# The Marriage Contract of Revenge Episode 31 to 55  | new pocket fm story in hindi | #pocketfm

https://www.youtube.com/watch?v=AuvTUl-c8S0
Translation: en

[00:00] एपिसोड 31 टू 55, अगले दिन अक्षत ने शोरूम जाकर रवि को उसकी पसंद की कार दिला दी।
  Episode 31 to 55, the next day Akshat went to the showroom and got Ravi the car of his choice.

[00:06] एक हफ्ते बाद ताऊजी और चाचाजी अपनी पत्नियों के साथ हवेली वापस लौटा आए।
  A week later, Tauji and Chachaji returned to the mansion with their wives.

[00:11] अक्षत के ठीक होने की खराब उन तक पहले ही पहुंच चुकी।
  The news of Akshat's recovery had already reached them.

[00:13] साक्षी घर में अब कम ही रहती थी इसलिए वह उसे भी कुछ बोल नहीं पाते थे।
  Sakshi now rarely stayed at home, so they couldn't say anything to her either.

[00:18] धीरे-धीरे वक्त बीता आज पूरे 2 महीने होने वाले थे।
  Slowly time passed, today it was going to be exactly 2 months.

[00:20] साक्षी को ऑफिस ज्वाइन किए हुए ऑफिस में किसी को भी यह बात नहीं पता थी कि साक्षी अक्षत की पत्नी है।
  Since Sakshi joined the office, no one in the office knew that Sakshi is Akshat's wife.

[00:27] ऑफिस की सभी लड़कियां उससे जालती उन्हीं में से एक लड़की राशि नाम की थी जो अक्षत को पसंद करती थी।
  All the girls in the office were jealous of her; among them was a girl named Rashi who liked Akshat.

[00:31] अक्षत का साक्षी के प्रति झुकाव देख उसे साक्षी शूल की तरह चुभती थी।
  Seeing Akshat's inclination towards Sakshi, she pricked her like a thorn.

[00:36] इन दो महीनों में अक्षत काफी हद तक साक्षी को समझने लग था।
  In these two months, Akshat had started understanding Sakshi to a great extent.

[00:40] अब उसे साक्षी द्वारा की जाने वाली छोटी-छोटी चीजों की आदत पड़ चुकी थी।
  Now he had gotten used to the little things done by Sakshi.

[00:42] अब उन दोनों की दोस्ती पक्की हो चुकी थी या कहें अक्षत साक्षी को पसंद करने लगा था।
  Now their friendship had become firm, or rather, Akshat had started liking Sakshi.

[00:46] पर उसे यह बात खुद ही समझ नहीं आ रही थी।
  But he himself could not understand this.

[00:49] रवि और साक्षी के बीच हल्कीफुल्की बातें होने लगी थी।
  Light conversations had started happening between Ravi and Sakshi.

[00:53] साक्षी रवि की आंखों में अपने लिए एहसास महसूस कर चुकी थी।
  Sakshi had felt the feeling for herself in Ravi's eyes.

[00:55] उसने यह बात राघव या अक्षत को बात के उनके बीच के प्यार में दरार नहीं डालनी चाहती थी।
  She did not want to tell this to Raghav or Akshat, so as not to create a rift in the love between them.

[00:59] इसलिए रवि से खुद ही एक उचित दूरी बनके
  Therefore, she herself maintained a proper distance from Ravi.

[01:01] रखती थी।
  She used to keep.

[01:04] रवि अपने केबिन में बैठ साक्षी की इंतजार कर रहा था।
  Ravi was sitting in his cabin waiting for Sakshi.

[01:06] उसने थोड़ी देर पहले ही उसे एक इंपॉर्टेंट फाइल लाने को कहा था।
  He had asked her to bring an important file just a little while ago.

[01:11] मे आई कम बाहर से साक्षी की आवाज आए।
  A voice of Sakshi came from outside, 'May I come?'

[01:13] साक्षी की आवाज सुन रवि ने मुस्कुराते हुए कहा, यस।
  Hearing Sakshi's voice, Ravi said with a smile, 'Yes.'

[01:16] यह फाइल आपने मांगाई थी।
  This is the file you asked for.

[01:19] साक्षी ने फाइल टेबल पर रखते हुए कहा।
  Sakshi said while placing the file on the table.

[01:19] जी, आप बैठाइए।
  Yes, please have a seat.

[01:21] कुछ बात करनी है।
  I need to talk about something.

[01:21] रवि ने सर्द आवाज में कहा।
  Ravi said in a cold voice.

[01:24] नहीं मैं यही ठीक हूं।
  No, I'm fine here.

[01:24] आप कहिए क्या बात करनी है?
  You tell me, what do you want to talk about?

[01:26] साक्षी ने रूखे स्वर में जवाब दिया।
  Sakshi replied in a curt tone.

[01:28] साक्षी मुझे आपसे जरूरी बात करनी है।
  Sakshi, I need to talk to you about something important.

[01:31] मैं आपसे रवि कुछ कहता कि साक्षी ने उसकी बातों को बीच में काटते हुए कहा, साक्षी नहीं भाभी हूं।
  As Ravi was about to say something to her, Sakshi interrupted him and said, 'I am not Sakshi, I am your sister-in-law.'

[01:35] मैं आपकी साक्षी ने हल्के गुस्से से कहा।
  'I am your...' Sakshi said with slight anger.

[01:37] आज उसे आपने डर सच होता हुआ दिखा रहा था।
  Today, her fear was appearing to come true.

[01:39] इसलिए उसने रवि को बीच में ही टोक दिया।
  That's why she interrupted Ravi mid-sentence.

[01:41] वह दो भाइयों के अलग की वजह नहीं बनना चाहती थी।
  She did not want to become the reason for the separation of two brothers.

[01:44] साथ ही वह इतने दिनों में यह भी अच्छे से समझ गई थी कि अक्षत रवि को बहुत प्यार करता है।
  Moreover, she had also understood well by now that Akshat loves Ravi very much.

[01:47] अगर उसने रवि के लिए साक्षी को छोड़ा दिया तो क्या होगा?
  What would happen if he left Sakshi for Ravi?

[01:51] उसका कैसे रहेगी?
  How would she live?

[01:53] वो अपने अक्षत के बिना यह सोचा कि ही उसका गला सूख गया।
  Just thinking about being without her Akshat made her throat dry.

[01:55] उसने थूक निगलकर अपना गला तर किया।
  She swallowed her saliva to moisten her throat.

[01:58] आप ठीक है साक्षी के चेहरे का उड़ा रंग देखा।
  'Are you okay?' Ravi asked, seeing the drained color on Sakshi's face.

[02:01] हां मैं ठीक हूं।
  Yes, I am fine.

[02:01] क्या मैं अब जा सकती हूं?
  May I go now?

[02:01] साक्षी
  Sakshi

[02:03] ने पूछा।
  He asked.

[02:05] बस मेरे एक सवाल का जवाब दे दीजिए।
  Just answer one question of mine.

[02:07] फिर आप जा सकती हैं?
  Then you can go?

[02:07] रवि ने साक्षी को देखते हुए कहा।
  Ravi said, looking at Sakshi.

[02:10] पूछिए साक्षी ने सामान्य तरीके से कहा,
  Ask, Sakshi said in a normal tone,

[02:12] आपकी शादी कोई नॉर्मल शादी नहीं है।
  Your marriage is not a normal marriage.

[02:14] आपकी शादी जबरन शादी है।
  Your marriage is a forced marriage.

[02:16] आप अलग क्यों नहीं हो जाती है भाई से?
  Why don't you separate from your brother?

[02:16] रवि ने साक्षी के चेहरे को देखते हुए कहा
  Ravi said, looking at Sakshi's face

[02:19] क्या मतलब है आपका साक्षी ने अचरत से कहा
  What do you mean? Sakshi said in surprise

[02:22] डिवोर्स क्यों नहीं ले लेती भाई से पति है
  Why don't you get a divorce from your brother? He is your husband

[02:24] अक्षत जी मेरे प्यार करती हूं मैं उनसे
  Akshat ji, I love him,

[02:26] कहते कहते साक्षी की आंखों नम हो चली थी
  As she spoke, Sakshi's eyes became moist.

[02:28] कितना आसान होता है कहना डिवोर्स ले लो
  How easy it is to say, get a divorce.

[02:30] क्या पतिप्नी का रिश्ते सिर्फ एक कागज के टुकड़े पर साइन करने से खत्म हो जाता क्या
  Does the husband-wife relationship end just by signing a piece of paper?

[02:34] मांग में भरे लाल सुर्ख सिंदूर का रंग बस एक साइन से फीका हो जाता है
  Does the bright red vermilion in the parting of the hair fade with just one signature?

[02:39] गले में पहने मंगलसूत्र जो सुहाग की निशानी है क्या वह एक साइन से सिर्फ श्रृंगार का एक गहना मात्र हो जाता है
  Does the mangalsutra worn around the neck, which is a symbol of marriage, become just a piece of jewelry with one signature?

[02:45] साक्षी ने रवि का कॉलर पकड़ कहा
  Sakshi grabbed Ravi's collar and said,

[02:47] होते कौन हो तुम हम दोनों पतिपत्नी के बीच बोलने वाले
  Who are you to speak between us husband and wife?

[02:50] आज के बाद दूर रहना मुझे कह साक्षी ने एक झटके से उसकी कॉलर छोड़ केबिन से बाहर निकाल वाशरूम की तरफ बांध गई
  Stay away from me from today, saying this, Sakshi released his collar with a jerk, went out of the cabin, and headed towards the washroom.

[02:56] रवि के कानों में सिर्फ साक्षी द्वारा कहे शब्द गूंज रहे थे
  Only the words spoken by Sakshi were echoing in Ravi's ears.

[02:58] पति है अक्षत जी मेरे प्यार करती हूं मैं उनसे
  He is my husband, Akshat ji, I love him.

[03:00] रवि ने अपने हाथों से कान धका लिए
  Ravi covered his ears with his hands.

[03:02] साक्षी के कहे शब्द उसके कानों में गर्म शीशे की
  Sakshi's words were like hot glass in his ears.

[03:04] तरह पड़ रहे थे उसने गुस्से से अपने केबिन का सारा सामान फेंक दिया।
  He was falling in such a way that he angrily threw all the stuff in his cabin.

[03:07] तब भी जब उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ तो वह कार की छबी लेकर बाहर निकाल गया।
  Even then, when his anger did not subside, he took the car keys and went out.

[03:11] रवि की कार सड़क पर तेजी से दौड़े जा रही थी।
  Ravi's car was speeding on the road.

[03:14] आंसू की वजह से रास्ता एकदम धुंधला दिख रहा था।
  Because of the tears, the road looked completely blurry.

[03:16] उसने कार सड़क के किनारे खड़ी कर अपने आंसुओं को बेरुखी से पहुंचा दिए।
  He parked the car on the side of the road and wiped his tears away indifferently.

[03:20] रवि काफी समय तक वहीं बैठ रहा।
  Ravi sat there for a long time.

[03:23] उसके फोन की रिंग से उसकी तंद्रा टूटी।
  His trance was broken by the ring of his phone.

[03:25] फोन पर अंकित का नंबर फ्लैश हो रहा था।
  Ankit's number was flashing on the phone.

[03:27] रवि ने दो-तीन बार फोन काट दिया।
  Ravi hung up the phone two or three times.

[03:29] जब लगातार अंकित का कॉल आता रहा तो उसने हारकार फोन उठान पड़ा।
  When Ankit's call kept coming continuously, he had to reluctantly pick up the phone.

[03:31] हेलो रवि ने अपनी आवाज को सामान्य करने की कोशिश करते हुए कहा।
  Hello, Ravi said, trying to normalize his voice.

[03:34] तू रो रहा।
  You are crying.

[03:36] अंकित ने उसकी आवाज को पहचान लिया था।
  Ankit had recognized his voice.

[03:39] नहीं तो रवि ने खुद को संयमित करके कहा।
  No, Ravi said, composing himself.

[03:41] क्या हुआ है बता।
  Tell me what happened.

[03:43] अंकित ने जोर देते हुए कहा।
  Ankit insisted and said.

[03:46] सब खत्म हो गया भाई।
  Everything is over, brother.

[03:48] आज मैंने उसे हमेशा के लिए खो दिया।
  Today I lost her forever.

[03:51] रवि का सब्र का बांध टूट चुका था।
  Ravi's dam of patience had broken.

[03:53] क्या खत्म हो गया भाई?
  What is over, brother?

[03:56] किसे तूने खो दिया?
  Whom did you lose?

[03:58] अंकित को रवि की कोई भी बात समझ नहीं आ रही थी।
  Ankit could not understand anything Ravi was saying.

[04:00] रवि ने साक्षी के साथ हुई सारी बातें अंकित को कह सुनाई।
  Ravi told Ankit everything that had happened with Sakshi.

[04:01] जिसे सुन अंकित ने कहा मैंने पहले ही कहा था भूल जाओ उसे।
  Hearing which, Ankit said, I had already told you to forget her.

[04:04] पर तुझे कहा बात माननी है।
  But you never listen.

[04:06] मेरी अंकित को रवि के पागल पाने पर गुस्सा आ रहा था।
  Ankit was angry at Ravi's madness.

[04:08] बहुत दर्द हो रहा है।
  It hurts a lot.

[04:07] भाई।
  Brother.

[04:07] रवि ने लड़खड़ती जुबान में कहा।
  Ravi said in a slurred voice.

[04:09] तू कहां है?
  Where are you?

[04:09] अंकित ने चिंता से कहा बाहर हूं।
  Ankit said with concern, I am outside.

[04:11] रवि ने कहा तू घर जा।
  Ravi said, you go home.

[04:14] मैं सुबह की पहली फ्लाइट पकड़ के आता हूं।
  I will catch the first flight in the morning and come.

[04:16] अंकित ने रवि को समझाते हुए कहा, रवि काफी समय तक वही बैठा रहा।
  Ankit said while explaining to Ravi, Ravi sat there for a long time.

[04:19] दुबरा अंकित के फोन पर काफी समझने से रवि कुछ सामान्य होकर उसने गाड़ी हवेली की ओर घुमा दी।
  After much persuasion on Ankit's phone again, Ravi became somewhat normal and turned the car towards the mansion.

[04:24] काफी देर वाशरूम में रहने के बाद साक्षी बाहर निकाली ही थी कि किसी से टक्कर गई देखा तो सामने अक्षत खड़ा था।
  After staying in the washroom for a long time, Sakshi had just come out when she bumped into someone; she saw that Akshat was standing in front.

[04:31] साक्षी की लाल आंखें देख अक्षत ने पूछा क्या हुआ?
  Seeing Sakshi's red eyes, Akshat asked, what happened?

[04:33] कुछ नहीं।
  Nothing.

[04:36] साक्षी ने नीचे देखते हुए कहा, फिर यह आंखों क्यों लाल है?
  Sakshi said while looking down, then why are these eyes red?

[04:37] अक्षत ने साक्षी का हाथ पकड़ उसकी आंखों में देखते हुए कहा।
  Akshat held Sakshi's hand and said while looking into her eyes.

[04:42] आंख में कचरा चला गया था।
  Some dust had gone into the eye.

[04:42] साक्षी ने साफ झूठ बोल दिया।
  Sakshi told a clear lie.

[04:45] अक्षत को साक्षी की बात कुछ खटकी।
  Akshat found Sakshi's words a bit suspicious.

[04:47] उसने उसका हाथ पकड़ाकर कहा, क्या बात है बताइए किसी ने कुछ कहा क्या?
  He held her hand and said, what is the matter, tell me, did someone say something?

[04:52] अक्षत के इस तरह पूछने से एक बार साक्षी का मन हुआ सब बता दे अक्षत को।
  Because of Akshat asking like this, Sakshi felt like telling everything to Akshat.

[04:54] फिर खुद ही सोचने लगी कौन है तू साक्षी?
  Then she started thinking to herself, who are you, Sakshi?

[04:56] अक्षत की सिर्फ एक जबरन पत्नी जिसे उसने आज तक एक नजर प्यार से देख तक नहीं है।
  Just a forced wife of Akshat, whom he has not even looked at with love even once till today.

[05:00] वो क्यों तेरी बातों पर विश्वास करेंगे।
  Why would he believe your words?

[05:02] सोच साक्षी ने अपने सिर से झटक कर कहा, कुछ नहीं।
  Thinking, Sakshi shook her head and said, nothing.

[05:04] सच में आंखों में कचरा चला गया था।
  Really, some dust had gone into the eyes.

[05:06] अक्षत को उसकी बातों पर विश्वास
  Akshat believed her words

[05:09] तो नहीं हुआ।
  So it didn't happen.

[05:11] फिर भी उसने उसका मूड हल्का करने के लिए कहा।
  Still, he said it to lighten her mood.

[05:13] अच्छा ठीक है अपना काम जल्दी खत्म करो अब बाहर डिनर करने चलते हैं।
  Okay fine, finish your work quickly, now let's go out for dinner.

[05:15] नहीं मेरा बिल्कुल मन नहीं है।
  No, I'm not in the mood at all.

[05:17] साक्षी ने कहा वो अभी भी रवि के बारे में सोच के काफी परेशान थी।
  Sakshi said she was still very upset thinking about Ravi.

[05:19] उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि रवि उसके रिजेक्शन पर रिएक्ट कैसे करेगा।
  She just couldn't understand how Ravi would react to her rejection.

[05:23] कहीं वह यह बात अक्षत को कुछ अलग तरीके से ना बताएं।
  Lest she tell this matter to Akshat in some different way.

[05:27] यही सब सोचकर साक्षी काफी परेशान हो रही थी।
  Thinking all this, Sakshi was getting very worried.

[05:30] साक्षी के चेहरे के बनते बिगड़ते भाव को देखकर अक्षत को भी काफी हैरानी हो रही थी।
  Seeing the changing expressions on Sakshi's face, Akshat was also quite surprised.

[05:34] पहली बार उसने साक्षी को इतना परेशान देखा रहा था।
  For the first time, he had seen Sakshi so upset.

[05:36] उसने साक्षी के कंधे पर हाथ रखकर कहा क्या बात है आज आप बहुत परेशान लग रही है किसी से कोई बात हुई है किसी ने कुछ कहा है क्या आपको अक्षत ने पूछा
  He placed his hand on Sakshi's shoulder and said, 'What's the matter? You seem very upset today. Did you talk to someone? Did someone say something to you?' Akshat asked.

[05:46] नहीं तो कोई बात नहीं है साक्षी ने नजरें चुराते हुए कहा
  'No, it's nothing,' Sakshi said, averting her eyes.

[05:48] साक्षी को ऐसे नजरें चुराते देखा अक्षत को यह बात तो जरूर समझ आ गई कि कोई ऐसी बात है जो साक्षी उसके साथ शेयर नहीं करना चाहती है
  Seeing Sakshi avoid his gaze, Akshat definitely understood that there was something Sakshi didn't want to share with him.

[05:55] इसीलिए उसने भी उस पर ज्यादा जवाब ना डालते हुए उससे कहा कोई बात नहीं जब आपका दिल हो तो आप बता दीजिएगा पर अभी के लिए प्लीज जल्दी से अपना काम खत्म कीजिए मुझे बहुत जोरों से भूख लगी है मेरा आज बाहर खाने का मन भी है तो प्लीज प्लीज आप मना मत कीजिएगा।
  So, without pressing her further, he said, 'It's okay, whenever you feel like it, you can tell me. But for now, please finish your work quickly. I'm very hungry, and I feel like eating out today, so please please don't refuse.'

[06:08] जल्दी से काम खत्म कीजिए।
  Finish your work quickly.

[06:08] अक्षत बिना साक्षी का जवाब सुने ही
  Akshat, without even waiting for Sakshi's reply,

[06:10] जल्दी से चला गया।
  He left quickly.

[06:13] अक्षत के इस तरह जल्दीबाजी में जाने से साक्षी मुस्कुरा दी।
  Sakshi smiled at Akshat leaving in such a hurry.

[06:15] अक्षत को इतना तो वह जान ही चुकी थी।
  She knew Akshat that well by now.

[06:17] उसकी हमेशा की यही आदत है।
  This is his usual habit.

[06:19] जब भी उसे अपनी कोई बात मनवानी होती तो वह अपनी बात कहकर वह जल्दी से चला जाता बिना सामने वाली की बात सुने हुए।
  Whenever he wanted to get his way, he would say his piece and leave quickly without listening to the other person.

[06:25] साक्षी मुस्कुराते हुए अपने डेक्स की तरफ बढ़ गई।
  Sakshi smiled and moved towards her desk.

[06:28] घड़ी की सुई शाम 7:00 बजे बजे का इशारा कर रही थी।
  The clock's hands were indicating 7:00 in the evening.

[06:30] अक्षत ने देखा तो जल्दी से साक्षी की डेक्स की तरफ बढ़ गया।
  Akshat saw this and quickly moved towards Sakshi's desk.

[06:34] वहां पहुंच उसने इशारे से साक्षी को घड़ी की तरफ देखने के लिए कहा।
  Reaching there, he gestured to Sakshi to look at the clock.

[06:36] घड़ी की तरफ देख साक्षी को समझ आया कि अक्षत उसे बाहर चलने के लिए कह रहा है।
  Looking at the clock, Sakshi understood that Akshat was asking her to go out.

[06:40] जिसे समझते हुए साक्षी ने उसे 5 मिनट वेट करने के लिए कहा।
  Understanding this, Sakshi asked him to wait for 5 minutes.

[06:44] अक्षय चुपचाप एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह लिफ्ट के पास जाकर खड़ा हो गया।
  Akshat silently went and stood near the lift like an obedient child.

[06:49] दूर खड़ी दो जोड़ी आंखें ना जाने उन दोनों के इशारेबाजी कब से देखा मुस्कुरा रही थी।
  Two pairs of eyes standing far away, who knows since when they had been watching their gestures, were smiling.

[06:53] साक्षी ने अपनी फाइलों को समेटकर लॉकर में रखकर अक्षत की तरफ बढ़ गई।
  Sakshi gathered her files, put them in the locker, and moved towards Akshat.

[06:58] साक्षी और अक्षत जैसे ही लिस्ट के अंदर घुसे पीछे से एक आवाज आई।
  As soon as Sakshi and Akshat entered the lift, a voice came from behind.

[07:00] कहां चली सवारी?
  Where are you off to, travelers?

[07:02] दोनों में अपने सर घुमाकर पीछे देखा तो राघव हाथ बांधे खड़ा मुस्कुराते हुए उन्हें ही देख रहा था।
  Both turned their heads and looked back, and there was Raghav standing with folded arms, smiling, looking right at them.

[07:06] राघव के इस तरह आ जाने से अक्षत साक्षी दोनों ही हड़बड़ा गए।
  Both Akshat and Sakshi were flustered by Raghav's sudden arrival.

[07:09] दोनों को हड़बड़ाया देखकर राघव ने
  Seeing both of them flustered, Raghav

[07:11] उनके मजे लेते हुए कहा, यह चेहरा क्यों पीला पड़ गया दोनों का?
  He said while enjoying himself, why have both of their faces turned pale?

[07:15] कहते हुए वह भी लिफ्ट में सवार हो गया।
  Saying this, he also got into the elevator.

[07:17] दोनों की तरफ से कोई जवाब ना पाकर राघव ने खुद ही कहा, क्या बात है?
  Getting no response from either of them, Raghav himself said, what's the matter?

[07:19] कौन सा सांप सूंघ गया, दोनों की ही बोलती बंद है।
  Which snake has sniffed them, both are speechless.

[07:24] आज तो राघव ने फूल मजे लेते हुए कहा।
  Today Raghav said while enjoying thoroughly.

[07:27] कुछ नहीं भाई घर जा रहे हैं और कहां जाएंगे?
  Nothing, brother, we are going home, and where else would we go?

[07:29] अक्षत ने साफ झूठ बोल दिया पर उसे खुद ही नहीं समझा आया कि उसने झूठ क्यों बोल पर अब तो वह फंस चुका था।
  Akshat told a clear lie, but he himself didn't understand why he lied, but now he was trapped.

[07:35] अक्षत के झूठ बोलने पर साक्षी ने उसे अजीब तरीके से घोरा।
  When Akshat lied, Sakshi stared at him in a strange way.

[07:38] साक्षी को अपनी तरफ देखता पाकर अक्षत ने अपनी गर्दन नीचे की तरफ झुका ली।
  Finding Sakshi looking at him, Akshat lowered his neck downwards.

[07:42] अच्छा वह सब तो ठीक है।
  Okay, all that is fine.

[07:42] पर अक्षत तुम्हें एक्ट में भी इतना पसीना क्यों आ रहा है?
  But Akshat, why are you sweating so much even in the act?

[07:46] राघव ने अपने रुमाल से अक्षत के माथे पर आए पसीने को पोछते हुए कहा।
  Raghav said while wiping the sweat from Akshat's forehead with his handkerchief.

[07:49] राघव आज अक्षत फुल मजे लेने के मूड में था।
  Today, Raghav, Akshat was in the mood to have full fun.

[07:51] वो आजकल गर्मी बहुत हो रही है ना।
  It's very hot these days, isn't it?

[07:53] इसलिए अक्षत ने राघव से रुमाल लेते हुए कहा।
  So Akshat said while taking the handkerchief from Raghav.

[07:56] हां भाई आजकल गर्मी तो बहुत हो रही है।
  Yes brother, it is indeed very hot these days.

[07:59] अक्षत की बात का समर्थन करते हुए राघव ने कहा साथ ही तीनों लिफ्ट से बाहर आ गए।
  Supporting Akshat's words, Raghav said, and at the same time all three came out of the elevator.

[08:03] तीनों पार्किंग की तरफ पर चला दिए।
  All three walked towards the parking.

[08:05] पर आज हमारे राघव बाबू अक्षत को इतनी आसानी से कहां जाने देने वाले थे।
  But today our Raghav Babu was not going to let Akshat go so easily.

[08:09] अपनी कार के पास पहुंचकर राघव ने कहा डैम यह क्या हो गया?
  Reaching near his car, Raghav said, damn, what has happened?

[08:12] राघव ने यह बात चिल्लाकर कही थी।
  Raghav had said this shouting.

[08:14] जिसे सुन अक्षत ने उसके पास आकर पूछा क्या हो गया?
  Hearing this, Akshat came near him and asked, 'What happened?'

[08:16] चिल्ला क्यों रहा है?
  Why are you shouting?

[08:19] यार यह टायर पंचर हो गया।
  Dude, this tire got punctured.

[08:21] अब मैं कैसे घर जाऊंगा?
  Now how will I go home?

[08:21] राघव ने अजीब सा मुंह बनाते हुए कहा।
  Raghav said, making a strange face.

[08:24] ड्राइवर को बोल के दूसरी कार मांगा अक्षय ने सुझाव दिया
  Akshay suggested, 'Tell the driver and ask for another car.'

[08:27] मांगा लेता पर ड्राइवर काका आज छुट्टी पर है।
  I would ask, but driver uncle is on leave today.

[08:29] राघव ने कहा तो कैब कर ले अक्षत ने फिर से सुझाव दिया
  Raghav said, 'Then take a cab,' Akshat suggested again.

[08:34] कैसा दोस्त है तू मुझे खुद घर छोड़ने की जगह कैसे बकवास से आइडियाज दिए जा रहा है राघव ने अक्षत को घूरते है कहा
  What kind of friend are you? Instead of dropping me home yourself, how are you giving me nonsense ideas? Raghav said, staring at Akshat.

[08:41] अरे अक्षत ने कुछ कहना चाहा कि राघव ने उसकी बात कटाते हुए कहा अरे वरे कुछ नहीं जल्दी से मुझे घर छोड़ दे
  Hey, Akshat tried to say something, but Raghav interrupted him and said, 'Hey, nothing at all, just drop me home quickly.'

[08:47] कहते हुए राघव अक्षत की गाड़ी की फ्रंट सीट पर बैठा गया
  Saying this, Raghav sat on the front seat of Akshat's car.

[08:50] अक्षत अपने ही बोले गए झूठ में फंस के बेचरा सा मुंह लेकर ड्राइवर सीट पर बैठा गया
  Akshat, caught in his own lie, sat on the driver's seat with a pitiful face.

[08:54] उसने मेरे से साक्षी को देखा तो वह उसकी हालत पर मुस्कुरा रही थी
  He looked at Sakshi from me, and she was smiling at his condition.

[08:58] साक्षी को मुस्कुराता देखा अक्षत ने एक थड़ी आ भरी।
  Seeing Sakshi smiling, Akshat let out a sigh.

[09:01] साक्षी को मुस्कुराता देख अक्षत ने सुकून की सांस लेकर राघव की तरफ एक शुक्रिया मुस्कान दी।
  Seeing Sakshi smiling, Akshat took a sigh of relief and gave a thankful smile towards Raghav.

[09:05] जिसे देख राघव ने आंखों से ही उसे तसल्ली दी।
  Seeing that, Raghav reassured him with his eyes alone.

[09:07] साथ ही उसके दिमाग में कुछ देर पहले की बातें ताज हो गई।
  At the same time, the events from a while ago became fresh in his mind.

[09:09] राघव जरूरी बात करने
  Raghav, to discuss an important matter,

[09:12] के लिए अक्षत केबिन में आया जहां उसे परेशान से बैठा अक्षत मिला।
  Akshat came to the cabin for something, where he found Akshat sitting worried.

[09:16] अक्षत अपनी सोच में इतना घूमता था कि कब राघव उसके केबिन में आकर उसके सामने वाली सीट पर बैठा गया उसे पता ही नहीं चला।
  Akshat was so lost in his thoughts that he didn't even realize when Raghav came into his cabin and sat on the seat opposite him.

[09:22] अक्षत को अपनी सोच में गुम बैठा देख राघव ने कहा, क्या बात है भाई बहुत परेशान लग रहे हो आज।
  Seeing Akshat sitting lost in his thoughts, Raghav said, 'What's the matter, brother? You seem very troubled today.'

[09:29] अचानक से राघव की आवाज सुनने से अक्षत चौंक गया।
  Akshat was startled by suddenly hearing Raghav's voice.

[09:30] फिर खुद को सम्मान करते हो उसने कहा तू कब आया पता ही नहीं चला।
  Then, composing himself, he said, 'When did you come? I didn't even realize.'

[09:33] अक्षत का जवाब सुन राघव ने शरारत से मुस्कुराते हुए अक्षत से कहा, जानवा अपनी सोच में इतने गुम है कि दुनिया भूल कर बैठे हैं।
  Hearing Akshat's reply, Raghav smiled mischievously and said to Akshat, 'Darling, you are so lost in your thoughts that you have forgotten the world.'

[09:41] राघव के जवाब पर अक्षत ने उसे घूरते हुए कहा, पूरा दिन बस प्यार मोहब्बत ही तेरे दिमाग में चलता रहता है।
  In response to Raghav's reply, Akshat stared at him and said, 'All day long, only love and romance keep running in your mind.'

[09:46] अक्षत की बात सुन अजीब निगाहों से उसे घूरते हुए मन ही मन कहा।
  Hearing Akshat's words, he stared at him with strange eyes and said to himself.

[09:50] जब प्यार का बुखार होगा ना तब पूछूं तुमसे।
  'When you get the fever of love, then I'll ask you.'

[09:52] प्रत्यक्ष रूप से उसने अक्षत से पूछा।
  Directly, he asked Akshat.

[09:54] अच्छा बता क्या बात है? क्यों इतना परेशान है?
  'Alright, tell me what's the matter? Why are you so troubled?'

[09:57] अक्षत ने साक्षी के साथ हुई सारी बातें राघव को कह सुनाई जिसे सुन राघव मन ही मन बोल मुबारक हो दोस्त प्यार की पहली सीढ़ी पर पैर आकर रखा ही दिया है तुमने बस भगवान से यही दुआ है कि तुम्हें जल्दी ही अपने प्यार का एहसास हो
  Akshat narrated to Raghav all the events that happened with Sakshi, hearing which Raghav said to himself, 'Congratulations, friend, you have set foot on the first step of love. I just pray to God that you realize your love soon.'

[10:07] राघव को मुस्कुरा देख अक्षत ने उसे घूरते हुए कहा यहां मैं तुझे पोरब फिल्म बता रहा हूं और तू है कि मुस्कुरा रहा है कैसा दोस्त है
  Seeing Raghav smile, Akshat stared at him and said, 'Here I am telling you a serious story, and you are smiling. What kind of friend are you?'

[10:13] तू कहते कहते उसकी आवाज में हल्का गुस्सा छलक आया था रिलिक्स ब्रो मैं साक्षी को अच्छी तरह से जानता हूं उसका मूड कैसे ठीक करना है पता है मुझे राघव ने विश्वास से कहा गाड़ी की हॉर्न की आवाज से राघव अपनी सोच से बाहर आया।
  As he spoke, a slight anger had spilled into his voice. Relax bro, I know Sakshi well, I know how to fix her mood, Raghav said with confidence. The sound of the car horn brought Raghav out of his thoughts.

[10:25] समय देखा तो उनकी गाड़ी रेड लाइट पर खड़ी थी।
  When he checked the time, their car was standing at a red light.

[10:27] सिग्नल ग्रीन होने पर अक्षत ने गाड़ी आगे बढ़ा दी।
  When the signal turned green, Akshat moved the car forward.

[10:29] कार में मौजूदा शांति तोड़ते हुए राघव ने कहा जोरों की भूख लगी है।
  Breaking the existing silence in the car, Raghav said, I am very hungry.

[10:32] प्लीज आगे किसी रेस्टोरेंट पर गाड़ी रोक दें।
  Please stop the car at some restaurant ahead.

[10:34] राघव की इस बात पर पीछे बैठी साक्षी ने भी मुस्कुराते हुए कहा।
  At this remark of Raghav, Sakshi, sitting in the back, also said smilingly.

[10:38] वैसे भूख तो मुझे भी लग रही है।
  By the way, I am feeling hungry too.

[10:40] भैया कहते हुए उसने तिरछी निगाहों से अक्षत को देखा जो आगे लगे मिरर से टकटकी लगाए उसे ही देख रहा था।
  Saying 'brother,' she looked at Akshat with sideways glances, who was staring at her through the front mirror.

[10:44] साक्षी की बात सुन अक्षर के होठ बर्स पर ही मुस्कुरा दिए।
  Hearing Sakshi's words, Akshat's lips just smiled slightly.

[10:46] वह अच्छी तरह से जानता था।
  He knew very well.

[10:49] साक्षी को बाहर का खाना खाना बिल्कुल भी पसंद नहीं है।
  Sakshi does not like eating outside food at all.

[10:52] वह जो यह बात कह रही है, बस अक्षत के लिए कह रही है क्योंकि अक्षत को भूख जरा भी बर्दाश्त नहीं होती है।
  Whatever she is saying, she is saying it just for Akshat because Akshat cannot tolerate hunger at all.

[10:56] अपनी बात पर साक्षी की सहमति पाने के बाद राघव ने नौटकी करते हुए अक्षत से कहा, अक्षत बाबू हमारी पार्टी मजबूत स्थिति में है।
  After getting Sakshi's agreement on his point, Raghav said jokingly to Akshat, Akshat Babu, our party is in a strong position.

[11:03] अपनी भलाई चाहते हो तो जल्दी से किसी अच्छे रेस्ट में ले चलो।
  If you want your own good, quickly take us to some good restaurant.

[11:07] राघव की नौटंकी देख अक्षत ने हंसते हुए कहा, चल रहा हूं मेरे बाप थोड़ी बाद अक्षत ने गाड़ी एक
  Seeing Raghav's antics, Akshat said laughing, I am going, my father. A little later, Akshat drove the car to a

[11:15] रेस्टोरेंट के बाहर रोक दी।
  Stopped outside the restaurant.

[11:17] साक्षी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर अपने बालों को सुलझा रही थी।
  Sakshi was sitting in front of the dressing table, fixing her hair.

[11:19] तीनों ने आज काफी एंजॉय किया था।
  All three had enjoyed a lot today.

[11:22] रहरह कर जब राघव अक्षत की टांग खींचता तो साक्षी भी खुलकर मुस्कुरा देती थी।
  Whenever Raghav teased Akshat, Sakshi would also smile openly.

[11:26] साक्षी को अपनी सोच में ही गुम देख अक्षत के हाथ लैपटॉप कीबोर्ड पर रुक गए।
  Seeing Sakshi lost in her own thoughts, Akshat's hands paused on the laptop keyboard.

[11:31] उसने झूठमठ में गला साफ किया।
  He cleared his throat pretentiously.

[11:33] अक्षत की आवाज सुन साक्षी अपनी सोच से बाहर आए।
  Hearing Akshat's voice, Sakshi came out of her thoughts.

[11:35] बालों को समेट उसने उन्हें जुड़े में कस दिया।
  Gathering her hair, she tightened them into a bun.

[11:37] पर कुछ गुस्ताख लाटे उसके गालों को चूम रही थी।
  But some mischievous strands were kissing her cheeks.

[11:39] साक्षी बेड के एक किनारे लेट उसने अपनी आंखें बंद कर ली।
  Sakshi lay down on one side of the bed and closed her eyes.

[11:44] अक्षत के हाथ वापस कीबोर्ड पर हरकत करने लगे।
  Akshat's hands started moving back on the keyboard.

[11:47] जब उसकी आंखें नींद से बोझिल होने लगी।
  When his eyes began to feel heavy with sleep.

[11:48] तब उसने लैपटॉप को साइड टेबल पर रख बिस्तर के दूसरे किनारे पर लेट गया।
  Then he placed the laptop on the side table and lay down on the other side of the bed.

[11:53] अक्षत की तरफ से कोई हरकत ना होते देख साक्षी ने अपनी आंखें खोल दी।
  Seeing no movement from Akshat's side, Sakshi opened her eyes.

[11:55] रोज ही तो वह ऐसा कहती थी ताकि कब अक्षत गहरी नींद में जाए और वह उसे जी भर के देख सके।
  She said this every day so that Akshat would fall into a deep sleep and she could gaze at him to her heart's content.

[12:02] साक्षी बाहरी रूप से चाहे जितनी कठोर बाने पर है तो अंदर से एक शर्मीली लड़की जो अपने महबूब की एक नजर से पिघलने लगती है।
  No matter how tough Sakshi appears outwardly, inside she is a shy girl who melts at a single glance from her beloved.

[12:06] जब भी अक्षत की नजरों की तपिश साक्षी को अपने ऊपर महसूस होती है।
  Whenever Sakshi feels the heat of Akshat's gaze upon her.

