Full Transcript
https://www.youtube.com/watch?v=OGa7-XYgJnY
[00:01] इमेजिन करें आप रात में एक सफर कर रहे
[00:05] इमेजिन करें आप रात में एक सफर कर रहे हैं।
[00:05] आप अकेले हैं और रोड बिल्कुल सुनसान हैं।
[00:08] आप अकेले हैं और रोड बिल्कुल सुनसान है।
[00:08] ना दूर तक बंदा है ना बंदे की साथ और है।
[00:11] ना दूर तक बंदा है ना बंदे की साथ और सिर्फ आपकी गाड़ी है और सामने हेडलाइट की
[00:14] सिर्फ आपकी गाड़ी है और सामने हेडलाइट की रोशनी है।
[00:14] अगर आप साइड व्यू मिरर से देखते
[00:17] रोशनी है। अगर आप साइड व्यू मिरर से देखते हैं तो आपकी गाड़ी की बैक लाइट आपको बस
[00:20] हैं तो आपकी गाड़ी की बैक लाइट आपको बस उसी की रेड लाइट नजर आए और कोई भी नहीं
[00:23] उसी की रेड लाइट नजर आए और कोई भी नहीं है।
[00:23] इतना सन्नाटा कि अब आपको खौफ आने लगे
[00:26] है। इतना सन्नाटा कि अब आपको खौफ आने लगे और फिर आपकी हेडलाइट पे अचानक कोई आदमी
[00:29] और फिर आपकी हेडलाइट पे अचानक कोई आदमी नमूदार होता है और एक पलक झपकते ही वो
[00:32] नमूदार होता है और एक पलक झपकते ही वो गायब हो जाए और फिर थोड़ी देर बाद वही
[00:34] गायब हो जाए और फिर थोड़ी देर बाद वही आपके रियर व्यू मिरर में पीछे दिखाई दें।
[00:36] आपके रियर व्यू मिरर में पीछे दिखाई दें।
[00:36] ऐसे बहुत से खौफनाक वाक्यात मैं इस चैनल
[00:39] ऐसे बहुत से खौफनाक वाक्यात मैं इस चैनल पे ऑलरेडी अपलोड कर चुका हूं।
[00:39] तो इसलिए
[00:41] पे ऑलरेडी अपलोड कर चुका हूं। तो इसलिए चैनल को सब्सक्राइब कर लें और बेल आइकन को
[00:43] चैनल को सब्सक्राइब कर लें और बेल आइकन को प्रेस कर लें ताकि मेरी स्टोरीज के
[00:45] प्रेस कर लें ताकि मेरी स्टोरीज के नोटिफिकेशंस आप तक पहुंचते रहा करें।
[00:47] नोटिफिकेशंस आप तक पहुंचते रहा करें। आज
[00:47] आज की स्टोरी शुरू करने से पहले एक लम्हे के
[00:50] की स्टोरी शुरू करने से पहले एक लम्हे के लिए खामोश हो जाएं और अपने आसपास की
[00:52] लिए खामोश हो जाएं और अपने आसपास की खामोशी को सुने।
[00:52] क्या वाकई सब कुछ ठीक है
[00:55] खामोशी को सुने। क्या वाकई सब कुछ ठीक है या कुछ ऐसा भी है जो अभी तक आपने नोटिस
[00:57] या कुछ ऐसा भी है जो अभी तक आपने नोटिस नहीं किया था?
[00:57] खैर स्टोरी शुरू करते हैं।
[01:00] नहीं किया था? खैर स्टोरी शुरू करते हैं।
[01:00] आयतुल कुर्सी का इज़हार कर लें ताकि आपको
[01:02] आयतुल कुर्सी का इज़हार कर लें ताकि आपको डर ना लगे।
[01:02] चलते हैं अपनी स्टोरीज की तरफ।
[01:08] [संगीत]
[01:13] आज का यह वाक्या हमें हमारे एक सब्सक्राइबर ने शेयर किया।
[01:16] चलते हैं इनकी स्टोरी इन्हीं की जुबानी सुनते हैं।
[01:18] मेरा नाम फैसल है और मैं पिछले 15 साल से अमेरिका में रह रहा हूं।
[01:21] फैमिली भी वहीं सेट थी।
[01:23] मेरी बीवी बड़ा बेटा मुस्तफा अरहम और सबसे छोटी बेटी मरियम।
[01:26] पाकिस्तान से ताल्लुक हमारा पंजाब के छोटे गांव से था।
[01:31] लेकिन हम लोग सालों से सिर्फ फोन कॉल्स, ईद पर मुबारक और कभी कबभार किसी फौत की या शादी की खबर तक महदूद हो गए थे।
[01:34] मेरे वालिद साहब के इंतकाल के बाद गांव वाली जमीन मेरे नाम आ गई।
[01:39] कागजों में जमीन अच्छी खासी थी।
[01:41] लेकिन मसला यह था कि वो जमीन कई साल से बंजर पड़ी थी।
[01:45] ना वहां फसल होती थी ना कोई ठेके
[02:04] पड़ी थी।
[02:04] ना वहां फसल होती थी ना कोई ठेके पर लेता था।
[02:07] मैंने शुरू में समझा कि शायद जमीन खराब होगी, पानी का मसला होगा या गांव वाले वैसे ही जिद्दी किस्म के होंगे।
[02:14] लेकिन जब भी मैं फोन पर किसी रिश्तेदार से बात करता तो एक ही बात कहता फैसल पुत्त वो जमीन बेचनी आसान नहीं।
[02:21] मैं पूछता क्यों?
[02:26] तो जवाब आता बस लोग डरते हैं।
[02:29] यह बस वाली बात मुझे हमेशा अजीब लगती थी।
[02:32] आखिर में मैंने खुद फैसला किया कि मैं खुद पाकिस्तान जाऊंगा।
[02:34] फैमिली को भी साथ ले जाऊंगा।
[02:37] मेरी वाइफ ने कहा इतने साल बाद जा रहे हैं तो बच्चों को भी दिखा दे कि आपका गांव कैसा था।
[02:40] आपका बचपन कहां गुजरा।
[02:43] मुझे भी यही लगा कि अच्छा मौका है।
[02:46] जमीन का मामला भी है।
[02:49] देख लेंगे।
[02:49] | रिश्तेदारों से भी मिल लेंगे और बाद में बच्चों को नॉर्थ का ट्रिप भी करवा देंगे।
[02:53] | पाकिस्तान पहुंचने के बाद पहले दो दिन हम लाहौर में रहे।
[02:56] | फिर गांव निकल गए।
[02:58] | गांव पहुंचकर अजीब
[03:06] रहे।
[03:06] फिर गांव निकल गए।
[03:06] गांव पहुंचकर अजीब सा एहसास हुआ।
[03:09] वही कच्ची गलियां, वही पुराने मकान, वही लोग लेकिन सब कुछ बदला हुआ भी लग रहा था।
[03:12] मेरे वालिद के एक पुराने जानने वाले चाचा रफीक अभी जिंदा थे।
[03:15] वो हमें देखकर खुश भी हुए।
[03:18] मगर जब मैंने जमीन का जिक्र किया तो उनके चेहरे का रंग बदल गया।
[03:21] उन्होंने फौरन बात घुमा दी।
[03:23] मैंने कहा चाचा मुझे साफसाफ बताएं यह जमीन कोई लेता क्यों नहीं?
[03:26] इतनी बुरी जमीन तो नहीं है।
[03:30] वो कुछ देर खामोश रहे फिर बोले जमीन बुरी नहीं है।
[03:33] उसके साथ वाली जगह बुरी है।
[03:36] मैंने पूछा कौन सी जगह?
[03:39] उन्होंने उंगली से दूर इशारा किया।
[03:43] वो पुराना मंदिर जो हिंदुओं के जमाने का था।
[03:46] अदनान भाई मैंने बचपन में भी उस मंदिर के बारे में सुना था।
[03:49] लेकिन तब मुझे ये सब कहानियां लिखती थी।
[03:52] गांव में बच्चे डराने के लिए ऐसी बातें करते रहते थे।
[03:55] कोई कहता वहां रात को औरत रोती है।
[03:57] कोई कहता पायल की आवाज आती है।
[04:01] कोई कहता दिन के वक्त भी
[04:07] की आवाज आती है।
[04:07] कोई कहता दिन के वक्त भी वहां साया चलता हुआ दिखाई देता है।
[04:10] लेकिन वहां साया चलता हुआ दिखाई देता है।
[04:10] लेकिन अब चाचा रफीक जैसे संजीदा आदमी वही बात कर रहा था।
[04:13] तो मुझे थोड़ा अजीब लगा।
[04:13] मैंने कहा चाचा मंदिर तो हमारी जमीन पर नहीं है ना।
[04:17] वो बोले नहीं बिल्कुल साथ है।
[04:19] दीवार के उस पार मगर लोग फर्क नहीं करते।
[04:22] उनके लिए वह सारा टुकड़ा ही बदनाम है।
[04:26] मैंने हंसते हुए कहा तो क्या चुड़ैल कागजात देखकर चलती है कि यह जमीन फैसल की है और यह मंदिर वाली।
[04:29] चाचा रफीक ने मेरी तरफ देखा लेकिन हंसे नहीं।
[04:31] उन्होंने बस इतना कहा कुछ जगह मजाक बर्दाश्त नहीं करती।
[04:34] यह बात सुनकर मेरी वाइफ ने मुझे बाजू से हल्का सा पकड़ा।
[04:38] उसने आहिस्ता से कहा फैसल अगर लोग इतना डर रहे हैं तो रहने दे।
[04:41] जमीन देख लें।
[04:44] लेकिन रात को वहां मत रुकना।
[04:46] मैंने कहा हिना यही तो मसला है।
[04:50] अगर हम डर गए तो फिर जमीन हमेशा के लिए फंस जाएगी।
[04:53] मुझे देखना है असल मामला क्या है।
[04:57] कहीं ऐसा तो नहीं गांव वाले जानबूझकर अफवाह
[05:09] ऐसा तो नहीं गांव वाले जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं ताकि जमीन सस्ती मिल जाए।
[05:12] फैला रहे हैं ताकि जमीन सस्ती मिल जाए।
[05:14] अदान भाई आज सोचता हूं तो लगता है कि मेरी ही ज़िद सबसे बड़ी गलती थी।
[05:18] अगले दिन मैं हिना और बच्चे चाचा रफीक के साथ जमीन देखने गए।
[05:21] मैंने एक सफेद गाड़ी Toyota pado किराए पर ली थी क्योंकि आगे हमें नॉर्थ भी जाना था।
[05:26] गांव से जमीन तक पक्की सड़क नहीं थी।
[05:29] आखिरी हिस्सा कच्ची पगडंडी से जाना पड़ता था।
[05:32] वहां पहुंचकर सबसे पहले जो चीज महसूस हुई वो खामोशी थी।
[05:36] गांव ज्यादा दूर नहीं था।
[05:39] मगर वहां खड़े होकर ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी अलग ही जगह आ गए।
[05:42] जमीन वाकई बंजर थी।
[05:45] इर्दगिर्द की जमीन में कहीं ना कहीं सब्जा था।
[05:49] मगर हमारी जमीन खुश फटी हुई और अजीब बेजान लग रही थी।
[05:53] जैसे किसी ने उससे जान निकाल ली हो।
[05:56] और जमीन के कोने से थोड़ा सा आगे वो मंदिर था।
[06:00] छोटा सा टूटा हुआ पुराना।
[06:03] दीवारों पर जगह-जगह दरा, छत का कुछ हिस्सा
[06:11] दीवारों पर जगह-जगह दरा, छत का कुछ हिस्सा गिरा हुआ और अंदर अंधेरा।
[06:14] गिरा हुआ और अंदर अंधेरा।
[06:14] दरवाजे के ऊपर कुछ पुराने निशान बने हुए थे।
[06:17] मगर वक्त ने उन्हें आधा मिटा दिया था।
[06:21] दरख्त की जड़े दीवारों में घुसी हुई थी।
[06:24] सबसे अजीब बात यह थी कि वहां परिंदे भी नहीं बैठ रहे थे।
[06:27] दरख्त मौजूद थे लेकिन आवाज नहीं थी।
[06:30] मुस्तफा ने कहा बाबा यह जगह कपी है।
[06:34] मैंने उसको डांटा नहीं।
[06:34] बस कहा यह पुरानी जगह है बेटा।
[06:38] इसलिए ऐसी लग रही है।
[06:41] चाचा रफीक ने कहा बस बाहर से देख लो अंदर जाने की जरूरत नहीं।
[06:45] मुझे पता नहीं क्यों जिद चढ़ गई।
[06:48] मैंने कहा चाचा अगर कल किसी खरीदार को लेना पड़ा तो क्या उसे भी यही कहेंगे कि अंदर मत जाना।
[06:51] फिर तो कोई नहीं लेगा जमीन।
[06:54] मेरी वाइफ ने मुझे रोका।
[06:57] फैसल प्लीज बच्चों के सामने ना जाए अंदर।
[07:00] लेकिन मैं टॉर्च लेकर मंदिर के अंदर चला गया।
[07:04] अंदर बहुत बदबू थी।
[07:07] चमगादड़ों की ब और एक अजीब सी बदजगह वाली घुटन।
[07:14] अजीब सी बदजगह वाली घुटन।
[07:14] टॉर्च की रोशनी दीवारों पर घूम रही थी।
[07:17] एक कमरा आगे था और एक छोटा सा हिस्सा पीछे की तरफ था।
[07:20] मैं बस देखना चाहता था कि अंदर कुछ खास है या नहीं।
[07:23] पिछले हिस्से में मुझे फर्श पर एक लोहे का पुराना दरवाजा सा नजर आया।
[07:26] जैसे छोटा सा तहखाना हो।
[07:29] आधा मिट्टी में दबा हुआ ऊपर जंग लगा हुआ गुंडा।
[07:33] पहले मैंने सोचा छोड़ देता हूं।
[07:36] फिर ख्याल आया कि शायद लोग इसी चीज की वजह से डरते हो।
[07:39] अगर कोई सांप वगैरह निकलता हो या अंदर कोई जानवर रहता हो तो साफ करवा देंगे।
[07:42] मैंने कुंडा हाथ से उठाने की कोशिश की वो नहीं हिला।
[07:45] फिर करीब पड़ा एक पत्थर उठाया और दो-तीन बार हल्के से मारा।
[07:49] कुंडा खुल गया।
[07:52] अदनान भाई जैसे ही मैंने वो छोटा लोहे का दरवाजा थोड़ा सा ऊपर किया अंदर से एक बदबू का झोंका आया है।
[07:55] इतना शदीद कि मैं फौरन पीछे हट गया।
[07:59] उसी वक्त मुझे लगा जैसे अंदर से किसी औरत की बहुत हल्की सी
[08:14] जैसे अंदर से किसी औरत की बहुत हल्की सी हंसी आई हो।
[08:17] हंसी आई हो। हंसी इतनी आहिस्ता थी कि मैं खुद भी कंफ्यूज हो गया कि वाकई आवाज आई या मेरे कान बजे।
[08:19] कि मैं खुद भी कंफ्यूज हो गया कि वाकई आवाज आई या मेरे कान बजे।
[08:23] मैंने टॉर्च पीछे मारी अंदर कुछ खास नजर नहीं आया।
[08:27] बस अंधेरा, मट्टी और शायद टूटे हुए बर्तन।
[08:30] मैंने दरवाजा दोबारा छोड़ दिया।
[08:34] उठकर के आवाज से बंद हो गया।
[08:37] बाहर आया तो मेरी वाइफ का चेहरा गुस्से और डर से भरा हुआ था।
[08:40] क्या जरूरत थी अंदर जाने की?
[08:43] उसने कहा, मैंने नॉर्मल बनने की कोशिश की।
[08:47] कुछ नहीं था अंदर। बस टूटा हुआ मंदिर है।
[08:50] चाचा रफीक ने मेरी तरफ गौर से देखा।
[08:52] उन्होंने पूछा, "आपने कुछ खोला तो नहीं अंदर?
