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https://www.youtube.com/watch?v=C3SQ6gxAxMU
[00:00] जंगल में इस साल भयंकर गर्मी पड़ी थी।
[00:03] सूरज की तेज किरणों से पेड़-पौधे सूखने लगे थे।
[00:05] छोटी नदियां खत्म हो चुकी थीं और जानवर पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे थे।
[00:08] जानवर पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे थे।
[00:11] पूरा जंगल परेशान था।
[00:14] हर जानवर बस किसी तरह पानी ढूंढकर अपनी प्यास बुझाना चाहता था।
[00:17] उसी जंगल में एक ताकतवर लेकिन बहुत घमंडी शेरनी रहती थी।
[00:20] वह खुद को पूरे जंगल की सबसे शक्तिशाली शिकारी समझती थी।
[00:24] उसे लगता था कि जंगल की हर चीज पर सिर्फ उसी का अधिकार है।
[00:27] गर्मी बढ़ने के साथ जंगल में सिर्फ एक बड़ा तालाब बचा था जहां थोड़ा पानी मौजूद था।
[00:29] एक दिन शेरनी उस तालाब के पास पहुंची।
[00:33] उसने देखा कि सारे जानवर वहीं पानी पीने आ रहे हैं।
[00:35] तभी उसके मन में घमंड भरा विचार आया।
[00:38] जब पूरा जंगल इस तालाब पर निर्भर है तो अब यह जगह सिर्फ मेरी होगी और यहां वही आएगा जिसे मैं अनुमति दूंगी।
[00:41] शेरनी तालाब के किनारे बैठ गई और उसने वहां आने वाले जानवरों को डराना शुरू कर दिया।
[00:44] कुछ देर बाद एक हिरण
[01:01] डराना शुरू कर दिया।
[01:01] कुछ देर बाद एक हिरण पानी पीने आया।
[01:04] वह बहुत प्यासा था और पानी पीने आया।
[01:04] वह बहुत प्यासा था और धीरे-धीरे तालाब के पास पहुंचा।
[01:07] रुको हिरण धीरे-धीरे तालाब के पास पहुंचा।
[01:07] रुको हिरण बिना मेरी इजाजत कोई भी इस तालाब का पानी नहीं पी सकता।
[01:09] पहले मुझे सम्मान दिखाना जरूरी होगा यहां।
[01:11] हिरण डर गया।
[01:11] लेकिन फिर भी उसने कांपती आवाज में कहा।
[01:14] मैं बहुत प्यासा हूं शेरनी।
[01:14] बस थोड़ा पानी पीकर चला जाऊंगा।
[01:16] मुझे कोई परेशानी नहीं चाहिए आज बिल्कुल भी।
[01:19] लेकिन शेरनी के चेहरे पर घमंड साफ दिखाई दे रहा था।
[01:21] अगर यहां पानी पीना है तो पहले मेरे लिए भोजन ढूंढ कर लाओ।
[01:23] तभी तुम्हें इस तालाब के पास आने दूंगी मैं।
[01:27] हिरण मजबूर था।
[01:27] वह डरते हुए वहां से चला गया।
[01:29] धीरे-धीरे बाकी जानवरों को भी पता चल गया कि शेरनी ने तालाब पर कब्जा कर लिया है।
[01:31] अब जो भी पानी पीने आता, शेरनी उसे डराकर भगा देती या अपने लिए काम करने को कहती।
[01:35] जंगल में डर फैलने लगा।
[01:38] उसी जंगल में एक समझदार लोमड़ी भी रहती थी।
[01:41] वह दूर से सब देख रही थी।
[01:44] उसे समझ नहीं आ रहा था कि शेरनी अचानक इतनी निर्दई क्यों हो गई है।
[01:47] अगले दिन एक छोटा