[12:10] वह शर्म से पानीपानी हो जाती है।
  She becomes completely overwhelmed with shyness.

[12:12] पर चाहकर भी अपनी नजरें उठकर अपने महबूब अपने पति को नजर देखने की हिम्मत नहीं जुटा।
  But even if she wants to, she cannot muster the courage to lift her eyes and look directly at her beloved, her husband.

[12:17] पाती है।
  She gets it.

[12:19] इसीलिए जब वह रात में नींद की आगोश में होता तो साक्षी अपने प्यासे नैनो की प्यास बुझा लेती है।
  That's why when he was in the embrace of sleep at night, Sakshi would quench the thirst of her thirsty eyes.

[12:24] कुछ देर तक यूं ही साक्षी प्यार से अक्षत को निहारती रही।
  For a while, Sakshi kept gazing at Akshat with love.

[12:26] उसने प्यार से उसके बालों को सहलाकर उसका माथे पर अपने लंबों को रख दिया।
  She lovingly stroked his hair and placed her lips on his forehead.

[12:30] साक्षी की हरकत पर अक्षत कसमसा कर फिर गहरी नींद की आगोश में चला गया।
  At Sakshi's movement, Akshat stirred and then went back into the embrace of deep sleep.

[12:34] साक्षी ने भी मुस्कुराते हुए अपनी बंद कर ली।
  Sakshi also closed hers, smiling.

[12:36] कुछ देर बाद साक्षी को अपनी कमर पर अक्षत के हाथों का स्पर्श महसूस हुआ।
  After a while, Sakshi felt the touch of Akshat's hands on her waist.

[12:41] अक्षत की हरकत पर साक्षी के चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कान खिल गई।
  At Akshat's movement, a shy smile bloomed on Sakshi's face.

[12:45] दूसरी तरफ रवि के कमरे में पूरी तरफ अंधेरा ही अंधेरा था।
  On the other side, in Ravi's room, there was darkness everywhere.

[12:47] एक नौकर ने जब आकर से कमरे का गेट खटखटाया जब गेट नहीं खोला तो उसने हल्के थके के साथ थोड़ा सा गेट खोला दिया।
  When a servant came and knocked on the room's gate, and when the gate wasn't opened, he pushed it open a little with a slight push.

[12:54] गेट खुलते ही उसे खांसी आने लगी।
  As soon as the gate opened, he started coughing.

[12:56] पूरे कमरे में सिर्फ सिगरेट का धुआ था।
  The entire room was filled with only cigarette smoke.

[12:58] वहां पर किसी का भी खड़ा होना मुश्किल था।
  It was difficult for anyone to stand there.

[13:00] नौकर ने अपनी नाक बंद करके रवि को आवाज लगाई।
  The servant covered his nose and called out to Ravi.

[13:02] अपने कमरे में किसी की और की के होने का एहसास होने पर रवि ने अपनी नजरें उस तरफ घूमी।
  Sensing someone else's presence in his room, Ravi turned his gaze that way.

[13:06] रवि की सुर्ख लाल आंखों देख वह साहम गया।
  Seeing Ravi's bloodshot red eyes, he was terrified.

[13:09] रवि ने उसे घूरते हुए कठोर लहजे में कहा और जब तक मैं ना कहूं कोई भी मेरे कमरे में नहीं आना चाहिए।
  Ravi stared at him and said in a harsh tone, 'And until I say so, no one should come into my room.'

[13:16] नौकर चुपचाप सर झुककर बाहर निकाल गया।
  The servant silently bowed his head and went out.

[13:13] रवि ने दोबारा अपने होठों के बीच
  Ravi again between his lips

[13:18] सिगरेट रख ली।
  He kept the cigarette.

[13:21] हॉल में बैठी ताई जी के माथे पर चिंता की लकीरें उभरी हुई थी।
  Worry lines were visible on Tai Ji's forehead as she sat in the hall.

[13:23] जब से रवि घर लौटा था।
  Ever since Ravi returned home.

[13:25] अपने कमरे में कैद था।
  He was locked in his room.

[13:25] ताई जी को उसका यह व्यवहार खटका।
  Tai Ji was suspicious of his behavior.

[13:27] वो भले ही उनसे सीधे मुंह बात ना करता हो पर ऐसी हरकतें उसने आज से पहले नहीं की थी।
  Even though he didn't speak directly to her, he had never done such things before today.

[13:32] नौकर को सीढ़ियां उतरते देख ताई जी अपनी जगह से झट खड़ी हो गई।
  Seeing the servant coming down the stairs, Tai Ji quickly stood up from her place.

[13:34] उन्होंने ही नौकर को खाने का पूछाने के लिए भेज था।
  She herself had sent the servant to ask about food.

[13:38] ताई जी के पास आकर नौकर सर झुक के खड़ा हो गया।
  Coming near Tai Ji, the servant stood with his head bowed.

[13:41] ताई जी ने उससे पूछा घनश्याम क्या कहा रवि ने?
  Tai Ji asked him, 'Ghanshyam, what did Ravi say?'

[13:43] उन्होंने मना कर दिया।
  He refused.

[13:45] साथ में यह भी कहा है जब तक मैं ना कहूं कोई भी मेरे कमरे में नहीं आना चाहिए।
  He also said that until I say so, no one should come into my room.

[13:49] घनश्याम ने रवि द्वारा कहे शब्दों को दोहरा दिया।
  Ghanshyam repeated the words spoken by Ravi.

[13:51] कुछ और कहा उसने तुमसे?
  Did he say anything else to you?

[13:54] ताई जी ने पूछा नहीं।
  Tai Ji asked, 'No?'

[13:54] पर काफी उदास लग रहे थे।
  But he seemed quite sad.

[13:56] पूरे कमरे में सिगरेट का ही घुआ था।
  The whole room was filled with cigarette smoke.

[13:58] घनश्याम ने जो कुछ देख सब बता दिया।
  Ghanshyam told everything he saw.

[14:01] तुम जाओ ताई जी के कहने पर घनश्याम चला गया और गया ताई जी के माथे पर गहरी चिंता की लकीरें।
  On Tai Ji's saying 'You go,' Ghanshyam left, and deep worry lines appeared on Tai Ji's forehead.

[14:05] ठाकुर कंस्ट्रक्शन में आज अफरातफरी मची हुई थी।
  There was chaos at Thakur Construction today.

[14:08] साक्षी और अक्षत आज जल्दी ही ऑफिस आ गए थे।
  Sakshi and Akshat had come to the office early today.

[14:10] अक्षत के लिए आज दिन बहुत खास था।
  Today was a very special day for Akshat.

[14:12] उनकी कंपनी ने गवर्नमेंट स्कूल्स हॉस्पिटल के लिए टेंडर फिल किया था।
  His company had filed a tender for government schools and hospitals.

[14:16] जिसका आज रिजल्ट अनाउंस होना था।
  The result of which was to be announced today.

[14:16] अक्षत के लिए यह
  For Akshat, this

[14:19] सिर्फ एक डील नहीं एक सपना था जो उसके पापा देखा करते थे।
  It was not just a deal, but a dream that his father used to see.

[14:23] इस कॉन्ट्रैक्ट को पाने के लिए उसने दिन रात बहुत मेहनत की है।
  He has worked day and night very hard to get this contract.

[14:25] अक्षत नर्वसा अपने केबिन में बैठ पाइल्स के पन्ने पलट रहा था।
  Akshat, nervous, was sitting in his cabin flipping through the pages of files.

[14:28] पर उसका ध्यान से नहीं लग पा रहा था।
  But he was not able to concentrate.

[14:30] हारकर उसने फाइल बंद करके टेबल पर पटक केबिन से बाहर निकाला गया।
  Giving up, he closed the file, slammed it on the table, and was taken out of the cabin.

[14:35] बाहर आकर उसने देखा एक अजीब सी शांति पूरे ऑफिस में फैली हुई थी।
  Coming out, he saw a strange silence spread throughout the office.

[14:37] अपना सिर झिटक कर अक्षत राघव के केबिन में चला गया।
  Shaking his head, Akshat went into Raghav's cabin.

[14:42] अक्षत को केबिन में देख राघव अपनी जगह पर खड़े होकर उसने पूछा, "क्या हुआ? बहुत परेशान लग रहा है।"
  Seeing Akshat in the cabin, Raghav stood up from his place and asked, "What happened? You seem very troubled."

[14:46] हां यार, पता नहीं यह कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा भी या नहीं?
  Yes, man, I don't know if this contract will be awarded or not?

[14:50] कहते हुए अक्षत चीय खींच कर बैठा गया।
  Saying this, Akshat pulled a chair and sat down.

[14:53] राघव ने वापस अपनी जगह पर बैठते हुए कहा टेंशन मत ले सब अच्छा होगा।
  Raghav, sitting back in his place, said, "Don't worry, everything will be fine."

[14:56] होप सो कह अक्षत ने लबी सांस ली चला टाइम होने वाला है।
  Saying "Hope so," Akshat took a deep breath, "Come on, it's almost time."

[15:01] गवर्नमेंट ऑफिसर आने वाले होंगे।
  The government officers will be arriving.

[15:03] राघव की बात सुन अक्षत ने अपनी नजरें घड़ी की तरफ घुमाई देखा तो 11:30 बज रहे थे।
  Hearing Raghav's words, Akshat turned his gaze towards the clock and saw that it was 11:30.

[15:05] 12 बजे बजे तक ऑफिसर आने वाले थे।
  The officers were supposed to arrive by 12 o'clock.

[15:08] अक्षत और राघव दोनों मीटिंग रूम की तरफ बढ़ गए।
  Both Akshat and Raghav moved towards the meeting room.

[15:12] वहां पर दूसरे कांट्रेक्टर्स भी आए हुए थे।
  Other contractors had also arrived there.

[15:13] दोनों ने वहां पहुंचकर सभी से हल्कीफुल्की बातचीत की।
  Upon reaching there, both had light conversation with everyone.

[15:16] ठीक 12:00 बजे बजे ऑफिस की गाड़ी ठाकुर कंस्ट्रक्शन के बाहर आकर रुकी।
  Exactly at 12:00, the office car arrived and stopped outside Thakur Construction.

[15:18] अक्षत ने खुद जाकर उनका वेलकम किया।
  Akshat himself went and welcomed them.

[15:20] कर उनको लेकर मीटिंग रूम की तरफ बढ़ गया।
  Kar took them and headed towards the meeting room.

[15:23] सभी लोग अपनी-अपनी जगह पर बैठ चुके थे।
  Everyone had already taken their seats.

[15:25] गवर्नमेंट ऑफिसर मिस्टर खन्ना में सभी का संबोधन करते हुए कहा, आप सभी अपना कीमती वक्त निकालकर यहां पर आए।
  Government officer Mr. Khanna, addressing everyone, said, all of you took out your precious time and came here.

[15:31] इसके लिए मुझे दिल से खुशी है।
  I am truly happy about this.

[15:33] आप सभी की कॉन्ट्रैक्ट अच्छे थे।
  All of your contracts were good.

[15:34] पर यह कांटेक्ट आप में से किसी एक को ही मिल सकता है।
  But this contract can only be given to one of you.

[15:37] मिस्टर खन्ना की बात सुन सभी लोगों ने हल्की मुस्कान के सहमति जताई।
  Hearing Mr. Khanna's words, everyone expressed agreement with a slight smile.

[15:41] अपनी बात को आगे कहते हुए उन्होंने कहा, अब बिना ज्यादा समय लिए मैं आप सबको बताना चाहूंगा जिस कंपनी को यह कॉन्ट्रैक्ट दिया जा रहा है, वह है उनके शब्दों से अक्षत की आंखें खुद ब खुद बंद हो गई।
  Continuing his speech, he said, now without taking much time, I would like to tell you all the company to which this contract is being given, and at his words, Akshat's eyes closed on their own.

[15:50] उसे हिम्मत देने के लिए राघव ने अपने हाथ उसके हाथों पर रखा दिए।
  To give him courage, Raghav placed his hands on his hands.

[15:54] दोनों ने वापस मिस्टर खन्ना की बातों पर ध्यान लग दिया।
  Both of them focused back on Mr. Khanna's words.

[15:58] यह कॉन्ट्रैक्ट जिस कंपनी को दिया जा रहा है, वह ठाकुर कंस्ट्रक्शन यानी कि मिस्टर अक्षत ठाकुर को कहे।
  The company to which this contract is being given is Thakur Construction, meaning it is being given to Mr. Akshat Thakur.

[16:02] मिस्टर खन्ना ने अपना हाथ आगे बढ़कर अक्षत को बधाई दी।
  Mr. Khanna extended his hand and congratulated Akshat.

[16:04] एक-एक कर सभी लोगों ने अक्षत को बधाई दी।
  One by one, everyone congratulated Akshat.

[16:07] अक्षत सभी का आभार व्यक्त किया।
  Akshat expressed gratitude to everyone.

[16:09] राघव अपने साथ सभी को कैंटीन एरिया की तरफ लेकर चला गया।
  Raghav took everyone with him towards the canteen area.

[16:13] जहां पर सभी के लिए पहले से ही नाश्ते की व्यवस्था की गई थी।
  Where breakfast arrangements had already been made for everyone.

[16:16] कुछ देर बाद सभी एंप्लॉयज ऑफिस के हॉफ में खड़े थे।
  After a while, all the employees were standing in the office hall.

[16:18] कुछ देर पहले उन्हें अक्षत ने दे बुलाया था।
  Akshat had called them a little while ago.

[16:20] अक्षत ने सभी का ध्यान अपनी ओर
  Akshat drew everyone's attention towards himself

[16:22] आकर्षित करते हुए कहा, अटेंशन एवरीवन आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है।
  Attracting attention, he said, 'Attention everyone, today is a very special day for me.'

[16:26] इसीलिए आज आप सभी मेरी तरफ से पार्टी।
  That's why today, a party from my side for all of you.

[16:29] आप सभी जल्दी छुट्टी लेकर घर जा सकते हैं।
  All of you can take early leave and go home.

[16:31] ठीक 8:00 बजे शाम को रेड चेरी क्लब में मिलते हैं पार्टी के लिए।
  We'll meet at Red Cherry Club at exactly 8:00 PM for the party.

[16:35] अक्षत की बात सुन सभी एंप्लाइज खुश हो गए।
  Hearing Akshat's words, all the employees became happy.

[16:37] वहीं आपस में बातें करने लगे।
  They started talking among themselves right there.

[16:39] सभी को अपनी जगह पर खड़े देखे।
  He saw everyone standing in their places.

[16:41] अक्षत ने वापस से कहा, जल्दी करो गाइस, आज फुल एंजॉय करना है।
  Akshat said again, 'Hurry up, guys, we have to fully enjoy today.'

[16:44] सभी एंप्लाइज वापस अपने डेक्स पर लौट अपन काम जल्दी-जल्दी खत्म कर एक-एक कर ऑफिस से निकालने लगे।
  All the employees returned to their desks, finished their work quickly, and started leaving the office one by one.

[16:49] कुछ ही देर में पूरा ऑफिस खाली हो चुका था।
  Within a short while, the entire office had become empty.

[16:51] अब ऑफिस में सिर्फ अक्षत, साक्षी और राघव ही रहा गए थे।
  Now only Akshat, Sakshi, and Raghav remained in the office.

[16:56] चला यार, अब मैं भी निकलता हूं।
  'Let's go, buddy, I'm leaving now too.'

[16:57] राघव ने अपना काम खत्म कर अक्षत केबिन में आकर कहा।
  Raghav finished his work, came to Akshat's cabin, and said.

[17:00] हां तो निकाल।
  'Yes, then leave.'

[17:02] मैं भी थोड़ा सा काम खत्म करके निकालता हूं।
  'I'll also finish a little work and then leave.'

[17:04] अक्षता ने लैपटॉप पर आंखें लगाए हुए कहा।
  Akshat said with his eyes fixed on the laptop.

[17:07] राघव साक्षी को बाय बॉल ऑफिस से निकाल गया।
  Raghav said bye to Sakshi and left the office.

[17:09] आपन काम खत्म कर अक्षत साक्षी के पास आकर उसने कहा चले साक्षी ने हां में अपनी गर्दन हिला दी।
  Finishing his work, Akshat came to Sakshi and said, 'Let's go.' Sakshi nodded her head in agreement.

[17:14] दोनों गाड़ी में बैठा हवेली की तरफ चला दिए।
  Both sat in the car and drove towards the mansion.

[17:16] साक्षी ने अक्षत को देखते हुए कहा मुझे पार्टी में नहीं जाना है।
  Sakshi, looking at Akshat, said, 'I don't want to go to the party.'

[17:21] क्यों अक्षत ने चौंक कर उसे देखते हुए कहा, मन नहीं है साक्षी ने
  'Why?' Akshat said, looking at her in surprise. 'I don't feel like it,' Sakshi said.

[17:23] बहाना बनते हुए कहा।
  He said while making an excuse.

[17:25] क्यों मन नहीं है आपका?
  Why are you not in the mood?

[17:25] अक्षत ने हल्के गुस्से से कहा।
  Akshat said with slight anger.

[17:28] उसे साक्षी का पार्टी में ना आने की बात सुनकर बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।
  He did not like hearing that Sakshi was not coming to the party at all.

[17:32] मैं आज से पहले क्लब या पब जैसे जगह गई नहीं हूँ तो कहते कहते साक्षी खामोश हो गई।
  Saying that she had never been to a place like a club or pub before today, Sakshi fell silent.

[17:37] अक्षत ने साक्षी की बात समझते हुए कहा, कभी ना कभी तो हर चीज की पे करनी ही होती है।
  Understanding Sakshi's point, Akshat said, 'Sooner or later, you have to try everything.'

[17:41] तो आज क्यों नहीं आप भी आज एक छोटी सी बेहाल कीजिए।
  So why not today? You too, make a small effort today.

[17:45] मेरे पास ऐसी पार्टी टाइप कपड़े भी नहीं है।
  I don't even have party-type clothes.

[17:47] साक्षी ने झिझकते हुए कहा ओ अक्षत ने हंठ ही हंठ में कहा।
  Sakshi said hesitantly, and Akshat said stubbornly.

[17:52] फिर साक्षी की तरफ मुखाफीत होते हुए कहा।
  Then, turning towards Sakshi, he said.

[17:54] इतनी सी बात के लिए आप इतनी अक्षत अपनी बात पूरी कह पाता कि साक्षी ने उसकी बात को काटते हुए कहा,
  For such a small thing, you are so... Akshat could not finish his sentence before Sakshi interrupted him and said,

[17:58] "आपके लिए होगी। यह इतनी सी बात पर मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
  "It might be for you. This small thing is a big deal for me.

[18:02] साक्षी ने अजीब सा है मुंह बना लिया।
  Sakshi made a strange face.

[18:05] साक्षी का मुंह बना देखा।
  He saw Sakshi's expression.

[18:05] अक्षत ने हंसते हुए कहा, आप सभी लड़कियों में एक बात कॉमन होती है।
  Akshat said laughing, 'There is one thing common among all you girls.'

[18:09] छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो जाती है।
  You get worried over small things.

[18:11] पार्टी के लिए ड्रेस नहीं है तो पार्टी में ही नहीं जाना है।
  If you don't have a dress for the party, you don't want to go to the party at all.

[18:13] जबकि इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन सामने है।
  While the solution to this problem is right in front.

[18:17] साक्षी ने अचरत से अक्षत को देखा तो अक्षत ने उसे आंखों से ही सामने देखने का इशारी किया।
  Sakshi looked at Akshat in surprise, then Akshat gestured with his eyes for her to look ahead.

[18:22] साक्षी ने सामने देखा तो उनकी गाड़ी सिटी मॉल के बाहर
  When Sakshi looked ahead, their car was outside City Mall.

[18:24] खड़ी थी।
  She was standing.

[18:24] उसके होठों पर मुस्कान खिल गई।
  A smile bloomed on her lips.

[18:26] कार पार्क कर दोनों मॉल के अंदर चला दी।
  He parked the car and both went inside the mall.

[18:28] एक कॉल था।
  There was a call.

[18:28] सेक्शन में पहुंचा।
  He reached the section.

[18:30] साक्षी अपने लिए ड्रेस देखने लगी पर उसे कुछ समझा ही नहीं आ रहा था।
  Sakshi started looking at dresses for herself but she couldn't understand anything.

[18:35] काफी देर तक अक्षत उसे परेशानी से जूझता देखता फिर खुद ही उसकी मदद के लिए काउंटर तरफ बढ़ गया।
  Akshat watched her struggling for a long time, then he himself moved towards the counter to help her.

[18:39] उसने सल्स गर्ल द्वारा दिखाई गई ड्रेस में से कुछ ड्रेन सेलेक्ट करके साक्षी के हाथों में पकड़ कर चेंजिंग रूम की तरफ इशारा कर दिया।
  He selected some dresses from those shown by the salesgirl, placed them in Sakshi's hands, and gestured towards the changing room.

[18:45] पहली ड्रेस पहान के साक्षी बाहर आई।
  After wearing the first dress, Sakshi came out.

[18:48] अक्षत ने उसे देख तो देखत ही रहा गया।
  Akshat saw her and just kept staring.

[18:49] गोल्डन कॉलर की नील लेंथ ड्रेस में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी।
  In the golden collar knee-length dress, she looked extremely beautiful.

[18:54] कैसी लग रही हो?
  How do I look?

[18:54] साक्षी के सवाल पर अक्षत ने अपनी नजरें उसके ऊपर से हटते हुए कहा, दूसरी ट्राई करो।
  At Sakshi's question, Akshat averted his gaze from her and said, try the second one.

[18:58] यह अच्छी नहीं है।
  This one is not good.

[19:00] साक्षी वापस चेंजिंग रूम में चली गई।
  Sakshi went back into the changing room.

[19:02] अक्षत ने अपने हंठ गोल कर मुंह से हवा छोड़ी।
  Akshat rounded his lips and let out a breath.

[19:05] साक्षी ड्रेस चेंज करके आई रेड कॉलर की ड्रेस में उसका रूप निखर रहा था।
  Sakshi came after changing the dress; in the red collar dress, her appearance was glowing.

[19:09] उसने अक्षत की तरफ देख भोहे उछल कर पूछा, कैसी लग रही है?
  She looked at Akshat, raised her eyebrows, and asked, how do I look?

[19:11] अक्षत ने नामे गर्दन हिला दी।
  Akshat shook his head no.

[19:13] साक्षी बेचार पे मुंह बांध के वापस चेंज करने चली गई।
  Sakshi, with a pout, went back to change.

[19:18] उनके जाने के बाद अक्षत ने चैन को सांस ली।
  After she left, Akshat breathed a sigh of relief.

[19:18] इस ड्रेस में कमर के दोनों तरफ यू शेप के कट जिससे साक्षी की पतली गोरी कमर साफ छलक रही थी।
  In this dress, there were U-shaped cuts on both sides of the waist, from which Sakshi's thin, fair waist was clearly visible.

[19:23] साक्षी वापस ड्रेस
  Sakshi back dress

[19:26] चेंज करके आए तो अक्षत ने नामे गर्दन हिला दी क्योंकि इस ड्रेस का बेग बहुत डीप था।
  When she came after changing, Akshat shook his head no because the neckline of this dress was very deep.

[19:30] साक्षी ने एक के बाद एक कई ड्रेस चेंज की।
  Sakshi changed many dresses one after another.

[19:32] अक्षत ने सभी में कोई ना कोई कमी निकाल ही देता हारकर।
  Akshat would find some flaw or the other in all of them, defeated.

[19:34] साक्षी ने कहा मुझे नहीं चेंज करना आपको कुछ पसंद ही नहीं आ रहा है।
  Sakshi said, I don't want to change, you don't like anything.

[19:39] प्लीज यह दोनों और देखा।
  Please, look at these two more.

[19:41] लो अक्षत ने दो और ड्रेस साक्षी को पकड़ते हुए कहा।
  Here, Akshat said while handing two more dresses to Sakshi.

[19:44] लास्ट है यह।
  This is the last one.

[19:44] साक्षी ने घूरते हुए कहा।
  Sakshi said while glaring.

[19:46] ओके अक्षत ने कहा।
  Okay, Akshat said.

[19:49] साक्षी चेंज करके आए तो अक्षत का मुंह खुला का खुला ही रहा गया।
  When Sakshi came after changing, Akshat's mouth remained wide open.

[19:50] फुल लेंथ ऑफ वाइट मैक्सी ड्रेस उस पर खूब जांच रही थी।
  The full-length off-white maxi dress was looking great on her.

[19:55] साक्षी ने अक्षत की तरफ निगाह उठाकर पूछा यह कैसा है?
  Sakshi raised her eyes towards Akshat and asked, how is this?

[19:57] जवाब में अक्षत ने अपने बाएं हाथ की इंडेक्स फिंगर और थंब को जोड़ इशारा कर दिया।
  In response, Akshat gestured by joining the index finger and thumb of his left hand.

[20:02] सच में आपको अच्छी लगी।
  You really liked it.

[20:02] साक्षी ने हेरनी से पूछा।
  Sakshi asked hesitantly.

[20:05] हां, आप जल्दी से चेंज करके आए फिर से नहीं।
  Yes, you come quickly after changing, not again.

[20:07] मेरा मतलब है आप आई मीन जब ड्रेस सेलेक्ट कर ली है तो अब हमें घर चलना चाहिए।
  I mean, you, I mean, since the dress is selected, now we should go home.

[20:11] अक्षत साक्षी को ऐसे देख कुछ बोल ही नहीं पा रहा था।
  Akshat, looking at Sakshi like that, was unable to say anything.

[20:15] ओ हां काफी टाइम शॉपिंग में ही लगा गया है।
  Oh yes, a lot of time has been spent just shopping.

[20:17] मैं अभी चेंज करके आती हूं कहकर साक्षी चेंजिंग रूम में चली गई।
  Saying 'I'll come after changing now,' Sakshi went into the changing room.

[20:19] अक्षत काउंटर की तरफ बैठ गया।
  Akshat sat down near the counter.

[20:22] वहां उसे एक वाइन कॉलर की साड़ी दिखी।
  There, he saw a wine-colored saree.

[20:25] एक्सक्यूज मी अक्षत ने काउंटर पर खड़ी
  Excuse me, Akshat said to the one standing at the counter,

[20:27] लड़की से कहा। यस सर लड़की ने मुस्कते हुए

[20:29] जवाब दिया। वो साड़ी दिखाएं। अक्षत उंगोली

[20:32] से साड़ी की तरफ इशारा करते हुए कहा। जी

[20:34] सर कहते हुए उस लड़की ने साड़ी अक्षत के

[20:37] सामने रखा दी। अक्षत को वो साड़ी बहुत

[20:39] अच्छी लग रही थी। लड़की ने देख तो कहा

[20:41] आपकी वाइफ पर यह कॉलर बहुत अच्छा लाए।

[20:43] आपको कैसे पता वह मेरी वाइफ है? अक्षत ने

[20:46] हैरानी से कहा, जिस तरह से आप उनकी हर एक

[20:48] ड्रेस में कमियां ढूंढ रहे थे, ऐसा सिर्फ

[20:50] हस्बैंड ही करते हैं। लड़की ने हल्की

[20:52] मुस्कान के साथ कहा, ना जाने क्यों अक्षत

[20:55] के मन में साक्षी को अपनी पत्नी का संबोधन

[20:57] सुने एक खुशी महसूस हुई जिससे उसने अंदर

[20:59] ही छुपकर सहजता से कहा, आप इसे भी पैक कर

[21:01] दीजिए। जी सर कहकर लड़की अपने काम में लग

[21:04] गई। तब तक साक्षी ने भी आकर अपनी ड्रेस

[21:06] पैक करवा ली। कुछ देर बाद दोनों मॉल से

[21:08] निकाल हवेली की तरफ चल दिए। अंकित दिल्ली

[21:11] से पहली फ्लाइट पकड़ा। रवि से मिलने के

[21:13] लिए पहुंच चुका था। यह क्या हालत बना रखी

[21:15] है? अपनी अंकित यह रवि की लाल आंखें देख

[21:17] कहा जिन्हें देख कोई भी कह सकता है कि वह

[21:19] पूरी रात सोया नहीं है। मेरी हालत दिखा

[21:22] रही पर मेरे दिल के अंदर चला रहा तूफान

[21:24] किसी को नहीं दिखा रहा है। उसकी कही बातें

[21:26] मेरे दिल को अंदर ही अंदर चीर रही है। ऐसा

[21:28] लग रहा जैसे किसी ने मेरे दिल को अपनी

[21:30] मुट्ठी में बंद कर लिया है। कहते-कहते रवि

[21:32] ने अंकित के दोनों हाथ पकड़ के कहा, तू

[21:34] कुछ कर ना। अंकित बहुत दर्द हो रहा भाई।

[21:36] तू तो हमेशा मेरी हर बात मानता है ना

[21:38] प्लीज। आज आखिर बार कुछ मांग रहा हूं।

[21:40] मुझे वो साक्षी चाहिए। बहुत प्यार करता

[21:43] हूं उसे। तू कुछ करना समझा उसे। मेरी बात

[21:45] तो उसने सुनी नहीं। तू बोल उसे क्यों इस

[21:46] जबरन शादी को निभा रही है। तू कुछ बोलता

[21:48] क्यों नहीं है? तू बात करेगा ना उससे

[21:50] समझाएगी ना उसे। बोल ना अंकित तू करेगा

[21:53] साक्षी से बात। बोला भाई चुप क्यों है तू?

[21:56] रवि की ऐसी हालात देख अंकित ने उसे कसकर

[21:58] अपने सीने से लग लिया। रवि ने भी अंकित पर

[22:00] अपनी पकड़ बना ली थी। कुछ देर बाद अंकित

[22:03] को रवि की पकड़ ढीली पड़ती महसूस हुई।

[22:05] उसने देख तो रवि बेहोशा हो चुका था। उसने

[22:07] जल्दी से आवाज लग के सबको बुलाया। रवि को

[22:09] देख ताईजी के हाथ पैर ठंडे पड़ गए। रवि का

[22:12] पूर्व चेहरा सफेद पड़ा हुआ था। उन पर आंसू

[22:14] के निशान भी बांधे हुए थे। आंखों के नीचे

[22:16] काले धब्बे पड़े हुए थे। अपनी इकलौती

[22:18] संतान की ऐसी हालत देख ताऊजी का भी कलेजा

[22:20] मोह को आ गया था। अंदर ओढ़ती में डॉक्टर

[22:23] रवि का चेकअप कर रहे थे और बाहर सभी

[22:25] परेशानी से दरवाजे को घूर रहे थे। रूम का

[22:27] दरवाजा खुला डॉक्टर बाहर आए। डॉक्टर को

[22:30] बाहर आता देख सभी उनकी तरह लपके। डॉक्टर

[22:32] ने सभी को एक नजर देख कहा स्ट्रेस ले रहे

[22:34] हैं। वह किसी चीज का और पोपो डाइट भी नहीं

[22:37] ले रहे हैं। सोमकिन की वजह से लंग्स में

[22:39] धुआं भरा गया। ट्रीटमेंट कर दिया है।

[22:41] थोड़ी देर में होश आ जाए। कहे डॉक्टर अपने

[22:43] केबिन की तरह बच गए। अंकित भी उनके पीछे

[22:45] हो चला दिया। ताई जी लपक कर रवि के कमरे

[22:48] में दाखिल हो गई। दवाइयों के आस से उसे

[22:50] जल्दी ही होश आ गया। उसे होशा में आया देख

[22:52] सभी ने चैन की सांस ली। कैसे हो? रवि

[22:55] ताऊजी ने नरमी से पूछा, ठीक हूं। वह

[22:57] बेरुखी से बोला। कौन सी बात तुम्हें इतना

[22:59] परेशान कर रही है? इस बार चाचा जी ने

[23:02] चिंतावश पूछा अपनी औदा खोने का दुख उनसे

[23:04] बेहतर कौन जानता है ऐसी कोई बात नहीं है

[23:07] चाची उसने टालने की कोशिश की ठीक है

[23:09] तुम्हारी बात माना लेते हैं पर आपने खाने

[23:11] पीने का ध्यान रखो चाचा जी ने हिदायत दी

[23:14] जी आगे से ध्यान रखूंगा उसने सिर झुककर

[23:16] कहा कुछ देर के लिए कमरे में शांति पसरा

[23:18] गई जिसे तोड़ते हुए रवि ने कहा आप लोग घर

[23:20] चले जाए आज भाई के लिए बहुत बड़ा दिन है

[23:23] रवि के कहने पर उन्हें समझते देर ना लगी

[23:26] कि वह किस बारे में बात कर रहा है। अपनी

[23:28] ऐसी हालात में रवि को अक्षत के बारे में

[23:29] चिंता करते देख ताई जी ने चिढ़कर कहा,

[23:31] तुझे बस उसकी ही चिंता रहती है। उसे तेरी

[23:34] जरा सी भी फिकर नहीं है। कहां वह जिसकी

[23:36] माला तू जपता रहता है। तिरछी मुस्कान के

[23:38] साथ उसने कहा, "आप में से किसी ने उन्हें

[23:40] मेरे बारे में बताया।" उसके तीखे सवाल से

[23:43] चारों निशब्ध हो गए। उन्हें चुप देख उसने

[23:45] कहा, "आप लोग घर जाकर कम से कम दिखावा ही

[23:47] कर लीजिए। उनकी खुशी में खुश होने का और

[23:49] एक बात ध्यान से सुन लीजिए। मेरे बारे में

[23:51] कोई उन्हें कुछ नहीं बांटेगा।" उसमें बोली

[23:52] में चेतावनी झलक रही थी। कोई टेंशन की बात

[23:55] तो नहीं है? डॉक्टर डॉक्टर के केबिन में

[23:57] पहुंच अंकित ने पूछा, बैठिए अंकित को

[24:00] दरवाजे से ही सवाल करते देख डॉक्टर ने

[24:02] कहा, वह अंदर आकर बैठा गया। सच कहूं तो

[24:05] अभी वह ठीक पर इतना ज्यादा मासिका तनाव

[24:07] सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। आप

[24:09] समझ सकते हैं मैं क्या कह रहा हूं। वह

[24:11] सहजता से बोले, "जी मैं ध्यान रखूंगा।

[24:14] डॉक्टर को शुक्रिया अदा करने के बाद अंकित

[24:16] उनके केबिन से निकाल आया। पर उसके माथे पर

[24:18] चिंता की लकीरें खींच गई थी। रवि जितना

[24:20] मस्तमोला इंसान था, उतना ही जिद्दी भी कही

[24:22] अपनी जिद में वह कुछ गलत ना कर बैठे जैसी

[24:24] अनेक संभावनाओं ने मस्तक पर परेशानी के

[24:27] भाव ला दिए थे। वह रवि के रूम के सामने

[24:29] पहुंच तो उसे होश आ चुका देख आपन सिर झिटक

[24:31] कर कमरे में दाखिल हो गया। कैसा है तू?

