# Lecture-30 || History by Manju Sir

https://www.youtube.com/watch?v=AXYlo4kXlrE
Translation: en

[00:02] कुछ ज्यादा ही आज।
  A bit too much today.

[00:15] तो सबसे पहले हम लोग आपको कल एक भूमिका के तौर पर समझा रहे थे।
  So, first of all, we were explaining an introduction to you yesterday.

[00:28] हमें याद है कि वह अधूरी ही रह गई थी।
  I remember that it remained incomplete.

[00:33] उसे हम आपको पूरा नहीं बता पाए थे।
  We could not tell you the whole thing.

[00:38] तो एक बार उसे कंप्लीट करते हैं और फिर एक-एक वंश को समझाते हुए आपको चलेंगे।
  So let's complete it once, and then we will proceed by explaining each dynasty one by one.

[00:46] ठीक है?
  Okay?

[00:52] तो पहले समझो देखो बेटा एक बार कॉपी कल क्या लिखा था?
  So first understand, look son, what was written in the copy yesterday?

[01:00] क्या?
  What?

[01:01] आवाज बढ़ाइए, आवाज बढ़ाइए जी यार, आवाज बढ़ाइए।
  Increase the volume, increase the volume, man, increase the volume.

[01:07] शोधन की मृत्यु के पश्चात चलो चलो बेटा।
  After the death of Shodhan, come on, come on, son.

[01:10] चलो।
  Come on.

[01:27] वेरी गुड मॉर्निंग बेटा।
  Very good morning, son.

[01:27] वेरी गुड मॉर्निंग ऑल ऑफ यू।
  Very good morning to all of you.

[01:32] ऑनलाइन वाले सारे प्यारे-प्यारे बच्चों को वेरी गुड मॉर्निंग।
  Very good morning to all the lovely children online.

[01:59] तो बात कर रहे हैं त्रिपक्षीय।
  So we are talking about the tripartite.

[02:03] शांत हो जाइए।
  Be quiet.

[02:07] और दो नोट्स कोई नहीं लेगा।
  And no one will take two notes.

[02:07] पता चला कोई।
  If it turns out someone...

[02:11] किसी और के लिए भी ले जा रहा हो।
  He might be taking it for someone else too.

[02:17] इसको बोलेंगे त्रिपराटाइट स्ट्रगल त्रिपक्षीय संघर्ष।
  This will be called the Tripartite Struggle, a three-party conflict.

[02:32] और यह बताया था कि कैसे कन्नौज में एक राजनीतिक वैक्यूम क्रिएट हो गया।
  And it was explained how a political vacuum was created in Kannauj.

[02:39] क्या हो गया?
  What happened?

[02:39] एक राजनैतिक वैक्यूम क्रिएट हो गया और उसे भरने के लिए भारत के विभिन्न भागों से उसे भरने के लिए भारत के विभिन्न भागों से अलग-अलग राजवंश कन्नौज की ओर बढ़े।
  A political vacuum was created, and to fill it, different dynasties from various parts of India moved towards Kannauj.

[02:55] और बेटा अभी मिलेगा ऑनलाइन नोट्स कब मिलेगा अभी मिलेगा बच्चे अभी अपलोड करवा रहे हैं तुरंत ठीक है।
  And son, you will get it now; when will you get the online notes? You will get them now, child; we are getting them uploaded immediately, okay.

[03:04] अंकित जी ने बोल दिया अपलोड कर दीजिए ठीक है अभी अपलोड हो जाएगा बेटा।
  Ankit ji has said to upload it, okay, it will be uploaded now, son.

[03:10] अलग-अलग क्षेत्रों से कहां पहुंचे?
  Where did they reach from different regions?

[03:10] कन्नौज।
  Kannauj.

[03:13] में पहुंचे।
  Reached in.

[03:17] और ये तीन वंश ये तीन राजवंश बंगाल का पाल वंश बंगाल से गुर्जर प्रतिहार कन्नौज से गुर्जर प्रतिहार कन्नौज से और राष्ट्रकूट महाराष्ट्र से राष्ट्रकूट महाराष्ट्र से अलग-अलग क्षेत्रों से कल बेटा आपको बताया भी था आपको एक मैप के थ्रू अलग-अलग क्षेत्रों से कन्नौज की ओर।
  And these three dynasties, these three royal dynasties, the Pala dynasty of Bengal from Bengal, Gurjara-Pratihara from Kannauj, Gurjara-Pratihara from Kannauj, and Rashtrakuta from Maharashtra, Rashtrakuta from Maharashtra, from different regions, yesterday son, I even told you, through a map, towards Kannauj from different regions.

[04:17] बढ़े और बेटा कन्नौज पर अधिकार करने का प्रयास किया।
  They advanced and tried to take control of Kannauj, son.

[04:24] कन्नौज में सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए कन्नौज में वैक्यूम को भरने के लिए यह संघर्ष हुआ।
  This struggle took place to establish supremacy in Kannauj and to fill the vacuum in Kannauj.

[04:32] क्योंकि तीन राजवंशों के बीच हुआ।
  Because it happened between three dynasties.

[04:35] इसलिए इसका नाम त्रिपक्षीय संघर्ष कहा गया।
  That is why it was called the Tripartite Struggle.

[04:38] ठीक है?
  Okay?

[04:38] पैराग्राफ चेंज करके वहीं से आगे जहां लिखना बंद किया था।
  Change the paragraph and continue from where you stopped writing.

[04:45] अब सोच रहे होंगे सर नोट्स भी मिल गए।
  Now you must be thinking that sir, we have already got the notes.

[04:47] अभी भी लिखवाए ही जा रहे हैं।
  Still, you are making us write.

[04:50] अरे एक भूमिका के तौर पर लिखवा रहे हैं।
  Hey, I am getting it written as an introduction.

[04:53] हां आपको कनेक्ट तो करेंगे ना बेटा कि कैसे आगे बढ़ा।
  Yes, I have to connect you, son, to how it progressed.

[05:00] लिखो बेटा।
  Write, son.

[05:05] सॉरी यह कन्नौज से नहीं था बेटा राजस्थान और गुजरात से
  Sorry, this was not from Kannauj, son, but from Rajasthan and Gujarat.

[05:20] ठीक है बेटा, कन्नौज पर तो अधिकार के लिए चल ही रहे थे।
  Okay son, we were already moving towards gaining control over Kannauj.

[05:28] देखिए, तीन राजवंशों के बीच सर्वोच्चता के लिए होने वाले संघर्ष को त्रिपक्षीय संघर्ष के नाम से जाना गया।
  Look, the struggle for supremacy between three dynasties was known as the Tripartite Struggle.

[06:06] अच्छा बेटा, बढ़वा देते हैं और थोड़ी आवाज बढ़वा दीजिए।
  Okay son, I will get it increased, please increase the volume a little more.

[06:15] ये तीन राजवंश थे।
  These were the three dynasties.

[06:27] ऐसे बनाओ जैसे पाल वंश।
  Make it like the Pala dynasty.

[06:30] बंगाल का पाल वंश।
  The Pala dynasty of Bengal.

[06:49] राजस्थान और गुजरात का गुर्जर प्रतिहार वंश।
  The Gurjara-Pratihara dynasty of Rajasthan and Gujarat.

[07:03] और महाराष्ट्र का राष्ट्रकूट वंश।
  And the Rashtrakuta dynasty of Maharashtra.

[07:20] ठीक है बच्चों?
  Okay children?

[07:20] यह तीन वंशों के बीच में त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ।
  A tripartite struggle took place between these three dynasties.

[07:23] लिखिए।
  Write it down.

[08:34] हो गया बेटा, लिखो यह त्रिपक्षीय संघर्ष।
  It is done son, write this tripartite struggle.

[08:40] यह त्रिपक्षीय संघर्ष लगभग 300 वर्षों तक निरंतर चलता रहा।
  This tripartite struggle continued continuously for about 300 years.

[09:04] इस संघर्ष का मुख्य कारण कन्नौज के माध्यम से गंगा यमुना के दोआब पर अधिकार करना था।
  The main reason for this struggle was to gain control over the Ganga-Yamuna Doab through Kannauj.

[09:28] गंगा कन्नौज के माध्यम से गंगा।
  Ganga, through Kannauj, Ganga.

[09:40] गंगा यमुना के आधार पर गंगा यमुना दोआब पर अधिकार करना था।
  Based on the Ganga-Yamuna, the goal was to gain control over the Ganga-Yamuna Doab.

[09:49] यस और नो।
  Yes and no.

[09:49] तो यह था और यह बेटा त्रिपक्षीय संघर्ष है जो हमें आपको एक मैप के थ्रू समझाना है।
  So this was it, and this, child, is the tripartite struggle that we have to explain to you through a map.

[09:59] इससे बेटा मैप तो हमने कल वैसे भी बना के दिखा दिया था लेकिन इससे क्या होगा मेरे बच्चों?
  We had already drawn the map for this yesterday, but what will this achieve, my children?

[10:04] आपको एग्जैक्ट समझ में आएगा कि भारत की कंडीशन उस समय क्या है।
  You will understand exactly what the condition of India was at that time.

[10:11] यह देखो बेटा।
  Look at this, child.

[10:13] यह देखो गुर्जर प्रतिहार मैप शोविंग किंगडम्स ऑफ गुर्जर प्रतिहार पाल एंड राष्ट्रकूटाज।
  Look at this Gurjara-Pratihara map showing the kingdoms of the Gurjara-Pratiharas, Palas, and Rashtrakutas.

[10:21] दीज़ दिस दिस इज द राष्ट्रकूट।
  These, this, this is the Rashtrakuta.

[10:25] क्या है?
  What is it?

[10:25] राष्ट्रकूट है बेटा।
  It is the Rashtrakuta, child.

[10:29] यह क्या है?
  What is this?

[10:29] राष्ट्रकूट।
  Rashtrakuta.

[10:29] और यह क्या है?
  And what is this?

[10:35] यह क्या है?
  What is this?

[10:37] यह गुर्जर प्रतिहार है।
  This is Gurjara-Pratihara.

[10:37] कितना बड़ा है ना बेटा?
  It is quite big, isn't it, son?

[10:40] गुर्जर प्रतिहार देखो कितना बड़ा है।
  Look at how big the Gurjara-Pratihara is.

[10:43] ठीक है?
  Okay?

[10:43] अब आओ पालों पर।
  Now let's come to the Palas.

[10:48] तो पालों में देखो बच्चों कि पाल में क्या है?
  So children, look at the Palas, what is in the Palas?

[10:52] पाल ये है बेटा।
  This is the Pala, son.

[10:53] पाल यह है।
  This is the Pala.

[10:53] तो यह तीन राजवंश है।
  So these are the three dynasties.

[10:58] उधर बच्चों अरब है, मुल्तान है।
  Over there, children, is Arabia and Multan.

[11:02] अन्य-अ्य्य क्षेत्र है।
  There are other areas.

[11:02] अलग-अलग क्षेत्रों पर अलग-अलग राज्य होंगे।
  There will be different kingdoms in different areas.

[11:05] ठीक है?
  Okay?

[11:05] परंतु परंतु ये तीन राज्य प्रसिद्ध है।
  But these three kingdoms are famous.

[11:09] आठवीं सदी, नौवीं सदी, 10वीं सदी की बात हम कर रहे हैं और उसमें तीन राज्य ही क्या है? मुख्य रूप से दिखाई देते हैं।
  We are talking about the 8th century, 9th century, and 10th century, and in that, only three kingdoms appear mainly.

[11:19] इसमें भी बच्चों आपको सबसे बड़ा दिख रहा होगा गुर्जर प्रतिहार और उसी के अंतर्गत आपको कन्नौज दिख भी रहा होगा।
  In this too, children, you must be seeing the Gurjara-Pratihara as the largest, and under it, you must also be seeing Kannauj.

[11:28] इसका अर्थ यह नहीं है कि कन्नौज हमेशा उसके अंडर में रहा।
  This does not mean that Kannauj was always under them.

[11:30] लेकिन इसका अर्थ यह है कि गुर्जर प्रतिहारों ने ही कन्नौज पर
  But it means that the Gurjara-Pratiharas only [controlled/attacked] Kannauj.

[11:36] सबसे लंबे समय तक शासन किया।
  They ruled for the longest time.

[11:40] क्योंकि वे उत्तर भारत से थे और उन्हें इस क्षेत्रों की ज्यादा जानकारी थी।
  Because they were from North India and had more knowledge of these regions.

[11:45] राष्ट्रकूट और पाल इसलिए ज्यादा कामयाब नहीं हो पाए क्योंकि उन्हें इन क्षेत्रों की ज्यादा जानकारी थी नहीं।
  The Rashtrakutas and Palas could not be very successful because they did not have much knowledge of these regions.

[11:50] तो गुर्जर प्रतिहार ज्यादा कामयाब हो गए।
  So the Gurjara-Pratiharas became more successful.

[11:53] मेरे प्यारे बच्चों बात समझ में आई?
  My dear children, did you understand?

[11:54] तो इसलिए ये तीन राजवंश कन्नूज के लिए बढ़ रहे हैं।
  So that is why these three dynasties are advancing for Kannauj.

[11:59] किसके लिए?
  For what?

[12:02] कन्नूज पर आक्रमण करना चाहते हैं।
  They want to attack Kannauj.

[12:06] बस इसी का नाम रख दिया गया त्रिपक्षीय संघर्ष या ट्रिपर टाटाइट स्ट्रगल।
  This is what was named the tripartite struggle or Tripartite Struggle.

[12:10] बेटा समझ पा रहे हो आप बात को?
  Son, are you able to understand the point?

[12:13] तो ये ट्रिप टाइट स्ट्रगल है।
  So this is the Tripartite Struggle.

[12:15] अब इसमें बच्चों हमें तीन राजवंशों का मुख्य रूप से अध्ययन करना है।
  Now, children, we have to mainly study three dynasties in this.

[12:17] अब तीन राज वंशों में से जो पहला राजवंश है वो पाल वंश है।
  Now, out of the three dynasties, the first dynasty is the Pala dynasty.

[12:22] पहले हम पढ़ेंगे पाल फिर हम पढ़ेंगे गुर्जर प्रतिहार और फिर हम पढ़ेंगे राष्ट्रकूट।
  First we will study the Palas, then we will study the Gurjara-Pratiharas, and then we will study the Rashtrakutas.

[12:29] क्या पढ़ेंगे?
  What will we study?

[12:32] राष्ट्रकूट।
  Rashtrakutas.

[12:35] तो तीनों को हम एक के बाद एक के बाद एक पढ़ते हुए जाएंगे।
  So we will study all three one after the other.

[12:40] और आपको सारी महत्वपूर्ण बातें हम बताते जाएंगे।
  And we will keep telling you all the important things.

[12:43] जैसे पाल वंश है तो बच्चों इसके सारे राजा पाल होंगे।
  For example, if it is the Pala dynasty, then children, all its kings will be 'Pala'.

[12:49] होंगे कि नहीं होंगे?
  Will they be or not?

[12:53] जैसे गोपाल, धर्मपाल, देवपाल, महिपाल पालीपाल है।
  Like Gopala, Dharmapala, Devapala, Mahipala, Palipala.

[12:59] होता है कि नहीं है?
  Does it happen or not?

[13:01] तो यानी यह सारे के सारे कौन हैं?
  So, that means who are all these?

[13:04] पाल शासक है।
  They are Pala rulers.

[13:13] पाल वंश का समय बच्चों आप सोचोगे कि सर कब से कब तक माना जाए?
  Children, you might wonder, sir, what should be considered the time period of the Pala dynasty?

[13:17] तो लगभग 750 से इस समय को 1000 38 एडी तक आप मान सकते हैं।
  So you can consider this time period from approximately 750 to 1038 AD.

[13:28] ठीक है?
  Okay?

[13:33] यह डेट बच्चों बहुत निर्धारित नहीं है।
  Children, this date is not very fixed.

[13:35] इसमें 5 10 साल ऊपर नीचे अलग-अलग किताबों में हो सकता है।
  In different books, it can vary by 5 to 10 years.

[13:39] नहीं समझे?
  Didn't you understand?

[13:40] परंतु
  However

[13:43] अरंत।
  Arant.

[13:47] परंतु यह पक्का है कि आठवीं, नौवीं, 10वीं और 11वीं शताब्दियों में संघर्ष चलता रहा।
  But it is certain that the conflict continued in the eighth, ninth, 10th, and 11th centuries.

[13:56] चलता रहा।
  It continued.

[13:56] तो पाल वंश में सबसे पहले बच्चों हमें पाल वंश के संस्थापक के तौर पर हमें कुछ शासकों को पढ़ना है।
  So, in the Pala dynasty, first of all, children, we have to study some rulers as the founders of the Pala dynasty.

[14:06] पहले तो जैसे कुछ महत्वपूर्ण शासक या मुख्य शासकों की बात करें तो मुख्य शासक या प्रोमिनेंट रूलर्स हमें कौन-कौन से पढ़ने हैं?
  First, if we talk about some important rulers or main rulers, then which main rulers or prominent rulers do we have to study?

[14:16] जैसे हम गोपाल को पढ़ेंगे।
  Like we will study Gopala.

[14:16] जैसे हम धर्मपाल को पढ़ेंगे।
  Like we will study Dharmapala.

[14:20] जैसे हम देवपाल को पढ़ेंगे।
  Like we will study Devapala.

[14:25] जैसे हम महिपाल को पढ़ेंगे।
  Like we will study Mahipala.

[14:28] ठीक है?
  Okay?

[14:28] इन तीन शासकों को देवपाल भी तो पढ़ना था।
  We also had to study Devapala among these three rulers.