[02:03] निर्दई क्यों हो गई है।
[02:03] अगले दिन एक छोटा खरगोश पानी पीने आया।
[02:06] गर्मी के कारण उसका गला सूख रहा था।
[02:09] छोटे खरगोश अगर पानी चाहिए तो पहले मेरे लिए मीठे फल लेकर आओ।
[02:12] खाली हाथ यहां आने की हिम्मत मत करना।
[02:14] मुझे बहुत प्यास लगी है शेरनी।
[02:17] मैं इतना दूर फल लेने नहीं जा सकता इस तेज गर्मी में अभी।
[02:19] अगर मेरी बात नहीं मानोगे तो इस तालाब के आसपास भी दिखाई मत देना वरना बहुत बुरा होगा तुम्हारे साथ।
[02:24] खरगोश रोता हुआ वहां से भाग गया।
[02:26] लोमड़ी यह सब देख रही थी।
[02:29] अब उसे समझ आने लगा कि शेरनी का घमंड पूरे जंगल के लिए खतरा बन चुका है।
[02:32] कुछ ही दिनों में हालत और खराब हो गई।
[02:35] कई जानवर प्यास के कारण कमजोर होने लगे थे।
[02:38] छोटे जानवर तो तालाब के पास जाने से भी डरने लगे थे।
[02:41] लेकिन शेरनी को किसी की परेशानी की परवाह नहीं थी।
[02:43] वह पूरे तालाब को अपना राज समझने लगी थी।
[02:46] एक शाम लोमड़ी चुपचाप तालाब के पास पहुंची।
[02:49] उसने देखा कि शेरनी अकेली बैठी पानी पी रही है।
[02:53] लोमड़ी धीरे-धीरे उसके पास गई।
[02:56] शेरनी पूरा जंगल प्यास से परेशान है।
[02:59] अगर
[03:05] शेरनी पूरा जंगल प्यास से परेशान है।
[03:09] अगर तुम चाहो तो सभी जानवर मिलकर इस गर्मी का सामना कर सकते हैं आसानी से।
[03:12] मैं जंगल की सबसे ताकतवर शिकारी हूं।
[03:15] मुझे किसी की जरूरत नहीं।
[03:17] और यह तालाब अब सिर्फ मेरा है हमेशा के लिए।
[03:20] लोमड़ी समझ गई कि शेरनी अब किसी की बात सुनने वाली नहीं है।
[03:22] वह चुपचाप वहां से लौट गई।
[03:26] रात होते-होते जंगल में बेचैनी और बढ़ गई।
[03:29] जानवर समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर वे पानी कहां से लाएं।
[03:32] लोमड़ी पूरी रात सोचती रही।
[03:35] अगर जल्दी कुछ नहीं किया गया तो कई जानवर प्यास से मर सकते थे।
[03:37] उसे लगा कि अब यह बात शेर तक पहुंचानी जरूरी है।
[03:41] लेकिन बिना पूरी सच्चाई जाने शेर शायद विश्वास ना करे।
[03:44] इसीलिए लोमड़ी ने फैसला किया कि वह अगले दिन फिर तालाब के पास जाकर शेरनी की हरकतों को ध्यान से देखेगी।
[03:50] अगले दिन लोमड़ी सुबह-सुबह चुपचाप तालाब के पास पहुंची।
[03:55] वह इस बार एक बड़े पत्थर के पीछे छिपकर सब देखने लगी।
[03:58] कुछ देर बाद एक बूढ़ा हिरण धीरे-धीरे तालाब की तरफ आया।
[04:08] हिरण धीरे-धीरे तालाब की तरफ आया।
[04:08] उसकी चाल बहुत कमजोर लग रही थी।
[04:11] जैसे ही वह पानी पीने झुका, शेरनी जोर से दहाड़ी।
[04:14] रुको बूढ़े हिरण।
[04:16] मैंने कहा था कि बिना मेरी अनुमति कोई भी इस तालाब का पानी नहीं पी सकता।
