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https://www.youtube.com/watch?v=XL8jKNKbzss
[00:00] 1 अप्रैल 2026 अर्जेंटीना के शहर उशुआया
[00:03] 1 अप्रैल 2026 अर्जेंटीना के शहर उशुआया से एक क्रूज जहाज निकलता है।
[00:05] इसमें पैसेंजर्स और क्रू मिलाकर 23 देशों के
[00:08] लगभग 150 लोग बैठे हैं और यह जहाज
[00:11] अंटार्कटिका और साउथ अटलांटिक के रिमोट
[00:13] आइलैंड्स पर एक सफर पर जा रहा है।
[00:16] शुरू के कुछ दिन सब ठीक रहता है।
[00:18] लोग आपस में मिलते हैं, एंजॉय करते हैं, पार्टीज होती
[00:21] हैं। इनमें से किसी को भी अंदाजा नहीं था
[00:23] कि यह ट्रिप जल्द ही एक बुरे सपने में
[00:26] बदलने वाली थी।
[00:30] ट्रिप शुरू होने के करीब 5 दिन बाद एक 70
[00:33] साल के डच पैसेंजर को अचानक से बुखार और
[00:36] सिर दर्द हो जाता है। माइल्ड डायरिया भी।
[00:38] यह शिप के डॉक्टर के पास जाता है। लेकिन
[00:40] एक-द दिन बाद इसे सांस लेने में भी तकलीफ
[00:43] होने लगती है। देखते ही देखते अचानक से
[00:45] हालत इतनी खराब हो जाती है कि 11 अप्रैल
[00:48] को जहाज पर ही इसकी मौत हो जाती है।
[00:52] दिस इज माय साइड ब्यूटी टू इनफॉर्म यू दैट
[00:57] वन पैसेंजर्स
[01:01] आखिर क्या कारण था इस मौत के पीछे किसी को नहीं पता था।
[01:06] पैसेंजर्स इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और लोग सोशलाइजिंग में और एंजॉय करने में लगे रहते हैं।
[01:11] 24 अप्रैल यह जहाज अफ्रीका के पास एक आइलैंड सेंट हेलेना पर डॉक करता है।
[01:17] यहां पर मुर्दा पैसेंजर की पत्नी उसकी बॉडी के साथ उतर जाती है।
[01:19] यहां से यह औरत साउथ अफ्रीका जाती है और 25 अप्रैल को साउथ अफ्रीका से एमस्टरडम जाने वाली फ्लाइट में बैठने ही वाली थी कि अचानक से इसकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि इसे फ्लाइट से उतार दिया जाता है।
[01:31] एकदम से यह एयरपोर्ट पर ही कोलैप्स कर जाती है और 26 अप्रैल को इसकी भी मौत हो जाती है।
[01:36] इस बीच जहाज पर मौजूद लोग भी बीमार होने लगते हैं।
[01:42] 28 अप्रैल को एक जर्मन महिला की तबीयत खराब हो जाती है और सिर्फ चार दिन बाद 2 मई को उसकी भी मौत हो जाती है।
[01:49] एक बार फिर से किसी को नहीं पता था कि एक-एक करके इस जहाज के पैसेंजर्स क्यों मर रहे थे।
[01:54] सेकंड मई को ही इस पूरी क्राइसिस के बारे में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन को इनफॉर्म किया जाता है।
[01:58] टेस्ट कंडक्ट करवाए जाते हैं और फिर डायग्नोसिस निकल कर आता है।
[02:00] हंता वायरस
[02:03] डायग्नोसिस निकल कर आता है।
[02:03] हंता वायरस हंट वायरस हंट वायरस डेडली हंट वायरस द हंट वायरस।
[02:07] डेडली हंट वायरस द हंट वायरस।
[02:07] अबे 26 में तो दुनिया खत्म है।
[02:08] तो दुनिया खत्म है।
[02:08] यह एक ऐसा वायरस है जिसकी कोई वैक्सीन नहीं है।
[02:10] कोई क्योर नहीं है और इसका डेथ रेट इतना ज्यादा है कि यह इनफेक्टेड इंसानों में से आधों को मार सकता है।
[02:14] आज यह वायरस एक ऐसे जहाज पर फैला हुआ है जो कई दिनों से समुद्र के बीच में ही फंसा है।