[14:31] इन चार शासकों को देवपाल, देवपाल और बच्चों साथ में महिपाल साथ में क्या?
  These four rulers: Devapala, Devapala, and children, along with Mahipala, along with what?

[14:39] महिपाल को।
  Mahipala.

[14:44] भी समझेंगे।
  We will also understand.

[14:48] तो इन शासकों को हम मुख्य रूप से समझते हुए जाएंगे।
  So, we will proceed by understanding these rulers primarily.

[14:52] जैसे बच्चों सबका अपना-अपना काल है।
  Like children, everyone has their own era.

[14:59] जैसे यह 700 750 से 770 एडी तक राज करते हैं।
  For example, they rule from 750 to 770 AD.

[15:04] ऐसे ही यह 770 से 810 एडी तक राज्य करते हैं।
  Similarly, they rule from 770 to 810 AD.

[15:09] ऐसे ही बच्चों आपको हर राजा का कोई ना कोई काल प्राप्त होगा या टाइम पीरियड प्राप्त होगा।
  Similarly children, you will find some era or time period for every king.

[15:16] यह बच्चों हर शासक की बात नहीं है बल्कि हम यहां बात करेंगे महत्वपूर्ण शासकों की।
  This, children, is not about every ruler, but rather we will talk about the important rulers here.

[15:23] किसकी बात करेंगे और राज्य की संरचना प्रशासन की स्थापना यह तो बिल्कुल अलग बात है।
  Whom will we talk about, and the structure of the state and the establishment of administration, that is a completely different matter.

[15:33] पाल वंश के शासकों का सबसे ज्यादा योगदान स्थापत्य कला और चित्रकला के क्षेत्र में मूर्तिकला के क्षेत्र में देखा गया।
  The greatest contribution of the Pala dynasty rulers was seen in the fields of architecture, painting, and sculpture.

[15:44] साथ में बंगाल और बिहार के क्षेत्रों में।
  Along with that, in the regions of Bengal and Bihar.

[15:47] शिक्षा का विकास करने में पालो का सबसे बड़ा योगदान है।
  The Palas have the greatest contribution in the development of education.

[15:50] धर्मपाल ने विक्रमशिला और नालंदा जैसी यूनिवर्सिटी का जीर्णोद्धार कार्य करवाया।
  Dharmapala carried out the restoration work of universities like Vikramshila and Nalanda.

[16:02] विक्रमशिला और सोमपुरा जैसे विश्वविद्यालयों का मौलिक रूप से निर्माण कार्य करवाया।
  He carried out the foundational construction work of universities like Vikramshila and Somapura.

[16:07] ये बौद्ध धर्म के अनुयाई थे।
  He was a follower of Buddhism.

[16:10] किस धर्म के अनुयाई थे?
  Which religion was he a follower of?

[16:13] लेकिन मेरे प्यारे बच्चों पाल वंश की घटना या इसकी कहानी शुरू होती है शशांक गड के बाद से।
  But my dear children, the event or the story of the Pala dynasty begins after Shashanka Gaud.

[16:20] किसके बाद से?
  After whom?

[16:27] शशांक गड के बाद से बच्चों हमें क्या दिखाई देता है?
  After Shashanka Gaud, children, what do we see?

[16:30] हमें शशांक गड के बाद से दिखाई देता है कि बंगाल में शशांक गड की मृत्यु के 100 साल तक कोई भी बड़ा या केंद्रीय राज्य बंगाल में स्थापित नहीं हो पाया और बंगाल की प्रशासनिक आर्थिक और न्यायिक स्थिति बहुत [खराब हो गई थी]।
  After Shashanka Gaud, we see that for 100 years after the death of Shashanka Gaud in Bengal, no major or central state could be established in Bengal, and the administrative, economic, and judicial situation of Bengal [became very bad].

[16:51] खराब हो गई।
  It got spoiled.

[16:53] यहां मत्स्य न्याय प्रणाली का सिद्धांत चल रहा था।
  The principle of 'Matsya Nyaya' (law of the fish) was prevailing here.

[16:59] मत्स्य न्याय प्रणाली का मतलब है बच्चों जिसकी लाठी उसकी भैंस अर्थात बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है।
  Children, the Matsya Nyaya system means 'might is right', that is, the big fish swallows the small fish.

[17:06] इसका मतलब है कि जो ताकतवर होगा वही व्यापार करेगा वही प्रशासन चलाएगा।
  It means that whoever is powerful will conduct business and run the administration.

[17:16] मत्स्य प्रणाली बच्चों किसी भी काल में अच्छी प्रणाली नहीं मानी जाती।
  Children, the Matsya system is not considered a good system in any era.

[17:20] क्योंकि मत्स्य प्रणाली का मतलब है कि जो गरीब निम्न वर्ग है दब्बा दबा हुआ दमित या निम्न वर्ग है उसको तो न्याय मिलेगा ही नहीं क्योंकि वह तो शक्तिशाली है ही नहीं।
  Because the Matsya system means that the poor, the oppressed, the suppressed, or the lower class will not get justice at all, because they are not powerful.

[17:32] तो इसलिए बंगाल में 100 वर्षों तक मत्स्य न्याय प्रणाली चलती रही।
  So, for this reason, the Matsya Nyaya system continued in Bengal for 100 years.

[17:38] प्रशासनिक अराजकता, आर्थिक अराजकता और राजनीतिक अराजकता इस काल में चरम पर थी।
  Administrative anarchy, economic anarchy, and political anarchy were at their peak during this period.

[17:47] चरम पर थी।
  They were at their peak.

[17:47] इसी दौर में गोपाल नाम का
  In this very era, a person named Gopala

[17:53] व्यक्ति गोपाल वाल नाम का व्यक्ति एक शक्तिशाली व्यक्ति के तौर पर उभर कर सामने आया और उसने इस मत्स्य न्याय प्रणाली को समाप्त करके एक कानून व्यवस्था को लागू किया।
  A person named Gopala emerged as a powerful figure and, by ending this system of 'Matsya Nyaya' (law of the fish/anarchy), he implemented a system of law and order.

[18:06] लोगों ने कहा कि बंगाल के लोगों ने कहा कि तुम ही तो हो वो हीरो जिसकी हमें तलाश थी।
  The people said, the people of Bengal said, that you are the hero we were looking for.

[18:14] तो तुम ही गद्दी पर बैठो।
  So you should sit on the throne.

[18:15] क्या करो?
  What should you do?

[18:17] गोपाल सबके कहने पर 750 एडी में गद्दी पर बैठ जाते हैं और एक वंश की स्थापना करते हैं जिसका नाम है पाल वंश।
  At everyone's request, Gopala sits on the throne in 750 AD and establishes a dynasty named the Pala dynasty.

[18:28] क्या नाम है?
  What is the name?

[18:30] पाल वंश।
  Pala dynasty.

[18:32] पाल वंश।
  Pala dynasty.

[18:33] ये सारी चीजें लिखी हुई है।
  All these things are written down.

[18:35] लिखी हुई है कि नहीं?
  Are they written or not?

[18:36] अब बच्चों इसके बाद जब वह गद्दी पर आ गए गोपाल तो गोपाल के बारे में हमें कुछ महत्वपूर्ण बातें जाननी पड़ेगी कि गोपाल वाज द फाउंडर ऑफ द पाला डायनेस्टी यानी गोपाल पाल वंश के संस्थापक थे।
  Now children, after he came to the throne, we need to know some important things about Gopala, that Gopala was the founder of the Pala dynasty, meaning Gopala was the founder of the Pala dynasty.

[18:52] तो पहली बात तो यह कि गोपाल कौन हैं?
  So the first thing is, who is Gopala?

[18:54] गोपाल कौन?
  Who is Gopala?

[18:56] हैं?
  Huh?

[18:56] पाल वंश के संस्थापक है।
  He is the founder of the Pala dynasty.

[19:00] उन्होंने कौन सा धर्म अपनाया?
  Which religion did he adopt?

[19:03] क्या उन्होंने पाल वंश के साम्राज्य का विस्तार किया?
  Did he expand the Pala dynasty empire?

[19:05] यस।
  Yes.

[19:05] उन्होंने पाल वंश के साम्राज्य का विस्तार किया था।
  He had expanded the Pala dynasty empire.

[19:10] साम्राज्य का क्या किया था?
  What did he do to the empire?

[19:17] मत्स्य न्याय प्रणाली को समाप्त किया।
  He ended the Matsya Nyaya system.

[19:20] बिल्कुल।
  Absolutely.

[19:23] मत्स्य न्याय प्रणाली को समाप्त करने का कार्य किया।
  He performed the task of ending the Matsya Nyaya system.

[19:30] साथ में साथ में एक सुव्यवस्थित कानून व्यवस्था लागू करने का भी काम किया।
  Along with that, he also worked to implement a well-organized legal system.

[19:38] सुव्यवस्थित कानून व्यवस्था लागू करने का काम किया।
  He worked to implement a well-organized legal system.

[19:41] साथ में इन्होंने ओदंतापुरी में एक मठ बनवाया।
  Along with this, he built a monastery in Odantapuri.

[19:49] बाद में यही मठ देवपाल के काल में ओदंतापुरी विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया।
  Later, this same monastery was converted into Odantapuri University during the reign of Devapala.

[19:55] तो
  So

[19:58] जब आपसे पूछा जाता है कि हु वाज द फाउंडर ऑफ अ ओदंतापुरी यूनिवर्सिटी तो आप कहोगे देवपाल।
  When you are asked who was the founder of Odantapuri University, you will say Devapala.

[20:07] बट हु वाज द फाउंडर ऑफ ओदंतापुरी मठ तो आप कहोगे गोपाल।
  But who was the founder of Odantapuri Math, then you will say Gopala.

[20:11] समझे तो इन्होंने ओदंतापुरी को मठ के रूप में स्थापित किया।
  Understand, so he established Odantapuri as a monastery.

[20:23] इन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया और बौद्ध धर्म की शाखा वज्रयान को इन्होंने अपनाया था।
  He adopted Buddhism and he adopted the Vajrayana branch of Buddhism.

[20:28] आपको याद है इस काल में वज्रयान का काफी प्रभाव था।
  Do you remember that during this period, Vajrayana had a lot of influence?

[20:35] क्या था?
  What was it?

[20:35] काफी प्रभाव था उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में।
  It had a lot of influence in the northeastern regions.

[20:38] ऐसे गोपाल की मृत्यु 20 साल शासन करने के पश्चात हो गई।
  Thus, Gopala died after ruling for 20 years.

[20:42] और फिर धर्मपाल सिंहासन पर आया।
  And then Dharmapala came to the throne.

[20:47] धर्मपाल को बच्चों एक धार्मिक या आध्यात्मिक राजा कहना उचित होगा।
  Children, it would be appropriate to call Dharmapala a religious or spiritual king.

[20:54] धार्मिक या आध्यात्मिक राजा कहना उचित।
  It is appropriate to call him a religious or spiritual king.

[20:59] होगा।
  It will be.

[21:03] उसने संस्कृति के विस्तार में सबसे ज्यादा बल देने का कार्य किया।
  He worked to give the most emphasis to the expansion of culture.

[21:07] शिक्षा के विस्तार को सबसे ज्यादा धर्मपाल ने ही आगे बढ़ाने का कार्य किया।
  It was Dharmapala who worked the most to advance the expansion of education.

[21:11] तो बच्चों यह पूर्व मध्यकाल है।
  So children, this is the early medieval period.

[21:14] पूरा सिलेबस हमने लिख लिया।
  We have written down the entire syllabus.

[21:16] त्रिपक्षीय संघर्ष क्यों कन्नौज के लिए सर्वोच्चता के लिए द्वाप पर नियंत्रण के लिए हारसुख की मृत्यु के बाद राजनीतिक बन गई।
  Why did the tripartite struggle become political after the death of Harshavardhana for Kannauj, for supremacy, and for control over the Doab?

[21:24] कमजोर कन्नौज की स्थिति कमजोर बन गई।
  The weak position of Kannauj became even weaker.

[21:27] तीन राजा है पाल, गुर्जर, प्रतिहार और राष्ट्रकूट।
  There are three kings: Palas, Gurjara-Pratiharas, and Rashtrakutas.

[21:29] पाल वंश शुरू किया और पहले बताया कि शशांगोड की मृत्यु के 100 साल बाद बंगाल में अराजकता फैल रही थी।
  The Pala dynasty started, and I mentioned earlier that 100 years after the death of Shashanka, anarchy was spreading in Bengal.

[21:38] मत्स्य न्याय का सिद्धांत लागू था।
  The principle of Matsya Nyaya (law of the fish) was in effect.

[21:41] शांति और संपन्नता नहीं थी।
  There was no peace and prosperity.

[21:44] गोपाल का उदय हुआ।
  Gopala emerged.

[21:44] उसने इस अराजकता को समाप्त कर दिया।
  He ended this anarchy.

[21:47] मत्स्य न्याय प्रणाली को समाप्त कर दिया।
  He ended the Matsya Nyaya system.

[21:49] और एक नया कानून व्यवस्था या राज्य स्थापित करने का काम किया।
  And he worked to establish a new law and order or state.

[21:57] यह गोपाल पाल वंश के संस्थापक।
  This Gopala is the founder of the Pala dynasty.

[22:00] थे। मत्स्य न्याय प्रणाली को समाप्त किया।

[22:03] बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा को अपनाने का

[22:07] काम किया। वज्रयान शाखा को अपनाया।

[22:10] साम्राज्य विस्तार और इसने अपनी राजधानी

[22:12] मुंगेर जो बिहार में स्थित है उसको बनाया।

[22:16] तो मुंगेर को राजधानी बनाने का श्रेय

[22:20] मुंगेर को राजधानी बनाने का श्रेय भी किसे

[22:22] जाता है? गोपाल को। अरे बेटा कहां रहते हो

[22:25] तुम लोग? पूछ रहा है सर मत्स्य न्याय

[22:28] प्रणाली का क्या अर्थ है? बेटा जब जब

[22:32] शक्तिशाली व्यक्ति

[22:34] और

[22:36] कमजोर व्यक्ति को शोषण करने लगे इस आधार

[22:41] पर कि वह शक्तिशाली है। जिसकी लाठी उसकी

[22:45] भैंस हो जाए। जब बड़ी मछली छोटी मछली को

[22:49] खाए तो इसको कहते हैं मत्स्य न्याय

[22:52] प्रणाली का अर्थ। ठीक है? तो बच्चों

[22:56] मृत्यु हुई इनकी 770 एडी में। तो दो-तीन

[22:59] चीजें याद रखना है। पहले कौन सा धर्म

[23:01] अपनाया यह याद रखना है। राजधानी कहां बनाई

[23:04] यह याद रखना है। कौन सा धर्म अपनाया?

[23:07] बौद्ध धर्म। मत्स्य न्याय प्रणाली खत्म

[23:10] की। औदताप पूरी मठ बनवाया। इसे याद रखोगे।

[23:13] नेक्स्ट

[23:15] धर्मपाल। क्या है? धर्मपाल। धर्मपाल ने भी

[23:19] बौद्ध धर्म अपनाया और यह गोपाल के पुत्र

[23:22] और उत्तराधिकारी थे। इन्होंने बौद्ध धर्म

[23:24] को अपनाने का काम किया। इन्होंने नालंदा

[23:27] विश्वविद्यालय की तीसरी मंजिल का निर्माण

[23:29] और दो अन्य विश्वविद्यालय विक्रमशिला और

[23:32] सोमपुरा की स्थापना करवाई। इन्हें कल एवं

[23:36] संस्कृति का महान संरक्षक कहा जाता है।

[23:39] गुजराती कवि शहडोल इनके दरबार में आया था

[23:42] और उसने इन्हें उत्तरापथ का स्वामी बताया

[23:45] है। तो उत्तरापथ का स्वामी किसे कहा जाता

[23:47] है? यदि आपसे पूछा जाए तो क्या बताओगे?

[23:51] बिल्कुल। पराजित हुए इनसे यह दो शासकों से

[23:54] पराजित हुए। देखो बेटा इसी के काल में

[23:57] त्रिपक्षीय संघर्ष की वास्तव में शुरुआत

[24:00] हुई। किसकी? त्रिपक्षीय संघर्ष में। और इस

[24:04] समय जहां पाल शासक धर्मपाल थे, वहीं वहीं

[24:09] प्रतिहार शासक वत्सराज थे और राष्ट्रकूट

[24:12] शासक ध्रुव थे। और गजब की बात यह है

[24:17] कि यह दोनों से हार गया। यह दोनों से हार

[24:21] गया। ठीक है? और बाद में बच्चों

[24:23] राष्ट्रकूट ध्रुव ने वत्सराज को भी पराजित

[24:26] कर दिया। तो कुल मिलाकर यहां पर कौन जीता

[24:28] था? ध्रुव जीता था। यानी राष्ट्रकूट जीते

[24:31] थे। इसे बच्चों परम सौगात के नाम से भी

[24:34] जाना जाता है कि हमें जो यह मिली है यह

[24:37] हमारे पास बहुत बड़ा तोहफे तोहफा है। क्या

[24:40] है? बहुत बड़ा तोहफा है यह। तो यह परम

[24:44] सौगात इन्होंने शिक्षा को संरक्षण देने का

[24:47] कार्य किया। इनकी मृत्यु 810 एडी में हो

[24:51] गई। इन्हें शिक्षा और धर्म के महान

[24:54] संरक्षक के तौर पर याद किया जाएगा। देवपाल

[24:57] धर्मपाल के पुत्र और उत्तराधिकारी हुए।

[25:00] अपने पिता की भांति योग्य थे और इन्होंने

[25:03] भी शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में

[25:06] योगदान जारी रखा। सबसे शक्तिशाली शासक

[25:09] अरबी इतिहासकार सुलेमान इन्हें भारत का

[25:12] महान शासक बताते हैं। इन्होंने बौद्ध धर्म

[25:15] की वज्रियान शाखा को अपनाया और इस समय

[25:19] शैलेंद्र वंश का राजा जो जावा सुमात्रा पर

[25:22] राज कर रहा था जिसका नाम था बालपुत्र देव।

[25:26] क्या नाम था?