[04:19] अब यहां मैं बहुत कमजोर हो चुका हूं।
[04:22] शेरनी बस थोड़ा पानी पी लेने दो।
[04:24] वरना शायद मैं ज्यादा देर जिंदा नहीं रह पाऊंगा।
[04:26] लेकिन शेरनी का दिल बिल्कुल कठोर हो चुका था।
[04:28] अगर जीना चाहते हो तो पहले मेरे लिए शिकार ढूंढ कर लाओ।
[04:33] फिर तुम्हें पानी पीने की इजाजत मिल सकती है यहां।
[04:36] बेचारा हिरण मायूस होकर वापस लौट गया।
[04:39] लोमड़ी यह सब देखकर परेशान हो उठी।
[04:43] उसे समझ आ गया कि अगर जल्दी कुछ नहीं किया गया तो जंगल में बड़ी मुसीबत आ जाएगी।
[04:48] शाम होने लगी।
[04:48] गर्म हवाएं अब भी चल रही थी।
[04:52] लोमड़ी चुपचाप जंगल के अलग-अलग जानवरों से मिलने लगी।
[04:54] उसने सबकी परेशानी सुनी।
[04:57] किसी को पानी नहीं मिल रहा था।
[04:59] कोई कमजोरी से गिर रहा था तो कुछ छोटे जानवर तालाब तक पहुंचने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहे थे।
[05:05] सभी जानवर डरे हुए थे।
[05:05] तभी एक छोटे खरगोश ने रोते
[05:08] डरे हुए थे।
[05:08] तभी एक छोटे खरगोश ने रोते हुए कहा,
[05:09] हुए कहा, अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम सब प्यास से मर
[05:11] अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम सब प्यास से मर जाएंगे।
[05:14] शेरनी किसी को तालाब के पास आने
[05:15] जाएंगे। शेरनी किसी को तालाब के पास आने ही नहीं देती।
[05:15] अब डरो मत।
[05:18] मैं इस समस्या का हल जरूर
[05:22] निकालूंगी। जंगल में हमेशा अन्याय नहीं चल
[05:25] सकता। कभी भी लंबे समय तक।
[05:25] उस रात लोमड़ी ने एक योजना बनाई।
[05:29] उसे पता था कि शेरनी बहुत घमंडी है और अपने अलावा
[05:32] किसी की ताकत नहीं मानती।
[05:32] इसलिए लोमड़ी ने
[05:35] तय किया कि वह शेर को खुद तालाब तक लेकर
[05:37] जाएगी।
[05:37] अगली सुबह वह शेर की गुफा की तरफ
[05:41] निकल पड़ी।
[05:41] शेर अपनी गुफा के बाहर बैठा
[05:44] हुआ था।
[05:44] वह भी गर्मी और जंगल की बदलती
[05:46] हालत को लेकर चिंतित था।
[05:46] लोमड़ी ने आदर से
[05:50] सिर झुकाया।
[05:50] महाराज जंगल के जानवर बहुत
[05:54] बड़ी परेशानी में हैं।
[05:54] अगर जल्दी कुछ नहीं
[05:57] किया गया तो हालात और खराब हो जाएंगे
[06:01] यहां।
[06:02] मुझे साफ-साफ बताओ लोमड़ी आखिर जंगल में
[06:05] ऐसा क्या हो रहा है जिससे सब जानवर इतने
[06:07] डरे हुए दिखाई दे रहे हैं।
[06:09] डरे हुए दिखाई दे रहे हैं।
[06:09] लोमड़ी ने पूरी बात बतानी शुरू की।
[06:11] उसने बताया कि कैसे शेरनी ने तालाब पर कब्जा कर लिया है और किसी भी जानवर को पानी नहीं पीने देती।
[06:17] शेर यह सुनकर हैरान रह गया।
[06:20] क्या यह सच है?