[24:34] अंकित ने कमरे में घुसते ही पूछा जिंदा

[24:35] हूं। क्या हो गया है तुझे? कैसी बातें कर

[24:38] रहा है? अंकित से उसकी हालत नहीं देखी जा

[24:40] रही थी। रवि ने मुस्कुराते हुए अंकित को

[24:43] देखा। उसकी मुस्कान में दर्द और बेबा के

[24:45] सिवा कुछ ना था। उसे इस हालत में देख

[24:47] अंकित तड़प उठा। घर ले चल मुझे। उसने वही

[24:50] मुस्कान होठों पर सजाकर कहा। इतनी क्या

[24:52] जल्दी है घर जाने की? बमुष कल खुद को

[24:55] संभाला। अंकित ने कहा उसे अभी रवि का

[24:57] सहारा बनाना था ना खुद की कमजोर पड़ना था।

[24:59] दम वुड यहां मेरा कमरे में लगी खिड़की से

[25:01] सूरज को देखते हुए कहा जिसे आप सिर्फ

[25:03] निहार सकते हैं हासिल नहीं कर सकते हैं।

[25:05] अगर यह गुस्तखी की तो सिर्फ राख मिलेगी और

[25:07] कुछ नहीं। रुक मेडिसन ले चलते हैं। अंकित

[25:10] मेडिसिन लेने चला गया। कुछ देर बाद दोनों

[25:13] हवेली की तरह चला दिए। बाकी लोगों पहले ही

[25:15] जा चुके थे। रेडियो पर बजता संगीत रवि के

[25:17] दर्द को शब्दों में पिरो रहा था। कुछ हारे

[25:20] नाल नसीब भी सी कुछ दिल दे रिश्ते तोड़

[25:22] देता कुछ अंजली नाम हो अनिया सी कुछ गलच

[25:25] गवा दे तोक भी सी किस्मत ने जाने ऐ दिल यह

[25:28] खेल कैसे खेले मन अंदर अंदर रोए गांव सहता

[25:32] रहे अकेले किस्मत ने जाने ऐ दिल यह खेल

[25:34] कैसे खेले मन अंदर अंदर रोए गांव सहता रहे

[25:37] अकेले किसे अपना हाल सुना किसे अपने जख्म

[25:40] दिखावा जो बीत गया है मुझ में मैं जानू या

[25:42] दिल जाने हाय रब्बा हाय रब्बा कोई दर्द ना

[25:45] जाने मेरा दर्द ना जाने हाय रब्बा हाय

[25:47] रब्बा कोई दर्द ना जाने मेरा मेरा दर्द ना

[25:49] जाने हाय रब्बा कच्ची थी आस की डोरी एक पल

[25:52] में टूट गई है यह अपनों की खुदग्रजी

[25:55] खुशियां मेरी लुट गई है इस राहे वफा में

[25:57] पाए हर मोड़ फख्त रुसवाए जो मंजिल के चाहत

[26:00] थी रस्ते में वो छूट गई है सुना मन का

[26:03] आंगन है यह कैसा खालीपन है मेरे अंदर है

[26:05] तनहाई मेरे बाहिर है वीरानी कोई पूछे मेरे

[26:08] दिल से कैसे यह जहर पिया है मरना किसको

[26:11] कहते हैं जीते जी यह जान लिया है बेदर्द

[26:13] जमाने से में कोई शिकवा करूं तो कैसे

[26:15] हमदर्द जिसे समझा था उसने ही तो दर्द दिया

[26:18] है यह सोच के दर्द साहू मैं इस दर्द से

[26:20] कुछ ना कहूं मैं यह दिल के रिश्ते पल में

[26:22] हो जाए ना बेगाने। हवेली में दाखिल होते

[26:25] ही साक्षी अक्षत को नया चेहरा देखने को

[26:27] मिला। साथ ही घर का माहौल भी और दिनों से

[26:29] अलग था। उनकी आंखों का अनुसरण करते हुए

[26:31] रवि ने अंकित का परिचय करते हुए कहा, "यह

[26:33] मेरा दोस्त अंकित है। हम दिल्ली में साथ

[26:35] पढ़ते थे। साक्षी ने मुस्क कर एक नजर उसे

[26:37] देख अपने कमरे की तरफ चला दी।" अकित गहरी

[26:39] आंखों से साक्षी को देखा रहा था। सच कहता

[26:41] रवि ने उसमें कुछ तो बात थी। कैसी रही

[26:44] मीटिंग? रवि ने मुस्कुरते हुए पूछा, "बोह

[26:46] हाथ अच्छी रही। कि छोटे कॉन्ट्रैक्ट भी

[26:47] हमें ही मिला है। अक्षत ने हॉल में रखे

[26:49] सोफे पर बैठे हुए कहा, कांग्रेचुलेशन भाई

[26:52] रवि अक्षत की खुशी में खुश था। थैंक्स पर

[26:55] तुम आज ऑफिस क्यों नहीं आए थे? अक्षत ने

[26:57] अचानक से पूछा। उसके इस सवाल पर थोड़ी देर

[26:59] के लिए रवि से काबका गया। फिर संभालते हुए

[27:01] कहा, सिर में दर्द था इसलिए दवाई ली? हां,

[27:04] अक्षत को कहीं फोन मिलता देख रवि ने पूछा,

[27:06] किसे फोन कर रहे हैं भाई? राघव को उसने दो

[27:09] टूक जवाब दिया। क्यों कॉन्ट्रैक्ट मिले कि

[27:11] खुशी में पार्टी रखी है? राघव को इनफॉर्म

[27:14] कर रहा हूं। आज पार्टी संभाला ले। क्यों

[27:16] आप नहीं जाएंगे क्या तू ठीक नहीं है और

[27:18] मैं पार्टी में जाऊं इंपॉसिबल क्यों भाई

[27:21] आज इतना बड़ा दिन है आपके लिए आपको मेरी

[27:23] कसम आप पार्टी में जरूर जाएगी रवि अक्षत

[27:26] ने डपटा लगाई कोई रवि नहीं आपको जाना

[27:28] पड़ेगा रवि ने बच्चों की तरह जिद करते हुए

[27:30] कहा तुम नहीं मनाओगे बिल्कुल नहीं ठीक है

[27:33] भाई जा रहा हूं कहा अक्षत अपने कमरे की

[27:35] तरफ बद गया रंग बिरंगी लाइटों से जगमगाती

[27:38] वो जगह एक तरफ बार काउंट तथा दूसरी तरफ

[27:41] कुछ बड़े आकार के सोफे रखे गए थे वहां पर

[27:43] बजता तेज आवाज का संगीत किसी के भी पैरों

[27:45] को थिरकने पर मजबूर कर सकता है। ठाकुर

[27:47] कंस्ट्रक्शन का पूरा स्टाफ वह पहले ही आ

[27:49] चुका था। राघव सभी को वेलकम कर रहा था। बस

[27:51] कमी थी पार्टी में तो मेजबान साहब की यानी

[27:53] कि हमारे अक्षत बाबू की। कुछ देर बाद रेड

[27:56] छेरी क्लब के बाहर एक चमचमाती BMW कार आकर

[27:59] रुकी राघव ने मुस्कुराते हुए इस कार में

[28:01] बैठे लोगों का स्वागत किया। उसमें से ब्लू

[28:03] डेनिम जींस के साथ ऑफ वाइट कलर का शर्ट

[28:05] जिसकी स्लीव को फोल्ड करके कोहनियों पर

[28:07] सटा हुआ था। पैरों में वाइट स्पॉट शूज थे।

[28:09] बालों को आज रोजाना की तरह सेट नहीं किया

[28:11] गया था। जेल लगाकर उन्हें आज खड़ा करके

[28:13] फनकी स्टाइल किया गया था। अक्षत को कॉलेज

[28:15] वाले लक में देखकर राघव ने कहा डूड आज तू

[28:17] कॉलेज बॉय लग रहा है। तू कौन सा कम लग रहा

[28:20] है? अक्षत ने जवाब के बदले राघव की तारीफ

[28:22] करते हुए कहा हट तेरे चक्कर में भाभी को

[28:25] तो देखना है भूल गया। राघव ने अक्षत पर से

[28:27] अपना ध्यान हटाते हुए साक्षी की तरफ देखा।

[28:29] उसे देखकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया।

[28:31] ऑफ वाइट कलर के फुल लेंथ मैक्सी गाउन में

[28:33] बेहद दिलकश लग रही थी। उसके कमर तक लहराते

[28:35] बालों को आजकली किया हुआ था। आज कानों में

[28:38] छोटी-छोटी बालियों की जगह हुपर्स ने ले

[28:40] रखी थी। राघव की हालत पर अक्षत ने

[28:42] फुसफुसते हुए उसके कान के पास कहा, मुंह

[28:44] बंद कर नहीं तो मच्छर चला जाएगा। उसकी बात

[28:47] सुन अपना मुंह बंद कर। उसने साक्षी से

[28:49] कहा, आज बहुत अच्छी लग रही हो साक्षी। बस

[28:51] मुस्कार दी। अक्षत की नजरों की तपिश खुद

[28:53] पर महसूस कर आज उसके मुंह के शब्द उसके

[28:55] मुंह में ही रह गए। चले राघव के कहने पर

[28:58] अक्षत ने अपनी नजर साक्षी के ऊपर से हटा

[29:00] ली। तीनों क्लब के अंदर चल दिए। अक्षत को

[29:02] देख सभी ने उसको ग्रीट किया। अक्षय ने

[29:04] मुस्कुराते हुए कहा, यहां पर फॉर्मेलिटी

[29:06] दिखाने की कोई जरूरत नहीं है। यह ऑफिस

[29:08] नहीं है। सो प्लीज एंजॉय। अक्षय के कहने

[29:10] पर सभी वापस से पार्टी एंजॉय करने में लग

[29:12] जाते हैं। पर सभी को कहीं ना कहीं यह

[29:14] जानने की इच्छा जरूर थी कि क्या साक्षी

[29:15] अक्षत के साथ पार्टी में आई थी? पर कोई भी

[29:18] यह सवाल उनसे पूछा नहीं सकता था। राघव

[29:20] अक्षत बार काउंटर की तरफ बढ़ गए। साक्षी

[29:23] स्टाफ की दूसरी लड़कियों के पास चली गई।

[29:25] बंद कर उसे घूरना। राघव ने बियर का घुट

[29:28] भरते हुए कहा। मैं किसे घूर रहा हूं?

[29:30] अक्षत ने यहां वहां देखते हुए कहा। तेरा

[29:33] भाई सब जानता है जो तू कहता है वह जो नहीं

[29:35] कहता है वह भी। कहा क्यों नहीं देता कि

[29:37] प्यार करने लगा है उसे। राघव ने उसकी

[29:39] आंखों में देखते हुए कहा, "साक्षी को एक

[29:42] टक देखते हुए अक्षत ने कहा, बहुत अच्छी

[29:44] लड़की है साक्षी। लड़की नहीं तेरी बीवी

[29:46] है। राघव ने टोकते हुए कहा, अक्षत एक टक

[29:49] मुस्कुराते हुए साक्षी को देखता रहा। राघव

[29:51] ने एक नजर दोनों पर डालते हुए अपनी

[29:53] ड्रिक्स पीने लगा। दूर खड़ी राशि को अक्षत

[29:56] का साक्षी को इस तरह देखना खल गया। उसने

[29:58] गुस्से से अपनी मुट्ठियां कस मन ही मन

[30:00] कहा। आज तो तुम्हें मजा जाग कर रहूंगी।

[30:02] सोच उसने एक वेटर को अपने पास बुलाकर कुछ

[30:04] समझाकर 2000 की नोट पकड़ दी। वेटर मुस्कता

[30:06] हुआ वहां से चला गया। राशि के चेहरे पर एक

[30:09] कुटिल मुस्कान आ गई। अक्षु आप मेरे साथ

[30:11] डांस नहीं करेंगे। साक्षी ने लड़खड़ती

[30:14] जुबान में अक्षत के पास आकर कहा, राघव और

[30:16] अक्षत ने चौंक कर साक्षी की तरफ देख तो

[30:18] उसने हंसते हुए अक्षत का हाथ पकड़ कहा,

[30:20] "यह बड़ी-बड़ी आंखों से घूर-घुर के क्या

[30:22] देख रहे हो? चलो जल्दी। साक्षी का व्यवहार

[30:25] दोनों को अजीब लगा। अक्षत ने उसकी नशाली

[30:27] आंखों देख उसके मुंह के पास जाकर सूंघ कर

[30:29] उसने राघव से कहा, मैडम ने पी रखी है।

[30:32] साक्षी ऐसी लड़की नहीं। राघव ने कहा,

[30:34] "आपने क्या पिया है साक्षी?" अक्षत ने

[30:36] प्यार से पूछा, ऑरेंज जूस जो आपने मेरे

[30:39] लिए भिजवाया था। साक्षी ने उसकी आंखों में

[30:41] देखते हुए कहा, जहां बहुत से जज्बात झलक

[30:43] रहे थे। तूने क्या भिजवाया था साक्षी के

[30:46] लिए? राघव ने अक्षत से पूछा, "मैंने कुछ

[30:48] नहीं भिजवाया अक्षत ने कहा, तो फिर राघव

[30:51] अपनी बात आगे कुछ कहता कि साक्षी ने अपने

[30:53] होठों पर उंगोली रख कहा, "कतनी बातें करते

[30:55] हैं।" आप दोनों अब चुप। फिर अक्षत की तरफ

[30:57] देखते हुए कहा, "प्लीज" चलिए ना मुझे डांस

[30:59] करना है।" साक्षी को बच्चों की तरह जिद

[31:00] करता देख, अक्षत ने उसे एक दो बार समझाने

[31:02] की कोशिश करी। पर साक्षी बिल्कुल बच्चों

[31:04] की तरह जिद पर आड़ चुकी थी। वह किसी की

[31:06] बात सुनने को तैयार ही नहीं थी। काफी देर

[31:09] तक राघव उन दोनों की बिना सर पैर की बहस

[31:11] को देखता रहा। थोड़ी देर बाद उसने खींचते

[31:13] हुए कहा भाईचला क्यों नहीं जाता है जैसे

[31:15] डांस करने को ही तो कह रही कौन सा तुझे

[31:17] तेरी किडनी मान रही है। अक्षत ने राघव की

[31:20] बेतुकी बातों पर गुस्से से घुर के देखा

[31:22] जिसे नजरअंदाज करते हुए राघव ने अपनी ही

[31:24] धुन में साक्षी से कहा। साक्षी इसे डांस

[31:26] नहीं करना है। कोई बात चलो हम साथ में

[31:28] डांस करते हैं। साक्षी ने एक नजर अक्षत को

[31:30] देख जो उन दोनों घुल रहा था। फिर राघव की

[31:32] तरफ देख बोली ठीक है चलिए दोनों अभी कुछ

[31:34] ही कदम चले थे कि किसी ने राघव का हाथ

[31:37] पकड़ लिया राघव के होठों पर तिरछी मुस्कान

[31:39] खेल गई उसने पीछे मुड़कर कर कर देख तो

[31:41] अक्षत उसे घूर रहा था अब क्या है राघव ने

[31:44] अपनी मुस्कान को छिपा कर कहा जा तदू अपनी

[31:46] ड्रिकस एंजॉय कर डांस मैं कर लूंगा अक्षत

[31:49] ने कहा पक्का ना हां मेरे बाप जा अक्षत ने

[31:51] खींचते हुए कहा राघव बार काउंटर की तरफ

[31:54] चला गया उसने वेटर को अपने पास बुलाकर

[31:56] उसके कान में कुछ कह नजरें डांस फ्लो पर

[31:58] जमा ली अक्षत साक्षी जैसे ही फ्लो फ्लो पर

[32:01] पहचे स्पॉटलाइट उनके ऊपर आकर पड़ी। साथ ही

[32:03] एक बहुत ही प्यारा गाना बैकग्राउंड में

[32:05] बजने लगा। अक्षत ने एक नजर राघव को देखा।

[32:08] जैसे ही दोनों की नजरें आपस में मिली,

[32:10] राघव ने शरारती मुस्कान अक्षत की तरह

[32:11] उछालकर अपनी एक आंख दब दी। मुंह फेर अक्षत

[32:14] भी मुस्कुरा दिया। इतनी मोहब्बत करो ना

[32:17] मैं डूब ना जाऊं कहीं वापस किनारे पर आना।

[32:19] मैं भूल ना जाऊं कहीं देखा जब से है चेहरा

[32:21] तेरा। मैं तो हफ्तों से सोया नहीं। साक्षी

[32:24] लड़खड़ाते कदमों के साथ डांस कर रही थी।

[32:26] उसे देख अक्षत ने एक हाथ से उसकी कमर पर

[32:29] अपनी मजबूत पक बना ली। दूसरे हाथ से उसके

[32:31] एक हाथ को अपने कंधे पर रखकर फिर अपनी

[32:33] उंगलियां से उसकी उंगुलियां उलझ ली। बोल

[32:36] दो ना जरा दिल में जो है छिपा मैं किसी से

[32:38] कहूंगा नहीं। बोल दो ना जरा अक्षत की पकड़

[32:41] में साक्षी कसमासने लगी। जैसे ही अक्षत की

[32:43] पकड़ अधाई हुई साक्षी जाने को हुई कि तभी

[32:45] अक्षत ने उसका हाथ पकड़ कर खींच जिससे

[32:47] साक्षी रोल होते हुए अक्षत के सीने से लग

[32:49] गई। साक्षी की पीठ अक्षत के सीने से सटी

[32:52] हुई थी। उसकी पतली कमर अक्षत के बाहों की

[32:54] गिरफ्त में थी। मुझे नींद आती नहीं है।

[32:57] अकेले ख्वाबों में आया करो। नहीं चल

[32:58] सकूंगा तुम्हारे बिना मैं। मेरा तुम सहारा

[33:01] बनो। एक तुम्हें चाहने के अलावा और कुछ

[33:02] हमसे होगा नहीं। बोल दो ना जरा। अक्षत की

[33:05] गर्म सांसों उसकी गर्दन पर पड़ रही थी।

[33:08] साक्षी के ऊपर अक्षत के शरीर से उठती महक

[33:10] से मददोशी छा रही थी या फिर आज नशे में

[33:12] उसका प्यार छलकने को तैयार है। साक्षी

[33:14] आंखें बंद कर इस एहसास को जी रही थी।

[33:16] अक्षत ने उसके कंधे पकड़ उसे अपनी तरफ

[33:18] घूमला। साक्षी घूमते ही उसके सीने से लग

[33:21] अपनी आंखें मुंड ली। उसकी हरकत देख अक्षत

[33:23] मुस्कार दिया। हमारी कमी तुमको महसूस होगी

[33:26] भीगा देंगी जब बारिशें मैं भर करके लाया

[33:28] हूं आंखों में अपनी अधूरी सी कुछ

[33:30] ख्वाहिशें रूह से चाहने वाले आशिक बातें

[33:32] जिस्मों की करते नहीं बोल दो ना जरा

[33:35] तालियों की आवाज से दोनों को होश आया गाना

[33:37] कब का खत्म हो चुका है देखा तो सब उन

[33:39] दोनों को ही देख रहे थे छिपते हुए अक्षत

[33:41] साक्षी का हाथ पकड़ राघव के पास आ गया

[33:44] कैसे रहा अक्षत बाबू डांस राघव ने उसके

[33:47] बैठते ही पहल सवाल लगा क्या मतलब है तेरा

[33:50] अक्षत को उसकी बात समझ नहीं आई बड़े

[33:52] रोमांटिक डांस कर रहे थे साक्षी के साथ

[33:54] राघव ने एक-एक शब्द पर जोर देते हुए कहा

[33:57] कुछ भी मत बोल अक्षत ने नजर चुराते हुए

[33:59] कहा होता है भाई होता है शर्माने वाली बात

[34:01] नहीं है अपनी बीवी के साथ रोमांटिक हो रहे

[34:03] हो किसी और के साथ नहीं है सो चील राघव ने

[34:05] हंसते हुए कहा राघव अक्षत ने उसे घूरते

[34:08] हुए कहा ठीक है ठीक है सॉरी पर प्लीज अपनी

[34:11] यह बड़ी आंखें मत दिखा राघव ने अपनी

[34:12] ड्रिंक्स पीते हुए कहा बस कर कितना पिएगा

[34:15] अक्षत ने उसे पीते देख कहा एक लास्ट पैक

[34:18] बस राघव ने विनती भरे लहजे में कहा ठीक है

[34:21] फिर मैं निकलता हूं अक्षत ने घड़ी की तरफ

[34:23] देखते हुए कहा इतनी जल्दी हां देख रहा है

[34:26] ना इनकी हालत अक्षत ने साक्षी की तरफ

[34:28] देखते हुए कहा जो बारकाउंडर पर अपनी दोनों

[34:30] कोहनियां टिक कर अपने चेहरे को हाथों में

[34:32] भरकर उन दोनों को ही देख रही थी हां काफी

[34:35] हाई है यह तो हां इसलिए अब निकला हूं यहां

[34:37] तो हैंडल कर लेना चल ठीक है ध्यान से जना

[34:40] राघव से विदा लेकर अक्षत साक्षी का हाथ

[34:42] पकड़ बाहर निकाला गया हम कहां जा रहे हैं

[34:45] अभी मुझे डांस करना है वह अक्षय से अपना

[34:47] हाथ छूटते हुए बोली हम घर जा रहे हैं आपको

[34:50] जितना भी डांस करना है रूम में चलकर करना

[34:52] अक्षत लगभग खींचते हुए उसे बाहर ले जा रहा

[34:54] था। पक्का ना उसने अपनी बड़ी-बड़ी पलकों

[34:57] को झपकते हुए पूछा, हां बाबा पक्का चलो।

[34:59] अक्षत के प्रॉमिस के बाद साक्षी चुपचाप

[35:01] उसके पीछेछे चलने लगी। गाड़ी के पास पहुंच

[35:04] अक्षत ने डोर अनलॉक करने के बाद साक्षी को

[35:06] सीट पर बिठाकर उसकी तरफ बढ़ने लगा। अक्षत

[35:09] को अपनी तरफ बढ़ता देख साक्षी की घड़क में

[35:11] तेज रफ्तार से चलने लगी। उसने अपनी आंखें

[35:13] कसकर बंद कर ली। उसे ऐसा करता देख अक्षत

[35:15] ने मुस्कुर कर सीट बेल बंद पीछे हट गया।

[35:18] थोड़ी देर बाद साक्षी ने अपनी एक आंख खोल

[35:20] कर देखा। अक्षत को अपने पास ना देख। उसने

[35:22] गर्दन घूमकर दूसरी तरफ देखा तो अक्षत उसे

[35:24] ही देख रहा था। चले अक्षत ने पूछा। उसने

[35:28] हां में गर्दन हिला दी। उनकी कार सड़क पर

[35:30] अपनी रफ्तार से चली जा रही थी। रात के इस

[35:32] पहर में सड़क पर एक दुख ही गाड़ियां थी।

[35:35] गाड़ी रोकिए जल्दी से वह अचानक से बोली

[35:37] क्या हुआ? उसने परेशानी से पूछा। पहले

[35:40] गाड़ी तो रोकिए प्लीज। वह रिक्वेस्ट करते

[35:42] हुए कहने लगी। अक्षत ने गाड़ी रोक। साक्षी

[35:44] से पूछा, "क्या हुआ?" इस तरह अचानक से

[35:46] गाड़ी क्यों रूम आई? उसके पूछने पर साक्षी

[35:48] ने सामने की तरफ उंगोली से इशारा कर दिया।

[35:50] अक्षत ने उस तरफ देखा। सामने आइसक्रीम

[35:52] पार्लर था। आइसक्रीम खानी है। अक्षत ने

[35:55] पूछा, हां, साक्षी ने बच्चों की तरह

[35:57] माचलते हुए कहा, "कौन सा फ्लेवर?" बटर

[36:00] स्कॉच ठीक है, मैं लेकर आता हूं पर आप

[36:02] यहां से हिलना मत। साक्षी ने जल्दी से

[36:04] अपनी गर्दन हिला दी। अक्षत आइसक्रीम लेने

[36:06] चला गया। अक्षत वापस आया तो उसने देखा,

[36:09] साक्षी गाड़ी के बोनट से टिक कर बाहर खड़ी

[36:11] थी। उसने कहा, मैंने आपको हिलने से मना

[36:12] किया था ना। फिर आप बाहर क्यों आए? मुझे

[36:15] अकेले अंदर अच्छा नहीं लगा था। इसलिए मैं

[36:17] बाहर आ गई। वह गर्दन झुका कर बोली, "चलिए,

[36:20] कोई बात नहीं। यह लीजिए आइसक्रीम। साक्षी

[36:21] की ओर बढ़ते हुए बोला, वह भी साक्षी के

[36:23] पास खड़ा हो गया। थैंक यू कहकर वह

[36:26] जल्दी-जल्दी आइसक्रीम खाने लगी। साक्षी की

[36:28] हरकतें देख अक्षत मन मन मुस्कुराने लगा।

[36:31] चले। साक्षी की आइसक्रीम खत्म होने के कुछ

[36:33] देर बाद अक्षत ने पूछा। वो कह वो गाड़ी

[36:35] में बैठ गई। ड्राइविंग सीट पर बैठा। अक्षत

[36:38] ने गाड़ी स्टॉट कर आगे बढ़ दी। कुछ ही दूर

[36:40] पर गाड़ी चलते-चलते बंद हो गई। गाड़ी

[36:42] क्यों रोका दी? गाड़ी को रुक देख साक्षी

[36:44] ने पूछा मैंने नहीं रोकी अक्षत आगे कुछ

[36:47] कहता कि साक्षी ने कहा अरे ड्राइव आप कर

[36:50] रहे हैं तो गाड़ी अपने नहीं तो किसने रोकी

[36:53] आपने आप रुक गई है हां कुछ देर हंसने के

[36:55] बाद साक्षी ने बम मुश्किल अपनी हंसी को

[36:57] रोक कर कहा यह अपने आप थोड़ी ना रुकती है

[36:59] इसे रोकना पड़ता है अच्छा मुझे तो पता ही

[37:02] नहीं था अक्षत ने खींचते हुए कहा अच्छा

[37:05] पता चल गया है तो प्लीज चलाओ ना साक्षी ने

[37:07] अक्षत का हाथ पकड़ हिलाते हुए कहा साक्षी

[37:09] की अजीब सी हरकतों से परेशान होकर अक्षत

[37:11] ने अपना सर पकड़ाकर कहा चुपचाप अपने मुंह

[37:13] पर उंगली रखकर बैठो। आप मैं देखकर आता हूं

[37:16] क्या हुआ है। अक्षत बोनट खोलकर गाड़ी चेक

[37:18] करने लगा। अभी वह अपना काम कर ही रहा था

[37:20] कि पीछे से उसके कंधों पर किसी ने अपने

[37:22] कंधों से टक्कर मारी। अक्षत ने गर्दन पीछे

[37:24] करके देखा तो साक्षी खड़ी उसे देखकर

[37:26] जल्दी-जल्दी अपनी पलकें झपका रही थी।

[37:28] साक्षी को देख अक्षत ने गहरी सांस ली।

[37:31] क्या रही है आप साक्षी की तरफ घूमते हुए

[37:33] अक्षत ने पूछा। प्यार अक्षत की आंखों में

[37:36] आंखें डालकर साक्षी ने कहा, "क्या साक्षी

[37:38] की बात सुन। अक्षत चौका क्या? क्या होता

[37:40] है प्यार कर कर रही हो? आपने पतिदेव से

[37:42] साक्षी ने आपन चेहरा अक्षत की तरफ बढ़ते

[37:44] हुए कहा क्या कर रही है आप अक्षत ने पीछे

[37:48] हटते हुए लड़खड़ाती जुबान में पूछा कितने

[37:50] भूलकड़ है आप अभी तो बताया प्यार वो आगे

[37:53] बढ़ते हुए बोली हम घर पर नहीं है अक्षत

[37:56] पीछे हटते हुए ही बोला आप घर पर ही कौन सा

[37:58] प्यार करते हैं साक्षी की आवाज में उदासी

[38:00] आ गई थी जो अक्षत को बिल्कुल अच्छी नहीं

[38:02] लगी वह मन ही मन बोला वह इस रिश्ते को दिल

[38:04] से निभा रही है उसकी कुछ इच्छाएं हैं कुछ

[38:05] जरूरतें हैं आखिर उसका हक है मुझ पर पत्नी

[38:08] है वह मेरी वह कुछ कहती नहीं है पर हर

[38:10] लड़की के अपनी मैरिड लाइफ के कुछ सपने

[38:11] होते हैं। उसका पति उसे प्यार करे। उसे

[38:13] वक्त दे, उसकी केयर करे। उसके हाथ में हाथ

[38:16] डालकर पार्टी में जाए। पर मैं क्या करूं?

[38:18] जो गलती उसने की ही नहीं उसकी सजा दे रहा

[38:20] हूं। बस अब और नहीं मुझे इस रिश्ते की एक

[38:23] नई शुरुआत करनी होगी। कहां खो गए साक्षी

[38:26] ने उसके मुंह के सामने चुटकी बजते हुए

[38:28] कहा। कहीं नहीं आप अंदर बैठो। मैं इसे चेक

[38:30] करके आता हूं। वह साक्षी को कार के अंदर

[38:32] बिठाते हुए बोला। कार को लॉक कर दिया ताकि

[38:35] साक्षी फिर से बाहर ना आ सके। थोड़ी देर

[38:37] बाद अक्षत ने कार स्टॉट की तो स्टॉ हो गई।

[38:39] उसने चैन की सांस लेकर गाड़ी हवेली की तरफ

[38:41] बढ़ दी। गाड़ी पाक कर अक्षत की तरफ देख तो

[38:44] वह सो चुकी थी। अक्षत को सोती हुई वह इतनी

[38:46] प्यारी लगी कि उसे साक्षी को उठान ही नहीं

[38:48] लगा। अक्षत ने साक्षी को अपनी बाहों में

[38:50] उठाकर कमरे की तरफ बढ़ गया। अपने कमरे की

[38:53] खिड़की पर खड़े रवि ने साक्षी को अक्षत की

[38:56] बाहों में देख अपनी नजरें फेर ली। उसके

[38:58] साथ में खड़े अंकित ने यह देख कहा। नजरें

[39:00] फेरने से कुछ नहीं होगा। रवि यह सच कभी

[39:02] नहीं बदल सकता है कि साक्षी अब अक्षत की

[39:04] पत्नी है। पता है मुझे पर क्या करूं उसे

[39:07] किसी और के साथ देख। देखिए दिल जलता है।

[39:08] रवि ने सिगरेट होठों पर रखते हुए कहा, "ज

[39:11] दिल जला रहा है तो क्यों खून भी जला रहा

[39:13] है?" अकित ने उसके मुंह से सिगरेट निकलते

[39:15] हुए पूछा, जिंदगी सबको हंसाए जरूरी तो

[39:18] नहीं। मोहब्बत सबको मिल जाए जरूरी तो

[39:20] नहीं। कुछ लोग बहुत याद आते हैं जिंदगी

[39:23] में। वह भी हमें याद करें जरूरी तो नहीं।

[39:26] स्त्रोत गूगल रवि ने दर्द भरी मुस्कान

[39:28] होठों पर सजाकर कहा, "क्यों कर रहा है

[39:30] अपने साथ ऐसा?" अंकित ने रवि से पूछा, वह

[39:34] हमें दर्द दे या प्यार उनका दिया। हमें सब

[39:36] कुछ कबूल है। रवि ने खुले आसमान को देखते

[39:38] हुए कहा, "मेरा दोस्त बहुत बदल गया है।

[39:40] इश्क ने हमें निकम्मा कर दिया। नहीं तो

[39:42] आदमी हम भी काम के थे। रवि ने मुस्कते हुए

[39:44] कहा, "चल, काफी रात हो गई है। सो जा।

[39:47] अंकित ने टाइम देखते हुए कहा, "चल कह

[39:50] दोनों साथी लेट गए।" थकान की वजह से अंकित

[39:52] जल्दी सो गया। पर रवि की आंखों से नींद

[39:54] दूर थी। कमरे में पहुंच अक्षत ने साक्षी

[39:57] को बेड पर ठीक से लिटाने के बाद हटाने को

[39:59] हुआ कि साक्षी ने अपनी आंखें खोल उसका हाथ

[40:01] पकड़ लिया। क्या हुआ? अक्षत ने मुड़कर

[40:03] पूछा, बैठिए ना। साक्षी ने बैर पर सरकते

[40:06] हुए कहा, अक्षत साक्षी के पास बैठ गया। यह

[40:09] लोग आपसे प्यार नहीं करते हैं। सिर्फ

[40:10] दिखाव करते हैं। थोड़ी देर बाद वह बोली,

[40:13] कौन लोग? अक्षत ने पूछा, यह आपकी फैमिली

[40:15] यह सब झूठे हैं। सिर्फ नाटक करते हैं

[40:17] प्यार करने का। अक्षत का हाथ अपनी

[40:18] हथेलियों के बीच रखकर कहा, "पता है मुझे

[40:21] होठों पर दर्द भरी मुस्कान लिए। अक्षत ने

[40:23] कहा, "फिर क्यों यहां है आप?" नशे में

[40:26] साक्षी को अक्षत की बातें ज्यादा समझ नहीं

[40:28] पाई थी। क्योंकि मैं परिवार की अहमियत

[40:30] समझता हूं। अब आप ज्यादा बातें मत करो। सो

[40:32] जाओ। अक्षत ने प्यार से उसके बालों को

[40:34] सहलाकर अपने लंबों को उसके माथे पर रख

[40:36] दिए। साक्षी नींद की आगोश में चली गई

[40:38] अक्षत फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस

[40:40] गया। फ्रेश होने के बाद अक्षत अपने रूम की

[40:43] खिड़की के पास खड़े होकर बादलों से घिरे

[40:45] आसमान की तरफ देखते हुए अतीत की यादों में

[40:47] खो गया। 3 साल पहले लखनऊ एयरपोर्ट पर

[40:50] कंधों पर एक पिट टू बैग टंगे खड़े अक्षत

[40:52] ने मन ही मन खुद से बोला अंकल और राघव से

[40:54] जब भी पूछो ताऊ जी। चाचा जी मुझसे मिलने

[40:57] क्यों नहीं आते हैं? हर बार कहते हैं बिजी

[40:58] है। अब इतना भी क्या बिजी होना कि एक बार

[41:00] मिला नहीं सकते आकर। ऊपर से यह राघव मुझे

[41:03] हवेली में किसी का फोन नंबर भी नहीं देता

[41:04] कि बात ही कर सकूं। पर अब अगर वह मिलने

[41:06] नहीं आ सकते तो कोई बात नहीं। मैं तो उनसे

[41:08] मिलने आ सकता हूं। इसलिए देखो आज बिना

[41:10] किसी को बताए इंडिया आया हूं। उन्हें

[41:12] सरपराइज दोगा। कितन चौंक जाएंगे मुझे इस

[41:15] तरह से देखकर। मुझे तो अभी से उनकी शक्लों

[41:17] के बारे में सोच के हंसी आ रही है। आज

[41:19] कितने सालों बाद अपने देश अपने शहर लौटा

[41:21] हूं। कितना अच्छा लगा रहा है। यहां आके

[41:23] कितना अपनापान है। यहां कितना सुकून है।

[41:25] यहां कुछ भी कहो अपना देश अपना ही होता

[41:27] है। एक लंबी सांस लेकर अक्षत एयरपोर्ट से

[41:29] बाहर निकाल गया। कहां जैगे जनाब लखनऊ

[41:32] तहजीब के साथ एयरपोर्ट पर खड़े ड्राइवर ने

[41:34] पूछा पता बताकर अक्षत टैक्सी में सवार

[41:36] होकर चला पड़ा अपनी मंजिल की ओर यहां के

[41:39] नहीं लगते हैं जनाब आप फ्रंट मेरे से

[41:41] अक्षत को देखते हुए टैक्सी ड्राइवर ने

[41:43] पूछा नहीं मैं यही कहूं बस कुछ सालों से

[41:45] बाहर रह रहा हूं पढ़ने के लिए वो

[41:47] मुस्कुराते हुए बोला अक्षत की बात सुन

[41:49] ड्राइवर भी मुस्कुरा दिया टैक्सी हवेली के

[41:52] बाहर आकर रोकी टैक्सी ड्राइवर को पैसे

[41:54] देकर वह हवेली की तरह बंध गया बाहर लगी

[41:56] नेमप्लेट को छूकर पुरानी यादों में खो गया

[41:59] पापा आप कहां कहां जा रहे हैं? अपने पापा

[42:01] को सुबह-सुबह घर के बाहर जाते देख जिज्ञास

[42:04] वश अक्षत ने पूछा, आओ हमरे साथ बताते हैं।

[42:07] वह मुस्कुराते हुए बोले, ठीक है, अपनी

[42:08] फुटबॉल लेके वह भी अपने पिता के पीछे पीछे

[42:11] चल दिया। महेंद्रे जी घर से निकाल बाहर आ

[42:13] गए। पापा बाहर क्यों आए हैं? वो पीछे पीछे

[42:16] चलते हुए ही बोला। एक जरूरी काम करने

[42:19] उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, क्या जरूरी

[42:20] काम एक खोजी व्यक्ति की तरह अक्षत ने

[42:22] पूछा। उसकी हसकते देख महेंद्रे जी मुस्कुर

[42:25] दिए। यह क्या है पता है? नमे प्लेट की तरफ

[42:28] इशारा करते हुए अक्षत से पूछा हां हमारे

[42:31] घर की नवे प्लेट है अजीबा सा मुंह बनते

[42:33] हुए बोला यह सिर्फ नमे प्लेट नहीं है बेटा

[42:36] धरोहर है हमारे परिवार की आशीर्वाद है

[42:38] बड़े बुजुर्गों का अब तक मैं यह सब कर रहा

[42:40] हूं पर मेरे जाने के बाद यह सब तुम्हें

[42:42] करना है बेटा अक्षत के सर को सहलते हुए

[42:44] उन्होंने कहा जवाब में अक्षत मुस्कुर दिया

[42:47] अतीत की यादों से निकाल अक्षत हवेली के

[42:49] अंदर की तरफ बढ़ गया बगीच देख मुस्कुरा

[42:51] दिया किस्तम अच्छी थी किसी की भी नजर उसके

[42:53] ऊपर नहीं पड़ी हवेली के दरवाजे पर पहुंच

[42:56] उसने अंदर झांक कर देखा। किसी को ना देखा।

[42:58] उसने चैना की सांस लेकर अंदर की तरफ बढ़

[43:00] गया। सबसे पहले वह अपने ताऊजी के कमरे की

[43:02] तरफ बढ़ गया उन्हें सरप्राइज देने के लिए।

[43:04] पर कुछ आवाजें सुनकर रुक गया। इस बूढ़े

[43:07] रागा ने ना जाने अक्षत को कहां छुप दिया

[43:09] है। कितने समय से उसे ढूंढ रहे हैं। ना

[43:11] जाने किस बिल में छुपा दिया है। हाथ ही

[43:12] नहीं लग रहा है। ताऊ जी गुस्से से पुकारते

[43:14] हुए बोले। चिंता क्यों करते हैं भाई साहब?

[43:17] अक्षत को हमारे बारे में कुछ नहीं पता है।

[43:19] जल्द ही वह वापस अपने घर तो लौटेगा ही।

[43:21] चाचा जी ने ताऊ जी को समझते हुए कहा। सही

[43:24] कह रहे हो पर हमें डर कि अगर उसे अक्षत

[43:27] यहां आने से पहले महेंद्र और ममता की मौत

[43:29] का राज पता चला गया तो ताऊजी ने आंशिक

[43:31] जताते हुए पूछा कौन बताएगा उसे कि उसके

[43:34] मां-बाप का एक्सीडेंट नहीं बल्कि हमने

[43:36] उन्होंने अपने हाथों से मार है। चाचा जी

[43:38] ने हंसते हुए कहा उनकी बातें सुन ताऊजी की

[43:40] हंस दिए। बाहर खड़े अक्षत के पैरों तले से

[43:42] जमीन खिसक चुकी थी। आंखों से आंसुओं की

[43:44] धारा निकाल रही थी। जिन्हें वह अपना

[43:46] परिवार मान रहा था। आज उन्होंने उसे

[43:47] परिवार का ऐसा रूप दिखाया जो कभी भी कोई

[43:49] नहीं देखना चाहेगा। वैसे भी भाई साहब डर

[43:52] किस बात का उसे हमारे बारे में कुछ पता

[43:54] नहीं। जब यहां आए तब उसे भी प्यार से बोतल

[43:56] में उतरा लेंगे। फिर किसी जान पहचान की

[43:58] लड़की से शादी कर देंगे जो हमारे सामने

[44:00] मुंह ना खोले। फिर बच्चा होने के बाद सारी

[44:02] प्रॉपर्टी आधी आधी बांटा लेंगे और हमारी

[44:04] अंश की मौत का बादल भी पूरा हो जाएगा।

[44:06] उनके बेटे को बर्बाद कर देंगे। वह आक्रोश

[44:09] से बोले जा रहे थे और बाहर खड़े अक्षत के

[44:11] लिए आगे सुन पाना मुश्किल होता जा है।

[44:13] बिना एक पल और रुके अक्षत हवेली से बाहर

[44:15] निकाल गया। उसके लिए इसे आगे एक शब्द भी

[44:17] सुन पाना मुश्किल हो रहा था। अक्षत सीधा

[44:20] एयरपोर्ट निकाल गया यहां और रोकता तो उसका

[44:22] दम घुट जाता। पहली फ्लाइट पकड़ा वापस लौटा

[44:24] गया। वह पहुंच सबसे पहले उसने एक

[44:26] डिटेक्टिव एजेंसी से कांटेक्ट कर

[44:28] इंफॉर्मेशन निकाल की बात की। उन्होंने उसे

[44:30] जितनी इंफॉर्मेशन उसके पास थी ले ली ताकि

[44:32] उनके लिए जानकारी निकालने में मदद हो सके।

[44:34] एजेंसी वाले अपने काम में लग लाएं। थोड़े

[44:37] वक्त बाद उन्हें जितनी इंफॉर्मेशन मिली सब

[44:39] अक्षत को दे दी। जिसे सुन अक्षत के पैरों

[44:41] के नीचे से निकाल गई। उसके मां पापा पर

[44:43] उसके जान से प्यारे भाई अंश की मौत का

[44:45] जिम्मेदार थारा गया था। अक्षत का मन मनाने

[44:47] को तैयार नहीं था कि उसके मां पापा ऐसा कर

[44:49] सकते हैं। पर इसे ज्यादा इंफॉर्मेशन

[44:51] उन्हें नहीं मिल पाई। अक्षत ने सोच लिया

[44:53] था। अब वह खुद वहां जाकर सब पता करें।

[44:55] क्या सच में उसके मां पापा ऐसा कर सकते

[44:57] हैं? कब अतीत को याद करते हुए उसकी आंखों

[44:59] के कोर भी गए अक्षत को पता ही नहीं चला।

[45:02] उसने टाइम देख तो 2:00 बज रहे थे। वो

[45:04] खिड़की से हटाकर बेड पर लेट गया। उसने एक

[45:07] नजर साक्षी को देखा जो निश्चित सी सो रही

[45:09] थी। उसने प्यार उसके गाल को सहल कर बोला।

[45:11] आप बहुत स्पेशल है। मेरी लाइफ में बस

[45:13] थोड़ा सा और इंतजार कर लीजिए। मैं सब ठीक

[45:15] कर दूंगा। पर तब तक आपको अपने प्यार का

[45:16] एहसास जरूर करूंगा जिसे अब तक आपको अछूत

[45:19] रखा है। आप नहीं जानती आप बहुत खास है।

[45:21] मेरे लिए उसने प्यार से उसके गाल को चूमकर

[45:23] अपनी बाहों से साक्षी की कमर को कैद कर

[45:25] लिया। साक्षी थोड़ा सा कसमसाई फिर कुछ देर

[45:27] में वापस सो गई। अक्षत ने भी अपनी आंखें

[45:29] बंद कर ली। सुबह साक्षी की आंख खुली तो

[45:32] उसे अपने सर में बहुत दर्द महसूस हो रहा

[45:34] था। अपने आप को कमरे में देख वो चौकी। वह

[45:36] मन ही मन बुदबुदाई में कब घर आई? मुझे याद

[45:39] क्यों नहीं आ रहा है? ऊपर से सर भी दर्द

[45:41] से फटा जा रहा है। वह अपने सर को पकड़ते

[45:43] हुए बोली, "यह पी लो दर्द काम हो जाएगा।

[45:46] अक्षत ने नींबू पानी का गिलास पकड़ते हुए

[45:48] कहा। आपको कैसे पता मेरे सर में दर्द है?