[25:27] बालपुत्र देव। उसने कहा उसे स्वर्णभूमि का

[25:30] राजा कहा गया। स्वर्णभूमि के राजा का मतलब

[25:33] यहां इंडोनेशिया के राजा से है।

[25:35] इंडोनेशिया को प्राचीन काल में स्वर्णभूमि

[25:38] के नाम से भी जाना जाता है। वहां सोने के

[25:41] भंडार होने के कारण और व्यापार सुगम होने

[25:44] के कारण। तो कहा जाता है इन्होंने कहा कि

[25:47] हम

[25:49] नालंदा में एक मठ बनाना नालंदा में एक मठ

[25:54] बनाना चाहते हैं। ऐसा मठ बनाने की अनुमति

[25:57] समुद्रगुप्त से श्रीलंका के राजा मेघवर्मन

[26:00] ने भी मांगी थी। याद है आपको? और एक

[26:03] बच्चों बालपुत्र देव जो रूलर ऑफ जावा

[26:08] सुमात्रा है और इंडोनेशिया है वह भी चाहता

[26:11] है ही वांटेड टू इस्टैब्लिश ए बुद्धिस्ट

[26:15] मठ इन द नालंदा एंड ही परमिटेड

[26:21] और कंस्ट्रक्शन ऑफ ए मठ और इन्होंने क्या

[26:24] कर दिया परमिट दे दिया इन्होंने क्या कर

[26:27] दिया परमिट दे दी और बच्चों उन्होंने एक

[26:30] नालंदा में मठ बनाया और इन्होंने ने मठ को

[26:33] बनाने के बाद उसे कुछ गांव भी दान किए।

[26:36] ओदंतापुरी मठ को यूनिवर्सिटी के तौर पर या

[26:39] विश्वविद्यालय के तौर पर स्थापित करने का

[26:42] श्रेय भी देवपाल को जाता है। देवपाल के

[26:45] बाद एक छोटा राजा बना विग्रहपाल जिसे

[26:48] बिल्कुल याद नहीं रखना है। उसके बाद

[26:50] नारायणपाल राजा बना जिसे बिल्कुल याद नहीं

[26:53] रखना है। यह आध्यात्मिक राजा था और उसके

[26:55] बाद एक बहुत बड़ा राजा गद्दी पर आया जिसका

[26:58] नाम महिपाल है। महिपाल जो है इस वंश के

[27:01] वास्तविक संस्थापक कहलाए। महिपाल क्या

[27:05] कहलाए? महानतम और वास्तविक संस्थापक और यह

[27:08] भी एक बौद्ध शासक हुए। इन्होंने आतिश नाम

[27:12] के एक बौद्धिस्ट अनुयाय को चाइना धर्म

[27:15] प्रचार के लिए भेजा था। सुलेमान अरबी

[27:18] इतिहासकार ने इन्हें रूमा कहा है। यहां

[27:21] रूमा शब्द का अर्थ है सबसे शक्तिशाली

[27:24] शासक। राजेंद्र चोल से यह हार गया था। और

[27:28] इस वंश के अंतिम शासक हुए रामपाल।

[27:31] संध्याकर नंदी नामक इतिहासकार ने रामपाल

[27:34] के ऊपर रामपाल चरित्र नामक पुस्तक

[27:39] रामपाल चरित्र नामक पुस्तक लिखी है किसने

[27:45] पूछा गया है यूपीएससी में किसने

[27:48] कौन सी पुस्तक

[27:50] किसके ऊपर रामपाल कौन है

[27:56] गुर्जर प्रतिहार गुर्जर प्रतिहार तो ये है

[28:00] पाल काल वंश सब लैंग्वेज में आपके सामने

[28:05] लिखा हुआ है। लिखा हुआ है। सब लैंग्वेज

[28:08] में आपके सामने लिखा हुआ है। अब बच्चों

[28:11] यहां पर

[28:14] यहां पर

[28:17] गुर्जर प्रतिहार जो है उसके संस्थापक है

[28:20] हरिश्चंद्र। लेकिन बच्चों बड़ी गजब की बात

[28:23] है कि उसके संस्थापक भले ही भले ही कौन

[28:28] हैं? हरिश्चंद्र लेकिन उसके वास्तविक

[28:31] संस्थापक नागभट्ट है। कौन है? नागभट है

[28:36] बच्चों। चंदबरदाई नामक इतिहासकार जिसने

[28:39] पृथ्वीराज रासो नामक पुस्तक लिखी है।

[28:43] उन्होंने गुर्जर प्रतिहारों को राजपूतों

[28:47] की ही एक शाखा बताया है। राजपूतों की ही

[28:51] एक शाखा बताया है। एहोल अभिलेख में गुर्जर

[28:56] शब्द आया है। एहोल अभिलेख पुलककेशिन

[28:59] द्वितीय का अभिलेख है जो नासिक से मिला

[29:03] है। इस अहोल अभिलेख में बताया गया है कि

[29:07] गुर्जर शब्द का अर्थ एक जाति है। गुर्जर

[29:11] शब्द का अर्थ एक जाति है। वार्षिक

[29:14] संस्थापक हमने क्या बताया? नागभट्ट प्रथम।

[29:17] उत्तर प्रदेश में इनके साम्राज्य का

[29:19] विस्तार हुआ। गुजरात में हुआ और राजस्थान

[29:22] में हुआ। गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक

[29:25] वास्तविक शासक नागभट्ट थे। जिनका काल 730

[29:29] से 756 तक चलता है। कब से कब तक?

[29:35] 756 तक चलता है। ग्वालियर अभिलेख में

[29:39] नागभट्ट को मलेच्छों का शासक कहा गया है।

[29:42] यहां पर मलेच्छों का मतलब होता है जनजाति

[29:45] से रिलेटेड उनका शासक इनको कहा गया है जो

[29:49] कि बच्चों बहुत क्रूर होती थी। वत्सराज

[29:52] गद्दी पर बैठा। इसके बाद नागभट्ट के बाद

[29:55] वत्सराज डिफिटेड धर्मपाल। यू नो दैट जानते

[29:59] हो कि नहीं जानते कि इन्होंने धर्मपाल को

[30:02] हराया था। उत्तर भारत में विस्तार किया।

[30:04] लेकिन बच्चों वत्सराज भी किससे हार गया?

[30:06] ध्रुव से हार गया। ध्रुव से पराजित हुआ।

[30:09] धर्मपाल को हराया। वत्सराज के बाद नागभट्ट

[30:13] गद्दी पर बैठा जो द्वितीय नागभट्ट था।

[30:15] नागभट्ट ने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया

[30:18] जो लंबे समय तक राजधानी इनकी बनी रही।

[30:23] मिहिर भोज उसके पश्चात गद्दी पर बैठा।

[30:26] मिहिर भोज वाज़ द ग्रेटेस्ट रूलर ऑफ दिस

[30:29] डायनेस्टी। मिरर भोज को राजा भोज के नाम

[30:32] से भी जाना जाता है। बट यह राजा भोज वह

[30:36] नहीं है बेटा कहां राजा भोज कहां गंगू

[30:39] तेली वो राजा भोज है परमार वंश के और उनकी

[30:43] अपने आप में एक कहानी है और हमें पता है

[30:47] तुम इस कहानी को जरूर सुनना

[30:50] तुम्हारे बारे में हमें सब पता है तुम

[30:52] क्या-क्या चाहते हो।

[30:54] ठीक है? शिक्षक और मां-बाप

[30:58] अपने बच्चों के बारे में जानते हैं। जानते

[31:01] हैं कि नहीं? हम तो यह भी बता सकते हैं कि

[31:04] यह बच्चा बैठा हुआ अभी क्या सोच रहा है।

[31:08] परंतु हम बताएंगे नहीं। उससे इसका भेद खुल

[31:13] जाएगा।

[31:15] तो अरे अरे ऐसे ही मजाक कर रहे हैं। क्या

[31:17] भेद? बेचारा कुछ भी नहीं है। मासूमियत से

[31:20] सोच रहा है कि सर कैसे पढ़ा रहे हैं? देख

[31:23] रहा है। नोट्स आगे रखे हुए बताओ यही तो

[31:26] सोच रहा है इसके दिमाग में और अन्य कोई

[31:29] विचार अभी नहीं है।

[31:32] लेकिन क्या पता अब कहने के बाद अन्य विचार

[31:36] आ जाए। विचारों का आगमन कभी भी

[31:40] विचारों का आना आसान है। उनका जाना आसान

[31:44] नहीं है।

[31:45] विचार आपको बहुत परेशान करते हैं। करते

[31:48] हैं कि नहीं करते हैं? हां विचार बच्चों

[31:51] नेगेटिव विचार आपके पूरे शरीर में कोलाहल

[31:54] पैदा कर देते हैं। कर देते हैं कि नहीं?

[31:57] कोलाहल का मतलब शोर मचा देते हैं। मचा

[32:00] देते हैं और आपको अशांत कर देते हैं।

[32:02] कभी-कभी तो आपकी नींद उड़ा देते हैं।

[32:06] है कि नहीं बेटा? किसी ने जैसे कुछ कह

[32:08] दिया तो बस तुम उसे ही सोचे जा रहे हो। उस

[32:13] उस टाइम पे मुझे यह जवाब देना चाहिए था।

[32:16] मैं मुझे यह कहना चाहिए था। जवाब ही नहीं

[32:19] दे पाया मैं। ऐसा कैसे कह सकता है?

[32:22] आखिरकार किस एंट में घूमता है? मैं भी तो

[32:26] अच्छा पढ़ता हूं। पढ़ती हूं। उसे सिलेक्शन

[32:30] लेकर औकात दिखाऊंगा।

[32:32] दिखाऊंगी। ऐसा सोचते हैं कि नहीं सोचते?

[32:35] और इस और देखो कह दिया और फिर अपने मन में

[32:38] कहेगा छोड़ो अब उस पर क्या ही बात करनी।

[32:41] लेकिन फिर भी काम करते समय सब चीजें करते

[32:44] समय रहरह कर आपके मन में वही विचार गूंजते

[32:49] रहेंगे। रहेंगे कि नहीं? और तब तक आप

[32:54] ध्यान की मुद्रा में नहीं बैठोगे और

[32:57] लंबी-लंबी सांसे नहीं लोगे तब तक ये विचार

[33:00] नहीं जाएंगे। है ना? तो ऐसे विचारों को

[33:04] बाहर निकालने के लिए क्या करोगे?

[33:07] बिल्कुल। और बच्चों दोस्त है ना दोस्त

[33:11] जीवन में अच्छे बनाने चाहिए। है ना? दोस्त

[33:15] में कभी भी एक बात बोलेंगे आपको दोस्त

[33:18] बनाते समय कभी भी यह मत सोचना कि ये दोस्त

[33:21] अमीर है या गरीब है। दोस्ती इस पर निर्भर

[33:26] नहीं करती। लेकिन कुछ लोग यह सोचकर दोस्त

[33:29] बनाते हैं कि गाड़ी है क्या? है ना? या

[33:34] फिर कितना धनायड है। है ना? भविष्य में

[33:38] किसी और योजना पर विचार किया जा सकता है

[33:40] क्या? इस आधार पर भी दोस्त बनाते हैं।

[33:43] लेकिन दोस्ती का

[33:46] दोस्ती का अमीरी और गरीबी से कोई संबंध

[33:50] हां तो दोस्त किसे बनाओगे?

[33:53] अरे सुन

[33:56] बताओ।

[34:02] हम किस बात को कर रहे ये शादी पर अटका हुआ

[34:04] है। बेटा तुम अपने पेरेंट्स से बात

[34:09] तुम अपने पेरेंट्स से बात करवाना। हम

[34:12] कहेंगे

[34:14] अभी मत कराओ। देखो कह रहा है अभी करवाए

[34:16] क्या?

[34:18] अब ध्यान से सुनो। अरे सुनो एक बहुत

[34:22] कंक्लूडिंग बात बताएंगे। है ना? क्योंकि

[34:24] आप तो सबसे ज्यादा समय तो दोस्तों में ही

[34:26] खराब करते हो ना? और सबसे ज्यादा प्रभावित

[34:29] भी उनसे ही होते हो ना। तो देखो आज

[34:30] बिल्कुल जड़ से मिटा देंगे तुम्हारी इस

[34:32] बात को। ऐसे दोस्त को कभी दोस्त मत बनाओ

[34:37] जो तुम्हें तुम्हारी अच्छाई और बुराइयों

[34:41] के साथ स्वीकार ना करें।

[34:45] नहीं समझे जो तुम्हारी सिर्फ अच्छाई को

[34:48] स्वीकार करेगा। इसका मतलब गड़बड़ है। ऐसे

[34:52] व्यक्ति को दोष बनाओ जो तुम्हारा बुरा

[34:55] पक्ष भी स्वीकार करें, अच्छा पक्ष भी

[34:57] स्वीकार करें और बुरे समय में तुम्हारे

[35:01] काम आ जाए और यदि कभी तुम पर कोई गलती हो

[35:04] जाए तो बच्चों वो तुम्हें क्षमा कर दे और

[35:08] तुम उसे क्षमा कर दो। क्योंकि बच्चों

[35:12] आखिरकार तुम लोग क्या हो? इंसान हो। और

[35:15] गलतियों का इंसान क्या होता है? पुलिंदा।

[35:18] होता है कि नहीं? तो बस यह मापदंड है

[35:21] दोस्ती के। लेकिन कुछ लोगों को देखना है

[35:23] एठ में रहते हैं। तुमसे गलती हुई नहीं कि

[35:26] उन्होंने अपने आप को तुमसे काटना शुरू कर

[35:29] दिया। ठीक है? और आपको समय-समय पर इस चीज

[35:34] का बोध कराएंगे कि देखो हमने तुम्हें छोड़

[35:37] दिया।

[35:39] ठीक है? तो ऐसे मूर्खों को दोस्त ना

[35:42] बनाएं। नहीं समझे? बस इस बात यह लोग क्या

[35:46] है? दंभी।

[35:48] दंभी का मतलब अहंकारी जिसका उन्हें भी खुद

[35:52] नहीं पता है कि यह अहंकारी है। उन्हें भी

[35:56] खुद नहीं पता कि ये अहंकारी है। परंतु

[35:58] उनमें अहंकार कूट-कूट कर भरा पड़ा है।

[36:02] लिखो विनम्रता में अहंकार नहीं होता बेटा।

[36:05] और वो स्थिति के अनुसार ढल जाता है। ठीक

[36:08] है? लिखो।

[36:11] नहीं लिखना नहीं है। तो मिहिर भोज क्या

[36:13] है? महानतम शासक। कौन है?

[36:17] कल्याणकारी

[36:19] कल्याणकारी कल्याणकारी शासक का मतलब जानते

[36:23] हो जो कल्याण के कामों को करे जो कल्याण

[36:27] के कामों को करे इन्होंने बच्चों देखो

[36:30] डिवाइन थ्योरी ऑफ किंगशिप का काम किया

[36:32] डिवाइन थ्योरी ऑफ किंगशिप का मतलब है

[36:36] डिवाइन थ्योरी ऑफ किंगशिप का मतलब क्या है

[36:39] बेटा डिवाइन थ्योरी और किंगशिप का मतलब है

[36:43] राजत्व का दैय सिद्धांत और इन्होंने ने

[36:46] आदि वरह वरह बेटा किसका विष्णु का अवतार

[36:49] है और प्रभास जो सूर्य के अवतार के रूप

[36:53] में है उसका इन्होंने उपाधि धारण की

[36:57] प्रभास और आदिवराह अपनाया कौन सा भागवत

[37:01] धर्म ये तो आदिवराह से भी स्पष्ट हो रहा

[37:04] है कि इसका धर्म पक्का भागवत ही होगा

[37:06] हराया किसे राष्ट्रकूट वंश के शासक कृष्ण

[37:11] सेकंड को इसने हरा दिया तो देखो कभी ध्रुव

[37:15] से वत्स राज हार गए थे लेकिन राष्ट्रकूट

[37:19] शासक किसने हरा दिया ध्रुव को तो तीनों

[37:23] कभी हार रहे हैं कभी जीत रहे इसलिए तो

[37:26] इसका नाम बेटा क्या है राजा भोज इन्हें

[37:30] कहा गया इनका उत्तराधिकारी हुआ महेंद्रपाल

[37:32] जिसे याद रखने की बिल्कुल जरूरत नहीं है

[37:35] इसकी उपाधियां थी यूपीएससी में पूछा गया

[37:39] महाराजा धीराज परम भट्टारक परमेश्वर सीधा

[37:43] ईश्वर की उपाधि ले ली लो जी

[37:46] क्या परमेश्वरा

[37:48] क्या परमेश्वरा हराया राष्ट्रकूट शासक

[37:52] इंद्र फर्स्ट को इसने भी हरा दिया अभी

[37:55] राष्ट्रकूट ने हराया था अभी इन्होंने हरा

[37:57] दिया तो ऐसे हराते रहते हैं राजशेखर एक

[38:00] प्रसिद्ध लेखक है जो इनके दरबार में रहते

[38:03] थे बेटा इस राजशेखर से महेंद्रपाल के

[38:08] दरबार में इस राजशेखर से यूपीएससी ने दो

[38:12] से तीन बार प्रश्न उठाया

[38:15] राजशेखर वाज द फेमस पोएट। क्या थे? फेमस

[38:19] पोएट एंड ऑथर। और इनके प्रमुख लेखक लेखन

[38:23] हैं कपूर मंजरी, काव्य मीमांसा, बाल

[38:27] रामायण, थर विलास, भुवनकोष, बाल भारत। ये

[38:33] सारी किताबें किसने लिखी? राजशेखर ने।

[38:36] किसके दरबार में? महेंद्रपाल। किसके?

