच्छा देखिए इनेट मतलब कि जो आप लोग को बचपन से मिली हुई है मतलब
[13:17] कि जो आप लोग को बचपन से मिली हुई है मतलब कि यहां पे देखिए अब ये जो इमनेट होती है
[13:19] कि यहां पे देखिए अब ये जो इमनेट होती है ना ये किसी एक किसी पर्टिकुलर वायरस के
[13:22] ना ये किसी एक किसी पर्टिकुलर वायरस के लिए स्पेसिफिक नहीं होती है।
[13:24] जैसे इनेट क्या होता है कि मान लीजिए जनरली जैसे जो
[13:26] जनरल सिकनेस होती है जनरल जो बुखार होता है उससे आप लोग को बचाने का काम करती है।
[13:30] लेकिन जो हमारी एडप्टिव इम्यूनिटी होती है
[13:32] ये ये कब डेवलप होती है?
[13:34] देखिए ये तब डेवलप होती है जैसे मान लीजिए आप लोग की
[13:36] बॉडी बॉडी में कोई स्पेसिफिक वायरस एंटर हुआ।
[13:38] अब यहां पे कोरोना वायरस को आप लोग समझिएगा।
[13:39] कोरोना वायरस जैसे मान लीजिए किसी ह्यूमन बॉडी में एंटर हुआ।
[13:41] ठीक है?
[13:43] तो उसने यहां पे क्या हुआ?
[13:45] उसने यहां पे अच्छा कोरोना में आप लोग को पता है क्या हो रहा था?
[13:47] कोरोना में यही तो हो रहा था कि जो हमारा वायरस था वो मान लीजिए हमारा
[13:48] जिस भी पर्सन को इनफेक्ट कर रहा था तो अगर या तो उसकी डेथ हो जा रही थी वायरस की वजह
[13:50] से ठीक है तो वो चीज हटा दी है लेकिन अगर
[13:52] वो पर्सन रिकवर हो जा रहा था तो रिकवर
[13:54] कैसे हो रहा था क्या उसके देखिए कोरोना में क्या बोला जा रहा था कि आप आइसोलेट हो
[13:56] जाइए आइसोलेट हो के वो अपने आप ही तो रिकवर हो रहा था उसको कोई दवा वगैरह नहीं
[13:58] दी जा रही थी ज्यादा से ज्यादा पैरासिटामॉल वगैरह ही दी जा रही थी
[14:00] क्योंकि कोई कोरोना की कोई वैक्सीन थोड़ी डेवलप हुई थी स्टार्टिंग में तो ऐसा क्या
[14:02] हुआ था देखिए जो बॉडी का इम्यून सिस्टम था
[14:04] ना उसने क्या किया उसने पहले जो हमारा
[14:16] ना उसने क्या किया उसने पहले जो हमारा कोरोना कोना वायरस था उसको धीरे-धीरे समझा।
[14:18] पहले तो कोरोना वायरस ने इनफेक्ट कर दिया।
[14:20] लेकिन धीरे-धीरे अगर जिसकी इम्युनिटी स्ट्रांग थी।
[14:22] अच्छा कोरोना वायरस के टाइम में एक चीज और भी बोला गया था कि इम्युनिटी स्ट्रांग रखनी है हमें।
[14:23] है ना?
[14:25] तो इम्युनिटी स्ट्रांग से क्या मतलब है कि इम्युनिटी जिसकी स्ट्रांग होती है स्ट्रांग थी वहां पे तो उसने कोरोना वायरस को क्या हुआ?
[14:26] पहले पहचाना फिर किल किया और किल करने के बाद क्या हुआ कि उसके उसके अगेंस्ट में एंटीबॉडी डेवलप कर दी।
[14:28] अब यहां पे देखिए एक बार जिसको कोरोना हो चुका था उसको दोबारा कोरोना होने के चांसेस बिल्कुल ना के बराबर होते थे।
[14:29] क्योंकि देखिए अगर दोबारा कोरोना वायरस एंटर भी करता था बॉडी में तो बॉडी यहां पे उसके प्रति ऑलरेडी एंटीबॉडी बना चुकी थी।
[14:31] तो वो एंटीबॉडी उसको वहां पे तुरंत किल कर देती थी।
[14:33] तो यहां पे देखिए ये वाली जो इम्युनिटी हमारी ऐसी होती है जो कि हमारा स्पेसिफिक जर्म्स को रिकॉग्नाइज करके डेवलप होती है।
[14:35] ठीक है?
[14:38] और ये हमारी जो है टाइम के साथ अलग-अलग बीमारियों के प्रति डेवलप होती जाती है।
[14:40] जैसे मान लीजिए एक बार जिसको कोरोना वायरस हुआ तो उसके उसके अगेंस्ट में उसकी बॉडी में एंटी एंटीबॉडी डेवलप डेवलप हो गई।
[14:41] अब उसको दोबारा कह सकते हो कोरोना होने के चांसेस काफी कम हो जाते थे।
[14:43] है ना?
[14:45] तो और यहां पे देखिए आप लोग को पता होना चाहिए कि कोरोना की वैक्सीन भी स्टार्टिंग में इसी तरीके से
[15:17] वैक्सीन भी स्टार्टिंग में इसी तरीके से बनाई जा रही थी कि जो कोरोना इनफेक्ट हो चुके थे।
[15:20] ठीक है?
[15:21] उन्हीं के सैंपल से यहां पे वैक्सीन बनाने की कोशिश भी करी गई थी।
[15:24] तो यहां पे देखिए इनप्टिव इम्युनिटी हमारी इस टाइप की होती है जो कि हमारी एडप्ट होती है।
[15:28] यानी कि धीरे-धीरे अलग-अलग बीमारियों के प्रति हमारी बॉडी में डेवलप होती जाती है।
[15:33] तो आई होप कि आप लोग समझ गए होंगे।
[15:34] बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें इम्यूनो स्टिमुलर्स के बारे में।
[15:36] तो देखिए सिंपल सी बात है ये हमारी वो दवाएं होंगी जो कि इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट करेंगे।
[15:40] बाकी देखिए बहुत सिंपल लैंग्वेज में लिखा हुआ है।
[15:41] आप लोग देख लीजिएगा।
[15:42] इसके क्लासिफिकेशन की बात करें तो यहां पे देखिए स्पेसिफिक नॉन स्पेसिफिक।
[15:45] देखिए स्पेसिफिक मतलब कि ये हमारी वो वो वो हमारे इम्यूनो स्टिमुलेंट होते हैं जो कि किसी स्पेसिफिक वायरस या फिर स्पेसिफिक बैक्टीरिया के प्रति हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं।
[15:52] जैसे मान लीजिए कि कोरोना की जो वैक्सीन लगी थी तो वो क्या थी भाई?
[15:56] कोरोना की वैक्सीन हमारे कोरोना वायरस के लिए ही तो लगी थी।
[15:58] तो वहां पे वो क्या हो रहा था कि वो हमारा कोरोना वायरस के प्रति हमारी बॉडी की इम्यूनिटी को बढ़ा रही थी।
[16:04] तो ये हमारे स्पेसिफिक इम्यूनो हो गए।
[16:06] और नॉन स्पेसिफिक की बात करें तो यहां पे देखिए नॉन स्पेसिफिक मतलब कि ये हमारी जनरल मतलब हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाने वाले एजेंट्स होते हैं।
[16:12] है ना?
[16:14] आप लोग को बाजार में भी बहुत ज्यादा मिलते हैं कि इससे हमारे इसको खाइए इम्यूनिटी बढ़ जाएगी।
[16:18] हमारे इसको खाइए इम्यूनिटी बढ़ जाएगी।
[16:21] तो उस टाइप के मान लीजिए हमारा नॉन स्पेसिफिक हो जाते हैं जो कि हमारा बॉडी की जनरल इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं।
[16:23] इसमें जैसे इम्यूनोग्लोबुलिंस वगैरह हो जाते हैं।
[16:25] नाउ अगर हम लोग यहां पे बात करें डिफरेंट टाइप्स ऑफ इम्यूनोस के बारे में तो यहां पे देखिए अगर हम लोग यहां पे सबसे पहले बात करें वैक्सीनंस के बारे में तो वैक्सीन देखिए वैक्सीनंस जनरली हमारे यहां पे जिस बैक्टीरिया की वजह से प्रॉब्लम होती है उसी बैक्टीरिया से या फिर जो है दूसरे उसके पार्ट से डेवलप करी जाती है।
[16:38] है ना?
[16:40] तो जनरली वैक्सीनंस हमारी बैक्टीरिया या फिर बैक्टीरिया वगैरह से ही ड्राइव करी जाती है।
[16:42] और ये हमारी या तो बैक्टीरिया को किल करके या तो उनको वीक करके ठीक है?
[16:45] इस तरीके से काम करती है और हमारा इम्यून रिस्पांस क्रिएट करती है विदाउट कॉजिंग डिजीज।
[16:50] अब इसमें हमारी बीसीजी वैक्सीनंस हो गई।
[16:52] ठीक है?
[16:53] और ये सारी हमारी डिफरेंट-डिफरेंट टाइप की वैक्सीनंस हमें देखने को मिलती है।
[16:54] फिर नेक्स्ट हमारा आ जाता है नेक्स्ट हमारा आ जाता है थैलीडोमाइट।
[16:58] तो थैलीडोमाइड हमारी मेडिकेशन है जो कि सबसे पहले तो सिडेटिव एजेंट की तरह यूज़ करी जाती थी लेकिन बाद में देखा गया कि इसके अंदर इम्यूनोस्टिमुलेंट प्रॉपर्टी भी देखने को मिली।
[17:05] है ना?
[17:07] और यहां पे ये बेसिकली हमारा लेप्रोसी या फिर मल्टीपल माइलोमा जैसे कंडीशंस में हमें यूज़ कर देखने को मिलती है।
[17:13] फिर नेक्स्ट हमारा आता है लेवामाइसोल।
[17:14] तो लेवा माइसोल भी देखिए हमारा एक मेडिकेशन थी मेडिकेशन है जो कि इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट अच्छा इसका भी यूज़
[17:18] सिस्टम को स्टिमुलेट अच्छा इसका भी यूज़ स्टार्टिंग में डीवॉर्मिंग यानी कि कह सकते हो जो कीड़े वगैरह थे जो भी हमारे वार्म वार्म थे उनको मारने के लिए किया जाता था लेकिन बाद में देखा गया कि इसके अंदर ऑटोइ्यून डिसऑर्डर को ट्रीट करने की कैपेबिलिटी भी थी। है ना?
[17:31] तो वहां पर देखिए अगर हम लोग बात करें तो यह भी हमारा कह सकते हो जो है सर्टेन डब्ल्यूबीसी या फिर जो है हमारी बॉडी को जो है एक्टिविटी को बढ़ा के हमारे इंफेक्शन से फाइट करने के लिए कह सकते हो इंक्रीस करती है।
[17:44] और इंटरफेरों्स की बात करें तो देखिए ये हमारे स्पेसिफिक टाइप के प्रोटीन होते हैं जो कि हम सिस्टम इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं।
[17:49] और ये भी हमारा इंटरफेयर करते हैं एबिलिटी के एबिलिटी के साथ जो भी हमारी बॉडी की है उसको थोड़ा सा स्टिमुलेट करके इंप्रूव करते हैं ताकि वो अच्छे से फाइट कर सके।
[17:55] और ये भी हमारा कह सकते हो हेपेटाइटिस और कुछ सर्टेन कैंसर्स हैं उनके अगेंस्ट में हमारा यहां पे यूज़ किया जाता है।
[18:02] और उसके बाद कॉलोनी स्टिमुलेटिंग फैक्टर्स की बात करें तो ये भी हमारे प्रोटंस होते हैं जो कि हमारे डब्ल्यूबीसी के प्रोडक्शन को और बढ़ाने में हेल्प करते हैं।
[18:09] और देखिए भाई डब्ल्यूबीसी तो हमारा सबसे मेजर पार्ट होती है।
[18:10] तो जब डब्ल्यूबीसी का प्रोडक्शन बढ़ जाएगा तो हमारी इम्युनिटी भी बढ़ जाएगी।
[18:13] उसके बाद साइटोकाइन देखिए साइटोकाइन भी हमारे जो है बहुत केमिकल्स होते हैं जो कि हमारा इनफ्लेमेशन वगैरह
[18:18] होते हैं जो कि हमारा इनफ्लेमेशन वगैरह में इन्वॉल्व होते हैं।
[18:20] तो ये भी हमारे कह सकते हो इम्यूनिटी को बढ़ाने में अपना बहुत ही मेजर रोल प्ले करते हैं।
[18:23] और उसके बाद देखिए नेक्स्ट हम लोग बात करते हैं इम्यूनो सप्रेसेंट्स के बारे में।
[18:26] अब इम्यूनो सप्रेसेंट देखिए ये हमारी वो मेडिकेशंस है जो कि हमारे इम्यून सिस्टम को सप्रेस करेंगी।
[18:31] हमारे इम्यून सिस्टम को कम करेंगे।
[18:33] अब देखिए ये बहुत इंपॉर्टेंट चीज है कि भाई इम्यून सिस्टम को बढ़ा रहा है।
[18:35] ये तो समझ में आ रहा है।
[18:36] लेकिन हमारी बॉडी के इम्यून सिस्टम को कोई कम करे ऐसी दवा हम लोग क्यों खाएंगे?
[18:40] क्योंकि भाई हमारा इम्यून सिस्टम तो स्ट्रांग होना चाहिए।
[18:41] देखिए होता क्या है कभी-कभी हमारी बॉडी में जो हमारी हमारी बॉडी का जो इम्यून सिस्टम है ना वो किसी सर्टेन इंफेक्शन से कॉज करते-करते ओवरस्टिमुलेट हो जाता है और ओवरएक्टिव हो के होता क्या है कि ये हमारी बॉडी के ऑन टिश्यू यानी कि बॉडी के खुद के टिश्यू को ही डैमेज करने लगता है और ऐसे प्रॉब्लम ऐसी प्रॉब्लम्स को हम लोग बोलते हैं ऑटोइम डिसऑर्डर्स।
[19:02] ऑटोइम डिसऑर्डर्स में होता क्या है कि जो बॉडी का इम्यून सिस्टम है वो गलती से बॉडी पर ही अटैक करने लगता है।
[19:08] अब भाई ऐसे टाइम पे हमें क्या चाहिए?
[19:09] ऐसे टाइम पे हमें चाहिए कि हम लोग ऐसी दवाएं दें जो कि हमारे इम्यून सिस्टम को थोड़ा सा कम करें क्योंकि हमारी बॉडी के खुद के टिश्यू को डैमेज कर रहा है।
[19:16] और इसके अलावा देखिए जैसे जब जब भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट वगैरह होता है तो जैसे मान लीजिए किडनी
[19:20] होता है तो जैसे मान लीजिए किडनी ट्रांसप्लांट है तो जब दूसरे पर्सन की
[19:22] ट्रांसप्लांट है तो जब दूसरे पर्सन की किडनी यहां पे किसी फर्स्ट पर्सन में
[19:24] किडनी यहां पे किसी फर्स्ट पर्सन में ट्रांसफर करी जाती है लगाई जाती है।
[19:26] ट्रांसफर करी जाती है लगाई जाती है।
[19:27] तो कभी-कभी बॉडी उसको एक्सेप्ट नहीं करती है।
[19:29] क्योंकि बॉडी का इम्यून सिस्टम उसको एज अ फॉरेन फॉरेन पार्टिकल ट्रीट करता है।
[19:31] फॉरेन फॉरेन पार्टिकल ट्रीट करता है।
[19:33] फॉरेन सब्सटेंस ट्रीट करता है।
[19:35] तो वहां पे भी हमें चाहिए होता है कि थोड़े टाइम के लिए बॉडी का इम्यून सिस्टम काम ना करें और
[19:37] लिए बॉडी का इम्यून सिस्टम काम ना करें और किडनी जो है उसमें ट्रांसप्लांट हो जाए और
[19:39] किडनी जो है उसमें ट्रांसप्लांट हो जाए और बॉडी उसको पहचान ले ताकि बॉडी उसको अपने
[19:41] बॉडी उसको अपने खुद के ऑर्गन की तरह ट्रीट करना स्टार्ट
[19:42] खुद के ऑर्गन की तरह ट्रीट करना स्टार्ट करे।
[19:44] तो इन सब टाइम पे हम लोग यहां पे इम्यूनो सप्रेसेंट का यूज़ करते हैं।
[19:45] इम्यूनो सप्रेसेंट का यूज़ करते हैं।
[19:47] अब देखिए इसके भी बहुत अलग-अलग टाइप है।
[19:50] इन सब इन सबको हम लोग यहां पे देखते हैं।
[19:51] सबसे पहला आता है हमारा यहां पे कैल्सिन्यूरिन इनबिटर्स।
[19:53] अब देखिए कैल्सिन्यूरिन क्या होता है?
[19:55] देखिए ये हमारा कह सकते हो एक एंजाइम होता है और ये
[19:57] बेसिकली करता क्या है?
[19:59] ये हमारा जो है कह सकते हो हमारे टी सेल्स को एक्टिवेट करने
[20:01] में अपना रोल प्ले करता है।
[20:02] तो जो कैल्स न्यूरिन इनबिटर है वो इस एंजाइम को
[20:04] इनबिबिट कर देते हैं जिसकी वजह से टी
[20:05] सेल्स एक्टिवेट नहीं हो पाती हैं।
[20:07] और यहां पे हमारा जो फर्दर पाथवे है वो भी इनबिबिट
[20:09] हो जाता है।
[20:10] इंटरल्यूकिन टू वगैरह क्या होता है भाई?
[20:11] जब टी सेल एक्टिवेट होती है तभी ये बनता है।
[20:13] तो ये नहीं एक्टिवेट होगा तो ये भी नहीं बनेगा।
[20:14] ये नहीं बनेगा तो हमारा इम्यून सिस्टम यहां पे सप्रेस हो
[20:16] जाएगा।
[20:17] और एडवर्स इफेक्ट यहां पे देख लीजिएगा।
[20:19] नेफ्रोडॉक्सिसिटी बहुत सिंपल से हैं।
[20:22] हैं।
[20:22] ठीक है?
[20:22] और थेरेपटिक ये सब आप लोग नोट्स में देख लीजिएगा।
[20:24] उसके बाद एमटोर नोट्स में देख लीजिएगा।
[20:25] उसके बाद एमटोर इनवर्टर्स की बात करें तो यहां पे देखिए ये भी हमारा जो है एक टाइप का प्रोटीन
[20:27] ये भी हमारा जो है एक टाइप का प्रोटीन होता है जो कि हमारे कह सकते हो
[20:28] होता है जो कि हमारे कह सकते हो डब्ल्यूबीसी के डब्ल्यूबीसी के कह सकते हो
[20:31] डब्ल्यूबीसी के डब्ल्यूबीसी के कह सकते हो ग्रोथ में ठीक है और प्रोफ्रेशन यानी उनको
[20:33] ग्रोथ में ठीक है और प्रोफ्रेशन यानी उनको बढ़ने में उनके सेल डिवीजन में अपना रोल
[20:34] बढ़ने में उनके सेल डिवीजन में अपना रोल प्ले करता है।
[20:36] अब अब भाई देखिए डब्ल्यूबीसी का जब सेल डिवीज़ होगा तभी तो
[20:38] डब्ल्यूबीसी का जब सेल डिवीज़ होगा तभी तो वो ज्यादा होंगी।
[20:40] तो अगर उसका सेल डिवीज़ ही रोक दिया जाए तो वहां पे क्या होगा?
[20:41] ही रोक दिया जाए तो वहां पे क्या होगा?
[20:43] हमारी बॉडी में डब्ल्यूबीसी कम हो जाएंगी तो हमारा काम बन जाएगा।
[20:44] तो हमारा काम बन जाएगा। है ना?
[20:44] क्योंकि डब्ल्यूबीसी अपना रोल प्ले करती है।
[20:46] बाकी यहां पे देख लीजिएगा आप लोग एडवर्स इफेक्ट
[20:48] थेरेपेटिक यूजेज और उसके बाद बात करें
[20:50] थेरेपेटिक यूजेज और उसके बाद बात करें एंटी एंटी प्रोलिफ्रेटिव ड्रग्स की तो
[20:52] एंटी एंटी प्रोलिफ्रेटिव ड्रग्स की तो यहां पे देखिए ये हमारी ये भी हमारी वो
[20:54] यहां पे देखिए ये हमारी ये भी हमारी वो ड्रग्स हैं जो कि हमारा प्रोलिफ्रेशन यानी
[20:55] ड्रग्स हैं जो कि हमारा प्रोलिफ्रेशन यानी कि कह सकते हो इनके ग्रोथ में अपना रोल
[20:57] कि कह सकते हो इनके ग्रोथ में अपना रोल प्ले करती हैं अपने हमारे जो है बी
[21:00] प्ले करती हैं अपने हमारे जो है बी लिंफोसाइट्स और टी लिंफोसाइट्स में।
[21:02] लिंफोसाइट्स और टी लिंफोसाइट्स में।
[21:02] ठीक है?
[21:02] प्रोलिफ्रेटिव एजेंट्स हमारे वो वो
[21:04] है? प्रोलिफ्रेटिव एजेंट्स हमारे वो वो एजेंट्स होते हैं जो कि इनको ग्रोथ करने
[21:05] एजेंट्स होते हैं जो कि इनको ग्रोथ करने में और एंटी प्रोलिफ्रेटिव मतलब कि यहां
[21:07] में और एंटी प्रोलिफ्रेटिव मतलब कि यहां पे इनकी ग्रोथ को रोकने का काम करती हैं।
[21:09] पे इनकी ग्रोथ को रोकने का काम करती हैं।
[21:09] ठीक है?
[21:10] तो इनको ग्रोथ को रोक के हमारा काम बन जाता है।
[21:10] और उसके बाद
[21:11] काम बन जाता है।
[21:11] और उसके बाद ग्लूकोकॉर्टिकॉइड्स की बात करें तो ये
[21:13] ग्लूकोकॉर्टिकॉइड्स की बात करें तो ये हमारे स्टेरॉइड हॉर्मोन्स होते हैं जो कि
[21:14] हमारे स्टेरॉइड हॉर्मोन्स होते हैं जो कि हमारा इनफ्लामेशन वगैरह को रिड्यूस करते
[21:16] हमारा इनफ्लामेशन वगैरह को रिड्यूस करते हैं।
[21:16] अब इसको हम लोगों ने फिफ्थ सेम में
[21:17] फिफ्थ सेम में काफी डिटेल में पढ़ा भी था।
[21:17] आप लोग को याद
[21:19] काफी डिटेल में पढ़ा भी था।
[21:19] आप लोग को याद होना चाहिए।
[21:19] और इसका यूज़ हम लोग बहुत
[21:20] होना चाहिए।
[21:20] और इसका यूज़ हम लोग बहुत सारे एलर्जीस, ऑटोइ्यून डिसऑर्डर्स और
[21:22] सारे एलर्जीस, ऑटोइ्यून डिसऑर्डर्स और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के टाइम पे करते हैं।
[21:24] ऑर्गन ट्रांसप्लांट के टाइम पे करते हैं।
[21:26] और अगर हम लोग यहां पे बायोलॉजिकल एजेंट्स की बात करें तो यहां पे देखिए टीएनएफ
[21:27] की बात करें तो यहां पे देखिए टीएनएफ अल्फा इन्वर्टर की बात करें तो यहां पे ये
[21:29] अल्फा इन्वर्टर की बात करें तो यहां पे ये हमारा एक फैक्टर होता है ट्यूमर
[21:31] हमारा एक फैक्टर होता है ट्यूमर न्यूक्रोसिस फैक्टर अल्फा।
[21:33] ये सारी चीजें अब देखिए इतना आप लोगों को समझना होगा कि
[21:35] अब देखिए इतना आप लोगों को समझना होगा कि ये सारी चीजें इम्यून इम्यून रिस्पांस में
[21:36] ये सारी चीजें इम्यून इम्यून रिस्पांस में बहुत मेजर रोल प्ले करती हैं।
[21:38] बहुत मेजर रोल प्ले करती हैं।
[21:40] तो इन सबको इनबिट करके हमारे यहां पे ड्रग्स क्या होता है?