[45:51] साक्षी ने गिलास पकड़ते हुए पूछा। कल आपने

[45:54] पीथ हैंग ओवर तो होना ही था। अक्षत ने

[45:56] अलमीरा से कपड़े निकलते हुए आराम से कहा।

[45:58] क्या अक्षत की बात सुन साक्षी अपनी जगह से

[46:00] उछाल पड़ी। हां, पर आप ऐसे उछाल क्यों रही

[46:03] है? अक्षत ने साक्षी पर अपनी निगाह जाम कर

[46:05] पूछा। मैंने कब पी? कल मैंने जूस पिया था।

[46:08] उसके बाद का मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा

[46:10] है। साक्षी ने दिमाग पर जोर देकर सोचते

[46:12] हुए कहा, "गलती से किसी से ड्रिंक

[46:15] एक्सचेंज हो गई होगी। आप नींबू पी के यह

[46:17] मेडिसिन ले लीजिए। बेटर फील करेगी। वह सर

[46:19] दर्द की दवाई। साक्षी की तरफ बढ़ते हुए

[46:21] बोला, साक्षी ने दवाई ले ली। एक्स्ट्रा

[46:23] बाथरूम में घुस गया। फीलिंग बेटे। कमर पर

[46:27] टॉवल बंधे गले में दूसरी टॉवल लटकाए। अपने

[46:29] बालों को बेतरतीब तरीके से पोछते हुए उसने

[46:31] पूछा। अक्षत को ऐसे देख साक्षी की आंखें

[46:34] चौड़ी हो गई। शरीर का सरा खून चेहरे पर

[46:36] उतरा आया। दिल में गुदगुद होने लगी। वह

[46:38] फेर के बैठ गई। क्या हुआ? अक्षत ने उसके

[46:40] गालों पर हाथ रख अपनी तरफ घूमते हुए पूछा।

[46:43] अक्षत के थड़े हाथों के स्पर्श से साक्षी

[46:45] की आंखें अपने आप ही बंद हो गई। उसकी हरकत

[46:48] देख अक्षत के होठों एक तरफ को उठ गए। वह

[46:50] मन ही मन बोला। कल नशे में कितनी वाइल्ड

[46:52] बिहावे कर रही थी और आज नजरें तक नहीं उठ

[46:54] पड़ रही है। क्या हो गया आज आपको? साक्षी

[46:58] ने अटकते अटकते बंद आंखें से ही बोली।

[47:01] पहले आंखें तो खोलिए। उसके गालों को अपने

[47:03] अंगूठे से सहलाते हुए अक्षत बोला। पहले आप

[47:06] कपड़े पहनिए। अक्षत के स्पर्श से साक्षी

[47:09] पर मदहोशी छा रही गाला सूख गया था। उसने

[47:11] थूक से गले को तर्क करते हुए बम मुश्किल

[47:13] खुद को संभाला। बोली, "कल तो कोई

[47:15] बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था कोई। अक्षत ने

[47:18] अपनी हरकतें जारी रखते हुए ही बोला, उसकी

[47:20] बात सुन। साक्षी ने झट से अपनी आंखें कर

[47:22] पूछा, कैसी हरकतें? क्या बातों आपको? कल

[47:24] क्या-क्या किया है? मैं तो किसी को मुंह

[47:26] दिखाने लायक नहीं रहा। साक्षी से दूर हटते

[47:28] हुए बोला, अक्षत बिस्तर के दूसरे कोने में

[47:30] बैठ दुखी होने का नाटक करने लगा। साक्षी

[47:32] घुटने के बल जल्दी से चलकर अक्षत के पीछे

[47:34] बैठते हुए पूछा क्या किया मैंने वह डरते

[47:36] हुए बोली अक्षत को परेशान करने में मजा आ

[47:39] रहा था आपने मुंह से क्या बताओ कल आपने

[47:42] मुझे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा

[47:43] अक्षत ने साक्षी की तरफ घुमाते हुए एक नजर

[47:46] उसे देख सर झुककर कहा आप झूठ बोला रहे हैं

[47:49] ना वो उसकी बाह पकड़ कर पूछने लगी उसकी

[47:51] आवाज रुधा गई थी अक्षत को अब और उसे

[47:53] परेशान करना अच्छा नहीं लगा उसने साक्षी

[47:55] के चेहरे को अपनी हथेलियों में भरकर उसके

[47:57] आंसू पोछते हुए बोला मजाक कर रहा हूं मैं

[47:59] तो आप तो रोने लगी साक्षी रोते हुए उसके

[48:01] के सीने से लग गई। आप बहुत बुरे हैं। वो

[48:04] उसके सीने पर मुंह जामते हुए बोली। पर आप

[48:07] बहुत अच्छी है। अक्षत ने अपनी पकड़ कसते

[48:09] हुए कहा। अब सर दर्द कैसा है? कुछ देर बाद

[48:12] अक्षत ने वैसे ही बैठे हुए पूछा। साक्षी

[48:15] ने सर उठाकर उसे देख फिर अपनी स्थिति का

[48:17] भन होने पर क्षमते हुए दूर बैठा कहा। पहले

[48:20] से बेहतर है। वह सर झुक कर बोली। एक नजर

[48:23] साक्षी को देख अक्षत मुस्कुराते हुए शीशे

[48:25] के सामने खड़े होकर अपने बालों पर हाथ

[48:27] फेरते हुए बोला। आज आप आराम कीजिए। ऑफिस

[48:29] आने की कोई जरूरत नहीं है। साक्षी ने

[48:31] नजरें उठकर देख तो अक्षत भी आईने से उसे

[48:34] ही देख रहा था। दोनों की नजरें आपस में

[48:35] उलझ गई। साक्षी ने अपनी नजरें हटाकर बोली

[48:38] एक जरूरी फाइल पेंडिंग है इसलिए जाना

[48:40] जरूरी है। ठीक है अक्षत कपड़े लेकर चेंज

[48:43] करने चला गया। उसके बाद साक्षी ने चैन की

[48:45] सांस ली। आज हो क्या गया है इन्हें? कैसे

[48:48] बर्ताव कर रहे हैं। अगर थोड़ी देर और यहां

[48:50] रुकते तो मेरी तो सांसे अटक जाती। क्या

[48:52] किया मैंने कल ऐसे जी यह ऐसे बर्ताव कर

[48:54] रहे हैं। साक्षी आगे कुछ सोच पाती कि

[48:56] बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज से उसकी

[48:58] तंद्रा टूटी। एक गिफ्ट रखा है बाथरूम में

[49:01] आपके लिए। आज वही पहनिएगा। वह मुस्कुराते

[49:04] हुए बोला, साक्षी जल्दी से बाथरूम में घुस

[49:06] गई। आज अक्षत की निगाहों में अजीब सी

[49:08] तपिसा थी जिसे साक्षी के सह पाना मुश्किल

[49:11] हो रहा था। इसलिए वह उसे भाग खड़ी हुई।

[49:13] अक्षत उसकी हरकतों पर बाहर रूम में ठहक

[49:15] लगकर हंस रहा था जो साक्षी आराम से सुन

[49:17] सकती थी। बेटा यह दवाई ले लो। रवि के रूम

[49:20] में बैठी ताइजी उसे बार-बार दवाई खाने के

[49:22] लिए कह रही थी। बस कीजिए मां अपना यह नाटक

[49:25] मेरे सामने बंद कीजिए। वो गुस्से से बोला

[49:28] नाटक तुझे मेरा प्यार नाटक लगत है रवि वह

[49:30] भावुक होते हुए बोली हां क्योंकि मैं आप

[49:33] लोगों को अच्छे से जानता हूं जो पैसों के

[49:35] लालच में अपने परिवार वालों को मर सकते

[49:36] हैं वो लोग किसी से प्यार नहीं कर सकते

[49:38] हैं वो गुस्से बोला रवि ताई जी उसके ऊपर

[49:41] गरजी जाए यहां से व पे आ की मात्रा रन इसे

[49:43] ज्यादा सच आप सुन नहीं पाएंगी वो गुस्से

[49:45] से बोला ताई जी पैर पटकते हुए बाहर निकाल

[49:47] गई यह क्या तरीका हुआ आंटी से बात करने का

[49:50] अंकित ने रवि को घूरते हुए कहा उसे रवि का

[49:52] इस तरह से अपनी मां से बात करना बिल्कुल

[49:54] भी अच्छा नहीं लगा रवि ने उसकी बात का कोई

[49:56] जवाब नहीं दिया। चुपचाप बैठा रहा। रवि के

[49:59] पास बैठते ही वह बोला तू क्यों करता है

[50:01] ऐसी हरकतें कि मुझे गुस्सा आए तुझ पर? रवि

[50:03] के भावहीन चेहरे को देख पूछा क्या करूं

[50:06] ऐसा ही हूं मैं। नहीं आता मुझे किसी से

[50:08] बात करने का तरीका बुरा लगी। तुझे भी मेरी

[50:10] बातें। हां लगनी भी चाहिए। मैं हूं ही

[50:12] नहीं। इस काबिल की कोई भी मुझे समझे तुझे

[50:14] मेरी बातें में बुरा लगा ना। जा तू भी चल

[50:16] जा। मुझे छोड़ा कर नहीं है। मुझे किसी की

[50:18] जरूरत जा चला जा। कहते रवि गुस्से से चीख

[50:20] उठ। रवि की बातें अकित को चुभ गई। इंसान

[50:23] गुस्से में सबसे ज्यादा तकलीफ अपने खास को

[50:25] ही पहुंचता है। वह जिसे में क्या-क्या कहा

[50:27] जाता है उसे पता है नहीं चलता है और जब तक

[50:29] एहसास होता है कुछ लोगों को देर तो कुछ

[50:31] लोगों को बहुत देर हो चुकी होती है। रवि

[50:33] को जब अपनी गलती का एहसास हुआ क्या उसने

[50:35] अकित की तरह देखा जो अपना बैक पैक के रहा

[50:37] था वह जल्दी से उठाकर अकित पास आकर पूछा

[50:39] क्या कर रहा है? अकित ने एक नजर डालते हुए

[50:42] उसे देख फिर बिना कुछ बोले अपने काम में

[50:44] लग गया। रवि दो-तीन बार उस पूछा क्या कर

[50:46] रहा है? पर अकित चुप ही रहा। रवि ने झलाते

[50:48] हुए बेग उसके हाथ से छीन लिया। मेरा बैग

[50:51] वापस दे। अंकित ने घोरते हुए कहा, पहले तू

[50:54] बात क्या कर रहा है? कहां जा रहा है? बैग

[50:56] को आपने पीछे छिपते हुए पूछा, वापस जा रहा

[50:59] हूं। यहां अपने दोस्त से मिलने आया था पर

[51:01] शायद गलत जगह आ गया इसलिए वापस जा रहा

[51:03] हूं। सॉरी ना यार। गुस्से में मुंह से

[51:06] निकाल गया। वह शर्मिंदगी से बोला, गुस्सा

[51:08] इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। रवि

[51:10] अभी भी वक्त है संभाला। जो वरन बाद में

[51:12] सिर्फ पछतावे के कुछ हाथ नहीं आएगा। मैं

[51:15] कोशिश करता हूं पर क्या करूं? आ जाता है

[51:17] माफा कर दे यार। आगे से ध्यान रखूंगा।

[51:18] गुस्सा ना करो। और आंटी से ठीक से बात

[51:21] करेगा। ठीक है मेरे भाई आज से उनसे ऐसे

[51:24] बात नहीं करूंगा। अब तो तू अपना मूड ठीक

[51:25] कर। वह अंकित को मनाते हुए बोला। ठीक है।

[51:28] ठीक है। अब ज्यादा भी मस्का लगाने की

[51:30] जरूरत नहीं है। अंकित ने तिरछी नजर से

[51:32] देखते हुए कहा। अंकित की बात सुन रवि के

[51:34] होठों पर शरारती मुस्कान खिल गई। उसने

[51:36] जल्दी से अंकित को दबोच बेड पर गिरते हुए

[51:38] मुंह के जाम दिए। अंकित करहाते हुए बोला

[51:40] मर्डाला यार। रवि उसकी बातों से बेस मुंह

[51:42] के जामात रहा। कुछ देर बाद अंकित ने

[51:45] मुस्कुराता कहा, आपने इसी यार को बहुत मिस

[51:47] कर रहा था। मैं उसकी बात सुन रवि के हाथ

[51:49] रुक गए। वो उसके गले गते हुए बोला तू मुझे

[51:51] जानता है ना मेरी बातों पर ज्यादा गुस्सा

[51:53] मत हुआ कर यार एक तू तो जिससे मैं आपन गम

[51:55] बांट सकता हूं अक्षत के ऑफिस में आज अलग

[51:58] ही खुरूर पुरुष हुई थी सारे स्टाफ के बात

[52:00] करने का हॉट टॉपिक हैश अक्षत साक्षी का

[52:02] साथ में पार्टी में आना उनका रोमांटी डांस

[52:04] हो या दोनों का साथ में पार्टी सी गायब हो

[52:06] जाना हो कुछ लोगों का कहना था दोनों एक

[52:08] दूसरे को डेट कर रहे तो कुछ लोगों का कहना

[52:11] था साक्षी ने पैसे वाली पार्टी को अपने

[52:12] प्यार के झांसे में फंसा लिया है और भी ना

[52:15] जाने क्या-क्या बातें हो रही थी उन दोनों

[52:17] को लेकर राघव को आता देख सभी चुप हो गए

[52:19] गए। राघव को बड़ा आश्चर्य हुआ। वह सभी से

[52:22] मिलजुलकर रहने वाला बंदा है। ऑफिस में भी

[52:24] वह सभी से फ्रेंडली ही बिहेव करता था और

[52:26] स्टाफ मेंबर्स भी वैसा ही बिहावे करते थे।

[52:28] पर आज उनका इस तरह से उसके आने से चुप हो

[52:30] जाना उसे अजीबा लगा। उसने एक नजर सभी को

[52:32] देखा। फिर सिर झिरकर अपने केबिन की तरफ

[52:34] बढ़ गया। पर कुछ शब्द से कानों में पड़

[52:36] चुके थे। थोड़ी देर बाद राघव ने अपने

[52:39] केबिन में अपने असिस्टेंट में बुलाया। जी

[52:40] सर आपने बुलाया। असिस्टेंट ने अंदर आने के

[52:42] बाद पूछा। यह ऑफिस में क्या बातें हो रही

[52:45] है? वो सख्त लहजे में बोला। कुछ कुछ भी तो

[52:48] नहीं सर असिस्टेंट डरते हुए बोला मुझे

[52:50] किसी भी फालतू बात में इंटरेस्ट नहीं है

[52:52] जितना पूछा था उतना जवाब दो वो कड़क आवाज

[52:54] में बोला असिस्टेंट में एक नजर उसको देखा

[52:57] फिर सर झुका के सारी बातें उसको बता दे छी

[53:00] शर्म नहीं आती आप लोगों को किसी लड़की के

[53:02] बारे में ऐसी बातें करते हुए कितना जानते

[53:04] आप उसको कितने टाइम हुआ उसे यहां काम करते

[53:06] हुए पर आप तो पिछले ढाई सालों से यहां काम

[53:08] कर रहे हैं क्या ऐसा होता है वर्क प्लेस

[53:10] जहां लोग काम कम का गसिपिंग ज्यादा करते

[53:12] हैं किसी के भी कैरेक्टर पर बिना उसे जाने

[53:14] सवाल खड़े कर देते हैं शर्म आनी चाहिए

[53:16] आपको और अब जाइए यहां से एंड वन मोर थिंग।

[53:19] अब मुझे किसी भी स्टाफ के मुंह से ऐसी

[53:20] फिजूल बातें नहीं सुनाई देनी चाहिए। और

[53:22] अगर मैंने किसी के भी मुंह से अनापशनाप

[53:24] बातें सुनी तो समझ लेना आज उसके इस ऑफिस

[53:26] में आखिरी दिन होगा। नाउ लीव असिस्टेंट

[53:28] मुंह लटका कर वहां से चला गया। राघव धम्म

[53:31] से अपनी कुर्सी पर बैठ गया। उसकी एक गलती

[53:33] से साक्षी के कैरेक्टर पर सवाल खड़े करवा

[53:36] दिए थे। अगर उसने पहले ही सबको बता दिया

[53:39] होता कि साक्षी अक्षत के पत्नी है तो कोई

[53:42] इस तरह से उसके कैरेक्टर पर सवाल नहीं

[53:43] करता। आज उसने अपने खुद के फैसले पर बहुत

[53:45] गुस्सा आ रहा था। उसने गुस्से से अपनी

[53:47] आंखें मीच ली। तभी उसके दिमाग में कल

[53:49] साक्षी द्वारा कही गई बातें याद आ गई।

[53:51] मैंने वही जूस पिया जो आपने मेरे लिए भेजा

[53:53] था। उसने झट से अपनी आंखें खोल मन ही मन

[53:55] बोला। इसका मतलब साक्षी ने गलती से गलत

[53:57] ड्रिंक नहीं पी थी। किसी ने जानबूझ उसे पी

[53:59] लिया था ताकि उसे बदनाम कर सके। पर ऐसा

[54:01] कौन कर सकता है मुझे पता करना होगा। उसने

[54:03] झट से क्लब के मैनेजर को फोन सीसीटीवी

[54:05] फुटेज की मांग की। मैनेजर ने उसे कुछ समय

[54:08] बाद फुटेज भेजना का बोल फोन रखा दिया। चले

[54:11] ऑफिस आ गया। साक्षी को अपनी धुन में खोया

[54:13] देख अक्षत ने उसे हाथ को हिलाते हुए कहा

[54:16] जी साक्षी ने बस इतना ही कहा और गाड़ी का

[54:18] दरवाजा खोल उतर गई अक्षत जल्दी से साक्षी

[54:21] के पास आकर खड़ा हो गया साक्षी ने सवालिया

[54:23] दृष्टि से उसकी तरफ देखा जैसे उसके इस तरह

[54:25] से यहां पर आने की वजह पूछ रही हो अच्छे

[54:27] से उसे देखा और मुस्कुराते हुए उसके बालों

[54:29] में फर्स्ट क्लचर आजाद कर उसके कान के पास

[54:31] फुसफुसाते हुए कहा खुले बालों में ज्यादा

[54:33] अच्छी लगती हो उसके गालों को चूम

[54:35] मुस्कुराते हुए चला गया साक्षी अपने गालों

[54:38] पर हाथ रखें वो फरे अक्षत को जाता देख रही

[54:40] थी अक्षत ने अचानक पीछे पलाट अपनी एक आंख

[54:43] दबा दी। साक्षी उसकी हरकत पर आवक रह गई।

[54:46] यह हो क्या गया है आज इन्हें? क्या सच में

[54:48] कल मैंने ऐसा वैसा कुछ कर दिया जो इस तरह

[54:50] से रिटेक्ट कर रहे हैं। नहीं नहीं अगर ऐसा

[54:52] होता तो वह मुझे कुछ बातें। साक्षी वहीं

[54:55] खड़ी स्थिति का आंकलन लग रही। तभी उसके

[54:56] कानों में एक आवाज पड़ी। मैडम आप यहां

[54:58] क्या कर रही हो? और गाल पर कुछ हुआ है

[55:01] क्या? तो इस तरह से पकड़ा हुआ है। गार्ड

[55:03] ने उसे बीच रास्ते में खड़ा देख पूछा कुछ

[55:05] नहीं कह। साक्षी ऑफिस की तरफ बढ़ गई।

[55:06] गार्ड अजीब से मुंह बनाते हुए चला गया।

[55:09] साक्षी जैसे ही ऑफिस के अंदर आए सभी उसे

[55:11] अजीब नजरों से घूर रहे थे। वह चुपचाप अपने

[55:14] डेक्स की तरफ बढ़ गई। बीप की आवाज के साथ

[55:16] राघव का फोन बज उठ उसने देख तो क्लब के

[55:18] मैनेजर ने कोई वीडियो भेजी थी। उसने लपक

[55:21] कर फोन उठकर वीडियो प्ले कर दी। उस वीडियो

[55:23] में दिखा रहा था। एक वेटर बार-बार साक्षी

[55:25] को ड्रिंक ऑफर कर रहा था। पर साक्षी उसे

[55:27] मना कर रही थी। कुछ देर बाद वह फिर आया और

[55:29] अक्षत की तरफ देख इशारा करके कुछ कहा।

[55:31] जिसके बाद साक्षी ने एक ऑरेंज जूस का

[55:33] ग्लास लेकर पीने लगी। वेटर ने एक अंगूठ

[55:36] उठकर दूसरी दिशा की ओर कुछ इशारा किया।

[55:39] दूसरी तरफ काफी अंधेर था जिसे उस शक्य का

[55:41] चेहरा नहीं दिखा रहा था। वीडियो देखने के

[55:43] बाद एक बात साफ हो चुकी थी कि किसी ने

[55:45] साक्षी को जानबूझकर शराब पिलाई है। राघव

[55:47] का दिमाग ठनका। वह मन ही मन बोला कल मैंने

[55:49] और अक्षत ने पूरा क्लब बुक कर लिया था

[55:51] ताकि स्टाफ मेंबर में किसी को कोई परेशानी

[55:53] ना हो। अगर मैं सही सोच रहा हूं तो यह

[55:55] हमारे ही स्टाफ में से किसी की हरकत है।

[55:57] मुझे उस वेटर से बात करनी होगी। किसके

[55:59] कहने पर उसने साक्षी को शराब पिलाई पर उसे

[56:01] पहले मुझे कोई यह बात अक्षत को बतानी

[56:03] होगी। आखिरकार उसे पता होना चाहिए कि

[56:05] साक्षी की ड्रिंक एक्सचेंज नहीं बल्कि

[56:06] किसी ने जानबूझकर उसे गलत ड्रिंक दी गई

[56:08] थी। वह अपनी सीट से उठकर अक्षत के कैबिन

[56:11] की तरफ बढ़ गया। यह साक्षी कितनी चालू चीज

[56:14] है यार। कैसे कल अक्षत सर के साथ चिपका

[56:16] चिपका कर डांस कर रही थी और राघव सर हमेशा

[56:18] कैसे उसके आगे पीछे घूमते रहते हैं। और तो

[56:20] और अपने नए बास रवि सर उनकी आंखें तो

[56:22] हमेशा उसके ऊपर ही टिकी रहती है। कितनी

[56:24] चालू चीज है यह। लड़कों को कैसे उंगलियों

[56:26] पर नाचते हैं। कोई इसे सीखे वाशरूम में

[56:28] हाथ धुलाते हुए राशि जहर उगल रही थी। हां,

[56:31] कह तो तुम सच रही हो। मैंने खुद कितनी बार

[56:33] रवि सर इसे घूरते देखा है। दूसरी लड़की

[56:35] नीलू राशि की हां में हां मिलाते हुए बोली

[56:38] बड़ी चंद लड़की है एक साथ तीन-तीन लड़कों

[56:40] को घुमा रही है। राशि नफरत से बोली मुझे

[56:43] तो लगता है पैसों के लालच में अंधी हो गई

[56:45] तभी तो इतनी ओछी हरकतें कर रही है। नीलू

[56:47] अपने हाथ टिश्यू से पोछते हुए बोली हमें

[56:50] क्या जब अक्षत सर को पता चलेगा ना तो खुद

[56:52] ही इस निकाल फेंकेगी यहां से। एंड ड्राई

[56:54] से हाथ सूखते हुए राशि घृणा से बोली चला

[56:57] ना हम क्यों अपना मुंह गंद करते हैं जब

[56:59] उसे खुद शर्म नहीं आती है नीलू आईने में

[57:01] देख अपने बाल सही करते हुए बोली तू ठीक

[57:04] कहा रही है सुन नहीं उसके एक आशिक ने

[57:06] फरमान सुनाया है अगर उसके बारे ने बात करी

[57:08] तो नौकरी से निकाल देगा कोई हर जगह मुंह

[57:11] मारता फिरे और हम आपस में बात भी ना करें

[57:13] हद है अपने मेक पक का टच अप करते हुए राशि

[57:15] बोली छोड़ा ना चालते हैं हमें क्या दोनों

[57:18] लड़कियां वाशरूम से बाहर निकाला गई अंदर

[57:20] बैठी साक्षी जो अब तक अपने मुंह पर हाथ

[57:22] रखकर सिसक रही थी उनकी जाने की आवाज सुन

[57:25] जोर-जोर से रोने लगी लोग इसके बारे में

[57:27] इतना गलत सोचते हैं उसने ऐसा कभी नहीं

[57:29] सोचा था राघव जिसे वो अपना भाई कहती है

[57:31] लोग उसे उसका आशिक बोल रहे थे उन लड़कियों

[57:33] की कही बातें उसके कानों में पिघले हुए

[57:34] शीशे की तरह पड़ रही थी किस तरह लोग बिना

[57:37] किसी को जाने हुए बिना उनके रिश्तों की

[57:38] सच्चाई जाने बिना ही जज कर देते हैं एक

[57:40] लड़का लड़की थोड़ा हंस के बाद क्या कर ले

[57:42] आपस में लोगों लगे उनके कैरेक्टर को जज

[57:44] करने में क्या हमारे समाज की सोच इतनी

[57:46] छोटी है क्यों दोस्ती जैसे पाक रिश्ते को

[57:48] समझ नहीं पाती है क्यों अगर एक लड़की हंस

[57:51] बोलकर बात कर ले तो उसके कैरेक्टर में

[57:53] उंगलियां खड़ी कर दी जाती है। लड़कियों का

[57:55] हंसना मुस्कुराने हर चीज पर पाबंदी लगा

[57:57] रखी। आखिर क्यों? उन लड़कियों की कही

[58:00] बातें साक्षी के कानों में गूंज रही थी।

[58:01] वह अपने कानों पर हाथ रख रोने लगी। काफी

[58:03] देर रोने के बाद जब उसका मन हल्का हो गया

[58:05] तो वह तेजी से ऑफिस से बाहर निकाल गई।

[58:08] साक्षी को बताया इस बारे में। राघव की

[58:10] पूरी बात सुन और वीडियो देखने के बाद

[58:12] अक्षत ने पूछा। नहीं मैं उसे बताकर परेशान

[58:15] नहीं करना चाहता। राघव अक्षत की तरफ देखते

[58:17] हुए कहा। सही किया। अब आगे क्या सोचा है?

[58:20] उसने पूछा उस वेटर की क्लास लेने जा रहा

[58:22] हूं। आखिर पता तो चले कौन है जो साक्षी के

[58:24] साथ ऐसा कर रहा है। वह बोला ठीक है फिर

[58:27] जाओ मुझे कुछ काम है। लैपटॉप पर उंगली

[58:29] चलाते हुए अक्षत ने आराम से कहा तू इतने

[58:32] आराम से कैसे बात कर सकता है? अक्षत कोई

[58:34] साक्षी को बदनाम करना चाहता है और तू ऐसे

[58:36] रिएक्ट कर रहा जैसे तुझे कोई फर्क ही ना

[58:38] पड़ता हो। राघव को अक्षत को इस तरह से

[58:40] ठंडा व्यवहार बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा।

[58:42] क्या चाहता है तू? मैं कैसे रिएक्ट करूं?