[38:41] महिपाल अगले शासक बने। एक इस काल में भी

[38:44] महिपाल है। एक वहां महिपाल है। एक यहां भी

[38:48] महिपाल है। इन्होंने शांति और संपन्नता को

[38:50] चरम पर पहुंचा दिया। चरम पर पहुंच गया तो

[38:53] अब क्या होगा? पतन। क्या होगा? पतन। अब

[38:57] बगदादी यात्री अल मसूदी इन्हीं के काल में

[38:59] भारत आए। और बच्चों इनकी मृत्यु के बाद

[39:03] यानी महिपाल की मृत्यु के बाद इस वंश का

[39:06] धीरे-धीरे पतन होता चला गया।

[39:09] 2018 में महमूद गजनवी ने आक्रमण किया बेटा

[39:13] और उस समय शासक था राज्यपाल

[39:17] राज्य पाल जो हार गया था जो हार गया था

[39:21] अंतिम शासक इस वंश के थे यशपाल कौन थे कौन

[39:27] थे बस तो यह हो गया गुर्जर प्रतिहार अब

[39:32] यदि हम बात करें तो हम बात करेंगे ये पाल

[39:35] फिर से लग गया कोई बात नहीं के लिए परेशान

[39:38] नहीं होना देवपाल के गुर्जर प्रतिहार मेहर

[39:44] भोज ये सारा समझा दिया

[39:47] राष्ट्रकूट अगला वंश आता है कौन सा

[39:50] राष्ट्रकूट राष्ट्रकूटों ने मेरे प्यारे

[39:53] बच्चों बहुत बड़े व्यापक स्तर पर संस्कृति

[39:58] के निर्माण में स्थापित

[40:02] स्थापत्य के कला में स्थापत्य कला के

[40:06] विकास में सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया

[40:09] आपने मेरे बच्चों अजंता एलोरा की गुफाएं

[40:12] सुनी होंगी अजंता एलोरा की गुफाएं और

[40:15] बच्चों कौन भूल सकता है एलोरा का कैलाश

[40:20] मंदिर जो एक मोनोलिथिक संरचना है

[40:25] मोनोलिथिक संरचना का मतलब होता है मेरे

[40:28] प्यारे बच्चों एक ही पत्थर से बनाई गई

[40:33] संरचना बनाई गई संरचना एकास्म कहते हैं

[40:37] उसको क्या कहते हैं? एककास्म कहते हैं।

[40:40] राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दंती दुर्ग

[40:43] थे। संस्थापक याद रखना, राजधानी रखना,

[40:45] महत्वपूर्ण शासक रखना, सब भूल जाना बाकी।

[40:48] बस यहीं से पूछेगा पूछेगा। ठीक है बेटा?

[40:51] मतलब जब याद करोगे पेपर के टाइम पे तो

[40:54] क्या-क्या याद करोगे? संस्थापक, राजधानी

[40:58] और कोई महत्वपूर्ण शासक हुआ क्या? बस उसके

[41:01] बारे में जैसे राजशेखर को है ना? याद कर

[41:04] ली। संस्थापक कौन है?

[41:08] राजधानी क्या है?

[41:10] महाराष्ट्र में एक जगह है मान्य खेत।

[41:14] मान्यखेत थैंक यू बेटा। थैंक यू। मान्यखेत

[41:17] आरंभिक उदय लातूर नाम की जगह है

[41:20] महाराष्ट्र में। क्या नाम है? क्या नाम

[41:24] है? लातूर है। लातूर महाराष्ट्र में

[41:28] बच्चों इन्होंने क्या किया? आरंभिक उदय

[41:31] किया। उत्तर भारत में ये क्या चाहते थे?

[41:34] शायद दंतीद दुर्ग हिरण्य यज्ञ किया और

[41:38] द्वारपाल बनाया प्रतिहार राजा को। सोचो

[41:42] बेटा यानी

[41:44] उन्होंने एक यज्ञ किया हिरण्य यज्ञ यानी

[41:48] कि एक प्रजा की कुशलता के लिए एक यज्ञ

[41:51] होता है। और इस यज्ञ में द्वारपाल बनाया

[41:55] था प्रतिहारों को। इसका मतलब राष्ट्रकूट

[41:58] कितने वीर है देखो आप। है ना? उन्होंने

[42:01] कहा तुम द्वारपाली करो।

[42:04] यज्ञ चल रहा है और व्यवधान पड़े तो उसको

[42:06] रोकना। ठीक है? तो यह इनकी महत्ता बताते

[42:10] हैं। राष्ट्रकूट वंश के शासक

[42:13] ने बच्चों ध्रुव ध्रुव अगले शासक हुए।

[42:16] ध्रुव इस वंश के अगले शासक हुए। और ध्रुव

[42:19] ने किसको हराया? धर्मपाल और वत्सराज दोनों

[42:22] को हरा दिया। और गंगा यमुना के सिक्के

[42:25] चलाए ध्रुव ने। क्यों ना चलाए? इसका मतलब

[42:28] है वह यह बताना चाहता है देखो गंगा यमुना

[42:31] के दब मेरा में भी मेरा अधिकार है मैंने

[42:35] सबको हरा दिया है ध्रुव वाज द पावरफुल

[42:39] रूलर ऑफ द राष्ट्रकूट आज बच्चों गंगा

[42:42] यमुना के सिक्के महानतम शासक लेकिन बच्चों

[42:44] इस वंश के गोविंद थर्ड है कौन है कौन है

[42:49] ध्रुव के पुत्र और उत्तराधिकारी थे

[42:52] पल्लवों को भी हरा दिया और पांड्यों को भी

[42:55] हरा दिया नीचे जाकर

[42:57] धर्मपाल को भी हरा दिया और नागभट्ट सेकंड

[43:01] को भी हरा दिया। कहते हैं निर्माण करवाया

[43:04] एलोरा की गुफाओं का। किसका?

[43:08] एलोरा की गुफाओं का। और इस वंश में आगे

[43:13] चलकर एक राजा हुए जिनका नाम था अमोग वर्ष।

[43:16] क्या नाम था?

[43:18] अमेग वर्ष का काल बच्चों धार्मिक

[43:20] सहिष्णुता के काल के रूप में याद किया

[43:24] जाता है। धार्मिक सहिष्णुता का मतलब समझो

[43:26] बेटा राष्ट्रकूट राष्ट्रकूट रूलर्स अमोग

[43:31] वर्ष वाज़ द फॉलोअर ऑफ जैनिज्म। कौन किस

[43:34] धर्म को मान्य थे? जैन धर्म को। लेकिन

[43:36] बच्चों थे सहिष्णु। कैसे थे? तो इन्होंने

[43:40] संरक्षक बने। अमोग वर्ष भारत में सबसे

[43:43] ज्यादा लंबे समय तक राज करने वाला राजा

[43:45] है।

[43:47] 64 साल। देखो बेटा कितने साल? 62 साल। 62

[43:53] साल शासन करते हैं। कौन? अमोग वर्ष। अमोग

[43:58] वर्ष कन्नड़ भाषा के विद्वान कहते हैं

[44:01] बच्चों इनके दरबार में रहते थे और यह खुद

[44:04] कन्नड़ बोलते थे। जैन सन्यासी जिनसेन इनके

[44:08] दरबार में थे जिन्होंने आदि पुराण लिखा

[44:10] था। क्या लिखा था? आदि पुराण। दो अन्य

[44:14] प्रसिद्ध व्यक्ति भी इनके दरबार में रहते

[44:18] थे। एक का नाम था महावीराचार्य और एक का

[44:21] नाम था स्वयंभू। महावीराचार्य ने एक किताब

[44:24] लिखी थी जिसका नाम है गणित सार संग्रह।

[44:27] क्या नाम है?

[44:29] और बच्चों अमे अमोग वर्ष की किताब दो बार

[44:32] यूपीएससी ने पूछी है। कवि राजमार्ग

[44:37] कवि राजमार्ग किसकी किताब है? किसकी किताब

[44:42] है? इस काल में आर्थिक विकास कहते हैं

[44:46] राष्ट्रकूटों का चरम पर पहुंच गया। और

[44:49] इन्होंने व्यापार में बड़ोच बंदरगाह का

[44:52] प्रयोग किया। वेयर इज बड़ोच बंदरगाह?

[44:55] गुजरात गुजरात इसी से सातवानों का भी

[44:58] व्यापार होता था। सातवान भी तो यहीं राज

[45:01] करते थे। मान्य खेत कृष्णा नदी के किनारे

[45:05] था। अमोग वर्ष की मृत्यु के बाद दो राजा

[45:07] हुए। इंद्र थर्ड और बच्चों कृष्णा थर्ड।

[45:11] कृष्णा थर्ड इंद्र थर्ड ने प्रतिहार शासक

[45:15] महिपाल को हरा दिया। यह सुना था ना वहां

[45:18] पे। और इंद्र थर्ड ने बलाहार की उपाधि ली।

[45:22] यानी एक महान शासक जिसने विजय ही विजय

[45:26] प्राप्त की हो। कृष्णा थर्ड इस वंश के

[45:28] अंतिम शक्तिशाली राजा थे। अंतिम शक्तिशाली

[45:32] राजा थे। तो बताओ राष्ट्रकूटों की राजधानी

[45:35] कहां? मान्यखेत। राष्ट्रकूटों का संस्थापक

[45:39] कौन?

[45:41] राष्ट्रकूटों का सबसे कल्याणकारी राजा

[45:43] कौन?

[45:45] नागभट्ट। कौन? नागभट्ट।

[45:49] कॉलेज जाना है।

[45:52] ठीक ठीक बेटा जाओ आराम करो दवाई भी ले

[45:55] लेना है ना हैं हां जाओ जाओ आराम ठीक है

[46:00] देखो बेटा

[46:02] कन्नड़ कवि अरे सुनो

[46:05] कन्नड़ कवि पना जो थे बच्चों कहते हैं वो

[46:09] इनके दरबार में रहते थे और पना ने क्या

[46:13] लिखा था शांति पुराण क्या लिखा था तो

[46:17] जिनसे ने लिखा आदि पुराण और पना ने लिखा

[46:21] था शांति पुराण क्या लिखा था दो प्रसिद्ध

[46:24] मंदिर भी बच्चों कृष्णा थर्ड ने बनवाए एक

[46:28] का नाम है कमलेश कृष्णेश्वर मंदिर और एक

[46:32] का नाम है गंड मार्तंडे मंदिर ठीक है गंड

[46:37] मार्तंडेय मंदिर और इस वंश के अंतिम शासक

[46:40] है कर्क कौन है

[46:44] कर्क द्वितीय कौन है द्वितीय तो बच्चों

[46:48] इसमें आपको क्या याद रखना है कमो वर्ष को

[46:51] याद रखना है। जैन धर्म के अनुयाई थे। इनके

[46:54] द्वारा जनता एलोरा की गुफाओं का निर्माण

[46:57] करवाया गया इन शासकों के द्वारा और कृष्ण

[47:01] फर्स्ट ने ही बच्चों एलोरा के कैलाश टेंपल

[47:05] का निर्माण करवाया था जो दुनिया का एकाश्म

[47:12] पत्थर से बनाया गया सबसे बड़ा मंदिर है

[47:17] दुनिया का बेटा किसका दुनिया का एकाश्म

[47:21] बनाया गया क्या है मंदिर है इसके बाद

[47:24] बच्चों जब यह संघर्ष खत्म हो जाता है तो

[47:27] इसके बाद

[47:29] शासनकाल स्थापित होता है किसका?

[47:33] राजपूतों का। किसका?

[47:36] कहते हैं गुर्जर प्रतिहार जिस प्रकार

[47:39] गुप्तों के सामंत थे, उसी प्रकार राजपूत

[47:44] गुर्जर प्रतिहारों के सामंत थे। और

[47:48] धीरे-धीरे उनका विकास हुआ। तभी तो बच्चों

[47:51] याद करो पृथ्वीराज रासों में चंद्रबरदाई

[47:54] ने चंद्रबरदाई ने गुर्जर प्रतिहारों को

[47:58] राजपूतों की एक शाखा बताया है। बताया कि

[48:01] नहीं? तो राजपूत कहां से आए? तो राजपूतों

[48:05] का इतिहास एक कर्नल टॉड नामक इतिहासकार ने

[48:09] लिखा है बेटा। किसने लिखा है? कर्नल टॉड

[48:13] ने। और वह उसने कहा है कि राजपूतों का

[48:16] इतिहास वास्तव में सातवीं शताब्दी से

[48:19] जुड़ा हुआ है। और अजमेर के पास एक जगह है

[48:23] शाकंभरी।

[48:25] वहां चौहानों का उदय सबसे पहले दिखाई देता

[48:31] है। लेकिन प्यारे बच्चों जैसे तीन

[48:34] ब्रांचेज इनकी थी वैसे ही चौहानों की

[48:38] चौहानों की राजपूतों की पांच ब्रांचेज

[48:42] बहुत फेमस थी। पहली ब्रांच का नाम है

[48:45] चौहान। दूसरी ब्रांच का नाम है गहड़वाल।

[48:49] तीसरी ब्रांच का नाम है चंदेल। चौथी

[48:52] ब्रांच का नाम है परमार और पांचवी ब्रांच

[48:56] का नाम है चालुक्य। क्या है? पांच

[49:00] ब्रांचेज कहते हैं राजपूतों की बहुत खास

[49:03] थी और इनको बोलने में आपको पता है बच्चों

[49:07] हम कैसे किसका सहारा लेते हैं

[49:11] इनको बोलने में हम ऐसे बोलते हैं कि ऐसे

[49:15] बोलते हैं

[49:18] कन्नौज के गहरवाल

[49:21] अजमेर के चौहान

[49:24] अजमेर के चौहान बुंदेलखंड के चंदेल

[49:29] मालवा के परमार मालवा के परमार और कल्याणी

[49:34] के चालुक्य कल्याणी के चालुक्य या वातापी

[49:38] के चालुक्य बात समझ में आया तो ऐसे हम

[49:42] इनके नाम से इन्हें क्या करते हैं संबोधित

[49:45] करते हैं जैसे बंगाल का पाल वंश जैसे

[49:49] बंगाल का पाल वंश जैसे बंगाल के पाल वंश

[49:54] के अलावा

[49:56] राष्ट्रकूट वंश कहां कहां का? महाराष्ट्र

[49:58] का और बच्चों गुर्जर प्रतिहार वंश गुजरात

[50:02] राजस्थान का क्लियर हुआ ऐसे ही राजपूत वंश

[50:05] आए। पहली बार में जो राजपूत वंश हमारे

[50:08] सामने आया ये देखो बच्चों चौहान अजमेर में

[50:11] गहड़वाल कन्नौज में परमार मालवा में।

[50:16] चौहान वंश की बात करें तो सबसे पहले चौहान

[50:19] वंश जो है वह बच्चों सातवीं शताब्दी एडी

[50:24] में स्थापित हुआ शाकंभरी के पास और इसके

[50:27] संस्थापक कौन थे? इसके संस्थापक कौन थे?

[50:32] वासुदेव इसके संस्थापक थे। कौन थे?