[21:42] इम्यून सिस्टम को सप्रेस करती हैं।
[21:43] अब इनके बारे में बहुत डिटेल में हम लोग बात नहीं कर सकते।
[21:45] बट इतना आप लोग समझिए कि टीएनएफ अल्फा हो गया चाहे हमारा
[21:47] समझिए कि टीएनएफ अल्फा हो गया चाहे हमारा इंटरल्यूकिन हो गया चाहे हमारा
[21:48] इंटरल्यूकिन हो गया चाहे हमारा इंटरल्यूकिन टू हो गया।
[21:50] देखिए इन सबके आगे एागोनिस्ट लगा है।
[21:51] मतलब ये सारे जो इंटरल्यूकिन वन हो गया, इंटरल्यूकिन टू हो गया।
[21:53] इंटरल्यूकिन वन हो गया, इंटरल्यूकिन टू हो गया।
[21:55] यह सारे अपना बहुत ही मेजर रोल प्ले करते हैं।
[21:57] तो इनको एंटागोनाइज़ करके हम लोग यहां पे इम्यून सिस्टम को सप्रेस कर सकते हैं।
[21:58] एंटीसीडी3 तो देखिए CD3 हमारे रिसेप्टर होते हैं।
[22:00] CD3 हमारे रिसेप्टर होते हैं।
[22:02] टी सेल्स पे प्रेजेंट होते हैं।
[22:03] तो इन सबको अगर हम लोग ब्लॉक कर देंगे तो कहीं ना कहीं हमारा टी सेल नहीं
[22:05] एक्टिवेट होगा।
[22:06] हमारा इम्यून सिस्टम नहीं एक्टिवेट होगा और हमारा काम यहां पे बन जाएगा।
[22:09] और पॉली पॉलीक्लोनल एंटीबॉडीज की बात करें तो ये हमारी मिक्सचर ऑफ
[22:12] बात करें तो ये हमारी मिक्सचर ऑफ एंटीबॉडीज होती है जो कि हमारे यहां पे
[22:14] एंटीबॉडीज होती है जो कि हमारे यहां पे मल्टीपल साइड्स में जो है कह सकते हो
[22:16] मल्टीपल साइड्स में जो है कह सकते हो एंटीजन के मल्टीपल साइड को टारगेट करती है।
[22:18] एंटीजन के मल्टीपल साइड को टारगेट करती है।
[22:20] तो ये भी हमारा कह सकते हो ये भी
[22:22] है।
[22:24] हमारा जो बी सेल्स होते हैं बी सेल्स होते हैं।
[22:25] ठीक है?
[22:25] तो उनके उनके थ्रू यहां पे हैं।
[22:27] ठीक है?
[22:27] तो उनके उनके थ्रू यहां पे प्रोड्यूस करी जाती है।
[22:27] बाकी यूजज़ की बात प्रोड्यूस करी जाती है।
[22:28] बाकी यूजज़ की बात करें तो हमारा इम्यून सिस्टम को सप्रेस करें तो हमारा इम्यून सिस्टम को सप्रेस करके हमारा यहां पे इनका यूज़ देखने को मिलता है।
[22:30] स्पेशली ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मिलता है।
[22:32] स्पेशली ऑर्गन ट्रांसप्लांट के टाइम।
[22:34] अब देखिए अगर हम लोग यहां पे बात करें तो हमारा एक बहुत ही इंपॉर्टेंट टॉपिक अभी यहां पे बचा हुआ है जो कि हमारा यहां पे कीमोथेरेपी ऑफ़ मैलगेंसी।
[22:36] अब देखिए इसका मतलब है मैलिगनेंसी का मतलब होता है हमारा यहां पे कैंसर।
[22:40] ठीक है?
[22:40] और यहां पे मतलब कैंसर का एक कह सकते हो स्टार्टिंग स्टेज होता है।
[22:45] बट और कीमोथेरेपी मतलब कि जो दवाएं हमारी कैंसर के ट्रीटमेंट में यूज़ करी जाती हैं।
[22:49] तो इसमें बेसिकली अगर हम लोग देखा जाए तो हमें पढ़ना है अपने एंटी कैंसर एजेंट्स के बारे में।
[22:52] और आप लोग एक एग्जाम में भी क्वेश्चन आता है डिफाइन अल्काइलेटिंग एजेंट्स, एंटी कैंसर एजेंट्स।
[22:57] तो यहां पे देखिए जो एंटी कैंसर एजेंट्स हैं इसको तो हम लोगों ने ऑलरेडी अपनी मेडिसिनल केमिस्ट्री में फिफ्थ सेम में पढ़ा हुआ था।
[23:01] आप लोग को याद हो तो।
[23:02] तो बस यहां से हम क्या करेंगे कि उसी लेक्चर को कंपाइल कर देंगे।
[23:06] बट थोड़ा सा फार्माकोलॉजी के पॉइंट ऑफ व्यू से यानी कि यहां पे देखिए एमओए इंट्रोडक्शन हम लोग वहां से देखेंगे और जो फार्माकोइनेटिक वगैरह है वो हम लोग यहां पे देख लेंगे और देखिए ये जो एक टॉपिक और है प्रोटीन ड्रग्स तो देखिए देखा जाए ना तो प्रोटीन ड्रग्स कुछ खास नहीं है मतलब जो ड्रग्स हमारी प्रोटीन नेचर की होती हैं तो यहां पे देखिए ये जो आप लोगों ने बहुत सारी
[23:25] पे देखिए ये जो आप लोगों ने बहुत सारी हमारी अभी अभी आप लोगों ने एंटीबॉडी वगैरह
[23:27] हमारी अभी अभी आप लोगों ने एंटीबॉडी वगैरह पढ़ी तो यहां पे देखिए ये सारी हमारी
[23:28] पढ़ी तो यहां पे देखिए ये सारी हमारी प्रोटीन ही तो होती हैं।
[23:30] जैसे यहां पे अगर आप लोग देखो तो ये जो हमारा साइटोकाइन
[23:33] आप लोग देखो तो ये जो हमारा साइटोकाइन होता है।
[23:35] ठीक है? और ये जो हमारा आप लोगों ने देखिए साइटोस वगैरह पढ़े हैं ये सारे
[23:37] हमारे क्या थे हमारा प्रोटीन थे।
[23:38] ये भी हमारा प्रोटीन था।
[23:40] ये भी हमारा प्रोटीन था। तो देखिए ये सारे जो प्रोटीनंस वगैरह
[23:42] होते हैं ना यही सारे हमारे होते हैं प्रोटीन ड्रैग्स।
[23:43] अब हालांकि इनके बारे में हम लोग थोड़ा सा जो है डिटेल नोट्स और
[23:45] में हम लोग थोड़ा सा जो है डिटेल नोट्स और देखेंगे।
[23:47] तो देखिए ये आप लोग को जो है नोट्स में मिल जाएगा।
[23:48] मतलब इसका इसका हम लोगों ने जो है दो पेज का एक स्पेसिफिक
[23:51] लोगों ने जो है दो पेज का एक स्पेसिफिक नोट्स अटैच कर दिया है।
[23:52] तो ये सारी चीजें नोट्स में अपडेट हो जाएंगी।
[23:55] मे बी मे बी आज रात तक या फिर मे बी कल सुबह तक पक्का
[23:57] अपडेट हो जाएंगे।
[23:59] तो आप लोग देख लीजिएगा।
[24:00] बाकी अब हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने
[24:02] कैंसर के बारे में।
[24:04] फिर हम लोग यहां पे इसको काफी डिटेल में देखते हैं अपने एंटी
[24:06] कैंसर एजेंट्स को।
[24:08] तो देखिए अगर हम लोग यहां पे बात करें अपने एंटी नियोप्लास्टिक
[24:10] एजेंट्स के बारे में तो देखिए यहां पे
[24:12] एंटी नियोप्लास्टिक मतलब कि एंटी ठीक है
[24:15] मतलब अपोज करने वाले और नियोप्लास्टिक
[24:17] मतलब कि यहां पे नियोप्लास्टिक का मतलब
[24:18] नियोप्लाज्म से और ये जो नियोप्लाज्म है
[24:21] ना तो बेसिकली नियोप्लाज्म को हम लोग यहां
[24:23] पे कैंसर के सिनोनिम की तरह यूज़ करते हैं।
[24:26] पे कैंसर के सिनोनिम की तरह यूज़ करते हैं।
[24:28] ऑलदो यहां पे देखिए थोड़ा सा नियोप्लाज्म डिफरेंट टर्म होता है।
[24:30] बट यहां पे आप लोग सिंपली समझो कि ये जो एंटी नियोप्लास्टिक एजिड्स हैं ये बेसिकली हमारे यहां पे एंटी कैंसर ड्रग्स होती हैं।
[24:34] यानी ये हमारे वो एजेंट्स होते हैं जो कि हमारे कैंसर के ट्रीटमेंट में यहां पे यूज़ किए जाते हैं।
[24:40] अब देखिए थोड़ा सा नियोप्लाज्म कैसे डिफरेंट है वो हम लोग अभी देखेंगे।
[24:43] बाकी अगर हम लोग यहां पे देखें तो एंटी नियोप्लास्टिक एजेंट्स आर द ड्रग्स दैट आर यूज्ड टू ट्रीट कैंसर।
[24:49] यानी ये हमारी वो दवाएं होती हैं जिनको हम लोग यहां पे कैंसर के ट्रीटमेंट में यूज़ करते हैं।
[24:52] बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो एंटीनोप्लास्टिक एजेंट्स और आल्सो नोन एज तो इनको हम लोग यहां पे एंटी कैंसर कीमोथेरेपी।
[24:57] कीमोथेरेपी का नाम आप लोगों ने बहुत सुना होगा कैंसर के ट्रीटमेंट में।
[25:03] ठीक है? कि हमारे कुछ केमिकल यानी कि दवाएं चलाई जाती हैं।
[25:05] तो काफी इफेक्टिव ट्रीटमेंट भी होता है ये यहां पे।
[25:07] मतलब अगर कैंसर को प्रिवेंट करने का कोई सबसे इफेक्टिव वे है तो हमारा ये कीमोथेरेपी ही होता है।
[25:12] और कीमोथेरेपी में ही जो दवाएं हम लोग यूज़ करते हैं।
[25:16] ठीक है? वही सारी हमारी एंटी नियोप्लास्टिक एजेंट्स के अंदर आती हैं।
[25:17] और बाकी हम लोग यहां पे साइटोटॉक्सिक ड्रग्स यानी कि सेल देखो साइटो मतलब सेल और टॉक्सिक मतलब कि जो उनके लिए टॉक्सिक हो मतलब यही है कि ये हमारी सेल्स को किल वगैरह करने का काम
[25:28] हमारी सेल्स को किल वगैरह करने का काम करती हैं।
[25:30] अब देखिए सारी चीजें क्यों करती हैं?
[25:31] तो वो हम लोग अभी कैंसर का इंट्रोडक्शन देखेंगे तब आप लोग समझ जाओगे।
[25:33] इंट्रोडक्शन देखेंगे तब आप लोग समझ जाओगे।
[25:35] बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो दे वर्क बाय टारगेटिंग एंड किलिंग कैंसर सेल्स बाय इनबिटिंग देयर ग्रोथ एंड प्रोलिफ्रेशंस।
[25:37] वर्क बाय टारगेटिंग एंड किलिंग कैंसर सेल्स बाय इनबिटिंग देयर ग्रोथ एंड प्रोलिफ्रेशंस।
[25:39] सेल्स बाय इनबिटिंग देयर ग्रोथ एंड प्रोलिफ्रेशंस।
[25:41] देखिए अगर हम लोग यहां पे बात करना थोड़ा सा अगर आप लोग को कैंसर का इंट्रोडक्शन हम दें तो देखिए कैंसर में होता क्या है कि जो हमारी सेल्स है ना ये हमारी अनकंट्रोलेबली डिवाइड होना स्टार्ट हो जाती हैं।
[25:43] इंट्रोडक्शन हम दें तो देखिए कैंसर में होता क्या है कि जो हमारी सेल्स है ना ये हमारी अनकंट्रोलेबली डिवाइड होना स्टार्ट हो जाती हैं।
[25:44] होता क्या है कि जो हमारी सेल्स है ना ये हमारी अनकंट्रोलेबली डिवाइड होना स्टार्ट हो जाती हैं।
[25:46] मतलब इनमें यहां पे अनकंट्रोल्ड सेल डिवीज़न देखने को मिलने लगता है।
[25:49] लगता है।
[25:51] जिससे हमारी जो सेल्स हैं वो बहुत ज्यादा मतलब डिवाइड हो के और बहुत ज्यादा सेल्स में कन्वर्ट हो जाती हैं।
[25:53] और ये जो सेल्स हैं ये हमारी बॉडी के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं होती हैं।
[25:55] तो बेसिकली हम लोग बात करें तो कैंसर में यही होता है।
[25:57] बाकी अभी डिटेल में हम लोग और ज्यादा देखेंगे।
[25:58] बट आप लोग सिंपली समझो कि इसमें अनकंट्रोल्ड सेल डिवीज़ होता है।
[26:00] तो यहां पे देखिए हमारी जो दवाएं हैं वो क्या करेंगी भाई?
[26:01] इसी सेल डिवीज़ को ही तो कंट्रोल करेंगी और उसके लिए क्या करना पड़ेगा भाई?
[26:03] इनको सेल को किल करना पड़ेगा।
[26:05] तो यहां पे वही है कि उसके डिवीज़ को ये लोग इनबिट यानी कि कम मतलब रोकते हैं बाय देयर ग्रोथ एंड प्रोलिफ्रेशंस।
[26:06] लोग इनबिट यानी कि कम मतलब रोकते हैं बाय देयर ग्रोथ एंड प्रोलिफ्रेशंस।
[26:08] यानी कि जो उसकी सेल की ग्रोथ है और जो उसका प्रोफेशन प्रोलिफ्रेशंस मतलब कि उसका समझ लीजिए थोड़ा फैलना।
[26:10] प्रोलिफ्रेशंस मतलब कि उसका समझ लीजिए थोड़ा फैलना।
[26:12] ठीक है?
[26:13] तो उसकी ग्रोथ और
[26:28] थोड़ा फैलना।
[26:28] ठीक है?
[26:28] तो उसकी ग्रोथ और फैलने को रोकते हैं ये लोग।
[26:31] बाकी दे वर्क थ्रू डिफरेंट मैकेनिज़्म डिपेंडिंग ऑन देयर क्लास एंड टाइप।
[26:35] तो अभी हम लोग यहां पे बहुत सारे डिफरेंट-डिफरेंट टाइप्स के एंटीनोप्लास्टिक एजेंट्स देखेंगे।
[26:38] तो सभी का यहां पे काम करने का तरीका थोड़ा अलग-अलग होता है।
[26:42] वो सारी चीजें अभी हम लोग बहुत डिटेल में देखेंगे।
[26:42] ठीक है?
[26:44] तो ये आप लोग एक बेसिक इंट्रोडक्शन समझ गए।
[26:46] बाकी अब हम लोग यहां पे थोड़ा सा बात करते हैं अपने कैंसर के बारे में।
[26:49] ताकि आप लोग यहां पे पहले कैंसर के बारे में समझो ताकि तभी आप लोग समझोगे कि इसको ट्रीट कैसे करते हैं अच्छे से।
[26:55] है ना?
[26:55] तो बात करें हम लोग यहां पे कैंसर के बारे में।
[26:57] तो देखिए कैंसर वर्ल्ड ऐसा तो है नहीं।
[26:59] आप लोग पहली बार सुन रहे हो।
[26:59] आप सभी को पता है हमारी कितनी ज्यादा हार्मफुल डिजीज होती है।
[27:04] आज तक भी इसका कोई इफेक्टिव ट्रीटमेंट नहीं ढूंढ पाया गया है।
[27:07] बाकी यहां पे इसके बहुत डिफरेंट-डिफरेंट स्टेजेस होते हैं।
[27:09] अगर मान लीजिए इनिशियल स्टेज में पहचान में आ जाती है तो फिर इसका थोड़ा बहुत यहां पे ट्रीटमेंट पॉसिबल होता है।
[27:15] बाकी अगर यहां पे लास्ट स्टेज में कोई होता है तो फिर उसका बच पाना बहुत ही मुश्किल ही होता है।
[27:19] बाकी वही बात है कि अगर हम लोग थोड़ा सा देखें कि एक्चुअल में इसमें होता क्या है?
[27:22] तो कैंसर इज़ अ वेरी सीरियस डिजीज।
[27:25] हमें पता है बहुत ज्यादा सीरियस और हार्मफुल डिजीज होती है।
[27:28] कैरेक्टराइज्ड बाय अनकंट्रोल्ड ग्रोथ एंड स्प्रेड ऑफ़
[27:30] अनकंट्रोल्ड ग्रोथ एंड स्प्रेड ऑफ़ एब्नॉर्मल सेल्स इन द बॉडी।
[27:32] एब्नॉर्मल सेल्स इन द बॉडी।
[27:32] देखिए एक्चुअल में इसमें होता क्या है?
[27:35] देखिए जो हमारी सेल्स होती हैं आप सभी को पता है हमारी बॉडी में सेल डिवीजन की प्रोसेस होती है।
[27:38] बॉडी में सेल डिवीजन की प्रोसेस होती है।
[27:38] ठीक है?
[27:40] तो देखिए होता क्या है?
[27:40] अगर हम लोग नॉर्मल वे में बात करें जैसे माइटोसिस सेल डिवीज़न में होता क्या है कि जो हमारी एक सेल है।
[27:45] ठीक है?
[27:45] वो यहां पे जब डिवाइड होती है, तो वो यहां पे दो नई सेल्स में कन्वर्ट हो जाती है।
[27:49] अब ये जो दो नई सेल्स हैं ये फर्दर डिवाइड होती है।
[27:50] ठीक है?
[27:50] तो चार नई सेल्स उसके बाद ये फर्दर डिवाइड होंगी तो आठ।
[27:54] मतलब इस तरीके से मतलब एक इक्वेशनल डिवीज़न चलता है।
[27:56] ठीक है?
[27:56] कि मतलब एक सेल अगर डिवाइड हो रही है तो वो दो में ही कन्वर्ट होगी।
[27:59] ऐसा नहीं है कि एक सेल डिवाइड हो के तीन चार 10 में कन्वर्ट हो जा रही है।
[28:03] ठीक है?
[28:03] ये हमारा नॉर्मल सेल डिवीज़न होता है।
[28:05] लेकिन यहां पे कैंसर में होता क्या है?
[28:07] कैंसर में यहां पे ये होता है कि जो हमारी सेल है ठीक है?
[28:09] इनमें यहां पे एक एब्नॉर्मल डिवीजन स्टार्ट होना स्टार्ट हो जाता है।
[28:13] मतलब कि होता क्या है कि जो एक सेल है, ठीक है?
[28:15] वो यहां पे डिवाइड हो के दो में नहीं बल्कि यहां पे एक सेल डिवाइड हो के कई सारी सेल्स में।
[28:20] और फिर ये यहां पे फर्दर डिवाइड हो के और भी कई सारी सेल्स में।
[28:21] मतलब इस तरीके से होता क्या है कि यहां पे ये जो सेल्स हैं ये इतनी ज्यादा डिवाइड हो जाती हैं कि यहां पे जो है एक एक्स्ट्रा लंप या फिर मास का फॉर्मेशन कर लेती हैं।
[28:29] मतलब नॉर्मली अगर हम लोग देखें तो देखिए यहां
[28:30] नॉर्मली अगर हम लोग देखें तो देखिए यहां पे प्रॉपर वे में मान लीजिए हमारी बॉडी का
[28:32] पे प्रॉपर वे में मान लीजिए हमारी बॉडी का कोई मान लीजिए कोई टिश्यू है।
[28:34] कोई मान लीजिए कोई टिश्यू है। ठीक है?
[28:34] तो उसमें नॉर्मल एक प्रॉपर वे में सेल डिवाइड है।
[28:37] लेकिन यहां पे देखिए क्या हुआ?
[28:38] यहां पे हमारा सेल डिवीजन इतना ज्यादा हो गया कि इसने यहां पे एक एक्स्ट्रा मास फॉर्म कर लिया।
[28:41] और देखिए यहां पे ये सेल डिवीजन तो होता ही है।
[28:44] दूसरी बात ये कि चूंकि इसके अंदर ये एब्नॉर्मल सेल डिवीजन हो रहा है।
[28:47] तो ये जो सेल है ठीक है?
[28:49] तो इसके अंदर भी मतलब ये सेल हमारी अच्छी सेल नहीं होती है क्योंकि इसके अंदर कुछ ना कुछ तो डीएनए मेडिटेशंस वगैरह होते हैं।
[28:53] तो मतलब पहली बात ये सेल्स भी हमारी काफी डैमेज सेल्स होती हैं।
[28:56] ठीक है?
[28:58] जो कि हमारी बॉडी के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं होती हैं।
[28:59] और दूसरा इनके अंदर एब्नॉर्मल डिवीजन होता है।
[29:01] जिसकी वजह से क्या होता है?
[29:02] ये एक्स्ट्रा बॉडी लंप या फिर मास का फॉर्मेशन कर लेती हैं।
[29:07] जो कि एट लास्ट में हमारी बाकी जो अच्छी सेल्स होती हैं उनको भी डैमेज करना स्टार्ट कर देती है।
[29:11] और धीरे-धीरे क्या होता है कि ये जो सेल्स है ना ये मेनली हमारी पूरी बॉडी में फैलना स्टार्ट हो जाती हैं।
[29:15] ठीक है?
[29:16] एक जगह से दूसरी जगह और इस तरीके से यहां पे जो हमारा कैंसर है ठीक है वो हमारा यहां पे बहुत ही हार्मफुल हो जाता है।
[29:21] देखिए एक चीज़ आप लोग समझिए कि अभी हम लोग थोड़ा देखेंगे तब आप लोग देखना।
[29:25] ठीक है?
[29:27] तो बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो दीज़ एब्नॉर्मल सेल्स कैन फॉर्म ट्यूमर एंड स्प्रेड थ्रू आउट द बॉडी विय ब्लड एंड
[29:32] स्प्रेड थ्रू आउट द बॉडी विय ब्लड एंड लिंफेटिक सिस्टम।
[29:34] तो देखिए ट्यूमर का मतलब यही होता है कि जैसे ये जो हमारा सेल्स है ठीक है?
[29:37] तो जब ये एक्स्ट्रा डिवाइड हो गई।
[29:38] ठीक है?
[29:40] तो इन्होंने क्या किया? एक मास मतलब एक ऐसा लम फॉर्म कर लिया।
[29:42] और इसी को हम लोग यहां पे बोलते हैं ट्यूमर।
[29:43] ट्यूमर मतलब कि एक एक्स्ट्रा ऐसा जो मास फॉर्म हो जाता है बॉडी के अंदर।
[29:48] ठीक है? और यहां पे क्या होता है?
[29:49] देखिए वही बात है कि ये जो हमारी एक्स्ट्रा सेल्स फॉर्म हो रही है।
[29:51] ठीक है?
[29:53] तो ये हमारा ब्लड और लिंफेटिक सिस्टम के थ्रू हमारी पूरी बॉडी में फिर स्प्रेड होना स्टार्ट हो जाती हैं।
[29:54] और देखिए यही चीज होती है कैंसर।
[29:56] ये चीज आप लोग समझिए कि अगर मान लीजिए हमारी बॉडी के सिर्फ किसी एक पार्ट में हमारी सेल्स डिवाइड हो रही हैं।
[29:58] ठीक है?
[30:00] और उसके बाद सिर्फ उसी एक ही पार्ट में हमारी रह जा रही हैं।
[30:02] तो उसको हम लोग सिंपली ट्यूमर बोलते हैं।
[30:04] वो हमारा एक्चुअल में कैंसर नहीं होता है।
[30:05] कैंसर कब होता कि जब यही सेल्स हमारी जो है पूरी बॉडी में स्प्रेड होना स्टार्ट हो जाती हैं तो उस केस को हम लोग कैंसर बोलते हैं।
[30:07] ठीक है?
[30:09] और बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें कैंसर कैन स्टार्ट ऑलमोस्ट एनीवेयर।
[30:11] मतलब कि मेन चीज वही है कि हमारी ह्यूमन बॉडी के किसी भी पार्ट में कहीं भी हमारा कैंसर स्टार्ट हो सकता है।
[30:13] मतलब कहीं भी ये हमारी सेल्स जो है एब्नॉर्मली डिवाइड होना स्टार्ट हो सकती हैं।
[30:14] एंड ऑफेन नेम्ड।
[30:16] और बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें कि जो कैंसर का नाम है।
[30:18] ठीक है?
[30:20] तो मेन चीज वही है कि कैंसर
[30:34] है।
[30:34] ठीक है?
[30:35] तो मेन चीज वही है कि कैंसर हमारी बॉडी के किसी भी पार्ट में हो सकता है।
[30:37] और जो कैंसर का नाम है वो हमारे उसी ऑर्गन या फिर टाइप ऑफ सेल के बाद यहां पे कैंसर लगा देने से स्टार्ट होता है।
[30:41] जैसे अगर हम लोग बात करें तो मान लीजिए ब्रेस्ट में अगर यहां पे सेल्स अनकंट्रोल डिवाइड होना स्टार्ट हो गए तो ब्रेस्ट कैंसर हो गया।
[30:47] ठीक है?
[30:49] लंग में हो गया तो लंग कैंसर हो गया।
[30:50] इसी तरीके से ब्लड में हो रहा तो ब्लड कैंसर हो गया।
[30:52] तो इस तरीके से यहां पे डिफरेंट-डिफरेंट यहां पे उसी ऑर्गन या फिर सिस्टम का नाम आगे लगा के हमारा कैंसर का नेम हो जाता है।
[30:57] ठीक है?