[08:56] मैंने झूठ बोल दिया।
[09:00] नहीं चाचा बस देखा है।
[09:03] वो खामोश हो गए।
[09:06] मगर उनकी आंखों में मुझे शक साफ नजर आया।
[09:09] उसी दिन शाम को मैंने फैसला किया कि हम जमीन पर ही एक रात रुकेंगे।
[09:12] चाचा रफीक ने बहुत मना किया।
[09:15] उन्होंने कहा पुत्तर जिद ना करो।
[09:17] दिन में जो देखना था
[09:15] पुत्तर जिद ना करो।
[09:15] दिन में जो देखना था देख लिया।
[09:18] रात वहां कोई नहीं रहता।
[09:18] मैंने देख लिया।
[09:18] रात वहां कोई नहीं रहता।
[09:21] मैंने कहा चाचा यही तो साबित करना है कि कुछ नहीं है।
[09:24] अगर मैं खुद रात गुजार लूंगा तो कल खरीदार को भी एतमाद से ला सकूंगा।
[09:27] कल खरीदार को भी एतमाद से ला सकूंगा।
[09:30] मैंने फैमिली को चाचा रफीक के घर छोड़ दिया।
[09:34] हिना वैसे भी मेरे उस फैसले से खुश नहीं थी।
[09:36] मेरी वाइफ बार-बार कह रही थी फैसल अगर तुम्हें देखना ही है तो दिन में देख लो।
[09:39] रात को अकेले वहां रुकने की क्या जरूरत है।
[09:42] मैंने उसे तसल्ली दी।
[09:46] बस एक रात की बात है।
[09:48] अगर मैं खुद वहां रात गुजार लूंगा तो कम से कम यह तो पता चल जाएगा कि लोग सच बोल रहे हैं या सिर्फ डरा रहे हैं।
[09:51] लोग सच बोल रहे हैं या सिर्फ डरा रहे हैं।
[09:54] सुबह फजर के बाद वापस आ जाऊंगा।
[09:57] लेकिन वाइफ के चेहरे पर जो खौफ था वो मुझे अब भी याद है।
[10:00] उसने जाते-जाते बस इतना कहा ठीक है मगर फोन ऑन रखना।
[10:03] और अगर जरा भी कुछ अजीब लगे तो फौरन वापस आ जाना।
[10:07] मैंने हां कर दी।
[10:10] मगर अंदर से मैं भी मुकम्मल मुतमई नहीं था।
[10:13] शाम के वक्त मैं दोबारा अपनी
[10:16] नहीं था।
[10:16] शाम के वक्त मैं दोबारा अपनी गाड़ी लेकर जमीन की तरफ निकल गया।
[10:19] चाचा गाड़ी लेकर जमीन की तरफ निकल गया।
[10:19] चाचा रफीक ने बहुत मना किया लेकिन मैंने जिद
[10:22] रफीक ने बहुत मना किया लेकिन मैंने जिद पकड़ ली थी।
[10:22] गांव से एक चारपाई, एक रजाई,
[10:26] पकड़ ली थी। गांव से एक चारपाई, एक रजाई, पानी की बोतलें, बिस्किट, चाय का थर्मस और
[10:29] पानी की बोतलें, बिस्किट, चाय का थर्मस और टॉर्च ले ली।
[10:29] मैंने सोचा था कि गाड़ी पास
[10:32] टॉर्च ले ली। मैंने सोचा था कि गाड़ी पास खड़ी होगी।
[10:32] एक रात गुजारनी है।
[10:36] खड़ी होगी। एक रात गुजारनी है।
[10:36] सुबह वापस आ जाऊंगा।
[10:39] आ जाऊंगा। बस इतना ही।
[10:39] बस इतना ही। जमीन पर पहुंचा तो
[10:39] जमीन पर पहुंचा तो सूरज ढल रहा था।
[10:42] सूरज ढल रहा था। दिन की रोशनी में भी वह
[10:42] दिन की रोशनी में भी वह जगह खाली खाली लगती थी।
[10:45] जगह खाली खाली लगती थी। मगर शाम होते ही
[10:45] मगर शाम होते ही उसका रंग बदल गया।
[10:49] उसका रंग बदल गया। इर्दगिर्द की जमीन पर
[10:49] इर्दगिर्द की जमीन पर कहीं ना कहीं लोग नजर आ जाते थे।
[10:51] कहीं ना कहीं लोग नजर आ जाते थे।
[10:51] कोई जानवर, कोई आवाज, कोई ट्रैक्टर।
[10:56] जानवर, कोई आवाज, कोई ट्रैक्टर। मगर हमारी
[10:56] मगर हमारी जमीन के हिस्से में अजीब सी खामोशी थी।
[10:59] जमीन के हिस्से में अजीब सी खामोशी थी।
[10:59] मैंने गाड़ी पगडंडी के पास खड़ी की।
[11:02] मैंने गाड़ी पगडंडी के पास खड़ी की।
[11:02] चारपाई थोड़ी दूर एक साफ जगह पर डाल दी।
[11:07] चारपाई थोड़ी दूर एक साफ जगह पर डाल दी।
[11:07] मंदिर मेरे चारपाई से कुछ फासले पर था।
[11:10] मंदिर मेरे चारपाई से कुछ फासले पर था।
[11:10] मैंने जानबूझकर चारपाई का रुख दूसरी तरफ
[11:13] मैंने जानबूझकर चारपाई का रुख दूसरी तरफ रखा ताकि बार-बार मेरी नजर मंदिर पर ना
[11:17] रखा ताकि बार-बार मेरी नजर मंदिर पर ना जाए।
[11:21] लेकिन अदान भाई कुछ जगह ऐसी होती है कि आप चाहे मुंह दूसरी तरफ कर लें।
[11:24] दिमाग फिर भी उस तरफ लगा रहता है।
[11:27] शुरू में सब नॉर्मल था।
[11:30] मैंने थर्मस से चाय निकाली।
[11:34] बिस्किट खाए मोबाइल पर वर्क देखा।
[11:37] नेटवर्क कभी एक लाइन आता कभी गायब हो जाता।
[11:40] वाइफ की कॉल आई तो मैंने उसे नॉर्मल आवाज में बताया।
[11:42] सब ठीक है।
[11:45] तुम परेशान ना हो।
[11:49] उसने पूछा वहां अकेले डर तो नहीं लग रहा।
[11:52] मैंने हंसकर कहा डर किस बात का?
[11:54] यहां कुछ भी नहीं है।
[11:58] लेकिन कॉल बंद होने के बाद जब मैंने इर्दगिर्द देखा तो मुझे अपने बात खुद झूठी लगी।
[12:01] तकरीबन 11:00 बजे के बाद गांव की तरफ आती हल्कीफुल्की आवाज भी बंद हो गई।
[12:05] पहले दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे।
[12:10] फिर वह भी खामोश हो गए।
[12:13] हवा बहुत कम थी।
[12:16] सर्दी भी थी मगर अजीब बात यह थी मंदिर के आसपास ज्यादा ठंड लग रही थी।
[12:20] मैं चारपाई पर लेटा रहा।
[12:22] रजाई ऊपर थी।
[12:24] टॉर्च सेने रखी
[12:19] पर लेटा रहा।
[12:19] रजाई ऊपर थी।
[12:19] टॉर्च सेने रखी थी।
[12:19] मोबाइल हाथ में था।
[12:23] मैं खुद को समझा रही थी।
[12:23] मोबाइल हाथ में था।
[12:23] मैं खुद को समझा रहा था कि यह सब माहौल का सर है।
[12:26] इंसान जब अकेला सुनसान जगह पर होता है तो दिमाग खुद आवाजें बनाता है।
[12:30] फिर पहली आवाज आई छन छन की।
[12:34] मैं फौरन उठकर बैठ गया।
[12:39] पहले मुझे लगा शायद कोई जानवर होगा।
[12:42] फिर दोबारा आवाज आई।
[12:46] ये पायल की आवाज थी।
[12:49] बिल्कुल साफ जैसे कोई औरत बहुत आहिस्ता मट्टी पर चल रही हो।
[12:53] मैंने टॉर्च उठाई और चारपाई के इर्दगिर्द रोशनी मारी।
[12:55] कुछ नहीं था।
[12:59] खुश जमीन, झाड़ियां, गाड़ी और थोड़े फासले पर वो पुराना मंदिर आवाज बंद हो गई।
[13:03] मैंने अपने आप से कहा कि फैसल बस वहम।
[13:06] मैं दोबारा लेट गया।
[13:10] मगर अब मेरी आंखें बंद नहीं हो रही थी।
[13:12] तकरीबन 5 मिनट बाद वो आवाज दोबारा आई।
[13:17] इस बार मंदिर की तरफ से फिर एक हल्की सी
[13:20] इस बार मंदिर की तरफ से फिर एक हल्की सी हंसी।
[13:22] हंसी।
[13:22] अदान भाई वो हस्ती इतनी हल्की थी के अगर
[13:25] अदान भाई वो हस्ती इतनी हल्की थी के अगर दिन का वक्त होता तो शायद मैं इग्नोर कर
[13:28] दिन का वक्त होता तो शायद मैं इग्नोर कर देता।
[13:28] मगर उस सुनसान रात में वो सीधी मेरे
[13:31] देता। मगर उस सुनसान रात में वो सीधी मेरे दिमाग में लगी।
[13:35] एक औरत की हंसी जैसे कोई दूर खड़ा होकर मुझे देख रहा हो और आहिस्ता
[13:39] से हंस रहा हो। मैंने फौरन टॉर्च मंदिर की
[13:42] तरफ मारी। रोशनी टूटी हुई दीवारों पर
[13:45] पड़ी। मंदिर का दरवाजा काला सा नजर आ रहा
[13:49] था। अंदर मुकम्मल अंधेरा था।
[13:49] मैंने दो-तीन
[13:53] बार रोशनी इधर-उधर घुमाई। कुछ नजर नहीं
[13:56] आया। मैंने मोबाइल उठाई कि चाचा रफीक को
[14:00] कॉल करूं। मगर नेटवर्क गायब था।
[14:00] उसी वक्त
[14:03] गाड़ी का अलार्म बज गया।
[14:03] रात के सन्नाटे
[14:06] में वो आवाज इतनी तेज लगी कि मेरा दिल
[14:09] एकदम [संगीत] जोर से धड़कना शुरू हुआ।
[14:09] मैं
[14:14] चारपाई से उठा और रिमोट जेब से निकाला।
[14:16] अलार्म बंद किया और गाड़ी की तरफ भागा।
[14:20] अलार्म बंद किया और गाड़ी की तरफ भागा।
[14:23] मुझे लगा शायद कोई जानवर टकरा गया होगा या कोई गांव का बंदा शरारत कर रहा होगा।
[14:27] पास पहुंचकर मैंने टॉर्च मारी।
[14:30] दरवाजे बंद थे। शीशा सही था। टायर सही थे लेकिन दाएं तरफ पिछले दरवाजे पर मट्टी लगी हुई थी।
[14:37] मट्टी ऐसी नहीं थी जैसे रास्ते से उड़ी हो।
[14:41] वो एक जगह जमा थी।
[14:44] जैसे किसी ने गीले हाथ से गाड़ी को छुआ हो।
[14:46] मैंने करीब जाकर देखा पांच उंगलियों जैसा निशान [संगीत] साफ नहीं था।
[14:48] मगर इतना जरूर था कि वह मिट्टी खुद नहीं लगी थी।
[14:54] मेरे दिल में पहली बार हकीकी खौफ आया।
[14:58] मैंने टॉर्च इर्द-गिर्द घुमाई।
[15:02] दूर-दूर तक कोई नहीं था।
[15:05] ना बंदा ना बंदे की जात खुश जमीन झाड़ियां और मंदिर का अंधेरा।
[15:08] फिर मुझे लगा जैसे मंदिर के दरवाजे के अंदर कोई सफेद चीज ही ली है।
[15:10] सिर्फ एक लम्हे के लिए मैंने टॉर्च सीधी वहां मारी कुछ नहीं था।
[15:14] मगर कसम खाकर कहता हूं मैंने
[15:22] कुछ नहीं था।
[15:22] मगर कसम खाकर कहता हूं मैंने कुछ हरकत देखी थी जैसे सफेद कपड़े का किनारा अंधेरे में पीछे हटाओ।
[15:28] अब मैं चारपाई पर वापस नहीं जाना चाहता।
[15:31] मैं गाड़ी के पास खड़ा रहा।
[15:31] दिल कर रहा था गाड़ी स्टार्ट करूं और वापस गांव चला जाऊं।
[15:39] लेकिन फिर मेरे अंदर वही जिद जाग गई।
[15:39] मैंने सोचा अगर मैं अभी भाग गया तो सारी उम्र खुद को यही कहूंगा कि शायद कुछ था ही नहीं मगर डर गया।
[15:49] मैंने गाड़ी अनलॉक की और अंदर बैठ गया।
[15:52] सोचा बाकी रात गाड़ी में गुजार लेता हूं।
[15:55] दरवाजा लॉक किए, सीट पीछे की और मोबाइल हाथ में पकड़ कर बैठ गया।
[15:58] तकरीबन आधा घंटा सुकून रहा।
[15:58] फिर गाड़ी के पिछले हिस्से से आहिस्ता से नोक की आवाज आई।
[16:05] मैंने सांस रोक ली।
[16:05] दोबारा आवाज आई।
[16:08] जैसे कोई उंगली से पिछला शीशा बजा रहा हो।
[16:12] मैंने रियर व्यू मिरर में देखा।
[16:15] अंधेरा था।
[16:15] कुछ नजर नहीं आ रहा था।
[16:19] मैंने टॉर्च ऑन की और शीशे से पीछे रोशनी
[16:22] मैंने टॉर्च ऑन की और शीशे से पीछे रोशनी मारी।
[16:22] कोई नहीं था।
[16:26] उसी वक्त मेरे बिल्कुल बाएं तरफ ड्राइवर साइड विंडो के पास पायल की आवाज आई।
[16:34] मैंने फौरन सर मोड़ा।
[16:36] शीशे के बाहर कोई खड़ा नहीं था।
[16:36] मगर शीशे पर धुन जमी हुई थी और उस धुन पर अंदर की तरफ नहीं बाहर की तरफ से एक लकीर खींची हुई थी।
[16:43] जैसे किसी ने उंगली से शीशे पर कुछ लिखने की कोशिश की हो।
[16:48] मैंने गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की मगर हाथ कांप रहे थे।
[16:51] इग्निशन लगा।
[16:55] गाड़ी स्टार्ट हुई मगर मैंने फौरन गाड़ी आगे नहीं बढ़ाई।
[16:58] मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं वाकई क्या देख रहा हूं।
[17:03] फिर मंदिर के अंदर से एक आवाज आई।
[17:06] इस बार हंसी नहीं थी।
[17:06] ऐसा लगा जैसे कोई औरत बहुत आहिस्ता से कह रही हो।
[17:13] दरवाजा मैं फ्रीज हो गया।
[17:13] दरवाजा वो लोहे का दरवाजा जो मैंने दिन में अंदर खोला था।
[17:19] उस वक्त मुझे पहली बार एहसास हुआ कि शायद मैंने वाकई कुछ गलत कर
[17:23] एहसास हुआ कि शायद मैंने वाकई कुछ गलत कर दिया।
[17:25] चाचा रफीक ने पूछा था आपने कुछ खोला दिया।
[17:25] चाचा रफीक ने पूछा था आपने कुछ खोला तो नहीं था और मैंने झूठ बोल दिया था।
[17:29] अब तो नहीं था और मैंने झूठ बोल दिया था।
[17:31] अब मुझे लग रहा था कि वह झूठ मेरे सामने खड़ा हो गया।
[17:33] हो गया।
[17:35] मैंने गाड़ी की हेडलाइट ऑन की।
[17:35] रोशनी सीधी मंदिर की दीवारों पर पड़ी।
[17:39] मंदिर की दीवारों पर पड़ी।
[17:39] उसी लें मंदिर के दरवाजे के पास एक औरत का साया नजर आया।
[17:42] के दरवाजे के पास एक औरत का साया नजर आया।
[17:45] सफेद कपड़े, सर झुका हुआ, चेहरा बालों में छुपा हुआ।
[17:49] छुपा हुआ।
[17:49] वो चंद सेकंड खड़ी रही।
[17:49] फिर अंदर अंधेरे में पीछे हट गई।
[17:53] अंदर अंधेरे में पीछे हट गई।
[17:53] अदान भाई मैं अब मजीद बहादुरी दिखाने के काबिल नहीं था।
[17:56] अब मजीद बहादुरी दिखाने के काबिल नहीं था।
[17:59] मैंने गाड़ी रिवर्स की, मट्टी उड़ी, टायर फिसले मगर मैंने गाड़ी पगडंडी पर चढ़ाई और
[18:03] फिसले मगर मैंने गाड़ी पगडंडी पर चढ़ाई और सीधा गांव की तरफ निकल गया।
[18:06] सीधा गांव की तरफ निकल गया।
[18:06] रास्ते में एक बार भी पीछे नहीं देखा।
[18:09] बार भी पीछे नहीं देखा।
[18:09] बस दिल में कलमा पढ़ता रहा।
[18:12] पढ़ता रहा।
[18:12] गांव पहुंचा तो रात के तकरीबन 3:00 बज रहे थे।
[18:16] 3:00 बज रहे थे।
[18:16] चाचा रफीक के घर के बाहर गाड़ी रोकी।
[18:19] गाड़ी रोकी।
[18:19] दरवाजा खटखटाया।
[18:19] चाचा रफीक ने नींद में दरवाजा खोला।
[18:22] नींद में दरवाजा खोला।
[18:22] लेकिन मुझे देखकर फौरन समझ गया कि कुछ हुआ है।
[18:26] फौरन समझ गया कि कुछ हुआ है।
[18:29] इन्होंने सिर्फ एक सवाल किया। मंदिर के अंदर कुछ खोला था ना?