[58:44] अक्षत ने अपनी दोनों कोहनियां टेबल पर

[58:46] टिकाते हुए पूछा। अक्षत मुझे ऐसे क्यों लग

[58:49] रहा है? तू पहले से जानता है साक्षी के

[58:51] साथ यह सब किसने किया है। राघव ने गहरी

[58:53] नजरों से देखते हुए कहा, अक्षत उसे देख

[58:56] रहस्यमई तरीके से मुस्कुराया। राघव जल्दी

[58:59] से अपनी जगह से उठ अक्षत के पीछे आकर उसका

[59:01] गला। अपने दोनों हाथों से पकड़ कहा, साले,

[59:03] मैं यहां टेंशन से मरा जा रहा हूं। और तू

[59:05] की है मेरे मजे ले रहा है। मुझे बता नहीं

[59:07] सकता था। हटा यार अपने हाथ मरेगा क्या

[59:10] मुझे? वो उसके हाथ अपने गले से हटते हुए

[59:12] बोला, हां, मर ही देना चाहिए तुझे। तो पर

[59:14] साक्षी के बारे में सोच कर रुक जाता हूं।

[59:16] कहते हुए राघव अक्षत की सीट के सामने रखी

[59:18] हुई चेयर पर जाकर बैठ गया। अच्छा अब यह

[59:21] बता किसने किया यह सब? बताऊं पर अभी नहीं।

[59:23] वह लैपटॉप में उंगलियां चलाते हुए बोला तो

[59:26] कब बताएगा? राघव से घूरते हुए बोला 15

[59:28] मिनट में पूरे स्टाफ के साथ मीटिंग एरिया

[59:30] मिलो। एक इंपॉर्टेंट अनाउंसमेंट करनी है।

[59:32] वह लैपटॉप पर आंखें गड़ए हुए ही बोला। पर

[59:35] अक्षत राघव ने बोलने की कोशिश की ही थी कि

[59:38] अक्षत उसे टोकते हुए बोला, नो मोर

[59:40] डिस्कशन। जितना बोला है उतना ही करो। राघव

[59:42] बड़े टेढ़े मुंह बनाते हुए केबल से बाहर

[59:44] निकल गया। जी सर आपने बुलाया पीयू की आवाज

[59:47] से अक्षत की तंद्रा टूटी हां अंदर आइए

[59:50] अक्षत ने आवाज देकर उन्हें अंदर केबिन में

[59:52] बुलाया जाइए साक्षी मैडम को भेजिए केबिन

[59:54] में वह लैपटॉप पर काम करते हुए बोला जी सर

[59:57] कहा कि पीयन बाहर निकाल गया थोड़ी देर बाद

[59:59] पीयून ने आकर कहा कि साक्षी मैडम अपने

[01:00:02] डेस्क पर नहीं है अक्षत के माथे पर चिंता

[01:00:04] की लकीरें खींच गई उसने पीयून को साक्षी

[01:00:06] को हर जगह देखने के लिए भेजा दिया और खुद

[01:00:08] सीसीटीवी फुटेज देखने लगा जिसमें उसे

[01:00:10] साक्षी ऑफिस से बाहर निकालते हुए दिखी वह

[01:00:13] साक्षी को फोन मिलते हुए जल्दी से खुद भी

[01:00:15] बाहर निकाल गया। अक्षत बाहर निकाल अपनी

[01:00:17] गाड़ी की तरफ बढ़ तो उसे वह किसी के रोने

[01:00:19] की आवाज सुनाई दी। वो आवाज की तरफ बढ़

[01:00:21] गया। उसने देख तो हैरान रहा गया। क्या

[01:00:24] अनाउंसमेंट करने वाला है अक्षत? साक्षी

[01:00:26] गाड़ी से टिक कर जमीन पर बैठ घुटनों में

[01:00:28] आपन मुंह छिपे रो रही थी। उसे ऐसे रोता

[01:00:30] देख अक्षत समझ गया। जिस बात का डर था वही

[01:00:32] हो गया है। वह एक गहरी सांस ले साक्षी के

[01:00:35] पास आ खड़ा हुआ। वह थोड़ी देर तक उसे ऐसे

[01:00:37] ही देखता रहा। फिर आपन गला साफ करते हुए

[01:00:39] बोला, यहां क्या कर रही आप? कुछ नहीं कहते

[01:00:41] हुए साक्षी उठ खड़ी हुई अंदर चाहिए जरूरी

[01:00:44] बात करनी है। मेरी तबीयत ठीक नहीं मुझे घर

[01:00:47] जाना है। वह अपने आंसू साफ करते हुए बोली

[01:00:49] चली जाइएगा पर अभी जरूरी काम है। आपका

[01:00:52] होना बहुत जरूरी है इसलिए चलिए। मुझे नहीं

[01:00:55] जाना। मुझे बस घर जाना है। कहते कहते उसका

[01:00:57] गला वापस रघ गया था। अक्षत ने नजर उसे देख

[01:01:00] फिर हाथ पकड़ अपने साथ अंदर ले जाने लगा।

[01:01:02] आप क्या कर रहे हैं? अक्षत जी मुझे नहीं

[01:01:04] जाना है अंदर। प्लीज छोड़िए मेरा हाथ

[01:01:06] साक्षी। अक्षत की पकड़ से आपन हाथ छोड़ते

[01:01:08] हुए बोली। बस थोड़ी देर के लिए मेरे साथ

[01:01:11] चलिए। फिर मैं खुद आपको घर छोड़ दूंगा।

[01:01:12] साक्षी के हाथ पर अपनी पकड़ कसते हुए वह

[01:01:15] बोला, "प्लीज अक्षत जी, मुझे नहीं जाना

[01:01:17] है। अंदर वह लगभग गिरगिरते हुए बोली,

[01:01:20] "साक्षी बार उसे छोड़ने के लिए कहती रही।

[01:01:22] पर अक्षत बिना उसकी बातों पर ध्यान दिए

[01:01:24] हुए उसका हाथ पकड़ अपने केबिन में ले आया।

[01:01:26] साक्षी का हाथ छोड़। अक्षत साक्षी का तरफ

[01:01:28] घूम उसके होठों पर उंगोली रखते हुए बोला,

[01:01:30] शशिष, कितना बोलने लगी है आजकल आप? फिर

[01:01:33] साक्षी की आंखों से आंसू की एक बूंद अपनी

[01:01:35] उंगोली में लेकर कहा और यह क्या है? जब

[01:01:36] देखो रोना चालू कर देती हो। कोई टंकी फिट

[01:01:39] है क्या आंखों में? वो माहौल को हल्का

[01:01:41] करते हुए बोल पर यह क्या साक्षी चुप होने

[01:01:43] की जगह और सिसकियां लग गई। अक्षत ने

[01:01:45] साक्षी के चेहरे को अपनी हथेलियों में

[01:01:47] भरा। उसके आंसू पोछते हुए बोला, "आपके

[01:01:49] आंसू किसी के दिल को चीरते हैं। इन्हें इस

[01:01:51] तरह मत बहाया कीजिए।" साक्षी के सिर को

[01:01:53] आपने सिर से जोड़ लिया। इस पल में दोनों

[01:01:55] की ही आंखें बंद थी। अक्षत अपनी बात जारी

[01:01:57] रखते हुए कहा, "लोगों का तो काम है कहना,

[01:01:59] अगर लोगों की बातों को हम दिल पर लगाए

[01:02:01] बैठे रहे, वह तो आगे कभी नहीं बढ़ पाएंगे।

[01:02:03] और जो लोग हमारे लिए अहमियत ही नहीं रखते

[01:02:05] हैं उनकी बातों को दिल पर कभी नहीं लगाना

[01:02:07] चाहिए समझी। सर पर हल्के से चपत लगते हुए

[01:02:10] अक्षत ने पूछा। साक्षी ने हां में गर्दन

[01:02:12] हिला दी। अक्षत ने मुस्कुर कर उसे देख फिर

[01:02:15] चेयर पर बैठकर उसके बाल सही करते हुए

[01:02:17] बोला, जब आप कमजोर होते हो तब सब लोगों का

[01:02:19] निशान आप बना जाते हैं तब एक क्या 10 मुंह

[01:02:21] खुलते हैं बोलने के लिए। पर यह जो समाज के

[01:02:23] लोग हैं ना बड़े बदलू किस्म के होते हैं।

[01:02:25] जैसे बिना पयादी का लोटा जो कभी इधर तो

[01:02:27] कभी उधर। जो लोग खुद अपनी बातों पर टिके

[01:02:29] नहीं रहते हैं। उनकी बातों से हमें फर्क

[01:02:31] नहीं पड़ना चाहिए। जाइए अब मुंह धुलकर

[01:02:34] आइए। पूरा फेस रेड हो चुका है। हर जगह

[01:02:36] आंसुओं के निशान बांधने हुए हैं। राघव ने

[01:02:38] देख तो मुझे ही दोष देंगा कि उसकी बहन का

[01:02:40] ख्याल सही से नहीं रखता हूं। मैं वह

[01:02:42] साक्षी के पास से हटते हुए बोला। साक्षी

[01:02:45] बाहर की तरह निकालने लगी तो अक्षत ने उसका

[01:02:47] हाथ पकड़ कहा, आप मेरे केबिन का वाशरूम

[01:02:49] यूज़ कर लीजिए। पता नहीं अगर आपका इरादा

[01:02:51] बदल गया और फिर से बाहर चली गई तो इसलिए

[01:02:53] मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता हूं। आप

[01:02:55] यही वाशरूम यूज़ कर लीजिए। वह हल्की

[01:02:57] मुस्कान के साथ बोला। उसकी बातें सुन

[01:02:59] साक्षी के होठों पर भी मुस्कान की रेखा

[01:03:00] खींच गई। थोड़ी देर बाद साक्षी फ्रेश होकर

[01:03:03] बाहर आई। अक्षत ने उसके सामने एक बॉक्स रख

[01:03:06] दिया। यह क्या है? बॉक्स को देख साक्षी ने

[01:03:09] पूछा, खोल कर देख लीजिए। अक्षत ने कहा,

[01:03:11] साक्षी में बॉक्स खोलकर देखा, तो उसके

[01:03:13] अंदर प्लैटिनम की दो रिंग्स थी। जिन पर

[01:03:15] छोटे-छोटे हीरे लगाए हुए थे। साक्षी में

[01:03:17] सवालिया दृष्टि से अक्षत की तरह देखा जैसे

[01:03:19] कहना चाह रहे हो यह गिफ्ट किस लिए। अक्षत

[01:03:22] ने मुस्कान के साथ उसको देखा और कहा आपकी

[01:03:24] जुबान से ज्यादा तो आपकी आंखें बात करती

[01:03:26] है। जब आपको इन आंखों की भाषा समझती आती

[01:03:29] है तो दे दीजिए जवाब इनके सावलों का। ठीक

[01:03:32] है फिर सुनिए मैंने गौर किया तो पाया

[01:03:34] हमारी को दो दिन बाद साल भर पूरा होने जा

[01:03:36] रहा है और जिन हालतों में हमारी शादी हुई

[01:03:38] थी उसमें हम दोनों ने एक दूसरे को रिंग तो

[01:03:40] पहनाई ही नहीं थी इसलिए ले आया था। सोचा

[01:03:42] तो था एनिवर्सरी वाले दिन तुम दोनों साथ

[01:03:44] एक बड़ी पार्टी के सभी को अपनी शादी के

[01:03:46] बारे में बता दूंगा। पर यहां तो हालत ही

[01:03:48] बदल गए हैं। इसलिए आज ही चलकर सभी स्टाफ

[01:03:50] मेंबर्स को पार्टी के लिए इनवाइट कर अपने

[01:03:53] रिश्ते का सच भी बता देंगे। अब अगर सवाल

[01:03:55] जवाब हो गए हो तो चले अपनी बात कह। अक्षत

[01:03:57] बाहर की तरफ निकल गया। पर साक्षी अब भी

[01:03:59] अपनी जगह पर खड़ी थी। जब अक्षत को एहसास

[01:04:02] हुए कि साक्षी उसके पीछे नहीं आ रही है तो

[01:04:04] वह वापस केबिन में आ गया। देखा तो साक्षी

[01:04:06] अब भी अपनी जगह पर खड़ी थी। क्या हुआ? चलो

[01:04:09] अक्षत उसका हाथ पकड़ते हुए बोला क्या आज

[01:04:11] ऑफिस में जो बातें हो रही है उसकी वजह से

[01:04:13] आप हमारे रिश्ते को पब्लिकली अनाउंस करना

[01:04:15] चाहते हैं ताकि मुझ पर कोई उंगली ना उठाएं

[01:04:18] जो बातें हो रही है उसकी वजह से नहीं मैं

[01:04:20] सच में अपना रिश्ता पब्लिकली अनाउंस करना

[01:04:22] चाहता हूं साक्षी के हाथों को अपने हाथों

[01:04:23] के ले कहा मैं अपने रिश्ते की एक नई

[01:04:25] शुरुआत करना चाहता हूं एक नॉर्मल कपल की

[01:04:28] तरह और जैसे आपने कहा कोई आप पर उंगोली ना

[01:04:30] उठाए तो सही कहा मेरी मां ने मुझे बचपन

[01:04:32] में सिखाया था औरत का सम्मान करना चाहिए

[01:04:34] औरत पुरुष के जीवन का अहम हिस्सा होती है

[01:04:36] चाहे वह मां के रूप में हो या पत्नी के

[01:04:38] रूप या बेटी या बहन जो पुरुष अपनी

[01:04:40] जीवनदाता और जीवन संगिनी के सम्मान की

[01:04:42] रक्षा ना कर सके वह कमजोर होते हैं। अक्षत

[01:04:45] ठाकुर अभी इतना कमजोर नहीं हुआ कि कोई की

[01:04:47] एरागैरा आएगा और उसकी पत्नी पर दोषारोपण

[01:04:50] करके चला जाएगा कह चुप हो गया। साक्षी की

[01:04:52] आंखों में नमी उतर आए। अब रोना बंद कीजिए

[01:04:55] और चलिए सब वेट कर रहे होंगे। अक्षत

[01:04:57] साक्षी का हाथ पकड़ मीटिंग रूम की तरफ बढ़

[01:04:59] गए। मीटिंग रूम में बैठा पूरा स्टाफ एक

[01:05:01] दूसरे का मोह तक रहे थे। खट की आवाज के

[01:05:03] साथ दरवाजा खोला। अक्षत साक्षी का हाथ

[01:05:05] पकड़े अंदर आया। एंप्लाइज उसे ग्रिड करने

[01:05:07] के लिए खड़े हो गए। सीट एवरीवन कहकर अक्षत

[01:05:11] अपनी सीट की तरफ साक्षी को लेकर बढ़ गया।

[01:05:13] स्टाफ मेंबर्स कभी एक दूसरे को देखते तो

[01:05:15] कभी साक्षी अक्षत को। अक्षत ने साक्षी को

[01:05:18] ले जाकर अपनी सीट पर बैठा दिया। सभी मुंह

[01:05:20] फाटे साक्षी को अजीब तरीके से देखने लगे।

[01:05:22] साक्षी ने अक्षत की तरफ देख उसने उसे

[01:05:24] आंखों से इशारा कर शांति से बैठे रहने को

[01:05:26] कहा। साक्षी गर्दन नीचे करके बैठा गई। इन

[01:05:29] सभी चीजों के बीच अगर कोई मुस्कुरा रहा

[01:05:31] था, वह है हमारे राघव मियां जिनकी दिल की

[01:05:33] मुर्दा पूरी हो रही थी। घुमा फिराकर बातें

[01:05:36] करना मुझे नहीं आती है तो मैं सीधे मेन

[01:05:38] टॉपिक पर ही आता हूं। मुझे लगता है आप सब

[01:05:40] यहां काम करने नहीं बल्कि गसिपिंग करने

[01:05:42] आता है। आप लोगों को क्या लगता है हम अंदर

[01:05:43] केबिन में बैठे हैं तो बाहर क्या हो रहा

[01:05:45] हमें पता नहीं चलता है। वो कड़क आवाज में

[01:05:48] बोला वहां पर बैठे सभी लोगों के पसीने

[01:05:49] छूटने लगे सिवाय राघव और साक्षी के। आप

[01:05:53] लोग पढ़े लिखे लोग हैं। आप लोगों से इतनी

[01:05:54] छोटी हरकतों की उम्मीद नहीं थी कि आप

[01:05:56] लोगों के दूसरों के कैरेक्टर जज करेंगे।

[01:05:58] पर छोड़िए आपसे लोगों से बस एक सवाल पूछना

[01:06:01] है। क्या आप में से कोई मुझे साक्षी का

[01:06:03] पूरा नाम बता सकता है? टेबल के चारों तरफ

[01:06:05] चक्कर लगाते हुए अक्षद ने पूछा, मीटिंग

[01:06:07] रूम में पिन ड्रॉप साइलेंस छा गया। किसी

[01:06:09] के पास भी उसके इस सवाल का जवाब नहीं था।

[01:06:11] एक टेढ़ी मुस्कान होठों से सजाए। अक्षत

[01:06:13] बोला, "स लड़की का पूरा नाम नहीं जानते

[01:06:15] आप, चले हैं उसको कैरेक्टर सर्टिफिकेट

[01:06:17] देने। चलिए कोई बात नहीं, आज मैं आपको

[01:06:19] साक्षी का पूरा नाम बता देता हूं। मिसेज

[01:06:21] साक्षी, अक्षत ठाकुर, माय वाइफ। वह बुलंद

[01:06:23] आवाज में बोला, वहां बैठे लोगों का

[01:06:25] आश्चर्य का ठिकाना ना रहा। दो दिन बाद

[01:06:28] हमारी फर्स्ट वेडिंग एनिवर्सरी है। सो यू

[01:06:30] ऑल गाइस आर इनवाइटेड। वो बोलते हुए रुका

[01:06:32] और सभी की तरफ देखते हुए साक्षी की चेयर

[01:06:34] के पीछे आकर खड़ा हो गया। एंड वन मोर थिंग

[01:06:36] कल साक्षी की ड्रिंक में किसी ने जानबूझकर

[01:06:38] अल्कोहल मिलाई थी। जिसने भी यह काम किया

[01:06:40] खुद से सामने आ जाए। वरना अगर मैं अपने पर

[01:06:42] आया तो उसके लिए बहुत बुरा होगा। 20 मिनट

[01:06:44] दे रहा हूं। मेरे केबिन में आकर

[01:06:46] रेजिग्नेशन लेटर रखें और साक्षी से सॉरी

[01:06:48] बोल के ऑफिस से जाए। मुझे पता है यह काम

[01:06:50] किसने किया है। पर मैं चाहता हूं वह खुद

[01:06:53] सामने आए क्योंकि अगर मैंने कुछ किया तो

[01:06:54] बहुत बुरा होगा। नाउ लीव अक्षय की बातें

[01:06:56] सुन राशि घबराहट से थरथरा उठी। अक्षत की

[01:06:59] बातें सुन राशि घबराहट से थरथरा उठी। उसे

[01:07:01] समझ ही नहीं आ रहा था क्या करें। डर के

[01:07:03] कारण उसके माथे पर पसीने की बुद उभर आई।

[01:07:06] क्या हुआ राशि तुझे इस बड़ी ई रूम में भी

[01:07:08] पसीना क्यों आ रहा है? साथ में काम करने

[01:07:10] वाली लड़की ने पूछा कुछ नहीं। बस ऐसे ही

[01:07:13] आजकल गर्मी बहुत हो रही है। ना राशि अपनी

[01:07:15] घबराहट को छुपते हुए बोली। हां वो भी है।

[01:07:18] पर यार आज माज आ गया। वो चहकते हुए बोली।

[01:07:22] राशि ज्यादा बात तो नहीं करना चाहती थी पर

[01:07:24] औपचारिकत वश पूछा लिया। क्यों आज ऐसा क्या

[01:07:26] हो गया? साक्षी मैम और अक्षत सर की जोड़ी

[01:07:29] कितनी मस्त लग रही थी यार। कितने क्यूट

[01:07:31] कपल लग रहे थे दोनों साथ में। पता नहीं

[01:07:33] मेरा मिस्टर परफेक्ट कब आएगा। वह आहें

[01:07:35] भरते हुए बोली झूठी मुस्कान होठों पर रख

[01:07:38] राशि बोली सही कहा रही हो। तुम जाओ काम

[01:07:40] करो। मैं वाशरूम से आई राशि बिना उसकी

[01:07:42] प्रतिक्रिया का इंतजार किए वहां से निकाल

[01:07:44] वाशरूम की तरफ बढ़ गई। कुछ देर तक राशि

[01:07:47] लंबी-लंबी सांसे लेती रही जब वह कुछ

[01:07:49] सामान्य हुई। वह मन ही मन क्या अक्षत सर

[01:07:51] सच में यह जानते हैं? मैंने ही साक्षी के

[01:07:53] जूस में अल्कोहल मिलाई थी या फिर वह

[01:07:55] अंधेरे में तीर चल रहे हैं। क्या करूं?

[01:07:57] क्या करूं? कुछ समझ नहीं आ रहा। मैं तो बस

[01:07:59] उस साक्षी को बदनाम करना चाहती था ताकि वह

[01:08:01] ऑफिस छोड़कर चली जाए। साथ ही अक्षत सर की

[01:08:03] जिदगी से भी। अब तो मेरा ही दाव उल्टा पड़

[01:08:06] गया। साक्षी की जगह मुझे इस ऑफिस से जाना

[01:08:08] पड़ेगा। अपने बाल अपने हाथों से पकड़ा।

[01:08:09] नहीं, नहीं मैं अक्षत को छोड़कर नहीं जा

[01:08:11] सकती। क्या करूं? कैसे इस परेशानी से

[01:08:13] निकालूं समझ नहीं आ रहा है। सबसे पहले

[01:08:15] मुझे वेटर से बात कर पूछाना चाहिए। क्या

[01:08:17] उसने बता दिया है कि उसने मेरे कहने पर

[01:08:19] साक्षी को अल्कोहल वाला जूस दिया था। हेलो

[01:08:22] फोन उठते ही शशि बोली हेलो कौन बोला रहा

[01:08:24] है फोन की दूसरी तरफ से आवाज आए कल

[01:08:27] तुम्हें एक काम दिया जिसके बाद तुम्हें

[01:08:30] राशि अपनी बात पूरी कह पाती कि उसकी बात

[01:08:32] काटते हुए दूसरी तरफ से आवाज आई हां

[01:08:34] पहचाना गया मैडम आपको भूल भी कैसे सकता

[01:08:36] हूं आपके थोड़े से पैसे की वजह से मेरी

[01:08:38] नौकरी चली गई है पता नहीं क्या हो गया था

[01:08:41] मुझे कि आपका बेकसा काम करने के लिए राजी

[01:08:43] हो गया अच्छा अच्छा ठीक है और पैसे मिला

[01:08:46] जाए वो पर मुझे कुछ बातें पूछनी है उसकी

[01:08:48] बेक बातों से ऊबकर वह बोली पैसे तो पक्का

[01:08:51] पक्का मिलेंगे ना? दूसरी तरफ से सवाल पूछा

[01:08:53] गया। मेरा दिमाग पहले ही गर्म है तू और

[01:08:56] गर्म मत कर। जितना पूछा है उतना बोला। वो

[01:08:58] गुस्से से बोली हां मैनेजर ने सुबह मुझे

[01:09:01] बोला था। वह एक लड़का भी था। वह पूछाताछ

[01:09:04] कर रहा था। उसने मेरे से पूछा तो मैंने सब

[01:09:06] बता दिया। पर मुझे कहा पता कि वह मुझे

[01:09:08] नौकरी से। वो अपनी बात पूरी करता तब तक

[01:09:10] दूसरी तरफ से फोन कट चुका था। वह अजीब सा

[01:09:12] मुंह बनाते हुए फोन की स्क्रीन को देखने

[01:09:14] लग। राशि अपना सिर पकड़ कर बैठ गई। ओ मेरे

[01:09:17] चॉकलेट हीरो आज तू एंग्री यंग मैन बना

[01:09:19] कैसे बना गया? टेबल पर अपनी दोनों

[01:09:21] कोहनियां टिक कर हथेलियों में अपना चेहरा

[01:09:23] लिए। अक्षत को एक टेट देखते हुए राघव ने

[01:09:25] पूछा, "क्या मतलब है तेरा?" राघव के सामने

[01:09:28] रखी चेयर पर बैठते हुए वह बोला, यही कि

[01:09:30] हमेशा प्यार से हर चीज हैंडल करने वाला

[01:09:32] शख्स आज अचानक से इस तरह से गुस्से से

[01:09:35] रूद्र रूप धारण कर लिया। पर कुछ भी बोलो

[01:09:37] तेरा यह अवतार देखकर मजा आ गया। अपनी जेब

[01:09:39] से चॉकलेट निकल मुंह में रखते हुए राघव

[01:09:41] बोला, "क्यों तू ही एंग्री यंग मैन बना

[01:09:44] सकता है क्या?" राघव के हाथ से पैक छीनते

[01:09:46] हुए वह बोला, "मैंने कब किया गुस्सा?"

[01:09:49] अपने हाथ रुमुला से साफ करते हुए राघव ने

[01:09:51] पूछा है तुझे क्या लागत है जो तूने आज

[01:09:54] किया मुझे पता नहीं है मुंह में चॉकलेट का

[01:09:56] एक पीस रख हल्की मुस्कान के साथ बोला कौन

[01:09:58] है तेरा जासूस जो तुझे हर किसी की

[01:10:00] इंफॉर्मेशन देता रहता है चॉकलेट का पैकेट

[01:10:03] अक्षत से छीनते हुए राघव चिढ़कर बोला

[01:10:05] क्यों राघव जी को जलन हो रही है वो राघव

[01:10:08] के माजे लेते हुए बोला आ तुझे से तो बात

[01:10:11] करना ही बेकार है राघव अपनी जगह से उठ

[01:10:13] मेंडिंग रूम से बाहर निकालने हुए बोला अरे

[01:10:16] राघव बेबी चिढ़ गए अक्षत हंसते हुआ बोला

[01:10:18] राघव मुंह फूल कर बाहर निकाल गया। उन

[01:10:20] दोनों की बचकानी बातों पर साक्षी भी

[01:10:22] मुस्कार दी। चल अक्षत ने साक्षी से पूछा

[01:10:25] कहां? वो अचरत से बोली मेरे केबिन में वह

[01:10:28] उठाते हुए बोला। साक्षी ने सहमति में

[01:10:31] गर्दन हिला दी। दोनों अक्षत केबिन की तरफ

[01:10:33] बढ़ गए। आपको कैसे पता चला कि मुझे

[01:10:36] जानबूझकर शराब पिलाई गई है? केबिन में

[01:10:38] पहुंच साक्षी ने सावल पूछा जो उसके मन में

[01:10:40] बहुत देर से चला रहा था। अक्षत ने उसे देख

[01:10:42] कहा, जानता हूं बहुत सवाल है। आपके मन में

[01:10:44] सभी का जवाब मिलेगा। धीरे-धीरे पहले आप

[01:10:46] आराम से बैठ जाइए। वह वहां पर रखे कोच पर

[01:10:49] उसे बिठाते हुए बोला, कुछ देर की शांति के

[01:10:52] बाद अक्षत ने कहना शुरू किया। जितना राघव

[01:10:54] ने मुझे आपके बारे में बताया उससे इतना तो

[01:10:56] मुझे समझ में आया है कि आप जिंदगी की

[01:10:57] अहमियत समझती हैं और जो लोग जिंदगी की

[01:10:59] कीमत समझते हैं वह इस तरह से इन चीजों से

[01:11:02] खून नहीं जालते हैं। साक्षी के चेहरे पर

[01:11:03] आए बालों को कान के पीछे करते हुए जब राघव

[01:11:06] ने आपको नशे में देख तो उसने मुझे बताया

[01:11:08] आपको यह सब पसंद नहीं है। साथ ही यह भी

[01:11:10] बताया कि आपको उन लोगों से सख्त नफरत है

[01:11:12] जो सिगरेट शराब पीते हैं। फिर आपको साक्षी

[01:11:15] ने कुछ कहना चाहा कि अक्षत ने उसके होठों

[01:11:17] पर उंगोली रखते हुए कहा बहुत बोलने लगी

[01:11:19] है। पिछले कुछ दिनों से आप पहले बस हां

[01:11:21] हूं जी और गर्दन हिला दिया करती थी उसके

[01:11:23] गाल खींचते हुए जब आप गर्दन हिलाती है ना

[01:11:25] तो बहुत क्यूट लगती है अक्षत की बातें और

[01:11:27] हरकतों पर साक्षी मुस्का दी वैसे डांस

[01:11:30] काफी अच्छा करती है आप वो मुस्कुरा कर

[01:11:32] पीछे हटते हुए बोला क्या डांस और मैं क्या

[01:11:35] कुछ भी शर्म से लाल साक्षी साड़ी के पल्लू

[01:11:37] में अपनी उंगोली उलझ हुए बोली विश्वास

[01:11:40] नहीं है आप रुको 1 मिनट के अक्षत ने अपनी

[01:11:42] पॉकेट से फोन निकाल एक वीडियो प्ले करके

[01:11:44] साक्षी के सामने रख दिया वीडियो में

[01:11:46] साक्षी और अक्षत को रोमांटिक डांस चल रहा

[01:11:48] था साक्षी गाल कश्मीरी सेब की तरह बिल्कुल

[01:11:50] लाल हो गए। अक्षत को उसकी हालत देखकर बहुत

[01:11:52] हंसी आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था उसे

[01:11:54] आज के मॉडल टाइम में भी इतनी शर्मीली

[01:11:56] लड़की मिली है जो जरा जरा सी बात पर शर्म

[01:11:59] से लाल हो जाती है। कुछ देर बाद अक्षत मैं

[01:12:01] अपनी बात जारी रखते हुए कहा कल इसी डांस

[01:12:03] वीडियो के लिए मैंने मैनेजर को कॉल किया

[01:12:05] था कि मुझे पार्टी की कुछ फुटेज भेज दे जब

[01:12:07] मैं वीडियो देख रहा था। उसमें से मैंने एक

[01:12:09] वीडियो देखा। एक वेटर आपके पास आकर

[01:12:11] बार-बार आपको ड्रिंक ऑफर कर रहा था और आप

[01:12:13] उसे बार-बार मना कर रही थोड़ी देर बाद वह

[01:12:15] वेटर वापस आपके पास आया और मेरी तरफ इशारा

[01:12:18] करके आपसे कुछ कहा तब आपने जूस ले लिया।

[01:12:20] फिर दूसरी तरफ थम्स अप का इशारा किया। तब

[01:12:23] मेरे दिमाग में कुछ खटक आपको रात में ऐसी

[01:12:25] हालत में छोड़कर नहीं आ सकता था। इसलिए

[01:12:27] मैंने मैनेजर कॉल कर सारी बात बताई। उससे

[01:12:29] कहा कि सुबह वेटर से मुझे मिलना है। फिर

[01:12:31] क्या था सुबह जाकर वेटर से वीडियो देखकर

[01:12:33] पूछा तो उसने रटूते की तरह सब बता दिया।

[01:12:36] किसने किया यह सब? लड़खड़ाती जुबान में

[01:12:38] साक्षी ने पूछा। अब तक तो उसे लगा रहा था

[01:12:40] कि उसकी गलती की वजह से यह सब हो रहा। ना

[01:12:42] वह कल पार्टी में जाती और ना यह सब होता।

[01:12:45] पता चल जाएगा थोड़ी देर में कोच से उठ

[01:12:47] अपनी रोलिंग चेयर की तरफ जाते हुए जो बाहर

[01:12:49] दरवाजे पर कान लगाए सुन रहे हैं उन्हें भी

[01:12:51] थोड़ी देर में जवाब मिला जाएगा। कह वह

[01:12:53] अपनी चेयर पर बैठा गया। राघव अपनी बत्तीसी

[01:12:56] दिखाते हुए अंदर आकर कहा, "इतना सस्पेंस

[01:12:58] क्या बना रखा है? जल्दी बताना किसने किया

[01:13:00] है। अक्षत के सामने रखी चेयर पर बैठ गया।

[01:13:03] बड़ा मजा आ रहा मुझे। तुझे इस तरह से

[01:13:05] परेशान होता देख। वो लैपटॉप को ऑन करते

[01:13:07] हुए बोला। हां सही है भाई यही तेरी दोस्ती

[01:13:10] तेरा प्यार राघव नौटंकी करते हुए बोला बस

[01:13:13] बस नटकी मत कर काम करने दे अक्षत लैपटॉप

[01:13:16] पर अपनी उंगोलियां चलने लग राघव मुंह

[01:13:18] फुलाकर उसे देखने लग साक्षी इन दोनों की

[01:13:20] बातों से बेखबर किसी अलग ही सोच में गुम

[01:13:22] थी रवि तू एक काम का मेरे साथ दिल्ली वापस

[01:13:25] चल कुछ दिनों उस लड़की से दूर रहेगा तो

[01:13:27] उसे भूलने में आसानी होगी अंकित गाड़ी

[01:13:29] ड्राइव करते हुए बोला इसीलिए मैं तेरे साथ

[01:13:32] बाहर नहीं आना चाहत था मुझे पहले ही पता

[01:13:34] था तू यही सब बातें करने के लिए मुझे अपने

[01:13:36] साथ बाहर लाया है खिड़की से बाहर के नजारे

[01:13:38] देखते हुए रवि ने कहा तू क्या चाहता है

[01:13:40] मैं बात ना करूं इस टॉपिक पर तू खुद तो

[01:13:42] कभी बात करेगा नहीं इस बारे में पर मैं

[01:13:44] तुझे इस हालत में नहीं देख सकता हूं

[01:13:46] इसीलिए चल मेरे साथ इन सब से दूर रहेगा तो

[01:13:48] उसे भूलने में आसानी होगी अंकित उसे समझते

[01:13:50] हुए बोला भुलाया बुरी यादों को जाता है

[01:13:53] जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादों को तो हमेशा

[01:13:55] संजोकर रख जाता है अंकित को एक नजर देख

[01:13:58] सामने की तरफ देखते हुए वह बोला जो यादें

[01:14:01] सिर्फ दर्द दे उन्हें भुला देना चाहिए वह

[01:14:02] गाड़ी दाई तरफ घूमते हुए बोला रवि ने

[01:14:05] मुस्कुराकर अंकित को देख कर्कश आवाज में

[01:14:07] बोला मोहब्बत में मिले दर्द या गम हमें सब

[01:14:10] हंस के काबुल है। रवि के इस अंदाज पर

[01:14:12] अंकित हंस दिया। थोड़ी देर बाद बोला यह

[01:14:15] मेरे वो दोस्त नहीं है जो हमेशा हंसता

[01:14:16] रहता था। मस्ती करता था। यह तो कोई और है

[01:14:18] जो बहुत बदल गया है। बहुत समझती वाली

[01:14:20] बातें करने लगे हैं। यह आके इश्क ने

[01:14:23] निकम्मा कर दिया नहीं तो आदमी हम भी काम

[01:14:25] के थे। वो शायराना अंदाज में बोला। हूं

[01:14:27] कहे अंकित ने गाड़ी एक क्लब के सामने रोक

[01:14:29] दी। दिन में यहां क्यों? उसने पूछा

[01:14:31] क्योंकि यहां आकर तेरा मूड थोड़ी देर के

[01:14:33] लिए ही सही ठीक तो होगा। अंकित ने गाड़ी

[01:14:35] पार्क कर बोला। अंदर चले। अंकित ने पूछा

[01:14:38] हूं। कह रवि और अंकित क्लब की तरफ बढ़ गए।

[01:14:41] क्या कर रहा है? अंकित ने रवि को ड्रिंक

[01:14:43] करता देख पूछा। दवाई पी रहा हूं। ग्लास

[01:14:46] अंकित को दिखाते हुए वह बोला। अच्छा यह

[01:14:48] दवाई है। कैसे? अजीब सा मुंह बनाते हुए

[01:14:51] अंकित ने पूछा। यह सुकून पाने के लिए यह

[01:14:53] दवाई बेस्ट है। एक घुंट भरते हुए वो बोला।

[01:14:56] तू तो कहा था यह बुरी चीज है। बियर का

[01:14:58] ग्लास होठों पर लगते हैं। अंकित ने पूछा।

[01:15:01] वक्त और हालत लोगों का नजरिया बदल देते

[01:15:03] हैं। वो दो टूक बोला। आज तुझे नहीं रोक

[01:15:06] रहा हूं पर आज के बाद नहीं हर डॉक्टर ने

[01:15:08] मना किया है तुझे इन सबके लिए रवि का खाली

[01:15:10] ग्लास भरते हुए अंकित बोला रवि मुस्कुरा

[01:15:12] दिया यार अब तो बता दे राघव झल्लाते हुए

[01:15:16] बोला कितना इंपेशेंट है तू कह अक्षत ने

[01:15:18] लेड लाइन पर किसी को फोन मिलाकर कुछ कहा

[01:15:20] अब यह फोन किसे मिला रहा है राघव मुंह

[01:15:22] बिचक बोला अक्षत बस मुस्कुरा कर रह गया हम

[01:15:26] दोनों कब तक तेरे बोलने का इंतजार करते

[01:15:28] रहेंगे राघव अब पक चुका था इंतजार

[01:15:30] करते-करते तेरे सावल का जवाब देने के लिए

[01:15:33] ही किसी को बुलाया है अक्षत लैपटॉप बंद

[01:15:35] करते हुए बोला किसे बुलाया है वह उत्साह

[01:15:37] से बोला जहां इतना इंतजार किया है थोड़ी

[01:15:39] देर और सही पेपरवेट से खेलते हुए वह बोला

[01:15:42] मे आई कम सर दरवाजे के दूसरी तरफ से लड़की

[01:15:45] की आवाज आई यस अक्षत सीरियस होते हुए बोला

[01:15:48] राघव और साक्षी ने देख तो राशि अंदर केबिन

[01:15:50] में आकर खड़ी हो गई कुछ कहना है आपको

[01:15:52] अक्षत ने राशि पर निगाहें जाम कर कड़क

[01:15:55] आवाज में पूछा जी सर वो गर्दन झुका बोली

[01:15:58] बोलिए क्या कहना है कल साक्षी को वह आगे

[01:16:00] कहती कि अक्षत ने उसे टोक कर कहा आप अपने

[01:16:03] बॉस की वाइफ को सिर्फ सिर्फ उनके नाम से

[01:16:04] बुला रही है। सॉरी सर। कल साक्षी मैम को

[01:16:07] अल्कोहल वाला जूस उस वेटर ने मेरे कहने पर

[01:16:10] दिया था। राशि की बात सुन राघव साक्षी के

[01:16:12] कान भाग खड़े हो गए। वह अपनी बात जारी

[01:16:14] रखते हुए बोली सर मैं तो बस थोड़ी मस्ती

[01:16:16] माजक कर रही थी साक्षी मैम के साथ। मुझे

[01:16:18] नहीं पता था ऑफिस में यह बात इस तरह से

[01:16:20] फैलाएगी। सर मुझे माफ कर दीजिए। आज के बाद

[01:16:23] ऐसा कुछ नहीं होगा। पर प्लीज सर मुझे

[01:16:25] नौकरी से मत निकलिए। वह घड़ियाली आंसू

[01:16:27] बहते हुए बोली। क्या साक्षी ने कभी आपके

[01:16:30] साथ कोई माजक मस्ती करी है? वह अपने

[01:16:32] गुस्से को कंट्रोल करते हुए अक्षत बोला

[01:16:34] नहीं साक्षी आपकी फ्रेंड है। नहीं तो फिर

[01:16:37] क्यों जो लड़की ना तुम्हारी फ्रेंड है ना

[01:16:39] ही किसी के साथ इस तरीके के मजाक करती है।

[01:16:41] क्यों तुमने उसके साथ इतना बेहद मजाक

[01:16:43] किया? वह दांत पीसते हुए वह बोला आई एम

[01:16:46] रियली सॉरी सर। क्या होगा तुम्हारे सॉरी

[01:16:48] कहने से है? सोचा है अगर कल मैं साक्षी के

[01:16:50] साथ ना होता तो कुछ भी हो सकता था उसके

[01:16:52] साथ। तुम खुद एक लड़की हो। तुम ऐसा कैसे

[01:16:54] कर सकती हो किसी दूसरी लड़की के साथ? इतना

[01:16:56] घटिया मजाक करते हुए तुम्हें जरा सी भी

[01:16:58] शर्म नहीं आई। अक्षय का इतना देर रुका हुआ

[01:17:00] गुस्सा अब बाहर निकलने लगा था। हाथों की

[01:17:02] मुट्ठियां भी चुकी थी। सॉरी सर वो रोते

[01:17:05] हुए बोली सॉरी नहीं चाहिए तुम्हारा

[01:17:06] रिजर्वेशन लेटर रखो और साक्षी से सॉरी

[01:17:09] बोलो। सर प्लीज मुझे जॉब से मत निकालिए।

[01:17:12] आप जिससे उसे माफी मांग लोगी वो

[01:17:13] गिड़गिड़ाते हुए बोली शुक्र मनाओ सिर्फ

[01:17:16] नौकरी से निकाल रहा हूं। वरना जैसी

[01:17:18] तुम्हारी हरकत थी पुलिस में दे देता।

[01:17:20] लड़की हो इसलिए जाने दे रहा हूं। साक्षी

[01:17:22] से माफी मांग अपना एक्सपीरियंस लेटर लेकर

[01:17:24] जाओ। सरप्ल राशि के शब्द मुंह में ही रह

[01:17:27] गए। अक्षत ने उसे हाथ देखकर कहा, "इतना

[01:17:29] टाइम नहीं है कि तुम पर वेस्ट करो। सो

[01:17:31] प्लीज गो।" राशि मरते कदमों के साथ साक्षी

[01:17:34] के पास आकर माफी मांग केबिन से बाहर निकल

[01:17:36] गई। कुछ देर के लिए पूरे कैबिन में शांति

[01:17:39] पसर गई। राघव ने आज से पहले अक्षत को कभी

[01:17:41] इतना गुस्सा करते हुए नहीं देखा था। थोड़ी

[01:17:43] देर बाद राघव ने हिम्मत कर अक्षत से पूछा,

[01:17:45] आर यू ओके? यस, आई एम ओके? बस थोड़ी देर

[01:17:49] अकेले रहना चाहता हूं। प्लीज अक्षत ने

[01:17:50] आंखें बंद कर अपना सर चेयर पर टिका दिया।

[01:17:52] राघव साक्षी ने एक दूसरे को देखा। फिर

[01:17:55] अक्षत केबिन से बाहर निकल गए। भैया वो

[01:17:58] केबिन से बाहर निकल साक्षी ने कुछ कहना

[01:18:00] चाहा कि राघव ने उसे टोकते हुए कहा तुम

[01:18:02] चिंता मत करो उसे टाइम तो वह ठीक हो जाएगा

[01:18:04] इतना गुस्सा सेहत के लिए ठीक है भैया

[01:18:07] साक्षी ने चिंतावसा कहा अक्षत को इतना

[01:18:09] गुस्सा करते देख वह भी सहम गई थी जानता

[01:18:12] हूं साक्षी इतना गुस्सा अच्छा नहीं है पर

[01:18:14] कभी-कभी कुछ चीजें ऐसी हो जाती है कि जब

[01:18:16] आप अपने आप को रोक नहीं पाते हैं। मेरे

[01:18:18] दोस्त बेवजह गुस्सा करने वालों में से

[01:18:20] नहीं है। वह यह सोचकर गुस्सा हो रहा अगर

[01:18:22] कल वह तुम्हारे साथ ना होता तो क्या होता

[01:18:24] अगर तुम गलती से कहीं चली जाती तो क्या हो

[01:18:26] सकता था? वह यह सब बातें सोचकर इतना

[01:18:28] परेशान हो है। उसे खुद पर गुस्सा आ रहा है

[01:18:30] कि वह तुम्हारा ठीक से ध्यान नहीं रख

[01:18:32] पाया। पर तुम उसे थोड़ी देर अकेल छोड़ दो।

[01:18:34] वह ठीक हो जाएगा। साक्षी के सर पर हाथ रख

[01:18:36] चिंता मत करो। बहुत स्टर्ग है तुम्हारा

[01:18:38] पति। चलो हम कॉफी पीते हैं। साक्षी को

[01:18:40] अपने साथ ले राघव कैंटीन की तरफ बढ़ गया।

[01:18:43] रविवार काउंटर पर बैठा शराब पी रहा था।

[01:18:46] पीछे से एक लड़की ने आकर उसके कानों में

[01:18:48] फुसफुसाते हुए कहा, कैन यू डांस विद मी?

[01:18:50] रवि ने गर्दन घुमाकर उस लड़की को देख

[01:18:52] ब्लैक कलर की घुड़नों से ऊपर तक की ड्रास

[01:18:54] पहना रखी थी। आंखों को काजल से संजाया हुआ

[01:18:56] था। होठों पर न्यूड लिपस्टिक लगा रखी थी।

[01:18:58] कुल मिलाकर वो लड़की बहुत हॉट लगा रही थी।

[01:19:01] रवि ने कुछ कहने के लिए होठों हिलाएगी।

[01:19:04] रवि ने कुछ कहने के लिए होठों हिलाए कि

[01:19:06] अंकित ने उसका हाथ पकड़ उसे लड़की से

[01:19:08] बोला, व्हाई नॉट रवि ने घुरकर उसे देख

[01:19:09] अंकित को देख तो उसने कंधे उचका दिए। वो

[01:19:12] लड़की रवि का हाथ पकड़ उसे डांस फ्लो की

[01:19:14] तरफ बढ़ गई। जो आंख लड़ जावे सारी रात

[01:19:17] नींद ना आए मेनु बड़ा तड़पावे दिल चैन

[01:19:20] कहीं ना पावे पावे पावे दशमल2 वो लड़की

[01:19:23] रवि के कंधों पर हाथ रख डांस कर रही थी

[01:19:25] रवि को उस लड़की के साथ बिल्कुल सहज नहीं

[01:19:27] हो पा रहा था खन्ना खन्ना खन्ना खन्ना

[01:19:30] चूड़ी तेरी खन्ना खन्ना खन्ना खन्ना खन के

[01:19:32] रे खन्ना खन्ना खन्ना खन्ना खन के आ देख

[01:19:36] वेख के चेहरा मेरा दिल ये धक धक धड़के रे

[01:19:39] दिल ये धक धक धड़के रे रवि ने डांस फ्लो से

[01:19:42] जाने की कोशिश की पर वह लड़की रवि का हाथ

[01:19:44] पकड़ रोल होते हुए उसके सीने से आ लगी।

[01:19:47] तरसावे तेरे बिन यह रह ना पावे माही जो तू

[01:19:49] ना आवे आवे। रवि ने एक झटके में उस लड़की

[01:19:52] से खुद से दूर किया जिसे वह लड़की कुछ कदम

[01:19:54] लड़खड़ गई। रवि बिना उस लड़की की तरफ देख

[01:19:57] दनाते हुई अंकित के पास चला गया। वह लड़की

[01:19:59] आंखें फाड़े रवि को देखने लगी। क्या हुआ

[01:20:02] काव्या तुम यहां क्यों खड़ी हो? उस लड़की

[01:20:04] काव्या की दोस्त ने आकर पूछा। वो उस तरफ

[01:20:07] लड़के को देख रही हो। काव्या रवि की तरफ

[01:20:09] उंगली से इशारा करते हुए बोली। वो ब्लू

[01:20:12] शर्ट वाला काव्या की दोस्त ने पूछा हां

[01:20:14] वही वह बोली क्या किया उसने? दोस्त ने

[01:20:17] पूछा वह मेरा हाथ झटक कर चला गया। डांस

[01:20:19] फ्लो से काव्या रवि को घूरते हुए बोली

[01:20:21] जाने दो उसे चलो हम एंजॉय करते हैं। वैसे

[01:20:24] भी हम लखनऊ घूमने आए हैं यार यहां किसी से

[01:20:26] बहस करने नहीं। दोस्त काव्या को समझते हुए

[01:20:28] बोली पर उसने मुझे काव्या अपनी बात पूरी

[01:20:31] करती कि उसकी दोस्त उसे खींचते हुए दूसरी

[01:20:33] साइड में लेकर आ गई। जहां उनके और दोस्त

[01:20:35] भी बैठे हुए थे। कहां चली गई थी काव्या?