[02:19] पूरी दुनिया में न्यूज़ हेडलाइंस बन रही है और कोई इस जहाज को अपने देश में डॉक नहीं होने देना चाहता।
[02:23] डॉक नहीं होने देना चाहता।
[02:27] हेल्थ ऑफिशियल अराउंड द वर्ल्ड रेिन डेली आउट ऑफ़ एंटीवास।
[02:35] आजकल दुनिया में वैसे एक और चीज है जो हर रोज नई हेडलाइंस बना रही है।
[02:37] आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
[02:40] एआई टूल्स इतने पावरफुल हो चुके हैं कि कई घंटों का काम मिनटों में किया जा सकता है।
[02:43] इसलिए दुनिया भर में लेऑ्स देखने को मिल रहे हैं।
[02:45] जॉब लॉसेस हो रहे हैं।
[02:47] लेकिन ज्यादातर लोगों को लगता है कि चैट जीपीटी में दो-तीन सवाल पूछ लिए तो एआई समझ गए।
[02:49] रियलिटी यह है कि एआई की पोटेंशियल इससे 100 गुना ज्यादा बड़ी है।
[02:51] कंपनीज़ के वर्क फ्लोस में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
[02:53] एक्चुअली में वो काम जिनके लिए पहले 10-10 एंप्लाइजस चाहिए होते थे वो एआई से किए जा रहे हैं और यही
[03:05] होते थे वो एआई से किए जा रहे हैं और यही कारण है इन जॉब लॉसेस के पीछे।
[03:07] अब जो लोग एआई की इस पोटेंशियल को इस्तेमाल करना सीखेंगे उनके लिए ओपोरर्चुनिटीज भी कई गुना ज्यादा होंगी।
[03:12] और जो लोग नहीं सीखेंगे वो पीछे रह जाएंगे।
[03:14] और इसीलिए आपको यह सिखाने के लिए मैंने बनाई है एआई मास्टर क्लास।
[03:17] 3 घंटे की लाइव वर्कशॉप जहां मैं खुद लाइव आकर आपको पर्सनली 30 से ज्यादा सबसे यूज़फुल एआई टूल्स सिखाता हूं।
[03:25] एक डेमो जो लोगों को सबसे ज्यादा शौक करता है वो यह है कि बिना एक भी लाइन कोड सीखे पूरी की पूरी वर्किंग वेबसाइट बनाना।
[03:32] वेबसाइट जिन्हें बनाने में पहले हफ्तों का समय लगता था।
[03:34] लाखों रुपए लगते थे।
[03:36] अब आप खुद सीख जाओगे 5 मिनट में बनाना।
[03:39] अभी तक 1 लाख से ज्यादा लोग इस क्लास को अटेंड कर चुके हैं और पिछले महीने का सेशन अभी तक का बेस्ट एवर सेशन था।
[03:45] 91% लोगों ने सिर्फ फोर या फाइव स्टार की रेटिंग दी है।
[03:47] अगला सेशन 31 मई को होने जा रहा है तो देरी मत करो ज्वाइन करने में।
[03:52] कॉस्ट सिर्फ दो मूवी टिकटों जितनी है।
[03:54] लिंक डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा और या फिर आप इस क्यूआर कोड को स्कैन करके भी रजिस्टर कर सकते हो अगले लाइव सेशन के लिए।
[04:01] नमस्कार दोस्तों, सबसे डरावनी बात यह है कि हंता वायरस कोई नया वायरस नहीं है।
[04:05] कि हंता वायरस कोई नया वायरस नहीं है।
[04:08] इसके बारे में लगभग 70 साल पहले से ही साइंटिस्ट जानते हैं जब यह पहली बार सामने आया था एक जंग के बीच जहां हजारों सोल्जर्स बीमार हो गए।
[04:16] लेकिन फिर भी अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिला है।
[04:18] हंता वायरस एक्चुअली में कोई सिंगल वायरस नहीं है।
[04:20] यह वायरसेस की पूरी फैमिली है और यह चूहों में मिलते हैं और वहीं से ही फैलते हैं।
[04:25] अलग-अलग तरीके के चूहे अलग-अलग टाइप के हंता वायरस कैरी करते हैं और इंसानों में इन वायरसेस से दो तरह की बीमारियां होती है।