[18:31] इस बार मैंने झूठ नहीं बोला।
[18:35] मैंने सर झुकाकर कहा, हां चाचा एक लोहे का दरवाजा था।
[18:38] चाचा रफीक ने गहरी सांस ली और कहा, फैसल पुत्त तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी।
[18:45] अगली सुबह मैंने वाइफ को मुकम्मल बात नहीं सुताई।
[18:49] बस इतना कहा कि रात को माहौल ठीक नहीं लगा।
[18:52] इसलिए मैं वापस आ गया।
[18:55] मेरी वाइफ ने मुझे गौर से देखा।
[18:58] उसे शायद अंदाजा हो गया था कि मैं पूरी बात नहीं बता रहा।
[19:00] मगर बच्चों के सामने उसने कुछ नहीं कहा।
[19:04] चाचा रफीक अलबत्ता खामोश नहीं थे।
[19:07] उन्होंने सुबह मुझे अलग बुलाकर कहा फैसल पुत्त अब इस जगह दोबारा मत जाना।
[19:13] और अगर जाना भी पड़े तो किसी समझदार बंदे को अपने साथ लेकर जाना।
[19:19] मैंने कहा चाचा मैंने सिर्फ एक जंग लगा दरवाजा ही तो खोला था।
[19:23] वो बोले कभी-कभी दरवाजा चीज का नहीं होता।
[19:26] हद का होता है। तुमने हद तोड़ी है।
[19:26] अदान भाई मैंने उनकी
[19:29] तुमने हद तोड़ी है।
[19:29] अदान भाई मैंने उनकी बात सुनी मगर दिल से नहीं मानी।
[19:32] बाहर रहने वाला आदमी था।
[19:35] तालीम याफ्ता चीजों को लॉजिकली देखने वाला।
[19:39] मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि रात, अकेलापन, पुराना मंदिर, खौफनाक माहौल शायद सब कुछ मेरे दिमाग ने क्रिएट किया था।
[19:49] मैंने खुद को यही समझाया कि मुझे इस माहौल से कुछ दिन दूर रहना चाहिए।
[19:55] बच्चों का भी मूड खराब हो गया था।
[19:55] भाई भी परेशान थी।
[19:58] इसलिए मैंने फैसला किया कि जमीन का मामला फिलहाल छोड़ देते हैं।
[20:03] पहले बच्चों को नॉर्थ का ट्रिप करवा देते हैं।
[20:05] दो दिन बाद हम गांव से निकल गए।
[20:10] हमारी गाड़ी सफेद टोटा पडो थी।
[20:10] बच्चों का मूड बेहतर हो गया था।
[20:13] मुस्तफा बार-बार कैमरा निकालकर वीडियो बना रहा था।
[20:16] अरहम माउंटेन देखने के लिए एक्साइटेड था और मरियम हर थोड़ी देर बाद पूछती बाबा स्नो मिलेगी।
[20:26] वाइफ खामोश थी वो बच्चों के सामने नॉर्मल रहने की कोशिश कर रही थी।
[20:26] मगर मुझे
[20:30] नॉर्मल रहने की कोशिश कर रही थी। मगर मुझे पता था वो अभी भी इस रात के बारे में सोच
[20:32] पता था वो अभी भी इस रात के बारे में सोच रही है। जब भी गाड़ी के शीशे में कोई
[20:35] रही है। जब भी गाड़ी के शीशे में कोई रिफ्लेक्शन आता है या रोड साइड पर कोई
[20:38] रिफ्लेक्शन आता है या रोड साइड पर कोई पुराना दरख्त नजर आता। वो एक लम्हे के लिए
[20:41] पुराना दरख्त नजर आता। वो एक लम्हे के लिए चौंक जाती। मैंने कहा अब रिलैक्स करो यहां
[20:47] चौंक जाती। मैंने कहा अब रिलैक्स करो यहां कोई नहीं आएगा। वो बोली फैसल
[20:51] कोई नहीं आएगा। वो बोली फैसल चाचा की बातें सुनी।
[20:53] चाचा की बातें सुनी। उन्होंने कहा कि कुछ चीज तुमने आजाद कर
[20:56] उन्होंने कहा कि कुछ चीज तुमने आजाद कर दी। मैं खामोश हो गया। मैंने कोई जवाब
[20:59] दी। मैं खामोश हो गया। मैंने कोई जवाब नहीं दिया। हम पहले इस्लामाबाद पहुंचे।
[21:02] नहीं दिया। हम पहले इस्लामाबाद पहुंचे। वहां थोड़ी देर रुके। फिर आगे पहाड़ी
[21:04] वहां थोड़ी देर रुके। फिर आगे पहाड़ी इलाके की तरफ निकल गए। प्लान ये था कि रात
[21:07] इलाके की तरफ निकल गए। प्लान ये था कि रात आराम आराम से सफर करेंगे। रात किसी अच्छे
[21:10] आराम आराम से सफर करेंगे। रात किसी अच्छे होटल्स में रुकेंगे। और अगले दिन आगे
[21:12] होटल्स में रुकेंगे। और अगले दिन आगे जाएंगे। मैं उस रूट पर पहली बार फैमिली के
[21:15] जाएंगे। मैं उस रूट पर पहली बार फैमिली के साथ जा रहा था। इसलिए मुझे डेस्टिनेशन का
[21:18] साथ जा रहा था। इसलिए मुझे डेस्टिनेशन का इतना आईडिया नहीं था। शाम के करीब हम एक
[21:21] इतना आईडिया नहीं था। शाम के करीब हम एक पेट्रोल पंप पे रुके। वहां साथ ही एक छोटी
[21:25] पेट्रोल पंप पे रुके। वहां साथ ही एक छोटी सी टक शॉप थी। बच्चों ने चिप्स लिए। मरियम
[21:27] सी टक शॉप थी। बच्चों ने चिप्स लिए। मरियम ने जूस लिया और मेरी वाइफ ने चाय ली।
[21:30] ने जूस लिया और मेरी वाइफ ने चाय ली। मैंने भी गाड़ी से उतर कर थोड़ा वॉक किया।
[21:33] मैंने भी गाड़ी से उतर कर थोड़ा वॉक किया। उस वक्त फ्यूल टैंक आधे से थोड़ा कम था।
[21:36] उस वक्त फ्यूल टैंक आधे से थोड़ा कम था। वाइफ कहती है, फैसल फ्यूल डलवा लें। आगे
[21:40] वाइफ कहती है, फैसल फ्यूल डलवा लें। आगे पहाड़ी रास्ता है। मैंने मीटर देखा और कहा
[21:43] पहाड़ी रास्ता है। मैंने मीटर देखा और कहा अभी काफी है। आगे कोई बड़ा पंप आएगा तो
[21:47] अभी काफी है। आगे कोई बड़ा पंप आएगा तो फुल करवा लूंगा। यह बात मैंने बहुत
[21:49] फुल करवा लूंगा। यह बात मैंने बहुत कॉन्फिडेंस से कही थी। मगर आज भी जब याद
[21:52] कॉन्फिडेंस से कही थी। मगर आज भी जब याद आती है तो दिल करता है काश मैं उसी वक्त
[21:55] आती है तो दिल करता है काश मैं उसी वक्त फ्यूल डलवा लेता। हम दोबारा रोड पर आ गए।
[21:58] फ्यूल डलवा लेता। हम दोबारा रोड पर आ गए। शुरू में ट्रैफिक था। फिर आहिस्ता-आहिस्ता
[22:01] शुरू में ट्रैफिक था। फिर आहिस्ता-आहिस्ता कम होने लगा। शाम रात में बदल गई। रोड तंग
[22:06] कम होने लगा। शाम रात में बदल गई। रोड तंग होती गई। मोड़ बढ़ते गए और आबादी पीछे रह
[22:10] होती गई। मोड़ बढ़ते गए और आबादी पीछे रह गई। कहीं-कहीं दूर पहाड़ों पर चंद लाइट्स
[22:13] गई। कहीं-कहीं दूर पहाड़ों पर चंद लाइट्स नजर आती। फिर वह भी गायब हो जाती। वाइफ ने
[22:17] नजर आती। फिर वह भी गायब हो जाती। वाइफ ने एक बार फिर पूछा पंप नहीं आया अभी तक।
[22:20] एक बार फिर पूछा पंप नहीं आया अभी तक। मैंने कहा आ जाएगा टेंशन ना लो। लेकिन अब
[22:24] मैंने कहा आ जाएगा टेंशन ना लो। लेकिन अब मुझे खुद भी टेंशन होने लगी थी। फ्यूल
[22:26] मुझे खुद भी टेंशन होने लगी थी। फ्यूल मीटर आखिरी क्वार्टर पर आ चुका था। मैंने
[22:30] मीटर आखिरी क्वार्टर पर आ चुका था। मैंने स्पीड कम कर दी। कोशिश कर रहा था फ्यूल बच
[22:33] स्पीड कम कर दी। कोशिश कर रहा था फ्यूल बच जाए। बच्चे पीछे थक कर सो चुके थे। गाड़ी
[22:36] जाए। बच्चे पीछे थक कर सो चुके थे। गाड़ी के अंदर सिर्फ इंजन की आवाज, वाइफ की
[22:39] के अंदर सिर्फ इंजन की आवाज, वाइफ की हल्की सांसे और बाहर पहाड़ी रोड का
[22:42] हल्की सांसे और बाहर पहाड़ी रोड का अंधेरा। फिर सामने से गाड़ी आई। गाड़ी
[22:46] अंधेरा। फिर सामने से गाड़ी आई। गाड़ी ऑपोजिट साइड से आहिस्ता-आहिस्ता गुजरी।
[22:49] ऑपोजिट साइड से आहिस्ता-आहिस्ता गुजरी। अंदर एक फैमिली बैठी हुई थी। मर्द
[22:52] अंदर एक फैमिली बैठी हुई थी। मर्द ड्राइविंग सीट पर औरत साथ पीछे दो बच्चे।
[22:55] ड्राइविंग सीट पर औरत साथ पीछे दो बच्चे। मगर अजीब बात यह थी कि जब वो गाड़ी हमारे
[22:58] मगर अजीब बात यह थी कि जब वो गाड़ी हमारे बराबर से गुजरी तो सब के सब हमारी तरफ देख
[23:02] बराबर से गुजरी तो सब के सब हमारी तरफ देख रहे थे। ऐसे नहीं जैसे आम लोग रोड पर
[23:05] रहे थे। ऐसे नहीं जैसे आम लोग रोड पर देखते हैं। ऐसे जैसे उन्हें पहले से मालूम
[23:08] देखते हैं। ऐसे जैसे उन्हें पहले से मालूम हो कि हम कहां फंसने वाले हैं। वाइब ने
[23:12] हो कि हम कहां फंसने वाले हैं। वाइब ने फौरन कहा फैसल उन लोगों ने बहुत अजीब तरह
[23:15] फौरन कहा फैसल उन लोगों ने बहुत अजीब तरह देखा। मैंने हल्के लहजे में कहा पहाड़ी
[23:19] देखा। मैंने हल्के लहजे में कहा पहाड़ी इलाके में लोग वैसे भी रोड पर स्ट्रेंजर्स
[23:22] इलाके में लोग वैसे भी रोड पर स्ट्रेंजर्स को देखते हैं। लेकिन सच ये था कि मुझे भी
[23:25] को देखते हैं। लेकिन सच ये था कि मुझे भी वो नजर अच्छी नहीं लगी थी। कुछ देर बाद
[23:28] वो नजर अच्छी नहीं लगी थी। कुछ देर बाद गाड़ी ने पहला झटका लिया। मैंने एक्सलरेटर
[23:31] गाड़ी ने पहला झटका लिया। मैंने एक्सलरेटर हल्का किया। गाड़ी चंद सेकंड चली। फिर
[23:34] हल्का किया। गाड़ी चंद सेकंड चली। फिर दूसरा झटका और इंजन ने खांसी जैसी आवाज
[23:37] दूसरा झटका और इंजन ने खांसी जैसी आवाज निकाली और गाड़ी आहिस्ताआहिस्ता बंद हो
[23:40] निकाली और गाड़ी आहिस्ताआहिस्ता बंद हो गई। मैंने गाड़ी साइड पर लगाई फ्यूल खत्म
[23:43] गई। मैंने गाड़ी साइड पर लगाई फ्यूल खत्म हो चुका था। अदान भाई उस वक्त जो
[23:46] हो चुका था। अदान भाई उस वक्त जो शर्मिंदगीगी और खौफ एक साथ मेरे अंदर आए
[23:49] शर्मिंदगीगी और खौफ एक साथ मेरे अंदर आए वो बयान करना आसान नहीं। एक तरफ फैमिली,
[23:52] वो बयान करना आसान नहीं। एक तरफ फैमिली, रात का वक्त, पहाड़ी, सुनसान रोड और दूसरी
[23:55] रात का वक्त, पहाड़ी, सुनसान रोड और दूसरी तरफ मेरी अपनी गलती। वाइफ ने मुझे देखा
[23:58] तरफ मेरी अपनी गलती। वाइफ ने मुझे देखा मगर कुछ नहीं कहा। उसका खामोश रहना मेरे
[24:02] मगर कुछ नहीं कहा। उसका खामोश रहना मेरे लिए ज्यादा भारी था। मैंने इग्निशन दोबारा
[24:06] लिए ज्यादा भारी था। मैंने इग्निशन दोबारा ट्राई किया मगर फायदा नहीं हुआ। गाड़ी डेड
[24:09] ट्राई किया मगर फायदा नहीं हुआ। गाड़ी डेड हो चुकी थी। मैंने हेडलाइट्स बंद की ताकि
[24:12] हो चुकी थी। मैंने हेडलाइट्स बंद की ताकि बैटरी सेफ हो जाए। जैसे ही हेडलाइट्स बंद
[24:15] बैटरी सेफ हो जाए। जैसे ही हेडलाइट्स बंद हुई, पूरी दुनिया एकदम अंधेरे में चली गई।
[24:19] हुई, पूरी दुनिया एकदम अंधेरे में चली गई। वहां इतना सन्नाटा था कि मुझे गाड़ी के
[24:22] वहां इतना सन्नाटा था कि मुझे गाड़ी के अंदर बच्चों की सांस सुनाई दे रही थी।
[24:24] अंदर बच्चों की सांस सुनाई दे रही थी। बाहर झीगरों की आवाज आ रही थी। कभी किसी
[24:28] बाहर झीगरों की आवाज आ रही थी। कभी किसी दूर के परिंदे या जानवर की हल्की सी आवाज
[24:31] दूर के परिंदे या जानवर की हल्की सी आवाज फिर दोबारा खामोशी। दूर बहुत नीचे या शायद
[24:35] फिर दोबारा खामोशी। दूर बहुत नीचे या शायद दूसरी पहाड़ी पर चंद बत्तियां जल रही थी।
[24:39] दूसरी पहाड़ी पर चंद बत्तियां जल रही थी। मगर वो इतनी दूर लग रही थी कि अंदाजा नहीं
[24:41] मगर वो इतनी दूर लग रही थी कि अंदाजा नहीं था। वहां पहुंचना मुमकिन भी है या नहीं।
[24:45] था। वहां पहुंचना मुमकिन भी है या नहीं। इन्होंने आहिस्ता से पूछा अब क्या करें?