[01:20:38] उसके दोस्तों ने पूछा कहीं नहीं चलो कहीं

[01:20:40] और चलते हैं घूमने। काव्या उनके पास बैठते

[01:20:42] हुए बोली हां चलो सभी दोस्त थोड़ी देर में

[01:20:44] क्लब से बाहर निकल गए क्या हो गया तू इस

[01:20:47] तरफ से क्यों डांस बीच में छोड़कर आ गया

[01:20:50] रवि को बीच गाने में वापस आया देख अंकित

[01:20:52] ने पूछा वो लड़की मुझे कुछ ठीक नहीं लगी

[01:20:54] वो अपने लिए ड्रिंक ऑर्डर करते हुए बोला

[01:20:57] मतलब वो असमज की स्थिति में बोला कुछ नहीं

[01:20:59] बोला उसने ग्लास होठों पर लगा लिया अंकित

[01:21:02] उसके चेहरे को ध्यान से देखने लगा राघव और

[01:21:05] साक्षी दोनों कैंटीन में बैठाए कॉफी का

[01:21:07] आनंद ले रहे थे साथ के साथ राघव उसे अपने

[01:21:09] और अक्षत के कॉलेज के किस्से सुन रहा था।

[01:21:11] राघव ने भी अक्षत के साथ ग्रेजुएशन आउट ऑफ

[01:21:13] इंडिया से की थी। जिसे सुन साक्षी खुद को

[01:21:15] हंसने से रोक नहीं पा रही थी। अच्छा अच्छा

[01:21:18] साक्षी यह वाला भी सुनो। राघव ने अपनी

[01:21:20] हंसी रोक कहा। नहीं नहीं भाई अब नहीं मेरा

[01:21:23] पेट दर्द हो गया है। हंसते-हंसते वह अपने

[01:21:25] पेट को पकड़ कर बोली। बस यह वाला लास्ट

[01:21:28] है। सुनो नहीं बस। अरे राघव आगे कुछ कहता

[01:21:30] कि पीछे से एक आवाज आई हो गई। मेरी बुराई

[01:21:32] या और कुछ बाकी रह गया है। उन दोनों ने

[01:21:35] पीछे मुड़कर देख तो अक्षत वह खड़ा था।

[01:21:37] अक्षत को देख राघव ने पूछा अब ठीक है तू।

[01:21:40] हां कह वह भी उन दोनों के पास आकर बैठा

[01:21:42] गया। तेरे लिए कुछ ऑर्डर करूं। राघव ने

[01:21:44] पूछा कॉफी वह थके स्वर में बोला कॉफी नहीं

[01:21:47] साक्षी जल्दी से बोली। उसके इस तरफ अचानक

[01:21:49] बोलने पर दोनों ही लड़कों की नजरें उसके

[01:21:51] ऊपर टिक गई। साक्षी क्षेपते हुए बोली मेरा

[01:21:54] मतलब है कि सुबह भी इन्होंने नाश्ता नहीं

[01:21:56] किया था और अब खाली पेट कॉफी पीने से

[01:21:58] एसिडिटी हो जाएगी। फिर इनका सर दर्द होगा।

[01:22:00] तो कहते-कते साक्षी गर्दन झुकाकर चुप हो

[01:22:02] गई। राघव ने इशारा से अक्षत को चिद तो वह

[01:22:05] यहां वहां देखने लगा। सैंडविच ले आओ अगर

[01:22:08] आपको प्रॉब्लम ना हो। वह साक्षी को चिदते

[01:22:10] हुए बोला राघव अक्षत खींचते हुए बोला ओह

[01:22:13] क्या बात एक से करो जवाब दूसरा देता है

[01:22:16] राघव शरारती मुस्कान के साथ बोला अक्षत

[01:22:18] उसे मरने के लिए लपक कि राघव फुर्ती से

[01:22:20] टेबल से दूर जा खड़ा हुआ रुक बताऊं तुझे

[01:22:22] भाग क्यों रहा है पागल थोड़ी ना हो जो

[01:22:25] भूखे शेर के आगे खुद ही आ जाऊं कह राघव

[01:22:27] वहां से भाग खड़ा हुआ पागल अक्षत हंसते

[01:22:30] हुए बोला उन दोनों की हरकतें देख साक्षी

[01:22:32] भी खुलकर हंस दी साक्षी को हंसता देख

[01:22:35] अक्षत उसकी हंसी में खो गया उसके आगे के

[01:22:37] चार दांतों को छोड़ बाई तरफ का पांच

[01:22:38] पांचवा दांत के ऊपर दांत था जो उसकी हंसी

[01:22:40] को और आकर्षक बना रहा था। खूबसूरत है ना

[01:22:43] अक्षत के कानों में आवाज गूंज वो बेख्याली

[01:22:46] से खोया हुआ बोला बहुत तो कहां दो उसे

[01:22:48] पसंद करने लगे हो उसे बोला दूंगा जल्द ही

[01:22:51] कब वो कहते हुए जब उसने मुड़कर देख तो

[01:22:54] राघव अपनी बत्तीसी दिखा रहा था रुक तू

[01:22:56] बताता हूं उसके कहने से पहले राघव साक्षी

[01:22:58] के पीछे खड़े होकर बोला ऑर्डर कर दिया तुम

[01:23:00] पतिपत्नी एंजॉय करो थोड़ी देर रुकिए ना

[01:23:03] साक्षी सहजता से बोली मुझे कबाब में हड्डी

[01:23:05] बनाना पसंद नहीं है वह अक्षत की तरफ देख

[01:23:07] मुस्कुरा कर बोला राघव इस बार अपनी जेब

[01:23:10] मिटाने के लिए वह गुस्से से बोला

[01:23:12] राघव इस बार अपनी जेब मिटाने के लिए वह

[01:23:14] गुस्से से बोला राघव ने अक्षत को देख बड़े

[01:23:17] एटीट्यूड से बोला क्या राघव हां मेरे पास

[01:23:20] बहुत काम है तुम्हारी तरफ वेला नहीं हूं

[01:23:22] है राघव के पास बहुत काम है मैं तो चला

[01:23:24] काम करने राघव यह बात इस तरह कही कि

[01:23:26] साक्षी अक्षत खुद को हंसने से रोक नहीं

[01:23:28] पाए कुछ देर बाद अक्षत बोला चलें कहां घर

[01:23:32] क्यों अरे भूल गई अभी थोड़ी देर पहले कोई

[01:23:34] कह रहा था मुझे घर जाना है मेरी तबीयत ठीक

[01:23:37] नहीं है वो अपनी गहरी नरों से साक्षी को

[01:23:39] देखते हुए बोला अक्षत की बात सुन साक्षी

[01:23:42] क्षेप गई। वह अटकते हुए बोली हां वो वो

[01:23:45] मतलब मैं साक्षी की हालत देख वो हंसकर

[01:23:48] बोला हालत देखो अपनी अब तो बोला भी नहीं

[01:23:50] पा रही हो। अपनी हंसी रोक आपकी तबीयत सच

[01:23:52] में बहुत खराब है। हमें घर चलाना चाहिए।

[01:23:54] साक्षी ने घुरकर उसे देख तो वह मुंह पर

[01:23:56] उंगली रख छोड़े बच्चों की तरह बैठा गया।

[01:23:58] क्या है आपको आजकल आप मुझे बहुत परेशान

[01:24:00] करने लगे। कभी मजाक उड़ाते हैं तो कभी।

[01:24:03] अपनी बिना पूरी किए ही वह चुप हो गई। कभी

[01:24:06] क्या? शरारती मुस्कान के साथ अक्षत ने

[01:24:08] पूछा। कुछ नहीं। ही वह नजरें चुराते हुए

[01:24:10] बोली कुछ तो उसने वापस से पूछा कहा ना कुछ

[01:24:13] नहीं वह गर्दन झुका कर बोली घर चले फिर

[01:24:16] अक्षत ने उठाते हुए पूछा पर काम का क्या

[01:24:19] उसने गर्दन उठकर पूछा ज्यादा काम है नहीं

[01:24:21] जो थोड़ा बहुत होगा वो घर पर कर लेंगे

[01:24:23] अक्षत सहजता से बोला साक्षी ने भी घर जाने

[01:24:26] के लिए हामी भर दी रवि अब बस कर बहुत हो

[01:24:29] गया है अंकित रवि को टोकते हुए बोला अभी

[01:24:31] तो बस पांच बॉलर्स हुए देख अभी तो मुझे नश

[01:24:34] भी नहीं हुआ है रवि लड़खड़ती आवाज में

[01:24:36] बोला वो दिख रहा है कि नाश हुआ है या नहीं

[01:24:39] अंकित खुद में ही बड़ब्या अंकित को

[01:24:40] बड़बड़ता देख वह बोला तुझे यकीन नहीं है

[01:24:42] ना रुक अभी तुझे चल कर दिखता हूं देखियो

[01:24:45] मुझे बिल्कुल सीधा चल कर दिखात हूं तुझे

[01:24:47] रवि अपनी जगह से उठते हुए बोले नहीं भाई

[01:24:50] मुझे पता है तुझे अभी चढ़ी नहीं है वह भी

[01:24:52] अपनी जगह से उठाते हुए बोला तू रुक मेरे

[01:24:54] पास मत आ मैं तुझे चला कर दिखाता हूं रवि

[01:24:57] उसे हाथ दिखाकर रोकते हुए बोला रवि

[01:24:59] लड़खड़ते हुए चार कदम ही चले कि गिरने को

[01:25:01] हो गया अंकित ने भागकर उसे संभाला कर कहा

[01:25:04] माना लिया तुझे अभी नहीं चढ़ी पर चल अब घर

[01:25:06] चलते हैं क्योंकि मुझे चद गई है चल चल फिर

[01:25:08] चलते हैं पता नहीं अब तू क्या-क्या नॉटकी

[01:25:10] कर रवि अंकित की शक्ल देखते हुए बोला

[01:25:12] अंकित उसकी बता सुन मन में बोला नॉनटकी

[01:25:14] खुद कर रहा और मुझे कैसे बुला रहा है

[01:25:16] बेवड़ा कहीं का अब मोटी क्यों बना हुआ

[01:25:19] चलना वो अंकित को अपनी जगह पर स्थिर खड़ा

[01:25:22] देख बोला हां भाई चला रहे हैं कह अंकित ने

[01:25:25] उसका एक हाथ अपने कंधों पर रखा उसे पेट

[01:25:27] पकड़ बाहर की तरफ चल दिया गाड़ी के पास

[01:25:29] पहुंच अंकित ने उसे बिठा सीट बेल्ट लगकर

[01:25:32] खुद ड्राइविंग सीट संभाल ली आपको नहीं

[01:25:34] लगता आपने शशि के साथ कुछ ज्यादा ही

[01:25:36] स्ट्रिक्ट हो गए थे गाड़ी में पहली शांति

[01:25:38] को तोड़ते हुए साक्षी ने पूछा नहीं वह दो

[01:25:41] टूक सामने देखते हुए बोला पर इस तरह से

[01:25:43] अचानक नौकरी छूट जाने से नई नौकरी को

[01:25:45] मिलने में वक्त लाएंगे और अभी तो महीने की

[01:25:47] शुरुआत है वह कैसे मैनेज करेगी साक्षी ने

[01:25:49] अपने मन में चल रहे सवालों को एक सांस में

[01:25:51] अक्षत से पूछ लिया अक्षत ने एक नजर साक्षी

[01:25:54] देखा फिर गाड़ी साइड में रोक कर कहा आप

[01:25:56] उसकी मैनेज करने की चिंता मत कीजिए मैंने

[01:25:58] 2 महीने की सैलरी उसे एडवांस में दे दी है

[01:26:00] ताकि उसे जब तक नई जॉब नहीं मिला जाती तब

[01:26:02] तक उसे कोई प्रॉब्लम ना हो अब भी कोई सवाल

[01:26:04] है मन में अक्षत उसे एक टिक देखते हुए

[01:26:07] बोला

[01:26:08] साक्षी ने गर्दन हां में हिलाकर अपनी

[01:26:10] नजरें झुक ली। अक्षत के इस तरफ से देखने

[01:26:12] पर वह उसकी तरफ अपनी नजरें नहीं उठा पा

[01:26:14] रही थी। साक्षी की झुकी घनी पलकों के पीछे

[01:26:16] छिपी आंखों को देख वो मुस्कार कर बोला

[01:26:18] पूछिए क्या पूछना चाहती हैं आप? वो मैं

[01:26:21] पूछना। अक्षत की नजरों की तपिश से साक्षी

[01:26:24] के मुंह से शब्द निकाल ही नहीं रहे थे।

[01:26:26] क्या हुआ पूछिए ना उसे जब साक्षी अटकती थी

[01:26:28] बहुत प्यारी लगती थी। पहले आप इधर देखिए।

[01:26:31] वो दूसरी दिशा की तरफ उंगोली से इशारा

[01:26:33] करते हुए बोली। क्यों? क्यों वो साक्षी की

[01:26:36] मासूम सी इल्तजा पर बोला प्ली प्लीज देखिए

[01:26:38] ना उसने वापस से मासूम इल्तजा की इस बार

[01:26:41] अक्षत ने उसकी इल्तजा मान दूसरी तरफ अपनी

[01:26:43] नजरें फेर ली अब जाके कहीं साक्षी की

[01:26:45] ट्रेनें की भांति चलती सांस को आराम मिला

[01:26:47] था आपने आज जो राशि के साथ किया उसे स्टाफ

[01:26:50] की आपके प्रति गलत इमेज बनाएगी कुछ देर

[01:26:53] बाद उसने एक नजर अक्षत को देख पूछा उसके

[01:26:56] सवाल पर अक्षत ने वापस अपनी नजरें साक्षी

[01:26:58] के ऊपर टिक कर कहा कोई मेरे बारे में गलत

[01:27:00] ना सोच ले इस डर से मैं सही काम करना बंद

[01:27:02] नहीं कर सकता हूं मुझे उसकी हरकत गलत नहीं

[01:27:04] बालकि बहुत गलत लगी। उसने आपके साथ यह

[01:27:06] किया या फिर स्टाफ में से किसी के भी साथ

[01:27:08] यह हरकत करती उसे ऐसी ही सजा मिलती। बिकॉज़

[01:27:11] शी डिविवेट राशि की बात करते हुए अक्षत के

[01:27:13] चेहरे के भाव बादल गए थे। जिन्हें साक्षी

[01:27:15] साफ तौर पर देख पा रही थी। अब भी कुछ

[01:27:18] पूछना है। वह रूखे स्वर में बोला नहीं

[01:27:20] साक्षी आवाक थी। अचानक से क्या हो गया

[01:27:22] अक्षत को? राशि के बारे में बात करते हुए

[01:27:24] उसके चेहरे पर घृणा के भाव थे। फिर चलते

[01:27:27] हैं। घर मेरा सर दर्द हो रहा है। कहते हुए

[01:27:29] अक्षत ने गाड़ी लौट कर वापस हवेली की तरफ

[01:27:31] बढ़ दी। साक्षी को अचानक उसके बर्ताव में

[01:27:34] आए अंतर की वजह तो नहीं पता थी, पर उसके

[01:27:36] चेहरे आते-जाते भावों को वह साफ देख पा

[01:27:38] रही थी। साक्षी ने धीरे से आप हाथ अक्षत

[01:27:40] के हाथ के ऊपर रख दिया, परंतु, अगले ही पल

[01:27:42] अक्षत ने अपना हाथ वो से हटा लिया। साक्षी

[01:27:45] ने निराश से अपनी आंखें बंद कर ली। अगले

[01:27:47] ही पल उसके होठों पर एक शर्मीली मुस्कान

[01:27:49] खेल गई क्योंकि हमारे अक्षत बाबू ने

[01:27:51] साक्षी के हाथ को अपने हाथ में कैद कर

[01:27:52] स्टीयरिंग संभाल ली थी। दूर कहीं बजते

[01:27:55] गाने के बोल साक्षी अक्षत के कानों में

[01:27:57] पड़ा रहे थे। चाहे दुख हो चाहे सुख हो दिल

[01:28:00] ने तुझको ही पुकारा। तूने हमको है बनाया

[01:28:03] तूने हमको है संवारा जहां को तो रब का है

[01:28:05] हमें तेरा है सहारा बस तेरा साथ हो चाहे

[01:28:08] जो बात हो बस तेरा साथ हो चाहे जो बात हो

[01:28:11] तेरे कहने से कर जाएंगे हम मर जाएंगे वो

[01:28:13] हम मर जाएंगे अक्षत की गाड़ी ठाकुर हवेली

[01:28:16] के सामने आकर रुकी साक्षी को उतारा वो

[01:28:18] गाड़ी पार्किंग में पार्क करने चला गया है

[01:28:20] साक्षी हवेली के अंदर हॉल से होते हुए

[01:28:22] अपने कमरे की तरफ बढ़ गई गाड़ी पार्क कर

[01:28:25] अक्षत हवेली की तरफ बढ़ने लगा कि हवेली के

[01:28:27] गेट पर एक गाड़ी आकर रुकी उसमें से

[01:28:29] लड़खड़ाते कदमों के साथ रवि रवि अंदर की

[01:28:31] तरफ बढ़ने लगा। रवि की हालत देख। अंकित ने

[01:28:33] अपना माथा पीट लिया। वो मन ही मन

[01:28:35] बुदबुदया। ये क्या किया कि तूने अंकित?

[01:28:37] रवि को इस हालत में घर के किसी मेंबर में

[01:28:40] देख लिया। ना तो पता नहीं कैसे रिएक्ट

[01:28:41] करेंगे। उनसे पहले तो मैं इसको देखूं जाके

[01:28:43] कहीं गिर ना जाए। अंकित जल्दी से गाड़ी से

[01:28:45] उतर रवि की तरफ चल दिया। अंकित रवि तक

[01:28:47] पहुंचा पता कि उससे पहले ही रवि गिरने को

[01:28:49] हुआ। अंकित उसे पकड़ने के लिए लपक कि उससे

[01:28:51] पहले अक्षत ने भागकर रवि को संभाल लिया।

[01:28:54] क्या हुआ छोटे और यह इतनी स्मेल तुमने पी

[01:28:56] है। उसने आश्चर्य से पूछा। थोड़ी सी पी है

[01:28:59] भाई। वो हाथों से इशारा करते हुए बोला वो

[01:29:02] तो दिख रहा है अक्षत धीरे से बुदबुदाया

[01:29:04] कुछ कहा आपने सर अंकित ने पूछा नहीं तुम

[01:29:07] जाओ गाड़ी पार्क कर दो मैं रवि उसके रूम

[01:29:09] तक छोड़ देता हूं वह सहजता बोला अंकिता

[01:29:12] हां में सर हिलकर थैंक यू बोला गाड़ी

[01:29:14] पार्क करने चला गया अक्षत रवि को संभाले

[01:29:16] उसके कमरे की तरफ बढ़ गया भाई आप मुझे से

[01:29:19] बहुत प्यार करते ना चलते-चलते रवि ने

[01:29:21] अक्षत से पूछा बहुत तुम्हें शक मेरे प्यार

[01:29:24] पर रवि के अजीब से सवाल पर उसने पूछा नहीं

[01:29:27] भाई बस एक बात पूछनी है आपसे रवि रवि ने

[01:29:29] एक नजर अक्षत को देख बोला पूछो क्या पूछना

[01:29:32] चाहते हो भाई अगर मैं आपसे कुछ मांगू तो

[01:29:35] आप मुझे देंगे उसने पूछा आज तक आपने छोटे

[01:29:38] को कभी मना किया है क्या रवि के सवाल के

[01:29:40] बदले उसने सवाल पूछा जिसके जवाब रवि ने

[01:29:43] नमे अपनी गर्दन हिला दी तो फिर क्यों मन

[01:29:46] में यह सवाल आया अक्षत ने पूछा बस ऐसे ही

[01:29:49] पूछा रवि लड़खड़ाते कदमों के साथ बोला

[01:29:51] अक्षत ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखकर कहा

[01:29:54] बताओ क्या चाहिए तुम्हें एक फीकी सी

[01:29:56] मुस्कान रवि के होठों पर खींच गई क्या हुआ

[01:29:58] हंस क्यों रहे हो। बताओ क्या चाहिए

[01:30:00] तुम्हें? रवि को कुछ ना बोलता देख अक्षत

[01:30:02] ने पूछा। जिसे हम चाहे वह हमेशा हमें

[01:30:05] मिले। ऐसा मुमकिन तो नहीं? दर्द भरी

[01:30:07] मुस्कान के साथ वह बोला, "ऐसा क्या चाहिए

[01:30:09] मेरे छोटे को जो मैं आपसे ना दे पाऊं।" एक

[01:30:12] बता तो सही, मैं पूरी कोशिश करूंगा तुझे

[01:30:14] देने की। वो विश्वास से बोला, वो अब मेरी

[01:30:16] कभी नहीं हो सकती है भाई क्योंकि वह आपसे।

[01:30:19] रवि अपनी बात पूरी कह पाता कि अंकित ने

[01:30:21] जल्दी से उसके मुंह पर नींबू पानी का

[01:30:22] गिलास लगा दिया। अंकित की अजीब सी हरकत पर

[01:30:25] अक्षत ने घूर कर उसे देखा जो समझते में

[01:30:27] अंकित जल्दी से बोला हैंगोवर उतारने के

[01:30:29] लिए सर अब आप चाहे तो जा सकते हैं मैं इसे

[01:30:31] हैंडल कर लूंगा स तुम हैंडल कर लोगे उसने

[01:30:34] औपचारिकता वश पूछा हां अंकित ने कहा हूं

[01:30:37] कि आवाज के साथ अक्षत अपने कमरे की तरफ

[01:30:39] चला गया अक्षत ने कमरे के चारों तरफ नजरें

[01:30:41] दौड़ाई उसे साक्षी पूरे कमरे में कहीं नजर

[01:30:43] नहीं आई वह सर पकड़ के बेड पर बैठा गया

[01:30:46] थोड़ी देर बाद बाथरूम का दरवाजा खोल

[01:30:47] साक्षी कमरे में दाखिल हुई आवाज सुन अक्षत

[01:30:50] को नजरें भी बाथरूम से निकालती साक्षी के

[01:30:52] ऊपर टिक

[01:30:53] साक्षी अपने कपड़े बदल सादे से चिकन कढ़ाई

[01:30:56] के हल्के आसमानी रंग के सूट विद वाइट

[01:30:57] प्लाजो पहने खड़ी थी। अक्षत थोड़ी देर उसे

[01:31:00] देखता रहा। फिर अपना सर झुक आंखें मून ली।

[01:31:02] सर दर्द हो रहा है। अक्षत को सर पकड़े देख

[01:31:05] उसने पूछा। हां थोड़ा सा है। आप फर्स्ट एड

[01:31:08] बॉक्स में से दवा दे दीजिए। वह बंद आंखें

[01:31:10] से ही बोला। छोटी-छोटी चीजों के लिए दवाई

[01:31:13] नहीं खानी चाहिए। मैं सर दवा देती हूं।

[01:31:15] इससे ही ठीक हो जाएगा। साक्षी ने सहजता से

[01:31:17] कहा। नहीं आपको तकलीफ उठाने को जरूरत नहीं

[01:31:20] है। आप बस दवा दे दीजिए। ठीक हो जाएगा।

[01:31:22] मैंने कहा है ना दवाई की कोई जरूरत नहीं।

[01:31:24] मैं दवा देती हूं। अभी ठीक हो जाए। कहते

[01:31:26] हुए साक्षी बेड पर चद घुटनों के बल बैठकर

[01:31:29] हल्के-हल्के हाथों से उसका सर दबाने लगी।

[01:31:32] जैसे ही अक्षत को साक्षी के हाथों का

[01:31:33] स्पर्श हुआ, एक मीठा सा दर्द उसके दिल दिल

[01:31:36] को गुदगुदाने लगा। कुछ देर बाद वह बोला,

[01:31:38] आपको ऐसे बैठने में प्रॉब्लम हो रही होगी।

[01:31:40] आप ठीक से बैठ जाइए, मैं लेट जाता हूं

[01:31:42] ताकि आपको बैठने में प्रॉब्लम ना हो। ठीक

[01:31:44] है। अपनी गर्दन साक्षी की तरफ घुमाकर वह

[01:31:47] बोला, साक्षी ने सहमति में अपनी गर्दन

[01:31:49] हिला दी। साक्षी अगर बुरा ना मानो तो एक

[01:31:52] चीज मांगो। अपनी आंखों को खोल साक्षी की

[01:31:54] तरफ देखते हुए उसने पूछा भला मैं क्या

[01:31:57] आपको दे सकती हूं? साक्षी छोटा सा मून बना

[01:31:59] के पूछा। आखिर उसके पास अक्षत को देने के

[01:32:01] लिए कुछ था ही कहां? पक्का अक्षत ने उसकी

[01:32:04] आंखों में झांकते हुए पूछा। अगर मेरे

[01:32:07] हाथों में होगा तो जरूर दूंगी। उन दोनों

[01:32:08] की आंखें आपस में उलझ चुकी थी। क्या मैं

[01:32:11] आपकी गोद में सर रखकर थोड़ी देर लेट सकता

[01:32:13] हूं? उसने अपनी छोटी सी ख्वाहिश साक्षी के

[01:32:15] सामने रखी। जिसे सुन साक्षी असहज हो गई।

[01:32:18] उसे असहज होता देख वह बोला कोई बात अपनी

[01:32:20] आंखें वापस मूंद ली। अक्षत के चेहरे पर

[01:32:23] मायूसी देख साक्षी को बिल्कुल अच्छा नहीं

[01:32:25] लगा। उसने हल्के से अक्षत सर को उठाकर

[01:32:27] अपनी गोद में रख दबाने लगी। अक्षत के

[01:32:29] होठों पर मुस्कान खिल गई। क्या करने जा

[01:32:31] रहा था रवि? तू अंकित गुस्से में धड़कते

[01:32:33] हुए रवि से बोला। क्या करने जा रहा था?

[01:32:36] मतलब क्या है तेरा? रवि बाथरूम से अपना

[01:32:38] मुंह पोंछ बाहर निकलते हुए बोला। साले अभी

[01:32:41] नशे में तू सब बकने वाला था। अपने भाई के

[01:32:43] सामने वो लाल पीला होते हुए बोला। उसे

[01:32:46] गुस्सा आ रहा अगर समझती नहीं है तो लोग

[01:32:48] इतनी पीते क्यों हैं? बका तो नहीं ना वह

[01:32:50] बिल्कुल ठंडेपन से बोला। अंकित ने रवि की

[01:32:52] बाह पकड़ अपने सामने कर पूछा चल क्या रहा

[01:32:54] है रवि तेरे दिमाग में? अगर तू कुछ भी गलत

[01:32:57] करने की सोचा रहा है तो मत कर। वो लड़की

[01:32:59] कोई चीज जब खिलौना नहीं है जो तूने अपने

[01:33:01] भाई से मांगा है और उसने तेरी जिद पूरी

[01:33:03] करने के लिए तुझे उठाकर उसे दे दिया। वह

[01:33:05] एक जीती जाती लड़की है जिसके कुछ अरमान

[01:33:07] है। कुछ चाहते हैं भावनाएं उसके अंदर।

[01:33:09] उसने तुझे साफ शब्दों में कहा है तो नहीं

[01:33:11] करती है वह तुझे पसंद। भूल जा मेरे भाई

[01:33:14] उससे और आगे बढ़ अपनी जिंदगी में। कहते

[01:33:16] कहते अंकित ने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए।

[01:33:18] वह नहीं चाहता था कि उसका दोस्त कोई गलती

[01:33:20] करे जिसे तीन-तीन जिंदगी खराब हो। क्या

[01:33:22] तुझे सच में लगता है कि तेरा दोस्त इतना

[01:33:24] गिर सकता है? आंखों में नमी लिए वह अंकित

[01:33:26] से सवाल पूछ रहा था। रवि की आंखों में नमी

[01:33:29] देख अंकित ने अपना सर ना हिला दिया। तो

[01:33:31] फिर क्यों अंकित ऐसी बातें करता है। मैंने

[01:33:34] उसे सच में प्यार किया है। उसके लिए तड़प

[01:33:36] रहा हूं मैं। पर अपने भाई की खुशी में कभी

[01:33:38] नहीं छिना सकता हूं। उनसे मैं साक्षी से

[01:33:39] कहीं ज्यादा प्यार करता हूं। अपने भाई के

[01:33:42] लिए ऐसी हजारों खुशियां कुर्बान है। क्या

[01:33:43] चाहता है तू? मैं तेरे साथ वापस चलूं। ठीक

[01:33:45] है मैं वापस चलूंगा पर अभी नहीं। अपनी बात

[01:33:48] कह रवि धम्म से बेड पर बैठ गया। अभी नहीं

[01:33:51] तो कब चलेगा? यहां जितना उसे अपने भाई के

[01:33:53] साथ देखेंगे सिर्फ तकलीफ होगी तुझे। अंकित

[01:33:55] उसके पास बैठते हुए बोला। एक गहरी लंबी

[01:33:58] सांस लेने के बाद वह बोला, दो दिन बाद भाई

[01:34:00] की फर्स्ट वेडिंग एनिवर्सरी उसके बाद ही

[01:34:02] जाऊंगा। अपने चेहरे पर दोनों हाथों से धक

[01:34:04] रखा था रवि ने। देख पाएगा दोनों को साथ

[01:34:07] में। अंकित ने पूछा पता नहीं पर दोनों को

[01:34:09] खुश देख दिल में तसल्ली हमेशा रहेगी कि

[01:34:11] दोनों साथ में खुश है और कहते कहते उसका

[01:34:14] गला भरा आया था और शब्द मुंह में ही फंसे

[01:34:16] ही रह गए थे। अंकित ने आगे बढ़कर रवि को

[01:34:19] अपने गले से लगा लिया। रवि छोटे बच्चों की

[01:34:21] तरह अंकित के गले लग फूट-फूट कर रो दिया।

[01:34:23] पहले प्यार का होना जितना आसान नहीं होता

[01:34:25] ठीक उसी तरह उसे भूलना भी आसान नहीं होता

[01:34:27] है। वैसे तो प्यार हमेशा खास होता है

[01:34:30] लेकिन पहले प्यार के दौरान हुई छोटी से

[01:34:32] छोटी घटना भी आपको याद रह जाती है और उसे

[01:34:34] आप भूल नहीं पाते हैं। आखिर पहला प्यार

[01:34:36] पहला ही होता है। जरूरी नहीं हर किसी को

[01:34:38] अपना पहला प्यार मिले पर पहले प्यार की

[01:34:40] एहसास हमेशा दिल में रहते हैं। कुछ खास

[01:34:42] होता है। पहला प्यार हमेशा हमारे जेहन में

[01:34:44] एक मीठी याद बन रही जाती है। उसकी यादें

[01:34:46] या फिर कुछ दर्द भरे लम्हे रह जाते हैं

[01:34:48] यादों में। पहली नजर में दिल जिसे मोहब्बत

[01:34:51] के लिए चुनता है वह अपना बने या ना बने

[01:34:53] मगर दिल पर। जरूर राज करता है। साक्षी को

[01:34:56] जब एहसास हुआ कि अक्षत गहरी नींद में सो

[01:34:58] रहा है तो उसने हल्के से उसका सर अपनी गोद

[01:35:00] से हटाकर उसके सर के नीचे तकिया रख उसके

[01:35:02] बालों को प्यार से सहलाकर कमरे से बाहर

[01:35:04] निकाल गई। साक्षी के कमरे से बाहर जाने के

[01:35:07] बाद अक्षत ने अपनी आंखें खोल दी। उसका मन

[01:35:09] अभी भी शांत नहीं था। वह उठाकर बाथरूम में

[01:35:11] शव लेने चला गया। शावर के नीचे खड़े होकर

[01:35:14] उसने शावर चालू कर दिया। पानी उसके सर से

[01:35:16] होते हुए उसके पूरे शरीर को भीगा रहा था।

[01:35:19] उसने कसकर अपनी आंखें बंद कर ली। उसके जहन

[01:35:21] में कुछ देर पहले हुई घटना घुमा गई। अक्षत

[01:35:24] सर मुझे आपसे बात करनी है। राशि अक्षत के

[01:35:27] केबिन में घुसते हुए बोली जब राघव और

[01:35:29] साक्षी उसके केबिन से बाहर निकल गए थे तब।

[01:35:32] जो भी बात करनी थी मैं कर चुका हूं। वो एक

[01:35:34] नजर उसे देख बोला। सर प्लीज एक बार मेरी

[01:35:37] बात सुन लीजिए। कहते हुए वह अक्षत के करीब

[01:35:40] आ खड़ी हुई। यह क्या तरीक है राशि? पहले

[01:35:42] तो दूर खड़े रहकर बात करो। अक्षत को उसका

[01:35:45] इस तरह से अपने नजदीक आना बिल्कुल पसंद

[01:35:47] नहीं आया। राशि उसकी बातों को अनसुना कर

[01:35:50] उसके बिल्कुल नजदीक आ खड़ी हुई। वह अक्षत

[01:35:53] का हाथ पकड़ प्यार से बोली, अक्षत मैं

[01:35:54] तुमसे बहुत प्यार करती हूं। प्लीज मुझे

[01:35:56] खुद से दूर मत करो। मुस्कुरा कर उसके

[01:35:58] गालों पर हाथ फेरते हुए कहा, तो तुमने

[01:36:00] थोड़ी देर पहले जो कहा कि साक्षी तुम्हारी

[01:36:02] पत्नी है। वह झूठ है। कहते हुए उसने अक्षत

[01:36:04] के होठों पर अपने होठों रखने चाहे कि

[01:36:06] अक्षत ने उसे खुद झटका दिया। जिससे वह

[01:36:07] पीछे की तरफ लड़खड़ा गई। अपनी सीट से ओठ

[01:36:10] उसे उंगली दिखाते हुए गुस्से से दांत

[01:36:12] पीसते हुए वह बोला यह क्या हरकतें कर रही

[01:36:14] हो? दिमाग खराब हो गया है क्या तुम्हारा?