[50:35] वासुदेव इसके संस्थापक थे। कहां? शाकंभरी

[50:40] अजमेर में। अच्छा बच्चों यदि आपसे कोई

[50:43] पूछे कि हमें कौन सा ऐसा अभिलेख है जिसके

[50:48] जिसके द्वारा सही रूप से चौहानों का

[50:52] इतिहास पता चलता है तो आप कहेंगे हर्ष

[50:57] अभिलेख जयपुर से मिला जो इस वंश के राजा

[51:00] विग्रहराज का है। किसका है? विग्रहराज का

[51:04] है। बिजोलिया अभिलेख जो हमें राजस्थान का

[51:08] है। सोमेश्वर का। सोमेश्वर वाज द फादर ऑफ

[51:11] पृथ्वीराज चौहान। फादर ऑफ पृथ्वीराज

[51:14] चौहान। तो उसका अभिलेख तो इन अभिलेखों से

[51:17] बच्चों हमें मुख्य रूप से जानकारी प्राप्त

[51:22] होती है। अजय राज बच्चों इस वंश के एक

[51:26] अन्य राजा हुए। जिन्होंने पहली बार अजमेर

[51:29] नगर को बसाने का काम किया था। किसे बसाने

[51:33] का काम किया था? अजमेर नगर को बसाया था। आ

[51:37] से अजयराज आ से अजमेर उन्होंने जैसे

[51:40] आनंदपाल तोमर ने आधुनिक दिल्ली के निर्माण

[51:45] पर बल दिया था। किसके निर्माण पर? आधुनिक

[51:49] दिल्ली के निर्माण पर। इसके अगले राजा हुए

[51:52] अरणोराज। जिसे आपको याद रखने की बिल्कुल

[51:55] जरूरत नहीं है। उसके पुत्र हुए बीसलदेव।

[51:59] इसे याद रखने की जरूरत है क्योंकि चौहान

[52:02] वंश के सबसे शक्तिशाली राजा मेरे प्यारे

[52:06] बच्चों पृथ्वीराज चौहान नहीं जिनका नाम

[52:08] आपने सुना है बार-बार बल्कि विसलदेव थे।

[52:11] कौन थे? विसलदेव थे। विसलदेव वाज द

[52:15] ग्रेटेस्ट रूलर ऑफ द ऑफ द चौहान

[52:18] डायनेस्टी। एंड ही एक्सपेंडेड चौहान

[52:22] डायनेस्टी। सबसे ज़्यादा एक्सपेंशन करने का

[52:25] श्रेय विसलदेव को जाता है। केवल 10 साल का

[52:28] शासन था। इसे विग्रहराज फोर्थ भी कहा गया।

[52:33] इस वंश के महानतम शासक थे। साम्राज्य चरम

[52:36] पर पहुंचाया। विसलदेव ना केवल एक बड़े

[52:39] राजा थे। एक महान लेखक भी थे और उन्होंने

[52:42] हरिकेल नामक ग्रंथ लिखा है जो अजमेर में

[52:46] अाई दिन के झोपड़े पर आज भी लिखा हुआ है।

[52:51] उसका हरिकेल के कुछ श्लोक वहां पर आज भी

[52:54] लिखे हुए हैं। क्योंकि अाई दिन का झोपड़ा

[52:57] कुतुबुद्दीन ऐबक ने बहुत जल्दी बना दिया

[52:59] था। क्या कर दिया था? बहुत जल्दी बना दिया

[53:02] था। जिसके कारण क्या हो गई? बहुत ज्यादा

[53:06] दिक्कत हो गई। यानी कि इतनी जल्दी क्यों

[53:08] बनवाया भाई? है ना? 2ाई दिन में बनवा

[53:12] दिया। तो 2ाई दिन में जो पुरानी चीजें थी,

[53:15] वह उनको इरेज नहीं करवा पाया। तो आज भी

[53:19] अाई दिन के झोपड़े पर विसलदेव के ग्रंथ

[53:22] हरिकेल के संस्मरण दिखाई देते हैं।

[53:27] विसलदेव को नहीं बहुत प्रसिद्धि मिली।

[53:30] हमें इसलिए नहीं पता क्योंकि हम पृथ्वीराज

[53:32] और संयोगिता की कहानी से प्रभावित है। है

[53:35] ना? और पृथ्वीराज चौहान गोरी से लड़ा। हम

[53:39] इसलिए प्रभावित है जबकि विसलदेव ने तो

[53:42] तुर्कों को कई बार हराया

[53:45] लेकिन वह राजस्थान के इतिहास में स्पेशली

[53:48] बेटा मेंशन किया जाता है। राजस्थान के

[53:51] इतिहास में स्पेशली उसे मेंशन किया जाता

[53:54] है। तो आपको आवश्यकता नहीं है। तो महानतम

[53:57] राजा कौन है? विसलदेव। कौन है? विसलदेव।

[54:01] विसलदेव। लेकिन सबसे प्रसिद्ध

[54:06] मोस्ट पॉपुलर कहेंगे। ये किससे पॉपुलर हो

[54:10] गया? संयिता से। प्रेम कहानी से पॉपुलर हो

[54:15] गया। और गौरी से युद्ध गौरी से युद्ध में

[54:20] और गौरी को युद्ध में हराया और फिर बच्चों

[54:24] हार भी गया। ठीक है? तो पृथ्वीराज चौहान

[54:27] इसलिए याद है क्योंकि उसे तुर्की राज्य की

[54:30] स्थापना से जोड़ा जाता है कि नहीं जोड़ा

[54:32] जाता है? यस और नो। तो इसलिए है पृथ्वीराज

[54:36] चौहान क्योंकि आप पृथ्वीराज चौहान को

[54:38] अच्छे से जानते हो। इसलिए पृथ्वीराज चौहान

[54:41] के बारे में देखो हम कितनी सारी बातें अलग

[54:43] से बता रहे हैं। इनके पिता का नाम

[54:46] इनके समकालीन राजा जयचंद की पुत्री

[54:50] संयोगिता से इन्हें प्रेम हो गया।

[54:54] क्या हो गया?

[54:56] प्रेम। अब बच्चों प्रेम भी कई स्तरों का

[54:59] होता है। ठीक है? और इस विषय को तुम्हें

[55:02] जानने में गहरी रुचि है।

[55:05] तो तो प्रेम बच्चों कई स्तरों का होता है।

[55:10] एक प्रेम तो ऐसा है जो कि मात्र मात्र

[55:15] अट्रैक्शन होता है। ठीक है? कि हमने किसी

[55:19] को देखा। हम उसके प्रति अट्रैक्ट हुए और

[55:22] हमने इसे नाम दे दिया प्रेम का। लेकिन

[55:27] प्यारे सुन लो। एक प्रेम होता है बच्चों।

[55:32] एक प्रेम होता है मानसिक स्तर पर। जब आप

[55:37] ने उनकी खूबी को देखा और खूबी को देखकर

[55:41] प्रभावित हुए और फिर आपके मन में बात आई

[55:46] कि हमारा मित्र ऐसा होना चाहिए।

[55:51] एक इससे गहरा भी होता है।

[55:55] जिसे कहते हैं आत्मिक। क्या कहते हैं?

[55:59] आत्मिक। जिसमें जिसमें बोलने की आवश्यकता

[56:03] नहीं है। मौन ही मौन से बात करता है।

[56:10] मौन ही मौन से यह आकर्षण नहीं है और यह

[56:14] कुछ लेता नहीं है। यह त्याग का नाम है।

[56:18] इसमें पाना नहीं है। इसमें क्या है?

[56:21] त्याग। यही है बच्चों सबसे बड़ा प्रेम जो

[56:26] दुनिया में अब नहीं मिलता। क्योंकि यदि यह

[56:30] प्रेम हो जाए तो यह प्रेम मीरा को हो गया

[56:35] तो मीरा ने

[56:37] आंख बंद करके घनश्याम देख लिया।

[56:41] यस और नो। यह प्रेम सूरदास को हो गया तो

[56:45] अंधे होकर भी उन्हें पता था कौन से वस्त्र

[56:48] पहनाए हैं। आज

[56:50] यह प्रेम यह प्रेम तुलसीदास को हो गया। तो

[56:56] तुलसीदास ने मरा मरा कहकर भी राम पा लिया।

[57:00] वाल्मीकि ने भी तो मरा मरा कहकर क्या पा

[57:03] लिया? राम पा लिया। यह प्रेम वो है जिसमें

[57:07] पाना नहीं है। जिसमें अपने आप को खोना है।

[57:11] जिसमें त्याग है। क्या है? यह तुम्हारे

[57:15] बूते से बाहर की बात है।

[57:18] है कि नहीं है?

[57:20] ऐसे परंतु आप यह मत कहना कि जीवन में अरे

[57:25] सुन ले यह देखो रामलाल सुन ले यह मत कहना

[57:31] कि बच्चों क्या इतिहास में ऐसे प्रेम हुए

[57:34] ही नहीं ऐसे प्रेम भी हुए हैं। ठीक है?

[57:37] पटना में ही

[57:41] अब तुम तो पटना में ही बैठे हो तो पटना का

[57:44] ही उदाहरण देंगे। पटना में ही तन्नू बाई

[57:48] को धर्षण तिवारी से ऐसा ही प्रेम हो गया।

[57:53] जब मोन ही मोन से बात करता था तो उसकी

[57:57] कहानी को फिर कभी सुनाएंगे। फिलहाल तो

[58:01] फिलहाल तो पृथ्वीराज चौहान की कहानी

[58:05] सुनाएंगे। ठीक है?