[30:59] बाकी अगर हम लोग यहां पे देखें तो अदर टर्म्स लाइक नियोप्लाज्म एंड ट्यूमर।
[31:02] तो देखिए कैंसर को हम लोग यहां पे ट्यूमर या फिर नियोप्लाज्म के नाम से भी जानते हैं।
[31:06] लेकिन यहां पे देखिए कहा तो जाता है लेकिन इन दोनों का जो मीनिंग है वो थोड़ा सा डिफरेंट होता है।
[31:10] तो कैसे डिफरेंट होता है वो हम लोग यहां पे थोड़ा सा देखते हैं।
[31:14] ठीक है?
[31:16] तो देखिए अगर हम लोग यहां पे बात करें ट्यूमर की तो देखिए ट्यूमर क्या होता है?
[31:20] ट्यूमर इज एन एबनॉर्मल ग्रोथ ऑफ सेल्स दैट फॉर्म अ मास और लंग।
[31:22] तो देखिए ट्यूमर का मतलब ये होता है कि हमारे बॉडी के किसी एक सिंगल पार्ट में जो हमारे सेल्स हैं वो थोड़ा सा डिवाइड हो गए।
[31:29] उन्होंने एक मास फॉर्म कर लिया।
[31:30] ये हमारा ट्यूमर होता है।
[31:32] अब ये ट्यूमर हमारा दो टाइप का होता है।
[31:32] एक होता है बिनाइन ट्यूमर, एक होता है
[31:34] एक होता है बिनाइन ट्यूमर, एक होता है मेलिग्नेंट ट्यूमर।
[31:36] और ध्यान से सुनिएगा मेलिग्नेंट ट्यूमर।
[31:36] और ध्यान से सुनिएगा आप लोग।
[31:38] ये जो हमारा मैलिग्नेंट ट्यूमर है आप लोग।
[31:38] ये जो हमारा मैलिग्नेंट ट्यूमर है ये होता है हमारा एक्चुअल कैंसर।
[31:40] ठीक है?
[31:40] ये होता है हमारा एक्चुअल कैंसर।
[31:42] ठीक है?
[31:42] मतलब ये बिनाइन ट्यूमर हमारा कैंसर नहीं होता है बल्कि मेग्नेंट ट्यूमर ही हमारा
[31:43] कैंसर होता है।
[31:43] मतलब अगर हम लोग बिनाइन
[31:45] ट्यूमर देखें तो ये हमारा नॉन कैंसरस
[31:47] ट्यूमर होता है।
[31:47] ठीक है?
[31:48] इसमें हमारा कोई
[31:48] ट्यूमर होता है।
[31:50] ठीक है?
[31:50] इसमें हमारा कोई ग्रोथ वगैरह नहीं होता है।
[31:51] बल्कि जबकि
[31:51] यहां पे मेलग्नेंट ट्यूमर में क्या होता
[31:53] है?
[31:53] ये हमारी स्प्रेड होने लगती है।
[31:55] और ये हमारा कैंसरस ट्यूमर होता है।
[31:55] ठीक है?
[31:57] तो इट जनरली डज़ नॉट स्प्रेड टू अदर पार्ट्स
[31:59] ऑफ़ बॉडी।
[31:59] मतलब ये किसी एक ही जगह होता है
[32:02] और यहां पे इसको जो है इट कैन बी इज़ली
[32:03] रिमूव्ड थ्रू सर्जरी।
[32:03] तो देखिए यहां पे
[32:05] क्या हुआ है कि बॉडी के किसी एक ही पार्ट
[32:07] में सेल्स ग्रो हुई हैं।
[32:07] तो यहां पे इसको
[32:09] सर्जरी के थ्रू रिमूव कर दिया जाता है और
[32:11] ये उसके बाद सही भी हो जाता है ज्यादातर
[32:13] केस में।
[32:13] लेकिन जो हमारा मेलग्नेंट ट्यूमर
[32:15] यानी कि जो कैंसरस ट्यूमर होता है।
[32:15] पहली बात तो ये क्या होता है?
[32:16] ये हमारी बॉडी के
[32:17] अलग-अलग पार्ट में स्प्रेड हो जाता है
[32:19] लिंफेटिक सिस्टम और ब्लड स्ट्रीम के थ्रू।
[32:22] और दूसरा यहां पे ये जो है सर्जरी के थ्रू
[32:24] इज़ली रिमूव नहीं किया जा सकता है।
[32:24] मतलब
[32:26] सर्जरी से रिमूव तो किया जा सकता है लेकिन
[32:27] उसके बाद क्या होता ये दोबारा से ग्रो
[32:29] होना स्टार्ट हो जाते हैं।
[32:29] ज्यादातर केस
[32:30] में कहीं-कहीं यहां पे काम भी हो जाता है
[32:32] तो सर्जरी भी वहां पे अच्छी चीज हो जाती
[32:34] है।
[32:34] लेकिन ज्यादातर केस में देखा गया है
[32:34] कि यहां पे सर्जरी काम में नहीं आती है।
[32:36] कि यहां पे सर्जरी काम में नहीं आती है।
[32:38] ठीक है?
[32:38] तो ये हो जाता है।
[32:39] बाकी अगर हम लोग क्लासिफिकेशन की बात करें तो क्लासिफिकेशन देखिए वही है कि हमारी बॉडी
[32:43] के डिफरेंट-डिफरेंट टिश्यू के हिसाब से इसको हम लोग क्लासिफाई कर देते हैं कैंसर को।
[32:47] जैसे हमारा कार्सिनोमास हो गया, सारकोमास हो गया, ल्यूकेमियास हो गया और लिंफोमास हो गया।
[32:51] तो देखिए अगर हम लोग इसको थोड़ा सा देखना चाहें।
[32:53] ठीक है?
[32:53] तो देखिए कार्सफिनोमास का मतलब होता है कि वो कैंसर जो कि हमारे एपिथलियल टिश्यू में अराइव होता है।
[33:00] अब एपिथलियल टिश्यू हमारी बॉडी में कहां-कहां जैसे हमारा ब्रेस्ट हो गया, लंग हो गया।
[33:03] ठीक है?
[33:03] तो इन सब में एपिथलियल टिश्यू वगैरह होते हैं।
[33:07] तो इन सभी कैंसर को हम लोग यहां पे कार्सिनोमास के अंदर क्लासिफाई करते हैं।
[33:08] बाकी सारकोमास की बात करें तो ये हमारा वो कैंसर होता है जो कि हमारे कनेक्टिव टिश्यू में अराइज़ होता है।
[33:14] जैसे हमारा बोन हो गया, जॉइंट्स हो गया।
[33:15] ठीक है?
[33:15] मसल हो गए।
[33:17] तो यहां पे अगर बोन कैंसर हो गया तो ये सारी चीजें हमारी सार्कोमास के अंदर आ जाती हैं।
[33:21] ठीक है?
[33:21] उसके बाद ल्यूकेमियास हमारा ये होता है हमारा ब्लड कैंसर।
[33:23] ठीक है?
[33:25] और जनरली ये हमारा जो है डब्ल्यूबीसीज में देखने को मिलता है।
[33:26] ठीक है?
[33:26] तो इट बिगिंस विद हेल्दी ब्लड सेल्स चेंजेस एंड ग्रो अनकंट्रोलेबली।
[33:31] ठीक है?
[33:31] तो अनकंट्रोल्ड ग्रोथ हो जाती है।
[33:33] उसके बाद हम लोग बात करें लिंफोमास की तो देखिए ये हमारा कैंसर जो है लिंफेटिक सिस्टम में
[33:36] हमारा कैंसर जो है लिंफेटिक सिस्टम में अराइज़ होता है।
[33:38] और इसका एग्जांपल जैसे अराइज़ होता है।
[33:40] और इसका एग्जांपल जैसे हमारा एक हॉचकिंस लिंफोमा हो जाता है।
[33:42] नॉन हॉस्चकिंस लिंफोमा।
[33:44] ये सारे हमारे लिंफोमा के एग्जांपल हो जाते हैं।
[33:46] तो देखिए ये तो था हमारा ये हो गया हमारा क्लासिफिकेशन ऑफ़ कैंसर।
[33:49] नाउ अगर हम लोग यहां पे बात करें इसके कॉजेस की तो देखिए जो कैंसर का जो एग्जैक्ट कॉज है ना वो बता पाना थोड़ा मुश्किल है।
[33:53] जैसे बहुत सारे रीजन होते हैं।
[33:55] बिल्कुल एग्जैक्टली नहीं।
[33:57] हां ये चीज है कि मेन चीज यही है कि जो हमारा कैंसर सेल्स होती हैं उनके अंदर कुछ ना कुछ म्यूटेशंस मतलब कि उनके डीएनए में कुछ ना कुछ चेंजेस हो जाते हैं।
[34:05] तभी उनके अंदर एब्नॉर्मल सेल डिवीज़न स्टार्ट होता है।
[34:09] लेकिन अब ये क्यों हो रहा है ये चेंजेस? उसको बता पाना थोड़ा मुश्किल रहता है।
[34:13] कोई एग्जैक्ट रीज़न नहीं होता है।
[34:15] बहुत सारे चेंजेस हो सकते हैं।
[34:16] जैसे जेनेटिक म्यूटेशंस तो वही है कि जेनेटिक म्यूटेशंस तो हो ही जाते हैं।
[34:18] अब इसके पीछे जैसे एनवायरमेंटल एक्सपोज़र्स हो सकते हैं।
[34:20] ठीक है? स्मोकिंग, अल्कोहल ये सारी चीजें भी हमारे रिस्क फैक्टर्स होते हैं।
[34:24] तो ये सभी चीजें आपको पता ही है कि हर स्मोकिंग के हर सिगरेट के डिब्बे में लिखा होता है।
[34:29] इट कैन बी हार्मफुल।
[34:31] ठीक है? तो बाकी वो अलग बात है कि बिल्कुल भी लोग ध्यान नहीं देते हैं।
[34:36] ठीक है? और बाकी यहां पे बहुत सारे ऐसे हमारे कुछ वायरस, बैक्टीरिया,
[34:37] ऐसे हमारे कुछ वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट्स वगैरह भी हो सकते हैं जिसकी वजह से ये हो सकता है।
[34:41] उसके बाद हमारे कुछ हॉर्मोनल इमंबैलेंसेस भी हमारे यहां पे रीजन हो सकते हैं कैंसर का।
[34:43] ठीक है?
[34:46] नाउ अगर हम लोग यहां पे साइन एंड सिम्टम्स की बात करें तो साइन एंड सिम्टम्स देखिए वही है कि हमारा यहां पे बहुत ज्यादा थकावट वगैरह देखने को मिलती है।
[34:49] ठीक है?
[34:51] और वेट में यहां पे चेंजेस देखने को मिल सकते हैं।
[34:53] ठीक है?
[34:54] जनरली यहां पे वेट लॉस देखने को मिलता है।
[34:56] उसके बाद यहां पे स्किन में भी यहां पे चेंजेस मतलब स्किन के कलर टेक्सचर में चेंजेस हो सकते हैं।
[34:58] उसके बाद बोवेल मूवमेंट में चेंजेस हो सकते हैं।
[35:00] ठीक है?
[35:02] डायरिया वगैरह हो सकता है और पर्सिस्टेंट कफ बाकी ब्रीथिंग ट्रबल तो
[35:04] देखिए अगर आप लोग ध्यान से देखें ना तो ये सारे सिम्टम्स तो बहुत सारे बीमारियों के सेम ही होते हैं।
[35:07] इसीलिए क्या होता है कि कैंसर अगर किसी को होता भी है तो जनरली वो इनिशियल स्टेज में पहचान में नहीं आता है।
[35:10] ठीक है?
[35:12] और लोग ध्यान देते नहीं है और जब पता चलता है तो काफी लास्ट स्टेज हो गई होती है और इसीलिए यहां पे कैंसर का ट्रीटमेंट काफी टफ हो जाता है।
[35:14] ठीक है?
[35:15] बाकी अगर हम लोग यहां पे ट्रीटमेंट की बात करें तो देखिए ट्रीटमेंट वही है कि यहां पे सर्जरी के थ्रू भी हमारा यहां पे कैंसरस सेल्स को रिमूव किया जा सकता है।
[35:18] लेकिन अब इसमें कभी-कभी यही होता है कि
[35:38] लेकिन अब इसमें कभी-कभी यही होता है कि ज्यादातर यहां पे दोबारा ग्रो कर जाती
[35:39] ज्यादातर यहां पे दोबारा ग्रो कर जाती हैं।
[35:42] ठीक है? सेल्स और बाकी हम लोग यहां पे कीमोथेरेपी तो इसी को हम लोग यहां पे
[35:44] पे कीमोथेरेपी तो इसी को हम लोग यहां पे आज की वीडियो में एक अच्छे से देखेंगे।
[35:45] आज की वीडियो में एक अच्छे से देखेंगे।
[35:47] ठीक है? कि कीमोथेरेपी मतलब कि हमारी कुछ केमिकल एजेंट्स का यूज़ करके इसको ट्रीट
[35:50] केमिकल एजेंट्स का यूज़ करके इसको ट्रीट किया जाता है।
[35:51] ठीक है? और उसके बाद हमारी यहां पे रेडिएशन थेरेपी।
[35:54] तो रेडिएशन के मतलब रेडिएशन के थ्रू भी हमारे यहां पे
[35:55] मतलब रेडिएशन के थ्रू भी हमारे यहां पे कैंसर सेल्स को किल किया जाता है।
[35:58] ठीक है? तो ये हमारे इसके कुछ ट्रीटमेंट के एप्रोच
[36:00] तो ये हमारे इसके कुछ ट्रीटमेंट के एप्रोच होते हैं।
[36:02] बाकी अब हम लोग यहां पे फाइनली बात करते हैं अपने एंटीनियोप्लास्टिक
[36:04] एजेंट्स यानी कि जो हमारी कीमोथेरेपी के
[36:06] अंदर जो जो ड्रग्स होती हैं उनके बारे
[36:07] में। तो बात करें हम लोग यहां पे अपने
[36:09] एंटीनियोप्लास्टिक एजेंट्स के बारे में।
[36:11] तो देखिए यहां पे इसके अंदर हमारे बहुत से
[36:13] डिफरेंट-डिफरेंट टाइप्स होते हैं।
[36:14] यहां पे बात करें तो इसके अंदर डिफरेंट-डिफरेंट
[36:16] क्लास होती हैं। जैसे हमारा अल्काइलेटिंग
[36:18] एजेंट्स हो गया, एंटीमेटाबोलाइट्स हो गया,
[36:19] एंटीबायोटिक्स हो गए, प्लांट प्रोडक्ट्स
[36:21] हो गए और मिसलेनियस कंपाउंड्स हो गए।
[36:23] ठीक है? तो अब देखिए इसके अंदर भी जैसे हमारे
[36:25] अल्काइलेटिंग एजेंट्स के अंदर भी
[36:27] डिफरेंट-डिफरेंट क्लास आ जाती हैं।
[36:28] फिर हमारे एंटीमबोलाइट्स के अंदर भी कुछ सब
[36:30] क्लासेस आ जाती हैं।
[36:32] ठीक है? बाकी एंटीबायोटिक्स के अंदर भी हम लोग बना सकते
[36:34] थे। बट जनरली हम लोगों ने सिंपल ही कर
[36:35] दिया है।
[36:37] ठीक है? फिर प्लान प्रोडक्ट्स इसके अंदर भी क्लासेस होती हैं। बट थोड़ा
[36:39] इसके अंदर भी क्लासेस होती हैं।
[36:40] बट थोड़ा सा सिंपल ही हम लोगों ने रखा है।
[36:40] ज्यादा कॉम्प्लिकेट नहीं किया है।
[36:42] ये थोड़ा ज्यादा जरूरी था।
[36:43] इसके लिए हम लोगों ने इसको मेंशन कर दिया है।
[36:45] और बाकी अगर हम लोग यहां पे थोड़ा सा बेसिक ओवरव्यू देखें
[36:47] तो अल्काइलेटिंग एजेंट्स मतलब इसमें हमारा कुछ अल्काइल ग्रुप का सिस्टम होता है जो
[36:49] कि अल्काइल ग्रुप ऐड हो जाता है।
[36:51] ठीक है?
[36:52] डीएनए में और एंटी मेटाबोलाइट्स तो ये हमारे कुछ जो है मेटाबोलाइट्स जैसे
[36:54] प्यूरिन पिरमिडीन और फॉलिक एसिड हो गया।
[36:56] तो उनको यहां पे इनबिट करते हैं।
[36:58] उसके बाद एंटीबायोटिक्स तो इनका भी हमारा यूज़ होता है।
[37:01] प्लांट प्रोडक्ट्स ये हमारे नेचुरली डिराइव्ड प्रोडक्ट्स होते हैं और
[37:03] मिसलेनियस मतलब ये हमारी ऐसी ड्रग्स होती हैं जो कि इन सारे में फिट नहीं होती हैं।
[37:04] बाकी इनका भी एंटी नियोप्लास्टिक एजेंट्स मतलब की तरह यूज़ किए जाते हैं।
[37:06] तो अगर हम लोग यहां पे देखें तो देखिए अल्काइलेटिंग एजेंट्स के अंदर भी हमारी कुछ क्लास हो जाती हैं।
[37:08] जैसे हमारे नाइट्रोजन मस्टर्ड्स तो इसके अंदर भी हमारी इसके अंदर हमारी चार ड्रग्स आ जाती हैं।
[37:10] उसके बाद इथाइलन अमीन तो इसके अंदर एक ड्रग और अल्काइल सल्फोनेट।
[37:12] तो इसके अंदर भी हमारी एक ड्रग आ जाती है।
[37:14] ठीक है?
[37:16] अभी देखिए इनके बारे में सबके बारे में काफी डिटेल में पढ़ेंगे।
[37:17] बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो देखिए आपके सिलेबस में इन सभी में से तीन का आप लोग को जो है तीन हमारी स्टार ड्रग्स होती हैं।
[37:19] जैसे हमारा मैक्लोरथामिन, मेथोट्रक्सेड और मरकेप्टोप्यूरिन।
[37:21] इन तीनों का आप लोग को
[37:41] मरकेप्टोप्यूरिन।
[37:41] इन तीनों का आप लोग को सिंथेसिस भी पढ़ना है।
[37:43] ठीक है?
[37:43] तो इन तीनों को हम लोग का देखिए इन तीनों पे हम लोग ज्यादा फोकस करेंगे।
[37:47] बाकी सभी ड्रग्स को हम लोग यहां पे जनरली एक जनरल ओवरव्यू देख लेंगे।
[37:51] ठीक है?
[37:51] क्योंकि आपको पता है इसके बहुत सारी ड्रग्स हैं।
[37:53] सबको इतना अच्छे से देख पाना बहुत मुश्किल है।
[37:54] बट हम लोगों ने काफी अच्छी नोट्स प्रिपेयर करी है।
[37:56] तो आप लोग उसको देख लेना अच्छे से।
[37:58] तो ये सारा देखिए हमारे कुछ क्लासिफिकेशन होते हैं।
[37:59] इसको आप लोग नाम वगैरह पढ़ लेना।
[38:01] बाकी इन सभी को एक-एक करके हम लोग देखने ही वाले हैं।
[38:02] तो वहां पे अच्छे से देख लेंगे।
[38:04] तो सबसे पहले हम लोग अपने अल्काइलेटिंग एजेंट्स के बारे में बात करते हैं।
[38:06] तो बात करें हम लोग यहां पे अपने अल्काइलेटिंग एजेंट्स के बारे में।
[38:07] तो देखिए यहां पे अल्काइलेटिंग एजेंट्स हमारे क्या होते हैं?
[38:09] दीज़ आर द टाइप ऑफ एंटीनियोप्लास्टिक ड्रग्स यूज्ड इन कैंसर ट्रीटमेंट।
[38:11] तो वो तो सिंपल ही है।
[38:12] ठीक है?
[38:14] बाकी ये हमारी जो है ओल्डेस्ट एंड मोस्ट यूज़फुल यानी कि ये हमारी सबसे पुरानी और आज के दिन में भी काफी रेलेवेंट एंड यूज़फुल ड्रग होती हैं।
[38:16] ठीक है?
[38:17] हमारे कैंसर के ट्रीटमेंट में।
[38:20] बाकी अगर हम लोग यहां पे देखें तो दे वर्क बाय डायरेक्टली डैमेजिंग द डीएनए विद इन कैंसर सेल्स।
[38:22] तो देखिए आप सभी को पता है कि जो हमारी कोई भी सेल होती है तो उसके अंदर सबसे इंपॉर्टेंट कंपोनेंट हमारा क्या होता है भाई?
[38:24] हमारा डीएनए होता है।
[38:26] तो ये जो हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं ये हमारी जो कैंसर सेल्स होती हैं।
[38:28] ठीक है?
[38:29] जो कि
[38:42] कैंसर सेल्स होती हैं।
[38:44] ठीक है?
[38:44] जो कि हमारा जिनके अंदर अनकंट्रोल्ड सेल डिवीज़न स्टार्ट हो गया होता है।
[38:46] ये डायरेक्टली उसके डीएनए को डैमेज कर देती हैं।
[38:48] जिसकी वजह से क्या होता है कि अल्टीमेटली यहां पे उनकी डेथ हो जाती है।
[38:49] ठीक है?
[38:51] यानी कि वो हमारी सेल खत्म हो जाती है।
[38:54] बाकी अगर हम लोग यहां पे देखेंगे कि कैसे हमारा एग्जैक्टली कैसे डैमेज होता है वो अभी हम लोग देखेंगे।
[38:57] ठीक है?
[38:59] बाकी इफेक्टिवनेस ऑफ़ अल्कालेटिंग एजेंट्स एज़ एंटी कैंसर ड्रग्स वाज़ कंफर्म।
[39:01] मतलब कि ये हमारे जो अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं, ये हमारे एंटी कैंसर ड्रग्स की तरह यूज़ हो सकते हैं।
[39:04] इसको यहां पे कंफर्म यहां पे 1940 के मिडिल में क्लीनिकल ट्रायल्स में किया गया था।
[39:08] ठीक है?
[39:09] बाकी दे आर ऑफेन यूज़्ड इन द ट्रीटमेंट ऑफ़ वेरियस टाइप ऑफ़ कैंसर।
[39:14] बिकॉज़ दे कैन टारगेट रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स।
[39:16] मतलब यहां पे ये जो अल्कालेटिंग एजेंट्स हैं ना ये क्या करते हैं कि ये मेनली हमारी कैंसर सेल्स को ही ज्यादा टारगेट करते हैं।
[39:19] इसीलिए इनका यूज़ यहां पे काफी अच्छे से किया जाता है।
[39:23] देखिए यहां पे अगर हम लोग थोड़ा सा देखना चाहें ना कि एक्चुअल में ये जो हमारी कीमोथेरेपी है वैसे देखा जाए ना तो ये काफी इफेक्टिव होती है।
[39:28] लेकिन फिर भी यहां पे क्यों ये थोड़ा सा कम यूज़फुल हो जाती है फिर भी।
[39:34] क्योंकि होता क्या है?
[39:36] देखिए ये जो हमारी ड्रग्स होती हैं।
[39:38] ठीक है?
[39:39] जिस जितनी भी हमारी कीमोथेरेपी के अंदर ड्रग्स होती हैं।
[39:41] ये हमारी कैंसर सेल्स को तो टारगेट
[39:43] हैं।
[39:43] ये हमारी कैंसर सेल्स को तो टारगेट करती हैं।
[39:45] लेकिन यहां पे होता क्या है कि करती हैं।
[39:45] लेकिन यहां पे होता क्या है कि कैंसर सेल्स के साथ-साथ ये हमारी जो है बॉडी की अच्छी सेल्स को भी टारगेट करना स्टार्ट कर देती हैं।
[39:51] तो वही चीज है कि यहां पे हमारी आज भी जो है ऐसी दवा बनना मुश्किल हो जा रही है।
[39:53] ठीक है?
[39:53] जो हमारी सिर्फ इसी सेल्स को टारगेट करे और हमारी जो अच्छी सेल्स हैं उनको ना टारगेट करे।
[39:58] तो मेन जो साइड इफेक्ट होता है हमारे जितने भी एंटीनियोप्लास्टिक एजेंट्स हैं उनका वो यही होता है कि हमारी कैंसर सेल्स को तो खत्म कर देते हैं लेकिन उसके साथ हमारी अच्छी सेल्स को भी डैमेज करना स्टार्ट कर देते हैं।
[40:09] तो वो एक हमारा मेजर साइड इफेक्ट हो जाता है।
[40:09] इसीलिए यहां पे कैंसर की ट्रीटमेंट में क्या होता है कि देखिए जिनका यहां पे इम्यूनिटी इम्यून सिस्टम वगैरह काफी अच्छा होता है वही थोड़ा बर्दाश्त कर पाते हैं।
[40:18] वरना कभी-कभी ज्यादातर केस में तो ये होता है कि कीमोथरेपी की वजह से ही कई लोगों की डेथ हो जाती है।
[40:22] ठीक है?