[04:33] पहली है हेमोरेजिक फीवर विद रिनल सिंड्रोम एचएफआरएस जो मेनली एशिया और यूरोप में लोगों को होता है।
[04:38] इसमें किडनीज फेल हो जाती है और बॉडी में इंटरनल ब्लीडिंग होने लगती है।
[04:45] दूसरी बीमारी है हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम एचपीएस जो नॉर्थ और साउथ अमेरिका में फैलती है।
[04:49] इसमें लंग्स के अंदर फेफड़ों के अंदर फ्लूइड भर जाता है और लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और इवेंचुअली इंसान की सफोकेशन से मौत हो जाती है।
[04:59] इसका मोटलिटी रेट 50% तक बताया जाता है और सबसे डिस्टर्बिंग चीज यह है कि इतना डेडली वायरस होने के बावजूद भी आज तक कोई भी
[05:07] वायरस होने के बावजूद भी आज तक कोई भी एफडीए या डब्ल्यूho अप्रूव्ड वैक्सीन नहीं
[05:10] एफडीए या डब्ल्यूho अप्रूव्ड वैक्सीन नहीं बनी है।
[05:12] वैक्सीन तो छोड़िए, कोई प्रूवन एंटी वायरल ट्रीटमेंट भी नहीं है।
[05:14] अगर आप इनफेक्ट हो जाते हैं तो डॉक्टर्स बस आपको सपोर्टिव केयर दे सकते हैं।
[05:16] सपोर्टिव केयर दे सकते हैं।
[05:18] इससे आपको थोड़ा रिलीफ मिल सकता है लेकिन इस वायरस से लड़ना तो आपके इम्यून सिस्टम को ही पड़ेगा।
[05:20] थोड़ा रिलीफ मिल सकता है लेकिन इस वायरस से लड़ना तो आपके इम्यून सिस्टम को ही पड़ेगा।
[05:22] इस वायरस के बारे में मॉडर्न हिस्ट्री में सबसे पहली बार पता चला था 1950 की कोरियन वॉर के दौरान।
[05:25] हिस्ट्री में सबसे पहली बार पता चला था 1950 की कोरियन वॉर के दौरान।
[05:27] इस वॉर में अमेरिकन सोल्जर्स साउथ कोरिया में लड़ रहे थे और अचानक 3000 से ज्यादा सोल्जर्स एक अजीब बीमारी का शिकार हो गए।
[05:29] अमेरिकन सोल्जर्स साउथ कोरिया में लड़ रहे थे और अचानक 3000 से ज्यादा सोल्जर्स एक अजीब बीमारी का शिकार हो गए।
[05:31] थे और अचानक 3000 से ज्यादा सोल्जर्स एक अजीब बीमारी का शिकार हो गए।
[05:34] अजीब बीमारी का शिकार हो गए।
[05:37] पहले इनको तेज बुखार आया।
[05:39] सिर दर्द और उल्टी हुई और फिर किडनीज ने काम करना बंद कर दिया।
[05:42] फिर किडनीज ने काम करना बंद कर दिया।
[05:45] इसमें से लगभग 15% सोल्जर्स मारे गए।
[05:47] डॉक्टर्स ने इसे कोरियन हेमोरेगिक फीवर का नाम दिया।
[05:49] नाम दिया।
[05:51] लेकिन उनको यह समझ नहीं आ रहा था कि क्या यह कोई बीमारी है या कोई केमिकल वेपन।
[05:54] केमिकल वेपन।
[05:57] इस मिस्ट्री को सॉल्व करने में लगभग 30 साल लग गए।
[05:59] 1980 के आसपास एक साउथ कोरियन वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर हो वांगली इन्होंने आइडेंटिफाई किया कि ये बीमारी चूहों से मिलने वाले एक वायरस की वजह से होती है और उन्होंने इस वायरस का नाम साउथ और नॉर्थ कोरिया में बहने वाली
[06:01] साउथ कोरियन वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर हो वांगली इन्होंने आइडेंटिफाई किया कि ये बीमारी चूहों से मिलने वाले एक वायरस की वजह से होती है और उन्होंने इस वायरस का नाम साउथ और नॉर्थ कोरिया में बहने वाली
