# Economy for UPSC Prelims 2026 | UPSC Preparation | UDAAN 2026 | UPSC Wallah

https://www.youtube.com/watch?v=I5I5ri4cS6E
Translation: en

[00:13] नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आप सभी का आज के सेशन के अंदर।
  Hello friends, welcome all of you to today's session.

[00:16] ए वेरी गुड मॉर्निंग टू ऑल ऑफ यू।
  A very good morning to all of you.

[00:18] गुड मॉर्निंग एवरीवन।
  Good morning everyone.

[00:21] गुड मॉर्निंग।
  Good morning.

[00:23] तो दोस्तों आज हमारा जो सेशन है वो इकॉनमी के रिगार्डिंग है।
  So friends, today our session is regarding the economy.

[00:26] एंड आज के सेशन में हमारी जो कंप्लीट इकॉनमी की हम डिस्कशन यहां पे आज के सेशन में करेंगे।
  And in today's session, we will have a complete discussion of the economy here in today's session.

[00:31] और हम लोग आज के सेशन में प्लान हमने ये किया है कि आज हम लोग अपना स्टैटिक पोर्शन भी कवर करेंगे।
  And we have planned for today's session that today we will also cover our static portion.

[00:36] इसमें बहुत सारे अलग-अलग करंट अफेयर्स के एंगल्स हैं।
  There are many different angles of current affairs in this.

[00:39] हम उनको भी आज के सेशन में डिस्कस करेंगे।
  We will discuss them too in today's session.

[00:41] एंड एट द सेम टाइम हम यहां पर बहुत सारे प्रैक्टिस एमसीक्यूस भी हम यहां पे डिस्कस करेंगे।
  And at the same time, we will discuss many practice MCQs here.

[00:47] सो दैट हमारी प्रैक्टिस भी कोई कमी ना रहे।
  So that there is no कमी in our practice.

[00:49] कुछ भी क्वेश्चंस हो उनको हम टैकल कर पाएं।
  Whatever questions there are, we can tackle them.

[00:52] दैट इज द एजेंडा ऑफ दिस डे।
  That is the agenda of this day.

[00:54] राइट?
  Right?

[00:59] हम ठीक है।
  We are fine.

[00:59] गुड गुड गुड।
  Good good good.

[00:59] ओके ओके ओके।
  Okay okay okay.

[01:03] बहुत अच्छा लग रहा है।
  It feels very good.

[01:03] आप सब लोग यहां पे कनेक्ट हुए हो।
  You all have connected here.

[01:05] एंड आज हम अच्छे से फिर हर एक टॉपिक को यहां पे गो थ्रू करेंगे।
  And today we will go through each topic properly here.

[01:07] आपको बस इंश्योर ये करना है कि आपको पूरे सेशन में बने रहना है स्टार्टिंग से लेके अंत
  You just have to ensure that you stay in the entire session from the beginning to the end.

[01:14] तक ताकि हर एक चीज हम यहां पे आज ही इसी सेशन में हम यहां पे डिस्कस करें।
  So that we discuss everything here today in this session.

[01:19] अब आप लोगों को पता होगा कि देखो एक तो आज जो सेशन जब कंप्लीट हो जाएगा तो आपको जो नोट्स हैं वो यहां पर मिल जाएंगे हमारी ऐप के ऊपर।
  Now you all will know that look, once today's session is completed, you will get the notes on our app.

[01:25] ठीक है?
  Okay?

[01:25] तो ऐप के ऊपर हमारे सारे जो नोट्स हैं वो यहां पे आपके साथ शेयर हो जाएंगे एंड वहां पर आप इनको अेल कर सकते हो इन क्लास नोट्स को।
  So on the app, all our notes will be shared with you here and there you can access these class notes.

[01:32] इसके साथ ही साथ आप लोग नोटिस कर रहे होंगे हमारी ये जो उड़ान सीरीज है इसमें प्रशांत सर आपको पिटी पढ़ाएंगे।
  Along with this, you all must be noticing that in our Udaan series, Prashant sir will teach you Polity.

[01:39] मतलब पढ़ा चुके हैं ऑलरेडी।
  Meaning, he has already taught.

[01:41] सिमिलरली अगर हम बात करें तो आपको यहां पे थापा सर ने आपको ज्योग्राफी डिस्कस की थी।
  Similarly, if we talk, then here Thapa sir had discussed Geography with you.

[01:47] एंड उसी तरह से बाकी फैकल्टी जैसे दीपिंदर सर भी आपको ज्योग्राफी का कुछ कॉम्पोनेंट पढ़ाएंगे।
  And similarly, other faculty like Dipinder sir will also teach you some component of Geography.

[01:51] एनवायरमेंट इकोलॉजी सर डिस्कस करेंगे।
  Environment Ecology sir will discuss.

[01:53] अभिषेक सर आपके साथ एंशिएंट एंड मेडिवल हिस्ट्री डिस्कस करेंगे।
  Abhishek sir will discuss Ancient and Medieval History with you.

[01:57] विकास एलावत सर आपके साथ मॉडर्न हिस्ट्री डिस्कस करेंगे।
  Vikas Elawat sir will discuss Modern History with you.

[01:59] शिवम सर साइंस एंड टेक्नोलॉजी
  Shivam sir Science and Technology

[02:01] नितिन सर आर्ट एंड कल्चर एंड आदित्य सर आपके गवर्नमेंट स्कीम्स।
  Nitin sir Art and Culture and Aditya sir your Government Schemes.

[02:04] ऑलरेडी दोस्तों दो लेक्चर्स जो हैं वो यहां पे कंप्लीट हो चुके हैं।
  Already friends, two lectures have been completed here.

[02:07] जैसे पिटी का लेक्चर प्रशांत सर ऑलरेडी ले चुके हैं।
  For example, Prashant sir has already taken the Polity lecture.

[02:10] एंड थापा सर ने भी फिजिकल ज्योग्राफी आपको पढ़ा चुके हैं।
  And Thapa sir has also taught you Physical Geography.

[02:12] तो इन दोनों लेक्चर्स को भी आप देख सकते हो
  So you can also watch these two lectures.

[02:16] अगर आपने नहीं देखे हुए।
  If you haven't seen them.

[02:18] उसी तरह से आज इकॉनमी का सेशन होगा।
  Similarly, today there will be an economy session.

[02:20] एंड आने वाले सेशंस आपके यहां पे प्लंड हैं नेक्स्ट फ्यू डज़ के अंदर।
  And the upcoming sessions are planned here for you in the next few days.

[02:22] वो भी इस तरह से प्लान होते रहेंगे।
  They will also continue to be planned in this way.

[02:24] एंड ध्यान में रखिएगा कि जो सेशंस हैं ना ये हर आपके वेडनेसडे एंड सैटरडे को होते हैं।
  And keep in mind that these sessions happen every Wednesday and Saturday.

[02:27] जैसे आज 14 आज सॉरी 14 नहीं आज 18 फरवरी है एंड आज वेडनेसडे है तो आज ये सेशन प्लंड है।
  Like today, the 14th, oh sorry, not the 14th, today is February 18th and it's Wednesday, so today this session is planned.

[02:32] इसके बाद अगला जो सेशन होगा वो आपको सैटरडे को होता हुआ देखने को मिलेगा।
  After this, you will see the next session happening on Saturday.

[02:37] एंड इस तरह से आप हर एक सेशन के अंदर यहां पे जुड़ सकते हो।
  And in this way, you can join in every session here.

[02:41] बाकी मेरा नाम ऋषभ है।
  Otherwise, my name is Rishabh.

[02:42] अगर आप मेरे साथ कनेक्टेड नहीं हो तो आप मेरे साथ इस Telegram चैनल ऋषभ शर्मा सर pw यहां पर आप मेरे साथ जुड़ सकते हो।
  If you are not connected with me, you can join me on this Telegram channel, Rishabh Sharma Sir PW, here.

[02:47] राइट?
  Right?

[02:50] ठीक है?
  Okay?

[02:53] स्टार्ट करें फिर।
  Shall we start then?

[02:59] ठीक है?
  Okay?

[03:00] आयुष राज तिवारी कोई चिंता वाली बात नहीं है।
  Ayush Raj Tiwari, there is no need to worry.

[03:02] अच्छे से पढ़ना मजा आएगा आपको बहुत ज्यादा।
  Study well, you will enjoy it a lot.

[03:05] ठीक है?
  Okay?

[03:07] चलिए स्टार्ट करते हैं।
  Let's start.

[03:09] देखो सबसे पहला टॉपिक ना हम इनफ्लेशन पिक करेंगे।
  Look, the very first topic, we will pick inflation.

[03:11] यहां पर मैं आपको बता दूं कि सबसे पहले हम इनफ्लेशन डिस्कस करेंगे।
  Here, let me tell you that first we will discuss inflation.

[03:12] उसके बाद हमारा फिस्कल पॉलिसी का डिस्कशन होगा।
  After that, we will have a discussion on fiscal policy.

[03:15] पहले दो टॉपिक्स हम यहां पे ये दोनों पिक करेंगे।
  First, we will pick these two topics here.

[03:15] क्योंकि दोनों
  Because both

[03:16] टॉपिक्स इंपॉर्टेंट भी हैं।
  The topics are also important.

[03:19] लगभग तीन से चार क्वेश्चन इन दोनों टॉपिक्स को मिला के आप कह सकते हो कि आते हैं लगभग चार क्वेश्चन के आसपास।
  Approximately three to four questions can be said to come from these two topics combined, around four questions.

[03:24] सो दैट इज व्हाई दीज़ टॉपिक्स आर वेरीेंट।
  So that is why these topics are very important.

[03:26] इंफ्लेशन के अंदर बहुत सारी बातें हुई हैं पिछले एक साल के अंदर।
  There has been a lot of discussion about inflation in the past year.

[03:28] तो काफी न्यूज़ में भी है।
  So it is also quite in the news.

[03:31] तो दैट इज व्हाई हम यहां पे सबसे पहले इनफ्लेशन को डिस्कस करना यहां पे स्टार्ट करते हैं।
  So that is why we start discussing inflation here first.

[03:35] अब पहली चीज आप नोटिस करो।
  Now, the first thing you notice.

[03:37] इनफ्लेशन का मीनिंग क्या होता है?
  What is the meaning of inflation?

[03:40] देखो सिंपल भाषा में हम इसको महंगाई बोलते हैं।
  Look, in simple language, we call it inflation.

[03:43] पर पॉइंट पता क्या है?
  But do you know what the point is?

[03:46] इट इज़ द सस्टेंड राइज़ इन द जनरल प्राइस लेवल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज।
  It is the sustained rise in the general price level of goods and services.

[03:49] मतलब आपकी वस्तुएं और आपकी सर्विसेज इनके अंदर एक सस्टेंड राइज़ होना।
  Meaning, there should be a sustained rise in your goods and your services.

[03:55] सस्टेंड मतलब लगातार एक तरह की बढ़ोतरी होना।
  Sustained means a continuous increase of sorts.

[03:57] ऐसा नहीं कि बस एक दिन के लिए 2 दिन के लिए किसी चीज का दाम बढ़ गया और हम उसको इनफ्लेशन बोल देंगे।
  It's not that the price of something increased for just one or two days, and we'll call it inflation.

[04:02] नहीं यहां पर एक सर्टेन टाइम पीरियड के लिए गुड्स एंड सर्विस का अगर इनक्रीस होता है, उसको हम लोग जानते हैं इनफ्लेशन के नाम से।
  No, if there is an increase in goods and services for a certain time period, we know it by the name of inflation.

[04:12] मीनिंग सबको पता है।
  Everyone knows the meaning.

[04:15] ये बहुत ही बेसिक डेफिनेशन है आपकी इनफ्लेशन की।
  This is a very basic definition of inflation.

[04:17] डेफिनेशन है ना वो जो आपको याद रखनी है वो ये वाली डेफिनेशन है।
  The definition, you know, the one you have to remember, is this definition.

[04:19] इंफ्लेशन से आपकी करेंसी की जो परचेजिंग पावर है ना वो कम होती है।
  With inflation, the purchasing power of your currency decreases.

[04:23] इसको मैं आपको सिंपल एक एग्जांपल से एक्सप्लेन कर देता हूं।
  Let me explain this to you with a simple example.

[04:26] जैसे आप लोग नोटिस कर पा रहे होंगे।
  As you might be noticing.

[04:29] देखो जैसे मेरे पास यहां पर एक ₹200 का नोट है।
  Look, for example, I have a ₹200 note here.

[04:32] ठीक है?
  Okay?

[04:35] यह ₹200 का नोट है।
  This is a ₹200 note.

[04:38] अब समझना इस बात को।
  Now, understand this point.

[04:41] लेट्स से हम बात करते हैं अगर एप्पल्स की।
  Let's say we talk about apples.

[04:43] अगर एप्पल आज के दिन ₹100 पर केजी है।
  If apples are ₹100 per kg today.

[04:49] मान लो ₹100 प्रति केजी है।
  Suppose it's ₹100 per kg.

[04:52] एंड आगे जाके अगर यह ₹200 प्रति किलो हो जाए।
  And going forward, if it becomes ₹200 per kg.

[04:55] तो हम नॉर्मल भाषा में बोलेंगे कि यहां पे इनके दाम बढ़ रहे हैं।
  Then in normal language, we will say that their prices are increasing here.

[04:58] इनका इनक्रीस हुआ इनके प्राइस के अंदर।
  There was an increase in their prices.

[05:00] पर अगर आप जरा करेंसी के परचेजिंग पावर में देखो ना इस रुपए से आप क्या खरीद सकते हो?
  But if you look at the purchasing power of the currency, what can you buy with this rupee?

[05:03] इस करेंसी की खरीदने की क्षमता क्या है?
  What is the purchasing capacity of this currency?

[05:06] तो आप नोटिस कर पाओगे कि पहले क्या था?
  Then you will be able to notice, what was it before?

[05:08] पहले आप इस ₹200 के नोट से आप 2 किलो आप यहां पर एप्पल खरीद सकते
  Before, with this ₹200 note, you could buy 2 kg of apples here.

[05:18] पर अब क्या कर पाओगे?
  But what will you be able to do now?

[05:21] अब केवल और केवल आप 1 किलो एप्पल अब आप खरीद पाओगे।
  Now you will only be able to buy 1 kg of apples.

[05:25] तो पहले आप इस करेंसी से 2 केg एप्पल परचेस कर पा रहे थे।
  So earlier you were able to purchase 2 kg of apples with this currency.

[05:28] अब केवल आप 1 केg एप्पल यहां पे परचेस कर पाओगे।
  Now you will only be able to purchase 1 kg of apples here.

[05:32] तो हम यहां पे बोल सकते हैं कि इनफ्लेशन से क्या हुआ?
  So we can say here, what happened due to inflation?

[05:35] आपकी जो करेंसी की परचेसिंग पावर थी ना वो कम हो गई।
  The purchasing power of your currency decreased.

[05:37] पहले के मुकाबले आप यहां पे कम क्वांटिटी अमाउंट जो है वो परचेस कर पाएंगे।
  Compared to before, you will be able to purchase a smaller quantity or amount here.

[05:43] इसको बोलते हैं परचेसिंग पावर ऑफ करेंसी यहां पे कम होना।
  This is called a decrease in the purchasing power of currency.

[05:45] ठीक है?
  Okay?

[05:45] गुड गुड गुड।
  Good, good, good.

[05:49] अब इसका अपोजिट होता है आपका डिफ्लेशन।
  Now, the opposite of this is deflation.

[05:53] जब हम बात करते हैं डिफ्लेशन की तो डिफ्लेशन भी बहुत सिंपल चीज है।
  When we talk about deflation, deflation is also a very simple thing.

[05:58] इनफ्लेशन का एग्जैक्टली जो उल्टा होता है वो होता है डिफ्लेशन।
  Exactly the opposite of inflation is deflation.

[06:00] अगर हम बात करते हैं इनफ्लेशन की तो वहां पर वस्तुओं का दाम बढ़ रहा होता है।
  If we talk about inflation, then the prices of goods are increasing there.

[06:05] बट जब हम बात करते हैं डिफ्लेशन की वहां पर वस्तुओं का दाम कम हो रहा होता है।
  But when we talk about deflation, the prices of goods are decreasing there.

[06:11] समझे मेरी बात को?
  Did you understand what I'm saying?

[06:14] तो अगर आप नोटिस करोगे जब मैंने इनफ्लेशन आपको समझाया मैंने आपको बताया कि वहां पर
  So if you notice, when I explained inflation to you, I told you that there

[06:18] परचेजिंग पावर ऑफ करेंसी कम हो रही थी।
  The purchasing power of the currency was decreasing.

[06:22] राइट?
  Right?

[06:22] करेंसी की खरीदने की क्षमता कम हो रही थी।
  The purchasing power of the currency was decreasing.

[06:25] अब डिफ्लेशन में क्या होगा?
  Now what will happen in deflation?

[06:27] डिफ्लेशन में परचेजिंग पावर ऑफ करेंसी बढ़ जाएगी।
  In deflation, the purchasing power of the currency will increase.

[06:30] कैसे बढ़ जाएगी?
  How will it increase?

[06:33] क्योंकि देखो अगर वस्तुओं के दाम कम हो जाएंगे तो उस करेंसी से आप ज्यादा खरीद पाओगे।
  Because look, if the prices of goods decrease, then you will be able to buy more with that currency.

[06:36] डू यू अग्री ऑन नॉट?
  Do you agree or not?

[06:39] जैसे फॉर एग्जांपल मान लो पहले एप्पल ₹100 पर केजी थे।
  For example, suppose earlier apples were ₹100 per kg.

[06:41] अब एप्पल आपके लेट्स से ₹50 पर केजी हो गए।
  Now, let's say apples have become ₹50 per kg.

[06:45] तो इससे क्या होगा?
  So what will happen from this?

[06:47] देखो जो मैंने आपको ₹200 का नोट दिखाया ना
  Look, the ₹200 note that I showed you,

[06:50] जो मैंने आपको ₹200 का नोट दिखाया।
  the ₹200 note that I showed you.

[06:54] तो क्या होगा?
  So what will happen?

[06:54] पहले आप उससे लगभग 2 केg एप्पल खरीद सकते थे।
  Earlier you could buy approximately 2 kg of apples with it.

[06:57] अब आप लोग 4 किलो एप्पल उससे खरीद पाओगे।
  Now you will be able to buy 4 kg of apples with it.

[07:00] तो यहां पर क्या हुआ?
  So what happened here?

[07:03] आपकी करेंसी की जो खरीदने की क्षमता थी,
  The purchasing power of your currency,

[07:05] परचेजिंग पावर ऑफ करेंसी थी, अब यहां पे बढ़ जाएगी।
  the purchasing power of currency, will now increase here.

[07:08] ये फर्क है आपका इनफ्लेशन और डिफ्लेशन में।
  This is the difference between inflation and deflation.

[07:10] एक बार रिवाइज़ करेंगे।
  Let's revise once.

[07:13] इनफ्लेशन में क्या होता है?
  What happens in inflation?

[07:13] आप लोग मुझे बताओ।
  You tell me.

[07:14] परचेसिंग पावर करेंसी की कम होती है या बढ़ती है?
  Does the purchasing power of currency decrease or increase?

[07:16] इस क्वेश्चन का आंसर करो।
  Answer this question.

[07:19] इनफ्लेशन के अंदर परचेजिंग पावर करेंसी की बढ़ेगी या कम होगी?
  Will the purchasing power of currency increase or decrease within inflation?

[07:21] सिंपल है।
  It's simple.

[07:24] इनफ्लेशन में परचेसिंग पावर ऑफ़ करेंसी कम होगी।
  In inflation, the purchasing power of currency will decrease.

[07:26] डिफ्लेक्शन के अंदर परचेजिंग पावर ऑफ करेंसी बढ़ जाएगी।
  Within deflation, the purchasing power of currency will increase.

[07:31] गॉट इट?
  Got it?

[07:34] ठीक है? ठीक है। ठीक है।
  Okay? Okay. Okay.

[07:36] ऐसे ही एक टर्म आता है हमारा डिसइफ्लेशन।
  Similarly, a term comes up, which is disinflation.

[07:38] डिसइफ्लेशन में क्या होगा?
  What will happen in disinflation?

[07:38] देखो डिसइफ्लेशन और डिफ्लेशन में बिल्कुल कंफ्यूज नहीं होना।
  Look, do not get confused between disinflation and deflation at all.

[07:42] बहुत सारे बच्चे डिफ्लेशन और डिसइफ्लेशन में कंफ्यूज हो जाते हैं।
  Many children get confused between deflation and disinflation.

[07:45] पर आपको नहीं होना।
  But you should not.

[07:47] डिफ्लेशन में वस्तुओं का दाम कम होता है।
  In deflation, the prices of goods decrease.

[07:50] बट डिसइफ्लेशन में दाम कम नहीं होता।
  But in disinflation, the price does not decrease.

[07:50] ध्यान से सुनना।
  Listen carefully.

[07:52] मान लो यहां पे लेट्स से पहले एक वस्तु का दाम ₹100 था।
  Suppose here, let's say, the price of an item was ₹100 before.

[07:55] ठीक है?
  Okay?

[07:59] आगे जाके मान लो इसका दाम हो गया लेट्स से 130।
  Going forward, suppose its price became, let's say, 130.

[08:01] ठीक है?
  Okay?

[08:03] या मान लो 120।
  Or suppose 120.

[08:03] ओके?
  Okay?

[08:06] तो पहली चीज मैं आपसे पूछना ये चाह रहा हूं कि 100 से 120 होने में कितने परसेंट का इनक्रीस है?
  So the first thing I want to ask you is, what is the percentage increase from 100 to 120?

[08:09] आप बहुत आराम से इसको बोल सकते हो।
  You can say this very easily.

[08:12] आप बोलोगे सर 100 से अगर आप 120 जा रहे हो ना तो यह 20% का इनक्रीस हुआ।
  You will say, sir, if you are going from 100 to 120, then this is a 20% increase.

[08:17] दिस इज़ एन
  This is an

[08:20] इनक्रीस ऑफ़ 20%.
  An increase of 20%.

[08:22] बट अगर आप इसके आगे चलोगे आप देखोगे कि मान लो लेट्स से आगे जाकर 120 वाली वस्तु ₹132 की होगी।
  But if you go further, you will see that, let's say, an item worth 120 will be ₹132 in the future.

[08:28] अब आप यहां पे क्या बोलोगे?
  Now what will you say here?

[08:31] आप यहां पे बोलोगे कि सर यहां पर 10% का इनक्रीस हुआ।
  You will say here that sir, there was a 10% increase here.

[08:35] हियर इज़ एन इंक्रीस ऑफ़ 10%.
  Here is an increase of 10%.

[08:38] अब प्लीज सुनना मेरी बात को।
  Now please listen to me.

[08:41] वस्तुओं के दाम तो बढ़ ही रहे हैं।
  The prices of goods are indeed increasing.

[08:44] 100 वाली चीज़ 120 की होगी, 120 वाली चीज़ 132 की होगी।
  An item worth 100 will be 120, an item worth 120 will be 132.

[08:46] दाम कम नहीं हुए।
  Prices have not decreased.

[08:46] दाम तो बढ़े ही बढ़े।
  Prices have definitely increased.

[08:49] पर उनका जो रेट था वो पहले रेट 20% था।
  But the rate they had was previously 20%.

[08:53] अब वो रेट कम हो के 10% हो चुका है।
  Now that rate has reduced to 10%.

[08:56] यानी कि महंगाई तो बढ़ रही है पर उस महंगाई के बढ़ने की रफ्तार पहले के मुकाबले कम हो चुकी है।
  Meaning, inflation is increasing, but the speed of that inflation's increase has reduced compared to before.

[08:58] पहले दाम 20% से बढ़ रहे थे।
  Previously, prices were increasing by 20%.

[09:01] अब दाम जो है वो 10% से बढ़ रहे हैं।
  Now, prices are increasing by 10%.

[09:04] इसी को बोलते हैं हम डिसइफ्लेशन।
  This is what we call disinflation.

[09:06] हियर इज़ अ रिडक्शन इन द रेट ऑफ इनफ्लेशन।
  Here is a reduction in the rate of inflation.

[09:10] रिडक्शन है, कमी है रेट ऑफ इनफ्लेशन में पर पॉजिटिव इनफ्लेशन है।
  There is a reduction, a decrease in the rate of inflation, but it is positive inflation.

[09:13] दाम बढ़ ही रहे हैं।
  Prices are indeed increasing.

[09:16] इसको हम बोलेंगे डिसइफ्लेशन।
  We will call this disinflation.

[09:18] ठीक है?
  Okay?

[09:20] तो इससे क्या होगा? परचेजिंग पावर
  So what will happen from this? Purchasing power

[09:22] करेंसी की बढ़ेगी या कम होगी? आप लोग बताओ
  Will the currency increase or decrease? You all tell me.

[09:24] क्या लगता है? डिसइफ्लेशन में परचेजिंग
  What do you think? In disinflation, purchasing

[09:26] पावर करेंसी की कम होगी या बढ़ेगी?
  power of the currency will decrease or increase?

[09:28] देखो मैंने आपको बोला डिसइनफ्लेशन है तो
  Look, I told you it's disinflation, so

[09:31] इनफ्लेशन ही ना। डिसइफ्लेशन में दाम तो
  it's inflation. In disinflation, prices are

[09:33] बढ़ ही रहे हैं। बस बढ़ने की रफ्तार कम हो
  still increasing. It's just that the speed of increase is reducing.

[09:35] रही है। और जब वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे तो
  And when the prices of goods increase, then

[09:38] भाई ये जो ₹200 का नोट था कहां गया? ये
  brother, where did this ₹200 note go? With this

[09:40] ₹200 के नोट से अब आप कम वस्तुएं खरीद
  ₹200 note, you will now be able to buy fewer goods

[09:43] पाओगे क्योंकि दाम तो बढ़ ही रहे हैं। सो
  because prices are indeed increasing. So

[09:45] दैट इज व्हाई डिसइफ्लेशन के अंदर क्या
  that is why inside disinflation what

[09:47] होता है? देयर इज़ अ रिडक्शन इन द परचेजिंग
  happens? There is a reduction in the purchasing

[09:50] पावर ऑफ करेंसी।
  power of currency.

[09:52] तीनों पॉइंट्स क्लियर हैं? इनफ्लेशन,
  Are all three points clear? Inflation,

[09:54] डिफ्लेशन, डिसइफ्लेशन।
  deflation, disinflation.

[09:57] यस गुड गुड। ठीक है? अब ऐसे ही एक वर्ड
  Yes, good, good. Okay? Now similarly a word

[10:00] आता है रिफ्लेशन का। रिफ्लेशन में क्या
  comes of reflation. What happens in reflation?

[10:02] होता है? रिफ्लेशन में आपके दाम वापस बढ़ने
  In reflation, your prices start increasing again

[10:05] लग जाते हैं आफ्टर डिफ्लेशन। मान लो
  after deflation. Suppose

[10:07] डिफ्लेशन में दाम कम हो रहे थे। वापस दाब
  in deflation prices were decreasing. Again the prices

[10:09] बढ़ने लग गए। उसको हमने बोल दिया क्या?
  started increasing. What did we call that?

[10:11] रिफ्लेशन। एक सिंपल एग्जांपल मैं आपको दे
  Reflation. I am giving you a simple example.

[10:13] रहा हूं। इधर देखना। एक सिंपल एक डायग्राम
  Look here. We will summarize it in a simple diagram.

[10:15] में हम इसको समराइज कर लेंगे। देखो मान लो
  Look, suppose

[10:18] आपके पहले दाम थे लेट्स से ₹100। ठीक है?
  your prices were earlier, let's say ₹100. Okay?

[10:21] मैंने कहा मान लो 100 से ये दाम हो गया
  I said suppose from 100 this price became

[10:23] 120। ठीक है?
  120. Okay?

[10:23] तो आप इसको सिंपल भाषा में इनफ्लेशन बोल दोगे कि हां सर यहां पे महंगाई हुई है।
  So you would simply call this inflation, saying yes sir, inflation has occurred here.

[10:28] ठीक है?
  Okay?

[10:28] ओके।
  Okay.

[10:28] ओके।
  Okay.

[10:28] फाइन।
  Fine.

[10:30] फाइन फाइन।
  Fine, fine.

[10:33] ठीक है।
  Okay.

[10:33] फिर मान लो ये दाम जो था 120 वाला ये हो गया मान लो 132 का।
  Then suppose this price, which was 120, became, say, 132.

[10:35] अब आप पता क्या बोलोगे?
  Now, what will you say?

[10:38] आप बोलोगे सर देखो यहां पर दाम बढ़ रहे थे 20% से।
  You will say, sir, look, here the prices were increasing by 20%.

[10:40] यहां पर दाम बढ़े हैं 10% से।
  Here the prices have increased by 10%.

[10:44] तो एक्चुअल में यहां पे पता क्या हुआ?
  So actually, what happened here?

[10:46] पहले के मुकाबले यहां पर इनफ्लेशन के बढ़ने की रफ्तार कम हो गई है।
  Compared to before, the rate of increase in inflation here has decreased.

[10:50] इसको हम डिसइफ्लेशन का नाम दे देंगे।
  We will call this disinflation.

[10:52] ठीक है?
  Okay?

[10:52] फिर आगे मान लो क्या होता है?
  Then, suppose what happens next?

[10:56] इसके बाद क्या होता है?
  What happens after this?

[10:58] मान लो 132 वाले जो प्रोडक्ट था या इन जनरल प्राइसेस थे मान लो अब वो 115 के हो गए हैं।
  Suppose the product that was 132, or in general the prices, have now become 115.

[11:00] अब आप क्या बोलोगे?
  Now what will you say?

[11:03] पहले के मुकाबले दाम कम हो रहे हैं।
  Prices are decreasing compared to before.

[11:05] तो दैट इज व्हाई यह जो टर्म यहां पे आप इस्तेमाल करोगे उसको हम बोलेंगे डिफ्लेशन।
  So that is why this term you will use here, we will call it deflation.

[11:08] क्योंकि यहां पर प्राइसेस नीचे आ रहे हैं।
  Because prices are coming down here.

[11:10] एंड अगर मान लो इसके बाद क्या होता है?
  And suppose what happens after this?

[11:12] इसके बाद मान लो वापस से दाम बढ़ने लग गया 115 से 125 हो गया तो इसको हम नाम देंगे रिफ्लेशन
  After this, suppose prices start increasing again, from 115 to 125, then we will call this reflation.

[11:24] का।
  Ka.

[11:27] जब भी कभी दाम बढ़ने दाम कम होने के बाद वापस दाम बढ़ने लगे उसको हम रिफ्लेशन का नाम देंगे।
  Whenever prices start rising again after falling, we will call it reflation.

[11:30] ठीक है?
  Okay?

[11:32] इंक्रीज इन प्राइसेस आफ्टर डिफ्लेशन उसको हम बोलते हैं क्या?
  An increase in prices after deflation, what do we call it?

[11:34] रिफ्लेशन।
  Reflation.

[11:37] तो ये चार वर्ड्स मैंने आपको अभी तक समझाए।
  So, these four words I have explained to you so far.

[11:39] इनफ्लेशन, डिसइफ्लेशन, डिफ्लेशन, रिइफ्लेशन।
  Inflation, disinflation, deflation, reflation.

[11:42] क्या चारों कांसेप्ट्स आपको यहां पे क्लियर हैं या नहीं है?
  Are all four concepts clear to you here or not?

[11:44] चारों पॉइंट्स आपको पूरी तरह से क्लियर हुए या नहीं हुए?
  Were all four points completely clear to you or not?

[11:46] यस और नो।
  Yes or no.

[11:50] यस और नो।
  Yes or no.

[11:53] चारों पॉइंट्स क्लियर है सबको?
  Are all four points clear to everyone?

[11:55] इनफ्लेशन,
  Inflation,

[11:57] डिफ्लेशन, डिसइफ्लेशन, रिफ्लेशन।
  Deflation, disinflation, reflation.

[12:01] गॉट इट?
  Got it?

[12:03] गुड गुड गुड।
  Good, good, good.

[12:03] ठीक है।
  Okay.

[12:03] ठीक है।
  Okay.

[12:06] आगे बढ़ते रहेंगे।
  We will keep moving forward.

[12:08] फिर अब सबसे बड़ा एक चीज आती है कि सर आखिर इनफ्लेशन होता क्यों है?
  Then, the biggest thing that comes up is, sir, why does inflation happen?

[12:11] देखो इनफ्लेशन के पीछे कारण कई हो सकते हैं।
  Look, there can be many reasons behind inflation.

[12:14] देयर कैन बी मेनी रीज़ंस बिहाइंड इनफ्लेशन।
  There can be many reasons behind inflation.

[12:16] पर मेन जो काम है ना वो है आपका डिमांड और सप्लाई का मिसमैच।
  But the main issue, you see, is the mismatch between demand and supply.

[12:19] जब भी कभी डिमांड और सप्लाई के
  Whenever there is a mismatch in demand and supply

[12:25] बीच में एक मिसमैच होगा ना तब आपको इनफ्लेशन होती हुई देखने को मिल सकती है।
  There will be a mismatch in between, then you might see inflation happening.

[12:31] ध्यान से सुनना मेरी बात और इसको आप यहां पे याद कर लेना।
  Listen to me carefully and remember this here.

[12:33] ये सेम बात जो है आगे जब मैं आपको एक्सचेंज रेट पढ़ाऊंगा ना मैं तब दोबारा से इस बात को डिस्कस करूंगा।
  This same thing, when I teach you about exchange rates later, I will discuss this again.

[12:41] इस बात को आप नोटिस करिएगा।
  You will notice this.

[12:41] होता पता है क्या है?
  Do you know what happens?

[12:44] जैसे अगर मान लो किसी चीज़ की डिमांड बढ़ती है ना किसी चीज़ की डिमांड बढ़ती है।
  For example, if the demand for something increases, the demand for something increases.

[12:53] ठीक है ना?
  Okay?

[12:53] तो उस केस में क्या होता है?
  So what happens in that case?

[12:56] बहुत सारे लोग उसको परचेस करना चाहते हैं।
  Many people want to purchase it.

[12:58] समझ रहे हो?
  Are you understanding?

[12:58] अगर मान लो मैं बोल रहा हूं कि यार मैं मान लो लेट्स से लेट्स से मतलब जैसे कोई भी चीज है।
  Suppose I am saying that, well, suppose, let's say, let's say, meaning, like anything.

[13:06] मान लो घड़ी है।
  Suppose it's a watch.

[13:06] ये घड़ी की मान लो डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है।
  Suppose the demand for this watch has increased a lot.

[13:08] बहुत सारे लोग इस घड़ी को खरीदना चाहते हैं।
  Many people want to buy this watch.

[13:10] पर घड़ी तो एक ही है।
  But there is only one watch.

[13:11] है ना?
  Right?

[13:11] बहुत सारे लोग इस घड़ी को खरीदना चाहेंगे पर खरीदने वाले बहुत सारे लोग हैं।
  Many people will want to buy this watch, but there are many people to buy it.

[13:16] उस केस में क्या होगा?
  What will happen in that case?

[13:18] आपको नोटिस करने को मिला कि सप्लाई तो इतनी ही है पर डिमांड लोगों ने बहुत ज्यादा करी।
  You will notice that the supply is only this much, but people have demanded a lot.

[13:21] और जबजब ऐसा होगा डिमांड बढ़ने से आपके जो प्राइसेस हैं वो आपको
  And whenever this happens, due to increased demand, your prices will

[13:27] यहां पे बढ़ते हुए देखने को मिलेंगे।
  Here we will see an increase.

[13:29] सिंपल लॉजिक है।
  It's simple logic.

[13:31] जिस चीज की डिमांड ज्यादा होती है उसके भाव ऑटोमेटिकली बहुत ज्यादा हो जाते हैं।
  The price of something that has more demand automatically becomes very high.

[13:36] जो वस्तुएं जो लोग बहुत ज्यादा डिमांड में होते हैं ना उनके भाव भी उतने ही ज्यादा होते हैं।
  The prices of goods or people who are in high demand are also that much higher.

[13:37] ठीक है?
  Okay?

[13:40] ऑन द अदर हैंड अगर मैं बात करूं यहां पे सप्लाई की।
  On the other hand, if I talk about supply here.

[13:43] अब सप्लाई में भी समझना।
  Now, understand this in supply too.

[13:46] ठीक है?
  Okay?

[13:46] अब आपको मैं एग्जांपल देता हूं।
  Now I will give you an example.

[13:48] कई बार आप लोगों ने नोटिस किया होगा।
  Many times you all must have noticed.

[13:51] जैसे मेरे हाथ में ये प्याज है।
  Like this onion in my hand.

[13:53] एक ठीक है ना?
  One, okay?

[13:56] आप लोगों ने आप लोगों ने कई बार नोटिस किया होगा।
  You all, you all must have noticed many times.

[13:58] जैसे ये प्याज है।
  Like this onion.

[14:01] अचानक कई बार ना प्याज के दाम कम हो जाते हैं या बढ़ जाते हैं कई बार।
  Suddenly, many times the price of onions decreases or increases many times.

[14:03] सोचा है क्यों बढ़ जाते हैं या कम हो जाते हैं?
  Have you thought about why they increase or decrease?

[14:05] ये प्याज का जो दाम होता है ना ये मोस्टली सप्लाई ओरिएंटेड होता है।
  The price of this onion is mostly supply-oriented.

[14:07] समझना कैसे?
  Understand how?

[14:09] देखो प्याज खाने वाले तो उतने ही थे।
  Look, the people who eat onions were the same.

[14:12] डिमांड तो प्याज की उतनी ही है।
  The demand for onions is the same.

[14:14] पर कहीं ना कहीं अगर मान लो फसल खराब हो जाए उस केस में क्या हो सकता है?
  But somewhere, if suppose the crop gets damaged, what can happen in that case?

[14:16] उस केस में आपके प्याज की जो सप्लाई है वो कम हो सकती है।
  In that case, the supply of your onions can decrease.

[14:21] एंड अगर मान लो इस प्याज की सप्लाई कम हो गई पर खरीदने वाले बहुत सारे लोग हैं।
  And suppose the supply of this onion decreased, but there are many people buying it.

[14:24] नॉर्मल डिमांड है पर उसकी सप्लाई बहुत कम
  There is normal demand, but its supply is very low.

[14:29] उस केस में हम लोग ज्यादा पे करने के लिए रेडी हो जाएंगे।
  In that case, we will be ready to pay more.

[14:33] तो वहां पर क्या होगा?
  So what will happen there?

[14:35] सप्लाई कम होने से भी आपके जो प्राइसेस हैं हमें वो बढ़ते हुए देखने को मिलेंगे।
  Even with reduced supply, we will see your prices increase.

[14:37] तो आपको ध्यान पता है क्या रखना है?
  So do you know what you need to keep in mind?

[14:39] आपको ध्यान ये रखना है कि डिमांड अगर बढ़ेगी तो वहां पर भी दाम बढ़ेंगे और अगर आपकी सप्लाई कम होगी तो वहां पर भी आपको यहां पर प्राइसेस आपको बढ़ते हुए देखने को मिलेंगे।
  You need to keep in mind that if demand increases, prices will rise there, and if your supply decreases, you will also see prices increase here.

[14:51] ठीक है?
  Okay?

[14:51] तो डिमांड और सप्लाई के ऊपर बेस्ड है।
  So it is based on demand and supply.

[14:54] और जब हम बात करते हैं यहां पे डिमांड की तो ऐसी इनफ्लेशन जो आपकी डिमांड वाली साइड की वजह से होती है, इसको हम नाम देते हैं डिमांड पुल इनफ्लेशन।
  And when we talk about demand here, inflation that occurs due to your demand side is called demand-pull inflation.

[15:05] और यहां पर जो हमारी सप्लाई की वजह से बढ़ती है इसको हम लोग कॉस्ट पुश इनफ्लेशन भी बोल सकते हो या फिर आप इसको सप्लाई शॉक इनफ्लेशन का भी नाम आप यहां पे दे सकते हो।
  And what increases due to our supply here can be called cost-push inflation, or you can also give it the name of supply shock inflation.

[15:15] यू कैन कॉल इट एज कॉस्ट पुश इनफ्लेशन और द सप्लाई शॉक इनफ्लेशन।
  You can call it as cost-push inflation or the supply shock inflation.

[15:21] क्लियर?
  Clear?

[15:23] ये बात ठीक है।
  This is correct.

[15:23] हां, स्टक इनफ्लेशन भी आगे आएगा जागृति।
  Yes, stagflation will also come later, Jagriti.

[15:25] आप चिंता ना करो।
  Don't worry.

[15:27] सारी चीजें आएंगी यहां पे।
  Everything will come here.

[15:27] तो पॉइंट आप देखो कि
  So see the point that

[15:29] डिमांड फुल इनफ्लेशन फिर क्या बना? सर
  What then becomes demand-pull inflation? Sir

[15:31] जबजब डिमांड बढ़ेगी उससे प्राइस बढ़ना इज कॉल्ड एज डिमांड फुल इनफ्लेशन।
  Whenever demand increases, the resulting price increase is called demand-pull inflation.

[15:35] जैसे फॉर एग्जांपल अगर मान लो मनी सप्लाई बढ़ गई।
  For example, suppose the money supply increases.

[15:37] देखो आगे हम ना पढ़ेंगे एक्सपेंशनरी मॉनिटरी पॉलिसी के बारे में।
  Look, we will read about expansionary monetary policy later.

[15:40] आप लोगों को पता होगा एक्सपेंशनरी पॉलिसी।
  You people will know about expansionary policy.

[15:42] थोड़ा बहुत तो आपको आईडिया होगा।
  You will have some idea.

[15:44] एक्सपेंशनरी पॉलिसी में पता क्या होता है?
  Do you know what happens in expansionary policy?

[15:46] जैसे फॉर एग्जांपल अगर आरबीआई रेपो रेट कम कर दे।
  For example, if the RBI reduces the repo rate.

[15:48] ठीक है?
  Okay?

[15:52] आप लोगों को मैं पढ़ाऊंगा रेपो रेट भी आगे।
  I will teach you about the repo rate later.

[15:54] पर आपको बेसिक आईडिया पता होगा कि जब आरबीआई रेपो रेट कम कर देती है तो लोगों तक पैसा सस्ते रेट में पहुंच जाता है।
  But you will have a basic idea that when the RBI reduces the repo rate, money reaches people at a cheaper rate.

[15:59] लोगों तक पैसा आसानी से पहुंचता है।
  Money reaches people easily.

[16:02] लोगों के हाथों में पैसा बढ़ जाता है।
  The money in people's hands increases.

[16:04] लोगों के हाथों में पैसा होगा वो कहीं ना कहीं ज्यादा डिमांड करेंगे।
  With money in their hands, people will demand more somewhere.

[16:07] तो पॉइंट पता है क्या है कि जबजब एक्सपेंशनरी पॉलिसी होती है या मनी सप्लाई बढ़ती है उससे आपका कॉस्ट सॉरी उससे आपका डिमांड फुल इनफ्लेशन बढ़ता है क्योंकि लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा होगा।
  So, do you know what the point is? Whenever there is an expansionary policy or the money supply increases, your cost, sorry, your demand-pull inflation increases because people will have more money in their hands.

[16:20] लोग उन वस्तुओं की ज्यादा डिमांड करेंगे।
  People will demand more of those goods.

[16:22] सिमिलरली अगर मान लो सरकार अपना खर्चा बढ़ा देती है।
  Similarly, suppose the government increases its expenditure.

[16:25] है ना?
  Right?

[16:27] या आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी ऐसी है जहां पर
  Or if the RBI's monetary policy is such that

[16:29] वो लोगों के हाथ में पैसा देने की कोशिश कर रहे हैं तो लोग डिमांड ज्यादा करेंगे वहां पर उन वस्तुओं को।
  They are trying to put money in people's hands, so people will demand those goods more.

[16:35] लोगों की सैलरी अगर बढ़ रही है तो कहीं ना कहीं लोग ज्यादा डिमांड करेंगे।
  If people's salaries are increasing, then somewhere people will demand more.

[16:37] समझे मेरी बात को?
  Did you understand what I said?

[16:39] तो कोई भी चीज जो आपकी डिमांड को इंपैक्ट कर रही है ना वो डिमांड पुल इनफ्लेशन के कॉजेस के अंदर आ जाएगी।
  So anything that impacts your demand will come under the causes of demand-pull inflation.

[16:43] ठीक है?
  Okay?

[16:43] पहले मान लो मैं 10,000 कमाता था।
  Earlier, suppose I used to earn 10,000.

[16:48] अगर मैं अब मान लो 15,000 कमाने लग जाऊंगा।
  If I now start earning, say, 15,000.

[16:50] कहीं ना कहीं मेरी डिमांड बढ़ती हुई देखने को मिलेगी।
  Somewhere, my demand will be seen increasing.

[16:51] डिमांड बढ़ेगी।
  Demand will increase.

[16:51] उससे कहीं ना कहीं वस्तुओं के दाम जो हैं वो भी हमें बढ़ते हुए देखने को मिल जाएंगे।
  Due to that, somewhere, the prices of goods will also be seen increasing.

[16:56] गुड।
  Good.

[16:56] हां बिल्कुल परचेसिंग पावर बढ़ गया।
  Yes, absolutely, purchasing power has increased.

[16:59] बिल्कुल ठीक बात है।
  Absolutely correct.

[17:00] परचेसिंग पावर का यहां पे इनक्रीस होना।
  The increase in purchasing power here.

[17:07] ठीक है?
  Okay?

[17:07] दूसरा कांसेप्ट इसमें है।
  There is another concept in this.

[17:10] मतलब इसमें आप ऐसे भी देख सकते हो अगर मनी सप्लाई ज्यादा होगी।
  Meaning, you can also see it this way: if the money supply is high.

[17:14] मनी सप्लाई ज्यादा होने का मतलब गुड्स एंड सर्विस का लोग ज्यादा डिमांड करेंगे और उससे आपके वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे और प्राइस लेवल बढ़ना ही आपका इनफ्लेशन होता है।
  High money supply means people will demand more goods and services, and due to that, the prices of your goods will increase, and the increase in the price level is your inflation.

[17:22] ये हो गया हमारा डिमांड फुल इनफ्लेशन।
  This is our demand-pull inflation.

[17:24] ऐसे ही होता है हमारा कॉस्ट पुश या जिसको हम लोग सप्लाई शॉक इनफ्लेशन के नाम से भी जानते हैं।
  Similarly, we have cost-push or what we also know as supply shock inflation.

[17:28] अब इसमें क्या होगा?
  Now, what will happen in this?

[17:28] या तो सप्लाई कम
  Either the supply decreases

[17:31] हो जाएगी या फिर कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन बढ़ जाएगा।
  It will happen or the cost of production will increase.

[17:33] देखो जैसे फॉर एग्जांपल मैंने बोला कि मेरे हाथ में एक घड़ी है।
  Look, for example, I said that I have a watch in my hand.

[17:36] अब इस घड़ी को बनाने के लिए रॉ मटेरियल्स चाहिए।
  Now, to make this watch, raw materials are needed.

[17:38] इस घड़ी को बनाने के लिए लेबर चाहिए होगी।
  Labor will be needed to make this watch.

[17:40] अगर मान लो कल को लेबर के वेजेस बढ़ गए।
  Suppose tomorrow the wages of labor increase.

[17:43] अगर लेबर ज्यादा सैलरी डिमांड कर रही है।
  If the labor is demanding more salary.

[17:46] वो स्ट्राइक पे बैठ के नहीं है कि हमारी मांगे पूरी करो।
  They are not sitting on strike saying fulfill our demands.

[17:48] हमें ज्यादा सैलरी दो।
  Give us more salary.

[17:49] तो उस केस में हम अगर उनकी सैलरी बढ़ाएंगे तो क्या इस घड़ी को बनाने का जो कॉस्ट है वो भी हमें बढ़ता हुआ नहीं देखने को मिलेगा।
  So in that case, if we increase their salary, won't we see the cost of making this watch also increasing?

[17:51] बिल्कुल देखने को मिलेगा।
  We will definitely see it.

[17:54] तो उससे आपका कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन बढ़ जाएगा।
  So your cost of production will increase because of that.

[17:57] कच्चे तेल कच्चे मटेरियल्स जो होते हैं रॉ मटेरियल्स होते हैं जो उनको यहां पे बना मतलब अगर वो महंगे हो जाएंगे तो ऑटोमेटिकली ये घड़ी भी महंगी हो जाएगी।
  Crude oil, raw materials, whatever they are, if they become expensive, then automatically this watch will also become expensive.

[17:58] तो कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन बढ़ जाए।
  So the cost of production will increase.

[18:00] ठीक है?
  Okay?

[18:02] कॉस्ट साइड के ऊपर यहां पे देखना है।
  We have to look at the cost side here.

[18:04] कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन अगर बढ़ जाए तो यहां पर हमें इसके मतलब दाम देखने को बढ़ते हुए देखने को मिलेंगे।
  If the cost of production increases, then we will see its prices increasing here.

[18:06] इवन जीएसटी रेट्स का बढ़ जाना।
  Even the increase in GST rates.

[18:07] देखो ध्यान से सुनो।
  Listen carefully.

[18:09] जैसे कई बार अभी जैसे मोदी जी ने थोड़े दिन पहले आए थे।
  Like many times, just recently Modi Ji came.

[18:11] आई थिंक सप्टेंबर में आए थे मोदी जी हमारे सामने।
  I think Modi Ji came before us in September.

[18:13] तब उन्होंने बोला था कि यार हम जीएसटी को कम कर रहे हैं।
  Then he had said that, hey, we are reducing GST.

[18:15] और जीएसटी कम होने का फायदा हमें वस्तुओं के
  And the benefit of GST reduction to us for goods

[18:31] दाम कम होते हुए देखने को मिला।
  We saw prices come down.

[18:33] पर अगर जीएसटी बढ़ा दिया जाए किसी चीज के ऊपर, तो ऑटोमेटिकली सर वो चीज महंगी हो जाएगी।
  But if GST is increased on something, then automatically sir, that thing will become expensive.

[18:38] तो वो भी आपका कॉस्ट पुश इनफ्लेशन के अंदर ही आती है।
  So that also comes under your cost-push inflation.

[18:40] तो इस तरह से आपको ध्यान रखना है कि एक होता है आपका डिमांड पुल इनफ्लेशन, एक होता है आपका कॉस्ट पुश इनफ्लेशन।
  So in this way, you have to keep in mind that there is your demand-pull inflation, and there is your cost-push inflation.

[18:47] आई थिंक ये दोनों बातें आपको यहां पे पता हैं।
  I think you know both these things here.

[18:49] ठीक है?
  Okay?

[18:49] इज इट फाइन टिल हियर?
  Is it fine till here?

[18:52] ठीक है?
  Okay?

[18:52] अभी थोड़ी देर में क्वेश्चंस आएंगे बहुत सारे।
  Many questions will come in a little while.

[18:55] तो इसलिए ध्यान से सुन लो सारे।
  So listen carefully everyone.

[18:57] ठीक है?
  Okay?

[18:57] एक होता है स्ट्रक्चर इन्फ्लेशन।
  One is structural inflation.

[19:00] अगर सरकार की कुछ पॉलिसीज की वजह से जैसे फॉर एग्जांपल अगर हमारे पास अच्छी सड़कें नहीं है, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, अच्छा स्टोरेज नहीं है तो क्या होगा ना हम लोग कभी चीजों को मैनेज नहीं कर पाएंगे।
  If due to some government policies, for example, if we do not have good roads, good infrastructure, good storage, then what will happen is we will never be able to manage things.

[19:11] हम उनकी सप्लाई प्रॉपर इंश्योर नहीं कर पाएंगे।
  We will not be able to ensure their proper supply.

[19:12] तो कई बार सरकार की नीतियां ही कुछ ऐसी होती हैं कि हमने प्रॉपर अपना इकॉनमी के अंदर जो स्ट्रक्चर है उसको ही प्रॉपर हमने नहीं डेवप किया हुआ।
  So many times, government policies are such that we have not properly developed the structure within our economy.

[19:21] ऐसे इनफ्लेशन को हम यहां पे स्ट्रक्चर इनफ्लेशन का नाम दे देते हैं।
  We call such inflation structural inflation here.

[19:24] खासकर ना जैसे मान लो अगर सड़कें टूटी हुई हैं, नेगेटिविटी अच्छी नहीं है, वहां पर उनके कॉस्ट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन बढ़ जाएगी।
  Especially, for instance, if the roads are broken, the negativity is not good, their cost of transportation will increase there.

[19:30] एंड उससे जो इनफ्लेशन होता है उसको हम लोग
  And the inflation that happens from that, we

[19:32] स्ट्रक्चर इनफ्लेशन का नाम यहां पे देते हैं।
  We give the structure inflation a name here.

[19:34] बाकी आप लोग जानते होंगे कि हमारा जो इनफ्लेशन का टारगेट है वो कितना है?
  Otherwise, you all might know what our inflation target is?

[19:37] दैट इज़ 4 + - 2%.
  That is 4 + - 2%.

[19:39] ठीक है?
  Okay?

[19:44] 4 + - 2% यहां पे इसको हम हमारा टारगेट होता है।
  4 + - 2% here, this is our target.

[19:48] ठीक है?
  Okay?

[19:49] अब इसमें पहले मैं आपको एक्सप्लेन कर देता हूं थोड़ा सा।
  Now, first, let me explain a little bit.

[19:55] ये 4 + - 2% वाला कांसेप्ट।
  This 4 + - 2% concept.

[19:57] देखो होता पता क्या है यहां पे कि जब हम बात करते हैं हमारे इनफ्लेशन के टारगेट की
  Look, what happens here is that when we talk about our inflation target,

[20:00] तो प्लीज सुनना यहां पे ध्यान से जो हम इनफ्लेशन के टारगेट की जब हम बात करते हैं ना
  So please listen carefully here, when we talk about the inflation target,

[20:02] तो हमारा जो इनफ्लेशन का टारगेट है वो आप सब लोग जानते होंगे।
  then our inflation target is something you all must know.

[20:04] हमारा इनफ्लेशन का टारगेट जो है वो क्या है?
  What is our inflation target?

[20:06] 4 + - 2% राइट?
  4 + - 2% right?

[20:08] अब इसमें पता क्या है?
  Now, what's the thing about this?

[20:12] हमारा आरबीआई एक्ट 1934 हमने अमेंड किया।
  We amended our RBI Act 1934.

[20:15] उसका आप सेक्शन 45 ZA आप देखिए।
  Look at its Section 45 ZA.

[20:18] तो पहली बात तो यह एक स्टचटरी हमने यहां पर इंटरवेंशन किया।
  So, firstly, we made a statutory intervention here.

[20:22] आरबीआई एक्ट के अंदर हमने बदलाव किया।
  We made changes within the RBI Act.

[20:23] एंड हमने यहां पे बोला कि भाई हमारे पास ना एक टारगेट होना चाहिए इनफ्लेशन का।
  And we said here that we must have an inflation target.

[20:26] वो टारगेट क्या होगा?
  What will that target be?

[20:29] वो
  That

[20:33] टारगेट होगा 4 + - 2%। क्या होगा टारगेट?

[20:38] 4 + - 2%। ये जो 4 + - 2% है ना, इसी को

[20:43] हम नाम देते हैं फ्लैक्सिबल इनफ्लेशन

[20:46] टारगेटिंग का। क्या नाम देते हैं?

[20:48] फ्लैक्सिबल इनफ्लेशन टारगेटिंग का।

[20:52] सर फ्लैक्सिबल क्यों? क्योंकि यहां पे हम

[20:54] एक फिक्स टारगेट नहीं लेके चल रहे। हमने

[20:56] एक रेंज दे रखी है 4 + - 2 की कि 4% होना

[20:59] चाहिए पर 2% ऊपर और 2% नीचे भी जा सकता

[21:02] है। यानी कि ये जो नंबर होना चाहिए ये 2%

[21:05] से लेकर 6% के बीच में होना चाहिए। एक तरह

[21:08] से आप कह सकते हो दैट 2% इज़ द लोअर

[21:11] टॉलरेंस लिमिट एंड 6% इज़ द अप्पर टॉलरेंस

[21:15] लिमिट। और यह जो हमें रिकमेंडेशन दिया था

[21:17] ना यह दरअसल में उर्जित पटेल कमेटी ने

[21:19] दिया था कि हमारे पास यह सब चीजें होनी

[21:22] चाहिए। तो उर्जित पटेल कमेटी इसके लिए

[21:23] यहां पे रिस्पांसिबल है। ठीक है? अब इसी

[21:27] चीज को मेंटेन करने के लिए हमने सेक्शन 45

[21:30] जेडबी ऑफ़ आरबीआई एक्ट हमें देखने को मिलता

[21:32] है। जिसके माध्यम से हमने सिक्स मेंबर्ड

[21:35] मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी हमने बनाई। छह मेंबर

[21:37] की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी है जिसमें आप

[21:39] नोटिस कर पाओगे जिसमें आपके तीन मेंबर्स

[21:42] जो होते हैं वह आरबीआई से आते हैं क्योंकि

[21:44] इनफ्लेशन को मेंटेन करना है ना 4 प्लस

[21:46] माइनस 2% तीन मेंबर्स आपके आरबीआई की तरफ

[21:49] से आएंगे एक तो दोस्तों आपके आरबीआई

[21:51] गवर्नर होते हैं राइट एक आपके आरबीआई के

[21:54] डिप्टी गवर्नर होंगे और एक तीसरे मेंबर

[21:57] होते हैं आरबीआई ऑफिशियल ठीक है तो तीन

[21:59] मेंबर आरबीआई की तरफ से आए और बाकी के जो

[22:01] तीन मेंबर्स होते हैं ना उनको हमारी जो

[22:03] सरकार है वो नॉमिनेट करती है इनकी मीटिंग

[22:06] होती है। अगर आप कानून उठा के देखोगे ना

[22:09] इसी में जो मैं बात कर रहा था आरबीआई एक्ट

[22:11] वाले की अगर आप इसको उठा के देखोगे इसमें

[22:13] क्लियरली मेंशंड है कि मॉनिटरी पॉलिसी

[22:16] कमेटी जो है उसको साल में कम से कम चार

[22:19] बार मिलना है। दे नीड टू मीट एट लीस्ट फोर

[22:23] टाइम्स इन अ ईयर। साल में कम से कम चार

[22:25] बार मिलना है। देखो ज्यादा बार जितनी बार

[22:27] मर्जी मिलो पर कम से कम चार बार मिलना है।

[22:30] नॉर्मली क्या होता है? वह हर 2 महीने बाद

[22:33] मिलते हैं। इसीलिए साल में वह छह बार मिल

[22:35] लेते हैं नॉर्मली। पर एस पर द कानून एस पर

[22:39] द एक्ट हमें यहां पे मतलब इनको साल में कम

[22:42] से कम चार बार मिलना है। और यही डिसाइड

[22:44] करते हैं कि बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट

[22:46] बेसिकली आपकी रेपो रेट कितनी होगी? वो कम

[22:49] होगी या ज्यादा होगी। और इसी मॉनिटरी

[22:52] पॉलिसी कमेटी के जो चेयरमैन होते हैं वो

[22:54] हमारे आरबीआई गवर्नर एक्स ऑफिशियल्स के

[22:56] चेयर पर्सन हो जाते हैं। छह मेंबर मैंने

[22:57] बताए ना तो उसको चेयर कौन करता है? आपके

[22:59] आरबीआई गवर्नर जो भी डिसीजन होंगे वो यहां

[23:02] मेजॉरिटी के बेसिस के ऊपर लिए जाएंगे। ठीक

[23:04] है ना? कि छह मेंबर्स ने कैसे-कैसे वोट

[23:06] किया है। उसके हिसाब से जहां मेजॉरिटी

[23:08] होगी उनकी बात यहां पे मान ली जाएगी। पर

[23:11] अगर मान लो यहां पर एक टाई हो जाए। मान लो

[23:13] कुछ ऐसा सिचुएशन आ जाए कि तीन लोग फेवर

[23:15] में बात कर रहे हैं। तीन लोग अगेंस्ट में

[23:17] बात कर रहे हैं। उस केस में क्या होगा? उस

[23:19] केस में आप नोटिस कर पाओगे। फिर यहां पे

[23:22] आपका कास्टिंग वोट होता है। कास्टिंग वोट

[23:24] मतलब हमारे जो आरबीआई गवर्नर हैं जो कि इस

[23:27] कमेटी के एक्स ऑफिशियल चेयर पर्सन हैं वो

[23:29] एक बार दोबारा से वोट डालेंगे। दोबारा से

[23:31] वोट डालेंगे एंड अकॉर्डिंगली फिर डिसाइड

[23:33] होगा कि कितना होना चाहिए रेपो रेट। ठीक

[23:35] है ना? तो बाकी मैंने बता ही दिया कि ये

[23:38] सिस्टम कैसे काम करता है। चार मेंबर्स कम

[23:40] से कम होने ही चाहिए। कोरम है इसका। एंड

[23:42] जो तीन नॉमिनेटेड मेंबर्स थे ना वो कौन

[23:44] नॉमिनेट किए जाते हैं? सरकार के द्वारा।

[23:46] उनको सरकार नॉमिनेट करती है। 4 साल का

[23:48] उनका टर्म होता है। एंड ध्यान में रखिएगा

[23:51] कि वो जो तीन मेंबर्स हैं जो सरकार

[23:53] नॉमिनेट करती है वो रीअपॉइंट नहीं किए जा

[23:57] सकते। इस बात का आप ध्यान में रखिएगा। अब

[23:59] आप लोग मुझे एक क्वेश्चन का आंसर करो। आप

[24:02] लोग मुझे इस सवाल का आंसर दो कि ये जो

[24:04] टारगेट है 4 + - 2% पहला सवाल तो इसमें ये

[24:07] है कि इस टारगेट को सेट कौन करता है? हु

[24:10] सेट्स दिस पर्टिकुलर टारगेट? यह 4 + - 2

[24:13] होना है या कुछ और होना है? ये टारगेट

[24:15] किसने सेट किया? ये मुझे आप बताओ। पहला

[24:17] क्वेश्चन। दूसरा क्या ये हमेशा जिंदगी भर

[24:21] के लिए यही टारगेट रहेगा या फिर कुछ

[24:23] पर्टिकुलर टाइम पीरियड के लिए हम इसको सेट

[24:25] करते हैं? ये दो क्वेश्चन का आप मुझे जरा

[24:27] एक बार आंसर करो। एक बार कमेंट्स दिखा

[24:30] दोगे आप। ये दो क्वेश्चन का आप मुझे आंसर

[24:33] करो। ठीक है? पहला है कि ये जो टारगेट है

[24:36] ये सेट किसने किया? दूसरी बात कि ये जो

[24:38] टारगेट है क्या यह हमेशा के लिए हमने सेट

[24:41] कर दिया है या इसमें कुछ चेंजेस भी किए जा

[24:43] सकते हैं।

[24:49] देखो काफी बच्चे गलत दे रहे हैं जवाब।

[24:51] बच्चे कह रहे हैं कि आरबीआई सेट करता है।

[24:53] नो नो नो प्लीज आप इसको ध्यान से सुनो

[24:56] मेरी बात को। प्लीज प्लीज प्लीज ध्यान से

[24:58] सुनो। ये जो टारगेट है ना ये टारगेट आपका

[25:02] गवर्नमेंट सेट करती है। इट इज़ सेट बाय द

[25:04] सेंट्रल गवर्नमेंट। यह 4 + - 2 होगा या 5

[25:08] + - 1 होगा या कुछ और होगा? यह टारगेट कौन

[25:12] से करता है? यह टारगेट सेट किया जाता है

[25:14] बाय द सेंट्रल गवर्नमेंट। प्लीज इस बात को

[25:16] नोट कर लीजिएगा। बट हां, एक बात जरूर

[25:19] ध्यान में रखना कि सेंट्रल गवर्नमेंट यह

[25:21] टारगेट सेट करते समय आपका कंसल्ट जरूर

[25:24] करती है आरबीआई के साथ। तो कोई अगर आपसे

[25:27] पूछे कि सेट कौन कर रहा है टारगेट? तो

[25:29] आंसर आपका सेंट्रल गवर्नमेंट होगा। बट

[25:31] हां, इतना जरूर है कि वह बातचीत कर लेगी

[25:33] आरबीआई के साथ यह टारगेट सेट करते समय,

[25:35] बट, टारगेट सेट करने की जिम्मेदारी वह

[25:37] सेंट्रल गवर्नमेंट की ही है। इस बात को

[25:39] प्लीज नोटिस करिएगा। अब रहा मेरा दूसरा

[25:42] क्वेश्चन वो क्या था दूसरा क्वेश्चन कि ये

[25:44] टारगेट कितने समय के लिए होता है? देखो ये

[25:47] टारगेट हम 5 साल के लिए लेते हैं। ठीक है?

[25:48] जैसे 2016 से 21 था। अब 21 से 26 का भी

[25:51] हमारा यही सेम टारगेट हमने रखा। अब हम

[25:53] दोबारा इसको चेंज भी कर सकते हैं अगर हमें

[25:55] रिक्वायरमेंट हो। पर फिलहाल हम इसी के साथ

[25:57] हम आई थिंक अगर आगे भी चलेंगे। तो ये

[26:00] टारगेट 5 साल के लिए हम रखते हैं। एंड इट

[26:02] कैन बी पीरियडिकली रिव्यूड कि कैसे हम

[26:04] यहां पे आगे इसको चलना चाहिए। तो 5 साल के

[26:07] लिए होता है। ठीक है ना? तो प्लीज ध्यान

[26:08] रखना। नहीं नहीं ऑलमोस्ट कुछ नहीं होता

[26:10] मासूम इसमें अगर आपके ऑप्शन में लिखा है

[26:13] ना सेंट्रल गवर्नमेंट और आरबीआई आप

[26:14] सेंट्रल गवर्नमेंट पे ही टिक मारेंगे

[26:16] आरबीआई से बस सलाह मशवरा किया जाता है बट

[26:18] टारगेट सेट करने की जिम्मेदारी सेंट्रल

[26:21] गवर्नमेंट की है उसको में उसको मेंटेन

[26:24] करना वो रेंज में रहे वो आरबीआई देखेगा

[26:27] काम बट टारगेट सेट किसने किया टारगेट सेट

[26:30] किया सेंट्रल गवर्नमेंट ने उसको मेंटेन

[26:32] करने की जिम्मेदारी आरबीआई की है। समझे

[26:34] मेरी बात को? आई होप ये जो दो पॉइंट्स हैं

[26:37] आपको यहां पर क्लियर हो चुके होंगे कि

[26:38] आखिर मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी क्या होती है

[26:40] एंड बाकी चीजें क्या है। एक और बात सर अगर

[26:44] मान लो हमने टारगेट अचीव नहीं किया

[26:46] सेंट्रल गवर्नमेंट ने बोल दिया 4 + - 2%

[26:48] रखना है और अगर मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी यह

[26:50] काम नहीं कर पाई तो देखो ध्यान से सुनना

[26:54] अगर लगातार तीन क्वार्टर आई रिपीट अगर

[26:57] लगातार तीन क्वार्टर कंजक्यूटिव तीन

[27:00] क्वार्टर्स के लिए तीन कंजकटिव क्वार्टर

[27:02] मतलब लगातार 9 महीनों के लिए अगर हमारा

[27:05] इनफ्लेशन इस पर्टिकुलर रेंज से बाहर आया

[27:08] इस पर्टिकुलर रेंज से बाहर आया या तो 2%

[27:10] से कम आया या 6% से ज्यादा आया आया तो उस

[27:13] केस में हम बोलेंगे कि मॉनिटरी पॉलिसी

[27:15] कमेटी अपना टारगेट अचीव करने में फेल हो

[27:18] चुकी है। कब बोलेंगे? जब तीन कंजक्टिव

[27:21] क्वार्टर्स के लिए वो इस टारगेट को अचीव

[27:22] नहीं कर पाई। मतलब इस रेंज में नहीं रह

[27:24] पाया। तब उसको बोलेंगे। अब पॉइंट ये आता

[27:26] है कि सर अगर मान लो ये फेल कर गए तो क्या

[27:29] होगा? एमपीसी अगर अपने रेंज में नहीं रख

[27:31] पाई अपने इन्फ्लेशन को तो क्या होगा? आंसर

[27:34] इज़ उनको एक रिपोर्ट बनानी पड़ेगी। उनको एक

[27:38] रिपोर्ट के अंदर यह बताना पड़ेगा कि हम यह

[27:39] टारगेट क्यों नहीं अचीव कर पाए। एंड क्या

[27:42] स्टेप्स आगे लेने वाले हैं ताकि ये टारगेट

[27:45] हम अचीव कर पाएं। दैट इज द एंटायर थिंग।

[27:47] और कुछ नहीं होता यहां पे कि अगर आप

[27:49] टारगेट नहीं अचीव कर पाओगे। बस इतना ही

[27:51] होगा यहां पे। इज इट फाइन? और क्वेश्चन

[27:54] यहां पे ये आता है कि यार ये कौन से

[27:56] इनफ्लेशन की सर आप बात कर रहे हो? कौन सा

[27:58] इनफ्लेशन है ये? ये 4 + - 2% कौन सा

[28:00] इनफ्लेशन है? यहां पर हम बात कर रहे हैं

[28:02] सीपीआई कंबाइंड की। अब थोड़ा ध्यान से

[28:04] सुनना। मुझे सीपीआई कंबाइंड बहुत अच्छे से

[28:06] एक्सप्लेन करना है आपको। तो प्लीज सब लोग

[28:08] यहां पे ध्यान से सुनेंगे क्योंकि ये

[28:09] मुद्दा बहुत ज्यादा करंट अफेयर्स में रहा

[28:11] है। तो प्लीज सब लोग यहां पे फोकस करके

[28:13] सुनिएगा।

[28:19] देखो

[28:24] तीन वर्ड्स हमें यहां पे डिस्कस करने हैं।

[28:28] चलो पहले उससे पहले मैं आपको ना सीपीआई

[28:30] डब्ल्यूपीआई समझाता हूं। फिर आएंगे इनके

[28:32] ऊपर। देखो इधर देखना होता पता क्या है?

[28:35] सीपीआई, डब्ल्यूपीआई, पीपीआई, जीडीपी

[28:39] डिफ्लेटर और सीपीआई में चेंजज़ यह बहुत बार

[28:42] पिछले एक साल में न्यूज़ में आए हैं। और

[28:44] देयर इज़ अ हैवी प्रोबेबिलिटी कि इन पांचों

[28:46] में से किस चीज पे क्वेश्चन पूछ सकता है।

[28:48] तो प्लीज ध्यान से सुनना हर एक पॉइंट को।

[28:50] देखो नहीं क्वार्टर भाई मासूम तीन लगातार

[28:52] क्वार्टर मतलब लगातार 9 महीने की बात कर

[28:54] रहा हूं। तीन कंजेक्टिव वर्ड बहुत

[28:56] इंपॉर्टेंट है यहां पे। ठीक है ना? प्लीज

[28:58] अब ध्यान से सुनेंगे। देखो जैसे फॉर

[29:00] एग्जांपल देखो यहां पर ना मैं एक चेन बना

[29:02] रहा हूं। सप्लाई चेन भी आप इसको कह सकते

[29:04] हो। जैसे यहां पर क्या होता है?

[29:05] मैन्युफैक्चरर। आप इसको मैन्युफैक्चरर बोल

[29:08] लो, प्रोड्यूसर बोल लो जो आप कहना चाहते

[29:09] हो। एक यहां पे मतलब क्या आया? यहां पे

[29:12] कच्चा माल था। यहां देयर वाज़ रॉ मटेरियल

[29:14] हियर। कच्चा माल था। मैन्युफैक्चरर ने

[29:16] प्रोडक्शन करी। फिर आगे वो गया होलसेलर के

[29:19] पास। होलसेल लेवल पे चीजें ना बल्क में

[29:22] ट्रेड की जाती हैं। तो ये होलसेलर लेवल हो

[29:24] गया। इसके बाद आता है हमारा रिटेलर का

[29:26] लेवल। ठीक है?

[29:29] और फिर फाइनली हमारा जो कस्टमर होता है।

[29:32] ठीक है? इस तरह से आपकी चेन आपको देखने को

[29:35] मिलती है। मैन्युफैक्चरर, होलसेलर, रिटेलर

[29:39] एंड कस्टमर। अब पॉइंट आता है कि सर हम

[29:42] यहां पे कहां-कहां पे इनफ्लेशन देखेंगे?

[29:44] देखो मेरी बात ध्यान से सुनना। मेरी बात

[29:46] ध्यान से सुनना। जैसे ये घड़ी है। यहां

[29:48] घड़ी थोड़ा मोबाइल फोन देख लो। अब मोबाइल

[29:50] है यार मोबाइल मेरे पास एक अलग इनफ्लेशन

[29:52] दिख रही होगी। क्योंकि यहां कस्टमर हूं।

[29:54] एक मैन्युफैक्चरर के पर्सेक्टिव से भी आप

[29:56] इनफ्लेशन देख सकते हो। और एक होलसेलर के

[29:58] लेवल पे जहां पर बल्क पे ऊपर चीजें ट्रेड

[30:00] हो रही हैं उसके लेवल पे इनफ्लेशन आपको

[30:02] अलग देखने को मिलेगा। वो रीज़न क्यों है

[30:04] मैं समझाऊंगा। क्यों अलग भी देखने को

[30:05] मिलेगा? दैट इज़ आल्सो वनेंट क्वेश्चन। ये

[30:08] इकोनॉमिक सर्वे ने दो चैप्टर्स दिए थे

[30:09] इसके ऊपर 2021 वाले इकोनॉमिक सर्वे में।

[30:12] एनीवेज तो पॉइंट पता क्या आता है कि हम

[30:14] किस लेवल के ऊपर इनफ्लेशन देखने को चाह

[30:16] रहे हैं। तो यहां देखना एक तो हो सकता है

[30:19] कि आप होलसेल लेवल के ऊपर अपना इनफ्लेशन

[30:21] देखो। जहां पर गुड्स बल्क में ट्रेड हो

[30:23] रही हैं। अगर आप यहां देख रहे हो इसको हम

[30:25] नाम देंगे होलसेल प्राइस इंडेक्स

[30:27] डब्ल्यूपीआई का। अगर आप कस्टमर लेवल के

[30:30] ऊपर देख रहे हो तो यहां पर ये नाम देंगे

[30:32] हम सीपीआई का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का।

[30:34] ठीक है ना? और अगर आप मैन्युफैक्चरर के

[30:37] लेवल के ऊपर देख रहे हो इसको हम नाम देते

[30:39] हैं पीपीआई का। प्रोड्यूसर प्राइस

[30:41] इंडेक्स।

[30:45] ठीक है? ये न्यूज़ में चल रहा है

[30:46] प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स। हमारी सरकार

[30:48] कोशिश कर रही है कि वो प्रोड्यूसर प्राइस

[30:50] इंडेक्स की तरफ बढ़े। शिफ्टिंग फ्रॉम द

[30:52] डब्ल्यूपीआई। मैं समझाऊंगा अभी क्यों है

[30:54] ऐसा। पर पहले एक बार डब्ल्यूपीआई और

[30:57] सीपीआई पढ़ लेते हैं। फिर मैं पीपीआई भी

[30:59] समझाऊंगा कि सरकार पीपीआई की बात कर क्यों

[31:01] रही है एंड कौन सी कमेटीज यहां पे अभी

[31:03] न्यूज़ में चल रही हैं। तो सबसे पहले एक

[31:05] काम करते हैं। सबसे पहले हम डब्ल्यूपीआई

[31:07] स्टडी करते हैं। देखो ये तो बात आपको समझ

[31:10] आ गई ना कि डब्ल्यूपीआई में क्या होगा? सर

[31:12] गुड्स बहुत बड़े लेवल के ऊपर ट्रेड होंगी।

[31:14] होलसेल लेवल पे क्या होता बल्क लेवल के

[31:16] ऊपर तो गुड्स ट्रेड होती हैं। बिल्कुल। तो

[31:19] यहां पर ना डब्ल्यूपीआई जो होलसेल प्राइस

[31:21] इंडेक्स है पहली बात तो ये हर महीने

[31:23] निकलता है। इट इज़ रिलीज़्ड ऑन अ मंथली

[31:25] बेसिस। ठीक है? दूसरी बात यहां पर जो

[31:28] गुड्स हैं वो बल्क लेवल के ऊपर एक बहुत

[31:30] बड़े स्तर के ऊपर ट्रेड की जाती हैं। पर

[31:33] सबसे इंपॉर्टेंट बात जो आपको यहां पे

[31:35] ध्यान देनी है जो कि क्वेश्चन 2021 में

[31:37] ऑलरेडी आ चुका है वो ये है कि यहां पर

[31:39] डब्ल्यूपीआई के अंदर केवल और केवल गुड्स

[31:43] होती हैं। केवल और केवल गुड्स इसमें

[31:46] सर्विसेज इंक्लूड नहीं होती। इस बात का आप

[31:49] सब लोग ध्यान रखेंगे। केवल और केवल गुड्स

[31:52] हियर सर्विज आर नॉट इंक्लूडेड। और इसका

[31:55] बेस ईयर क्या है? इसका बेस ईयर फिलहाल

[31:57] 2011-12 है। पर पर पर यह बहुत ही जल्दी

[32:01] 2022-23 होने जा रहा है। बहुत ही जल्दी ये

[32:03] 2022-23 होने जा रहा है। समझे मेरी बात

[32:06] को? तो डब्ल्यूपीआई क्या है? केवल गुड्स

[32:08] सर्विज नहीं आएंगी। 2011-12 बेस ईयर है पर

[32:10] बहुत जल्दी चेंज हो के 2023 हो जाएगा। एंड

[32:13] एक औरेंट बात ये है कि सर यहां पर इसको

[32:15] रिलीज़ कौन करता है? देखो आपको मिनिस्ट्री

[32:18] ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बारे में पता

[32:19] है? उस मिनिस्ट्री के अंतर्गत एक

[32:21] डिपार्टमेंट है वेरी-वेरी फेमस

[32:22] डिपार्टमेंट डीपीआईआईटी डिपार्टमेंट ऑफ

[32:24] प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड।

[32:26] इस डीपीआईआईटी के अंतर्गत एक ऑफिस है ऑफिस

[32:29] ऑफ इकोनमिक एडवाइजर। तो दरअसल में ऑफिस ऑफ

[32:31] इकोनमिक एडवाइजर डीपीआईटी मिनिस्ट्री ऑफ़

[32:33] कॉमर्स एंड इंडस्ट्री वो डब्ल्यूपीआई को

[32:35] यहां पे रिलीज़ करता है। हर मंथली बेसिस के

[32:38] ऊपर आपको डब्ल्यूपीआई का आंकड़ा आपको यहां

[32:39] पे देखने को मिलेगा। अब सवाल यहां पे ये

[32:42] आता है कि सर डब्ल्यूपीआई में हम देखते

[32:44] क्या हैं? देखो मेरी बात ध्यान से सुनना।

[32:46] जो हम यहां पे इनफ्लेशन देखते हैं ना वो

[32:49] दरअसल में एक बास्केट के बेसिस के ऊपर

[32:51] देखें। जैसे ये एक बास्केट है मेरे पास।

[32:53] ठीक है ना? मैंने आपको बोला था ना

[32:55] इनफ्लेशन की डेफिनेशन याद करो। इनफ्लेशन

[32:57] में हम एक सस्टेंड राइस चेक करते हैं

[33:00] मल्टीपल गुड्स का और सीपीआई के केस में

[33:02] सर्विज का भी। पर डब्ल्यूपीआई के केस में

[33:04] केवल गुड्स का चेक किया जाता है। अब इसमें

[33:06] पता है क्या होता है? आप हर एक आइटम जो

[33:09] कहीं ना कहीं ज्यादा इस्तेमाल होती है

[33:12] उसको आप यहां पे इस बास्केट में इंक्लूड

[33:14] करोगे। जैसे फॉर एग्जांपल किसी ने कहा कि

[33:16] नहीं सर ये नींबू ऐड कर दो। तो भाई इसमें

[33:18] नींबू ऐड कर दिया। किसी ने कहा ये पेन ऐड

[33:19] कर दो। पेन ऐड कर दिया। तो बहुत सारी ऐसी

[33:21] चीजें होती हैं। आपका नमक हो गया, आपके

[33:24] जूते हो गया, आपका क्लोथिंग हो गया, आपका

[33:26] फूड, आपका फ्यूल ये सारी डिफरेंट-डिफरेंट

[33:28] जो आइटम्स होती हैं ना उसके बेसिस पे ये

[33:30] बास्केट बनती है। फिर हम देखते हैं यार ये

[33:32] बास्केट पहले कितने की थी? अब ये बास्केट

[33:34] में कितनी महंगाई आ चुकी है? उस बेसिस के

[33:36] ऊपर हम यहां पे इनफ्लेशन कैलकुलेट करते

[33:38] हैं। क्या ये बात समझ आई कि कैसे डब्ल्यू

[33:40] पे देखा जाता है? अब मेरी बात ध्यान से

[33:42] सुनना। ये है तो केवल गुड्स पर इसके अंदर

[33:45] आपको यहां पे ध्यान देना है। देखो जय जब

[33:49] तक आपका में प्रीलिम्स होगा तब तक ये चेंज

[33:52] हो चुका होगा। तो 2022-23 तब तक आ चुका

[33:54] होगा। हां जी। अब इसमें आप नोटिस करना।

[33:56] प्लीज इधर फोकस करेंगे। सब लोग सब लोग इधर

[33:58] फोकस करेंगे।

[34:02] ठीक है? सब लोग इधर फोकस करेंगे। यहां पे

[34:04] देखो आपके जो डब्ल्यूपीआई है ना उसमें तीन

[34:07] कॉम्पोनेंट्स होते हैं। एक होता है

[34:08] प्राइमरी आर्टिकल्स, एक होता है फ्यूल एंड

[34:10] पावर, एक होता है मैन्युफैक्चर

[34:12] प्रोडक्ट्स। आपको इनको याद करना है ऑर्डर

[34:15] के अंदर। कौन सा ऑर्डर? सबसे पहले आपको

[34:17] मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट्स याद रखने हैं।

[34:19] देखो मैंने आपको बताया ना ये बास्केट है।

[34:21] अब इस बास्केट के अंदर प्रोडक्ट्स तो

[34:22] आएंगे पर हर किसी का वेटेज सेम नहीं है।

[34:26] हर किसी का वेटेज सेम नहीं है। सबसे

[34:28] ज्यादा वेटेज किसका है? मैन्युफैक्चरर्ड

[34:30] का। आपको ये परसेंटेज याद नहीं रखना। आपको

[34:33] ऑर्डर याद रखना है। मैन्युफैक्चर सबसे

[34:35] ज्यादाेंट फॉललोड बाय प्राइमरी आर्टिकल्स

[34:38] फॉललोड बाय फ्यूल एंड पावर। जो चीजें बन

[34:40] चुकी हैं वो सारी मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट्स

[34:42] के अंदर आएंगी। ठीक है ना? जैसे आपका

[34:44] टेक्सटाइल्स वगैरह हो गया। प्राइमरी

[34:45] आर्टिकल्स के अंदर आपके कुछ इंपॉर्टेंट जो

[34:47] फूड आइटम्स हैं वो आ जाएंगे। और फ्यूल एंड

[34:49] पावर तो आप समझते ही होंगे। राइट? तो इनका

[34:51] ऑर्डर क्या बनेगा? इनका ऑर्डर बनेगा सर

[34:54] मैन्युफैक्चरर्ड प्रोडक्ट। सबसेेंट फॉललोड

[34:56] बाय प्राइमरी आर्टिकल्स एंड फॉललोड बाय

[34:58] आपका फ्यूल एंड पावर। और ये जो मैं

[35:01] बास्केट आपको बता रहा था ना करंट डाटा ही

[35:04] है। कृष आप चिंता ना करो। करंट डाटा ही है

[35:06] सारा। चिंता मत करो। हर एक करंट डाटा है।

[35:08] करंट डाटा है। अरे मनीषा झा वो सीपीआई का

[35:12] है। मैं डब्ल्यूपीआई पढ़ा रहा हूं। प्लीज

[35:13] ध्यान देंगे। वो सीपीआई की जो आप बात कर

[35:15] रहे हो 24 वाला वो सीपीआई का है। दैट इज़

[35:18] डिफरेंट। अभी मैं सीपीआई पे आया नहीं हूं।

[35:19] ये डब्ल्यूपीआई पढ़ा रहा हूं मैं आपको। अब

[35:21] यहां पर क्या होता है? यहां पर डब्ल्यूपीए

[35:23] के केस में आपकी टोटल 679 आइटम्स हैं।

[35:26] मैंने आपको बोला ना इस बास्केट के अंदर

[35:28] हमें बहुत सारी गुड्स डाली हुई हैं। पॉइंट

[35:30] आता है कितनी गुड्स डाली गई हैं? 697

[35:33] आइटम्स। ये जो 6797 आइटम्स हैं इनमें सबसे

[35:37] ज्यादा आइटम्स किस चीज की हैं?

[35:38] मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट्स की। फिर दूसरे

[35:40] नंबर के ऊपर आपके प्राइमरी आर्टिकल्स हैं।

[35:42] फिर उसके बाद आपके फ्यूल एंड पावर है।

[35:44] समझे मेरी बात को? तो इस तरह से ये ऑर्डर

[35:46] है। तो मैन्युफैक्चरर्ड सबसे ज्यादा

[35:48] फॉललोड बाय प्राइमरी आर्टिकल्स फॉललोड बाय

[35:50] फ्यूल एंड पावर। क्या ये बात आपको सबको

[35:53] क्लियर हुई या नहीं हुई? ठीक है? आप चिंता

[35:55] मत करो। सारा डेटा मैंने अपडेट किया हुआ

[35:57] है। आप 2024 जो कह रहे हो वो आपका सीपीआई

[36:00] का है। उस पे आएंगे अभी। रुको अभी रुको।

[36:02] क्या ये बात सबको क्लियर हुई या नहीं हुई?

[36:05] डब्ल्यूपीआई क्लियर हुआ? तो डब्ल्यूपीआई

[36:07] में ये बातें आपको ध्यान रखनी है। कौन

[36:08] रिलीज़ करता है? क्या-क्या इंक्लूड होता

[36:10] है? बेस ईयर क्या है? और साथ ही साथ आपका

[36:12] ऑर्डर क्या है? ठीक है? ये कहां पे हम बात

[36:15] कर रहे हैं सर? ये हम बात कर रहे थे

[36:17] होलसेल लेवल की। होलसेल लेवल की। एक्चुअली

[36:20] ना इसमें एक दो बड़ी परेशानियां है। क्या

[36:22] है बड़ी परेशानियां? देखो पहली बड़ी

[36:25] परेशानी पता है क्या है? अभी इसको ठीक

[36:27] कैसे करेंगे? मैं बताऊंगा। पहली बड़ी

[36:29] परेशानी पता क्या है? डब्ल्यूपीआई ना एक

[36:33] तो पता है क्या होता है? डब्ल्यूपीआई में

[36:34] पहली बात सर्विज नहीं आती। मैंने वो

[36:36] बास्केट दिखाई ना आपको। उस डब्ल्यूपीआई के

[36:38] अंदर आपकी सर्विज नहीं आती। पहली चीज़।

[36:40] दूसरी बात डब्ल्यूपीआई में एक प्रॉब्लम कई

[36:43] बार बोली जाती है। वो प्रॉब्लम आती है डबल

[36:45] काउंटिंग की। क्यों आती है डबल काउंटिंग

[36:47] की प्रॉब्लम? क्योंकि यहां पर डब्ल्यूपीआई

[36:49] में ना कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो आपकी

[36:51] प्राइमरी आर्टिकल्स में भी इंक्लूड हो

[36:53] जाती हैं और वही सेम चीजें मैन्युफैक्चर

[36:55] में भी आ जाती हैं। तो कई बार डबल

[36:56] काउंटिंग की प्रॉब्लम आ जाती है

[36:57] डब्ल्यूपीआई में। तीसरी बात यहां पर एक

[37:00] बात और बोली जाती है कि यार देखो यार

[37:02] डब्ल्यूपीआई तक आते-आते ना आपका

[37:04] इनडायरेक्ट टैक्स भी बीच में इंक्लूड हो

[37:06] जाता है। अब समझो मेरी बात को। जब कोई चीज

[37:08] प्रोड्यूसर लेवल के ऊपर थी ना तब उसमें

[37:10] आपका जीएसटी या इनडायरेक्ट टैक्स का

[37:12] इफेक्ट नहीं आया था। होलसेल लेवल पे

[37:14] जाते-जाते उसमें इनडायरेक्ट टैक्स का

[37:16] इफेक्ट आ जाता है। तो अगर सही मायने में

[37:18] आपको इनफ्लेशन देखनी है ना तो डब्ल्यूपीआई

[37:20] शायद सही मेजर नहीं होगा। वहां पर पीपीआई

[37:22] शायद बेटर मेजर होगा और दुनिया में भी

[37:24] ज्यादातर कंट्रीज पीपीआई की तरफ अडॉप्ट कर

[37:26] रही हैं। तो लोग बोलते हैं कि हमें भी

[37:28] पीपीआई की तरफ अडॉप्ट करना चाहिए। समझे

[37:31] मेरी बात को? समझे मेरी बात को? शिवानी

[37:34] समझ आया कि क्यों हम मूव करना चाहते हैं?