[58:07] तो कहते हैं जब पृथ्वीराज चौहान को प्रेम

[58:11] हुआ तो अब जयचंद जो था जयचंद यह नहीं

[58:17] चाहता था कि मेरी पुत्री का विवाह इससे हो

[58:21] जाए।

[58:23] राजपूतों की हार का एक मुख्य कारण बताते

[58:26] हैं। बच्चों आपसी मतभेद कॉन्फ्लिक्ट बहुत

[58:29] ज्यादा होना। बच्चों पड़ोसी राज्य राजा

[58:32] राजपूत है। वह उसको हराने में लगे हुए

[58:35] हैं। जबकि यूनिटी यदि इनमें होती तो

[58:38] दुनिया का कोई भी राजा दुनिया का कोई भी

[58:42] योद्धा बच्चों इन्हें आकर पराजित नहीं कर

[58:44] सकता था। लेकिन ये आपस में लड़ते रहते थे।

[58:47] इसमें पृथ्वीराज चौहान भी कम नहीं थे और

[58:50] जयचंद भी बड़े राजा है वे भी कम नहीं थे।

[58:52] तो बच्चों जैसे पृथ्वीराज चौहान ने 1178

[58:55] में एक युद्ध लड़ा जिसका नाम है जिसका जो

[58:59] युद्ध बच्चों उन्होंने परमर्दी देव के

[59:02] खिलाफ लड़ा जो एक चंदेल शासक है।

[59:05] आपने आउदल को सुना है आल्हा उदल बच्चों दो

[59:10] बड़े योद्धा थे। आल्हा और उदल दो बहुत

[59:13] बड़े योद्धा थे। और यह दोनों कहते हैं जब

[59:17] परमरदी देव वाज द ग्रेट रूलर ऑफ द चंदेल

[59:20] डायनेस्टी यानी चंदेल वंश का बड़ा राजा था

[59:23] परमदी देव बहुत बड़ा और उसी

[59:27] उसी के राज्य में महोबा भी पड़ता था। क्या

[59:30] पढ़ता था महोबा और महोबा के ही थे दोनों

[59:34] आ्हा और उदल दो भाई एक ही मां के पेट से

[59:39] उत्पन्न हुए तो कहा जाता है कि आला और उदल

[59:43] से परमर्दी देव का कुछ झगड़ा हो गया और

[59:46] आला और उदल भिक्षु अपना राज्य छोड़कर चले

[59:50] गए तो परमर्दी देव को पता था कि यदि

[59:54] पृथ्वीराज चौहान जैसे बड़े राजा से युद्ध

[59:56] लड़ना है जिनका राज्य अजमेर से दिल्ली के

[59:59] सारे क्षेत्रों तक फैला हुआ है और हरियाणा

[01:00:02] इत्यादि में फैला हुआ है। यदि उससे लड़ना

[01:00:04] है तो आला उदल की आवश्यकता तो पड़ेगी। तो

[01:00:08] उन्होंने उनकी मां से कहा जाकर हाथ जोड़कर

[01:00:11] कि आला उदल को वापस ले आइए क्योंकि वे

[01:00:14] लड़कर झगड़ा करके चले गए थे बच्चे। मतभेद

[01:00:17] हो गया था। उनका अपमान वगैरह हुआ था।

[01:00:21] तो मां ने आला उदल से मिलने के लिए उन्हें

[01:00:25] बुलाया और उन्हें कहा कि आपसी विवाद अपनी

[01:00:29] जगह है लेकिन राष्ट्र सबसे पहले राष्ट्र

[01:00:33] की और मातृभूमि की सुरक्षा के लिए तुम

[01:00:36] कहीं भी हो और तुम्हारे किसी से भी मतभेद

[01:00:39] हो लेकिन तुम्हें हमेशा अपने प्राण

[01:00:41] न्योछावर करने के लिए तैयार हो जाना

[01:00:43] चाहिए। तो कहते हैं आला और उदल ने इस

[01:00:47] युद्ध में भाग लिया और बच्चों ऐसे लड़े

[01:00:52] ऐसे लड़े कि इतिहास में ऐसे शायद ही कोई

[01:00:57] योद्धा लड़े हो। कहते हैं बहुत कम सेना थी

[01:01:01] परमदी देव की एज कंपेयर टू चौहानों के।

[01:01:04] लेकिन बच्चों कहते हैं 10 से 15 कि.मी. तक

[01:01:10] पृथ्वीराज की सेना को पीछे धकेल दिया।

[01:01:13] उन्होंने एक-एक भाई सैकड़ों सैनिकों पर

[01:01:17] भारी पड़े। आज भी महोबा में जाओगे मध्य

[01:01:22] प्रदेश में आ और उदल की वीरता के किस्से

[01:01:27] गलीगली नुक्कड़ नुक्कड़ पर गाए जाते हैं

[01:01:31] और एक पौराणिक मान्यता के अनुसार यह माना

[01:01:35] जाता है कि आला और उदल आज भी बच्चों महोबा

[01:01:40] की एक काली माता के मंदिर में आज भी आते

[01:01:44] हैं पूजा करने। यानी उनकी आत्माएं यह एक

[01:01:49] लोक मान्यता है। ठीक है? तो आला और उदल से

[01:01:53] लड़ने के बाद

[01:01:56] पृथ्वीराज चौहान ने कहा था कि राजपूत

[01:02:00] योद्धा यदि हो तो आला उदल जैसे हो। और यदि

[01:02:06] आल्हा और उदल कुछ और समय जीवित रह जाते

[01:02:08] क्योंकि मारे गए थे बच्चों बीच में। कुछ

[01:02:11] और समय जीवित रह जाते तो चौहानों की हार

[01:02:15] सुनिश्चित थी। उसे कोई रोक नहीं सकता था।

[01:02:19] तो ये तो आला दल है तो आपस में लड़ते रहते

[01:02:22] थे। अब बच्चों 1100

[01:02:25] 78 के आसपास अहिलावाड़ा गुजरात पर एक

[01:02:28] आक्रमण पृथ्वीराज सॉरी मोहम्मद गोरी का

[01:02:32] होता है।

[01:02:33] मोहम्मद गौरी वाज द तुर्किश इनवेटर है ना।

[01:02:37] वह तुर्की का आक्रमणकारी है और उसका

[01:02:39] आक्रमण बड़े स्तर पर हुआ। लेकिन अनिलवाड़ा

[01:02:43] के शासक ने बच्चों उन्हें हरा दिया और

[01:02:47] इसके बाद मोहम्मद गोरी कई युद्धों में

[01:02:50] हारा। लेकिन उसने हार नहीं मानी और उसने

[01:02:53] टारगेट बना लिया कि मुझे उत्तर भारत को

[01:02:56] जीतना है। बिकॉज़ मेन पर्पज ऑफ द इन्वज़न ऑफ़

[01:03:01] मोहम्मद गोरी वाज़ द एक्सपेंशन ऑफ हिज़

[01:03:04] एंपायर इन इंडिया। यानी उनका मेन पर्पज

[01:03:07] बच्चों ऐसा नहीं था कि बस राज्यों को जीत

[01:03:10] लो। नहीं भारत में साम्राज्य का विस्तार

[01:03:13] करना था। तो उत्तर भारत में इस समय दो ही

[01:03:16] शक्तियां हैं। एक चौहान है और एक गहवाल

[01:03:20] है। तो इन चौहानों और गढ़वालों में फूट

[01:03:23] डाल दो। यदि फूट डाल दोगे तो आसानी से

[01:03:27] दोनों को हराया जा सकता है। और ये चौहान

[01:03:30] और गढ़वाल बच्चों इस बात को कभी समझ ही

[01:03:33] नहीं पाए। कहते हैं चौहानों और गढ़वाल में

[01:03:36] बच्चों इस बात को लेकर थोड़ा सा मतभेद था

[01:03:40] कि पंजाब के क्षेत्रों में टैक्सेशन कौन

[01:03:43] वसूलेगा। पहले तो उनमें यह मतभेद था।

[01:03:46] दूसरा वे प्रतिद्वंदी राज्य थे और तीसरा

[01:03:48] इसी प्रतिद्वंदी राज्य की राजकुमारी

[01:03:52] संयोगिता से पृथ्वीराज चौहान को प्रेम हो

[01:03:54] गया।

[01:03:56] जयचंद ने इनकी शादी से इंकार कर दिया।

[01:03:59] जयचंद ने कहा कि यह विवाह नहीं होगा

[01:04:02] क्योंकि पृथ्वीराज चौहान वाज द वाज द

[01:04:06] राइवल ऑफ चौहान्स यानी चौहानों के राइवल

[01:04:09] है यानी प्रतिद्वंदी है तो यह नहीं होगा

[01:04:12] तो उसे चिढ़ाने के लिए इन्होंने एक

[01:04:15] स्वयंवर का आयोजन किया किसने जयचंद ने और

[01:04:19] यह बहुत बड़ा स्वयंवर आयोजित किया गया

[01:04:22] जिसमें समस्त भारत के राजाओं को बुलाया

[01:04:25] गया छोड़कर पृथ्वीराज चौहान को और इस

[01:04:28] स्वयंवर का द्वारपाल बनाया गया पृथ्वीराज

[01:04:32] चौहान के स्टेच स्टचू को

[01:04:35] स्टचू और पृथ्वीराज चौहान उसका एक पुतला

[01:04:39] बनाया गया कि तुम दरबार पे खड़े हो

[01:04:42] तुम्हें भी पता चलेगा। लेकिन यह दांव

[01:04:45] उल्टा पड़ गया किसका? जयचंद का। उनकी

[01:04:49] पुत्री संयिता ने उसी स्टैचू को वरमाला

[01:04:53] पहना दी।

[01:04:58] और विवाह क्या हो गया? संपन्न। सुन साहिबा

[01:05:02] सुन प्यार की धुन

[01:05:06] मैंने तुझे चुन लिया तू भी मुझे चुन

[01:05:10] चुन लिया भाई पृथ्वीराज चौहान को पता चला

[01:05:13] बिना किए ही विवाह हो गया तो पृथ्वीराज

[01:05:17] चौहान ने एक समय निर्धारित किया और घोड़े

[01:05:20] पर बैठकर संयिता को ले उड़े संयिता को ले

[01:05:26] उड़े और उन्होंने भी गाना गाया

[01:05:29] पितु जी को भगा लाया हूं तेरे घर से

[01:05:33] तेरे बाप के डर बाप का डर तो था ही तो

[01:05:37] कहते हैं ये व्यापक स्तर पर

[01:05:42] व्यापक स्तर पर दोनों के बीच में स्ट्रगल

[01:05:45] होता रहा।

[01:05:48] अंततः 1191 में ध्यान से सुनो। 1191 में

[01:05:54] एक बड़ा खतरा सामने उपस्थित हो गया। यह था

[01:05:58] तराइन का पहला युद्ध। 1191 में तराइन का

[01:06:03] पहला युद्ध लड़ा गया।

[01:06:06] और मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान

[01:06:11] ने ना केवल पराजित किया बल्कि युद्ध भूमि

[01:06:15] से भागने पर मजबूर कर दिया।

[01:06:18] लेकिन चौहानों की ओर और गड़बड़ होती थी कि

[01:06:21] इतने ज्यादा आत्मसम्मान वाले होते थे कि

[01:06:24] दूसरों के हथियार गिर गए तो पहले डाल देते

[01:06:26] थे कि तुम्हारा गिर गया हम भी हमने भी डाल

[01:06:29] दिया आ जाओ अब हाथ से लड़ो तब तक पीछे

[01:06:32] वाला छल कपट से पीछे भी एक हथियार रखा हुआ

[01:06:35] है और वो यहां से निकाल कर देता था काम

[01:06:38] ऐसे ही तो महारावल रतन सिंह मार दिया था

[01:06:40] अलाउद्दीन ने अरे महारावल रतन सिंह ऐसे ही

[01:06:44] तो मारा था ऐसे पूर्णमल मार दिया शेरशाह

[01:06:48] ने ऐसे मेरे प्यारे बच्चों पृथ्वीराज

[01:06:52] चौहान भी ऐसे ही मरा इन्होंने भाई साहब ने

[01:06:54] कहा भाग गया भागने दो जबकि उसे पकड़ कर

[01:06:58] मार देना चाहिए था लेकिन वक्त को कुछ और

[01:07:02] मंजूर था और एक साल बाद अपनी शक्ति को

[01:07:06] बढ़ाकर जयचंद का सपोर्ट लेकर गौरी फिर से

[01:07:10] आया और तराइन में एक और युद्ध हुआ और अबकी

[01:07:14] बार पृथ्वीराज चौहान हार गया और प्यारे

[01:07:17] बच्चों उसे बंदी बनाया गया और कुछ लोग

[01:07:21] कहते हैं कि इसे बंदी बनाकर आंखें फोड़ दी

[01:07:25] गई और उसकी हत्या कर दी गई कैद में भारत

[01:07:28] में ही जबकि कुछ लोग कहते हैं कि इसे ले

[01:07:31] जाया गया अफगानिस्तान कहां ले जाया गया

[01:07:34] उनको अंधा कर दिया गया और पृथ्वीराज रासो

[01:07:37] को भी उनके साथ चंद्रबरदाई को भी उनके साथ

[01:07:39] लाया गया ठीक है और

[01:07:43] चंदबरबरदाई

[01:07:46] कि

[01:07:48] शब्द भेदी बाण शब्द भेदी बाण कहते वहां पर

[01:07:53] कहा गया कि चौहान तुम्हारे पास क्या कोई

[01:07:55] ऐसी योग्यता है जिसे हम सब लोग देख सके

[01:08:04] और एक तो उन्होंने कहा कि शब्द भेदी बाण

[01:08:07] है हम शब्दों पर बाण चला सकते हैं तो कहते

[01:08:12] हैं बच्चों

[01:08:16] दूर जैसे यहां पृथ्वीराज चौहान बैठे हैं।

[01:08:18] यह बात पृथ्वीराज रासो में चंद्रबरदाई

[01:08:20] बताता है। उसके आधार पर ये बात कर रहे हैं

[01:08:23] हम लोग बेटा। ठीक है? बाकी अन्य इतिहासकार

[01:08:25] ये बताते हैं कि पृथ्वीराज चौहान को भारत

[01:08:28] में उन्होंने मरवा दिया था और उसका बेटा

[01:08:30] गोविंद चंद चौहान को अगला रूलर बना दिया

[01:08:34] था। यानी चौहान गद्दी पर रहे। अगला रूलर

[01:08:38] बना दिया 1192 में। लेकिन उनके काल में एक

[01:08:41] बहुत बड़े स्तर पर अराजकता फैल गई।

[01:08:44] विद्रोह हो गए। विद्रोह होने के बाद

[01:08:46] कुतुबुद्दीन ऐबक ने उन्हें गद्दी से हटाकर

[01:08:48] अपना शासन स्थापित कर लिया। यह चौहानों की

[01:08:52] कहानी मैक्सिमम हिस्टोरियंस बताते हैं।

[01:08:56] ठीक है? लेकिन पृथ्वीराज रासो में

[01:08:59] चंद्रबरदाई लिखता है कि शब्दभेदी बाण

[01:09:02] चलाया गया।

[01:09:05] शब्दभेदी बाण चलाया गया और एक दूरी पर

[01:09:10] बच्चों ठीक है?

[01:09:12] एक दूरी पर चार गज

[01:09:16] चार गज 24 अंगुल अष्ट परमाण और ता ऊपर

[01:09:22] सुल्तान है चूको मत चौहान ऐसा उन्होंने

[01:09:26] कहा इशारा यानी इतने गज पर इतने अंगुल पर

[01:09:31] यहां बैठा हुआ है कौन

[01:09:34] सुल्तान तो कहा गया ता ऊ पर सुल्तान है

[01:09:38] चूको मत चौहान और तभी उन्होंने बाण चलाया

[01:09:42] आया जो गोरी के आरपार हो गया। यहां से वह

[01:09:45] बोला था। ऐसे गोरी मरा कहता है चंदबरदाई।

[01:09:51] परंतु भारतीय इतिहासकार

[01:09:55] या फिर कर्नल टॉड इत्यादि इतिहासकारों ने

[01:09:59] इससे सहमति व्यक्त नहीं की है। उन्होंने

[01:10:03] बताया कि ऐसा नहीं हुआ था। गौरी 1206 में

[01:10:09] किसके खिलाफ लड़ता मारा गया था? जाटों के

[01:10:12] खिलाफ लड़ता हुआ मारा गया था। यस और नो तो

[01:10:16] वो इस बात को बताते हैं। तो तराइन फर्स्ट

[01:10:21] तराइन सेकंड तराइन फर्स्ट तराइन सेकंड दो

[01:10:25] प्रसिद्ध ग्रंथ पृथ्वीराज रासो पृथ्वीराज

[01:10:28] विजय पृथ्वीराज विजय जयानक ने लिखा। सब

[01:10:32] लिखा हुआ है बेटा आपके नोट्स में।

[01:10:33] पृथ्वीराज रासो पृथ्वीराज रासो किसने

[01:10:36] लिखा? चंद्रबरदाई ने लिखा। इस वंश के

[01:10:39] अंतिम शासक है गोविंद चंद्र गोविंद चौहान

[01:10:43] सॉरी और गोविंद चौहान का नाम आप जानते हो

[01:10:46] बेटा गोविंद चौहान का नाम आप जानते हो अभी

[01:10:49] तो बताया कि एक साल राज किया लगभग फिर इसे

[01:10:52] गद्दी से हटा दिया और यहां उसके कब्जे में

[01:10:56] आ गया अब ये था चौहान वंश समझ में आया

[01:11:00] बेटा अरे चौहान वंश समझ में आया अब बात

[01:11:04] करते हैं जयचंद की बच्चों ये सोच सोचने की

[01:11:09] भूल भी मत कर देना जीवन में कि जयचंद कोई

[01:11:12] कायर राजा था। जयचंद वाज द मोस्ट कैपेबल

[01:11:18] रूलर ऑफ राजपूत।

[01:11:20] बट आज जयचंद को भारत के गद्दार के तौर पर

[01:11:24] जाना जाता है। तो जब भी कोई गद्दार होता

[01:11:26] है तो उसे कहते हैं जयचंद हो तुम। क्या

[01:11:29] हो? जयचंद हो। जिसने अपने ही राजपूतों को

[01:11:33] लड़ाने लड़ने के लिए

[01:11:36] अपने ही राजपूतों को सॉरी हराने के लिए

[01:11:39] आपने एक बाहरी का साथ दे दिया। घर का भेदी

[01:11:44] बनकर तुमने लंका ढा दी। तो यह बात उन पर

[01:11:48] कही जाती है। है ना? अभी लालू यादव जी के

[01:11:52] परिवार में

[01:11:54] तेज प्रताप ने बार-बार जयचंदों का हवाला

[01:11:57] दिया। उन्होंने कहा जयचंदों के कारण हम

[01:12:00] बाहर है। है ना? देखो बच्चों जीवन

[01:12:04] कैसे-कैसे मोड़ पर ले जाता है। ले जाता है

[01:12:07] कि नहीं? कभी लालू यादव यदि संसद में बोल

[01:12:11] रहे हैं तो उनकी बात को सब वो ध्यान से

[01:12:14] सुनते थे। आज बेचारे ना केवल बीमार हैं

[01:12:17] बल्कि राजनीतिक गिरावट की स्थिति भी हो

[01:12:22] रही है। और परिवार का झगड़ा सबसे ज्यादा

[01:12:26] तोड़ देता है व्यक्ति को। सबसे ज्यादा

[01:12:28] तोड़ देता है व्यक्ति को।

[01:12:32] तो परिवार क्योंकि बच्चों की लड़ाई

[01:12:35] माता-पिता नहीं सह पाते। वे मजबूर होते

[01:12:39] हैं और उन्हें आंख बंद करके सब कुछ सहना

[01:12:43] पड़ता है। जैसे भीष्म पितामह ने आंख बंद

[01:12:46] करके अपने ही अपने ही पोते परपोतों को

[01:12:50] मरते हुए देखा था अपने सामने। तो ऐसा

[01:12:54] कभी-कभी होता है। समय बड़ा बलवान। समय

[01:12:58] क्या होता है? बहुत बलवान होता है। समय से

[01:13:01] बड़ा

[01:13:03] कोई भी बच्चों

[01:13:05] बल

[01:13:07] शाली व्यक्ति नहीं है। समय से बड़ा कोई भी

[01:13:13] मरहम नहीं है। जैसे आज आपके जीवन में कोई

[01:13:17] समस्या आई, तो आप उसे यह सोच कर छोड़ दो

[01:13:22] कि एक समय ऐसा आएगा जब यह समस्या वाला काल

[01:13:26] गुजर जाएगा और फिर दूसरा समय आएगा। जैसे

[01:13:30] सुख का समय चला जाता है, ऐसे ही मेरे

[01:13:33] बच्चों दुख का समय भी चला जाता है। वो भी

[01:13:36] नहीं ठहरता। बसशर्ते हम धैर्य रखें। हम

[01:13:40] धैर्य रखें और अपने कर्म में संलग्न रहे।

[01:13:44] कुछ बच्चे धैर्य खो देते हैं। बड़ी

[01:13:47] विडंबना की बात है। कुछ बच्चे जैसे प्री

[01:13:50] का एग्जाम उन्होंने अच्छे तरीके से दिया।

[01:13:53] पास नहीं हुए। बच्चों गलत-गलत कदम उठा

[01:13:57] लेते हैं। आप एक बात बताओ कि क्या

[01:14:01] बीपीएससी का एग्जाम में सब कुछ है? क्या

[01:14:05] बस यही जीवन समाप्त हो गया? इसके आगे कुछ

[01:14:08] नहीं। चलो मान लो वो एक बार प्री फेल हो

[01:14:11] गया तो दोबारा प्रयास करें। मान लो दोबारा

[01:14:15] भी हो गया, तबारा भी हो गया एक अपवाद के

[01:14:17] तौर पर तो क्या बच्चों हमारा जीवन इतना

[01:14:21] सस्ता है कि एक जीवन पर टिक गया एक उस पर

[01:14:25] क्या पता आपके जीवन में आपकी उपलब्धि इस

[01:14:29] प्रकार बढ़े कि आपको

[01:14:33] हजारों एसडीएम और डीएम सैल्यूट करें। यस

[01:14:36] और नो? समय कभी भी बदल सकता है। कभी भी

[01:14:42] बदल सकता है। ऐसा होता है कि नहीं? तो आप

[01:14:46] गहरवाल वंश को अब समझो। तो राजपूतों का

[01:14:49] बच्चों ये बहुत बड़ा दोष था कि वे आपस में

[01:14:53] लड़ते रहते थे। हां बेटा अब बताओ

[01:15:03] क्या बेटा?

[01:15:08] नहीं नहीं नहीं सुनो सुनो कोई हम बस यह

[01:15:10] समझ में नहीं आ रहा है कि कौन अस्थिया

[01:15:12] अस्थिया लाया था पृथ्वीराज चौहान की कौन

[01:15:17] शेरशाह

[01:15:18] शेर

[01:15:20] शेर खान

[01:15:22] शेर सिंह राणा अच्छा अच्छा बैठो बैठो

[01:15:25] इसमें भी दो बातें हैं अब इसको ध्यान से

[01:15:28] सुनो एक

[01:15:30] जालौन नाम की जगह है जालौर सॉरी क्या नाम

[01:15:35] है जालौर कहां है राजस्थान में वहां का एक

[01:15:41] शासक वहां का एक राजपूत शासक है और उनका

[01:15:47] बेटा है वीरन सिंह क्या नाम है वीरण सिंह

[01:15:52] वीरण सिंह को कहा जाता है कि जो

[01:15:55] सोमनाथ से लूट कर ले गया था

[01:16:01] शिवलिंग को और वहां जो एक बच्चों जिसकी

[01:16:05] बहुत बुरी हालत थी। बाहर लगाया गया था। उस

[01:16:08] शिवलिंग पर उस शिवलिंग पर कहते हैं बहुत

[01:16:14] एक तरीके का अत्याचार टाइप का किया जाता

[01:16:17] था। उस शिवलिंग को भारत लाने का काम वीरन

[01:16:21] सिंह ने किया था। यही वीरन सिंह है जो

[01:16:24] अलाउद्दीन खिलजी से ने भी नहीं रोका था।

[01:16:27] वह इतना वीर था। लेकिन वीरन सिंह की एक

[01:16:30] खास बात यह भी थी कि वीरन सिंह जितना बड़ा

[01:16:34] योद्धा था उससे ज्यादा कहीं वह बहुत

[01:16:38] स्मार्ट और बहुत हैंडसम भी था। तो कहते

[01:16:42] हैं जब उसे दरबार में बुलाया गया

[01:16:45] अलाउद्दीन खिलजी के तो अलाउद्दीन खिलजी की

[01:16:48] एक बेटी थी फिरोजा।

[01:16:51] क्या नाम थी? फिरोजा।

[01:16:54] फिरोजा बेरन सिंह को दिल दे बैठी।

[01:17:00] और

[01:17:02] इनमें कितना आक्रोश आ जाता है इन बातों

[01:17:05] का। शेर सिंह राणा की बात सुनो बेटा आपके

[01:17:09] प्रश्न का जवाब। पहली बात इतिहासकार कौन

[01:17:14] मानता है इस बात को कि उनकी अस्थियां वहां

[01:17:18] थी।

[01:17:19] इस इतिहासकार कौन मानता है? चंदबरबरदाई।

[01:17:22] अरे सुन तो ले। कौन मानता है? चंदबरबरदाई।

[01:17:26] अन्य इतिहासकार इस संबंध में कुछ भी नहीं

[01:17:29] कहते। वे कहते हैं भारत में ही मरे थे

[01:17:31] पृथ्वीराज चौहान। तो बेटा इस कहानी को एक

[01:17:35] लोक कहानी के तौर पर ऑथेंटिक नहीं माना

[01:17:39] जाएगा। उसके आधार पर माना जाएगा। ठीक है?