[40:22] क्योंकि वो इतनी ये इतनी हाई मतलब पोटेंसी की दवाएं होती हैं कि हर इंसान इनको बर्दाश्त नहीं कर पाता है।
[40:31] पहली बात मतलब इसमें काफी पेन होता है।
[40:31] ठीक है?
[40:31] छोड़िए खैर वो सब बातें हैं।
[40:31] ठीक है?
[40:34] बाकी आप लोग समझ रहे हैं कि काफी ज्यादा इनके यहां पे साइड इफेक्ट वगैरह भी देखने को मिलते हैं।
[40:39] और बाकी अगर हम लोग यहां पे क्लासिफिकेशन की बात करें तो देखिए क्लासिफिकेशन जैसा हम लोगों ने देखा ही है कि इसके अंदर हमारे कि जनरल क्लासिफिकेशन
[40:44] कि इसके अंदर हमारे कि जनरल क्लासिफिकेशन हमारा इस तरीके से होता है अल्कलाइटिंग हमारा इस तरीके से होता है अल्कलाइटिंग एजेंट्स का।
[40:48] तो ये आप लोग देख लेना। और एजेंट्स का।
[40:50] तो ये आप लोग देख लेना। और बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें मेन हमारे मैकेनिज्म ऑफ एक्शन की।
[40:52] तो देखिए आप लोग ध्यान से देखना इस मैकेनिज्म ऑफ एक्शन को।
[40:54] इसको हम लोग यहां पे देख लेंगे।
[40:56] बाकी आप लोग इतना समझो कि लगभग लगभग हमारी जितनी भी दवाएं हम लोग देखेंगे वो जो छह ड्रग्स हम लोगों ने देखी हैं जो सिलेबस में है।
[41:04] उन सभी का मैकेनिज्म ऑफ एक्शन हमारा इसी तरीके से रहने वाला है।
[41:06] ठीक है?
[41:08] अब देखिए सबसे इंपॉर्टेंट चीज ये है कि इस मैकेनिज्म ऑफ एक्शन को समझने के लिए आप लोग को सबसे पहले हमारे डीएनए के बारे में नॉलेज होनी चाहिए।
[41:13] यानी डीएनए का स्ट्रक्चर वगैरह आप लोग को पता होना चाहिए।
[41:16] तो देखिए सबसे पहले हम लोग यहां पे अपने डीएनए के बारे में ही थोड़ा अच्छे से देखेंगे।
[41:19] अगर आप लोग को डीएनए पता है तो आप लोग स्किप कर देना।
[41:23] बाकी अगर थोड़ा बहुत पता है नहीं तो रिकॉल हो जाएगा।
[41:25] बाकी हम लोग शॉर्ट में सबसे पहले देखते हैं डीएनए आखिर किस तरीके से हमें देखने को मिलता है हमारी सेल्स में।
[41:30] ठीक है?
[41:31] तो देखिए अगर हम लोग यहां पे बात करें तो देखिए डीएनए हमारा क्या होता है?
[41:33] डीएनए का फुल फॉर्म होता है डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड।
[41:36] यानी कि अगर हम लोग यहां पे बात करें तो ये हमारे एक टाइप के न्यूक्लिक एसिड होते हैं।
[41:37] अब न्यूक्लिक एसिड क्या होते हैं?
[41:39] तो देखिए न्यूक्लिक एसिड हमारे एक टाइप के बायो मॉलिक्यूल्स होते हैं।
[41:43] ठीक है?
[41:44] और यहां पे देखो ये क्या होते हैं?
[41:46] हैं? ये हमारे मिलके बने होते हैं न्यूक्लियोटाइट से यानी कि मेड फ्रॉम न्यूक्लियोटाइट से यानी कि मेड फ्रॉम न्यूक्लोटाइट्स।
[41:49] यानी इतना सिंपली समझो कि न्यूक्लोटाइट्स।
[41:49] यानी इतना सिंपली समझो कि जब बहुत सारे मतलब कि बहुत सारे न्यूक्लोटाइट्स जब कंबाइन करते हैं तो हमारा न्यूक्लिक एसिड बनता है।
[41:55] तो डीएनए हमारा क्या है?
[41:56] डीएनए भी हमारा एक टाइप का न्यूक्लिक एसिड है।
[41:58] यानी ये भी हमारे बहुत सारे न्यूक्लोटाइट से ही मिलके बना होगा।
[42:00] सिंपल सी बात है।
[42:00] है ना?
[42:02] अब जैसे डीएनए और आरएनए हमारा दूसरा न्यूक्लिक एसिड होता है।
[42:05] इसका नाम होता है राइबोन न्यूक्लिक एसिड और इसका नाम होता है डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड डीएनए का।
[42:09] ठीक है?
[42:10] तो देखिए इनमें हम लोग यहां पे देखेंगे कि इनके अंदर मेजर डिफरेंस क्या होते हैं।
[42:14] बाकी आप लोग सिंपली समझो कि डीएनए हमारा न्यूक्लियोटाइट से मिलके बना होता है।
[42:17] तो अगर हमें डीएनए को समझना है तो सबसे पहले हमें इस न्यूक्लोटाइट को समझना पड़ेगा।
[42:21] ठीक है?
[42:21] इसको हम लोग देख लेंगे तो इसका मतलब इसी के साथ बहुत सारे जब कंबाइन हो जाएंगे तो डीएनए बन जाएगा।
[42:27] तो देखिए अगर न्यूक्लियोटाइट्स की बात करें तो देखिए एक चीज आप लोग समझना कि डीएनए भी हमारा न्यूक्लोटाइट से मिलके बना है।
[42:31] आरएनए भी हमारा न्यूक्लोटाइट से मिलके बना है।
[42:33] इन दोनों के में मेजर डिफरेंस कहां पे आता है?
[42:36] इन दोनों में मेजर डिफरेंस हमारा इसके शुगर और नाइट्रोजन बेस में आता है।
[42:38] तो ये हम लोग अभी देखेंगे।
[42:40] बाकी अगर न्यूक्लोटाइट्स की बात करें तो ये हमारे तीन चीजों से मिलके बने होते हैं।
[42:43] इनके अंदर हमारी थ्री यूनिट्स होती हैं।
[42:45] पहला होता है पेंटोज़ शुगर, दूसरा होता है
[42:46] होता है पेंटोज़ शुगर, दूसरा होता है फास्फोरिक एसिड और थर्ड होता है हमारा फास्फोरिक एसिड और थर्ड होता है हमारा नाइट्रोजेनस बेस।
[42:51] तो देखिए पेंटोज़ शुगर की नाइट्रोजेनस बेस।
[42:52] तो देखिए पेंटोज़ जैसा इसका नाम ही है।
[42:54] तो इसके अंदर हमारी पेंटोज़ यानी कि पांच कार्बन होते हैं।
[42:56] ठीक है? पांच कार्बन की शुगर होती है और ये हमारी दो टाइप की होती है।
[42:57] ध्यान से सुनिएगा।
[42:59] पेंटोस शुगर हमारी न्यूक्लोटाइट का एक कंपोनेंट होता है और ये हमारी दो टाइप की होती है।
[43:03] पहला होता है राइबोज शुगर दूसरा होता है डीऑक्सीराइबोज शुगर।
[43:07] और देखिए ये जो हमारा यहीं से आप लोग समझ जाओगे कि जो हमारा आरएनए होता है राइबो न्यूक्लिक एसिड इसके अंदर हमें देखने को मिलती है हमारी राइबोज शुगर।
[43:15] जबकि जो हमारा डीएनए होता है इसके अंदर हमें देखने को मिलती है हमारी डीऑक्सीराइबोज़ शुगर।
[43:19] और देखिए ये हमारा होता है डीऑक्सीराइबोज़ शुगर का स्ट्रक्चर।
[43:21] ठीक है? तो हमें यही देखना है।
[43:23] बाकी देखिए अगर हम लोग यहां पे बात करें ना तो राइबोज शुगर बिल्कुल ऐसी ही होती है।
[43:27] बस उसमें यहां पे इस H के बाद एक O आ जाता है ऑक्सीजन।
[43:28] ठीक है? और यहां पे डीऑक्सीराइबोज़ में ऑक्सीजन डीऑक्सी मतलब चला जाता है।
[43:33] ठीक है? तो बस यही एक सिंपल सा यहां पे डिफरेंस होता है।
[43:35] तो देखिए ये हो गया हमारा डीऑक्सीराइबोज़ का स्ट्रक्चर।
[43:37] ठीक है? तो इसे आप लोग समझ गए।
[43:38] और देखिए दूसरा एक हो एक हो गया पेंटोज़ शुगर।
[43:40] तो पेंटोज़ शुगर हम लोगों ने देखी हमारी डीऑक्सीराइबोज़।
[43:43] ठीक है? तो डीएनए में हमारी यही वाली होगी।
[43:44] और फास्फोरिक
[43:48] में हमारी यही वाली होगी।
[43:49] और फास्फोरिक एसिड की हम लोग बात करें तो देखिए एसिड की हम लोग बात करें तो देखिए फॉस्फोरिक एसिड यानी फॉस्फेट ग्रुप होता
[43:51] फॉस्फोरिक एसिड यानी फॉस्फेट ग्रुप होता है सिंपल।
[43:53] इसमें कुछ खास नहीं है।
[43:53] और जो थर्ड होता है नाइट्रोजनस बेस।
[43:55] तो इसको भी आप लोग थोड़ा ध्यान से देखना।
[43:57] देखिए जो नाइट्रोजनस बेस है ना अब ये भी हमारे दो टाइप के होते हैं।
[43:59] पहला होता है प्यूरिन।
[44:00] दूसरा होता है पिरिमडीनंस।
[44:03] अब इसमें भी हम लोग देखें तो प्यूरिन के अंदर भी हमारे दो टाइप होते हैं एडनीन और ग्वानिन।
[44:05] और पिरिमडीस के अंदर भी हमारे तीन टाइप होते हैं।
[44:07] यूरसिल, थाइमिन और साइटोसिन।
[44:08] अब अगर हम लोग यहां पे इसका स्ट्रक्चर देखें तो
[44:11] देखिए प्यूरिंस मतलब इसके अंदर हमारा एडनीन और ग्वानिन होगा।
[44:12] तो देखिए ये हो गया एडनीन का स्ट्रक्चर।
[44:14] ये हो गया ग्वानिन का स्ट्रक्चर।
[44:15] ठीक है?
[44:17] और उसके बाद पिरिमडी की बात करें तो ये हो गया हमारा थाइमिन, साइटोसिन और यूरासिस।
[44:19] ये तीनों हमारे इसके अंदर आ जाते हैं।
[44:20] तो इन तीनों का स्ट्रक्चर हमारा इस तरीके से हो गया।
[44:23] तो देखिए यहां पे हम लोगों ने देखा कि हमारा पेंटोस शुगर हमारी क्या-क्या होती है?
[44:24] राइबोस और डीऑक्सीराइबोज़।
[44:26] डीएनए में कौन सी होती है?
[44:28] डीऑक्सीराइबोज़।
[44:30] ठीक है?
[44:30] फास्फोरिक एसिड हम लोगों ने देखा।
[44:33] ये हमारा सिंपल सा एक फास्फेट ग्रुप होता है।
[44:34] और थर्ड नाइट्रोजनस बेस भी हम लोगों ने देखा कि हमारे दो टाइप के होते हैं।
[44:36] उनके अंदर भी अलग-अलग सब टाइप होते हैं।
[44:38] ठीक है?
[44:39] तो टोटल हमारे अगर हम लोग बात करें तो पांच टाइप के नाइट्रोजनस बेस होते हैं।
[44:41] एडनीन, ग्वानिन, यूरास, थाइमिन, साइटोसिन।
[44:49] एडनीन, ग्वानिन, यूरास, थाइमिन, साइटोसिन।
[44:50] अब देखिए अब हम लोग देखते हैं कि ये तीनों कंबाइन करके हमारा डीएनए कैसे बनाते हैं।
[44:53] कंबाइन करके हमारा डीएनए कैसे बनाते हैं।
[44:55] तो देखिए अगर हम लोग यहां पे देखें तो हम लोगों ने स्टार्टिंग में ही क्या देखा कि
[44:56] जो हमारा डीएनए है वो हमारा किससे मिल
[44:58] किससे मिलके बना होगा? न्यूक्लोटाइट से।
[45:00] किससे मिलके बना होगा? न्यूक्लोटाइट से।
[45:01] बहुत सारे न्यूक्लोटाइट से। तो न्यूक्लोटाइट का स्ट्रक्चर अगर हम लोग
[45:03] न्यूक्लोटाइट का स्ट्रक्चर अगर हम लोग देखें तो इसके अंदर हम लोगों ने देखा कि
[45:04] देखें तो इसके अंदर हम लोगों ने देखा कि तीन चीजें होती हैं।
[45:06] तीन चीजें होती हैं। अब इन तीनों को हम लोगों ने अलग-अलग तो देखा लेकिन ये मतलब
[45:08] लोगों ने अलग-अलग तो देखा लेकिन ये मतलब एक न्यूक्लोटाइट में किस तरीके से देखने
[45:10] एक न्यूक्लोटाइट में किस तरीके से देखने को मिलते हैं। तो यहां पे देखिए इस तरीके
[45:12] को मिलते हैं। तो यहां पे देखिए इस तरीके से होता है न्यूक्लोटाइट का स्ट्रक्चर।
[45:13] से होता है न्यूक्लोटाइट का स्ट्रक्चर। यानी एक हमारी पेंटोज़ शुगर हो गई। अब यहां
[45:15] यानी एक हमारी पेंटोज़ शुगर हो गई। अब यहां पे हमारा डीऑक्सीराइबोज़ राइबोज़ दोनों में
[45:17] पे हमारा डीऑक्सीराइबोज़ राइबोज़ दोनों में से कोई एक होगी। अगर डीऑक्सीराइबोज़ होगी
[45:20] से कोई एक होगी। अगर डीऑक्सीराइबोज़ होगी तो हमारा क्या हो जाएगा? डीएनए। है ना? और
[45:22] तो हमारा क्या हो जाएगा? डीएनए। है ना? और एक हमारा फास्फेट ग्रुप होगा और एक हमारा
[45:24] एक हमारा फास्फेट ग्रुप होगा और एक हमारा नाइट्रोजनस बेस होगा। अब देखिए नाइट्रोजनस
[45:26] नाइट्रोजनस बेस होगा। अब देखिए नाइट्रोजनस बेस हम लोगों ने देखा पांच टाइप के हो गए
[45:28] बेस हम लोगों ने देखा पांच टाइप के हो गए एडनीन ग्वानिन। तो इसमें से मतलब देखिए
[45:30] एडनीन ग्वानिन। तो इसमें से मतलब देखिए मतलब यहां पे एक न्यूक्लोटाइट में कोई एक
[45:32] मतलब यहां पे एक न्यूक्लोटाइट में कोई एक ही होगा। ठीक है? अब अलग-अलग में अलग-अलग
[45:34] ही होगा। ठीक है? अब अलग-अलग में अलग-अलग होंगे। तो अगर हम लोग यहां पे इसको डिटेल
[45:36] होंगे। तो अगर हम लोग यहां पे इसको डिटेल में देखें तो देखिए ये हो गई पेंटोस शुगर।
[45:38] में देखें तो देखिए ये हो गई पेंटोस शुगर। ठीक है? ये हो गया हमारा नाइट्रोजनस बेस।
[45:40] ठीक है? ये हो गया हमारा नाइट्रोजनस बेस। अब जैसे यहां पे ये हमारा एडनीन है। ठीक
[45:42] अब जैसे यहां पे ये हमारा एडनीन है। ठीक है? अब इसकी जगह हमारा ग्वानिन भी हो सकता
[45:44] है? अब इसकी जगह हमारा ग्वानिन भी हो सकता है। साइटोसिन भी हो सकता है। वो अलग बात
[45:45] है। साइटोसिन भी हो सकता है। वो अलग बात हो गई। ठीक है? और ये हमारा फॉस्फेट ग्रुप
[45:47] हो गई। ठीक है? और ये हमारा फॉस्फेट ग्रुप हो गया। अब देखिए अगर हम लोग यहां पे मेन
[45:50] हो गया।
[45:50] अब देखिए अगर हम लोग यहां पे मेन बात करें डीएनए की।
[45:52] तो डीएनए में देखिए एक बात करें डीएनए की।
[45:52] तो डीएनए में देखिए एक तो हम लोगों ने देखा कि इसके अंदर तो हम लोगों ने देखा कि इसके अंदर डीऑक्सीराइबोज़ शुगर हो गई।
[45:55] और दूसरी डीऑक्सीराइबोज़ शुगर हो गई।
[45:55] और दूसरी खासियत क्या होती है डीएनए की?
[45:58] कि डीएनए के अंदर हमें यहां पे यूरासिल बेस नहीं देखने को मिलता है।
[46:01] मतलब डीएनए के अंदर या तो हमारा एडनीन होगा या तो ग्वानिन होगा या तो थाइमिन होगा या तो साइटोसिन होगा।
[46:02] मतलब डीएनए के अंदर या तो हमारा एडनीन होगा या तो ग्वानिन होगा।
[46:04] या तो थाइमिन होगा या तो साइटोसिन होगा।
[46:06] यानी अगर हम लोग बात करें तो जो न्यूक्लोटाइट ठीक है?
[46:07] यानी अगर हम लोग बात करें तो जो न्यूक्लोटाइट्स ठीक है?
[46:09] मिलके डीएनए बनाएंगे उनके अंदर जो नाइट्रोजनस बेस है वो या तो हमारा एडनीन होगा या तो ग्वानिन या तो साइमिन या तो साइटोसिन।
[46:12] वो या तो हमारा एडनीन होगा या तो ग्वानिन।
[46:14] या तो साइमिन या तो साइटोसिन।
[46:16] ठीक है?
[46:16] तो अगर हम लोग यहां पे डीएनए के एक जनरल स्ट्रक्चर की बात करें तो ये देखिए ये हमें जो है एक डबल हेलिकल स्ट्रक्चर में इस तरीके से देखने को मिलता है।
[46:18] अगर हम लोग यहां पे डीएनए के एक जनरल स्ट्रक्चर की बात करें तो ये देखिए ये।
[46:19] स्ट्रक्चर की बात करें तो ये देखिए ये हमें जो है एक डबल हेलिकल स्ट्रक्चर में इस तरीके से देखने को मिलता है।
[46:21] इस तरीके से देखने को मिलता है।
[46:21] इस तरीके से आप लोगों ने देखा भी होगा।
[46:23] लेकिन अगर हम लोग स्ट्रक्चरल फॉर्म में देखें यानी ये जो हमारा न्यूक्लोटाइट किस तरीके से मिलके बनाते हैं तो देखिए ये हमारा जो है डीएनए जो है इस तरीके से देखने को मिलता है।
[46:25] लेकिन अगर हम लोग स्ट्रक्चरल फॉर्म में देखें यानी।
[46:26] ये जो हमारा न्यूक्लोटाइट किस तरीके से।
[46:28] मिलके बनाते हैं तो देखिए ये हमारा जो है डीएनए जो है इस तरीके से देखने को मिलता है।
[46:30] डीएनए जो है इस तरीके से देखने को मिलता है।
[46:32] तो यहां पे आप लोग देखिए यहां पे क्या है?
[46:33] ये हमारा जैसे नाइट्रोजनस बेस हो गया।
[46:35] ये हमारा फास्फेट ग्रुप हो गया।
[46:38] ये हमारा सॉरी ये हमारा पेंटोस शुगर हो गई।
[46:39] ये हमारा नाइट्रोजनस बेस हो गया।
[46:41] ये हमारा फास्फेट ग्रुप हो गया।
[46:43] तो देखिए इस तरीके से यहां पे देखिए बहुत सारे न्यूक्लोटाइट कंबाइन है।
[46:45] कंबाइन है।
[46:45] तभी तो डीएनए बना है।
[46:46] देखिए ये हमारा डीएनए का एक केमिकल स्ट्रक्चर है।
[46:49] तो देखिए यहां पे अगर आप लोग देखें तो आप
[46:51] तो देखिए यहां पे अगर आप लोग देखें तो आप लोगों को बेस में क्या-क्या देखने को मिल रहा है?
[46:52] एडनीन, थाइमिन, ग्वानिन, साइटोसिएन।
[46:54] देखिए कहीं पे भी आप लोग को यूरासिल देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि वही चीज़ है यूरासिल हमारा डीएनए में नहीं होता है।
[46:58] और सबसे इंपॉर्टेंट चीज जो एक और चीज आ जाती है वो जो हमें समझनी है कि जो हमारा एडनीन बेस है वो हमारा सिर्फ और सिर्फ हमारे थाइमिन के साथ ही यहां पे कांटेक्ट में होगा।
[47:04] मतलब एडनीन हमारा थाइमिन के साथ होगा और जो ग्वानिन है वो हमारा साइटोसिन के साथ होगा।
[47:09] मतलब कभी भी यहां पे एडनीन और ग्वानिन के बीच में पेयरिंग नहीं होगी।
[47:15] कभी भी यहां पे ग्वानिन या फिर एडनीन, ग्वानिन, थाइमिन, ग्वानिन इस तरीके से नहीं होगा।
[47:19] हमेशा ए हमारा टी यानी एडनीन हमारा थाइमिन के साथ जुड़ा होगा और ग्वानिन हमारा साइटोसिन के साथ कंबाइन फॉर्म में होगा डीएनए के स्ट्रक्चर में।
[47:30] और यही चीज़ हमें समझनी है क्योंकि यहीं पे हमारा अल्काइलेटिंग एजेंट्स काम करेगा।
[47:34] ठीक है?
[47:36] ये इनकी मिसपेयरिंग करवा देगा।
[47:37] तो हम लोगों ने क्या देखा कि एडनीन हमेशा ग्वानिन के साथ और अह सॉरी एडनीन हमेशा थाईमिन के साथ और ग्वानिन हमेशा साइटोसिन के साथ देखने को मिलता है हमारे डीएनए में।
[47:45] ठीक है?
[47:46] और बाकी देखिए ये हमारा डीएनए का स्ट्रक्चर हो गया।
[47:48] जैसे ये वाला पार्ट हमारा इतना हो गया और ये इधर वाला पार्ट हमारा इतना हो
[47:52] गया और ये इधर वाला पार्ट हमारा इतना हो गया।
[47:54] तो समझ गए होंगे आप लोग।
[47:54] देखिए इस तरीके से हमारे न्यूक्लोटाइट्स बहुत सारे मिलके डीएनए बना देते हैं।
[47:58] ठीक है?
[47:58] तो आई होप कि आप लोग यहां पे समझ गए होंगे डीएनए का स्ट्रक्चर।
[48:02] बाकी अब अगर हम लोग यहां पे देखें इनका मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन।
[48:04] ठीक है?
[48:04] तो अल्काइलेटिंग एजेंट्स आर अ क्लास ऑफ़ कीमोथेरेपी ड्रग्स दैट वर्क बाय एडिंग अल्काइल ग्रुप्स टू डीएनए व्हिच इंटरफेयर्स विद डीएनए रेप्लिकेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन।
[48:13] देखिए एक्चुअल में इसमें होगा क्या कि जो हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं तो बहुत सारे होते हैं वो हम लोग अभी देखेंगे।
[48:18] तो ये करेंगे क्या कि अल्काइलेटिंग एजेंट्स हमारे जो है कुछ अल्काइल ग्रुप ठीक है अब अल्काइल ग्रुप जैसे हमारा अल्काइल ग्रुप हमारा CH3 हो सकता है।
[48:25] C2H5 हो सकता है।
[48:27] ठीक है?
[48:27] जैसे मिथाइल इथाइल ये सारे हमारे अल्काइल होते हैं।
[48:31] ठीक है?
[48:31] तो ये क्या करेगा?
[48:31] ये इन अल्काइल ग्रुप्स को यहां पे लाके हमारे डीएनए के अंदर अटैच कर देगा।
[48:35] ठीक है?
[48:35] और होगा क्या?
[48:35] जिसकी वजह से कि हमारा जो डीएनए है, ठीक है?
[48:39] उसके अंदर यहां पे उसकी रेप्लिकेशन डीएनए रेप्लिकेशन मतलब वही कि डीएनए की कॉपी बनना।
[48:44] जैसे आप लोग समझिए कि जब सेल डिवाइड होता है तो एक सेल हमारी दो में कन्वर्ट होती है।
[48:48] तो एक सेल का जो डीएनए है वो भी तो हमारा दोनों सेल में जाएगा जिसके लिए क्या होगा?
[48:51] डीएनए हमारा रेप्लिकेशन है।
[48:51] रेप्लिकेशन मतलब वो अपनी
[48:53] रेप्लिकेशन है।
[48:53] रेप्लिकेशन मतलब वो अपनी कॉपी बनाएगा।
[48:55] ठीक है?