[24:47] इन्होंने आहिस्ता से पूछा अब क्या करें? मैंने फोन देखा नेटवर्क नहीं था। मैंने
[24:50] मैंने फोन देखा नेटवर्क नहीं था। मैंने कहा मैं डॉट लेकर थोड़ा आगे पीछे देखता
[24:52] कहा मैं डॉट लेकर थोड़ा आगे पीछे देखता हूं। शायद कोई घर हो, कोई गांव हो या कोई
[24:55] हूं। शायद कोई घर हो, कोई गांव हो या कोई बंदा मिल जाए। वाइफ ने फौरन कहा, नहीं
[24:59] बंदा मिल जाए। वाइफ ने फौरन कहा, नहीं फैसल हमें अकेला छोड़कर मत जाए। मैंने
[25:02] फैसल हमें अकेला छोड़कर मत जाए। मैंने बच्चों की तरफ देखा। मुस्तफा जाग चुका था।
[25:05] बच्चों की तरफ देखा। मुस्तफा जाग चुका था। अरहम भी आंखें मल रहा था। मरीमा आधी नींद
[25:09] अरहम भी आंखें मल रहा था। मरीमा आधी नींद में थी। वाइफ से लिपटी हुई थी। मैंने वाइफ
[25:12] में थी। वाइफ से लिपटी हुई थी। मैंने वाइफ को तसल्ली दी। मैं ज्यादा दूर नहीं
[25:13] को तसल्ली दी। मैं ज्यादा दूर नहीं जाऊंगा। बस लाइट्स तक देख कर आता हूं। तुम
[25:18] जाऊंगा। बस लाइट्स तक देख कर आता हूं। तुम दरवाजा लॉक रखना। किसी सूरत गाड़ी मत
[25:21] दरवाजा लॉक रखना। किसी सूरत गाड़ी मत खोलना। जब तक मैं वापस ना आऊं शीशा भी
[25:24] खोलना। जब तक मैं वापस ना आऊं शीशा भी मुकम्मल नीचे मत करना। मैंने उसे फोन और
[25:27] मुकम्मल नीचे मत करना। मैंने उसे फोन और टॉर्च की एक्स्ट्रा लाइट दी। कोई डेंजरस
[25:31] टॉर्च की एक्स्ट्रा लाइट दी। कोई डेंजरस चीज नहीं। बस जो सफर में इमरजेंसी के लिए
[25:33] चीज नहीं। बस जो सफर में इमरजेंसी के लिए रखी होती है वो भी उसके करीब रख दी ताकि
[25:36] रखी होती है वो भी उसके करीब रख दी ताकि उसे कुछ सिक्योरिटी फील हो। वाइफ ने मेरा
[25:40] उसे कुछ सिक्योरिटी फील हो। वाइफ ने मेरा हाथ पकड़ा। फैसल प्लीज जल्दी आना। मैंने
[25:43] हाथ पकड़ा। फैसल प्लीज जल्दी आना। मैंने कहा बस 10-15 मिनट। मैं गाड़ी से बाहर
[25:46] कहा बस 10-15 मिनट। मैं गाड़ी से बाहर निकला तो हवा बहुत ठंडी थी। मैंने दरवाजा
[25:50] निकला तो हवा बहुत ठंडी थी। मैंने दरवाजा बंद किया। वाइफ अपनी अंदर से लॉक कर दिया।
[25:53] बंद किया। वाइफ अपनी अंदर से लॉक कर दिया। गाड़ी के शीशे के पीछे उसका चेहरा फेंट सा
[25:55] गाड़ी के शीशे के पीछे उसका चेहरा फेंट सा नजर आ रहा था। मरियम अब मुकम्मल जाग गई थी
[25:59] नजर आ रहा था। मरियम अब मुकम्मल जाग गई थी और रो रही थी। मैंने हाथ के इशारे से कहा
[26:02] और रो रही थी। मैंने हाथ के इशारे से कहा बस आता हूं। फिर मैं टॉर्च लेकर रोड पर
[26:05] बस आता हूं। फिर मैं टॉर्च लेकर रोड पर आगे चलने लगा। अदनान भाई अगले सुनसान रोड
[26:08] आगे चलने लगा। अदनान भाई अगले सुनसान रोड पर चलना और बात है। लेकिन जब आपको पता हो
[26:11] पर चलना और बात है। लेकिन जब आपको पता हो कि आपके बीवी बच्चे पीछे गाड़ी में लॉक है
[26:14] कि आपके बीवी बच्चे पीछे गाड़ी में लॉक है तो फ्यूल खत्म है। नेटवर्क नहीं है और आप
[26:17] तो फ्यूल खत्म है। नेटवर्क नहीं है और आप खुद नहीं मालूम मदद कहां से मिलेगी। तो हर
[26:21] खुद नहीं मालूम मदद कहां से मिलेगी। तो हर कदम भारी हो जाता है। मैं आगे तकरीबन 10
[26:24] कदम भारी हो जाता है। मैं आगे तकरीबन 10 मिनट चला। रोड के एक तरफ पहाड़ की दीवार
[26:27] मिनट चला। रोड के एक तरफ पहाड़ की दीवार थी। दूसरी तरफ ढलवान नीचे दूर लाइट्स थी।
[26:31] थी। दूसरी तरफ ढलवान नीचे दूर लाइट्स थी। मगर उन तक कोई साफ रास्ता नहीं जा रहा था।
[26:35] मगर उन तक कोई साफ रास्ता नहीं जा रहा था। एक जगह मुझे कच्चा सा पाथ दिखाई दिया जो
[26:38] एक जगह मुझे कच्चा सा पाथ दिखाई दिया जो नीचे उतर रहा था। मैंने टॉर्च मारी। पाथ
[26:41] नीचे उतर रहा था। मैंने टॉर्च मारी। पाथ पत्थरों से भरा हुआ था। मैंने सोचा अगर
[26:44] पत्थरों से भरा हुआ था। मैंने सोचा अगर मैं नीचे चला गया और रास्ता गलत निकला तो
[26:47] मैं नीचे चला गया और रास्ता गलत निकला तो वापस आते-आते बहुत वक्त लग जाएगा। मैं भी
[26:51] वापस आते-आते बहुत वक्त लग जाएगा। मैं भी यही सोच रहा था कि मुझे अपने पीछे कदमों
[26:54] यही सोच रहा था कि मुझे अपने पीछे कदमों की आवाज आई। मैं फौरन मुड़ा कोई नहीं था।
[26:57] की आवाज आई। मैं फौरन मुड़ा कोई नहीं था। मैंने टॉर्च रोड पर पहाड़ की तरफ फिर
[27:00] मैंने टॉर्च रोड पर पहाड़ की तरफ फिर ढुलवान की तरफ मारी। कुछ नहीं बस तारीखी
[27:04] ढुलवान की तरफ मारी। कुछ नहीं बस तारीखी अंधेरा।
[27:05] अंधेरा। फिर बहुत हल्की पायल की आवाज आई। मेरा दिल
[27:08] फिर बहुत हल्की पायल की आवाज आई। मेरा दिल एकदम जोर से धड़का। मैंने खुद को समझाया
[27:11] एकदम जोर से धड़का। मैंने खुद को समझाया कि नहीं यह वहम है। शायद इस जानवर के गले
[27:15] कि नहीं यह वहम है। शायद इस जानवर के गले में बेल हो। शायद पत्थर से कोई आवाज आई
[27:18] में बेल हो। शायद पत्थर से कोई आवाज आई हो। लेकिन आवाज दोबारा आई। अब वो रोड के
[27:21] हो। लेकिन आवाज दोबारा आई। अब वो रोड के बिल्कुल किनारे से आ रही थी। मैंने टॉर्च
[27:24] बिल्कुल किनारे से आ रही थी। मैंने टॉर्च उस तरफ मारी कुछ नहीं था। मगर मुझे ऐसा
[27:27] उस तरफ मारी कुछ नहीं था। मगर मुझे ऐसा लगा जैसे अंधेरे में कोई सफेद सा कपड़ा एक
[27:30] लगा जैसे अंधेरे में कोई सफेद सा कपड़ा एक लम्हे के लिए हल्का और फिर पत्थर के पीछे
[27:33] लम्हे के लिए हल्का और फिर पत्थर के पीछे गायब हो गया। मेरे हाथ ठंडे पड़ गए। मैंने
[27:37] गायब हो गया। मेरे हाथ ठंडे पड़ गए। मैंने फैसला किया कि मैं वापस गाड़ी की तरफ जाता
[27:39] फैसला किया कि मैं वापस गाड़ी की तरफ जाता हूं। मदद बाद में देखी जाएगी। पहले फैमिली
[27:43] हूं। मदद बाद में देखी जाएगी। पहले फैमिली के पास रहना जरूरी है। मैं वापस मुड़ा ही
[27:46] के पास रहना जरूरी है। मैं वापस मुड़ा ही था कि रोड के किनारे एक आदमी खड़ा नजर
[27:49] था कि रोड के किनारे एक आदमी खड़ा नजर आया। चादर ओढ़े हुए दरमियानी उम्र चेहरा
[27:53] आया। चादर ओढ़े हुए दरमियानी उम्र चेहरा आधा शैडो में। मैंने उसे आते नहीं देखा
[27:56] आधा शैडो में। मैंने उसे आते नहीं देखा था। वो बस वहां खड़ा था। जैसे पहले से
[28:00] था। वो बस वहां खड़ा था। जैसे पहले से मौजूद हो। उसने कहा गाड़ी बंद हो गई है।
[28:04] मौजूद हो। उसने कहा गाड़ी बंद हो गई है। मैं चंद सेकंड ही उसे देखता रहा। फिर बोला
[28:06] मैं चंद सेकंड ही उसे देखता रहा। फिर बोला जी फ्यूल खत्म हो गया। फैमिली गाड़ी में
[28:09] जी फ्यूल खत्म हो गया। फैमिली गाड़ी में है। उसने रोड के नीचे वाले पाथ की तरफ
[28:12] है। उसने रोड के नीचे वाले पाथ की तरफ इशारा किया। नीचे घर है मेरा ही घर है। आप
[28:16] इशारा किया। नीचे घर है मेरा ही घर है। आप फैमिली को ले आए। रात रोड पर अच्छी नहीं
[28:20] फैमिली को ले आए। रात रोड पर अच्छी नहीं गुजरती।
[28:21] गुजरती। मैंने फौरन ट्रस्ट नहीं किया। मैंने कहा
[28:23] मैंने फौरन ट्रस्ट नहीं किया। मैंने कहा अगर फ्यूल का बंदोबस्त हो जाए तो बेहतर
[28:26] अगर फ्यूल का बंदोबस्त हो जाए तो बेहतर है। फैमिली इस वक्त नीचे ले जाना मुश्किल
[28:29] है। फैमिली इस वक्त नीचे ले जाना मुश्किल है। बोला रात को फ्यूल मुश्किल से मिलेगा।
[28:32] है। बोला रात को फ्यूल मुश्किल से मिलेगा। मगर आप अकेले नहीं बैठ सकते वहां। औरतें
[28:36] मगर आप अकेले नहीं बैठ सकते वहां। औरतें और बच्चे साथ हैं। उसकी बात प्रैक्टिकल थी
[28:39] और बच्चे साथ हैं। उसकी बात प्रैक्टिकल थी मगर फिर भी मैं मोहताजद था। मैंने कहा मैं
[28:42] मगर फिर भी मैं मोहताजद था। मैंने कहा मैं पहले वापस जाकर बीवी से बात करता हूं। वो
[28:46] पहले वापस जाकर बीवी से बात करता हूं। वो बोला ठीक है मैं यहीं हूं। मैं
[28:48] बोला ठीक है मैं यहीं हूं। मैं जल्दी-जल्दी वापस गाड़ी की तरफ चला।
[28:51] जल्दी-जल्दी वापस गाड़ी की तरफ चला। रास्ते में बार-बार पीछे देखता रहा। वो
[28:54] रास्ते में बार-बार पीछे देखता रहा। वो आदमी वहीं खड़ा था। लेकिन अजीब बात यह थी
[28:58] आदमी वहीं खड़ा था। लेकिन अजीब बात यह थी कि उसके पास कोई टॉर्च नहीं थी। इतने
[29:00] कि उसके पास कोई टॉर्च नहीं थी। इतने अंधेरे में वो वहां कैसे खड़ा था। यह बात
[29:04] अंधेरे में वो वहां कैसे खड़ा था। यह बात मुझे उस वक्त भी अजीब लगी। जब मैं गाड़ी
[29:07] मुझे उस वक्त भी अजीब लगी। जब मैं गाड़ी के करीब पहुंचा तो गाड़ी के अंदर बच्चों
[29:09] के करीब पहुंचा तो गाड़ी के अंदर बच्चों की हल्की भी रोने की आवाज आ रही थी। मैंने
[29:12] की हल्की भी रोने की आवाज आ रही थी। मैंने शीशे पर नॉक किया। मुस्तफा ने मुझे देखा
[29:15] शीशे पर नॉक किया। मुस्तफा ने मुझे देखा और लॉक खोला। मैंने दरवाजा खोला तो फौरन
[29:18] और लॉक खोला। मैंने दरवाजा खोला तो फौरन पूछा, वाइफ कहां है? ड्राइविंग सीट के साथ
[29:21] पूछा, वाइफ कहां है? ड्राइविंग सीट के साथ वाली सीट खाली थी। पीछे बच्चों के साथ भी
[29:24] वाली सीट खाली थी। पीछे बच्चों के साथ भी नहीं थी। मेरे अंदर जैसे किसी ने झटका
[29:28] नहीं थी। मेरे अंदर जैसे किसी ने झटका मारा हो। मैंने दोबारा पूछा, मम्मा कहां
[29:31] मारा हो। मैंने दोबारा पूछा, मम्मा कहां है तुम्हारी? मुस्तफा की आवाज कहां पर रही
[29:34] है तुम्हारी? मुस्तफा की आवाज कहां पर रही थी? बाबा मम्मा बाहर गई थी। बाहर क्यों
[29:38] थी? बाबा मम्मा बाहर गई थी। बाहर क्यों गई? मैंने मना किया था। अरम ने रोते हुए
[29:42] गई? मैंने मना किया था। अरम ने रोते हुए कहा एक आंटी और अंकल आए थे। मम्मा ने शीशा
[29:45] कहा एक आंटी और अंकल आए थे। मम्मा ने शीशा थोड़ा सा नीचे किया था। आंटी ने कहा नीचे
[29:48] थोड़ा सा नीचे किया था। आंटी ने कहा नीचे घर है। हेल्प मिल जाएगी। मगर मम्मा कहने
[29:51] घर है। हेल्प मिल जाएगी। मगर मम्मा कहने लगी कि मैं बस बाहर देख रही हूं। तुम लोग
[29:55] लगी कि मैं बस बाहर देख रही हूं। तुम लोग लॉक रहना। फिर वह चली गई। अदान भाई उस
[29:58] लॉक रहना। फिर वह चली गई। अदान भाई उस वक्त मुझे लगा मेरी टांगों में जान नहीं
[30:00] वक्त मुझे लगा मेरी टांगों में जान नहीं रही। मैंने बच्चों को सख्ती से कहा दरवाजा
[30:03] रही। मैंने बच्चों को सख्ती से कहा दरवाजा लॉक करो कि किसी के लिए भी ना खोलना। मेरे
[30:07] लॉक करो कि किसी के लिए भी ना खोलना। मेरे लिए भी नहीं जब तक मैं अपना नाम लेकर ना
[30:09] लिए भी नहीं जब तक मैं अपना नाम लेकर ना बोलूं। मरियम रोकर बोली बाबा मम्मा को ले
[30:12] बोलूं। मरियम रोकर बोली बाबा मम्मा को ले आए। मैंने डॉर्च उठाई और गाड़ी के
[30:15] आए। मैंने डॉर्च उठाई और गाड़ी के इर्दगिर्द वाइफ को पुकारना शुरू किया। कोई
[30:19] इर्दगिर्द वाइफ को पुकारना शुरू किया। कोई जवाब नहीं। इस बार बहुत दूर से हल्की सी
[30:22] जवाब नहीं। इस बार बहुत दूर से हल्की सी औरत की हंसी आई। महीना की हंसी नहीं थी।
[30:25] औरत की हंसी आई। महीना की हंसी नहीं थी। यह वही हंसी थी जो मैंने मंदिर में सुनी
[30:27] यह वही हंसी थी जो मैंने मंदिर में सुनी थी। मैंने रोड के किनारे नीचे उतरते हुए
[30:30] थी। मैंने रोड के किनारे नीचे उतरते हुए पाथ पर टॉर्च मारी। वहां मिट्टी में फ्रेश
[30:34] पाथ पर टॉर्च मारी। वहां मिट्टी में फ्रेश कदमों जैसे निशान थे। मैं नीचे उतरने लगा
[30:37] कदमों जैसे निशान थे। मैं नीचे उतरने लगा तो वही चादर वाला आदमी अचानक मेरे करीब आ
[30:40] तो वही चादर वाला आदमी अचानक मेरे करीब आ गया। मैं घबरा कर पीछे हुआ आप यहां कैसे?