[06:03] बीमारी चूहों से मिलने वाले एक वायरस की वजह से होती है और उन्होंने इस वायरस का नाम साउथ और नॉर्थ कोरिया में बहने वाली
[06:06] वजह से होती है और उन्होंने इस वायरस का नाम साउथ और नॉर्थ कोरिया में बहने वाली
[06:08] नाम साउथ और नॉर्थ कोरिया में बहने वाली एक नदी हंतान रिवर के नाम पर रख दिया।
[06:10] एक नदी हंतान रिवर के नाम पर रख दिया।
[06:12] लेकिन हंता वायरस की सबसे ड्रामेटिक स्टोरी आई साल 1993 में।
[06:15] स्टोरी आई साल 1993 में।
[06:17] मई 1993 में अमेरिका की एक अमेरिकन इंडियन ड्राइव नावाहो के 10 लोगों की कुछ हफ्ते के अंदर-अंदर मौत हो गई।
[06:19] अंदर-अंदर मौत हो गई।
[06:21] द मिस्टीरियस एपिडेमिक इन द साउथ वेस्टर्न यूनाइटेड स्टेट्स हैज़ यूएस मेडिकल इन्वेस्टिगेटल्ड द डिजीज किल्ड 10 पीपल इट स्ट्राइक सडनली
[06:23] स्टेट्स हैज़ यूएस मेडिकल इन्वेस्टिगेटल्ड
[06:25] द डिजीज किल्ड 10 पीपल इट स्ट्राइक सडनली
[06:29] एंड इन डे।
[06:30] हैरानी की बात ये थी कि ये सभी लोग काफी यंग और हेल्दी थे लेकिन अचानक से बीमार पड़ गए और इन सबके सिम्टम्स एक जैसे थे।
[06:33] यंग और हेल्दी थे लेकिन अचानक से बीमार पड़ गए और इन सबके सिम्टम्स एक जैसे थे।
[06:35] पहले फ्लू जैसा बुखार फिर अचानक से लंग्स के अंदर फ्लूइड भर जाना और फिर मौत।
[06:37] के अंदर फ्लूइड भर जाना और फिर मौत।
[06:40] शुरुआत में इनका मोटैलिटी रेट 75% था।
[06:44] यानी हर चार में से तीन इनफेक्टेड इंसानों की मौत हुई।
[06:47] बहुत कोशिशों के बाद भी साइंटिस्ट इस बीमारी को क्रैक नहीं कर पा रहे थे।
[06:50] साइंटिस्ट इस बीमारी को क्रैक नहीं कर पा रहे थे।
[06:52] और फिर ट्राइबल एल्डर्स ने साइंटिस्ट को बताया कि वह इस बीमारी के बारे में पहले से ही जानते थे।
[06:54] साइंटिस्ट को बताया कि वह इस बीमारी के बारे में पहले से ही जानते थे।
[06:57] इन नावाहों आदिवासियों की ओरल हिस्ट्री में यह रिकॉर्ड था कि जब बहुत बारिश होती है तो पिनियन पाइन नट्स चिलगोजे की बंपर पैदावार
[06:59] बारे में पहले से ही जानते थे।
[07:01] इन नावाहों आदिवासियों की ओरल हिस्ट्री में यह रिकॉर्ड था कि जब बहुत बारिश होती है तो
[07:03] रिकॉर्ड था कि जब बहुत बारिश होती है तो
[07:06] पिनियन पाइन नट्स चिलगोजे की बंपर पैदावार
[07:09] पिनियन पाइन नट्स चिलगोजे की बंपर पैदावार होती है।
[07:12] यह चूहों का खाना है जिसको खाकर उनकी पॉपुलेशन बढ़ती है और इस बढ़ती ओवरपुलेशन की वजह से यह बीमारी फैलती है चूहों में।
[07:19] साइंटिस्ट के लिए जानकारी बहुत इंपॉर्टेंट साबित हुई।
[07:21] जब उन्होंने चूहों को एग्जामिन किया तो 16 जून को वही वायरस चूहों में भी मिला।
[07:26] उन्होंने अंदाजा लगाया कि यह एक नए टाइप का हंता वायरस है और 1993 में इसके आउटब्रेक का कारण था एलनियो।
[07:32] वही एलनियो जिसकी मैंने हीट वेव वाले वीडियो में भी बात करी थी।
[07:36] साल 199192 में एक बड़ा एलनियो आया था जिसके कारण वहां पर ज्यादा बारिश हुई थी।
[07:43] नट क्रॉप्स की ज्यादा पैदावार हुई और चूहों की पॉपुलेशन एकदम से एक्सप्ललोड कर गई।