[37:35] क्यों हम मूव करना चाहते समझ आया आपको? इज़

[37:38] इट क्लियर? तो यहां पर डब्ल्यूपी में

[37:40] समस्याएं क्या हैं? एक सर्विज इंक्लूड

[37:42] नहीं है इसके अंदर। दूसरी बात डबल

[37:43] काउंटिंग का एरर आ सकता है। तीसरी बात

[37:45] यहां पे है कि दुनिया में इसको उतना

[37:47] अडॉप्ट नहीं किया जाता क्योंकि यहां पर

[37:48] इनडायरेक्ट टैक्स जीएसटी का भी इंपैक्ट

[37:50] आपको इसमें देखने को मिल सकता है। तो जब

[37:52] सही मायने में इनफ्लेशन देखनी है तो

[37:53] प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स विल बी अ बेटर

[37:55] मेजर। चलो बात ठीक है। होलसेलर प्राइस

[37:59] इंडेक्स की बात यहां तक समझ आई। पीपीआई भी

[38:01] समझाऊंगा अभी। उसके रिगार्डिंग मैं आपके

[38:02] लिए एमसीक्यू भी लेकर आया हूं ताकि आपको

[38:04] क्वेश्चंस भी उसमें हैंडल कर पाओ। अब एक

[38:06] बार हम एक काम करते हैं। हम लोग कंज्यूमर

[38:08] प्राइस इंडेक्स हम सीपीआई की भी बात कर

[38:10] लेते हैं एक बार कि व्हाट इज कंज्यूमर

[38:11] प्राइस इंडेक्स? लेट अस ट्राई एंड

[38:13] अंडरस्टैंड दैट एस्पेक्ट आल्सो।

[38:16] अच्छा अब देखो कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की

[38:18] जब हम बात करते हैं ना उसको समझने के लिए

[38:20] आपको एंगल्स लॉ समझना बहुत-बहुत

[38:22] इंपॉर्टेंट है। ये सेम लॉ द आपका पीआईबी

[38:24] में मेंशंड हुआ था। यह पीआईबी से मेंशन

[38:26] मैंने पीआईबी से पिक किया है ये वाली चीज़।

[38:28] यह पीआईबी में एज़ इट इज़ आया था जब सीपीआई

[38:30] चेंज किया था। मैं आपको समझाता हूं क्या?

[38:32] एक्चुअली पता है क्या है? पहले तो मैं

[38:34] कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सिंपल समझाता

[38:35] हूं। फिर मैं बताता हूं कि इसमें बदलाव

[38:37] करने की जरूरत क्या पड़ी। देखो आपको ये तो

[38:40] समझ आ गया होगा ना कि कंज्यूमर प्राइस

[38:41] इंडेक्स की जब हम बात करते हैं जैसे

[38:43] डब्ल्यूपीआई में क्या था? होलसेल लेवल के

[38:45] ऊपर। सीपीआई में क्या आएगा? कंज्यूमर लेवल

[38:47] के ऊपर होगा। तो ये जो सीपीआई वाला है ना

[38:49] इसमें पता है क्या होगा? सर सीपीआई वाले

[38:51] में अब दोनों आएंगे। इस बास्केट में आप

[38:53] गुड्स भी डालोगे। इस बास्केट में आप

[38:55] सर्विसेस भी डालोगे। कंज्यूमर लेवल के ऊपर

[38:58] दोनों चीजें होती हैं। बोथ गुड्स एंड

[39:00] सर्विसेस। और दोस्तों ये जो सीपीआई है ये

[39:03] मंथली बेसिस पे आता है। ये हर महीने रिलीज

[39:06] किया जाता है। ठीक है? ठीक है? हर महीने

[39:08] रिलीज किया जाएगा। तीसरी बात ये कंज्यूमर

[39:11] लेवल के ऊपर होता है। वो तो हमने डिस्कस

[39:12] कर लिया। अब सुनना मेरी बात। इसका बेस ईयर

[39:15] 2012 हुआ करता था। था सर इसमें था क्यों

[39:19] बोल दिया? अरे भाई जनवरी का डाटा आ गया है

[39:21] ऑलरेडी। 12 फरवरी को या 13 फरवरी के

[39:24] प्रीलिम बुक से मैंने आपको पढ़ा भी दिया

[39:25] लेटेस्ट डाटा। तो ये ऑलरेडी चेंज हो चुका

[39:27] है। डब्ल्यूपीआई चेंज होने वाला है।

[39:30] सीपीआई चेंज हो चुका है। ये 2024 ऑलरेडी

[39:32] हो गया है। समझे जो मनीषा बीच में कह रही

[39:34] थी 204। अरे 204 हो गया। वो सीपीआई का था।

[39:37] डब्ल्यूपीआई का सेपरेट था। सीपीआई का 204

[39:40] का डाटा आ भी गया पहले महीने का। जनवरी का

[39:42] डाटा रिलीज़ भी कर दिया यहां पे। किसने

[39:44] रिलीज़ कर दिया? अरे मोसपी ने रिलीज़ कर

[39:46] दिया। मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स एंड

[39:47] प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन के अंदर आपका जो

[39:49] एनएसओ है नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ये

[39:52] एनएसओ ही डाटा रिलीज़ करता है। यहां पर

[39:54] किसका? सीपीआई का। ठीक है सर। ठीक है। समझ

[39:58] गए। समझ गए। अब सवाल यहां पर ये आएगा कि

[40:00] सर मतलब क्या जरूरत क्या पड़ी? सीपीआई को

[40:03] चेंज क्यों किया गया? सीपीआई को हमने चेंज

[40:06] किया क्यों? आखिर मैं आपको एक्सप्लेन करता

[40:09] हूं कि सीपीआई को हमने चेंज किया क्यों?

[40:10] और उसमें क्या बदलाव किए वो भी समझाएंगे।

[40:13] नहीं नहीं जैरी जो सीपीआई का बेस ईयर होता

[40:16] है वो कैलेंडर ईयर होता है। वो फाइनेंसियल

[40:18] ईयर नहीं होता। तो 2024 ही लिखोगे। 23-24

[40:21] नहीं लिखेंगे। 2024 सीपीआई का कैलेंडर ईयर

[40:24] आपका बेस ईयर रहता है। समझे इस बात को?

[40:26] ठीक है सर। अब पॉइंट आता है कि सर चेंज

[40:28] क्यों किया गया? देखो आप जाके पीआईबी का

[40:30] आर्टिकल पढ़ना। आपको बहुत शानदार क्लेरिटी

[40:32] मिलेगी इस पे। सबसे पहली चीज तो बदली पता

[40:34] है क्या है? सबसे पहली क्लैरिटी आपको

[40:36] एंजेल्स लॉ समझ आना चाहिए। अगर आपको

[40:37] एंगल्स लॉ समझ आ गया ना आपको समझ आएगा कि

[40:39] सीपीएम में चेंज करना जरूरी क्यों था। मैं

[40:42] आपको एक्सप्लेन करता हूं। और इसके पीछे

[40:44] कहानी और भी है। देखो मैं आपको समझाता

[40:47] हूं। देखो सुनना मेरी बात को। जैसे मेरा

[40:50] था ना पहले मैं आपको पहले की बात बताता

[40:51] हूं। पहले ना मैं महीने के 10,000 कमाता

[40:53] था। ठीक है? जब मैं महीने के 10,000 कमाता

[40:56] था ना जब मैं महीने के ₹10,000 कमाता था

[40:58] ना तो मेरे लगभग लगभग ₹4,500 मेरे

[41:02] खाने-पीने की आइटम पे जाते थे। लगभग

[41:05] ₹4,500 मैं आपको मेरा पहले का बता रहा

[41:07] हूं। एक साल पहले मेरी कमाई महीने की

[41:09] ₹10,000 थी। तो मैं तब ₹4,500 खाने-पीने

[41:12] की आइटम पे खर्च करता था। जिसको मैं फूड

[41:14] एंड बेवरेजेस बोलूंगा। तो पहली बात आप

[41:16] मुझे बताओ कि ये कितने परसेंटेज मैंने

[41:18] रफली खर्च किया अपनी सैलरी का खाने-पीने

[41:21] के ऊपर? ये बताओ मुझे। सर आपने रफली 45%

[41:26] खर्च किया अपने खाने-पीने के ऊपर। है कि

[41:29] नहीं? मानते हो मेरी बात को? हां बिल्कुल

[41:31] बिल्कुल बिल्कुल। एग्जैक्टली। अब मान लो

[41:34] मेरी सैलरी हो गई है 15,000। ठीक है?

[41:36] मैंने थोड़ा अच्छा पढ़ाया आप सबको तो सर

[41:38] ने कहा कि चलो ठीक है आप महीने के आपको

[41:39] 15,000 मिलेंगे। अब मेरी बात ध्यान से

[41:42] बताना क्या अभी भी मैं 15000 का 45% वो

[41:46] कितना आएगा ये आएगा आपका

[41:49] 6750 क्या अभी भी मैं अपनी सैलरी का 45%

[41:53] खर्च करूंगा खाने पीने के ऊपर नहीं देखो

[41:55] यार ऐसा नहीं होगा मेरी सैलरी 50% बढ़ गई

[41:58] पर मेरे खाने पीने का खर्चा 50% नहीं

[42:00] बढ़ेगा अरे यार पहले दो रोटी खाता था अब

[42:02] ढाई रोटी खा लूंगा और क्या पर ऐसा थोड़ी

[42:04] है कि दो की जगह अब तीन रोटी खाने लग

[42:06] जाऊंगा तो मेरी देखो यार बढ़ेगी पर इतना

[42:09] नहीं बढ़ेगा हो सकता कह रहा है 4500 की

[42:11] जगह मेरा 6000 खर्च कर दो। तो मुझे एक चीज

[42:14] बताओ ये 15,000 का कितना परसेंट मैंने

[42:15] खर्च किया यहां पे खाने पीने की चीजों पे?

[42:17] रफली 40% और अगर आप इसको थोड़ा सा कम कर

[42:20] दो। मान लो आप इसको 5500 कर दो तो ये रफली

[42:22] आपका 37% आ गया। देखो मेरी बात ध्यान से

[42:25] सुनना। बहुत ध्यान से सुनना। ये बच्चों को

[42:27] समझ ही नहीं आएगा पीआईबी क्या बोलना चाह

[42:29] रहा है। पर आप ध्यान से सुनना। देखो पहले

[42:31] मैं खाने-पीने पे खर्च करता था 4500। अब

[42:33] मैं खाने-पीने पे खर्च कर रहा हूं 5500।

[42:35] क्या मेरा खाने पे खर्च बढ़ा? हां बिल्कुल

[42:38] बढ़ा। खाना पहले मैं 4500 का खाता था। अब

[42:40] 5500 का खाता हूं। तो खर्च तो मेरा बढ़ा

[42:42] परसेंटेज ऑफ सैलरी में देखेंगे ना तो पहले

[42:45] वो 45% था। अब वो 37% के आसपास आ गया। तो

[42:49] यार मेरा खाने-पीने के ऊपर खर्च तो बढ़ा

[42:51] पर परसेंटेज टर्म्स में मेरा खर्च कम हुआ

[42:55] है। पहले मेरी सैलरी का 45% खर्च होता था

[42:57] खाने पीने के ऊपर। अब केवल 37% होता है।

[43:00] यही सेम बात हमारा जो हाउसहोल्ड कंसमशन

[43:03] एक्सपेंडिचर सर्वे है उसने ये सेम बात

[43:06] बताई। और ये सेम बात एंगल्स लॉ भी बोलता

[43:08] है। एंगल्स लॉ यही बोलता है कि भाई

[43:10] जैसे-जैसे एक परिवार की इनकम बढ़ती है ना

[43:12] जैसे-जैसे एक परिवार की इनकम बढ़ेगी तो

[43:14] परसेंटेज ऑफ इनकम कितना इनकम वो खाने पे

[43:17] खर्च करते हैं वो परसेंटेज टर्म्स में

[43:20] डिक्रीज हो जाता है। परसेंटेज टर्म्स में

[43:22] डिक्रीज होगा। ऑलदो एक्चुअल स्पेंडिंग

[43:24] एक्चुअल खर्चा बढ़ेगा। 4500 से 5500 मैंने

[43:27] खर्च किया परसेंटेज टर्म्स में वो नंबर कम

[43:30] होगा।

[43:31] यही सेम बात हमारे हाउसहोल्ड कंजमशन

[43:33] एक्सपेंडिचर सर्वे ने पकड़ी और उसी बेसिस

[43:36] के ऊपर हमने सीपीआई में बदलाव किया। हमने

[43:39] कहा यार देखो पहले लोग खाने-पीने के ऊपर

[43:41] ज्यादा परसेंटेज खर्चा कर रहे थे। पर अब

[43:43] तो लोगों की इनकम बढ़ रही है। अब

[43:45] खाने-पीने के ऊपर परसेंटेज टर्म्स में

[43:47] खर्चा कम हो रहा है। इसीलिए हमने सबसे

[43:50] पहली चीज क्या करी? सर हमने यहां पर जो

[43:53] बास्केट है ना ये जो बास्केट था इसमें

[43:55] बास्केट में जो आइटम्स होती हैं, हमने उसी

[43:57] में चेंज कर दिया। पॉइंट आता है क्या चेंज

[43:59] कर दिया सर ऐसा आपने? देखो मैं आपको

[44:01] समझाता हूं। पहले पता है क्या होता था?

[44:03] प्लीज जरा फोकस करना जरा। पहले आपकी इस

[44:06] बास्केट में 299 आइटम्स थी। कितनी आइटम्स

[44:09] थी? 299। उस 299 आइटम्स में 259 गुड्स थी।

[44:14] 40 थी सर्विज।

[44:16] ठीक है? 299 आइटम्स में 259 गुड्स थी। 40

[44:19] थी सर्विज। बट अब क्या हमने कर दिया? अब

[44:22] हमने इस 299 को चेंज करके 358 कर दिया है।

[44:26] 358 कर दिया। ठीक है? उनमें 308 गुड्स हैं

[44:31] और आपकी 50 सर्विज हैं। 308 गुड्स 50

[44:34] सर्विज तो टोटल बनी 358। और उसमें भी हमने

[44:38] क्या किया है? फूड एंड बेवरेजेस का जो

[44:40] वेटेज है वो हमने यहां पर कम कर दिया है।

[44:44] फूड एंड बेवरेजेस का जो वेटेज है वो हमने

[44:46] यहां पर कम कर दिया है। देखो कैसे कम कर

[44:49] दिया है। पहले जो फूड एंड बेवरेजेस का

[44:50] वेटेज था वो रफ्ली 45% था आपके सीपीआई के

[44:54] अंदर। अब ये रफ्ली कम करके हमने इसको 37%

[44:57] कर दिया है। समझे मेरी बात को? तो

[44:59] परसेंटेज टर्म्स में फूड एंड बैरेज का

[45:01] जोेंस था वो पहले के मुकाबले हमने कम कर

[45:04] दिया। ये बात आपको ध्यान रखनी है। पहली

[45:06] चीज। दूसरी बात बेस चेंज कर दिया वो ध्यान

[45:09] रखेंगे। तीसरी बात आप ध्यान रखेंगे कि

[45:11] नंबर ऑफ आइटम्स हमने पहले के मुकाबले बढ़ा

[45:14] दी हैं। राइट? ये बात आप ध्यान में

[45:16] रखेंगे। उसके अलावा हमने जो गांव की जो

[45:18] रूरल मार्केट्स होती हैं उनका कवरेज जो है

[45:20] वो बढ़ा दिया है पहले के मुकाबले। दैट इज़

[45:22] अनदर चेंज जो हमने यहां पे किया है। ठीक

[45:24] है ना? इसके अलावा हमने 12 ऑनलाइन

[45:27] मार्केट्स को भी इंक्लूड किया है। भाई

[45:29] देखो यार आजकल तो आप लोग sविgi, instamt

[45:32] ठीक है? Zeeptotो, blink इन सब से कहीं ना

[45:34] कहीं करते हो। तो भाई वहां पर तो ई-कॉमर्स

[45:36] प्लेटफॉर्म्स भी हैं। उनका डाटा भी हमने

[45:38] लेना स्टार्ट कर दिया। उनको भी इंक्लूड

[45:40] करना स्टार्ट कर दिया। आजकल तो आप यू नो

[45:42] Netflix का, Amazon Prime का इनके ऊपर भी

[45:45] खर्चा करते हो। ये ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का

[45:46] सब्सक्रिप्शन भी लेते हो। तो उनको भी हमने

[45:48] यहां पे अब इंक्लूड करना स्टार्ट कर दिया

[45:50] है। और सिमिलरली एक बहुत बड़ा जो चेंज आया

[45:53] है वो आया है रूरल हाउसिंग के अंदर। पहले

[45:56] ना रूरल हाउसिंग का वेटेज ज़ीरो था। रूरल

[46:00] वालों के लिए हाउसिंग को 0%ेंस थी। अब

[46:03] यहां पे रूरल हाउसिंग को भी हमने इंक्लूड

[46:05] कर लिया है। उसको भी हम यहां पर देखने लग

[46:07] गए हैं। तो ये बड़े-बड़े चेंजेस हैं जो यहां

[46:09] पे हमने यहां पर किए हैं। क्या ये बात

[46:12] आपको समझ आई?

[46:14] क्या ये बात आपको समझ आई? अरे भाई

[46:16] डिसइफ्लेशन आपका अलग कांसेप्ट है।

[46:19] डिसइफ्लेशन अलग कांसेप्ट है। कहां

[46:21] डिसइफ्लेशन में घुसे जा रहे हो? क्या ये

[46:23] बात आपको समझ आई कि क्या चेंजज़ क्या हुए

[46:25] हैं? मैं एक बार आपको क्विकली रिवाइज़

[46:27] कराता हूं। चारप पॉइंट्स आपको याद रखने

[46:29] हैं। प्लीज आप लोग साथ-साथ लिखना मेरे।

[46:31] पहली चीज है बेस ईयर चेंज हुआ सीपीआई का।

[46:34] 2012 पहले था 204 अब है। दूसरी बात पहले

[46:37] 299 आइटम्स थी जिसमें 259 गुड्स थी 40

[46:40] सर्विज थी। अब इसको 358 किया गया जिसमें

[46:42] 308 गुड्स हैं 50 सर्विज हैं। तीसरी बात

[46:45] फूड एंड बेवरेजेस जो सबसे ज्यादा

[46:47] इंपॉर्टेंट होता है उसका परसेंटेज में

[46:48] वेटेज कम कर दिया गया है। पहले जो 45% के

[46:50] आसपास था अब वो 37% के आसपास कर दिया गया

[46:53] है। पहले रूरल हाउसिंग की हम वेटेज नहीं

[46:55] देखते थे। अब उसको भी इंक्लूड किया गया।

[46:56] ऑनलाइन मार्केट्स भी हमने यहां पे इंक्लूड

[46:58] करी हैं। ये सारे चेंजेस हमने यहां पे

[47:00] इंक्लूड किए हैं। इज इट फाइन ऑ नॉट? अरे

[47:05] 23 24 नहीं है। 2024 है बेस ईयर भाई। 2024

[47:07] बेस ईयर है। ठीक है? तो ये हमने बदलाव

[47:11] किया है। ये पुराना है। मैंने यहां लिखा

[47:12] भी है ओल्डर। पहले ये ऐसे होता था। देखो

[47:14] ना इसको आप भूल जाओ। ये तो बहुत पुराना

[47:16] है। अब इसमें पता है क्या होता था? देखो

[47:18] इसमें एक हम निकालते थे गांव के लिए। ये

[47:20] पुराना डाटा है। ठीक है? ये पहले गांव के

[47:21] लिए निकालते थे और शहरों के लिए अलग

[47:23] निकालते थे। फिर कंबाइंड के लिए। तो पहले

[47:24] ये जो कंबाइंड वाला वेटेज 45 था ना अब

[47:26] इसको हमने कम करके 37% कर दिया है। दूसरी

[47:29] बात ये रूरल हाउसिंग की वेटेज पहले जीरो

[47:31] हुआ करती थी। अब हम इसको भी इंक्लूड करने

[47:33] लग गए हैं। तो ये कुछ चेंजेस हैं जो आपको

[47:35] यहां पे पता होने चाहिए। क्या आपको सीपीआई

[47:38] के बारे में बात समझ आई? तो एक होता है

[47:40] सीपीआई रूरल। एक होता है सीपीआई अर्बन, एक

[47:43] होता है सीपीआई कंबाइंड। समझे या नहीं

[47:46] समझे यहां पे?

[47:48] समझे या नहीं समझे? ठीक है? तो ये हो गया

[47:50] आपका सीपीआई कंबाइंड।

[47:53] हां वर्मा मैंने हाईलाइट कर दिया। आपको

[47:55] पीडीएफ मिलेगी। मैंने हर एक चीज यहां पर

[47:56] लिख रखी है। आप चिंता ना करना। ये हर एक

[47:58] चीज मैंने यहां पर लिख रखी है। ठीक है? तो

[48:00] ये हो गया हमारा सीपीआई के बारे में। अब

[48:02] देखो ये तो चलो बात हमने कर दी सीपीआई के

[48:04] बारे में। ठीक है? पर देखो आप अंडरस्टैंड

[48:06] करना सिर्फ यही प्रकार के सीपीआई नहीं

[48:08] होते। इसके अलावा भी सीपीआई होते हैं। ये

[48:11] तो हमने सीपीआई रूल सीपी अर्बन सीपीआई

[48:13] कंबाइंड की बात करी। पर इसके अलावा भी

[48:15] सीपीआई इंडस्ट्रियल वर्कर भी होता है।

[48:17] सीपीआई इंडस्ट्रियल वर्कर ये किसके लिए

[48:19] होता है? इंडस्ट्रियल वर्कर के

[48:20] पर्सपेक्टिव से जो आपकी इनफ्लेशन निकालना

[48:23] वो होता है सीपीआई आईडब्ल्यू। ये पता है

[48:26] क्या इस्तेमाल होता है सीपीआई आईडब्ल्यू

[48:27] का? आप लोगों ने जो महंगाई भत्ता आपने

[48:30] सुना होगा जिसको हम लोग डीएनएस अलाउंस का

[48:32] नाम देते हैं। डीए जो आप बोलते हो कितना

[48:34] परसेंटेज डीए देना है अपने वर्कर्स को वो

[48:37] डिसाइड होता है सीपीआई आईडब्ल्यू के

[48:39] पर्सेक्टिव से। और इस सीपीआई आईडब्ल्यू को

[48:41] कौन निकालता है? इसको निकालता है आपका

[48:43] लेबर ब्यूरो। जब आपका श्रम मंत्रालय के

[48:45] अंतर्गत आपका लेबर ब्यूरो आपको देखने को

[48:46] मिलेगा अंडर मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंड

[48:48] एंप्लॉयमेंट। उसकी जिम्मेदारी है यहां पर

[48:50] आपको सीपीआई आईडब्ल्यू निकालना और इसका

[48:53] बेस ईयर क्या होता है? इसका बेस ईयर आपका

[48:55] 2016 होता है 2016 ठीक है 2016 नहीं आईएलओ

[48:59] पब्लिश नहीं करता भाई लेबर ब्यूरो पब्लिश

[49:01] करता है इसको लेबर ब्यूरो इसको पब्लिश

[49:03] करते हैं इसके अलावा अगर हम बात करें सीपी

[49:05] एग्रीकल्चर लेबरल की प्लीज अंडरस्टैंड

[49:08] करना यहां पर बहुत सारी बुक्स में अभी भी

[49:10] गड़बड़ हो रखी है इसका बेस ईयर सीपीआई एएल

[49:13] का पहले 1986 87 हुआ करता था अब वो बदल के

[49:16] 2019 हो चुका है तो सीपीआईएल का जो बेस

[49:20] ईयर है वो आपको 2019 होगा और ये आपके

[49:22] मनरेगा की जो वेजेस होती हैं ना जो मनरेगा

[49:24] तो हम नहीं बोलेंगे उसको विकसित भारत जी

[49:26] राम जी उसके अंदर वेजेस जो हैं वो कितने

[49:29] परसेंट बढ़ेंगी वो डिसाइड आपका सीपीआईएल

[49:31] के पर्सेक्टिव से किया जाता है एंड इसको

[49:33] भी आपका लेबर ब्यूरो ही यहां पे रिलीज़

[49:35] करता है। इस तरह से आपका सीपीआईआरएल होता

[49:37] है। सीपीआईआरएल का आपका बेस ईयर भी बदल

[49:40] दिया गया है। पहले बेस ईयर आपका 1986 87

[49:43] हुआ करता था। अब ये 2019 हो चुका है। नहीं

[49:46] सरीन अंसारी जो मैं बता रहा हूं बिल्कुल

[49:48] ठीक है। बेस ईयर उसका 2016 ही था। इसका

[49:50] बेस ईयर अब 2019 है। इसका बेस ईयर भी 2019

[49:53] है। बुक्स में पुराना डाटा गिवन है 1986

[49:55] 87 वो अपडेट हो चुका है। वो अपडेट हो चुका

[49:58] है। ठीक है? तो ध्यान ये रखना है कि

[50:00] सीपीआई आईडब्ल्यू, सीपीआईएल और सीपीआई

[50:03] आरएल इन सबको रिलीज करने की जिम्मेदारी

[50:05] किसकी है? वो आपकी लेबर ब्यूरो मिनिस्ट्री

[50:08] ऑफ लेबर एंड एंप्लॉयमेंट की ही जिम्मेदारी

[50:09] है।

[50:12] राइट? हां हां मुदारी मैं पढ़ा रहा हूं

[50:14] टाइप्स ऑफ इनफ्लेशन। डोंट वरी डोंट वरी।

[50:16] तो यहां तक आपको सीपीआई समझ आया पहले ये

[50:18] बताओ।

[50:20] आपको सीपीए समझ आया यहां पे?

[50:26] ठीक है? अब आपको कुछ क्वेश्चंस ट्राई करने

[50:28] हैं। ठीक है? अब आपको कुछ क्वेश्चंस ट्राई

[50:30] करने हैं। कंज्यूमर के लेवल के ऊपर अक्षय

[50:32] मुझे कैसे पता लगेगा कि आपको महंगाई फील

[50:34] हो रही है या नहीं हो रही? ठीक है? एंड

[50:36] इनफैक्ट ना जो मैं बात यहां पे कर रहा था

[50:38] ये जो 4 + - 2% वाली ये 4 + - 2% कौन सा

[50:42] सीपीआई है? अब आप मुझे बताओ कौन सा

[50:43] इनफ्लेशन है ये? व्हाट इज 4 + - 2%? मैंने

[50:46] आपको बताया था कि इनफ्लेशन को इस रेंज

[50:48] मेंटेन करना है। ये कौन सी इनफ्लेशन की हम

[50:50] बात कर रहे हैं? अरे ये सीपीआई कंबाइंड की

[50:51] ही बात कर रहे हैं। इसी को ही हमें 4 + -

[50:53] 2% की रेंज में रखना होता था। ठीक है?

[50:58] ओके ओके ओके गुड गुड गुड यस यस यस। सीपीए

[51:02] आरएल का बेस ईयर 2019 है। गणेश 2019

[51:05] लेटेस्ट वाला लेटेस्ट वाला। बुक्स में गलत

[51:07] लिखा हुआ है। बुक्स में पुराना लिखा हुआ

[51:09] है। ये पिछले साल चेंज हो गया है। ठीक है?

[51:13] हां। सीपीआई में मैंने वेटेज बता दिया

[51:15] भाई। 308 गुड्स हैं, 50 सर्विज हैं आपकी।

[51:18] हां, एक चीज और पढ़नी है। उसके बाद हम

[51:19] क्वेश्चंस पे चलेंगे। एक आखरी चीज और

[51:21] पढ़नी है। मुझे आपको एक चीज और बतानी है।

[51:22] देखो, होता पता क्या है?

[51:26] एक्चुअली पता है क्या होता है?

[51:29] अगर हम बात करें फूड एंड फ्यूल वाले

[51:32] कॉमोनेंट्स की। ये अपने आप में काफी

[51:34] वोलेटाइल होते हैं। वोलेटाइल मतलब इनके

[51:36] दाम अचानक ऊपर नीचे होते रहते हैं। आज

[51:38] ज्यादा हैं, कल कम हो जाएंगे, फिर बढ़

[51:40] जाएंगे, फिर कम हो जाएंगे। तो यहां पर भी

[51:43] ना हम दो तरह से आप इनफ्लेशन को देख सकते

[51:45] हो। एक होती है आपकी हेडलाइन इनफ्लेशन, एक

[51:48] होती है कोर। एंड इनफैक्ट अगर आपको तीसरा

[51:49] भी देखना है आप तीसरा भी देख सकते हो। इट

[51:51] इज़ कॉल्ड एज व्हाट? इट इज़ कॉल्ड एज

[51:53] रिफाइंड कोर। मैं तीनों समझा देता हूं

[51:54] आपको।

[51:59] रिफाइंड कोर इनफ्लेशन। देखो,

[52:02] जब हम बात करते हैं ना हेडलाइन इनफ्लेशन

[52:04] की, जब हम बात करते हैं हेडलाइन इनफ्लेशन

[52:07] की, ठीक है ना? हेडलाइन इनफ्लेशन में क्या

[52:09] होता है? हम हर एक आइटम्स को इंक्लूड करते

[52:12] हैं। हर एक मतलब मेरे कहने का मतलब

[52:13] वोलेटाइल आइटम्स को भी इंक्लूड कर दिया।

[52:15] आपने फूड आइटम्स को, फ्यूल आइटम्स को जो

[52:17] वोलेटाइल आइटम्स होती है आपने उनको भी

[52:19] इंक्लूड कर लिया। उनको बोलते हैं हेडलाइन।

[52:21] पर आपको अगर ये देखना हो कि नहीं यार ये

[52:24] जो वोलेटाइल वाली आइटम है जिनमें अचानक

[52:26] बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव या बदलाव आता है

[52:28] उनको हटाकर आप बताओ। जब आप उनको हटाकर

[52:30] अपना इनफ्लेशन काउंट करते हो ना दैट वी

[52:32] कॉल्ड एज कोर इनफ्लेशन। ठीक है? तो कोर

[52:35] इनफ्लेशन में क्या हुआ? आपने जो वोलेटाइल

[52:37] आइटम्स थी अपने फूड एंड फ्यूल। फ्यूल बोल

[52:40] सकते हो या इसको एनर्जी भी बोल सकते हो।

[52:42] तो फूड एंड फ्यूल को हटाने के बाद जब आपके

[52:44] पास इनफ्लेशन निकल के आती है उसको हम

[52:46] बोलते हैं कोर इनफ्लेशन। अब आप मुझे एक

[52:48] सवाल का आंसर करो। आप मुझे एक सवाल का

[52:50] आंसर करो। ज्यादा वैल्यू में चेंज कौन सी

[52:54] वाली इनफ्लेशन के नहीं आएगा? हेडलाइन में

[52:57] नहीं आएगा ज्यादा चेंज या कोर में नहीं

[52:58] आएगा? ज्यादा स्टेबल कौन सी होगी? हेडलाइन

[53:01] या कोर?

[53:10] हम

[53:14] क्या लगता है हेडलाइन है एक और किस में

[53:17] ज्यादा चेंज नहीं आएगा

[53:40] आंसर इज़ कोर। कोर में ज्यादा चेंज नहीं

[53:43] आएगा। उसका रीज़न क्या है कोर में चेंज ना

[53:45] आने का? अरे भाई कोर में चेंज इसलिए

[53:47] ज्यादा नहीं आएगा क्योंकि जो चीजें बदलाव

[53:49] ज्यादा कर सकती थी फूड एंड फ्यूल वाली

[53:51] आइटम्स वो हमने पहले ही हटा दी। कोर में

[53:53] वो सब आया ही नहीं। जब कोर में स्टेबल

[53:55] वाली चीजें ही आई तो कोर ज्यादा स्टेबल

[53:57] होता है। कोर इनफ्लेशन ज्यादा स्टेबल होता

[53:59] है। हेडलाइंस इनफ्लेशन उतार-चढ़ाव उसमें आ

[54:02] सकते हैं। ठीक है? अब एक टर्म सर यहां पे

[54:05] और है। उसको हम बोलते हैं रिफाइंड कोर

[54:07] इनफ्लेशन। आप में से कोई बताना चाहेगा

[54:09] रिफाइंड कोर में क्या अंतर है? व्हाट इज द

[54:11] डिफरेंस बिटवीन कोर एंड रिफाइंड कोर? कोई

[54:13] कमेंट करके बताना चाहेगा? देखो आप प्लीज

[54:16] यहां पे समझना। आप यहां पे टेबल में बाकी

[54:19] सब चीजें भूल जाओ। इधर आपको देखने की

[54:21] जरूरत नहीं है। यह तो पुराना डेटा है। यू

[54:22] नो नीड टू गो थ्रू दिस। आप इधर ध्यान दो।

[54:25] इधर ध्यान दो। जब हम दोस्तों बात करते हैं

[54:28] ना, मेरी बात ध्यान से सुनना। मेरी बात

[54:30] ध्यान से सुनना। काफी सारे लोगों को लगता

[54:33] है कि जब हम फूड बात करते हैं तो खाने

[54:34] पीने की आइटम बात करते हैं। हां, ठीक है।

[54:36] और लोगों को लगता है फ्यूल का मतलब है

[54:38] पेट्रोल डीजल। पर आप बिल्कुल गलत हो। आप

[54:41] बिल्कुल गलत हो। अगर आप ये लग रहा है आपको

[54:42] कि फ्यूल का मतलब आपका पेट्रोल डीजल है।

[54:44] नहीं। फ्यूल का मतलब यहां पे आपका यहां पे

[54:47] जो कॉम्पोनेंट यहां पे है ना फ्यूल एंड

[54:49] लाइट। यह कॉम्पोनेंट में क्या आता है? इस

[54:51] कॉमोनेंट में आपका इलेक्ट्रिसिटी, आपका

[54:54] एलपीजी, आपका केरोसिन ये सारी चीजें आती

[54:57] हैं आपकी फ्यूल एंड लाइट के अंदर। ये सारी

[55:00] चीजें आती हैं आपकी फ्यूल एंड लाइट के

[55:03] अंदर। ठीक है? हां हां बिल्कुल एक

[55:05] स्टूडेंट स्क्रॉल विद विवेक। स्क्रॉल विद

[55:07] विवेक और मानवी ने बिल्कुल सही आंसर दिया

[55:09] है। वेरी गुड। वेरी गुड। अब पता पॉइंट पता

[55:12] है क्या आता है? पेट्रोल एंड डीजल कहां

[55:14] आता है? फिर सर देखो पेट्रोल एंड डीजल ना

[55:16] दरअसल में यहां पर आता है मिसलेनियस में।

[55:18] मिसलेनियस में कॉम्पोनेंट आता है

[55:19] ट्रांसपोर्टेशन का। इस ट्रांसपोर्टेशन में

[55:21] आपका इंक्लूड होता है पेट्रोल एंड डीजल।

[55:23] तो मेरी बात ध्यान से सुनना। कोर इनफ्लेशन

[55:26] में सॉरी जब हेडलाइन से आप कोर पे पहुंचे

[55:29] ना आपने फूड एंड फ्यूल को हटाया। आपने

[55:31] पेट्रोल डीजल को नहीं हटाया। तो पेट्रोल

[55:34] डीजल होता है कोर के अंदर भी। तो अगर आप

[55:38] कोर में से अगर आप क्या करो? अगर आप कोर

[55:42] में से ठीक है? अगर आप कोर में से ये सारी

[55:46] चीजें भी हटा दो। अगर आप कोर में से अपना

[55:50] पेट्रोल, डीजल ये सब वाली आइटम्स भी हटा

[55:53] दोगे ना तो आपके पास जो बन के आएगा दैट वी

[55:56] कॉल्ड एज रिफाइंड कोर। अरे कोर इंडस्ट्रीज

[55:59] अलग हैं। उस पे आएंगे। उस पे भी आएंगे एयट

[56:01] कोर इंडस्ट्रीज। वो एक अलग कांसेप्ट है।

[56:03] वो एक अलग कांसेप्ट है। समझे या नहीं?

[56:05] फ्यूल में आता है एलपीजी, केरोसिन,

[56:09] इलेक्ट्रिसिटी। ये सारी बातें आती हैं

[56:10] आपके फ्यूल के अंदर। ठीक है? फ्यूल का

[56:12] मतलब पेट्रोल, डीजल नहीं है। फ्यूल का

[56:14] मतलब केरोसिन, इलेक्ट्रिसिटी, एलपीजी ये

[56:17] वाली आइटम्स हैं। समझे? तो पॉइंट पता है

[56:19] क्या है? आपके पास एक था हेडलाइन इंस्पेशन

[56:22] जिसमें आपने क्या कर दिया? आपने जो भी

[56:24] आइटम्स थे सबको देख लिया। कोर में आपने

[56:26] क्या किया? कोर में आपने क्या किया?

[56:28] हेडलाइन में से आपने माइनस कर दिया फूड

[56:32] एंड फ्यूल वाले वोलेटाइल आइटम्स को। फिर

[56:35] एक तीसरा कॉम्पोनेंट आया रिफाइंड कोर।

[56:37] वहां पर कैसे पहुंचे? कोर में से जब आप

[56:39] पेट्रोल को एंड डीजल को माइनस कर देंगे तब

[56:42] आप पहुंचोगे अपने रिफाइंड कोर में।

[56:46] इज दिस क्लियर?

[56:48] अब आप मुझे बताओ

[56:51] ये मैंने तीन चीजें लिखी। दिस इज़ ए, दिस

[56:55] इज़ बी, दिस इज़ C। आप मुझे इनका स्टेबिलिटी

[56:59] ऑर्डर बताओ। इनमें सबसे ज्यादा स्टेबल कौन

[57:01] सा है? फिर दूसरे नंबर पे स्टेबल कौन सा

[57:03] है? फिर तीसरे नंबर पे स्टेबल कौन सा है?

[57:05] इन तीनों को अरेंज करो स्टेबिलिटी ऑर्डर

[57:07] के अंदर। इन तीनों को अरेंज करो

[57:10] स्टेबिलिटी ऑर्डर के अंदर।

[57:12] हां हां अक्षय फूड तो वोलेटाइल है ही है।

[57:14] बिल्कुल है वोलेटाइल।

[57:28] आपको पूरी स्क्रीन दिख रही है ना? कोई कट

[57:30] तो नहीं रहा पीछे ऊपर पोर्शन।

[57:33] पोर्शन कोई कट तो नहीं रहा। हां बिल्कुल।

[57:35] देखो सिंपल है। C इज ग्रेटर मतलब

[57:37] स्टेबिलिटी की बात कर रहा हूं। स्टेबिलिटी

[57:39] की टर्म्स में C इज़ मोर स्टेबल एज़ कंपेयर

[57:42] टू B एंड A। ठीक है? रिफाइंड कोर इनफ्लेशन

[57:45] ज्यादा स्टेबल है। कोर इनफ्लेशन उससे कम

[57:47] स्टेबल है और जो आपका

[57:51] हेडलाइन है वो सबसे कम स्टेबल है। क्योंकि

[57:53] इसमें वोलेटाइल आइटम्स हैं। इसमें थोड़ी सी

[57:55] वोलेटाइल आइटम बची। इसमें बिल्कुल भी नहीं

[57:57] बची। ये हमारा ऑर्डर ऐसे होता है। ये

[58:00] हमारा ऑर्डर ऐसे होता है। गुड गुड गुड।

[58:02] बहुत बढ़िया। अब आएंगे अपने क्वेश्चंस की

[58:05] तरफ। ठीक है? अब आपकी बारी।

[58:10] पहले इसको ट्राई करना। इस क्वेश्चन का

[58:12] पर्पस लाने का पता क्या है? मैं आपको

[58:14] पीपीआई थोड़ा और डिटेल में समझाना चाहता

[58:16] हूं। पर मैं चाहता हूं एक बार आप भी ट्राई

[58:17] करो। नहीं होगा। कोई घबराने वाली बात

[58:19] नहीं। मैं आपको बताऊंगा। पर एक बार आप

[58:21] ट्राई जरूर करो।

[59:04] बहुत बढ़िया बहुत ही बढ़िया गुड गुड गुड

[59:07] देखो मैंने आपको बताया था क्या मैंने

[59:08] बताया था एक्चुअली ना मैंने आपको बताया था

[59:11] कि होलसेल प्राइस इंडेक्स में कुछ

[59:12] समस्याएं हैं। हमें उन समस्याओं को ठीक

[59:14] करना है। सवाल आता है समस्याएं क्या थी?

[59:16] जैसे मैंने आपको बताया एक समस्या तो ये थी

[59:18] कि आपका जो डब्ल्यूपीआई के अंदर क्या था?

[59:22] डब्ल्यूपीआई में सर्विज इंक्लूड नहीं होती

[59:23] थी। डबल काउंटिंग की दिक्कत थी।

[59:26] इनडायरेक्ट टैक्सेस का इंपैक्ट को हटाता

[59:29] नहीं था वो। तो सही इनफ्लेशन कई बार नहीं

[59:31] पता लगती थी। राइट? ये सारी समस्याएं थी

[59:34] डब्ल्यूबीआई के अंदर। इसको रिॉल्व करने के

[59:36] लिए सरकार ने दो कमेटीज़ बनाई थी। एक पहले

[59:39] थी बीए एन गोलदार कमेटी और फिर अभी यहां

[59:42] पे रमेश चंद जो कमेटी है उसको बनाया गया

[59:44] था। अब इस कमेटी के हिसाब से अगर हम बात

[59:47] करेंगे ना तो पीपीआई इज़ अ बेटर मेजर।

[59:50] प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स। मैंने आपको वो

[59:53] चेन दिखाई थी मैन्युफैक्चरर, होलसेलर,

[59:56] रिटेलर और आपका कंज्यूमर। यही था। अब

[59:59] इसमें पता क्या होता है? प्रोड्यूसर

[01:00:01] प्राइस इंडेक्स में सबसे पहली बात तो

[01:00:02] पीपीआई में आपका गुड्स भी आएंगी और सर्विज

[01:00:06] भी आएंगी। तो भाई जो डब्ल्यूपीआई वाली

[01:00:09] समस्या थी ना केवल गुड्स को देखने की वो

[01:00:11] यहां पे हट जाएगी। इस बात को आप ध्यान

[01:00:12] रखेंगे। दूसरी बात।

[01:00:16] दूसरी बात आप ध्यान रखो। पहला कह रहा है

[01:00:18] कि यहां पर गुड्स एंड सर्विज। हां हां

[01:00:19] इसमें ना दो तरह का पीपीआई होता है। एक

[01:00:21] होता है इनपुट पीपीआई एक होता है आउटपुट

[01:00:23] पीपीआई। ठीक है ना? तो बिल्कुल इनपुट

[01:00:26] स्टेज के ऊपर भी और बनने के बाद जो आपका

[01:00:28] आउटपुट जिस पे सेल होगा तो वो आउटपुट

[01:00:31] पीपीआई ये दोनों को कैप्चर करेगा। तो

[01:00:32] इनपुट पीपीआई भी यहां पे होगा और आउटपुट

[01:00:34] पीपीआई भी होगा। बिल्कुल। इसीलिए यहां पर

[01:00:36] क्या होगा? गुड्स एंड सर्विस दोनों को

[01:00:37] इंक्लूड किया जाएगा। इसीलिए स्टेटमेंट

[01:00:39] आपका बिल्कुल ठीक है। पहला। दूसरा कह रहा

[01:00:41] है कि देखो पीपीआई क्या करता है? यहां पर

[01:00:44] फोकस करते हैं जितना प्राइस प्रोड्यूसर

[01:00:46] रिसीव कर रहा है अदर रिटेल। हां बिल्कुल।

[01:00:48] सीपीआई में क्या होता है? सीपीआई में

[01:00:49] रिटेल की बात करते हैं। पीपीआई में हम

[01:00:51] यहां पे बात करेंगे अपने प्रोड्यूसर्स की।

[01:00:53] ये भी बात ठीक है। तीसरा कह रहा है कि

[01:00:55] पीपीआई में केवल फिनिश्ड गुड्स होती हैं।

[01:00:57] नहीं यहां पर इंटरमीडिएट गुड्स भी होती

[01:00:59] हैं। इनपुट्स भी होते हैं। इसीलिए दो

[01:01:00] स्टेटमेंट अपने आप में ठीक है। तीसरा गलत

[01:01:02] है। ठीक है? हां। जोया ने एक लाइन लिखी है

[01:01:05] जो कि आप सबको अपने कॉपीज़ में भी लिखनी

[01:01:07] है। एक्चुअली मैंने यहां पे लिखी हुई है।

[01:01:08] जोया ने बिल्कुल सही लाइन लिखी है। इसको

[01:01:10] लाइन आप नोट करेंगे। पीपीआई एक्सक्लूड्स।

[01:01:14] वेरी गुड ज़ोया। जहां से भी आपने पढ़ा है

[01:01:16] अच्छी जगह से पढ़ा है। पीपीआई एक्सक्लूड्स

[01:01:18] इंपैक्ट ऑफ फिस्कल पॉलिसी।

[01:01:25] ये लाइन आप नोट करेंगे। बिल्कुल ठीक लाइन

[01:01:27] लिखी है इन्होंने। पीपीआई एक्सक्लूड्स

[01:01:29] इंपैक्ट ऑफ फिस्कल पॉलिसी। इसका मतलब क्या

[01:01:30] है? देखो मैंने आपको बोला ना जब आप पीपीआई

[01:01:33] से डब्ल्यूपीआई चले जाओगे, वहां पे जीएसटी

[01:01:35] का इफ़ेक्ट भी आ जाएगा। पर पीपीआई में वो

[01:01:37] सब नहीं आएगा। पीपीआई में वो सब नहीं

[01:01:39] आएगा। इसीलिए ये लाइन यहां पे आएगी।

[01:01:40] पीपीआई एक्सक्लूड्स द इंपैक्ट ऑफ़ फिस्कल

[01:01:43] पॉलिसी। समझे मेरी बात को? बाकी जो सारे

[01:01:45] पॉइंट्स हैं मैंने यहां पे लिख ही दिए हुए

[01:01:46] हैं। ठीक है ना? इनपुट पीपीआई समझा दिया।

[01:01:48] आउटपुट पीपीआई समझ गए। पीपीआई रॉ मटेरियल

[01:01:50] का कॉस्ट चेंज आया। इंटरमीडिएट गुड्स में

[01:01:52] क्या चेंज आया वो देख लेगा। आउटपुट पीपीआई

[01:01:54] जो फिनिश्ड प्रोडक्ट्स बन के निकले

[01:01:56] प्रोड्यूसर से उसमें क्या चेंजज़ आए वो सब

[01:01:58] आ जाएगा। और फोकस क्या है पीपीआई का?

[01:02:01] गुड्स एंड सर्विज के ऊपर फोकस है। ये

[01:02:03] टैक्सेस को एक्सक्लूड करता है। ये जो लाइन

[01:02:06] यहां पे लिखी है ना ये वाली लाइन ये लाइन

[01:02:07] और इसका लाइन का मतलब बिल्कुल सेम है।

[01:02:09] यहां पर आपका टैक्सेस आपकी सब्सिडीज जो

[01:02:11] हैं यहां पर इसको हटा दिया गया है। ठीक है

[01:02:14] ना? ठीक है? और पीपीआई एक अर्ली इंडिकेटर

[01:02:18] है। क्योंकि देखो यार सुनना मेरी बात।

[01:02:20] पहले प्रोड्यूसर से कोई चीज़ बन के निकली।

[01:02:22] वो होलसेलर के पास जाएगी। फिर रिटेलर के

[01:02:23] पास, फिर कंज्यूमर के पास। तो पीपीआई में

[01:02:26] अगर इनफ्लेशन आ गया ना वो धीरे-धीरे करते

[01:02:28] करते आपका सीपीआई तक भी चला जाएगा। इस बात

[01:02:30] को ध्यान रखना। इसीलिए पीपीआई एक अर्ली

[01:02:32] इंडिकेटर है ट्रेंड्स का कि कैसे चेंजेस

[01:02:34] आने वाले हैं कंज्यूमर से पहुंचने से पहले

[01:02:36] ही हमें पता लग जाएगा। ठीक है? तो पीपीआई

[01:02:39] में सिर्फ फिनिश्ड गुड्स ही नहीं बल्कि

[01:02:41] आपकी इंटरमीडिएट गुड्स, रॉ मटेरियल्स ये

[01:02:43] सब भी इंक्लूड होगा। और इससे हम कहीं ना

[01:02:45] कहीं देख पाएंगे कैसे-कैसे इनफ्लेशन यहां

[01:02:47] पे चेंज हो रही है। इज इट फाइन?

[01:02:51] ओके?

[01:02:52] ठीक है। ठीक है। ठीक है। तो इसका आंसर

[01:02:54] क्या बनेगा? इसका आंसर बनेगा ऑप्शन बी

[01:02:56] ओनली टू। इसका आंसर बनेगा ऑप्शन बी ओनली

[01:02:59] टू।

[01:03:01] खुशी इनपुट पीपीआई क्या होता है? देखो

[01:03:04] प्रोड्यूसर है ना प्रोड्यूसर प्रोड्यूसर

[01:03:06] के पास गुड्स आई व्हेन द गुड्स एंटर द

[01:03:09] प्रोडक्शन प्रोसेस वहां पर अगर आप चेक कर

[01:03:11] रहे हो दैट इज़ इनपुट पीपीआई। फिर

[01:03:12] प्रोड्यूसर ने वस्तुएं बना दी। वहां से जब

[01:03:14] एग्जिट हुई तो वहां पर अगर आप इनफ्लेशन

[01:03:16] चेक कर रहे हो उसको बोलेंगे हम आउटपुट

[01:03:18] पीपीआई।

[01:03:20] तो सरकार को जो पुराने प्रॉब्लम्स थे ना

[01:03:23] कि सर्विज नहीं है डब्ल्यूपीआई के अंदर।

[01:03:25] डबल काउंटिंग की दिक्कत है। वहां पर

[01:03:27] फिस्कल पॉलिसी का इंपैक्ट आता है। वो सारी

[01:03:29] प्रॉब्लम यहां पे सॉल्व होती हुई देखने को

[01:03:31] मिल रही हैं। इसीलिए सरकार सोच रही है कि

[01:03:33] डब्ल्यूपीआईसी की जगह हम यहां पे पीपीए की

[01:03:35] तरफ यहां पे शिफ्ट हो जाते हैं। ठीक है?

[01:03:38] फिस्कल पॉलिसी का इफेक्ट इसीलिए नहीं आता

[01:03:41] क्योंकि यहां पर प्रोड्यूसर लेवल पे

[01:03:42] जीएसटी का इंपैक्ट नहीं है। फिस्कल पॉलिसी

[01:03:44] क्या है? टैक्सेस सब्सिडीज। इसका इफेक्ट

[01:03:47] यहां पे आएगा ही नहीं। डब्ल्यूपीए तक

[01:03:48] आते-आते जीएसटी वगैरह का इंपैक्ट आ जाएगा।

[01:03:50] पीपीआई में नहीं आएगा इसलिए नहीं आता।

[01:03:53] ठीक है? इसको ट्राई करो।

[01:03:57] क्या हो गया अभिषेक? आपको इशिका जिंदल की

[01:03:58] याद आ रही है क्या? आप पढ़ाई पे ध्यान दे

[01:04:00] लो भाई।

[01:04:43] ओके ओके ओके ओके ओके अब देखो इस क्वेश्चन

[01:04:46] को करेंगे आंसर करेंगे आंसर पहले मैं थोड़ा

[01:04:49] आपको इनफ्लेशन के इफेक्ट समझा दूं

[01:04:54] इनफ्लेशन के इफेक्ट आपको समझा दूं मैं

[01:04:56] थोड़ा। देखो

[01:05:00] मेरी बात ध्यान से सुनना। मेरी बात

[01:05:01] देखो मेरी बात ध्यान से सुनना। मेरी बात

[01:05:01] ध्यान से सुनना यहां पे।

[01:05:05] इनफ्लेशन से कुछ लोगों को नुकसान होता है।

[01:05:07] उनको हम लूजर्स बोलते हैं। इनफ्लेशन से

[01:05:09] कुछ लोगों को फायदा होता है। उनको हम

[01:05:10] गेनर्स बोलते हैं या बेनिफिट बोलते हैं।

[01:05:12] सुनना मेरी बात ध्यान से। सबसे पहले ये

[01:05:14] बोरोअर और क्रेडिटर वाला कांसेप्ट समझ

[01:05:16] लेना एक बार।

[01:05:18] देखो सिंपल है। सिंपल है। जैसे मान लो

[01:05:20] मेरे पास ₹200 थे। ठीक है ना? अब जैसे

[01:05:22] हमारे साथ कौन है? हमारे साथ हैं रितेश

[01:05:25] पांडे। ठीक है ना? सॉरी नितेश पांडे 1210।

[01:05:28] अब देखो मैं हूं यहां पे। मैंने पता है

[01:05:30] क्या किया? मैंने नितेश पांडे जी को क्या

[01:05:32] दिए? ये ₹200 दे दिए। ठीक है? इन्होंने

[01:05:35] मुझे कहा कि सर मैं आपको ना 1 साल बाद

[01:05:38] ₹220 दे दूंगा। मैंने कहा ठीक है भाई दे

[01:05:39] देना। बढ़िया बात है। बढ़िया बात है।

[01:05:41] अच्छी बात है। तो मैंने पता है यह कब

[01:05:44] मिलेंगे? मुझे 1 साल बाद मिलेंगे आफ्टर वन

[01:05:46] ईयर। तो देखो यहां पर इस केस में मैं कौन

[01:05:48] हुआ? मैं सर लोन देने वाला हूं। तो मैं

[01:05:50] क्रेडिटर हूं। हां बिल्कुल ठीक है। और ये

[01:05:52] भाई साहब क्या है? ये डेटर हैं क्योंकि

[01:05:54] इन्होंने मेरे से पैसे उधार लिए हैं। हां

[01:05:56] बिल्कुल ठीक है सर। बिल्कुल परफेक्ट है।

[01:05:58] अब देखो यहां पे अब मान लो मान लो आज आज

[01:06:02] जैसे मैंने आपको अभी यहां पे नींबू दिखाए

[01:06:04] ना यहां पे। हां। ठीक है? जैसे आप लोगों

[01:06:06] ने ये नींबू देखें। अब ये नींबू बड़े महंगे

[01:06:08] हैं आज। आज कितने के हैं? आज ये नींबू है

[01:06:11] 1 किलो ₹200 के। ठीक है? आज के दिन ये है

[01:06:15] आज के दिन। ठीक है? तो आज के दिन ना मेरे

[01:06:18] पास ये जो ₹200 थे ना इस ₹200 के नोट के

[01:06:22] साथ मैं 1 किलो नींबू खरीद सकता हूं आज के

[01:06:25] दिन। ठीक है? अब 1 साल बाद क्या होगा सर?

[01:06:28] सर जब 1 साल बीत जाएगा ना मेरे पास कितने

[01:06:31] पैसे आ जाएंगे? मेरे पास होंगे 220। मैं

[01:06:34] तो बहुत खुश हो जाऊंगा। बट नहीं। मैं गया

[01:06:36] मार्केट नींबू खरीदने। जब मैं मार्केट गया

[01:06:39] नींबू खरीदने। मैंने रियलाइज किया कि ये

[01:06:41] जो 1 किलो नींबू हैं, अब यह ₹440 किलो के

[01:06:45] हो चुके हैं। 1 किलो नींबू ₹440 किलो हो

[01:06:48] चुके हैं। अब मैं कितने नींबू खरीद पाऊंगा

[01:06:50] उस ₹200 के नोट के साथ? सॉरी 220 के साथ।

[01:06:53] 220 होना है अब तो। सर 220 के साथ अब तो

[01:06:55] आप 1/2 किलो ही नींबू खरीद पाओगे। तो

[01:06:58] नोटिस करो यार पहले मैं 1 किलो नींबू खरीद

[01:07:01] पा रहा था। अब मैं 1/2 किलो नींबू खरीद पा

[01:07:03] रहा हूं। ऐसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिए हुआ

[01:07:05] क्योंकि मैंने 1 साल के अंदर इनफ्लेशन

[01:07:07] एक्सपीरियंस किया। महंगाई का बढ़ने का

[01:07:10] नुकसान जो है ना वो किसके ऊपर आया?

[01:07:13] क्रेडिटर। मुझे नुकसान हुआ। और मेरा

[01:07:15] नुकसान मतलब इस पर्सन का फायदा। तो आपको

[01:07:19] ध्यान ये रखना है कि जब हम बात करते हैं

[01:07:21] ना इनफ्लेशन की तो इनफ्लेशन से आपके

[01:07:23] क्रेडिटर को नुकसान होता है। वेयर एस जब

[01:07:26] हम बात करते हैं हमारे डेटर की इन भाई

[01:07:28] साहब को यहां पे फायदा होता है। ठीक है?

[01:07:30] देखो ऐसा ही सिमिलर कांसेप्ट बॉन्ड का भी

[01:07:32] होता है। क्योंकि आप एक बात अंडरस्टैंड

[01:07:34] करो। जिन लोगों को बॉन्ड का एक बेसिक

[01:07:36] आईडिया पता है दे नो। एक होता है कौन

[01:07:38] दोस्तों? एक होता है हमारा

[01:07:41] बॉन्ड होल्डर।

[01:07:44] एक होता है हमारा बॉन्ड इशूअर।

[01:07:47] राइट? एक होता है बॉन्ड होल्डर और एक होता

[01:07:49] है बॉन्ड इशूअर। बॉन्ड होल्डर कौन है?

[01:07:53] मतलब बॉन्ड इशूर कौन है? जिसने बॉन्ड इशू

[01:07:55] किया भाई जो बंदा बॉन्ड इशू करता है, जो

[01:07:57] सरकार या कंपनी बॉन्ड इशू करती है ना वो

[01:07:59] पैसा उधार लेती है। और हम लोग बॉन्ड होल्ड

[01:08:03] करते हैं। हम लोग उनको पैसा देंगे। तो

[01:08:05] एक्चुअली क्रेडिटर इज़ सिमिलर टू बॉन्ड

[01:08:07] होल्डर। डेटर इज़ सिमिलर टू बॉन्ड इश्वर।

[01:08:09] तो अगर क्रेडिटर को नुकसान हुआ था तो

[01:08:11] बॉन्ड होल्डर को भी नुकसान होगा। अगर डेटर

[01:08:14] को फायदा हुआ था तो बॉन्ड इशूर को भी

[01:08:16] फायदा होगा। तो यही बात यहां पे लिखी है

[01:08:18] कि डेटर को फायदा होता है। बॉन्ड इशूर को

[01:08:20] फायदा होता है और क्रेडिटर को नुकसान होता

[01:08:23] है और आपके बॉन्ड होल्डर को भी नुकसान

[01:08:25] होता है। बाकी इसके अलावा अगर मैं बात

[01:08:27] करूं।

[01:08:31] ठीक है? बाकी अगर मैं बात करूं यहां पे तो

[01:08:33] आप नोटिस कर पाओगे कि जिनकी फिक्स सैलरी

[01:08:35] है मान लो भाई मेरी ₹10,000 सैलरी थी और

[01:08:38] 10,000 ही रहे। महंगाई से मुझे तो बड़ा

[01:08:40] नुकसान होगा। जिनको पेंशन पर डिपेंडेंट

[01:08:42] है, जो रिटायरीज हैं, उनको भी यहां पर

[01:08:44] नुकसान होता है। अब एक सवाल आता है कि सर

[01:08:46] एक्सपोर्टर को क्या होगा? एक्सपोर्टर को

[01:08:49] फायदा होगा या नुकसान होगा? देखो मेरी बात

[01:08:51] ध्यान से सुनना। मेरी बात ध्यान से सुनना।

[01:08:52] ये घड़ी थी। ये घड़ी थी। मैं घड़ी

[01:08:55] एक्सपोर्ट करता था पहले। हां, ठीक है। अगर

[01:08:58] महंगाई हो जाएंगी ना तो मेरी घड़ी महंगी

[01:09:00] हो जाएगी। मेरी घड़ी महंगी हो जाएगी तो

[01:09:02] मेरी घड़ी विदेशों में महंगी बिकेगी। इसको

[01:09:05] हम बोलते हैं देयर इज दे लूज देयर

[01:09:07] एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस। वो जो

[01:09:09] एक्सपोर्ट का फायदा हो सकता था ना मुझे

[01:09:11] सस्ते प्रोडक्ट की वजह से अब वो खत्म हो

[01:09:13] गया। अगर मेरा प्रोडक्ट महंगा हो जाएगा तो

[01:09:16] मेरी एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस खत्म हो

[01:09:18] जाएगी। अब मेरे प्रोडक्ट यहां पे कोई नहीं

[01:09:20] खरीदेगा। तो एक्चुअल में एक्सपोर्टर को

[01:09:22] यहां पे नुकसान होता है। एक्सपोर्टर को

[01:09:24] नुकसान होता है। क्या ये बात आपको समझ आई?

[01:09:27] कि किसको नुकसान किसको फायदा? हां जी।

[01:09:30] किसको नुकसान किसको फायदा? क्या ये बात

[01:09:32] सबको क्लियर है? हां सर। ये बात हमें

[01:09:34] क्लियर है। अगर ये बात आपको क्लियर है तो

[01:09:36] फिर ये क्वेश्चन भी क्लियर होगा आपको। फिर

[01:09:38] ये आपको क्वेश्चन भी क्लियर होगा। क्या था

[01:09:40] क्वेश्चन? ये

[01:09:42] क्या था क्वेश्चन? ये क्वेश्चन यहां पे ये

[01:09:44] था। पहला स्टेटमेंट कह रहा है कि इनफ्लेशन

[01:09:46] इज़ राइज़ इन प्राइसेस व्हिच कैन बी

[01:09:48] ट्रांसलेटेड डिक्लाइन ऑफ़ परचेसिंग पावर ऑफ़

[01:09:50] टाइम। बिल्कुल। यहां पर परचेजिंग पावर कम

[01:09:53] होती है इनफ्लेशन में। दैट इज़ राइट। सेकंड

[01:09:56] देखो। कह रहा है इनफ्लेशन बढ़ने से

[01:09:58] क्रेडिटर को फायदा होता है। नहीं भाई साहब

[01:10:01] डेटर को फायदा होता है। क्रेडिटर को

[01:10:02] नुकसान होता है। इसीलिए सेकंड स्टेटमेंट

[01:10:04] अपना गलत है। तो पहला स्टेटमेंट आपका वन

[01:10:07] ओनली इज़ द राइट आंसर। उज्जवल आप चिंता मत

[01:10:10] करो। आगे मैं बॉन्ड समझाऊंगा। जब हम

[01:10:13] फाइनेंसियल मार्केट्स पे आएंगे तो उस टाइम

[01:10:15] आपको बॉन्ड का कांसेप्ट भी समझ आ जाएगा।

[01:10:17] ठीक है? तो आपको बस उस टाइम देखना होगा कि

[01:10:19] हां यार बॉन्ड होल्डर किसको बोलते थे। कई

[01:10:21] बच्चों ने बिल्कुल नहीं पढ़ा होगा। एक

[01:10:23] बच्चा पूछ रहा है डेटर को फायदा कैसे

[01:10:24] होगा? अरे भाई एक का नुकसान दूसरे का

[01:10:26] फायदा इनफ्लेशन की वजह से उसको फायदा हुआ

[01:10:28] नहीं तो बहुत महंगा होता।

[01:10:32] ठीक है सर एक और क्वेश्चन ट्राई करेंगे।

[01:10:34] बहुत ईजी है ये वाला बताओ। ये क्वेश्चन के

[01:10:37] माध्यम से कई सारे कांसेप्ट्स हम सीखते

[01:10:38] रहेंगे।

[01:11:10] देखो ये जो टर्म है ना स्टैक फ्लेशन इसको

[01:11:14] थोड़ा समझते हैं। इसको जरा समझते हैं स्टक

[01:11:17] फ्लेशन को। देखो इस पे आते हैं।

[01:11:24] देखो स्टफिलेशन पता क्या होता है? स्टकशन

[01:11:27] एक बहुत ही सिंपल टर्म है। स्टकशन दरअसल

[01:11:29] में यहां पर कुछ वर्ड्स को जोड़ के बना

[01:11:31] है। एक है वर्ड स्टैग्नेट और एक है

[01:11:33] इन्फ्लेशन। स्टैग्नेंट क्या है? इकोनॉमिक

[01:11:36] ग्रोथ। जब आपकी इकोनॉमिक ग्रोथ स्टैग्नेंट

[01:11:39] हो जाती है। मतलब इकोनॉमिक अर्थव्यवस्था

[01:11:42] जो है वो आगे नहीं बढ़ पा रही। इकॉनमी

[01:11:44] रुकी हुई है। राइट? स्टैगनेट इकॉनमी ग्रोथ

[01:11:47] और साथ ही साथ महंगाई भी बहुत ज्यादा है।

[01:11:50] और साथ ही साथ आपकी बेरोजगारी भी ज्यादा

[01:11:52] है। जब ये तीनों कंडीशंस मिल जाती है ना

[01:11:54] उसको हम बोलते हैं स्टैगफ्लेशन। मतलब

[01:11:56] महंगाई भी ज्यादा है, बेरोजगारी भी ज्यादा

[01:11:58] है और अर्थव्यवस्था आगे नहीं बढ़ पा रही।

[01:12:01] वो रुकी हुई है अर्थव्यवस्था। इस सिचुएशन

[01:12:03] को हम बोलते हैं स्टैग फ्लेशन। अब ये

[01:12:06] स्टैग्लेशन क्या इंडिया में कभी हुआ है?

[01:12:09] हां बिल्कुल कई बार हुआ है और अभी लेटेस्ट

[01:12:12] वाला जब हुआ था वो कोविड के समय हुआ था

[01:12:14] क्योंकि आप कोविड का समय देखो कोविड के जो

[01:12:16] छ महीने थे ना अप्रैल 2020 से लेकर सितंबर

[01:12:20] 2020 ये छ महीने हमारी अर्थव्यवस्था नीचे

[01:12:22] गिरी थी तो इकोनमिक ग्रोथ स्टैगेंट थी या

[01:12:25] इवन व्हेन डिक्लाइनिंग इकोनमिक ग्रोथ भी

[01:12:26] कह सकते हो आप इसको और उस टाइम बेरोजगारी

[01:12:28] भी ज्यादा थी और उस टाइम के ऊपर इनफ्लेशन

[01:12:30] भी ज्यादा थी तो वो सिचुएशन आपकी स्टक

[01:12:32] इनफ्लेशन यहां पे कहलाती है। अच्छा एक

[01:12:36] बच्चा पूछ रहा है कि फिलिप्स कर्व क्या सर

[01:12:37] देखो Philipsk कर्व ना पता बहुत ही

[01:12:39] इंटरेस्टिंग है। यहां पे आप नोटिस करना।

[01:12:42] Philipsk पता है क्या बोलता है? Philipsk

[01:12:44] बोलता है इनफ्लेशन और अनइंप्लॉयमेंट रेट

[01:12:46] का वो लिंक निकालता है कि इनफ्लेशन और

[01:12:48] अनइंप्लॉयमेंट रेट आखिर कैसे लिंक्ड है?

[01:12:51] तो प्लीज यहां पे ध्यान से देखना।

[01:12:53] फिलिप्स कर्व ये बोलता है कि जब इनफ्लेशन

[01:12:56] ज्यादा होगा ना तो उस टाइम के ऊपर मतलब

[01:12:59] अनइंप्लॉयमेंट रेट कम होगा। इनफ्लेशन और

[01:13:02] अनइंप्लॉयमेंट का रिश्ता उल्टा है। ऐसा

[01:13:04] फिलिप्स का बोलता है। क्या बोलता है?

[01:13:06] इनफ्लेशन और अनइंप्लॉयमेंट का रिश्ता

[01:13:08] उल्टा है। जब अनइंप्लॉयमेंट कम है तो

[01:13:11] इनफ्लेशन ज्यादा है। और जब अनइंप्लॉयमेंट

[01:13:13] बढ़ गया है तो उस टाइम आपको इनफ्लेशन कम

[01:13:15] देखने को मिलेगा। तो इनफ्लेशन और

[01:13:17] अनइंप्लॉयमेंट का रिश्ता एग्जैक्टली

[01:13:19] अपोजिट होता है। ऐसा यहां पे फिलिप्स कर्व

[01:13:21] यहां पे बोलता है दैट दे हैव एन इनवर्स

[01:13:23] रिलेशन। अब पॉइंट आता है क्या फिलिप्स

[01:13:26] कर्व की बात बिल्कुल सही है? आंसर इज़ नो।

[01:13:28] इनकी पूरी बात सही नहीं है। क्योंकि आप

[01:13:30] देखो अभी मैंने आपको स्टकशन पढ़ाया और

[01:13:33] स्टक मैंने आपको यही समझाया कि एक ऐसा

[01:13:35] टाइम हो सकता है जब इकॉनमी स्टैगेंट हो।

[01:13:38] इनफ्लेशन हाई हो और अनइंप्लॉयमेंट भी हाई

[01:13:41] हो। है ना? स्टकशन में ऐसा ही होता है।

[01:13:43] बेरोजगारी भी ज्यादा और महंगाई भी ज्यादा।

[01:13:45] पर फिलिप्स क्या बोलते हैं? ये बोलते हैं

[01:13:46] कि नहीं नहीं इनफ्लेशन और अनइंप्लॉयमेंट

[01:13:48] तो उल्टे होते हैं। अगर ये उल्टे होते तो

[01:13:50] स्टैफ्लेशन कैसे आता? समझे मेरी बात को?

[01:13:53] इसीलिए आप कह सकते हो कि जो स्टक फ्लेशन

[01:13:55] वाली सिचुएशन है ना वो यहां पूरी तरह से

[01:13:57] फिलिप्स कर्व को फॉलो नहीं करती है। तो

[01:13:59] स्टैक फ्लेशन गोज़ अगेंस्ट द कांसेप्ट ऑफ

[01:14:01] फिलिप्स कर्व। ये बात भी आप यहां पे ध्यान

[01:14:03] में रखेंगे।

[01:14:08] इज़ इट क्लियर?

[01:14:11] ठीक है? तो अगर हम उस क्वेश्चन पे भी चलो

[01:14:14] आ जाएंगे। पर कुछ और मैं कांसेप्ट भी आपको

[01:14:16] छोटा-छोटा बता देता हूं। जैसे एक कांसेप्ट

[01:14:19] आता है आपका नॉमिनल इंटरेस्ट रेट का और एक

[01:14:21] रियल इंटरेस्ट रेट का। ठीक है? समझना मेरी

[01:14:24] बात को। कई बार आप बैंक्स में जाते हो।

[01:14:26] बैंक वाले आपको बोलते हैं कि यार हम आपको

[01:14:28] 10% इंटरेस्ट रेट देंगे। कितना देंगे? 10%

[01:14:31] इंटरेस्ट रेट देंगे। बट होता क्या है?

[01:14:34] महंगाई हो जाती है। महंगाई होने की वजह से

[01:14:37] क्या होता है? महंगाई होने की वजह से आपको

[01:14:40] जितना फायदा होना चाहिए उतना नहीं होता।

[01:14:42] देखो ना समझना मेरी बात को। मान लो मैंने

[01:14:44] ₹100 बैंक में जमा कराए। बैंक वालों ने

[01:14:46] बोला सर आपको 10% ब्याज देंगे। मैंने कहा

[01:14:48] बहुत बढ़िया। पर भाई 1 साल के बाद मुझे

[01:14:52] ₹110 मिल जाएंगे। पर उस ₹110 की कीमत उतनी

[01:14:55] नहीं होगी। उसका रीज़न पता है क्या है? एक

[01:14:58] साल में महंगाई भी तो बढ़ जाएगी। तो ओवरऑल

[01:15:00] आपको कितना फायदा हुआ? वो आपको रियल

[01:15:03] इंटरेस्ट रेट दिखाएगा। तो रियल इंटरेस्ट

[01:15:05] रेट क्या होता है? नॉमिनल इंटरेस्ट रेट

[01:15:07] माइनस द इनफ्लेशन। जैसे मैं आपको एग्जांपल

[01:15:09] देता हूं। मान लो आपने किसी जगह पैसे

[01:15:13] इन्वेस्ट किए और 3% ब्याज आपको मिला तो

[01:15:16] ₹100 आपके ₹13 हो गए। ₹100 आपके 103 हो

[01:15:20] गए। हां, ठीक है। बट बट बट मान लो वहां

[01:15:23] इनफ्लेशन 100% था या 50% इनफ्लेशन था। तो

[01:15:27] एक्चुअल में आपका पैसा 3% बढ़ा जरूर पर

[01:15:29] अगर आप सही मायने में देखोगे ना आपके पैसे

[01:15:31] की कीमत कम हो चुकी है। क्योंकि इनफ्लेशन

[01:15:34] भी आपका पैसा या इंटरेस्ट रेट बीट नहीं कर

[01:15:36] पा रहा। तो इसीलिए नॉमिनल इंटरेस्ट रेट

[01:15:38] जानना इंपॉर्टेंट है। पर कितना इनफ्लेशन

[01:15:40] है ये जानना भी इंपॉर्टेंट है। इसीलिए

[01:15:43] नॉमिनल इंटरेस्ट रेट माइनस इनफ्लेशन इसी

[01:15:45] को हम बोलते हैं क्या? रियल इंटरेस्ट रेट।

[01:15:48] क्या ये बात क्लियर है सबको?

[01:15:51] क्या ये बात सबको क्लियर है? व्हाट इज़

[01:15:53] रियल इंटरेस्ट रेट?

[01:15:56] ठीक है ना? तो दरअसल में ना क्रेडिटर को

[01:15:58] नुकसान पीछे जब मैंने डिस्कस किया कि

[01:16:00] क्रेडिटर को नुकसान क्यों हो रहा था? उसका

[01:16:02] रीज़न भी यही था। क्रेडिटर ने अपनी तरफ से

[01:16:04] तो दे दिया पैसा। बट हुआ पता है क्या?

[01:16:07] इनफ्लेशन की वजह से उसको जो रियल इंटरेस्ट

[01:16:09] रेट मिलना था वह कम हो गया। समझे? तो इसको

[01:16:12] बोलते हैं हम रियल इंटरेस्ट रेट एंड

[01:16:13] नॉमिनल इंटरेस्ट रेट। बाकी इसके अलावा भी

[01:16:16] छोटे-छोटे और टर्म्स हैं यहां पे इनफ्लेशन

[01:16:18] के अंदर। एक बार क्विकली इनको भी रिवाइज़

[01:16:20] कर लेते हैं। जैसे एक टर्म आपका आता है

[01:16:21] श्रिंफ्लेशन। श्रिंकफ्लेशन का मतलब क्या

[01:16:24] होता है? देखो जैसे यहां पर हमारे पास एक

[01:16:26] फ्रूटी भी है। ठीक है? ये फ्रूटी पहले भी

[01:16:28] ₹10 की आती थी। अभी भी ₹10 की आती है। बस

[01:16:31] फर्क पता क्या है? फर्क ये है दोस्तों कि

[01:16:33] पहले ये आपकी आती थी 200 ml। अब ये आती है

[01:16:36] केवल 150 ml है ये ₹10 की पहले भी 10 की

[01:16:39] थी अभी भी 10 की है तो यहां दाम नहीं बदला

[01:16:42] पर उन्होंने इसका क्वांटिटी छोटी कर दी

[01:16:44] इसको हम बोलेंगे क्या वी कॉल इट एस

[01:16:46] श्रिंकफ्लेशन प्रोडक्ट का प्राइस सेम रहता

[01:16:49] है पर उसकी क्वांटिटी कम हो जाती है जैसे

[01:16:50] आपका parleg का एग्जांपल है जीडीपी

[01:16:52] डिफ्लेटर भी करेंगे अनुज आप चिंता ना करो

[01:16:54] भाई चिंता ना करो एक-एक करके आएंगे

[01:16:56] कांसेप्ट सारे फिर एक आता है इंपोर्टेड

[01:16:58] इनफ्लेशन यहां पर आप जैसे मान लो बाहर से

[01:17:01] कच्चा तेल मंगा रहे हो तो आपका कच्चा तेल

[01:17:03] अगर महंगा हो गया तो हमारे देश के अंदर

[01:17:05] महंगाई बढ़ सकती है। तो उसको हम बोलते हैं

[01:17:07] इंपोल्ड इनफ्लेशन। इस तरह से हम बात करते

[01:17:09] हैं स्क्यूफ्लेशन की। स्क्यूफ्लेशन का

[01:17:11] क्या होता है मीनिंग? आपकी इनफ्लेशन

[01:17:14] नॉर्मली बाकी प्रोडक्ट्स में नहीं है। पर

[01:17:16] कुछ एक वस्तु में है। कई बार आपने नोटिस

[01:17:19] किया होगा कि बाकी मार्केट में दाम नॉर्मल

[01:17:21] रहते हैं। बस प्याज महंगा हो जाता है।

[01:17:24] बाकी सारी चीजें नॉर्मल रेट में चल रही

[01:17:26] हैं। बस प्याज महंगा हो गया। तो इसको हम

[01:17:28] बोलते हैं स्क्यूफ्लेशन। स्क्यूफ्लेशन का

[01:17:30] मतलब क्या? व्हेन देयर इज़ स्क्यूफ्लेसिस

[01:17:32] इनफ्लेशन। बाकी जगह प्राइसेस नॉर्मल हैं

[01:17:35] पर कुछ चीजों के दाम अचानक बढ़ चुके हैं।

[01:17:38] ऐसी सिचुएशन को हम क्या बोलते हैं?

[01:17:39] स्क्यूफ्लेशन।

[01:17:44] कोई कंफ्यूजन कोई डाउट है यहां पे?

[01:17:49] ठीक है? हां। गुड गुड गुड। अच्छा एक

[01:17:53] कांसेप्ट पिछले कुछ सालों में ये

[01:17:54] न्यूज़पेपर्स में आ रहा है। वो आ रहा है

[01:17:56] ग्रीड फ्लेशन का कांसेप्ट। ग्रीड फ्लेशन

[01:17:58] क्या होता है? देखो कई बार तो महंगाई

[01:18:01] बढ़ेगी बिकॉज़ वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं।

[01:18:05] मतलब एज इन कि रॉ मटेरियल का दाम बढ़ रहा

[01:18:07] है। रॉ मटेरियल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़

[01:18:09] रही है तो ठीक है। दैट वी कैन कॉल एज

[01:18:11] कॉस्ट पुश इनफ्लेशन। पर कई बार ना कुछ

[01:18:14] कंपनीज़ के सीईओस या जो मालिक होते हैं वो

[01:18:16] बहुत ही लालची होते हैं। उनको लगता है कि

[01:18:18] नहीं इन नहीं वस्तुओं के दाम बढ़ाओ ताकि हम

[01:18:20] यहां पे ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट कमा

[01:18:22] पाएं। तो जब इस तरह से किसी चीज की ग्रीड

[01:18:25] जो है किसी चीज की जो लालच है अगर किसी ने

[01:18:28] अपने लालच की वजह से वस्तुओं के दाम बढ़ाए

[01:18:31] तो उसको हम बोलते हैं ग्रीड फ्लिश लालच

[01:18:34] होने की वजह से। ठीक है ना? कुछ बड़ी-बड़ी

[01:18:36] कंपनीज़ की ना पीछे कुछ रिपोर्ट्स आई थी कि

[01:18:38] उनके जो नीचे वाले लोग काम कर रहे हैं, जो

[01:18:40] नीचे लोग काम कर रहे हैं, उनकी सैलरी

[01:18:42] बिल्कुल नहीं बढ़ रही। पर जो ऊपर लोग हैं,

[01:18:44] उनकी सैलरी दुगनी, तिगनी, चार गुना होती

[01:18:46] जा रही है। उनको हम बोलते हैं क्या? ग्रीड

[01:18:49] फ्लेशन।

[01:18:53] अरे नहीं भाई रोहित आप पहली बार पढ़ रहे

[01:18:56] हो क्या? पहले मुझे यह बताओ। हेडलाइन

[01:18:57] इनफ्लेशन में हम अलग-अलग जो वस्तुएं होती

[01:18:59] हैं जो बास्केट ऑफ गुड्स हैं वो देखते

[01:19:01] हैं। स्क्यूफ्लेशन में हम बोल रहे हैं कि

[01:19:04] सिर्फ कुछ एक वस्तुओं का दाम बढ़ रहा है।

[01:19:05] बाकी सबका दाम नॉर्मल है।

[01:19:12] नहीं हैप्पी देखो जब एक्स जब आपका

[01:19:14] इनफ्लेशन बढ़ता है ना उस वजह से क्या होता

[01:19:17] है? आपके वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। जब

[01:19:18] वस्तुएं महंगी होंगी तो कहीं ना कहीं आपकी

[01:19:20] वस्तुओं का जो कॉम्पिटिटिवनेस था वो कम हो

[01:19:23] जाता है। वो महंगी बिकेंगी हम वहां पे।

[01:19:28] अच्छा एक कांसेप्ट आता है आपका वेज प्राइस

[01:19:32] स्पायरल का। इसका मीनिंग क्या होता है?

[01:19:34] वेज प्राइस स्पायरल का। इसको हम लोग

[01:19:36] इनफ्लेशनरी स्पाइरल के नाम से भी जानते

[01:19:38] हैं। अब इसका मीनिंग समझना यहां पे। क्या

[01:19:40] मीनिंग हुआ इसका यहां पे? देखो यहां पर

[01:19:43] पता है क्या हुआ? मान लो यहां पर इनफ्लेशन

[01:19:45] है। यहां पर इनफ्लेशन है। ठीक है? अगर मान

[01:19:50] लो महंगाई है सब जगह तो बाहर क्या है?

[01:19:53] मार्केट में सब चीजें महंगी हो रखी हैं।

[01:19:56] अब यार मैं हूं मुझे भी तो खरीदना होगा।

[01:19:59] मार्केट से कुछ ना कुछ सामान। अब मार्केट

[01:20:01] से कुछ ना कुछ सामान हमें कुछ खरीदना होगा

[01:20:02] तो मैं मार्केट जाऊंगा। जाऊंगा। बिल्कुल

[01:20:05] जाऊंगा। अब जब मुझे कोई चीज खरीद ही नहीं

[01:20:07] पाऊंगा तो मैं क्या करूंगा? मैं अपने

[01:20:09] मालिक के पास जाऊंगा। जो भी मेरे कंपनी का

[01:20:11] एंप्लॉयर होगा मैं उसको बोलूंगा कि भाई आप

[01:20:13] मेरी सैलरी बढ़ा दो। क्यों मेरी सैलरी

[01:20:15] बढ़ा दो? क्योंकि अगर हम बात करें जब

[01:20:18] वस्तुएं महंगी हो रखी हैं एसी चला दो यार

[01:20:21] प्लीज। मैं कब से उनको बुला रहा हूं। एसी

[01:20:23] चला दो। हां। अगर हम यहां पे महंगाई

[01:20:26] ज्यादा हो रखी है तो उसमें मुझे यहां पे

[01:20:28] वस्तुएं खरीदने के लिए अपनी सैलरी जो है

[01:20:30] वो बढ़ानी पड़ेगी। जब मुझे अपनी सैलरी

[01:20:32] बढ़ानी पड़ेगी तो कॉस्ट पुश इनफ्लेशन बढ़

[01:20:34] जाएगा। इसी को बोलते हैं हम वेज प्राइस

[01:20:36] स्पाइरल या इनफ्लेशनरी स्पाइरल। क्या ये

[01:20:39] बात समझ आई आपको?

[01:20:42] ठीक है? क्या ये बात आपको समझ आई है? यहां

[01:20:44] पे या नहीं आई? वेज प्राइस पैरेलल में

[01:20:47] क्या हुआ? इनफ्लेशन ज्यादा थी तो वस्तुओं

[01:20:49] के दाम ज्यादा थे। वस्तुओं के दाम ज्यादा

[01:20:51] थे तो लोग चाहेंगे ना कि उनकी सैलरी

[01:20:53] ज्यादा हो। उनकी सैलरी अगर ज्यादा होने

[01:20:55] लगी तो कहीं ना कहीं चीजों के दाम बढ़

[01:20:58] जाएंगे। दाम बढ़ जाएंगे तो कॉस्ट बढ़

[01:21:00] जाएगी। कॉस्ट बढ़ जाएगी तो चीजों का

[01:21:01] इनफ्लेशन बढ़ जाएगा। तो एक तरह से ना मेरी

[01:21:04] सैलरी बढ़ने से इनफ्लेशन हो रही है।

[01:21:06] इनफ्लेशन बढ़ने की वजह से मेरी सैलरी बढ़

[01:21:08] रही है। तो ये एक स्पायरल हो गया। इसको

[01:21:09] बोलते हैं वेज प्राइस स्पायरल। ठीक है?

[01:21:12] इसको बोलते हैं वेज प्राइस स्पायरल। नहीं

[01:21:14] देखो यार आज ना पता क्या है? आज यहां पे

[01:21:16] जो स्टूडियो पर्सन है वो पता नहीं कहां

[01:21:18] चले गए हैं। ठीक है ना? कभी एसी यहां पे

[01:21:20] बंद हो जा रहा है। कभी कुछ है। ठीक है?

[01:21:22] बहुत ही क्या ही बोलूं अब मैं इनको। ठीक

[01:21:25] है? कोई है ही नहीं सपोर्ट आज यहां पे

[01:21:27] मेरे पास। अपनी तरफ से ही मैं काम कर रहा

[01:21:29] हूं पूरा। कब से उनको मैं बुलाए जा रहा

[01:21:31] हूं। बुलाए जा रहा हूं। कॉल भी करे जा रहा

[01:21:32] हूं। चलो कोई बात नहीं। ठीक है। सहना

[01:21:36] पड़ता है कभी कबभार।

[01:21:39] हां। हां।

[01:21:42] ठीक है? कोई और डाउट है आपका यहां तक?

[01:21:47] देखो एंजल हब मेरी बात ध्यान से सुनो।

[01:21:49] वस्तुओं के दाम बढ़े। ठीक है? दाम बढ़ने

[01:21:52] हैं। दाम बढ़ रहे हैं मार्केट के अंदर। तो

[01:21:55] मुझे क्या करना होगा? मुझे भी तो ज्यादा

[01:21:57] सर्वाइव करने के लिए मुझे अपनी सैलरी

[01:21:59] बढ़ानी होगी। अब मैं अपनी सैलरी बढ़ाऊंगा

[01:22:02] तो जो भी मैं कंपनी में काम कर रहा हूं

[01:22:04] क्या उस पर्टिकुलर कंपनी की कॉस्ट नहीं

[01:22:06] बढ़ जाएगी? तो कॉस्ट बढ़ जाएगी तो कॉस्ट

[01:22:08] पुश इनफ्लेशन नहीं हो जाएगा। बिल्कुल तो

[01:22:10] इनफ्लेशन बढ़ने से मेरी सैलरी बढ़ी। मेरी

[01:22:13] सैलरी बढ़ने से कॉस्ट बढ़ रही है। मतलब

[01:22:15] इनफ्लेशन हो रही है। इसको बोलते हैं

[01:22:17] इनफ्लेशन वेज स्पाइरल। वेजेस ने इनफ्लेशन

[01:22:19] को बढ़ाया। इनफ्लेशन ने वेजेस को बढ़ाया।

[01:22:21] इसको हम बोलते हैं स्पाइरल।

[01:22:27] ठीक है? ठीक है? तो हमारा ये यहां पे जो

[01:22:29] क्वेश्चन था ना हमारा यहां पे जो क्वेश्चन

[01:22:31] था वो क्वेश्चन यहां पे क्या था ये वाला

[01:22:34] स्टक फ्लेशन वाला तो ये तो हमने डिस्कस कर

[01:22:37] लिया।

[01:22:39] ठीक है? ये तो हमने डिस्कस कर लिया। ठीक

[01:22:41] है? इसमें क्या आएगा? इसमें आएगा

[01:22:43] स्टैगफ्लेशन का मतलब एक ऐसी इकोनॉमिक

[01:22:45] सिचुएशन जहां पर इनफ्लेशन बढ़ रही होती

[01:22:47] है। ग्रोथ भी नहीं है और आपकी बेरोजगारी

[01:22:50] भी ज्यादा है। इसी को बोलते हैं हम

[01:22:52] स्टैगफ्लेशन। तो ऑप्शन बी यहां पे इसका

[01:22:54] आंसर बनेगा। ऑप्शन बी यहां पे आंसर बनेगा।

[01:23:01] अच्छा इसको ट्राई करो फिर आप लोग एक बार।

[01:23:45] हां स्क्यू फैशन टेंपरेरी बेसिस पे होगा।

[01:23:47] यस

[01:23:54] देखो

[01:24:01] अब इसमें आप नोटिस करोगे देखो जो जो

[01:24:03] स्टेटमेंट्स आपको आ रही है उनको एक बार

[01:24:05] अंडरस्टैंड करेंगे। ये कहां पर हैं

[01:24:06] स्टूडियो पर्सन? प्लीज एक बार इनको बुला

[01:24:08] देंगे।

[01:24:11] ठीक है? यहां पर आप नोटिस करेंगे। यहां पर

[01:24:13] कुछ स्टेटमेंट्स हैं। जैसे कोर इनफ्लेशन

[01:24:15] के बारे में बात कर रखी है। यहां पर कह

[01:24:16] रहा है कोर इनफ्लेशन जो है ना उसमें

[01:24:18] वोलेटाइल आइटम्स हटा दी जाती हैं। हां

[01:24:21] बिल्कुल ठीक है। देखो कोर इनफ्लेशन जो

[01:24:22] होगा मैंने आपको बताया कि इसमें फूड एंड

[01:24:24] एनर्जी को हम यहां पे इंक्लूड नहीं करते।

[01:24:26] तो यस दैट इज़ अ करेक्ट स्टेटमेंट। ठीक है?