[48:55] तो अपने आप को कॉपी बनाएगा।
[48:55] ठीक है?
[48:55] तो अपने आप को डिवाइड करेगा।
[48:57] तो यहां पे इसकी रेप्लिकेशन डिवाइड करेगा।
[48:57] तो यहां पे इसकी रेप्लिकेशन और ट्रांसक्रिप्शन।
[48:59] देखिए ट्रांसक्रिप्शन का मतलब होता है डीएनए से जब आरएनए बनता है।
[49:02] ठीक है?
[49:03] तो इस प्रोसेस को हम लोग बोलते हैं ट्रांसक्रिप्शन।
[49:05] तो इसमें भी हमें यहां पे जो है इंटरफ़ेयर देखने को मिल जाएगा।
[49:07] ठीक है?
[49:09] जिसकी वजह से क्या होगा कि एट लास्ट में यहां पे सेल डेथ हो जाएंगे।
[49:11] तो देखिए अब हम लोग यहां पे हम लोगों ने देखा हम लोग इसका थोड़ा सा डिटेल्ड मैकेनिज़्म देखते हैं कि किस तरीके से होता है।
[49:12] तो देखिए सबसे पहला यहां पे आ जाता है हमारा अल्काइलेशन।
[49:18] तो देखिए अल्काइलेशन में होता क्या है कि जो हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं वो हमारे ट्रांसफर कर देते हैं एन अल्काइल ग्रुप टू द डीएनए मॉलिक्यूल टिपिकली मिथाइल और इथाइल।
[49:27] दिस यूजुअली अकर्स दैट देखिए यही चीज़ हमें समझनी है।
[49:30] सबसे मेन चीज़ यही है कि अह देखिए होता क्या है कि देखिए ये जो हमारा ग्वानिन बेस हम लोगों ने देखा था।
[49:35] ठीक है?
[49:37] देखिए अगर हम लोग यहां पे अपने इस ग्वानिन बेस को देखें।
[49:39] तो इस ग्वानिन में देखिए ये जो ये वाला नाइट्रोजन होता है।
[49:41] ठीक है?
[49:43] ये हमारा होता है सेवंथ पोजीशन पे।
[49:45] ठीक है?
[49:47] मतलब अगर आप लोग यहां पे काउंट करोगे तो ये जो नाइट्रोजन है ये हमारा सेवंथ पोजीशन पे होता है।
[49:48] तो होता क्या है?
[49:50] ये जो हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं ये हमारे इसी ग्वानिन के सेवंथ पोजीशन पे क्या करते हैं?
[49:51] हमारा
[49:55] सेवंथ पोजीशन पे क्या करते हैं?
[49:55] हमारा अल्काइल ग्रुप लाके अटैच कर देते हैं।
[49:57] अल्काइल ग्रुप लाके अटैच कर देते हैं।
[49:57] जिसकी वजह से होता क्या है कि हमारा यहां
[49:59] जिसकी वजह से होता क्या है कि हमारा यहां पे जो ग्वानिन है, ठीक है?
[50:01] इसके अंदर कुछ स्ट्रक्चरल चेंजेस हो जाते हैं।
[50:03] जिसकी वजह से यहां पे देखिए यहां पे आप लोग ध्यान से
[50:05] से यहां पे देखिए यहां पे आप लोग ध्यान से देखिएगा कि ये जो हमारे ग्वानिन है, ठीक
[50:07] है? इनको जुड़ना हमारा साइटोसिन से चाहिए
[50:09] था। लेकिन यहां पे इनके अंदर मिसपेयरिंग
[50:11] हो जाती है। यानी ये ग्वानिन जाके हमारा
[50:12] या तो थाइमिन से जाके कनेक्ट हो जाएगा।
[50:14] या तो ये ग्वानिन हमारा एडनीन से कनेक्ट हो
[50:16] जाएगा। ठीक है?
[50:16] या तो ये ग्वानिन हमारा किसी दूसरे ग्वानिन से ही कनेक्ट हो
[50:19] जाएगा। इस तरीके से इनके अंदर ना एक
[50:21] मिसपेयरिंग आ जाती है।
[50:23] क्यों? क्योंकि यहां पे ये जो ग्वानिन था इसकी सेवंथ
[50:25] पोजीशन पे यहां पे हमारे अल्काइलेटिंग
[50:26] एजेंट्स ने क्या किया?
[50:28] हमारा अल्काइल ग्रुप ट्रांसफर कर दिया।
[50:30] और इस तरीके से
[50:30] क्या होता है कि जब यहां पे इनके अंदर
[50:31] मिसपेयरिंग हो जाती है।
[50:33] देखिए आप लोग एक एक बात समझिए कि ये पेयरिंग बहुत
[50:35] इंपॉर्टेंट है।
[50:37] अगर हमारा ग्वानिन हमारा साइटोसिन के अलावा किसी से भी जाके जुड़ा
[50:39] तो डीएनए पूरा खराब हो जाएगा।
[50:39] ठीक है?
[50:41] ना उसके अंदर कोई प्रोसेस होगी ना उसके अंदर
[50:43] कोई रेप्लिकेशन होगा और पूरी की पूरी
[50:45] हमारी सेल डेड हो जाएगी।
[50:47] तो इसी तरीके से
[50:47] हमारे ये काम करते हैं।
[50:49] बाकी देखिए ये सिंपल सा मैकेनिज्म था।
[50:51] बाकी इसका थोड़ा डिटेल में हम लोग देखते हैं कि एक्चुअल
[50:52] में क्या-क्या होता है।
[50:52] जैसे दिस यूजुअली अकर्स एट N7 यानी कि जो हमारा सेवंथ
[50:56] अकर्स एट N7 यानी कि जो हमारा सेवंथ नाइट्रोजन होता है ग्वानिन बेस का वहां पे
[50:58] नाइट्रोजन होता है ग्वानिन बेस का वहां पे हमें देखने को मिलता है लीडिंग टू द
[50:59] हमें देखने को मिलता है लीडिंग टू द फॉर्मेशन ऑफ़ N7 अल्काइल ग्वानिन।
[51:02] तो होता क्या है कि जब ये हमारा अटैच हो जाता है
[51:03] क्या है कि जब ये हमारा अटैच हो जाता है तो हमारा जो नया ग्वानिन होता है वो उसको
[51:05] तो हमारा जो नया ग्वानिन होता है वो उसको हम लोग बोलते हैं N7 अल्काइल ग्वानिन।
[51:07] ठीक है?
[51:09] और बाकी अगर हम लोग यहां पे देखें फर्स्ट दीज़ अल्काइलेटिंग एजेंट्स स्पेशली
[51:11] फर्स्ट दीज़ अल्काइलेटिंग एजेंट्स स्पेशली नाइट्रोजन मस्ट डेरिवेटिव।
[51:13] तो देखिए हम लोगों ने देखा कि जो अल्काइलेटिंग एजेंट्स
[51:14] हैं वो तीन टाइप के हैं।
[51:16] ठीक है? हम लोग के सिलेबस में एक नाइट्रोजन मस्टर्ड, एक
[51:18] एथैलीन अमीन, एक अल्काइल सल्फोनेट।
[51:20] तो ये जो मतलब यहां पे देखिए ये जो हम लोग
[51:22] मैकेनिज्म ऑफ एक्शन देख रहे हैं ये
[51:23] बेसिकली हम लोग नाइट्रोजन मस्टर्ड के लिए
[51:25] ज्यादा देख रहे हैं। बाकी देखिए काम लगभग
[51:27] बाकी सबका भी वैसा ही होता है। बाकी अगर
[51:29] हम लोग इस इसी क्लास की बात करें
[51:30] नाइट्रोजन मस्टर्ड की।
[51:32] ठीक है? तो इसमें
[51:33] देखिए क्या होता है?
[51:36] कि यहां पे ये जो नाइट्रोजन मस्टर्ड होते हैं, ठीक है?
[51:39] तो अंडरगोस इंटरमॉलिक्यूलर साइक्लाइजेशन टू फॉर्म
[51:41] एजरडेनियम आयन।
[51:43] तो देखिए होता क्या है?
[51:45] जैसे इस नाइट्रोजन मस्टर्ड में हम लोग बात करें तो जैसे इसमें अंदर हमारी एक ड्रग आ
[51:47] जाती है मैक्लोर इथामिन।
[51:49] ठीक है? तो ये देखिए मैक्लोर इथामिन का स्ट्रक्चर ये हो
[51:50] गया। बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो
[51:52] देखिए इस नाइट्रोजन मस्टर्ड के अंदर जितनी
[51:54] भी ड्रग है चाहे हमारा मैक्लोरथामीन हो,
[51:55] साइक्लो फास्फोमाइड हो इन सभी का
[51:57] साइक्लो फास्फोमाइड हो इन सभी का स्ट्रक्चर लगभग हमारा बिल्कुल ऐसा ही होता
[51:59] स्ट्रक्चर लगभग हमारा बिल्कुल ऐसा ही होता है।
[52:01] बस चेंजेस यहां पे इस CH3 में आ जाते हैं।
[52:03] ठीक है? ये इतना पोर्शन हमारा सभी में सेम देखने को मिलेगा।
[52:05] जितने भी ड्रग्स हैं।
[52:07] बाकी ये जो CH3 है यहां पे चेंजेस होंगे।
[52:09] तो अगर मैक्लोर इथामिन की बात करें तो मैक्लोर इथामिन में हमें यहां पे ये CH3 देखने को मिलता है।
[52:11] ठीक है?
[52:13] बाकी ड्रग्स में कुछ-कुछ और देखने को मिलता है।
[52:14] ठीक है?
[52:15] कहीं पे हमारा रिंग स्ट्रक्चर होता है, कहीं पे और कुछ होता है।
[52:17] तो वो हम लोग अभी देखेंगे।
[52:18] बाकी देखिए ये जो मैक्थामिन है अगर हम लोग इसके बारे में देखें तो देखिए होता क्या है?
[52:20] ये हमारा जो है एक साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म कर लेता है।
[52:22] मतलब यहां पे आप लोग देखिए हुआ क्या कि ये जो हमारा CH2 और Cl था।
[52:24] ठीक है?
[52:26] तो यहां से देखिए Cl यहां से अलग हो गया।
[52:28] और ये जो CH2 था ना इसने क्या किया?
[52:30] इसने यहां पे देखिए ये ये हमारा एक CH2 था ठीक है तो ये हमारा एक CH2 और ये जो दूसरा CH2 था इसने यहां पे क्या किया इस नाइट्रोजन के साथ यहां पे बॉन्ड बना लिया देखिए यहां पे इस CH2 ने इस नाइट्रोजन के साथ बॉन्ड बना लिया
[52:32] और देखिए यहां पे क्या हुआ जब नाइट्रोजन के पास हमारे चार बॉन्ड बन गए तो यहां पे नाइट्रोजन के पास यहां पे हमारा एक एक्स्ट्रा पॉजिटिव चार्ज आ गया
[52:37] ठीक है और इसको हम लोग नाइट्रोजन का जो है क्वार्टनरी फॉर्म बोलते हैं।
[52:38] ठीक है?
[52:40] जनरली हमारा नाइट्रोजन टर्शरी फॉर्म में होता है।
[52:42] ये हमारा क्वार्टनरी स्ट्रक्चर हो जाता है।
[52:43] ठीक है? तो यहां पे देखिए
[52:58] हो जाता है।
[52:58] ठीक है?
[52:58] तो यहां पे देखिए होता क्या है?
[53:00] बाय दिस रिएक्शन टर्शरी होता क्या है?
[53:00] बाय दिस रिएक्शन टर्शरी अमीन यानी यहां पे देखिए ये जो हमारा ये
[53:02] अमीन यानी यहां पे देखिए ये जो हमारा ये जो मतलब नाइट्रोजन से जब हमारे तीन कार्बन
[53:05] जो मतलब नाइट्रोजन से जब हमारे तीन कार्बन ग्रुप अटैच होते हैं तो उसको हम लोग यहां
[53:06] ग्रुप अटैच होते हैं तो उसको हम लोग यहां पे बोलते हैं अमीन।
[53:08] ठीक है?
[53:08] तो देखिए ये हमारा टर्शरी अमीन होता है।
[53:10] ठीक है?
[53:10] तो टर्शरी अमीन क्या होता है?
[53:13] हमारा अनस्टेबल क्वार्टरनरी कंपाउंड अमोनियम कंपाउंड में
[53:15] क्वार्टरनरी कंपाउंड अमोनियम कंपाउंड में कन्वर्ट हो जाता है।
[53:17] मतलब ये टर्शरी अमीन हमारा क्वार्टनरी अमीन।
[53:18] क्योंकि यहां पे हमारे नाइट्रोजन के पास चार बॉन्ड हो गए।
[53:20] अब देखिए हमारा ये कन्वर्ट तो हो जाता है
[53:22] लेकिन ये हमारा काफी एक अनस्टेबल कंपाउंड
[53:24] होता है।
[53:26] मतलब ये ज्यादा स्टेबल नहीं होता है।
[53:26] तो ये क्या करता है?
[53:27] ये फर्दर हमारा जो है एक कार्बोनियम आयन फॉर्म कर लेता
[53:30] है।
[53:30] कार्बोनियम यानी कि कार्बन के पास जब
[53:32] पॉजिटिव चार्ज आ जाता है।
[53:33] ठीक है?
[53:33] तो वो हम लोग अभी थोड़ा देखेंगे।
[53:35] तो देखिए पहले क्या हुआ जो हमारा मैक्लोथामीन है मतलब ये
[53:37] हमारे जो अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं सबसे पहले ये कन्वर्ट हो जाते हैं एजडी
[53:39] पहले ये कन्वर्ट हो जाते हैं एजडी एजडीनियम आयन में।
[53:41] ठीक है?
[53:43] और उसके बाद देखिए क्या होता है।
[53:46] नाउ दिस अनस्टेबल क्वार्टनरी अमोनियम कंपाउंड अल्काइलेट्स
[53:48] टू ग्वानिन बेस एट सेवंथ एटम।
[53:48] अब देखिए ये जो हमारा ये जो हमारा एजिडनियम आयन बना है
[53:51] जो हमारा ये जो हमारा एजिडनियम आयन बना है ये हमारा बल ये हमारा जो है दो ग्वानिन
[53:53] ये हमारा बल ये हमारा जो है दो ग्वानिन बेस के साथ जा के अटैच हो जाता है।
[53:55] हम लोगों ने यही तो देखा कि ये जो हमारे
[53:58] लोगों ने यही तो देखा कि ये जो हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स हैं ये क्या करते हैं?
[54:00] हैं।
[54:01] ये ग्वानिन के सेवंथ पोजीशन पे अपना अल्काइल ग्रुप ट्रांसफर कर देते हैं।
[54:03] तो अल्काइल ग्रुप ट्रांसफर करने से क्या मतलब है कि मतलब ये जो है इनका अल्काइल वाला जो चेन होती है वो इसके साथ इसके साथ जाके अटैच हो जाती है।
[54:09] तो देखिए एक जो एक हमारा जो अल्काइलेटिंग एजेंट है वो हमारे दो ग्वानिन बेस के साथ जाके अटैच होता है।
[54:15] तो अगर हम लोग यहां पे देखें तो आप लोग देख रहे हो।
[54:17] ठीक है?
[54:18] कि यहां पे इस एजिरनडीनियम आयन ने ठीक है? क्या किया कि दो ग्वानिन बेस को कंबाइन किया।
[54:22] अब देखिए ये स्ट्रक्चर बिल्कुल हमारा ऐसा ही है।
[54:24] बस थोड़ा सा फॉर्म चेंज है।
[54:26] आप लोग ध्यान से समझना।
[54:28] देखो ये नाइट्रोजन यहां पे सिंपल है।
[54:30] ठीक है?
[54:32] उसके बाद देखिए ये जो CH3 है तो ये भी हमारा यहां पे है।
[54:34] बाकी देखिए यहां पे क्या हुआ कि देखिए ये CH2 ठीक है देखिए ये CH2 ये CH2 अब यहां से देखिए यहां से Cl अलग हो गया और यहां से ये बॉन्ड ब्रेक हो गया तो देखिए यहां से ये जो बॉन्ड ब्रेक हुआ तो यहां से क्या हुआ इसने यहां पे हमारे इस ग्वानिन के सेवंथ नाइट्रोजन के साथ बॉन्ड बना लिया ठीक है
[54:46] और इस CH2 ने क्या किया इस CH2 ने यहां पे इस वाले के साथ बॉन्ड बना लिया तो देखिए हमारे यहां पे इसने क्या किया दो ग्वानिन बेस के साथ यहां पे बॉन्ड बना लिया ठीक है
[54:51] जिसके साथ जिसकी वजह से क्या हुआ हमारे ग्वानिन के दो बेस यहां पे सेवंथ पोजीशन
[54:58] ग्वानिन के दो बेस यहां पे सेवंथ पोजीशन पे अल्काइलेट हो गए ठीक है तो इसी तरीके
[55:00] पे अल्काइलेट हो गए ठीक है तो इसी तरीके से देखिए देखिए इसने यहां पे क्या किया
[55:02] से देखिए देखिए इसने यहां पे क्या किया इसने यहां पे फॉर्म कर लिया। ठीक है?
[55:04] इसने यहां पे फॉर्म कर लिया। ठीक है?
[55:06] और यहां पे क्या होता है कि इसी की वजह से यहां पे क्या होता है कि इसी की वजह से इनकी वजह से क्या होता है कि हमारी जो है
[55:08] इनकी वजह से क्या होता है कि हमारी जो है क्रॉस लिंकिंग यानी कि जो हमारे डीएनए के
[55:10] क्रॉस लिंकिंग यानी कि जो हमारे डीएनए के अंदर जो भी हमारे बेस है उनके अंदर क्रॉस
[55:12] अंदर जो भी हमारे बेस है उनके अंदर क्रॉस लिंकिंग स्टार्ट हो जाती है। यानी एडनीन
[55:14] लिंकिंग स्टार्ट हो जाती है। यानी एडनीन हमारा या तो साइटोसिन से सॉरी मतलब मेन
[55:16] हमारा या तो साइटोसिन से सॉरी मतलब मेन चीज हमारी इस ग्वानिन के साथ ही हुआ है ना
[55:18] चीज हमारी इस ग्वानिन के साथ ही हुआ है ना तो ये ग्वानिन हमारा क्रॉस लिंक हो जाता
[55:19] तो ये ग्वानिन हमारा क्रॉस लिंक हो जाता है। यानी ये जो है साइटोसिन की बजाय या तो
[55:21] है। यानी ये जो है साइटोसिन की बजाय या तो हमारा थाइमिन से जाके अटैच हो गया या तो
[55:23] हमारा थाइमिन से जाके अटैच हो गया या तो हमारा एडनीन से जाके अटैच हो गया। तो इस
[55:25] हमारा एडनीन से जाके अटैच हो गया। तो इस तरीके से यहां पे हमारा डीएनए पूरी तरीके
[55:27] तरीके से यहां पे हमारा डीएनए पूरी तरीके से बेकार हो जाता है। ठीक है?
[55:29] से बेकार हो जाता है। ठीक है? तो देखिए वही चीज है कि दूसरा स्टेप हमारा यहां पे
[55:31] वही चीज है कि दूसरा स्टेप हमारा यहां पे आ जाता है क्रॉस लिंकिंग। तो क्रॉस
[55:32] लिंकिंग। तो क्रॉस लिंकिंग का मतलब वही है कि जो द अल्काइल
[55:34] लिंकिंग का मतलब वही है कि जो द अल्काइल ग्रुप्स फॉर्म कोवेलेंट बॉन्ड बिटवीन
[55:36] ग्रुप्स फॉर्म कोवेलेंट बॉन्ड बिटवीन डिफरेंट डीएनए स्ट्रैंड्स और विद इन द सेम
[55:38] डिफरेंट डीएनए स्ट्रैंड्स और विद इन द सेम स्ट्रैंड। तो देखिए यहां पे ये जो क्रॉस
[55:40] स्ट्रैंड। तो देखिए यहां पे ये जो क्रॉस लिंकिंग है ये हमारी कोवेलेंट बॉन्ड के
[55:42] लिंकिंग है ये हमारी कोवेलेंट बॉन्ड के थ्रू होती है और ये हमारी देखो ये हमारी
[55:44] थ्रू होती है और ये हमारी देखो ये हमारी किसी एक मतलब कि हो सकता है कि ये एक ही
[55:47] किसी एक मतलब कि हो सकता है कि ये एक ही डीएनए स्टैंड में हो। ठीक है?
[55:48] डीएनए स्टैंड में हो। ठीक है? तो इसको हम बोल देंगे इंट्रा डीएनए इंट्रालिंकिंग
[55:50] बोल देंगे इंट्रा डीएनए इंट्रालिंकिंग क्रॉस लिंकिंग। और अगर हमारा ये मान लीजिए
[55:52] क्रॉस लिंकिंग। और अगर हमारा ये मान लीजिए ऐसे मतलब कि इस मतलब ये दोनों स्टैंड के
[55:55] ऐसे मतलब कि इस मतलब ये दोनों स्टैंड के बीच में हो रही है तो इसको हम लोग बोल
[55:56] बीच में हो रही है तो इसको हम लोग बोल देंगे इंटर क्रॉस लिंकिंग। ठीक है?
[55:57] देंगे इंटर क्रॉस लिंकिंग। ठीक है? इंटरस्टैंड क्रॉस लिंकिंग तो वही चीज़ है
[56:00] इंटरस्टैंड क्रॉस लिंकिंग तो वही चीज़ है कि दो अलग-अलग में भी हो सकती है और अपने
[56:01] कि दो अलग-अलग में भी हो सकती है और अपने एक ही स्टैंड में भी हो सकती है।
[56:03] दिस एक ही स्टैंड में भी हो सकती है।
[56:03] दिस प्रिवेंट्स सेपरेशन ऑफ़ डीएनए स्टैंड
[56:05] प्रिवेंट्स सेपरेशन ऑफ़ डीएनए स्टैंड नेसेसरी फॉर रेप्लिकेशन एंड
[56:07] नेसेसरी फॉर रेप्लिकेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन।
[56:09] तो देखिए यहां पे सबसे इंपॉर्टेंट चीज क्या होती है कि जो डीएनए
[56:11] इंपॉर्टेंट चीज क्या होती है कि जो डीएनए रेप्लिकेशन की प्रोसेस होती है तो उसमें
[56:13] रेप्लिकेशन की प्रोसेस होती है तो उसमें क्या होता है कि ये जो दो स्टैंड होते हैं
[56:14] क्या होता है कि ये जो दो स्टैंड होते हैं ये यहां पे अलग-अलग सेपरेट हो जाते हैं।
[56:17] ये यहां पे अलग-अलग सेपरेट हो जाते हैं।
[56:17] ठीक है?
[56:19] मतलब कि यहां पे ये जो दो स्टैंड है ठीक है?
[56:19] तो ये अलग हो जाता है।
[56:19] ठीक है?
[56:20] है ठीक है?
[56:20] तो ये अलग हो जाता है।
[56:20] ठीक है?
[56:23] ये अलग हो जाता है।
[56:23] लेकिन यहां पे जैसे ही हमारा ये जो क्रॉस लिंकिंग होती है तो
[56:25] इसकी वजह से क्या होता है कि ये स्टैंड
[56:26] अलग हो ही नहीं पाते और जब ये स्टैंड अलग
[56:28] नहीं हो पाते और जब ये स्टैंड अलग नहीं हो पाएगा तो हमारी डीएनए रेप्लिकेशन
[56:30] की प्रोसेस होगी नहीं।
[56:30] और जब डीएनए रेप्लिकेशन नहीं होगा तो सेल डिवाइड नहीं
[56:31] होगी।
[56:31] और हमें यही तो चाहिए कि जो हमारी
[56:33] सेल है वो यहां पे डिवाइड होना बंद हो
[56:35] जाए।
[56:35] ठीक है?
[56:37] क्योंकि इसके अंदर अनकंट्रोल्ड सेल डिवीज़न स्टार्ट हो गया।
[56:38] और जब सेल डिवाइड नहीं होगी तो अल्टीमेटली
[56:39] क्या होगी?
[56:39] हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[56:41] ठीक है?
[56:43] तो वही चीजें बाकी अगर हम लोग यहां पे
[56:45] देखें तो यहां पे देखिए कुछ इस तरीके से
[56:46] हमारा ये काम करता है कि सबसे पहले ये
[56:48] क्या करता है कि हमारा इसने क्या किया
[56:50] डीएनए स्टैंड के साथ इंटरलिंक कर दिया और
[56:51] इंटरलिंक करने के बाद क्या करता है कि ये
[56:53] जो डीएनए के फ्रेगमेंट्स हैं ये हमारे
[56:55] यहां पे टूट कर अलग होना स्टार्ट हो जाते
[56:57] हैं।
[56:57] ठीक है?