[07:47] जितने ज्यादा चूहे उतना ही ज्यादा वायरस ब्रेकआउ करने का चांस और उतना ही ज्यादा चांस कि यह वायरस किसी इंसान के कांटेक्ट में आकर फैलने लग जाए।
[07:57] एक लंबे समय तक साइंटिस्ट का मानना था कि इंडिया में हंता वायरस डिजीज नहीं है।
[08:02] लेकिन 2005 से 2008 के बीच एक मल्टी इंस्टीट्यूशनल स्टडी ने तमिलनाडु के बिलोर डिस्ट्रिक्ट में 28 कंफर्म्ड केसेस खोजे।
[08:08] यह केसेस मिले क्रॉनिक किडनी
[08:10] केसेस खोजे।
[08:12] यह केसेस मिले क्रॉनिक किडनी डिजीज के पेशेंट्स में, गोदामों में काम करने वाले वर्कर्स में और इरुला ट्राइब के उन मेंबर्स में जो चूहे पकड़ने का काम करते हैं।
[08:17] जब रिसर्चरर्स ने अलग-अलग रिस्क ग्रुप्स के 661 लोगों में हंता वायरस स्पेसिफिक एंटीबॉडीज चेक करी तो लगभग 4% जनरल पॉपुलेशन में भी एंटीबॉडीज मिली।
[08:28] यानी यह सबूत था कि इंडिया में भी कुछ लोग पहले से ही इनफेक्ट हुए थे।
[08:33] और यह रेट उन लोगों में और भी ज्यादा था जो चूहों के आसपास रहते थे या काम करते थे।
[08:39] लेकिन इंटरेस्टिंग बात यह थी कि इस पॉइंट ऑफ टाइम तक अभी भी साइंटिस्ट का मानना था कि हंता वायरस डायरेक्टली चूहों से इंसानों में फैलता है।
[08:46] यह एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैल सकता।
[08:51] लेकिन सन 1996 में सदर्न अर्जेंटीना में एक आउटब्रेक ने इस एजम्पशन को तोड़ दिया।
[08:56] इस आउटब्रेक का कारण था एंडीज वायरस।
[08:58] हंता वायरस फैमिली का एक ऐसा स्ट्रेन जो बहुत ही डेंजरस एबिलिटी रखता था।
[09:04] यह इंसान से इंसान में फैल सकता था।
[09:06] आज के दिन पूरी हंता वायरस फैमिली में यह एकमात्र ऐसा वायरस स्ट्रेन है जिसमें कंफर्म्ड ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन डॉक्यूमेंट किया गया है।
[09:09] लेकिन
[09:11] ट्रांसमिशन डॉक्यूमेंट किया गया है।
[09:13] लेकिन अच्छी खबर यह है कि यह कोविड या फ्लू की तरह हवा में नहीं फैलता।
[09:15] इसके लिए बहुत क्लोज्ड और प्रोलोंग्ड फिजिकल कांटेक्ट जरूरी है।
[09:17] यानी कि आप किसी और इंसान के एक लंबे समय तक काफी करीब रहें।
[09:20] एक ही बेड शेयर करें।
[09:22] उनके बॉडीली फ्लूइड से कांटेक्ट हो।
[09:24] इसीलिए यह आमतौर पर फैमिली मेंबर्स के बीच में ही फैलता है।
[09:26] या फिर तब जब कोई इंसान किसी इनफेक्टेड पर्सन की बहुत नजदीकी से केयर कर रहा हो।
[09:28] और यहां पर एक और ट्विस्ट भी है।
[09:31] साइंटिस्ट ने अर्जेंटीना में डॉक्यूमेंट किया है कि कुछ इनफेक्टेड लोग सुपर स्प्रेडर्स की तरह बिहेव करते हैं।
[09:33] कुछ इनफेक्टेड लोग कुछ ज्यादा ही लोगों को इनफेक्ट कर सकते हैं।
[09:35] लेकिन यहां पर भी अच्छी चीज यह है कि इस वायरस की ट्रांसमिशन विंडो बहुत छोटी है।
[09:37] यह बीमारी की शुरुआत में सिर्फ एक दिन ही फैलता है।
[09:40] तो अब तक दोस्तों आप समझ ही गए होंगे कि जिस क्रूजशिप की मैंने शुरू में बात करी थी, वहां पर भी यही एंडडी स्ट्रेन फैला था।
[09:42] वही स्ट्रेन जहां पर इंसानों से इंसानों का ट्रांसमिशन पॉसिबल है।
[09:44] लेकिन सवाल यह है कि उस जहाज पर यह वायरस आया कहां से?