[01:24:29] यहां पर तीसरा कह रहा है हेडलाइन इनफ्लेशन

[01:24:31] हमेशा ज्यादा होती है कोर इनफ्लेशन से। ये

[01:24:33] जरूरी नहीं है। ये जरूरी नहीं है। हेडलाइन

[01:24:36] इनफ्लेशन ज्यादा भी हो सकती है, कम भी हो

[01:24:38] सकती है। देखो ना हेडलाइन इनफ्लेशन ज्यादा

[01:24:40] भी हो सकती है, कम भी हो सकती है। क्योंकि

[01:24:43] अगर मान लो देखो हेडलाइन और कोर में अंतर

[01:24:46] क्या था? हमने क्या किया? फूड एंड फ्यूल

[01:24:48] को हटाया ही तो है। अगर फ्यूल एंड फ्यूल

[01:24:50] के दाम कम होंगे तो हेडलाइन कम भी तो आ

[01:24:52] सकता है। एग्जैक्टली।

[01:24:55] अगर फूड एंड एनर्जी प्राइसेस ज्यादा होंगे

[01:24:57] तो हेडलाइन फेशन ज्यादा होगा। अगर फूड एंड

[01:25:00] एनर्जी के प्राइसेस कम हो जाएंगे तो उस

[01:25:01] केस में आपका हेडलाइन इनफ्लेशन आपका कम हो

[01:25:04] जाएगा। ठीक है ना? इस बात का आप ध्यान

[01:25:06] रखेंगे। तो तीसरा आपका गलत है। पहला

[01:25:08] स्टेटमेंट अपने आप में आपका करेक्ट है।

[01:25:09] ठीक है? तो यहां पर पहला ठीक है, दूसरा

[01:25:11] ठीक है, तीसरा आपका गलत है। तो ऑप्शन ए वन

[01:25:14] एंड टू ओनली इज़ द राइट आंसर। ठीक है? वन

[01:25:17] एंड टू ओनली इज़ द राइट आंसर।

[01:25:21] नहीं रहने दो। क्या हुआ?

[01:25:27] आप एक बार जो स्टूडियो पर्सन है यहां पर

[01:25:28] उनको एक बार बुला दो। मैं कब से बुला रहा

[01:25:30] हूं उनको पिछले 15 मिनट से।

[01:25:34] वो पता नहीं कहां पे 15 मिनट हो गए मुझे

[01:25:35] उनको बोलते हुए।

[01:25:48] ठीक है। हां जी। अगले क्वेश्चन पे आएंगे।

[01:25:50] यहां पे यह वाला ट्राई करो।

[01:25:59] राधिका देखो थर्ड स्टेटमेंट में यही था कि

[01:26:01] जो हेडलाइन इनफ्लेशन होता है उसमें फूड

[01:26:03] एंड फ्यूल भी फूड एंड फ्यूल होता है। अगर

[01:26:05] फूड एंड फ्यूल कम होगा तो आपके प्राइसेस

[01:26:07] बढ़े प्राइसेस कम होंगे तो वो हेडलाइन

[01:26:10] इनफ्लेशन कम आएगा। अगर फूड एंड फ्यूल के

[01:26:12] दाम ज्यादा होंगे तो हेडलाइन ज्यादा आएगा।

[01:26:48] अरे नहीं गुस्सा करने की बात नहीं है।

[01:26:50] पॉइंट यह है कि मैंने उनको बोला था कि एसी

[01:26:53] चलता रहना चाहिए। अब यहां एसी बंद हो जा

[01:26:55] रहा है कभी। फिर मैंने उनको स्लाइड्स पूरी

[01:26:56] दी थी। अब वो स्लाइड्स आधी लगा के गए हैं।

[01:26:59] अब मैं उनको 15 मिनट से बुला रहा हूं तो

[01:27:00] 15 मिनट से वो आ नहीं रहे हैं। पॉइंट वो

[01:27:02] गुस्सा करने की नहीं है। पर जिसका जो काम

[01:27:04] होता है उसको वो काम करना चाहिए। ऐसा

[01:27:07] थोड़ी कि मतलब सर पढ़ा रहे हैं। सर पढ़ाते

[01:27:09] रहेंगे अपनी तरफ से। ठीक है। मैं पढ़ाऊंगा

[01:27:10] ऑब्वियसली। पर थोड़ा सा बेसिक चीजें होती

[01:27:13] हैं कि भाई अब यहां पे मुझे हवा पानी तो

[01:27:15] आना चाहिए ना। ऐसा थोड़ी कि मैं गर्मी में

[01:27:16] पढ़ाता रहूंगा। अब 15 मिनट्स में कॉल भी

[01:27:18] कर रहा हूं। कॉल भी नहीं उठा रहे। बेल बजा

[01:27:20] रहा हूं। बेल भी नहीं ले रहे। ये बात गलत

[01:27:21] है ना?

[01:27:23] ठीक है ना? हां। तो देखो यहां पे हमने

[01:27:25] डिस्कस किया था सीपीआई रिटेल इनफ्लेशन के

[01:27:27] बारे में। तो ये क्या है? अपने आप में

[01:27:28] एनएसओ रिलीज़ करता है। बिल्कुल ठीक है।

[01:27:30] सीपीआई आईडब्ल्यू मैंने आपको बताया लेबर

[01:27:32] ब्यूरो रिलीज़ करता है और डब्ल्यूपीआई आपका

[01:27:33] ऑफिस ऑफ इकोनमिक एडवाइजर डीपीआईआईटी

[01:27:35] मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉमर्स इंडस्ट्री रिलीज़

[01:27:37] करता है। ये आंसर अपने आप में डी वन टू

[01:27:39] एंड थ्री यहां पे हो जाएगा।

[01:27:42] चलिए तो ये सारा डिस्कस कर दिया हमने

[01:27:44] डिटेल में। हां। एक क्वेश्चन और करेंगे।

[01:27:47] फिर हम अगले टॉपिक पे आएंगे।

[01:28:27] अरे यार कोई स्टूडियो पर्सन ही नहीं है

[01:28:28] यार। मतलब मैं कब से बुलाया जा रहा हूं

[01:28:30] उनको।

[01:28:32] एक बार देखना नहीं है। देखना 20 मिनट हो

[01:28:34] गए मुझे बुलाते हुए।

[01:28:47] हेलो

[01:28:51] हां जी आई थिंक ये क्वेश्चन काफी ईजी है।

[01:28:53] ठीक है यहां पे आंसर क्या बनेगा? ऑप्शन डी

[01:28:55] आरबीआई। काफी ईजी क्वेश्चन यूपीएससी ने

[01:28:57] पूछा था। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। इसका

[01:28:59] आंसर क्या बनेगा? ऑप्शन डी आरबीआई। ठीक

[01:29:02] है? रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जो है उसकी

[01:29:04] जिम्मेदारी है यहां पे इनफ्लेशन को

[01:29:06] कंट्रोल करने की। बहुत ईजी क्वेश्चन यहां

[01:29:07] पे यूपीएससी के द्वारा आया था। कहां

[01:29:10] जाएंगे?

[01:29:14] अगली स्लाइड लगानी है इसके बाद। थोड़ी देर

[01:29:17] में उनको बुला लो। मतलब मैं आधे घंटे से

[01:29:19] बुला रहा हूं।

[01:29:26] एक क्वेश्चन इसको ट्राई करेंगे। एक बार

[01:29:28] इसका क्या आंसर आएगा?

[01:30:05] बार-बार कोई एसी बंद करके जा रहा है।

[01:30:07] थोड़ा उसका ध्यान रख लो। गर्मी हो रही है

[01:30:08] बहुत ज्यादा।

[01:30:11] ऑप्शन डी आएगा। इसका आंसर सही आएगा। 1 2

[01:30:13] एंड 3 इज द राइट आंसर। ठीक है? 1 2 एंड

[01:30:16] थ्री इज द राइट आंसर। यहां पर इसका आंसर

[01:30:17] ऑप्शन डी होगा। प्राइसेस अगर हमें बढ़ने

[01:30:19] हैं तो मनी सप्लाई बढ़ाने से, एग्रीगेट

[01:30:22] लेवल ऑफ आउटपुट कम होने से और डिमांड।

[01:30:24] देखो इसका मीनिंग समझो। मैंने आपको पहले

[01:30:26] ही बताया ना अगर किसी चीज की डिमांड

[01:30:28] बढ़ेगी तो ऑटोमेटिकली उसके प्राइसेस

[01:30:30] बढ़ेंगे। ये डिस्कस किया था। अगर किसी चीज

[01:30:32] की सप्लाई कम होगी तो भी उसके प्राइस

[01:30:34] बढ़ेंगे। और तीसरी बात यहां पर ये है कि

[01:30:37] अगर एग्रीगेट लेवल ऑफ आउटपुट अगर टोटल

[01:30:39] आउटपुट जो है अगर वो आपका कम हो जाएगा

[01:30:42] मैंने आपको बोला ना सप्लाई अगर टोटल

[01:30:43] आउटपुट कम हो जाएगा सप्लाई कम हो जाएगी तो

[01:30:45] उससे भी आपके दाम बढ़ते हुए देखने को

[01:30:47] मिलेंगे इसीलिए इसका आंसर बनेगा ऑप्शन डी

[01:30:49] वन टू एंड थ्री इज़ द राइट आंसर।

[01:30:52] ठीक है? सेकंड पॉइंट यही है यहां पर आपका

[01:30:55] एग्रीगेट लेवल ऑफ़ आउटपुट। टोटल आउटपुट अगर

[01:30:58] यहां पर कम हो जाएगा। अगर मान लो कोई चीज

[01:31:00] का प्रोडक्शन कम हो जाएगा तो डेफिनेटली

[01:31:02] वहां पर उसका दाम बढ़ना ही बढ़ना है।

[01:31:06] ठीक है? गुड।

[01:31:08] तो, यह है तीसरा पॉइंट है इफेक्टिव

[01:31:10] डिमांड। डिमांड अगर बढ़ जाएगी, तो उस केस

[01:31:12] में भी आपकी महंगाई बढ़ती हुई देखने को

[01:31:14] मिलेगी।

[01:31:17] चलिए, चलिए, चलिए। अब एक आखिरी कांसेप्ट

[01:31:20] हमें पढ़ना है अपने

[01:31:22] इनफ्लेशन के टॉपिक के अंदर। वो है जीडीपी

[01:31:24] डिफ्लेटर का। आप एक बार ट्राई करोगे इसको।

[01:31:27] एक बार ट्राई करो इसको। फिर मैं आपको

[01:31:29] जीडीपी डिफ्लेटर समझाता हूं। हां,

[01:31:31] हाइपरफ्लेशन भी समझा दूंगा। डोंट वरी।

[01:32:06] बन

[01:32:22] हां जी देखो जब हम बात करते हैं जीडीपी

[01:32:25] डिफ्लेटर की तो इसको हम समझते हैं कि

[01:32:27] जीडीपी डिफ्लेटर क्या होता है? देखो आपको

[01:32:30] अंतर समझना है डब्ल्यूपीआई, सीपीआई और

[01:32:32] जीडीपी डिफ्लेटर के बीच में। सुनो मेरी

[01:32:35] बात ध्यान से।

[01:32:37] आप फोकस करेंगे इधर। या पहले मैं आपको

[01:32:40] समझाता हूं एक चीज़।

[01:32:42] आप लोग जीडीपी डिफ्लेटर का फार्मूला जानते

[01:32:44] हो?

[01:32:46] व्हाट इज़ द फार्मूला ऑफ़ जीडीपी डिफ्लेटर?

[01:32:51] क्या होता है जो जीडीपी डिफ्लेक्टर का

[01:32:53] फार्मूला? जीडीपी डिफ्लेक्टर का फार्मूला

[01:32:54] होता है आपका नॉमिनल जीडीपी

[01:33:03] बाय रियल जीडीपी * 100 क्या होता है

[01:33:08] जीडीपी डिफेक्टर का फार्मूला नॉमिनल

[01:33:10] जीडीपी बाय रियल जीडीपी * 100 अब यहां पर

[01:33:13] पता है क्या होता है जब हम बात करते हैं

[01:33:15] नॉमिनल जीडीपी की यह हम जीडीपी निकालते

[01:33:18] हैं एट

[01:33:19] करंट प्राइसेस।

[01:33:22] ठीक है? तो बेसिकली यहां पर पता है क्या

[01:33:24] होगा? नॉमिनल जीडीपी में आप क्वांटिटी

[01:33:27] लोगे करंट ईयर की एंड आपके प्राइसेस भी

[01:33:30] होते हैं आपके करंट ईयर के। ठीक है? बट जब

[01:33:33] हम बात करते हैं ना रियल जीडीपी की, यहां

[01:33:35] पर आप जीडीपी निकालते हो कॉन्स्टेंट

[01:33:38] प्राइसेस के ऊपर।

[01:33:41] और इसमें क्या होगा? आपकी जो क्वांटिटी है

[01:33:44] वह तो आप करंट ईयर की लेते हो यहां पर जब

[01:33:46] आप निकालते हो जीडीपी बट आपके जो प्राइसेस

[01:33:48] होते हैं ना वह आप कांस्टेंट ईयर या फिर

[01:33:50] आप एक बेस ईयर वाले प्राइसेस लेते हो तो

[01:33:53] आप एक बार नोटिस करो यहां पे आप एक बार

[01:33:56] नोटिस करो यहां पर हुआ पता है क्या यहां

[01:33:59] पर आपने फर्क कहां पे आया यहां फर्क आ रहा

[01:34:02] है आपके प्राइसेस के अंदर यहां आप करंट

[01:34:04] ईयर के प्राइस के कॉन्टेक्स्ट में बात कर

[01:34:05] रहे हो यहां आप बेस ईयर के प्राइस के

[01:34:07] कॉन्टेक्स्ट में बात कर रहे हो तो

[01:34:08] एक्चुअली ना जो जीडीपी डिफ्लेटर होता है

[01:34:10] वो किसकी बात करता है वो वो इंफ्लेशन

[01:34:12] निकालने का ही एक तरीका है। ये इनफ्लेशन

[01:34:15] निकालने में हेल्प करता है जीडीपी

[01:34:17] डिफ्लेटर। इससे जीडीपी नहीं इससे आपकी

[01:34:19] इनफ्लेशन निकलती है जीडीपी डिफ्लेटर से।

[01:34:22] ठीक है? अब पॉइंट पता क्या है? सुनना मेरी

[01:34:25] बात। डब्ल्यूपीआई सीपीआई में क्या करते

[01:34:27] हैं हम लोग? हम एक बास्केट लेते हैं। और

[01:34:29] मैंने आपको बताया भी डब्ल्यूपीआई की

[01:34:31] बास्केट अलग है। सीपीआई की बास्केट अलग

[01:34:33] है। डब्ल्यूपीआई बास्केट में गुड्स देखी

[01:34:35] हैं हमने। और सीपीआई की बास्केट में हमने

[01:34:36] गुड्स एंड सर्विसेस दोनों देखी। सवाल आता

[01:34:39] है कि जीडीपी डिफ्लेटर की कौन सी बास्केट

[01:34:41] होती है? देखो जीडीपी डिफ्लेटर की कोई

[01:34:43] बास्केट नहीं होती। जीडीपी डिफ्लेर की कोई

[01:34:45] बास्केट नहीं होती। फिर इसमें हम महंगाई

[01:34:47] कैसे बताते हैं? देखो जीडीपी क्या होता

[01:34:50] है? आपको बेसिक जीडीपी का तो बंदा पता है

[01:34:52] ना सबको। इट इज़ द सम टोटल ऑफ़ ऑल फाइनल

[01:34:55] गुड्स एंड सर्विज प्रोड्यूस्ड विद इन द

[01:34:57] डोमेस्टिक टेरिटरी ऑफ़ इकॉनॉमी इन अ

[01:34:58] पर्टिकुलर टाइम पीरियड। एक टाइम पीरियड के

[01:35:00] अंदर जितनी भी गुड्स एंड सर्विस का

[01:35:02] प्रोडक्शन हुआ उन सबको लिया जाता है। तो

[01:35:05] एक्चुअली ना जीडीपी डिफ्लेक्टर में कोई

[01:35:06] बास्केट नहीं थी। वो 358 गुड्स एंड सर्विज

[01:35:09] की बात नहीं करेगा। जितनी भी गुड्स एंड

[01:35:11] सर्विस प्रोड्यूस हुई उन सबको इंक्लूड

[01:35:13] करेगा। दैट इज व्हाई दैट इज व्हाई जीडीपी

[01:35:16] डिफ्लेटर अपने आप में सबसे कॉम्प्रिहेंसिव

[01:35:19] इंडिकेटर है। सबसे कॉम्प्रिहेंसिव

[01:35:22] इंडिकेटर है आपका इनफ्लेशन निकालने का। इट

[01:35:25] इज़ द मोस्ट कॉम्प्रिहेंसिव इंडिकेटर।

[01:35:28] क्यों है? वो इसीलिए है। इसीलिए क्योंकि

[01:35:30] यहां पे कोई बास्केट ही नहीं है। सीपीआई

[01:35:33] ने तो बस उस बास्केट का देखा कि उसका दाम

[01:35:35] कैसे बदला। जीडीपी डिफेटर में ऐसा कुछ

[01:35:37] नहीं है। उसने हर एक चीज का दाम देखा जो

[01:35:38] भारत में बनी है। अब देखो मेरी बात ध्यान

[01:35:40] से सुनना। पहला क्वेश्चन है मेरा आपसे।

[01:35:43] क्या सीपीआई में इंपोर्टेड गुड्स होंगी?

[01:35:45] इस सवाल का जवाब दो। सीपीआई की बात कर रहा

[01:35:47] हूं। क्या सीपीआई में इंपोर्टेड गुड्स

[01:35:49] होंगी या नहीं? ये बताओ मुझे।

[01:35:53] हम होंगी या नहीं होंगी? आंसर इज़ होंगी।

[01:35:56] सीपीआई में बास्केट देखा कि बास्केट पहले

[01:35:58] से महंगा हो या सस्ता हुआ। हम यह थोड़ी

[01:36:00] देख रहे हैं कि वो वस्तु भारत में बनी या

[01:36:02] नहीं बनी। तो सीपीआई में इंपोर्टेड गुड्स

[01:36:05] होती हैं। सीपीआई इंक्लूड्स इंपोर्टेड

[01:36:08] गुड्स। अच्छा दूसरा सवाल मेरा आपसे है।

[01:36:12] जीडीपी डिफ्लेटर में क्या इंपोर्टेड गुड्स

[01:36:14] होती हैं? क्या? क्या जीडीपी डिफ्लेटर में

[01:36:16] इंपोर्टेड गुड्स होती हैं? ये बताओ। क्या

[01:36:19] जीडीपी डिफ्लेटर में इंपोर्टेड गुड्स होती

[01:36:21] हैं? आंसर इज़ नो। अरे भाई जीडीपी डिफ्लेटर

[01:36:24] आया कहां से? जीडीपी से आया। जीडीपी का

[01:36:26] मतलब क्या? जो चीज भारत में बनी उसको हमें

[01:36:28] देखना है। तो जीडीपी डिफ्लेटर में

[01:36:30] इंपोर्टेड गुड्स नहीं आएंगी। सीपीआई में

[01:36:32] इंपोर्टेड गुड्स आएंगी। जीडीपी डिफेटर में

[01:36:35] नहीं आएंगी। इस बात का आप यहां पे ध्यान

[01:36:36] में देंगे। तो आप यहां पे देख सकते हो इन

[01:36:38] तीनों का अंतर। ठीक है? जी सीपीआई में

[01:36:41] क्या किया? वो बास्केट ऑफ गुड्स एंड

[01:36:43] सर्विज का क्या दाम चेंज हुआ वो देखा?

[01:36:45] जीडीपी डिफ्लेटर में ऑल फाइनल गुड्स एंड

[01:36:47] सर्विज का जो दाम था उसमें क्या चेंज आया

[01:36:49] वो देखा? सीपीआई में कंज्यूमर गुड्स

[01:36:52] सर्विज की बात कर रहे हैं। यहां सभी फाइनल

[01:36:53] गुड्स एंड सर्विज की बात कर रहे हैं। इसके

[01:36:55] साथ ही साथ अगर हम बात करें।

[01:36:58] ठीक है? इसके साथ-साथ हम बात करें। आप

[01:37:00] यहां पे लिख सकते हो यहां पर इंपोर्टेड

[01:37:02] गुड्स आती हैं।

[01:37:06] बट जीडीपी डिफ्लेटर के अंदर हम यहां पे

[01:37:08] इंपोर्टेड गुड्स एंड सर्विसेज को इंक्लूड

[01:37:11] नहीं करते हैं। इस बात का आप यहां पे

[01:37:13] ध्यान रखेंगे। तो अगर हम दोस्तों यहां पे

[01:37:15] क्वेश्चन में आए ना क्या कह रहा है

[01:37:16] क्वेश्चन? यहां पर क्वेश्चन कह रहा है कि

[01:37:17] यहां पर जितनी भी गुड्स एंड सर्विस

[01:37:19] प्रोड्यूस हुई उनको सबको इंक्लूड किया

[01:37:20] गया। बिल्कुल ये बात अपने आप में बिल्कुल

[01:37:22] ठीक है।

[01:37:24] दूसरा कह रहा है कि जैसे-जैसे आपका रियल

[01:37:26] जीडीपी बढ़ेगा आपका जीडीपी डिफ्लेटर

[01:37:28] बढ़ेगा? नहीं जीडीपी डिफ्लेटर अपने आप में

[01:37:31] रियल जीडीपी के साथ नहीं बढ़ता। बस ये तो

[01:37:34] रिफ्लेक्ट करता है कि ओवरऑल प्राइस लेवल

[01:37:35] चेंज क्या आया। ठीक है ना? इसलिए सेकंड

[01:37:38] अपने आप में गलत है। और थर्ड स्टेटमेंट तो

[01:37:40] मैंने आपको बता ही दिया कि जीडीपी

[01:37:42] डिफ्लेटर में कॉम्प्रिहेंसिव तो है पर

[01:37:43] जीडीपी डिफ्लेटर में हम लोग यहां पे

[01:37:45] इंपोर्टेड गुड्स की बात नहीं करेंगे

[01:37:47] क्योंकि जीडीपी की बात हो रही है। सो दैट

[01:37:48] इज़ व्हाई थर्ड इज़ आल्सो रॉन्ग। तो करेक्ट

[01:37:50] कौन सा हुआ? ऑप्शन ए ओनली वन इज़ राइट। इज़

[01:37:54] इट क्लियर नाउ?

[01:37:56] हम हम

[01:38:00] ठीक है। ठीक है। गुड। गुड गुड। तो ये हमने

[01:38:02] जीडीपी डिफ्रेटर भी यहां पे पढ़ लिया है।

[01:38:05] ठीक है। हां। एक दो क्वेश्चन और कर लेते

[01:38:07] हैं। फिर हम आगे चलेंगे नेक्स्ट टॉपिक पे।

[01:38:42] नहीं हरी और अक्षय जरूरी नहीं है ना रियल

[01:38:44] जीडीपी बढ़ने के साथ आपका जीडीपी डिफ्लेटर

[01:38:46] भी बढ़े। रियल जीडीपी का मतलब बस यह कह रहा

[01:38:49] है कि आपके प्रोडक्शन ज्यादा हुई वस्तुओं

[01:38:51] की। प्रोडक्शन ज्यादा होना यह यह नहीं

[01:38:54] बताता कि महंगाई बढ़ रही है।

[01:39:20] देखो इसको ट्राई करते हैं। पहला कह रहा है

[01:39:23] कि सीपीआई में जितनी भी गुड्स एंड

[01:39:24] सर्विसेस है सबको इंक्लूड किया। अरे नहीं

[01:39:26] भाई सीपीआई में एक बास्केट है।

[01:39:29] जीडीपी डिफ्लेटर में बास्केट नहीं होती।

[01:39:32] जीडीपी डिफ्लेटर में सारी चीजें होती हैं।

[01:39:34] तो इसने पहला स्टेटमेंट उल्टा कर दिया।

[01:39:36] इसने पहला स्टेटमेंट उल्टा कर दिया। इसलिए

[01:39:38] स्टेटमेंट वन गलत है। स्टेटमेंट टू देखो

[01:39:41] कि सीपीआई में इंपोर्टेड गुड्स के प्राइस

[01:39:43] आते हैं। हां, आते हैं। जीडीपी डिफ्लेटर

[01:39:45] में नहीं आते। ये बात ठीक है। थर्ड

[01:39:47] स्टेटमेंट की बात करें। कह रहा है जीडीपी

[01:39:49] डिफ्लेटर में वेट्स कांस्टेंट होते हैं।

[01:39:50] नहीं सीपीआई में वेट्स कांस्टेंट होंगे

[01:39:53] ना। किसकी कितनीेंस है? वो वेट था उसका।

[01:39:56] तो सीपीआई में वेट कांस्टेंट है कि अच्छा

[01:39:58] फूड एंड बेवरेज का वेटेज 37% है। जीडीबी

[01:40:01] डिफ्लेटर में तो क्या है? जो चीज़ ज्यादा

[01:40:03] प्रोड्यूस होगी उसका ज्यादा वेटेज होता

[01:40:05] रहेगा। इसीलिए थर्ड भी आपका यहां पे गलत

[01:40:08] हो जाएगा। सही आंसर क्या बनेगा? ऑप्शन बी

[01:40:10] टू ओनली। ऑप्शन बी टू ओनली।

[01:40:14] इज इट फाइन टेल हियर?

[01:40:17] यहां तक बात समझ आई? आई थिंक आपको

[01:40:20] इनफ्लेशन का कांसेप्ट आपको यहां पे समझ आ

[01:40:22] चुका होगा कि इनफ्लेशन में क्या-क्या

[01:40:23] पॉइंट्स थे? कैसे-कैसे चीजें हमने यहां पे

[01:40:25] डिस्कस करी, कैसे-कैसे बढ़ती है,

[01:40:27] क्या-क्या टाइप्स होती हैं? वो सारे

[01:40:29] कांसेप्ट्स हमने यहां पे डिस्कस करने की

[01:40:30] कोशिश करी है। क्वेश्चंस आते हैं इसीलिए

[01:40:33] हमने इसको थोड़ा डिटेल में पढ़ा। अब कुछ

[01:40:35] दो-तीन करंट अफेयर्स थे जो यहां पे

[01:40:37] इनफ्लेशन के अंदर थे। जैसे पिछले कुछ

[01:40:40] दिनों में ना कई बार स्क्ंिंजर्स इकॉनमी

[01:40:42] की डिस्कशन हुई। सुना आप लोगों ने? कभी

[01:40:44] स्कंजर्स इकॉनमी क्या होता है? देखो अगर

[01:40:47] आप लोगों ने अपनी फिजिक्स पढ़ी है ना तो

[01:40:49] आप लोगों ने स्कंजर्स कैट के बारे में

[01:40:51] सुना होगा। सुना है या नहीं सुना आप लोगों

[01:40:53] ने? स्कंसर्स कैट के बारे में? ये कैट बड़ी

[01:40:56] इंटरेस्टिंग है। देखो एक डब्बा है। अब उस

[01:40:59] डब्बे में कैट है। अब वो कैट जब तक हम

[01:41:03] डब्बा नहीं खोलते तब तक वो कैट जिंदा भी

[01:41:06] हो सकती है। वो कैट मरी भी हो सकती है। तो

[01:41:08] सेम टाइम के ऊपर दो इंस्टेंसेस हो सकते

[01:41:10] हैं आपकी कौन आपकी कैट के। इट कुड बी बोथ

[01:41:14] डेड एंड अलाइव। हमारी अर्थव्यवस्था भी आज

[01:41:17] के समय कुछ ऐसी ही है। सर क्यों? ऐसा

[01:41:19] क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि आप नोटिस करो

[01:41:22] अगर आपकी अर्थव्यवस्था सेम टाइम के ऊपर

[01:41:26] कमजोर भी दिखे और मजबूत भी दिखे उसको हम

[01:41:29] बोलते हैं स्वरेंजर्स इकॉनमी। जैसे आपका

[01:41:31] स्क्रिंजस कैट था ना कि कैसे क्वांटम

[01:41:33] फिजिक्स के अंदर आपकी जो कैट है वो बोथ

[01:41:35] डेड एंड अलाइव हो सकती है। जब तक हम उसको

[01:41:37] डब्बे को खोल के नहीं देखते। ऐसे ही आपकी

[01:41:39] अर्थव्यवस्था भी सेम टाइम के ऊपर कमजोर और

[01:41:42] सेम टाइम पे मजबूत दिख सकती है। सर ऐसा

[01:41:44] कैसे हो सकता है? देखो हमारी जैसे इकॉनमी

[01:41:47] मान लो अगर मिक्स सिग्नल दे। मिक्स सिग्नल

[01:41:49] का मतलब कुछ चीजों में हम अच्छे हो, कुछ

[01:41:50] चीजों में खराब हो। फॉर एग्जांपल, अगर हम

[01:41:53] रियल जीडीपी की बात करें, तो हमारी रियल

[01:41:55] जीडीपी अच्छी है 8.2% पर अगर हम नॉमिनल

[01:41:57] जीडीपी की बात करें वो पहले के मुकाबले कम

[01:41:59] हुई है। तो कुछ चीजों को देखने पे हमें

[01:42:02] दिख रहा है कि अर्थव्यवस्था अच्छी चल रही

[01:42:03] है। कुछ चीजों को देखने पे लग रहा है कि

[01:42:05] नहीं नहीं अर्थव्यवस्था कमजोर चल रही है।

[01:42:07] तो हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर और मजबूत

[01:42:10] दोनों हैं एक ही टाइम के ऊपर। जैसे वो कैट

[01:42:13] थी डेड एंड अलाइव एट द सेम टाइम। इसीलिए

[01:42:16] भारत की अर्थव्यवस्था को काफी सारे

[01:42:17] इकॉनॉमिस्ट आज के समय स्केंजर्स इकॉनमी

[01:42:19] यहां पे बोल रहे हैं। क्या ये कांसेप्ट

[01:42:21] समझ आया आपको?

[01:42:23] क्या ये कांसेप्ट समझ आया या नहीं? अनुज

[01:42:25] आप लोग कांसेप्ट समझो। रियल जीडीपी होता

[01:42:27] क्या है? ठीक है ना? रियल जीडीपी इज़

[01:42:29] सिंपली व्हाट नथिंग बट द क्वांटिटी कितनी

[01:42:32] प्रोड्यूसेस इंटू प्राइस ऑफ़ बेस ईयर। जब

[01:42:34] आपकी क्वांटिटी बढ़ेगी तो आपका रियल जीडीपी

[01:42:37] बढ़ेगा। तो क्वांटिटी बढ़ने से जीडीपी

[01:42:39] डिफ्लेटर बढ़े ये जरूरी नहीं है।

[01:42:42] ठीक है ना? हां।

[01:42:44] ठीक है? अच्छा एक कांसेप्ट और है गोल्ड्डी

[01:42:47] लॉक्स इकॉनमी का। आप लोगों ने ये वर्ड

[01:42:49] सुना। आप मुझे बताओ यह वर्ड किसने

[01:42:51] इस्तेमाल किया? दोस्तों गोल्ड्डी लॉक

[01:42:53] इकॉनमी ना ये हमारी फाइनेंस मिनिस्टर ने

[01:42:55] अपनी स्पीच में ये वर्ड इस्तेमाल किया।

[01:42:57] हमारे आरबीआई गवर्नर ने अपनी स्पीच में ये

[01:42:59] इस्तेमाल किया। ये पर्टिकुलर वर्ड

[01:43:00] गोल्ड्डी लॉक्स इकॉनमी। अब सवाल आता है कि

[01:43:02] सर ऐसा क्या है इस वर्ड में खास कि हमारे

[01:43:04] फाइनेंस मिनिस्टर ने भी और आरबीआई गवर्नर

[01:43:06] ने भी इस वर्ड का इस्तेमाल किया। देखो

[01:43:09] गोल्ड्डी लॉक्स इकॉनमी यह वर्ल्ड ना दरअसल

[01:43:11] में गोल्ड्डी लॉक ज़ोन से आया है। आप लोग

[01:43:14] सुनते होंगे हमारी जो धरती है वो गोल्डी

[01:43:17] लॉक ज़ोन में है। क्या मतलब है इस चीज का?

[01:43:19] देखो हमारी जो धरती है ना वो ना ही सूरज

[01:43:22] से बहुत दूर है ना ही सूरज के बहुत पास

[01:43:25] है। इसीलिए हमारे यहां धरती के ऊपर जो

[01:43:27] जीवन है वो सफल है। जीवन हो सकता है। अगर

[01:43:30] हम धरती अगर हम सूरज से बहुत ज्यादा दूर

[01:43:32] होते तो बहुत ठंड होती। अगर हम सूरज के

[01:43:35] बहुत पास होते तो बहुत गर्मी होती। वहां

[01:43:37] पर लाइफ सस्टेनेबल ना हो पाती। तो गोल्डी

[01:43:40] लॉक ज़ोन एक ऐसा ज़ोन होता है जहां पर लाइफ

[01:43:41] सस्टेनेबल है। ना बहुत ठंडा ना बहुत गर्म।

[01:43:45] अब हमारी अर्थव्यवस्था भी ऐसी सिचुएशन में

[01:43:47] ही है। ना बहुत ज्यादा ठंडी है ना बहुत

[01:43:49] ज्यादा गर्म है। सर इसका क्या मतलब हुआ?

[01:43:52] देखो ध्यान से सुनना।

[01:43:54] होता पता है क्या है दोस्तों? अगर

[01:43:56] इनफ्लेशन मतलब अगर ग्रोथ बहुत ज्यादा हो।

[01:44:00] अगर ग्रोथ बहुत ज्यादा होती है ना तो कहीं

[01:44:02] ना कहीं उससे आपकी बहुत ज्यादा महंगाई हो

[01:44:04] जाती है। ठीक है? पर अगर मान लो महंगाई

[01:44:07] बहुत ज्यादा कम हो तो उस केस में आपकी

[01:44:09] ग्रोथ हैंपर हो सकती है। उस केस में ग्रोथ

[01:44:12] में दिक्कत आ जाएगी। आपकी जीडीपी नहीं

[01:44:14] बढ़ेगी। एग्जैक्टली यही सेम चीज हमारी

[01:44:17] इकोनमी में हो सकती है। पर हमारे यहां पे

[01:44:19] ना एक ऐसी सिचुएशन है जो आज के समय

[01:44:21] बिल्कुल सही है। जैसे धरती ना ज्यादा ठंडी

[01:44:24] है ना ज्यादा गर्म है। तो सेम चीज यहां पर

[01:44:26] भी है। हां हमारी अर्थव्यवस्था में

[01:44:28] इनफ्लेशन कंट्रोल में है और ग्रोथ भी अपने

[01:44:30] आप में ठीक है। बहुत ज्यादा भी नहीं है कि

[01:44:32] इनफ्लेशन हो जाए और बहुत कम भी नहीं है।

[01:44:35] मतलब इनफ्लेशन बहुत कम भी नहीं है कि अपने

[01:44:37] आप में ग्रोथ ही खत्म हो जाए। तो ऐसी

[01:44:39] सिचुएशन जहां पर आपकी ग्रोथ एकदम सही

[01:44:41] स्थिति में है उसको हम बोलते हैं गोल्डी

[01:44:43] लॉक्स इकॉनमी। तो हमारी फाइनेंस मिनिस्टर

[01:44:46] का एंड हमारे आरबीआई गवर्नर का ऐसा मानना

[01:44:48] है कि भारत आज के समय गोल्डी लॉक अर्थ

[01:44:51] गोल्डी लॉक अर्थव्यवस्था बन चुका है। क्या

[01:44:54] ये बात समझ आई या नहीं आई? इज दिस पॉइंट

[01:44:56] क्लियर? तो सिचुएशन जहां पर इनफ्लेशन

[01:44:59] कंट्रोल में रहे, ग्रोथ अच्छी हो,

[01:45:01] बेरोजगारी कम हो, उसको हम बोलते हैं गोल्ड

[01:45:03] लॉक्स इकॉनमी।

[01:45:06] एनी कंफ्यूजन टिल हियर? यहां पर हमारा

[01:45:08] इनफ्लेशन चैप्टर कंप्लीट हुआ। कोई

[01:45:10] कंफ्यूजन है, कोई डाउट है किसी को? तो

[01:45:11] पूछो।

[01:45:13] अंडरस्टुड? आपने देखा हमने स्टैटिक भी

[01:45:16] पढ़ा, हमने करंट अफेयर्स भी पढ़े और साथ-साथ

[01:45:18] हमने एमसीक्यू भी प्रैक्टिस करे। कोई डाउट

[01:45:20] है यहां पे? कुछ बच्चे पूछ रहे हैं

[01:45:22] स्करिंजर इकॉनमी नहीं समझ आया। स्करिंजर्स

[01:45:24] इकॉनमी। स्करंजर्स कैट से आया है। ठीक है?

[01:45:27] हमारी अर्थव्यवस्था अगर एक ही टाइम के ऊपर

[01:45:29] कमजोर भी हो और मजबूत भी हो उसको बोलते

[01:45:31] हैं स्करंजर्स इकॉनमी।

[01:45:35] चलो गुड गुड गुड

[01:45:40] ठीक है

[01:45:42] ठीक है ओके ओके ओके

[01:45:45] चलो अब आते हैं अपने अगले टॉपिक पे अगला

[01:45:48] टॉपिक हमारा क्या है अगला टॉपिक है हमारा

[01:45:51] यहां पे फिस्कल पॉलिसी के बारे में ठीक है

[01:45:53] फिस्कल पॉलिसी के बारे में अब फिस्कल

[01:45:55] पॉलिसी इंपॉर्टेंट टॉपिक है 2025 में आई

[01:45:57] थिंक दो क्वेश्चन तो मिनिमम आए थे इससे दो

[01:45:59] या तीन क्वेश्चन आप कह सकते हो ठीक है हां

[01:46:02] तो इसको हम यहां पे समझेंगे कि व्हाट

[01:46:03] एग्जैक्टली डू डू मीन बाय दिस टर्म फिस्कल

[01:46:05] पॉलिसी। देखो मीनिंग तो आप सबको पता है

[01:46:07] फिस्कल पॉलिसी का। हमारी जो सरकार की नीति

[01:46:10] होती है उसको हम बोलते हैं फिस्कल पॉलिसी।

[01:46:13] सरकार की नीति मतलब भाई सरकार टैक्सेस में

[01:46:17] चेंजेस कर सकती है। सरकार अपने खर्चे में

[01:46:20] बदलाव कर सकती है। ये जो भी बदलाव यहां पे

[01:46:23] आया ना उसको हम बोलते हैं क्या? फिस्कल

[01:46:25] पॉलिसी। सरकार की नीति सरकार के द्वारा जो

[01:46:28] भी चेंजेस किए जाते हैं वो हमारा फिस्कल

[01:46:30] पॉलिसी का यहां पे पार्ट बनते हैं। ओके

[01:46:32] ओके ओके ओके ओके ठीक है।

[01:46:36] आएंगे इन क्वेश्चंस पे आएंगे। अब आप लोग

[01:46:39] जानते होंगे कि जब हम बात करते हैं ना

[01:46:41] सरकार की तो सरकार के लिए सबसे इंपॉर्टेंट

[01:46:44] चीज आती है सरकार का जो बजट होता है। है

[01:46:46] ना? सरकार का बजट। सरकार का जो बजट होता

[01:46:49] है वो सबसे बढ़िया एग्जांपल है अपना किस

[01:46:52] चीज का? अपने फिस्कल पॉलिसी का। ठीक है?

[01:46:55] ओके। ओके ओके ओके

[01:46:57] अब देखना

[01:46:59] अब हमारे जो सरकार का बजट है ना इसके दो

[01:47:03] कॉम्पोनेंट्स होते हैं दोस्तों एक होता है

[01:47:06] हमारा रेवेन्यू अकाउंट

[01:47:09] और एक होता है दोस्तों हमारा कैपिटल

[01:47:11] अकाउंट

[01:47:13] राइट एक हो जाएगा हमारा रेवेन्यू अकाउंट

[01:47:16] एक हो जाएगा हमारा कैपिटल अकाउंट ठीक है

[01:47:18] गुड गुड गुड रेवेन्यू अकाउंट में भी दो

[01:47:20] पर्टिकुलर चीजें होती हैं बट उसमें पहले

[01:47:22] मैं समझा देता हूं देखो सरकार को ना क्या

[01:47:26] देखना है? सरकार को देखना है कितना पैसा

[01:47:28] वो कहां पे खर्च कर रही है? कितना पैसा

[01:47:30] कहां से आया? हर एक चीज का लेखाजोखा रखना

[01:47:33] है। उसके लिए ही बजट बनाया जाता है।

[01:47:35] बिल्कुल। तो होता पता है क्या है कि अगर

[01:47:40] कुछ ऐसा चीज हो जिससे एसेट या लायबिलिटी

[01:47:43] में कोई चेंजेस नहीं आए वो आपके रेवेन्यू

[01:47:46] अकाउंट का पार्ट बनते हैं। कोई ऐसी चीज

[01:47:48] जिससे आपका एसेट या लायबिलिटी में बदलाव

[01:47:50] आए वो आपका कैपिटल अकाउंट का पार्ट

[01:47:52] बनेंगे। जैसे फॉर एग्जांपल सरकार बहुत

[01:47:55] सारे खर्चे करती है। एक एग्जांपल मैं आपको

[01:47:58] देता हूं। जैसे सरकार अपने मुलाजिमों को

[01:48:00] सैलरी पे करती है। पेंशन देती है उनको। ये

[01:48:03] सरकार का एक खर्चा है। ठीक है? पर इस

[01:48:06] खर्चे से कोई एसेट लायबिलिटी में चेंज

[01:48:08] नहीं आ रहा। इसीलिए वो रेवेन्यू अकाउंट

[01:48:10] में आएगा। बट ऑन द अदर हैंड अगर हम बात

[01:48:12] करें मान लो सरकार ने कोई सड़क बनाई।

[01:48:14] सरकार ने कोई ब्रिज बनाया। सरकार ने कुछ

[01:48:17] डिफेंस में कुछ अपना टैंक एक्वायर किया।

[01:48:20] डिफेंस में टैंक को लेने के लिए वो टैंक

[01:48:23] हमारे लिए एक तरह का एसेट बन गया। अब यहां

[01:48:25] पर जब हमने ये सब काम किए तो यहां पर

[01:48:27] हमारे एसेट या लायबिलिटी में कुछ ना कुछ

[01:48:29] चेंजज़ आ रहे हैं। तो वो सब चीजें हमारी

[01:48:31] कहां पे इंक्लूड आएंगी? वो आपका कैपिटल

[01:48:33] अकाउंट का हिस्सा बनेंगे। समझे मेरी बात

[01:48:35] को? तो कोई भी ऐसी चीज जो अपने यहां पे

[01:48:37] रेवेन्यू मतलब अपना एसेट या लायबिलिटी में

[01:48:40] चेंज ना करे वो रेवेन्यू अकाउंट का पार्ट

[01:48:42] बनेगा। अगर एसेट लायबिलिटी में कोई चेंज

[01:48:44] आता है वो आपका कैपिटल अकाउंट का पार्ट

[01:48:46] बनता है। आई होप दैट इज़ क्लियर। अब होता

[01:48:49] पता है क्या है जो रेवेन्यू अकाउंट है यह

[01:48:51] दो प्रकार का होता है।

[01:48:54] एक है आपका रेवेन्यू रिसीप्ट

[01:49:00] और एक है आपका रेवेन्यू एक्सपेंडिचर।

[01:49:05] उसी तरह से अगर हम बात करें कैपिटल की तो

[01:49:08] कैपिटल में भी दो पार्ट होंगे। एक होगा

[01:49:11] आपका कैपिटल रिसीप्ट

[01:49:15] और दूसरा हो जाएगा हमारा यहां पे

[01:49:18] कैपिटल एक्सपेंडिचर।

[01:49:25] ठीक है?

[01:49:27] एक हो जाएगा रेवेन्यू रिसीप्ट। एक है

[01:49:28] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। एक है कैपिटल

[01:49:30] रिसीट, एक है कैपिटल एक्सपेंडिचर। चलो ठीक

[01:49:32] है। अब पॉइंट आता है कि इनका मतलब क्या

[01:49:34] है? रिसीट और एक्सपेंडिचर का। सिंपल बात

[01:49:37] है। पैसा आ रहा है तो वर्ड इस्तेमाल

[01:49:39] करेंगे रिसीप्ट। पैसा जा रहा है तो वर्ड

[01:49:42] इस्तेमाल करेंगे हम एक्सपेंडिचर। तो देखो

[01:49:45] अगर मैं ये टर्म इकट्ठा कर रहा हूं।

[01:49:47] रेवेन्यू रिसीप्ट। रेवेन्यू वर्ड मतलब

[01:49:49] एसेट लायबिलिटी में चेंज ना आना। रिसीप्ट

[01:49:51] मतलब पैसा आना। पैसा मिलना। अगर सरकार के

[01:49:55] पास पैसा आ रहा है और एसेट लायबिलिटी में

[01:49:57] चेंज नहीं आ रहा उसको हम बोलते हैं

[01:49:58] रेवेन्यू रिसीप्ट। ऐसी कौन सी चीजें होती

[01:50:00] हैं जो रेवेन्यू रिसीप्ट होती हैं? अरे

[01:50:02] भाई आप लोगों ने सरकार को टैक्स मिलता

[01:50:04] देखा है? हां देखा है सर। अब सरकार को

[01:50:06] टैक्स मिलता है। हां बिल्कुल मिलता है।

[01:50:08] सरकार को जीएसटी मिलता है, इनकम टैक्स

[01:50:09] मिलता है, कॉर्पोरेट टैक्स मिलता है और

[01:50:11] बहुत सारे टैक्सेस मिलते हैं। हां। सरकार

[01:50:13] को फाइन वगैरह मिलता है जो फीस वगैरह होती

[01:50:15] है अलग-अलग तरह की वो सारी चीजें सरकार के

[01:50:17] लिए कमाई का साधन है। हां पैसा मिल रहा है

[01:50:19] रिसीप्ट और कोई एसेट लायबिलिटी में चेंज

[01:50:21] भी नहीं आ रहा। इसीलिए रेवेन्यू रिसीप्ट

[01:50:24] एग्रीड

[01:50:25] उसी तरह से एक होता है रेवेन्यू

[01:50:27] एक्सपेंडिचर। मैंने आपको बता दिया इसका

[01:50:28] एग्जांपल यार जो सरकार ने अपने मुलाजिमों

[01:50:30] को सैलरी पेंशन दी वो सरकार की जेब से

[01:50:33] खर्चा जा रहा है। पैसा बाहर जा रहा है

[01:50:34] इसलिए एक्सपेंडिचर। पर क्योंकि यहां पे

[01:50:37] कोई एसेट लायबिलिटी में चेंज नहीं आ रहा।

[01:50:38] इसलिए वो रेवेन्यू एक्सपेंडिचर।

[01:50:41] ठीक है? फिर सर ये क्या है? कैपिटल

[01:50:43] रिसीप्ट। रिसीट मतलब पैसा आना और कैपिटल

[01:50:45] मतलब एसेट लायबिलिटी में कुछ ना कुछ चेंज

[01:50:47] आना चाहिए। ऐसा कौन सी चीज है? आपने सरकार

[01:50:50] को लोन लेते हुए देखा है? हां। सरकार लोन

[01:50:54] लेगी। लोन लेगी तो सरकार को पैसा मिलेगा?

[01:50:57] बिल्कुल मिलेगा। इसीलिए रिसीट। दूसरी बात

[01:50:59] जब लोन लेगी तो सरकार के लिए लायबिलिटी

[01:51:01] है। सरकार को वो रीपे करना है लोन। इसीलिए

[01:51:04] वो कैपिटल रिसीट का हिस्सा बनेगा। आपने

[01:51:06] सरकार को डिसन्वेस्टमेंट करते देखा है।

[01:51:08] हां। सरकार अपनी कंपनियों को बेचती है।

[01:51:10] हां। जब सरकार अपनी कंपनियों को बेचेगी तो

[01:51:12] क्या सरकार को पैसे मिलेंगे? हां मिलेंगे।

[01:51:15] पर सरकार ने अपनी कंपनी बेच दी तो सरकार

[01:51:17] ने अपना एसेट सेल नहीं कर दिया। बिल्कुल

[01:51:19] कर दिया। तो डिसइन्वेस्टमेंट या एसेट

[01:51:21] सेलिंग जो होती है वो आपकी कैपिटल रिसीड

[01:51:23] का हिस्सा बनती है। एग्रीड? अच्छा एक है

[01:51:26] फिर कैपिटल एक्सपेंडिचर। ये क्या होगा?

[01:51:28] सरकार जब खर्चा करती है एक्सपेंडिचर।

[01:51:30] सरकार की जेब से पैसा जाएगा और एसेट

[01:51:32] लायबिलिटी में चेंज आना चाहिए। मैंने आपको

[01:51:33] बताया सरकार जब इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगी

[01:51:36] सरकार जब अब इस तरह से कुछ टैंक, कुछ

[01:51:37] हेलीकॉप्टर खरीदेगी वो क्या होगा? सरकार

[01:51:40] ने खर्चा किया तो एक्सपेंडिचर और क्योंकि

[01:51:42] सरकार का कुछ ना कुछ एसेट क्रिएट हो रहा

[01:51:44] है यहां पे इसीलिए वो एग्जांपल बनेगा

[01:51:46] कैपिटल एक्सपेंडिचर का।

[01:51:48] क्या ये बात आपको क्लियर है या नहीं है?

[01:51:51] डिफरेंस क्लियर हुआ या नहीं हुआ?

[01:51:59] डिफरेंस आपको क्लियर हुआ या नहीं हुआ?

[01:52:03] यस

[01:52:06] गुड गुड गुड यस एक बार क्विकली इनके

[01:52:09] एग्जांपल देख लेते हैं। देखो सबसे पहली

[01:52:11] बात है यहां पे रेवेन्यू रिसीप्ट की।

[01:52:14] रेवेन्यू रिसीट का इंपैक्ट जो होता है ना

[01:52:15] वो शॉर्ट टर्म रहता है। जैसे फॉर एग्जांपल

[01:52:19] आप नोटिस कर पाओगे ये चीज नॉर्मली बार-बार

[01:52:22] होती है। रेकरिंग भी बोलते हैं इसको। इट

[01:52:24] इज़ रेकरिंग एंड रेगुलर। ये बार-बार चीजें

[01:52:26] होंगी। और ये आपके एसेट लायबिलिटी को चेंज

[01:52:28] नहीं करती। जैसे मैंने आपको बताया।

[01:52:31] ठीक है? इसमें एग्जांपल देखो। इसमें

[01:52:33] एग्जांपल देखो। जैसे टैक्सेस आप लोगों ने

[01:52:36] इनकम टैक्स की बात कर सकते हो। कॉर्पोरेट

[01:52:38] टैक्स की बात कर सकते हो। ये डायरेक्ट

[01:52:40] टैक्स होते हैं। ये डायरेक्ट टैक्स होते

[01:52:42] हैं। ठीक है ना? अब इनमें पता क्या है?

[01:52:44] सरकार को पैसा मिल रहा है इसीलिए रिसीप्ट

[01:52:48] और दूसरी बात सरकार की कोई एसेट या

[01:52:50] लायबिलिटी में चेंज भी नहीं आ रहा। इसीलिए

[01:52:52] ये रेवेन्यू रिसीप्ट का पार्ट बनेंगे। ऐसे

[01:52:54] ही जीएसटी सरकार को पैसा मिल रहा है तो

[01:52:56] रिसीप्ट और एसेट लायबिलिटी में चेंज भी

[01:52:58] नहीं आ रहा। इसीलिए रेवेन्यू रिसीप्ट।

[01:53:00] सिमिलरली सरकार के पास कुछ नॉन टैक्स

[01:53:03] रिसीट्स भी आ सकती हैं। सर नॉन टैक्स का

[01:53:06] मतलब अरे हां ठीक है। कैपिटल रिसीट समझा

[01:53:07] दूंगा। डोंट वरी समझा रहा हूं। समझा रहा

[01:53:08] हूं कैपिटल रिसीट भी। पहले रेवेन्यू शीट

[01:53:10] पे आओ।

[01:53:12] सरकार को कई बार कुछ इंटरेस्ट मिलता है।

[01:53:15] इंटरेस्ट रिसीव्ड

[01:53:19] अगर सरकार ने कुछ लोन दिया था पर सरकार को

[01:53:22] अब उसके ऊपर इंटरेस्ट मिल रहा है। अब ये

[01:53:24] इंटरेस्ट मिलना सरकार के लिए रिसीप्ट है

[01:53:26] क्योंकि सरकार को पैसा मिल रहा है। और

[01:53:28] दूसरी बात यहां पर कोई एसेट लायबिलिटी में

[01:53:30] चेंज भी नहीं आ रहा। इसीलिए इंटरेस्ट

[01:53:31] मिलना सरकार को डिविडेंड मिलना, सरकार का

[01:53:34] प्रॉफिट होना, सरकार को ग्रांट्स मिलना,

[01:53:36] मिलना, रिसीव होना, फीस सरकार को मिलना।

[01:53:39] ये सारी चीजें क्या आती हैं? ये सारी

[01:53:41] चीजें सरकार को मिल रही हैं और इससे कोई

[01:53:43] एसेट या लायबिलिटी में चेंज भी नहीं आता।

[01:53:45] इसीलिए रेवेन्यू रिसीप्ट का हिस्सा

[01:53:47] बनेंगे। समझे मेरी बात को? समझे मेरी बात

[01:53:50] को? और दूसरी बात यहां पे है रेवेन्यू

[01:53:52] एक्सपेंडिचर। अगर सरकार कुछ खर्चा करे

[01:53:55] जैसे अपने मुलाजिमों को सैलरीज पेंशन दे

[01:53:58] या इनको इंटरेस्ट पे करे। मतलब इंटरेस्ट

[01:54:00] सरकार ने किस चीज पे किया या सरकार ने

[01:54:02] सब्सिडी दी। ये सारी चीजें किसमें आएंगी?

[01:54:04] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में। एक्सपेंडिचर का

[01:54:06] मतलब है खर्चा होना और रेवेन्यू का मतलब

[01:54:09] एसेट लायबिलिटी में चेंज ना आना। कई बच्चे

[01:54:12] आई थिंक पहली बार पढ़ रहे हैं। मैं उनको

[01:54:13] दोबारा एक्सप्लेन कर देता हूं हल्का सा।

[01:54:15] देखो मेरी बात ध्यान से सुनो। जब भी आप

[01:54:17] वर्ड सुनो रेवेन्यू आपको दिमाग में आना

[01:54:19] चाहिए एसेट लायबिलिटी में कोई चेंज नहीं

[01:54:21] आना। जब भी आप वर्ड पढ़ो कैपिटल एसेट

[01:54:24] लायबिलिटी में चेंज आएगा। ठीक है? और जब

[01:54:26] आप वर्ड सुनो रिसीप्ट, पैसा मिलना इज़

[01:54:29] रिसीप्ट, पैसा बाहर जाना इज़ एक्सपेंडिचर।

[01:54:31] बस इतना याद रखो। तो अगर आपको ये बातें

[01:54:34] समझ आएगी तो रेवेन्यू रिसीड क्या हो

[01:54:35] जाएगा? रेवेन्यू रिसीप्ट मतलब सरकार को

[01:54:37] पैसा मिल रहा है और एसेट लायबिलिटी में

[01:54:39] चेंज नहीं आ रहा। ये सारी जो बातें यहां

[01:54:41] पे लिखी हुई है ना इन सब में क्या है?

[01:54:43] सरकार को पैसा मिल रहा है रिसीव और सरकार

[01:54:46] में कोई एसेट लायबिलिटी चेंजेस भी नहीं आ

[01:54:48] रहे। और ऐसे जब हम बात करते हैं सैलरीज,

[01:54:50] पेंशन, इंटरेस्ट पेड, सब्सिडी की। यहां पर

[01:54:52] सरकार की जेब से पैसा बाहर जा रहा है।

[01:54:54] इसलिए रेवेन्यू एक्सपेंडिचर।

[01:54:57] अब आए अगर हम कैपिटल वालों की जिनके ऊपर

[01:54:59] काफी बच्चों को समझ नहीं आया था। देखो,

[01:55:01] कैपिटल में क्या होना चाहिए? आपका एसेट

[01:55:04] लायबिलिटी चेंज होना चाहिए। ठीक है? तो

[01:55:06] अगर कोई आपसे पूछे कैपिटल रिसीप्ट की बात,

[01:55:09] तो कैपिटल रिसीड में क्या आएगा? रिसीव्ड

[01:55:11] मतलब सरकार को पैसा मिलना चाहिए। हां, ठीक

[01:55:13] है? सरकार को पैसा मिलेगा। सरकार को पैसा

[01:55:16] मिलेगा? हां, ठीक है। और एसेट लायबिलिटी

[01:55:18] में चेंज भी आएगा। ऐसी कौन सी चीजें हो

[01:55:20] सकती हैं? जैसे आपका लोन लेना। सरकार अगर

[01:55:23] लोन ले रही है ना, तो क्या हुआ? सरकार को

[01:55:26] पैसा मिला। हां, रिसीप्ट। दूसरी बात जब

[01:55:28] सरकार ने लोन लिया सरकार के ऊपर लायबिलिटी

[01:55:31] बन चुकी है। तो लोन लेना सरकार के लिए एक

[01:55:34] कैपिटल रिसीप्ट होती है। फिर सरकार ने

[01:55:37] अपनी कंपनी को बेच दिया। डिसइन्वेस्ट कर

[01:55:40] दिया। जब सरकार अपनी कंपनी को बेचेगी तो

[01:55:42] सरकार को पैसा मिलेगा। तो रिसीप्ट। दूसरी

[01:55:44] बात डिसइन्वेस्ट करने से सरकार का एसेट

[01:55:47] खत्म हो जाता है। इसीलिए वो क्या होगा?

[01:55:49] कैपिटल रिसीप्ट। इसी तरह से अगर हम बात

[01:55:51] करें लोन रिकवरी। सरकार ने किसी को लोन

[01:55:54] दिया था। अब वो लोन वापस आ गया। तो जब लोन

[01:55:57] वापस आ गया तो सरकार को पैसा मिला। हां

[01:55:59] यस। तो रिसीप्ट। दूसरी बात सरकार के लिए

[01:56:02] लोन एक एसेट था। अब वो एसेट जब हमने वापस

[01:56:04] ले लिया तो हमारा एसेट खत्म हो गया। तो

[01:56:06] चेंज इन एसेट हुआ। हां बिल्कुल हुआ।

[01:56:08] इसीलिए लोन की रिकवरी भी अपने आप में एक

[01:56:10] कैपिटल रिसीप्ट यहां पे कहलाई जाती है।

[01:56:14] समझे मेरी बात को? फिर एक आता है कैपिटल

[01:56:16] एक्सपेंडिचर। सरकार जब पैसा खर्च करे जैसे

[01:56:19] सरकार ने जमीन खरीदने के लिए इक्विपमेंट

[01:56:21] इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अगर पैसा खर्च

[01:56:24] किया एक्सपेंडिचर किया और इससे सरकार का

[01:56:26] एसेट भी बन गया। इनको बोलते हैं हम कैपिटल

[01:56:29] एक्सपेंडिचर।

[01:56:31] कैपिटल एक्सपेंडिचर।

[01:56:38] प्रीतम घोष मेरी बात ध्यान से सुनो। अगर

[01:56:40] गवर्नमेंट अपने एसेट को सेल कर रही है तो

[01:56:43] वो कैपिटल रिसीप्ट होगा। फिर उस पैसे का

[01:56:45] आगे क्या करेगी वो अगला स्टेप है। ये दो

[01:56:48] अलग-अलग ट्रांजैक्शन है। आप इनको कंबाइन

[01:56:50] मत करो। समझे मेरी बात को? गवर्नमेंट ने

[01:56:52] जब अपने एसेट को सेल किया तो वो कैपिटल

[01:56:54] रिसीड। फिर जो पैसा आया उससे वो जो करना

[01:56:57] चाहिए इंटरेस्ट पे कर दिया तो वहां पर वो

[01:56:59] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर हो गया। समझे मेरी

[01:57:01] बात को? वो दो अलग-अलग ट्रांजैक्शंस हैं।

[01:57:03] दोज़ आर टू डिफरेंट ट्रांजैक्शंस।

[01:57:07] समझे? हां। अब एक डाउट ये आता है। अब एक

[01:57:11] डाउट ये आता है कि सर हम डिफेंस को किस

[01:57:14] में कैटेगराइज करें? मान लो हमने डिफेंस

[01:57:16] पे एक्सपेंडिचर किया है। हमने कुछ डिफेंस

[01:57:18] में खर्चा किया है। ये कहां पे डालेंगे?

[01:57:20] शुड इट बी कैटेगराइज़्ड एज़ रेवेन्यू

[01:57:22] एक्सपेंडिचर और कैपिटल एक्सपेंडिचर? बताओ।

[01:57:27] बताओ। डिफेंस एक्सपेंडिचर कहां आना चाहिए?

[01:57:30] देखो, डिफेंस एक्सपेंडिचर के ना दो

[01:57:32] कॉम्पोनेंट होते हैं। ध्यान से सुनना मेरी

[01:57:33] बात को। ध्यान से सुनना मेरी बात को। एक

[01:57:36] होता है कि हम अपने लोगों को सैलरीज दें।

[01:57:39] जो हमारे डिफेंस पर्सनल्स हैं उनको हमने

[01:57:41] सैलरीज दी। एक होता है कि आपने डिफेंस

[01:57:44] इक्विपमेंट परचेस किया। आपने टैंक खरीदा,

[01:57:46] आपने ड्रोन खरीदा। ये सब। तो एक्चुअली पता

[01:57:49] है क्या होता है? जो आप यहां पे अपने

[01:57:51] मुलाजिमों को सैलरी या पेंशन देते हो ना

[01:57:54] वो आता है आपका वो आता है आपका रेवेन्यू

[01:57:58] एक्सपेंडिचर।

[01:58:00] क्योंकि ये खर्चा है और इससे कोई एसेट

[01:58:02] लायबिलिटी भी नहीं चेंज हो रहा। बट अगर

[01:58:05] सरकार टैंक या ड्रोन खरीद रही है यह भी

[01:58:08] खर्चा है। पर यहां पर सरकार का एसेट बिल्ड

[01:58:10] अप हो रहा है। इसीलिए इस वाले पार्ट को हम

[01:58:12] कैपिटल एक्सपेंडिचर में काउंट करेंगे। तो

[01:58:14] अगर वो लिखे ना डिफेंस पे खर्चा है। आपको

[01:58:16] देखना पड़ेगा कि वो खर्चा किसकी बात कर

[01:58:18] रहा है। कुछ इस तरह के इक्विपमेंट्स

[01:58:20] खरीदने के लिए कर रहा है या फिर सैलरी

[01:58:22] पेंशन या मेंटेनेंस के लिए कर रहा है। अगर

[01:58:23] सैलरी पेंशन या मेंटेनेंस होगा तो

[01:58:25] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर होगा। अगर यहां पर

[01:58:26] ये वाली बात होगी तो कैपिटल एक्सपेंडिचर

[01:58:28] में इसको हम यहां पे काउंट करेंगे।

[01:58:31] अंडरस्टुड ऑ नॉट? अंडरस्टुड ऑ नॉट?

[01:58:40] ठीक है। ठीक है। ठीक है। ओके। ओके। अब मैं

[01:58:43] थोड़ा सा ना आपको इस बार के नंबर्स के

[01:58:46] हिसाब से इस बात को समझाऊंगा क्योंकि

[01:58:47] यूपीएससी इन नंबर्स के अंदर भी इंटरेस्टेड

[01:58:49] रह सकता है। पिछली बार दो न्यूमेरिकल्स आए

[01:58:51] थे। बच्चे कहते हैं न्यूमेरिकल्स नहीं हुए

[01:58:53] हमसे। अरे भाई आप एक बार समझो तो सही कि

[01:58:55] वो डाटा आया कहां से? देखो ये बजट इस बार

[01:58:57] का है और आपको लोग जानते होंगे पहली बात

[01:58:59] तो कि बजट बनाता कौन है? देखो बजट बनता है

[01:59:02] मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के द्वारा।

[01:59:03] मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस में ना दरअसल में

[01:59:05] एक डिपार्टमेंट है डिपार्टमेंट ऑफ

[01:59:06] इकोनॉमिक अफेयर्स। उसके अंतर्गत जो बजट

[01:59:09] डिवीजन है उसकी जिम्मेदारी है इस बजट को

[01:59:11] बनाना। ठीक है? अब इस बजट के आप आंकड़े

[01:59:14] देखो। खासकर मैं आपको ये नंबर्स आपको

[01:59:16] दिखाना चाहता हूं। ये वाले नंबर्स। प्लीज

[01:59:19] फोकस करेंगे इधर आप लोग। सब लोग ध्यान

[01:59:20] देंगे इधर।

[01:59:27] सब लोग बहुत ध्यान से देखेंगे। इधर बहुत

[01:59:29] ध्यान से देखेंगे। बजट में बात क्या होती

[01:59:32] है सर? सर बजट में बात होती है कि आने

[01:59:35] वाले साल में हम कितना खर्चा करेंगे? कहां

[01:59:37] से पैसा कमाएंगे? आने वाला साल मतलब देखो

[01:59:40] आज हम फरवरी में खड़े हैं। आने वाला साल

[01:59:42] कौन सा है? अरे जो 1 अप्रैल से शुरू होगा।

[01:59:45] 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और 31 मार्च

[01:59:48] 2027 तक खत्म हो जाएगा। ये है वो साल

[01:59:52] 2026। यह है उसके बजट एस्टीमेट। यह हमने

[01:59:55] अनुमान दिया है। यह हमने अनुमान दिया है

[01:59:58] कि आने वाले साल में हम कितना पैसा खर्च

[02:00:01] करेंगे या कितना पैसा कमाएंगे। ठीक है? ये

[02:00:04] हम आज अनुमान देके जा रहे हैं। अगले साल

[02:00:07] का क्या हम सोच रहे हैं। तो वो आंकड़ा

[02:00:11] आपको यहां देखने को मिलेगा। ठीक है सर।

[02:00:14] ऐसा ही एक आंकड़ा हमारी फाइनेंस मिनिस्टर

[02:00:17] ने पिछले साल भी दिया था। बिल्कुल वो

[02:00:19] आंकड़ा यहां लिखा हुआ है कि 1 साल पहले आप

[02:00:22] क्या बोल के गए थे। 1 साल पहले आपने क्या

[02:00:25] बोला था कि आप क्या करने वाले हो? यह

[02:00:27] 2025-26 का अनुमान था। 1 साल पहले लेके गए

[02:00:29] थे हम। सर पर अब तो हमारा ये साल 8 9 10

[02:00:33] महीने खत्म हो गए हैं। हां बिल्कुल। ये जो

[02:00:35] 8 9 महीने खत्म हो गए हैं। अभी अभी फरवरी

[02:00:37] मार्च तो बचा है ना। 2 महीने तो बचे हुए

[02:00:38] हैं। तो ये 2 महीने बचे हुए हैं। उनका

[02:00:41] डाटा नहीं है हमारे पास। पर पिछले 8 9

[02:00:42] महीने का तो डाटा है। हां हां हां उनका

[02:00:44] डाटा है। तो उसके बेसिस के ऊपर हमने जो

[02:00:47] पिछले साल अनुमान दिए थे ना उनमें थोड़े

[02:00:49] से बदलाव कर दिए। उसको हमने बोल दिया

[02:00:51] रिवाइज़्ड एस्टीमेट। उसमें कुछ चेंजेस जो

[02:00:53] किए वो है रिवाइज्ड एस्टीमेट। समझे मेरी

[02:00:56] बात को? ये वाला आंकड़ा कौन है? कौन सा है

[02:00:58] जो अगले अगले अप्रैल से आएगा। 1 अप्रैल

[02:01:01] 2026 से लेकर 31 मार्च 2027 तक। ये वाली

[02:01:04] लाइन क्या है? जो फाइनेंस मिनिस्टर 1 साल

[02:01:06] पहले बोल के गई थी कि हम ऐसा-ऐसा करने

[02:01:08] वाले हैं। पर 8 9 महीने के डेटा के हिसाब

[02:01:10] से उन्होंने अपने आंकड़े रिवाइज कर दिए।

[02:01:12] थोड़ा बदलाव कर दिया। साल कंप्लीट नहीं

[02:01:14] हुआ अभी। 8 9 महीने के हिसाब से हमने उसको

[02:01:16] डेटा को थोड़ा बदलाव कर दिया। ये है वो

[02:01:18] रिवाइज्ड एस्टीमेट। ठीक है? फिर सर ये

[02:01:21] वाला क्या है? व्हाट इज़ दिस आंकड़ा? ये

[02:01:23] आंकड़ा क्या है भाई? जो साल पीछे वाला

[02:01:25] कंप्लीट हो गया 2425 1 अप्रैल 2024 से

[02:01:27] लेकर 31 मार्च 2025 वो साल तो कंप्लीट हो

[02:01:30] गया ना। उसका एक्चुअल आंकड़ा है मेरे पास

[02:01:32] एक्चुअल क्योंकि वो साल कंप्लीट हो गया

[02:01:33] है। अभी चलने अब ये करंट ईयर कंप्लीट नहीं

[02:01:36] हुआ इसलिए इसका एक्चुअल नहीं आया। उसका

[02:01:38] रिवाइज आया है। अगला साल जो आने वाला है

[02:01:40] उसका हम बजट एस्टीमेट देके जा रहे हैं। तो

[02:01:43] एक्चुअल में आपके बजट के अंदर तीन सालों

[02:01:45] की बात होती है। कॉलम चार हैं पर बात होती

[02:01:48] है तीन सालों की। आने वाला साल, करंट वाला

[02:01:51] साल, पिछला साल जो खत्म हो गया। ये पिछला

[02:01:53] साल जो खत्म हो गया ये चल रहा है साल।

[02:01:55] इसके दो आंकड़े होंगे जो एक साल पहले बोल

[02:01:57] के गए थे वो और 8 9 महीने के हिसाब से

[02:02:00] हमने जो उसको रिवाइज कर दिया और एक जो साल

[02:02:02] अभी शुरू होगा 1 अप्रैल ऑनवर्ड्स। तो ऐसे

[02:02:04] आपका डाटा होता है यहां पे। चलो ठीक है।

[02:02:08] अब प्लीज नोटिस करना। पहली चीज तो कोई

[02:02:10] आपसे पूछे कि भाई आपका बजट है कितना का?

[02:02:13] देखो यहां पे नोटिस करना। जब हम बात करते

[02:02:16] हैं ना बजट साइज की जब हम बात करते हैं ना

[02:02:18] बजट हमारा साइज कितना है

[02:02:22] हम तो ये वाला आप देखो ये वाला नोटिस करो

[02:02:25] ये होता है आपका बजट साइज ये टोटल

[02:02:27] एक्सपेंडिचर यहां पे लिखा है ना ये है ये

[02:02:29] क्या है सर ये कौन सा आंकड़ा है ये

[02:02:31] एक्चुअली ना ये करोड़ों में नंबर्स हैं

[02:02:33] यहां लिखा है करोड़ यहां देखो ना ऊपर लिखा

[02:02:35] है यहां करोड़ इन करोड़ इन रूपी करोड़ ठीक

[02:02:38] है ना ये लिखा हुआ है यहां पे अब इसमें

[02:02:40] पता है क्या होगा ये जो आंकड़ा आपको दिख

[02:02:42] रहा है ना ये ये है बजट का साइज। आप लोगों

[02:02:46] ने अखबारों में ये बात पढ़ी होगी कि भारत

[02:02:48] का जो बजट है वो 53 लाख करोड़ का है। ये

[02:02:52] पढ़ा आप लोगों ने? ये नंबर यही है कि भारत

[02:02:55] का बजट 53 लाख करोड़ का है। अब सवाल आता

[02:02:58] है ये 53 लाख करोड़ बना कैसे? सबसे पहले

[02:03:01] मैं आपको खर्चे दिखाता हूं। देखो इधर

[02:03:02] देखो। इधर देखो। इधर देखेंगे सब लोग। पहला

[02:03:06] लाइन है यहां पे रेवेन्यू रिसीट। क्या आप

[02:03:09] लोग रेवेन्यू रिसीड का मतलब जानते हो?

[02:03:10] हां, हम जानते हैं। अभी पढ़ के आए हैं।

[02:03:12] क्या होता है रेवेन्यू रिसीड का मतलब?

[02:03:14] क्या होता है रेवेन्यू शीट का मतलब सर

[02:03:16] इसमें एक तो टैक्स रेवेन्यू आ गया। अरे

[02:03:17] बताया मैंने आपको यार इनडायरेक्ट टैक्स,

[02:03:19] जीएसटी, डायरेक्ट टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स,

[02:03:21] इनकम टैक्स और मैंने आपको नॉन टैक्स

[02:03:23] रेवेन्यू बताया। इन दोनों को जोड़ते हैं ना

[02:03:26] टैक्स रेवेन्यू और नॉन टैक्स रेवेन्यू

[02:03:28] इनको जोड़ के बनता है रेवेन्यू रिसीप्ट। अब

[02:03:31] अगर आप अरे कर दिया भाई ज़ूम गणेश एक बार

[02:03:34] लिख दिया बहुत है। बस शांति रखो। अब इसमें

[02:03:35] आप ध्यान देखो। यहां पर मैं रिवाइज़्ड

[02:03:37] एस्टीमेट की बात कर रहा हूं। अब इसमें

[02:03:39] देखो 26 लाख करोड़ का हमारा क्या था? हमारा

[02:03:41] टैक्स रेवेन्यू था। 6 लाख करोड़ का हमारा

[02:03:44] नॉन टैक्स रेवेन्यू था। जब आप इन दोनों को

[02:03:46] जोड़ोगे यह लगभग 33 लाख करोड़ का बनेगा।

[02:03:49] तो हमारे रेवेन्यू रिसीप्ट कितने हैं? 33

[02:03:52] लाख करोड़ के। समझे?

[02:03:56] ठीक है? अच्छा फिर यहां पे अगला

[02:03:58] कॉम्पोनेंट आओ। कैपिटल रिसीट। सर कैपिटल

[02:04:00] रिसीट भी जानते हैं? हां अभी पढ़ा हमने।

[02:04:02] कैपिटल रिसीट में क्या-क्या आता है? लोन

[02:04:04] की रिकवरी। लोन की मैंने दिखाया था आपको

[02:04:06] लोन की रिकवरी। लोन की रिकवरी कैपिटल

[02:04:08] रिसीट होगा? हां हां भाई। अगर आप लोन को

[02:04:11] रिकवर कर रहे हो क्या आपका एसेट खत्म नहीं

[02:04:14] हो रहा? हां हो रहा है और सरकार को पैसा

[02:04:16] भी मिल रहा है। इसलिए वो कैपिटल रिसीट में

[02:04:17] आएगा। फिर सरकार कुछ उधार ले रही है।

[02:04:20] बोरोइंग बोरोइंग भी सरकार के लिए कैपिटल

[02:04:23] रिसीट है। वो कैसे? अरे भाई सरकार जब बोरो

[02:04:26] कर रही है सरकार के पास पैसा आ रहा है तो

[02:04:28] रिसीट दूसरा सरकार के लिए लायबिलिटी बन

[02:04:30] रही है। तो बोरोइंग भी आपका रिसीट में

[02:04:32] आएगा। कैपिटल रिसीट में आएगा। एंड उसी तरह

[02:04:34] से अगर हम बात करें अदर रिसीड्स इसमें

[02:04:36] आपका डिसन्वेस्टमेंट आ जाता है। जो आप

[02:04:38] सरकार अपनी कंपनियां बेचती है उसको बोलते

[02:04:40] हैं डिसइन्वेस्टमेंट।

[02:04:43] अब नोटिस करना इधर इधर नोटिस करना।

[02:04:46] इधर नोटिस करना। यहां पे पता है क्या होता

[02:04:49] है? यहां पर ये कितने का है कैपिटल रिसीड?

[02:04:51] ये है 16 लाख करोड़ का। 16 लाख करोड़ हमारी

[02:04:54] कैपिटल रिसीड है। उसमें से 3 लाख करोड़

[02:04:56] यहां से आया। सॉरी 3ज़ करोड़। आई एम नॉट आई

[02:04:58] एम वेरी सॉरी। अह तीन 300 करोड़ यहां से

[02:05:02] आया। 33,000 करोड़ डिसन्वेस्टमेंट से आया

[02:05:04] और 15 लाख करोड़ आपका आया कहां से? उधार

[02:05:07] लेकर। 15 लाख करोड़ का हमने यहां पे उधार

[02:05:10] लिया है। तो इस तरह से टोटल कैपिटल रिसीट

[02:05:12] कितने की हुई? 16 लाख करोड़ की। ठीक है

[02:05:14] ना? ये बनी 16 लाख करोड़ की। तो नोटिस

[02:05:17] करो। नोटिस करो। हमारी रेवेन्यू रिसीट

[02:05:20] कितने की है? 33 लाख करोड़। 16 लाख करोड़

[02:05:23] हमारा कैपिटल रिसीट। तो टोटल रिसीट्स

[02:05:25] कितनी हुई? टोटल रिसीट्स कितनी हुई? वो

[02:05:27] कैसे बनेंगी? रेवेन्यू रिसीट प्लस कैपिटल

[02:05:29] रिसीट। वो कितना आया? 33 + 16 49 लाख

[02:05:32] करोड़। क्या आपको रिसीप्ट वाला कॉम्पोनेंट

[02:05:34] समझ आया? अरे भाई यही क्वेश्चंस आए थे ऐसे

[02:05:37] ही क्वेश्चंस पिछले साल आपके। उसने आपको

[02:05:39] ये दे दी वैल्यू मान लो 10,000 करोड़। ये

[02:05:41] दे दी 20,000 करोड़। पूछा ये कितना आएगा?

[02:05:43] दोनों को ऐड करना था। ऐसे आगे भी आऊंगा।

[02:05:45] डेफिट वाले पे भी आऊंगा। वो भी डेटा के

[02:05:47] साथ दिखाऊंगा आपको। पर क्या ये बात आपको

[02:05:48] समझ आई या नहीं आई यहां पे? कि कितना है

[02:05:51] आपका रेवेन्यू रिसीट? कितना है कैपिटल

[02:05:52] रिसीट? कितना है आपका टोटल रिसीट्स? ठीक

[02:05:55] है सर। दोस्तों ऐसे ही हम बात कर लेते हैं

[02:05:57] अब एक्सपेंडिचर की। रिसीप्ट वाला

[02:05:59] कॉम्पोनेंट हमने पढ़ लिया। अब पढ़ेंगे हम

[02:06:01] यहां पे रेवेन्यू की।

[02:06:03] अब देखो यहां पर कह रहा है रेवेन्यू के

[02:06:05] कॉन्टेक्स्ट में क्या-क्या आया? देखो

[02:06:08] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। अब एक्सपेंडिचर की

[02:06:10] बात हो रही है। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में

[02:06:11] कई चीजें आई। जैसे फॉर एग्जांपल आपका

[02:06:13] इंटरेस्ट पेमेंट आ गया। आपका ग्रांट्स

[02:06:15] वगैरह आ गया। ये सारी चीजें आई। अब इसमें

[02:06:17] पता है क्या हुआ? ये सारा मिला के आपका

[02:06:19] कितने का हुआ? 38 लाख करोड़। तो आपका

[02:06:21] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर कितना है? 38 लाख

[02:06:24] करोड़। इसमें सैलरी वगैरह सब कुछ आ गया

[02:06:25] पेंशन वगैरह। अच्छा। और यहां पर है कैपिटल

[02:06:28] एक्सपेंडिचर। कैपिटल एक्सपेंडिचर मतलब

[02:06:31] आपने जो अ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया वो

[02:06:33] कैपिटल एक्सपेंडिचर वो कितने का है? वो है

[02:06:36] 10 लाख करोड़ का। तो 38 लाख करोड़ और 10

[02:06:38] लाख करोड़ ऐड करोगे वो लगभग 49 लाख करोड़

[02:06:41] आएगा। तो ऐसे आपका बनता है आपका टोटल

[02:06:44] एक्सपेंडिचर। किसी को किसी भी चीज में अभी

[02:06:47] तक यहां पे डाउट है? रेवेन्यू

[02:06:48] एक्सपेंडिचर, रेवेन्यू सीट, कैपिटल

[02:06:50] एक्सपेंडिचर, कैपिटल रिसीड कोई कंफ्यूजन

[02:06:51] है यहां पे।

[02:06:57] ठीक है।

[02:06:59] इज इट फाइन?

[02:07:06] ठीक है? ये क्वेश्चन पिछले साल में बहुत

[02:07:08] सारे स्टेट पीसीएस में आया है। मैं आपको

[02:07:10] बताता हूं। आपको मैं यहां पे बताता हूं।

[02:07:12] अभी तक यूपीएससी में ऐसा क्वेश्चन नहीं

[02:07:13] आया पर फिर भी आ सकता है। मैं आपके सामने

[02:07:16] चार चीजें लिख रहा हूं। एक लिख रहा हूं

[02:07:17] रेवेन्यू रिसीप्ट। एक लिख रहा हूं

[02:07:19] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। एक लिख रहा हूं

[02:07:21] कैपिटल रिसीप्ट। एक लिख रहा हूं कैपिटल

[02:07:23] एक्सपेंडिचर। क्या आप इनको असेंडिंग

[02:07:25] डिसेंडिंग ऑर्डर में अरेंज कर सकते हो? रफ

[02:07:27] आईडिया एग्जैक्ट नंबर याद करने की जरूरत

[02:07:29] नहीं है। एक रफ आईडिया के हिसाब से आप बता

[02:07:31] सकते हो कौन सी चीज कहां पे आएगी? इन

[02:07:33] चारों को क्या आप असेंडिंग डिसेंडिंग

[02:07:35] ऑर्डर में अरेंज कर सकते हो? ये स्टेट

[02:07:36] पीसीएस में कई बार क्वेश्चन आ चुके हैं

[02:07:38] ऐसे। कल को हो सकता है यूपीएससी में भी आ

[02:07:40] जाए अगर आपको वो डेटा के बेसिस पे टेस्ट

[02:07:41] करना चाहे। 2025 में ऑलरेडी न्यूमेरिकल्स

[02:07:43] में थोड़ा बहुत टेस्ट कर लिया था बेसिक

[02:07:44] न्यूमेरिकल्स पे।

[02:07:52] अरे ऐसे ही करने हैं सर जैसे मैंने आपको

[02:07:54] बताया

[02:08:02] टोटल एक्सपेंडिचर मतलब ऋषेश कैपिटल

[02:08:05] एक्सपेंडिचर प्लस रेवेन्यू एक्सपेंडिचर

[02:08:08] देखो इसको अगर आपको अरेंज करना हो ना तो

[02:08:11] आप नोटिस कर पाओगे रेवेन्यू एक्सपेंडिचर

[02:08:14] सबसे ज्यादा है। फिर रेवेन्यू रिसीप्ट है।

[02:08:17] उसके बाद उसके बाद आपका कैपिटल रिसीप्ट

[02:08:19] है। फिर है आपका कैपिटल एक्सपेंडिचर। यह

[02:08:22] है इनका ऑर्डर। ठीक है? आप चेक करना चाहो

[02:08:24] तो इनका नंबर भी देख सकते हो।

[02:08:27] ठीक है?

[02:08:29] आप चेक करना चाहो तो इनका आप नंबर भी देख

[02:08:31] सकते हो। देखो यहां पे

[02:08:33] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर कितना था हमारा?

[02:08:35] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर था हमारा ये था 38

[02:08:38] लाख करोड़ का। रेवेन्यू रिसी रिसीड कितना

[02:08:40] था? 33 लाख करोड़ का। कैपिटल रिसीड 16 लाख

[02:08:42] करोड़। और आपका कैपिटल एक्सपेंडिचर 10 लाख

[02:08:45] करोड़। तो यस तो यह ऐसे बनेगा जैसे मैंने

[02:08:47] यहां पे आपको लिखा है रेवेन्यू

[02:08:48] एक्सपेंडिचर ग्रेटर दैन रेवेन्यू रिसीड

[02:08:50] ग्रेटर दैन कैपिटल रिसीड ग्रेटर दैन

[02:08:51] कैपिटल एक्सपेंडिचर ये इस तरह से ऑर्डर

[02:08:53] बनेगा।

[02:08:59] इज इट फाइन।

[02:09:05] ठीक है। गुड गुड गुड गुड। सर यहां तो बात

[02:09:08] होगी हमारी इन नंबर्स की। हमने हर एक चीज

[02:09:11] को देखो कल को न्यूमेरिकल्स आएंगे ना आप

[02:09:13] अब इनको आराम से टैकल कर लोगे कितना मर्जी

[02:09:14] डिफिकल्ट भी वो दे दे कोई दिक्कत नहीं है

[02:09:16] क्योंकि आपने एक्चुअल बजट से समझा है इस

[02:09:18] बात को ठीक है हां हां हां चलो ठीक है ठीक

[02:09:21] है ओके ओके ओके यहां तक तो बात हो गई देखो

[02:09:24] रिसीट एक्सपेंडिचर कैपिटल रिसीट कैपिटल

[02:09:26] एक्सपेंडिचर इन सब की बात हो गई अब हमें

[02:09:29] यहां पे पढ़ना है डेफिसिट के बारे में

[02:09:30] डेफिट मतलब हमारे जो घाटे होते हैं उनके

[02:09:32] बारे में हम यहां पे डिस्कस करेंगे

[02:09:36] ठीक है एक बार उनको भी हम यहां पे पढ़

[02:09:38] लेते हैं हमारे डेफिट्स को देखो,

[02:09:46] ठीक है? एक-एक करके हम अपने डेफिट्स को

[02:09:48] पढ़ना स्टार्ट करते हैं। एक-एक करके हम

[02:09:51] डेफिट्स को पढ़ना स्टार्ट करते हैं। आगे

[02:09:53] वाली स्लाइड्स लगानी है। और ये आखिरी

[02:09:55] स्लाइड है। एक बार छोड़ देना। ये वाली इसके

[02:09:57] बाद वाली स्लाइड्स लगा लो।

[02:10:02] ठीक है? आप लोग मुझे बस 1 मिनट देना। बस 1

[02:10:05] मिनट। कोई ब्रेक नहीं मैं दे रहा। अभी वो

[02:10:07] आगे वाली स्लाइड्स हल्की सी इंसर्ट करनी

[02:10:08] है इसके अंदर। उसमें 30 सेकंड्स लगेंगे।

[02:10:10] जस्ट वेट फॉर 30 सेकंड्स। बस अभी हम तुरंत

[02:10:13] के तुरंत आए।

[02:10:17] म्यूट करना एक बार।

[02:12:29] हां जी। आगे कंटिन्यू करते हैं। ठीक है?

[02:12:32] आगे कंटिन्यू करते हैं। आगे कंटिन्यू करना

[02:12:34] है हमें टाइप्स ऑफ डेफिसिट में। ठीक है?