[01:36:16] अक्षत के अचानक धक्का देने से वह गुस्से

[01:36:18] से भरा उसका कॉलर पकड़ते हुए बोली क्या है

[01:36:20] साक्षी में ऐसे जो मुझ में नहीं है? क्या

[01:36:23] कमी है मुझ में अक्षत? क्या मैं उस साक्षी

[01:36:25] से कम सुंदर हूं। ज्यादा बिस्तर गर्म करती

[01:36:27] है। वह तुम्हारे एक बार मुझे मौका दो।

[01:36:29] उससे कही ज्यादा मैं तुम। वह अपनी बात

[01:36:31] पूरी कह पाती कि अक्षत ने उसके गालों पर

[01:36:33] एक चांटा जड़ दिया। वह घृणा से उसकी तरफ

[01:36:35] देखते हुए बोला, तुम बेक लो। उतना तो मुझे

[01:36:38] पता था पर तुम बेशम हो। यह आज भी पता चला

[01:36:40] गया। निकलो यह से वरना मैं क्या कर दूंगा

[01:36:42] मैं खुद भी नहीं जानता हूं। मैंने कहा

[01:36:44] निकालो यहां से। वह गुस्से में चीखा। अपने

[01:36:47] गाल पर हाथ रखे गुस्से लाल आंखों लिए। वह

[01:36:49] अक्षत को देख बोली इस थप्पड़ की बहुत भारी

[01:36:51] कीमत चुकनी होगी तुम्हें और तुम्हारी

[01:36:53] पत्नी को याद रखना मेरी बातों को। मिस्टर

[01:36:55] ठाकुर वो गुस्से फुफकारी। जो करना हो करो

[01:36:58] पर अभी निकालो यहां उसे पहले कि मैं यह

[01:37:00] भूल जाऊं कि तुम एक लड़की हो। वह बाहर का

[01:37:01] रास्ता दिखाते हुए बोला। आज तो मैं जा रही

[01:37:04] हूं पर याद रखना मैं लौट कर जरूर आऊंगी।

[01:37:06] तुम्हारी बर्बादी लेके कह गुस्से से पांव

[01:37:08] पटक केबिन से निकाल गई। अक्षत जी आप

[01:37:11] बाथरूम में है? साक्षी ने बाथरूम का

[01:37:13] दरवाजा खटखटाते हुए पूछा। हां कह अक्षत ने

[01:37:16] शावर बंद कर दिया। आप इतनी जल्दी उठा गए।

[01:37:18] उसने बाहर से ही पूछा। हां कह वो दरवाजा

[01:37:21] खोला। बाहर आया। चलिए अच्छा ही मैं आपके

[01:37:23] लिए खाना लाई हूं। आपने सुबह से कुछ नहीं

[01:37:25] खाया है। साक्षी ने टेबल पर रखी खाने की

[01:37:27] प्लेट की तरफ इशारा करते हुए बोली। वह

[01:37:29] अपना सर पोछते हुए बेड पर बैठा बोला अभी

[01:37:32] मन नहीं है खाना मन के लिए नहीं शरीर के

[01:37:35] लिए खाना जरूरी है समझे इसलिए बिना नखरे

[01:37:37] किए चुपचाप खाना खाए वो आर्डर देते हुए

[01:37:39] बोली आप मुझसे रिक्वेस्ट कर रही है या

[01:37:42] आर्डर दे रही है साक्षी को अपने पास देख

[01:37:44] वो मुस्क दिया आप कुछ भी समझा लो और अब

[01:37:47] जल्दी से खाना करो कहते हुए उसने बड़े हक

[01:37:49] के साथ उसके हाथों से टॉवल छीन उसके बाल

[01:37:52] पोछने लगी यह क्या कर रही है आप वो उसके

[01:37:54] द्वारा की गई इस अप्रत्याशित घटना पर बोला

[01:37:57] आपके बालों का पानी साफ कर रही हूं। वह

[01:37:59] अपने काम में मग्न होकर बोली, वो तो मैं

[01:38:02] भी कर रहा था। वो उसके चेहरे पर झुलती

[01:38:04] उसके गालों को चूमती लाटों को देख बोला,

[01:38:06] "अच्छा जी, जिस तरफ से आप अपने बालों पर

[01:38:09] अत्याचार कर रहे थे, जल्दी ही आपका मैदान

[01:38:11] साफ हो जाए। वो अक्षत के बालों को छूते

[01:38:13] हुए बोली, अत्याचार। उसकी उलझी सी बातें

[01:38:16] अक्षत के सर के ऊपर से निकाला गई। हां,

[01:38:19] अत्याचार। इतने अच्छे बालों को भाला, कोई

[01:38:21] इतना रंगड़ रगड़ कर साफ करता है खासकर जब वो

[01:38:23] गीले हो।" वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उसे

[01:38:26] देखते हुए बोली, "क्या कब से कुछ भी बोले

[01:38:28] जा रही हो, जो भी कहना साफ-साफ और सरल

[01:38:30] शब्दों में बोलो। अक्षत। उसके हाथ से टॉवल

[01:38:32] छीन बेड पर फेंकते हुए बोला, "मेरा मतलब

[01:38:35] है कि कभी भी गीले बालों रगड़ कर नहीं

[01:38:37] पोछना चाहिए। इसे बाल कमजोर होकर टूटने लग

[01:38:40] जाते हैं। और मैं नहीं चाहती कि आपके इतने

[01:38:42] सुंदर बाल खराब हो। वो बेहद मासूमियता से

[01:38:44] बोली। आपकी बात मानूंगा पर मेरी एक शर्त

[01:38:47] है। वह उसकी मासूमियता पर अपना दिल हार

[01:38:49] रहा था। मुझे सारी शर्तें मंजूर है। वह

[01:38:51] जल्दी से बोली। साक्षी की हरकत देख। अक्षत

[01:38:53] हंसकर बोला पहले शर्त तो सुन लीजिए उसके

[01:38:55] बाद हां या ना बोलना ठीक है फिर बताइए

[01:38:59] आपकी शर्त वो अभी भी उसके बालों की तरफ

[01:39:00] देखते हुए बोली जब अक्षत के गीले बाल उसके

[01:39:03] माथे पर बेतरतीब तरीके से बिखर जाते हैं

[01:39:05] तब वह साक्षी को बड़ा प्यारा लगता है आज

[01:39:08] से रोज आप ही मेरे बालों का पानी साफ

[01:39:09] करेगी अक्षत ने मुस्कुराते हुए पूछा वो

[01:39:12] बेख्याली में बोली हां जरूर ठीक फिर खाना

[01:39:14] खाएं उसके गालों को चूमती लाटों को कान के

[01:39:17] पीछे करते हुए बोला हां चलिए वह होश में

[01:39:20] आते हुए बोली तुमने खाया उसने अपनी प्लेट

[01:39:22] पेट पकड़ते हुए पूछा। साक्षी ने नमे गर्दन

[01:39:25] हिला दी। अक्षत ने पहला निवाला उसकी तरफ

[01:39:28] बढ़ दिया। जिसे देख साक्षी ने कहा नहीं

[01:39:29] मैं खुद खा लूंगी। साक्षी के कहने पर

[01:39:32] अक्षत अपना निवाला रख अपना हाथ उल्टा पलटा

[01:39:34] कर देखने लगा। साक्षी उसकी अजीब हरकत पर

[01:39:37] बोली क्या कर रहे हैं आप? देख रहा हूं

[01:39:39] कांटे कहां लगे हैं? वह अपने हाथों को

[01:39:41] ध्यान से देखते हुए बोला। कांटे साक्षी

[01:39:44] सावलिया दृष्टि से उसकी तरफ देखने लगी।

[01:39:46] हां कांटे तभी तो मेरे हाथों से नहीं खा

[01:39:49] रही हो। ही ही ही अक्षत की बात पर वह

[01:39:51] खुलकर हंस दी क्या आप भी कैसी बातें करते

[01:39:54] हैं? मैं तो इसलिए मना कर रही थी कि पति

[01:39:56] को पत्नी का झूठ नहीं खाना चाहिए। अक्षत

[01:39:58] ने अजीब सा मुंह बनाते हुए बोला आप भी

[01:40:00] कैसी बातें करती है? कौन मानता है ऐसे

[01:40:02] पुराने नियम? चलिए पहला निवला मेरे हाथ से

[01:40:04] खाएं नहीं तो मैं भी नहीं खाऊंगा निवाला

[01:40:06] उसकी तरफ बढ़ते हुए। नहीं मानेंगे आप।

[01:40:09] साक्षी ने पूछा। अक्षत ने नमे गर्दन हिला

[01:40:12] दी। उसने हार मानते हुए अपना मुंह खोला

[01:40:13] निवाला खा लिया। अब खुश उसने आंखों ही

[01:40:16] आंखों में पूछा। बहुत कहते हुए अक्षत ने

[01:40:18] खाना शुरू कर दिया। साक्षी ने भी अपनी

[01:40:20] प्लेट लगा खाना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ

[01:40:23] अक्षत के ऑफिस में राशि अपने डेक से अपना

[01:40:25] सामान समेट रही थी। पूरा स्टाफ उसे अजीब

[01:40:28] तरीके से घूर रहे थे। सामान पैक कर राशि

[01:40:30] ऑफिस से बाहर निकाल। ऑफिस के बोर्ड को देख

[01:40:32] बोली इस थप्पड़ की बहुत भारी कीमत चुकनी

[01:40:34] होगी तुम्हें। आज जा रही हूं पर वादा है

[01:40:36] जल्दी ही लौटोगी। अक्षत नहाने के बाद

[01:40:39] बाथरूम से बाहर निकला। कमर पर टॉवल बांधी

[01:40:41] थी। दूसरी टॉवल गले में लटका रही थी।

[01:40:43] साक्षी जो ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर

[01:40:45] अपने बालों को सुलझा रही थी। अक्षत को ऐसे

[01:40:47] देख उसकी आंखें हैरानी से फैला गई। पूरे

[01:40:49] शरीर में सेहरन सी दौड़ गई। दिल अपनी

[01:40:51] सामान्य गति से अधिक धड़कने लगा। वह अपनी

[01:40:53] निगाहें हटाकर वापस अपने बालों को सुलझाने

[01:40:56] लग गई। साक्षी के चेहरे पर आए हया के भाव

[01:40:58] को देखकर वह मुस्कुराते हुए बेड पर जाकर

[01:41:00] बैठा गया। साक्षी कुछ देर बाद उसने

[01:41:03] पुकारा। हम वो अपनी सांसों को संयमित करके

[01:41:05] बस इतना ही कह पाए। आप कुछ भूल नहीं रही

[01:41:08] है। वो मन मन मुस्कुरा कर बोला। क्या भूल

[01:41:11] रही हूं मैं? शीशे पर उभरे अक्षत के

[01:41:13] ऑक्सक्स को देखकर उसने पूछा, यहां आइए

[01:41:15] बताता हूं। साक्षी को अपने पास बुलाते हुए

[01:41:17] वह बोला, धड़कते दिल के साथ साक्षी अपनी

[01:41:20] जगह उठाकर अक्षत को तरफ बढ़ने लगी। एक-एक

[01:41:23] कदम के साथ उसकी धड़कनों की रफ्तार बढ़ती

[01:41:25] जा रही थी। वह हिम्मत करके उसके सामने आकर

[01:41:27] खड़ी हो गई। अक्षत ने मुस्कुराते हुए अपना

[01:41:29] सर झुका लिया। अरे यह क्या कर रहे हैं आप?

[01:41:32] वह अक्षत को सर झुकाता देख दो कदम पीछे

[01:41:34] हटते हुए बाली। अक्षत ने अपनी लंबी मजूबत

[01:41:37] बाहों से साक्षी की कमर को कैद कर अपने

[01:41:39] बिल्कुल नजदीक ला खड़ा किया। अक्षत के

[01:41:41] बालों से टपकाता पानी साक्षी की खुली कमर

[01:41:44] पर पड़ा रहा था। वह अटकते हुए बोली, यह कह

[01:41:47] कर कर रहे हैं आप। अक्षत की नजदीकी से

[01:41:50] उसके हाथ पैर ठंडे पड़ा गए थे। मैं तो

[01:41:52] आपकी मदद कर रहा हूं। वह अपनी उंगलियों से

[01:41:54] साक्षी की कमर पर शरारत करते हुए बोला।

[01:41:57] अक्षत की ठंडी उंगलियों के स्पर्श से उसकी

[01:41:59] आंखें स्वद ही बंद हो गई। होठ बिल्कुल सूख

[01:42:01] गए। क सी मद द बम मुश्किल उसके हल्का से

[01:42:05] मारी हुई आवाज निकाली। अक्षत ने निगाहें

[01:42:07] उठाकर उसके मासूम चेहरे की तरफ देख जो

[01:42:09] आंखें बंद किए खड़ी चेहरा पसीने से पूरा

[01:42:11] भी हुआ था। बड़ी भूलकड़ है आप कल ही। आपने

[01:42:14] कहा था कि अब से रोज आप ही मेरे बालों का

[01:42:16] पानी साफ करेगी। अब जल्दी कीजिए। लेट हो

[01:42:18] रहा है। वह साक्षी की हालत पर मन ही मन

[01:42:20] हंस रहा था। उसने धीरे से उसकी कमर को

[01:42:22] अपनी कैद से आजाद कर दिया। साक्षी उसके

[01:42:24] गले से टॉवल निकाल हल्के हाथों से उसके

[01:42:26] बाल पोछने लगी। साक्षी मन ही मन खुद को

[01:42:29] कोसने लगी। यह क्या किया तूने? क्या जरूरत

[01:42:31] थी कल बिना मतलब का भाषण देने की? अब देख

[01:42:34] यह तुझे कितना परेशान करेंगे। वैसे ही

[01:42:36] आजकल एक मौका नहीं छोड़ते हैं तुझे परेशान

[01:42:38] करने का। अगर रोज यह इसी तरफ अपने शरीर का

[01:42:40] प्रदर्शन करते रहे तो मेरा दिल तो पक्का

[01:42:42] उछल कर बाहर ही निकाल आएगा हो गया। कुछ

[01:42:45] देर बाद अक्षत ने पूछा हां कहते हुए वह

[01:42:48] अक्षत से दूर जा खड़ी हुई अक्षय कपड़े

[01:42:50] लेकर चेंज करने चला गया। उसके जाते ही

[01:42:52] साक्षी धम्म से बेड पर बैठा। अपनी असयमित

[01:42:54] सांसों को संतुलित करने लगी। कुछ देर बाद

[01:42:56] दोनों तैयार होकर कमरे से बाहर निकाल गए।

[01:42:59] मुझे आप सभी लोगों से कुछ जरूरी बात करनी

[01:43:01] है। डाइनिंग टेबल पर बैठते हुए वह बोला

[01:43:03] जहां पूरा परिवार पहले से मौजूद था। बोलो

[01:43:06] बेटा ताऊजी झूठी हंसी होठों पर लिए बोले

[01:43:08] पारसो हमारी वेडिंग एनिवर्सरी और मैं एक

[01:43:11] पार्टी रखा सभी रिश्तेदारों और बिजनेस

[01:43:13] पार्टनर को अपनी वेडिंग के बारे में

[01:43:14] इनफॉर्म करना चाहता हूं। आपकी क्या राय है

[01:43:17] इस बारे में? ताऊजी और चाचा जी की तरफ

[01:43:19] मुखाफित होते हुए उसने पूछा ताऊजी ने कुछ

[01:43:22] कहने के लिए अपना मुंह खोला ही था कि रवि

[01:43:23] बोल पड़ा जैसा आप करना चाहते कर सकते हैं।

[01:43:26] भाई यह आपकी पहली एनिवर्सरी है। हमें कोई

[01:43:28] प्रॉब्लम नहीं है। क्यों पापा? वह ताऊजी

[01:43:30] की तरफ देखता हुआ बोला। ताऊ जी ने गुस्से

[01:43:33] से भरी नजरों से ताई जी की तरफ देखा। वह

[01:43:35] आंखों ही आंखों में उन्हें शांत रहने का

[01:43:36] इशारा करने लगी। ताऊजी बेचारे खियाए

[01:43:38] हंसी-हंस कर रह गए। ठीक फिर अगर आप लोगों

[01:43:41] को कोई परेशानी नहीं है तो फिर मैं सभी को

[01:43:43] इनविटेशन सेंड करता हूं। वह हल्का सा

[01:43:45] मुस्कुरा कर बोला हमें भला क्या परेशानी

[01:43:48] होगी बच्चों की खुशी में? ताई जी अपना मन

[01:43:50] मारकर बोली उनकी तो छाती पर सांप लोट रहा

[01:43:52] था। अभी कल ही तो उनका बेटा हॉस्पिटल से

[01:43:54] लौट कर आया है और आज अक्षत अपनी शादी की

[01:43:56] सालगिरह मनाने की बात कर रहा था। इन सब

[01:43:59] बातों से बेखबर अक्षत मुस्कुराते हुए

[01:44:01] बोला, "अच्छा अब हम दोनों निकालते हैं।

[01:44:03] काफी लेट हो रहा है।" दोनों साथ में ऑफिस

[01:44:06] के लिए निकल गए। अक्षत ने रवि से उसके

[01:44:08] ऑफिस ना आने की वजह पूछी तो उसने कहा कि

[01:44:10] उसका दोस्त जब तक यहां है तब तक उसके साथ

[01:44:12] उसे शहर घुमा रहा है। तो ऑफिस नहीं आ

[01:44:14] पाएगा। अक्षत ने भी उसकी बात मानते हुए

[01:44:15] उसे ऑफिस जाने के लिए फोर्स नहीं किया।

[01:44:18] दोनों ऑफिस पहुंचे तो आज सब अक्षत के साथ

[01:44:20] साक्षी को ग्रिड कर रहे थे। साक्षी को

[01:44:22] उनका यह व्यवहार बड़ा अजीब लग रहा था। उसे

[01:44:24] असहज होता देख अक्षत उसके कान के पास

[01:44:26] फुसफुसाते हुए कहा अब आदत डाल लीजिए मिसेज

[01:44:28] साक्षी अक्षत ठाकुर कह कर मुस्कुराते हुए

[01:44:30] अपने केबिन में चला गया आज तो जनाब का

[01:44:33] चेहरा कुछ ज्यादा ही खिला हुआ लग रहा है

[01:44:35] अक्षत अपने कैमरे में घुसा ही था कि वहां

[01:44:37] पर पहले से बैठे हुए राघव ने उसे

[01:44:39] मुस्कुराते देख टोका तू यहां भूत की तरह

[01:44:42] क्यों बैठा हुआ है वो अचानक से राघव की

[01:44:44] आवाज सुनकर बोला हूं मुझे भी कोई शौक नहीं

[01:44:47] है भूतों की तरह बैठने का कब से भाई साहब

[01:44:49] का वेट कर रहा हूं पर जनाब तो रोज ही लेट

[01:44:51] आते हैं अगर तेरे जैसे बॉस होंगे ना अक्षत

[01:44:53] अक्षत तो उस कंपनी का तो राम ही मालिक है।

[01:44:55] वह पिछले आधे घंटे से बैठा अक्षत का

[01:44:57] इंतजार कर रहा था। भाई जिसका राघव जैसे

[01:45:00] दोस्त है उस इंसान को किस बात की चिंता

[01:45:02] सुबह मुस्कुराते हुए अपनी सीट पर बैठकर

[01:45:04] बोला चल साले ज्यादा मस्का मत लगा। अगर कल

[01:45:07] से तू लेट आया तो मैं नहीं आने वाला।

[01:45:09] जल्दी वो मुंह बनाते हुए बोला अच्छा मुंह

[01:45:11] बनाना छोड़ बता। किस लिए वेट कर रहा था?

[01:45:13] वो मुद्दे पर आते हुए बोला यार कुछ चेक पर

[01:45:16] तेरे साइन चाहिए थे। कुछ लोगों की पेमेंट

[01:45:18] पेंडिंग वो चेक बुक को अक्षत की तरह

[01:45:20] बढ़ाते हुए बोला ला दे कहकर वो चेक बुक पर

[01:45:23] साइन करने लगा। अच्छा अब बता हंस क्यों

[01:45:25] रहा था राघव कहां था बातों को इतनी आसानी

[01:45:27] से छोड़ने वाला निकाला तेरा काम हो गया ना

[01:45:30] वो राघव को झिड़कते हुए बोला अरे बताना

[01:45:33] इतना भाव क्या खा रहा है वो मुंह सिकोड़ते

[01:45:35] हुए बोला जाता है कि धक्के मारकर निकाल

[01:45:38] लूं वो राघव को डांटते हुए बोला हां हां

[01:45:41] जा रहा हूं कहते हुए वह केबिन से निकाल

[01:45:43] गया हंसते मुस्कुराते कब वो दिन नजदीक आ

[01:45:45] गया जिसका सबको इंतजार था किसी को पता ही

[01:45:47] नहीं चला ठाकुर हवेली आज नई नवेली दुल्हन

[01:45:49] की तरह सजी हुई थी पूरी हवेली आज फूलों से

[01:45:52] महक रही थी झिलमिलाती लाइटिंग से हवेली की

[01:45:54] रौनक में चार चांद लगा रहे थे। मेहमानों

[01:45:56] का आना शुरू हो चुका था। आज हवेली की रौनक

[01:45:58] दूर से देखी जा सकती थी। ऐसा होता भी

[01:46:00] क्यों ना भला आज शहर के मशहूर ठाकुर

[01:46:02] खानदान में किसी खास अवसर पर दावत जो रखी

[01:46:04] गई थी। अक्षत ने आज अपने खास दिन के लिए

[01:46:07] अपने सभी जाने वालों को बुलाया था। चाहे

[01:46:09] वह देश या विदेश से ही क्यों ना हो। उसने

[01:46:11] अपने विदेशों से कुछ दोस्तों को भी बुलाया

[01:46:13] था। वह इतने शार्प नोटिस पर आ नहीं पाए

[01:46:15] थे। अक्षत ने अंकित से खासतौर पर कहा था

[01:46:18] अपनी फैमिली दोस्तों को जरूर बुलाएं। उसे

[01:46:20] बहुत अच्छा लगेगा अगर वह लोग उसकी खुशी का

[01:46:22] हिस्सा बनेंगे। अक्षत की बातें सुनकर

[01:46:24] अंकित ने मुस्कुराते हुए कहा था, मैं बात

[01:46:26] करता हूं। अगर पॉसिबल हुआ तो वह जरूर

[01:46:28] आएंगे। अंकित की फैमिली से तो कोई नहीं आ

[01:46:30] पाया पर उसने श्रुति के साथ मधु को जरूर

[01:46:32] बुला लिया। अंकित श्रुति से कोई भी बात

[01:46:34] नहीं छिपता था। रवि के साथ जो कुछ भी हुआ

[01:46:36] उसे पूरी बात श्रुति को बता दी जिसे सुनकर

[01:46:38] उसने कहा अभी उसे एक ऐसे इंसान की जरूरत

[01:46:41] है जो उसके दर्द को समझे। उसकी भावनाओं को

[01:46:43] समझ पाए। ऐसे में सिर्फ मधु ही है जो उसे

[01:46:45] समझा सकती है क्योंकि इस भावनाओं से वह भी

[01:46:47] गुजर चुकी है। शायद इसी बहाने दोनों एक

[01:46:50] दूसरे के साथ ज्यादा वक्त बिता एक दूसरे

[01:46:52] को समझे थे। शायद तब रवि को एहसास हो कि

[01:46:54] मधु ही उसके लिए सही लड़की है। श्रुति की

[01:46:56] बातें अंकित को भी सही लगी। इसलिए उसने

[01:46:58] श्रुति को मधु को अपने साथ लेने के लिए

[01:47:00] बुला दिया। जब श्रुति ने मधु को अपने साथ

[01:47:03] लखनऊ चलने के लिए बोला तो पहले तो साफ मना

[01:47:05] कर दिया कि वह कहीं नहीं जा सकती है। पर

[01:47:07] जब श्रुति ने यह कहा कि रवि के भाई ने

[01:47:09] बुलाया है तो वह झट से मान गई। दोनों आज

[01:47:12] सुबह की पहली फ्लाइट से लखनऊ आ चुके थी।

[01:47:14] जैसे ही दोनों ने रवि को देख दोनों आवाक

[01:47:16] रह गई। यह वह रवि नहीं था जिसे वह कुछ

[01:47:18] महीनों पहले तक जानती थी। उसके चेहरे पर

[01:47:20] हमेशा शरारत भरी मुस्कान रहती थी। एक अलग

[01:47:22] ही एक्शन था उसके चेहरे पर। आज जो रवि

[01:47:24] उनके सामने खड़ा था, वह बिल्कुल विपरीत

[01:47:26] था, ना चेहरे पर मुस्कान ना ही शरारतें

[01:47:28] थी। उसकी आंखों में एक अजीब सी उदासी थी,

[01:47:30] जिसका कारण श्रुति तो जानती थी, पर मधु

[01:47:32] अभी इस सच से अनजान थी। खैर आज शहर के सभी

[01:47:35] जानेमाने लोग इस हवेली में एकत्रित हैं।

[01:47:37] सभी इस खास दावत किस लिए रखी गई है कि वजह

[01:47:40] जानना चाह चाहते थे। पर उन्हें अभी तक

[01:47:41] जिसका इंतजार है, वह दोनों अपने कमरे में

[01:47:43] आज की खास शाम के लिए तैयार हो रहे थे।

[01:47:46] अक्षत आज ब्लैक कलर के थरी पीस सूट में

[01:47:48] कहर धाने को तैयार खड़ा था। वहीं आज

[01:47:50] साक्षी बनारसी लाल रंग की साड़ी में लिपटी

[01:47:52] बेहद खूबसूरत लग रही थी। बालों को बीच की

[01:47:55] मांग खोलकर जोड़ा बना रखा था। गले में एक

[01:47:57] चौका और कानों के झुमके उसकी खूबसूरती को

[01:47:59] बढ़ा रहे थे। जैसे ही साक्षी ने मांग में

[01:48:01] सिंदूर भरने के लिए अपने हाथ बढ़ाए, अक्षत

[01:48:03] ने उसका हाथ पकड़ लिया। क्या हुआ? वह

[01:48:05] आहिस्ते से बोली, "यह हक तो मेरा है। वह

[01:48:08] मुस्कुराते हुए बोला। साक्षी ने अचरत से

[01:48:10] उसकी तरफ देखा। वह प्रत्यक्ष रूप से उससे

[01:48:12] पूछ पाती कि उससे पहले अक्षत ने अपनी जेब

[01:48:14] से एक सिंदूर की डिबिया निकाल। उसकी मांग

[01:48:16] में सिंदूर सजा दिया। इस पल में साक्षी की

[01:48:18] आंखें बंद हो गई थी। शादी की पहली सालगिरह

[01:48:21] का तोहफा। वह उसके कान के पास फुसफुसाते

[01:48:23] हुए बोलकर सिंदूर की डिबिया उसके हाथों

[01:48:25] में थाम दी। यह मैं कैसे ले सकती हूं? तो

[01:48:28] बहुत महंगी है। साक्षी सिंदूर की डिबिया

[01:48:30] को देख बोली जो सोने की थी जिस पे हीरे की

[01:48:32] बारीक कारीगरी से अक्षत साक्षी का नाम

[01:48:34] पिरोया हुआ था। तोहफा देने वाले की

[01:48:36] भावनाओं को देखा जाता है ना कि तोहफे की

[01:48:38] कीमत को वह अपने बालों को जेल से सेट करते

[01:48:40] हुए बोला पर मैं साक्षी ने कुछ कहना चाहा

[01:48:43] कि अक्षत ने उसके होठों पर अपनी उंगोली रख

[01:48:46] कहा शशिष पतिप में कब से ऐसी बातें होने

[01:48:48] लगी जो है हम दोनों का है और बहुत प्यारा

[01:48:50] से लाया हूं रखो लो मैं चाहता है आज से जब

[01:48:52] जब आप अपनी मांग भरे हमेशा मुझे याद करें

[01:48:55] अक्षत की नजदीकी से साक्षी के सासे

[01:48:58] उथलपुथल होने लगी थी अक्षत ने कर्कश आवाज

[01:49:00] जब साक्षी के कानों के पास गूंजी साक्षी

[01:49:03] के पूरे शरीर में कट सा दौड़ा गया उसके के

[01:49:05] हाथों की मुट्ठियां साड़ी में कस गई। वो

[01:49:06] थकू गटकते हुए बम मुश्किल बोली ठठी क है।

[01:49:10] वो उसके गाल खींचते हुए बोला इट्स लाइक

[01:49:12] गुड गर्ल कहकर वो मुस्कुराने लगा। साक्षी

[01:49:14] बिना एक पल गनवाए जल्दी से ड्रेसिंग टेबल

[01:49:16] के पास आकर अपने हाथों में चिड़िया पहनने

[01:49:18] लगी। साक्षी की मासूम हरकतों को देख वो

[01:49:21] मुस्कुराते हुए अलमारी की तरफ बढ़ गया।

[01:49:23] उसने अलमारी के अंदर से रिंग का बॉक्स

[01:49:25] निकाल लिया जो कुछ दिन पहले ऑफिस में

[01:49:27] पहनना रहा गया था। रेडी? अक्षत ने पूछा

[01:49:30] हूं कि आवाज के साथ उसने हमेशा की तरह

[01:49:32] उसने अपनी गर्दन हिला दी जैसे वह हमेशा

[01:49:34] करती है। वहीं उसकी हरकत पर वह होठ होंठ

[01:49:36] में बुदबुदाया क्यूट। चले इस बार वह बोली

[01:49:39] अक्षत को खोया देखकर चलाते हैं। पहले रिंग

[01:49:41] एक्सच कर ले। वह बॉक्स आगे करते हुए बोला।

[01:49:43] साक्षी ने एक रिंग निकाला। अक्षत को पहना

[01:49:46] दी। अक्षत ने साक्षी को रिंग पहना दी। कुछ

[01:49:48] कमी लग रही। कुछ देर बाद अक्षत उसे देखते

[01:49:51] हुए बोला। कहां कहकर वह आईने की मदद से

[01:49:53] आपने श्रृंगार को एक बार ठीक से देखने

[01:49:55] लगी। मेरी तरफ देखिए बताता हूं। वो उसके

[01:49:58] पीछे जा खड़ा हुआ। साक्षी झट से उसकी तरफ

[01:50:01] घूम गई। अक्षत ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ

[01:50:03] देख। हल्के से उसके होठों को अपने होठों

[01:50:05] से छूकर कहा, अब परफेक्ट है कहकर उसके

[01:50:07] हाथों को अपने हाथों में लेकर कमरे से

[01:50:09] बाहर निकला गया। साक्षी अब भी अक्षत को

[01:50:11] आवाक नजरों से देख रही थी। चलते-चलते

[01:50:13] अक्षत एक नजर उसे देख कहा आदत डाल लीजिए।

[01:50:16] उसकी बातों का असर से साक्षी के गाल पर

[01:50:18] सिंदूरी रंग छा गया। एक शर्मीली मुस्कान

[01:50:20] उसके होठों पर थिरक उठी। दोनों जैसे ही

[01:50:23] सीढ़ियों पर पहुंचे पूरे हॉल में अंधेर छा

[01:50:25] गया। एक स्पॉट लाइट उन दोनों के ऊपर पड़ी।

[01:50:27] साथ ही माहौल में मधुर संगीत बाज उठा।

[01:50:30] कहने को जश्न बहारा है दिल यह देख के हैरा

[01:50:32] है फूल से खुशबू खफाखफा है गुलशन में।

[01:50:34] छुपा है कोई रंज फिजा की चिलमन में सारे

[01:50:37] सहमे नजारे हैं। सोएस सोए वक्त के धारे

[01:50:40] हैं और दिल में खोई-खोई सी बातें हैं।

[01:50:42] कैसे कहें क्या है सितम सोचते हैं अब यह

[01:50:44] हम कोई कैसे कहे वो है या नहीं हमारे।

[01:50:47] करते तो हैं सात सफर। फासले हैं फिर भी

[01:50:49] मगर जैसे मिलते नहीं किसी दरिया के दो

[01:50:52] किनारे।

[01:50:52] पास है फिर भी पास नहीं। हमको यह गम रास

[01:50:54] नहीं। शीशे की एक दीवार है जैसे दरमियां

[01:50:57] सारे सहमे नजारे हैं हमने जो था नगमा सुना

[01:50:59] दिल ने था उसको चुना यह दास्तान हमें वक्त

[01:51:02] ने कैसी सुनाई हम जो अगर है गमगी वो भी

[01:51:05] उधर खुश तो नहीं मुलाकातों में है जैसे

[01:51:07] गुल सी गई तनहाए मिलके भी हम मिलते नहीं

[01:51:10] खिलके भी गुल खिलते नहीं आंखों में है

[01:51:12] बहारें दिल में खिजा सारे सहमे नजारे हैं

[01:51:15] सीढ़ियों से नीचे उतरा अक्षत ने सभी का

[01:51:17] ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा मेरे

[01:51:19] खास दिन को आप सब लोग और खास बनाने के लिए

[01:51:21] यहां पर आए मुझे इस बात की बहुत खुशी है

[01:51:23] जानता हूं आप सबके आपके मन में बहुत से

[01:51:25] सवाल होंगे कि आज की खास पार्टी किसका वजह

[01:51:27] से रखी गई है। वह मुस्कुराकर आगे बोला

[01:51:29] चलिए ज्यादा सस्पेंस ना बनाते हुए मैं

[01:51:31] आपको बता ही देता हूं कि यहां आज आपको किस

[01:51:33] लिए बुलाया गया है। लेडीज एंड जेंटलमैन

[01:51:35] मीट माय वॉइस मिसेज साक्षी अक्षत ठाकुर।

[01:51:38] शादी का एक साल इनके साथ हंसते मुस्कुराते

[01:51:40] कैसे निकला गया। पता ही नहीं चला। साक्षी

[01:51:42] उंगलियों को अपनी उंगलियों में उलझकर आज

[01:51:44] तक मैं सोचता था शादी करना एक फॉर्मेलिटी

[01:51:46] है जो सभी को करनी पड़ती है। खासकर हमारी

[01:51:48] कंट्री में तो बट मेरी यह थिंकिंग तब चेंज

[01:51:51] हुई जब मैं इनसे मिला। बचपन में मम्मी

[01:51:53] पापा हमेशा कहा करते थे शादी एक ऐसा

[01:51:55] रिश्ता है जो अपने आप में संपूर्ण होता

[01:51:57] है। कभी पत्नी आपको मां की तरह डांटती है

[01:51:59] तो कभी दोस्त की तरह समझाती है तो कभी

[01:52:01] अपने प्यार से आपकी तकलीफों को बांटने की

[01:52:03] कोशिश करती है। पति पत्नी का रिश्ता होता

[01:52:05] कि कुछ खास कुछ अलग से आज मां पापा की बता

[01:52:07] समझ आया है। आज इसी खास रिश्ते को एक साल

[01:52:10] पूरा हो गया। इसी खुशी में आज हमने यह

[01:52:12] पार्टी रखी है। काम की व्यस्तता की वजह से

[01:52:15] पहले आप सभी को इस खुशी में शामिल नहीं कर

[01:52:17] पाए। पर आज हम चाहते हैं कि आप सभी हमारी

[01:52:19] खुशियों में शामिल हो कहकर वह मुस्कुरा

[01:52:21] दिया। हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज

[01:52:23] उठी। एक-एक कर सभी लोग अक्षत साक्षी से

[01:52:26] मिलकर कांग्रेचुलेशन कहने लगे हैं। दोनों

[01:52:28] ही मुस्क कर सभी का अभिवादन कर रहे थे।

[01:52:30] थोड़ी देर तक यह सिलासिला चलता रहा। मिलने

[01:52:33] मिलने बाद अक्षत साक्षी को राघव के पापा

[01:52:35] के पास ले चला गया। तो यह है वह जिनकी

[01:52:38] इतनी तारीफ करते हैं आप और राघव राघव के

[01:52:40] पिता ने मुस्कुराकर कहा दोनों ने झुकाकर

[01:52:42] उनके पांव छुए। जी अंकल अक्षत खेपते हुए

[01:52:45] बोला बहुत प्यारी बच्ची है। आप हमेशा खुश

[01:52:47] रहिए। साक्षी के सर पर हाथ रखते हुए ईश्वर

[01:52:50] आप दोनों की जोड़ी हमेशा बनाए रखे। वह

[01:52:52] मुस्कुरा कर बोले साक्षी उनकी बातों पर

[01:52:54] मुस्कुरा दी। वह अपनी जारी रखते हुए बोले

[01:52:56] चलिए अब हम चलते हैं घर पर। राघव की मां

[01:52:58] अकेले हैं और उनकी तबीयत भी कुछ खराब है।

[01:53:00] इसलिए अब निकालते हैं। वह सहजता से बोले

[01:53:03] अंकल आप थोड़ी देर रुकते तो अच्छा लगता।

[01:53:05] वो विनम्रता से बोला। रुकना तो हम भी

[01:53:08] चाहते थे पर आज नहीं हो पाएगा बेटा। पर

[01:53:10] हां सुधा जी राघव की मम्मी ने आप दोनों को

[01:53:13] रविवार की शाम खाने पर बुलाया है। तो आप

[01:53:15] दोनों जरूर आइएगा। वह अक्षत को देख बोले।

[01:53:18] ठीक है फिर निकालते हैं। आप लोग एंजॉय

[01:53:20] कीजिए कहकर वह हवेली से निकाल गए। साक्षी

[01:53:23] वहां से हटा किचन में सुजाता काकी से

[01:53:25] मिलने आ गई। साक्षी को देख सुजाता काकी

[01:53:27] बोली आज आप बिल्कुल ममता अक्षत की मम्मी

[01:53:29] मैम साहब की तरह लग रही है। साक्षी

[01:53:31] मुस्कुराकर उनके पांव की तरफ झुकाने लगी।

[01:53:34] यह देख काकी पीछे की तरफ हटाते हुए बोली

[01:53:36] यह क्या रही है आप? हम नौकर हैं इस घर के

[01:53:38] आप। का इस तरह से हमारे पांव छूना अच्छा

[01:53:41] नहीं लगाता है। आप बड़ी है हमारी। मैंने

[01:53:43] सिर्फ मुंह से काकी कहा नहीं बल्कि दिल से

[01:53:45] मान है और इस नाते हमारा पूर्ण हक है आपसे

[01:53:48] आशीर्वाद लेने का। चलिए अब कंजूसी बिल्कुल

[01:53:50] मत दिखाइए और हमें ढेर सारे आशीर्वाद

[01:53:52] दीजिए कहकर उसने काकी पांव छू लिए काकी की

[01:53:54] आंखों में नमी उतरा आए। आज पहली बार

[01:53:56] उन्हें इस हवेली में किसी सम्मान मिला था।

[01:53:58] उन्होंने नम आंखों से साक्षी को कई सारे

[01:54:00] आशीर्वाद दिए। कुछ देर तक साक्षी काकी से

[01:54:03] बातचीत करती रही। फिर वहां से निकाल राघव

[01:54:05] अक्षत के पास आ गई। दोनों उसे देख

[01:54:07] मुस्कुरा दिए। क्या यार राघव आज भी अकेले

[01:54:10] आया है? अक्षत मुस्कुराते हुए बोला, नहीं

[01:54:13] भाई आज थोड़ा वक्त निकाल कर आए हैं। मैडम

[01:54:15] राघव नाक सिकोड़ते हुए बोला, "कं?" उसने

[01:54:18] पूछा, वो खड़ी। उधर राघव ने एक तरफ खड़ी

[01:54:20] लड़की की तरफ इशारा करते हुए कहा, "चलो

[01:54:23] फिर चलते हैं। उसके पास। वह आगे की तरफ

[01:54:25] कदम बढ़ाते हुए बोला, राघव अक्षत का हाथ

[01:54:28] पकड़ बोला। कॉलेज से जरूरी कॉल आया। वही

[01:54:30] अटेंड करके आती होगी। अक्षत ने राघव को

[01:54:33] गहरी नजरों से देखते हुए कहा। वैसे तो

[01:54:35] हमेशा मुंह बनाकर कहता कि नीलिमा मुझे जरा

[01:54:37] सा टाइम नहीं देती। इसके लिए अपना करियर

[01:54:39] इंपॉर्टेंट है। यह कौन कहता रहता है?