[09:46] अभी तक जो इंफॉर्मेशन मिली है उसके अनुसार मार्च 2026 में एक डच कपल उशु आया में एक बर्ड वॉचिंग टूर पर गए थे और
[10:11] आया में एक बर्ड वॉचिंग टूर पर गए थे और टूर के दौरान ये एक ऐसे लैंडफील्ड में जा पहुंचे जहां पर बहुत सारे चूहे रहते थे।
[10:16] पहुंचे जहां पर बहुत सारे चूहे रहते थे।
[10:18] अब चांस की बात देखिए। कि अगर यह दो-ती दिन बाद जहाज पर लौटे होते तो ये वायरस शायद ना फैलता क्योंकि इसकी ट्रांसमिशन विंडो ऑन एवरेज सिर्फ एक दिन की है।
[10:22] लेकिन यह इस टूर के तुरंत बाद इस जहाज पर आ गए और यहीं पर और लोगों में इंफेक्शन फैल गया।
[10:30] बाय द वे यह वही डच कपल है जिसकी हंता वायरस से सबसे पहले मौत हुई।
[10:33] 10 मई तक इस जहाज पर टोटल 10 केसेस सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की ऑलरेडी मौत हो चुकी है।
[10:40] इसके अलावा कई पैसेंजर्स को मेडिकली इवाकुएट करना पड़ा है और अभी चार पेशेंट्स हॉस्पिटलाइज्ड हैं।
[10:47] एक आईसीयू में जोहानिसबर्ग साउथ अफ्रीका में, दो अलग-अलग हॉस्पिटल्स में नेदरलैंड्स में और एक स्विट्जरलैंड में।
[10:51] कई दिनों तक यह जहाज वेस्ट अफ्रीकन कंट्री केप वडे की कोस्ट के पास खड़ा रहा था।
[10:55] लेकिन इस देश ने इसे डॉग करने की परमिशन देने से मना कर दिया।
[10:57] फिर स्पेन ने उसे अपने अंडर आने वाले ऑटोनॉमस कैनरी आइलैंड्स पर डॉक करने की परमिशन दी और 10 मई को यह जहाज फाइनली जाकर टेनरिफ आइलैंड पर डॉक करता है।
[11:07] अब यहां से इस जहाज को इवाक्युएट किया जा रहा है और यह देखना होगा कि कितने पैसेंजर्स यहां
[11:13] देखना होगा कि कितने पैसेंजर्स यहां पॉजिटिव टेस्ट करते हैं।
[11:16] जहाज के क्रू में पॉजिटिव टेस्ट करते हैं।
[11:18] जहाज के क्रू में दो इंडियंस भी शामिल थे और वो जहाज के साथ अब नेदरलैंड्स गए हैं और वहां पर
[11:20] क्वारेंटीन में है।
[11:22] हालांकि उनमें कोई सिम्टम्स नहीं देखे गए हैं।
[11:24] लेकिन इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल जो आपके मन में आ रहा
[11:26] होगा, मेरे मन में भी आ रहा है कि क्या
[11:28] हंता वायरस अब अगला पेंडेमिक बन जाएगा?