[02:12:36] कि किस-किस प्रकार के हमारे पास डेफिसिट

[02:12:38] होते हैं। अब हम वो अंडरस्टैंड करेंगे।

[02:12:41] ठीक है? कि किस-किस प्रकार के डेफिसिट

[02:12:42] होते हैं। देखो, समझना इस बात को। जब मैं

[02:12:45] बात करता हूं ना डेफिसिट की। व्हाट इज़ द

[02:12:48] मीनिंग ऑफ़ दिस टर्म? डेफिसिट। डेफिसिट का

[02:12:50] मतलब होता है घाटा। डेफिसिट का मतलब होता

[02:12:53] है घाटा। कि कितना घाटा है। ठीक है? अब

[02:12:56] डेफिसिट कैसे निकालते हो? बहुत सिंपल चीज

[02:12:58] है। मैं आपको एक्सप्लेन करता हूं। देखो

[02:13:01] मान लो आपके पास आपका खर्चा है 100 का।

[02:13:07] आपका एक्सपेंडिचर है 100 और आपका रिसीप्ट

[02:13:10] है मान लो 20।

[02:13:12] ठीक है? तो अगर आपको यहां पे घाटा निकालना

[02:13:15] हो, अगर आपको यहां पे डेफिट निकालना हो,

[02:13:17] तो वो कितने का आएगा? क्या हम बता सकते

[02:13:19] हैं? बहुत ईजीली बता सकते हैं भाई। बहुत

[02:13:22] ईजीली। आप देखो ना अगर आपका खर्चा ₹100 का

[02:13:25] है। आपकी रिसीट 20 है तो आपका घाटा कितने

[02:13:28] का आएगा? 80 का आएगा ना?

[02:13:31] कैसे निकाला आपने? कैसे निकाला? सिंपली

[02:13:33] एक्सपेंडिचर माइनस रिसीट कर दिया।

[02:13:35] एक्सपेंडिचर माइनस रिसीट करोगे। खर्चा

[02:13:37] माइनस आपका रिसीट्स करोगे तो आपके पास

[02:13:41] डेफिसिट निकल के आ जाएगा। आपके पास

[02:13:43] डेफिसिट निकल के आ जाएगा। तो एक्चुअली पता

[02:13:45] क्या होता है? हम भी इस तरह से अलग-अलग

[02:13:48] प्रकार के डेफिसिट निकाल सकते हैं। तो

[02:13:50] देखो सबसे पहला हमारे पास डेफिसिट जो आता

[02:13:53] है वह आता है रेवेन्यू डेफिसिट। व्हाट डू

[02:13:56] मीन बाय दिस टर्म? रेवेन्यू डेफिसिट।

[02:13:58] रेवेन्यू डेफिट की फुल फॉर्म होती है

[02:14:00] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर माइनस रेवेन्यू

[02:14:02] रिसीप्ट। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर माइनस

[02:14:05] रेवेन्यू रिसीप्ट। इसका मतलब क्या हुआ?

[02:14:08] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर माइनस रेवेन्यू

[02:14:09] रिसीप्ट। देखो मैंने आपको बताया डेफिसिट

[02:14:11] का मतलब तो यही है एक्सपेंडिचर माइनस

[02:14:14] रिसीप्ट। ठीक है? अगर यहां पर इसके आगे

[02:14:16] मैं रेवेन्यू कॉमोनेंट ऐड कर दूं तो ये

[02:14:18] क्या बन जाएगा? रेवेन्यू एक्सपेंडिचर

[02:14:20] माइनस रेवेन्यू रिसीप्ट। बिल्कुल बन

[02:14:22] जाएगा। अब नोटिस करो क्या ये चीज ये घाटा

[02:14:26] अपने आप में बुरी चीज है? देखो मैं आपको

[02:14:28] पहले ना सिंपल बताता हूं। आप रेवेन्यू

[02:14:31] एक्सप डेफिसिट छोड़ो। इन जनरल डेफिसिट की

[02:14:33] बात करो। क्या डेफिसिट होना अच्छी बात है

[02:14:35] या बुरी बात है? हां। डेफिसिट होना अच्छी

[02:14:39] बात है या बुरी बात है? देखो डेफिसिट होना

[02:14:42] या ना होना यह अच्छी भी बात हो सकती है,

[02:14:44] बुरी बात भी हो सकती है। यह डिपेंड पता है

[02:14:47] किस बात पर करता है? आप उधार ले क्यों रहे

[02:14:50] हो? अगर आप कुछ अच्छे काम के लिए लोन ले

[02:14:53] रहे हो। मान लो आपको अपनी दुकान खोलनी है

[02:14:55] या सरकार को मान लो कुछ सड़कें बनानी है

[02:14:57] तो उस चीज के लिए लोन लेना कोई बुरी बात

[02:14:59] नहीं है। दैट इज़ फाइन। ठीक है? अगर आप

[02:15:01] सड़क बनाने के लिए लोन ले रहे हो तो वो एक

[02:15:03] अच्छी बात है। पर अगर आपको अपने मुलाजिमों

[02:15:06] की सैलरी देने के लिए आप लोन लेना पड़े वो

[02:15:09] अपने आप में चिंता वाली बात है। समझे? तो

[02:15:12] डेफिसिट अपने आप में खराब या अच्छा नहीं

[02:15:14] होता। वो डिपेंड करता है कि आप डेफिसिट

[02:15:17] किस पर्पस की वजह से है। क्या रीज़न की वजह

[02:15:20] से आपको उधार लेना पड़ रहा है। समझे मेरी

[02:15:22] बात को? अब यहां पे बात आएगी।

[02:15:27] यहां पे बात आएगी रेवेन्यू डेफिसिट की। अब

[02:15:30] रेवेन्यू डेफिसिट अपने आप में खराब है।

[02:15:32] पता है क्यों खराब है? मैं आपको समझाता

[02:15:33] हूं। देखो, रेवेन्यू डेफिसिट क्यों हुआ

[02:15:36] है? बिकॉज़ रेवेन्यू एक्सपेंडिचर ज्यादा है

[02:15:38] एज़ कंपेयर टू रेवेन्यू सीट। रेवेन्यू

[02:15:40] एक्सपेंडिचर ज्यादा होने का मतलब कहीं ना

[02:15:42] कहीं सरकार को अपने जो पेंशन देनी है,

[02:15:45] सैलरीज देनी है वो अमाउंट ज्यादा है और

[02:15:48] सरकार को जो टैक्स से या नॉन टैक्स

[02:15:50] रेवेन्यू आया वो अपने आप में काफी कम था।

[02:15:52] इसका मतलब पता है क्या है? कि सरकार अपने

[02:15:55] लोगों को सैलरी देने के लिए उधार ले रही

[02:15:57] है। ये चीज थोड़ी चिंता वाली बात हो जाती

[02:16:00] है। लंबे पर्पस के लिए सड़क बनाने के लिए

[02:16:03] लोन चाहिए दैट इज ओके। पर अगर सैलरी देने

[02:16:05] के लिए लोन लेना पड़े वो थोड़ी गलत बात

[02:16:07] है। तो इसीलिए रेवेन्यू डेफिसिट हमारा

[02:16:09] जितना कम हो उतना अच्छी बात होती है।

[02:16:11] रेवेन्यू डेफिसिट ज्यादा होगा तो कहीं ना

[02:16:13] कहीं खराब बात होती है। बट

[02:16:17] ये पहला कांसेप्ट है आरटी का। इसके ऊपर

[02:16:19] क्वेश्चन आया था यूपीएससी 2025 में। कैसे

[02:16:21] आया था क्वेश्चन? उसने यहां पे रेवेन्यू

[02:16:23] एक्सपेंडिचर की कुछ वैल्यू दे रखी थी। मान

[02:16:24] लो 20,000 करोड़। इसकी वैल्यू दे रखी थी

[02:16:26] मान लो 10,000 करोड़। और आपसे पूछा था

[02:16:28] रेवेन्यू डेफिसिट क्या होगा? तो सिंपली

[02:16:31] 20,000 - 10,000 = 10,000 करोड़। ऐसे निकाल

[02:16:33] लेंगे। सिंपल। सिंपल फार्मूला क्या है?

[02:16:35] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर माइनस रेवेन्यू सीट

[02:16:37] इज़ कॉल्ड एज रेवेन्यू डेफिसिट। इज़ इट

[02:16:40] फाइन?

[02:16:42] इज़ इट फाइन?

[02:16:49] ठीक है। ओके। ओके ओके ओके। अच्छा एक

[02:16:51] कांसेप्ट ऐसे आता है आपका इफेक्टिव

[02:16:53] रेवेन्यू डेफिसिट। एक कांसेप्ट आपका यहां

[02:16:56] पे आता है इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट। अब

[02:16:58] ये बड़ा ही इंटरेस्टिंग है। मैं आपको

[02:17:00] समझाता हूं क्यों?

[02:17:02] देखो

[02:17:05] रेवेन्यू डेफिसिट तो आपको समझ आ गया। इट

[02:17:07] इज़ नथिंग बट रेवेन्यू एक्सपेंडिचर माइनस

[02:17:10] रेवेन्यू सीट। ठीक है? बट गवर्नमेंट कई

[02:17:14] बार क्या बोलती है ना? गवर्नमेंट केबर

[02:17:16] बोलती है कि यार हमने ना स्टेट्स को

[02:17:20] ग्रांट्स दी। हमने स्टेट्स को ग्रांट्स

[02:17:22] दी। ठीक है? ये जो हमने ग्रांट्स दी

[02:17:25] स्टेट्स को

[02:17:28] उन्होंने क्या किया? इस ग्रांट से अपने

[02:17:31] यहां पे कुछ कैपिटल एक्सपेंडिचर कर दिया।

[02:17:34] मतलब कुछ सड़कें बना ली, कुछ

[02:17:35] इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट कर लिया। अब यह

[02:17:38] खर्चा खराब खर्चा नहीं है। अगर हम यहां पर

[02:17:41] ग्रांट्स दे रहे हैं अपनी स्टेट्स को और

[02:17:44] स्टेट्स अगर उससे यहां पे आगे कैपिटल

[02:17:46] एक्सपेंडिचर यहां पे कर रहे हैं। कुछ

[02:17:48] इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट कर रहे हैं तो वो

[02:17:50] खराब खर्चा नहीं है। तो एक्चुअली ये वाला

[02:17:52] खर्चा जो अच्छा खर्चा है इसको आप माइनस

[02:17:55] करिए। कहां से? रेवेन्यू डेफिसिट से। तो

[02:17:58] वो जो टर्म आता है ना वो हमारे सामने आता

[02:18:00] है इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट का। वो कैसे

[02:18:03] निकालते हैं? इट इज़ नथिंग बट रेवेन्यू

[02:18:05] डेफिसिट माइनस ग्रांट्स टू स्टेट्स

[02:18:09] ग्रांट्स टू स्टेट्स

[02:18:12] फॉर क्रिएशन ऑफ़ कैपिटल एसेट्स।

[02:18:15] ग्रांट्स टू स्टेट्स फॉर क्रिएशन ऑफ़

[02:18:19] कैपिटल एसेट्स।

[02:18:22] ये फार्मूला बनता है आपका ईआरडी का।

[02:18:25] इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिट का फार्मूला क्या

[02:18:26] बना? रेवेन्यू डेफिसिट माइनस ग्रांट्स टू

[02:18:29] स्टेट्स फॉर क्रिएशन ऑफ़ कैपिटल एसेट। कह

[02:18:31] रहा पता है क्या हमने? हमने बोला कि यार

[02:18:33] आरडी सारा का सारा खराब खर्चा नहीं है। ये

[02:18:36] खर्चा तो अच्छा खर्चा है। अगर हम स्टेट्स

[02:18:38] को कुछ ग्रांट्स दे रहे हैं और स्टेट्स उस

[02:18:40] ग्रांट से कैपिटल एसेट क्रिएट कर रहे हैं

[02:18:41] तो दिस इज़ अ गुड एक्सपेंडिचर। तो आप

[02:18:44] रेवेन्यू डेफिसिट में से ये माइनस करो। तो

[02:18:46] जो बचा वो है इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट।

[02:18:48] अब पॉइंट यहां पे ये आएगा कि इसको लाने की

[02:18:50] जरूरत क्या थी? देखो मेरी बात समझो।

[02:18:52] सरकारों के ऊपर प्रेशर डलता था कि भाई आप

[02:18:55] अपना रेवेन्यू डेफिसिट जीरो करो। अगर आप

[02:18:58] अपना रेवेन्यू डेफिट जीरो करोगे वही अच्छी

[02:19:00] बात मानी जाएगी। क्योंकि अगर आपका

[02:19:02] रेवेन्यू डेफिसिट है इसका मतलब यह है कि

[02:19:04] आप ना क्या कर रहे हो? आप कहीं ना कहीं

[02:19:08] ऐसा खर्चा बहुत ज्यादा कर रहे हो जिससे

[02:19:10] कुछ मीनिंगफुल एसेट क्रिएट नहीं हो रहे।

[02:19:13] तो सरकार ने देखा यार देखो मेरी बात सुनो।

[02:19:15] मैं आपकी बात मानता हूं कि आरडी खराब है।

[02:19:17] पर कुछ ऐसा खर्चा भी तो था रेवेन्यू

[02:19:19] डेफिसिट के अंदर जो हमने ग्रांट्स दी

[02:19:20] स्टेट्स को जिससे उन्होंने एसेट बनाया। तो

[02:19:23] वो दैट इज़ नॉट अ बैड एक्सपेंडिचर। तो आप

[02:19:25] रेवेन्यू डेफिट में से इस चीज़ को माइनस

[02:19:26] करो। तो जब हमने इसको माइनस किया वो निकल

[02:19:29] के आया इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट। तो

[02:19:30] एक्चुअली हमारा फोकस पता है क्या होना

[02:19:32] चाहिए कि हम इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट को

[02:19:34] जीरो करें ना कि आरडी को जीरो करें। ईआरडी

[02:19:38] ज़ीरो होना चाहिए। इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिट

[02:19:40] ज़ीरो होना चाहिए क्योंकि वो है खराब

[02:19:42] खर्चा।

[02:19:43] समझे मेरी बात को? तो इस तरह से हम

[02:19:45] इफेक्टिव रेम डेफिसिट निकाल सकते हैं।

[02:19:46] क्या फार्मूला इसका बनेगा? इफेक्टिव

[02:19:48] रेवेन्यू डेफिट का फार्मूला बनेगा

[02:19:49] रेवेन्यू डेफिसिट माइनस ग्रांट्स गिवन टू

[02:19:51] स्टेट्स फॉर द क्रिएशन ऑफ़ कैपिटल एसेट्स।

[02:19:55] इज़ इट क्लियर? इज़ इट क्लियर?

[02:19:59] ठीक है? ठीक है। ठीक है। अच्छा एक

[02:20:01] कांसेप्ट और देखना है हमें। वो आता है

[02:20:03] फिसिकल डेफिसिट का। अब इसके ऊपर भी

[02:20:05] क्वेश्चन आया था इस बार फिस्ल डेफिसिट के

[02:20:07] ऊपर। कैसे निकालते हैं फिसलिक डेफिसिट?

[02:20:09] बहुत सिंपल है। फिस्कल डेफिसिट कैसे

[02:20:11] निकालेंगे सर? फिस्कल डेफिसिट जब हम

[02:20:14] निकालेंगे ना, हम निकालेंगे इट इज़ नथिंग

[02:20:16] बट टोटल एक्सपेंडिचर माइनस टोटल इनकम।

[02:20:20] यहां टोटल इनकम होता है। ये टोटल रिसीट्स

[02:20:22] नहीं होता। मैं आपको समझाता हूं फर्क क्या

[02:20:24] है इनकम और रिसीट्स का। प्लीज देखेंगे जब

[02:20:27] हम मतलब कि टोटल खर्चा कितना है माइनस

[02:20:30] टोटल कमाई कितनी है वो आपका होगा फिसिकल

[02:20:32] डेफिसिट टोटल खर्चा कैसे बताएंगे सर टोटल

[02:20:35] खर्चा कैसे बताएंगे इट इज़ नथिंग बट

[02:20:37] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर प्लस कैपिटल

[02:20:38] एक्सपेंडिचर ठीक है टोटल इनकम कैसे

[02:20:41] निकालेंगे देखो एक्सपेंडिचर तो आपने समझ आ

[02:20:44] गया रेवेन्यू एक्सपेंडिचर और कैपिटल

[02:20:45] एक्सपेंडिचर इनकम के लिए क्या करना होगा

[02:20:48] इनकम के लिए हम यहां पे रेवेन्यू रिसीप्ट

[02:20:51] लेंगे और क्या लेंगे बताओ क्या लेंगे

[02:20:54] इसमें आगे क्या लिख लिखूं यहां पे क्या

[02:20:56] कैपिटल रिसीट लिख दूं? नहीं यहां हम

[02:20:59] कैपिटल रिसीप्ट नहीं लिखेंगे। यहां हम

[02:21:01] क्या लिखेंगे? नॉन डे क्रिएटिंग कैपिटल

[02:21:05] रिसीट। सर ये क्या लिख दिया आपने? देखो

[02:21:08] समझाता हूं क्यों ऐसा लिखेंगे। मैंने आपको

[02:21:10] कैपिटल रिसीट पढ़ाया था। हां हां। कैपिटल

[02:21:12] रिसीड आपने पढ़ाया था। जब मैंने आपको

[02:21:14] कैपिटल रिसीड पढ़ाया था। मैंने आपको बताया

[02:21:16] था कि कैपिटल रिसीड दो प्रकार की होती

[02:21:18] हैं। एक होती है डेप्ट क्रिएटिंग। एक होती

[02:21:22] है नॉन डेप्ट क्रिएटिंग।

[02:21:28] डेप्ट क्रिएटिंग कैपिटल रिसीड कौन सी होती

[02:21:30] हैं? जैसे आपका बोरोइंग्स अगर आप उधार

[02:21:32] लोगे ना तो आपका कैपिटल रिसीड तो होगा पर

[02:21:35] इससे आपका उधार बनेगा। नॉन डे क्रेडिटिंग

[02:21:38] में जैसे आपका डिसन्वेस्टमेंट हो गया है

[02:21:40] ना? एसेट सेलिंग हो गया या फिर रिकवरी ऑफ़

[02:21:43] लोंस हो गया। यह सब आपका नॉन डेप्ट

[02:21:46] क्रेडिटिंग कैपिटल

[02:21:49] रिसीप्ट में आता है। तो जब हम यहां पे

[02:21:51] इनकम लेते हैं ना, जब हम इनकम देखते हैं

[02:21:54] ना, तो इनकम के अंदर आपका डेप्ट क्रिएटिंग

[02:21:58] कैपिटल रिसीट नहीं देखा जाता। क्या देखा

[02:22:00] जाता है? केवल और केवल नॉन डेप्ट

[02:22:02] क्रिएटिंग कैपिटल रिसीट। सो दैट इज़ व्हाई

[02:22:04] हम यहां पर टोटल इनकम में पूरा कैपिटल

[02:22:08] रिसीट नहीं लेते। टोटल इनकम में नॉन डेप्ट

[02:22:10] क्रेडिटिंग कैपिटल रिसीट लेते हैं। मतलब

[02:22:12] बोरोइंग वाला पार्ट हम यहां नहीं देखेंगे।

[02:22:15] समझे? तो ये बना फिसिकल डेफिसिट का

[02:22:17] फार्मूला। टोटल एक्सपेंडिचर माइनस टोटल

[02:22:20] इनकम। टोटल एक्सपेंडिचर में क्या आया?

[02:22:22] रेवेन्यू एक्सपेंडिचर प्लस कैपिटल

[02:22:23] एक्सपेंडिचर। और टोटल इनकम में क्या आया?

[02:22:25] रेवेन्यू रिसीप्ट प्लस नॉन डे क्रिएटिंग

[02:22:27] कैपिटल रिसीप्ट।

[02:22:29] क्या ये बात क्लियर है? ये आएगा आपका

[02:22:31] फिस्कल डेफिसिट का फार्मूला।

[02:22:34] इसको या तो ऐसे लिख लो या फिर इसको ऐसे भी

[02:22:38] लिखा जा सकता है। इट इज नथिंग बट फिसल

[02:22:40] डेफिसिट इज़ नथिंग बट टोटल एक्सपेंडिचर

[02:22:42] माइनस टोटल रिसीट्स

[02:22:48] एक्सक्लूडिंग बोरोइंग्स

[02:22:53] टोटल रिसीट्स एक्सक्लूडिंग बोरोइंग्स।

[02:22:56] क्योंकि रिसीट का हमने सारा हिस्सा लिया।

[02:22:58] बस बोरोइंग वाला हिस्सा ना लिया। सारा

[02:23:01] हिस्सा लिया बस बोरोइ वाला हिस्सा नहीं

[02:23:02] लिया। तो टोटल रिसीट्स एक्सक्लूडिंग द

[02:23:04] बोरोइंग्स। ये बन जाएगा फार्मूला फिस्कल

[02:23:06] डेफिसिट का। गॉट इट? ये दोनों फॉर्मूले

[02:23:10] आपको समझ आए? ये दोनों फ़ूले आपको समझ आए?

[02:23:13] हां, ठीक है? एक इसका तीसरा फार्मूला भी

[02:23:15] है। एक इसका तीसरा फार्मूला भी है। इनके

[02:23:18] ऊपर दो क्वेश्चन आए थे 2025 में। अगर आपने

[02:23:20] पीवाईक्यूस देखे हो। देखो, समझाता हूं।

[02:23:23] मान लो आपका टोटल खर्चा है

[02:23:27] मान लो आपका टोटल खर्चा है ₹150 और आपकी

[02:23:30] टोटल कमाई है 100। अगर आपका टोटल खर्चा है

[02:23:33] ₹150 और आपकी कमाई है 100 तो मुझे बताओ यह

[02:23:37] ₹50 का यहां पर शॉर्टफॉल है। क्या यह ₹50

[02:23:40] का शॉर्टफॉल नहीं है? हां ₹50 का शॉर्टफॉल

[02:23:43] है। सर इसी को तो हम फिसल डेफिट बोलते

[02:23:45] हैं। हां बिल्कुल इसी को हम यहां पे

[02:23:47] फिसिकल डेफिट बोलते हैं। पॉइंट ये है ये

[02:23:49] ₹50 का जो शॉर्टफॉल है, ये कैसे फुलफिल

[02:23:51] होगा? यह ₹50 का शॉर्टफॉल सर फुलफिल होता

[02:23:54] है आपका उधार लेकर आपका बोरोइंग कर कर। तो

[02:23:58] एक्चुअली आपकी बोरोइंग भी कितनी हुई?

[02:24:00] बोरोइंग भी आपकी ₹50 की ही हुई। तो

[02:24:02] एक्चुअली जो इसका तीसरा फ़ूला बनके निकल के

[02:24:04] आया इट इज़ नथिंग बट फिसल डेफिसिट इज़ सेम

[02:24:07] ऐज़ योर बोरोइंग। फिस्कल डेफिसिट उतना ही

[02:24:10] होगा जितना आपने उधार लिया है।

[02:24:21] क्या ये बात क्लियर हुआ या नहीं हुआ?

[02:24:35] तीनों फॉर्मूले में कोई डाउट है?

[02:24:38] तीनों फ़ूले क्लियर हैं यहां पे?

[02:24:47] तीनों फ़ूले यहां पे क्लियर हैं।

[02:24:51] गुड गुड गुड। अच्छा एक और फार्मूला यहां

[02:24:53] पे

[02:24:56] वह आता है आपका प्राइमरी डेफिसिट का। वो

[02:25:00] आता है प्राइमरी डेफिसिट का। प्रथा

[02:25:02] पाटीदार पूछ रहे हैं ये कैसे पॉसिबल है?

[02:25:04] अरे आप मुझे बताओ आपने खर्चा प्रथा ₹150

[02:25:07] का करा। आपकी कमाई ₹100 आए। ₹50 कहां से

[02:25:10] आए? उधार लेकर आए तो फिसल डेफिसिट बोरोइंग

[02:25:12] में होता है। अभी आपको मैं डाटा दिखाऊंगा।

[02:25:14] चिंता मत करना। चौथा कांसेप्ट हमारे सामने

[02:25:16] है प्राइमरी डेफिसिट का।

[02:25:18] देखो

[02:25:21] देखो अगर आपको सरकार की इस साल की स्थिति

[02:25:25] को जानना है कि सरकार ने इस साल जो करंट

[02:25:27] ईयर के अंदर अपने फाइनेंससेस को कैसे

[02:25:30] मैनेज किया? क्या सही ढंग से उसने अपने

[02:25:32] खर्चे मैनेज किए या नहीं किए? तो क्या वो

[02:25:34] फिसल डेफिट्स देख सकते हैं? नहीं देख

[02:25:36] सकते। क्यों नहीं देख सकते? क्योंकि देखो

[02:25:39] जब आप फिसलिक डेफिसिट कैलकुलेट करते हो तो

[02:25:41] तब आप खर्चा देखोगे सारा का सारा। उस

[02:25:44] खर्चे में तो वह सब भी आ गया जो किसी

[02:25:46] पिछले ने लोन लिया था उसका इंटरेस्ट

[02:25:48] इंटरेस्ट पेमेंट भी करना है। मानते हो अगर

[02:25:51] आपको सरकार का मौजूदा साल का परफॉर्मेंस

[02:25:53] आपको चेक करना है तो फिसल डेफिसिट से नहीं

[02:25:55] देख सकते वो तो पिछले सालों का भी लोन

[02:25:57] होगा उसका भी इंटरेस्ट पेमेंट करना पड़ेगा

[02:25:59] इस साल में। राइट? तो अगर आपको सरकार की

[02:26:02] करंट परफॉर्मेंस जाननी है ना उसके लिए

[02:26:04] आपके पास जो टेक्निक आती है वो आती है

[02:26:06] प्राइमरी डेफिसिट। प्राइमरी डेफिसिट कैसे

[02:26:08] निकालेंगे? देखो अगर आप अपने फिस्ल डेफिट

[02:26:11] जो टोटल घाटा था उसमें से अगर आप इंटरेस्ट

[02:26:14] पेमेंट

[02:26:16] उसमें से अगर आप इंटरेस्ट पेमेंट

[02:26:20] ऑन प्रीवियस बोरोइंग्स

[02:26:26] ये माइनस कर दोगे जितना भी आपका पुराना

[02:26:28] उधार था जितना भी आपका पुराना उधार था अगर

[02:26:32] आपने उसके ऊपर इंटरेस्ट पेमेंट को माइनस

[02:26:34] कर दिया ना तो जो पैसा बचेगा आपके पास जो

[02:26:36] डेफिसिट आपके पास बचेगा उसको हम बोलते हैं

[02:26:38] प्राइम प्राइमरी डेफिसिट। तो प्राइमरी

[02:26:40] डेफिसिट क्या हुआ? फिस्कल डेफिसिट में से

[02:26:42] इंटरेस्ट पेमेंट अपने पिछले बोरोइंग्स का

[02:26:44] आप माइनस कर दीजिए। जो बचेगा आपका वो

[02:26:47] प्राइमरी डेफिसिट होगा। क्या ये बात समझ

[02:26:50] आई या नहीं आई?

[02:26:53] बिल्कुल। तो यहां पर प्राइमरी डेफिसिट से

[02:26:55] क्या होगा? आपकी करंट परफॉर्मेंस आपको पता

[02:26:58] लगेगी।

[02:27:01] करंट परफॉर्मेंस ऑफ गवर्नमेंट। अगर सरकार

[02:27:07] की आपको करंट परफॉर्मेंस जाननी है, वह

[02:27:09] आपको प्राइमरी डेफिट से यहां पर पता लग

[02:27:10] पाएगी।

[02:27:12] क्या यह बात आपको समझ आई या नहीं आई?

[02:27:15] चारों कांसेप्ट आपको समझ आए या नहीं आए?

[02:27:18] पहला हमने पढ़ा रेवेन्यू डेफिसिट। वो क्या

[02:27:20] था? रेवेन्यू एक्सपेंडिचर माइनस रेवेन्यू

[02:27:22] रिसीप्ट। दूसरा हमने पढ़ा इफेक्टिव

[02:27:25] रेवेन्यू डेफिट। वो क्या था? रेवेन्यू

[02:27:27] डेफिसिट माइनस क्या था? रेवेन्यू डेफिसिट

[02:27:30] माइनस ग्रांट्स टू स्टेट्स फॉर द क्रिएशन

[02:27:32] ऑफ़ कैपिटल एसेट्स। तीसरा फार्मूला था

[02:27:35] फिस्कल डेफिसिट। फिसलिक डेफिसिट क्या था?

[02:27:37] टोटल एक्सपेंडिचर माइनस टोटल इनकम। या फिर

[02:27:39] उसको हम फिसल डेफिसिट इक्वल ट बोरोइंग भी

[02:27:41] बोल सकते थे। एंड चौथा फार्मूला क्या है?

[02:27:43] प्राइमरी डेफिसिट इक्वल टू फिसल डेफिसिट

[02:27:45] माइनस इंटरेस्ट पेमेंट ऑन प्रीवियस

[02:27:47] बोरोइंग। क्या ये बात क्लियर है?

[02:27:51] यस।

[02:27:55] अब आते हैं यहां पे। अब आते हैं यहां पे।

[02:28:04] देखो

[02:28:09] एक-एक करके देखेंगे।

[02:28:12] पहला देखो पहला यहां देखो इधर पढ़ो।

[02:28:15] रेवेन्यू डेफिसिट क्या कह रहा है? 10 - 1

[02:28:18] सर क्या है? 10 देखो ना लिखा है 10 - 1

[02:28:21] कहां पर 10 है सर? 10 है यहां पे। 10 क्या

[02:28:23] है? रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। 10 है रेवेन्यू

[02:28:26] एक्सपेंडिचर। और वन क्या है? वन। वन है

[02:28:28] रेवेन्यू रिसीप्ट। है या नहीं है? बिलकुल

[02:28:30] है। तो अगर आप अगर आप क्या करो? अगर आप

[02:28:35] रेवेन्यू डेफिसिट सॉरी रेवेन्यू

[02:28:36] एक्सपेंडिचर माइनस रेवेन्यू सीड करेंगे ना

[02:28:38] वो आपको क्या देगा? रेवेन्यू डेफिसिट। अब

[02:28:41] मैंने आपको जब रेवेन्यू एक्सपेंडिचर और

[02:28:43] रेवेन्यू सीड बताया था। मैंने आपको बताया

[02:28:44] था कि रेवेन्यू एक्सपेंडिचर कितना था?

[02:28:46] लगभग 37 या 36 लाख करोड़। और रेवेन्यू सीट

[02:28:49] कितना था? 31 लाख करोड़। तो क्या ये 5 लाख

[02:28:51] करोड़ नहीं आना चाहिए? बिल्कुल आया है।

[02:28:53] वही तो है आपका रेवेन्यू डेफिसिट। वही तो

[02:28:56] है रेवेन्यू डेफिसिट। अंडरस्टुड? ठीक है?

[02:28:59] फिर एक आया इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट। अब

[02:29:01] ये क्या कह रहा है? ये कह रहा है 15 - 12।

[02:29:04] 15 क्या था? रेवेन्यू डेफिसिट। 12 क्या है

[02:29:06] सर? 12। मैं दिखाता हूं 12 क्या है? कहां

[02:29:08] है 12 आपका? सर 12 है ये। ग्रांट्स फॉर द

[02:29:11] क्रिएशन ऑफ़ कैपिटल एसेट। क्या यही

[02:29:12] फार्मूला नहीं लिखा हमने? एग्जैक्टली सर

[02:29:14] यही लिखा। ये देखो ना। क्या है रेवेन्यू

[02:29:16] डेफिट? सॉरी इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिट क्या

[02:29:18] है? 15 - 12 15 था। आर डी तो आर डी - 12

[02:29:22] आरडी माइनस ग्रांट्स फॉर द क्रिएशन ऑफ़

[02:29:24] कैपिटल एसेट। यही है आपका ईआरडी का

[02:29:26] फार्मूला। आप चेक कर लो। आरडी था आपका 5

[02:29:29] लाख करोड़, आपका ग्रांट्स था 3 लाख करोड़

[02:29:32] का। तो आपका ईआरडी आ गया ₹ लाख करोड़ का।

[02:29:35] यही आपके फ़ूले पूछे गए हैं भाई। आपको ये

[02:29:38] नंबर दे दिए थे पिछली बार। देखो कह रहे

[02:29:39] हैं ना न्यूमेरिकल आए थे पिछली बार। हां

[02:29:41] आए थे। यही नंबर दे दिए गए थे। उनको पूछा

[02:29:43] था ईआरडी निकाल दो। तो फार्मूला पता होता

[02:29:45] तो निकल जाता।

[02:29:47] अब तीसरा देखो इधर। इधर देखो। फिस्कल

[02:29:50] डेफिसिट। फिस्कल डेफिसिट कैसे निकाला

[02:29:52] इसने? 9 - 1 + 5 + 6 पहले नाइन देखो। नाइन

[02:29:55] क्या है सर? नाइन। व्हाट इज नाइन? नाइन

[02:29:57] कहां पे है? नाइन है टोटल एक्सपेंडिचर।

[02:29:59] हां, ठीक है। ठीक है। टोटल एक्सपेंडिचर

[02:30:00] में से क्या करना है? 1 + 5 + 6 1 + 5 + 6

[02:30:04] देखो वन क्या है? रेवेन्यू रिसीप्ट है या

[02:30:07] नहीं है? और 5 + 6 क्या है? रिकवरी ऑफ़

[02:30:09] लोनस एंड बोरोइंग। देखो यार इसने अदर सॉरी

[02:30:13] रिकवरी ऑफ़ लोनस प्लस अदर रिसीट्स। इसने भी

[02:30:15] बोरोइंग वाला पार्ट नहीं लिया। क्या-क्या

[02:30:16] लिया उसने? उसने रिसीट में से रेवेन्यू

[02:30:18] रिसीट ले लिया। मतलब वन ले लिया और फाइव

[02:30:21] और सिक्स ले लिया। मतलब बोरोइंग वाला

[02:30:23] पार्ट छोड़ दिया नहीं छोड़ दिया? बिल्कुल।

[02:30:25] तो यही तो हमने फार्मूला डिस्कस किया था

[02:30:26] पीछे। यही तो हमने फार्मूला डिस्कस किया

[02:30:28] था फिसलिक डेफिट का। तो ऐसे आप फिसिकल

[02:30:30] डेफिट भी निकाल सकते हो। समझे या नहीं

[02:30:33] समझे? ठीक है सर समझ गए? एक चीज और समझना

[02:30:36] यहां पे। एक चीज और समझना यहां पे। देखो

[02:30:38] मैंने आपको फिसिकल डेफिसिट का तीसरा

[02:30:40] फार्मूला बताया था। फिस्कल डेफिसिट का

[02:30:42] तीसरा फार्मूला क्या था? फिस्कल डेफिसिट

[02:30:44] का तीसरा फार्मूला था फिस्कल डेफिसिट

[02:30:45] इक्वल टू बोरोइंग था या नहीं था? बिल्कुल

[02:30:47] था। तो देखो यहां फिस्कल डेफिसिट कितने का

[02:30:50] है? सर 15 लाख करोड़? एग्जैक्ट नंबर देखो।

[02:30:53] 1558492

[02:30:56] है ना 1558492

[02:30:59] यहां पर देखो इधर आओ बोरोइंग्स बोरोइंग आओ

[02:31:00] इधर ये लिखा है बोरोइंग्स बोरोइंग्स एंड

[02:31:02] अदर लायबिलिटी ये कितना नंबर है सर ये

[02:31:04] नंबर है 1558492

[02:31:09] क्या बोरोइंग फिस्कल डेफिसिट के बराबर आई

[02:31:12] या नहीं आई? बिल्कुल आई 2025 का प्रीलिम्स

[02:31:14] का क्वेश्चन।

[02:31:16] ठीक है? तो यस ये फिस्कल डेफिट हो गया। और

[02:31:18] प्राइमरी डेफिसिट क्या होगा सर? 17 - 11

[02:31:21] अरे 17 है फिस्कल डेफिसिट और 11 क्या है?

[02:31:23] इंटरेस्ट पेमेंट ऑन प्रीवियस बोरोइंग्स।

[02:31:26] तो वो आ जाएगा आपका ₹84,000 करोड़।

[02:31:30] समझे मेरी बात को?

[02:31:33] ठीक है? अग्रिमा देखो ना जब आपका फार्मूला

[02:31:36] आया उसमें फाइव और सिक्स आया जो सेकंड

[02:31:38] फार्मूला टोटल एक्सपेंडिचर माइनस टोटल

[02:31:41] रिसीप्ट्स एक्सक्लूडिंग बोरोइिंग्स तो

[02:31:43] सेवन नहीं लिया ना उसमें सेवन नहीं लिया

[02:31:46] क्या ये बातें सबको समझ आई या नहीं आई

[02:31:47] पहले मुझे बताओ

[02:31:50] ये बात सबको क्लियर हुई डेटा के साथ मैंने

[02:31:52] हर एक चीज़ आपको प्रूव करके दिखाई है जो

[02:31:55] चीज़ हमने पढ़ी नहीं है हमने उनको अप्लाई

[02:31:56] किया है और क्वेश्चन आजकल एप्लीकेशन

[02:31:58] ओरिएंटेड आ रहे हैं रटने की कोई जरूरत

[02:32:00] नहीं है अप्लाई करके देखो उनको

[02:32:03] ठीक है गणेश फोर्थ वाले में क्या होता है?

[02:32:05] आप फिसल डेफिसिट में से इंटरेस्ट पेमेंट

[02:32:08] ऑन प्रीवियस बोरोइंग हटाते हो तो प्राइमरी

[02:32:10] डेफिसिट बन जाता है ताकि सरकार की मौजूदा

[02:32:12] साल की परफॉर्मेंस हम यहां पे जज कर पाएं।

[02:32:18] वो बोरोइंग की बात हो रही है। बोरोइंग जो

[02:32:20] भी उसकी और लायबिलिटीज़ हैं।

[02:32:24] इज़ इट फाइन? हां।

[02:32:29] एनडीसीसीआर क्या है? नॉन डेप्ट क्रेडिटिंग

[02:32:31] कैपिटल रिसी। मैंने बताया ना कैपिटल सीट

[02:32:33] के दो हिस्से हैं। एक डेप्ट वाला, एक नॉन

[02:32:35] डेप्ट। तो नॉन डे वाला नॉन डेप्ट

[02:32:37] क्रेडिटिंग कैपिटल रिसीट होगा। डेप्ट वाला

[02:32:39] होगा बोरोइंग।

[02:32:41] हां, तीनों फार्मूला फिसिकल डेफिसिट के ही

[02:32:43] हैं। तीनों फार्मूला फिसल डेफिसिट के ही

[02:32:45] हैं। अगर रिसीट ज्यादा होगा तो सरप्लस।

[02:32:47] प्रिया अगर रिसीट ज्यादा होगा तो सरप्लस,

[02:32:49] रिसीट कम होगा तो डेफिसिट।

[02:32:54] अब एक चीज और नोटिस करना। इनमें तो आएंगे

[02:32:56] चलो इन चीजों पे भी।

[02:32:58] देखो क्वेश्चन इनके ऊपर कई बार आ चुके

[02:33:01] हैं। क्वेश्चन इनके ऊपर आ चुके हैं।

[02:33:06] अग्रिम बोरोइंग हटाई है तभी तो बराबर आया

[02:33:09] ना। आपका आप मुझे बताओ आपने ₹150 खर्च

[02:33:13] किया। आपकी ₹100 कमाई थी। ठीक है? क्या आप

[02:33:17] उधार को अपनी इनकम बोलोगे? नहीं बोलोगे।

[02:33:20] तो इनकम में बोरोइंग हटाएंगे। रिसीट में

[02:33:23] आएंगी बोरोइंग पर इनकम में नहीं आएंगी।

[02:33:25] इसीलिए बोरोइंग को हटाना पड़ेगा। अब वो

[02:33:28] ₹50 का शॉर्ट कॉल कैसे पूरा होगा? वो उधार

[02:33:30] लेकर होगा। तो फिसिकल डेफिट बोरोइंग के

[02:33:32] बराबर होगा। फिस्ल डेफिसिट आपका बोरोइंग

[02:33:35] के बराबर होगा। ठीक है? देखो यार योगेश एक

[02:33:38] बार लिखो बस एक बार लिखो आप अपना कमेंट।

[02:33:41] 10 बार लिखने की कोई जरूरत नहीं है। ठीक

[02:33:43] है? दूसरी बात मासूम धीरे-धीरे करके आपके

[02:33:46] सारे कांसेप्ट्स आ जाएंगे। तो शांति बने

[02:33:47] रहो। ठीक है? शांति बनाए रखो। अब इधर आओ।

[02:33:51] इधर ध्यान से देखो।

[02:33:53] देखो इधर देखो यहां पे

[02:33:57] क्वेश्चंस ऐसे आते हैं कि पिछले 10 साल से

[02:33:59] लगातार प्राइम डेफिसिट बढ़ रहा है क्या?

[02:34:01] ऐसे क्वेश्चन आ चुके हैं ऑलरेडी कई बार

[02:34:03] यूपीएससी में और ये बच्चों को हवा ही नहीं

[02:34:05] लगती क्या पूछना चाह रहा है? देखो ध्यान

[02:34:07] से डाटा ध्यान से देखो।

[02:34:09] सबसे पहले फिस्कल डेफिसिट के ऊपर। सबसे

[02:34:11] पहले फिस्कल डेफिसिट के ऊपर फोकस करेंगे।

[02:34:14] देखो

[02:34:15] कौन सा है फिसिकल डेफिसिट का ग्राफ? सर

[02:34:17] फिसल डेफिसिट का ग्राफ ये रहा।

[02:34:21] देखो अगर वह पूछे क्या पिछले 5 साल में

[02:34:24] लगातार फिसल डेफिसिट कम हुआ है? आंसर इज

[02:34:27] हां देखो पिछले 5 साल में 2021-21 जब

[02:34:31] कोविड का समय था ना उस टाइम फिसल डेफिसिट

[02:34:33] बहुत हाई पे था। अगले साल कम हुआ। अगले

[02:34:35] साल और कम हुआ। अगले साल और कम हुआ। अगले

[02:34:38] साल और कम हुआ। अगले साल और कम हुआ। तो

[02:34:40] पिछले 5 साल में लगातार फिसिकल डेफिसिट कम

[02:34:42] हुआ है। पिछले 5 साल की बात कर रहा हूं।

[02:34:44] अगर वो 10 साल बोले ना 10 साल इन द लास्ट

[02:34:47] डिकेड तो स्टेटमेंट गलत है क्योंकि आप

[02:34:49] देखो 10 साल की अगर हम बात करोगे तो पहले

[02:34:51] फिस्कल डेफिसिट कम था फिर थोड़ा बढ़ा सॉरी

[02:34:54] फिर कम हुआ फिर बढ़ा फिर अचानक बहुत बढ़

[02:34:56] गया सर क्यों अचानक क्यों बढ़ गया अचानक

[02:34:59] क्यों बढ़ गया भाई यहां आ गया था कोविड 19

[02:35:01] पेंडेमिक आप समय देखो ना 201920 से 20-21

[02:35:04] वाला समय कोविड-19 पेंडेमिक आया सरकार की

[02:35:07] कमाई थी नहीं सरकार का खर्चा बढ़ गया जब

[02:35:09] खर्चा बढ़ेगा और कमाई है नहीं तो फिसिकल

[02:35:11] डेफिसिट शूट अप करेगा यहां फिस्कल डेफिसिट

[02:35:13] ने शूट अप किया पर धीरे-धीरे करके हमने

[02:35:15] यहां पे उस फिस्कल डेफिसिट को जो उधार है

[02:35:17] उसको कम करना स्टार्ट किया। पिछले 5 साल

[02:35:20] में लगातार फिसिकल डेफिसिट कम हो रहा है।

[02:35:22] पर 5 साल का ट्रेंड है ये। 10 साल का

[02:35:24] ट्रेंड नहीं है। 10 साल में ट्रेंड चेंज

[02:35:26] हो गया था। ठीक है सर। ठीक है। हां हां

[02:35:29] हां हां हां ठीक है। ठीक है। ओके। ये बात

[02:35:32] हुई फिस्सल डेफिट की। फिर बात करेंगे हम

[02:35:34] आरडी की। रेवेन्यू डेफिसिट की। देखो

[02:35:36] रेवेन्यू डेफिट अगर हम पिछले 5 साल पे

[02:35:38] फोकस करो। इधर देखो पीए 7.3 था। कम हुआ

[02:35:41] 4.4 फिर 4% फिर 2.5 1.7 1.5 ये भी कम हो

[02:35:45] रहा है। पिछले 5 साल में ये भी कम हो रहा

[02:35:47] है। रेवेन्यू डेफिसिट इज़ आल्सो कमिंग डाउन

[02:35:50] इन लास्ट फाइव ईयर बट नॉट इन 10 इयर्स।

[02:35:53] अगर हम बात करते हैं दोस्तों ऐसे प्राइमरी

[02:35:55] डेफिसिट की। ये प्राइमरी डेफिट ग्रीन कलर

[02:35:56] का जो है। ये देखो यहां पे ऐसे था। ये भी

[02:36:00] 5 साल में कम हुआ है। दिस इज़ आल्सो कम

[02:36:02] डाउन इन द लास्ट फाइव इयर्स। पर अगर हम

[02:36:05] बात करें ईआरडी की तो सर ईआरडी भी आपका

[02:36:07] यहां पर कम होता हुआ देखने को मिल रहा है।

[02:36:09] सरकार की कोशिश है इफेक्टिव रेवेन्यू

[02:36:12] डेफिसिट को जीरो करने की। अभी हम पहुंचे

[02:36:13] नहीं है वहां पे पर काफी नजदीक पहुंच चुके

[02:36:16] हैं। सरकार की कोशिश पता है क्या है?

[02:36:17] सरकार की कोशिश ये है कि यार फिसल डेफिट

[02:36:19] हमारा लगभग 3% ऑफ़ जीडीपी होना चाहिए। और

[02:36:22] जो ईआरडी है वो 0% होना चाहिए। वो खत्म

[02:36:25] होना चाहिए। ईआरडी नहीं होना चाहिए। 0%

[02:36:27] होना चाहिए ईआरडी और आपका फिसल डेफिसिट 3%

[02:36:30] ऑफ़ जीडीपी होना चाहिए। अभी फिस्कल डेफिट

[02:36:32] में हम थोड़ा दूर हैं उससे पर ईआरडी काफी

[02:36:34] हमारा 0.6% हो चुका है। तो आने वाले समय

[02:36:36] में अगर हम अपने खर्चों को सही ढंग से

[02:36:38] मैनेज करेंगे ना तो हम ईआरडी खत्म कर सकते

[02:36:40] हैं। क्या ये बात आपको समझ आई या नहीं आई

[02:36:43] यहां पे? अच्छा अच्छा

[02:36:48] जीडीपी के कंपैरिजन में जीडीपी हां जीडीपी

[02:36:50] जीडीपी यस यस यस। एक थोड़ा डिफिकल्ट

[02:36:54] क्वेश्चन पूछना चाहे अगर आप यूपीएससी तो

[02:36:56] आपसे इनका ऑर्डर पूछ सकता है कि इन चारों

[02:36:59] में से ज्यादा वैल्यू किसकी है? कम वैल्यू

[02:37:01] किसकी है? तो आप देखो यहां सबसे ज्यादा है

[02:37:03] फिसिकल डेफिट। फिस्कल डेफिसिट के बाद अगला

[02:37:06] नंबर आता है रेवेन्यू डेफिसिट का। फिर

[02:37:08] उसके बाद अगला नंबर आता है आपका प्राइमरी

[02:37:10] डेफिसिट का। फिर उसके बाद अगला नंबर आता

[02:37:12] है इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट का। ये इनके

[02:37:14] परसेंटेज टर्म्स में इनके नंबर्स हैं।

[02:37:16] फिसलिक डेफिसिट इज़ ग्रेटर दैन आर डी

[02:37:17] ग्रेटर दैन प्राइमरी डेफिट ग्रेटर दैन

[02:37:19] ईआरटी। ये ऑर्डर आप इस तरह से इसका ध्यान

[02:37:21] रख सकते हो।

[02:37:28] ईआरडी खराब होता है सोहन खराब होता है।

[02:37:31] इसीलिए हम कोशिश पता है क्या करते हैं कि

[02:37:34] ईआरडी खत्म हो जाए। ईआरडी एलिमिनेट हो

[02:37:36] जाए। दैट इज़ आवर टारगेट। कि हम चाहते हैं

[02:37:39] ईआरडी खत्म हो जाए। निमिषा आप खुद देखो

[02:37:41] यार। खुद देखो आप कह रहे हो 10 साल में

[02:37:43] कहां डिक्रीज हुआ है। पहले ईआरडी आपका 1ढ़

[02:37:46] था। फिर 1.5 फिर 2.5 फिर बढ़ गया। फिर उसके

[02:37:48] बाद कम हुआ। 5 साल में कम हुआ है। 10 साल

[02:37:51] में कोई कम नहीं हुआ। 10 साल में पहले

[02:37:53] बढ़ा फिर कम हुआ। तो कंसिस्टेंटली डिक्रीज

[02:37:55] इन लास्ट फाइव ईयर। वो सही होगा। पर लास्ट

[02:37:57] 10 ईयर में स्टेटमेंट गलत हो जाएगी। लास्ट

[02:37:59] 10 ईयर में स्टेटमेंट आपकी गलत हो जाएगी।

[02:38:03] किसी को ये डायग्राम समझने में कोई

[02:38:05] दिक्कत?

[02:38:07] ठीक है? कोई भी ट्रेंड बेस्ड क्वेश्चन आए

[02:38:09] आपके इन लेक्चर से आराम से हैंडल हो

[02:38:10] जाएंगे। क्योंकि हमने ट्रेंड को बहुत

[02:38:12] अच्छे से अंडरस्टैंड करने की कोशिश करी

[02:38:13] है।

[02:38:15] अच्छा एक चीज और भी है। एक चीज और भी है

[02:38:19] वो आता है कि रुपया कहां से आता है? रुपया

[02:38:21] कहां जाता है? ठीक है? रुपया कहां से आ

[02:38:24] रहा है? कहां पे जा रहा है? देखो

[02:38:28] इधर देखो।

[02:38:30] अगर हमारे सरकार के पास ₹1 आता है ना

[02:38:33] इनमें टॉप थ्री या टॉप फोर याद रखने हैं।

[02:38:35] बस आपको बाकी याद नहीं रखने कि सरकार के

[02:38:37] पास अगर ₹1 आएगा तो कहां से आएगा?

[02:38:41] नहीं नहीं फरा में नहीं है भाई। वो है

[02:38:43] आपका मैं बताऊंगा अभी आपको। ठीक है? ठीक

[02:38:45] है? एफआरबीएम एक्टिव अभी मैं पढ़ाऊंगा

[02:38:47] आपको। डोंट वरी उमंग। ठीक है? अब इसमें आप

[02:38:49] नोटिस करो अगर सरकार के पास ₹1 आता है ना

[02:38:52] तो सबसे ज्यादा पैसा उसको आता है बोरोइंग

[02:38:55] से। मतलब सरकार की जेब में अगर ₹1 आएगा

[02:38:58] उसमें से 24 पैसे उसको उधार की फॉर्म में

[02:39:00] आएंगे। सबसे बड़ा कॉम्पोनेंट है बोरोइंग

[02:39:02] का। उसके बाद सरकार को सबसे ज्यादा पैसा

[02:39:04] जो आता है वो आता है इनकम टैक्स से।

[02:39:08] 18 पैसे यहां से आते हैं। उसके बाद जो

[02:39:10] अगला कॉम्पोनेंट सरकार के पास आता है वह

[02:39:12] आता है आपका कॉरपोरेशन टैक्स से।

[02:39:17] उसके बाद जो सरकार को सबसे ज्यादा पैसा

[02:39:19] आता है वह आता है जीएसटी से। तो यह टॉप

[02:39:21] फोर आइटम्स का ट्रेंड आपको पता होना चाहिए

[02:39:24] कि अगर सरकार को ₹1 मिल रहा है उसमें सबसे

[02:39:27] ज्यादा कंट्रीब्यूशन उधार का है। फिर इनकम

[02:39:29] टैक्स से सरकार की कमाई होती है। फिर

[02:39:31] कॉर्पोरेट टैक्स से फिर आपका जीएसटी।

[02:39:36] इज इट फाइन?

[02:39:39] यस अभिषेक यू आर राइट। यू आर राइट। मैं

[02:39:40] अभी दिखाता हूं आपको। बिल्कुल सही कह रहे

[02:39:42] हो आप अभिषेक। यस।

[02:39:44] यहां तक बात क्लियर है?

[02:39:49] ठीक है? ऐसे अगर हम बात करें दोस्तों कि

[02:39:51] ₹1 जाता कहां-कहां पे है? उसको भी आप

[02:39:54] ध्यान में देना यहां पे। कहां-कहां पे हम

[02:39:56] खर्च कहां पे कर रहे हैं? देखो सबसे बड़ा

[02:39:58] सरकार का खर्च का कॉम्पोनेंट है स्टेट्स

[02:40:00] का कि जो हम स्टेट्स के साथ शेयर करते हैं

[02:40:02] ना तो स्टेट को शेयर में 22 पैसे चले जाते

[02:40:05] हैं सरकार के। तो सबसे बड़ा कॉम्पोनेंट

[02:40:06] आपका ये हुआ। फिर उसके बाद देखो यार जो भी

[02:40:09] हमने उधार वगैरह ले रखा है उसके ऊपर

[02:40:11] इंटरेस्ट पेमेंट भी करनी है। तो दूसरा

[02:40:13] हमारा सबसे बड़ा कंट्रीब्यूट मतलब

[02:40:14] कंट्रीब्यूटर नहीं जहां पर हमारा पैसा

[02:40:16] जाता है वो है इंटरेस्ट पेमेंट जो हम करते

[02:40:18] हैं। ठीक है? उसके बाद आप नोटिस करिएगा

[02:40:22] उसके बाद आपका सेंट्रल सेक्टर स्कीम्स।

[02:40:24] सेंट्रल सेक्टर मतलब ऐसी स्कीम जहां पे

[02:40:26] पूरा पैसा सेंट्रल गवर्नमेंट देती है 100%

[02:40:28] कंट्रीब्यूशन बाय द सेक्टर सेंटर वो आएगा

[02:40:31] सेंट्रल सेक्टर स्कीम में। एंड इसके बाद

[02:40:33] आपका चौथा जो कॉम्पोनेंट बचता है ठीक है?

[02:40:36] वो है डिफेंस। चौथा इतना नोट करने की

[02:40:38] जरूरत नहीं है। यह टॉप थ्री आपको ज़रूर पता

[02:40:39] होना चाहिए। स्टेट को जो शेयर दिया सबसे

[02:40:41] बड़ा कॉम्पोनेंट फॉललोड बाय इंटरेस्ट

[02:40:43] पेमेंट फॉललोड बाय सेंट्रल सेक्टर

[02:40:45] स्कीम्स। ये आपको कंट्रीब्यूशन आपको यहां

[02:40:47] पे इस तरह से पता होना चाहिए।

[02:40:56] क्लियर है यहां पे?

[02:40:59] नहीं। अ समर्पित देखो यार थोड़ा बहुत ना

[02:41:04] हमारे यहां पे ना अभी क्या है? है फिसल

[02:41:06] डेफिसिट ज़ीरो करना पॉसिबल नहीं है भारत के

[02:41:08] लिए। भारत अभी डेवलपिंग कंट्री है। हमें

[02:41:10] खर्चा करना है अपनी गरीबी को कम करने के

[02:41:12] लिए, बेरोजगारी के लिए तो हमारे यहां

[02:41:14] खर्चा होना ही होना है। ठीक है?

[02:41:17] इज इट फाइन टिल हियर।

[02:41:21] ठीक है। हां। एक स्टूडेंट ने एक स्टूडेंट

[02:41:24] थे। आई थिंक मैं नाम भूल गया उनका।

[02:41:25] उन्होंने काफी अच्छा एक पॉइंट बताया था।

[02:41:26] बिल्कुल। वो यहां पे मेंशंड है। इधर देखना

[02:41:28] सब लोग। इधर देखना।

[02:41:30] चलो पहले उसको बताते हैं जो उन्होंने डाउट

[02:41:32] पूछा था।

[02:41:36] हां कैपिटल एक्सपेंडिचर की मुझे थोड़ा सा

[02:41:38] बात बतानी है। देखो इस बार ना अगर आपने इस

[02:41:40] बार का बजट आपने देखा हो तो सरकार ने एक

[02:41:43] बात चिल्ला-चिल्ला के बोली है कि देखो हम

[02:41:45] कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ा रहे हैं, बढ़ा

[02:41:46] रहे हैं, बढ़ा रहे हैं। तो थोड़ा उसका

[02:41:48] ट्रेंड भी एक बार आप नोटिस करो। इधर देखो

[02:41:49] आप लोग। अगर मैं बात करूं ना कैपिटल

[02:41:52] एक्सपेंडिचर की जो हमने कैपेक्स किया।

[02:41:55] सरकार पता कर रही है कि हम कह रहे हैं हम

[02:41:57] लॉन्ग टर्म एसेट क्रिएट कर रहे हैं। लॉन्ग

[02:41:59] टर्म एसेट क्रिएट कर रहे हैं। तो अगर आप

[02:42:01] नोटिस करोगे ना तो सरकार ना कितना पैसा

[02:42:04] खर्च कर रही है अपने सड़कें बनाने के लिए,

[02:42:06] अपने ब्रिजेस, अपने रेलवेेज ये सब बनाने

[02:42:08] के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कितना

[02:42:09] खर्चा कर रही है। तो वो नंबर देखो बढ़ रहा

[02:42:11] है। आप नोटिस करो। जैसे ये नंबर ना पहले

[02:42:14] अगर 5 साल पीछे जाएं तो 5 साल पहले ये 4.3

[02:42:18] लाख करोड़ था। अब ये दुगने से भी बड़ा हो

[02:42:20] गया। देखो ये बढ़ के 5.9 हुआ, 7.4 हुआ,

[02:42:22] 9.5, 10.5 11 अब अगले साल ये 12 लाख करोड़

[02:42:26] क्रॉस करेगा। ऐसा हमारी सरकार का अनुमान

[02:42:28] है। तो हमारी जो करंट सरकार है, इसने

[02:42:30] कैपिटल एक्सपेंडिचर में बहुत तेजी से

[02:42:32] खर्चा बढ़ाया है। आप नोटिस करोगे ये नंबर

[02:42:34] बढ़ रहा है एब्सोल्यूट टर्म्स के अंदर। पर

[02:42:37] अगर आप इसको परसेंटेज में देखोगे परसेंटेज

[02:42:39] ऑफ जीडीपी में तो परसेंटेज ऑफ जीडीपी आपको

[02:42:42] एक अलग आंकड़ा बताएगा। कैसे? देखो सुनो

[02:42:44] मेरी बात। इधर देखो सब लोग। यहां पर पता

[02:42:47] है क्या था? पहले ये 2.5 1% हमारी जीडीपी

[02:42:50] का था। फिर बढ़ा 2.5 फिर और बढ़ा 2.8 फिर

[02:42:52] 3.2 3.2 अब ये कम हुआ है 3.1 तो एक्चुअली

[02:42:56] पता क्या है? हमारी जीडीपी भी तो बढ़ी है।

[02:42:58] हां बिल्कुल हमारा कैपिटल एक्सपेंडिचर भी

[02:43:00] बढ़ा है। ठीक है? अगर हम आंकड़ों में देखें

[02:43:04] नंबर्स की बात करें तो कैपिटल एक्सपेंडिचर

[02:43:06] बढ़ रहा है। बिल्कुल ठीक बात है। पर जीडीपी

[02:43:08] ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए क्या हो

[02:43:10] रहा है? कैपिटल एक्सपेंडिचर एज अ परसेंटेज

[02:43:13] ऑफ जीडीपी वो कंसिस्टेंटली नहीं बढ़ रहा।

[02:43:16] तो मेरी लाइन बहुत ध्यान से सुनना।

[02:43:20] लाइन यहां बहुत ध्यान से सुनना सर। कौन सी

[02:43:22] लाइन? लाइन सुनो मेरी बात ध्यान से। अगर

[02:43:24] लिखेगा कैपिटल एक्सपेंडिचर

[02:43:27] हैज़ कंसिस्टेंटली इंक्रीज़्ड इन द लास्ट 10

[02:43:30] इयर्स आंसर आएगा यस। पर अगर लिखेगा कैपिटल

[02:43:35] एक्सपेंडिचर एज़ अ परसेंटेज ऑफ़ जीडीपी हैज़

[02:43:37] इंक्रीज़्ड। तो आंसर आएगा नो। मेरी बात

[02:43:40] आपको समझ आई या नहीं आई?

[02:43:43] मेरी बात आपको समझ आई या नहीं आई?

[02:43:46] ठीक है?

[02:43:53] मेरी बात आपको समझ आई या नहीं आई?

[02:43:55] ठीक है? मेरी बात आपको समझ आई या नहीं आई?

[02:43:55] कि कैसे इसको देखना है?

[02:44:00] इज इट फाइन?

[02:44:02] ठीक है? तो लाइन पता है क्या है? इस लाइन

[02:44:05] को अगर आपने लिखना है लिख लो। आप लिख सकते

[02:44:06] हो कैपिटल एक्सपेंडिचर हैज़ इंक्रीज़्ड इन द

[02:44:10] लास्ट 10 इयर्स। हैज़ कंसिस्टेंटली

[02:44:11] इंक्रीज़्ड इन द लास्ट 10 इयर्स। यस। बट

[02:44:14] कैपिटल एक्सपेंडिचर एज अ परसेंट ऑफ जीडीपी

[02:44:16] हैज़ नॉट कंसिस्टेंटली इंक्रीज्ड। उसमें

[02:44:18] यहां पे कम ज्यादा हो रहा है। उसमें यहां

[02:44:20] पे कम ज्यादा हो रहा है। क्या ये बात सबको

[02:44:23] क्लियर है या नहीं है?

[02:44:28] ठीक है। हां। ओके। ओके। ओके। चलो सर। ये

[02:44:31] बात हमें क्लियर हुई।

[02:44:36] ठीक है। ये बात हमें यहां पे समझ आ गई।

[02:44:38] इसके अलावा एक बात हमें और देखनी है।

[02:44:44] यह वाला डायग्राम

[02:44:53] ये वाला डायग्राम देखेंगे एक बार सब लोग

[02:44:56] ये वाला डायग्राम देखेंगे एक बार

[02:45:00] कल को यूपीएससी आपसे पूछे हमारे पास जो

[02:45:03] पैसा आता है टैक्सेस में ज्यादा पैसा कहां

[02:45:06] से आता है डायरेक्ट टैक्स से या

[02:45:08] इनडायरेक्ट टैक्स से आप बताओ मुझे भाई

[02:45:10] क्लियरली इस डायग्राम से पता लग रहा है।

[02:45:12] क्लियरली इस डायग्राम से पता लग रहा है कि

[02:45:14] देखो जो डायरेक्ट टैक्स है ना उनका

[02:45:16] कंट्रीब्यूशन ज्यादा है। इनडायरेक्ट टैक्स

[02:45:18] का कंट्रीब्यूशन जो है वो कम है। समझे

[02:45:20] मेरी बात को? तो डायरेक्ट टैक्स का

[02:45:22] कंट्रीब्यूशन ज्यादा है। इनडायरेक्ट टैक्स

[02:45:23] का यहां पे कॉनंट्रीब्यूशन कम है। और देखो

[02:45:26] ये अगर हम पिछले 5 साल की बात करें ना

[02:45:29] पिछले 5 साल में ऐसा ही है। पिछले 5 साल

[02:45:32] में लगातार हमारा क्या है? हमारा डायरेक्ट

[02:45:35] टैक्स का कंट्रीब्यूशन ज्यादा है।

[02:45:36] इनडायरेक्ट टैक्स कम है। डायरेक्ट टैक्स

[02:45:38] ज्यादा है। इनडायरेक्ट कम है। डायरेक्ट

[02:45:39] टैक्स ज्यादा है। इनडायरेक्ट टैक्स कम है।

[02:45:40] डायरेक्ट टैक्स ज्यादा है। इनडायरेक्ट कम

[02:45:41] है। डायरेक्ट टैक्स ज्यादा है। इनडायरेक्ट

[02:45:42] कम है। तो 5 साल में ऐसा ही हुआ है। पिछले

[02:45:45] 5 सालों में हर साल डायरेक्ट टैक्स का

[02:45:47] कंट्रीब्यूशन ज्यादा रहा है। एज़ कंपेयर टू

[02:45:48] इनडायरेक्ट टैक्स। बट पहले ऐसा नहीं था।

[02:45:51] जैसे अगर मैं बात करूं कोविड के समय की तो

[02:45:54] कोविड के समय आपका इनडायरेक्ट टैक्स का

[02:45:55] कंट्रीब्यूशन ज्यादा था। डायरेक्ट टैक्स

[02:45:57] का उस साल कॉन्ट्रिब्यूशन कम था। समझे

[02:45:59] मेरी बात को? अभी क्या पिछले 5 साल से है?

[02:46:02] डायरेक्ट टैक्स ज्यादा कंट्रीब्यूट कर रहा

[02:46:04] है एज़ कंपेयर टू इनडायरेक्ट टैक्स। ठीक

[02:46:06] है? पर कोविड के समय ऐसा नहीं था। कोविड

[02:46:09] के समय इनडायरेक्ट टैक्स जीएसटी का

[02:46:10] कंट्रीब्यूशन ज्यादा था। आपका डायरेक्ट

[02:46:12] टैक्स का कंट्रीब्यूशन आपका कम था। समझे?

[02:46:15] डायरेक्ट के अंदर मासूम देखो इनकम टैक्स

[02:46:17] भी आ गया, कॉर्पोरेट टैक्स भी आ गया और

[02:46:19] बाकी डायरेक्ट टैक्सेस भी आ गए।

[02:46:20] इनडायरेक्ट टैक्स में मेजरली आपका जीएसटी

[02:46:22] है।

[02:46:28] किसी को मुझे बताओ ये बजट की टर्मिनोलॉजी

[02:46:30] समझने में कोई दिक्कत है तो पूछ लो अभी।

[02:46:33] अ जिलेजिल इंग्लिश आपसे मेरी एक रिक्वेस्ट

[02:46:35] है। आप एक बार कमेंट करो। मैं पढ़ लूंगा

[02:46:37] आपका कमेंट। आपको तीन बार कमेंट करने की

[02:46:39] जरूरत नहीं है। ठीक है? आगे से किसी ने

[02:46:41] ऐसे तीन-चार बार कमेंट किया। मैं उसका

[02:46:42] डाउट नहीं लूंगा। आपका मैं ले रहा हूं।

[02:46:45] रीपेमेंट ऑफ लोन समझो। जब हम लोन को रीपे

[02:46:47] करेंगे ना तो सरकार के लिए लोन रीपे करना

[02:46:51] सरकार की लायबिलिटी खत्म करता है और जब

[02:46:53] सरकार की लायबिलिटी खत्म हो जाएगी तो वो

[02:46:55] कैपिटल में आएगा और क्योंकि सरकार जब रीपे

[02:46:58] कर रही है सरकार खर्चा कर रही है इसलिए इट

[02:47:00] अ कैपिटल एक्सपेंडिचर

[02:47:08] नहीं देखो अक्षय यार मतलब बहुत छोटे-छोटे

[02:47:09] फायदे हैं अगर आप ऐसा कहोगे ऐसे तो मतलब

[02:47:12] सरकार सैलरी भी दे रही है पर उससे लॉन्ग

[02:47:13] टर्म एसेट नहीं ना कुछ साहस बन रहा

[02:47:16] अंडरस्टुड सबको यह बात क्लियर हुई यहां पे

[02:47:20] सारा आपको बजट के जो इंपॉर्टेंट आपको

[02:47:22] ट्रेंड्स थे ग्राफ्स थे क्या वो सबको

[02:47:23] क्लियर हुए या नहीं हुए

[02:47:28] अक्षय आपको भी बोल रहा हूं आप बस एक ही

[02:47:30] बार कमेंट करो मैं आपका डाउट ले लूंगा

[02:47:32] ठीक है ठीक है ठीक ओके ओके ओके चलो गुड

[02:47:35] गुड गुड अब आगे आते हैं अब आगे आते हैं ये

[02:47:38] सारी बातें तो हमने पढ़ ली ये सारी बातें

[02:47:40] तो हमने डिस्कस कर ली अब बात आती है कि सर

[02:47:43] इस बार के बजट में कुछ और भी बातें हुई है

[02:47:45] क्या? हां देखो, बहुत सारी बातें हुई हैं।

[02:47:47] बहुत सारी बातें हुई हैं। मैं एक-एक करके

[02:47:48] आपको एक्सप्लेन करता हूं कि और क्या बात

[02:47:50] हुई है इस बार के बजट में।

[02:47:53] देखो

[02:47:54] इस बार के बजट में एक तो जो बहुत बड़ी

[02:47:57] डेवलपमेंट थी वो थी सिक्योरिटीज

[02:47:59] ट्रांजैक्शन टैक्स के कॉन्टेक्स्ट में। आप

[02:48:01] लोगों ने देखा होगा कि जो फ्यूचर्स के लिए

[02:48:03] आपका यह जो टैक्स लगता है ना सिक्योरिटी

[02:48:06] ट्रांजैक्शन टैक्स यह बढ़ा दिया गया है।

[02:48:09] सो देखा था आप लोगों ने? अब थोड़ा डिस्कस

[02:48:12] करना है हमें इस टेक्स्ट के बारे में कि

[02:48:14] ये न्यूज़ में रहा है और यह सिर्फ इस वजह

[02:48:15] से न्यूज़ में नहीं रहा। यह कई कारणों की

[02:48:17] वजह से न्यूज़ में रहा। देखो

[02:48:21] समझना इस बात को। ये सिक्योरिटी

[02:48:24] ट्रांजैक्शन टैक्स सर होता क्या है? सबसे

[02:48:26] पहली बात तो समझो। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन

[02:48:28] टैक्स अपने आप में एक डायरेक्ट टैक्स है।

[02:48:32] जैसे आप लोग शेयर्स वगैरह बेचते होंगे। जब

[02:48:35] आप शेयर्स खरीदते बेचते हैं ना जब आपने

[02:48:37] शेयर्स बेचा तो उस शेयर को बेचते टाइम के

[02:48:40] ऊपर आपके ऊपर कुछ टैक्सेस लगते हैं। मैं

[02:48:43] बाकी टैक्सेस की बात नहीं कर रहा कि

[02:48:44] कैपिटल गेन वगैरह की बातें नहीं वो तो

[02:48:46] सेपरेट है। पर अगर आप सिंपली उस शेयर को

[02:48:49] बेच रहे हो ना आपके ऊपर एक टैक्स लगता ही

[02:48:51] लगता है। दैट इज़ कॉल्ड एज सिक्योरिटी

[02:48:53] ट्रांजैक्शन टैक्स। और ये भी एक डायरेक्ट

[02:48:56] टैक्स ही है। क्यों है ये डायरेक्ट टैक्स?

[02:48:58] क्योंकि देखो जब मैंने शेयर बेचा ना तो

[02:49:00] मेरी ही जिम्मेदारी थी उस टैक्स को पे

[02:49:02] करने की और मेरी जेब से ही पैसे कटे। तो

[02:49:04] इट इज अ डायरेक्ट टैक्स। जैसे इनकम टैक्स

[02:49:06] होता है। मैं ही पे करता हूं सरकार को और

[02:49:08] मेरी ही जेब से पैसा कटता है। तो वो

[02:49:10] डायरेक्ट टैक्स होता है। कॉर्पोरेट टैक्स

[02:49:12] भी डायरेक्ट टैक्स है। राइट? तो

[02:49:14] सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स भी इस तरह

[02:49:15] से एक डायरेक्ट टैक्स ही माना जाता है।

[02:49:18] ठीक है? अब पॉइंट पता क्या है? ये

[02:49:21] सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स एक और वजह

[02:49:23] से न्यूज़ में था।

[02:49:29] पहले मैं आपको थोड़ा और इसका मीनिंग समझा

[02:49:30] देता हूं। सिक्योरिटी ट्रांजक्शन एक्स का।

[02:49:32] इधर पढ़ो आप लोग। इट इज़ अ देखो इधर। इट इज़

[02:49:36] अ इट इज़ अ डायरेक्ट टैक्स।

[02:49:41] जो कि किसके ऊपर लगता है? आपकी जो भी

[02:49:43] टैक्सेबल सिक्योरिटीज़ हैं जब भी आप उनको

[02:49:45] यहां पे स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से उनको

[02:49:47] बेचते हो तो आपके ऊपर सिक्योरिटी

[02:49:49] ट्रांजैक्शन टैक्स लगता है। ठीक है? ठीक

[02:49:52] है?

[02:49:53] इसके साथ ही साथ यह फाइनेंस एक्ट 2004 के

[02:49:56] माध्यम से यहां पर इसको इंट्रोड्यूस किया

[02:49:58] गया था सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स को।

[02:50:00] इसके अलावा इसको देखता कौन है? क्योंकि ये

[02:50:02] डायरेक्ट टैक्स है ना तो ये सीबीडीटी के

[02:50:04] अंदर आता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट

[02:50:06] टैक्सेस जो कि आपका मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस

[02:50:08] में आएगा। प्लस जो भी आप परचेस करते हो,

[02:50:11] सेल ऑफ सिक्योरिटीज़ करते हो, जैसे आपका

[02:50:12] शेयर्स, डेरिवेटिव्स, इक्विटी ओरिएंटेड

[02:50:14] म्यूच्यूल फंड्स, उनके ऊपर आपका ये

[02:50:16] सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स आपका लगता

[02:50:17] है। ठीक है? अब यह दो वजह से न्यूज़ में

[02:50:20] क्यों रहा? ये दो वजह से न्यूज़ में रहा।

[02:50:23] उसके दो रीज़न पता है क्या थे? एक तो सरकार

[02:50:25] ने सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स को बढ़ा

[02:50:27] दिया है। ठीक है? दूसरी बात सिक्योरिटी

[02:50:30] ट्रांजैक्शन टैक्स का मुद्दा जो है वो

[02:50:31] सुप्रीम कोर्ट में जा रखा है। सुप्रीम

[02:50:33] कोर्ट ने इसको अपने यहां पे एडमिट कर लिया

[02:50:35] है। अभी वो सुनवाई करेंगे इसकी। पॉइंट है

[02:50:38] क्यों? सुप्रीम कोर्ट में क्यों मुद्दा

[02:50:39] गया? देखो मेरी बात सुनो।

[02:50:42] आपको चाहे प्रॉफिट हो, आपको चाहे नुकसान

[02:50:45] हो, आपको सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स

[02:50:48] देना ही पड़ता है। बहुत ही छोटा अमाउंट

[02:50:50] होता है पर देना पड़ता है। चाहे फायदा हो,

[02:50:52] चाहे नुकसान हो। इसका मतलब पता है क्या

[02:50:54] है? इसका मतलब पता है क्या है? आप अगर कुछ

[02:50:57] काम करना चाह रहे हो तो आपके ऊपर टैक्स लग

[02:50:59] रहा है। ओके। पर आपने पिटी पढ़ी है। हां

[02:51:03] सर पिटी तो हमने पढ़ी है। अगर आप पिटी का

[02:51:06] आर्टिकल 14 देखेंगे। अगर आप पिटी का

[02:51:11] अगर आप पॉलिटी का आर्टिकल 14 देखेंगे ना

[02:51:14] तो पॉलिटी का आर्टिकल 14 राइट टू इक्वलिटी

[02:51:17] की बात करता है और पॉलिटी का आर्टिकल 191

[02:51:20] जी जो है वो बात करता है फ्रीडम टू

[02:51:23] प्रैक्टिस एनी प्रोफेशन और ट्रेड आप कोई

[02:51:25] भी प्रोफेशन में इंगेज हो सकते हो पर सर

[02:51:28] सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स मुझे मेरे

[02:51:29] प्रोफेशन में इंगेज होने से रोक रहा है यह

[02:51:32] कह रहा है कि भाई आपको फायदा हो नुकसान हो

[02:51:34] आपको यह टैक्स तो देना ही पड़ेगा तो क्या

[02:51:36] यह राइट टू फ्रीडम ऑफ प्रोफेशन के अगेंस्ट

[02:51:38] नहीं जाता यह मुद्दा सुप्रीम सुप्रीम

[02:51:40] कोर्ट में लेकर लोग गए हुए हैं कि एसटी को

[02:51:42] हटाया जाए। अभी सुप्रीम कोर्ट ने इसके ऊपर

[02:51:45] अपना फैसला नहीं दिया पर न्यूज़ में तो आ

[02:51:47] गया ये बात। तो इसीलिए सिक्योरिटी

[02:51:49] ट्रांजैक्शन टैक्स दो वजह से पिछले 6

[02:51:51] महीने में न्यूज़ में रहा है। इसीलिए इसके

[02:51:52] बारे में हमें दोनों बातें पता होनी

[02:51:54] चाहिए। क्या ये बात आपको समझ आई या नहीं

[02:51:56] आई? जब भी आप अपना शेयर बेचते हो ना आप

[02:51:59] नोटिस करना उसके नीचे लिखा होता है कि

[02:52:01] आपके ऊपर कौन-कौन से टैक्स लगे। उसमें एक

[02:52:04] टैक्स लगता है सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन

[02:52:05] टैक्स। उसी को बढ़ाया गया है। दैट इज

[02:52:07] व्हाई इट वाज़ इन द न्यूज़।

[02:52:10] क्या ये बात क्लियर है?

[02:52:12] यह हो गई बात एसटी की। गुड गुड गुड। कुछ

[02:52:15] और टर्मिनोलॉजीस भी हैं।

[02:52:22] एक और इंपॉर्टेंट बात इस बार के बजट के

[02:52:25] अंदर इस बार के बजट के अंदर हमारी जो 16th

[02:52:29] फाइनेंस कमीशन है ना उसकी रिकमेंडेशंस को

[02:52:31] मान लिया गया है। अब पॉइंट आता है कि सर

[02:52:34] यह फाइनेंस कमीशन क्या है? और इसकी क्या

[02:52:36] रिकमेंडेशंस हैं? प्लीज सुनेंगे आप लोग सब

[02:52:38] लोग। देखो जब हम बात करते हैं ना हमारे

[02:52:41] फाइनेंस कमीशन की, जब हम बात करते हैं

[02:52:44] हमारे फाइनेंस कमीशन की, तो आपको पहली चीज

[02:52:46] तो पता होनी चाहिए कि फाइनेंस कमीशन

[02:52:48] कॉन्स्टिट्यूट किया जाता है बाय द

[02:52:49] प्रेसिडेंट अंडर द आर्टिकल 280 ऑफ़ द

[02:52:52] कॉन्स्टिट्यूशन। अब ये कॉन्स्टिट्यूशनल

[02:52:54] बॉडी है। पहली बात ये ध्यान में रखेंगे।

[02:52:57] हमारे प्रेसिडेंट जी इसको कॉन्स्टिट्यूट

[02:52:58] करते हैं। ठीक है? तो 16वां फाइनेंस कमीशन

[02:53:01] जो था वो 2023 31 दिसंबर को बना था और

[02:53:04] इसकी जो रिकमेंडेशन होंगी वो 1 अप्रैल

[02:53:07] 2026 से लेकर 31 मार्च 2031 तक वैलिड

[02:53:09] रहेंगी। अब पॉइंट पता है क्या है? आपके

[02:53:12] सेंट्रल गवर्नमेंट के पास पैसा है। ठीक

[02:53:14] है? जो डिविज़िबल पूल है वो सेंट्रल

[02:53:16] गवर्नमेंट से कैसे आपका पैसा स्टेट्स में

[02:53:18] शेयर होगा? कितना परसेंटेज शेयर होगा

[02:53:22] सेंटर से स्टेट्स में? कितना परसेंटेज

[02:53:25] शेयर होगा? इसको हम बोलते हैं वर्टिकल

[02:53:27] डेवोल्यूशन। सेंटर ने कितना पैसा स्टेट्स

[02:53:29] को देना है। ठीक है?

[02:53:33] जैसे 16th फाइनेंस कमीशन ने बोला है कि ये

[02:53:36] 41% होगा। इट विल बी 41%। एक्चुअली अगर हम

[02:53:41] इसको पास्ट में जाएं ना तो पहले ये 32%

[02:53:43] हुआ करता था। फिर 32 से बड़ा 42 हुआ। पर

[02:53:46] पिछली बार फाइनेंस कमीशन ने इसको 42 से कम

[02:53:49] करके 41 कर दिया था। क्यों कम कर दिया था?

[02:53:52] क्योंकि यहां पे जम्मू कश्मीर एक यूटी बन

[02:53:54] गई थी। अब 16th फाइनेंस कमीशन ने इसको 41%

[02:53:58] ही रखा है। यानी कि 41% शेयर होगा फ्रॉम द

[02:54:01] सेंटर टू द स्टेट्स। ठीक है? 41% शेयर हो

[02:54:05] गया। अब पॉइंट आता है पर सर इसमें मणिपुर

[02:54:07] को कितना मिलेगा? मेघालय को कितना मिलेगा?

[02:54:09] कर्नाटका को कितना मिलेगा? तमिलनाडु को

[02:54:11] कितना मिलेगा? गुजरात को कितना मिलेगा? ये

[02:54:13] कैसे डिसाइड होगा? उसके लिए भी यहां पे

[02:54:16] इन्होंने क्राइटेरिया दिया है। और इस बार

[02:54:18] क्या क्राइटेरिया दिया गया है इस बार के

[02:54:19] फाइनेंस कमीशन के अंदर? यह एक क्राइटेरिया

[02:54:22] है। आपको देखो यह क्राइटेरिया याद रखना

[02:54:24] है।

[02:54:25] आपको यह क्राइटेरिया याद रखना है। कौन सा

[02:54:28] क्राइटेरिया सर? यह वाला भाई यह वाला।

[02:54:30] इसके ऊपर क्वेश्चंस पता नहीं कितनी बार

[02:54:32] पूछे गए हैं प्रीलिम्स के अंदर। तीन या

[02:54:34] चार बार क्वेश्चन आ चुके हैं फाइनेंस

[02:54:36] कमीशन के रिकमेंडेशंस के ऊपर। प्लीज ध्यान

[02:54:38] देना। सबसे पहली बात पपुलेशन की। पॉपुलेशन

[02:54:42] का वेटेज पहले 15% होता था। अब उसको

[02:54:45] बढ़ाकर 17.5 कर दिया गया है।

[02:54:50] दूसरी बात डेमोग्राफिक परफॉर्मेंस आपने

[02:54:53] पॉपुलेशन कंट्रोल करने के अंदर कितना

[02:54:54] अच्छा काम किया। तो पहले ये 12.5% था। अब

[02:54:58] इसकी वेटेज कम करके 10% कर दी गई है।

[02:55:01] तीसरी बात एक कॉम्पोनेंट है एरिया का।

[02:55:04] एरिया का वेटेज पहले 15% था। अब इसको कम

[02:55:06] करके 10% कर दिया गया है। चौथी बात

[02:55:09] फॉरेस्ट। पहले इसका वेटेज 10 था। इसको 10

[02:55:12] ही रखा गया है। फिर पर कैपिटा जीएसडीपी

[02:55:15] डिस्टेंस मतलब हर एक स्टेट का जैसे देश का

[02:55:19] जीडीपी निकालते हो ना उसी तरह से हर एक

[02:55:21] स्टेट का आपका आता है ग्रॉस स्टेट

[02:55:23] डोमेस्टिक प्रोडक्ट जीएसडीपी। अब हम देखते

[02:55:26] हैं कि यार हम कहां पर हैं और सबसे अमीर

[02:55:29] वाला स्टेट उसके बीच में कितना डिस्टेंस

[02:55:31] है। क्योंकि देखो यार अगर मैं बहुत ही

[02:55:33] गरीब स्टेट हूं ना तो मुझे डेवलप होने के

[02:55:35] लिए ज्यादा पैसे चाहिए। तो अमीर गरीब का

[02:55:38] कितना अंतर है? जितना ज्यादा अंतर होगा उस

[02:55:40] स्टेट को उतने पैसे देने चाहिए ताकि वो

[02:55:42] अपने आप को डेवलप कर पाए। उसको हम बोलते

[02:55:44] हैं पर कैपिटा जीएसडीपी विद डिस्टेंस।

[02:55:46] कितना डिस्टेंस है सबसे अमीर स्टेट के

[02:55:48] साथ? तो उसको दिया जाता है उसका वेटेज है

[02:55:51] 42.5% पहले ये 45 था। इसको कम करके 42.5

[02:55:56] किया गया है। पर ध्यान रखना अभी भी ये

[02:55:58] सबसे बड़ा क्राइटेरिया यही है। लार्जेस्ट

[02:56:00] क्राइटेरिया अभी भी यही है। 42.5% दैट इज़

[02:56:02] योर पर कैपिटा जीएसटीपी डिस्टेंस। इसके

[02:56:05] अलावा एक है जीडीपी में कितना

[02:56:06] कंट्रीब्यूशन है। अब ये नया इंट्रोड्यूस

[02:56:08] किया गया है। ये पहले नहीं था। पहले इसका

[02:56:10] कोई वेटेज नहीं था कि पहले था ही नहीं। अब

[02:56:13] यहां पे इसको 10% का वेटेज दिया गया है कि

[02:56:15] जीडीपी में आपकी कितनीेंस है।

[02:56:18] लास्ट है टैक्स एंड फिस्कल एफर्ट। ये पहले

[02:56:21] 2.5 था। अब यहां पर इसको हटा दिया गया है।

[02:56:23] आपने टैक्स कलेक्शन में कितना अच्छा काम

[02:56:25] किया। अब इसको हटा दिया गया है। अब ये 0%

[02:56:27] है। अगर आप इनको ऐड करोगे तो ये टोटल आपका

[02:56:30] 100% यहां पे बनेगा। तो आप इनको यहां पे

[02:56:33] याद रख सकते हो कि अच्छा इसकी सबसेेंट

[02:56:35] वेटेज है। फिर उसके बाद बाकी कॉम्पोनेंट्स

[02:56:38] की वेटेज 10% 10% 10% 10% और एक पॉपुलेशन

[02:56:41] इज़ वेरीेंट 17.5%

[02:56:43] ये क्राइटेरिया 16th फाइनेंस कमीशन का है।

[02:56:47] समझे? और इस बार के फाइनेंस कमीशन में जो

[02:56:50] आपके

[02:56:52] इस बार के फाइनेंस कमीशन में जो आपके चेयर

[02:56:54] पर्सन हैं वो डॉ. अरविंद पंगड़िया जी थे।

[02:56:57] ठीक है ना? और ध्यान रखने वाली बात ये है

[02:56:59] इनकी जो रिकमेंडेशन होती है वो एडवाइज़री

[02:57:01] होती हैं। ठीक है? सरकार चाहे तो माने

[02:57:04] इनकी बात चाहे तो ना माने। आमतौर पर सरकार

[02:57:07] इनकी बात मान लेती है। पर ऐसा नहीं है कि

[02:57:09] इनकी रिकमेंडेशंस बाइंडिंग है। वो अपने आप

[02:57:11] में एडवाइज़री ही है। उसी तरह से अगर हम

[02:57:14] बात करें तो यहां पर आप नोटिस कर पाओगे

[02:57:16] बाकी और मेंबर्स भी हैं। चार और मेंबर्स

[02:57:18] होते हैं चेयरमैन के अलावा। तो उनको भी

[02:57:19] यहां पे कॉन्स्टिट्यूट किया गया है। अब

[02:57:21] यहां पे सवाल आता है कि सर इससे फायदा

[02:57:23] होगा किसको या नुकसान होगा? देखो प्लीज

[02:57:26] मेरी बात सुनना। अभी मैं एक अपने स्टूडेंट

[02:57:28] से बात कर रहा था। अभी उन्होंने इंटरव्यू

[02:57:30] देकर के आए हैं वो यूपीएससी के अंदर अभी

[02:57:32] थोड़े दिन पहले ही और उनसे ये सवाल पूछा

[02:57:34] गया था फाइनेंस कमीशन से कि फाइनेंस कमीशन

[02:57:36] का सदर्न स्टेट्स पे क्या इंपैक्ट होगा 16

[02:57:38] फाइनेंस कमीशन का। ये इंटरव्यू में बहुत

[02:57:40] बच्चों से सवाल पूछे गए हैं ऐसे। अब इसमें

[02:57:42] आप नोटिस करना आपके अगर हम बात करें ना

[02:57:45] सदर्न स्टेट्स की तो सदर्न स्टेट्स को

[02:57:48] यहां पर फायदा होने वाला है। नॉर्मली पता

[02:57:51] है क्या होता था? सदर्न स्टेट्स हमेशा

[02:57:53] कंप्लेंट करती थी कि यार आप हमें पैसा

[02:57:56] देते नहीं हो। सारा पैसा आप उत्तर प्रदेश

[02:57:58] बिहार को देते रहते हो। पॉपुलेशन कंट्रोल

[02:58:00] करने के अंदर काम हमने किया। हमने इतनी

[02:58:02] मेहनत करी। आपने हमें फायदा नहीं दिया। तो

[02:58:04] इस बार सदर्न स्टेट्स की बात को भी ध्यान

[02:58:07] में रखा गया है। और यहां पे आप नोटिस कर

[02:58:10] पाओगे पांचों स्टेट्स को सदर्न स्टेट्स को

[02:58:12] फायदा होगा। जैसे आंध्र प्रदेश का वेटेज

[02:58:15] पहले 4.04 था। अब वो बढ़ के 4.21 हो

[02:58:17] जाएगा। कर्नाटका का वेटेज भी बढ़ेगा। उसको

[02:58:20] भी ज्यादा पैसे मिलेंगे। केरला का भी

[02:58:22] बढ़ेगा आपका तमिलनाडु का भी बढ़ेगा थोड़ा सा

[02:58:24] बढ़ेगा हालांकि तमिलनाडु का और ऐसे ही आपके

[02:58:26] हल्का सा तेलंगाना का भी बढ़ेगा पर पांचों

[02:58:28] सदर्न स्टेट्स का यहां पे कंट्रीब्यूशन

[02:58:30] नॉट नो डाउट कंट्रीब्यूशन उनको जो पैसा

[02:58:32] मिलना है वो बढ़ रहा है सर बिहार यूपी का

[02:58:34] क्या हो रहा है देखो यूपी की अगर हम बात

[02:58:36] करें इसका शेयर कम हो जाएगा यूपी को पहले

[02:58:38] 17.9% मिलता था अब 17.6% मिलेगा और अगर हम

[02:58:42] बात करें बिहार की बिहार को पहले 10%

[02:58:45] मिलता था अब कम हो गया आपका 9.94 थोड़ा सा

[02:58:48] कम किया गया थोड़ा सा हल्का सा ठीक है है

[02:58:50] ना? ये बात आप यहां पे ध्यान में रखेंगे।

[02:58:54] ठीक है? तो ऐसा पता क्यों हुआ? ऐसा इसलिए

[02:58:57] हुआ क्योंकि देखो यार पपुलेशन बिहार यूपी

[02:59:01] की ज्यादा है। तो उनका फायदा मिलेगा बिहार

[02:59:04] यूपी को। पर अगर हम बात करें

[02:59:08] ठीक है ना? इनकम डिस्टेंस की। ठीक है ना?