[56:59] मतलब यहां पे ये पूरा डीएनए
[57:01] हैं।
[57:01] ठीक है?
[57:01] मतलब यहां पे ये पूरा डीएनए डैमेज हो जाता है।
[57:02] तो यहां पे देखिए वही डैमेज हो जाता है।
[57:03] तो यहां पे देखिए वही चीज़ है कि ये क्रॉस लिंकिंग की वजह से क्या होता है?
[57:05] डीएनए स्टैंड्स हमारे ब्रेक हो जाते हैं।
[57:07] ठीक है?
[57:07] अलग ही पूरे खराब हो जाते हैं।
[57:09] तो वही चीज़ है।
[57:09] बाकी थर्ड स्टेप हमारा आ जाता है डीएनए डैमेज।
[57:11] तो देखिए अब इन सब चीजों की वजह से क्या होता है?
[57:13] द अल्काइलेशन ऑफ़ डीएनए कॉजेस स्ट्रक्चरल डिस्टॉर्शनंस एंड ब्रेक्स इन डीएनए।
[57:17] मतलब इस अल्काइलेशन की वजह से क्या होता है कि हमारा स्ट्रक्चरल डिस्टॉर्शन मतलब डिस्टॉर्शन मतलब वही है कि हमारे ये अलग हो जाते हैं।
[57:22] ठीक है?
[57:22] नाउ दिस ब्रेक्स लीड्स टू एरर ड्यूरिंग डीएनए रेप्लिकेशन एंड इवेंचुअली लीड्स टू सेल डेथ।
[57:28] यानी इसकी वजह से क्या होता है कि जो हमारा डीएनए रेप्लिकेशन की प्रोसेस है यानी जो डीएनए डिवाइड होता है।
[57:33] ठीक है?
[57:33] उसमें एरर आ जाता है और इवेंचुअली हमारी सेल की डेथ हो जाती है और हमें यही तो चाहिए कि हमारी जो कैंसरस और देखिए ये चीज वही है कि हमारे ये सारी चीजें ज्यादातर कैंसर सेल्स में ही होती हैं।
[57:43] अब कुछ-कुछ हमारी अच्छी सेल्स में भी हो जाती हैं तो वो एक अलग चीज है।
[57:45] ठीक है?
[57:45] थोड़ा साइड इफेक्ट तो होता ही है।
[57:48] अल्टीमेटली द एक्यूमुलेशन ऑफ़ डीएनए डैमेज एंड इनएबिलिटी टू रिपेयर इट लीड टू सेल डेथ पार्टिकुलरली इन रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स।
[57:55] मतलब अल्टीमेटली वही होता है कि जो हमारी डीएनए डैमेज हो जाता है।
[57:57] ठीक है?
[57:57] और यहां पे उसकी जो रिपेयर होने की एबिलिटी है उसमें यहां पे
[58:02] रिपेयर होने की एबिलिटी है उसमें यहां पे कमी हो जाती है।
[58:02] इन इनेबिलिटी आ जाती है।
[58:04] कमी हो जाती है।
[58:04] इन इनेबिलिटी आ जाती है।
[58:06] जिसकी वजह से क्या होता है कि हमारी जो रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स हैं वो यहां पे डेथ हो जाती है।
[58:08] रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स हैं वो यहां पे डेथ हो जाती है।
[58:10] ठीक है?
[58:10] तो इस तरीके से देखिए हमें यहां पे हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स का मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन देखने को मिलता है।
[58:12] तरीके से देखिए हमें यहां पे हमारे अल्काइलेटिंग एजेंट्स का मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन देखने को मिलता है।
[58:14] एक्शन देखने को मिलता है।
[58:15] तो देखिए वही बात है अगर हम लोग यहां पे फिर से थोड़ा समरी में देखें तो इसमें होता क्या है कि सबसे पहले हमारा यहां पे जो इनके अंदर साइक्लाइजेशन होता है मतलब साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म होता है।
[58:17] बात है अगर हम लोग यहां पे फिर से थोड़ा समरी में देखें तो इसमें होता क्या है कि सबसे पहले हमारा यहां पे जो इनके अंदर साइक्लाइजेशन होता है मतलब साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म होता है।
[58:19] समरी में देखें तो इसमें होता क्या है कि सबसे पहले हमारा यहां पे जो इनके अंदर साइक्लाइजेशन होता है मतलब साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म होता है।
[58:21] सबसे पहले हमारा यहां पे जो इनके अंदर साइक्लाइजेशन होता है मतलब साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म होता है।
[58:22] साइक्लाइजेशन होता है मतलब साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म होता है।
[58:24] स्ट्रक्चर फॉर्म होता है।
[58:24] साइक्लिक स्ट्रक्चर फॉर्म होने की वजह से बहुत अनस्टेबल हो जाते हैं।
[58:25] स्ट्रक्चर फॉर्म होने की वजह से बहुत अनस्टेबल हो जाते हैं।
[58:27] अनस्टेबल हो जाते हैं।
[58:27] अनस्टेबल होने के बाद क्या करते हैं?
[58:28] बाद क्या करते हैं?
[58:28] ये हमारे यहां पे टारगेट करते हैं हमारे ग्वानिन बेस को।
[58:30] टारगेट करते हैं हमारे ग्वानिन बेस को।
[58:31] ठीक है?
[58:31] उसके बाद यहां पे क्या होता है?
[58:33] ये हमारा जो बॉन्ड है ये ब्रेक हो जाता है।
[58:34] कार्बोनियम आयन फॉर्म होता है।
[58:34] ठीक है?
[58:36] और ये कार्बोनियम आयन देखिए कार्बोनियम आयन का मतलब यही है कि जब ये Cl अलग होगा और यहां से ये बॉन्ड ब्रेक होगा तो इसके पास पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा।
[58:38] कार्बोनियम आयन का मतलब यही है कि जब ये Cl अलग होगा और यहां से ये बॉन्ड ब्रेक होगा तो इसके पास पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा।
[58:39] Cl अलग होगा और यहां से ये बॉन्ड ब्रेक होगा तो इसके पास पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा।
[58:41] होगा तो इसके पास पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा।
[58:41] और ये पॉजिटिव चार्ज जब हमारे ये नाइट्रोजन के साथ कंबाइन हो के हमारा बॉन्ड बन जाएगा।
[58:43] नाइट्रोजन के साथ कंबाइन हो के हमारा बॉन्ड बन जाएगा।
[58:44] बॉन्ड बन जाएगा।
[58:44] ठीक है?
[58:46] तो यहां पे ये हमारे क्या होंगे? दो हमारे ग्वानिन के साथ बॉन्ड बना लेंगे और यहां पे इनका अल्काइलेशन हो जाएगा।
[58:48] हमारे क्या होंगे? दो हमारे ग्वानिन के साथ बॉन्ड बना लेंगे और यहां पे इनका अल्काइलेशन हो जाएगा।
[58:50] साथ बॉन्ड बना लेंगे और यहां पे इनका अल्काइलेशन हो जाएगा।
[58:50] जिसकी वजह से इनकी क्रॉस लिंकिंग हो जाएगी।
[58:51] क्रॉस लिंकिंग हो जाएगी।
[58:53] क्रॉस लिंकिंग होने की वजह से हमारा डीएनए डैमेज हो जाएगा और अल्टीमेटली हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[58:55] होने की वजह से हमारा डीएनए डैमेज हो जाएगा और अल्टीमेटली हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[58:56] जाएगा और अल्टीमेटली हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[58:56] तो इस तरीके से हमारे होता है अल्काइलेटिंग एजेंट्स का मैकेनिज्म ऑफ
[59:00] तो इस तरीके से हमारे होता है अल्काइलेटिंग एजेंट्स का मैकेनिज्म ऑफ
[59:02] अल्काइलेटिंग एजेंट्स का मैकेनिज्म ऑफ एक्शन।
[59:04] आई होप कि आप लोग यहां पे समझ गए होंगे।
[59:05] ठीक? तो देखिए ये था हमारा यहां पे अल्काइलेटिंग एजेंट्स का बेसिक इंट्रोडक्शन और मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन वगैरह।
[59:08] बाकी अगर हम लोग यहां पे इसके फमको काइनेटिक्स की बात करें तो यहां पे देखिए ये सब चीज़ आप लोग देख लीजिएगा।
[59:14] अब्सॉर्प्शन की बात करें तो हमारा वेल अब्सॉर्ब हो जाती हैं।
[59:16] ओरली आईवी दोनों तरीके से।
[59:17] ज्यादातर आईवी रूट से ही दी जाती हैं।
[59:19] डिस्ट्रीब्यूशन की बात करें तो हमारा बैडली डिस्ट्रीब्यूट हो जाती है।
[59:23] लिवर के थ्रू हमारा मेटाबोलाइट और किडनी के थ्रू हमारी यहां पे रिमूव हो जाती है।
[59:24] एडवर्स इफ़ेक्ट हमारा वही नजिया, फैटी, हेयर लॉस इनफर्टिलिटी हेयर लॉस आपको पता होगा कि हमारा कैंसर का एक बहुत ही मेजर सिम्टम होता है।
[59:30] और थेरेपेटिक जस्ट की बात करें तो हमारा जितने भी टाइप के कैंसर है उन सब में हम लोग यहां पे इसका यूज़ देखने को मिलता है।
[59:35] तो देखिए ये था हमारा यहां पे अल्काइलेटिंग एजेंट्स।
[59:37] नाउ अब हम लोग यहां पे बात करेंगे अपने एंटीमोटबोलाइट्स के बारे में।
[59:41] अब देखिए एंटीमोटबोलाइट्स में हमारे दो-तीन टाइप हैं।
[59:42] फॉलेट एंडगोनिस्ट।
[59:44] ठीक है?
[59:47] तो देखिए इन सबका हम लोग यहां पे एक साथ ही जो है इन सबका एक-एक करके एमओए देखेंगे और फिर इसके बाद जो इनकी फार्माकोनेटिक है वो हम लोग यहां पे सबकी कंबाइंड फॉर्म में डिस्कस करेंगे।
[59:57] तो देखिए यहां पे एंटी मेटाबोलाइट्स का क्या मतलब है?
[59:59] एंटी मेटाबॉलाइट्स यानी कि मेटाबोलाइट्स के अगेंस्ट में काम करने वाले।
[01:00:00] अब
[01:00:02] अगेंस्ट में काम करने वाले।
[01:00:03] अब मेटाबोलाइट्स देखिए क्या होते हैं?
[01:00:05] तो मेटाबोलाइट्स सिंपली हमारे मेटाबॉलिज्म का जो भी प्रोडक्ट्स होते हैं, ठीक है?
[01:00:06] वो हमारे मेटाबोलाइट्स होते हैं।
[01:00:08] तो देखिए कुछ हमारे ऐसे मेटाबोलाइट्स होते हैं जो हमारे ह्यूमन बॉडी में जो हमारे कह सकते हो डीएनए में बहुत मेजर रोल प्ले करते हैं।
[01:00:16] तो देखिए ये जो हम लोगों ने देखा था प्यूरिन।
[01:00:19] ठीक है? प्यूरिन पिरिमिडीन ये क्या थे?
[01:00:21] ये हमारे नाइट्रोजनस बेस थे ना?
[01:00:23] याद है आप लोगों को?
[01:00:25] अभी हम लोगों ने देखा ये जो नाइट्रोजनस बेस थे यही तो है हमारे प्यूरिन और पिरिमिडीन।
[01:00:27] तो ये दोनों भी क्या होते हैं?
[01:00:28] हमारे एक टाइप के मेटाबोलाइट होते हैं।
[01:00:29] और इन दोनों के अलावा एक हमारा तीसरा मेटाबोलाइट होता है फॉलिक एसिड।
[01:00:31] ठीक है?
[01:00:34] तो ये तीनों हमारे ऐसे मेटाबोलाइट होते हैं जो कि डीएनए में बहुत मेजर रोल प्ले करते हैं।
[01:00:36] क्योंकि देखिए प्यूरीन के अंदर क्या होता है?
[01:00:38] एडनीन, ग्वानिन।
[01:00:39] ये दोनों बेस देखने को मिलते हैं डीएनए में।
[01:00:41] और पिरिडीन के अंदर हमारा थाइमिन, साइटोसिन ये दोनों बेस हमारे डीएनए के होते हैं।
[01:00:45] तो यहां पे देखिए ये हमारा डीएनए में बहुत मेजर रोल प्ले करते हैं ये दोनों।
[01:00:47] और उसके बाद फोलिक एसिड।
[01:00:50] तो देखिए ये जो हमारा थाइमिन थाइमिन होता है।
[01:00:53] ठीक है?
[01:00:55] तो इसके सिंथेसिस में भी इसके सिंथेसिस में और भी हमारे बहुत सारे प्यूरिंस और पेरिमडीन के सिंथेसिस में हमारा फोलिक एसिड बहुत ही मेजर रोल प्ले करता है।
[01:00:58] तो ये तीनों हमारे एक टाइप के ऐसे मेटाबोलाइट होते हैं जो कि
[01:01:03] एक टाइप के ऐसे मेटाबोलाइट होते हैं जो कि डीएनए के सिंथेसिस में बहुत ही मेजर रोल।
[01:01:05] डीएनए के सिंथेसिस में बहुत ही मेजर रोल प्ले करते हैं।
[01:01:07] तो अगर हम लोग कुछ ऐसा करें कि इन तीनों को यहां पे थोड़ा सा इनहबिट कर दें।
[01:01:09] मतलब इन तीनों के फॉर्मेशन को या फिर इन तीनों के काम करने के तरीके को।
[01:01:11] अगर हम लोग यहां पे किसी तरीके से रोक दें तो क्या होगा भाई?
[01:01:13] ये तीनों ही तो डीएनए बना रहे हैं।
[01:01:14] अगर ये तीनों काम नहीं करेंगे अच्छे से तो डीएनए बनेगा नहीं।
[01:01:16] और जब डीएनए नहीं बनेगा तो हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[01:01:18] और जब सेल डेथ हो जाएगी तो सेल डिवाइड नहीं होगी।
[01:01:19] और हमें यहां पे कैंसर जो है थोड़ा सा प्रिवेंट हो जाएगा।
[01:01:21] तो देखिए हमारा यहां पे एंटी एंटी मेटाबोलाइट्स आर बिलोंग टू अ क्लास ऑफ़।
[01:01:23] एंटी कैंसर एजेंट दैट आर स्ट्रक्चरली सिमिलर टू मेटाबोलाइट्स।
[01:01:25] तो देखिए होता क्या है कि ये जो एंटी मेटाबोलाइट्स है ना इनका जो स्ट्रक्चर है।
[01:01:28] ये हमारा जो है लगभग-लगभग इस प्यूरिन पिरिमडीस और फॉलिक एसिड की तरह सिमिलर होता है।
[01:01:30] देखिए इसके अंदर भी तीन क्लास होती हैं।
[01:01:31] एक होता है प्यूरिन एटागोनिस्ट, एक होता है पिरिमडीन एटागोनिस्ट, एक होता है फॉलिक एसिड एटागोनिस्ट।
[01:01:33] तो देखिए जो प्यूरिन एंडगोनिस्ट है वो हमारा इसके जैसा होगा।
[01:01:35] पिरिमिडीन हमारा इसके पिरमिडीन के जैसा होगा और फोलिक एसिड एंडागोनिस्ट हमारा इसके जैसा होगा।
[01:01:37] तो मतलब स्ट्रक्चरली ये इनके सिमिलर होते हैं।
[01:01:38] ठीक है?
[01:01:41] दैट आर एसेंशियल मतलब कि कौन से मेटाबोलाइट्स हमारे जो कि हमारे सेल की सिंथेसिस यानी
[01:02:03] हमारे जो कि हमारे सेल की सिंथेसिस यानी कि डीएनए के लिए एसेंशियल होते हैं।
[01:02:05] जैसे कि डीएनए के लिए एसेंशियल होते हैं।
[01:02:06] जैसे कि हमारा प्यूरिन, पिरामिडीन और फॉलिक एसिड्स।
[01:02:09] मतलब इन तीनों मेटाबोलाइट के जैसे ही हमें यहां पे देखने को मिलते हैं हमारे एंटी मेटाबॉल।
[01:02:10] दे एक्ट आइदर बाय इनबिटिंग देयर सिंथेसिस।
[01:02:13] मतलब कि या तो ये इनकी सिंथेसिस को रोक देते हैं और बाय कमपीटिंग विद देम इन डीएनए एंड आरएनए सिंथेसिस या तो ये क्या करते हैं कि या तो इनकी सिंथेसिस को ही रोक देते हैं या तो इनके साथ कमपीट मतलब कि इसकी जगह इसकी जगह खुद जाके डीएनए में जाके अटैच हो जाते हैं।
[01:02:28] मतलब प्यूरिन एागोनिस्ट जो ड्रग होगी वो क्या होगी कि प्यूरिन बेस की जगह खुद जाके डीएनए में अटैच हो जाएंगे।
[01:02:34] अब बताइए जब यहां पे इसकी प्यूरिन्नस की जगह मतलब एडिनीन और ग्वानिन की जगह इसी के जैसा दिखने वाला अगर कोई बेस अटैच हो गया तो क्या होगा भाई?
[01:02:41] डीएनए के तो यही दोनों चाहिए। इनके जैसा दिखने वाला तो चाहिए नहीं।
[01:02:43] तो डीएनए खराब हो जाएगा। यानी फॉल्स डीएनए फेक डीएनए बन जाएगा। जिसकी वजह से अल्टीमेटली हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[01:02:49] ठीक है? दे इंटरफेयर्स विद नॉर्मल सेल फंक्शनिंग।
[01:02:51] ठीक है? तो नॉर्मल सेल फंक्शन को इनिबिट कर देते हैं।
[01:02:53] उसके बाद एंटी मेटाबॉल कॉमनली किल द सेल इन एस फज़।
[01:02:55] तो देखिए ये एस फज़ का क्या मतलब है?
[01:02:58] अब इसके लिए थोड़ा सा आप लोग को सेल डिवीज़न समझना पड़ेगा।
[01:03:01] देखिए हम लोग सिर्फ उतना देखेंगे
[01:03:04] पड़ेगा।
[01:03:04] देखिए हम लोग सिर्फ उतना देखेंगे जितना हमारे लिए यूज़फुल है।
[01:03:06] देखिए अगर हम लोग सेल डिवीज़न की बात करें तो आप सभी को पता है कि जो हमारी सेल है वो एक सेल हमारी दो सेल में डिवाइड हो जाती है।
[01:03:11] तो देखिए इसके अंदर ये सेल डिवीज़न की प्रोसेस अगर हम लोग देखें तो इसके अंदर हमारे दो फेस होते हैं।
[01:03:15] एक होता है इंटरफेस, एक होता है एम फेस।
[01:03:17] अब अगर हम लोग यहां पे इंटरफ़ेस की बात करें तो इसके अंदर भी हमारे तीन फेस होते हैं।
[01:03:20] एक होता है हमारा G1 फज़, फर्स्ट ग्रोथ फज़, एक होता है हमारा एस फज़ सिंथेसिस फज़ और थर्ड होता है हमारा यहां पे जी टू फज़ यानी कि सेकंड ग्रोथ फेस।
[01:03:26] तो देखिए होता क्या है कि इन सभी में भी अगर हम लोग यहां पे अपने एस फज़ की बात करें।
[01:03:31] ठीक है?
[01:03:33] तो देखिए इसी पी ये हमारा इंपॉर्टेंट है।
[01:03:35] तो ये एस फेस हमारा इसको हम लोग जो है सिंथेसिस फेस के नाम से जानते हैं।
[01:03:38] और इसी में हमारा होता है डीएनए रेप्लिकेशन।
[01:03:41] यानी जो हमारा डीएनए का जो कॉपी बनना होता है।
[01:03:43] देखिए होता क्या है कि जब एक सेल हमारी डिवाइड होती है तो दो सेल में कन्वर्ट होती है।
[01:03:47] तो ये जो सेल के अंदर जो भी ऑर्गेनल्स होते हैं डीएनए होते हैं यहां पे क्या होता है?
[01:03:48] सेल उनकी कॉपी बनाना स्टार्ट कर देता है।
[01:03:50] भाई देखो जब एक से एक डीएनए है।
[01:03:52] ठीक है?
[01:03:55] अब एक डीएनए है तो एक डीएनए से जब दो डीएनए बनेगा तभी तो ये हमारा दोनों सेल में अलग-अलग जाके जॉइंट होगा।
[01:03:58] ठीक है?
[01:04:00] तो वही चीज है कि यहां पे हमारा क्या होता है कि जो डीएनए है वो यहां पे कॉपी बनना स्टार्ट हो जाता है।
[01:04:03] मतलब एक डीएनए की यहां पे कॉपी मतलब
[01:04:06] है।
[01:04:06] मतलब एक डीएनए की यहां पे कॉपी मतलब कि दो डीएनए में यहां पे कन्वर्ट हो जाता
[01:04:07] कि दो डीएनए में यहां पे कन्वर्ट हो जाता है।
[01:04:09] और इस प्रोसेस को हम लोग बोलते हैं है।
[01:04:09] और इस प्रोसेस को हम लोग बोलते हैं डीएनए रेप्लिकेशन।
[01:04:11] ठीक है?
[01:04:11] डीएनए रेप्लिकेशन।
[01:04:13] और ये किस फेस में होता है?
[01:04:13] ये हमारे इस एस फेस में होता है।
[01:04:16] ठीक है?
[01:04:18] तो ये चीज हमारी इंपॉर्टेंट होती है कि
[01:04:20] यहां पे ये जो एंटी मेटाबोलाइट्स हैं ये हमारी सेल डिवीजन के एस फेस में जाके सेल
[01:04:23] को किल करते हैं।
[01:04:25] ठीक है?
[01:04:25] तो ये सेल साइकिल स्पेसिफिक होते हैं।
[01:04:27] देखिए दो टर्म होता है।
[01:04:27] एक टर्म होता है सेल साइकिल
[01:04:31] स्पेसिफिक।
[01:04:33] तो देखिए सेल अभी हम लोग बता
[01:04:35] रहे हैं।
[01:04:35] ठीक है?
[01:04:35] देखिए एक हो गया सेल साइकिल स्पेसिफिक और दूसरा टर्म हो गया
[01:04:37] सेल साइकिल नॉन स्पेसिफिक।
[01:04:41] नॉन स्पेसिफिक।
[01:04:43] तो देखिए जो जो हमारे एंटी
[01:04:45] न्यूरोप्लास्टिक एजेंट्स हमारी किसी स्पेशली सेल साइकिल के किसी फेस में जाके
[01:04:47] काम करते हैं।
[01:04:49] जैसे मान लीजिए जैसे हमारे ये एंटी मेटाबॉल हो गए।
[01:04:51] तो ये हमारी सेल साइकिल के एस फेस में काम कर रहे हैं।
[01:04:53] ठीक है?
[01:04:53] तो ये हमारे सेल साइकिल के सेल साइकिल स्पेसिफिक हो गए।
[01:04:55] मतलब ये किसी स्पेशली
[01:04:57] सेल साइकिल के किसी फेस में जाके काम
[01:04:59] करेंगे।
[01:04:59] तो ये सेल साइकिल स्पेसिफिक ड्रग्स हो गई।
[01:05:01] और जो ड्रग्स हमारी किसी भी
[01:05:03] सेल साइकिल के फेस में नहीं बल्कि वो कहीं
[01:05:05] भी जाके सेल को किल कर सकती हैं।
[01:05:05] मतलब
[01:05:07] भी जाके सेल को किल कर सकती हैं।
[01:05:09] मतलब किसी भी फेस में सेल को मार सकती हैं।
[01:05:09] वो किसी भी फेस में सेल को मार सकती हैं।
[01:05:11] वो हमारी सेल साइकिल नॉन स्पेसिफिक हो जाती हैं।
[01:05:12] तो जो हम लोगों ने अल्काइलेटिंग एजेंट्स देखे वो हमारे सेल साइकिल नॉन स्पेसिफिक थे।
[01:05:15] मतलब वो सेल के किसी भी फेस में सेल को किल कर सकते हैं।
[01:05:17] लेकिन ये जो सेल्स है ये जो एंटी मेटाबोलाइट्स हैं ये हमारे मेनली एस फेस में जाके सेल को किल करते हैं।
[01:05:18] लेकिन ये जो सेल्स है ये जो एंटी मेटाबोलाइट्स हैं ये हमारे मेनली एस फेस में जाके सेल को किल करते हैं।
[01:05:20] हमारे मेनली एस फेस में जाके सेल को किल करते हैं।
[01:05:22] अब क्लासिफिकेशन की बात करें तो इसके अंदर हमारी तीन क्लास आ जाती है।
[01:05:24] इसके अंदर हमारी तीन क्लास आ जाती है।
[01:05:25] फोलेट एंडगोनिस्ट, प्यूरिन एंडगोनिस्ट और पिरिमडीन।
[01:05:27] तो देखो फोलेट हमारा सिंपल फोलिक एसिड ही होता है।
[01:05:29] कोई कंफ्यूजन नहीं है।
[01:05:31] ठीक है?