[11:31] अब देखो दोस्तों, मैं कोई एस्ट्रोलॉजर तो हूं
[11:33] नहीं।
[11:35] होने को कुछ भी हो सकता है लेकिन इसका चांस बहुत कम है और इसकी वजह है दो
[11:38] कारण।
[11:41] पहला तो यह कि इसका ट्रांसमिशन विंडो इतना छोटा है।
[11:43] सिर्फ एक दिन का।
[11:45] तो कोविड की तरह यहां पर 14 दिन तक क्वारेंटाइन करने की जरूरत नहीं।
[11:47] अगर कोई इनफेक्टेड आदमी है अगर दो दिन तक वो किसी और से नहीं मिलता उसी में ही चांस
[11:49] बहुत-बहुत कम हो जाता है।
[11:51] दूसरा कोविड या फ्लू की तरह यह हवा में नहीं फैलता तो
[11:54] इसलिए इसके फैलने का चांस और भी कम हो
[11:56] जाता है।
[11:58] यह सिर्फ ह्यूमन टू ह्यूमन क्लोज कांटेक्ट से फैलता है।
[12:00] अभी तक इसका यूरोप और एशिया में कोई भी ह्यूमन टू ह्यूमन केस
[12:02] नहीं देखा गया है।
[12:05] वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी कहा है कि ग्लोबल
[12:06] पपुलेशन के लिए इस वायरस का ओवरऑल रिस्क
[12:08] लो है।
[12:11] लेकिन यह इंसिडेंट एक बड़ा वेकअप कॉल है क्योंकि इसका मोटलिटी रेट डेथ रेट
[12:16] कॉल है क्योंकि इसका मोटलिटी रेट डेथ रेट 50% तक हो सकता है।
[12:19] तो जो लोग इनफेक्ट हो जाते हैं उनके लिए यह बेहद जानलेवा है।
[12:21] ऊपर से इसका एलनियो से भी कनेक्शन है और इस साल एक बेहद बड़ा एलनियो आने की संभावना है।
[12:28] तो सवाल यह उठता है कि इस वायरस से खुद को कैसे प्रोटेक्ट किया जाए?
[12:32] सबसे पहले तो आपको अपने घर को सील करने की जरूरत है ताकि चूहे घर के अंदर ना घुस सके।
[12:37] यह वायरस चूहों से फैलता है।
[12:39] अच्छा यही होगा कि आप घर में कोई भी ऐसी जगह या गैप ना छोड़ें जिससे चूहे अंदर आ सके।
[12:44] अगर आप ऐसी किसी जगह पर जा रहे हो जहां बहुत चूहे होते हैं जैसे कि स्टोरेज रूम, गोदाम या पुराने बंद कमरे तो N95 मास्क या ग्लव्स पहन कर जाओ।
[12:51] अगर आप कहीं पर भी चूहों की ड्रॉपिंग्स देखते हो तो और भी ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।
[12:55] लेकिन सबसे बेसिक पॉइंट यहां पर है हाइजीन।
[12:58] अपने आसपास खाने को खुला मत छोड़ो।
[13:00] कूड़े को प्रॉपर्ली डिस्पोज करो और जितनी भी चीजें चूहों को अट्रैक्ट करती हैं उनको हटा दो।
[13:04] हंता वायरस एक साइलेंट थ्रेट है।
[13:06] यह न्यूज़ हेडलाइंस में तभी आता है जब अचानक से कई लोगों की मौत हो जाती है।
[13:11] लेकिन सच बात तो यह है कि यह वायरस हर रोज दुनिया भर में खामोशी से कई दशकों से लोगों को
[13:16] भर में खामोशी से कई दशकों से लोगों को इनफेक्ट करता रहा है।
[13:18] बस फर्क यह है कि पहले आपको इसके बारे में नहीं पता था।
[13:21] लेकिन अब आप जान चुके हैं।
[13:23] बिना वैक्सीन और क्योर के आपके पास अब सबसे अच्छा हथियार है अवेयरनेस और प्रिवेंशन।
[13:29] एआई मास्टर क्लास के अगले सेशन को ज्वाइन करना चाहते हो तो यहां क्लिक करके कर सकते हो।
[13:36] और अब अगर आपको एलनियो के बारे में और डिटेल में जानना है तो इस वाले वीडियो में जान सकते हो यहां क्लिक करके।
[13:40] बहुत-बहुत धन्यवाद।