[01:17:42] ऐसी बहुत सारी चीजें चलती है। जैसे ताजमहल

[01:17:46] ताजमहल नहीं था। तजो महल था। इसे परमर्दी

[01:17:51] देव ने बनवाया था। यह बिना सिर पैर की बात

[01:17:54] है। ताजमहल कोई था जो महल नहीं था। कोर्ट

[01:17:58] ने कोर्ट ने उस व्यक्ति को एक व्यक्ति था

[01:18:02] बच्चों उनका नाम याद नहीं आ रहा है। वो

[01:18:04] किताब में अपने मन से इतिहास में ये ये

[01:18:06] हुआ ये लिखता चला गया।

[01:18:09] उसने शेर सिंह राणा की बात भी लिख ली।

[01:18:12] अपने मन से कि ये हुआ ये हुआ। देखो उसने

[01:18:16] कहा ताजमहल पहले तजो महल था। अब इसी पर

[01:18:20] किसी व्यक्ति ने क्या किया? वह तो लिख के

[01:18:23] मर गया। इस किताब को किसी ने पढ़ लिया।

[01:18:28] अब इसे पढ़ के वो चला गया कोर्ट।

[01:18:31] हाई कोर्ट ने उसे कहा भाई ये हमारे बस की

[01:18:33] बात नहीं है। तुम सुप्रीम कोर्ट जाओ।

[01:18:36] सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों सुप्रीम कोर्ट के

[01:18:38] जजों ने बकायदा पूरा इतिहास पढ़ा। और

[01:18:45] अरे सच्ची में। पूरा इतिहास पढ़ा सुप्रीम

[01:18:48] कोर्ट के जजों ने और फिर उस व्यक्ति को

[01:18:50] इतनी फटकार लगाई,

[01:18:53] इतनी फटकार लगाई और कहा कि ताजमहल कोई

[01:18:57] तजोहल नहीं था। उसने फिर तो जजों ने

[01:19:00] इतिहास पढ़ लिया था। तो जजों ने फिर तो

[01:19:03] पूरी जानकारी दी कि शाहजहां ने जमीन किससे

[01:19:06] ली? तो उस राजा का नाम इतिहास में ढूंढा।

[01:19:09] जय सिंह से जमीन ली। तो जय सिंह से जमीन

[01:19:13] क्या छीनी? नहीं। अपनी मर्जी से दी उसने।

[01:19:16] तो इसके बदले जय सिंह को क्या दिया? उतनी

[01:19:18] ही भूमि राजस्थान में दी उसे। और यहां पर

[01:19:22] फिर हुमायूं के मकबरे की नकल पर ताजमहल

[01:19:25] बनवाया गया उस्ताद ईसा खान अब्दुल अहमद

[01:19:29] हमीद लाहौरी के द्वारा।

[01:19:33] ठीक है? तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा और यदि

[01:19:36] आगे ऐसी कोई याचिका

[01:19:39] कोर्ट लेकर आ गए तो जेल का प्रावधान होगा।

[01:19:44] तो बच्चों बताओ आप यह अपने मन से कह दिया

[01:19:46] उन्होंने कि ऐसा रहा होगा नहीं समझे तो

[01:19:49] बेटा ऐसी बात है इसका प्रमाणीकरण नहीं हुआ

[01:19:53] लेकिन वीरन देव का प्रमाणीकरण है

[01:19:59] फिरोजा का विवाह नहीं हो पाया उससे

[01:20:02] ठीक है क्योंकि वीरन ने भरे दरबार में

[01:20:06] फिरोजा को रिजेक्ट कर दिया

[01:20:11] उसने कहा

[01:20:14] उसने कहा कि मैं राजपूत हूं। राजपूत हूं

[01:20:19] और मैं अपनी परंपरा के अनुपालन के साथ

[01:20:22] किसी राजपूतानी से ही विवाह करूंगा।

[01:20:26] तो उन्होंने नहीं किया। संस्थापक है इसके

[01:20:29] चंद्रदेव। कौन है? चंद्रदेव। चंद्रदेव।

[01:20:34] अब क्या करें? तुम्हारे मुंह लटक गए थे।

[01:20:37] कि सारा ये क्या पढ़ाने लग गए? क्या ज्ञान

[01:20:41] दिए जा रहे हैं? हम तो जानते हैं ना तुम

[01:20:43] क्या-क्या सोचते हो। तो इसलिए फिर तुम्हें

[01:20:47] तुम्हारे अंदर मनोरंजन का

[01:20:51] क्या लगाया गया? तड़का लगाया गया।

[01:20:54] संस्थापक कौन है? चंद्रदेव। देखो तो

[01:20:57] तुम्हें पढ़ाने के लिए क्या-क्या जतन करने

[01:21:00] पड़ते हैं? सोचो।

[01:21:03] पराजित किया दिल्ली के तोमरों को। किसने?

[01:21:08] चंद्रदेव या गहरवालों ने। गढ़वाल का शासन

[01:21:11] बच्चों कहां है? कन्नौज में है।

[01:21:13] प्रतिहारों का राजधानी थी ना कन्नौज। उसके

[01:21:16] बाद यह बन गए वहां पर। इनके शासक हुए मदद

[01:21:19] पाल। मदनपाल ने बच्चों तुर्कों को कई बार

[01:21:22] हराया।

[01:21:23] इनके पुत्राधिकारी हुए गोविंद चंद्र। यही

[01:21:26] गोविंद चंद्र इस वंश के सबसे शक्तिशाली

[01:21:29] राजा है। गोविंद चंद्र वाज़ द मोस्ट

[01:21:33] पावरफुल रूलर ऑफ द गहड़वाल। महानतम शासक

[01:21:37] है। विस्तार चरम पर पहुंचाया। जीता मगध को

[01:21:40] भी जीत लिया पाल वंश को भी जीत लिया हरा

[01:21:44] दिया बुद्धिमान शासक बोध था और बच्चों इसे

[01:21:47] विविध विद्या विचार वाचस्पति के नाम से

[01:21:51] जाना गया जो संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा

[01:21:54] देने वाला है और इसका मंत्री था लक्ष्मीधर

[01:21:59] वो भी इससे बड़ा विद्वान उसने लिखा एक

[01:22:02] ग्रंथ कृत्य कल्पतरु कृत्य कल्पतरु और

[01:22:07] इनकी पत्नी थी कुमार देवी। कुमार देवी ने

[01:22:11] धर्म चक्र जिन विहार जो सारनाथ में है

[01:22:15] उसका निर्माण करवाया।

[01:22:19] अंतिम शासक थे इसके जयचंद। प्रमुख विजय

[01:22:24] तुर्कों को हराया। देवगिरि के यादवों को

[01:22:26] हराया। गुजरात के साल देखो कितनों को

[01:22:28] हराया। लेकिन बच्चों यह सेन वंश के राजा

[01:22:31] लक्ष्मण सेन से हार गया। इसने राजसूय यज्ञ

[01:22:35] किया था। बहुत बड़ा जयचंद मैंने बताया ना

[01:22:37] जयचंद कोई बहुत कमजोर रूलर नहीं है बच्चों

[01:22:41] वो अपेक्षाकृत ज्यादा बड़ा रूलर है

[01:22:43] विस्तार लक्ष्मण शेर के द्वारा क्या हो

[01:22:45] गया हार गया इसका प्रसिद्ध कवि था श्री

[01:22:48] हर्ष श्री हर्ष ने दो किताबें लिखी नैसद

[01:22:52] चरित्र और खंड खाद्य क्या लिखी नैसद

[01:22:56] चरित्र और खंड खाद्य चौहानों के

[01:22:59] प्रतिद्वंदी कौन थे चौहानों के प्रतिबंधी

[01:23:03] थे जयचंद कौन कौन थे? जयचंद। चंदावर के

[01:23:07] युद्ध में गौरी ने बच्चों इसे भी हरा

[01:23:10] दिया। 1194 में क्योंकि गौरी की निगाह तो

[01:23:15] भारत को जीतने पर थी तो उसने अपने लक्ष्य

[01:23:18] को क्या रखा? वहीं बनाए रखा और इसको भी

[01:23:22] हराकर पूरे उत्तर भारत पर अधिकार क्या कर

[01:23:26] लिया? कर लिया। अधिकार कर लिया। इसके बाद

[01:23:30] आता है बच्चों

[01:23:33] राजपूत वंश में। इसके बाद आते हैं

[01:23:38] कौन? परमार। इसके बाद कौन आते हैं? परमार।

[01:23:43] परमार कहां के हैं? मालवा के। परमार भी

[01:23:47] बहुत शानदार है। परमारों का इतिहास भी

[01:23:51] बहुत गाथापूर्ण है। इसके दो शासकों की

[01:23:55] कहानी हम आपको बताएंगे। इसमें एक तो राजा

[01:23:59] भोज है तो गंगू तेली की कहानी सुननी

[01:24:02] पड़ेगी क्योंकि जानना पड़ेगा कहां राजा

[01:24:05] भोज कहां गंगू तेली और एक इसमें है वाचस

[01:24:10] जो सॉरी वाकपति मुंज वाकपति मुंज

[01:24:15] वाकपति मुंज भी एक बहुत बड़ा राजा है इस

[01:24:18] काल का बहुत बड़ा राजा है इस काल का बेटा

[01:24:23] तुम हमेशा मुस्कुराते रहते हो बड़ी अच्छी

[01:24:26] बात है लेकिन कभी कभी-कभी तुम क्या करते

[01:24:28] हो? बहुत तेज-तेज मुस्कुराने लगते हो। तो

[01:24:31] हमें संदेह हो जाता है कि कपड़े ठीक है

[01:24:33] क्या?

[01:24:38] कोई गड़बड़ तो नहीं है? पढ़ा ठीक रहे हैं

[01:24:41] क्या? माइक से आवाज आ रही है क्या?

[01:24:48] ऐसा होता है कोई-कोई बच्चा हंसता रहता है।

[01:24:50] और वो टीचर को देख के ही हंस जाएगा। हंस

[01:24:52] जाएगा। और जैसे वह टीचर को देखकर हंसना

[01:24:55] शुरू करेगा टीचर को संदेह

[01:24:58] सब कुछ ठीक है क्या

[01:25:04] टीचर भी तो इंसान है कि नहीं है तो बच्चों

[01:25:09] भाई तुम हंसो

[01:25:11] परंतु लगातार हमें देखकर मत हंसो

[01:25:20] और साथ में संदेह भी हो जाता है कि कहीं

[01:25:25] यह बावला बालक हमसे प्यार तो नहीं कर।

[01:25:38] बिल्कुल बिल्कुल प्यार तो होना ही चाहिए।

[01:25:41] हां तो इसलिए कभी-कभी यह स्थिति संदेहस्पद

[01:25:46] होती है। है ना? परंतु मंदमंद मुस्कुराते

[01:25:50] रहो। ठीक है? नहीं। देखो यहां पर उदय कहां

[01:25:54] हुआ? प्रतिहारों के पतन के बाद किसका उदय

[01:25:58] हुआ?

[01:26:01] परमारों का। प्रतिहार के सामंत चंदेल भी

[01:26:05] थे। प्रतिहारों के सामंत चौहान भी थे।

[01:26:08] गहड़वाल भी थे। सामंत आपको समझा चुके कौन

[01:26:12] थे? उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में

[01:26:14] राज्य बढ़ा दिए। सब बड़े-बड़े राजा बन गए।

[01:26:16] परमार भी ऐसे ही है। परमार वंश के

[01:26:20] संस्थापक का नाम है उपेंद्र कृष्णराज के

[01:26:24] नाम से भी इन्हें जाना जाता है। और इनकी

[01:26:27] पहली राजधानी उज्जैन थी और आप जानते हो

[01:26:30] बच्चों कि उज्जैन उज्जैन इज द हिस्टोरिकल

[01:26:34] सिटी। उज्जैन एक बहुत बड़ा हिस्टोरिकल

[01:26:37] ऐतिहासिक नगर है। लेकिन उज्जैन से इसकी

[01:26:41] राजधानी बदलेगी और यह बदलकर हो जाएगी

[01:26:46] धारा।

[01:26:47] क्या हो जाएगी? धारा राजधानी हो जाएगी।

[01:26:51] धारा राजधानी बनाएंगे कौन? बाद में राजा

[01:26:56] भोज कौन बनाएंगे? इस वंश के सबसे पहले

[01:27:00] शक्तिशाली राजा थे श्री हर्ष। उन्होंने

[01:27:04] साम्राज्य विस्तार किया। श्री हर्ष के बाद

[01:27:07] एक बहुत ही आत्मविश्वास से भरा योद्धा और

[01:27:13] अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाला वाकपति

[01:27:16] मुंज नाम का शासक गद्दी पर बैठा।

[01:27:20] यह वाकपति मुंज क्या करता था? यह वाकपति

[01:27:24] मुंज कहते हैं इस समय कलचुरी छोटा सा वंश

[01:27:27] था बेटा कलचुरी वंश साउथ में उसको तैलप

[01:27:31] सेकंड जो चालुक्य शासक शासक था कलचुरी था

[01:27:34] वो चालुक्य शासक था तैलप सेकंड उसको

[01:27:37] बच्चों वो क्या करता था वाकपति मुंज छह

[01:27:41] बार हराया

[01:27:43] सिक्स टाइम्स

[01:27:45] डिफिटेड टेलप सेकंड अब तैलब सेकंड को

[01:27:49] हराता था और मारता भी नहीं था ना छोड़

[01:27:52] छोड़ता था जाता था हराता था तैलब को सामने

[01:27:56] बैठाता था पूछता था और भाई कैसा लग रहा है

[01:27:58] हार के

[01:28:04] पराजित होकर कैसा फील कर रहे हो ठीक है और

[01:28:09] फिर चला जाता था बच्चों थोड़ा बहुत धन मन

[01:28:12] लेकर के हमें राज्य घुमाओ फिर चला जाता

[01:28:15] फिर थोड़े दिन बाद फिर उसका मन करता था

[01:28:17] शिकार खेलना है तो शिकार नहीं खेलता था

[01:28:20] बोलता इससे बढ़िया है तलब को ही हराते

[01:28:22] फिर आता था तैलक को हरा देता था। ऐसे करके

[01:28:26] सिक्स टाइम्स उसने तैलक को पराजित कर

[01:28:30] दिया। अब तैलक ने प्रतिरोधक क्षमता डेवलप

[01:28:35] कर ली। जैसे बच्चों कोई प्रजाति कर लेती

[01:28:39] है। प्रतिरोधक क्षमता। जैसे पहले वाले जो

[01:28:44] मच्छर हुआ करते थे वो एक छोटा सा तेल या

[01:28:49] ओडो मास की क्रीम लगाने से भाग जाते मर

[01:28:51] जाते थे। आज तुम ओडो मास्क भी लगा लो, कोई

[01:28:56] तेल भी लगा लो, ऑल आउट भी जगा लो। फिर भी

[01:29:00] मधुरमधुर संगीत तुम्हारे कानों में बजता

[01:29:04] रहेगा।

[01:29:05] कारण मच्छरों ने प्रतिरोधक क्षमता विकसित

[01:29:10] कर ली। उसे पता चल गया मनुष्यों ने यह

[01:29:13] बनाया है और हम अब इसे सूंघ के भी नहीं

[01:29:18] मरेंगे। तो इसलिए अब वे जो है अपने मधुर

[01:29:21] संगीत को गाते रहते हैं। खैर यह तो एक

[01:29:24] उदाहरण है। ऐसे करके बच्चों हर व्यक्ति

[01:29:27] प्रतिरोधक क्षमता क्या करता है? बना लेता

[01:29:30] है। है ना? तो

[01:29:34] टेलप ने बच्चों अपने आप को मजबूत किया और

[01:29:37] इस बार जब सातवीं बार आया ये

[01:29:41] तो इसे बंदी बना लिया।

[01:29:44] क्या कर लिया?

[01:29:46] और तैलब ने कहा अब की बार बैठ के और बताओ

[01:29:49] क्या हाल है?