[06:23] क्या शेरनी ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करके पूरे जंगल को डराना शुरू कर दिया है अब खुलेआम।
[06:27] अगर आपको विश्वास नहीं हो रहा तो आप खुद मेरे साथ चलकर सब देख सकते हैं महाराज।
[06:33] अभी इसी समय वहां।
[06:35] शेर कुछ पल तक सोचता रहा।
[06:38] उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।
[06:40] अगर यह बात सच निकली तो आज ही इस घमंड का अंत होगा ताकि जंगल में फिर से शांति लौट सके हमेशा।
[06:48] उधर तालाब के पास शेरनी अब भी अपने घमंड में बैठी थी।
[06:51] कुछ छोटे जानवर दूर खड़े पानी को देख रहे थे।
[06:54] लेकिन डर के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
[06:57] शेरनी उन्हें देखकर मुस्कुरा रही थी।
[07:00] उसे लग रहा था कि अब पूरे जंगल में सिर्फ उसी का राज चलता है।
[07:05] कुछ ही देर में शेर और लोमड़ी उसके सामने आए।
[07:05] शेरनी ने भी शेर को देखा।
[07:09] उसके सामने आए।
[07:09] शेरनी ने भी शेर को देखा।
[07:11] लेकिन उसके चेहरे पर घमंड अब भी दिखाई दे रहा था।
[07:11] महाराज आप अचानक यहां कैसे?
[07:14] क्या इस तालाब के आसपास कोई नई परेशानी खड़ी हो गई है आज जंगल में?
[07:16] परेशानी तुम हो शेरनी।
[07:17] पूरे जंगल के जानवर तुम्हारी वजह से प्यास और डर में जीने को मजबूर हो चुके हैं।
[07:22] अब शेरनी थोड़ी चौकी लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
[07:26] मैं सिर्फ तालाब की रक्षा कर रही हूं।
[07:29] अगर मैं यहां ना रहूं तो सारे जानवर पानी के लिए लड़ाई करने लगेंगे।
[07:34] यह झूठ है महाराज।
[07:37] शेरनी किसी को पानी नहीं पीने देती और छोटे जानवरों को डरा कर भगा देती है।
[07:41] आसपास खड़े जानवर भी धीरे-धीरे हिम्मत जुटाने लगे।
[07:44] एक बूढ़ा हिरण आगे आया।
[07:47] महाराज कई दिनों से हम प्यासे हैं लेकिन शेरनी हमें तालाब के पास भी नहीं आने देती अब बिल्कुल भी।
[07:54] हम बहुत डर गए हैं महाराज।
[07:56] अगर कोई पानी मांगता है तो शेरनी उसे डांट कर भगा देती है।
[07:59] तुरंत वहां से।
[07:59] यह सुनते ही शेर जोर से दहाड़ा।
[08:03] पूरे जंगल में उसकी आवाज गूंज उठी।
[08:04] पानी और प्रकृति पर किसी एक का अधिकार नहीं हो सकता।
[08:07] यह जंगल के हर जीव का
[08:10] नहीं हो सकता।
[08:10] यह जंगल के हर जीव का अधिकार है।
[08:10] हमेशा से और रहेगा।
[08:13] अधिकार है।
[08:13] हमेशा से और रहेगा।
[08:13] शेरनी पूरी तरह शांत हो गई।
[08:13] उसे एहसास हो
[08:16] शेरनी पूरी तरह शांत हो गई।
[08:16] उसे एहसास हो चुका था कि उसका घमंड उसे गलत रास्ते पर
[08:19] चुका था कि उसका घमंड उसे गलत रास्ते पर ले गया था।
[08:19] वह धीरे-धीरे तालाब से दूर चली
[08:22] ले गया था।
[08:22] वह धीरे-धीरे तालाब से दूर चली गई।
[08:22] जैसे ही वह वहां से हटी, छोटे-छोटे
[08:25] गई।
[08:25] जैसे ही वह वहां से हटी, छोटे-छोटे जानवर धीरे-धीरे तालाब की तरफ आने लगे।