[30:44] गया। मैं घबरा कर पीछे हुआ आप यहां कैसे? वो बोला आपकी बीवी उस तरफ गई है। मैंने
[30:48] वो बोला आपकी बीवी उस तरफ गई है। मैंने गुस्से से कहा आप लोगों ने ही तो बात की
[30:50] गुस्से से कहा आप लोगों ने ही तो बात की थी ना उससे। आपकी बीवी कहां है? वो परेशान
[30:53] थी ना उससे। आपकी बीवी कहां है? वो परेशान लग रहा था। मेरी बीवी ने बात की थी मगर
[30:56] लग रहा था। मेरी बीवी ने बात की थी मगर आपकी बीवी गाड़ी से ज्यादा दूर नहीं गई।
[30:59] आपकी बीवी गाड़ी से ज्यादा दूर नहीं गई। जल्दी चलें। उस तरफ एक पुराना गड़ा है।
[31:02] जल्दी चलें। उस तरफ एक पुराना गड़ा है। रात को खतरा है। मैं सोचने का वक्त खो
[31:05] रात को खतरा है। मैं सोचने का वक्त खो चुका था। वाइफ को ढूंढना था। हम दोनों
[31:08] चुका था। वाइफ को ढूंढना था। हम दोनों नीचे की तरफ उतरे। रास्ता बहुत खराब था।
[31:11] नीचे की तरफ उतरे। रास्ता बहुत खराब था। पत्थर, [संगीत] खुश झाड़ियां और मिट्टी
[31:14] पत्थर, [संगीत] खुश झाड़ियां और मिट्टी में वाइफ का नाम पुकारता रहा। टॉर्च की
[31:17] में वाइफ का नाम पुकारता रहा। टॉर्च की लाइट कभी रास्ते पर पड़ती, कभी झाड़ियों
[31:20] लाइट कभी रास्ते पर पड़ती, कभी झाड़ियों पर। दो बार मुझे लगा जैसे कोई सफेद चीज
[31:23] पर। दो बार मुझे लगा जैसे कोई सफेद चीज हमारे आगेआगे जा रही है। मगर जब रोशनी
[31:26] हमारे आगेआगे जा रही है। मगर जब रोशनी मारता तो कुछ ना होता। फिर वो आदमी रुक
[31:29] मारता तो कुछ ना होता। फिर वो आदमी रुक गया। उसने आहिस्ता से कहा वो रही। मैंने
[31:33] गया। उसने आहिस्ता से कहा वो रही। मैंने टॉर्च आगे मारी। मेरी वाइफ एक गड़े के
[31:35] टॉर्च आगे मारी। मेरी वाइफ एक गड़े के किनारे खड़ी थी। बिल्कुल खामोश।
[31:39] किनारे खड़ी थी। बिल्कुल खामोश। उसका चेहरा नीचे था जैसे वो गड़े के अंदर
[31:42] उसका चेहरा नीचे था जैसे वो गड़े के अंदर कुछ देख रही हो। दुपट्टा कांधे से सरक
[31:45] कुछ देख रही हो। दुपट्टा कांधे से सरक चुका था। हाथ सीधे जिस्म के साथ थे और वह
[31:48] चुका था। हाथ सीधे जिस्म के साथ थे और वह इतनी स्टिल खड़ी थी। कि मुझे एक लम्हे के
[31:51] इतनी स्टिल खड़ी थी। कि मुझे एक लम्हे के लिए लगा शायद वो मेरी वाइफ नहीं कोई और
[31:54] लिए लगा शायद वो मेरी वाइफ नहीं कोई और है। मैंने आहिस्ता से कहा हिना कोई जवाब
[31:59] है। मैंने आहिस्ता से कहा हिना कोई जवाब नहीं। मैं करीब गया उसके कांधे पर हाथ
[32:02] नहीं। मैं करीब गया उसके कांधे पर हाथ रखा। वो अचानक मुड़ी उसकी आंखें खुली हुई
[32:06] रखा। वो अचानक मुड़ी उसकी आंखें खुली हुई थी जैसे वो किसी और जगह से वापस आई हो।
[32:09] थी जैसे वो किसी और जगह से वापस आई हो। पहले वो मुझे पहचान नहीं पाई। फिर एकदम
[32:12] पहले वो मुझे पहचान नहीं पाई। फिर एकदम घबरा कर बोली फैसल बच्चे कहां है? मैंने
[32:16] घबरा कर बोली फैसल बच्चे कहां है? मैंने कहा तुम यहां क्या कर रही हो? वो बोली मैं
[32:20] कहा तुम यहां क्या कर रही हो? वो बोली मैं मैं तुम्हें ढूंढने आई थी। मुझे लगा तुम
[32:22] मैं तुम्हें ढूंढने आई थी। मुझे लगा तुम नीचे गए हो। तुम घड़े में क्या देख रही
[32:25] नीचे गए हो। तुम घड़े में क्या देख रही थी? वो खामोश हो गई। फिर बहुत आहिस्ता
[32:28] थी? वो खामोश हो गई। फिर बहुत आहिस्ता बोली मुझे नहीं पता। वो आदमी पीछे खड़ा
[32:31] बोली मुझे नहीं पता। वो आदमी पीछे खड़ा था। उसने कहा रात यहां रुकना ठीक नहीं। आप
[32:35] था। उसने कहा रात यहां रुकना ठीक नहीं। आप लोग मेरे घर चलें। सुबह मैं फ्यूल का
[32:37] लोग मेरे घर चलें। सुबह मैं फ्यूल का बंदोबस्त करवा दूंगा। मैंने हिना का हाथ
[32:40] बंदोबस्त करवा दूंगा। मैंने हिना का हाथ पकड़ा। उसका हाथ बर्फ की तरह ठंडा था। वो
[32:43] पकड़ा। उसका हाथ बर्फ की तरह ठंडा था। वो चल तो रही थी मगर बार-बार पीछे घड़े की
[32:46] चल तो रही थी मगर बार-बार पीछे घड़े की तरफ देख रही थी जैसे वहां कुछ रह गया हो।
[32:49] तरफ देख रही थी जैसे वहां कुछ रह गया हो। गाड़ी के पास पहुंचे तो बच्चे हिना से
[32:52] गाड़ी के पास पहुंचे तो बच्चे हिना से लिपट गए। मुस्तफा की आंखें रो-रो कर सुर्ख
[32:55] लिपट गए। मुस्तफा की आंखें रो-रो कर सुर्ख हो चुकी थी। मैंने उसे सीने से लगाया मगर
[32:58] हो चुकी थी। मैंने उसे सीने से लगाया मगर खुद मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या
[33:01] खुद मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करूं। वो आदमी बोला मेरा नाम नज़र है। घर
[33:04] करूं। वो आदमी बोला मेरा नाम नज़र है। घर नीचे है। रास्ता मुश्किल है मगर ज्यादा
[33:07] नीचे है। रास्ता मुश्किल है मगर ज्यादा दूर नहीं। आप गाड़ी लॉक कर दें। सुबह तक
[33:11] दूर नहीं। आप गाड़ी लॉक कर दें। सुबह तक फ्यूल भी आ जाएगा और आप लोग निकल जाएंगे।
[33:13] फ्यूल भी आ जाएगा और आप लोग निकल जाएंगे। उसी वक्त उसकी बीवी भी रोड के किनारे आकर
[33:16] उसी वक्त उसकी बीवी भी रोड के किनारे आकर खड़ी हो गई। वही औरत जिसने हिना से बात की
[33:19] खड़ी हो गई। वही औरत जिसने हिना से बात की थी। सर पर शॉल, सादा लिबास, देहातीती
[33:24] थी। सर पर शॉल, सादा लिबास, देहातीती अंदाज उसने हिना से कहा, बाजी बच्चों को
[33:27] अंदाज उसने हिना से कहा, बाजी बच्चों को ले आए। रात को यहां बैठना अच्छा नहीं है।
[33:30] ले आए। रात को यहां बैठना अच्छा नहीं है। मैं अब भी मुकम्मल मुतम नहीं था। मगर
[33:33] मैं अब भी मुकम्मल मुतम नहीं था। मगर ऑप्शन नहीं थे। गाड़ी में फ्यूल नहीं,
[33:35] ऑप्शन नहीं थे। गाड़ी में फ्यूल नहीं, नेटवर्क नहीं, बच्चों की हालत खराब और
[33:38] नेटवर्क नहीं, बच्चों की हालत खराब और पाइप खुद अजीब हालत में। मैंने
[33:42] पाइप खुद अजीब हालत में। मैंने गाड़ी लॉक की जरूरी चीजें उठाई और हम सब
[33:46] गाड़ी लॉक की जरूरी चीजें उठाई और हम सब नज़र के साथ नीचे उतरने लगे। रास्ते में एक
[33:49] नज़र के साथ नीचे उतरने लगे। रास्ते में एक बार फिर पायल की आवाज आई। मैंने फौरन नज़र
[33:52] बार फिर पायल की आवाज आई। मैंने फौरन नज़र की बीवी के पांव की तरफ देखा। उसके पांव
[33:55] की बीवी के पांव की तरफ देखा। उसके पांव में कोई पायल नहीं थी। उसने मेरी तरफ देखा
[33:58] में कोई पायल नहीं थी। उसने मेरी तरफ देखा जैसे उसे पता था मैंने क्या सुना है। मगर
[34:01] जैसे उसे पता था मैंने क्या सुना है। मगर उसने कुछ नहीं कहा। और अदनान भाई उसकी
[34:05] उसने कुछ नहीं कहा। और अदनान भाई उसकी खामोशी ने मुझे और ज्यादा डरा दिया। हम
[34:08] खामोशी ने मुझे और ज्यादा डरा दिया। हम नज़र के पीछेछे नीचे उतर रहे थे। रास्ता
[34:12] नज़र के पीछेछे नीचे उतर रहे थे। रास्ता इतना खराब था कि एक कदम सोच कर रखना पड़ता
[34:15] इतना खराब था कि एक कदम सोच कर रखना पड़ता था। एक तरफ पहाड़ की काली दीवार थी, दूसरी
[34:19] था। एक तरफ पहाड़ की काली दीवार थी, दूसरी तरफ ढिलवान। नीचे अंधेरे में कहीं-कहीं
[34:22] तरफ ढिलवान। नीचे अंधेरे में कहीं-कहीं रोशनी नजर आ रही थी। मगर वो रोशनी भी
[34:25] रोशनी नजर आ रही थी। मगर वो रोशनी भी सुकून नहीं दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे
[34:28] सुकून नहीं दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी आबादी की तरफ नहीं किसी ऐसी जगह
[34:30] हम किसी आबादी की तरफ नहीं किसी ऐसी जगह जा रहे हैं जहां हमें नहीं जाना चाहिए था।
[34:33] जा रहे हैं जहां हमें नहीं जाना चाहिए था। वाइफ मेरे बिल्कुल साथ चल रही थी। मैंने
[34:36] वाइफ मेरे बिल्कुल साथ चल रही थी। मैंने उसका हाथ मजबूती से पकड़ रखा था। वो खामोश
[34:39] उसका हाथ मजबूती से पकड़ रखा था। वो खामोश थी मगर उसकी खामोशी आम खामोशी नहीं थी।
[34:42] थी मगर उसकी खामोशी आम खामोशी नहीं थी। कभी-कभी वो पीछे मुड़कर ऊपर सड़क की तरफ
[34:45] कभी-कभी वो पीछे मुड़कर ऊपर सड़क की तरफ देखती। कभी नीचे घड़े वाली तरफ। मैंने दो
[34:49] देखती। कभी नीचे घड़े वाली तरफ। मैंने दो बार पूछा हिना तबीयत ठीक है। वो हर बार
[34:52] बार पूछा हिना तबीयत ठीक है। वो हर बार सिर्फ यही कहती हां बस घर चलें। बच्चे
[34:55] सिर्फ यही कहती हां बस घर चलें। बच्चे बहुत डरे हुए थे पर यह बार-बार मेरी कमीज
[34:59] बहुत डरे हुए थे पर यह बार-बार मेरी कमीज पकड़ लेती। अरम के कदम लड़खड़ा रहे थे।
[35:02] पकड़ लेती। अरम के कदम लड़खड़ा रहे थे। मुस्तफा बड़ा था मगर उसके चेहरे पर भी खौफ
[35:05] मुस्तफा बड़ा था मगर उसके चेहरे पर भी खौफ साफ नजर आ रहा था। बहादुर बनने की कोशिश
[35:09] साफ नजर आ रहा था। बहादुर बनने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह बाप था। उसकी आंखों का
[35:11] कर रहा था लेकिन वह बाप था। उसकी आंखों का डर बढ़ सकता था। नज़र की बीवी सबसे पीछे
[35:15] डर बढ़ सकता था। नज़र की बीवी सबसे पीछे चल रही थी। उसने कोई बात नहीं कही। बस
[35:18] चल रही थी। उसने कोई बात नहीं कही। बस कभी-कभी हिना को देखती भी नजरें झुका ले
[35:21] कभी-कभी हिना को देखती भी नजरें झुका ले थी। मुझे उस औरत के इस अंदाज से भी डर लग
[35:24] थी। मुझे उस औरत के इस अंदाज से भी डर लग रहा था जैसे उसे हिना के बारे में कुछ
[35:27] रहा था जैसे उसे हिना के बारे में कुछ मालूम हो मगर वह कहना नहीं चाहती। तकरीबन
[35:29] मालूम हो मगर वह कहना नहीं चाहती। तकरीबन 20 मिनट बाद हम एक बड़े से घर के सामने
[35:32] 20 मिनट बाद हम एक बड़े से घर के सामने पहुंचे। घर पहाड़ के दामन में बना हुआ था।
[35:35] पहुंचे। घर पहाड़ के दामन में बना हुआ था। ना वो मुकम्मल गांव था ना मुकम्मल वीरान।
[35:38] ना वो मुकम्मल गांव था ना मुकम्मल वीरान। आसपास दो-तीन और घर दूर-दूर नजर आ रहे थे।
[35:42] आसपास दो-तीन और घर दूर-दूर नजर आ रहे थे। मगर उनमें रोशनी नहीं थी। नजीर का घर
[35:45] मगर उनमें रोशनी नहीं थी। नजीर का घर निस्बतन बड़ा था। चैन कुशादा दीवारें ऊंची
[35:49] निस्बतन बड़ा था। चैन कुशादा दीवारें ऊंची और एक तरफ पानी का नल दूसरी तरफ लकड़ी का
[35:53] और एक तरफ पानी का नल दूसरी तरफ लकड़ी का ढेर और पीछे की तरफ खाई का अंधेरा। दरवाजा
[35:56] ढेर और पीछे की तरफ खाई का अंधेरा। दरवाजा खुला तो अंदर से एक बूढ़ी औरत और दो बच्चे
[35:59] खुला तो अंदर से एक बूढ़ी औरत और दो बच्चे नजर आए। अजीब बात यह थी कि वो हमें देखकर
[36:02] नजर आए। अजीब बात यह थी कि वो हमें देखकर ज्यादा हैरान नहीं हुए। जैसे उन्हें पहले
[36:05] ज्यादा हैरान नहीं हुए। जैसे उन्हें पहले से मालूम हो कि रात को कोई मुसाफिर आने
[36:08] से मालूम हो कि रात को कोई मुसाफिर आने वाला है। नज़र ने हमें अंदर बिठाया और
[36:11] वाला है। नज़र ने हमें अंदर बिठाया और उसकी बीवी ने पहले पानी, फिर बच्चों के
[36:13] उसकी बीवी ने पहले पानी, फिर बच्चों के लिए रोटी और अंडे दिए। हमारे लिए दाल,
[36:17] लिए रोटी और अंडे दिए। हमारे लिए दाल, चावल और चाय ले आई। मैंने पहले मना किया
[36:20] चावल और चाय ले आई। मैंने पहले मना किया क्योंकि दिल घबरा रहा था मगर बच्चे भूखे
[36:23] क्योंकि दिल घबरा रहा था मगर बच्चे भूखे थे। नीना ने भी कहा बच्चों को कुछ खिला
[36:25] थे। नीना ने भी कहा बच्चों को कुछ खिला दें फिर देखते हैं। हम कमरे के कोने में
[36:28] दें फिर देखते हैं। हम कमरे के कोने में बैठकर खाना खाने लगे। नजीर हमारे सामने
[36:31] बैठकर खाना खाने लगे। नजीर हमारे सामने नहीं बैठा। बस थोड़ा फासले पर खड़ा रहा।
[36:34] नहीं बैठा। बस थोड़ा फासले पर खड़ा रहा। उसकी बीवी आती जाती रही। बूढ़ी औरत एक
[36:36] उसकी बीवी आती जाती रही। बूढ़ी औरत एक कमरे के दरवाजे से हमें देखती रही। खाना
[36:39] कमरे के दरवाजे से हमें देखती रही। खाना खाते हुए मैंने पहली बार हिना में वो
[36:41] खाते हुए मैंने पहली बार हिना में वो तब्दीली देखी जिसने मुझे अंदर तक हिला
[36:44] तब्दीली देखी जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया। वो एक निवाला लेती। फिर अचानक सहन
[36:47] दिया। वो एक निवाला लेती। फिर अचानक सहन के खाली कोने की तरफ देखने लगती। जैसे
[36:51] के खाली कोने की तरफ देखने लगती। जैसे वहां कोई खड़ा हो। मैं पूछता क्या हुआ? वो
[36:54] वहां कोई खड़ा हो। मैं पूछता क्या हुआ? वो फौरन कहती कुछ नहीं। फिर वो पानी का गिलास
[36:57] फौरन कहती कुछ नहीं। फिर वो पानी का गिलास हाथ में लेकर उसे घूरने लगती। इतनी देर तक
[37:00] हाथ में लेकर उसे घूरने लगती। इतनी देर तक के मैंने उसके हाथ से गिलास लेकर नीचे
[37:03] के मैंने उसके हाथ से गिलास लेकर नीचे रखा। वो चौंक गई। फैसल क्या कर रहे हो?