[02:59:10] या अगर हम बात करें पहले इनकम डिस्टेंस का

[02:59:13] वेटेज 45% था। बिहार थोड़ा पीछे था तो

[02:59:17] उसको इनकम डिस्टेंस से ज्यादा पैसे मिलते

[02:59:18] थे। अब इनकम डिस्टेंस का वेटेज 42.5% कर

[02:59:21] दिया गया तो बिहार को वहां नुकसान हो

[02:59:23] जाएगा। बाकी इसके हम बात करें पॉपुलेशन

[02:59:26] ग्रोथ इसकी वेटेज कम कर दी गई है तो उसका

[02:59:28] भी नुकसान होगा। तो कुछ चीजों का फायदा

[02:59:30] हुआ बिहार को कुछ का नुकसान हुआ। ओवरऑल

[02:59:32] हल्का सा नुकसान हुआ। आई होप ये बात आप

[02:59:34] यहां पे समझ पाए होंगे।

[02:59:37] ठीक है? तो ये है हमारी 16th फाइनेंस

[02:59:40] कमीशन की रिकमेंडेशंस।

[02:59:43] ठीक है?

[02:59:46] बाकी इसके अलावा इन्होंने ₹1400 करोड़ का

[02:59:49] जो एलोकेशन है वह दिया है 2026 के लिए

[02:59:52] जहां रूल एंड अर्बन लोकल बॉडी ग्रांट्स

[02:59:54] हैं डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रांट्स आपको

[02:59:56] यहां पे देखने को मिलेंगी। एंड अगर हम बात

[02:59:58] करें तो ये परसेंटेज जो था वो 41% ही है

[03:00:01] जो मैंने आपको यहां पे बताया है।

[03:00:08] आनंद कुछ वजह से सदर्न स्टेट्स को नुकसान

[03:00:11] हुआ। कुछ वजह से फायदा हुआ। ओवरऑल फायदा

[03:00:14] हुआ।

[03:00:16] पहले मुझे यहां पर बताओ यहां तक आपको कुछ

[03:00:18] भी डाउट है, कुछ भी कंफ्यूजन है।

[03:00:21] यहां पर आपको कुछ भी डाउट है, कुछ भी

[03:00:23] कंफ्यूजन है।

[03:00:26] एनी डाउट? एनी कंफ्यूजन टिल नाउ? हां,

[03:00:28] ब्रेक दे रहे हैं भाई। ब्रेक दे रहे हैं।

[03:00:30] पहले बताओ यहां तक कोई डाउट, कोई कंफ्यूजन

[03:00:32] है?

[03:00:47] नहीं देखो मैं वही बता रहा हूं जैसे सदर्न

[03:00:52] स्टेट्स ने जीडीपी में ज्यादा कंट्रीब्यूट

[03:00:53] किया तो फायदा भी हुआ उनको नहीं फरीन

[03:00:56] रिकमेंडेशन बाइंडिंग नहीं है नॉन बाइंडिंग

[03:00:58] है रेकमेंडेशंस है वो केवल सरकार अमूमन

[03:01:01] मान लेती है पर बाइंडिंग नहीं है

[03:01:04] ऑर्डर डेफिनेटली याद होना चाहिए ऑर्डर यह

[03:01:07] वाला डेफिनेटली याद होना चाहिए

[03:01:15] ठीक है। नहीं देखो अभी 12:00 बजे हैं।

[03:01:17] 12:00 बजे लंच ब्रेक नहीं होती। अभी लंच

[03:01:19] बना ही नहीं है भाई यहां पे। कैसे लंच

[03:01:21] ब्रेक दे दूं मैं आपको? मैं जाके बाहर

[03:01:23] बैठा रहूंगा। लंच लंच बनेगा 1:00 बजे। अभी

[03:01:26] हम टी ब्रेक लेंगे। लंच ब्रेक अभी बाद में

[03:01:28] लेंगे। ठीक है ना? तो अभी एक काम करते

[03:01:30] हैं। अभी हम 15 मिनट की ब्रेक लेंगे। लंच

[03:01:33] ब्रेक हम लेंगे 2:00 बजे के आसपास। ठीक

[03:01:34] है? अभी लंच बना ही नहीं यार। मैं क्या

[03:01:36] करूंगा आधा घंटा? ठीक है ना? जब लंच बनेगा

[03:01:38] तब मैं आपको लंच ब्रेक दूंगा। अभी टी

[03:01:40] ब्रेक है फिलहाल। ठीक है? तो एक काम करते

[03:01:42] हैं।

[03:01:44] एक काम करते हैं दोस्तों। ठीक है? 15 मिनट

[03:01:47] की टी ब्रेक लेते हैं।

[03:01:51] ठीक है? 15 मिनट की टी ब्रेक लेते हैं।

[03:01:53] 12:02 हुए हैं। तो 12:18 पे हम मिलेंगे।

[03:01:58] ठीक है?

[03:02:04] 12:18 पे मिलेंगे और फिर आगे कंटिन्यू

[03:02:06] करेंगे। बट आप लोग चले मत जाना वापस आ

[03:02:09] जाना 12:18 पे। ठीक है? तो मिलते हैं 15

[03:02:12] मिनट बाद। ठीक है? ओके। थैंक यू सो मच।

[03:02:20] हां जी। तो दोस्तों, आगे फिर कंटिन्यू

[03:02:22] करते हैं। राइट? तो ब्रेक से पहले हम लोग

[03:02:25] डिस्कशन कर रहे थे हमारे बजट के

[03:02:27] एस्पेक्ट्स के ऊपर। तो हमने देखा था कि

[03:02:29] यार बजट के अंदर कई तरह की अनाउंसमेंट्स

[03:02:31] थी। हमने फाइनेंस कमीशन की रिकमेंडेशंस भी

[03:02:34] देखी। पर इसके अलावा भी और बहुत सारी

[03:02:36] बातें थी, इंपॉर्टेंट अनाउंसमेंट्स थी जो

[03:02:38] बजट के अंदर थी। तो हमें उनको भी एक-एक

[03:02:41] करके डिस्कस करना होगा। जैसे इस बार के

[03:02:44] बजट में एक बात हुई भारत विस्तार के बारे

[03:02:47] में। किसके बारे में? भारत विस्तार। व्हाट

[03:02:51] इज द फुल फॉर्म ऑफ दिस वर्ड? भारत

[03:02:53] विस्तार। देखो जब हम बात करते हैं ना इसकी

[03:02:56] फुल फॉर्म की यह बनेगा वर्चुअली

[03:02:59] इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल

[03:03:03] रिसोर्सेज।

[03:03:05] ये दरअसल में पता क्या है? ये हमारे यहां

[03:03:08] पे एक ऐसी हमने एक एआई इनेबल्ड डिजिटल

[03:03:12] प्लेटफार्म हमने यहां पे प्रपोज किया है

[03:03:14] जिसके माध्यम से एग्रीकल्चर बहुत ज्यादा

[03:03:17] बेहतर हो जाएगा। कैसे?

[03:03:20] यहां पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हम

[03:03:22] इस्तेमाल करेंगे एंड इंश्योर ये किया

[03:03:24] जाएगा कि किसानों को अगर कुछ फैसला लेना

[03:03:27] हो उन फैसले लेने के अंदर ये एआई उनको मदद

[03:03:30] करे किस प्रकार की फसल लगानी है कितना

[03:03:33] यहां पे मसून रहेगा हर एक चीज यहां पर

[03:03:36] किसानों को पता होगी और अगर यहां पे

[03:03:38] किसानों को ये बातें पता होंगी तो कहीं ना

[03:03:40] कहीं उनको यहां पर डिसीजन लेने के अंदर

[03:03:43] फिर समस्या नहीं आएगी ये है भारत विस्तार

[03:03:46] राइट तो इसको हमारा मिनिस्ट्री ऑफ

[03:03:48] एग्रीकल्चर एंड फार्मर वेलफेयर और साथ ही

[03:03:51] साथ आपका ये जो सिस्टम है यह होगा और जो

[03:03:53] एग्री स्टक ने यहां पे प्लेटफार्म डेवलप

[03:03:55] किए हैं उनके साथ इनको इंटीग्रेट किया

[03:03:57] जाएगा ताकि किसानों को यहां पे हम यहां पे

[03:03:59] मदद मिल पाए। ठीक है? तो ये भी एक भारत

[03:04:01] विस्तार के बारे में आपको पता होना चाहिए

[03:04:03] ताकि एग्रीकल्चर भी क्या हो? डेटा ड्रिवन

[03:04:06] एविडेंस बेस्ड डिसीजन मेकिंग हमें यहां पे

[03:04:08] करनी है। उसके अंदर ये हेल्प करेगा। ठीक

[03:04:10] है? ये एक इनिशिएटिव था। इसके अलावा कुछ

[03:04:13] और इनिशिएटिव भी थे। जैसे इस बार के बजट

[03:04:15] के अंदर बात हुई बुद्धिजिस्ट सर्किट

[03:04:18] डेवलपमेंट की। कहां पर? हमारे नॉर्थ ईस्ट

[03:04:21] रीजन के अंदर। हमारी फाइनेंस मिनिस्टर ने

[03:04:23] कहा कि हम नॉर्थ ईस्ट रीजन के अंदर

[03:04:25] टूरिज्म डेवलप करेंगे। बुद्धिज्म के ऊपर

[03:04:27] हम यहां पे डेवलप करेंगे। ऑलरेडी हमारी

[03:04:29] स्कीम्स हैं। जैसे फॉर एग्जांपल

[03:04:31] पूर्वोध्याय योजना ये हमारे ईस्टर्न एरिया

[03:04:33] के ऊपर फोकस करती है। हमारा नॉर्थ ईस्टर्न

[03:04:36] फोकस डेवलपमेंट स्ट्रेटजी उसी के ऊपर यहां

[03:04:37] पे हम काम करेंगे। अब आप लोगों ने अपने

[03:04:40] हिस्ट्री बुक्स के अंदर कुछ चीजें पढ़ी

[03:04:41] होंगी। जैसे फॉर एग्जांपल आप लोगों ने

[03:04:44] अपनी हिस्ट्री बुक्स में पढ़ा होगा कि अगर

[03:04:46] हम बात करते हैं ना बुद्धिज्म की तो नॉर्थ

[03:04:49] ईस्टर्न रीजन बुद्धिज्म के पर्सपेक्टिव से

[03:04:51] बहुत ज्यादाेंट है। अगर हम बात करें

[03:04:53] अरुणाचल प्रदेश की ये क्वेश्चन ऑलरेडी आ

[03:04:55] चुके हैं यूपीएससी में। तवांग मोनेस्टी

[03:04:57] आपको देखने को मिलती है अरुणाचल प्रदेश के

[03:04:59] अंदर जो कि वन ऑफ द लार्जेस्ट बुद्धिस्ट

[03:05:02] लर्निंग सेंटर्स हैं पूरे एशिया में।

[03:05:04] मोनपा के ऊपर क्वेश्चन ऑलरेडी यूपीएससी ने

[03:05:06] पूछ चुकी है। ट्राइब मोनपा ट्राइब के ऊपर।

[03:05:08] मोनपा पेपर भी बड़ा फेमस आता है। तो मोनपा

[03:05:10] ट्राइब शरदुकन ट्राइब ये सारी जो ट्राइब्स

[03:05:14] हैं ये कहीं ना कहीं बुद्धिज्म के साथ

[03:05:15] लिंक्ड हैं। तो अरुणाचल प्रदेश के अंदर

[03:05:17] आपको तवांग मोनेस्टी देखने को मिलेगी। इसी

[03:05:19] तरह से अगर हम बात करें सिक्किम के अंदर

[03:05:22] भी आपको वज्रयान बुद्धिज्म आपको देखने को

[03:05:24] मिलता है। इसके कुछ इंपॉर्टेंट आपके

[03:05:26] स्कूल्स हैं। काग्यू स्कूल हो गया, नगमा

[03:05:29] स्कूल हो गया। है ना? और रूमटेक

[03:05:31] मोनेस्ट्री ऑलरेडी क्वेश्चन पूछा जा चुका

[03:05:33] है इसके ऊपर। रूमटेक मोनेस्ट्री कहां पर

[03:05:34] है? सिक्किम के अंदर। सिमिलरली अगर हम बात

[03:05:37] करें असम में भी आपको हुनसांग जो थे जो

[03:05:40] सेवंथ सेंचुरी के अंदर भारत आए थे

[03:05:42] हर्षवर्धन के टाइम के ऊपर तो उन्होंने भी

[03:05:44] यहां पे कंफर्म किया है अपने वर्क के अंदर

[03:05:46] कि बुद्धिस्ट स्कॉलरशिप थी ब्रह्मपुत्र

[03:05:48] वैली के अंदर फिर थेरवाद और महायान

[03:05:50] इन्फ्लुएंस आपको देखने को मिलता है मणिपुर

[03:05:52] और त्रिपुरा के अंदर तो ये सारे हमारे पास

[03:05:54] एविडेंसेस हैं। इन्हीं के कॉन्टेक्स्ट में

[03:05:56] हम यहां पे बुद्धिज्म को डेवलप करने हैं

[03:05:58] अपने नॉर्थ ईस्ट रीजन के अंदर। वहां पर भी

[03:06:00] आपका टूरिज्म डेवलप हो। तो डेफिनेटली

[03:06:03] फाइनेंस मिनिस्टर ने बात करी है तो चाहे

[03:06:05] क्वेश्चन इकॉनमी के पर्सेक्टिव से आए चाहे

[03:06:07] आपका आर्ट एंड कल्चर के पर्सपेक्टिव से आए

[03:06:10] पर बुद्धिज्म बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट यहां

[03:06:12] पे बन जाता है। ठीक है ना? हां। तो ये भी

[03:06:15] यहां पे बात हुई है। इसके अलावा एक बात इस

[03:06:18] बार के बजट के अंदर हुई थी वो थी रेयर

[03:06:20] अर्थ के बारे में। देखो कितनी सारी बातें

[03:06:22] हुई हैं इस बार बजट के अंदर। ठीक है? और

[03:06:25] आपको लगता है कि बजट पढ़ना इतना आसान है।

[03:06:26] इतना आसान नहीं है बेटा बजट पढ़ना। और

[03:06:28] इसीलिए क्वेश्चन बनते नहीं है आपसे बजट

[03:06:30] में क्योंकि आपने डिटेल में कभी पढ़ा ही

[03:06:31] नहीं उसको। देखो सबसे पहली बात तो आप ये

[03:06:34] समझो कि रेयर अर्थ मिनरल्स क्या होते हैं?

[03:06:37] रेयर अर्थ मिनरल्स की जब हम बात करें तो

[03:06:39] सबसे पहले आपको ध्यान रखना है कि यहां पर

[03:06:41] वर्ड भले ही रेयर इस्तेमाल हुआ पर इसका

[03:06:44] मतलब ये नहीं है कि दुनिया में ये पाए

[03:06:46] नहीं जाते। दुनिया में बहुत भारी मात्रा

[03:06:48] में ये पाए जाते हैं। तो सर फिर इनको रेयर

[03:06:50] क्यों बोलते हैं? इनको रेयर इसीलिए बोला

[03:06:53] जाता है क्योंकि इनको एक्सट्रैक्ट करना

[03:06:55] बहुत मुश्किल होता है। ठीक है? ये रेयर

[03:06:58] नहीं है। ये काफी भारी मात्रा के अंदर है।

[03:07:01] दुनिया के क्रस्ट के अंदर। एंड इनफैक्ट

[03:07:03] अगर हम बात करें ना तो यहां पर आपको टोटल

[03:07:06] 17 एलिमेंट्स आपको देखने को मिलेंगे।

[03:07:08] जिनमें से 15 लैंथेनाइड्स होते हैं और

[03:07:10] 16वां स्टैंडिनियम एंड आपका यूट्रियम। ये

[03:07:13] 17 आपको एलिमेंट्स आपको देखने को मिलते

[03:07:15] हैं। दीज़ आर कॉल्ड एज रेयर अर्थ

[03:07:16] एलिमेंट्स। ठीक है? अब पॉइंट आता है क्या

[03:07:19] भारत में रेयर अर्थ है? आप लोग मुझे बताओ

[03:07:22] क्या भारत में रेयर अर्थ है? आंसर इज़

[03:07:24] बिल्कुल है। भारत के पास दुनिया के सबसे

[03:07:28] पांचवें सबसे बड़े आपको रिजर्व्स देखने को

[03:07:30] मिलेंगे। इंडिया हैज़ द फिफ्थ लार्जेस्ट

[03:07:33] रिजर्व्स। और सर कहां पर है भारत में?

[03:07:35] आपको आंध्र प्रदेश के अंदर देखने को

[03:07:37] मिलेंगे। कर्नाटका, उड़ीसा, केरला और भी

[03:07:40] बाकी स्टेट्स के अंदर हैं। पर इन स्टेट्स

[03:07:42] में सबसे ज्यादा आपको रेयर अर्थ रिजर्व्स

[03:07:44] आपको देखने को मिल जाएंगे। अब सवाल आता है

[03:07:46] कि सर क्या फायदा क्या है? देखो ये 17

[03:07:49] मैंने आपको सामने लिखे भी हुए हैं। अगर आप

[03:07:50] इनको गो थ्रू करना हो। ठीक है? आपके 15

[03:07:53] इनमें लैंथेनाइड्स हो गए और उसके अलावा

[03:07:55] आपका यूट्रिम हो गया एंड आपका

[03:07:59] स्केंडिनियम हो गया। तो इस तरह से टोटल 17

[03:08:01] आपके रेयरर एलिमेंट्स आपको देखने को मिल

[03:08:03] जाएंगे। अब इनका पॉइंट पता क्या है? हां

[03:08:06] इनका पॉइंट पता क्या है? इनकी मैग्नेटिक

[03:08:09] स्ट्रेंथ काफी अच्छी है। कंडक्टिविटी

[03:08:11] इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी काफी अच्छी है।

[03:08:13] इसीलिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के अंदर

[03:08:15] इनका इस्तेमाल हो सकता है। इनके मेल्टिंग

[03:08:17] पॉइंट नॉर्मली ज्यादा होते हैं। तो कहीं

[03:08:18] ना कहीं कुछ ऐसी एप्लीकेशन जिनमें

[03:08:21] टेंपरेचर बहुत हाई हो जाए उस केस में भी

[03:08:23] ये मेल्ट नहीं होंगे क्योंकि इनकी

[03:08:24] मेल्टिंग पॉइंट इनका ज्यादा होता है। फिर

[03:08:26] अगर हम बात करें ये कैटलिस्ट की तरह काम

[03:08:29] करते हैं। मतलब ये कंज्यूम नहीं होते और

[03:08:31] आपके प्रोसेस को तेज कर देते हैं। तो इनकी

[03:08:33] ये सब प्रॉपर्टीज की वजह से इनका कई जगह

[03:08:35] इस्तेमाल होता है। कहां-कहां पे इस्तेमाल

[03:08:37] होता है? बहुत सारी चीजों के ऊपर आपके

[03:08:39] इस्तेमाल इनका देखने को मिल जाएगा। आपके

[03:08:42] इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के अंदर इनका

[03:08:43] इस्तेमाल होता है। आपके रिन्यूएबल एनर्जी

[03:08:46] सिस्टम्स के अंदर इस्तेमाल होता है।

[03:08:47] इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल हो गया। है

[03:08:49] ना? डिफेंस में हो गया। अब इसमें आप नोटिस

[03:08:51] करिएगा है कई देशों के पास। पर इसके ऊपर

[03:08:55] जो कंसंट्रेशन है इन टर्म्स ऑफ़ इसका

[03:08:58] एक्सट्रैक्शन वो चाइना के पास है। नोटिस

[03:09:00] करिएगा चाइना लगभग 90% ग्लोबल रेयर अर्थ

[03:09:03] प्रोसेसिंग का यहां पे कंट्रोल करता है

[03:09:05] ग्लोबल सप्लाई का। ठीक है? ठीक है? तो

[03:09:07] कहीं ना कहीं बहुत एक्सेसिव निर्भरता है

[03:09:10] चाइना के ऊपर। तो इसीलिए यहां पर ये

[03:09:12] दिक्कत हमें देता है। तो कहीं ना कहीं

[03:09:13] देखो भारत के लिए जरूरी क्या बन जाता है?

[03:09:15] भारत के अंदर डिमांड बढ़ रही है सबकी

[03:09:17] इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की, रिन्यूएबल एनर्जी

[03:09:19] की, इलेक्ट्रॉनिक्स की। तो इसीलिए हमें

[03:09:21] जरूरत है कि हम यहां पे अपनी डिपेंडेंस जो

[03:09:23] है वो चाइना के ऊपर कम करें। तो इंडिया ने

[03:09:26] नोटिस करो 53,000 मेट्रिक टन रेयर अर्थ

[03:09:30] मैग्नेट्स 204-25 के अंदर हमने इंपोर्ट

[03:09:32] करी। तो कहीं ना कहीं भारत की इंपोर्ट

[03:09:34] डिपेंडेंसी बहुत ज्यादा है। मैग्नेट्स भी

[03:09:36] हम यहां पे इंपोर्ट करते हैं। रेयर अर्थ

[03:09:37] मैग्नेट्स जो होती हैं। तो भारत ने इस बार

[03:09:40] क्या सोचा है ना इस बार बजट के अंदर कि

[03:09:41] भाई हम लोग ना अपनी ये जो निर्भरता है ना

[03:09:43] ये कम करेंगे। हम आत्मनिर्भर बनेंगे। वो

[03:09:46] कैसे बनेंगे? हमने यहां पर रेयर अर्थ

[03:09:49] कॉरिडोर हम यहां पर डेवलप करेंगे। कहां

[03:09:51] पर? सर ओसा में, केरला में, आंध्र प्रदेश

[03:09:55] में और तमिलनाडु में। जब इन स्टेट्स के

[03:09:57] अंदर हम अपने रेयर अर्थ कॉरिडोर जब हम

[03:10:00] सेटअप कर देंगे तो कहीं ना कहीं यहां पर

[03:10:02] हम अच्छे से अपनी डेवलपमेंट कर सकते हैं

[03:10:05] रेयर अर्थ मेटल्स की भी और आपके रेयर अर्थ

[03:10:07] आपके जो मैग्नेट्स होते हैं। ठीक है? तो

[03:10:09] इंडिया में आपको बीच सैंड मिनरल्स जो होते

[03:10:12] हैं ना वो मेजर सोर्स हैं रेयर अर्थ

[03:10:13] एलिमेंट्स के। एंड वहीं पर हम यहां पे

[03:10:15] फोकस करेंगे जैसे खासकर अगर हम बात करें

[03:10:17] तो यहां पर आपको मोनोजाइट आपको देखने को

[03:10:19] मिल जाएगा। ठीक है ना? नियोडियम हो जाएगा।

[03:10:21] ये सारे आपके जो रेयर अर्थ होते हैं ये

[03:10:23] आपको देखने को मिल जाएंगे। तो जब हमारे

[03:10:24] पास है तो हमें टेक्नोलॉजी के ऊपर फोकस

[03:10:26] करना चाहिए ताकि हम यहां पे फोकस करें एंड

[03:10:29] हमारा जो डिपेंडेंस है वो कम हो पाए। तो

[03:10:31] एयर अर्थ मैग्नेट्स भी जो होती हैं वो

[03:10:33] कहीं ना कहीं सबसे स्ट्रांग मैग्नेट्स

[03:10:35] होती हैं। उनका बहुत हैवी एप्लीकेशन होता

[03:10:37] है। सो दैट इज़ व्हाई वी आर वर्किंग

[03:10:38] टुवर्ड्स इट एंड अकॉर्डिंगली दो प्रकार की

[03:10:41] रेयर मैग्नेट्स आपको देखने को मिलती हैं।

[03:10:43] एक है न्यूडोमियम आयरन बोरोन। ठीक है? और

[03:10:46] एक है आपका सिमेरियम कोबाल्ट। ठीक है? तो

[03:10:49] इन पर्टिकुलर मैग्नेट्स का फायदा यही है

[03:10:51] कि इनको जंग नहीं लगता। इनकी स्ट्रेंथ

[03:10:53] अच्छी होती है, एनर्जी डेंसिटी ज्यादा

[03:10:55] होती है। तो हम चाहते हैं कि भारत में भी

[03:10:57] यहां पर ये डेवलप हो। एंड इसीलिए कौन सी

[03:11:00] चार स्टेट्स के अंदर? ओसा, केरला, आंध्र

[03:11:02] प्रदेश, तमिलनाडु। इन चार कोस्टल स्टेट्स

[03:11:05] के ऊपर हम यहां पे फोकस कर रहे हैं रेयर

[03:11:07] अर्थ कॉरिडोर डेवलप करके। आई थिंक दैट इज़

[03:11:10] क्लियर।

[03:11:15] ठीक है सर। ठीक है। ठीक है।

[03:11:18] ठीक है। ओके। ओके। ओके। कुछ और भी

[03:11:21] अनाउंसमेंट्स हैं क्या? मेजर अनाउंसमेंट्स

[03:11:22] देखो यही हैं। और भी मैं आपको बताऊंगा। पर

[03:11:25] कुछ अनाउंसमेंट से पहले हम कुछ और फर्दर

[03:11:28] बातें पढ़ लेते हैं हमारी फिस्कल पॉलिसी

[03:11:29] के रिगार्डिंग। ठीक है? बजट का मेजर

[03:11:31] पोर्शन हमने डिस्कस कर लिया है। कुछ और

[03:11:33] हमें छोटी-छोटी और कुछ फ़क्चुअल चीजें, कुछ

[03:11:35] स्टैटिक पोर्शन वाली चीजें हमें यहां पे

[03:11:37] डिस्कस करनी है आपकी फिस्कल पॉलिसी के

[03:11:40] रिगार्डिंग। जैसे

[03:11:44] हां

[03:11:45] देखो ये सारी जो बातें हैं ये आपके इस बार

[03:11:47] के बजट में बताई गई हैं। ठीक है? हां। अब

[03:11:50] एक कांसेप्ट हमें यहां पे डिस्कस करना है।

[03:11:51] कुछ स्टैटिक पोर्शन अब आएंगे। करंट काफी

[03:11:53] हमने डिस्कस कर लिया। एक कांसेप्ट आता है

[03:11:55] आपका फिस्कल कंसोलिडेशन का। ऑलरेडी

[03:11:57] क्वेश्चन आ चुका है फिसिकल कंसोलिडेशन के

[03:11:58] अंदर। फिस्कल कंसोलिडेशन का मीनिंग बहुत

[03:12:01] सिंपल होता है। आपको अपना घाटा कम करना

[03:12:04] है। आपको अपना डेफिसिट कम करना है।

[03:12:06] डेफिसिट कम कैसे होगा? जब आप कहीं ना कहीं

[03:12:08] अपने खर्चे को कंट्रोल करेंगे और अपना

[03:12:11] रिसीप्ट को आपको बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

[03:12:13] तो बस कोई भी ऐसी चीज, कोई भी सरकार की

[03:12:16] ऐसी नीति जो सरकार के घाटे को कम करने में

[03:12:18] मदद करे और उसकी इनकम को बढ़ाए वही

[03:12:21] कंक्लूड होगी आपकी फिस्कल कंसोलिडेशन के

[03:12:24] अंदर। जैसे फॉर एग्जांपल

[03:12:27] अगर मैं आपसे पूछूं अगर मैं आपसे पूछूं कि

[03:12:30] सरकार कुछ नई सब्सिडी स्कीम लेकर आ रही

[03:12:32] है। क्या इसके फिसिकल कंसोलिडेशन होगा या

[03:12:35] नहीं होगा? आप बताना मुझे।

[03:12:38] अगर सरकार यहां पर कुछ नई स्कीम लेकर आ

[03:12:40] रही है, सब्सिडी प्रोवाइड कर रही है, उसके

[03:12:43] थ्रू फिस्कल कंसोलिडेशन होगा या नहीं

[03:12:46] होगा? जवाब है नहीं हो पाएगा। जब सरकार

[03:12:48] सब्सिडी देगी, सरकार का खर्चा बढ़ेगा।

[03:12:51] खर्चा बढ़ेगा तो उससे डेफिसिट बढ़ेगा।

[03:12:53] डेफिसिट बढ़ेगा उससे फिसल कंसोलिडेशन आपका

[03:12:56] नहीं अचीव होता है। समझे मेरी बात को?

[03:13:03] कर दिया। कर दिया डिस्कस कर दिया। जो आप

[03:13:05] पूछ रहे हो ना ये आइटम डिस्कस कर दीजिएगा।

[03:13:07] ऑलरेडी मैं डिस्कस कर चुका हूं। अगर आप

[03:13:08] लेक्चर की स्टार्टिंग से बने हुए थे तो

[03:13:10] आपने देखा होगा। मैं डिस्कस कर चुका हूं

[03:13:12] उस बात को। हां गुड गुड गुड। अब एक बच्चा

[03:13:15] पूछ रहा है कि सर ये फिसिकल स्टिमुलस क्या

[03:13:17] होता है? हां भाई आपको भी बताएंगे। आप

[03:13:19] चिंता मत करो। ठीक है? आपको पूछने की

[03:13:21] जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आप थोड़ी देर शांति

[03:13:23] से बैठोगे। आपको सारे क्वेश्चन का आंसर

[03:13:24] मिलेगा। फिस्कल स्टिमुलस क्या होता है?

[03:13:26] देखो कई बार ना जो आपकी अर्थव्यवस्था होती

[03:13:29] है वो अच्छी नहीं चल रही होती। जैसे

[03:13:31] कोविड-19 का समय था उस टाइम के ऊपर हमें

[03:13:34] अपनी ग्रोथ बढ़ानी थी। हमें अपनी जीडीपी

[03:13:36] को इनक्रीस करना था। तो वहां सरकार ने

[03:13:38] क्या किया? सरकार कैसे बढ़ाएगी ग्रोथ को?

[03:13:40] सरकार अपना खर्चा बढ़ा सकती है। मतलब

[03:13:42] एक्सपेंडिचर बढ़ाएगी और दूसरा सरकार

[03:13:45] टैक्सेस कम कर देगी। अगर सरकार ने खर्चा

[03:13:47] बढ़ा दिया तो लोगों के हाथों तक पैसा

[03:13:49] पहुंचेगा। दूसरा सरकार ने अगर डायरेक्ट

[03:13:52] टैक्स कम कर दिया। डायरेक्ट टैक्स अगर कम

[03:13:54] कर दिया तो लोगों का कम पैसा अब टैक्सेस

[03:13:56] में जाएगा और उनके पास पैसा ज्यादा बचेगा।

[03:13:59] अब वो ज्यादा खर्च करेंगे, ज्यादा कंज्यूम

[03:14:01] करेंगे। यही होता है फिस्कल स्टिमुलस। जब

[03:14:04] हमें यहां पे अपनी अर्थव्यवस्था को और आगे

[03:14:06] बूस्ट करना होता है, उसकी रफ्तार बढ़ानी

[03:14:08] होती है, तो सरकार के पास एक तरीका होता

[03:14:11] है कि वो काफी सारा पैसा पंप इन करें। उसी

[03:14:13] को बोलते हैं फिसिकल स्टिमुलस। सो इट इज़ अ

[03:14:16] इनक्रीस स्पेंडिंग बाय द गवर्नमेंट। सरकार

[03:14:18] ने स्पेंडिंग अपना खर्चा बढ़ाया ताकि

[03:14:20] इकोनॉमिक एक्टिविटी बढ़े कंट्री के अंदर।

[03:14:23] जैसे आपका आत्मनिर्भर पैकेज जो था वो

[03:14:25] फिसिकल स्टिमुलस ही था। समझे मेरी बात को?

[03:14:30] ठीक है? हां।

[03:14:32] ठीक है। गुड गुड गुड। ये बात हो गई हमारी

[03:14:34] फिस्कल स्टिमुलस की। अच्छा

[03:14:37] अब इसमें भी नोटिस करना आपकी जो फिस्कल

[03:14:40] पॉलिसी है वो दो तरह की हो सकती है। एक

[03:14:43] होती है दोस्तों एक्सपेंशनरी पॉलिसी। एक

[03:14:45] होती है कंट्रक्शनरी। एक्सपेंशनरी में

[03:14:48] क्या होगा? हम अपनी ग्रोथ बढ़ाने की कोशिश

[03:14:50] करेंगे। सवाल आता है ग्रोथ कैसे बढ़ेगी?

[03:14:53] ग्रोथ बढ़ेगी अगर आप टैक्सेस को कम करो।

[03:14:56] यहां मैं बात कर रहा हूं आपके डायरेक्ट

[03:14:57] टैक्सेस की। अगर आप अपने डायरेक्ट टैक्सेस

[03:15:00] को कम करोगे तो देखो यार अगर टैक्स कम हो

[03:15:03] गया मेरे ऊपर तो अब मैं कम टैक्स दूंगा।

[03:15:06] कम टैक्स दूंगा तो मेरे पास ज्यादा पैसा

[03:15:07] बचेगा। ज्यादा पैसा बचेगा तो मैं कहीं ना

[03:15:09] कहीं अलग-अलग जगह पे खर्च करूंगा। उससे

[03:15:12] हमारा जीडीपी बढ़ेगा। ऑन द अदर हैंड सरकार

[03:15:15] अपना खर्चा भी बढ़ा सकती है। तो ये जो

[03:15:18] सरकार खर्चा बढ़ा रही है, टैक्स को कम कर

[03:15:20] रही है, इससे आपकी जीडीपी बढ़ती है। इससे

[03:15:22] आपकी ग्रोथ बढ़ती है। इसी को हम बोलते हैं

[03:15:24] क्या? एक्सपेंशनरी पॉलिसी

[03:15:27] ऑन द अदर हैंड अगर मैं बात करूं

[03:15:29] कंट्रक्शनरी फिस्कल पॉलिसी की इसमें क्या

[03:15:31] होगा इसमें उल्टा हो जाएगा सरकार ने अगर

[03:15:33] मान लो आपका डायरेक्ट टैक्स बढ़ा दिया अगर

[03:15:35] डायरेक्ट टैक्स सरकार ने आपके ऊपर बढ़ा

[03:15:37] दिया तो कहीं ना कहीं अब आपके पास कम पैसा

[03:15:39] बचेगा आप कम खर्चा करोगे राइट तो टैक्सेस

[03:15:42] बढ़ाना या फिर आपका खर्चा कम कर देना

[03:15:44] सरकार अगर खर्चा कम कर दे इससे आपकी ग्रोथ

[03:15:47] कम हो सकती है पर महंगाई अगर बढ़ी हुई है

[03:15:51] उसको कंट्रोल करने के अंदर ये इफेक्टिव है

[03:15:52] अगर महंगाई बहुत ज्यादा थी तो सरकार क्या

[03:15:54] कर सकती है? टैक्सेस बढ़ा दे। मतलब

[03:15:56] डायरेक्ट टैक्स बढ़ा दे और अपना खर्चा कम

[03:15:58] कर दे। लोगों के हाथों में पैसा कम बचेगा

[03:16:00] तो लोग खर्चा कम करेंगे और इनफ्लेशन

[03:16:02] कंट्रोल में आ जाएगी। इसको हम बोलते हैं

[03:16:04] कॉन्ट्रक्शनरी फिस्कल पॉलिसी। समझ गए यहां

[03:16:08] पे? ठीक है? अब दो कांसेप्ट आपको यहां पे

[03:16:11] समझने हैं। देखो सबसे पहले आप यहां पे

[03:16:14] समझेंगे। ये कांसेप्ट आपका प्रोसाइक्लिकल

[03:16:17] फिस्कल पॉलिसी। वर्ड क्या है?

[03:16:19] प्रोसाइक्लिकल फिस्कल पॉलिसी। देखो

[03:16:22] प्रोसाइक्लिकल क्या मीनिंग होगा

[03:16:24] प्रोसाइक्लिकल का? साइकिल के साथ में

[03:16:26] चलना। पॉइंट बताइए साइकिल क्या है? देखो

[03:16:30] लेट मी एक्सप्लेन इट टू यू।

[03:16:38] देखो होता पता है क्या है? आपकी इकॉनमी भी

[03:16:42] हमारी जिंदगी की तरह होती है। जैसे जिंदगी

[03:16:44] में उतार-चढ़ाव आते हैं ना वैसे

[03:16:46] अर्थव्यवस्था में भी उतार-चढ़ाव आते हैं।

[03:16:48] ठीक है? तो हुआ पता क्या

[03:16:52] कि इस तरह से आपकी एक इकोनॉमिक साइकिल

[03:16:55] होता है या आप इसको बिजनेस साइकिल भी कह

[03:16:57] सकते हो। अब इसमें भी अलग-अलग फसेस आते

[03:16:59] हैं। कैसे फसेस आते हैं? देखो यहां पर ये

[03:17:03] जो फज़ है ना इसको हम बोलते हैं ग्रोथ का

[03:17:05] फज़।

[03:17:07] यहां जीडीपी बढ़ रही है। मतलब परसेंटेज

[03:17:10] इनक्रीस हो रहा है। यहां पर आपका मैक्सिमम

[03:17:13] ग्रोथ रेट आ गया। दैट इज़ इसको बूम फज़ आप

[03:17:15] कह सकते हो। इसके बाद यहां पर क्या होगा?

[03:17:18] अब इसके बाद ना जीडीपी नहीं गिरेगी।

[03:17:20] परसेंटेज कम हो जाएगा। परसेंटेज कम होने

[03:17:22] का मतलब यहां पर आपका स्लो डाउन आएगा।

[03:17:26] स्लो डाउन मतलब पहले जीडीपी 8% से बढ़ रही

[03:17:29] थी। अब 6% से बढ़ेगी। मतलब बढ़ने की

[03:17:31] रफ्तार कम हो गई है। और अगर मान लो वो

[03:17:34] जीडीपी आपका जीडीपी ग्रोथ रेट अगर आपका

[03:17:36] नेगेटिव में जाने लग जाए तो वहां पर हमारा

[03:17:39] रिसेशन आने लग जाता है। अगर रिसेशन बहुत

[03:17:42] लंबे समय तक रहे उसको हम लोग डिप्रेशन का

[03:17:45] नाम देते हैं। और इसके बाद जब हम वापस

[03:17:49] थोड़ा ठीक होने लग जाते हैं, उसको हम नाम

[03:17:51] देते हैं रिकवरी का। राइट? तो हुआ पता

[03:17:54] क्या? हुआ कुछ ऐसे कि हमारी इकॉनमी स्टेबल

[03:17:57] नहीं है। कभी ऊपर जा रही है, कभी फिर नीचे

[03:18:00] जा रही है, फिर वापस हम रिकवर कर रहे हैं।

[03:18:03] ठीक है? अब सरकार पता कर सकती है सरकार इस

[03:18:06] साइकिल को छोटा-बड़ा कर सकती है। पॉइंट

[03:18:09] आता है कैसे? देखो ध्यान से।

[03:18:13] अगर मान लो सरकार ने सोचा कि यार यह ग्रोथ

[03:18:16] है। ग्रोथ क्या हम किसी तरह से इसको बढ़ा

[03:18:20] सकते हैं? सोच के बताओ। क्या इस ग्रोथ को

[03:18:22] बढ़ाया जा सकता है? हां, बढ़ाया जा सकता

[03:18:24] है। कैसे? एक्सपेंशनरी फिस्कल पॉलिसी के

[03:18:27] साथ। अगर हमने एक्सपेंशनरी फिस्कल पॉलिसी

[03:18:29] अडॉप्ट करी, क्या उससे ग्रोथ नहीं बढ़ेगी?

[03:18:32] हां बिल्कुल बढ़ेगी। तो क्या हमारा साइकिल

[03:18:34] कुछ ऐसे नहीं हो जाएगा? ग्रोथ बढ़ने लग

[03:18:37] जाएगी ना? बिल्कुल। तो ये साइकिल यहां पे

[03:18:40] ऐसे कुछ हो जाएगा। राइट? ग्रोथ इनक्रीस हो

[03:18:43] जाएगी। ठीक है? अब ये देखो जैसा साइकिल चल

[03:18:46] रहा था ना हमने साइकिल के साथ में ही चले।

[03:18:49] अब यहां पर भी देखो अगर हम ऑलरेडी नीचे जा

[03:18:52] रहे थे तो हम उसके साथ और नीचे जाएंगे। अब

[03:18:55] ये जो मैंने ऑरेंज वाला कर्व बनाया ना ये

[03:18:57] साइकिल के फेवर में बनाया है। अगर साइकिल

[03:19:00] अच्छा चल रहा था मैंने उसको और अच्छा कर

[03:19:02] दिया। अगर साइकिल खराब कर रहा था मैंने

[03:19:04] उसको और खराब कर दिया। जब हम साइकिल के

[03:19:07] फेवर में या जैसा साइकिल चल रहा है

[03:19:09] बिल्कुल वैसे ही चलें। उसको हम बोलते हैं

[03:19:11] वी कॉल इट एज द प्रो साइक्लिकल फिस्कल

[03:19:15] पॉलिसी।

[03:19:17] साइकिल के साथ में चलना। जैसे-जैसे साइकिल

[03:19:20] चल रहा है बिल्कुल वैसे ही चलना। अच्छा एक

[03:19:23] आता है इसका उल्टा। उल्टा क्या आता है?

[03:19:26] साइकिल के अगेंस्ट चलना। अगर ग्रोथ ज्यादा

[03:19:29] थी तो उस ग्रोथ को थोड़ा कम कर दो। अगर

[03:19:32] हालत खराब थी तो उसको थोड़ा ठीक कर दो।

[03:19:34] साइकिल के अपोजिट चलना। जब आप साइकिल के

[03:19:36] अपोजिट चलोगे तो ये साइकिल आपका कुछ ऐसे

[03:19:39] बनेगा जो मैंने येलो में बनाया है। इसको

[03:19:41] हम बोलते हैं काउंटर साइक्लिकल। जैसा

[03:19:44] साइकिल था उसके अगेंस्ट जाना। इसको

[03:19:48] बोलेंगे क्या? काउंटर साइक्लिकल फिस्कल

[03:19:51] पॉलिसी। क्या आपको मीनिंग समझ आया?

[03:19:54] प्रोसाइक्लिकल का और काउंटर साइक्लिकल का।

[03:19:57] साइकिल के साथ-साथ चलना, उसको और एनहांस

[03:20:00] करना प्रोसाइक्लिकल। साइकिल के अगेंस्ट

[03:20:02] चलना, उसके इफेक्ट को रिड्यूस करना इज़

[03:20:04] कॉल्ड एज काउंटर साइक्लिकल। अब मेरा आपसे

[03:20:07] सवाल है अगर सरकार प्रोसाइक्लिकल फॉलो कर

[03:20:12] रही है पॉलिसी को तो एक्सपेंशन फज़ में

[03:20:16] सरकार क्या करेगी? बताओ जरा। क्या कह रहा

[03:20:20] हूं मैं? अगर सरकार प्रो साइक्लिकल पॉलिसी

[03:20:23] अडॉप्ट कर रही है तो एक्सपेंशन फज़ में

[03:20:26] सरकार क्या करेगी? सर देखो अगर हम बात

[03:20:29] करें ना एक्सपेंशन फज़ की। ये है आपका

[03:20:31] एक्सपेंशन फज़। और आपने कहा कि

[03:20:33] प्रोसाइक्लिकल करना है। तो साइकिल के फेवर

[03:20:36] में जाना है। साइकिल को बड़ा करना है।

[03:20:37] साइकिल को बड़ा कैसे करेंगे? जब आप यहां पे

[03:20:40] ऐसे करेंगे। ऐसे कैसे हो जाएगा? जब आप

[03:20:42] टैक्सेस कम करोगे और खर्चा बढ़ाओगे। क्या

[03:20:46] ये बात सबको क्लियर है? जब सरकार टैक्सेस

[03:20:48] कम करेगी, खर्चा बढ़ाएगी, साइकिल बड़ा

[03:20:50] नहीं होता हुआ देखने को मिलेगा। बिल्कुल

[03:20:52] मिलेगा। बिल्कुल मिलेगा। ठीक है? खर्चा

[03:20:55] बढ़ाना पड़ेगा सरकार को और टैक्स कम करने

[03:20:57] पड़ेंगे। गुड वेरी गुड। वेरी गुड। दूसरा

[03:20:59] सवाल है मेरा। अगर सरकार काउंटर साइक्लिकल

[03:21:03] फिस्कल पॉलिसी अडॉप्ट कर रही है। आई रिपीट

[03:21:06] अगर सरकार काउंटर साइक्लिकल फिस्कल पॉलिसी

[03:21:08] अडॉप्ट कर रही है तो रिसेशन के टाइम सरकार

[03:21:12] क्या करेगी?

[03:21:14] अगर सरकार काउंटर साइक्लिकल फिसल पॉलिसी

[03:21:18] अडॉप्ट कर रही है तो रिसेशन के समय सरकार

[03:21:20] क्या करेगी?

[03:21:29] सर देखो आपने कहा रिसेशन का समय है। हां

[03:21:32] मतलब यह वाला टाइम चल रहा है कहीं ना

[03:21:34] कहीं। हां ठीक है। यहां साइकिल के अगेंस्ट

[03:21:38] चलना है। साइकिल के अगेंस्ट चलना है। मतलब

[03:21:41] ये रिसेशन जो हो रखा था इसको थोड़ा सा हम

[03:21:43] इसको रोकेंगे। इसके अगेंस्ट काम करेंगे

[03:21:45] ना। रिसेशन को रोकना है। तो कैसे रोकेंगे

[03:21:48] रिसेशन को? सर जब खर्चा बढ़ाएंगे और

[03:21:50] टैक्सेस कम करेंगे। तो इसमें भी वही बात

[03:21:53] आएगी। अरे काउंटर साइक्लिकल था यहां तो

[03:21:56] खर्चा बढ़ाएंगे और टैक्सेस कम करेंगे। यस

[03:21:58] क्योंकि ये काउंटर साइक्लिकल की बात कर

[03:22:00] रहा हूं। तो आपको ध्यान रखना है वो प्रो

[03:22:02] साइक्लिकल कह रहा है या काउंटर साइक्लिकल।

[03:22:04] अब इधर आएंगे एक बार। इधर आएंगे इस वाले

[03:22:06] लाइन को पढ़ेंगे एक बार। ठीक है? ये बहुत

[03:22:08] सारे लोगों को समझ नहीं आता कि क्या लिखा

[03:22:10] हुआ है, कैसे करना है। भाई इसके ऊपर

[03:22:11] इकोनॉमिक सर्वे ने एक चैप्टर दिया हुआ है।

[03:22:13] ठीक है ना? तो इनको समझना जरूरी है आपको।

[03:22:16] इनको समझना जरूरी है। देखो पहले देखो अगर

[03:22:19] हम प्रोसाइक्लिकल की बात करते हैं तो

[03:22:21] प्रोसाइक्लिकल में क्या होगा?

[03:22:24] सॉरी प्रोसाइक्लिकल में क्या होगा सर?

[03:22:27] जैसा साइकिल चल रहा है उसी के डायरेक्शन

[03:22:29] में चलना है। अगर अगर अच्छा समय चल रहा

[03:22:32] है, अच्छा समय मतलब ग्रोथ वाला टाइम चल

[03:22:34] रहा है। उस टाइम आप एक्सपेंशन करेंगे ताकि

[03:22:36] साइकिल बड़ा हो। पर अगर खराब समय चल रहा

[03:22:39] है तो उस समय क्या करेंगे? कॉन्ट्रक्शन

[03:22:41] करेंगे ताकि साइकिल बड़ा हो। समझे मेरी

[03:22:45] बात को? दूसरा केस समझो। मान लो अगर हम

[03:22:48] काउंटर साइक्लिकल फिस्कल पॉलिसी की बात कर

[03:22:50] रहे हैं। यहां साइकिल के हम अगेंस्ट चल

[03:22:52] रहे हैं। साइकिल के अगेंस्ट चलने का मतलब

[03:22:54] अगर अच्छा समय चल रहा है ना तो भाई उसको

[03:22:56] अच्छा होने से रोकना है तो वहां पर

[03:22:58] कंट्रक्शन करनी पड़ेगी। पर अगर आपका बुरा

[03:23:01] समय चल रहा है। बुरा समय चल रहा है मतलब

[03:23:03] रिसेशन वाला समय उस टाइम आप एक्सपेंशन

[03:23:05] करोगे। ठीक है? तो वहां पे एक्सपेंशनरी

[03:23:07] फिसिकल पॉलिसी होगी। अब पॉइंट आता है कि

[03:23:09] यार ज्यादा अच्छी चीज आपके हिसाब से क्या

[03:23:11] लग रही है? कंट्रक्शनरी या एक्सपेंशनरी

[03:23:13] आपको क्या लग रहा है? सॉरी नॉट कंट्रक्शन

[03:23:14] नहीं सॉरी प्रोसाइक्लिकल अच्छी पॉलिसी लग

[03:23:16] रही है या आपको काउंटर साइक्लिकल अच्छी लग

[03:23:19] रही है? आपके हिसाब से क्या अच्छा है?

[03:23:21] प्रोसाइक्लिकल या काउंटर साइक्लिकल?

[03:23:24] व्हाट डू यू थिंक व्हिच इज़ बेटर?

[03:23:26] प्रोसाइक्लिकल या काउंटर साइक्लिकल?

[03:23:36] इसका आंसर है काउंटर साइक्लिकल। इसका आंसर

[03:23:39] है काउंटर साइक्लिकल। देखो इकोनॉमिक सर्वे

[03:23:41] ने क्लियरली यह बात बोली है कि हमें

[03:23:44] काउंटर साइक्लिकल फिस्कल पॉलिसी अडॉप्ट

[03:23:46] करनी चाहिए। क्यों? क्योंकि देखो अगर हम

[03:23:48] प्रोप साइक्लिकल कर रहे हैं ना तो गड़बड़

[03:23:50] है। जब मुश्किल परिस्थिति आएंगी जब

[03:23:53] मुश्किल परिस्थिति आएंगी तो यार उसको और

[03:23:56] मुश्किल थोड़ी करना है। उस मुश्किल को कम

[03:23:58] करना है। ठीक है ना? तो जैसे मान लो अगर

[03:24:00] हमारे सामने रिसेशन का समय आ रखा है ना ये

[03:24:02] वाला समय तो भाई रिसेशन को रोकने की कोशिश

[03:24:05] करनी है। उसके अगेंस्ट काम करना है। हां

[03:24:06] तो ये काम करेंगे। और जब हम यहां पे

[03:24:10] एक्सपेंशन चल रही है ना उसको और मत बढ़ाओ

[03:24:13] क्योंकि ऐसा ना हो कि बहुत ज्यादा

[03:24:15] इनफ्लेशन हो जाए तो उस केस में आप थोड़ा

[03:24:17] सा उसको टोन डाउन कर सकते हो। तो ये

[03:24:20] क्लियर बात यहां पे इकोनॉमिक सर्वे ने

[03:24:22] लिखी हुई है कि हमें यहां पे काउंटर

[03:24:24] साइक्लिकल फिसल पॉलिसी हमें अडॉप्ट करनी

[03:24:26] चाहिए। समझे मेरी बात को? क्या ये बात

[03:24:29] क्लियर है?

[03:24:31] यस।

[03:24:34] चलिए सर यह बात हमें समझ आ चुकी है कि

[03:24:36] काउंटर साइक्लिकल क्या होता है और आपके

[03:24:38] बाकी चीजें क्या होती है। हां फिस्कल

[03:24:40] पॉलिसी में एक टॉपिक और है वो है आपका

[03:24:43] एफआरबीएम एक्ट का। देखो मैंने अभी आपको

[03:24:46] थोड़ी देर पहले बताया भी था। क्या बताया

[03:24:48] था सर? मैंने आपको थोड़ी देर पहले आपको

[03:24:50] ब्रेक पे जाने से पहले बताया था कि हमें

[03:24:52] हमारे अपने डेफिसिट को कंट्रोल में रखना

[03:24:54] है। पॉइंट आता है कौन कहता है हमें अपने

[03:24:57] डेफिसिट को कंट्रोल में रखना है? आंसर इज़

[03:24:59] ये एक स्टचटरी प्रोविजन है। हमने 2003 में

[03:25:03] एक एक्ट लेकर आए एफआरबीएम एक्ट फिस्कल

[03:25:06] रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट एक्ट।

[03:25:09] अब इसमें एक्ट में पता है क्या बोला गया?

[03:25:11] इस एक्ट में दो बातें आपको ध्यान रखनी है।

[03:25:13] कौन सी दो बातें? जब ये 2003 में आया ना

[03:25:16] इसने बात करी फिस्सल कंसोलिडेशन की। मैंने

[03:25:18] अभी आपको फिस्कल कंसोलिडेशन का मतलब बताया

[03:25:20] कि हमें अपने घाटे को कंट्रोल में रखना

[03:25:22] है। यही था ना फिसिकल कंसोलिडेशन कि खर्चा

[03:25:25] कम करो, अपनी कमाई बढ़ाओ। अब पॉइंट आता है

[03:25:28] कि इन्होंने कुछ टारगेट दिए थे क्या? हां

[03:25:30] बिल्कुल। उस टाइम इन्होंने 2003 में कुछ

[03:25:32] टारगेट लिए थे। क्या थे टारगेट? टारगेट ये

[03:25:34] था कि हम अपने फिस्कल डेफिसिट को 3% ऑफ

[03:25:38] जीडीपी रखेंगे। मतलब यहां तक ले आएंगे और

[03:25:41] हमारा रेवेन्यू डेफिसिट को एलिमिनेट कर

[03:25:43] देंगे। इसके ऊपर क्वेश्चन ऑलरेडी आ चुका

[03:25:46] है। यूपीएससी ने पूछा था कि रेवेन्यू

[03:25:48] डेफिसिट को हम 3% करेंगे और फिस्कल

[03:25:50] डेफिसिट लिमिट करेंगे। ना फिस्कल डेफिसिट

[03:25:52] 3% तक रखना है। रेवेन्यू डेफिट हमें खत्म

[03:25:54] करना था। आर डी आर डी रेवेन्यू डेफिसिट

[03:25:57] हमें खत्म करना था। ज़ीरो करना था और

[03:25:59] फिसलिक डेफिसिट 3% पर हम लोग ये नहीं कर

[03:26:02] पाए। कोई बात नहीं कोई बात नहीं। फिर क्या

[03:26:04] हुआ? फिर एफआरबीएम 2.0 आया। क्या आया? फिर

[03:26:08] एफआरबीएम टू सॉरी पहले एफआरबीएम ही पूरा

[03:26:10] एक्सप्लेन करने दो। इसमें ना और कुछ बातें

[03:26:12] भी हुई। एफआरबीएम में ये भी बोला गया कि

[03:26:15] सरकार को अपने जो खर्चे हैं ना उनको

[03:26:18] दिखाना पड़ेगा कि कहां-कहां खर्च कर रहे

[03:26:20] हैं। क्या सही खर्चा कर रहे हैं। फालतू

[03:26:22] खर्चा तो नहीं कर रहे। इसके लिए यहां पर

[03:26:24] सरकार को कुछ स्टेटमेंट्स पेश करनी है। ये

[03:26:26] बजट के अंदर बजट के साथ में ही हमारी

[03:26:29] फाइनेंस मिनिस्टर जो हैं उनको पेश करती

[03:26:31] हैं। ये क्वेश्चन 2020 में आया था

[03:26:33] यूपीएससी में। तो कौन सी स्टेटमेंट्स हैं

[03:26:35] ये? जैसे मीडियम टर्म फिस्कल पॉलिसी

[03:26:37] स्टेटमेंट, फिस्कल पॉलिसी स्ट्रेटजी

[03:26:39] स्टेटमेंट, मैइकोनमिक फ्रेमवर्क

[03:26:41] स्टेटमेंट। यह तीन स्टेटमेंट्स ऐसी हैं जो

[03:26:44] एफआरबीएम बोलता है कि सरकार को पेश करनी

[03:26:46] होंगी इन ऑर्डर टू शो कि उनके खर्चे सही

[03:26:48] जगह खर्च हो भी रहे हैं या नहीं हो रहे।

[03:26:51] राइट? तो ये है आपका एफआरबीएम एक्ट। ठीक

[03:26:55] है? इसने क्या बोला? फिसिकल डेफिसिट 3% ऑफ

[03:26:58] जीडीपी रखो। रेवेन्यू डेफिसिट खत्म कर दो

[03:27:00] और साथ ही साथ ये जो स्टेटमेंट्स है आप ये

[03:27:01] भी जारी करो। ठीक है? ओके। ओके। ओके। पर

[03:27:05] ये हम टारगेट अचीव नहीं कर पाए। क्योंकि

[03:27:08] दोस्तों बीच में आपका रिसेशन आ गया और

[03:27:11] समस्याएं आ गई। अब जब जब 2007 का रिसेशन

[03:27:14] आने लग गया तो कहीं ना कहीं हमें वहां पे

[03:27:15] अपने खर्चे को बढ़ाना पड़ा। है ना? यूएस

[03:27:17] में रिसेशन आ गया था तो हमें अपने खर्चे

[03:27:19] को बढ़ाना पड़ा। तो उस चक्कर में हम इन

[03:27:20] टारगेट को अचीव नहीं कर पाए। उसके बाद

[03:27:23] क्या आता है? 2012 में हम एफआरबीएम में

[03:27:26] संशोधन करते हैं। वी ब्रिंग व्हाट?

[03:27:28] एफआरबीएम 2.0। एफआरबीएम 2.0 में क्या होता

[03:27:31] है? यहां पर हम बोलते हैं कि देखो यार

[03:27:33] मैंने आपको समझाया था एक था रेवेन्यू

[03:27:35] डेफिसिट। वो था रेवेन्यू एक्सपेंडिचर

[03:27:37] माइनस रेवेन्यू रिसीप्ट और मैंने आपको

[03:27:39] समझाया था ईआरडी इफेक्टिव रेवेन्यू

[03:27:41] डेफिसिट वो क्या था रेवेन्यू डेफिसिट

[03:27:44] माइनस लिखो आप लोग क्या माइनस माइनस था

[03:27:47] ग्रांट्स टू स्टेट्स फॉर द क्रिएशन ऑफ

[03:27:49] कैपिटल एसेट मैंने तब भी आपको वहां पे

[03:27:51] समझाया था कि सेंट्रल गवर्नमेंट बोलती है

[03:27:53] कि भाई यार जो ग्रांट्स हम स्टेट्स को दे

[03:27:54] रहे हैं फॉर क्रिएशन ऑफ कैपिटल एसेट ये

[03:27:56] खराब खर्चा नहीं है ये खराब खर्चा नहीं है

[03:27:59] तो इसको आप क्यों इंक्लूड कर रहे हो इसको

[03:28:01] हटाओ तो हमने एक कॉम्पोनेंट बना दिया

[03:28:03] ईआरडी इफेक्टिव रेवेन्यू डेफिसिट तो यहां

[03:28:06] एफआरबीएम 2.0 ने बोला हमें आर डी ज़ीरो

[03:28:08] नहीं करना। आरडी में तो वो भी आ गया

[03:28:11] ग्रांट्स टू स्टेट फॉर कैपिटल एसेट। उसको

[03:28:13] हटा कर बताओ। तो यहां पर हमने बोला कि

[03:28:16] हमें ईआरडी ज़ीरो करना है। तो एफआरबीएम 2.0

[03:28:19] ने क्या बोला कि भाई ईआरडी ज़ीरो करो।

[03:28:21] मैंने आपको दिखाया जब आपको डाटा दिखाया

[03:28:23] था। ईआरडी आज के समय 0.6% ऑफ़ जीडीपी है।

[03:28:26] अभी भी ज़ीरो नहीं हुआ। 2026 में पहुंच गए

[03:28:29] हैं। अभी भी वो ज़ीरो नहीं हुआ। ठीक है?

[03:28:31] सोच हम 2030 साल से रहे हैं। पर अभी भी हम

[03:28:33] ज़ीरो तक नहीं पहुंच पाए। बट एनीवेज और

[03:28:35] साथ-साथ इसने ये भी बोला कि आपको ये

[03:28:37] मीडियम टर्म एक्सपेंडिचर स्टेटमेंट आपको

[03:28:39] ये भी यहां पे देनी होंगी। तो ये एफआरबीएम

[03:28:42] अमेंडमेंट आपको यहां पे देखने को मिलता

[03:28:44] है। ठीक है? ठीक है। ठीक है। ओके ओके ओके

[03:28:46] ओके ठीक है। गुड गुड गुड। ये बात भी समझ

[03:28:49] आई। ठीक है। अच्छा एक यहां पे एफआरबीएम को

[03:28:52] रिव्यू करने के लिए भी कमेटी आई जिसको हम

[03:28:55] लोग एफआरबीएम रिव्य्यू कमेटी बोलते हैं।

[03:28:57] अब यहां पे आप नोटिस कर पाओगे। इन्होंने

[03:28:59] ये बोला कि यार देखो पहली बात तो आप लोग

[03:29:02] मुझे बताओ। मुझे बताना फिस्कल डेफिसिट

[03:29:06] और डेप्ट क्या यह दोनों सेम बात है या गलत

[03:29:10] है या अलग-अलग है? आप मुझे बताना फिस्कल

[03:29:15] डेफिसिट और आपका

[03:29:18] डेप्ट क्या ये दोनों सेम बात है या

[03:29:20] अलग-अलग हैं?

[03:29:27] देखो रोहित कह रहे हैं व्हिच इज़ ऑलरेडी3%?

[03:29:29] नो रोहित मेरी बात समझो। ईआरडी आज के समय

[03:29:33] 0.6% ही है। सरकार उम्मीद लगा के बैठी है

[03:29:36] कि अगले साल 3 हो जाएगा। 03 हुआ नहीं है।

[03:29:39] सरकार की उम्मीद है। ठीक है? उम्मीद के

[03:29:42] सहारे तो देखो दुनिया चल रही है। हमारी

[03:29:44] फाइनेंस मिनिस्टर भी चल रही है। तो ठीक

[03:29:46] है। अगर आप भी उम्मीद के सहारे चलना चाहते

[03:29:47] हो तो आप भी चलो। बट अभी 6% है। सरकार की

[03:29:51] उम्मीद है कि 0.3% होगा वो। ठीक है ना?

[03:29:54] हां।

[03:29:56] तो यहां पे आप नोटिस करेंगे। यहां पे आप

[03:29:58] नोटिस करेंगे कि फिस्कल डेफिसिट और डेप्ट

[03:30:00] सेम बात नहीं होती। फिस्कल डेफिसिट होता

[03:30:02] है मेरी इस साल के कितना मुझे उधार लेना

[03:30:04] है। व्हाट इज़ माय बोरोइंग फॉर द करंट ईयर?

[03:30:06] इस साल मुझे कितना उधार लेना पड़ रहा है?

[03:30:08] दैट इज़ फिस्सल डेफिसिट। डेप्ट क्या होता

[03:30:10] है? मेरा टोटल उधार कितना है? भाई देखो

[03:30:13] मुझे इस साल चलाने के लिए मुझे ₹100 उधार

[03:30:15] लेना है। ठीक है? ये मेरा फिसिकल डेफिसिट

[03:30:17] है। पर मैंने पिछले साल, उससे पिछले साल,

[03:30:19] उसने पिछले साल, उससे पिछले साल भी तो कुछ

[03:30:20] ना कुछ उधार लिया होगा। वो डेप्ट में

[03:30:22] काउंट होता है। दैट इज़ डेप्ट। तो दोनों

[03:30:24] बातें अलग-अलग हैं। दोनों बातें सेम नहीं

[03:30:26] है। इस बात को आप यहां पे समझना जरा। ठीक

[03:30:28] है? ठीक है। ठीक है। हां हां हां बिल्कुल

[03:30:31] गुड गुड गुड गुड। ठीक है। तो यहां पर एन

[03:30:33] के सिंह ने बोला कि आप ना सिर्फ फिसल

[03:30:36] डेफिसिट पे फोकस मत करो। आप कहीं ना कहीं

[03:30:39] आप ओवरऑल डेप्ट के ऊपर भी फोकस करो कि ठीक

[03:30:42] है यार इस साल तो आप इतना उधार लोगे। दैट

[03:30:44] इज़ फाइन। पर ऐसा ना हो कि आपके ऊपर ओवरऑल

[03:30:48] जो उधार है वो बहुत ज्यादा बढ़ता रहे। तो

[03:30:50] इन्होंने एक लिमिट दी कि सेंटर डेप्ट टू

[03:30:52] जीडीपी रेशियो 40% होनी चाहिए। स्टेट

[03:30:53] गवर्नमेंट डेप्ट टू जीडीपी रेशियो आपका

[03:30:55] 20% होना चाहिए। इसके ऊपर भी यूपीएससी

[03:30:57] सवाल पूछ चुकी है। आपने देखा 2019 का शायद

[03:31:00] क्वेश्चन था। क्या पूछा था यूपीएससी ने?

[03:31:02] उसने डेटा को इंटरचेंज कर दिया। उसने

[03:31:04] स्टेट के लिए 40 कर दिया और सेंटर के लिए

[03:31:06] 20 कर दिया। नहीं सेंटर के लिए 40, स्टेट

[03:31:08] के लिए 20%। और साथ ही साथ इन्होंने ये भी

[03:31:11] बोला। साथ ही साथ इन्होंने ये भी बोला कि

[03:31:14] अगर हम बात करें तो हमारे पास एक एस्केप

[03:31:16] क्लॉज़ भी होना चाहिए। एस्केप लॉस का मतलब

[03:31:18] एस्केप लॉस का मतलब देखो यार कई बार ना

[03:31:21] मुश्किल परिस्थितियां आ जाती हैं। मतलब

[03:31:23] कुछ एग्रीकल्चर खत्म हो गया हमारा कोलैप्स

[03:31:26] हो गया। कोई नेशनल सिक्योरिटी कोई युद्ध

[03:31:28] चल गया। जब युद्ध चल रहा है या एग्रीकल्चर

[03:31:30] ध्वस्त हो चुका है। कोई समस्या आ चुकी है।

[03:31:32] नेशनल सिक्योरिटी की बात आ चुकी है। फिर

[03:31:34] ये मत देखो कि फिसिकल डेफिसिट बढ़ गया।

[03:31:36] फिसलिक डेफिसिट ये हो गया। फिर आप खर्चा

[03:31:37] करो। इसको इन्होंने क्या बोला? दे कॉल्ड

[03:31:39] इट एज द एस्केप क्लॉज़। दे कॉल्ड इट एज द

[03:31:43] एस्केप क्लॉज़।

[03:31:45] क्या ये बात आप लोग समझ पाए? ये आपका

[03:31:47] एफआरबीएम की बात थी। तो हमें ना अपने

[03:31:49] फाइनेंससेस को सही ढंग से मैनेज करना है।

[03:31:51] दैट इज द होल पॉइंट। हमें यहां पे फिसिकल

[03:31:53] कंसोलिडेशन की तरफ बढ़ना है। हमारा वो पाथ

[03:31:55] होना चाहिए फिसिकल कंसोलिडेशन का। ये यहां

[03:31:57] पे हमें यहां पे देखने को मिलता है।

[03:32:00] क्लियर है ये बात?

[03:32:05] ठीक है? मुझे पता है कई बच्चे ऐसे होंगे

[03:32:06] जिन्होंने मेरे से पढ़ा नहीं होगा। उनको हर

[03:32:08] एक चीज नहीं लग रही होगी। पर देखो पॉइंट

[03:32:10] मैंने आपको बताया एफआरबीएम के ऊपर ही तीन

[03:32:12] या चार बार क्वेश्चन आ चुका है। तो मुझे

[03:32:14] पढ़ाना पड़ेगा भाई। कई बच्चों ने मुझे पता

[03:32:16] है कि कई बच्चों ने पहले कभी नहीं पढ़ी

[03:32:18] इकॉनमी या कहीं से पढ़ी है तो उन्होंने

[03:32:20] ऊपर ऊपर से पढ़ रखी है। उन्होंने शायद ये

[03:32:21] नाम भी नहीं सुना कईयों ने। बट देखो यार

[03:32:23] ये चीजें आती है एग्जाम के अंदर तो हमें

[03:32:25] पढ़ना जरूरी है ये। ठीक है? ट्रेंड्स में

[03:32:27] कितनी बार क्वेश्चन आ गया है। बहुत बार

[03:32:29] क्वेश्चन आ चुका है ट्रेंड्स के ऊपर।

[03:32:31] चलो इसके अलावा चलो और कुछ चीजें हैं ये

[03:32:34] जो टैक्स बेस होता है कि किस-किस चीज के

[03:32:35] ऊपर आपका टैक्स लग रहा है। आपकी जो भी

[03:32:37] वस्तुएं, सर्विज या इंडिविजुअल जिनके ऊपर

[03:32:39] टैक्स लग रहा है वो टैक्स बेस उनको कहलाते

[03:32:41] हैं।

[03:32:43] ठीक है? हां। दो टर्म्स आपको यहां पे

[03:32:46] सीखनी है। दो टर्म्स आपको यहां पे सीखनी

[03:32:48] है। एक है पहला टर्म आपका टैक्स बॉयसी।

[03:32:52] क्या मीनिंग होता है टैक्स बेंसी का? क्या

[03:32:55] मीनिंग होता है टैक्स बेंसी का? टैक्स

[03:32:57] बेंसी का मीनिंग होता है यहां पर चेंज इन

[03:32:59] टैक्स रेवेन्यू एज कंपेयर टू चेंज इन

[03:33:01] जीडीपी। क्या है टैक्स बेंसी का मतलब?

[03:33:04] चेंज इन टैक्स रेवेन्यू एज कंपेयर टू चेंज

[03:33:07] इन जीडीपी। हमारे फाइनेंस मिनिस्टर ने इस

[03:33:10] बार के बजट में टैक्स बेंसी की बात करी

[03:33:12] है। अगर आपने ढंग से बजट स्पीच सुनी हो।

[03:33:14] ठीक है? इकोनॉमिक सर्वे में टैक्स बेंसी

[03:33:16] का कई बार जिक्र आया है। क्या बात है

[03:33:18] टैक्स बेंसी की? टैक्स बेंसी बोलता है

[03:33:20] चेंज इन टैक्स रेवेन्यू एज़ कंपेयर टू चेंज

[03:33:22] इन जीडीपी। जीडीपी चेंज होने के साथ टैक्स

[03:33:25] रेवेन्यू कितना चेंज हुआ? वो होता है

[03:33:27] टैक्स डोंसी। अब किसी बच्चे के दिमाग में

[03:33:29] सवाल आना चाहिए कि सर क्या जीडीपी बदलने

[03:33:32] से टैक्स रेवेन्यू बदलना चाहिए? क्यों

[03:33:34] नहीं बदलना चाहिए भाई? बिल्कुल बदलना

[03:33:36] चाहिए। सुनो मेरी बात। कैसे बदलना चाहिए?

[03:33:38] देखो जीडीपी होता क्या है? व्हाट

[03:33:40] एग्जैक्टली इज़ जीडीपी? सर, जीडीपी होता है

[03:33:43] सम टोटल ऑफ़ ऑल फाइनल गुड्स एंड सर्विसेस

[03:33:46] प्रोड्यूस द डोमेस्टिक टेरिटरी ऑफ़ इकॉनमी

[03:33:48] इन अ पर्टिकुलर टाइम पीरियड। बेसिकली कोई

[03:33:50] वस्तु और या सर्विज जो बनी देश की

[03:33:52] अर्थव्यवस्था के अंदर उनका टोटल है। उनके

[03:33:54] फाइनल गुड्स का टोटल है। हां। अगर कोई

[03:33:57] वस्तु बनी है मतलब कहीं ना कहीं किसी के

[03:33:59] पास उसकी इनकम गई होगी। हां। इनकम गई होगी

[03:34:02] तो उसने टैक्स पे किया होगा। हां। तो

[03:34:05] टैक्स रेवेन्यू बढ़ेगा नहीं बढ़ेगा?

[03:34:06] बिल्कुल बढ़ेगा। और दूसरी बात जब उस वस्तु

[03:34:10] को बनी तो उसके ऊपर जीएसटी नहीं लगा। हां

[03:34:12] बिल्कुल लगा। तो एक्चुअली पता है पॉइंट

[03:34:14] क्या है? जब हम बात करते हैं ना जीडीपी

[03:34:17] बढ़ने के साथ टैक्स रेवेन्यू बिल्कुल

[03:34:19] बढ़ना चाहिए। दोनों तरह से बढ़ना चाहिए।

[03:34:21] डायरेक्ट टैक्स के थ्रू भी, इनडायरेक्ट

[03:34:22] टैक्स के थ्रू भी। सो दैट इज व्हाई जीडीपी

[03:34:24] का चेंज आपका टैक्स रेवेन्यू में

[03:34:25] डिफ्लेक्ट होना चाहिए। कोशिश तो ये होनी

[03:34:29] चाहिए कम से कम अगर ये 1% बढ़े ना तो भाई

[03:34:32] हमारा टैक्स रेवेन्यू कम से कम 1% तो

[03:34:33] बढ़ना चाहिए। पर अगर यह नहीं बढ़ रहा ना

[03:34:36] इसका मतलब पता है क्या है? कि देश की

[03:34:38] जीडीपी तो बढ़ रही है 7% 8% पर सरकार के

[03:34:41] पास कोई टैक्स नहीं आ रहा। सरकार से टैक्स

[03:34:43] नहीं आएगा तो जीडीपी चाहे कहीं भी बढ़ती

[03:34:45] रहे। क्या फायदा उस चीज का? सरकार को पैसा

[03:34:48] तो चाहिए ना भाई। जीडीपी का आंकड़ा देकर

[03:34:50] क्या कर लेंगे? अगर सरकार के पास टैक्स ही

[03:34:52] नहीं आ रहा। कैसे खर्चा करेंगे जब टैक्स

[03:34:53] ही नहीं आ रहा। ठीक है? तो वो आंकड़ा हमें

[03:34:56] कितना बढ़ा टैक्स वो कैसे पता लगता है? वो

[03:34:58] टैक्स बेंसी से पता लगता है। ठीक है ना?

[03:35:00] तो टैक्स बेंसी क्या बताती है? इट इज़ द

[03:35:02] रिस्पोंसिवनेस ऑफ़ टैक्स रेवेन्यू दैट ऑफ़

[03:35:04] जीडीपी। जीडीपी चेंज होने से टैक्स

[03:35:06] रेवेन्यू कितना चेंज हुआ?

[03:35:08] ठीक है? ठीक है। ठीक है। ओके ओके ओके।

[03:35:10] दूसरी बात आप देखो। दूसरी बात आप देखो।

[03:35:12] दूसरी बात है टैक्स इलास्टिसिटी। टैक्स

[03:35:15] इलास्टिसिटी क्या बोलता है? इट इज़ द चेंज

[03:35:17] इन टैक्स रेवेन्यू एज़ कंपेयर टू चेंज इन

[03:35:18] टैक्स रेट। रेट चेंज होने से टैक्स रेट के

[03:35:22] बदलाव से टैक्स रेवेन्यू में क्या चेंज

[03:35:24] आया? रेट चेंज करने से क्या रेवेन्यू चेंज

[03:35:26] होना चाहिए? बिल्कुल चेंज होना चाहिए। भाई

[03:35:29] देखो यार सुनो मेरी बात। अगर सरकार जैसे

[03:35:31] किसी चीज़ के ऊपर पहले 15% टैक्स लगाती थी।

[03:35:34] अब उसने मान लो 25% कर दिया। क्या सरकार

[03:35:36] का रेवेन्यू बढ़ना नहीं चाहिए? डेफिनेटली

[03:35:38] चेंज तो होना ही चाहिए। तो वो कितना चेंज

[03:35:41] आया? उसको हम बोलते हैं क्या? वी कॉल इट

[03:35:43] एज द टैक्स इलासिटी। व्हाट इज द चेंज इन

[03:35:46] टैक्स रेवेन्यू एज कंपेयर टू चेंज इन

[03:35:48] टैक्स रेट?

[03:35:50] क्या ये बात सही है? अब क्वेश्चन यहां पे

[03:35:52] ये आता है कि सर क्या

[03:35:55] टैक्स रेट बढ़ने से हमेशा टैक्स रेवेन्यू

[03:35:57] बढ़ेगा? आप बताओ मुझे जरा। टैक्स रेट

[03:36:00] बढ़ने से क्या हमेशा टैक्स रेवेन्यू बढ़ता

[03:36:02] है?

[03:36:05] हम

[03:36:07] क्या हमेशा टैक्स रेट बढ़ने से टैक्स

[03:36:09] रेवेन्यू बढ़ता है? आंसर इज नो। आंसर इज़

[03:36:13] नो। ऐसा क्यों सर? देखो मेरी बात ध्यान से

[03:36:16] सुनना। होता पता है क्या है? जब आप किसी

[03:36:19] किसी चीज के ऊपर मान लो आपने कुछ भी टैक्स

[03:36:22] नहीं लगाया। अगर आपने उसके ऊपर 0% टैक्स

[03:36:24] लगाया। अगर आपने किसी चीज़ पे 0% टैक्स

[03:36:26] लगाया तो आपके पास रेवेन्यू ज़ीरो आएगा।

[03:36:28] सरकार के पास कुछ भी कमाई नहीं होगी। अगर

[03:36:30] सरकार ने 10% टैक्स लगा दिया तो थोड़ा

[03:36:32] सरकार के पास रेवेन्यू आएगा। 20% लगा दिया

[03:36:34] थोड़ा और आएगा। 30% लगा दिया थोड़ा और

[03:36:36] बढ़ेगा। पर अगर मान लो सरकार 70% 80% 90%

[03:36:40] टैक्स लगाए तो भाई मैं फिर काम ही करना

[03:36:44] बंद कर दूंगा। मैं बोलूंगा कि भाई अब सारा

[03:36:46] पैसा मुझे निर्मला सीतारमण जी को ही देना

[03:36:48] है। तो मैं काम करके क्यों कर रहा हूं?

[03:36:50] व्हाई आई एम डूइंग द वर्क? मैं इसलिए

[03:36:52] थोड़ी काम कर रहा हूं कि उनके लिए मैं

[03:36:53] टैक्स देता रहूं। तो जब टैक्स रेट बहुत

[03:36:56] ज्यादा होने लग जाता है ना तो लोग जो होते

[03:36:58] हैं वो टैक्स की चोरी करना शुरू कर देते

[03:37:00] हैं। या तो टैक्स की चोरी करने लग जाते

[03:37:01] हैं या फिर या फिर क्या करते हैं? या फिर

[03:37:04] वो काम करना बंद कर देते हैं। तो जब लोग

[03:37:07] काम नहीं करेंगे, कुछ खरीदेंगे नहीं और

[03:37:09] टैक्स की चोरी करेंगे तो सरकार का

[03:37:11] रेवेन्यू कम ही होगा। तो एक्चुअली पता है

[03:37:13] क्या होता है? शुरुआत में टैक्स रेट बढ़ने

[03:37:16] से टैक्स रेवेन्यू बढ़ता है। पर एक पॉइंट

[03:37:18] के बाद टैक्स रेट बढ़ने से आपका रेवेन्यू

[03:37:21] जो है वो कम होने लग जाता है। और ये बात

[03:37:23] मैं नहीं कह रहा। ये लेफर बोल रहे हैं। और

[03:37:25] इसलिए इसको बोलते हैं रेफर कर। टैक्स

[03:37:27] रेवेन्यू इनिशियली इंक्रीसेस बट इट

[03:37:30] स्टार्ट्स टू डिक्लाइन वंस द टैक्स रेट

[03:37:32] क्रॉस द थ्रेशहोल्ड। एक सर्टेन लेवल के

[03:37:34] ऊपर जाएगा तो फिर टैक्स रेवेन्यू आपका कम

[03:37:36] होने लग जाएगा। यह होता है आपका टैक्स

[03:37:39] इलास्टिसिटी का कांसेप्ट।

[03:37:46] क्लियर है ये बात? इज इट फाइन?

[03:37:51] ठीक है? बाकी इसके अलावा तो आपको पता ही

[03:37:52] होगा। जैसे एक होता है प्रोग्रेसिव

[03:37:54] टैक्सेशन। प्रोग्रेसिव टैक्सेशन का मीनिंग

[03:37:56] क्या होता है? जैसे-जैसे आपकी इनकम बढ़ेगी,

[03:38:00] वैसे-वैसे आपके ऊपर ज्यादा परसेंटेज टैक्स

[03:38:02] रेट लगेगा। अगर आपकी इनकम काफी कम है,

[03:38:05] आपके ऊपर कम परसेंटेज टैक्स। आपकी इनकम बढ़

[03:38:08] गई, तो आपके ऊपर ज्यादा परसेंटेज टैक्स।

[03:38:09] आपकी इनकम बहुत बढ़ गई। आपके ऊपर बहुत

[03:38:11] ज्यादा परसेंटेज टैक्स। तो जैसे-जैसे इनकम

[03:38:14] बढ़ती है, वैसे-वैसे उसके ऊपर ज्यादा

[03:38:16] परसेंटेज टैक्स लगता है। इसको बोलते हैं

[03:38:18] हम प्रोग्रेसिव टैक्स। ठीक है? क्या ये एक

[03:38:21] अच्छी बात है? बिल्कुल अच्छी बात है।

[03:38:23] क्योंकि देखो जो अमीर होते हैं ना उनके

[03:38:26] ऊपर ज्यादा परसेंटेज टैक्स लगना ही चाहिए।

[03:38:28] उनके ऊपर ज्यादा परसेंटेज टैक्स लगना ही

[03:38:30] चाहिए। ठीक है? तो इससे पता है क्या होता

[03:38:33] है? इससे आपकी इनकम इनकलिटी कम होती है।

[03:38:36] अमीरों पे ज्यादा टैक्स, गरीबों पे कम

[03:38:38] टैक्स। इससे आपकी इनकम इनकलिटी यहां पे कम

[03:38:41] होती है। भारत का जो इनकम टैक्स का सिस्टम

[03:38:43] है, वह दरअसल में प्रोग्रेसिव टैक्स ही

[03:38:45] है। ठीक है? ये एग्जांपल है। ये एग्जांपल

[03:38:48] है। डोंट टेक दिस एज अ राइट थिंग। ये तो

[03:38:50] एग्जांपल मैं आपको दे रहा हूं।

[03:38:53] फिर एक होता है प्रपोर्शनल टैक्स। आपकी

[03:38:55] इनकम जितनी मर्जी हो। आपके ऊपर सेम

[03:38:58] प्रपोर्शन टैक्स लगेगा। एक बंदे की इनकम 1

[03:39:00] लाख है। उसके ऊपर 10%ेज टैक्स। एक बंदे की

[03:39:03] इनकम आपकी

[03:39:07] एक बंदे की इनकम मान लो 10 लाख है उसके

[03:39:09] ऊपर भी 10% टैक्स एक बंदे की इनकम 1 करोड़

[03:39:11] है उसके ऊपर भी 10 10% टैक्स इसको बोलते

[03:39:14] हैं फ्लैट रेट एक फ्लैट रेट आपके ऊपर होगा

[03:39:17] इररेिस्पेक्टिव ऑफ योर इनकम फ्लैट रेट

[03:39:19] लगेगा नहीं तीसरा पॉइंट है यहां पे आपका

[03:39:22] रिग्रेसिव टैक्स रिग्रेसिव टैक्स क्या

[03:39:25] होता है इनकम बढ़ने के साथ-साथ कम परसेंटेज

[03:39:29] टैक्स लगना इनकम बढ़ने के साथ-साथ कम कम

[03:39:32] परसेंटेज टैक्स लगना उसको हम बोलते हैं

[03:39:34] रिग्रेसिव टैक्स। उसको हम बोलते हैं

[03:39:37] रिग्रेसिव टैक्स। हां हां मुद्दा मैं

[03:39:39] पढ़ाऊंगा आपको पावर्टी ना अनइंप्लॉयमेंट

[03:39:41] भी डोंट वरी। ठीक है? टैक्स

[03:39:45] इनकम बढ़ने के साथ-साथ टैक्स रेट जब कम हो

[03:39:48] उसको बोलते हैं हम आपका रिग्रेसिव टैक्स।

[03:39:50] अब मेरा आपसे सवाल यह है जीएसटी क्या है?

[03:39:53] प्रपोशनल है या रिग्रेसिव है? जीएसटी क्या

[03:39:57] है? प्रपोर्शनल है या रिग्रेसिव है?

[03:40:02] यह बात बताओ क्या है जीएसटी?

[03:40:18] हम देखो जीएसटी आपका रिग्रेसिव है। अरे

[03:40:21] प्रपोर्शनल नहीं है भाई। रिग्रेसिव है।

[03:40:24] जीएसटी आपका रिग्रेसिव है। प्रपोर्शनल

[03:40:26] नहीं है। जीएसटी इज़ रिग्रेसिव। क्यों है

[03:40:28] रिग्रेसिव? बहुत सिंपल एग्जांपल है। बहुत

[03:40:31] सिंपल एग्जांपल है। ठीक है? मैं आपको

[03:40:33] एग्जांपल भी दे सकता हूं अगर आपको देखना

[03:40:35] है।

[03:40:37] देखो मैंने आज सुबह ये फ्रूटी खरीदी। ठीक

[03:40:40] है? तो ये जब मैंने फ्रूटी खरीदी ना तो

[03:40:42] मैंने इसके ऊपर भी टैक्स दिया। ठीक है?