[01:05:33] तो इसके अंदर हमारे मेथोड्रक्साइड आ जाता है।
[01:05:35] ठीक है?
[01:05:35] ये भी हमारी स्टार ड्रग हो गई।
[01:05:36] तो इसका सिंथेसिस पढ़ना है।
[01:05:38] प्यूरिन एटागोनिस्ट के अंदर हमारा मरकेप्टोपर्युन थियो थायोगा।न ठीक है?
[01:05:40] हमारा मरकेप्टोपर्युन थियो थायोगा।न ठीक है?
[01:05:40] और एजाथियोपन ठीक है?
[01:05:42] तो ये आ जाता है और उसके बाद पिमडीन एटागोनिस्ट में हमारा यहां पे फ्लोरसिल फ्लॉक्स यूरिडीन और साइटाराबिन ये तीनों ड्रग्स हमारी इसके अंदर आ जाती है।
[01:05:44] और उसके बाद पिमडीन एटागोनिस्ट में हमारा यहां पे फ्लोरसिल फ्लॉक्स यूरिडीन और साइटाराबिन ये तीनों ड्रग्स हमारी इसके अंदर आ जाती है।
[01:05:45] ये तीनों ड्रग्स हमारी इसके अंदर आ जाती है।
[01:05:48] तो इन तीनों को हम लोग यहां पे थोड़ा अलग-अलग देखेंगे।
[01:05:49] जैसे सबसे पहले हम लोग बात करते हैं अपने फोलेट एंडागोनिस्ट के बारे में।
[01:05:51] जैसे सबसे पहले हम लोग बात करते हैं अपने फोलेट एंडागोनिस्ट के बारे में।
[01:05:53] तो देखिए फॉलेट एटागोनिस्ट हमारी यहां पे एंटीफोलिक या फिर एंटीफोलिक एसिड के नाम से भी जानते हैं।
[01:05:55] फॉलेट एटागोनिस्ट हमारी यहां पे एंटीफोलिक या फिर एंटीफोलिक एसिड के नाम से भी जानते हैं।
[01:05:57] और उसके बाद देखिए इट इज़ अ टाइप ऑफ़ ड्रग दैट इंटरफेयर्स विथ द मेटाबॉलिज़्म ऑफ़ फोलिक एसिड।
[01:05:59] तो देखिए जैसा इसका नाम है फोलिड एटागोनिस्ट।
[01:06:01] तो ये फोलिक एसिड की
[01:06:07] फोलिड एटागोनिस्ट।
[01:06:07] तो ये फोलिक एसिड की तरह दिखने वाली ड्रग्स होगी।
[01:06:09] और ये हमारी तरह दिखने वाली ड्रग्स होगी।
[01:06:09] और ये हमारी फोलिक एसिड के मेटाबॉलिज्म में जाके उसको इनहबिट करती है।
[01:06:11] फोलिक एसिड के मेटाबॉलिज्म में जाके उसको इनहबिट करती है।
[01:06:13] ठीक है?
[01:06:13] उसका मेटाबॉलिज्म को डिस्टर्ब कर देती हैं।
[01:06:15] एन एसेंशियल को डिस्टर्ब कर देती हैं।
[01:06:15] एन एसेंशियल न्यूट्रिएंट रिक्वायर्ड फॉर सिंथेसिस ऑफ़ डीएनए।
[01:06:17] डीएनए।
[01:06:17] और देखिए ये जो फोलिक एसिड है ये हमारा बहुत ही एसेंशियल न्यूट्रिएंट होता है।
[01:06:19] हमारा बहुत ही एसेंशियल न्यूट्रिएंट होता है जो कि डीएनए की सिंथेसिस में रिक्वायर्ड होता है।
[01:06:20] है जो कि डीएनए की सिंथेसिस में रिक्वायर्ड होता है।
[01:06:21] रिक्वायर्ड होता है।
[01:06:23] अब कैसे होता है वो हम लोग अभी थोड़ा देखेंगे।
[01:06:25] देखेंगे।
[01:06:27] दीज़ ड्रग्स आर पार्शियली इफेक्टिव इन ट्रीटिंग रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स बट कैन आल्सो इफ़ेक्ट हेल्दी सेल्स।
[01:06:29] इफेक्टिव इन ट्रीटिंग रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स बट कैन आल्सो इफ़ेक्ट हेल्दी सेल्स।
[01:06:31] कैंसर सेल्स बट कैन आल्सो इफ़ेक्ट हेल्दी सेल्स।
[01:06:33] सेल्स।
[01:06:33] तो देखिए वही है कि वैसे ये हमारी कैंसर सेल्स में तो इफेक्टिव होती हैं लेकिन हमारी हेल्दी सेल्स को भी इफेक्ट कर सकती हैं।
[01:06:35] कैंसर सेल्स में तो इफेक्टिव होती हैं लेकिन हमारी हेल्दी सेल्स को भी इफेक्ट कर सकती हैं।
[01:06:36] लेकिन हमारी हेल्दी सेल्स को भी इफेक्ट कर सकती हैं।
[01:06:38] सकती हैं।
[01:06:38] तो ये तो सभी ड्रग्स का साइड इफेक्ट होता ही है हमारे एंटीनोप्लास्टिक एजेंट्स में।
[01:06:39] इफेक्ट होता ही है हमारे एंटीनोप्लास्टिक एजेंट्स में।
[01:06:41] एजेंट्स में।
[01:06:41] अब मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन की बात करें तो देखिए वही चीज़ है कि ये जो हमारी देखिए होता क्या है?
[01:06:44] बात करें तो देखिए वही चीज़ है कि ये जो हमारी देखिए होता क्या है?
[01:06:45] हमारी देखिए होता क्या है?
[01:06:45] हम लोग थोड़ा सा फॉलिक एसिड के मेटाबॉलिज़्म को समझते हैं।
[01:06:48] फॉलिक एसिड के मेटाबॉलिज़्म को समझते हैं।
[01:06:49] देखिए ये थोड़ा सा अभी पेंसिल्स है इसको हम लोग यहां पे बाद में पेन से बना देंगे।
[01:06:51] लोग यहां पे बाद में पेन से बना देंगे।
[01:06:51] उसकी टेंशन मत लीजिए।
[01:06:53] होता क्या है?
[01:06:53] देखिए ये जो हमारा फॉलेट है या फिर फोलिक एसिड।
[01:06:55] ये जो हमारा फॉलेट है या फिर फोलिक एसिड।
[01:06:57] देखिए इसमें कंफ्यूज मत होइए।
[01:06:57] फोलेट फॉलिक एसिड ही होता है।
[01:06:59] तो देखिए होता क्या फॉलिड जब हमारी बॉडी में जाता है तो ये फॉलिड सबसे पहले कन्वर्ट होता है हमारा यहां पे डीएचएफ यानी डाईहाइड्रोफोलेट में।
[01:07:01] फॉलिड जब हमारी बॉडी में जाता है तो ये फॉलिड सबसे पहले कन्वर्ट होता है हमारा यहां पे डीएचएफ यानी डाईहाइड्रोफोलेट में।
[01:07:03] फॉलिड सबसे पहले कन्वर्ट होता है हमारा यहां पे डीएचएफ यानी डाईहाइड्रोफोलेट में।
[01:07:05] यहां पे डीएचएफ यानी डाईहाइड्रोफोलेट में।
[01:07:07] ठीक है?
[01:07:07] और यहां पे इसमें एंजाइम कौन सा यूज़ होता है?
[01:07:07] डीएचएफ डाईहाइड्रेट फोलेट
[01:07:09] यूज़ होता है? डीएचएफ डाईहाइड्रेट फोलेट रिडक्टिव।
[01:07:11] ठीक है? डाईहाइड्रोफोलेट रिडक्टिव।
[01:07:13] ठीक है? डाईहाइड्रोफोलेट रिडक्टिव ये हमारा एंजाइम होता है।
[01:07:16] अब ये जो डीएचएफ है ये हमारा फर्दर कन्वर्ट हो जाता है टीएचएफ यानी कि टेट्राहाइड्रोफोलेट में।
[01:07:19] ठीक है? मतलब डीएचएफ हमारा कन्वर्ट हो जाता है टीएचएफ में।
[01:07:22] और यहां पे भी हमारा सेम यही डीएचएफआर यानी कि डाईहाइड्रोफोलेट रिडक्टिव एंजाइम काम करता है।
[01:07:26] और ये जो टीएचएफ है ये हमारा एक मिथाइल ग्रुप के साथ अटैच हो के कन्वर्ट हो जाता है मिथाइल टीएचएफ यानी कि एम टीएचएफ में।
[01:07:32] और ये एमटीएफ क्या होता है?
[01:07:34] ये हमारा फर्दर जो है डीएचएफ में कन्वर्ट हो जाता है।
[01:07:35] तो देखिए इस तरीके से हमारी बॉडी में इसका मेटाबॉलिज्म चलता रहता है।
[01:07:40] और यहां पे होता क्या है कि जब ये मिथाइल टीएचएफ हमारा डीएचएफ में कन्वर्ट होता है।
[01:07:42] ठीक है?
[01:07:44] तो यहां पे ये जो हमारा डीयूएमपी यानी कि डीऑक्सीयरडीन मोनो फॉस्फेट होता है।
[01:07:46] ये हमारा कन्वर्ट हो जाता है डीटीएमपी यानी डीऑक्सी डीऑक्सीथाइमिडीन मोनो फॉस्फेट में।
[01:07:51] ठीक है?
[01:07:53] जिसके अंदर हमारा थाइमिन बेस होता है।
[01:07:55] तो यहां पे देखिए ये हमारा जो है डीएनए के सिंथेसिस में बहुत ही मेजर रोल प्ले करता है।
[01:07:58] मतलब ये हमारा क्या होता है?
[01:07:59] हमारा एक टाइप का न्यूक्लोटाइट होता है।
[01:08:01] ठीक है?
[01:08:04] जो कि डीएनए में यूज़ होता है।
[01:08:05] तो ये हमारा मतलब ओवरऑल डीएनए में बहुत ही सिंथेसिस में बहुत ही मेजर रोल प्ले करता है।
[01:08:08] इसके अलावा और भी प्यूरिन पिमडीन बेस की सिंथेसिस में भी थोड़ा सा ये रोल प्ले
[01:08:10] की सिंथेसिस में भी थोड़ा सा ये रोल प्ले करता है।
[01:08:12] बट मेन हमारा डीटीएमपी की सिंथेसिस में एक मेजर रोल प्ले करता है
[01:08:13] सिंथेसिस में एक मेजर रोल प्ले करता है हमारा फोलिक एसिड।
[01:08:16] ठीक है? तो यहां पे देखिए होता क्या है?
[01:08:17] ये जो हमारे फॉल एटागोनिस्ट होते हैं ये हमारे टीएचएफआर को यहां पे क्या कर देते हैं?
[01:08:20] इनबिट कर देते हैं।
[01:08:22] मतलब इस डाईहाइड्रोफोलेट रिडक्टिव एंजाइम को इनबिट कर देते हैं।
[01:08:25] तो इसकी वजह से होता क्या क्या है?
[01:08:27] डीएचएफ हमारा टीएचएफ में कन्वर्ट नहीं हो पाता।
[01:08:28] और जब ये इसमें कन्वर्ट नहीं होगा तो ये फर्दर आगे की प्रोसेस होगी नहीं।
[01:08:29] तो ये हमारा डीओएमपीए डीटीएमपी में कन्वर्ट नहीं होगा।
[01:08:31] डीएनए सिंथेसिस इनहिबिट हो जाएगी और हमारी सेल डेथ हो जाएगी।
[01:08:33] ठीक है? तो इस तरीके से हमारा ये काम करता है।
[01:08:34] तो फोलिक एसिड हमारा एक बहुत ही एसेंशियल डाइटरी फैक्टर होता है।
[01:08:36] मतलब इसको डाइट से लेना जरूरी होता है।
[01:08:38] ठीक है? और उसके बाद यहां पे फॉल एंडगोनिस्ट सच एज मेथोट्रेक्सिट।
[01:08:41] तो ये हमारा इसका एक इसके अंदर हमारा एक एग्जांपल होता है।
[01:08:42] ठीक है? हमारी ड्रग होती है।
[01:08:44] तो ये क्या करता है? ये हमारी स्पेसिफिकली हमारे डहाइड्रोफोलेट रिडक्टिव एंजाइम को इनबिट कर देती है।
[01:08:45] ठीक है? और ये हमारा देखो ये जो हमारा डीएचएफआर है यानी डाईहाइड्रोफोलेट रिडक्टेस है ये हमारा रिस्पांसिबल होता है डीएचएफ को
[01:08:47] डीएचएफ में कन्वर्ट करने के लिए और डीएचएफ हमारा क्या होता है एक रिड्यूस्ड फॉर्म होती है फोलेट की ठीक है
[01:08:48] जो कि हमारी एसेंशियल होती है प्यूरिन की सिंथेसिस में ठीक है
[01:08:50] और जो भी हमारा डीटीएमपी होता है मतलब मेन हमारा इसकी सिंथेसिस में बहुत ही
[01:09:11] मतलब मेन हमारा इसकी सिंथेसिस में बहुत ही मेजर रोल प्ले करता है जो कि हमारे डीएनए
[01:09:13] मेजर रोल प्ले करता है जो कि हमारे डीएनए एंड आरएनए के प्रोडक्शन में नेसेसरी होते
[01:09:15] एंड आरएनए के प्रोडक्शन में नेसेसरी होते हैं दे मोस्टली किल्स द सेल इन एस फेस और
[01:09:18] हैं दे मोस्टली किल्स द सेल इन एस फेस और ये क्या करता है ये हमारा मेनली एस फ में
[01:09:20] ये क्या करता है ये हमारा मेनली एस फ में काम करता है। ठीक है?
[01:09:21] हम लोग बात करते हैं प्यूरिन एंटाबॉलिस्ट के बारे में।
[01:09:23] तो देखिए सिंपली ये हमारे प्यूरिन के
[01:09:24] सिंथेसिस को इनबिट करेगी।
[01:09:26] ठीक है? ये हमारी ड्रग्स होती हैं जो कि एंटी एंटी
[01:09:28] मेटाबोलाइट के अंदर कंबाइन करती हैं मतलब
[01:09:30] बिलोंग करती हैं और दैट इंटरफेयर्स विद द
[01:09:32] सिंथेसिस एंड फंक्शन ऑफ़ प्यूरिन।
[01:09:34] यानी कि ये प्यूरिन के साथ जो है इंटरफेयर करती
[01:09:36] हैं जो कि हमारा एक एसेंशियल बिल्डिंग
[01:09:38] ब्लॉक होता है डीएनए और आरएनए का।
[01:09:40] आप सभी को पता है प्यूरिन बेस हमारे बहुत
[01:09:41] इंपॉर्टेंट होते हैं।
[01:09:44] ठीक है? अह फ्यू ड्रग्स बिलोंगिंग टू द क्ला।
[01:09:45] अब हमारी जो सिलेबस के अंदर हमें जो पढ़ना है उसके
[01:09:47] अंदर हमें पढ़ना है मरकेप्टोब्यूरिन,
[01:09:48] थियोथायोग्वानिन और एजाथियोपन।
[01:09:51] इन तीनों के बारे में हमें पढ़ना है और
[01:09:52] मरकट्टोप्यूरिन का हमें सिंथेसिस भी पढ़नी
[01:09:54] है।
[01:09:56] ठीक है? अब मरकेप्टोप्यूरिन के मैकेनिज़्म ऑफ़ एक्शन की बात करें तो यहां
[01:09:58] पे देखिए प्यूरिन एागोनिस्ट सच एज अब जैसे
[01:10:01] हमारे प्यूरिन एागोनिस्ट जो होते हैं जैसे
[01:10:02] इसके अंदर हमारा कौन-कौन से ड्रग्स हैं?
[01:10:04] मरकेप्टोपरिन हो गया, थायग्वानिन हो गया।
[01:10:06] तो ये सारे हमारे क्या होते हैं?
[01:10:07] ये हमारे स्ट्रक्चरली सिमिलर होते हैं।
[01:10:09] नेचुरल प्यूरिन बेससेस।
[01:10:11] यानी कि प्यूरिन बेस के अंदर हमारे कौन-कौन से हैं?
[01:10:11] एडनीन और
[01:10:12] अंदर हमारे कौन-कौन से हैं?
[01:10:12] एडनीन और ग्वानिन।
[01:10:12] यही दोनों तो होते हैं।
[01:10:13] ग्वानिन।
[01:10:13] यही दोनों तो होते हैं।
[01:10:13] तो ये हमारे इन्हीं की तरह सिमिलर होते हैं।
[01:10:15] हमारे इन्हीं की तरह सिमिलर होते हैं।
[01:10:15] वंस इनसाइड द सेल।
[01:10:17] इनसाइड द सेल।
[01:10:17] यानी कि एक बार जब ये सेल के अंदर जाते हैं दीज़ ड्रग्स आर कन्वर्टेड
[01:10:19] इंटू एक्टिव मेडबलाइट।
[01:10:19] यानी कि एक बार जब
[01:10:21] यहां पे सेल के अंदर जाते हैं तो ये अपने एक्टिव फॉर्म में कन्वर्ट हो जाते हैं।
[01:10:23] एक्टिव फॉर्म में कन्वर्ट हो जाते हैं।
[01:10:24] और एक्टिव फॉर्म में कन्वर्ट होने के बाद क्या होते हैं?
[01:10:25] ये यहां पे हमारे
[01:10:27] इनकर्पोरेट यानी कि डीएनए के अंदर जाके
[01:10:29] यहां पे इनकर्पोरेट हो जाते हैं।
[01:10:29] मतलब उसी
[01:10:31] के अंदर जाके फिट हो जाते हैं।
[01:10:31] ऐसा समझ लीजिए।
[01:10:33] ठीक है?
[01:10:33] या फिर आरएनए स्टैंड्स के
[01:10:35] ड्यूरिंग द एस फज़ यानी कि सिंथेसिस फज़ के
[01:10:37] दौरान।
[01:10:37] और और इसकी वजह से क्या होता है?
[01:10:39] दिस इनकरपोरेशन मतलब कि जब ये यहां पे
[01:10:42] हमारे डीएनए के जाके डीएनए के अंदर जाके
[01:10:44] इनकर्पोरेट हो जाते हैं।
[01:10:44] जिसकी वजह से
[01:10:46] क्या होता है?
[01:10:46] हमारा फौ्टी न्यूक्लिक
[01:10:47] एसिड।
[01:10:47] अब देखिए हुआ क्या?
[01:10:49] ठीक थोड़ा आप लोग समझिए कि ये हमारे क्या है?
[01:10:51] ये हमारे इडनीन और ग्वानिन की तरह दिखने में है।
[01:10:53] तो डीएनए के अंदर क्या हुआ?
[01:10:53] डीएनए को चाहिए
[01:10:56] था एडनीन और ग्वानिन।
[01:10:56] जबकि यहां पे हुआ
[01:10:58] क्या कि इसकी जगह हमारा जाके यहां पे जैसे
[01:11:00] हमारा मरकेप्टोरिन हो गया, थियोनिन हो
[01:11:03] गया।
[01:11:03] मतलब कि जो हमारे प्यूरिन एटागोनिस्ट
[01:11:04] थे वो यहां पे इसकी जगह जाके डीएनए में
[01:11:06] इनकर्पोरेट हो गए।
[01:11:06] मतलब डीएनए में होना
[01:11:08] चाहिए था एडिनीन गग्निन को।
[01:11:08] जबकि हो गए
[01:11:10] हमारे यहां पे प्यूरिन एटागोनिस्ट।
[01:11:10] जिसकी
[01:11:12] हमारे यहां पे प्यूरिन एटागोनिस्ट।
[01:11:14] जिसकी वजह से होगा क्या?
[01:11:14] जिसकी वजह से हमारा फौ्टी न्यूक्लिक एसिड।
[01:11:17] मतलब कि हमारा फॉल्स कह सकते हो डीएनए या फिर आरएनए बन जाएगा।
[01:11:20] जिसकी वजह से लीडिंग टू डिस्फंक्शनल और इनकंप्लीट जेनेटिक इनेशन
[01:11:23] जिसकी वजह से हमारी जेनेटिक इनेशन कंप्लीट हो नहीं पाएगी क्योंकि डीएनए का स्ट्रक्चर
[01:11:27] अच्छे से फॉर्म नहीं हो पाया व्हिच इनबिट्स द सेल एबिलिटी टू फंक्शन प्रॉपर्ली
[01:11:30] जिसकी वजह सेल की जो फंक्शन करने की एबिलिटी है वो यहां पे इनबिट हो जाएगी।
[01:11:36] दे आल्सो इंटरफेयर्स विद आईएमपी डिहाइड्रोजेनेस।
[01:11:39] अह आईएमपी डिहाइड्रोजनस मतलब यह हमारा एक एंजाइम होता है जो कि हमारे आयनोसिनिक मोनोफॉस्फेट या फिर आयनोसिनिक एसिड को
[01:11:45] देखिए थोड़ा सा आप लोग को इसके लिए ना हमारे डीएनए और आरएनए मतलब कि सॉरी ये जो हमारे नाइट्रोजनस बेस होते हैं इनके मतलब कि इनकी सिंथेसिस की नॉलेज होनी चाहिए।
[01:11:56] मतलब ये कैसे बनते हैं?
[01:11:58] अब इतना डिटेल में तो आप लोग जाओगे नहीं।
[01:12:00] तो सिंपली समझो हमारा ये जो एडनीन और ग्वानिन है ये हमारे यहां पे बनते हैं आईएमपी के कन्वर्ज़ से।
[01:12:05] ठीक है?
[01:12:05] तो आईएमपी का कन्वर्ज़ होता कब है?
[01:12:07] ये तब होता है जब हमारा आईएमपी डिहाइड्रोजन एंजाइम काम करता है।
[01:12:10] तो ये क्या करते हैं?
[01:12:10] ये इसके साथ भी इंटरफेयर कर देते हैं।
[01:12:11] जिसकी वजह से क्या होता है जो हमारा आईएमपी है आयनोसिनिक
[01:12:13] होता है जो हमारा आईएमपी है आयनोसिनिक मोनोफॉस्फेट।
[01:12:16] ठीक है? ये हमारा डी एडनीन मोनोफॉस्फेट।
[01:12:17] ठीक है? ये हमारा डी एडनीन और ग्वानिन में कन्वर्ट नहीं हो पाता।
[01:12:19] और ग्वानिन में कन्वर्ट नहीं हो पाता।
[01:12:21] जिसकी वजह से इसकी सिंथेसिस भी स्टॉप हो जाती है।
[01:12:23] तो देखिए वही चीज़ है।
[01:12:25] या तो ये इसकी सिंथेसिस को बंद कर देंगे या तो ये इसकी जगह जो है खुद जाके कमपीट करके हमारा अटैच हो जाएंगे और हमारी डीएनए को खराब कर देंगे।
[01:12:29] ठीक है? तो थोड़ा सा हम लोग देखें तो प्यूरिन एंडगोनिस्ट क्या होता है?
[01:12:32] सबसे पहले अपने एक्टिव फॉर्म में कन्वर्ट होता है।
[01:12:35] एक्टिव फॉर्म में कन्वर्ट होने के बाद हमारा डीएनए में इनकर्पोरेट हो जाता है।
[01:12:39] जिसकी वजह से एट लास्ट में डीएनए स्टैंड्स की ब्रेकेज हो जाती है और डीएनए सिंथेसिस भी रुक जाती है।
[01:12:43] ठीक है? मतलब यहां पे इस तरीके से डीएनए सिंथेसिस भी रुक जाती है।
[01:12:45] नाउ अब हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने थर्ड क्लास की अपने एंटीमेटाबॉलाइट्स ड्रग्स के अंदर जो कि हमारा होता है पिरिमडीन एंडस्ट।
[01:12:51] तो देखिए पिरिमिडीन एंडगोनिस्ट हमारी यहां पे एंटी मेटाबोलाइट्स के अंदर ये एक क्लास होती है जिसमें क्या होता है कि ये हमारे पिरिमडीन के जैसी होती है।
[01:12:59] मतलब कि ये ये हमारे एक्ट करती है बाय मिमिकिम।
[01:13:03] मिमिकिंग मतलब कोई कॉपी करना।
[01:13:05] ठीक है? तो ये पिरिमडीन बेस की तरह ही होते हैं दिखने में।
[01:13:09] और यहां पे क्या करते हैं? ये जो है डीएनए आरएनए की सिंथेसिस को इनिबिट कर देते हैं।
[01:13:13] अब इसके अंदर हमारे तीन ड्रग आ जाते हैं। फ्लोरसल, साइटराबिन और फ्लॉक्स यूरडीन।
[01:13:13] तो अगर मैकेनिज्म ऑफ एक्शन की बात करें तो
[01:13:15] अगर मैकेनिज्म ऑफ एक्शन की बात करें तो देखिए वही है कि ये हमारे जो है
[01:13:17] देखिए वही है कि ये हमारे जो है डीनोवोसिंथेसिस मतलब पिरिमडीन की
[01:13:19] डीनोवोसिंथेसिस मतलब पिरिमडीन की डिनोवसिंथेसिस को इनबिट कर देते हैं।
[01:13:21] मतलब इसके अंदर जो भी एंजाइम्स इन्वॉल्व होते
[01:13:23] इसके अंदर जो भी एंजाइम्स इन्वॉल्व होते हैं उनको यहां पे ये इनबिट कर देते हैं।
[01:13:26] हैं उनको यहां पे ये इनबिट कर देते हैं।
[01:13:28] फॉर एग्जांपल्स मतलब कि अगर हम लोग बात करें तो जैसे हमारी जो फ्लोरोयरसिल होती
[01:13:30] है ये हमारी थाइमिडाइलेट्स की थाइमिडाइलेट
[01:13:33] सिंथेस मतलब ये हमारा एक एंजाइम होता है।
[01:13:34] इसको इनबिट कर देती है।
[01:13:36] अब ये जो एंजाइम है एन एंजाइम क्रूशियल फॉर कन्वर्टिंग
[01:13:39] यूरडीन इंटू थाइमिडीन अनेसेसरी कंपोनेंट
[01:13:41] ऑफ़ डीएनए।
[01:13:43] तो ये जो एंजाइम है ये हमारा क्या करता है?