[37:07] रखा। वो चौंक गई। फैसल क्या कर रहे हो? मैंने कहा तुम ठीक हो? वो बोली मैं ठीक
[37:10] मैंने कहा तुम ठीक हो? वो बोली मैं ठीक हूं बस सर भारी है। मगर वो ठीक नहीं थी।
[37:14] हूं बस सर भारी है। मगर वो ठीक नहीं थी। एक बार उसने अचानक अपना चेहरा दूसरी तरफ
[37:16] एक बार उसने अचानक अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ा और हल्का सा मुस्कुराई। मैंने भी
[37:20] मोड़ा और हल्का सा मुस्कुराई। मैंने भी उसी तरफ देखा। वहां कोई नहीं था। सिर्फ
[37:22] उसी तरफ देखा। वहां कोई नहीं था। सिर्फ दीवार थी और दीवार के साथ अंधेरा।
[37:26] दीवार थी और दीवार के साथ अंधेरा। नजीर ने सब देखा। उसकी बीवी ने भी देखा।
[37:30] नजीर ने सब देखा। उसकी बीवी ने भी देखा। दोनों की नजरें एक लम्हे के लिए मिली। फिर
[37:32] दोनों की नजरें एक लम्हे के लिए मिली। फिर दोनों ने नजरें झुका ली। मुझे साफ महसूस
[37:35] दोनों ने नजरें झुका ली। मुझे साफ महसूस हुआ कि वो लोग कुछ जानते हैं। मगर वो
[37:38] हुआ कि वो लोग कुछ जानते हैं। मगर वो हमारे साथ खुलकर बोल नहीं रहे। खाने के
[37:41] हमारे साथ खुलकर बोल नहीं रहे। खाने के बाद नजीर हमें एक और दूसरे कमरे में ले
[37:44] बाद नजीर हमें एक और दूसरे कमरे में ले गया। कमरा बड़ा था लेकिन एक तरफ लकड़ी का
[37:48] गया। कमरा बड़ा था लेकिन एक तरफ लकड़ी का प्लंग था। दूसरी तरफ जमीन पर गद्दे बिछे
[37:50] प्लंग था। दूसरी तरफ जमीन पर गद्दे बिछे हुए थे। बच्चों के लिए रजाइयां रख दी गई
[37:53] हुए थे। बच्चों के लिए रजाइयां रख दी गई थी। दीवार के साथ एक पुरानी अलमारी थी और
[37:57] थी। दीवार के साथ एक पुरानी अलमारी थी और एक बड़ी खिड़की थी जो बाहर खाई की तरफ
[38:00] एक बड़ी खिड़की थी जो बाहर खाई की तरफ खुलती थी। मैंने खिड़की खोली और बाहर
[38:03] खुलती थी। मैंने खिड़की खोली और बाहर देखा। नीचे मुकम्मल अंधेरा था। कोई छत
[38:07] देखा। नीचे मुकम्मल अंधेरा था। कोई छत नहीं, कोई बरामदा नहीं, कोई जगह नहीं।
[38:10] नहीं, कोई बरामदा नहीं, कोई जगह नहीं। जहां इंसान खड़ा हो सके। खिड़की के बाहर
[38:13] जहां इंसान खड़ा हो सके। खिड़की के बाहर सीधा नीचे गहराई थी। मैंने फौरन खिड़की
[38:17] सीधा नीचे गहराई थी। मैंने फौरन खिड़की बंद की और कुंडी लगा दी। नजीर ने मुझे
[38:20] बंद की और कुंडी लगा दी। नजीर ने मुझे देखकर कहा दरवाजा अंदर से बंद कर लीजिएगा।
[38:23] देखकर कहा दरवाजा अंदर से बंद कर लीजिएगा। रात को बाहर निकलने की जरूरत नहीं। मैंने
[38:26] रात को बाहर निकलने की जरूरत नहीं। मैंने पूछा आप यह बार-बार क्यों कह रहे हैं? वो
[38:30] पूछा आप यह बार-बार क्यों कह रहे हैं? वो चलना खामोश रहा। फिर बोला यह पहाड़ी इलाका
[38:33] चलना खामोश रहा। फिर बोला यह पहाड़ी इलाका है। रात को रास्ता अच्छा नहीं होता और
[38:36] है। रात को रास्ता अच्छा नहीं होता और आपकी बेगम तबीयत भी ठीक नहीं लग रही।
[38:40] आपकी बेगम तबीयत भी ठीक नहीं लग रही। मैंने उसके चेहरे को गौर से देखा। वो कुछ
[38:42] मैंने उसके चेहरे को गौर से देखा। वो कुछ छुपा रहा था। मगर उस वक्त मैं बच्चों के
[38:45] छुपा रहा था। मगर उस वक्त मैं बच्चों के सामने बहस नहीं करना चाहता था। नसीर चला
[38:47] सामने बहस नहीं करना चाहता था। नसीर चला गया। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया।
[38:50] गया। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया। बच्चे गद्दों पर लेट गए। मरियम हिना के
[38:52] बच्चे गद्दों पर लेट गए। मरियम हिना के साथ लिपट गई। अरम ने पूछा बाबा सुबह हम
[38:56] साथ लिपट गई। अरम ने पूछा बाबा सुबह हम वापस जाएंगे ना? मैंने कहा हां बेटा सुबह
[38:58] वापस जाएंगे ना? मैंने कहा हां बेटा सुबह होती। मुस्तफा खामोश था। वो खिड़की को देख
[39:02] होती। मुस्तफा खामोश था। वो खिड़की को देख रहा था। मैंने कहा तुम भी सो जाओ। वो बोला
[39:04] रहा था। मैंने कहा तुम भी सो जाओ। वो बोला बाबा खिड़की के बाहर कोई आ तो नहीं सकता
[39:07] बाबा खिड़की के बाहर कोई आ तो नहीं सकता ना। मैंने खिड़की की तरफ देखा। फिर उसे
[39:11] ना। मैंने खिड़की की तरफ देखा। फिर उसे तसल्ली दी। नहीं बेटा वहां बाहर जगह ही
[39:13] तसल्ली दी। नहीं बेटा वहां बाहर जगह ही नहीं है। यह कहते हुए मुझे खुद भी अजीब
[39:16] नहीं है। यह कहते हुए मुझे खुद भी अजीब लगा क्योंकि यही बात बाद में मेरे लिए
[39:19] लगा क्योंकि यही बात बाद में मेरे लिए सबसे खौफनाक बनने वाली थी। कुछ देर बाद
[39:22] सबसे खौफनाक बनने वाली थी। कुछ देर बाद बच्चे सो गए। हिना भी लेट गई। मैं पलंग के
[39:25] बच्चे सो गए। हिना भी लेट गई। मैं पलंग के किनारे बैठा रहा। मेरी आंखों में नींद
[39:27] किनारे बैठा रहा। मेरी आंखों में नींद नहीं थी। बाहर सहन सेहल की रोशनी कमरे के
[39:31] नहीं थी। बाहर सहन सेहल की रोशनी कमरे के नीचे आ रही थी। घर के अंदर खामोशी थी मगर
[39:34] नीचे आ रही थी। घर के अंदर खामोशी थी मगर वो सुकून वाली खामोशी नहीं थी। ऐसी खामोशी
[39:37] वो सुकून वाली खामोशी नहीं थी। ऐसी खामोशी थी जैसे लोग जानबूझकर सांस रोक कर लेटे
[39:41] थी जैसे लोग जानबूझकर सांस रोक कर लेटे हो। तकरीबन आधी रात के बाद मुझे सहन से
[39:43] हो। तकरीबन आधी रात के बाद मुझे सहन से पायल की आवाज आई। मैं सीधा होकर बैठ गया।
[39:48] पायल की आवाज आई। मैं सीधा होकर बैठ गया। पहले मैंने सोचा शायद नज़र की बीवी होगी
[39:51] पहले मैंने सोचा शायद नज़र की बीवी होगी मगर फिर आवाज के साथ एक हल्की सी हंसी आई।
[39:54] मगर फिर आवाज के साथ एक हल्की सी हंसी आई। बिल्कुल वही हंसी वही जो मंदिर में थी।
[39:57] बिल्कुल वही हंसी वही जो मंदिर में थी। वही जो सड़क पर सुनाई दी थी। मैंने फौरन
[40:00] वही जो सड़क पर सुनाई दी थी। मैंने फौरन हिना की तरफ देखा। पलंग खाली था। दान भाई
[40:04] हिना की तरफ देखा। पलंग खाली था। दान भाई मेरा दिल जैसे एकदम हाथ से निकल गया।
[40:07] मेरा दिल जैसे एकदम हाथ से निकल गया। दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की बंद थी।
[40:09] दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की बंद थी। फिर रीना बाहर कैसे गई? मैंने जल्दी से
[40:11] फिर रीना बाहर कैसे गई? मैंने जल्दी से बच्चों को देखा। तीनों सो रहे थे। मैंने
[40:14] बच्चों को देखा। तीनों सो रहे थे। मैंने आहिस्ते से दरवाजा खोला और सहन में झांका।
[40:17] आहिस्ते से दरवाजा खोला और सहन में झांका। जो मंजर मैंने देखा वो आज भी मेरे आंखों
[40:20] जो मंजर मैंने देखा वो आज भी मेरे आंखों के सामने। हिना सहन के बीच में थी। वो आम
[40:24] के सामने। हिना सहन के बीच में थी। वो आम इंसान की तरह नहीं चल रही थी। कभी दोनों
[40:27] इंसान की तरह नहीं चल रही थी। कभी दोनों हाथ जमीन पर रखकर आगे बढ़ती। कभी अचानक
[40:31] हाथ जमीन पर रखकर आगे बढ़ती। कभी अचानक पलट कर ऐसे मुड़ती जैसे कोई कम उम्र लड़की
[40:34] पलट कर ऐसे मुड़ती जैसे कोई कम उम्र लड़की खेल में कलाबाजियां खा रही होती। उसका
[40:37] खेल में कलाबाजियां खा रही होती। उसका जिस्म भारी था। वो जिंदगी में कभी इस तरह
[40:40] जिस्म भारी था। वो जिंदगी में कभी इस तरह हरकत नहीं कर सकती थी। मगर उस रात वो इतनी
[40:43] हरकत नहीं कर सकती थी। मगर उस रात वो इतनी देर और लजक से हरकत कर रही थी कि मुझे
[40:46] देर और लजक से हरकत कर रही थी कि मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा था। कभी वो
[40:49] अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा था। कभी वो धम से जमीन पर बैठ जाती कि फौरन उठकर हंस
[40:53] धम से जमीन पर बैठ जाती कि फौरन उठकर हंस देती। कभी बेसन के पास जाती नल खोलती।
[40:57] देती। कभी बेसन के पास जाती नल खोलती। दोनों हाथ पानी के नीचे रख लेती। और ऐसे
[41:00] दोनों हाथ पानी के नीचे रख लेती। और ऐसे खड़ी रहती जैसे पानी में लुत्फ ले रही हो।
[41:03] खड़ी रहती जैसे पानी में लुत्फ ले रही हो। फिर उंगलियों से गीली जमीन पर कुछ बनाने
[41:05] फिर उंगलियों से गीली जमीन पर कुछ बनाने लगती। मैंने गौर किया तो वो सीधी लकीरें
[41:09] लगती। मैंने गौर किया तो वो सीधी लकीरें नहीं थी जैसे कोई निशान बना रही हो जैसे
[41:12] नहीं थी जैसे कोई निशान बना रही हो जैसे वो किसी ऐसी जुबान में कुछ लिख रही हो
[41:15] वो किसी ऐसी जुबान में कुछ लिख रही हो जिसे मैं नहीं समझ सकता था। मैंने हिम्मत
[41:18] जिसे मैं नहीं समझ सकता था। मैंने हिम्मत करके आहिस्ता से कहा हिना वो रुक गई। उसने
[41:21] करके आहिस्ता से कहा हिना वो रुक गई। उसने गर्दन मेरी तरफ मोड़ी। उसके चेहरे पर
[41:24] गर्दन मेरी तरफ मोड़ी। उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी। मगर वो हिना की मुस्कुराहट
[41:27] मुस्कुराहट थी। मगर वो हिना की मुस्कुराहट नहीं थी। उसमें पहचान नहीं थी। उसमें नरमी
[41:30] नहीं थी। उसमें पहचान नहीं थी। उसमें नरमी नहीं थी। वो मुस्कुराहट ऐसी थी जैसे कोई
[41:33] नहीं थी। वो मुस्कुराहट ऐसी थी जैसे कोई चीज मुझे देखकर खुश हो रही हो कि मैं डर
[41:36] चीज मुझे देखकर खुश हो रही हो कि मैं डर गया हूं। मैं उसके करीब गया ही ना अंदर
[41:39] गया हूं। मैं उसके करीब गया ही ना अंदर आओ। बच्चे सो रहे हैं। उसने बहुत आहिस्ता
[41:42] आओ। बच्चे सो रहे हैं। उसने बहुत आहिस्ता से कहा वो बुला रही है। मेरे मुंह से
[41:44] से कहा वो बुला रही है। मेरे मुंह से निकला कौन? वो चंद लम्हे मुझे देखती रही।
[41:47] निकला कौन? वो चंद लम्हे मुझे देखती रही। फिर अचानक जैसे होश में आ गई। उसकी आंखों
[41:51] फिर अचानक जैसे होश में आ गई। उसकी आंखों में खौफ भर गया था। फैसल मैं यहां कैसे
[41:54] में खौफ भर गया था। फैसल मैं यहां कैसे आई? मैंने उसे बाजू से पकड़ा और कमरे में
[41:57] आई? मैंने उसे बाजू से पकड़ा और कमरे में ले आया। वो कांप रही थी। मैंने उसे प्लंग
[42:00] ले आया। वो कांप रही थी। मैंने उसे प्लंग पर लेटाया। उसने पूछा मैंने कुछ नहीं
[42:02] पर लेटाया। उसने पूछा मैंने कुछ नहीं किया। मैं झूठ बोला नहीं तुम नींद में उठ
[42:05] किया। मैं झूठ बोला नहीं तुम नींद में उठ गई थी। थकन की वजह से होगा। लेकिन वो खुद
[42:08] गई थी। थकन की वजह से होगा। लेकिन वो खुद जानती थी कि बात इतनी मामूली नहीं है।
[42:11] जानती थी कि बात इतनी मामूली नहीं है। मैंने दरवाजा फिर बंद किया। खिड़की कुंडी
[42:13] मैंने दरवाजा फिर बंद किया। खिड़की कुंडी देखी। बच्चों को देखा सब सो रहे थे। मैं
[42:17] देखी। बच्चों को देखा सब सो रहे थे। मैं चाहता था कि बाकी रात जाकर गुजार दूं। मगर
[42:19] चाहता था कि बाकी रात जाकर गुजार दूं। मगर इंसान चाहे कितना भी डरा हुआ हो। थकन अपना
[42:23] इंसान चाहे कितना भी डरा हुआ हो। थकन अपना काम करती।
[42:25] काम करती। शायद मेरी आंख चंद लम्हों के लिए लग गई।
[42:28] शायद मेरी आंख चंद लम्हों के लिए लग गई। फिर मुस्तफा की दबी हुई आवाज ने मुझे
[42:30] फिर मुस्तफा की दबी हुई आवाज ने मुझे जगाया। पापा मैंने आंख खोली। कमरे में
[42:34] जगाया। पापा मैंने आंख खोली। कमरे में अंधेरा था। मुस्तफा गद्दे पर बैठा था।
[42:36] अंधेरा था। मुस्तफा गद्दे पर बैठा था। उसका चेहरा खौफ से सफेद था। वो बोल नहीं
[42:39] उसका चेहरा खौफ से सफेद था। वो बोल नहीं पा रहा था। मैंने फौरन हिरा की तरफ देखा।
[42:42] पा रहा था। मैंने फौरन हिरा की तरफ देखा। वो पलंग पर नहीं थी। इस बार दरवाजा अंदर
[42:45] वो पलंग पर नहीं थी। इस बार दरवाजा अंदर से बंद था मगर खिड़की कुंडी खुली हुई थी।
[42:49] से बंद था मगर खिड़की कुंडी खुली हुई थी। मैं उठा मगर मुस्तफा ने मेरा हाथ पकड़
[42:52] मैं उठा मगर मुस्तफा ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसकी आवाज कांप रही थी। बाबा मम्मा