[03:40:44] मान लो मैंने इसके ऊपर टैक्स दिया। अब ये

[03:40:47] इसके ऊपर ना मान लो ये ₹10 की फ्रूटी है।

[03:40:49] मान लो इसके ऊपर ₹1 टैक्स था। मान लो मान

[03:40:51] लो। लेट्स से लेट्स से इसके ऊपर ₹1 टैक्स

[03:40:53] था। ठीक है? ₹1 जीएसटी मान लो लगा। इसके

[03:40:55] ऊपर मान लो ₹1 टैक्स था। ठीक है? अब देखो

[03:40:59] मैंने कितना टैक्स दिया इसके ऊपर? ₹1 ठीक

[03:41:02] है? मेरी इनकम कितनी है? मेरी इनकम है

[03:41:05] ₹10,000।

[03:41:07] ठीक है? ओके। ओके। ओके। और आप लोग सुमित

[03:41:10] सर को जानते होंगे। सुमित सर की इनकम

[03:41:12] कितनी है? सुमित सर की इनकम है ₹1 लाख। अब

[03:41:15] उन्होंने भी मेरे साथ फ्रूटी खरीदी है।

[03:41:16] उन्होंने कहा कि मैं भी खरीदूंगा फ्रूटी।

[03:41:18] अब उन्होंने जब मेरी फ्रूटी खरीदी,

[03:41:20] उन्होंने भी ₹1 ही टैक्स दिया।

[03:41:23] अब देखो मेरी इनकम का परसेंटेज अगर आप

[03:41:26] निकालोगे ना तो ज्यादा परसेंटेज मैंने

[03:41:28] टैक्स दिया। इन्होंने इनकी इनकम का कम

[03:41:32] परसेंटेज टैक्स लगा। अमाउंट ₹1 है पर

[03:41:35] परसेंटेज टर्म्स में अगर आप नोटिस करोगे

[03:41:37] ना मैंने कम मैंने ज्यादा परसेंटेज टैक्स

[03:41:39] दिया। इन्होंने कम परसेंटेज टैक्स दिया।

[03:41:41] तो गरीब के ऊपर ज्यादा परसेंटेज टैक्स लग

[03:41:43] रहा है। अमीर की इनकम का कम परसेंटेज

[03:41:45] टैक्स लग रहा है। इसको बोलते हैं हम

[03:41:47] रिग्रेसिव टैक्स। तो दरअसल में हमारा जो

[03:41:49] जीएसटी है वो रिग्रेसिव टैक्स है। अमीरों

[03:41:52] के ऊपर कम परसेंटेज टैक्स, गरीबों के ऊपर

[03:41:55] ज्यादा परसेंटेज टैक्स। ठीक है? इसीलिए

[03:41:57] यहां पे क्या है? रिग्रेसिव टैक्स है ये।

[03:42:00] क्या ये बात क्लियर हुई आपको?

[03:42:04] ठीक है? तो जीएसटी एक रिग्रेसिव टैक्स

[03:42:06] यहां पे आपको देखने को मिलेगा। चलो।

[03:42:11] ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है।

[03:42:13] अब एक काम करते हैं। फिर सर थोड़ा जीएसटी

[03:42:15] पढ़ा ही दो। ठीक है? अगर यहां तक पहुंच ही

[03:42:17] गए हैं। ठीक है? जीएसटी तक अगर पहुंच ही

[03:42:19] गए हैं तो थोड़ा हम पढ़ ही लेते हैं

[03:42:20] जीएसटी में।

[03:42:23] हम हम

[03:42:25] चलो थोड़ा पढ़ लेते हैं। जैसे मैंने आपको

[03:42:28] बोला जीएसटी क्या है? एक इनडायरेक्ट टैक्स

[03:42:29] है। ठीक है? और एक रिग्रेसिव टैक्स है।

[03:42:32] ठीक है? गुड गुड गुड। ओके। ओके। ओके। ओके।

[03:42:36] ठीक है?

[03:42:38] ठीक है। हां। देखो आप लोग ये शॉट्स काट

[03:42:41] काट के सुमित सर को मत भेज देना। ठीक है

[03:42:43] ना? और दिक्कत हो जाएगी फिर नहीं तो ठीक

[03:42:47] है ये हमारे और आप आपकी आपस के बीच की बात

[03:42:49] है। आप इनको सुमित सर तक मत पहुंचाना। ठीक

[03:42:51] है ना? हां। सुमित सर बुरा मान जाएंगे

[03:42:54] भाई। उनकी सैलरी मैंने 1 लाख कर दी। बताओ

[03:42:56] कितना बुरा मानेंगे वो मेरे से।

[03:42:59] ठीक है? हां। चलो वापस आते हैं मुद्दे पे।

[03:43:01] वापस आते हैं मुद्दे पे। हां। जीएसटी के

[03:43:03] बारे में कुछ फ़क्चुअल चीजें हैं। ये उड़ान

[03:43:05] की बुकलेट्स हैं आपके। तो आप इनको देख

[03:43:07] सकते हो एक बार। हां। पहली चीज तो ये है

[03:43:09] कि जीएसटी आया कब से है? देखो जीएसटी आया

[03:43:12] आपका 1 जुलाई 2017 को। अब इसने क्या किया?

[03:43:16] बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के जो

[03:43:18] इनडायरेक्ट टैक्सेस थे वो यहां पर इसने

[03:43:21] सब्स्यूम कर लिए। सब्स्यूम मतलब इसके

[03:43:23] अंतर्गत आ गए। ठीक है? कौन से सर इसके

[03:43:25] अंतर्गत आ गए? देखो कुछ मैं आपको एग्जांपल

[03:43:27] दे देता हूं। ये टैक्सेस पहले लगा करते

[03:43:30] थे। जैसे फॉर एग्जांपल आपका सेंट्रल

[03:43:31] एक्साइज ड्यूटी था। एडिशनल एक्साइज ड्यूटी

[03:43:33] था, ड्यूटी ऑफ़ एक्साइज था। ठीक है? इस तरह

[03:43:36] से आपके सेंट्रल के टैक्सेस थे। बाकी

[03:43:38] स्टेट के टैक्सेस भी थे। जैसे फॉर

[03:43:40] एग्जांपल अगर हम बात करेंगे स्टेट वट की

[03:43:42] सेंट्रल सेल्स टैक्स, लग्जरी टैक्स,

[03:43:44] एंट्री टैक्स, एडवरटेनमेंट टैक्स,

[03:43:47] अम्यूजमेंट टैक्स, टैक्स ऑन एडवर्टाइजमेंट

[03:43:49] ऐसे बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के टैक्सेस

[03:43:51] थे। इन सबको जीएसटी ने सब्सक्यूम कर लिया।

[03:43:54] मतलब अब इनकी जगह सबकी जगह एक सिंगल टैक्स

[03:43:56] आ चुका है जीएसटी।

[03:43:59] ठीक है?

[03:44:00] जीएसटी आ चुका है। ठीक है। ठीक है। ओके।

[03:44:03] ओके। ओके। ओके।

[03:44:06] तो पॉइंट आप ये देखो कि चलो ठीक है। अब

[03:44:08] यहां पर क्या हुआ? जीएसटी ने इन सबको यहां

[03:44:10] पर रिप्लेस कर दिया। तो इसका फायदा क्या

[03:44:13] हुआ? देखो, पहली चीज तो यहां पर फायदा यह

[03:44:15] है

[03:44:17] कि इसने ना वन नेशन वन टैक्स वन मार्केट

[03:44:20] क्रिएट की। क्या क्रिएट किया? वन नेशन वन

[03:44:23] टैक्स वन मार्केट। ठीक है? ठीक है। ठीक

[03:44:26] है। वन नेशन वन टैक्स वन मार्केट का क्या?

[03:44:28] देखो पहले पता क्या होता था? आपकी जो

[03:44:30] स्टेट्स हैं वो हर स्टेट अपने-अपने हिसाब

[03:44:32] से बहुत सारे टैक्सेस लगाती थी। मैंने

[03:44:33] बताया स्टेट्स के इतने सारे अलग-अलग

[03:44:35] प्रकार के टैक्सेस हैं। तो उससे क्या हुआ?

[03:44:37] एज अ बिजनेसमैन मुझे बड़ी दिक्कत आती थी।

[03:44:39] इतने सारे टैक्सेस हैं। हर स्टेट

[03:44:41] अपने-अपने हिसाब से अलग-अलग काम कर रही

[03:44:42] है। हमें समझ ही नहीं आता है कि यार ये

[03:44:45] स्टेट्स हैं या अलग-अलग देश हैं जो इतना

[03:44:47] ज्यादा कॉम्प्लेक्स टैक्सेशन सिस्टम है।

[03:44:48] तो हमने सबको रिप्लेस करके एक सिंगल टैक्स

[03:44:50] बना दिया। वन नेशन वन टैक्स वन मार्केट।

[03:44:53] पूरा देश में सिमिलर तरह का टैक्सेशन

[03:44:55] सिस्टम आ चुका है। ठीक है? दूसरी बात पहले

[03:44:58] पता क्या होता था? पहले टैक्स के ऊपर

[03:45:00] टैक्स लगता था। टैक्स के ऊपर टैक्स का

[03:45:02] मतलब आपने कुछ

[03:45:05] आपने कुछ प्रोडक्ट खरीदा पहले उसके ऊपर

[03:45:08] टैक्स लगा मान लो ₹100 का प्रोडक्ट था।

[03:45:10] मैं सिंपल बताता हूं। मान लो

[03:45:11] मैन्युफैक्चरर के पास ₹100 का प्रोडक्ट

[03:45:13] था। मैन्युफैक्चरर ने आके रिटेलर को दिया।

[03:45:14] रिटेलर ने आके कस्टमर को दिया। तो पहले

[03:45:17] इसके ऊपर ₹10 मान लो टैक्स लग गया। फिर ये

[03:45:19] ₹110 जो था ना, फिर इसके ऊपर फर्दर टैक्स

[03:45:21] लग गया। दिक्कत पता है क्या आई? आपने जब

[03:45:24] पहले यहां पे टैक्स लगाया। ठीक है? लगाया

[03:45:27] कोई दिक्कत नहीं। जब आप यहां पे टैक्स लगा

[03:45:28] रहे हो ना आप पता कर रहे हो आप यहां पे जो

[03:45:31] ऑलरेडी आपने टैक्स पे कर दिया है उसके ऊपर

[03:45:33] फर्दर टैक्स लगा रहे हो इसको बोलते थे

[03:45:35] टैक्सेस के ऊपर टैक्स लगाना इसको बोलते थे

[03:45:37] कास्ट केडिंग ऑफ टैक्सेस तो जीएसटी के आने

[03:45:39] से ये जो कास्ट केडिंग इफेक्ट था ना

[03:45:40] टैक्सेस का वो यहां पे खत्म हो चुका है

[03:45:43] कास्ट केडिंग इफेक्ट यहां पे खत्म हो चुका

[03:45:45] है ठीक है ओके सर ओके ओके ओके अब पहली बात

[03:45:49] एक बात ध्यान रखना ये जीएसटी का पूरा

[03:45:51] मैकेनिज्म जो है ये हमने कॉन्स्टिट्यूशन

[03:45:53] में अमेंडमेंट करके किया है संविधान में

[03:45:56] हमने संशोधन किया आपको पता होगा हम 11

[03:45:59] कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट एक्ट लेकर आए।

[03:46:02] उसके माध्यम से हमने जीएसटी में चेंजेस

[03:46:03] करे। मतलब जीएसटी मतलब जीएसटी इंट्रोड्यूस

[03:46:06] किया। चेंजज़ क्या? जीएसटी लेकर आए 11

[03:46:08] फर्स्ट कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट के

[03:46:09] माध्यम से। और ये अमेंडमेंट कोई आसान नहीं

[03:46:11] था। ये अमेंडमेंट कैसे हुआ? आपको पता होगा

[03:46:14] आर्टिकल 368 के अंतर्गत जो एक डिफरेंट तरह

[03:46:18] की मेजॉरिटी होती है। क्या होता है इसमें?

[03:46:20] देखो आपको स्पेशल मेजॉरिटी तो चाहिए ही

[03:46:22] चाहिए। मतलब 2/3 मेंबर प्रेसिडेंट वोटिंग

[03:46:25] एंड एब्सोलुट मेजॉरिटी ऑफ़ द हाउस। वो तो

[03:46:26] चाहिए ही चाहिए बट उसके साथ ही साथ आपको

[03:46:29] कम से कम आधी स्टेट से रेटिफिकेशन भी

[03:46:31] चाहिए होता है बाय व्हिच मेजॉरिटी आप मुझे

[03:46:33] बताओ इसका आंसर आधी स्टेट्स जो इसको

[03:46:36] रेटिफाई करेंगी वो कौन सी मेजॉरिटी से

[03:46:37] करेंगी आप मुझे इसका आंसर बताओ देखते हैं

[03:46:39] आपकी पॉलिटी कितनी स्ट्रांग है ये चीज करी

[03:46:42] उसके माध्यम से आपका जीएसटी इंट्रोड्यूस

[03:46:43] हुआ जीएसटी बना और उसके माध्यम से एक

[03:46:46] संवैधानिक बॉडी बनी जिसका नाम क्या है

[03:46:48] जीएसटी काउंसिल ध्यान रखिएगा ये अपने आप

[03:46:51] में क्या है ये अपने आप में

[03:46:54] कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी है अगर अगर आप

[03:46:56] आर्टिकल 279 ए उठा के देखेंगे वहां पर

[03:46:59] आपको जीएसटी काउंसिल का आपको मेंशन देखने

[03:47:01] को मिलेगा। ठीक है? तो बिल्कुल जीएसटी

[03:47:03] काउंसिल अपने आप में एक कॉन्स्टिट्यूशनल

[03:47:05] बॉडी है। इस बात का आप यहां पे ध्यान में

[03:47:07] रखेंगे। बिल्कुल ठीक बात है। ये जो

[03:47:10] रेटिफिकेशन चाहिए होता है ना स्टेट्स के

[03:47:11] माध्यम से ये सिंपल मेजॉरिटी के माध्यम से

[03:47:13] होता है। यहां चाहिए होती है।

[03:47:15] पार्लियामेंट के अंदर आपकी स्पेशल

[03:47:16] मेजॉरिटी चाहिए। पर जो स्टेट्स सर्टिफाई

[03:47:18] करेंगी वहां पर आपकी सिंपल मेजॉरिटी चल

[03:47:20] जाएगी। ठीक है?

[03:47:23] ओके। ओके। ओके। अब ये जीएसटी काउंसिल जो

[03:47:26] होता है ना इस जीएसटी काउंसिल में आपके

[03:47:27] सेंटर भी होती है, स्टेट्स भी होती है। वो

[03:47:29] कैसे? एक्चुअली यहां पर भी डिसीजन आपके

[03:47:32] वोटिंग के हिसाब से लिए जाते हैं। कोई भी

[03:47:35] अगर आपको फैसला करवाना है, उसके लिए क्या

[03:47:37] चाहिए होगा? आपको फैसला करवाने के लिए

[03:47:40] क्या चाहिए होगा? आपको 3/4 मेजॉरिटी

[03:47:42] चाहिए। 3/4 मेजॉरिटी का मतलब आपको 75%

[03:47:46] आपको वोट चाहिए। और इसके ना वोटिंग सिस्टम

[03:47:48] पता है कैसे है? वोटिंग सिस्टम कुछ इस तरह

[03:47:50] से है कि इस पर्टिकुलर

[03:47:53] जीएसटी काउंसिल में आपके सेंटर का शेयर

[03:47:55] कितना है? 1/3 वोटिंग पावर है सेंटर की।

[03:47:57] स्टेट्स की कितनी वोटिंग पावर है? वो है

[03:47:59] 23/3। और देखो अगर आपको कोई डिसीजन लेना

[03:48:02] है उसके लिए 75% मेजॉरिटी चाहिए। ना अकेले

[03:48:05] सेंटर के पास 75% मेजॉरिटी है ना अकेले

[03:48:08] स्टेट्स के पास 75% मेजॉरिटी है। तो

[03:48:10] मेजॉरिटी कैसे मिलेगी? जब दोनों साथ में

[03:48:12] मिलकर यहां पे काम करेंगे। ठीक है ना? तो

[03:48:15] फाइनेंस मिनिस्टर इसकी एक्स ऑफिशियल चेयर

[03:48:17] पर्सन होती हैं और ये अपने आप में क्या

[03:48:19] है? अपने आप में ये रिकमेंडेटरी बॉडी है।

[03:48:22] ठीक है? क्या ये बात क्लियर हुई? ये

[03:48:24] रेकमेंडेटरी क्यों? देखो यार सुप्रीम

[03:48:26] कोर्ट ने यहां पे क्लेरिफाई कर दिया हुआ

[03:48:28] है कि इसकी रेकमेंडेशंस ही हैं। ठीक है?

[03:48:32] ये रेकमेंडेशंस हैं इसकी। ये बाइंडिंग

[03:48:34] नहीं है जो इन्होंने डिसाइड कर दिया। दीज़

[03:48:36] आर नॉट बाइंडिंग। ये रेकमेंडेशंस ही होती

[03:48:38] हैं इनकी।

[03:48:40] नहीं सेंटर के पास 1/3 पावर है सेंट्री के

[03:48:42] पास कम है। स्टेट के पास ज्यादा है।

[03:48:44] बिल्कुल। और ये कोऑपरेटिव फेडलिज्म का

[03:48:46] बहुत अच्छा एग्जांपल है।

[03:48:48] ठीक है? ओके। ओके ओके ओके। ठीक है। एक तो

[03:48:52] पता नहीं ये नीचे से कहां से आ रहे हैं।

[03:48:53] सीजन को बाद बैच को आप ज्वाइन कर सकते हो

[03:48:55] भाई। नीचे से आ रहा है। ठीक है। चलो ओके

[03:48:58] ओके ओके। ठीक है। ठीक है। चलो गुड गुड

[03:49:00] गुड। ओके। ओके।

[03:49:04] ठीक है सर। और कुछ फैक्ट्स भी थे सर यहां

[03:49:05] पे जीएसटी के बारे में। इनको भी एक बार हम

[03:49:07] डिस्कस कर लेते हैं। हां। सर जीएसटी में

[03:49:09] इस बार कुछ चेंजेस हुए हैं। बहुत

[03:49:11] बड़े-बड़े बदलाव हुए हैं। हां बिल्कुल हुए

[03:49:12] हैं। बिल्कुल हुए हैं। क्या बदलाव हुए

[03:49:14] हैं? पहली चीज तो बात ये है कि यहां पर एक

[03:49:16] स्टैंडर्ड रेट लगेगा 18% का। ठीक है? हां।

[03:49:21] ज्यादातर गुड्स एंड सर्विज आपकी 18% रेट

[03:49:24] के अंदर मिलेंगी। ठीक है? और एक यहां पे

[03:49:27] आपका 5% रेट भी रखा गया जिसको हम लोग

[03:49:29] मेरिट रेट बोल रहे हैं। ऐसी वस्तुएं जो

[03:49:32] थोड़ी जरूरत वाली आइटम्स हैं या काफी लोग

[03:49:34] इनको कंज्यूम करते हैं वो 5% की स्लैब में

[03:49:37] आएंगी। बाकी ज्यादातर आइटम आपकी 18% स्लैब

[03:49:39] के अंदर। बट हां एक अलग से डीममेरिट रेट

[03:49:43] भी हमने यहां पे बनाई है जिसका नाम है

[03:49:44] 40%। 40% किसके लिए हैं? आपकी ऐसी वस्तुएं

[03:49:47] जो सन गुड्स हैं या लग्जरी गुड्स हैं।

[03:49:50] जैसे आपका पान मसाला, आपका टोबैको, हाई

[03:49:53] एंड व्हीकल्स, इरेटेड ड्रिंक्स ये सबके

[03:49:55] ऊपर कितना लगेगा? 40% का टैक्स लगेगा। ठीक

[03:49:58] है ना? इसके अलावा एक कंपनसेशन टेस्ट भी

[03:50:00] है। एक्चुअली पॉइंट पता है क्या है

[03:50:02] कंपनसेशन टेस्ट का? मैं आपको यहां पे बता

[03:50:04] भी देता हूं।

[03:50:06] जब आपका जीएसटी सिस्टम आया था 2017 में तो

[03:50:11] स्टेट्स को काफी डर था। स्टेट्स को डर था

[03:50:13] यार कि हमारी तो टैक्स लगाने की पावर छीनी

[03:50:16] जा रही है। अगर आपने हमारी टैक्स लगाने की

[03:50:18] पावर छीन ली हमें तो बड़ी दिक्कत आ जाएगी।

[03:50:21] तो सेंटर ने बोला था कोई बात नहीं आप

[03:50:23] चिंता मत करो। हम आपको एक प्रॉमिस दे रहे

[03:50:25] हैं। प्रॉमिस किस बात का दे रहे हैं? कि

[03:50:27] हर साल आपका 14% आपका

[03:50:32] रेवेन्यू आपको एक्स्ट्रा मिलता रहेगा।

[03:50:34] आपका रेवेन्यू 14% हर साल इनक्रीस होगा।

[03:50:37] सवाल आता है कि अगर नहीं हुआ तो सेंटर ने

[03:50:39] बोला अगर नहीं हुआ तो कोई बात नहीं मैं

[03:50:42] आपको पैसे दूंगा। आपको यही डर है ना कि

[03:50:44] जीएसटी आने से आपका नुकसान ना हो जाए। तो

[03:50:47] अगले 5 साल के लिए मैं वादा कर रहा हूं कि

[03:50:49] आपको कम से कम 14% हर साल ज्यादा पैसा

[03:50:52] मिलेगा। अगर कुछ भी नहीं मिला कम मिला अगर

[03:50:55] पैसा तो वो सारी भरपाई मैं करूंगा। ठीक

[03:50:57] है? सब कुछ बढ़िया चल रहा था। पर फिर

[03:51:00] दिक्कत आई 2020 के समय। 2020 जब कोविड आ

[03:51:03] गया ना तो दिक्कत आने लग गई। तो दिक्कत ये

[03:51:06] आई कि यार अब क्या करें? 2020 के समय तो

[03:51:09] ऊपर तो दुकानें बंद थी, सब कुछ बंद हो गया

[03:51:11] था। तो उस चक्कर में क्या हुआ? रेवेन्यू

[03:51:13] काफी कम हो गया। रेवेन्यू कम हो गया पर

[03:51:16] स्टेट्स को तो चाहिए था कि नहीं नहीं मुझे

[03:51:18] तो और पैसा दो। तो उस चक्कर में सेंट्रल

[03:51:21] गवर्नमेंट को काफी सारा लोन लेना पड़ा

[03:51:23] ताकि स्टेट्स को कंपनसेेट करते रहे। तो

[03:51:25] उसी को हम बोलते हैं जीएसटी कंपनसेशन सेस।

[03:51:28] अगर आपका कम आपका पैसा कम होगा ना तो उस

[03:51:31] केस में यहां पर हम आपको कंपनसेेट करेंगे।

[03:51:33] तो ये 5 साल का सिस्टम था। ये 5 साल

[03:51:36] कंप्लीट हो गए हैं। अब स्टेट्स को यहां पे

[03:51:38] हम कंपनसेेट नहीं करते। बट बट बट कंपनसेशन

[03:51:42] से सरकार अभी भी ले रही है। क्यों ले रही

[03:51:44] है? क्योंकि सेंट्रल गवर्नमेंट बोलती है

[03:51:47] कि भाई हमने कोविड के समय लोन लिए थे आपके

[03:51:50] शॉर्टफॉल को कंपनसेट करने के लिए। उनकी

[03:51:52] भरपाई भी तो करनी है मुझे। इसीलिए

[03:51:54] कंपनसेशन सेस जो है वो चल रहा है। फिलहाल

[03:51:56] भी स्टेट्स को नहीं जा रहा।

[03:51:59] ठीक है? ओके। ओके ओके ओके। इसके अलावा

[03:52:02] जीएसटी कौन से मैंने आपको समझा दिया। ठीक

[03:52:04] है? ये तो आपको पता है इंटीग्रेट जीएसटी।

[03:52:06] अगर मान लो अ एक स्टेट से दूसरे स्टेट में

[03:52:09] कोई ट्रांजैक्शन हो रही है। वहां उसके ऊपर

[03:52:11] आईजीएसटी लगता है। आई थिंक यू आर अवेयर

[03:52:13] अबाउट दैट। बाकी इसके अलावा दो-तीन

[03:52:15] कांसेप्ट ऐसे हैं जो आपको पता होने चाहिए।

[03:52:17] एक तो यहां पे कांसेप्ट पढ़ो। ये वाला एंटी

[03:52:19] प्रॉफिटिंग अथॉरिटी। ये बड़ा इंटरेस्टिंग

[03:52:22] है। ये बड़ा इंटरेस्टिंग है। मैं आपको

[03:52:24] समझाता हूं क्यों? आप लोगों ने ना पिछले 6

[03:52:26] महीने में कोई शॉपिंग करी है? इनफैक्ट ना

[03:52:29] मैंने आपको बता रहा हूं। मैं आपको बता रहा

[03:52:30] हूं। आप लोगों ने कई बार ना ऐसे-ऐसे

[03:52:32] डब्बों पे भी देखा होगा। जैसे अभी मैंने

[03:52:34] ना एक अचार का डब्बा मैंने खरीदा था। ठीक

[03:52:36] है? गोपाल से खरीदा था। जो गोपाल दुकान

[03:52:38] नहीं आती वहां से खरीदा था। उसके ऊपर लिखा

[03:52:40] हुआ था अर्लियर रेट वाज़ 105। न्यू रेट =

[03:52:44] 102। ऐसे लिखा हुआ था वहां के ऊपर। अगर

[03:52:46] आपने किसी जगह देखा हो। कई शर्ट्स के ऊपर

[03:52:48] भी लिखा होता है। कई और जगह के ऊपर भी

[03:52:50] अर्लियर प्राइस दिस मच, न्यू प्राइस दिस

[03:52:52] मच। देखा आपने वो एक्चुअली पता है क्या

[03:52:55] था? सरकार ने अभी रिसेंटली जीएसटी काफी

[03:52:59] चीजों पे कम किया। हां किया। पर क्या वो

[03:53:03] जीएसटी कम करने का फायदा लोगों तक पहुंचा

[03:53:06] या नहीं पहुंचा? कहीं ऐसा तो नहीं कि

[03:53:10] जीएसटी सरकार ने तो कम कर दिया पर बिनेसेस

[03:53:13] ने उस पैसे को कम ही नहीं किया। कस्टमर तक

[03:53:15] वही सेम रेट दिया। वहां पर एंटी

[03:53:17] प्रॉफिटिंग अथॉरिटी का रूल बनता है। ये

[03:53:20] क्या है? ये इंश्योर करती है कि भाई अगर

[03:53:22] आपने जीएसटी रेट कम किया है ना तो क्या

[03:53:24] उसका फायदा कस्टमर तक पहुंचा या नहीं? ये

[03:53:27] था आपका एंटी प्रॉफिटिंग अथॉरिटी। समझे

[03:53:30] मेरी बात?

[03:53:33] ठीक है? इसके अलावा दो वर्ड्स और हैं। एक

[03:53:36] है आपका इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर। देखो

[03:53:39] इसका मीनिंग पता है क्या होता है? देखो

[03:53:40] जैसे फॉर एग्जांपल आप इसको अंडरस्टैंड

[03:53:42] करना। अब जैसे

[03:53:45] एक तो है ये घड़ी। ठीक है? ये एक वॉच। वॉच

[03:53:49] अपने आप में एक आउटपुट है। पर इस वॉच को

[03:53:52] बनाने के लिए रॉ मटेरियल लगे होंगे। है

[03:53:55] ना? इसके लिए स्टील लगा होगा। इसके लिए

[03:53:58] कुछ और भी लगा होगा। जो भी मेटलवेटल और भी

[03:54:00] हैं। ये सारे रॉ मटेरियल हैं। अब पॉइंट

[03:54:03] पता है क्या देखो? ध्यान से लॉजिक समझना।

[03:54:05] लॉजिक पता क्या बोलता है? लॉजिक ये बोलता

[03:54:07] है कि भाई जब आपके रॉ मटेरियल है ना उनके

[03:54:10] ऊपर भी जीएसटी लग रहा होगा। आपके फाइनल

[03:54:12] प्रोडक्ट के ऊपर भी जीएसटी लग रहा होगा।

[03:54:14] होना क्या चाहिए? आमतौर पे होना ये चाहिए

[03:54:16] कि आपके रॉ मटेरियल के ऊपर जो रेट लगना है

[03:54:20] वो कम होना चाहिए। इट शुड बी लेस। और आपका

[03:54:23] जो फाइनल वाले प्रोडक्ट्स हैं उनके ऊपर जो

[03:54:25] रेट लगना चाहिए वो ज्यादा लगना चाहिए। दिस

[03:54:28] शुड नॉर्मली बी द केस कि मान लो इसके ऊपर

[03:54:30] 5% है और मान लो इसके ऊपर 18% है। सही

[03:54:33] मायने ऐसे होते हैं। होना ऐसा चाहिए। तभी

[03:54:36] तो प्रोडक्शन यहां पे हम उसको बढ़ा

[03:54:38] पाएंगे। पर अगर मान लो ऐसा हो जाए कि आपने

[03:54:42] रॉ मटेरियल के ऊपर रेट ज्यादा लगा रखा है

[03:54:45] बट वॉच के ऊपर फाइनल प्रोडक्ट के ऊपर जो

[03:54:48] आपका रेट है वो कम है तो ऐसी कंडीशन को हम

[03:54:50] बोलते हैं क्या बोलेंगे ऐसी कंडीशन को

[03:54:53] इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर

[03:54:56] इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर इट अकर्स

[03:55:00] इट अकर्स व्हेन टैक्स रेट ऑन इनपुट

[03:55:04] एक्सीड्स द टैक्स रेट ऑन आउटपुट

[03:55:06] एग्जैक्टली ब्लू फ्लैग ने बिल्कुल सही सही

[03:55:08] आंसर दिया है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर

[03:55:10] होने की वजह से पता है क्या होता है? आपका

[03:55:12] जो क्रेडिट है, टैक्स क्रेडिट है वो

[03:55:15] इकट्ठा होने लग जाता है। पैसा अटक जाता है

[03:55:17] बीच में इन मैन्युफैक्चरर का। तो ये

[03:55:18] मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक नुकसानदायक चीज

[03:55:20] होती है। अगर आपका टैक्स रेट यहां पे

[03:55:22] ज्यादा है रॉ मटेरियल के ऊपर और मतलब

[03:55:25] इनपुट्स के ऊपर और आउटपुट के ऊपर कम है।

[03:55:28] तो हमें करना क्या चाहिए? इनपुट के ऊपर

[03:55:30] रेट कम होना चाहिए। आउटपुट के ऊपर रेट

[03:55:32] ज्यादा होना चाहिए। पर जब इसका उलकट

[03:55:35] सिचुएशन आ जाता है। जैसे ये वाला सिचुएशन

[03:55:36] मैंने आपको बताया। इसको बोलते हैं हम लोग

[03:55:38] इनपुट टैक्स सॉरी इनवर्टेड ड्यूटी

[03:55:40] स्ट्रक्चर। बाकी टैक्स क्रेडिट मुझे बता

[03:55:42] ही दिया जो उन्होंने बताया था। बिल्कुल जो

[03:55:44] भी आपने यहां पे टैक्स पे किया है उसका

[03:55:46] आपको वापस मिल जाता है। जो क्रेडिट आपको आ

[03:55:48] जाता है उसको बोलते हैं आईटीसी इनपुट

[03:55:50] टैक्स क्रेडिट। ये सारी टर्मिनोलॉजी हैं

[03:55:52] आपकी जीएसटी की। ठीक है? इनको आप देख सकते

[03:55:54] हो। तो मैंने आपको बता ही दिया। अब देखो

[03:55:56] ये सब चेंजज़ हैं। आपको ये चेंजज़ नहीं गो

[03:55:58] थ्रू करने। एक बेसिक आईडिया पता है क्या

[03:56:00] है? आपकी बहुत सारी चीजों पे इस बार सरकार

[03:56:01] ने टैक्सेस कम कर दिए हैं। जैसे फॉर

[03:56:03] एग्जांपल मेजर तो है आपकी हेल्थ एंड लाइफ

[03:56:06] इंश्योरेंस। पहले इसके ऊपर जो टैक्स लगता

[03:56:08] था अब इसके ऊपर 0% टैक्स कर दिया गया है।

[03:56:10] बाकी थर्मामीटर के ऊपर 5% कर दिया गया है।

[03:56:13] आपके बर्तनों के ऊपर 5% टैक्स हो गया।

[03:56:15] पहले 12% हुआ करता था। आपके शैंपू, आपके

[03:56:18] टूथपेस्ट, आपके सोप, आपके टूथब्रश पहले

[03:56:21] उसके ऊपर 18% जीएसटी था। अब 5% कर दिया

[03:56:23] गया है। बटर, घी, चीज़, दाल, डेरी स्प्रेड

[03:56:26] के ऊपर 12% था। 5% कर दिया गया है। ठीक

[03:56:29] है? आपकी स्विंग मशीन पे 12% था 5% कर

[03:56:31] दिया गया है। वैसे बहुत सारे चेंजेस सरकार

[03:56:33] ने यहां पे किए हैं। ट्रैक्टर के ऊपर 12%

[03:56:35] था 5% कर दिया गया है। किसानों की मदद

[03:56:37] करने की कोशिश की है हमारे प्रधानमंत्री

[03:56:39] जी ने। है ना? तो ये सारी बातें हमारे

[03:56:41] यहां पे देखने को मिलती हैं।

[03:56:44] क्लियर हुआ?

[03:56:46] ठीक है? ये था जीएसटी 2.0

[03:56:51] हां हां सप्ताशी यस यू आर राइट। मैंने बस

[03:56:54] उसका मीनिंग समझाया था। मैंने तभी बोला था

[03:56:55] कि पहले ये थी।

[03:56:59] देखो लज़ारनी गोल्ड इज अ स्पेशल केस। ठीक

[03:57:03] है? मुझे पता है आप मेरी नॉलेज टेस्ट करने

[03:57:05] के लिए पूछ रहे हो यह बात। गोल्ड पे

[03:57:07] स्पेशल केस बनता है। गोल्ड के ऊपर आपका 3%

[03:57:09] जीएसटी होता है। वो स्पेशल केस है गोल्ड

[03:57:11] का। गोल्ड का और आपका रफ डायमंड्स वगैरह

[03:57:13] का केस स्पेशल रहता है। उनके लिए अलग

[03:57:16] ब्रैकेट रहती है।

[03:57:22] हम

[03:57:23] कुछ और बातें भी हमें यहां पे समझनी है।

[03:57:27] जैसे हां एक कांसेप्ट यहां पे आता है। एक

[03:57:31] कांसेप्ट यहां पे आता है हम। एक कांसेप्ट

[03:57:35] यहां पे आता है बीईपीएस का। बेस इरोजन एंड

[03:57:38] प्रॉफिट शिफ्टिंग। प्लीज इस बात को

[03:57:40] समझेंगे। प्लीज इस बात को अंडरस्टैंड

[03:57:42] करेंगे। व्हाट इज द बेस इरोजन एंड प्रॉफिट

[03:57:44] शिफ्टिंग? देखो क्या होता है बेस इरोजन

[03:57:46] एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग? समझते हैं इस बात

[03:57:49] को। देखो

[03:57:52] आप लोगों ने हो सकता है टैक्स हेवन का केस

[03:57:55] सुना होगा।

[03:57:59] ठीक है? आप लोगों ने टैक्स हेवन का केस

[03:58:02] सुना होगा। टैक्स हेवन क्या होता है? जहां

[03:58:04] पर टैक्स रेट बहुत ही कम होते हैं। जहां

[03:58:06] पर आपके टैक्स रेट्स बहुत ही कम होते हैं।

[03:58:08] 2% 3% 5% इस तरह से। तो बहुत सारे कंपनीज़

[03:58:13] पता है क्या करती है? मल्टीीनेशनल कंपनीज़

[03:58:15] वो

[03:58:16] पैसा भारत से या कुछ और देश से कमा रही

[03:58:19] हैं। पर कहीं ना कहीं अपने हेड क्वार्टर

[03:58:21] दिखा देती हैं किसी और देश के अंदर। और

[03:58:23] बोलती है कि नहीं नहीं हम तो वहां पर

[03:58:24] टैक्स पे करेंगे क्योंकि हम उस देश को

[03:58:26] बिलोंग करते हैं। कमा वो भारत से रही हैं

[03:58:29] पर दिखाएंगे अपने आपको कहीं और का। तो

[03:58:32] उन्होंने पता है क्या किया? अपने प्रॉफिट

[03:58:35] को जो इन्होंने इस देश में कमाया इस

[03:58:37] प्रॉफिट को अपने यहां को किसी और देश में

[03:58:39] यहां पर शिफ्ट कर दिया।

[03:58:42] ठीक है? क्योंकि उन्होंने दिखाया ना कि

[03:58:44] हमारे हेड क्वार्टर यहां पे है। हमारा

[03:58:45] ऑफिस यहां पे है। उस चक्कर में क्या हो

[03:58:47] गया? ये प्रॉफिट पूरा यहां से यहां शिफ्ट

[03:58:49] हो गया। और जो भारत का टैक्स बेस था या

[03:58:52] किसी और देश का टैक्स बेस था वो एक तरह से

[03:58:54] इरोड हो गया। टैक्स बेस एक तरह से खत्म हो

[03:58:56] गया। इसको बोलते हैं बेस इरोजन एंड

[03:58:59] प्रॉफिट शिफ्टिंग। जैसे आपका मॉरीशियस है,

[03:59:02] कैमबन आइलैंड्स हैं। बिल्कुल ठीक बात है।

[03:59:04] ठीक है? सिंगापुर है। अब इसमें आप नोटिस

[03:59:06] कर पाओगे। एक बार इस लाइन को पढ़ते हैं। इस

[03:59:08] लाइन को पढ़ो एक बार। क्या लिखा हुआ है?

[03:59:12] बीईपीएस रेफर्स टू स्ट्रेटजीज़ व्हिच आर

[03:59:15] यूज़्ड बाय मल्टीीनेशनल कंपनीज़ इन ऑर्डर टू

[03:59:18] शिफ्ट प्रॉफिट। प्रॉफिट को शिफ्ट कर रहे

[03:59:19] हैं। कहां से? फ्रॉम हाई टैक्स

[03:59:21] जुरिसडिक्शन टू लो टैक्स जुरिसडिक्शन।

[03:59:24] मिनिमाइज़ देयर ओवरऑल टैक्स बर्डन। अपने

[03:59:26] टैक्स बर्डन को खमतम करने के लिए या कम

[03:59:28] करने के लिए हाई टैक्स जुरडिक्शन से लोअर

[03:59:31] टैक्स जुरडिक्शन में आपने प्रॉफिट को अपने

[03:59:33] शिफ्ट कर दिया। प्रॉफिट यहां से वहां आपने

[03:59:35] भेज दिया। इससे क्या होगा? इससे आपको कम

[03:59:38] टैक्स देना पड़ेगा। पर कहीं ना कहीं उस

[03:59:40] देश के लिए ये नुकसानदायक बात होगी जहां

[03:59:42] पर टैक्स ज्यादा था।

[03:59:44] ठीक है? बट इसका एक स्यूशन यहां पे निकाला

[03:59:48] गया है ओईसीडी के द्वारा ऑर्गेनाइजेशन फॉर

[03:59:52] इकोनमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट। पहला

[03:59:54] सवाल तो आप मुझे बताओ क्या इंडिया ओईसीडी

[03:59:56] का मेंबर है? क्या इंडिया ओईसीडी का मेंबर

[04:00:00] है? आप एक बार ये बताना ये और दूसरी चीज

[04:00:04] आप यहां पे नोटिस करो। स्यूशन क्या है

[04:00:06] यहां पे? स्यूशन दोस्तों यहां पर ये है

[04:00:07] आपका

[04:00:09] जीएमसीटी ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स।

[04:00:14] ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स का मतलब

[04:00:15] क्या? इसका मतलब यह है कि अगर एक बड़ी

[04:00:19] मल्टीीनेशनल कंपनी है उसको पता है क्या

[04:00:22] इंश्योर करना पड़ेगा उसको कम से कम कम से

[04:00:25] कम 15% टैक्स रेट तो देना ही पड़ेगा 15%

[04:00:29] टैक्स तो देना ही पड़ेगा सर ऐसा कैसे देखो

[04:00:33] अगर मान लो लेट्स से एक मल्टीीनेशनल कंपनी

[04:00:35] दो देशों में काम कर रही है इंडिया में कर

[04:00:37] रही है और किसी दूसरे देश में कर रही है

[04:00:39] मान लो उसने कहा कि नहीं नहीं हम तो वहां

[04:00:40] टैक्स देंगे और वहां टैक्स रेट है 5% ठीक

[04:00:43] है तो आप एक काम करो 5% वहां दे

[04:00:46] 10% आप इंडिया में दे देना। पर आपको 15%

[04:00:48] तो देना ही देना पड़ेगा। तो अब कहीं ना

[04:00:51] कहीं जो ये प्रॉफिट को शिफ्ट करके उधर

[04:00:53] लेके जा रहे थे ना अब ये प्रॉफिट शिफ्टिंग

[04:00:56] रुक जाएगी। अब ये प्रॉफिट शिफ्टिंग रुक

[04:00:58] जाएगी। ये है आपका पिलर नंबर टू कि यहां

[04:01:01] पर क्या हुआ? मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स रेट

[04:01:03] आपका 15% ग्लोबली होगा ही होगा। दूसरी बात

[04:01:06] एक पिलर वन भी है यहां पे। यहां पर ये बोल

[04:01:08] रहा है कि भाई यार टैक्स ना उन देशों में

[04:01:11] देना चाहिए जहां पर उस मल्टीीनेशनल कंपनी

[04:01:14] के कस्टमर रिलेटेड है। अगर मान लो कोई

[04:01:16] कंपनी भारत में काम कर रही है। भारत के

[04:01:19] कस्टमर से पैसा कमा रही है तो उसको वहां

[04:01:21] टैक्स देना चाहिए ना कि जहां पर उसकी

[04:01:24] फिजिकल प्रेजेंस है। हो सकता है उसने एक

[04:01:26] ऑफिस कहीं खोल लिया हो पर वहां टैक्स दे

[04:01:28] जा रही है। वहां नहीं जहां से उसने पैसा

[04:01:31] कमाया वहां पे टैक्स लगना चाहिए। ये है

[04:01:33] आपका जीएमसीटी ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट

[04:01:35] टैक्स ताकि ये जो बेस इरोजन एंड प्रॉफिट

[04:01:37] शिफ्टिंग वाला कांसेप्ट है ना इसको रोका

[04:01:39] जा पाए इसीलिए ये कांसेप्ट आपको देखने को

[04:01:42] यहां पे मिलता है। ठीक है? तो ये टेक्स

[04:01:44] हेवन का मीनिंग मैंने आपको समझा दिया। ठीक

[04:01:46] है? और यहां पर एक वर्ड इस्तेमाल हुआ है

[04:01:48] प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट। बेसिकली

[04:01:50] कंपनी ज्यादातर काम या ज्यादातर प्रॉफिट

[04:01:53] कहां से कमा रही है, उसको कंसीडर करना

[04:01:56] चाहिए प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट।

[04:01:59] समझ गए या नहीं? समझ गए? हां।

[04:02:05] ठीक है? अब यह न्यूज़ में पता क्यों था?

[04:02:07] पिछले साल डॉन्ड ट्रंप ने बोला कि भाई हम

[04:02:09] इसका पार्ट नहीं बनेंगे। यह साइन हुआ था

[04:02:11] बाइडन के टाइम के ऊपर। पर डोन्ड ट्रंप को

[04:02:13] ज्यादा पसंद नहीं आया कि नहीं नहीं हमारे

[04:02:15] ये टैक्स सोवनिटी के अगेंस्ट जाता है।

[04:02:17] हमें हमारी मर्जी होनी चाहिए। हम जितना

[04:02:18] मर्जी टैक्स लगाएं। तो डॉन्ड ट्रंप की वजह

[04:02:21] से ये न्यूज़ में आया था लास्ट ईयर। एंड इस

[04:02:23] वजह से हमें ये पता भी होना चाहिए। कुछ

[04:02:24] बच्चे कह रहे हैं कि इंडिया पार्ट है।

[04:02:26] नहीं दोस्तों ओईसीडी का इंडिया फुल मेंबर

[04:02:29] नहीं है। ठीक है? हम ओईसीडी के साथ बहुत

[04:02:31] ही क्लोजली काम करते हैं। ये बात बिल्कुल

[04:02:34] सच है। पर इंडिया ओईसीडी का मेंबर नहीं

[04:02:36] है। अगर आपने ओईसीडी पढ़ा है, आपने

[04:02:39] रियलाइज़ किया होगा ओईसीडी के मेंबर्स

[04:02:41] नॉर्मली वो देश हैं जिनका ह्यूमन

[04:02:43] डेवलपमेंट में बहुत अच्छा स्कोर होता है।

[04:02:46] भारत का स्कोर ह्यूमन डेवलपमेंट में अच्छा

[04:02:48] छोड़ो बल्कि बहुत ही खराब है। हमारा रैंक

[04:02:51] 130, 131, 132 के आसपास रहता है। तो भारत

[04:02:55] ओईसीडी का फुल मेंबर नहीं है।

[04:02:59] क्या ये बात क्लियर हुई?

[04:03:05] ठीक है।

[04:03:10] कुछ क्वेश्चंस ट्राई करते हैं।

[04:03:14] ठीक है? कुछ मैंने कांसेप्ट्स आपको सिखाने

[04:03:15] के लिए ना आपके लिए कुछ क्वेश्चंस का

[04:03:17] इस्तेमाल किया है। एक-एक करके आप ट्राई

[04:03:19] करना इन क्वेश्चंस को।

[04:04:16] हां जी कई बच्चे सी कह रहे हैं। अच्छा सी

[04:04:19] कह रहे हैं।

[04:04:21] तो उस केस में मुझे बताओ कौन सा गलत कह

[04:04:23] रहे हो आप? अगर तीन ठीक है, तो कौन सा गलत

[04:04:25] है? बहुत ईजी क्वेश्चन है। देखो, बात कह

[04:04:27] रहा है फिस्कल कंसोलिडेशन की। ऐसा

[04:04:29] क्वेश्चन ऑलरेडी पूछा जा चुका है। दोबारा

[04:04:31] भी पूछ सकता है। फिस्कल कंसोलिडेशन का

[04:04:33] मतलब क्या था? मैंने आपको बताया था। हमें

[04:04:34] अपने यहां पे जो खर्चा है, उसको कम करना

[04:04:38] है और अपनी इनकम को बढ़ाना है। यही तो है

[04:04:41] कंसोलिडेशन करना। हां, ठीक है। अब देखो,

[04:04:44] पहले स्टेटमेंट की बात करें। आप उधार

[04:04:46] ज्यादा लो। अरे उधार लेने से आपका ख आपका

[04:04:49] जो फिसिकल डेफिसिट बढ़ेगा। तो ये गलत है

[04:04:52] पहला स्टेटमेंट। दूसरा कह रहा है टैक्स

[04:04:53] अवॉयडेंस कम करो। टैक्स अवॉयडेंस होता है

[04:04:56] जो देखो एक होता है टैक्स इवेशन एक होता

[04:04:58] है टैक्स अवॉयडेंस। इवेजशन में तो होता है

[04:05:01] जो इललीगल काम करे जो टैक्स मतलब जो कि

[04:05:06] काला धन हो उनके पास वो सब चीजें। टैक्स

[04:05:08] अवॉयडेंस का मतलब पता है क्या होता है?

[04:05:10] आपने कुछ लूप होल ढूंढ लिए। अपने कानूनों

[04:05:13] में कुछ अपने कमियां रहती हैं ना। उन लूप

[04:05:15] होल्स का आपने इस्तेमाल किया। अगर हम ये

[04:05:18] लूप होल्स कम कर दें और जो टैक्स के लूप

[04:05:21] होल्स लोग निकाल के टैक्स नहीं पे कर रहे

[04:05:23] थे अब वो भी टैक्स पे करेंगे। अगर टैक्स

[04:05:25] पे करेंगे तो सरकार की इनकम बढ़ेगी। तो

[04:05:27] बिल्कुल ये तो आपका फिसलिक कंसोलिडेशन में

[04:05:29] हेल्प करेगा। दैट इज़ राइट। अगर सरकार सही

[04:05:32] ढंग से पीएसयूस को बेचे स्ट्रेटेजिक

[04:05:34] डिसइन्वेस्टमेंट करे तो जब सरकार पीएसयू

[04:05:36] को बेचेगी या उसमें अपना शेयर कम करेगी

[04:05:38] उससे सरकार की कमाई बढ़ेगी। एंड दैट इज़ हाउ

[04:05:41] फिसलशन होगा क्योंकि डेफिसिट कम हो जाएगा।

[04:05:43] ये भी अपने आप में ठीक है। सब्सिडी कम

[04:05:46] करना इससे भी खर्चा कम होगा। तो ये भी

[04:05:48] अपने आप में ठीक है। इसलिए आंसर क्या

[04:05:50] बनेगा? ऑप्शन सी। ओनली थ्री इज़ राइट।

[04:06:05] चलो आगे आते हैं। इसका बताओ फिर।

[04:06:41] नेक्स्ट लगाना है।

[04:06:51] वो कहां गया?

[04:06:53] बुला दो एक बार इसको। उसको सारे पता है ना

[04:06:55] आठ

[04:06:59] देखो दो कांसेप्ट आते हैं। एक होता है

[04:07:01] क्राउडिंग इन, एक होता है क्राउडिंग आउट।

[04:07:03] देखो अगर ना सरकार पैसा खर्च करे। ठीक है?

[04:07:07] अगर सरकार पैसा खर्च करती है। मान लो फॉर

[04:07:10] एग्जांपल सरकार ने सड़कें बनाई तो कई बार

[04:07:12] प्राइवेट सेक्टर भी आएगा साथ में। वो

[04:07:15] बोलेगा यार सरकार ने सड़कें बना दी। चलो

[04:07:17] अब मेरा काम बनता है कि सड़कों के आसपास

[04:07:19] थोड़ा अपना खाने पीने की चीजें बना दे।

[04:07:21] कुछ हाईवेज के आसपास बना दें। कुछ एनर्जी

[04:07:23] का सरकार ने काम कर दिया। मैं उसमें कुछ

[04:07:24] ऐड ऑन कर दूं। कुछ उसमें और फर्दर कर दूं।

[04:07:27] क्योंकि जब सरकार खर्चा करती है तो

[04:07:28] प्राइवेट सेक्टर भी एक तरह से वो भी

[04:07:30] मोटिवेट होता है। इसी को बोलते हैं

[04:07:32] क्राउडिंग इन। यहां पर देखो जब प्राइवेट

[04:07:34] सेक्टर इनकरेज हो रहा है ना फाइनेंसियल

[04:07:36] मार्केट क्योंकि सरकार खर्चा कर रही है तो

[04:07:40] इसको बोलते हैं हम क्राउडिंग इन। इसको

[04:07:42] बोलते हैं क्राउडिंग इन। तो ऑप्शन बी

[04:07:43] इसमें आंसर सही होगा। अच्छा एक कांसेप्ट

[04:07:46] आता है आपका क्राउडिंग आउट। क्राउडिंग

[04:07:48] आउट। क्राउडिंग आउट का मतलब क्या होता है?

[04:07:50] क्राउडिंग आउट का मतलब होता है जब सरकार

[04:07:53] जरूरत से बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर दे। जब

[04:07:56] सरकार जरूरत से बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर

[04:07:58] देती है तो कई बार प्राइवेट सेक्टर

[04:08:00] डिसइंसेंटिवाइज होता है। वो बोलता है कि

[04:08:01] सारा खर्चा तो सरकार ने कर दिया। सारा जो

[04:08:04] पैसा था सरकार के पास ही आ चुका है।

[04:08:06] क्योंकि सरकार ने ही सब जगह से लोन ले

[04:08:07] लिया है। अब प्राइवेट सेक्टर के पास पैसा

[04:08:09] ही नहीं बचा है इन्वेस्ट करने के लिए।

[04:08:10] उसको बोलते हैं हम क्राउडिंग आउट। तो इन

[04:08:12] का मतलब होता है प्राइवेट सेक्टर जब

[04:08:14] इनकरेज होता है। आउट का मतलब होता है जब

[04:08:16] प्राइवेट सेक्टर डिसरेज होता है।

[04:08:22] एक क्वेश्चन ये ट्राई करो।

[04:08:25] एक क्वेश्चन इसको ट्राई करेंगे।

[04:08:30] देखो आप लोगों ने कई बच्चे ना दो-तीन बार

[04:08:33] कमेंट कर रहे हैं। मैंने पहले भी बोला था

[04:08:35] आप एक बार कमेंट करोगे आपको अपना जवाब

[04:08:37] मिलेगा। 10 बार कमेंट करोगे नहीं मिलेगा।

[04:08:40] ठीक है?

[04:09:28] देखो यहां पर आपकी सारी स्टेटमेंट्स जो

[04:09:32] हैं वो अपने आप बिल्कुल करेक्ट हैं। ऑल

[04:09:34] थ्री आर राइट। देखो बिल्कुल घबराना नहीं

[04:09:37] है देख के। मैं हर एक टर्म आपको एक्सप्लेन

[04:09:39] करने के लिए क्वेश्चन को लेकर आया हूं।

[04:09:41] पहला स्टेटमेंट कह रहा है कि फिस्कल ड्रैग

[04:09:43] कब होता है? फिसिकल ड्रैप तब होता है जब

[04:09:46] इकोनॉमिक ओवर हीटिंग होती है और हाई

[04:09:48] इनफ्लेशन होता है। देखो सुनना मेरी बात

[04:09:50] को। एक्चुअली पॉइंट पता क्या है? जब मान

[04:09:53] लो महंगाई बहुत ज्यादा है। ठीक है ना? उस

[04:09:56] टाइम पता है क्या होता है? महंगाई ज्यादा

[04:09:58] होने की वजह से या इनकम ज्यादा बढ़ने की

[04:10:00] वजह से अब क्या होगा? अब ज्यादा टैक्स रेट

[04:10:04] लगेगा। मान लो एक बंदे की इनकम पहले

[04:10:05] 10,000 थी तो उसके ऊपर हो सकता है 10%

[04:10:07] टैक्स रेट लगता हो। अब उसकी इनकम 15,000

[04:10:09] होगी। अब उसके ऊपर 15% टैक्स रेट लगेगा।

[04:10:12] तो इससे पता क्या हुआ? आप नोटिस कर पाओगे

[04:10:15] कि सरकार ने टैक्स रेट नहीं बढ़ाया। सरकार

[04:10:18] ने टैक्स रेट नहीं बढ़ाया। बट

[04:10:22] लोगों की इनकम बढ़ गई ना। लोगों की इनकम

[04:10:24] बढ़ने से लोग ज्यादा बड़ी टैक्स ब्रैकेट

[04:10:27] के अंदर आ गए। जब ज्यादा बड़ी टैक्स

[04:10:29] ब्रैकेट के अंदर आ जाएंगे तो सरकार का

[04:10:30] रेवेन्यू बढ़ता रहेगा। राइट? तो इससे पता

[04:10:33] क्या होगा? आप नोटिस कर पाओगे। आपकी इनकम

[04:10:36] बढ़ी। आपको लगा यार अब मैं ज्यादा खर्चा

[04:10:37] करूंगा। पर नहीं क्योंकि आपकी इनकम बढ़ने

[04:10:40] से आप ज्यादा टैक्स ब्रैकेट के अंदर आ

[04:10:41] चुके हो। आपके ऊपर ज्यादा टैक्स लग रहा

[04:10:43] है। इस वजह से आपकी कई बार स्पेंडिंग नहीं

[04:10:46] भी बढ़ती। इसी को बोलते हैं फिसिकल ड्रैग।

[04:10:49] इंक्रीस इन टैक्सेस रिड्यूसेस द एग्रीगेट

[04:10:51] डिमांड एंड कंज्यूमर स्पेंडिंग फ्रॉम

[04:10:52] टैक्स पेयर। बिकॉज़ उनके ज्यादातर पोर्शन

[04:10:54] आपका टैक्स देने में चला जाता है और उससे

[04:10:56] आपकी जो स्पेंडिंग है वो कम हो जाती है।

[04:10:58] एक तरह से ड्रैग हो जाता है। उतना ग्रोथ

[04:11:00] नहीं देखने को मिल पाता। सेकंड स्टेटमेंट

[04:11:02] यहां पे कह रहा था जो प्रोग्रेसिव

[04:11:04] टैक्सेशन होता है वो इसी का एग्जांपल है।

[04:11:05] हां प्रोग्रेसिव टैक्सेशन में ही होगा। जब

[04:11:07] आपकी इनकम बढ़ेगी तो आपको ज्यादा टैक्स

[04:11:09] लगेगा। ये भी करेक्ट है। तीसरा कह रहा है

[04:11:12] कि फिस्कल क्लिफ एक कांसेप्ट होता है।

[04:11:14] यहां पर क्या होता है? यहां पर आपका कैश

[04:11:17] कम होता है विद द पब्लिक एज अ रिजल्ट ऑफ़

[04:11:20] हाई टैक्सेस एंड लो पब्लिक स्पेंडिंग।

[04:11:21] देखो कई बार ना सरकार पहले बहुत खर्चा

[04:11:24] करती है पर एक टाइम के बाद सरकार खर्चा कम

[04:11:26] करने लग जाती है और टैक्सेस बढ़ाने लग

[04:11:28] जाती है। जब सरकार एक टाइम के बाद टैक्सेस

[04:11:30] बढ़ाने लग जाएगी और खर्चा कम करने लग

[04:11:32] जाएगी तो लोगों के हाथों में पैसा कम हो

[04:11:34] जाएगा। लोगों के हाथों में पैसा कम हो

[04:11:35] जाएगा इसको बोलते हैं हम फिस्सल क्लिफ। तो

[04:11:38] ऑल द थ्री स्टेटमेंट्स आर करेक्ट इन दिस

[04:11:40] पर्टिकुलर केस। तो ऑप्शन डी वन टू एंड

[04:11:43] थ्री इज़ द राइट आंसर।

[04:11:45] क्या ये बात सबको क्लियर है?

[04:11:49] अब देखो ब्रेक नहीं दे रहा अभी अभी बस 1

[04:11:52] मिनट का ब्रेक है क्योंकि इसके आगे की

[04:11:54] पीडीएफ लगानी है वो इतनी पीडीएफ ना इतने

[04:11:56] स्लाइड स्टोर नहीं हो पा रही इसके अंदर तो

[04:11:58] बस 1 मिनट का ब्रेक है जिसमें हम अपनी

[04:12:00] स्लाइड्स आगे डालेंगे अभी कोई ब्रेक नहीं

[04:12:03] मिल रहा अभी जस्ट 1 मिनट आप वेट करना तो

[04:12:05] अब हम आगे कंटिन्यू करेंगे 1 मिनट के बाद

[04:14:43] ओके ओके ओके ठीक है हम तो आखिरी कुछ

[04:14:46] कांसेप्ट बचे हैं हमारे यहां पे बजट के

[04:14:49] ठीक है मैंने बोला था मत जाना फिर भी

[04:14:50] 50-60 बच्चे चले गए कहीं पे कोई बात नहीं

[04:14:52] चलो अब देखो एक दो कांसेप्ट बचे हुए हैं

[04:14:56] बजट के आखिरी वाले जैसे इस बार ना सबसे एक

[04:14:58] बहुत बड़ी अनाउंसमेंट जो हुई बजट के अंदर

[04:15:00] वो थी बायोफार्मा शक्ति की अब इसमें से भी

[04:15:04] क्वेश्चन बन सकता है और अगर इसमें से

[04:15:06] क्वेश्चन बनेगा ना इसमें से क्वेश्चन

[04:15:08] बनेगा आपके दो वर्ड्स के डिफरेंसेस के बीच

[04:15:10] में सबसे पहली बात समझो कि क्या अनाउंस

[04:15:12] किया हमारी फाइनेंस मिनिस्टर ने हम

[04:15:16] क्या अनाउंस किया

[04:15:19] हमारी फाइनेंस मिनिस्टर ने। तो हमारी

[04:15:21] फाइनेंस मिनिस्टर ने अनाउंस ये किया है कि

[04:15:24] हम ये स्कीम लेकर आ रहे हैं बायोफार्मा

[04:15:26] शक्ति जिसकी फुल फॉर्म क्या है? स्ट्रेटजी

[04:15:29] फॉर हेल्थ केयर एडवांसमेंट थ्रू नॉलेज,

[04:15:31] टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन।

[04:15:34] ठीक है? अब इसके लिए क्या होगा? इसके लिए

[04:15:36] अगले 5 साल के लिए 10,000 करोड़ का यहां

[04:15:39] पे सरकार पैसा खर्च करेगी। पॉइंट आता है

[04:15:42] क्या मिलेगा क्या पैसा खर्च करके? देखो

[04:15:44] पहली बात तो आप यहां पे ये समझो कि यहां

[04:15:47] पर ना आपके सामने दो वर्ड्स हैं।

[04:15:51] ये दो वर्ड्स का मीनिंग समझना। प्लीज फोकस

[04:15:53] करेंगे इधर। ठीक है? हर कुछ इंपॉर्टेंट

[04:15:55] नहीं है पर ये टर्म इंपॉर्टेंट है। इधर

[04:15:56] देखो सब लोग। एक टर्म है यहां पे

[04:15:59] बायोलॉजिक्स।

[04:16:01] सर व्हाट डू यू मीन बाय दिस टर्म?

[04:16:02] बायोलॉजिक्स। बायो जहां भी वर्ड आता है ना

[04:16:05] जहां वर्ड बायो आ गया वो लाइफ को दर्शाता

[04:16:07] है। है ना? तो बायोलॉजिक्स का मतलब क्या

[04:16:10] हो गया? बायोलॉजिक्स का मतलब ऐसी ड्रग्स

[04:16:13] जो कहीं ना कहीं आपके लिविंग ऑर्गेनिज्म्स

[04:16:15] या उनके कॉमोनेंट्स से आ रही हैं। जैसे

[04:16:16] आपके प्रोटीनंस, आपके जीनंस से। तो जो भी

[04:16:19] आपकी मेडिसिंस इनसे बनती है ना उनको हम

[04:16:21] बोलते हैं बायोलॉजिक्स।

[04:16:23] समझे? तो हमारा फोकस ये है कि हम ये

[04:16:26] बायोलॉजिक्स हम यहां पे इंडिया में डेवलप

[04:16:28] करें। तो एक तो फोकस रहेगा बायोलॉजिक्स के

[04:16:31] ऊपर। दूसरी बात हमारा फोकस रहेगा

[04:16:33] बायोसिमिलर्स के ऊपर। ये वर्ड बड़ा

[04:16:36] इंपॉर्टेंट है। ये वर्ड बड़ा इंपॉर्टेंट है

[04:16:38] बायोसिमिलर्स। बायोसिमिलर्स क्या होते

[04:16:40] हैं? बायोसिमिलर का मतलब होते हैं आपकी जो

[04:16:44] भी बायोलॉजिकल मेडिसिंस है ना उनके सिमिलर

[04:16:47] वर्जनंस। उनके सिमिलर वर्जन पर ये सस्ते

[04:16:51] होते हैं अपने आप में। अब आपके दिमाग में

[04:16:53] आएगा सर ये सस्ती दवाइयां हैं मतलब हां कम

[04:16:57] कॉस्ट की हैं। ठीक है? बायोलॉजिक्स की तरह

[04:17:01] ही हैं पर कॉस्ट कम होगी इनकी। अब किसी के

[04:17:03] दिमाग में घंटी बजेगी सर आप जेरिक की बात

[04:17:06] कर रहे हो। पर दोस्तों नहीं फाइनेंस

[04:17:08] मिनिस्टर ने अपनी स्पीच में भी बोला है और

[04:17:09] मैं भी आपको बता देता हूं कि यहां पर

[04:17:12] जेनेरिक अलग चीज होती है और आपके

[04:17:14] बायोसिमिलर अलग होते हैं। क्या डिफरेंस है

[04:17:16] जेरिक और बायोसिमिलर में? ध्यान से देखना।

[04:17:18] पहली बात तो आप ये समझो कि जो जेरिक

[04:17:20] मेडिसिन होती हैं वो बहुत ही सिंपल होती

[04:17:22] हैं। बहुत ही छोटे मॉलिक्यूल केमिकल्स

[04:17:24] उसमें इस्तेमाल होते हैं। बायोसिमिलर्स के

[04:17:26] अंदर अगर हम बात करें ना ये बड़े

[04:17:28] मॉलिक्यूल प्रोटीन से यहां पे बनती हैं।

[04:17:30] जेनेरिक होती है एग्जैक्ट कॉपी। जो नॉर्मल

[04:17:34] मेडिसिन के अंदर होगा वही सेम चीज आपको

[04:17:36] जेनेरिक में देखने को मिलेगी। पर

[04:17:38] बायोसिमिनल में एग्जैक्ट कॉपी नहीं होती।

[04:17:40] सिमिलर कॉपी होती है। समझ रहे हो? जैसे

[04:17:42] मैं हूं। अब मैं आपको पढ़ा रहा हूं। मैं

[04:17:44] एक ही इंसान हूं। आप बोलोगे ना कि मेरे

[04:17:47] जैसा भी कोई पढ़ा सकता है। पॉइंट है मेरे

[04:17:49] जैसा पढ़ा सकता है पर वो मैं नहीं हऊंगा।

[04:17:52] जेनेरिक मतलब मैं ही हूं। इट इज द सेम। इट

[04:17:55] इज़ द एग्जैक्ट कॉपी। बायोसिमिलर में मेरे

[04:17:58] जैसा कोई। ठीक है? तो बायोसिमिलर में काफी

[04:18:01] हद तक सिमिलरिटी होती है। पर थोड़ा

[04:18:03] वेरिएशन भी रहता है बायोसिमिलर के अंदर।

[04:18:06] जेनेरिक को बनाना आसान होता है।

[04:18:08] बायोसिमिलर को बनाना अपने आप में काफी

[04:18:09] मुश्किल अपने आप में देखने को मिल जाएगा।

[04:18:12] जेरिक बहुत ही सस्ती दवाई होती है। लगभग

[04:18:14] 80-85% कम होती है ब्रांडेड मेडिसिन के

[04:18:16] मुकाबले। पर बायोसिमिलर की अगर हम बात

[04:18:18] करें तो ये भी सस्ती होती है पर ये 15 से

[04:18:21] 35% सस्ती होती है। ऐसा नहीं कि 80-85%

[04:18:24] सस्ती होंगी। पर हां इनमें कुछ सिमिलरिटी

[04:18:26] जरूर है जेरिक और बायोसिमिलर के बीच में

[04:18:28] वो है इनकी एफिकसी काफी अच्छी खासी होती

[04:18:30] है। सेफ्टी होती है इनकी इन दोनों की। पर

[04:18:33] ये डिफरेंसेस आपको जरूर आपको ध्यान में

[04:18:35] रखने होंगे। दीज़ आर द डिफरेंसेस। समझ गए?

[04:18:38] ये तीनचार डिफरेंसेस हैं जिनका आप ध्यान

[04:18:40] रखेंगे। बायोलॉजिक्स क्या होते हैं?

[04:18:42] बायोसिमिलर्स क्या होते हैं? और

[04:18:44] बायोसिमिलर और जेरिक का डिफरेंस क्या होता

[04:18:46] है? यह तीन बातें आपको बायोफार्मा शक्ति

[04:18:48] से पिक करने हैं। इज इट फाइन? इज इट फाइन?

[04:18:54] ये अनाउंसमेंट हुआ एक बजट के अंदर

[04:18:55] बहुतेंट। बाकी एक और इंपॉर्टेंट

[04:18:58] अनाउंसमेंट ये था कि हमने ना सोचा है कि

[04:19:00] हम मेडिसिन के सेक्टर में काफी सारा काम

[04:19:02] करेंगे। जैसे फॉर एग्जांपल हमारा जो आयुष

[04:19:05] है आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा,

[04:19:08] होम्योपैथी इन सब चीजों के लिए हम यहां पे

[04:19:11] तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट्स यहां पे

[04:19:13] हम आयेदा के सेटअप करेंगे। इसके अलावा

[04:19:16] आयुष फार्मेसी सेटअप होंगी, अपग्रेड

[04:19:18] होंगी। ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज होंगी।

[04:19:20] एक ना डब्ल्यूho का ग्लोबल ट्रेडिशनल

[04:19:22] मेडिसिन सेंटर है। जामनगर गुजरात के अंदर

[04:19:24] आपने सुना होगा इसके अंदर जामनगर गुजरात

[04:19:26] में WHO का वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का

[04:19:29] ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर है। इसको

[04:19:30] हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने ही इनोगेट

[04:19:32] किया था। तो उसको अपग्रेड किया जाएगा।

[04:19:35] वहां पर और बेहतर ढंग से हम टेस्टिंग

[04:19:37] करेंगे। एविडेंस बेस्ड डिसीजन मेकिंग

[04:19:38] होगी। ये सारी बातें यहां पे हमें देखने

[04:19:40] को मिलती हैं। ठीक है? तो आयुष के लिए हम

[04:19:44] यहां पे काफी सारा काम कर रहे हैं। तो

[04:19:45] देखो ये सारी अनाउंसमेंट्स थी जो हमें

[04:19:48] यहां पे बजट के कॉन्टेक्स्ट में यहां पे

[04:19:50] डिस्कस करनी थी। क्या आपको फिस्कल पॉलिसी

[04:19:53] वाला पूरा कांसेप्ट डिस्कस हुआ या समझ

[04:19:55] आया? नहीं आया? फिस्कल पॉलिसी वाला आपको

[04:19:57] कांसेप्ट पूरा क्लियर हुआ या नहीं हुआ? यस

[04:20:00] और नो।

[04:20:04] हमने करंट भी डिस्कस किया, स्टैटिक भी

[04:20:06] डिस्कस किया। एंड एट द सेम टाइम हमने काफी

[04:20:08] सारे एमसीक्यू भी प्रैक्टिस यहां पे कर

[04:20:10] लिए।

[04:20:13] राइट।

[04:20:24] ठीक है सर। ठीक है। आगे देखो कुछ

[04:20:25] छोटे-छोटे टॉपिक्स और भी हैं। ठीक है। आगे

[04:20:27] हमें मॉनिटरी पॉलिसी वगैरह भी पढ़ना है।

[04:20:29] फाइनेंसियल मार्केट भी पढ़ना है। पर पहले

[04:20:31] कुछ छोटे टॉपिक्स हम एक बार क्विकली इनको

[04:20:33] रैप अप कर लेते हैं। बहुत जल्दी हो जाएगा

[04:20:35] ये पॉवर्टी वगैरह वाले टॉपिक्स। बहुत ईजी

[04:20:37] टॉपिक्स हैं। तो लेट्स ड्राई दीज़ टॉपिक्स

[04:20:39] आल्सो। पॉवर्टी का मीनिंग आप सब लोग जानते

[04:20:41] ही होंगे।

[04:20:43] बेसिक मतलब क्या है पॉवर्टी का? कि आपके

[04:20:46] पास इतना भी पैसा नहीं है कि आप यहां पे

[04:20:48] जो आम जरूरत की चीजें हैं रोटी, कपड़ा,

[04:20:50] मकान उनको आप यहां पे अफोर्ड कर पाएं।

[04:20:52] उसको हम बोलते हैं कि वो पॉवर्टी है। बट

[04:20:55] इस बार वर्ल्ड बैंक ने पॉवर्टी की

[04:20:57] डेफिनेशन चेंज करी है। क्या आप मुझे बता

[04:20:59] सकते हो व्हाट इज द डेफिनेशन ऑफ़ वर्ल्ड

[04:21:01] बैंक? जो कि इस बार चेंज हुई है? व्हाट इज

[04:21:03] द लेटेस्ट डेफिनेशन ऑफ़ वर्ल्ड बैंक फॉर

[04:21:05] पावर्टी? बता सकते हो आप लोग।

[04:21:10] हम देखो अगर हम बात करें ना वर्ल्ड बैंक

[04:21:13] की वर्ल्ड बैंक ने यहां पर जो डेफिनेशन इस

[04:21:15] बार चेंज करी है ना वो यह है

[04:21:18] कि हम पुअर एक ऐसे इंसान को मानेंगे जो

[04:21:21] कहीं ना कहीं 3 यूएस डॉलर पर डे से कम में

[04:21:24] यहां पे रह रहा है। द वर्ड इज़ व्हाटेंट

[04:21:27] हियर इट इज़ $3 यूएस पर डे।

[04:21:31] देखो यह नंबर ना कई बुक्स में अभी भी $1.9

[04:21:36] लिखा हुआ है। पर यह $1.9 कब का चेंज हो

[04:21:39] गया है? यह $1.9 कब का चेंज हो गया है?

[04:21:42] उसके बाद यह आपका 2 आई थिंक $15 था। यह भी

[04:21:45] चेंज हो चुका है। अब यहां पर ये कितना हो

[04:21:47] चुका है? अब ये आ चुका है $3 पर डे। ठीक

[04:21:50] है? तो लेटेस्ट डेफिनेशन जो वर्ल्ड बैंक

[04:21:52] की है वो है $3 यूएस डॉलर पर डे। उसको

[04:21:56] वर्ल्ड बैंक यहां पे गरीब मानता है। समझे

[04:21:59] मेरी बात को? तो तीन वाली बात याद रखनी

[04:22:01] है। $2.15 या $1.9 आपको नहीं याद रखना। वो

[04:22:04] पुरानी डेफिनेशन थी वर्ल्ड बैंक की। चलो

[04:22:06] ठीक है। ये बात तो सर क्लियर हुई। अब देखो

[04:22:09] बात जब होती है ना कि सर इंडिया में हम

[04:22:12] कैसे देखते हैं गरीबी? देखो अब तो हमारे

[04:22:14] पास जो टेक्निक्स आ गई हैं उसमें हम

[04:22:16] इस्तेमाल करते हैं मल्टीडमेंशनल पॉवर्टी

[04:22:19] इंडेक्स का। इसको देखो प्लीज ध्यान से सुन

[04:22:21] लेना। दो बार क्वेश्चन प्रीलिम्स में और

[04:22:24] एक बार क्वेश्चन मेंस में इस टॉपिक से

[04:22:26] ऑलरेडी आ चुका है। मेंस में सीधा 15 नंबर

[04:22:29] का क्वेश्चन इसी पर्टिकुलर क्वेश्चन से

[04:22:30] आया था डायरेक्टली क्लास में से उठ के। अब

[04:22:33] इस पे ध्यान देना आप लोग। इसमें ध्यान

[04:22:35] देना आप लोग।

[04:22:39] जब हम बात करते हैं ना मल्टीडमेंशनल

[04:22:42] पॉवर्टी इंडेक्स की। पहली चीज तो दिमाग

[04:22:44] में आएगा कि ये इंडेक्स निकालता कौन है?

[04:22:47] ये इंडेक्स दोस्तों निकालता है हमारा

[04:22:49] यूएनडीपी और ओपीएचआई। ठीक है? आपका जो

[04:22:52] यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम है और

[04:22:54] आपका ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन

[04:22:56] डेवलपमेंट इशिएटिव यूएनडीपी एंड ओपीएचआई

[04:22:58] मिलकर इस पर्टिकुलर इंडेक्स को निकालते

[04:23:00] हैं। चलो ये बात तो समझ आई। इसका नाम क्या

[04:23:02] है सर? इसका दोस्तों नाम है मल्टीडमेंशनल

[04:23:05] पावर्टी इंडेक्स।

[04:23:09] जब हमने ये वर्ड लिखा ना यहां पे

[04:23:10] मल्टीडमेंशनल। इसका मीनिंग पता है क्या बन

[04:23:13] गया? यहां पर हम पावर्टी को अलग-अलग

[04:23:16] डायमेंशंस में हम यहां पे देखेंगे।

[04:23:18] अलग-अलग डायमेंशन में देखने का मतलब हम

[04:23:20] सिर्फ और सिर्फ पैसों के कॉन्टेक्स्ट में

[04:23:22] नहीं देखेंगे। हम यहां पे डिफरेंट

[04:23:24] डायमेंशन को कंसीडर करेंगे। अब सवाल आता

[04:23:26] है कितनी डायमेंशन देखनी है यहां पे? आंसर

[04:23:27] इज़ तीन। कौन सी तीन डायमेंशंस हैं यहां

[04:23:30] पे? यहां पर जो तीन डायमेंशंस हैं या तीन

[04:23:32] हां, तीन डायमेंशंस जो हैं उनको आप ध्यान

[04:23:34] से देखो। पहला डायमेंशन है हेल्थ।

[04:23:38] ठीक है? दूसरा डायमेंशन है आपका एजुकेशन

[04:23:40] और तीसरा डायमेंशन है आपका स्टैंड ऑफ

[04:23:41] लिविंग। डायमेंशन कितनी है? तीन। कौन-कौन

[04:23:45] सी? हेल्थ, एजुकेशन, स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग।

[04:23:49] ये तीन डायमेंशंस हैं। ओके? पर अगर हम बात

[04:23:54] करते हैं इंडिकेटर्स की। आप बताओ कितने

[04:23:56] इंडिकेटर हैं इसके अंदर? दोस्तों, इसके

[04:23:59] अंदर टोटल नंबर ऑफ इंडिकेटर्स वो हैं 10।

[04:24:02] 10 इंडिकेटर्स आपको यहां पे देखने को

[04:24:04] मिलेंगे। कितने? 10 इंडिकेटर्स। व्हाट आर

[04:24:07] दोज़ 10 इंडिकेटर्स? देखो, हेल्थ के अंदर

[04:24:10] दो इंडिकेटर्स हैं। न्यूट्रिशन एंड चाइल्ड

[04:24:12] मोटेलिटी।

[04:24:14] एजुकेशन के अंदर दो इंडिकेटर हैं। एक है

[04:24:16] ईयर इन स्कूलिंग, एक है स्कूल अटेंडेंस।

[04:24:19] और जब हम बात करते हैं आपके स्टैंडर्ड ऑफ

[04:24:21] लिविंग की वहां पर छह इंडिकेटर आपको देखने

[04:24:23] को मिलते हैं। कुकिंग फ्यूल, सैनिटेशन,

[04:24:26] ड्रिंकिंग वाटर, इलेक्ट्रिसिटी, हाउसिंग,

[04:24:28] एसेट्स। तो टोटल आपको यहां पे 10 इंडिकेटर

[04:24:32] देखने को मिलते हैं। डायमेंशन तीन,

[04:24:34] इंडिकेटर 10।

[04:24:37] इन सबको कंबाइन करके हम यहां पे निकालते

[04:24:39] हैं क्या? हमारा मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी

[04:24:42] इंडेक्स।

[04:24:44] ठीक है? अब किसी बच्चे के दिमाग में यह भी

[04:24:47] आएगा सर यहां भी दो इंडिकेटर हैं। अरे

[04:24:48] नहीं दो इंडिकेटर नहीं है। इनका मैं

[04:24:50] मीनिंग समझाता हूं। रुको अभी इन पे आओ। अब

[04:24:52] होता पता क्या है यहां पे? यहां पर पता

[04:24:54] क्या होता है? 1/3 वेटेज है आपकी हेल्थ

[04:24:58] की। 1/3 वेटेज है आपकी एजुकेशन की। 1/3

[04:25:02] वेटेज है आपकी स्टैंड ऑफ लिविंग की। चलो

[04:25:04] ठीक है। अब पता है क्या है? हेल्थ भी दो

[04:25:07] हिस्सों में डिवाइडेड है। आपका न्यूट्रिशन

[04:25:08] एंड चाइल्ड मोटलिटी। तो न्यूट्रिशन की

[04:25:10] वेटेज यहां पे कितनी 1/6 चाइल्ड मोटलिटी

[04:25:13] की वेटेज है 1/6 ऐसे ही ईयर इन स्कूलिंग

[04:25:15] की वेटेज है 1/6 ईयर इन अह सॉरी स्कूल

[04:25:18] ट्रेंड्स की वेटेज है 1/6 बट अगर हम बात

[04:25:21] करते हैं ना स्टैंड ऑफ लिविंग की अब इसमें

[04:25:23] तो छह आइटम्स हैं। छह आइटम्स हैं और उनका

[04:25:25] कंबाइंड वेटेज 1/3 है ना तो एक्चुअली इन

[04:25:28] सबकी वेटेज कितनी आती है? 1/8 इसकी भी

[04:25:31] 1/18, इसकी भी 1/8, इसकी भी 1/8 सबकी 1/18

[04:25:34] तो सब ऐड होंगे तो बनेगा 1/3। तो इस तरह

[04:25:37] से आपका ये पूरा मल्टीनेशनल पॉवर्टी

[04:25:39] इंडेक्स आ रहा है। सर इतना डिटेल में

[04:25:41] क्यों डिस्कस कर रहे हैं? क्योंकि भाई तीन

[04:25:43] बार क्वेश्चन आ गया। दो बार प्रीलिम्स में

[04:25:44] एक बार मेंस में इसीलिए डिटेल में बता रहा

[04:25:46] हूं।

[04:25:47] ठीक है? नहीं नहीं अभिषेक 5 मिनट रुको।

[04:25:50] आपको खुद आंसर मिलेगा। पांच मिनट रुको

[04:25:52] आपको। तो इस तरह से हम लोग मल्टीमेंशनल

[04:25:54] पॉवर्टी इंडेक्स को हम यहां पे कैलकुलेट

[04:25:56] करते हैं। सर बाकी तो समझ आ गया। पर ये दो

[04:25:59] वर्ड्स यहां लिखे हुए हैं। इनका मतलब नहीं

[04:26:01] मुझे समझ आ रहा। इंटेंसिटी ऑफ़ पॉवर्टी एंड

[04:26:03] हेड काउंट रेशो। देखो इसका मीनिंग भी समझ

[04:26:07] लेते हैं कि ये इंटेंसिटी ऑफ़ पॉवर्टी एंड

[04:26:09] हेड काउंट रेशियो का मतलब क्या है?

[04:26:12] देखो

[04:26:15] मान लो जैसे मैंने एक यहां पे लाइन ड्रॉ

[04:26:18] करी।

[04:26:19] मैंने कहा ये लाइन है आपकी

[04:26:22] ये है मान लो पावर्टी लाइन।

[04:26:25] ठीक है? इस पावर्टी लाइन के

[04:26:29] नीचे जो जो भी होगा ये सब लोग मान लो गरीब

[04:26:33] हैं। है ना? पावर्टी लाइन के जो नीचे

[04:26:35] होंगे वो कंसीडर होंगे पुअर एंड पावर्टी

[04:26:37] लाइन के जो ऊपर होंगे उनको हम बोलेंगे नॉन

[04:26:39] पुअर। ठीक है? अब पॉइंट पता क्या आता है?

[04:26:43] ये भी गरीब है। ये भी गरीब है। ये भी गरीब

[04:26:45] है। ये भी गरीब है। गरीब तो ये सारे हैं।

[04:26:48] पर फर्क पता क्या है? फर्क पता क्या है?

[04:26:51] ये इंसान कम गरीब है। और ये इंसान बेचारा

[04:26:56] बहुत ज्यादा गरीब है। मानते हो मेरी बात

[04:26:59] को? हां सर। तो अगर हमें ये निकालना हो कि

[04:27:02] कितने लोग गरीब हैं। हाउ मेनी पीपल आर

[04:27:04] पुअर? उसके लिए हम निकालते हैं हेड काउंट

[04:27:07] रेश्यो। अगर हमें नंबर चाहिए ना कि कितने

[04:27:10] लोग गरीब हैं तो भाई ये सारे लोग गरीब

[04:27:12] हैं। तो हेड काउंट रेश्यो के अंदर हमें इन

[04:27:14] सबका बारे में पता लगेगा। पर अगर हमें ये

[04:27:18] निकालना हो कि कौन कितना कम गरीब, कौन

[04:27:21] कितना ज्यादा गरीब। उसके लिए हमारे पास

[04:27:23] क्या होता है? उसके लिए हमारे पास होता है

[04:27:25] पावर्टी डेप्थ रेशियो या पावर्टी गैप

[04:27:28] रेशो। वो हमें क्या बताएगा? वो हमें

[04:27:30] बताएगा कि यार यह वाला बंदा ना यह कम गरीब

[04:27:32] है। यह बहुत ज्यादा गरीब है। क्योंकि गरीब

[04:27:34] भी एक सिंगल मोनोलिथ एंटिटी नहीं है।

[04:27:37] गरीबों में भी कम गरीब होते हैं। गरीबों

[04:27:39] में भी कोई ज्यादा बंदा गरीब होता है।

[04:27:40] किसी को खाने के लिए कुछ नहीं मिलता। किसी

[04:27:41] के लिए थोड़ा बहुत मिल जाता है। तो ये

[04:27:43] बंदा कम गरीब है। ये बंदा ज्यादा गरीब है।

[04:27:45] तो दो यहां पे टर्मिनोलॉजीस हमें यहां पे

[04:27:47] देखने को मिलती हैं। वो है पहली है हेड

[04:27:49] काउंट रेशो। हेड काउंट रेशियो क्या

[04:27:51] बताएगी? कितने लोग गरीब हैं? नंबर ऑफ़ पुअर

[04:27:54] एस्टेड एज अ प्रोपोशन ऑफ़ पीपल फ्रॉम

[04:27:55] पॉवर्टी लाइन। गरीबी रेखा से नीचे कितने

[04:27:57] लोग हैं? इसको हम लोग पावर्टी इंसिडेंस

[04:28:00] रेशियो भी बोलते हैं। बट अगर हम बोलते हैं

[04:28:03] पावर्टी डेप्थ रेशो की या पॉवर्टी गैप

[04:28:04] रेशियो की ये क्या बताता है कि कितने लोग

[04:28:06] व्हाट इज द गैप? पुअर का कंजमशन कितना दूर

[04:28:09] है पावर्टी लाइन से वो होता है पावर्टी

[04:28:11] डेप्थ या पावर्टी गैप रेशो। अब आप मुझे एक

[04:28:13] बार सोच के बताओ अगर हम बात करते हैं इस

[04:28:16] मल्टीडमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स की। यह आपको

[04:28:20] क्या बताएगा? क्या आपको यह हेड काउंट

[04:28:23] रेशियो बताएगा या इंटेंसिटी ऑफ़ पॉवर्टी

[04:28:25] बताएगा? आप मुझे बताओ क्या बताएगा? देखो

[04:28:28] यार सुनो मेरी बात। यह एक्चुअली ना आपको

[04:28:31] दोनों बताएगा। कैसे? यह तो बता ही देगा

[04:28:34] कितने लोग गरीब हैं। पर वो आपको ये भी बता

[04:28:36] देगा कि कितना ज्यादा या कितना कम गरीब

[04:28:39] है। कैसे सर? वो कैसे? अरे भाई मान लो एक

[04:28:41] बंदे को कुछ भी नहीं मिल रहा है इन 10 में

[04:28:42] से। वो बंदा बहुत ज्यादा गरीब हुआ। एक

[04:28:45] बंदे को इनमें से थोड़ा सा चीजें मिली तो

[04:28:47] वो कम गरीब हुआ। पर गरीब तो दोनों हुए ना।

[04:28:50] तो इस वजह से क्या होता है ना यहां पर हम

[04:28:52] क्या निकाल सकते हैं? व्हाट कैन बी मेजर

[04:28:54] रिगार्डिंग द पॉवर्टी? हम दोनों चीजें

[04:28:56] निकाल पाएंगे। हम हेड काउंट रेशियो भी

[04:28:58] निकाल पाएंगे। हम इंटेंसिटी ऑफ़ पॉवर्टी भी

[04:29:00] निकाल पाएंगे। तो इस तरह से आपका पूरा ये

[04:29:02] मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स बनता है।

[04:29:07] क्या ये बात क्लियर है सबको?

[04:29:09] समझ गए सर? समझ गए? अब दोस्तों अभी कुछ

[04:29:12] महीने पहले अभी 2 से 3 महीने पहले हां एक

[04:29:15] लाइन और एक लाइन और एक इंसान मल्टीमशनल

[04:29:18] पुअर है या नहीं वो कैसे पता लगेगा? अगर

[04:29:20] वो एटलीस्ट 1/3 ऑफ इंडिकेटर्स में

[04:29:23] डिप्र्राइव्ड है। अगर उसको कम से कम 1/3

[04:29:25] ऑफ द इंडिकेटर्स में वो डिप्र्राइव्ड है

[04:29:27] तो उसको हम लोग यहां पर ग्रीब बोलते हैं।

[04:29:29] अब कुछ महीने पहले लगभग दो-ती महीने पहले

[04:29:31] ही मल्टीीनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स का डाटा

[04:29:34] लेटेस्ट डाटा सरकार ने सरकार ने नहीं

[04:29:36] यूएनडीपी और ओपीएचआई ने रिलीज़ किया। क्या

[04:29:39] आया उस डाटा के अंदर? क्या आया उस डाटा के

[04:29:42] अंदर? मैं बताता हूं क्या आया उस डाटा के

[04:29:44] अंदर? उस डाटा के अंदर यहां पे आप नोटिस

[04:29:46] कर पाओगे। हां, पहली चीज़ पहली चीज़

[04:29:48] देखेंगे। एमपीआई का जो डेटा होता है ना वो

[04:29:51] जीरो से लेकर वन के बीच में होता है। अगर

[04:29:54] जीरो की तरफ है

[04:29:56] अगर ज़ीरो की तरफ है तो पॉवर्टी कम है। वन

[04:30:00] की तरफ है ज्यादा है। तो आपको ध्यान रखना

[04:30:02] है अगर ये वैल्यू ज्यादा है ना

[04:30:04] मल्टीमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स की इसका मतलब

[04:30:06] पता है क्या है कि वहां पे पॉवर्टी ज्यादा

[04:30:07] है। ठीक है? और इस बार जो हमने 2025 का

[04:30:11] एडिशन आया मल्टीीनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स का

[04:30:13] जो अभी 3 महीने पहले ही आया है उसमें पहली

[04:30:16] बार पहली बार एनवायरमेंट को भी जोड़ा गया

[04:30:19] है। जैसे फॉर एग्जांपल आप नोटिस कर पाओगे

[04:30:21] गर्मी कितनी है, सूखा कितना है, फ्लड्स

[04:30:23] कितने हैं। है ना? एयर पोल्यूशन कितना है?