[01:54:40] आंखों को गोल-गोल करते हुए उसने पूछा। वो

[01:54:43] बस कभी-कभी खींच हो जाती है। इसलिए मुंह

[01:54:45] से कुछ भी निकाल जाता है। पर मैं चाहता

[01:54:47] हूं मेरी नीलिमा का हर सपना सच हो जो वह

[01:54:49] चाहती है। पता है मुझे अभी इसमें वक्त

[01:54:51] लगेगा पर इस प्यारी सी लड़की के लिए अगर

[01:54:53] मुझे पूरी जिंदगी भी इंतजार करना पड़े तो

[01:54:55] मैं हंस करूंगा। वो उस लड़की यानी नीलिमा

[01:54:57] को देख खोए हुए स्वर में बोला। मुझे नहीं

[01:55:00] पता था मेरा बड़बोला दोस्त इश्क में मजनू

[01:55:02] बना बैठा है। अक्षत उसकी हालत देख बोला

[01:55:05] मजनू कहा लो रजहान कहा लो या कहा लो महवाल

[01:55:08] अब क्या करें जनाब हम है बेमिसाल वो

[01:55:09] शायराना अंदाज में बोला क्या बात है राघव

[01:55:12] मियां आप तो बिल्कुल इश्क में डूबे बैठे

[01:55:14] हैं वो उसके अंदाज पर बोला किसी को पावर

[01:55:17] का नशा है किसी को पैसे का नशा है और हमें

[01:55:19] इश्क का नशा है वो नीलिमा को हाथों के

[01:55:21] इशारे से अपने पास बुला रहा था अच्छा अब

[01:55:24] बंद कर तेरी सस्ती शायरी यह वाला राघव कुछ

[01:55:26] अच्छा नहीं लग रहा है तू शरारतें करते हुए

[01:55:28] ही अच्छा लगता है वो मुस्कुरा कर बोला

[01:55:30] उसकी बातों पर साक्षी ने भी अपनी सहमति

[01:55:32] जता दी कांग्रेचुलेशन मिस्टर एंड मिसेज

[01:55:35] ठाकुर मुझे आपसे बहुत शिकायत है मिसेज

[01:55:37] ठाकुर नीलिमा झूठी नारजगी जताते हुए बोली

[01:55:41] मुझे शिकायत है आपको साक्षी ने आश्चर्य से

[01:55:43] उसकी तरफ देखते हुए उसने पूछा हां नीलिमा

[01:55:47] जल्दी से बोलिए नीलिमा क्यों परेशान कर

[01:55:49] रही हो मेरी बहन को राघव ने नीलिमा से

[01:55:51] पूछा परेशान नहीं सच कह रही हूं साक्षी को

[01:55:54] देखते हुए बोली क्या जरूरत है तुम्हें

[01:55:56] इतना अच्छा खाने बनाने की और राघव के

[01:55:58] बच्चे को खिलाने की तुम्हें पता तुम्हें

[01:56:00] ने मेरे लिए कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी

[01:56:02] है वैसे वैसे ही यह मुझसे कितनी शिकायतें

[01:56:04] करता रहता है। अब तो इसकी बकेट लिस्ट में

[01:56:05] एक चीज और ऐड हो गई है कि नीलिमा को अच्छा

[01:56:08] खाना बनाना भी नहीं आता है। वह मुंह

[01:56:09] सिकोड़ते हुए बोली उसकी बातों के बोलने का

[01:56:12] तरीका ऐसा था ताकि राघव बेचारा जेब गया।

[01:56:14] वहीं अक्षत साक्षी हंस दिए। आपकी इस

[01:56:17] प्रॉब्लम का सशन है। मेरे पास साक्षी

[01:56:19] मुस्कुरा कर बोली क्या तीनों? नीलिमा

[01:56:22] अक्षत राघव ने लगभग एक साथ पूछा। यही कि

[01:56:25] आप दोनों रोज हमारे साथ ही आ जाना खाना

[01:56:27] खाने। वह हंसते हुए बोली साक्षी की बातें

[01:56:30] सुनकर तीनों खुलकर हंस दिए। अगर तुम दोनों

[01:56:32] रेडी हो गई हो तो क्या हम पार्टी में नीचे

[01:56:34] चले? क्योंकि पार्टी आज ही है। अंकित

[01:56:36] दरवाजे पर खड़े होकर झल्लाते हुए बोला हां

[01:56:39] बस 5 मिनट अंदर से लड़कियों की आवाज आए।

[01:56:42] पिछले एक घंटे यही चल रहा है तुम दोनों

[01:56:44] का। पार्टी आज ही है याद है ना? अंकित नाक

[01:56:46] मुंह सिकोड़ते हुए बोला पता है हमें बस दो

[01:56:49] मिनट आए। अंदर रूम से लड़कियों की आवाज

[01:56:51] आई। हद है यार। वह हंठ ही हंठ में बोला।

[01:56:54] कुछ देर बाद दोनों लड़कियां बाहर आई।

[01:56:56] दोनों को देख वह हाथ जोड़कर कर बोला। हो

[01:56:58] भाग्य हमारे जवाब। दोनों ने कमरे से बाहर

[01:57:00] निकलने का कष्ट किया। तुम जैसे लोग पर

[01:57:02] कभी-कभी हम लोगों अपनी दिव्य दृष्टि डाल

[01:57:04] ही देते हैं। श्रुति अदा से अपने बालों को

[01:57:06] कान के पीछे करते हुए बोली। जहां मधु उसकी

[01:57:08] बातों पर हंस रही थी, वहीं अंकित उसे घूर

[01:57:11] रहा था। अब लेट नहीं हो रहा है। श्रुति ने

[01:57:14] अंकित को अपनी तरफ घूरते देख पूछा। अंकित

[01:57:17] भुनभुनाते हुए आगे की चल दिया। दोनों

[01:57:19] लड़कियां मुस्कुराते हुए उसके पीछे चल दी।

[01:57:21] रवि कहां है? मधु ने चलते-चलते पूछा, अपने

[01:57:24] कमरे में है। उसको बुलाकर लाता हूं। तुम

[01:57:26] दोनों वेट करो। कहकर अंकित रवि के कमरे की

[01:57:28] तरफ बढ़ गया। थोड़ी देर में अंकित रवि के

[01:57:30] साथ आता दिखा। उसे आता देख मधु के चेहरे

[01:57:32] पर शर्मीली मुस्कान थिरक उठी। जिसे देख

[01:57:34] श्रुति ने हल्के से उसके कंधे पर मारते

[01:57:36] हुए बोली, नॉर्मल रह बहन। यह घर है उसका।

[01:57:39] मधु ने हां में सर हिला दिया। चलो हम सब

[01:57:42] भी अक्षत सर को कांग्रेचुलेशन कर देते

[01:57:44] हैं। अंकित ने कहा, चारों हॉल की तरफ चल

[01:57:46] दिए।

[01:57:47] कांग्रेचुलेशन सर अंकित अपना हाथ अक्षत की

[01:57:49] तरह बढ़ाते हुए बोला, "सर, नहीं भैया बोल

[01:57:52] सकते हो जैसे रवि का भाई हूं। मैं वैसे

[01:57:53] तुम्हारा भी भाई हूं। एंड थैंक यू सो मच।

[01:57:55] वो अपना हाथ अंकित से मिलाते हुए मुस्कुर

[01:57:57] कर बोला। जी सर अंकित बोला फिर से वो हंस

[01:58:01] कर बोला सॉरी जी भाई जैसा आप कहे वह झेपते

[01:58:04] हुए बोला उसकी हालत देख वहां खड़े सभी

[01:58:06] मुस्कुरा दिए थोड़ी देर तक सामान्य बातचीत

[01:58:09] के बाद चारों लड़कियां आपस में मिलजुलकर

[01:58:10] बातें करने लगी जैसे ना जाने कब से एक

[01:58:12] दूसरे को जानती हो वैसे फ्यूचर प्लांस

[01:58:15] क्या है तुम्हारे राघव ने अंकित की तरफ

[01:58:17] देखते हुए पूछा हमारा इंपोर्ट एंड

[01:58:20] एक्सपोर्ट का बिजनेस है उसी में पापा का

[01:58:22] हाथ बटाना है वह सहज भाव से बोला अच्छी

[01:58:25] बात है वैसे लखनऊ घूम लिए राघव ने पूछा

[01:58:28] अभी तो कुछ खास नहीं। अंकित बोला रवि

[01:58:30] तुम्हारे दोस्त दिल्ली से आए हैं। घुमाओ

[01:58:32] इन्हें इस नवाबों के शहर में। रवि की तरफ

[01:58:33] देख मुस्कुरा कर वह बोला जी भाई रवि धीमे

[01:58:36] स्वर में बोला क्या हुआ रवि? काफी लो

[01:58:38] साउंड कर रहे हो। तबीयत तो ठीक है ना? इस

[01:58:40] बार अक्षत ने चिंता जताते हुए पूछा। तबीयत

[01:58:43] ठीक है बस थोड़ा सा सर दर्द है। वो

[01:58:45] मुस्कुराने की कोशिश करता हुआ बोला।

[01:58:47] मेडिसिन ली तुमने एंड रेस्ट करो। तुम यहां

[01:58:50] पर म्यूजिक में सर दर्द और बढ़ जाएगा। वो

[01:58:51] रवि के माथे को अपनी उंगलियां से छूते हुए

[01:58:54] बोला। रवि उसका हाथ पकड़ मुस्कुरा कर

[01:58:56] बोला। इतनी टेंशन क्यों ले रहे हैं आप?

[01:58:58] हल्का सा तो सर दर्द है बस बाकी ठीक हूं।

[01:59:00] और मैं अपने भाई के इतने स्पेशल डे पर रूम

[01:59:02] में रेस्ट करूं। नो वे। ठीक तो कह रहे हैं

[01:59:05] रवि। भाई तू फालतू में चिंता कर रहा है।

[01:59:07] राघव अक्षत के कंधों पर हाथ रखते हुए बोला

[01:59:10] तो कुछ डांस हो जाए। अंकित ने पूछा नेकी

[01:59:13] और पूछ-पूछ राघव हंसकर बोला ठीक है। फिर

[01:59:16] मैं सॉन्ग प्ले करवा कर आता हूं। कहकर

[01:59:18] अंकित जाने लगा कि मधु उसे रोक। उसके कान

[01:59:20] में कुछ बोली जिसे सुन अंकित ने मुस्कुरा

[01:59:22] कर हां में सर हिला दिया। साथिया तूने

[01:59:24] क्या किया? बेलिया यह तूने क्या किया?

[01:59:26] मैंने किया तेरा इंतजार। इतना करो ना मुझे

[01:59:29] प्यार। इतना करो ना मुझे प्यार। अंकित ने

[01:59:31] मुस्कुराते हुए स्वीति के सामने हथेली रख

[01:59:33] दी। श्रुति ने मुस्कते हुए उसकी हथेली थाम

[01:59:35] कर गुनगुनाने लगी। साथिया तूने क्या कहा?

[01:59:38] बेलिया यह तूने क्या कहा? यूं ना कभी करना

[01:59:40] इंतजार। मैंने किया है तुमसे प्यार। मैंने

[01:59:43] किया है तुमसे प्यार। नीलिमा साक्षी को

[01:59:45] पकड़ और रावक अक्षत को पकड़ कर ले आया और

[01:59:48] उन्हें डांस करने के लिए कहकर पीछे हटा

[01:59:50] गए। अक्षत ने साक्षी की कमर को थाम डांस

[01:59:52] करना शुरू कर दिया। साथिया तूने क्या

[01:59:55] किया? बेलिया यह तूने क्या किया एक दूसरे

[01:59:56] की निगाहों में डूबते हुए इतनी मोहब्बत सह

[01:59:59] ना सकूंगा सच में जिंदा रह ना सकूंगा

[02:00:02] तुझको संभलू यह मेरा जिम्मा मैं ही हूं तो

[02:00:04] क्या है जाने तम ना अब जीना मरना मेरा

[02:00:06] जन्म तेरे हाथ है मैंने कहा ना सनम अब तू

[02:00:10] मेरे साथ है तो फिर संभल जाना कहा नीलिमा

[02:00:13] ने राघव के गाले में बाहे फंसकर गाने को

[02:00:15] बोल गुनगुना कर डांस करने लगी दिल के चमन

[02:00:18] का हंसना तो देखा जगी नजर का सपना तो देखा

[02:00:21] ऐसे बने हम एक जन एक दिल तू है कि मैं हूं

[02:00:23] कहना हो मुश्किल छोटा बासती है तू तन है

[02:00:26] गुलाबी मेरा दो रंग मील के बाद होते नहीं

[02:00:29] है जुदा तो फिर संभल जाना कहा ला लाला

[02:00:32] साथिया तूने क्या किया बेलिया यह तूने

[02:00:34] क्या किया अंकित श्रुति रवि और मधु को भी

[02:00:36] पकड़ कर ले आए रवि डांस के लिए मना करने

[02:00:38] लगा जिससे अंकित ने मुंह फुला लिया अंकित

[02:00:41] को मुंह फुलाते देख रवि हार मानकर मधु के

[02:00:43] साथ डांस करने लगा मधु जिस तरह से प्यार

[02:00:45] से उसे देख रही थी वैसा प्यारा वह किसी और

[02:00:47] की आंखों में देखना चाहता था आज रवि को

[02:00:49] मधु के दर्द का एहसास हो रहा था इतनी

[02:00:52] मोहब्बत सह ना सकूंगा सच मैं जिंदा रह ना

[02:00:55] सकूंगा तुझको संभलू यह मेरा जिम्मा मैं

[02:00:57] हूं तो क्या है जाने तमना अब जीना मरना

[02:01:00] मेरा जन्म तेरे हाथ है मैंने कहा ना सनम

[02:01:03] अब्बा तू मेरे साथ है तो फिर संभल जाना

[02:01:05] कहा रवि ने मधु से दूर हटाने की कोशिश की

[02:01:08] जिस पर मधु उसके पीछे से हगकर उसके गाल पर

[02:01:10] अपने गालों से स्पर्श करते हुए दिल के चमन

[02:01:13] का हंसना तो देखा जगी नजर का सपना तो देखा

[02:01:16] ऐसे बने हम एक जन एक दिल तू है कि मैं हूं

[02:01:19] कहना हो मुश्किल छोटा बासती है तू तन है

[02:01:22] गुलाबी मेरा दो रंग मील के

[02:01:24] होते नहीं है जुदा तो फिर संभल जाना कहा

[02:01:26] धीरे-धीरे इस रोमांटिक डांस में और भी लोग

[02:01:28] शामिल हो गए पूरे हॉल का माहौल एकदम

[02:01:30] रोमांटिक हो चला गाना खत्म होने पर तीनों

[02:01:33] कपल के साथ मधु रवि भी वहां से अलग हट गए

[02:01:35] तुमने प्ले करवाया था ना यह गाना राघव ने

[02:01:38] मधु की तरफ देखते हुए पूछा हां अच्छा नहीं

[02:01:41] लग क्या वो अटक अटक कर डरते हुए बोली

[02:01:44] अच्छा नहीं थोड़ी देर रुक कर बहुत अच्छी

[02:01:46] चॉइस है तुम्हारी राघव मुस्कुरते हुए बोला

[02:01:48] मधु को डर देख नीलिमा ने हल्के से उसके

[02:01:50] पेट पर कोहनी मारते हुए मधु से कहा इससे

[02:01:53] डर करने की कोई जरूरत नहीं है। यह पागल

[02:01:54] है। थोड़ा सा राघव ने घूर कर उसकी तरफ

[02:01:56] देखा तो वह उसके कान के पास फुसफुसाते हुए

[02:01:59] बोली, अब हर किसी को सच थोड़ी ना बता सकती

[02:02:01] हूं कि मेरा होने वाला पति थोड़ा नहीं

[02:02:02] बल्कि पूरा पागल है। कहकर वो मुस्कुर दी।

[02:02:04] राघव बस उसे घूर कर रह गया। किसी का वेट

[02:02:08] कर रहे भाई आप अक्षत को बार-बार घड़ी की

[02:02:10] तरफ देखते हुए रवि ने पूछा। हां कोई आने

[02:02:13] वाला है। वह सहजता से बोला कौन? लगभग सभी

[02:02:15] ने एक साथ अक्षत से पूछा। वह देखो। तो उधर

[02:02:18] अक्षत ने दरवाजे की तरफ इशारा किया जिसे

[02:02:20] देख साक्षी की मुस्कान और चौड़ी हो गई।

[02:02:23] किसे बुलाया है अक्षत ने जिसे देख साक्षी

[02:02:25] का चेहरा चमक उठा। बताइए जल्दी से और हां

[02:02:27] कल साक्षी अक्षत छुट्टी पर है। सब ने

[02:02:30] दरवाजे की तरफ देखा जहां अक्षत की नजर थी

[02:02:32] वहां पर एक लड़का रागा काका के साथ खड़ा

[02:02:34] था। राहुल को सामने देख साक्षी बिना एक पल

[02:02:37] गनवाए उसकी तरफ बढ़ चली और उसे अपने सीने

[02:02:39] से लगा लिया। इस खूबसूरत पल को देख जहां

[02:02:42] अक्षत और राघव के होठों पर मुस्कान थी।

[02:02:44] वहीं बाकी सबके चेहरे पर एक प्रश्न साफ

[02:02:46] झलक रहा था। नीलिमा ने राघव को कोहनी

[02:02:48] मारते हुए इशारे से पूछा कौन है यह साक्षी

[02:02:51] का भाई वह धीरे से बोला कैसा है तू और

[02:02:53] अचानक साक्षी आगे कुछ कह पाती कि अक्षत ने

[02:02:55] उसके पास आकर कहा सारे सवाल चौखट पर ही कर

[02:02:58] लेगी आप या अंदर भी बुलाएंगी हमारे साले

[02:03:00] साहब को होठों पर हल्की सी मुस्कान लिए वो

[02:03:02] राहुल को देख रहा था राहुल अपने जीजा जी

[02:03:05] को देख झट से उनके पास आकर बोला आज तो आप

[02:03:07] बहुत बहुत अच्छे लग रहे हो जीजू जरूर

[02:03:10] अच्छे लग रहे हैं पर आपसे कम राहुल की

[02:03:12] बातों पर वो उसके गाल खींच मुस्कुराते हुए

[02:03:14] बोला उसकी बातों को सुन राहुल हंस दिया

[02:03:17] चलो राहुल तुम्हें सबसे मिलावत हूं। कहकर

[02:03:19] अक्षत राहुल को लेकर उन सभी के पास चल

[02:03:21] दिया। किन शब्दों में आपका धन्यवाद करूं

[02:03:24] काका साक्षी अपने भाई को देख भावुक होते

[02:03:26] हुए रागा काका से बोली धन्यवाद हमें नहीं

[02:03:29] बाबा का कीजिए उन्होंने ही बुलाया है आपके

[02:03:31] भाई को। वो अक्षत की तरफ देखते हुए बोले

[02:03:34] साक्षी की नजरें भी अक्षत के ऊपर जा टिकी।

[02:03:36] यह देख वो मुस्कुर कर बोले शादी की

[02:03:38] सालगिरह मुबारक हो। जानते हैं इस रिश्ते

[02:03:41] की शुरुआत गलत तरीके से हुई थी। पर अब उन

[02:03:43] बातों को छोड़ एक नई शुरुआत कीजिए। उनकी

[02:03:45] बातें सुन साक्षी के गाल गर्म हो उठे। अब

[02:03:47] वो क्या कहती जिस शुरुआत की बात काका कर

[02:03:49] रहे हैं उसकी शुरुआत तो अक्षत की तरफ से

[02:03:51] हो चुकी है। उसमें उसकी भी सहमति थी।

[02:03:53] इसलिए उसने कभी उसे रोका या कुछ कहा नहीं।

[02:03:55] काका उसके हाथ पर सर रख चले गए। यह राघव

[02:03:58] अक्षत राघव के परिचय के बारे में आगे कुछ

[02:04:00] कहता कि राहुल उसकी बातों को काटते हुए यह

[02:04:02] राघव भाई है। इनके बारे में बहुत बातें

[02:04:04] करती है दीदी और मैं इनसे पहले भी मिल

[02:04:06] चुका हूं। वह मुस्कुरा कर बोला यह है मेरा

[02:04:09] छोटा भाई रावी। वह राघव के बराबर में खड़े

[02:04:12] रवि को देख बोला। राहुल ने मुस्कुराते हुए

[02:04:14] उसके सामने अपने हाथ जोड़ नमस्ते किया।

[02:04:16] धीरे-धीरे अक्षत ने सभी से उसका परिचय

[02:04:18] करवाया। सभी ने उसे हेलो किया। अब केक काट

[02:04:21] करे राघव ने अक्षत से पूछा। हां, बस 5

[02:04:24] मिनट और। वो किसी को फोन मिलाते हुए बोला,

[02:04:27] "अब किसका वेट कर रहा है?" राघव उसे फोन

[02:04:29] मिलाते देख बोला, "गिफ्ट आ रहा है

[02:04:31] साक्षी?" वह फोन कट करते हुए बोला, "ऐसा

[02:04:34] क्या मांग लिया है तूने?" राघव ने आंखें

[02:04:36] मटकाते हुए पूछा भाग साले जैसे तू सोच रहा

[02:04:39] है वैसा कुछ नहीं है। वह उसे घूरते हुए

[02:04:41] बोला राघव शरारती मुस्कान लिए एकटक उसे

[02:04:43] घोरता रहा। हारकर अक्षत चेहरा घुमाकर

[02:04:45] मुस्कुरा दिया। थोड़ी देर बाद अक्षत का

[02:04:48] फोन बज उठा। वो एक्सक्यूज मी कहते हुए

[02:04:50] वहां से हट बाहर निकाल गया। राघव उसके इस

[02:04:53] तरह अचानक बाहर चले जाने से परेशान हो

[02:04:55] उठा। राघव को अकेला खड़ा देख नीलिमा उसके

[02:04:58] पास आकर झूठे शिकायती लहजे में बोली। वैसे

[02:05:00] तो रोज फोन पर सिर्फ शिकायतें करते रहते

[02:05:02] हो। जब आज मैं यहां आई हूं तब तुम मुझ पर

[02:05:04] ध्यान ही नहीं दे रहे हो। नीलेमा की बातों

[02:05:06] पर उसने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख उसका

[02:05:08] हाथ पकड़ उसे एक कोने में लाकर उसकी कमर

[02:05:11] को अपनी बाहों में कैद कर उसके ऊपर झुकते

[02:05:13] हुए बोला चलिए अब तो मेरा सारा ध्यान आपके

[02:05:15] ऊपर है। अब बोलिए उसकी नाक से अपनी नाक को

[02:05:17] हल्के से टच करते हुए अभी भी कोई शिकायतें

[02:05:19] हैं? नीलिमा ने आंखें बंद कर हां में

[02:05:21] गर्दन हिला दी। राघव ने मुस्कुराते हुए

[02:05:23] उसका गाल चूमकर पूछा। अभी भी है शिकायतें

[02:05:25] हैं? नीलिमा की आंखों के कोर गीले हो गए।

[02:05:27] उसने हां में गर्दन हिला दी। राघव ने उसका

[02:05:30] दूसरा गाल भी चूमकर उसकी बंद आंखों को चूम

[02:05:32] लिया। नीलिमा उसके सीने से लग धीरे-धीरे

[02:05:34] सिसकियां लेने लगी। क्या हो गया जान? उसकी

[02:05:37] पीठ सहलाते हुए उसने पूछा, "आपको मुझ पर

[02:05:40] गुस्सा नहीं आता। मैं आपको कितना इंतजार

[02:05:42] करवा रही हूं? अपना सर उठकर उसकी आंखों

[02:05:43] में देखते हुए उसने पूछा, राघव ने अपने

[02:05:46] प्यार से उसके ललाट चूम कर नम गर्दन हिला

[02:05:48] के उसे अपनी बाहों की कैद में ओर कस लिया।

[02:05:51] इतना सब्र कैसे कर लेते हैं आप? कुछ देर

[02:05:53] बाद वह राघव से अलग होकर अपनी आंखों की

[02:05:55] नमी साफ करते हुए बोली। क्योंकि बचपन में

[02:05:58] पढ़ा था सब्र का फल मीठा होता है। वह

[02:06:00] मुस्कुराकर उसके गाल खींचते हुए बोला,

[02:06:02] नीलिमा ने उसका हाथ पकड़ कहा, कितनी आसानी

[02:06:04] से आप खुद की तकलीफें सबसे छुपा देते हैं।

[02:06:06] पर मेरे सामने इस झूठी मुस्कान का मुखोट

[02:06:08] पहनने की कोई जरूरत नहीं है। पल भर में

[02:06:11] राघव के चेहरे के मुस्कान छीन गई। उसके

[02:06:13] चेहरे के भाव बदल गए। वह उसकी आंखों में

[02:06:15] देख विश्वास भरे लहजे में बोला, प्यार में

[02:06:17] किसी के हिस्से प्यार तो किसी के हिस्से

[02:06:19] एक तरफ एहसास तो किसी के हिस्से तड़प और

[02:06:21] किसी के हिस्से इंजरार आता है। मेरे

[02:06:24] हिस्से में प्यार का इंतजार आया। उसके

[02:06:26] हाथों को अपने हाथों में लेके मेरा यकीन

[02:06:27] मानो इस इंतजार का भी अपना ही मजा है और

[02:06:29] यह तो हमारे प्यार की इम्तिहान की घड़ी है

[02:06:32] और हमें इसे अव्वल नंबर से पास करना है।

[02:06:34] समझी? नीलिमा ने नम आंखों से उसे देख हां

[02:06:36] सर हिला दिया। नीलिमा और राघव की सगाई आज

[02:06:39] से 4 साल पहले हुई थी। दोनों एक ही स्कूल

[02:06:42] में पढ़ते थे और धीरे-धीरे यह दोस्ती राघव

[02:06:44] की तरफ से प्यार में बदलती चली गई। जब उसे

[02:06:46] अपने प्यार का एहसास हुआ तो उसे कई बार

[02:06:48] अपने दिल बात उसे कहनी चाही। पर कहीं अगर

[02:06:50] नीलिमा ने ना कर दी तो कहीं उसकी दोस्ती

[02:06:53] भी ना खोदे। इस डर से हर बार वह अपने कदम

[02:06:55] पीछे हटा लेता था। राघव ने यह बात बताई तो

[02:06:57] किसी से नहीं थी। पर इश्क और मुश्क छिपाए

[02:06:59] नहीं छिपता कहावत तो सच्ची है। राघव के

[02:07:01] अंदर आए बदलाव को उसकी मां ने नोटिस कर

[02:07:03] दिया था। जब उन्होंने यह बात उसके पिता को

[02:07:05] तो बताई। उन्होंने उससे बात करने की सोची।

[02:07:08] राघव के पिता एक खुली सोच के इंसान थे। वह

[02:07:10] उसके पिता कम दोस्त ज्यादा थे। जब

[02:07:11] उन्होंने राघव से इस बारे में बात करी तो

[02:07:13] राघव ने भी कुछ ना छुपाते हुए सारी बात

[02:07:15] खुलकर बता दी। अगले दिन ही उसके पिता राघव

[02:07:18] का रिश्ता लेकर नीलिमा के घर पहुंच गए। अब

[02:07:20] तक राघव की ग्रेजुएशन पूरी हो चुकी थी। अब

[02:07:23] मास्टर के लिए वह अक्षत के पास जाने वाला

[02:07:24] था। उसके पिता ने सोचा क्यों ना उसे सगाई

[02:07:26] करवा कर ही भेजा जाए। नीलिमा के घर वाले

[02:07:29] राघव के परिवार को पहले से ही जानते थे।

[02:07:31] आखिर शहर के अमीर परिवार में से एक परिवार

[02:07:33] था उनका। उन्होंने झट से रिश्ते के लिए

[02:07:35] हां कर दी। जब यह बात नीलिमा को पता चली

[02:07:38] तो उसे बहुत दुख हुआ रात में पैरों पर

[02:07:40] खड़ी होना चाहती थी। एक डॉक्टर बनना चाहती

[02:07:42] थी। कुछ दिनों बाद राघव और नीलिमा की एक

[02:07:44] मीटिंग कराई गई कि लड़का लड़की एक दूसरे

[02:07:46] को पसंद कर ले। जहां राघव खुश है कि अब

[02:07:48] नीलिमा उसकी होने वाली है। वहीं नीलिमा के

[02:07:50] मन में उथल-पुथल मची हुई वह इतनी जल्दी

[02:07:52] शादी नहीं करना चाहती थी। जब उसने अपने मन

[02:07:54] की बातें राघव के सामने रखी तो वह

[02:07:56] मुस्कुरा कर बोला, "मुझे कोई प्रॉब्लम

[02:07:58] नहीं है। तुम्हें जितना वक्त चाहिए, मैं

[02:07:59] उतना वक्त दूंगा।" राघव आज भी अपने शब्दों

[02:08:02] पर खड़ा था। पूरे चार सालों से इंतजार कर

[02:08:04] रहा है वह। शायद कोई और होता तो अब तक या

[02:08:07] तो रिश्ता तोड़ दिया होता या फिर ऐसी

[02:08:08] शर्तें ही तोड़ दी होती। इतना सोच कर ही

[02:08:10] नीलिमा की आंखों में नमी उतर आई। जिन्हें

[02:08:12] देख राघव ने नमे गर्दन हिलाते हुए कहा जान

[02:08:15] अब इतना भी जुल्म मत करो हमारे ऊपर जब

[02:08:17] जानती हो कि आपकी आंखों से गिरते मोती

[02:08:19] यहां इधर अपने दिल की तरफ इशारा करते हुए

[02:08:21] दर्द देते हैं। नीलिमा ने अपनी आंखों में

[02:08:24] आए नमी को साफ कर मुस्कुराने की कोशिश

[02:08:26] करते हुए बोली अब ठीक राघव ने नमे इशारा

[02:08:28] कर उसके चेहरे पर अपने दोनों हाथों से थाम

[02:08:31] उसके होठों को चूम कर कहा यह सच्ची

[02:08:32] मुस्कान है नीलिमा के चेहरे पर हया की

[02:08:34] मुस्कान और गहरी हो गई वह चेहरा दोनों

[02:08:36] हाथों से धक वहां से भाग गई उसकी इस अदा

[02:08:38] पर राघव अपने बालों पर हाथ फेरते हुए

[02:08:40] बुदबुदाया शर्मीली लड़की वह भी वहां से हट

[02:08:43] हॉल में आ गया जहां कुछ औरतें खड़ी अक्षत

[02:08:45] साक्षी और राहुल से बातें कर रही थी कौन

[02:08:48] है यह लोग राघव ने उत्सुकतावश रवि से पूछा

[02:08:50] जो अक्षत से दूर से खड़ा था उसके सवाल पर

[02:08:52] रवि ने अपने कंधे उचका दिए। राघव ने अक्षत

[02:08:55] की तरफ कदम बढ़ दिए। राघव ने अक्षत की तरफ

[02:08:58] कदम बढ़ दिए। अक्षत के कान में फुसफुसाते

[02:09:00] हुए उसने पूछा, "कौन है यह लोग? मैंने

[02:09:02] पहले तो इन्हें कभी नहीं देखा। इनका नाम

[02:09:05] कमला है। अभी कुछ दिन पहले ही मिला था।

[02:09:07] मैं इनसे मैं मां के नाम से एक अनाथ आश्रम

[02:09:09] खोलना चाहता हूं और चाहता हूं इसका सारा

[02:09:11] काम साक्षी संभाले। इसीलिए मैंने आज इन

[02:09:13] लोगों को यहां बुलाया है ताकि यह मेरी और

[02:09:15] साक्षी की मदद कर सके। पर यहां तो मुझे ही

[02:09:17] सरप्राइज मिला गया। वह सहजता से मुस्क कर

[02:09:19] बोला, "कैसा सरप्राइज?" राघव ने आंखें

[02:09:22] मटकाते हुए पूछा साक्षी कमला जी को पहले

[02:09:25] से जानती है वह साक्षी की तरफ देख बोला

[02:09:28] तुम कैसे जानती हो इन्हें साक्षी राघव ने

[02:09:30] साक्षी से पूछा भैया मैंने आपको बताया था

[02:09:33] ना मैं और राहुल आश्रम में पले बड़े हैं

[02:09:35] राघव ने हां में अपनी गर्दन हिला दी

[02:09:37] साक्षी अपनी बात जारी रखते हुए बोली

[02:09:39] इन्होंने ही उस समय हमें संभाला था जब

[02:09:41] अपनों ने साथ छोड़ा तब इन्होंने ही तो

[02:09:42] हमें सहारा दिया था नहीं तो पता नहीं हम

[02:09:44] दोनों भाई बहन आज कहां दर्द की ठोकरें खा

[02:09:46] रहे होते अपने बीते कल को याद कर उसकी

[02:09:48] आंखों में नमी उतर आई अब क्यों दुखी होती

[02:09:51] हो साक्षी अब तो तुम्हारा खुद का परिवार

[02:09:53] है। इतना अच्छा पति है तुम्हारा। इतना भरा

[02:09:55] पूरा परिवार है। अब अपने बीते कल को भूल

[02:09:58] आने वाले कल के सुनहरे भविष्य के बारे में

[02:09:59] सोचे। कमला जी प्यार से समझती हुई बोली।

[02:10:02] साक्षी ने अपनी आंखों की नमी साफ कर हां

[02:10:04] में गर्दन हिला दी। कुछ देर बाद एक आदमी

[02:10:06] कुछ पेपर लेकर अक्षत के पास आया। अक्षत ने

[02:10:09] पेपर उस आदमी से लेकर साक्षी की तरह बढ़

[02:10:11] दिए। साक्षी ने सवालिया दृष्टि से उसकी

[02:10:13] तरफ देखा जिसे समझ अक्षत बोला, "यह

[02:10:15] प्रॉपर्टी आपके नाम पर है। इसलिए इस पर

[02:10:17] आपके साइन चाहिए।" मेरे नाम पर क्यों? वह

[02:10:20] हैरानी से बोली मेरी तरफ से तोहफा है आपके

[02:10:22] लिए वह मुस्कुरा कर बोला किस चीज का तोहफा

[02:10:25] वो अभी भी अक्षत को हैरानी से देख रही थी

[02:10:28] शादी की पहली सालगिरह का वो उसकी आंखों

[02:10:30] में आंखें डाल संजीदा लहजे बोला पर इसकी

[02:10:33] क्या जरूरत है उसे अक्षत से इस तरह से

[02:10:35] इतना मन तोहफा लेना अच्छा नहीं लग रहा था

[02:10:38] आप पेपर साइन करिए बाद में बताता हूं वह

[02:10:40] धीमे से उसके कान के पास आकर बोला अक्षत

[02:10:42] की गर्म सांसों को अपने कान के पास महसूस

[02:10:44] कर साक्षी के शरीर में सिहरन सी दौड़ गई

[02:10:46] शरीर रोंगटे खड़े हो गए दिल की लड़कनों की

[02:10:49] धुकधुक की सी लग गई। दिल में अजीब सा मीठा

[02:10:51] सा दर्द होने लगा। कहां खो गई? जल्दी

[02:10:54] करिए। साक्षी को पेपर्स पर साइन ना करते

[02:10:56] देख उसने साक्षी को टोका। साक्षी ने चौंक

[02:10:59] कर उसकी तरफ देख। अक्षत ने उसे पेपर पर

[02:11:01] साइन करने का इशारा किया। साक्षी ने अक्षत

[02:11:04] की बात मानते हुए चुपचाप साइन कर दिए। देख

[02:11:06] रही हो राधा? इस अक्षत को कैसे साक्षी के

[02:11:08] प्यार में बावला होकर घर की दौलत उठाई जा

[02:11:11] रही है। ताई जी को अक्षत का उनसे बिना

[02:11:12] पूछे या घर में बिना किसी की राय ली।

[02:11:14] करोड़ों की प्रॉपर्टी साक्षी के नाम करना

[02:11:16] बिल्कुल भी नहीं भाया। इसीलिए वह अपना

[02:11:18] गुस्सा निकालते हुए अपने दांत तीसते हुए

[02:11:20] चाची जी से बोली आप क्या कर सकते हैं जीजी

[02:11:23] हैं क्योंकि यह और जेठ जी तो अभी कुछ करना

[02:11:25] ही नहीं चाह रहे हैं पता नहीं क्या सोचा

[02:11:26] अभी तक रुके हुए हैं इन दोनों साक्षी और

[02:11:29] अक्षत को खुश देख मेरी छाती पर सांप लौटे

[02:11:31] हैं मुझे बार-बार अपने बच्चे अंश का दर्द

[02:11:33] से पीला पड़ता चेहरा मेरी आंखों के सामने

[02:11:35] घूम जाता है उसकी कही बातें मुझे आज भी

[02:11:37] याद आती है कैसे मेरा बच्चा मुझसे बोला

[02:11:39] रहा था मम्मा मुझे क्या हो रहा है मेरा सर

[02:11:41] दर्द क्यों बढ़ता जा रहा है मम्मा मम्मा

[02:11:44] बहुत दर्द हो रहा है मम्मा कुछ करो प्लीज

[02:11:46] अतीत की यादों में खोई चाची जी को पता ही

[02:11:48] नहीं चला कब उनकी आंखों से आंसू की धर बह

[02:11:50] गई। क्यों बीते कल की बातें याद कर अपना

[02:11:52] खून जलती है। मैं बात करती हूं। इसने अब

[02:11:55] वक्त आ गया है कुछ करने का। ताई जी रहसय

[02:11:57] तरीके से बोली अब और यहां रुक मैं यह झूठा

[02:12:00] दिखाव नहीं कर सकती हूं। कहकर चाची जी

[02:12:02] अपने कमरे में चली गई। ताई जी बस उन्हें

[02:12:04] जाता हुआ देखती रहा गई। अगर अब तुम लोगों

[02:12:07] का मिलन मिलान और गिफ्ट एक्सचेंज हो चुके

[02:12:09] हो तो क्या हम केक कट करें? वह लगभग अक्षत

[02:12:11] को खा जाने वाली नजरों से देखते हुए बोला।

[02:12:13] अक्षत ने उसे सहमति दे दी। कुछ देर बाद

[02:12:16] अक्षत साक्षी में मिलकर केक काटकर एक

[02:12:18] दूसरे को खिलाया। उसके बाद राघव ने केक का

[02:12:20] बड़ा सा पीस उठा। अक्षत के मुंह पर माल

[02:12:22] दिया। अक्षत उसे गुस्से से घूरते हुए उसे

[02:12:24] निकाल अपना फेस साफ करने के लिए चला गया।

[02:12:26] मौके का फायदा उठाते हुए नीलिमा ने राघव

[02:12:28] के चेहरे पर केक लगा दिया। उसके बाद उन

[02:12:30] दोनों की केक की ऐसी होली खेली कि कोई

[02:12:32] नहीं बच पाया। यह क्या हालत बना रखी अपनी

[02:12:35] तुम लोगों ने? उन सभी के बिगड़े चेहरों के

[02:12:37] नक्शे देख अक्षत ने अजीब मुंह बनाकर पूछा।

[02:12:40] यह सब इस राघव के बच्चे ने किया है।

[02:12:42] नीलिमा राघव को गुस्से से घूरते हुए बोली,

[02:12:44] उसके पूरे बालों में केक ले गया था। राघव

[02:12:47] ने राघव अक्षत ने कुछ कहना चाहा, मैंने

[02:12:49] कुछ नहीं किया है। अक्षत यह सब इस नीलिमा

[02:12:51] ने किया। देख इसने मेरे कान में केक फूंस

[02:12:53] दिया है। राघव छोटे बच्चों की तरफ अक्षत

[02:12:55] से शिकायत लगते हुए बोला। उसने इस तरह से

[02:12:57] अपनी बात कही कि अक्षत की हंसी निकाल गई।