[42:55] लिया। उसकी आवाज कांप रही थी। बाबा मम्मा पहले खिड़की के पास खड़ी थी। फिर उन्होंने
[42:58] पहले खिड़की के पास खड़ी थी। फिर उन्होंने बाहर झांका। फिर वो खिड़की से बाहर चली
[43:00] बाहर झांका। फिर वो खिड़की से बाहर चली गई। मैंने कहा बेटा ऐसा नहीं हो सकता।
[43:04] गई। मैंने कहा बेटा ऐसा नहीं हो सकता। बाहर जगह ही नहीं है। मुस्तफा रोने लगा।
[43:06] बाहर जगह ही नहीं है। मुस्तफा रोने लगा। बाबा मैंने देखा है। फिर थोड़ी देर बाद
[43:09] बाबा मैंने देखा है। फिर थोड़ी देर बाद मम्मा बाहर से अंदर देख रही थी। नान भाई
[43:12] मम्मा बाहर से अंदर देख रही थी। नान भाई ये जुमला सुनकर मेरे अंदर जैसे सब कुछ रुक
[43:14] ये जुमला सुनकर मेरे अंदर जैसे सब कुछ रुक गया। बाहर से अंदर देख रही थी। खिड़की
[43:18] गया। बाहर से अंदर देख रही थी। खिड़की बाहर खड़े होने की जगह ही नहीं थी। नीचे
[43:20] बाहर खड़े होने की जगह ही नहीं थी। नीचे खाई थी। अगर कोई बाहर जाता तो सीधा नीचे
[43:23] खाई थी। अगर कोई बाहर जाता तो सीधा नीचे गिरता। मैंने खिड़की खोली और नीचे देखा
[43:26] गिरता। मैंने खिड़की खोली और नीचे देखा अंधेरा था। मैंने हाथ वाली [संगीत] बत्ती
[43:28] अंधेरा था। मैंने हाथ वाली [संगीत] बत्ती नीचे मारी मगर रोशनी गहराई में खो गई। कुछ
[43:32] नीचे मारी मगर रोशनी गहराई में खो गई। कुछ नजर नहीं आया। उसी वक्त कमरे के दरवाजे पर
[43:35] नजर नहीं आया। उसी वक्त कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई। मैंने बच्चों को इशारा किया कि
[43:38] दस्तक हुई। मैंने बच्चों को इशारा किया कि खामोश रहे। फिर पूछा कौन? बाहर नज़र की
[43:42] खामोश रहे। फिर पूछा कौन? बाहर नज़र की आवाें आई। फैसल [संगीत] साहब दरवाजा
[43:45] आवाें आई। फैसल [संगीत] साहब दरवाजा खोलिए। मैंने दरवाजा खोला। नसीर खड़ा था।
[43:48] खोलिए। मैंने दरवाजा खोला। नसीर खड़ा था। उसके हाथ में लालटेन थी। चेहरे पर डर साफ
[43:51] उसके हाथ में लालटेन थी। चेहरे पर डर साफ था। वो बोला आपकी बेगम बाहर जंगल की तरफ
[43:53] था। वो बोला आपकी बेगम बाहर जंगल की तरफ गई है। मैंने अभी देखा है। मैंने कहा यह
[43:57] गई है। मैंने अभी देखा है। मैंने कहा यह कैसे हो सकता है? दरवाजा अंदर से बंद था।
[44:00] कैसे हो सकता है? दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की के बाहर तो कोई खाई है। नजीर ने
[44:03] खिड़की के बाहर तो कोई खाई है। नजीर ने कमरे के अंदर देखा। हिना वाकई नहीं थी।
[44:06] कमरे के अंदर देखा। हिना वाकई नहीं थी। उसने नजरें झुका ली। बच्चों को अंदर रहने
[44:09] उसने नजरें झुका ली। बच्चों को अंदर रहने दे। मेरी बीवी उनके पास बैठ जाएगी। आप
[44:13] दे। मेरी बीवी उनके पास बैठ जाएगी। आप मेरे साथ आए देर ना करें। मैंने मुस्तफा
[44:17] मेरे साथ आए देर ना करें। मैंने मुस्तफा को सीने से लगाया। वह अभी भी कांप रहा था।
[44:20] को सीने से लगाया। वह अभी भी कांप रहा था। मरियम और अरहम भी जाग चुके थे और रोने लगे
[44:24] मरियम और अरहम भी जाग चुके थे और रोने लगे थे। नज़र की बीवी अंदर आ गई। उसने बच्चों
[44:27] थे। नज़र की बीवी अंदर आ गई। उसने बच्चों को अपने पास बिठाया। मैं नज़र के साथ बाहर
[44:31] को अपने पास बिठाया। मैं नज़र के साथ बाहर निकला। चैन से बाहर जाते हुए मुझे दोबारा
[44:34] निकला। चैन से बाहर जाते हुए मुझे दोबारा वही पायल की आवाज आई। इस बार आवाज घर के
[44:37] वही पायल की आवाज आई। इस बार आवाज घर के पीछे से आ रही थी। नज़र ने भी सुनी। उसने
[44:41] पीछे से आ रही थी। नज़र ने भी सुनी। उसने एक लम्हे के लिए कदम रोक दिए। फिर बहुत
[44:43] एक लम्हे के लिए कदम रोक दिए। फिर बहुत आहिस्ता से कहा आवाज के पीछे नजर ना
[44:46] आहिस्ता से कहा आवाज के पीछे नजर ना दौड़ाएं। बस मेरे साथ चलते रहें। हम घर के
[44:49] दौड़ाएं। बस मेरे साथ चलते रहें। हम घर के पिछले हिस्से से एक कच्चे रास्ते पर
[44:51] पिछले हिस्से से एक कच्चे रास्ते पर निकले। वहां छोटा सा जंगल था। दरख्त बहुत
[44:54] निकले। वहां छोटा सा जंगल था। दरख्त बहुत घने नहीं मगर रात में हर दरख्त के पीछे
[44:58] घने नहीं मगर रात में हर दरख्त के पीछे किसी खड़े होने का एहसास होता था। जमीन
[45:01] किसी खड़े होने का एहसास होता था। जमीन पुथरीली थी। लालटेन की रोशनी कम थी लेकिन
[45:04] पुथरीली थी। लालटेन की रोशनी कम थी लेकिन उसमें हमें रास्ता नजर आ रहा था। मैं
[45:07] उसमें हमें रास्ता नजर आ रहा था। मैं बार-बार हिना का नाम पुकारता मगर कोई जवाब
[45:10] बार-बार हिना का नाम पुकारता मगर कोई जवाब नहीं आता। फिर कुछ फासले पर एक हल्की सी
[45:12] नहीं आता। फिर कुछ फासले पर एक हल्की सी हंसी सुनाई दी। नजीर रुक गया। उसने लालटेन
[45:15] हंसी सुनाई दी। नजीर रुक गया। उसने लालटेन ऊपर की। सामने एक दरख्त के पास हिना बैठी
[45:18] ऊपर की। सामने एक दरख्त के पास हिना बैठी थी। वो जमीन पर उकड़ू बैठी थी। सर नीचे
[45:22] थी। वो जमीन पर उकड़ू बैठी थी। सर नीचे हाथ घुटनों पर पांव नंगे। उसके पांव
[45:25] हाथ घुटनों पर पांव नंगे। उसके पांव मिट्टी और पत्थरों से भरे हुए थे। कमरे
[45:28] मिट्टी और पत्थरों से भरे हुए थे। कमरे में सोने से पहले उसने चप्पल उतारी थी। वो
[45:31] में सोने से पहले उसने चप्पल उतारी थी। वो चप्पल अब भी कमरे में थी। फिर वो नंगे
[45:33] चप्पल अब भी कमरे में थी। फिर वो नंगे पांव उस पथरीले रास्ते पर कैसे आई? मैं
[45:36] पांव उस पथरीले रास्ते पर कैसे आई? मैं आहिस्ता से करीब गया। हिना उसने सर नहीं
[45:39] आहिस्ता से करीब गया। हिना उसने सर नहीं उठाया। मैंने उसके कांधे पर हाथ रखा। उसने
[45:42] उठाया। मैंने उसके कांधे पर हाथ रखा। उसने आहिस्ता से चेहरा मेरी तरफ किया। उसकी
[45:44] आहिस्ता से चेहरा मेरी तरफ किया। उसकी आंखों में सुर्खी थी। मैं यह नहीं कहूंगा
[45:47] आंखों में सुर्खी थी। मैं यह नहीं कहूंगा कि कोई आग जल रही थी या कोई फिल्मी मंजिर
[45:49] कि कोई आग जल रही थी या कोई फिल्मी मंजिर था। मगर वो सुर्खी आम नहीं थी। उसकी आंखें
[45:52] था। मगर वो सुर्खी आम नहीं थी। उसकी आंखें ऐसी लग रही थी जैसे वो बहुत देर से किसी
[45:55] ऐसी लग रही थी जैसे वो बहुत देर से किसी अंधेरे में खुली रही। बगैर पलक झुपकाए और
[45:59] अंधेरे में खुली रही। बगैर पलक झुपकाए और फिर मुस्कुरा दी। वो मुस्कुराहट मैं पीछे
[46:02] फिर मुस्कुरा दी। वो मुस्कुराहट मैं पीछे हटने ही वाला था कि अचानक उसका चेहरा बदल
[46:05] हटने ही वाला था कि अचानक उसका चेहरा बदल गया। असल घबरा कर बोली मैं यहां क्यों
[46:08] गया। असल घबरा कर बोली मैं यहां क्यों हूं? मैंने उसे उठाया वो कांप रही थी।
[46:10] हूं? मैंने उसे उठाया वो कांप रही थी। नजीर लालटेन नीचे की और बहुत आहिस्ता से
[46:14] नजीर लालटेन नीचे की और बहुत आहिस्ता से कहा ये असल यहां का नहीं है। यह आपके साथ
[46:17] कहा ये असल यहां का नहीं है। यह आपके साथ आया है। मैंने उसकी तरफ देखा। आपको कैसे
[46:20] आया है। मैंने उसकी तरफ देखा। आपको कैसे पता? नज़र ने जवाब दिया। बस कहा उसे घर ले
[46:23] पता? नज़र ने जवाब दिया। बस कहा उसे घर ले चले। सुबह का इंतजार मुनासिब नहीं। हम
[46:26] चले। सुबह का इंतजार मुनासिब नहीं। हम वापस आए तो नज़र के घर वाले जाग रहे थे।
[46:29] वापस आए तो नज़र के घर वाले जाग रहे थे। उसकी बीवी ने हिना के पांव साफ किए। बच्चे
[46:33] उसकी बीवी ने हिना के पांव साफ किए। बच्चे उससे लिपट गए। हिना रो रही थी। वो बार-बार
[46:35] उससे लिपट गए। हिना रो रही थी। वो बार-बार कह रही थी फैसल मुझे वाकई कुछ याद नहीं।
[46:38] कह रही थी फैसल मुझे वाकई कुछ याद नहीं। मैंने नजीर से साफ पूछा आप लोग कुछ जानते
[46:41] मैंने नजीर से साफ पूछा आप लोग कुछ जानते हैं? नज़र कुछ देर खामोश रहा। फिर बोला आप
[46:44] हैं? नज़र कुछ देर खामोश रहा। फिर बोला आप किसी पुरानी जगह से आए। कोई वीरान इमारत,
[46:48] किसी पुरानी जगह से आए। कोई वीरान इमारत, कोई जगह। कोई ऐसी जगह जहां कुछ बंद था।
[46:52] कोई जगह। कोई ऐसी जगह जहां कुछ बंद था। मेरे पास झूठ बोलने की हिम्मत नहीं थी।
[46:54] मेरे पास झूठ बोलने की हिम्मत नहीं थी। मैंने उसे मंदिर वाली बात बताई। लोहे के
[46:56] मैंने उसे मंदिर वाली बात बताई। लोहे के दरवाजे वाली बात। नजीर ने सर झुका लिया।
[47:00] दरवाजे वाली बात। नजीर ने सर झुका लिया। उसकी बीवी ने बच्चों को अपने पास कर
[47:02] उसकी बीवी ने बच्चों को अपने पास कर [संगीत] लिया जैसे वह डर गई हो। नजीर बोला
[47:05] [संगीत] लिया जैसे वह डर गई हो। नजीर बोला फिर देर मत करें। आपको वापस जाना होगा।
[47:08] फिर देर मत करें। आपको वापस जाना होगा। जहां यह शुरू हुआ है वहीं जाकर खत्म होगा।
[47:12] जहां यह शुरू हुआ है वहीं जाकर खत्म होगा। मैंने कहा अभी रात को। बोला यहां सुबह तक
[47:15] मैंने कहा अभी रात को। बोला यहां सुबह तक रुकना आपके लिए अच्छा नहीं। मैं पेट्रोल
[47:17] रुकना आपके लिए अच्छा नहीं। मैं पेट्रोल का बंदोबस्त करता हूं। आप गाड़ी तक चलने
[47:19] का बंदोबस्त करता हूं। आप गाड़ी तक चलने की तैयारी करें। उसने अपने एक जानने वाले
[47:21] की तैयारी करें। उसने अपने एक जानने वाले को बुलाया। वह आदमी नीचे दूसरे घर से आया।
[47:25] को बुलाया। वह आदमी नीचे दूसरे घर से आया। दोनों कहीं गए और कुछ देर बाद चंद बोतलों
[47:27] दोनों कहीं गए और कुछ देर बाद चंद बोतलों में पेट्रोल ले आए। मैंने पैसे देने चाहे
[47:30] में पेट्रोल ले आए। मैंने पैसे देने चाहे मगर नजीर ने हाथ रोक दिए। पहले यहां से
[47:33] मगर नजीर ने हाथ रोक दिए। पहले यहां से निकले पैसे बाद की बात है। हमने बच्चों को
[47:35] निकले पैसे बाद की बात है। हमने बच्चों को तैयार किया है। हिना कमजोर थी मगर होश में
[47:38] तैयार किया है। हिना कमजोर थी मगर होश में थी। मैंने उसे एक लम्हे के लिए भी अकेला
[47:41] थी। मैंने उसे एक लम्हे के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा। नजीर और दूसरा आदमी हमें ऊपर
[47:44] नहीं छोड़ा। नजीर और दूसरा आदमी हमें ऊपर सड़क तक ले गया है। रास्ते में कई बार
[47:46] सड़क तक ले गया है। रास्ते में कई बार मुझे महसूस हुआ जैसे कोई हमारे पीछे चल
[47:49] मुझे महसूस हुआ जैसे कोई हमारे पीछे चल रहा है। पायल की आवाज कभी करीब आती कभी
[47:51] रहा है। पायल की आवाज कभी करीब आती कभी दूर जाती मगर मैंने पीछे नहीं देखा। गाड़ी
[47:55] दूर जाती मगर मैंने पीछे नहीं देखा। गाड़ी वहीं खड़ी थी। मैंने पेट्रोल डाला। खुदा
[47:58] वहीं खड़ी थी। मैंने पेट्रोल डाला। खुदा का शुक्र है गाड़ी चल पड़ी। उस वक्त इंजन
[48:00] का शुक्र है गाड़ी चल पड़ी। उस वक्त इंजन की आवाज मेरे लिए किसी मदद से कम नहीं थी।
[48:03] की आवाज मेरे लिए किसी मदद से कम नहीं थी। नजीर ने जाते-जाते कहा, आगे सफर ना करें।
[48:05] नजीर ने जाते-जाते कहा, आगे सफर ना करें। वापस जाएं। जिस दरवाजे को खोला है, उसे
[48:08] वापस जाएं। जिस दरवाजे को खोला है, उसे बंद करवाएं। वरना यह चीज आपके घर तक
[48:10] बंद करवाएं। वरना यह चीज आपके घर तक जाएगी। हिना ने बात सुनी तो उसने आंखें
[48:13] जाएगी। हिना ने बात सुनी तो उसने आंखें बंद कर ली। हम गाड़ी लेकर आगे बढ़े। बच्चे
[48:16] बंद कर ली। हम गाड़ी लेकर आगे बढ़े। बच्चे खामोश थे। कोई एक लफ्ज नहीं बोल रहा था।
[48:19] खामोश थे। कोई एक लफ्ज नहीं बोल रहा था। कुछ दूर जाकर हिना ने बहुत आहिस्ता से
[48:22] कुछ दूर जाकर हिना ने बहुत आहिस्ता से कहा। दरअसल मैंने ख्वाब में एक औरत देखी
[48:25] कहा। दरअसल मैंने ख्वाब में एक औरत देखी थी। मैंने पूछा क्या कह रही थी? हिना बोली