[01:29:53] तो वाकपति मुंज ने कहा यदि राजपूत होंगे

[01:29:57] तो मुझे मार ही देना क्योंकि मैं हार गया

[01:30:01] राजपूतों का घमंड आत्मस्वाभिमान ऐसे ही

[01:30:04] था। या तो वो खुद मर जाते थे या तो कई

[01:30:08] राजपू एक दो राजपूत ऐसे शासक हुए ढोल

[01:30:10] नगाड़ों के साथ जाकर नदी में डूबकर प्राण

[01:30:13] दे देते थे। क्यों? क्योंकि मैं हार गया।

[01:30:17] सबको ले जाते थे अपने साथ। चलो पूरा समूह

[01:30:20] आज राजा डूबने जा रहा है।

[01:30:24] कुछ राजा अरे सच बात बता रहे हैं। कुछ

[01:30:27] राजा ऐसे होते थे जैसे आपको बताएंगे। कुछ

[01:30:30] राजा ऐसे होते थे कि कोई दूसरा राजपूत हार

[01:30:32] गया तो जाकर उसे मार देते थे कि हारे

[01:30:36] क्यों? क्यों हारे? मरे क्यों नहीं? बताओ

[01:30:40] भाई। यह भी गजब बात है। यार हार गया तो

[01:30:42] हार गया। बेचारा मरना जरूरी था क्या? तो

[01:30:45] ऐसा भी हुआ राजपूतों की हार के यही तो

[01:30:47] कारण है ना बेटा राजपूतों की हार के यही

[01:30:50] कारण है। और बच्चों तैलप ने भी सोचा कि

[01:30:53] यदि वाकपति को छोड़ दिया तो अगली बार

[01:30:56] वाकपति हालचाल नहीं पूछेगा। मार ही देगा।

[01:31:00] तो इसलिए तैलप ने ही मार दिया।

[01:31:03] तैलप ने क्या कर दिया? मार दिया। बच्चों

[01:31:06] वाकपति मुंज ने बहुत ज्यादा झीलों का

[01:31:09] निर्माण भी करवाया। ऐसी बच्चों मुंज सागर

[01:31:12] झील का निर्माण उन्होंने धारा नगरी में

[01:31:14] करवाया है जिसे आजकल धार डिस्ट्रिक्ट कहते

[01:31:17] हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने इस झील को

[01:31:19] पुनर्जीवित किया और पर्यटन के क्षेत्र के

[01:31:23] रूप में विकसित किया है। विकसित किया है।

[01:31:26] मध्य प्रदेश पर्यटन गुजरात और मध्य प्रदेश

[01:31:29] पर्यटन के क्षेत्र में पर्यटन के क्षेत्र

[01:31:31] में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

[01:31:33] बच्चों। और उन्होंने पर्यटन के क्षेत्र

[01:31:36] में शानदार डेवलपमेंट किया है। बिहार इस

[01:31:39] मामले में पीछे है। है ना? बिहार के पास

[01:31:42] तो बहुत कुछ था लेकिन वो डेवलप कर ही नहीं

[01:31:45] पाया। नीतीश कुमार जी अब डेवलप करने में

[01:31:48] इनवॉल्व है और वे इसे कर रहे हैं बच्चों।

[01:31:51] जैसे उन्होंने राजगीर को डेवलप किया।

[01:31:53] धीरे-धीरे बच्चों कुम्रहार के आसपास के

[01:31:56] एरिया को डेवलप कर रहे हैं। तो अब वो कर

[01:31:59] रहे हैं। मध्य प्रग इनके काल में कुछ

[01:32:03] विद्वान भी थे जैसे पदम गुप्त और धनंजय

[01:32:07] उन्होंने हाल युद्ध नामक ग्रंथ लिखा था और

[01:32:10] ये महा कवि के नाम से प्रसिद्ध हुए थे।

[01:32:13] लेकिन बच्चों इस वंश के सबसे पावरफुल राजा

[01:32:20] का नाम है राजा भोज।

[01:32:24] राजा

[01:32:27] बच्चों इतने विद्वान

[01:32:30] बड़े वीर

[01:32:33] विद्वान

[01:32:34] संगीत के जानकार

[01:32:37] साहित्य के जानकार

[01:32:40] स्थापत्य के जानकार शिक्षा को चरम पर

[01:32:44] पहुंचाने वाले यूनिवर्सिटीज को स्थापित कर

[01:32:47] देने वाले और कहते हैं यदि उनकी शारीरिक

[01:32:52] संरचना देखो को 6 1/2 फीट से ज्यादा लंबा

[01:32:56] कद

[01:32:58] कहते हैं नीली आंखें

[01:33:01] और और कहते हैं इतना सुंदर राजा कोई और

[01:33:07] हुआ हो इस पर संदेह है।

[01:33:11] ऐसे थे राजा भोज कहते हैं राजा भोज को यदि

[01:33:16] प्रजा के बीच निकलना है तो पहले बच्चों

[01:33:19] मूछ दाढ़ी लगानी होती थी अपना अपने आप को

[01:33:23] कुरूप बनाना पड़ता था तब निकलते थे

[01:33:26] क्योंकि इतने लोग घेर लेते थे उन्हें

[01:33:29] देखकर कि राजा भोज को सब देखने के लिए ही

[01:33:33] परेशान रहते थे कि बस एक बार राजा भोज दिख

[01:33:37] जाए। स्त्रियां पुरुष दोनों ये स्त्रियों

[01:33:38] पर क्यों इतना जोर दे रहा है? यह देखो

[01:33:42] तो

[01:33:44] अरे पुरुष और स्त्री दोनों ही सुंदर

[01:33:48] व्यक्ति को कौन देखना नहीं चाहता

[01:33:59] तुम्हारी बात माइक को पसंद नहीं आई।

[01:34:03] अब देखो ध्यान से कहते हैं इन्होंने

[01:34:07] बच्चों

[01:34:12] अरे शांत हो जाओ। ओए

[01:34:17] ये रामलाल नहीं है। उच्च कोटि वाला रामलाल

[01:34:19] है। देखो बेटा यूनिवर्सिटी को स्थापित

[01:34:23] किया। इसको आज बदलवा दीजिएगा।

[01:34:27] यूनिवर्सिटी को स्थापित किया। और बच्चों

[01:34:31] आपको बताएं एक छोटी सी बात राजा भोज के

[01:34:34] बारे में जब राजा भोज ने हर जगह सरस्वती

[01:34:38] की प्रतिमा को बनवाया था बच्चों है ना

[01:34:41] संगीत की देवी और शिक्षा की देवी के रूप

[01:34:45] में तो बच्चों जब राजा भोज की मृत्यु हुई

[01:34:49] तो कहा गया

[01:34:52] अध्यरा निराधरा

[01:34:54] निरामया सरस्वती इसका अर्थ था कि

[01:35:00] सारी धरा आज अनाथ हो गई। सर्व सरस्वती का

[01:35:06] संरक्षक आज नहीं रहा। आज नहीं रहा। आज

[01:35:12] शिक्षा क्या हो गई? अनाथ हो गई। राजा भोज

[01:35:17] महानतम शासक है। सिंधु राज के पुत्र थे।

[01:35:21] साम्राज्य चरम पर पहुंचाया। राजधानी

[01:35:24] उज्जैन से धारा परिवर्तित की। यह राजा भोज

[01:35:29] का किला है और यह राजा भोज की प्रतिमा जो

[01:35:34] मध्य प्रदेश सरकार ने बनवाई है

[01:35:38] प्रतिमा बनवाई है। आज देखो तो बेटा इस

[01:35:41] किले के आसपास कैसे मिट्टी मिट्टी और घास

[01:35:45] उग गई है। यही तो हम तुम्हें समझाते हैं।

[01:35:49] समय का परिवर्तन क्या होता है? जो कभी

[01:35:54] राजा महाराजा थे। आज बच्चों उनके वंशज

[01:35:59] कहां है इसका भी पता नहीं है। राजा भोज का

[01:36:04] स्मारक तो है जो राजा भोज की याद दिलाता

[01:36:08] है लेकिन राजा भोज के कर्म हम आपको बता

[01:36:11] रहे हैं जो उनके साथ गए। राजा भोज ने 20

[01:36:15] से ज्यादा ग्रंथ लिखे। इन्होंने चालुक्य

[01:36:19] के कल्याणी राजाओं को हराया। लेकिन चंदेल

[01:36:22] शासक विविध विद्या विचार वाचस्पति यानी कि

[01:36:26] विद्याधर से हार गए। सॉरी विद्याधर से हार

[01:36:29] गए। कविराज के नाम से जानेंगे और कुछ

[01:36:32] प्रमुख ग्रंथ इन्होंने लिखे। आयुर्वेद

[01:36:34] सर्वस्व और सरस्वती कंठा भरवाणी सिद्धांत

[01:36:39] संग्रह चारू चित्र और विद्या विनोद। यह

[01:36:44] ग्रंथ राजा भोज के द्वारा लिखे गए हैं। एक

[01:36:49] बार राजा भोज ने भोजशाला विश्वविद्यालय

[01:36:52] बनाया जहां वागदेवी यानी सरस्वती देवी की

[01:36:55] प्रतिमा बनवाई। नगर भोजपुर बसाया इन्होंने

[01:36:58] जो बच्चों आज भी है और भारत के

[01:37:03] जगदीशपुर के कुंवर सिंह भी अपना संबंध

[01:37:08] राजा भोज से ही बताते हैं। वह कहते हैं हम

[01:37:11] राजा भोज भोजपुर

[01:37:14] है ना बच्चों और राजा भोज के वंशज है हम

[01:37:16] इन्हीं के नाम पर है बेटा वो इन्हीं के

[01:37:19] नाम पर है वह बताते हैं वहीं से आए थे हम

[01:37:21] परमार से ही बिहार में आकर बसे तो हमारा

[01:37:24] संबंध किससे है

[01:37:27] एक झेल बनवाई जिसका नाम था भोजसार आईने

[01:37:30] अकबरी में भी राजा भोज के बारे में अकबर

[01:37:33] के काल में भी लिखा गया और धारा पर भीम

[01:37:37] प्रथम का बाद में आक्रमण हुआ बच्चों और

[01:37:40] उसे नष्ट कर दिया गया बाद में 1305 में

[01:37:44] मालवा को जीतकर अलाउद्दीन खिलजी ने अपने

[01:37:48] राज्य में मिला लिया। लेकिन यह राजा भोज

[01:37:51] की मृत्यु के लगभग 200 साल बाद हुआ। ठीक

[01:37:53] है? तो ऐसे पतन हुआ किसका?

[01:37:56] परमार वंश का। किसका वंश हुआ? परमार वंश

[01:37:59] का। और बच्चों यहां पर एक बात यह ध्यान

[01:38:02] देने की है कि जो परमार है या जो राजा भोज

[01:38:06] है कहते हैं एक बार उनका शिकार खेलने का

[01:38:09] मन हुआ और हमने आपको बताया है कि राजा भोज

[01:38:14] अपना वेश बदलकर निकलते थे तो वेश बदलकर वे

[01:38:17] सैनिकों के साथ निकले शिकार खेल रहे थे

[01:38:21] तभी पास के राज्यों

[01:38:24] के राजा पास के राजा के लोगों के द्वारा

[01:38:29] सैनिकों के द्वारा माना गया कि कोई आक्रमण

[01:38:31] करने वाला हमारे राज्य में घुस रहा है। और

[01:38:33] बच्चों उन्होंने सभी सैनिकों को मार दिया

[01:38:37] और राजा भोज पर भी तीर चलाए जिससे राजा

[01:38:41] भोज घायल हो गए। राजा भोज घायल हो गए और

[01:38:44] वे बेहोश हो गए। और उन्होंने सोचा ये मर

[01:38:47] गए छोड़कर भाग गए। उन्होंने सोचा यह भी मर

[01:38:51] गया। ये उन्होंने उसे सैनिक ही माना था

[01:38:53] क्योंकि राजा भोज तो वेश बदले हुए थे। कुछ

[01:38:57] समय बाद से बच्चों वहां से एक व्यक्ति

[01:39:00] गुजर रहा था। उसने देखा कि बहुत सारे लोग

[01:39:03] मृत पड़े हुए हैं। एक व्यक्ति को देखा

[01:39:06] जिसमें सांसे चल रही है। यह राजा भोज थे

[01:39:11] और यह व्यक्ति गंगू तेली था। राजा भोज को

[01:39:15] अपने साथ लेकर यह अपने घर चला गया और वहां

[01:39:20] इसकी चिकित्सा की इन्होंने। कुछ दिनों बाद

[01:39:22] राजा भोज को होश आ गया और

[01:39:27] उनकी याददाश्त पर कुछ प्रभाव पड़ा था। तो

[01:39:31] वे भूल चुके थे। तो कहा जाता है कि जब वे

[01:39:36] भूल गए थे तो इसी बीच में अब लेकिन वो भूल

[01:39:40] गए थे कि मैं कहीं का राजा हूं। लेकिन

[01:39:42] बच्चों जो उनकी कला थी जैसे संगीत इत्यादि

[01:39:45] यह तो उनमें थी तो वह गंगू तेली के घर पर

[01:39:49] रहकर गाने गुनगुनाया करते थे। गंगू तेली

[01:39:53] बैठकर उनके गानों को या उनके गायन को बड़े

[01:39:56] ध्यान से सुनता था। उनकी बातों को और वो

[01:39:59] सोचता था कि यार कितना विद्वान है। इससे

[01:40:02] तो राज दरबार में होना चाहिए। क्योंकि

[01:40:05] पहले विद्वानों की कदर कहां होती थी? राज

[01:40:07] दरबार में। तो उस राज्य में एक बड़ी संगीत

[01:40:10] प्रतियोगिता का आयोजन करवाया गया और गंगू

[01:40:14] तेली इनसे पूछे बिना इनका भी नाम लिख पाए।

[01:40:17] किसका?

[01:40:19] राजा भोज का।

[01:40:22] तो राजा भोज को इन्होंने कहा कि एक संगीत

[01:40:26] समारोह है और मैं अपने बिहाफ पर आपका नाम

[01:40:32] लिखवाया है। अब आपको चलना है। कहते हैं

[01:40:35] इसी बीच धीरे-धीरे

[01:40:38] राजा भोज को यह पता चल गया कि वह राजा भोज

[01:40:42] है याददाश्त आने लगी। लेकिन अब गंगू ने

[01:40:45] इतना आदर, इतना सम्मान, इतनी केयर की थी

[01:40:48] कि गंगू को छोड़कर जाए कैसे? तो उन्होंने

[01:40:51] कहा देखा जाएगा अब कुछ दिन और

[01:40:55] क्या किया जाए

[01:40:58] और अपनी आइडेंटिटी छुपाकर रहा जाए और जिस

[01:41:02] प्रतियोगिता में गंगू ने नाम लिखवाया है

[01:41:04] जिसने जान बचाई उसका इतना तो हक है ही कि

[01:41:08] हम उसके लिए एक प्रतियोगिता में भाग ले ले

[01:41:11] और जो इनाम जीते वो भी सही दे दे गंगू को

[01:41:13] ही तो उन्होंने कहा था कि जो भी इनाम

[01:41:15] मिलेगा वो आपको दे दिया जाएगा अशरफिया जो

[01:41:19] भी मिलेगी गी

[01:41:22] अब राजा भोज

[01:41:24] अब प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंच गए।

[01:41:27] बड़ी प्रतियोगिता है। उधर बच्चों राजा भोज

[01:41:30] की नगरी धारा नगरी में खोज पड़ी हुई है।

[01:41:33] भोज कहां गए?

[01:41:35] लेकिन

[01:41:37] लेकिन राजा भोज ऐसा कर देते थे। वे गायब

[01:41:41] हो जाते थे वेश बदलकर। तो लोगों ने सोचा

[01:41:44] कि चले जाते फिर प्रकट हो जाएंगे किसी

[01:41:46] दिन। तो अब राजा भोज ने उस संगीत

[01:41:50] प्रतियोगिता जहां से बड़े-बड़े लोग आए थे

[01:41:53] कहते हैं उस संगीत प्रतियोगिता में भाग

[01:41:55] लिया और उसमें भाग लेने के समय उन्होंने

[01:42:01] जो गायन किया कहते हैं उस गायन को सुनकर

[01:42:05] राजा भी हक्के बक्के रह गए। उनका इतना

[01:42:09] शाना।

[01:42:12] अरे गायन का मतलब है सुरों का अच्छे

[01:42:15] प्रकार से ज्ञान होना। गायन तो सब करते

[01:42:19] हैं। है ना? भाई सब कुल मिलाकर सब ऐसे तो

[01:42:23] है ही कि बाथरूम सिंगर बन जाए। है ना? कि

[01:42:26] थोड़ा-थोड़ा गाना सब गा लेते हैं अपने

[01:42:28] जीवन में। बट गायन की क्या होती है? शैली।

[01:42:31] लता मंगेशकर तो कोई एक ही हुई। है कि

[01:42:34] नहीं? जो सरस्वती का रूप थी। तो ढेरों

[01:42:38] गायक है ऐसे जिनको गायन सुरों की पहचान

[01:42:41] है। तो इन्होंने जब सुर लगाए तो कहते हैं

[01:42:45] राजा और सब सुनने वाले स्तब्ध रह गए।

[01:42:49] प्रतियोगिता को जीतना तो इनका बाएं हाथ का

[01:42:52] काम था। लेकिन एक गजब की घटना घट गई। कहते

[01:42:56] हैं राजा की बहन को यह गायक बहुत पसंद आ

[01:43:02] गए।

[01:43:04] और उन्होंने उन्होंने अपने भाई से जाकर

[01:43:08] कहा किसी युवक से हमें विवाह करना है तो

[01:43:14] हमारा विवाह इनसे आप करवा दीजिए। यह बात

[01:43:17] अब एकांत में इनाम देने के लिए बहाने से

[01:43:20] एकांत में राजा ने उन्हें अपने पास बुलाया

[01:43:23] और ढेरों इस पर अशर्फियां दी और कहा कि हम

[01:43:27] क्या करें? बड़ी विडंबना है कि आप एक

[01:43:31] साधारण व्यक्ति हैं और राजकुमारी आपसे

[01:43:34] विवाह करना चाहती है। यदि आप कहीं के राजा

[01:43:38] होते तो हम आपसे राजकुमारी का विवाह कर

[01:43:41] देते। राजा भोज ने सोचा यह सही समय है जब

[01:43:46] आपकी अपनी पहचान इन्हें बताई जाए।

[01:43:51] राजा भोज ने कहा कि हम

[01:43:55] हम

[01:43:57] धारा नगरी और परमार वंश के राजा भोज है।

[01:44:02] उन्होंने अपनी आइडेंटिटी सामने ला दी।

[01:44:04] बड़ा सत्कार सम्मान हुआ, विवाह हुआ। राजा

[01:44:08] भोज ने कहा, यह जितनी भी असर्फियां तुमने

[01:44:10] हमें दी है, यह सम किसे दे दो? गंगू को दे

[01:44:13] दो। और उन्होंने कहा कि ये गंगू कौन है?

[01:44:16] तो उन्होंने कहा कि गंगू को बुलाओ। और

[01:44:19] गंगू बहुत खास आदमी है हमारे लिए। तो गंगू

[01:44:22] को बुलाया गया तो उन्हें बताया गया उस

[01:44:25] राजा के द्वारा। पता है तुम्हारे घर पर

[01:44:26] कौन रह रहे थे। राजा भोज

[01:44:30] तुमने राजा भोज के साथ तुम रहे हो। तो

[01:44:33] राजा भोज बड़ा नाम था। तो

[01:44:37] तो इतने में राजा भोज ने उन्हें अपने गले

[01:44:40] से लगाया कि गंगू ही मेरा सबसे बड़ा मित्र

[01:44:44] है। तो गंगू ने उनकी मतलब उनकी जो बच्चों

[01:44:51] वो जो उन्हें आलिंगन किए हुए थे।

[01:44:59] उसको छुड़ाकर गंगू ने दूर हटकर कहां राजा

[01:45:04] भोज कहां गंगू तेरे मैं आपका मित्र कैसे

[01:45:08] हो सकता हूं आप राजा भोज और मैं गंगू तेरे

[01:45:12] और यह कहानी अमर हो गई कहां राजा भोज कहां

[01:45:17] गंगू तेरे

[01:45:19] समझ में आया

[01:45:21] कितनी सारी कहानियां सुना दी तुम्हें एक

[01:45:23] दिन में ठीक है अब

[01:45:26] इससे आगे की विवेचना

[01:45:29] कल की क्लास में करेंगे। बहुत-बहुत

[01:45:31] धन्यवाद। बहुत-बहुत आभार।

[01:45:35] आज की क्लास तुम्हें ज्यादा पसंद आई

[01:45:38] क्योंकि तुम तो कहानी सुनना चाहते हो ना।

[01:45:42] ऐसे सबको लिख के लाना है।