[04:30:26] उसको भी यहां पे इन्होंने इंक्लूड किया है

[04:30:28] कि कैसे उनका एक्सपोज़र कितना है। क्योंकि

[04:30:30] यार देखो अगर ये सब कहीं ना कहीं हज़ार्ड्स

[04:30:32] होंगे उसकी वजह से भी कहीं ना कहीं गरीबी

[04:30:34] के ऊपर इंपैक्ट तो आता ही आता है। तो इसको

[04:30:36] भी इन्होंने यहां पे इंक्लूड किया हुआ है।

[04:30:39] अरे गिनी कोफिशंट एक अलग कांसेप्ट है।

[04:30:40] गिनी कोफिशंट पे अभी आएंगे। रुक जाओ रुक

[04:30:42] जाओ। वो वो इनकलिटी निकालने का तरीका है।

[04:30:44] पावर्टी निकालने का तरीका नहीं है।

[04:30:46] पावर्टी इज़ डिफरेंट। इनकलिटी इज़ डिफरेंट।

[04:30:48] ठीक है? अब इस बार इन्होंने बताया क्या

[04:30:50] है? इस बार इन्होंने बताया है कि अगर हम

[04:30:52] बात करें ना दुनिया की तो लगभग 1.1 बिलियन

[04:30:55] मतलब 110 करोड़ लोग जो कि दुनिया का 18%

[04:30:58] पॉपुलेशन बनता है वो मल्टीडमेंशनल पॉवर्टी

[04:31:01] में आपको देखने को मिल जाएंगे। और इसमें

[04:31:03] भी अगर हम बात करें ज्यादातर जो लोग हैं

[04:31:05] वो कहीं ना कहीं ऐसे एरियाज में रहते हैं

[04:31:07] जहां पर कोई ना कोई क्लाइमेट हज़ार्ड है।

[04:31:09] मतलब या तो वहां सूखा पड़ता है या फ्लड्स

[04:31:11] आते हैं, एयर पोल्यूशन ज्यादा है या हीट

[04:31:13] बहुत ज्यादा है। तो गरीबी और हज़ार्ड का भी

[04:31:16] कनेक्शन उन्होंने यहां पे दिखाया है। समझे

[04:31:18] मेरी बात को? इसके साथ ही साथ अगर हम बात

[04:31:20] करें बच्चों में 27% बच्चे कहीं ना कहीं

[04:31:23] गरीब हैं। ठीक है? अर्बन और रूरल एरियाज

[04:31:26] में भी डिस्पैरिटी है। अगर हम बात करें ना

[04:31:28] 83% जो गरीब लोग हैं वो गांव में रहते

[04:31:31] हैं। हालांकि गांव में दुनिया की पॉपुलेशन

[04:31:34] 55% है पर गरीबों में ज्यादातर लोग गांव

[04:31:37] में रह रहे हैं। फिर अगर हम बात करें सबसे

[04:31:40] ज्यादा गरीब कहां रह रहे हैं? सब सहधारण

[04:31:42] अफ्रीका में। लगभग 51% दुनिया के जो गरीब

[04:31:45] हैं वह सबधारण अफ्रीका में रहते हैं। फिर

[04:31:46] साउथ एशिया की बात करें तो यहां पर आपको

[04:31:49] 390 मिलियन या 35% आपको लोग देखने को मिल

[04:31:51] जाएंगे। इन्हीं दोनों एरियाज को आप कंबाइन

[04:31:53] कर दो। लगभग 84% गरीबी यहीं पर है आपको

[04:31:56] इन्हीं दो रीजंस के अंदर। अब पॉइंट आता है

[04:31:59] कि सर आप बाकी सब छोड़ो। आप हमें भारत की

[04:32:01] बात बताओ। भारत कैसा कर रहा है? देखो भारत

[04:32:04] की अगर हम बात करें भारत में जो

[04:32:06] मल्टीीनेशनल पॉवर्टी थी ना वो 55.1%

[04:32:09] थी। आज से 20 साल मतलब 50 20056 के अंदर

[04:32:13] बट 2019-21 के डाटा के हिसाब से हमारे पास

[04:32:16] ये अब 16.4% हो गई है। तो कहीं ना कहीं 41

[04:32:20] करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।

[04:32:22] ये मल्टीनेशनल पावर्टी इंडेक्स हमें यहां

[04:32:24] पे बताता है। ठीक है ना? ये अभी का डाटा

[04:32:27] है। 2 महीने पहले जो डाटा आया मैं उसी की

[04:32:28] बात कर रहा हूं। एज़ इट इज़ मैंने वहां से

[04:32:30] लिया है। ठीक है?

[04:32:33] ठीक है? तो बाकी भारत में क्या समस्याएं

[04:32:35] हैं? क्लीन कुकिंग फ्यूल नहीं है। क्योंकि

[04:32:37] देखो वो जो हमने स्टैंड ऑफ लिविंग देखा था

[04:32:39] ना उसमें कुकिंग फ्यूल की भी बात हुई थी।

[04:32:40] तो दैट इज़ आल्सो देयर। फिर हाउसिंग नहीं

[04:32:43] है। ये एक समस्या है। पुअर सैनिटेशन है।

[04:32:45] अंडर न्यूट्रिशन है, एजुकेशन की समस्या

[04:32:48] है। ये कहीं ना कहीं सभी समस्याएं जो है

[04:32:50] ना ये भारत को थोड़ा सा पीछे खींच रही

[04:32:52] हैं। ऐसा यहां पर इस बार के मल्टीडमेंशनल

[04:32:54] पावर्टी इंडेक्स ने यहां पे बताया है।

[04:32:58] क्या ये समझ आया कि इस बार का एमपीआई

[04:33:00] इंडेक्स क्या बोलता है?

[04:33:03] ठीक है? ये इस बार का मल्टीडमेंशनल

[04:33:05] पावर्टी इंडेक्स हमने ये बता रहा है।

[04:33:07] अच्छा एक बच्चा बीच में पूछ रहा था। क्या

[04:33:10] पूछ रहा था? एक बच्चा बीच में पूछ रहा था

[04:33:12] कि सर आप हमें ये बताओ कि बैंक अकाउंट

[04:33:15] नहीं इंक्लूड करते क्या? आंसर इज़ ग्लोबल

[04:33:18] मल्टीमेंशनल पावर्टी इंडेक्स में बैंक

[04:33:19] अकाउंट नहीं आता। देखो हमें ना ये जो

[04:33:22] यूएनडीपी का कांसेप्ट है यूनाइटेड नेशन

[04:33:25] डेवलपमेंट प्रोग्राम और ओपीएचएआए का

[04:33:26] कांसेप्ट है। ये हमें अच्छा लगा। तो हमने

[04:33:28] पता है क्या किया? हमने कहा यार हम भी

[04:33:30] इसको इंप्लीमेंट करेंगे भारत के अंदर। ये

[04:33:32] तो देश के बारे में बता रहे हैं ना हमें

[04:33:34] जानना है राज्यों के बारे में कि बिहार

[04:33:35] कैसा कर रहा है? महाराष्ट्र कैसा कर रहा

[04:33:37] है? आपका आंध्र प्रदेश कैसा कर रहा है?

[04:33:39] असम कैसा कर रहा है? तो हमने क्या बनाया

[04:33:42] दोस्तों? हमने बनाया यहां पे हमारा नेशनल

[04:33:45] एमपीआई। क्या बनाया हमने? हमने दोस्तों

[04:33:48] बनाया नेशनल मल्टीडमेंशनल पॉवर्टी

[04:33:51] इंडेक्स। हमने वहां से सीखा।

[04:33:55] ग्लोबल इंडेक्स से हमने सीखा और हमने

[04:33:56] नेशनल एमपीआई बनाया और इसको रिलीज़ कौन

[04:33:59] करता है दोस्तों?

[04:34:01] इसको रिलीज़ करता है आपका नीति आयोग। पॉइंट

[04:34:04] आता है कि हमने कुछ बदलाव किए क्या सर

[04:34:06] यहां पे? हां, वहां से हमने सीख लिया पर

[04:34:10] हमने जैसे हम बोलते नहीं है कि हम पॉलिटी

[04:34:13] के अंदर कि हमने कहीं से अपना

[04:34:14] कॉन्स्टिट्यूशन कॉपी नहीं किया। हमने वहां

[04:34:16] से चीजें सीखी और अपने हिसाब से उनको चेंज

[04:34:18] कर दिया। यहां पर भी यही हुआ है। हमने भी

[04:34:21] ग्लोबल मल्टीीनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स सीखा।

[04:34:23] उसको चेंजज़ कर दिया हमने अपने हालातों के

[04:34:25] हिसाब से। पॉइंट आता है क्या चेंज कर दिया

[04:34:27] सर आपने? मैंने नहीं नीति आयोग की बात कर

[04:34:29] रहा हूं। नीति ने चेंज पता है क्या किया?

[04:34:31] पहली बात तो सेम रखी कि तीन आपके थे

[04:34:33] इंडिकेटर्स वो तीन ही रखे। ठीक है? आपके

[04:34:36] जो अह हेल्थ, एजुकेशन और आपका फैंड ऑफ

[04:34:40] लिविंग। पर इसमें भी वेटेज इनका 1/3, 1/3,

[04:34:43] 1/3 ही रखा। पर इसमें दो चीजें ऐड हुई।

[04:34:46] चेंजज़ वैसे तीन हैं। पर ऐड पता है क्या

[04:34:49] हुआ? एक तो ऐड हुआ मैटरनल हेल्थ। हेल्थ के

[04:34:52] अंदर हमने मैटरनल हेल्थ को जोड़ दिया।

[04:34:54] दूसरी बात यहां पर हमने बैंक अकाउंट को भी

[04:34:57] जोड़ा है। तो बैंक अकाउंट वाला जो मुद्दा

[04:34:59] है ना यह ग्लोबल मल्टीीनेशनल पावर्टी

[04:35:01] इंडेक्स के अंदर नहीं है। ये नेशनल

[04:35:03] मल्टीीनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स के अंदर है

[04:35:05] जो नीति आयोग यहां पे रिलीज़ करता है। ये

[04:35:06] फर्क आपको पता होना चाहिए। बैंक अकाउंट

[04:35:09] ग्लोबल एमपीआई में नहीं है। नेशनल एमपीआई

[04:35:11] के अंदर आपका बैंक अकाउंट देखने को

[04:35:13] मिलेगा। तो यहां पर टोटल आपको

[04:35:17] 12 आपको ये केसेस देखने को मिलेंगे यहां

[04:35:19] पे। ठीक है? 12 हैं यहां पे। उसमें 10

[04:35:22] इसमें 12 है। ये तीन ही है बट ये 10 नहीं

[04:35:25] है। ये यहां पे 12 है। क्या-क्या ऐड हुआ?

[04:35:27] मैटरनल हेल्थ ऐड हुआ और आपका बैंक अकाउंट।

[04:35:30] इनकी थोड़ी वेटेज भी बदल गई। कैसे वेटेज

[04:35:32] बदल गई? देखो पहले आपको पता था पहले छह थे

[04:35:35] ना। पहले छह थे तो उसमें 1/18 वेटेज था।

[04:35:38] अब दोस्तों सात हो गया सात। तो सबका वेटेज

[04:35:40] कितना हो चुका है? 1/21। सबका वेटेज 1/21

[04:35:44] है। यहां पे आप देख लो। दूसरी बात। दूसरी

[04:35:47] बात क्या है? यहां पर हेल्थ वालों का भी

[04:35:49] वेटेज थोड़ा बदला है। कैसे? देखो

[04:35:51] न्यूट्रिशन को हम वेटेज देते हैं 1/6

[04:35:53] चाइल्ड मोटलिटी को हम देते हैं 1/12 और

[04:35:56] अगर हम बात करें मैटरनल हेल्थ को 1/12

[04:35:59] यहां वेटेज थोड़ा अलग-अलग दे रखा है हमने

[04:36:01] यहां पे अपने जो ये जो आपके न्यूट्रिशन

[04:36:03] चाइल्ड एंड अडोलेसेंट मोटलिटी है और आपका

[04:36:05] मैटरनल हेल्थ है क्या ये बात क्लियर हुई

[04:36:07] सबको आपको समझ आया कि नेशनल एमपीआई क्या

[04:36:09] है ग्लोबल एमपीआई क्या है

[04:36:13] हम

[04:36:15] नेशनल एमपीआई क्या है और ग्लोबल एमपीआई

[04:36:17] क्या है क्या ये बात क्लियर

[04:36:20] समर्पित आप चिंता मत करो। लेक्चर के एंड

[04:36:22] पे ही आपको पीडीएफ पूरी की पूरी मैं

[04:36:24] Telegram पे शेयर कर दूंगा। ठीक है? आप

[04:36:26] घबराना मत।

[04:36:29] डन।

[04:36:32] चलो दोस्तों, ये बात हो गई हमारी पावर्टी

[04:36:35] की। ठीक है? ये बात हो गई पावर्टी की।

[04:36:39] ठीक है? अब आप इस क्वेश्चन का एक बार आंसर

[04:36:41] करो मुझे।

[04:36:44] आप एक बार इस क्वेश्चन का आंसर करो।

[04:37:32] हां जी क्या आएगा इसका आंसर देखो इसमें आप

[04:37:35] नोटिस करेंगे

[04:37:37] देखो

[04:37:38] अब यार आप ना इसका आंसर बहुत आराम से कर

[04:37:41] सकते हो। मैंने थोड़ी देर पहले आपको लेफर

[04:37:43] का पढ़ाया था। हां सर आपने पढ़ाया था।

[04:37:45] आपने बताया था टैक्स रेट और टैक्स

[04:37:46] रेवेन्यू का क्या रिश्ता है? क्या था वो?

[04:37:48] इनवर्टेड यू देखा था। और अगर आप थोड़ा

[04:37:51] लंबे समय से जुड़े हुए हो तो आपने

[04:37:53] सुबह-सुबह हमारे साथ फिलिप्स कर्व भी

[04:37:54] डिस्कस किया था। फिलिप्स कर्व में क्या

[04:37:56] था? हमने देखा था इनफ्लेशन एंड

[04:37:58] अनइंप्लॉयमेंट के रेट का जो रिश्ता है वो

[04:38:00] एक इनवर्स रिश्ता था। इनफ्लेशन ज्यादा

[04:38:02] होता है तो अनइंप्लॉयमेंट रेट कम।

[04:38:04] इनफ्लेशन कम होता है तो अनइंप्लॉयमेंटेड

[04:38:05] रेट ज्यादा। यह वाला तो हमने बी और सी तो

[04:38:07] पहले ही पढ़ लिए। तो वो तो हो नहीं सकते।

[04:38:10] बचता है क्या? ऑप्शन ए और ऑप्शन डी। ऑप्शन

[04:38:13] ए और ऑप्शन डी। अब इसमें कह रहा है कि भाई

[04:38:15] इनकलिटी और पर कैपिटा इनकम का रिश्ता कौन

[04:38:18] दिखाता है? जो बच्चे सी कह रहे हैं वो तो

[04:38:21] बिल्कुल गलत कह रहे हैं भाई। हां सी कह

[04:38:24] रहे हैं वो तो बिल्कुल गलत कह रहे हैं। अब

[04:38:25] देखो मैं आपको एक्सप्लेन करता हूं इसका

[04:38:27] आंसर क्या है।

[04:38:30] देखो सबसे पहली बात तो हम क्वनेट कर्व मैं

[04:38:33] आपको समझाता हूं। जब भी कुजनेट कर्व आए ना

[04:38:36] देखो

[04:38:38] अगर आपने किसी अच्छे फैकल्टी से पढ़ा है

[04:38:41] तो आपने कुजनेट कर्व एनवायरमेंट में भी

[04:38:43] पढ़ा होगा और अगर आपने मेरे से पढ़ा है

[04:38:45] इकॉनमी तो आपने इकॉनमी तो बिल्कुल पढ़ा

[04:38:47] होगा कुजनेट कर्व। देखो समझना इस बात को।

[04:38:50] होता पता क्या है? जब-जबनेट कर्व आए ना तो

[04:38:52] कुछ नेट कर्व आप देखना ऐसे ही बनेगा। अब

[04:38:55] पॉइंट आता है ये क्या है कर्व? देख रहा

[04:38:56] हूं। देखो होता पता क्या है? ये

[04:39:00] एनवायरमेंट में भी सेम कांसेप्ट है।

[04:39:02] इकॉनमी में सिमिलर कांसेप्ट है। अब यहां

[04:39:04] पर पता है क्या बात होती है? यहां पर बात

[04:39:07] होती है कि यार अगर मान लो पर कैपिटा इनकम

[04:39:11] अगर मैं इधर को बढ़ा रहा हूं तो इनकलिटी

[04:39:14] कैसे बदलेगी? यह इकॉनमी के अंदर आता है जो

[04:39:18] कि हमारा क्वेश्चन भी था यहां पे जो कि

[04:39:20] हमारा यहां पे क्वेश्चन भी था। क्वेश्चन

[04:39:21] में यही पूछा था ना इनकलिटी एंड पर कैपिटा

[04:39:23] इनकम। बिल्कुल तो होता पता है क्या है?

[04:39:26] देखो शुरुआत में पता है क्या होता है?

[04:39:28] शुरुआत में शुरुआत में पता है क्या होता

[04:39:30] है? शुरुआत में देखो जब इनकम बढ़ती है यार

[04:39:33] देखो शुरुआत में जब आपकी इनकम बढ़ेगी मतलब

[04:39:36] आपकी देश की इनकम बढ़ेगी। अगर मान लो अगर

[04:39:38] शुरुआत में पर कैपिटा इनकम अगर बढ़ रही है

[04:39:40] ना उस केस में पता है क्या होगा? सिर्फ

[04:39:42] शायद कुछ लोगों की इनकम बढ़े। जैसे अभी

[04:39:44] कुछ लोग कहते हैं इंडिया में सिमिलर तरह

[04:39:46] की चीजें हो रही हैं कि कुछ लोगों की इनकम

[04:39:48] बहुत बढ़ रही है पर बाकी आम जनता की इनकम

[04:39:50] बढ़ ही नहीं पा रही। है ना? कुछ ऐसा मतलब

[04:39:53] हालांकि डेटा कुछ अलग बोलता है। वो डेटा

[04:39:55] पे भी आऊंगा। वो गिनी इंडेक्स क्या बोलता

[04:39:56] है? अभी आऊंगा उसके ऊपर भी। पर अगर हम कई

[04:39:59] देशों की बात करें ना जो डेवलपिंग देश

[04:40:01] होते हैं जो डेवलपिंग देश होते हैं उनमें

[04:40:04] पता है क्या होता है कि इनकम पर कैपिटा

[04:40:06] इनकम बढ़ने से इनकलिटी बढ़ती है बट एक

[04:40:09] टाइम के बाद जाके सब लोगों के पास कहीं ना

[04:40:12] कहीं अच्छी शिक्षा आ जाती है टेक्नोलॉजी

[04:40:15] का एक्सेस आ जाता है तो उनको भी एक मौका

[04:40:17] मिलता है अपनी इनकम बढ़ाने का तो एक टाइम

[04:40:20] के बाद जाके पता है क्या होता है फिर पर

[04:40:22] कैपिटा इनकम बढ़ने से आपकी जो इनकलिटी है

[04:40:26] वो कम होती है तो पॉइंट पता क्या है?

[04:40:28] कुशनेट जी का ऐसा मानना था कि जो डेवलपिंग

[04:40:31] कंट्रीज होंगी डेवलपिंग वहां पर पता क्या

[04:40:33] होगा कि इनकम बढ़ने से पर कैपिटा इनकम

[04:40:36] बढ़ने से पर कैपिटा इनकम बढ़ने से शुरुआत

[04:40:39] में आपकी इनकलिटी बढ़ेगी। पर जैसे-जैसे

[04:40:42] कंट्रीज आपकी डेवलप्ड होती रहेंगी ना

[04:40:44] वैसे-वैसे आपकी पर कैपिटा इनकम बढ़ने से

[04:40:46] आपकी इनकलिटी कम होती रहेगी। ऐसा कुशनेट

[04:40:50] जी का बोलना था। समझे मेरी बात को? यही है

[04:40:53] कुजनेट कर्व। अच्छा ये कुछ इसको बोलते हैं

[04:40:55] कुजनेट इनकलिटी कर्व। क्या बोलते हैं

[04:40:57] इसको? कुजनेट इनकलिटी कर्व। पर आप लोग

[04:41:00] एनवायरमेंट में कुछनेट एनवायरमेंट कर्व भी

[04:41:02] पढ़ते होंगे। उसमें क्या होता है सर?

[04:41:04] कुजनेट एनवायरमेंट कर्व में उसमें भी

[04:41:05] सिमिलर बात होती है। बस उसमें ये बोलता है

[04:41:08] कि पर कैपिटा इनकम चेंज होने से आपका

[04:41:10] एनवायरमेंट का कितना नुकसान हुआ? तो

[04:41:13] एक्चुअली ना वो मतलब कुछ नेट एनवायरमेंट

[04:41:15] कर्व में भी यही बोलते हैं कि देखो शुरुआत

[04:41:17] में पता है क्या होगा? जैसे-जैसे पर

[04:41:19] कैपिटा इनकम बढ़ेगी वैसे-वैसे एनवायरमेंट

[04:41:21] को नुकसान होगा। क्योंकि यार जब आपको इनकम

[04:41:23] बढ़ानी है तो कहीं ना कहीं एनवायरमेंट को

[04:41:25] नुकसान करोगे। एनवायरमेंट पोल्यूट होगा।

[04:41:27] पर एक टाइम के बाद जब आपकी इनकम बढ़ने लग

[04:41:30] जाएगी बहुत सारी तो उस केस में आप बोलोगे

[04:41:32] नहीं यार अब रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ चलते

[04:41:33] हैं। अब ऐसी चीजें करते हैं जिससे आपको

[04:41:35] एनवायरमेंट आपका साफ रहे। तो वहां पर आपको

[04:41:37] एनवायरमेंट का डिग्रेडेशन आपको कम होता

[04:41:39] रहेगा। ये होता है कुजनेट एनवायरमेंट

[04:41:42] कर्व। क्या दोनों कर्व समझ आए? इनकलिटी

[04:41:44] कर्व और आपका एनवायरमेंट कर्व। ये कुजनेट

[04:41:47] कर्व होता है। ठीक है सर। समझ गए कुछनेट

[04:41:50] कर्व। तो इसका आंसर तो सर कोनेट कर्व ही

[04:41:52] आएगा। वो तो हम समझ चुके हैं। ठीक है? बट

[04:41:55] हमें यहां पर एक और कर्व पढ़ना है जिसका

[04:41:58] नाम है लॉरेंस कर्व। ये बड़ा इंटरेस्टिंग

[04:42:01] है। क्या पढ़ना है हमें? लॉरेंस कर्व। ये

[04:42:04] आपके सामने लॉरेंस कर्व बना है। अब इसको

[04:42:06] समझाते हैं कि लॉरेंस कर्व क्या होता है?

[04:42:09] ठीक है? हां, लॉरेंस कर्व समझते हैं।

[04:42:11] देखो,

[04:42:13] लॉरेंस कर्व देखना। अब इस सिंपल एग्जांपल

[04:42:17] से समझते हैं। देखो, एक साइड हम क्या

[04:42:19] लेंगे? यहां परसेंटेज ऑफ़ पॉपुलेशन। यहां

[04:42:22] पर क्या लेंगे? परसेंटेज ऑफ़ इनकम।

[04:42:24] क्या-क्या लिया? एक साइड लिया परसेंटेज ऑफ़

[04:42:26] पापुलेशन। एक साइड लिया परसेंटेज ऑफ़ इनकम।

[04:42:28] अब देखो, मान लो मैंने इनका कर्व बनाने की

[04:42:32] कोशिश करी। और लेट्स से कर्व आया कुछ ऐसे।

[04:42:37] ठीक है? थोड़ा सा इसको या चलो चलो हां ऐसे

[04:42:40] मान लो। ये कर्व मान लो आया कुछ ऐसे। ठीक

[04:42:44] है? तो अब इसी पे फोकस करना। ये कर्व क्या

[04:42:46] दिखा रहा है सर? देखो अगर आप इसको कहीं पे

[04:42:49] पिक करोगे ना इस कर्व का। जैसे मान लो

[04:42:50] आपने यहां पे पिक किया। आपने यहां पर पिक

[04:42:53] किया यह वाला पॉइंट। अब इसमें पता है क्या

[04:42:54] दिख रहा है? आप बोल रहे हो कि सर 50%

[04:42:56] पापुलेशन और इधर है 10%। मतलब क्या है इस

[04:43:00] चीज का? इस चीज का मतलब है 50% पापुलेशन

[04:43:03] के पास 10% इनकम है। इसका मतलब पता है

[04:43:06] क्या है? इस देश में बहुत इनकलिटी है। इस

[04:43:09] देश में बहुत इनकलिटी है। बट अगर आप इस

[04:43:12] लाइन को कंसीडर करो।

[04:43:17] अब ये लाइन पता है क्या है? ये लाइन बड़ी

[04:43:18] इंटरेस्टिंग है। देखो इधर इस लाइन के ऊपर

[04:43:20] आप कोई भी पॉइंट उठाओ। जैसे मान लो आपने

[04:43:23] ये पॉइंट उठाया। अब ये पॉइंट क्या

[04:43:24] दिखाएगा? ये पॉइंट दिखा रहा है 10% लोगों

[04:43:27] के पास 10% इनकम है। ये पॉइंट पिक करो। ये

[04:43:31] क्या दिखाएगा? 50% लोगों के पास 50% इनकम

[04:43:34] है। आप इस कर्व पे ये पॉइंट पिक करो। ये

[04:43:36] पॉइंट क्या दिखाएगा? 90% लोगों के पास 90%

[04:43:39] इनकम है। तो भाई, ये वाली जो लाइन है ना,

[04:43:42] ये परफेक्ट इक्वलिटी की लाइन है। दिस इज़ द

[04:43:44] लाइन ऑफ़ परफेक्ट इक्वलिटी। ऐसा क्यों? 10%

[04:43:47] लोगों के पास 10% इनकम, 50% लोगों के पास

[04:43:49] 50% इनकम, 90% लोगों के पास 90% इनकम। ये

[04:43:52] लाइन है परफेक्ट इक्वलिटी की लाइन। ठीक

[04:43:54] है? यहां पर इनकलिटी है। अच्छा मैं एक

[04:43:59] लाइन और बना रहा हूं यहां पे। मान लो

[04:44:01] मैंने ये लाइन यहां बनाई है एक और। अब आप

[04:44:03] मुझे बताओ येलो वाले में ज्यादा इनकलिटी

[04:44:06] है या ग्रीन वाले में?

[04:44:08] येलो वाले में ज्यादा इनकलिटी है या ग्रीन

[04:44:10] वाले में? आंसर इज़ ग्रीन वाले में। पता है

[04:44:14] क्यों? अगर आप जैसे ग्रीन वाले को उठाओ ये

[04:44:16] वाली लाइन है। अब 90% लोगों के पास केवल

[04:44:19] 10% इनकम है। तो यहां पर ना पॉइंट पता है

[04:44:23] क्या है? आपके पास ये जो लाइन है लाइन ऑफ़

[04:44:25] परफेक्ट इक्वलिटी आप इससे जितना दूर जाओगे

[04:44:29] आप इससे जितना दूर जाओगे उतनी ज्यादा

[04:44:32] इनकलिटी बढ़ती रहेगी। ये वाली लाइन है

[04:44:34] परफेक्ट इक्वलिटी की लाइन। और जितना

[04:44:36] ज्यादा आप इससे दूर जाते रहोगे वो लाइन ऑफ

[04:44:39] पर लाइन मतलब उतनी ज्यादा इनकलिटी बढ़ती

[04:44:41] रहेगी। आई होप ये बात आप लोग समझ गए

[04:44:44] होंगे। ठीक है सर। ठीक है। और यहीं से एक

[04:44:47] कांसेप्ट आता है। यहीं पर एक कांसेप्ट आता

[04:44:50] है जिसको हम जानते हैं गिनी कोशिश के नाम

[04:44:52] से। सर क्या होता है गिनी कोफिशंट? बहुत

[04:44:55] ध्यान से सुनना। देखो

[04:44:57] आप देखो मान लो आपकी कर्व है ये। ये वाली

[04:45:00] जो येलो में मैंने लाइन बनाई है ना। मान

[04:45:01] लो ये है आपकी एक्चुअल कर्व। आपने इंडिया

[04:45:03] को प्लॉट किया। मान लो इंडिया के लिए कर्व

[04:45:05] कुछ ऐसी आई। ठीक है? अब अगर इंडिया के लिए

[04:45:08] कर्व यहां पे ये आ रही है ना? तो आप इसको

[04:45:10] देखो दो पार्ट्स में आप इसको डिवाइड कर

[04:45:12] सकते हो। एक तो आप देखो ये वाला हिस्सा

[04:45:14] है। ये वाला हिस्सा आपको दिख रहा है ये

[04:45:16] वाला। हां सर ये हिस्सा आपको दिख रहा है?

[04:45:19] हां बिल्कुल। तो ये वाले पोर्शन मतलब

[04:45:21] परफेक्ट इक्वलिटी से लेकर कर्व तक का

[04:45:23] हिस्सा। इस वाले पोर्शन को मैं क्या

[04:45:25] बोलूंगा? आई विल कॉल दिस एरिया एज A। ठीक

[04:45:28] है? फिर जो बाकी इसके बाद वाला हिस्सा है,

[04:45:31] ये वाला हिस्सा जो है, ये वाला हिस्सा

[04:45:34] क्या मैं कहलाऊंगा? इसको मैं कहलाऊंगा B.

[04:45:37] ठीक है? ये बाकी वाला जो हिस्सा है, इसको

[04:45:38] मैं कहलाऊंगा क्या? आई विल कॉल दिस एज बी।

[04:45:41] चलो ठीक है। अब गिनी ने क्या बोला? ठीक

[04:45:44] है? कोराडो गिनी एक इटालियन रशेस हैं।

[04:45:46] उन्होंने यहां पे यह निकाला था कि आप गिनी

[04:45:48] कोफिशिएंट की वैल्यू बताओ। और इसको सॉल्व

[04:45:50] कैसे करना है? a / a + b।

[04:45:55] आपको एक वैल्यू बतानी है g = a / a + b

[04:45:59] की। ओके? ओके। ओके। अब एक बात नोटिस करो।

[04:46:04] मैं आपको एग्जांपल देता हूं। 1 सेकंड के

[04:46:06] लिए 1 सेकंड के लिए मान लो क्या मान लें?

[04:46:11] 1 सेकंड के लिए मान लो a 0 है। अब सोच के

[04:46:14] देखो।

[04:46:16] अगर आप 1 सेकंड के लिए a को ज़ीरो मान लोगे

[04:46:19] उस केस में पता है क्या होगा? ये वाला

[04:46:20] एरिया होगा ही नहीं। और अगर ये वाला एरिया

[04:46:23] नहीं होगा तो एक्चुअल में आपकी लाइन क्या

[04:46:26] यही नहीं बन जाएगी? और ये लाइन कौन सी?

[04:46:28] अगर a होगा ही नहीं तो आपकी लाइन क्या ये

[04:46:30] नहीं बन जाएगी? बिल्कुल। और अगर आपकी लाइन

[04:46:32] ये बन जाएगी ये कौन सी लाइन है? ये

[04:46:34] इक्वलिटी की लाइन है। ये कौन सी लाइन है?

[04:46:37] ये इक्वलिटी की लाइन है। तो कहने का पॉइंट

[04:46:39] पता है क्या है? जब आपका जब आपका a ज़ीरो

[04:46:43] बन जाता है तो आपका मुझे बताओ g कितना

[04:46:47] बनेगा? अगर a ज़ीरो बनेगा तो आप ज़ीरो डालो।

[04:46:49] 0 / 0 + b तो वहां पे गिनी कोफिशिएंट ज़ीरो

[04:46:52] बन जाएगा। और गिनी कोफिशंट ज़ीरो बनने का

[04:46:54] मतलब वहां पर क्या है? परफेक्ट इक्वलिटी।

[04:46:58] सब लोग बराबर हैं जब आपका गिनी कोफिशिएंट

[04:47:01] ज़ीरो होता है।

[04:47:06] क्या ये बात सबको समझ आई? गिनी कोफिशंट

[04:47:09] जीरो होने का मतलब वहां पर क्या है?

[04:47:10] परफेक्ट इक्वलिटी सब लोग बराबर हैं। अच्छा

[04:47:13] ठीक है सर। ठीक है। ठीक है। ठीक है। अच्छा

[04:47:16] अगर दूसरा केस मैं आपको दूं। अगर मैं आपको

[04:47:19] दूसरा केस दूं। मान लो आप 1 सेकंड के लिए

[04:47:21] मान लो कि आपका b ज़ीरो है। सर अगर आपका B

[04:47:25] ज़ीरो हो गया तो आपकी कर्व पता है कैसे

[04:47:27] बनेगी? आपकी कर्व कुछ ऐसे बनेगी। क्योंकि

[04:47:29] आपने B ज़ीरो कर दिया। और अगर आप b 0 कर

[04:47:32] दोगे ये कर्व बहुत ही ज्यादा इधर नहीं

[04:47:34] होगी। हां बिल्कुल। और यह क्या दर्शाएगी?

[04:47:36] यह दर्शाएगी कि ये तो परफेक्ट इनकलिटी है।

[04:47:39] तो जैसे ही आप b को ज़ीरो डालोगे आपका गिनी

[04:47:41] कोफिशिएंट क्या आएगा? a / a + 0 वो बन

[04:47:44] जाएगा कितना? a / a वो बन जाएगा कितना?

[04:47:46] वन। तो यहां गिनी कोफिशंट आएगा वन। तो

[04:47:48] गिनी कोफिशंट जब वन होता है ना वो दिखाता

[04:47:51] है आपका परफेक्ट इनकलिटी। यहां बस एक

[04:47:54] इंसान के पास सारा पैसा है। बाकी किसी के

[04:47:56] पास कुछ भी पैसा नहीं है। इसको बोलते हैं

[04:47:58] परफेक्ट इनकलिटी।

[04:48:00] समझे मेरी बात को? समझे मेरी बात को? तो

[04:48:03] आपको ध्यान पता है क्या रखना है? ध्यान ये

[04:48:05] रखना है कि जो गिनी कोफिशिएंट होता है ना

[04:48:07] उसकी वैल्यू क्या होती है? ज़ीरो से लेकर

[04:48:09] वन। जितना ज़ीरो की तरफ होगा उतनी ज्यादा

[04:48:12] इक्वलिटी। जितना वन की तरफ होगा उतनी

[04:48:14] ज्यादा इनकलिटी। ये कर्व को हम बोलते हैं

[04:48:17] लॉरेंस कर्व। और ये जो कोफिशिएंट हम

[04:48:20] निकालते हैं इसको बोलते हैं हम गिनी

[04:48:21] कोफिशिएंट।

[04:48:23] हम उसको हम बोलते हैं गिनी कोफिशिएंट।

[04:48:29] कोई कंफ्यूजन कोई डाउट है यहां पे? क्या

[04:48:32] आपको गिनी कोफिशिएंट और आपका जो लॉरेंस

[04:48:35] कर्व है वो यहां पे समझ आया या नहीं आया?

[04:48:52] हम

[04:49:00] यहां तक बात क्लियर है सबको?

[04:49:18] ठीक है। एक क्वेश्चन ट्राई करते हैं यह

[04:49:20] वाला।

[04:49:26] वर्मा हम ये पढ़ चुके हैं सेक्शन 45 बी ये

[04:49:28] मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी में हमने डिस्कस

[04:49:30] किया था

[04:49:35] लीगल पंछी आपका नाम क्या है

[04:49:58] अ राजपूत देखो सेन इंडेक्स आपके मेंस के

[04:50:00] लिए रिक्वायर्ड है। प्रीलिम्स के लिए वो

[04:50:01] इंपॉर्टेंट नहीं है।

[04:50:20] देखो इसका आंसर बिल्कुल ए है। यहां पर अगर

[04:50:23] हम बात करें मल्टीीनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स

[04:50:24] की तो सिर्फ यही इस्तेमाल होता है। यहां

[04:50:26] कोई परचेजिंग पावर पैरिटी या फिर बजट

[04:50:28] डेफिसिट कितना है? ये सब नहीं देखते। तो

[04:50:30] बिल्कुल इसका आंसर जो रहेगा वो आपका ऑप्शन

[04:50:32] ए वन ओनली यहां पे आंसर रहेगा।

[04:50:37] ठीक है? क्या यह बात क्लियर है सबको?

[04:50:43] ओके ओके ओके

[04:50:45] ठीक है हां ठीक है ठीक है ओके तो एक काम

[04:50:49] करते हैं फिर ठीक है एक काम करते हैं हम

[04:50:51] छोटा सा ब्रेक लेते हैं लंच के लिए ठीक है

[04:50:54] एक लंच ब्रेक लेते हैं थोड़ी देर के लिए

[04:50:57] नेक्स्ट हम इसके बाद अनइंप्लॉयमेंट

[04:50:59] पढ़ेंगे हमें स्टार्टअप्स भी गो थ्रू करने

[04:51:01] हैं इस बार डेफिनेशन भी चेंज हुई है उसकी

[04:51:03] तो एक काम करेंगे ठीक है ना आप लोग भी लंच

[04:51:05] कर लो आराम से ठीक है तो अभी जैसे 2:07

[04:51:08] हुए आधे घंटे का ब्रेक करते हैं। ठीक है?

[04:51:11] तो हम 237 पे मिलते हैं। ठीक है? 237 PM

[04:51:15] पे हम मिलेंगे और ठीक है? लंच ब्रेक रखते

[04:51:18] हैं आधे घंटे का। उसके बाद हम लंच के बाद

[04:51:20] फिर आगे अपने जो फर्दर अपने टॉपिक्स हैं,

[04:51:22] हम उनको पिक करेंगे। ओके चलो लंच के बाद

[04:51:25] मिलते हैं।

[04:51:28] हां जी दोस्तों आगे चलते हैं। ठीक है?

[04:51:31] नेक्स्ट हमें जो टॉपिक डिस्कस करना है वो

[04:51:33] अनइंप्लॉयमेंट के बारे में है। बेरोजगारी

[04:51:36] के बारे में आप सब लोग जानते ही होंगे। अब

[04:51:38] देखो इसके रिगार्डिंग अगर बेरोजगारी के

[04:51:40] ऊपर यूपीएससी ने कोई क्वेश्चन पूछा ना तो

[04:51:42] वो क्वेश्चन थोड़ा सा रहेगा इसके अलग-अलग

[04:51:44] टर्मिनोलॉजीस के रिगार्डिंग कि आखिर लेबर

[04:51:46] फोर्स क्या होता है? लेबर फोर्स

[04:51:48] पार्टिसिपेशन रेट क्या होता है? ये सारी

[04:51:51] चीजों के रिगार्डिंग। तो एक काम करते हैं।

[04:51:53] पहले हम अनइंप्लॉयमेंट के बेसिक समझ लेते

[04:51:55] हैं एंड फिर हम यहां पे अलग-अलग जो

[04:51:58] टर्मिनोलॉजीस हैं हम यहां पे उनको डिस्कस

[04:51:59] कर लेंगे।

[04:52:02] चलो सबसे पहली बात तो यहां पर ये आती है

[04:52:05] कि सर आखिर बेरोजगार बोलते किसको हैं?

[04:52:07] देखो

[04:52:10] बेरोजगार बस वही इंसान है जो अपनी तरफ से

[04:52:13] पूरी मेहनत कर रहा है। पूरी कोशिश कर रहा

[04:52:16] है नौकरी मिलने की। पर उसकी पूरी कोशिश

[04:52:20] करने के बावजूद भी उसको नौकरी नहीं मिल

[04:52:22] रही। तो सिंपल मीनिंग क्या हुआ?

[04:52:24] अनइंप्लॉयमेंट इज़ सेट टू एक्सिस्ट व्हेन

[04:52:27] पीपल हु आर विलिंग टू वर्क एट गोइंग वेजेस

[04:52:29] कैन नॉट फाइंड जॉब्स। ठीक है? तो कोई भी

[04:52:31] ऐसा इंसान जो नौकरी ढूंढ ही नहीं रहा या

[04:52:34] नौकरी करना ही नहीं चाहता उसको हम

[04:52:36] बेरोजगार नहीं बोलते। बेरोजगार बस वही

[04:52:38] इंसान है जो काम ढूंढ रहा है। पूरी तरह से

[04:52:40] मेहनत कर रहा है काम ढूंढने की पर तब भी

[04:52:42] उसको काम ना मिले। ओनली दैट पर्सन इज़

[04:52:45] अनइंप्लॉयड।

[04:52:47] ठीक है। ठीक है। ठीक है। ओके। ओके। ओके।

[04:52:51] अब कुछ टाइप्स ऑफ़ अनइंप्लॉयमेंट आपको पता

[04:52:54] होगा। बहुत बेसिक-बेसिक है। जल्दी से हो

[04:52:56] जाएगा ये कवर। एक है आपका स्ट्रक्चरल

[04:52:58] अनइंप्लॉयमेंट। स्ट्रक्चर अनइंप्लॉयमेंट

[04:53:00] का मीनिंग क्या होता है? इसका मीनिंग यह

[04:53:02] होता है कि आपके पास कुछ स्किल्स हैं।

[04:53:07] मार्केट में नौकरियां हैं। पर आपके पास जो

[04:53:10] स्किल्स हैं और जिस तरह की नौकरी के लिए

[04:53:12] जो स्किल्स चाहिए उसके बीच में एक गैप है।

[04:53:14] व्हेन देयर इज़ अ मिसमैच कि मुझे ये चीज़

[04:53:17] आती है। मुझे आती है। लेट्स से मुझे

[04:53:19] कोडिंग करना आता है। पर कोडिंग वाली जॉब्स

[04:53:22] जो हैं वहां पर मेरी वाली लैंग्वेज वाली

[04:53:24] कोडिंग चाहिए ही नहीं। कोई और लैंग्वेज

[04:53:25] वाली चाहिए। तो मेरे पास जो स्किल्स हैं

[04:53:27] और जिससे नौकरी मिल सकती है उसके बीच में

[04:53:30] अगर एक मिसमैच होता है उसको हम बोलते हैं

[04:53:31] स्ट्रक्चरल अनइंप्लॉयमेंट। राइट? फिर एक

[04:53:35] आता है साइक्लिक अनइंप्लॉयमेंट। साइक्लिक

[04:53:37] अनइंप्लॉयमेंट में क्या होता है? मैंने

[04:53:38] आपको पहले साइकिल दिखाया था। आपको याद

[04:53:40] होगा जिसमें हमने देखा कि एक टाइम आता है

[04:53:44] ग्रोथ फेस। एक टाइम आता है बूम। एक फिर

[04:53:46] स्लो डाउन आपका आता है रिसेशन आता है। तो

[04:53:49] आप खुद देखो जब कहीं ना कहीं आपको रिसेशन

[04:53:51] देखने को मिलेगा। क्या उस टाइम के ऊपर

[04:53:53] आपको बेरोजगारी ज्यादा नहीं देखने को

[04:53:54] मिलेगी? बिल्कुल। और जब आपको यहां पर

[04:53:57] ग्रोथ वाला फज़ होगा तो बेरोजगारी कम देखने

[04:53:59] को मिलेगी। राइट? क्योंकि जब ग्रोथ हो रही

[04:54:02] है तो मतलब आपकी जो कंपनीज़ हैं वो यहां पे

[04:54:04] क्या कर रही हैं? वो यहां पे इंश्योर ये

[04:54:06] कर रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को

[04:54:07] रोजगार मिले। अच्छा काम कर रही हैं ना।

[04:54:10] अच्छा काम करने के लिए लोगों को ज्यादा

[04:54:11] हायर करना पड़ेगा। तो ये सारी चीजें आपको

[04:54:14] यहां पे देखने को मिलेंगी। साइक्लिकल कि

[04:54:16] जैसे-जैसे आपका फेसेस ऑफ़ बिज़नेस साइकिल के

[04:54:18] साथ-साथ वो चेंज होता रहेगा। इसी तरह से

[04:54:21] एक होती है डिसगाइस्ड अनइंप्लॉयमेंट। यह

[04:54:23] होती है डिसगाइस का मतलब ही होता है छुपी

[04:54:25] हुई बेरोजगारी। छुपी हुई बेरोजगारी का

[04:54:28] मतलब क्या है? आपको पता भी नहीं लग रहा पर

[04:54:30] आप बेरोजगार हो। ठीक है ना? अब इसका मतलब

[04:54:34] क्या है? अब इसका मतलब मैं आपको एग्जांपल

[04:54:36] देता हूं। मान लो कोई एक पर्सन है। वो एक

[04:54:39] क्लास ले रहा है। ठीक है? और उसके साथ एक

[04:54:42] बंदा मदद करने के लिए बैठा हुआ है कि हां

[04:54:44] चलो लेक्चर को बीच में रोकना है। कुछ

[04:54:46] लेक्चर को बीच में एसी ऑन करना है। तो मैं

[04:54:48] कर दूंगा। पर उस बंदे के होने या ना होने

[04:54:51] से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। तो उस बंदे

[04:54:53] को लग रहा है कि मैं काम कर रहा हूं पर

[04:54:55] उसके होने या ना होने से कोई आउटपुट में

[04:54:57] फर्क नहीं पड़ रहा। इसको हम बोलते हैं

[04:54:59] डिसगाइस्ड अनइंप्लॉयमेंट। एग्रीकल्चर में

[04:55:01] बहुत ही कॉमनली ये बात देखी जाती है। जैसे

[04:55:03] फॉर एग्जांपल एक खेत में तीन लोग चाहिए पर

[04:55:06] काम लेट्स से कर रहे हैं पांच। अब वो दो

[04:55:08] लोगों को लग रहा है कि यार हम तो काम कर

[04:55:10] रहे हैं। हम तो हाथ बटा रहे हैं। पर अगर

[04:55:11] वो दो लोग नहीं होंगे तो उस केस में क्या

[04:55:14] होगा? उस केस में आउटपुट के ऊपर कोई फर्क

[04:55:16] नहीं आने वाला। तो वहां पर क्या होता है?

[04:55:18] डिसगाइस्ड अनइंप्लॉयमेंट।

[04:55:20] ठीक है? तो आप नोटिस कर पाओगे कि ये

[04:55:22] डेवलपिंग कंट्रीज के अंदर बहुत कॉमन है।

[04:55:24] एंड यहां पर हम टर्म जो इस्तेमाल करते हैं

[04:55:26] दैट इज़ मार्जिनल प्रोडक्टिविटी इज़ ज़ीरो।

[04:55:29] मार्जिनल प्रोडक्टिविटी मतलब एक्स्ट्रा

[04:55:31] एक्स्ट्रा प्रोडक्टिविटी यहां पे ज़ीरो

[04:55:33] होती है। क्योंकि उनके होने या ना होने से

[04:55:35] कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। ठीक है? हां।

[04:55:38] अगला कांसेप्ट आता है यहां पे सीजनल

[04:55:40] अनइंप्लॉयमेंट। ये सीजन के हिसाब से होता

[04:55:42] है कि कुछ सीजन आपको काम मिल रहा है। कुछ

[04:55:43] सीजन काम नहीं मिल रहा। जैसे फॉर एग्जांपल

[04:55:45] कोई टूरिस्ट जॉब हो सकती हैं। कुछ ऐसा

[04:55:47] टाइम होगा जब आपको नौकरी मिल जाएगी। जब

[04:55:50] आपका सीजन है जब वो सीजन नहीं रहा, सीजन

[04:55:52] चला गया तो नौकरी नहीं मिल पाएगी। ठीक है?

[04:55:55] आइसक्रीम सेलर को भी हो सकता है कि

[04:55:57] सर्दियों में उसको आइसक्रीम ना बिके और

[04:55:59] गर्मियों में आइसक्रीम खूब सारी बिके। तो

[04:56:01] गर्मियों के टाइम के ऊपर उसके पास नौकरी

[04:56:02] है पर सर्दियों के टाइम उसके पास नौकरी

[04:56:04] नहीं है। ये हो गया आपका सीजनल

[04:56:05] अनइंप्लॉयमेंट। फिर एक होता है आपका

[04:56:07] फ्रिक्शनल अनइंप्लॉयमेंट। इसमें क्या

[04:56:09] होगा? ये बड़ा इंटरेस्टिंग है फ्रिक्शनल।

[04:56:11] इसको हम लोग सर्च अनइंप्लॉयमेंट भी बोलते

[04:56:13] हैं। सर्च अनइंप्लॉयमेंट का मतलब क्या?

[04:56:16] मान लो मैं मैंने एक नौकरी छोड़ दी। अब

[04:56:19] दूसरी नौकरी तुरंत थोड़ी मिल जाएगी। कुछ

[04:56:21] बीच में टाइम होगा। मान लो 3 महीने, 4

[04:56:23] महीने, 6 महीने का गैप है। जब मैं आपको

[04:56:26] अपने आप को अगली नौकरी के लिए रेडी कर रहा

[04:56:28] होगा। तो वो बीच का समय जब मैं कहीं ना

[04:56:30] कहीं एक नौकरी छोड़ के दूसरी नौकरी तरफ जा

[04:56:32] रहा हूं तो वो बीच का समय होगा। उस टाइप

[04:56:34] के अनइंप्लॉयमेंट को हम बोलेंगे फ्रिक्शनल

[04:56:36] अनइंप्लॉयमेंट या फिर आप इसको सर्च

[04:56:39] अनइंप्लॉयमेंट भी आप यहां पे कह सकते हो।

[04:56:42] ठीक है? एक होती है टेक्नोलॉजिकल

[04:56:44] अनइंप्लॉयमेंट। अगर आपको टेक्नोलॉजी

[04:56:46] रिप्लेस कर दे जैसे चैट जीपीटी कुछ कंटेंट

[04:56:50] क्रिएटर्स को रिप्लेस कर दे सेल्फ

[04:56:52] ड्राइविंग कार्स कुछ ड्राइवर्स को रिप्लेस

[04:56:54] कर दे तो आपको पता है क्या कर दिया आपको

[04:56:56] टेक्नोलॉजी ने रिप्लेस कर दिया जब ये होता

[04:56:58] है तो उसको हम बोलते हैं टेक्नोलॉजिकल

[04:56:59] अनइंप्लॉयमेंट

[04:57:01] उसी तरह से अगर हम बात करें एक होता है

[04:57:03] इसके अलावा अंडर अनइंप्लॉयमेंट यार देखो

[04:57:05] ना अंडर एंप्लॉयमेंट एक्चुअल में

[04:57:07] अनइंप्लॉयमेंट नहीं है ये अनइंप्लॉयमेंट

[04:57:09] नहीं इसको बोलेंगे बट हां ये सीरियस

[04:57:12] चिंताजनक बात जरूर है ये सीरियस क्यों है?

[04:57:15] उसका मैं आपको रीज़न देता हूं। मान लो जैसे

[04:57:18] मान लो मुझे ऐसा लगता है कि यार मेरी

[04:57:21] स्किल्स जो है ना उसके हिसाब से मुझे बहुत

[04:57:23] ही शानदार नौकरी मिलनी चाहिए। बट मैं

[04:57:25] नौकरी कर तो रहा हूं पर अपने स्किल से

[04:57:28] बहुत ही नीचे वाली नौकरी। कई बार होता है

[04:57:30] ना कि यार कोई किसी बंदे ने पीएचडी कर रखी

[04:57:32] होती है पर उसको नौकरी कुछ ऐसी करनी पड़ती

[04:57:34] है जो काफी कम स्किल्स वाली नौकरी होती

[04:57:37] है। तो उस केस में उसके पास रोजगार तो है

[04:57:39] पर कहीं ना कहीं वो अपने स्किल्स के हिसाब

[04:57:42] से जो उसके पास नौकरी होनी चाहिए उससे

[04:57:43] बहुत कम वाले रोजगार के ऊपर यहां पे

[04:57:45] एंप्लॉयड है। तो व्हेन पीपल आर वर्किंग इन

[04:57:48] जॉब्स व्हिच आर बिलो देयर स्किल्स और

[04:57:50] टैलेंट उनको हम बोलते हैं अंडर एंप्लॉयड।

[04:57:53] एक होता है क्रोनिक अनइंप्लॉयमेंट।

[04:57:55] क्रोनिक मतलब बहुत लंबे समय तक अगर

[04:57:57] बेरोजगारी हो तो उसको हम बोलेंगे क्रोनिक

[04:57:59] अनइंप्लॉयमेंट। यह बहुत बेसिक चीजें थी।

[04:58:02] आई थिंक आप सबको पता भी होंगी। हमने 5

[04:58:04] मिनट लेके इनको क्विकली रिवाइज कर लिया।

[04:58:06] बट हमें कुछ स्पेसिफिक टर्मिनोलॉजीस के

[04:58:09] बारे में जानना है। कि यार अनइंप्लॉयमेंट

[04:58:12] हम निकालते कैसे हैं?

[04:58:14] देखो

[04:58:16] कुछ टर्मिनोलॉजीस आप यहां पे देखना। सबसे

[04:58:19] पहली टर्म है वर्किंग एज पॉपुलेशन। प्लीज

[04:58:21] ध्यान से सुनेंगे। ये टर्मिनोलॉजीस पहले

[04:58:24] भी क्वेश्चन आए हुए हैं, आगे भी आएंगे और

[04:58:27] आपके ये गवर्नमेंट ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स

[04:58:30] में यही टर्म्स इस्तेमाल करती है। पहला

[04:58:32] टर्म है वर्किंग एज पापुलेशन। वर्किंग एज

[04:58:35] पॉपुलेशन का मतलब ऐसे लोग जो काम करने

[04:58:37] वाली उम्र के अंदर हैं। काम करने वाली

[04:58:40] उम्र मतलब 15 से 59 इयर्स। कई देशों में

[04:58:43] 15 टू 64 भी काउंट किया जाता है। पर

[04:58:44] इंडिया में 15 टू 59 इयर्स को हम यहां पे

[04:58:46] वर्किंग एज पॉपुलेशन देखते हैं। अब सवाल

[04:58:49] आता है इसमें कौन-कौन आता है? देखो काम

[04:58:52] करने वाली उम्र के अंदर कुछ लोग ऐसे होंगे

[04:58:56] जो काम कर रहे होंगे। वी कॉल देम

[04:58:58] एंप्लॉयड। कुछ लोग ऐसे होंगे जो बेरोजगार

[04:59:02] होंगे। बेरोजगार कौन है? जो काम ढूंढ तो

[04:59:04] रहे हैं पर वो काम मिल नहीं रहा उनको। और

[04:59:08] तीसरे कौन होंगे? तीसरे होंगे आप लोग। आप

[04:59:10] लोग अभी पढ़ाई कर रहे हो। आप लोग काम ढूंढ

[04:59:13] नहीं रहे। पर आप लोग वर्किंग एज पॉपुलेशन

[04:59:15] में तो हो। एक बस नाइंथ क्लास का बच्चा है

[04:59:17] वो नहीं काउंट होगा। बाकी सब लोग काउंट

[04:59:19] होंगे। तो ये जो काम ढूंढना ही ढूंढ ही

[04:59:22] नहीं रहे या काम करना नहीं चाहते। अभी वो

[04:59:24] पढ़ाई कर रहे हैं या कुछ और काम मतलब वो

[04:59:26] Netflix देखना पसंद कर रहे हैं तो वो यहां

[04:59:28] पे आएंगे। तो एक्चुअली वर्किंग एज

[04:59:30] पॉपुलेशन में तीन तरह के लोग होते हैं। एक

[04:59:31] होते हैं मेरे जैसे लोग जो रोजगार कर रहे

[04:59:34] हैं। एक होते हैं कुछ ऐसे लोग जो काम ढूंढ

[04:59:36] तो रहे हैं पर उनको काम मिल नहीं रहा। और

[04:59:38] तीसरे ऐसे लोग जो काम ढूंढ ही नहीं रहे।

[04:59:40] तो वर्किंग एज पॉपुलेशन में तीन तरह के

[04:59:42] लोग आते हैं एंप्लॉयड, अनइंप्लॉयड और पीपल

[04:59:45] नॉट लुकिंग फॉर वर्क। आई थिंक दैट इज़

[04:59:47] क्लियर।

[04:59:49] अगला कांसेप्ट आता है लेबर फोर्स का। अब

[04:59:52] सर लेबर फोर्स अलग है क्या? हां बिल्कुल

[04:59:54] अलग है। लेबर फोर्स अलग कैसे है? लेबर

[04:59:57] फोर्स में कौन-कौन आता है? देखो लेबर

[04:59:59] फोर्स जब हम बात करते हैं ना लेबर फोर्स

[05:00:01] में आते हैं ऐसे लोग जिनके पास रोजगार है

[05:00:04] या फिर ऐसे लोग जो बेरोजगार हैं। लेबर

[05:00:08] फोर्स में पीपल नॉट लुकिंग फॉर वर्क। वो

[05:00:11] सब नहीं आएंगे। मेरे कहने का मतलब पता है

[05:00:13] क्या है? अगर आप लोग पढ़ाई कर रहे हो। आप

[05:00:16] लोग वर्किंग एज पॉपुलेशन में आओगे पर आप

[05:00:18] लोग लेबर फोर्स का पार्ट नहीं बनेंगे।

[05:00:21] लेबर फोर्स में कौन आएगा? ऐसे लोग जिनके

[05:00:23] पास या तो रोजगार है या फिर वो काम ढूंढ

[05:00:26] रहे हैं पर काम मिल नहीं रहा। बस पीपल नॉट

[05:00:28] लुकिंग फॉर वर्क दे आर नॉट अ पार्ट ऑफ

[05:00:30] लेबर फोर्स। प्लीज इस बात को ध्यान में

[05:00:32] रखेंगे।

[05:00:36] तीसरा कांसेप्ट यहां पे आता है एलएफपीआर।

[05:00:39] लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट। वेरी

[05:00:42] वेरीेंट पॉइंट। वेरी वेरीेंट पॉइंट। कई

[05:00:44] बार आप लोगों को सुनने को मिलता है कि

[05:00:45] इंडिया के अंदर वुमेन का लेबर फोर्स

[05:00:48] पार्टिसिपेशन रेट पहले कम था। अब वो वुमेन

[05:00:50] एलएफपीआर ज्यादा हो गया। सर मीनिंग क्या

[05:00:52] है लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट का? देखो

[05:00:54] लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट का फार्मूला

[05:00:56] है लेबर फ़ोर्स डिवाइड बाय वर्किंग एज

[05:00:58] पॉपुलेशन। देखो क्या है फार्मूला एलएफपीआर

[05:01:02] का? लेबर फोर्स डिवाइडेड बाय लेबर फोर्स

[05:01:06] सॉरी लेबर फ़ोर्स डिवाइड बाय वर्किंग एज

[05:01:08] पॉपुलेशन।

[05:01:09] अब ध्यान से देखो इस बात को। लेबर फोर्स

[05:01:12] में क्या आता है? मैंने आपको बताया जो

[05:01:14] एंप्लॉयड हैं और जो अनइंप्लॉयड हैं।

[05:01:16] वर्किंग एज पापुलेशन में क्या आता है?

[05:01:17] एंप्लॉयड भी आते हैं, अनइंप्लॉयड भी आते

[05:01:19] हैं एंड पीपल नॉट लुकिंग फॉर वर्क भी आते

[05:01:21] हैं। ठीक है? ठीक है? हां हां हां। अब मान

[05:01:25] लो मैंने आपको बोला मान लो मैंने आपको

[05:01:28] बोला कि भारत का भारत में महिलाओं का

[05:01:31] एलएफपीआर कम है। भारत में महिलाओं का

[05:01:34] एलएफपीआर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट

[05:01:37] महिलाओं का कम है। इसका मीनिंग क्या हुआ?

[05:01:40] इसका मीनिंग समझ रहे हो? देखो। इकोनॉमिक

[05:01:43] सर्वे ने ये टर्म्स बहुत डिटेल में डिस्कस

[05:01:45] करनी स्टार्ट करी थी। एंड वहां से हमने

[05:01:47] अपने अक्सर डिस्कस करते रहते हैं हम। तो

[05:01:51] यहां पे समझो अगर एलएफपीआर कम है ना इसका

[05:01:54] मीनिंग पता क्या है? देखो ऊपर कौन है?

[05:01:56] एंप्लॉयड अनइंप्लॉयड। नीचे कौन है?

[05:01:58] एंप्लॉयड अनइंप्लॉयड एंड पीपल नॉट लुकिंग

[05:02:00] फॉर वर्क। अगर न्यूमैरेटर डिनोमिनेटर सेम

[05:02:04] है ना बस यहां पे ये अंतर है। अगर

[05:02:06] एलएफपीआर कम है ना इसका मतलब पता है क्या

[05:02:08] है? पीपल नॉट लुकिंग फॉर वर्क ज्यादा है।

[05:02:12] आई रिपीट एलएफपीआर कम होने का मतलब पता है

[05:02:15] क्या है? पीपल नॉट लुकिंग फॉर वर्क ज्यादा

[05:02:17] है। तो जब हम बोलते हैं ना कि भारत में

[05:02:20] महिलाओं का एलएफपीआर कम है। इसका मतलब पता

[05:02:23] है क्या है? भारत में ऐसी महिलाएं बहुत

[05:02:26] ज्यादा हैं जो काम ढूंढ ही नहीं रही।

[05:02:31] देखो एक तो होता है कि काम नहीं मिल रहा।

[05:02:34] ठीक है? दैट इज ओके। पर काम ढूंढ ही नहीं

[05:02:38] रही।

[05:02:40] इसका मीनिंग पता है क्या है? महिलाओं को

[05:02:42] भारत में घर में बिठा दिया जाता है। ना

[05:02:45] उनको काम करने दिया जाता है ना काम ढूंढने

[05:02:47] दिया जाता है। समझे मेरी बात को? तो

[05:02:50] इंडिया में वुमेन नॉट लुकिंग फॉर वर्क वो

[05:02:54] बहुत बड़ा नंबर है। बहुत बड़ा नंबर है।

[05:02:56] उनको काम करने दिया ही नहीं जाता। काम

[05:02:58] ढूंढने भी नहीं दिया जाता। बेरोजगारी एक

[05:03:01] अलग मुद्दा था पर काम ढूंढने तो दो

[05:03:03] एटलीस्ट उनको। ठीक है ना? हां।

[05:03:07] यस यस यस। ठीक है? बट अच्छी बात पता क्या

[05:03:10] है? भारत में वुमेन एलएफपीआर पहले के

[05:03:14] मुकाबले बेटर हुआ है। वुमेन एलएपीआर इज

[05:03:16] इंक्रीजिंग। पहले ये तो 20% के आसपास होता

[05:03:18] है। फिर बढ़ता-बढ़ता 35 37 और 40% तक

[05:03:20] पहुंच गया है। तो इंडिया में एलएफपीआर बढ़

[05:03:22] रहा है महिलाओं का। दैट इज़ अ गुड साइन।

[05:03:24] दैट इज़ अ गुड साइन।

[05:03:27] ठीक है? हां। हां हां। अच्छा। हां। अब आता

[05:03:30] है कि सर बेरोजगारी दर अनइंप्लॉयमेंट रेट।

[05:03:35] अनइंप्लॉयमेंट रेट का आपके हिसाब से

[05:03:37] फार्मूला क्या होना चाहिए? सोचो

[05:03:40] अनइंप्लॉयमेंट रेट का फार्मूला देखो ऊपर

[05:03:42] तो आएगा कितने लोग बेरोजगार हैं।

[05:03:46] डिनोमिनेटर में क्या आना चाहिए आपके हिसाब

[05:03:48] से? आप लोग बताओ

[05:03:50] बेरोजगारी दर निकालनी है कि कितने लोग

[05:03:52] कितने प्रतिशत लोग भारत में बेरोजगार हैं।

[05:03:55] हम किस में से निकालेंगे? ऊपर तो आ गया

[05:03:58] न्यूमरेटर में अनइंप्लॉयड। डिनोमिनेटर में

[05:04:00] क्या आएगा? नंबर ऑफ पीपल अनइंप्लॉयड एज अ

[05:04:03] परसेंटेज ऑफ व्हाट? एज अ परसेंटेज ऑफ

[05:04:07] लेबर फोर्स

[05:04:09] एज अ परसेंटेज ऑफ लेबर फोर्स * 100 प्लीज

[05:04:13] ध्यान से सुनना इसमें हम लोग लेबर फोर्स

[05:04:15] लेते हैं। लेबर फोर्स हम यहां पर पॉपुलेशन

[05:04:20] नहीं लेते। यहां क्या लेते हैं? लेबर

[05:04:22] फोर्स। समझे मेरी बात को? क्योंकि

[05:04:25] पॉपुलेशन तो लेने का कोई सेंस ही नहीं है

[05:04:27] इसके अंदर। कोई बच्चा बोलेगा वर्किंग एज

[05:04:29] पॉपुलेशन ले लो ना।

[05:04:32] भाई मुझे एक चीज बताओ। हमें हमें यह देखना

[05:04:34] है कितने लोग बेरोजगार हैं। पर किसमें से

[05:04:37] देखें? उनमें से देखो ना जो या तो काम कर

[05:04:39] रहे हैं या काम ढूंढ रहे हैं। जो बंदा काम

[05:04:42] ही नहीं कर रहा उसको हम बेरोजगार काउंट

[05:04:43] करते ही नहीं है। तो उनमें से सबको क्यों

[05:04:46] इंक्लूड करना? आप सिर्फ उन लोगों को देखो

[05:04:49] जो कहीं ना कहीं एंप्लॉयड और अनइंप्लॉयड

[05:04:50] हैं। तो सिर्फ लेबर फोर्स में से देखते

[05:04:52] हैं। यह फार्मूला ध्यान रखना।

[05:04:54] अनइंप्लॉयमेंट इज़ नथिंग बट नंबर ऑफ

[05:04:57] अनइंप्लॉयड एज अ परसेंटेज ऑफ लेबर फोर्स।

[05:04:59] इस बात को आप ध्यान रखेंगे। समझे मेरी बात

[05:05:02] को? तो नीचे आपका वर्किंग एज पॉपुलेशन

[05:05:04] नहीं आता। यह लेबर फ़ोर्स ही आता है। यह

[05:05:06] लेबर फ़ोर्स ही आता है। क्लियर है ये बात?

[05:05:09] ये ध्यान रखना। ये बात आपको आई होप समझ आ

[05:05:11] गई होगी। ऐसे ही एक होता है वर्कर एंड

[05:05:14] पॉपुलेशन रेशियो। ये होता है नंबर ऑफ़

[05:05:15] एंप्लॉयड डिवाइड बाय पॉपुलेशन * 100।

[05:05:17] वर्कर डिवाइड बाय पॉपुलेशन।

[05:05:20] ठीक है? हां। हां। गुड गुड गुड।

[05:05:26] अब पॉइंट यह आता है कि सर भारत में

[05:05:28] बेरोजगारी दर है कितनी? देखो प्लीज मेरी

[05:05:30] बात सुनना। भारत में अगर आपको बेरोजगारी

[05:05:33] चेक करनी है ना उसके लिए सरकार आंकड़ा

[05:05:35] देती है। कौन सा आंकड़ा देती है? पीरियडिक

[05:05:39] लेबर फोर्स सर्वे का। पीएलएफएस सर्वे होता

[05:05:41] है। ये कौन निकालता है सर सर्वे? ये

[05:05:44] निकालता है आपका एनएसओ नेशनल स्टैट्सिकल

[05:05:46] ऑफिस। ये आपको आंकड़ा देता है पीरियडिक

[05:05:48] लेबर फ़ सर्वे का। ठीक है? हर साल ये

[05:05:50] आंकड़ा आता है। हर साल ये आंकड़ा आता है।

[05:05:52] सर कितना है भारत में बेरोजगारी दर? देखो

[05:05:54] भारत में जो बेरोजगारी दर है इट इज 3.2%

[05:05:58] अब कुछ लोग मेरी बात से सहमत नहीं होंगे

[05:06:00] कि सर इतना तो नहीं है। कुछ लोग मेरे

[05:06:03] सामने लिख देंगे नहीं नहीं सर Google पे

[05:06:04] इतना लिखा हुआ है। ठीक है मैं आपकी बात से

[05:06:06] सहमत हूं। पर देखो सरकार किस आंकड़े को

[05:06:09] मानती है? सरकार मानती है इस आंकड़े को।

[05:06:12] क्योंकि ये सरकारी आंकड़ा है। सरकार ने

[05:06:14] खुद इसका सर्वे कराया। सरकार ने खुद ये

[05:06:16] आंकड़ा दिया है। ये आंकड़ा किसी प्राइवेट

[05:06:19] संस्थान ने नहीं दिया। प्राइवेट संस्थान

[05:06:21] वाले 6% 7% 8% 9% सब देंगे। पर सरकार किस

[05:06:25] आंकड़े को मानती है? ये आंकड़े को। एग्जाम

[05:06:27] में Google वाला आंकड़ा नहीं चलेगा।

[05:06:29] एग्जाम में चलेगा कि भाई ये एनएसओ ने क्या

[05:06:31] आंकड़ा दिया? तो एग्जाम में कोई पूछे

[05:06:32] बेरोजगारी दर कितनी है? तो 3.2% ही

[05:06:35] लिखेंगे। अगर आपको मेरी बात पे भरोसा नहीं

[05:06:37] है। आप इनका 14 अप्रैल 2025 का जो लेटेस्ट

[05:06:41] पीरियडिक लेबर फ़ोर्स सर्वे है। आप उसको

[05:06:43] पढ़ के देख लो। आप 250 पेजेस की रिपोर्ट

[05:06:45] पढ़ के देख लेना। आपको यही आंकड़ा मिलेगा।

[05:06:47] और एक्चुअली ये एनुअल आंकड़ा है। होता पता

[05:06:50] है क्या है? तीन-ती महीने के ऊपर भी

[05:06:51] अलग-अलग आंकड़े आते हैं। पर हमें उनको गो

[05:06:53] थ्रू नहीं करना। हमें सालाना आंकड़ा देखना

[05:06:55] है। इस साल 14 अप्रैल को फिर से ये आंकड़ा

[05:06:57] बदलेगा। बिल्कुल बदलेगा। तो 14 अप्रैल को

[05:07:00] आपका ये डाटा बदल जाएगा। पर अभी फिलहाल के

[05:07:02] लिए जिस दिन मैं खड़ा हूं इस दिन यही

[05:07:04] आंकड़ा है। समझे मेरी बात को?

[05:07:08] और ये एनुअल वाली बात कर रहा हूं। ये

[05:07:10] सालाना आंकड़े की बात कर रहा हूं।

[05:07:11] क्वार्टरली भी आते हैं कुछ-कुछ डाटा पर

[05:07:13] हमें उनमें नहीं जाना। हमें ये एनुअल

[05:07:16] आंकड़ा यहां पे देखना है।

[05:07:19] ठीक है। ठीक है सर। ठीक है। ठीक है। ठीक

[05:07:20] है। ओके सर। ओके। ओके। और एक्चुअली पता

[05:07:24] क्या है? मैं थोड़ा सा आपको एक्सप्लेन कर

[05:07:26] दूं। हालांकि इतना डिटेल में यूपीएससी

[05:07:28] शायद ना पूछे। इतना शायद यूपीएससी डिटेल

[05:07:30] में ना पूछे। ठीक है ना? बट फिर भी मैं

[05:07:32] आपको बता देता हूं कि ये पीरियडिक लेबर

[05:07:34] फॉर सर्वे या जो हम अनइंप्लॉयमेंट निकालते

[05:07:36] हैं ना ये तीन तरीके हैं यहां पे। एक होता

[05:07:39] है यूजुअल स्टेटस अप्रोच। एक होता है करंट

[05:07:41] वीकली स्टेटस, एक होता है आपका करंट डेली

[05:07:44] स्टेटस। ठीक है? तीन तरीके हैं। यूजुअल

[05:07:46] स्टेटस अप्रोच, करंट वीकली स्टेटस और एक

[05:07:48] होता है करंट डेली स्टेटस। ये मैंने जो

[05:07:50] आपको आंकड़ा दिया है, ये यूजुअल स्टेटस

[05:07:52] अप्रोच का है 3.2% वाला। अब इसमें पता है

[05:07:54] क्या होता है? इसमें आपको ऐसे इतना

[05:07:57] डिटेल्स जाने की जरूरत नहीं है। ठीक है?

[05:07:58] ये अलग-अलग तरीके हैं निकालने के इसके।

[05:08:02] होता पता क्या है? है यूजुअल स्टेटस

[05:08:04] अप्रोच में हम पिछले 1 साल का रेफरेंस

[05:08:06] पीरियड लेते हैं। पिछले 1 साल में लोगों

[05:08:08] से पूछा जाता है कि आपको कितने दिन लेबर

[05:08:10] फ़ोर्स का पार्ट थे? लेबर फ़ोर्स का पार्ट

[05:08:12] थे तो कितने दिन काम मिला? उसके हिसाब से

[05:08:14] उनकी बेरोजगारी यहां पे नापी जाती है। ठीक

[05:08:16] है? तो सबसे रिलायबल आपका यूज़ुअल स्टेटस

[05:08:18] अप्रोच आपको ध्यान में रखना है। बट

[05:08:22] ठीक है। चलो ठीक है। इतना काफी है। ये

[05:08:24] वाला प्रेस्टन का चलो छोड़ो। बट अभी एक ना

[05:08:26] करंट अफेयर्स में जो मुद्दा था वो था आपका

[05:08:30] एमजी नरेगा के बारे में।

[05:08:33] हां कृष देखो अगर आप यह वाला डाटा लिख के

[05:08:35] आओगे तो यूपीएससी आपको मार्क्स बिल्कुल

[05:08:37] नहीं देगा। मैं वही बता रहा हूं आपको। यह

[05:08:39] जो आप डाटा मुझे दे रहे हो ये किसी

[05:08:41] प्राइवेट संस्था ने कर दिया। मैं डाटा बोल

[05:08:43] दूंगा। मैं बोल रहा हूं भारत में 50%

[05:08:45] अनइंप्लॉयमेंट रेट है। ठीक है? तो मान

[05:08:46] जाओगे क्या आप? नहीं। यूपीएससी वही डाटा

[05:08:49] देगा जो आपने सरकार ने निकाला है। सबसे

[05:08:52] रिलायबल आपका मोस्टी का ही डाटा है। एनएसओ

[05:08:54] का जो डाटा है। तो आपको वही लिखना है। हां

[05:08:56] जी। देखो अभी इस साल पता है क्या हुआ? अभी

[05:08:59] इस साल आप लोग जानते होंगे कि हमारी जो

[05:09:00] एमजी नरेगा स्कीम है उसको यहां पर बदलकर

[05:09:03] हमने क्या कर दिया? वीवी जी राम जी विकसित

[05:09:06] भारत।

[05:09:07] ठीक है? गारंटी

[05:09:09] फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन। अब पॉइंट

[05:09:12] आता है कि सर क्या अंतर क्या हुआ दोनों

[05:09:14] में से?

[05:09:16] एमजी नरेगा को क्यों यहां पे वीबी जी राम

[05:09:19] जी कर दिया? मैं आपको समझाता हूं। देखो

[05:09:21] कुछ बातें प्लीज जरा फोकस करिएगा। प्लीज

[05:09:23] ध्यान से देखना सब लोग। सबसे पहली चीज तो

[05:09:26] यह है कि देखो एमजी नरेगा जो था ना वो

[05:09:28] 2005 में आया

[05:09:31] एक कानून के माध्यम से एक एक्ट के माध्यम

[05:09:33] से हां ठीक है एक कानून हमने पास किया

[05:09:36] एमजी नरेगा एंड उस हिसाब से ये आ गया तो

[05:09:39] स्टचटरी एक अथॉरिटी थी ठीक है और इसने

[05:09:43] इंश्योर क्या किया इसने इंश्योर किया राइट

[05:09:45] टू वर्क ठीक है क्या लिखा गया था इसके

[05:09:48] अंदर इसके अंदर लिखा गया था कि आपका जो भी

[05:09:51] रूरल हाउसहोल्ड है वर्ल्ड इज़ वर्ल्ड इज़

[05:09:53] वेरी वेरीेंट ये रूरल हाउसहोल्ड की बात

[05:09:55] करता है। जो आपके ग्रामीण हाउसहोल्ड हैं

[05:09:58] उनको हम यहां पे कम से कम एटलीस्ट 100 डेज

[05:10:02] का काम देंगे अनस्किल्ड। अनस्किल्ड वर्क

[05:10:04] के लिए आपको 100 दिन का यहां पे काम

[05:10:06] मिलेगा। रूरल एरियाज की बात यहां पे हो

[05:10:09] रही है। ठीक है? अब प्लीज फोकस करना। ये

[05:10:12] एक डिमांड बेस्ड था। कहने का मतलब मुझे

[05:10:16] काम नहीं मिल रहा। मैं सरकार के पास

[05:10:18] जाऊंगा कि भाई मुझे काम दो। तो सरकार मुझे

[05:10:21] काम देगी। ये मेरी डिमांड के हिसाब से काम

[05:10:24] कर रहा है। और आप मनमोहन सिंह जो हमारे

[05:10:26] डॉ. मनमोहन सिंह उस टाइम के ऊपर प्राइम

[05:10:27] मिनिस्टर थे। उन्होंने ये बात बोली थी कि

[05:10:29] सरकार आपको काम देकर आपके ऊपर कोई एहसान

[05:10:31] नहीं कर रही। ये आपका हक है। दिस इज़ योर

[05:10:33] राइट टू वर्क। तो ये डिमांड बेस्ड अप्रोच

[05:10:36] थी ताकि बेरोजगारी से हम यहां पे लड़ पाएं।

[05:10:39] अब जब हम बात करते हैं ना एमजी नरेगा की

[05:10:41] तो यहां पर

[05:10:44] यहां पर एलोकेशन फिक्स नहीं था। यहां पर

[05:10:46] एलोकेशन फिक्स नहीं था। कितने पैसे एमजी

[05:10:48] नरेगा के लिए हमें हर साल देने हैं ये

[05:10:50] फिक्स नहीं था। हम उसको कम ज्यादा कर लेते

[05:10:52] थे क्योंकि डिमांड जब आएगी तो लोगों को

[05:10:54] रोजगार देना पड़ेगा। रोजगार देंगे तो

[05:10:56] खर्चा बढ़ेगा। तो यहां पर एलोकेशन फिक्स

[05:10:58] नहीं होता था। और जो फंडिंग होता था ना

[05:11:01] फंडिंग कि पैसा कैसे शेयर होना है। ये

[05:11:03] पैसा जो होता था दो तरह से शेयर होता था।

[05:11:05] देखो एक होता था आपके वेजेस जो भी लोग काम

[05:11:08] करेंगे जो भी लोग यहां पे काम करेंगे। ठीक

[05:11:10] है ना?

[05:11:12] ठीक है? मैं बोलता हूं टीम को थोड़ा

[05:11:14] ब्राइटनेस कम कर देगी। जो भी यहां पे काम

[05:11:16] करेंगे ना जो वेजेस होगी जो काम करने की

[05:11:19] वेजेस होंगी तो उस केस में क्या होगा 100%

[05:11:22] पैसा सेंट्रल गवर्नमेंट देगी स्टेट देंगी

[05:11:24] 0% ध्यान से सुनना वेजेस की बात कर रहा

[05:11:26] हूं वेजेस में पूरा पैसा सेंट्रल

[05:11:28] गवर्नमेंट देती थी 0% स्टेट्स जब हम बात

[05:11:31] करते हैं रॉ मटेरियल की कच्चा जो रॉ

[05:11:33] मटेरियल मतलब जो आपके मान लो सीमेंट चाहिए

[05:11:36] कुछ चाहिए उसको बनाने के लिए तो वहां पर

[05:11:38] ये शेयर होता था 75 टू 25 की रेशियो में

[05:11:41] 75 सेंट्रल गवर्नमेंट 25 स्टेट गवर्नमेंट

[05:11:43] ओवरऑल अगर हम बात करें। ओवरऑल आपको यहां

[05:11:45] पे ये 90 टू 10 का रेशियो आपको देखने को

[05:11:47] मिलता था कि 90% सेंट्रल गवर्नमेंट की तरफ

[05:11:49] से आ रहा है। 10% आपके स्टेट्स की तरफ से

[05:11:51] था। इस तरह से ये शेयरिंग होती थी। ठीक

[05:11:53] है? बट अब जब हम बात करते हैं ना यहां पे

[05:11:57] वीबीजी राम जी विकसित भारत गारंटी फॉर

[05:12:00] रोजगार एंड आजीविका मिशन। अब वीबीजी राम

[05:12:02] जी में क्या है? पहली चीज तो हमने 100 दिन

[05:12:05] को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया। ठीक है? दूसरी

[05:12:09] बात आप नोटिस कर पाओगे। यह अब सप्लाई

[05:12:12] बेस्ड हो चुका है। कहने का मतलब आप काम

[05:12:14] मांगने जाओ और सामने वाला बोले ना ना काम

[05:12:17] है नहीं। यह पहले नहीं हो सकता था क्योंकि

[05:12:20] पहले डिमांड बेस्ड था। अब यह सप्लाई बेस्ड

[05:12:22] हो चुका है। काम होगा तो दे देंगे। नहीं

[05:12:24] होगा तो नहीं देंगे।

[05:12:26] दूसरी बात जब पीक सीजन होगा एग्रीकल्चर

[05:12:29] का। मान लो आपका खेतीबाड़ी में बहुत सारे

[05:12:31] पीक सीजन चल रहा है तो वहां पर वर्कर की

[05:12:33] रिक्वायरमेंट है। भाई उस समय के ऊपर ये

[05:12:35] स्कीम नहीं चलेगी। ताकि ऐसा ना हो कि लोग

[05:12:38] इधर घुस गए हैं मनरेगा में काम करने घुस

[05:12:40] गए हैं और वहां पे एग्रीकल्चर वर्कर की

[05:12:42] शॉर्टेज हो गई। तो पीक सीजन के समय के ऊपर

[05:12:45] ये स्कीम काम नहीं करेगी जब एग्रीकल्चर का

[05:12:47] पीक सीजन होगा। ठीक है? अरे वो लाइट की

[05:12:51] वजह से ज्यादा दिख रही है। वो चिंता मत

[05:12:53] करो। आपको पीपीटी मिलेगी तो उसमें बिल्कुल

[05:12:55] सही दिखेगा। ठीक है? आप बस अंडरस्टैंड कर

[05:12:57] लो इसमें। ठीक है? बाकी यहां पर स्टेट्स

[05:13:00] का एलोकेशन यहां पे स्टेट्स को जो पैसा

[05:13:02] दिया जाएगा एक फिक्स अमाउंट दिया जाएगा।

[05:13:04] देखो फर्क समझो। यहां पर फिक्स एलोकेशन

[05:13:06] नहीं था। डिमांड के हिसाब से हम एलोकेशन

[05:13:08] कम ज्यादा कर लेते थे। पर यहां पर स्टेट्स

[05:13:10] को एलोकेशन फिक्स कर दिया कि इतना ही पैसा

[05:13:12] मिलेगा। बात खत्म। ठीक है? और इसमें ना जो

[05:13:16] शेयर है वो भी चेंज कर दिया गया। पहले

[05:13:18] 9010 था। मैंने आपको बताया ना वेजेस में

[05:13:20] 100 ज़ीरो रॉ मटेरियल में 75 25। अब यहां

[05:13:22] पर क्या हो चुका है? 60-40 तो भाई यहां पर

[05:13:25] क्या हो जाएगा? यहां पर हमारे जो स्टेट्स

[05:13:28] होंगे उनका खर्चा बढ़ जाएगा। तो स्टेट्स

[05:13:31] के ऊपर इसका भार ज्यादा डाल दिया गया है।

[05:13:33] अब जो नए चेंजेस करे गए हैं। तो ये कुछ

[05:13:35] बड़े-बड़े चेंजेस हैं जो आपको यहां पे

[05:13:36] देखने को मिलती हैं। इन केस ऑफ आपके

[05:13:40] आपके जो विकसित भारत जी राम जी तो 60-4

[05:13:43] नॉर्मल केस के अंदर नॉर्मल स्टेट्स में

[05:13:45] नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स में 910 एंड अगर

[05:13:47] यूटी है तो 100 जीरो। तो बट पॉइंट पता है

[05:13:49] क्या है? स्टेट्स खुश नहीं है इससे

[05:13:51] क्योंकि स्टेट्स के ऊपर बर्डन बढ़ गया है।

[05:13:53] अब स्टेट्स के ऊपर जिम्मेदारी आ गई है।

[05:13:55] सेंटर थोड़ा पीछे हट गया है यहां पर ये

[05:13:57] रोजगार देने के लिए। तो ये है आपका विकसित

[05:14:00] भारत जी राम जी। तो ये फर्क आपको समझ आना

[05:14:02] चाहिए कि कैसे पहले 910 का रेश्यो था। अब

[05:14:04] ये 60-4 यहां पे कर दिया गया है। ठीक है?

[05:14:07] आई होप आपको ये कांसेप्ट भी यहां पे समझ आ

[05:14:09] गया होगा आपका दोनों में डिफरेंस का जो था

[05:14:11] एम जी नरेगा और वीबी जी राम जी का।

[05:14:16] ठीक है? तो ये कुछ टॉपिक्स थे जो हमें

[05:14:18] यहां पे पता होने चाहिए थे विद रिगार्ड्स

[05:14:20] टू एंप्लॉयमेंट। थोड़ा करंट अफेयर्स भी

[05:14:21] हमने यहां पे डिस्कस किया। एंड बाकी जो

[05:14:23] स्टैटिक टॉपिक्स थे हमने वो भी यहां पे

[05:14:25] डिस्कस कर लिए। आगे चलेंगे। अगला टॉपिक

[05:14:28] हमारा इंडस्ट्रीज के रिगार्डिंग है। सबसे

[05:14:31] पहले आप लोग एक क्वेश्चन का आंसर करेंगे।

[05:14:33] किस क्वेश्चन को ट्राई करो? इसका आंसर

[05:14:35] बताओ मुझे।

[05:15:17] अच्छा फिर बताओ आईआईपी कौन पब्लिश करता है

[05:15:22] आईआईपी कौन पब्लिश करता है?

[05:15:29] ट्राई करते हैं। देखो

[05:15:32] पहले मैं आपको आईआईपी के बारे में

[05:15:34] एक्सप्लेन कर देता हूं। इंडेक्स ऑफ

[05:15:36] इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन। इंडेक्स ऑफ

[05:15:38] इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन। इंडेक्स ऑफ

[05:15:40] इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन जो है, पहली बात तो

[05:15:42] आप समझो कि यह हर महीने के ऊपर रिलीज़ किया

[05:15:44] जाता है। इट रिलीज़ ऑन अ मंथली बेसिस। पहली

[05:15:47] बात। दूसरी बात इसको रिलीज़ कौन करता है?