[01:13:45] यूरडीन को थाइमिडीन में कन्वर्ट करता है।
[01:13:47] और जहां जब ये एंजाइम ही नहीं होगा तो क्या होगा?
[01:13:49] यूरडीन हमारा थाइयडीन में कन्वर्ट नहीं होगा।
[01:13:50] और जब थाइयडीन में कन्वर्ट नहीं होगा तो हमारा
[01:13:52] डीएनए बनेगा नहीं।
[01:13:54] क्योंकि ये हमारा डीएनए का एक बहुत ही मेजर कंपोनेंट होता है।
[01:13:57] सम परमडीन एंडागोनिस्ट कैन बी इनकर्पोरेटेड।
[01:13:59] मतलब कि कुछ हमारे पिमडीन एंडागोनिस्ट
[01:14:00] डीएनए और आए में भी इनकर्पोरेट मतलब वही
[01:14:02] है कि उसके अंदर फिट हो मतलब अटैच हो जाते
[01:14:04] हैं।
[01:14:06] ठीक है? डिसरप्टिंग नॉर्मल न्यूक्लिक एसिड फंक्शन जिसकी वजह से नॉर्मल फंक्शन
[01:14:08] यहां पे डिसररप्ट हो जाते हैं।
[01:14:10] बाय इनबिटिंग डीएनए सिंथेसिस एंड रिपेयर
[01:14:12] मैकेनिज़्म दीज़ ट्रग्स इवेंचुअली लीड्स टू
[01:14:14] सेल डेथ एस्पेशली इन रैपिडली डिवाइडिंग
[01:14:16] सेल डेथ एस्पेशली इन रैपिडली डिवाइडिंग कैंसर सेल्स।
[01:14:18] और देखो इन सभी की वजह से क्या होता है?
[01:14:20] अल्टीमेटली हमारी सेल की डेथ हो जाती है।
[01:14:22] तो देखिए ये हमारे कॉमन मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन है।
[01:14:24] इसको आप लोग सभी ड्रग इन तीनों ड्रग्स में यूज़ कर सकते हो।
[01:14:26] तो ये था हमारा यहां पे फोलेट एंडागोनिस्ट।
[01:14:29] और इसके अंदर जो भी ड्रग्स थी बाकी अब हम लोग यहां पे इन सभी का कंबाइंड एमओ अगर देखें तो ज्यादातर ड्रग्स हमारी वेल अब्सॉर्ब हो जाती हैं।
[01:14:33] और मेनली हमारा देखिए ये सब चीजें कुछ खास थोड़ी है।
[01:14:35] वही है कि हमारा किडनी लिवर से मेटाबोलाइज किडनी सेक्स किट सारी दवा का यही तो होता है।
[01:14:40] आपको पता है ज्यादातर दवाओं का यही सब होता है।
[01:14:41] एडवर्स इफेक्ट वही लगभग सिमिलर से ही है।
[01:14:43] थेरेपी जितने भी टाइप के कैंसर वगैरह होते हैं।
[01:14:45] ठीक है?
[01:14:47] नाउ उसके बाद अब अगर हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने एंटीबायोटिक्स के बारे में जो कि हमारे कैंसर के ट्रीटमेंट में यूज़ करी जाती हैं।
[01:14:51] अब देखिए एंटीबायोटिक्स का वैसे जनरली तो हमारा यूज़ जो है बैक्टीरिया वगैरह को किल करने में होता है।
[01:14:56] लेकिन यहां पे कुछ हमारी एंटीबायोटिक्स ऐसी भी देखी गई जो कि हमारी कैंसरस सेल्स को रोकने में हेल्पफुल थी।
[01:15:00] ठीक है?
[01:15:02] तो उसके अंदर हम लोग यहां पे उन्हीं एंटीबायोटिक्स के बारे में पढ़ेंगे।
[01:15:04] तो एंटीबायोटिक्स हमारी वो ड्रग्स होती हैं जो कि माइक्रो ऑर्गेनिज्म से हमें देखने को मिलती हैं।
[01:15:06] बाकी दे हैव बीन रिसेंटली रिकॉग्नाइज्ड एज एन इंपॉर्टेंट क्लास ऑफ एंटी
[01:15:16] एन इंपॉर्टेंट क्लास ऑफ एंटी नियोप्लास्टिक एजेंट।
[01:15:18] मतलब रिसेंटली देखा गया कि जो एंटीबायोटिक्स हैं कुछ एंटीबायोटिक्स हैं वो एंटीनियोप्लास्टिक एजेंट की तरह ही काम करती हैं।
[01:15:23] ठीक है? तो रिसेंटली इनको ऐसा पहचाना गया।
[01:15:25] बाकी ये हमारी दीज़ आर द क्लास ऑफ़ ड्रग्स नोन फॉर देयर एबिलिटी टू इनबिट द कैंसर सेल ग्रोथ।
[01:15:30] तो ये हमारी कैंसर सेल ग्रोथ को यहां पे इनबिट कर देती हैं।
[01:15:33] ठीक है? अभी हमारे सिलेबस में इसके अंदर हमें यहां पे जो है डैक्टिनोमाइसिन, डाउनलोरोबिसिन, डॉक्सोबिसिन और ब्लमाइसिन के बारे में पढ़ना है।
[01:15:40] अब अगर हम लोग यहां पे अपने एंटीबायोटिक्स के मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन की बात करें तो देखिए सबसे पहले हम लोग यहां पे एक कॉमन मैकेनिज्म ऑफ़ एक्शन देखेंगे जो इन चारों में ही यूज़ हो जाएगा।
[01:15:48] बाकी इसके बाद हम लोग अलग-अलग तो देखेंगे ही।
[01:15:50] ठीक है? तो एंटीबायोटिक्स यूज़्ड एन एंटीनोप्लास्टिक एजेंट वर्क थ्रू सेवरल मैकेनिज़्म।
[01:15:55] तो यहां पे देखिए ये मतलब ऐसा नहीं है कि इसका कोई एक मैकेनिज़्म है।
[01:15:57] ये बहुत सारे मैकेनिज़्म के थ्रू काम करती है।
[01:15:59] इसके अंदर कुछ हम लोग देखते हैं।
[01:16:01] जैसे पहला आ जाता है इंटरकेलेशन इंटू डीएनए।
[01:16:03] देखिए इंटरकाइलेशन का भी मतलब वही है कि हमारा डीएनए के अंदर जाके ये जो है कह सकते हो अटैच हो जाती हैं।
[01:16:10] ठीक है? तो एंटीबायोटिक्स सच एज डॉक्सिन एंड डायनोरोबिसिन इंजर्ड देमसेल्व्स बिटवीन डीएनए बेस पेयर्स मतलब कि डीएनए बेस के
[01:16:17] डीएनए बेस पेयर्स मतलब कि डीएनए बेस के पेयर्स के बीच में जाके इंसल्ट हो जाती
[01:16:19] पेयर्स के बीच में जाके इंसल्ट हो जाती हैं।
[01:16:21] इंसल्ट मतलब कि कह सकते हो अपने आप को मतलब उसके अंदर अह मतलब सिचुएट कर लेती हैं।
[01:16:25] मतलब उसके अंदर स्थापित कर लेती है।
[01:16:26] ठीक है?
[01:16:28] व्हिच इंटरफेयर्स विद नॉर्मल फंक्शन ऑफ़ डीएनए।
[01:16:30] जिसकी वजह से क्या होता है?
[01:16:32] हमारा नॉर्मल डीएनए फंक्शन इनबिट मतलब इंटरफेयर होने लगता है।
[01:16:34] दिस इंटरकलेशन डिस्ट्रब्ट्स डीएनए रेप्लिकेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन।
[01:16:37] मतलब इसकी वजह से क्या होता है कि हमारा डीएनए रेप्लिकेशन इंटरफेयर हो जाता है।
[01:16:39] ठीक है?
[01:16:41] उसका ट्रांसक्रिप्शन यानी कि डीएनए का प्रोटीन सॉरी आरएनए में कन्वर्ट होना भी इनबिट हो जाता है।
[01:16:45] लीडिंग टू सेल साइकिल अरेस्ट एंड एपोप्टोसिस।
[01:16:47] तो जिसकी वजह से क्या होता है कि जो हमारी सेल स मतलब जो हमारा जो हमारी सेल है ठीक है?
[01:16:53] है वो सेल साइकिल में अरेस्ट मतलब कि अरेस्ट का मतलब वही है कि सेल साइकिल में फंस जाती है।
[01:16:57] मतलब वो डिवीज़ अच्छे से हो नहीं पाता है।
[01:16:59] और यहां पे एपोप्टोसिस हो जाती है।
[01:17:01] एपोप्टोसिस का मतलब होता है प्रोग्राम सेल डेथ।
[01:17:04] तो देखिए हमारी बॉडी में ना एक मैकेनिज्म होता है एपोप्टोसिस।
[01:17:07] जिसकी वजह से क्या होता है कि हमारी बॉडी की जो बेकार सेल्स हैं वो यहां पे हमारी बॉडी खुद ही उनको मार देती है।
[01:17:11] लेकिन कैंसर में क्या होता देखिए कैंसरस सेल्स भी हमारी बॉडी के लिए अच्छी तो होती नहीं है।
[01:17:14] बेकार सेल्स होती हैं।
[01:17:16] लेकिन ये कुछ ऐसा कर देती है कि ये एपोपोसिस से बच
[01:17:18] कुछ ऐसा कर देती है कि ये एपोपोसिस से बच जाती हैं।
[01:17:18] एस्केप कर जाती हैं।
[01:17:20] लेकिन यहां पे क्या होता है कि जब ये इंटरकलेशन हो जाता है तो यहां पे इनका स्ट्रक्चर थोड़ा चेंज हो जाता है।
[01:17:23] जिसकी वजह से हमारी बॉडी उनको किल करना स्टार्ट कर देती है।
[01:17:27] ठीक है?
[01:17:29] नाउ इसका सेकंड मैकेनिज्म होता है हमारा इनहिबिशन ऑफ टोपो आइसोमरेज।
[01:17:32] तो देखिए यहां पे टोपो आइसोमरेज क्या होता है?
[01:17:34] इन एडिशन टू इंटरकलेशन यानी इंटरकलेशन के अलावा ये हमारी टोपो आइसोमेरिस सेकंड टू मतलब कि टोपो आइसोमेरेज टू हमारा एक एंजाइम होता है उसको भी इनबिट कर देती हैं
[01:17:36] और ये जो एंजाइम है ये हमारा जो है डीएनए रेप्लिकेशन और रिपेयर में बहुत ही मेजर रोल प्ले करता है।
[01:17:39] तो इसको भी यहां पे इनबिट कर देती हैं।
[01:17:41] दिस इनहिबिशन कॉजेस डीएनए स्ट्रैंड्स ब्रेकेज।
[01:17:43] अब इस इनबिशन की वजह से क्या होता है कि हमारे डीएनए स्ट्रैंड्स ब्रेक होने लगते हैं।
[01:17:45] ठीक है?
[01:17:47] और वो जो उनका रिपेयर प्रोसेस होता है वो यहां पे इंपेयर हो जाता है।
[01:17:49] जिसकी वजह से हमारी सेल डेथ हो जाती है।
[01:17:51] अब थर्ड मैकेनिज़्म इसका हो जाता है फॉर्मेशन ऑफ़ फ्री रेडिकल्स।
[01:17:53] तो ये हमारी कुछ फ्री रेडिकल्स मतलब कि फ्री रेडिकल्स आप लोग समझ रहे होंगे जहां पे फ्री इलेक्ट्रॉन्स होते हैं।
[01:17:55] ठीक है?
[01:17:56] तो यहां पे उनका फॉर्मेशन भी कर देती है जिसकी वजह से क्या होता है?
[01:17:58] एंटीबायोटिक्स सच एज ब्लियोमाइसिस मतलब कि कुछ हमारी एंटीबायोटिक जैसे हमारा ब्लियोमाइसिन क्या
[01:18:19] एंटीबायोटिक जैसे हमारा ब्लियोमाइसिन क्या होता है?
[01:18:21] हमारे फ्री रेडिकल्स जनरेट कर देती हैं।
[01:18:23] जिसकी वजह से हमारे डीएनए में एक ऑक्सीडेटिव डैमेज देखने को मिलता है।
[01:18:24] जिसकी वजह से क्या होता है? लीडिंग टू सिंगल एंड डबल स्टैंड ब्रेकेज।
[01:18:28] जिसकी वजह से डीएनए का जो स्टैंड्स है उनके अंदर यहां पे ब्रेकेज देखने को मिलने लगता है।
[01:18:31] दिस डैमेज इनबिट्स द डीएनए रेप्लकेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन रिजल्टिंग इन सेल डेथ।
[01:18:35] अब इसकी वजह से क्या होता है कि ना डीएनए अच्छे से रेप्लिकेट होता है ना वो आरएनए में कन्वर्ट हो पाता है और सेल डेथ हो जाती है।
[01:18:40] और फाइनली यहां पे क्रॉस लिंकिंग मतलब वही है कि डीएनए के जो बेस है वो यहां पे क्रॉस लिंक हो जाते हैं।
[01:18:44] यानी एटनीन या तो हमारा ग्वानिन से लिंक हो जाएगा।
[01:18:47] मतलब जो क्रॉस लिंकिंग हो जाएगी।
[01:18:49] ठीक है? जो तो ये थे हमारे यहां पे एंटीबायोटिक्स जो कि हमारे कैंसर के ट्रीटमेंट में यूज़ करे जाते हैं।
[01:18:53] बाकी अगर हम लोग यहां पे इनके फार्माकोनेटिक्स पैराटर्स की बात करें तो ये आप लोग देख सकते हो।
[01:18:56] तो ठीक है। एडवर्स इफेक्ट हमारा वही हेयर लॉस वगैरह है, स्किन रेश, लंग, टॉक्सिसिटी, थरा प्रोड्यूसेस की बात करें तो हमारा जो भी टाइप का कैंसर है, ओवेरियन, ब्रेस्ट कैंसर, ब्लैडर कैंसर ये सब में हम लोग यहां पे इसका यूज़ करते हैं।
[01:19:06] नाउ नेक्स्ट हम लोग यहां पे बात करते हैं अपने कुछ प्लांट प्रोडक्ट्स के बारे में जो कि हमारे नेचुरल नेचुरल प्रोडक्ट्स होते हैं और कैंसर के ट्रीटमेंट में इनका यूज़ किया जाता है।
[01:19:14] तो देखिए प्लांट प्रोडक्ट्स की अगर हम लोग यहां पे बात करें तो ये हमारे सिंपल
[01:19:20] लोग यहां पे बात करें तो ये हमारे सिंपल से वो एजेंट्स होते हैं जो कि नेचुरली
[01:19:22] से वो एजेंट्स होते हैं जो कि नेचुरली ड्राइव होते हैं।
[01:19:23] ठीक है? यानी प्लांट से ड्राइव होते हैं।
[01:19:23] ठीक है? यानी प्लांट से इनको ड्राइव किया जाता है।
[01:19:26] तो मैकेनिज़्म ऑफ़ एक्शन की बात करें तो देखिए वही है कि
[01:19:28] ऑफ़ एक्शन की बात करें तो देखिए वही है कि हमारा जो प्लांट प्रोडक्ट्स होते हैं।
[01:19:29] ठीक है? तो ये हमारे बहुत ही वेरियस मैकेनिज्म से काम करते हैं।
[01:19:32] बाकी अगर हम लोग यहां पे बात करें तो थोड़ा सा देखिए इसके लिए भी आप
[01:19:34] लोगों को सेल साइकिल थोड़ा सा समझना पड़ेगा।
[01:19:38] सेल डिवीज़न देखिए जैसा हम लोगों ने देखा था कि सेल डिवीज़न के अंदर दो फज़ होते हैं।
[01:19:42] इंटरफ़ेस और एम फज़।
[01:19:44] अब इंटरफ़ेस के अंदर तीन फेस होते हैं।
[01:19:46] G1 फज़, G2 फेस, एस फेस।
[01:19:46] ठीक है? बाकी अगर हम लोग एम फज़ की बात करें एम फज़ तो इसमें आप लोग देखिए जो एम फज़ है
[01:19:50] इसके अंदर हमारे दो स्टेप होते हैं।
[01:19:51] कार्िनेसिस साइटोकाइनेसिस।
[01:19:54] देखिए कार्ोकाइनेसिस में होता है हमारा यहां पे
[01:19:55] न्यूक्लियर डिवीज़।
[01:19:58] यानी कि जो हमारा एक सेल है उसका जो न्यूक्लियस है वो डिवाइड
[01:20:00] हो के दोनों सेल्स में चला जाता है।
[01:20:01] और साइटोकाइनेसिस में क्या होता है कि सेल का
[01:20:03] साइटोप्लाज्म डिवाइड होता है।
[01:20:05] ठीक है? मतलब साइटोप्लाज्म डिवाइड हो के दोनों सेल
[01:20:07] में चला जाता है।
[01:20:08] तो देखिए अगर हम लोग इस कारियोकाइनेसिस की बात करें तो इसके अंदर
[01:20:10] भी चार फेस होते हैं।
[01:20:12] प्रोफेज, मेटाफेज, एनाफेज और टेलोफेज़।
[01:20:15] तो देखिए ये अगर हम लोग अपने इस मेटाफेज की बात करें मेटाफेज
[01:20:17] तो मेटाफेज में होता क्या है कि जो हमारे
[01:20:19] क्रोमोसोम्स होते हैं ठीक है तो वो मतलब
[01:20:21] क्रोमोसोम्स होते हैं ठीक है तो वो मतलब यहां पे न्यूक्लियस पूरा गायब हो जाता है।
[01:20:23] यहां पे न्यूक्लियस पूरा गायब हो जाता है और यहां पे क्रोमोसोम्स मतलब थोड़ा सेंटर
[01:20:25] और यहां पे क्रोमोसोम्स मतलब थोड़ा सेंटर में अलाइन होना स्टार्ट हो जाते हैं मतलब
[01:20:27] में अलाइन होना स्टार्ट हो जाते हैं मतलब सेंटर में आ जाते हैं और ये जो हमारा एक
[01:20:29] सेंटर में आ जाते हैं और ये जो हमारा एक स्ट्रक्चर होता है माइटोटिक स्पिंडल ठीक
[01:20:31] स्ट्रक्चर होता है माइटोटिक स्पिंडल ठीक है इसको ध्यान से समझिएगा माइटोटिक
[01:20:33] है इसको ध्यान से समझिएगा माइटोटिक स्पिंडल हमारा एक स्ट्रक्चर होता है ठीक
[01:20:35] स्पिंडल हमारा एक स्ट्रक्चर होता है ठीक है तो ये हमारा बना होता है
[01:20:38] है तो ये हमारा बना होता है हमारे जो है हमारे ये हमारा बना होता है
[01:20:41] हमारे जो है हमारे ये हमारा बना होता है हमारे इस माइक्रोब्युलस से तो ये जो
[01:20:43] हमारे इस माइक्रोब्युलस से तो ये जो माइटोटिक स्पेंडल होते हैं, ठीक है?
[01:20:45] तो ये बेसिकली हमारे माइक्रोटिब्यूल्स का ही
[01:20:47] बेसिकली हमारे माइक्रोटिब्यूल्स का ही अपडेटेड फॉर्म होते हैं। ठीक है?
[01:20:48] अपडेटेड फॉर्म होते हैं। ठीक है? माइक्रोटिब्यूल्स से बने होते हैं।
[01:20:50] तो होता क्या है? ये माइटोटिक स्पेंडल ना ये
[01:20:53] हमारे फर्दर जो है इन क्रोमोसोम्स को
[01:20:55] सेंटर में अलाइन करते हैं। ठीक है?
[01:20:56] तो ये देखिए ये इनके साथ जो है फाइबर के साथ
[01:20:58] मतलब एक कह सकते हो इनको सेंटर में अलाइन
[01:21:01] करने का काम करते हैं। तो मतलब ये हमारा
[01:21:02] मेटाफेज में ये सारी चीजें होती हैं। ठीक
[01:21:04] है? तो ये आप लोग समझना। तो होता क्या है
[01:21:06] कि ये जो हमारे प्लांट प्रोडक्ट्स होते
[01:21:08] हैं जैसे हमारा विन ब्लास्टिन विन
[01:21:09] क्रिस्टन हो गया। ये हमारा इनबिट कर देते
[01:21:11] हैं पॉलीमराइजेशन ऑफ ट्युबुलिन इंटू
[01:21:13] माइक्रोटब्यूल्स। तो देखिए हमारा एक
[01:21:15] ट्युबुलिन प्रोटीन होता है तो यही हमारा
[01:21:16] माइक्रोटब्यूल्स में पॉलीमराइज हो के
[01:21:18] कन्वर्ट होता है। तो ये इनबिट कर देते
[01:21:20] हैं। मतलब ये ट्युबुलिन को
[01:21:21] माइक्रोटब्यूल्स में कन्वर्ट ही नहीं होने
[01:21:23] माइक्रोटब्यूल्स में कन्वर्ट ही नहीं होने देते हैं।
[01:21:24] जिसकी वजह से क्या होता है?
[01:21:24] देते हैं।
[01:21:24] जिसकी वजह से क्या होता है?
[01:21:26] डिसररप्टिंग द स्पिंडल फॉर्मेशन जिसकी वजह से ये जो हमारा माइटोटिक स्पिंडल है ये हमारा बन ही नहीं पाता है।
[01:21:30] और जब ये बनेगा नहीं तो ये सेंटर में इसको अलाइन नहीं कर पाएगा।
[01:21:33] और जब ये सेंटर में अलाइन नहीं होगा।
[01:21:36] तो देखिए इसके बाद जो हमारा एनाफेज होता है मेटाफेज के बाद इसमें क्या होता है?
[01:21:39] ये जो हमारे डीएनए है मतलब सॉरी ये जो हमारे क्रोमोसोम्स हैं ये हमारे अलग हो जाते हैं।
[01:21:43] मतलब इनमें से देखिए ये चार इधर आ जाते हैं चार उधर।
[01:21:46] ठीक है?
[01:21:46] तो ये नहीं हो पाता क्योंकि यहां पे जब ये माइटोटिक स्मिडल ही नहीं बनेगा तो ये चारों अलग कैसे होंगे?
[01:21:51] तो वही चीज़ है कि जिसकी वजह से हमारा सेल डिवीज़ ब्लॉक हो जाता है।
[01:21:53] ड्रग सच एज एटोपोसाइट इनबिट्स द टोपो आइसोमरेज टू एंड एंजाइम क्रूशियल फॉर डीएनए स्टैंड्स ब्रेकेज एंड सेल डेथ।
[01:21:59] तो वही चीज है यहां पे टोपो आइसोमेरिस टू को भी यहां पे ये इनबिट करने का काम करते हैं।
[01:22:04] तो देखिए इस तरीके से हमारे प्लांट प्रोडक्ट्स वर्क करते हैं।
[01:22:06] बाकी तो ये थे हमारे यहां पे प्लांट प्रोडक्ट्स जिनका यूज़ हम लोग यहां पे एंटी कैंसर एजेंट्स की तरह करते हैं।
[01:22:10] बाकी यहां पे इनके फार्माकोनेटिक्स और एडवर्स इफेक्ट थेरेपिक एजेंट आप लोग देख लीजिएगा।
[01:22:14] और इस तरीके से हमारी यूनिट फोर भी यहां पे कंप्लीट हो जाती है।
[01:22:18] और मिलते हैं हम लोग यहां पे नेक्स्ट वीडियो में।
[01:22:19] तब तक के लिए, थैंक यू सो मच।