[48:28] थी। मैंने पूछा क्या कह रही थी? हिना बोली वो कह रही थी तू मुझे जगाया है। अब वापस
[48:30] वो कह रही थी तू मुझे जगाया है। अब वापस आओ। मेरे पांव तले जमीन निकल गई। मैंने
[48:33] आओ। मेरे पांव तले जमीन निकल गई। मैंने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। फिर रीना ने
[48:36] गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। फिर रीना ने अचानक दाएं शीशे की तरफ देखा और उसका
[48:38] अचानक दाएं शीशे की तरफ देखा और उसका चेहरा बदल गया। पैसल शीशे में देखो। मैंने
[48:41] चेहरा बदल गया। पैसल शीशे में देखो। मैंने दाएं तरफ के आईने में देखा। सड़क के
[48:44] दाएं तरफ के आईने में देखा। सड़क के किनारे एक औरत खड़ी थी। सफेद पुराने
[48:46] किनारे एक औरत खड़ी थी। सफेद पुराने कपड़े, सर झुका हुआ, बाल, चेहरे के आगे वो
[48:49] कपड़े, सर झुका हुआ, बाल, चेहरे के आगे वो कुछ नहीं कर रही थी। बस हमें देख रही थी।
[48:52] कुछ नहीं कर रही थी। बस हमें देख रही थी। गाड़ी आगे बढ़ रही थी। मगर आईने में वो
[48:54] गाड़ी आगे बढ़ रही थी। मगर आईने में वो औरत छोटी नहीं हो रही थी। उसी फासले पर
[48:58] औरत छोटी नहीं हो रही थी। उसी फासले पर खड़ी थी। जैसे गांव के साथ-साथ चल रही हो।
[49:00] खड़ी थी। जैसे गांव के साथ-साथ चल रही हो। इन्होंना ने आयत कुर्सी पढ़नी शुरू कर दी।
[49:03] इन्होंना ने आयत कुर्सी पढ़नी शुरू कर दी। बच्चों ने भी पीछे पढ़ना शुरू किया। मैंने
[49:05] बच्चों ने भी पीछे पढ़ना शुरू किया। मैंने आईने से नजर हटाने की कोशिश की। मगर आंख
[49:08] आईने से नजर हटाने की कोशिश की। मगर आंख बार-बार वहीं जा रही थी। एक मोड़ आया,
[49:11] बार-बार वहीं जा रही थी। एक मोड़ आया, गाड़ी मुड़ी। आईना खाली हो गया। औरत गायब
[49:14] गाड़ी मुड़ी। आईना खाली हो गया। औरत गायब थी। लेकिन अदान भाई मुझे उस वक्त साफ
[49:17] थी। लेकिन अदान भाई मुझे उस वक्त साफ महसूस हो गया था कि वो खत्म नहीं हुई। वो
[49:19] महसूस हो गया था कि वो खत्म नहीं हुई। वो बस नजर से हटी है। हमने नॉर्थ का सफर वहीं
[49:23] बस नजर से हटी है। हमने नॉर्थ का सफर वहीं खत्म कर दिया। सुबह तक हम वापस पंजाब की
[49:25] खत्म कर दिया। सुबह तक हम वापस पंजाब की तरफ निकल चुके थे। गांव पहुंचे तो चाचा
[49:28] तरफ निकल चुके थे। गांव पहुंचे तो चाचा रफीक ने हमें देखते ही समझ लिया मामला
[49:31] रफीक ने हमें देखते ही समझ लिया मामला बहुत बिगड़ चुका है। मैंने इस बार सब कुछ
[49:33] बहुत बिगड़ चुका है। मैंने इस बार सब कुछ सच-सच बता दिया। चाचा रफीक ने सर पकड़
[49:36] सच-सच बता दिया। चाचा रफीक ने सर पकड़ लिया। फैसल पुत्तर अब किसी समझदार बंदे को
[49:39] लिया। फैसल पुत्तर अब किसी समझदार बंदे को दिखाए बगैर बात नहीं बनेगी। उसी रात वो
[49:41] दिखाए बगैर बात नहीं बनेगी। उसी रात वो मुझे करीबी फासले के एक बुजुर्ग के पास ले
[49:44] मुझे करीबी फासले के एक बुजुर्ग के पास ले गए। वो कोई डरामाई आमिल नहीं थे। सादा
[49:46] गए। वो कोई डरामाई आमिल नहीं थे। सादा लिबास, सफेद दाढ़ी, खामोश तबीयत उन्होंने
[49:49] लिबास, सफेद दाढ़ी, खामोश तबीयत उन्होंने हिना को देखा। फिर मेरी तरफ देखा और पहला
[49:52] हिना को देखा। फिर मेरी तरफ देखा और पहला सवाल यही किया। तुमने बंद जगह खोली है।
[49:55] सवाल यही किया। तुमने बंद जगह खोली है। मैंने सर झुका दिया। वो बोले अब अमल वहीं
[49:58] मैंने सर झुका दिया। वो बोले अब अमल वहीं होगा जहां से यह शुरू हुआ है। मंदिर के
[50:01] होगा जहां से यह शुरू हुआ है। मंदिर के पास इनर ने डर कर कहा मैं वहां नहीं
[50:04] पास इनर ने डर कर कहा मैं वहां नहीं जाऊंगी। बुजुर्ग ने आहिस्ता संजीता लहजेचे
[50:07] जाऊंगी। बुजुर्ग ने आहिस्ता संजीता लहजेचे में कहा तुम नहीं जाओगी तो खुद तुम्हारे
[50:09] में कहा तुम नहीं जाओगी तो खुद तुम्हारे लिए आ जाएगी। कमरे में खामोशी छा गई और
[50:13] लिए आ जाएगी। कमरे में खामोशी छा गई और अदनान भाई उसी लम्हे मुझे समझ आ गया कि अब
[50:16] अदनान भाई उसी लम्हे मुझे समझ आ गया कि अब हमें दोबारा उस बंजर जमीन, उसी मंदिर और
[50:18] हमें दोबारा उस बंजर जमीन, उसी मंदिर और उसी दरवाजे के सामने जाना होगा। जिसे खोल
[50:21] उसी दरवाजे के सामने जाना होगा। जिसे खोल कर मैं अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर
[50:24] कर मैं अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर चुका हूं। गांव वापस आकर चाचा रफीक हमें
[50:27] चुका हूं। गांव वापस आकर चाचा रफीक हमें एक बुजुर्ग के पास लेकर आए। बुजुर्ग ने
[50:30] एक बुजुर्ग के पास लेकर आए। बुजुर्ग ने हिना को देखा तुमने कोई बंद जगह खोली है।
[50:33] हिना को देखा तुमने कोई बंद जगह खोली है। मैंने मंदिर के अंदर लोहे के दरवाजे वाली
[50:35] मैंने मंदिर के अंदर लोहे के दरवाजे वाली बात बता दी। बुजुर्ग ने कहा जहां से यह
[50:37] बात बता दी। बुजुर्ग ने कहा जहां से यह शुरू हुआ है खत्म वहीं होगा। आज रात मंदिर
[50:41] शुरू हुआ है खत्म वहीं होगा। आज रात मंदिर के पास जाना होगा। वाइफ डर गई। वो बार-बार
[50:44] के पास जाना होगा। वाइफ डर गई। वो बार-बार कह रही थी फैसल वो मुझे बुलाती है। बच्चों
[50:47] कह रही थी फैसल वो मुझे बुलाती है। बच्चों को चाचा रफीक के घर छोड़ा और रात को मैं
[50:50] को चाचा रफीक के घर छोड़ा और रात को मैं हिना चाचा रफीक और बुजुर्ग उसी बंजर जमीन
[50:54] हिना चाचा रफीक और बुजुर्ग उसी बंजर जमीन की तरफ निकल गए। मंदिर के पास पहुंचते ही
[50:57] की तरफ निकल गए। मंदिर के पास पहुंचते ही हिना की हालत बदलने लगी। मंदिर के अंधेरे
[51:00] हिना की हालत बदलने लगी। मंदिर के अंधेरे दरवाजे को देख रही थी। फिर अंदर से पायल
[51:02] दरवाजे को देख रही थी। फिर अंदर से पायल की आवाज आई। उसके बाद वो औरत की हंसी।
[51:05] की आवाज आई। उसके बाद वो औरत की हंसी। हिना ने मेरा हाथ सख्ती से पकड़ा और
[51:08] हिना ने मेरा हाथ सख्ती से पकड़ा और आहिस्ता से बोली वो अंदर खड़ी है। बुजुर्ग
[51:11] आहिस्ता से बोली वो अंदर खड़ी है। बुजुर्ग ने पूछना शुरू किया। अचानक हिना की आवाज
[51:14] ने पूछना शुरू किया। अचानक हिना की आवाज बदल गई। यह मेरी जगह है। अदनान भाई वो
[51:16] बदल गई। यह मेरी जगह है। अदनान भाई वो हिना नहीं बोल रही थी। उसके चेहरे में वही
[51:19] हिना नहीं बोल रही थी। उसके चेहरे में वही खौफनाक मुस्कुराहट थी। बुजुर्ग ने मुझे
[51:22] खौफनाक मुस्कुराहट थी। बुजुर्ग ने मुझे कहा फैसल अंदर जाओ। जो लोहे का दरवाजा
[51:24] कहा फैसल अंदर जाओ। जो लोहे का दरवाजा तुमने खोला था उसे बंद करो। मैं और चाचा
[51:27] तुमने खोला था उसे बंद करो। मैं और चाचा रफीक मंदिर के अंदर गए। अंदर सख्त बदबू,
[51:30] रफीक मंदिर के अंदर गए। अंदर सख्त बदबू, अंधेरा और दीवारों पर अजीब खराशें थी।
[51:33] अंधेरा और दीवारों पर अजीब खराशें थी। पिछले हिस्से में वही लोहे का दरवाजा खुला
[51:35] पिछले हिस्से में वही लोहे का दरवाजा खुला हुआ था। नीचे से ठंडी हवा आ रही थी। मैंने
[51:39] हुआ था। नीचे से ठंडी हवा आ रही थी। मैंने दरवाजा पकड़ा तो अंदर से हिना की आवाज आई।
[51:41] दरवाजा पकड़ा तो अंदर से हिना की आवाज आई। फैसल मुझे निकालो। फिर मरियम की आवाज आई।
[51:44] फैसल मुझे निकालो। फिर मरियम की आवाज आई। बाबा मुझे डर लग रहा है। मेरा दिल टूटने
[51:47] बाबा मुझे डर लग रहा है। मेरा दिल टूटने लगा। मगर मुझे पता था बच्चे गांव में है।
[51:50] लगा। मगर मुझे पता था बच्चे गांव में है। चाचा रफीक ने कहा ना सुनो ये धोखा है।
[51:53] चाचा रफीक ने कहा ना सुनो ये धोखा है। हमने पूरी ताकत से दरवाजा बंद किया और
[51:56] हमने पूरी ताकत से दरवाजा बंद किया और अंदर से चीखें, हंसी और पायल की आवाज आती
[51:59] अंदर से चीखें, हंसी और पायल की आवाज आती रही। और जैसे कोई जोर-जोर से दरवाजे को
[52:02] रही। और जैसे कोई जोर-जोर से दरवाजे को अंदर से बजा रहा हो। आखिर दरवाजा बंद हो
[52:05] अंदर से बजा रहा हो। आखिर दरवाजा बंद हो गया। चाचा रफीक ने बुजुर्ग का दिया हुआ
[52:08] गया। चाचा रफीक ने बुजुर्ग का दिया हुआ ताला लगा दिया। जैसे ही ताला लगा ठंडी हवा
[52:12] ताला लगा दिया। जैसे ही ताला लगा ठंडी हवा बंद हो गई। हम बाहर आए तो मंदिर के सामने
[52:15] बंद हो गई। हम बाहर आए तो मंदिर के सामने मट्टी पर आग जल रही थी। हिना जमीन पर बैठी
[52:17] मट्टी पर आग जल रही थी। हिना जमीन पर बैठी रो रही थी। आग के पीछे अंधेरे में सफेद
[52:20] रो रही थी। आग के पीछे अंधेरे में सफेद कपड़ों वाली औरत का साया नजर आया। चंद
[52:23] कपड़ों वाली औरत का साया नजर आया। चंद लम्हे बाद वो साया गायब हो गया। बुजुर्ग
[52:26] लम्हे बाद वो साया गायब हो गया। बुजुर्ग ने पढ़ाई मुकम्मल की आग बुझ गई। मंदिर के
[52:30] ने पढ़ाई मुकम्मल की आग बुझ गई। मंदिर के अंदर से आखिरी बार पायल की आवाज आई। छन
[52:34] अंदर से आखिरी बार पायल की आवाज आई। छन छन। हिना बेहोश होकर गिर गई। जब उसे होश
[52:38] छन। हिना बेहोश होकर गिर गई। जब उसे होश आया तो उसने की आंखें नॉर्मल थी। बुजुर्ग
[52:40] आया तो उसने की आंखें नॉर्मल थी। बुजुर्ग ने कहा इस जगह को दोबारा मत छेड़ना। ना
[52:43] ने कहा इस जगह को दोबारा मत छेड़ना। ना जमीन बेचने की जिद करना ना सफाई खुदाई। हम
[52:46] जमीन बेचने की जिद करना ना सफाई खुदाई। हम सुबह से पहले गांव वापस गए। बच्चे हिना से
[52:49] सुबह से पहले गांव वापस गए। बच्चे हिना से लिपट कर रोने लगे। कुछ दिन बाद हम
[52:52] लिपट कर रोने लगे। कुछ दिन बाद हम पाकिस्तान से वापस चल गए। वो जमीन आज भी
[52:55] पाकिस्तान से वापस चल गए। वो जमीन आज भी हमारे नाम पर है। हिना अब ठीक है। लेकिन
[52:57] हमारे नाम पर है। हिना अब ठीक है। लेकिन कभी-कभी रात को उठकर कहती है फैसल मुझे
[53:00] कभी-कभी रात को उठकर कहती है फैसल मुझे पायल की आवाज आई है। अदनान भाई यह थी मेरी
[53:04] पायल की आवाज आई है। अदनान भाई यह थी मेरी स्टोरी। एक छोटी सी गलती। एक दरवाजा खोल
[53:07] स्टोरी। एक छोटी सी गलती। एक दरवाजा खोल देना और दूसरा यह कि गाड़ी में फ्यूल ना
[53:11] देना और दूसरा यह कि गाड़ी में फ्यूल ना डलवाना। आई होप मेरी स्टोरी से सुनने
[53:14] डलवाना। आई होप मेरी स्टोरी से सुनने वालों को लेसन तो मिला होगा। माना मेरी भी
[53:17] वालों को लेसन तो मिला होगा। माना मेरी भी बेवकूफियां कई जगह थी। लेकिन स्टोरी
[53:19] बेवकूफियां कई जगह थी। लेकिन स्टोरी सुनाने का मकसद यह सबक सबके लिए है कि कभी
[53:23] सुनाने का मकसद यह सबक सबके लिए है कि कभी भी फैमिली के साथ जाएं अपना तेल पानी
[53:26] भी फैमिली के साथ जाएं अपना तेल पानी गाड़ी का पूरा रखें और कभी भी ऐसी वीरान
[53:29] गाड़ी का पूरा रखें और कभी भी ऐसी वीरान जगहों पर जहां पर मशहूर हो कि यह जगह
[53:32] जगहों पर जहां पर मशहूर हो कि यह जगह ह्टेड है आपने नहीं जाना और ख्याल करना है
[53:37] ह्टेड है आपने नहीं जाना और ख्याल करना है व सलाम दोस्तों उम्मीद करता हूं आज की
[53:39] व सलाम दोस्तों उम्मीद करता हूं आज की स्टोरीज आपको पसंद आई होंगी स्टोरीज पसंद
[53:41] स्टोरीज आपको पसंद आई होंगी स्टोरीज पसंद आई है तो वीडियो को लाइक करना ना भूलिएगा
[53:43] आई है तो वीडियो को लाइक करना ना भूलिएगा ये दो स्टोरीज मैं आपको बता रहा हूं जाकर
[53:45] ये दो स्टोरीज मैं आपको बता रहा हूं जाकर लाजमी सुनिएगा आपको बहुत पसंद आएंगे और आप
[53:48] लाजमी सुनिएगा आपको बहुत पसंद आएंगे और आप यकीन करें। आप खौफ के मारे छोड़ने पर
[53:50] यकीन करें। आप खौफ के मारे छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे। इतनी खौफनाक स्टोरीज है।
[53:53] मजबूर हो जाएंगे। इतनी खौफनाक स्टोरीज है। अपना ख्याल रखिएगा।