[05:15:49] दोस्तों, इसको रिलीज़ किया जाता है एनएसओ

[05:15:51] के द्वारा। नेशनल स्टिकल ऑफिस जो है जो कि

[05:15:53] मोसपी के अंतर्गत आता है वही यहां पे इसको

[05:15:56] रिलीज़ करता है। ठीक है? यहां पर इंडेक्स

[05:15:59] ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में तीन

[05:16:00] कॉम्पोनेंट्स हैं। आपका मैन्युफैक्चरिंग,

[05:16:02] आपका माइनिंग, आपका इलेक्ट्रिसिटी। इनका

[05:16:05] वेटेज भले ही मत याद रखो। इनका ऑर्डर याद

[05:16:07] रखो। हमें देखना है ना कि इंडस्ट्रीज ने

[05:16:10] कैसा परफॉर्म किया। तो वहां पर

[05:16:11] मैन्युफैक्चरिंग का सबसे ज्यादा वेटेज है

[05:16:15] फॉललोड बाय माइनिंग एंड इलेक्ट्रिसिटी।

[05:16:18] ठीक है? अब यहां पर बहुत सारी अलग-अलग

[05:16:20] इंडस्ट्रीज आएंगी। अभी फिलहाल के लिए इनका

[05:16:23] जो बेस ईयर है वो 2011-12 हैं। पर इसको

[05:16:25] जल्द ही चेंज किया जाएगा 2022-23।

[05:16:28] ठीक है? तो न्यू बेस ईयर विल बी 2022-23।

[05:16:31] ये है इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन

[05:16:33] के रिगार्डिंग। हम इंडस्ट्रीज की

[05:16:34] परफॉर्मेंस हम यहां पे ट्रैक करने की

[05:16:35] कोशिश कर रहे हैं। पर सर आप एक बात देखो।

[05:16:38] ये तो बहुत सारी इंडस्ट्रीज होंगी। हां,

[05:16:40] इनको तो कैलकुलेट करना बड़ा मुश्किल है।

[05:16:42] हां, निकाल लेंगे। बट निकालते हैं तो है

[05:16:44] ही है। ठीक है। पर अगर हमें यह देखना हो

[05:16:47] कि हमारी फंडामेंटल इंडस्ट्रीज, हमारी जो

[05:16:49] कोर इंडस्ट्रीज हैं वो कैसा परफॉर्म कर

[05:16:51] रही हैं। उसके लिए हमारे पास एक अलग

[05:16:53] इंडेक्स है व्हिच वी कॉल एज इंडेक्स ऑफ़ एट

[05:16:56] कोर इंडस्ट्रीज। आठ कोर इंडस्ट्रीज का

[05:16:59] इंडेक्स। अब ये आठ कोर इंडस्ट्रीज आपको

[05:17:01] याद रखनी है और इसी ऑर्डर में याद रखनी

[05:17:04] है। क्योंकि क्वेश्चन इसमें दो बार तो आ

[05:17:06] ही चुका है। कौन-कौन सी एट कोर इंडस्ट्रीज

[05:17:08] हैं? एक बार क्वेश्चन ये आया था और उनको

[05:17:10] वेटेज के अंदर अरेंज करने का क्वेश्चन दो

[05:17:12] बार आ चुका है। तो प्लीज सुनना ये आठ

[05:17:15] इंडस्ट्रीज आप इसी ऑर्डर में याद रखेंगे।

[05:17:17] सबसे पहले आएगा आपका पेट्रोलियम रिफाइनरी।

[05:17:20] फिर इलेक्ट्रिसिटी, फिर स्टील, फिर कोल,

[05:17:23] फिर क्रूड ऑयल, फिर आपका नेचुरल गैस, फिर

[05:17:26] सीमेंट आप और फर्टिलाइज़र्स। ये आठ

[05:17:29] सेक्टर्स आपको याद रखने हैं। आठ कोर

[05:17:31] इंडस्ट्रीज। इसी ऑर्डर में मेरे साथ सब

[05:17:34] लोग बोलेंगे पहले आया पेट्रोलियम

[05:17:36] रिफाइनिंग। फिर आया इलेक्ट्रिसिटी, फिर

[05:17:38] स्टील, फिर कोल, फिर क्रूड ऑयल, फिर

[05:17:40] नेचुरल गैस, फिर सीमेंट, फिर

[05:17:42] फर्टिलाइज़र्स। ये आठों आपको इसी पर्टिकुलर

[05:17:45] ऑर्डर में यहां याद रखने हैं। हाईएस्ट टू

[05:17:47] लोएस्ट वेटेज है। और अगर आप इन आठ

[05:17:50] इंडस्ट्रीज को अंडरस्टैंड कर जाते हैं ना,

[05:17:53] आपको इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन का

[05:17:55] 40% वेटेज आईडिया लग जाएगा। क्योंकि

[05:17:57] आईआईपी के अंदर तो सारी इंडस्ट्रीज हैं।

[05:18:00] पर इन्हीं आठ कोर इंडस्ट्रीज का वेटेज जो

[05:18:02] है वो 40% है। मतलब अगर आपने इन कोर

[05:18:04] सेक्टर्स को देख लिया इन्हीं के ऊपर बाकी

[05:18:06] और इंडस्ट्रीज डिपेंडेंट है। कोई भी

[05:18:08] इंडस्ट्री जो है वो कोल चाहिए, उसको स्टील

[05:18:10] चाहिए, रिफाइनरी का रिक्वायरमेंट होता है।

[05:18:12] हर एक चीज का तो कहीं ना कहीं इस तरह से

[05:18:14] इन्हीं को देख लेना। मतलब आपने एक बहुत

[05:18:16] अच्छे से आपने आईआईपी को भी समझ लिया। पर

[05:18:19] ध्यान से सुनना। आईआईपी जैसे हमने नोटिस

[05:18:21] किया था कि वहां पर एनएसओ रिलीज़ करता था।

[05:18:23] बट इंडेक्स ऑफ़ एट कोर इंडस्ट्रीज कौन

[05:18:25] रिलीज़ करता है? ये रिलीज़ किया जाता है बाय

[05:18:27] द ऑफिस ऑफ इकोनमिक एडवाइजर डीपीआईटी

[05:18:29] मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री। ये

[05:18:31] भी महीने के बेसिस के ऊपर रिलीज़ होता है

[05:18:33] और इसका बेस ईयर आपको 11-12 आपको देखने को

[05:18:35] मिलेगा।

[05:18:37] ठीक है? ऐसे ही एक और इंडस्ट्रीज के लिए

[05:18:39] होता है जिसको हम बोलते हैं एनुअल सर्वे

[05:18:41] ऑफ इंडस्ट्रीज। एनुअल सर्वे ऑफ

[05:18:44] इंडस्ट्रीज। एएसआई ये नाम में लिखा है

[05:18:46] एनुअल। तो ये सालाना रिलीज़ होता है और

[05:18:48] इसको भी आपका एनएसओ ही रिलीज़ करता है। ठीक

[05:18:50] है? यह इस इयरली बेसिस के ऊपर यहां पे

[05:18:52] रिलीज़ होता है एएसआई। एनुअल सर्वे ऑफ़

[05:18:54] इंडस्ट्रीज़। पर एक और आपको यहां पे पता

[05:18:58] होना चाहिए एक और इंडेक्स जिसको हम जानते

[05:19:01] हैं पीएमआई के नाम से परचेसिंग मैनेजर

[05:19:04] इंडेक्स नहीं श्रेया 40% जीडीपी में

[05:19:07] कंट्रीब्यूशन नहीं है 40% इंडेक्स ऑफ

[05:19:09] इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में कंट्रीब्यूशन

[05:19:11] है समझे मेरी बात को हां तो इसको देखेंगे

[05:19:16] इसको देखेंगे परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स

[05:19:19] क्या होता है देखो ये बड़ा इंटरेस्टिंग है

[05:19:21] पीएमआई को निकालना

[05:19:23] देखो यहां यहां पर पता है क्या होगा?

[05:19:25] परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स में एक सर्वे

[05:19:28] किया जाएगा। उस सर्वे में पूछा जाएगा कि

[05:19:31] अभी सिचुएशन कैसी है? पिछले महीने से

[05:19:34] बढ़िया है, खराब है या वैसी ही है जैसे

[05:19:37] पहले थी। तो होता पता है क्या है? इसका एक

[05:19:40] फार्मूला आपको यहां पे ध्यान रखना होगा

[05:19:42] परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स का। क्या है

[05:19:44] फार्मूला? देखो बात ध्यान से सुनना।

[05:19:52] तीन तरह की चीजें होती हैं। एक होता है

[05:19:55] इंप्रूवमेंट,

[05:20:00] एक होता है नो चेंज।

[05:20:05] एक होता है डिक्रीज।

[05:20:08] इन सबकी वेटेज है। जैसे इंप्रूवमेंट की

[05:20:10] वेटेज है वन, नो चेंज की वेटेज है 5 और

[05:20:14] डिक्रीज की वेटेज है ज़ीरो। अब मान लो आपके

[05:20:16] पास कुछ क्वेश्चंस हैं। अब परसेंटेज में

[05:20:19] 100% क्वेश्चन होंगे। हां, ठीक है। अब 100

[05:20:21] क्वेश्चंस हैं मान लो। उसमें से कुछ

[05:20:23] क्वेश्चन के आपसे सवाल पूछे गए और मैनेजर

[05:20:26] ने बोला कि भाई यार देखो 40 जगह पे हमारी

[05:20:29] इंप्रूवमेंट है। 30 जगह पे देयर इज़ नो

[05:20:31] चेंज। जैसा पिछले महीने था वैसा ही

[05:20:33] सिचुएशन चल रहा है। और 30 चीजों में हमारी

[05:20:35] यहां पे डिक्रीज हुआ है। फिर क्या होगा ना

[05:20:37] इनका कैलकुलेट किया जाएगा इनकी वैल्यूज़।

[05:20:39] कैसे कैलकुलेट की जाएगी? देखो जो भी

[05:20:42] क्वेश्चन है उसको वेटेज

[05:20:45] उसके साथ मल्टीप्लाई किया जाएगा। जैसे ये

[05:20:47] बनेगा क्या? 40 * 1

[05:20:50] 40% क्वेश्चन में इंप्रूवमेंट थी ना?

[05:20:51] इंप्रूवमेंट का स्कोर है वन। तो 40 * 1

[05:20:54] 30% क्वेश्चन में नो चेंज है तो 30 * 5.

[05:20:58] ऐसे ही 30% 30% क्वेश्चंस में आपका

[05:21:01] डिक्रीज़ है तो ये बनेगा 30 * 0 अब आप यहां

[05:21:04] पे अगर इसका रिजल्ट निकालने की कोशिश

[05:21:05] करोगे ना आप रियलाइज़ करोगे ये बनेगा 40 *

[05:21:07] 1 40 30 *5 15 और 30 * 0 इन सबको ऐड

[05:21:12] करेंगे तो ये कितना बनेगा? ये बनेगा टोटल

[05:21:14] आपका 55।

[05:21:16] ठीक है? अब सवाल यहां पे ये आएगा कि 55 तो

[05:21:19] हमने निकाल लिया। इसका मतलब क्या है? 50%

[05:21:21] का मतलब क्या है? ये 55 तो आ गया। देखो

[05:21:24] अगर आपका स्कोर आता है 50 से बड़ा। अगर

[05:21:27] पीएमआई स्कोर आता है 50 से बड़ा। इसका मतलब

[05:21:30] है कि हम एक्सपेंशन कर रहे हैं। देयर इज़

[05:21:33] एक्सपेंशन। अगर स्कोर आता है 50 के बराबर।

[05:21:36] इसका मतलब है कि जैसे सिचुएशन पहले थी,

[05:21:38] वैसी ही सिचुएशन अभी भी है। देयर इज़ नो

[05:21:40] चेंज। एंड अगर आपका स्कोर आता है 50 से

[05:21:43] कम, इसका मतलब देयर इज़ अ कॉन्ट्रैक्शन। तो

[05:21:45] स्कोर 50 से ज्यादा आया, कम आया, 50 के

[05:21:48] बराबर आया। उसके हिसाब से हमें पता लग

[05:21:49] जाता है कि इंप्रूवमेंट हुआ है, नो चेंज

[05:21:52] है या एक डिक्रीज है। तो ये होता है

[05:21:55] पीएमआई स्कोर। अब ध्यान से सुनना। ये जो

[05:21:58] पीएमआई है ना ये मैन्युफैक्चरिंग के लिए

[05:22:00] अलग निकालते हैं। सर्विस के लिए अलग

[05:22:03] निकालते हैं और फिर दोनों का एक कंबाइंड

[05:22:05] स्कोर भी निकाला जाता है। आई रिपीट

[05:22:07] मैन्युफैक्चरिंग का अलग होता है। सर्विज

[05:22:09] का अलग होता है। एंड फिर दोनों के लिए

[05:22:11] कंबाइंड स्कोर भी यहां पे निकाला जाता है।

[05:22:16] व्हाट इज एमएसजी? कहां लिखा है एमएसजी?

[05:22:18] भाई कहां लिखा है एमएसजी?

[05:22:22] ओके। हां। तो इस तरह से आप नोटिस कर

[05:22:25] पाओगे। एक सर्वे बेस्ड मेजर है और ये

[05:22:27] परसेप्शन बताता है इंपॉर्टेंट वेरिएबल्स

[05:22:30] की। वेरिएबल्स में ना एक्चुअली अगर आपको

[05:22:32] यूपीएससी थोड़ा डिफिकल्ट क्वेश्चन पूछना

[05:22:33] चाहे तो ये पूछ सकता है यहां पे। ये पूछ

[05:22:35] सकता है आपसे। ठीक है ना? क्या पूछेगा? ये

[05:22:38] पूछेगा कि इसके अंदर क्या-क्या चीजें

[05:22:40] देखते हो आप परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स के

[05:22:41] अंदर? तो नए ऑर्डर्स कितने हैं? आउटपुट

[05:22:44] कितना है? रोजगार कितना है? सप्लायर

[05:22:46] डिलीवरी, स्टॉक ऑफ परचेस ये हर एक

[05:22:49] कॉम्पोनेंट को यहां पे देखता है। परचेसिंग

[05:22:51] मैनेजर इंडेक्स। उसके बेसिस के ऊपर आपका

[05:22:53] यहां पे रिजल्ट निकाला जाता है कि आखिर

[05:22:55] पीएमआई का स्कोर 50 से ज्यादा है, कम है

[05:22:58] या फिर 50 के बराबर है। ठीक है? हां। गुड।

[05:23:02] तो इसको निकालता कौन है? इट इज़ लीज़्ड बाय

[05:23:04] आईएचएस मार्केट व्हिच इज़ पार्ट ऑफ SNP

[05:23:07] ग्लोबल। ठीक है? तो इनके द्वारा ये पीएमआई

[05:23:09] इंडेक्स यहां पे निकाला जाता है। तो ये

[05:23:11] सारी बातें मैंने आपको बता दी। अब अगर

[05:23:13] वापस आए इस क्वेश्चन के अंदर तो आप इस

[05:23:15] क्वेश्चन को अब आप हैंडल कर सकते हो।

[05:23:18] राइट?

[05:23:21] अब देखो इसमें ना ये पहला स्टेटमेंट अभी

[05:23:23] तो ठीक है पर आगे जाके 2022- 23 हो जाएगा।

[05:23:25] तो आप इसको करेक्ट कर लेना। ठीक है ना?

[05:23:27] बाकी अगर हम बात करें तो आप नोटिस कर

[05:23:29] पाओगे कि जो थर्ड स्टेटमेंट मैंने आपको

[05:23:31] बता दिया आठ इंडस्ट्रीज का जो स्कोर है वो

[05:23:33] 40% से ज्यादा वेटेज है। ठीक है ना? बाकी

[05:23:35] आईआईपी के अंदर क्या केवल मैन्युफैक्चरिंग

[05:23:37] माइनिंग आता है? अरे नहीं भाई मैंने आपको

[05:23:39] बताया इलेक्ट्रिसिटी भी तो आता है। तो

[05:23:41] सेकंड इज़ रॉन्ग। एंड थर्ड की अगर हम बात

[05:23:43] करें फोर्थ स्टेटमेंट की आईआईपी इज़

[05:23:45] पब्लिश्ड ऑन अ मंथली बेसिस। महीने भर तो

[05:23:47] होता है पर ये एनएसओ के द्वारा रिलीज़ किया

[05:23:49] जाता है ना कि आपका आरबीआई की तरफ से।

[05:23:51] इसीलिए इसका आंसर आपका ऑप्शन सी वन एंड

[05:23:53] थ्री ओनली यहां पे हो जाएगा।

[05:24:05] कहां लिखा है भाई? एमएसडी कहां लिखा है

[05:24:07] आपको? कहां दिख रहा है?

[05:24:11] क्लियर हुआ यहां तक?

[05:24:22] ठीक है। हां। अब इसी में हमें एक कांसेप्ट

[05:24:26] डिस्कस करना है स्टार्टअप्स के बारे में।

[05:24:27] ठीक है? ठीक है? इंडस्ट्रीज स्टार्टअप्स

[05:24:29] ये सारी बातें डिस्कस करनी है। अब देखो

[05:24:31] स्टार्टअप से क्वेश्चन पूछा जा सकता है।

[05:24:34] वो क्यों पूछा जा सकता है? क्योंकि

[05:24:35] दोस्तों इस बार के बजट के अंदर स्टार्टअप

[05:24:38] की जो डेफिनेशन है वो बदल गई है। सुना आप

[05:24:40] लोगों ने? इस बार के बजट के अंदर

[05:24:43] स्टार्टअप की डेफिनेशन को बदल दिया गया

[05:24:45] है। तो अगर आपने किसी बुक से पढ़ा है और

[05:24:48] आपने करंट अफेयर्स नहीं पढ़े तो आपको पता

[05:24:50] ही नहीं होगा क्या है स्टार्टअप की

[05:24:51] डेफिनेशन। तो समझते हैं कि आखिर स्टार्टअप

[05:24:54] की डेफिनेशन क्या है। पर उससे पहले मैं

[05:24:56] आपको एक चीज समझाना चाहूंगा। वो है कि

[05:24:59] आपका

[05:25:02] डीप टेक स्टार्टअप क्या होता है? पहले डीप

[05:25:03] टेक स्टार्टअप समझेंगे। फिर स्टार्टअप की

[05:25:05] डेफिनेशन पे आएंगे। व्हाट इज द मीनिंग ऑफ़

[05:25:07] डीप टेक स्टार्टअप? देखो ये वाला वर्ड

[05:25:09] हमारी फाइनेंस मिनिस्टर ने इस्तेमाल किया

[05:25:11] है। ठीक है? तो दैट इज़ व्हाई वी मस्ट

[05:25:13] अंडरस्टैंड द मीनिंग ऑफ़ द वर्ड डीप टेक।

[05:25:15] डीप टेक का मतलब होता है भाई ऐसे

[05:25:17] स्टार्टअप जो कहीं ना कहीं ऐसी टेक्नोलॉजी

[05:25:20] में काम कर रहे हैं जो कटिंग एज है। कटिंग

[05:25:22] एज में मतलब सर जैसे फॉर एग्जांपल

[05:25:24] रोबोटिक्स में काम हो रहा है। जैसे आपका

[05:25:25] सेमीकंडक्टर में काम हो रहा है। ठीक है

[05:25:27] ना? आपका कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसका

[05:25:30] एग्रीकल्चर में क्लाइमेट रीज़न क्रॉप्स

[05:25:31] बनाने में काम हो रहा है। ठीक है ना? आपका

[05:25:33] प्रसीजन मेडिसिन बन रही है। आपका एआई का

[05:25:36] इस्तेमाल हो रहा है। एडवांस

[05:25:37] मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। तो ऐसी वाले

[05:25:39] स्टार्टअप्स या ऐसी वाली टेक्नोलॉजी

[05:25:41] जिसमें बहुत बड़ा पोटेंशियल है आपका यहां

[05:25:44] पे कुछ बड़ी डिस्कवरी करने के ऊपर। है ना?

[05:25:47] जिनमें बहुत ज्यादा रिसर्च की आवश्यकता

[05:25:49] होती है। जिनमें अगर आप पैसा लगाओगे तो हो

[05:25:52] सकता है कि आपको बहुत अच्छा रिजल्ट देकर

[05:25:54] आए और उससे दुनिया पूरी बदल जाए। इनको हम

[05:25:56] बोलते हैं डीप टेक स्टार्टअप। बहुत सारे

[05:26:00] एग्जांपल्स यहां पे हैं। अर्बन

[05:26:01] इंफ्रास्ट्रक्चर में हो सकता है। ये सारे

[05:26:03] आते हैं डीप टेक स्टार्टअप। अब डीप

[05:26:06] टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ना एक वर्ड

[05:26:07] निकल के आता है। वो आता है ये ये वर्ड

[05:26:11] आपको ध्यान देना है। इस पूरे पेज के अंदर

[05:26:14] ये वर्ड इंपॉर्टेंट है ये वाला। देखो अगर

[05:26:18] आपको देखो भारत को आगे बढ़ना है तो भाई

[05:26:23] डीप टेक्नोलॉजी में हमें काम करना पड़ेगा।

[05:26:25] बिल्कुल। पर डीप टेक्नोलॉजी में एक समस्या

[05:26:27] है। समस्या पता है क्या है? डीप

[05:26:30] टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज्यादा पैसे की

[05:26:32] आवश्यकता है। यहां रिसर्च एंड डेवलपमेंट

[05:26:35] बहुत बड़े स्तर के ऊपर करना पड़ेगा।

[05:26:36] रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए चाहिए पैसा

[05:26:39] और पैसा आप लगाओगे आज। हो सकता है कि उसका

[05:26:44] फायदा आपको 10 साल बाद मिले या उससे भी

[05:26:47] ज्यादा समय बाद मिले। क्योंकि यहां पर

[05:26:48] रिसर्च में पैसा आज लगेगा। आउटपुट आज नहीं

[05:26:51] आएगा। आउटपुट आएगा कई सालों के बाद। पर

[05:26:54] शायद अगर आपका रिजल्ट आया तो बहुत ही

[05:26:56] शानदार होगा। अब जैसे चैट जीपीटी की बात

[05:26:58] कर लो। चैट जीपीटी कई सालों से काम हो रहा

[05:27:00] था। पर कहीं ना कहीं पैसा आता जा रहा था।

[05:27:03] पैसा लगाते जा रहे थे। जब रिजल्ट आया तो

[05:27:05] कितना शानदार आया। तो डीप टेक्नोलॉजी के

[05:27:07] लिए यही सेम बात आती है। इसको बोलते हैं

[05:27:09] लॉन्ग जेस्टेशन पीरियड। आप पैसा लगाओगे आज

[05:27:12] पर आउटपुट या रिटर्न मिलेगा कई सालों के

[05:27:14] बाद। तो जेस्टेशन पीरियड यहां पे ज्यादा

[05:27:16] होता है। तो सरकार ने ना स्टार्टअप्स की

[05:27:19] जो डेफिनेशन चेंज करी है उसमें दो तरह के

[05:27:22] स्टार्टअप्स बात की है। एक तो है नॉर्मल

[05:27:24] स्टार्टअप्स। उनकी डेफिनेशन अलग है और एक

[05:27:26] है डीप टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स। उनकी

[05:27:28] डेफिनेशन अलग है। आई रिपीट स्टार्टअप्स

[05:27:31] में सरकार ने दो कैटेगरीज बना दी। एक तो

[05:27:33] नॉर्मल वाले स्टार्टअप। एक है डीप

[05:27:35] टेक्नोलॉजी वाले स्टार्टअप। इनकी डेफिनेशन

[05:27:37] अलग है। इनकी डेफिनेशन अलग है। पॉइंट आता

[05:27:39] है इनकी डेफिनेशन क्या है? फिर स्टार्टअप

[05:27:41] की देखो जब हम बात करते हैं ना स्टार्टअप

[05:27:44] की प्लीज सुनना यहां पे अगर हम बात करते

[05:27:47] हैं नॉर्मल स्टार्टअप की सुनना भैया ध्यान

[05:27:50] से नॉर्मल स्टार्टअप डीप टैक की बात नहीं

[05:27:52] कर रहा नॉर्मल स्टार्टअप उसके लिए बात

[05:27:54] होती है कि अगर उनका टर्नओवर 200 करोड़ तक

[05:27:59] है। देखो पहले ये नंबर ना 100 करोड़ होता

[05:28:02] था। अब ये नंबर बढ़ के 200 करोड़ हो गए।

[05:28:06] मैं आपको एक्सप्लेन कर देता हूं इसको यहां

[05:28:08] पे। देखो अगर आपको अपना स्टार्टअप कहलाना

[05:28:11] है। जैसे मैं आपसे अगर पूछता हूं क्या PW

[05:28:13] एक स्टार्टअप है? अगर मैं आपसे पूछता हूं

[05:28:16] क्या Zomato अब स्टार्टअप है? अगर मैं

[05:28:17] आपसे पूछता हूं कि क्या आपका स्विगी एक

[05:28:20] स्टार्टअप है? बताओ आप जरा लोग जरा।

[05:28:22] एक्चुअली पता क्या है? स्टार्टअप कहलाने

[05:28:24] के लिए चार क्राइटेरिया है भारत के अंदर।

[05:28:27] ये एस पर द एक्ट मैं आपको बता रहा हूं।

[05:28:28] मैं आपको बताता हूं क्या है। देखो इधर

[05:28:30] आपको पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है। मैं

[05:28:32] आपको समझा रहा हूं। एक तो है उसको शुरू

[05:28:35] हुए

[05:28:37] 10 साल से कम हुए होने चाहिए। उसको शुरू

[05:28:41] हुए 10 साल से कम समय होना चाहिए। ठीक है?

[05:28:44] दूसरी बात अगर हम बात करें उसको यहां पे

[05:28:48] भारत में रजिस्टर्ड होना चाहिए। कहने का

[05:28:50] मतलब हमारे जो अलग-अलग एक्ट हैं जैसे

[05:28:52] कंपनीज़ एक्ट हो गया उसके अंतर्गत

[05:28:54] रजिस्टर्ड होना चाहिए भारत के अंदर। एक और

[05:28:56] बात है कि वो कुछ इनोवेटिव काम करें।

[05:29:00] ठीक है? अब देखो यार ये तीन क्राइटेरिया

[05:29:03] तो पहले भी सेम थे। यह तीन क्राइटेरिया तो

[05:29:06] पहले भी सेम थे। ठीक है? क्राइटेरिया चेंज

[05:29:09] हुआ है एक। जो चौथा क्राइटेरिया है ना वो

[05:29:12] बदल गया है। चौथा क्राइटेरिया पता है क्या

[05:29:14] था कि आपका जो टर्नओवर होना चाहिए वो पहले

[05:29:17] था कि 100 करोड़ से कम होना चाहिए किसी भी

[05:29:20] साल के अंदर। पर अब हमने इसको क्या कर

[05:29:22] दिया है? अब हमने इसको कर दिया है अप टू

[05:29:24] 200 करोड़। अप टू 200 करोड़। अगर किसी भी

[05:29:29] फाइनेंसियल ईयर में मतलब किसी भी नहीं अगर

[05:29:32] आपका सभी फाइनेंसियल ईयर में टर्नओवर 200

[05:29:34] करोड़ से कम है और आपकी ये तीनों

[05:29:36] क्राइटेरिया भी साथ में फुलफिल होते हैं

[05:29:38] तो आप स्टार्टअप हो। अब जैसे अगर हम बात

[05:29:40] करें फिजिक्स वाला या पीडब्ल्यू की देखो

[05:29:42] पीडब्ल्यू इन तीनों क्राइटेरिया पे सही

[05:29:45] बैठता है। इनोवेशन भी किया, 10 साल से कम

[05:29:47] टाइम भी हुआ, भारत में रजिस्टर्ड भी है।

[05:29:49] ये तीन बातें सही हैं। पर पीडब्ल्यू यहां

[05:29:52] पे सही नहीं बैठता। इसीलिए पीडब्ल्यू आज

[05:29:54] के समय स्टार्टअप नहीं है। समझे? किसी

[05:29:57] टाइम पे था आज नहीं है। तो ये चारों

[05:30:00] क्राइटेरिया फॉलो होने चाहिए। क्या है

[05:30:02] चारों क्राइटेरिया? आपका स्टार्ट हुए टाइम

[05:30:05] 100 10 साल से कम हुआ होना चाहिए। दूसरी

[05:30:07] बात एनुअल टर्नओवर इन ऑल ऑफ द प्रोसीडिंग

[05:30:10] फाइनेंसियल ईयर वो 200 करोड़ से कम होना

[05:30:12] चाहिए। पहले ये नंबर 100 करोड़ था। अब 200

[05:30:14] करोड़ किया गया है। तीसरी बात इंडिया में

[05:30:16] आपका रजिस्टर्ड होना चाहिए। चौथी बात कुछ

[05:30:18] इनोवेशन का रिगार्डिंग काम क्या होना

[05:30:20] चाहिए? ये है स्टार्टअप्स की आपकी

[05:30:21] डेफिनेशन। चेंज क्या आया है? चेंज आया

[05:30:24] यहां पे। पहले ये नंबर 100 करोड़ था। अब

[05:30:26] ये 200 करोड़ हो गया है। ऐसा क्यों हुआ?

[05:30:28] अरे इसका जवाब हमारे ऑनरेबल प्राइम

[05:30:30] मिनिस्टर मोदी जी ने खुद दिया है। क्या

[05:30:31] कहा मोदी जी ने सर? मोदी जी ने ये कहा कि

[05:30:33] देखो यार ये वाला क्राइटेरिया हमने 10 साल

[05:30:36] पहले सोचा था। एक्चुअली पता है क्या है?

[05:30:38] हर साल 16 जनवरी को हम लोग नेशनल

[05:30:41] स्टार्टअप डे मनाते हैं। क्योंकि

[05:30:42] स्टार्टअप इंडिया के 10 साल कंप्लीट हो

[05:30:44] गए। अब 2016 में ना हम लोग स्टार्टअप

[05:30:46] इंडिया पॉलिसी लेकर आए थे। उसको 10 साल

[05:30:48] कंप्लीट हो गए हैं। तो मोदी जी ने खुद कहा

[05:30:50] उस दिन कि भाई ये वाली बात ना हमने 10 साल

[05:30:53] पहले लेकर आए थे।

[05:30:55] तब 100 करोड़ वाली बात ठीक थी। अब तो यार

[05:30:58] कंपनियां ज्यादा कमा रही हैं। कंपनी का

[05:30:59] टर्नओवर ज्यादा है। तो अब हमें इस

[05:31:01] डेफिनेशन को भी चेंज करना पड़ेगा। अब हमने

[05:31:03] यहां पर इसको 200 करोड़ यहां पे कर दिया

[05:31:05] है कि टर्नओवर आपका 200 करोड़ से कम होना

[05:31:07] चाहिए। टाइम आपका 10 साल से कम इनोवेटिव

[05:31:09] प्रोडक्ट एंड इंडिया में रजिस्टर्ड होना

[05:31:11] चाहिए। चलो ठीक है। अब पॉइंट आता है कि सर

[05:31:15] ये तो डेफिनेशन हो गई नॉर्मल स्टार्टअप

[05:31:18] की। हमारे डीप टेक स्टार्टअप के लिए क्या

[05:31:20] है डेफिनेशन? देखो डीप टेक स्टार्टअप के

[05:31:23] लिए हमने यह सोचा कि यार देखो यार ये वाले

[05:31:25] स्टार्टअप्स को ना रिसर्च एंड डेवलपमेंट

[05:31:29] ज्यादा चाहिए। बिल्कुल ठीक बात है। ये

[05:31:31] वाले स्टार्टअप्स को लॉन्ग जस्टेशन पीरियड

[05:31:34] है। पैसा लगाएंगे आज रिटर्न बाद में आएगा।

[05:31:36] तो इनके लिए डेफिनेशन थोड़ी अलग होनी

[05:31:38] चाहिए। पॉइंट आता है क्या अलग इनके लिए

[05:31:40] किया गया? इनके लिए देखो जो टाइम था ना वो

[05:31:43] 10 साल नहीं वो 20 साल किया गया है। टाइम

[05:31:47] क्या है? जो नॉर्मल स्टार्टअप के लिए 10

[05:31:49] साल था इनके लिए डीप स्टार्टअप के लिए वो

[05:31:51] 20 साल है। पहला फर्क। दूसरा फर्क ये है

[05:31:54] जो नॉर्मल स्टार्टअप के लिए 200 करोड़ की

[05:31:56] बात थी इनके लिए वो है 300 करोड़। समझ पाए

[05:32:01] मेरी बात को कि क्या चेंजेस किए गए हैं

[05:32:02] स्टार्टअप्स की डेफिनेशन में। क्या आपको

[05:32:04] समझ आया नहीं आया ये बात?

[05:32:07] नॉर्मल के लिए 10 साल 200 करोड़, डीप टेक

[05:32:10] के लिए 20 साल 300 करोड़।

[05:32:17] क्या यह बात ठीक है सबके लिए?

[05:32:25] ठीक है? तो ये सारी बातें यहां पर लिखी भी

[05:32:27] हुई हैं। देखो 20 साल 300 करोड़ ये है डीप

[05:32:30] टेक स्टार्टअप्स के लिए। नॉर्मल

[05:32:32] स्टार्टअप्स के लिए 200 करोड़ बस।

[05:32:35] ठीक है? नॉर्मल के लिए कोई अच्छा अलग नहीं

[05:32:38] किया। ठीक है ना? हां। बस पहले एक सिंगल

[05:32:40] कैटेगरी थी। अब दो कैटेगरी बना दी हमने।

[05:32:42] ठीक है? हां। एक चीज़ और भी है। एक चीज़ और

[05:32:44] भी है। कोऑपरेटिव्स

[05:32:46] भाई कोऑपरेटिव्स को भी एलिजिबल कर दिया

[05:32:48] गया स्टार्टअप के लिए। जैसे आपके

[05:32:50] मल्टीस्टेट या स्टेट रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव

[05:32:52] सोसाइटीज होती हैं वो भी इंक्लूड हो चुकी

[05:32:54] हैं अब इसके अंदर तो कोऑपरेटिव्स भी

[05:32:55] एलिजिबल हो पाएंगे। ठीक है? हां हां तो

[05:32:58] कोशिश यही है कि भाई यार आप चिंता मत करो।

[05:33:01] आप इनोवेशन पे ध्यान दो। आप ये मत सोचो कि

[05:33:03] यार हम स्टार्टअप नहीं रहेंगे। दिक्कत हो

[05:33:05] जाएगी। हमें इतने सारे फायदे मिल रहे हैं।

[05:33:07] वो चले जाएंगे। अरे भाई आप चिंता मत करो।

[05:33:10] सरकार बैठी है। ठीक है?

[05:33:14] गुड गुड गुड।

[05:33:17] ठीक है? तो अब ध्यान रखना कि अब

[05:33:19] कोऑपरेटिव्स भी एलिजिबल हैं। ठीक है? आपके

[05:33:21] कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ भी अब यहां पे एलिजिबल

[05:33:23] हो जाएंगी इनके बेनिफिट्स लेने के लिए।

[05:33:24] हां, एक बात और ध्यान रखना कि यह ना जो

[05:33:28] डेफिनेशन है ना यह डीपीआईआईटी की है। जो

[05:33:30] मैंने आपको बताया ना मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स

[05:33:31] एंड इंडस्ट्री के अंदर डिपार्टमेंट ऑफ

[05:33:33] प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री इंटरनल ट्रेड जो आता

[05:33:34] है। तो डीपीआईआईटी के साथ आपको रिकॉग्निशन

[05:33:37] लाने के लिए ये क्राइटेरियाज़ आपको फॉलो

[05:33:38] करने पड़ते हैं। एक्चुअली स्टार्टअप के

[05:33:40] रिगार्डिंग ज्यादातर जो काम है वो

[05:33:41] डीपीआईटी ही देखता है।

[05:33:45] ठीक है। ठीक है। ठीक है। क्या बेनिफिट्स

[05:33:47] होते हैं सर? देखो इनको अगर देखो आपको

[05:33:49] डीपीआईटी ने रिकॉग्नाइज किया है स्टार्टअप

[05:33:51] तो आपको 100% इनकम टैक्स पे छूट मिलती है

[05:33:55] ऑन प्रॉफिट फॉर थीम कंजेक्टिव ईयर तीन

[05:33:57] लगातार सालों के लिए आपको यहां पे प्रॉफिट

[05:34:00] के ऊपर एक्सेंपशन आपको देखने को मिलेगा

[05:34:02] अगर आप एक स्टार्टअप हो उसके अलावा आपको

[05:34:04] अननेसेसरी जो कैश फ्लो स्टेटमेंट्स है वो

[05:34:06] नहीं बनानी होंगी अगर आप एक स्टार्टअप हो

[05:34:08] बड़ी कंपनी बन जाओगे तो बनाना ही है पर

[05:34:10] अगर आप स्टार्टअप हो तो आपको ये सब से

[05:34:12] आपको छूट मिल जाती है ताकि आपका ज्यादा

[05:34:14] टाइम ना रेगुलेशंस वगैरह में मत जाए उसके

[05:34:17] साथ-साथ अगर हम बात करें बाकी इसके अलावा

[05:34:19] आपको मदद दी जाती है। स्टार्टअप इंडिया है

[05:34:21] हमारे पास। अटल इनोवेशन मिशन है। तो ये

[05:34:23] सारे अलग-अलग बेनिफिट्स यहां पे आपको दिए

[05:34:25] जाते हैं। ठीक है? तो ये बातें आपको यहां

[05:34:27] पे क्लियर होनी चाहिए।

[05:34:29] राइट? राइट राइट। ठीक है? अच्छा एक बात और

[05:34:32] ध्यान रखना। अगर कोई आपसे पूछे कि इंडिया

[05:34:35] में आज के समय कितने नंबर ऑफ स्टार्टअप्स

[05:34:37] हैं? देखो अगर हम बात करते हैं ना जो हमने

[05:34:39] लास्ट टाइम अगर हम नेट पर चेक करें तो

[05:34:42] आपको ये नंबर मिलेगा 1.59 लाख से ज्यादा

[05:34:44] स्टार्टअप्स हैं। पर अभी-अभी मोदी जी ने

[05:34:46] खुद अपने भाषण में बोला है कि भारत में

[05:34:49] नंबर ऑफ स्टार्टअप्स 2 लाख से ज्यादा हो

[05:34:51] चुके हैं। ये मैं नहीं बोल रहा ये मोदी जी

[05:34:53] ने बोला है। आप चेक करना। तो आज के समय

[05:34:55] भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं

[05:34:58] एस पर मोदी जी। उसी तरह से अगर हम बात

[05:35:00] करें देखो ये नंबर आज से 12 साल पहले ये

[05:35:03] नंबर 1000 से भी कम था।

[05:35:06] भारत में 2014 में स्टार्टअप्स 1000 से भी

[05:35:08] कम थे। यह फिर से मोदी जी ने बोला है और

[05:35:10] यह फैक्ट है ये। तो चलो 1000 से भी कम थे।

[05:35:12] तो आप नोटिस कर पाओगे कि इस तरह से

[05:35:15] स्टार्टअप्स में एक बहुत बड़ी बढ़ोतरी

[05:35:17] हमें यहां पे देखने को मिली है। बाकी

[05:35:19] स्टार्टअप्स में एक पर्टिकुलर टर्म आता है

[05:35:20] जिसको हम जानते हैं यूनिकॉर्न के नाम से।

[05:35:22] यूनिकॉर्न एक ऐसा स्टार्टअप होता है जिसकी

[05:35:25] वैल्यू्यूएशन आपकी 1 बिलियन यूएस डॉलर से

[05:35:27] ज्यादा होती है। ठीक है? और हर साल हम 16

[05:35:31] जनवरी को नेशनल स्टार्टअप डे के रूल में

[05:35:33] सेलिब्रेट करते हैं। क्योंकि इसी दिन 2016

[05:35:36] में हमारा नेशनल स्टार्ट जो स्टार्टअप

[05:35:38] इंडिया है वो यहां पे स्टार्ट हुआ था।

[05:35:41] ठीक है? ओके ओके ओके हां अब इसी

[05:35:46] कॉन्टेक्स्ट में अगर हम बात करें ना तो

[05:35:48] भारत ने ना इनोवेशन में अच्छा काम किया

[05:35:50] है। सर आपको कैसे पता? अरे भाई एक ग्लोबल

[05:35:53] इनोवेशन इंडेक्स आता है। ग्लोबल इनोवेशन

[05:35:55] इंडेक्स में पिछले 10 साल में भारत की

[05:35:57] रैंकिंग बड़ी तेजी से बढ़ी है। बहुत

[05:36:00] इंपॉर्टेंट है। 2015 में भारत का रैंक था

[05:36:02] 81 और अब 2025 में भारत का रैंक हो चुका

[05:36:05] है 38। ऐसा कैसे हो गया? ऐसा हमें बताया

[05:36:10] है किसने? डब्ल्यूआईपीओ ने। डब्ल्यूआईपीओ

[05:36:13] वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी

[05:36:14] ऑर्गेनाइजेशन। दरअसल में जो वर्ल्ड

[05:36:17] इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन होती

[05:36:18] है, यह हर साल एक इंडेक्स लेकर आती है

[05:36:21] ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स। अभी दो-ती महीने

[05:36:23] पहले इन्होंने 2025 का हमारे सामने

[05:36:25] इंडेक्स लेकर आया और इसमें इन्होंने बताया

[05:36:27] कि यार देखो भारत काफी तरक्की कर रहा है।

[05:36:29] पहले 81 रैंक था 2015 में वहां से हमने

[05:36:33] इंप्रूवमेंट करी। हम 48 पे पहुंचे 2020

[05:36:36] में और अब हमने और इंप्रूवमेंट करी। अब हम

[05:36:39] 38 पे पहुंच चुके हैं 2025 के अंदर। तो

[05:36:41] भारत लगातार तरक्की कर रहा है ग्लोबल

[05:36:44] इनोवेशन इंडेक्स के अंदर। और अगर हम बात

[05:36:47] करें अगर हम दोस्तों बात करें लोअर मिडिल

[05:36:51] इनकम कंट्रीज की ठीक है और सेंट्रल एंड

[05:36:54] साउथर्न एशिया की यहां पर भारत इनोवेशन के

[05:36:57] मामले में पहले स्थान के ऊपर है। आई रिपीट

[05:37:00] लोअर मिडिल इनकम कंट्रीज में और सेंट्रल

[05:37:03] एंड सदर्न एशियन कंट्रीज में भारत यहां पर

[05:37:06] पहले स्थान के ऊपर है इन टर्म्स ऑफ

[05:37:09] इनोवेशन। दुनिया में हम 38 पे हैं। पर इस

[05:37:12] रीजन की बात करें या लोअर मिडिल इनकम

[05:37:14] कंट्रीज की बात करें भारत वहां पे पहले

[05:37:16] नंबर के ऊपर है। समझे? तो ये बताया है

[05:37:18] डब्ल्यूआईपीओ ने। बाकी दुनिया में अगर हम

[05:37:20] बात करें स्विट्जरलैंड टॉप पे है इनोवेशन

[05:37:23] के मामले में स्वीडन, यूएसए, साउथ कोरिया,

[05:37:25] सिंगापुर इस तरह से एंड आपको यहां पे

[05:37:27] देखने को मिल जाएंगे। चाइना टॉप 10 में आ

[05:37:30] चुका है। चाइना 10थ प्लेस के ऊपर आपको

[05:37:32] देखने को मिल जाएगा। है ना? तो ये कुछ

[05:37:34] बातें हैं जो आपको यहां पे पता होनी

[05:37:36] चाहिए। आप यहां पे देखो। ये है लोअर मिडिल

[05:37:39] इनकम कंट्रीज। लोअर मिडिल इनकम कंट्रीज

[05:37:42] में भारत का रैंक वन है। अपर मिडिल इनकम

[05:37:44] कंट्रीज में चाइना का रैंक वन है।

[05:37:47] ठीक है? बाकी मैंने बता ही दिया। वर्ल्ड

[05:37:50] इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन यहां

[05:37:51] पे निकालता है। एंड हिसाब से बताता है कि

[05:37:53] कहां-कहां पे कितना रिसर्च एंड डेवलपमेंट

[05:37:55] हो रहा है। इंस्टीटशंस कैसे हैं?

[05:37:56] इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है। है ना? ये सारी

[05:37:58] बातें यहां पे बताई जाती हैं। तो ये है

[05:38:02] आपका ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025।

[05:38:09] ठीक है? हां। चाइना अपर मिडिल इनकम कंट्री

[05:38:11] है। चाइना आपका अपपर मिडिल इनकम कंट्री

[05:38:14] है।

[05:38:21] यहां तक कोई कंफ्यूजन है किसी को?

[05:38:31] एक बच्चा पूछ रहा है कि सर ये लोअर मिडिल

[05:38:33] इनकम कंट्री का मतलब क्या है? देखो यार

[05:38:35] उन्होंने ना वो डेफिनेशन डाली हुई है। मैं

[05:38:37] आपको रफ आईडिया दे देता हूं। भारत का अभी

[05:38:39] ना जो पर कैपिटा इनकम है वो $3000 से कम

[05:38:42] है। तो भारत की पर कैपिटा इनकम कम है तो

[05:38:44] उनको लोअर मिडिल इनकम कंट्री में डालते

[05:38:46] हैं। चाइना की हमारे से ज्यादा है तो वो

[05:38:48] अप्पर मिडिल इनकम कंट्री है। आगे आ जाएगा।

[05:38:50] मैंने वो डेफिनेशन डाली हुई है। 13,000 से

[05:38:53] ऊपर वालों को हायर इनकम कंट्रीज बोलते

[05:38:55] हैं। आगे आ जाएगा। वो मैंने लिखा हुआ है

[05:38:57] यहां पे। ठीक है? वो एग्जैक्ट डाटा आपको

[05:38:58] दे दूंगा। पर पॉइंट पता है क्या होता है?

[05:39:00] पर कैपिटा इनकम के बेसिस के ऊपर डा बताते

[05:39:02] हैं। अह लो इनकम, लोअर मिडिल इनकम, अप्पर

[05:39:05] अह मिडिल इनकम और हाई इनकम। हाई इनकम का

[05:39:08] 13,847 से ऊपर होता है। वो है डेफिनेशन।

[05:39:11] डोंट वरी। वो डॉलर्स के कॉन्टेक्स्ट में

[05:39:13] वो मिल जाएगी आपको। ठीक है? भारत की इनकम

[05:39:15] अभी थोड़ी कम है। इसलिए भारत लोअर मिडिल

[05:39:17] इनकम कंट्री है। वर्ल्ड बैंक ये ना डाटा

[05:39:20] बताता है कि कौन सी इनकम के ऊपर पर कैपिटा

[05:39:22] इनकम के ऊपर आप कौन सी रेंज में आते हो।

[05:39:25] चलो। ये तो बात हो गई सर स्टार्टअप्स की।

[05:39:28] हां। ठीक है? अच्छा एक बात और ध्यान रखना

[05:39:31] भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप

[05:39:33] इकोसिस्टम है। सबसे ज्यादा जो स्टार्टअप्स

[05:39:35] हैं वो आपको यूएसए में देखने को मिलते

[05:39:37] हैं। उसके बाद आपको चाइना में देखने को

[05:39:39] मिलेंगे। यूएसए और चाइना के बाद तीसरे

[05:39:41] नंबर पर भारत का स्थान आता है स्टार्टअप

[05:39:43] इकोसिस्टम के अंदर। ठीक है? तो इस तरह से

[05:39:46] आप यहां पे इनको डिवाइड कर सकते हो। यूएसए

[05:39:48] पहले पे, चाइना दूसरे पे, इंडिया तीसरे पे

[05:39:50] ऊपर। अच्छा एक टर्मिनोलॉजी स्टार्टअप्स के

[05:39:54] रिगार्डिंग बहुत बार न्यूज़ में आई है।

[05:39:56] इसका स्टार्टिंग एक्चुअली इकोनॉमिक सर्वे

[05:39:58] ने किया था। पर उसके बाद न्यूज़पेपर्स में

[05:40:00] कई बार आई है। इस टर्म को हम जानते हैं

[05:40:02] फ्लिपिंग के नाम से एंड रिवर्स फ्लिपिंग

[05:40:04] के नाम से। ये दो वर्ड्स का आपको मीनिंग

[05:40:06] समझना है स्टार्टअप के कॉन्टेक्स्ट में।

[05:40:08] फ्लिपिंग एंड रिवर्स फ्लिपिंग। देखो

[05:40:13] मान लो एक स्टार्टअप है।

[05:40:16] ठीक है? अब यार उसको पता क्या लगता है?

[05:40:19] उसको लगता है कि यार

[05:40:21] इंडिया में ना थोड़ी दिक्कत चल रही है।

[05:40:23] क्यों दिक्कत क्यों चल रही है? क्या

[05:40:25] दिक्कत है इंडिया से? इंडिया में दिक्कत

[05:40:27] उनको लगता है।

[05:40:29] इंडिया में उनको दिक्कत मान लो ये लगी कि

[05:40:31] यार देखो कहीं ना कहीं अगर हम बात करें तो

[05:40:34] इंडिया में रेगुलेशन बहुत ज्यादा है

[05:40:36] अननेसेसरी के। है ना? हमें यहां पे थोड़ा

[05:40:39] इंडिया में नह के फायदा नहीं है। चलो एक

[05:40:41] काम करते हैं किसी दूसरी जगह पे यहां पे

[05:40:43] अपने आप को करते हैं। तो कई बार पता क्या

[05:40:45] होता था? इंडियन स्टार्टअप्स

[05:40:48] अपनी पेरेंट कंपनी दूसरे देशों में मूव कर

[05:40:51] लेते हैं ताकि इंडिया के रेगुलेशंस उनके

[05:40:54] ऊपर प्रॉपर्ली एक्टिव ना हो पाए। इस

[05:40:56] कांसेप्ट को बोलते हैं फ्लिपिंग। ठीक है?

[05:40:58] अपने पेरेंट कंपनी को उन्होंने रजिस्टर

[05:41:00] करवा लिया यूएसए में, सिंगापुर में या

[05:41:02] ऑपरेशंस अपने इंडिया ऑपरेशंस इंडिया में

[05:41:04] रखे पर कहीं ना कहीं पेरेंट कंपनी अपनी

[05:41:06] यूएसए या सिंगापुर या किसी और देश में

[05:41:07] करवा ली। इसको बोलते थे फ्लिपिंग। पर अब

[05:41:11] हमने पता है क्या किया? भारत ने अपने

[05:41:13] रेगुलेशन बहुत सिंपल कर दिए हैं। जैसे

[05:41:15] क्या सिंपल कर दिया हमने? फॉर एग्जांपल अब

[05:41:18] भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम बेहतर हो

[05:41:19] गया है। आईपीओ लिस्ट करना अब आसान हो गया

[05:41:22] है। रेगुलेशंस पहले के मुकाबले आसान हो

[05:41:24] चुके हैं। सरकार आपको मदद करती है। इंडियन

[05:41:26] कैपिटल मार्केट आपको पैसे वगैरह रेज़ करना

[05:41:28] अब थोड़ा बेटर आपको लगता है। और आपको लगता

[05:41:31] है कि यार अगर हम भारतीय कंपनी बोलेंगे ना

[05:41:33] अपने आपको तो कहीं ना कहीं हमारे लिए

[05:41:34] फायदा है। तो जब इतने सारे बेनिफिट्स आपको

[05:41:37] मिले मिल जाएंगे ना आप सोचोगे यार हमने ना

[05:41:40] ये पेरेंट कंपनी यूएसए या सिंगापुर में

[05:41:42] करके गलती कर दी। एक काम करते हैं पेरेंट

[05:41:45] कंपनी इंडिया में बना लेते हैं। तो इसको

[05:41:47] बोलते हैं रिवर्स फ्लिपिंग। फ्लिपिंग में

[05:41:49] क्या होता था? भारत के स्टार्टअप्स अपने

[05:41:50] आप को दूसरे देश में यहां पे अपनी पेरेंट

[05:41:53] कंपनी रजिस्टर करवाते थे। पर अब वो वहां

[05:41:55] से वापस भारत आ रहे हैं। इसको बोलते हैं

[05:41:57] हम रिवर्स फ्लिपिंग। क्या होता है रिवर्स

[05:41:59] क्लिपिंग? जब एक स्टार्टअप अपने लीगल हेड

[05:42:02] क्वार्टर को फॉरेन कंपनीज़ फॉरेन देश से

[05:42:05] वापस भारत में या वापस अपने होम कंट्री

[05:42:08] में शिफ्ट करता है, उसको हम बोलते हैं

[05:42:09] रिवर्स फ्लिपिंग।

[05:42:12] ठीक है? फ्लिपिंग मतलब स्टार्टअप ने अपने

[05:42:14] हेड क्वार्टर फॉरेन कंट्री में शिफ्ट कर

[05:42:16] दिए। रिवर्स का मतलब फॉरेन कंट्री से वापस

[05:42:18] अपनी होम कंट्री में आ गया। इसको बोलते

[05:42:20] हैं रिवर्स फ्लिपिंग। तो इंडिया अच्छा काम

[05:42:22] कर रहा है। एंड इसीलिए कहीं ना कहीं हमारा

[05:42:24] यहां पे रिवर्स फ्लिपिंग का कांसेप्ट हमें

[05:42:26] यहां पे देखने को मिल रहा है। पहले

[05:42:27] फ्लिपिंग होता था। अब यहां पे रिवर्स

[05:42:29] फ्लिपिंग हमें यहां पे देखने को मिल रहा

[05:42:31] है।

[05:42:33] बात क्लियर है सबको? ये?

[05:42:37] ठीक है? ऐसे ही आप लोग जरा एमएसएमई की भी

[05:42:40] डेफिनेशन देख लो। ऐसे ही आप लोग जरा

[05:42:42] एमएसएमई की डेफिनेशन भी देख लो। एमएसएमई

[05:42:44] की डेफिनेशन पता है क्या है? ये देखो इसके

[05:42:46] ऊपर दो बार क्वेश्चन आ चुका है। अगर आपको

[05:42:48] पता हो अगर आप पीवाईक्यूस करते हो।

[05:42:49] एमएसएमई की डेफिनेशन के ऊपर दो बार

[05:42:51] क्वेश्चन आ गया है। देखो

[05:42:54] माइक्रो स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेस।

[05:42:59] ठीक है? आपके जो लघु उद्योग होते हैं ना

[05:43:01] बेसिकली उनकी बात है। इंडिया में आप

[05:43:03] एमएसएमई हो या नहीं हो इसके लिए आपके दो

[05:43:06] क्राइटेरियास हैं। एक है आपका

[05:43:08] इन्वेस्टमेंट और एक होता है आपका टर्नओवर।

[05:43:11] इन्वेस्टमेंट एंड टर्नओवर के बेसिस के ऊपर

[05:43:13] आपको यहां पे डिसाइड किया जाता है कि आप

[05:43:15] एमएसएमई हो या नहीं हो। प्रॉफिट का कोई

[05:43:18] लेना देना नहीं है। यहां पे लेना देना

[05:43:19] किसका है? कितना आपने पैसा इन्वेस्ट किया

[05:43:21] और कितना आपका टर्नओवर है। पहले 2020 से

[05:43:25] पहले क्या होता था? मैन्युफैक्चरिंग का

[05:43:27] क्राइटेरिया अलग था। सर्विस का अलग था। अब

[05:43:30] कोई सेपरेट क्राइटेरिया नहीं है। अब देयर

[05:43:31] इज़ अ सिंगल क्राइटेरिया मैन्युफैक्चरिंग

[05:43:33] और सर्विस के लिए। और वो क्राइटेरिया क्या

[05:43:35] है? यह वाला। आपको ये नया वाला

[05:43:38] क्राइटेरिया देखना है। ये नया वाला

[05:43:40] क्राइटेरिया। यूपीएससी ने इस क्राइटेरिया

[05:43:41] पे क्वेश्चन ऑलरेडी पूछ लिया था 2023 के

[05:43:43] पेपर के अंदर। देखो माइक्रो एंटरप्राइजज़

[05:43:46] कौन सी होती हैं? जिनकी इन्वेस्टमेंट ढ.5

[05:43:49] करोड़ से कम और टर्नओवर 10 करोड़ से कम होता

[05:43:52] है। उनको बोलते हैं माइक्रो।

[05:43:55] ऐसी एंटरप्राइज जिनका इन्वेस्टमेंट 25

[05:43:58] करोड़ से कम और आपका टर्नओवर 100 करोड़ से

[05:44:01] कम होता है उनको हम बोलते हैं स्मॉल और

[05:44:03] ऐसी एंटरप्राइज जिनमें आपका इन्वेस्टमेंट

[05:44:05] सवा5 करोड़ 125 करोड़ से कम और आपका

[05:44:08] टर्नओवर 500 करोड़ से कम होता है उनको हम

[05:44:10] बोलते हैं आपका मीडियम ठीक है ये पुराने

[05:44:14] वाले अब आपको याद नहीं रखने नो नीड टू

[05:44:15] रिमेंबर द ओल्ड वंस ये नए वाले जो है ना

[05:44:18] ये वाले ये नए वाले जो हैं ये आपको यहां

[05:44:20] पे क्राइटेरिया इसका याद रखना है ये सेम

[05:44:22] क्वेश्चन आ चुका है ऑलरेडी ये सेम

[05:44:24] क्वेश्चन यहां पे आ चुका है ऑलरेडी

[05:44:26] यूपीएससी में

[05:44:28] ठीक है? यह होता है एमएसएमस का

[05:44:30] क्राइटेरिया कि कौन माइक्रो है, कौन स्माल

[05:44:32] है, कौन मीडियम है। इस तरह से

[05:44:35] इनका फायदा आप देख सकते हो। फायदा बहुत

[05:44:38] सारा है। लगभग 30% जीडीपी कॉनंट्रीब्यूशन

[05:44:40] आपका एमएसएमईस का होता है। लगभग 45% आपके

[05:44:43] एक्सपोर्ट्स में कंट्रीब्यूट करते हैं।

[05:44:45] उसी तरह से अगर हम बात करें

[05:44:46] मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट के अंदर इनका

[05:44:48] कॉन्ट्रिब्यूशन लगभग 35% का रहता है

[05:44:50] एमएसएमईस का। ठीक है? बाकी ये तो

[05:44:52] गवर्नमेंट स्कीम्स हैं। ये तो आपको पता

[05:44:54] होगा इन स्कीम्स के बारे में।

[05:44:56] हां जी। अच्छा एक कांसेप्ट आता है डच

[05:44:59] डिजीज का। आप लोग बताओगे क्या होता है डच

[05:45:01] डिजीज? कैन यू टेल मी व्हाट इज डच डिजीज?

[05:45:04] एनीवन?

[05:45:36] अंजलि फर्क ही फर्क है। देखो मान लो जैसे

[05:45:41] मैं आपको बताता हूं जब मैं टीचर नहीं था

[05:45:43] ना तो पहले मैंने कुछ टाइम के ऊपर मैंने

[05:45:45] हलवाई का काम किया था। तो जब मैं हलवाई का

[05:45:47] काम करता था, मैं क्या करता था? मान लो

[05:45:49] मैंने आज ₹100 के लड्डू बेचे। तो ₹100 के

[05:45:52] लड्डू जो मैंने बेचे ना, ₹100 मेरे लिए

[05:45:53] टर्नओवर है। पर ₹100 मेरा प्रॉफिट नहीं

[05:45:56] है। क्योंकि जब मैंने लड्डू बनाए थे, तो

[05:45:58] मैंने वहां पे कुछ रॉ मटेरियल, कुछ लेबर

[05:46:00] कॉस्ट भी आई। मान लो ₹30 मेरे लड्डू बनाने

[05:46:02] में लग गए। तो मेरा प्रॉफिट ₹70 का हुआ।

[05:46:05] टर्नओवर मेरा 100 का है। प्रॉफिट मेरा ₹70

[05:46:07] का है। क्योंकि खर्चा भी तो हुआ है मेरा।

[05:46:09] समझे?

[05:46:11] हां जी। हां जी। हां जी। देखो इसको

[05:46:13] समझेंगे कि आखिर ये डच डिजीज क्या है?

[05:46:15] देखो जब हम बात करते हैं ना डच डिजीज की

[05:46:17] इसका मीनिंग पता है क्या होता है अगर आपकी

[05:46:19] एक रिसोर्स के ऊपर कई बार डिपेंडेंस बहुत

[05:46:21] ज्यादा होती है और उस चक्कर में आपके जो

[05:46:24] बाकी और चीजें हैं वो कभी डेवलप ही नहीं

[05:46:26] हो पाती क्या मतलब है इस चीज का इसका

[05:46:29] मीनिंग बहुत सिंपल है इसका मीनिंग बहुत

[05:46:31] सिंपल है देखो मान लो हां सडन वूमेन

[05:46:36] नेचुरल सेक्टर बिल्कुल ठीक है सुदीप ने

[05:46:38] बिल्कुल ठीक कहा सडन वूमेन वन रिसोर्स यस

[05:46:41] देखो मान लो हमारा देश जो है मान लो हमारा

[05:46:45] एक देश है। ठीक है? उसमें एक सेक्टर अच्छा

[05:46:48] कर रहा है। एक सेक्टर इतना अच्छा कर रहा

[05:46:51] है कि वो एक्सपोर्ट भी अच्छा खासा कर रहा

[05:46:53] है। ठीक है? अब ये जो सेक्टर है जिसने

[05:46:56] अच्छा किया इसको तो फायदा हुआ क्योंकि

[05:46:58] इसने एक्सपोर्ट अच्छा खासा किया। उससे कई

[05:47:00] बार क्या होता है ना हमारा जो करेंसी है

[05:47:02] हमारा करेंसी मजबूत हो जाता है। अब करेंसी

[05:47:05] मजबूत हो गया। ठीक है? अब करेंसी मजबूत

[05:47:08] होने से ना बाकी और सेक्टर्स कहीं ना कहीं

[05:47:11] दिक्कत में आ जाते हैं। क्योंकि बाकी

[05:47:13] सेक्टर्स में उतनी हमारी कॉम्पिटिटिवनेस

[05:47:15] नहीं है। तो बाकी सेक्टर अगर हम कुछ

[05:47:17] प्रोड्यूस करेंगे उसको हम एक्सपोर्ट कराने

[05:47:19] की कोशिश करेंगे तो नहीं हो पाएगा। तो पता

[05:47:21] है क्या हुआ यहां पे? जैसे कई बार कुछ देश

[05:47:23] हैं जहां तेल वगैरह मिलता है। तो यार तेल

[05:47:26] वगैरह मिलने से तो वहां पे बड़ा फायदा

[05:47:28] होना चाहिए था उनको। तो वो तो बहुत

[05:47:29] डेवलप्ड होने चाहिए थे। पर सारे देश तो

[05:47:31] ऐसे नहीं है क्योंकि तेल होने से उनकी

[05:47:34] पूरी अर्थव्यवस्था सिर्फ उसके ऊपर

[05:47:35] डिपेंडेंट हो चुकी है। बाकी और सेक्टर

[05:47:37] बिल्कुल वहां पे जीरो हो गए। इसको बोलते

[05:47:39] हैं हम डच डिजीज।

[05:47:46] क्या ये बात समझ आई आपको? एक्सेसिव

[05:47:48] डिपेंडेंस ऑन वन सेक्टर। बेसिकली एक्सेसिव

[05:47:51] डिपेंडेंस ऑन वन सेक्टर समटाइम्स हार्म्स

[05:47:53] अदर सेक्टर्स। समटाइ्स हार्म अदर सेक्टर।

[05:47:56] बाकी सेक्टर्स डेवलप ही नहीं हो पाए।

[05:47:58] डीइंडस्ट्रलाइज हो गए बाकी सेक्टर्स। हां

[05:48:00] हुआ पता है क्या? जब अचानक बूम आया एक

[05:48:03] सेक्टर में तो करेंसी मजबूत होगी। करेंसी

[05:48:05] मजबूत होने से बाकी सेक्टर्स एक्सपोर्ट

[05:48:07] में उतना अच्छा नहीं कर पाएंगे क्योंकि

[05:48:09] कॉम्पिटिटिवनेस उनकी खत्म हो जाएगी।

[05:48:13] उससे वीक मैन्युफैक्चरिंग आ सकती है।

[05:48:15] एग्जैक्टली इस कांसेप्ट को बोलते हैं डेच

[05:48:17] डिजीज। ये कई बार पिछले एक साल में

[05:48:18] न्यूज़पेपर्स में आया है। तो मैंने इस

[05:48:20] टर्म को भी आपको यहां पे एक्सप्लेन कर

[05:48:21] दिया है।

[05:48:25] ओके। ओके।

[05:48:28] चलो अब आएंगे अपने अगले चैप्टर पे जिसका

[05:48:31] नाम है एक्सटर्नल सेक्टर। कल मैंने

[05:48:33] Telegram पे पूछा था कि कौन सा एक चैप्टर

[05:48:35] है जो आपको दिक्कत देता है। तो बहुत सारे

[05:48:36] बच्चों ने कहा सर हमें एक्सटर्नल सेक्टर

[05:48:38] बिल्कुल समझ नहीं आता। हमें नहीं समझ आता

[05:48:40] कि रुपया कब मजबूत हो रहा है, कब कमजोर हो

[05:48:42] रहा है। बिल्कुल आईडिया ही नहीं लग पाता।

[05:48:44] तो कोई बात नहीं। आज हम आईडिया लेने की

[05:48:46] यहां पे कोशिश करेंगे।

[05:48:49] ठीक है? ओके। ओके। ओके।

[05:48:55] सबसे पहले आप एक क्वेश्चन को आंसर करने की

[05:48:57] कोशिश करो।

[05:49:23] हम

[05:50:00] ओके ओके ओके ओके गुड गुड गुड देखो बैलेंस

[05:50:03] ऑफ पेमेंट को समझना बहुत इंपॉर्टेंट है।

[05:50:06] एक बार अंडरस्टैंड करते हैं। प्लीज ध्यान

[05:50:08] से सुनना।

[05:50:10] यहां पर चैप्टर का नाम क्या है? एक्सटर्नल

[05:50:12] सेक्टर। तो यहां बात पता किसकी होएगी?

[05:50:15] एक्सटर्नल की ही होगी। कहने का मतलब सर

[05:50:18] मैं हूं भारत का रेजिडेंट। अगर मैं नॉन

[05:50:21] रेजिडेंट के साथ मतलब भारत के अलावा किसी

[05:50:24] और बंदे के साथ या और सरकार के साथ कुछ

[05:50:26] ट्रांजैक्शन करता हूं। उनका रिकॉर्ड रखना

[05:50:29] है। जितनी भी इकोनॉमिक ट्रांजैक्शन हुई

[05:50:32] बिटवीन रेजिडेंट्स ऑफ अ कंट्री एंड नॉन

[05:50:34] रेजिडेंट ऑफ कंट्री उसका पूरा लेखाजोखा

[05:50:37] उसका पूरा रिकॉर्ड वो होता है बैलेंस ऑफ

[05:50:40] पेमेंट।

[05:50:41] यहां हम एक्सटर्नल सेक्टर में जब बैलेंस

[05:50:43] ऑफ पेमेंट पढ़ते हैं। हम विद इन द कंट्री

[05:50:46] ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड नहीं करना। मैं

[05:50:48] यहां बैठकर

[05:50:50] ओसा के बंदे को कुछ भेज रहा हूं। वो

[05:50:52] एक्सटर्नल सेक्टर में नहीं आएगा। पर मैं

[05:50:54] यहां बैठकर कुछ

[05:50:56] यूएस के बंदे के साथ कोई ट्रेड कर रहा

[05:50:58] हूं। वो आएगा। तो रेजिडेंट एंड नॉन

[05:51:00] रेजिडेंट के बीच में जो ट्रांजैक्शन होता

[05:51:02] है ना उसको हम इंक्लूड करते हैं आपके यहां

[05:51:04] पे बैलेंस ऑफ़ पेमेंट के अंदर। समझ गए? इट

[05:51:07] इज़ अ रिकॉर्ड ऑफ़ इकोनमिक ट्रांजैक्शन

[05:51:09] व्हिच टेक प्लेस बिटवीन द रेजिडेंट एंड

[05:51:10] नॉन रेजिडेंट्स। चलो ठीक है। अब जब हम बात

[05:51:13] करते हैं ना बीओपी की बैलेंस ऑफ़ पेमेंट

[05:51:15] की। तो प्लीज समझना बैलेंस ऑफ पेमेंट में

[05:51:18] दो अकाउंट होते हैं। एक होता है आपका करंट

[05:51:20] अकाउंट और एक होता है आपका कैपिटल अकाउंट।

[05:51:26] एक होता है क्या? एक होता है आपका करंट

[05:51:27] अकाउंट और दूसरा होता है आपका कैपिटल

[05:51:29] अकाउंट। ठीक है? बिल्कुल होता है।

[05:51:33] अब आगे इसको क्लासिफाई करना भी बड़ा आसान

[05:51:35] है। कैसे? करंट अकाउंट की जब हम बात करते

[05:51:38] हैं तो आप लोग जानते होंगे कि करंट अकाउंट

[05:51:40] में आपका

[05:51:42] देखो, कैपिटल अकाउंट की बात करता हूं

[05:51:43] पहले। कैपिटल अकाउंट में आप एसेट्स का

[05:51:46] ट्रांजैक्शन करते हो। जहां एसेट्स का

[05:51:48] ट्रांजैक्शन आएगा ना, वो कैपिटल अकाउंट

[05:51:49] में आएगा। करंट अकाउंट में बाकी जो चीजें

[05:51:52] होंगे जैसे गुड्स एंड सर्विस का

[05:51:53] ट्रांजैक्शन। तो एक्चुअली ना करंट अकाउंट

[05:51:55] के दो पार्ट्स होते हैं। एक होता है

[05:51:57] विज़िबल,

[05:52:01] एक होता है आपका इनविज़िबल्स।

[05:52:05] विज़िबल का मतलब क्या होता है? जो चीजें

[05:52:08] हमें दिख रही हैं, जो चीजें हमें दिख रही

[05:52:10] हैं, वो विज़िबल का पार्ट बनेंगी। क्या

[05:52:12] चीजें पार्ट बनेंगे विज़िबल का? अरे भाई,

[05:52:14] आपकी गुड्स, आपकी गुड्स का ट्रेड। इसको आप

[05:52:17] गुड्स बोल सकते हो या आप इसको टेक्निकल

[05:52:20] भाषा में आप इनको मर्चकेंडाइज बोलते हो या

[05:52:22] मर्चेंडाइज जो भी आप कहना चाहते हो। तो जब

[05:52:25] मर्चेंडाइज का ट्रेड होता है ना

[05:52:26] मर्चेंडाइज का वो होता है आपका विज़िबल

[05:52:28] में। तो सिंपल भाषा में आप समझो एक

[05:52:33] रेजिडेंट ने दूसरे नॉन रेजिडेंट को कुछ

[05:52:36] गुड्स ट्रेड करी वो आएगा विज़िबल के अंदर।

[05:52:40] वो आएगा विज़िबल के अंदर। समझे मेरी बात

[05:52:43] को? अगर मान लो मैंने एक्सपोर्ट किया।

[05:52:47] एक्सपोर्ट मतलब मैंने भारत में मान लो

[05:52:50] घड़ी बनाई और इस घड़ी को बेच दिया दूसरे

[05:52:51] देश में। तो मैंने घड़ी को एक्सपोर्ट

[05:52:54] किया। तो जब मैं घड़ी को एक्सपोर्ट करूंगा

[05:52:56] मेरे पास डॉलर्स आएंगे। एक्सपोर्ट हुआ तो

[05:52:59] मेरे अकाउंट में प्लस लिख दिया जाएगा। ठीक

[05:53:01] है? अगर मैं एक्सपोर्ट करूंगा ना इसको तो

[05:53:04] मैं प्लस की तरह नोट करूंगा क्योंकि मेरे

[05:53:05] पास डॉलर्स आए हैं। अगर मैं एक्सपोर्ट

[05:53:08] करूंगा तो प्लस की तरह दिखाऊंगा। अगर सर

[05:53:10] मैं इंपोर्ट करवा रहा हूं, वहां से सामान

[05:53:12] मंगा रहा हूं तो मैं माइनस कर लिखूंगा।

[05:53:14] क्योंकि जब मैंने विदेशों से सामान मंगाया

[05:53:16] तो मेरे पास से डॉलर बाहर गए। समझे? तो ये

[05:53:19] है आपका विज़िबल जिसमें गुड्स एंड

[05:53:22] मर्चेंडाइज़ आ जाएंगी।

[05:53:24] ठीक है? ऐसे ही जब हम बात करते हैं ना

[05:53:26] इनविज़िबल की। इनविज़िबल में क्या आता है

[05:53:29] दोस्तों? इनविज़िबल में आता है आपका।

[05:53:32] इसमें आ जाएगा आपका सर्विसेस।

[05:53:36] इसमें आ जाएगा आपका इनकम।

[05:53:39] इसमें आपका आ जाएगा आपका ट्रांसफर्स।

[05:53:46] आप लोग सर्विस समझते हो सर्विज हां देखो

[05:53:49] सर्विज का भी तो आपका लेनदेन होता है।

[05:53:53] बिल्कुल जैसे आपका एजुकेशन सर्विज,

[05:53:56] ट्रांसपोर्ट सर्विज, हेल्थ केयर सर्विज।

[05:53:59] जैसे आपका गुड्स का ट्रांजैक्शन हो रहा

[05:54:01] था, इंपोर्ट एक्सपोर्ट हो रहा था, वैसे

[05:54:02] आपका सर्विज का भी इंपोर्ट एक्सपोर्ट

[05:54:04] होगा। बिल्कुल ठीक बात है। अब पॉइंट आता

[05:54:07] है सर इनकम की बात क्या होती है? इनकम

[05:54:09] क्या होता है? इनकम देखो

[05:54:13] जैसे फॉर एग्जांपल आपने नोटिस किया होगा

[05:54:17] कई बार

[05:54:20] जैसे कहीं से मुझे रेंट हो गया, वेजेस या

[05:54:25] कुछ प्रॉफिट।

[05:54:27] ठीक है ना? रेंट हो गया, प्रॉफिट हो गया,

[05:54:30] इंटरेस्ट हो गया। यह सब मिले मुझे। ठीक

[05:54:33] है?

[05:54:34] कि मान लो मैंने कुछ अपना सर्विज प्रोवाइड

[05:54:37] करी हैं। मतलब मतलब एक तरह की सर्विज ही

[05:54:39] हुई। मतलब जैसे आपका इनकम आपने कुछ अर्न

[05:54:41] करी। आई विल गिव यू एग्जांपल कि मान लो

[05:54:43] मैं इंडिया में बैठा हूं। मैं हूं भारत का

[05:54:45] रेजिडेंट पर मुझे यूएसए से कुछ इनकम आ रही

[05:54:48] है। तो वो भी कोई एसेट नहीं है मेरा। मतलब

[05:54:51] मतलब जो इनकम आ रही है, इनकम इज़ नॉट एसेट।

[05:54:53] वो मेरा जो इन्वेस्टमेंट है, वो मेरा एसेट

[05:54:55] है। पर इनकम थोड़ी एसेट हुआ। तो, जैसे मुझे

[05:54:57] वहां से कुछ इनकम मिला, ठीक है? या कुछ

[05:54:59] प्रॉफ़िट मिला, मुझे कुछ इंटरेस्ट मिला। तो

[05:55:02] ये सारी चीजें जो मेरी इनकम वगैरह आई ना

[05:55:04] ये सारा आपका इनकम के अंदर हम यहां पे

[05:55:06] दिखाएंगे।

[05:55:07] अच्छा एक एक और चीज आती है। एक और चीज आती

[05:55:10] है यहां पे दैट इज़ ट्रांसफर्स। ये होते

[05:55:12] हैं वन साइडेड ट्रांसफर्स। वन साइडेड

[05:55:14] ट्रांसफर। जैसे आपका रेमिटेंसेस हो गया।

[05:55:17] आपके दोस्त आपके रिश्तेदार जो होते हैं ना

[05:55:19] जो विदेशों में बैठे हुए हैं वो कई बार

[05:55:21] आपको कुछ पैसा भेजते हैं। अगर वो पैसा

[05:55:23] भेजेंगे तो उसको हम प्लस की तरह यहां पे

[05:55:25] डोनेट करेंगे। समझे? तो इस तरह से आप

[05:55:27] नोटिस कर पाओगे कि जब हम बात करते हैं ना

[05:55:29] इनविज़िबल की इसमें ये सारी चीजें आ जाती

[05:55:31] हैं। आपका सर्विज आ गया, आपका इनकम आ गया

[05:55:36] और आपका यहां पे ट्रांसफर्स भी आ गया।

[05:55:39] राइट? तो ये सारी चीजें आपको यहां पे

[05:55:41] देखने को मिल जाएंगी।

[05:55:44] ओके? ओके। ओके। सबसे पहली चीज़ सबसे पहली

[05:55:47] चीज़ अब ध्यान से देखिएगा। सबसे पहली चीज़

[05:55:49] आप ध्यान से देखिएगा।

[05:55:52] सबसे पहला कॉम्पोनेंट आता है यहां पे

[05:55:53] बैलेंस ऑफ ट्रेड। आप पहले मुझे सब लोग

[05:55:56] कमेंट्स में बताओ कि आपके हिसाब से बैलेंस

[05:55:58] ऑफ ट्रेड क्या होता है? व्हाट इज द

[05:56:00] फार्मूला ऑफ बैलेंस ऑफ ट्रेड? अगर मेरे से

[05:56:02] पूछे बैलेंस ऑफ ट्रेड मैं कैसे निकालूंगा

[05:56:04] बैलेंस ऑफ ट्रेड?

[05:56:06] क्या होता है बैलेंस ऑफ़ ट्रेड? हम किस-किस

[05:56:10] को देखते हैं बैलेंस ऑफ़ ट्रेड में? अगर

[05:56:12] सिर्फ बैलेंस ऑफ ट्रेड लिखा है तो किस-किस

[05:56:14] को देखना है? देखो, जब वो बोले बैलेंस ऑफ़

[05:56:16] ट्रेड, यहां पर हम केवल और केवल गुड्स की

[05:56:19] बात करेंगे। ओनली गुड्स। गुड्स मतलब

[05:56:22] मर्चेंडाइज़। बैलेंस ऑफ ट्रेड में केवल

[05:56:24] गुड्स की बात करनी है। केवल गुड्स की।

[05:56:27] ओनली गुड्स। अगर गुड्स का एक्सपोर्ट

[05:56:31] ज्यादा है एज कंपेयर टू इंपोर्ट। हम

[05:56:34] बोलेंगे बैलेंस ऑफ ट्रेड सरप्लस है। पर

[05:56:38] अगर हम एक्सपोर्ट कम करते हैं एज़ कंपेयर

[05:56:40] टू इंपोर्ट। हम बोलते हैं बैलेंस ऑफ ट्रेड

[05:56:42] का डेफिसिट है।

[05:56:45] केवल गुड्स की बात होती है। अब मेरा आपसे

[05:56:49] क्वेश्चन यहां पे ये है आपके हिसाब से

[05:56:51] बैलेंस ऑफ ट्रेड भारत के लिए क्या है?

[05:56:55] क्या लगता है?

[05:57:00] बैलेंस ऑफ ट्रेड भारत का डेफिसिट में है

[05:57:02] या सरप्लस में है?

[05:57:29] आंसर इज़ ईजी सर भारत का डेफिसिट में है।

[05:57:33] ठीक है? भारत का डेफिसिट में है। और एक

[05:57:36] बच्चा कह रहा है कि इट इज़ डेफिसिट सिंस

[05:57:38] इंडिपेंडेंस। नो दैट इज़ नॉट द करेक्ट

[05:57:40] आंसर। एक्चुअली पता है क्या है? केवल 2

[05:57:43] साल अगर हम छोड़ दें 1972 और 1976 केवल 2

[05:57:47] साल अगर हम छोड़ दें ना बाकी हर साल हम

[05:57:50] लोग डेफिट में ही रहे हैं। इंडिपेंडेंस के

[05:57:52] बाद मतलब आप ये कह सकते हो 1991 के बाद हम

[05:57:55] लोग हमेशा डेफिट में रहे हैं। गुड्स में

[05:57:56] गुड्स में वस्तुओं में ना हमारा ज्यादा

[05:57:59] अच्छा काम हमारा नहीं हो पा रहा है। आप

[05:58:01] देख रहे हो चाइना से हम कितना ज्यादा हम

[05:58:04] यहां पे अ इंपोर्ट करवा रहे हैं। तो भाई

[05:58:07] पिछले 30 साल 40 साल बल्कि 50 साल में हम

[05:58:11] डेफिसिट में ही रहे हैं पिछले 50 साल।

[05:58:13] लगातार 50 साल होने वाले हैं हमें बैलेंस

[05:58:16] ऑफ ट्रेड में डेफिसिट में रहते हुए। हम

[05:58:17] गुड्स का एक्सपोर्ट बहुत कम कर रहे हैं।

[05:58:20] इंपोर्ट बहुत ज्यादा है। समझ रहे हो? ठीक

[05:58:23] है? ऐसे ही अगर हम बात करें सर्विज की।

[05:58:27] सर्विज में हम नॉर्मली क्या रहते हैं?

[05:58:31] हम

[05:58:34] सर्विज में हम नॉर्मली क्या रहते हैं?

[05:58:37] देखो सर्विज में हम नॉर्मली रहते हैं

[05:58:40] पॉजिटिव में। ठीक है? यहां पर क्योंकि हम

[05:58:42] यहां पे एक्सपोर्ट ज्यादा करते हैं,

[05:58:43] इंपोर्ट कम करवाते हैं। तो सर्विज हमारा

[05:58:46] यहां पे सरप्लस हमें देखने को मिलता है।

[05:58:48] ठीक है? इनकम के केस में हम नॉर्मली यहां

[05:58:50] पे डेफिसिट में रहते हैं। और ट्रांसफर के

[05:58:53] केस में तो यार हम डेफिनेटली पॉजिटिव में

[05:58:56] रहते हैं। उसका सिंपल यही है। हमें बहुत

[05:58:58] अच्छे खासे रेमिटेंसेस हमें बाहर से

[05:58:59] विदेशों से देखने को मिलते हैं। बहुत

[05:59:01] अच्छे खासे। ठीक है? सो देयर इज़ अ सरप्लस

[05:59:04] ट्रांसफरर्स के केस में अंदर। ठीक है?

[05:59:08] ओके। ओके। ओके।

[05:59:10] अब मेरा आपसे सवाल यह है कि हमारा करंट

[05:59:14] अकाउंट में क्या है? क्या लगता है? करंट

[05:59:16] अकाउंट में भारत का क्या है? डेफिसिट है

[05:59:19] करंट अकाउंट में या सरप्लस है? देखो,

[05:59:22] ध्यान से देखो। नॉर्मली पता क्या है?

[05:59:24] विज़िबल वाला हमारा नेगेटिव में रहता है।

[05:59:27] इनविज़िबल वाला हमारा पॉजिटिव में रहता है।

[05:59:29] तो मुझे बताओ हमारा करंट अकाउंट किस में

[05:59:31] रहेगा? डेफिसिट में या सरप्लस में?

[05:59:38] हां।

[05:59:39] देखो एक वैल्यू है नेगेटिव एक वैल्यू है

[05:59:43] पॉजिटिव

[05:59:45] तो करंट अकाउंट क्या आना चाहिए यार देखो

[05:59:48] ये नेगेटिव भी आ सकता है ये पॉजिटिव भी आ

[05:59:50] सकता है है कि नहीं ये नेगेटिव भी आ सकता

[05:59:53] है ये पॉजिटिव भी आ सकता है अगर पॉजिटिव

[05:59:55] वाली वैल्यू बड़ी हुई नेगेटिव वाली छोटी

[05:59:58] हुई तो सरप्लस आएगा पर अगर नेगेटिव वाली

[06:00:00] वैल्यू बड़ी हुई और पॉजिटिव वैल्यू वाली

[06:00:02] छोटी हुई तो उस केस में आपका डेफिसिट में

[06:00:05] चला जाएगा समझे तो कभी डेफिसिट भी हो सकता

[06:00:08] है कभी सरप्लस भी हो हो सकता है। नॉर्मली

[06:00:10] डेफिसिट होता है। पर जैसे आपका कोविड का

[06:00:12] समय था। आप कोविड का समय डाटा चेक करना।

[06:00:15] कोविड के समय के ऊपर भारत करंट अकाउंट

[06:00:17] सरप्लस में आ गया था। समझ रहे हो? ये

[06:00:20] डेफिसिट भी हो सकता है, सरप्लस भी हो सकता

[06:00:21] है। कोविड में हम करंट अकाउंट सरप्लस में

[06:00:23] थे। आमतौर पे हम यहां पे डेफिसिट में रहते

[06:00:26] हैं। इस बात को आप यहां पे ध्यान में

[06:00:27] रखेंगे। बाकी रही बात कैपिटल की। देखो

[06:00:30] कैपिटल में एक तो आ गया आपका इन्वेस्टमेंट

[06:00:32] वाला पार्ट।

[06:00:35] इन्वेस्टमेंट में आपका क्या आ जाएगा? जैसे

[06:00:36] आपका फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट एफडीआई

[06:00:38] हो गया। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट

[06:00:40] एफपीआई हो गया। ये इन्वेस्टमेंट में आ

[06:00:42] जाएगा। फिर ऐसे अगर हम बात करें क्योंकि

[06:00:45] ये देखो ना ये कैपिटल में क्या आने हैं?

[06:00:46] एसेट्स का ट्रांजैक्शन। एसेट्स का

[06:00:49] ट्रांजैक्शन जो होता है ना वो यहां पे

[06:00:50] आएगा। एसेट्स का ट्रांजैक्शन। तो यहां पे

[06:00:52] डेप्ट भी आ जाएगा। डेप्ट। ठीक है? जैसे

[06:00:55] आपकी सरकारें डेप्ट लेती हैं। सोवन डेप्ट

[06:00:57] हो गया या फिर आपकी कंपनीज़ डेप्ट लेती

[06:01:00] हैं। ईसीबी जिनको हम बोलते हैं

[06:01:03] एक्सटर्नल

[06:01:06] कमर्शियल

[06:01:09] बोरोइंग

[06:01:14] राइट तो ये सब चीजें क्या है आपकी ये आपका

[06:01:18] डे में आपको ये देखने को मिल जाएगा

[06:01:21] ऐसे ही आपके जो एनआरआई अकाउंट्स होते हैं।

[06:01:24] ठीक है? वो भी आपके यहां पे कैपिटल अकाउंट

[06:01:26] में यहां पे देखे जाते हैं। तो ये सारी

[06:01:28] चीजें हैं जो आपको यहां पे पता होनी चाहिए

[06:01:30] अपने बैलेंस ऑफ पेमेंट के कॉन्टेक्स्ट

[06:01:32] में।

[06:01:33] बैलेंस ऑफ पेमेंट के कॉन्टेक्स्ट में आपको

[06:01:35] यहां पर यह बातें पता होनी चाहिए।

[06:01:44] इज इट फाइन?

[06:01:54] अगर आपने ये क्वेश्चन फिर समझा तो अब आप

[06:01:56] इस कॉन्फेशन को आराम से कर सकते हो।

[06:02:01] एक बच्चा पूछ रहा है कि यूएसए के साथ एफटी

[06:02:04] का क्या इंपैक्ट होगा? देखो वो तो जब

[06:02:07] डिटेल सामने आएंगी तब पता लगेगा। है ना?

[06:02:09] आप आंकड़े दे दो। आप पूरा जो पूरा का पूरा

[06:02:12] आपका ट्रेड डील हुई है उसका आप बताओ कि

[06:02:14] क्या-क्या हुआ है। तो देखते हैं उसके बाद।

[06:02:17] अब देखो यहां पर कह रहा है कि क्या-क्या

[06:02:18] चीजें आपकी करंट अकाउंट के अंदर आएंगी। अब

[06:02:21] बताओ काफी सारे बच्चे सी कह रहे थे पहले

[06:02:23] इसका आंसर। नहीं देखो यार ये देखो जो

[06:02:25] रेमिटेंसेस हैं वो तो मैंने आपको बता

[06:02:27] दिया। करंट अकाउंट का पार्ट होंगे। ये

[06:02:29] लाइन ऑफ ट्रेड टू एनी फॉरेन कंट्री। ये

[06:02:30] डेप्ट है एक तरह का और जब ट्रांजैक्शन इन

[06:02:32] एसेट्स होगा वो आपका कैपिटल अकाउंट का

[06:02:34] पार्ट बनेगा। तो सेकंड इज़ रॉन्ग। ये

[06:02:35] कैपिटल अकाउंट में आएगा। फिर देखो यहां पर

[06:02:37] ये कह रहा है इंटरेस्ट एंड डिविडेंड। देखो

[06:02:39] यार मेरी बात ध्यान से सुनना। ये बात

[06:02:41] मैंने आपको तब भी बताई थी जब हमने अ बजट

[06:02:44] की बात करी थी। एक्चुअली इंटरेस्ट या

[06:02:46] डिविडेंड ये आपके एसेट्स नहीं होते। लोन

[06:02:49] आपका एसेट होता है। इंटरेस्ट या डिविडेंड

[06:02:51] एसेट नहीं होता। तो इंटरेस्ट और डिविडेंड

[06:02:54] वाली चीजें जो होती हैं ये करंट अकाउंट का

[06:02:56] ही पार्ट बनती हैं। सो दैट इज अ करेक्ट

[06:02:57] स्टेटमेंट और शेयर मार्केट इन्वेस्टमेंट

[06:02:59] मैंने आपको बता दिया जो एफडीआई एफपीआई

[06:03:01] वगैरह होगा वो सारी चीजें आपका कैपिटल

[06:03:03] अकाउंट का पार्ट बनेंगी। इसीलिए इसका आंसर

[06:03:05] होगा ऑप्शन नंबर बी ओनली टू इज़ द राइट

[06:03:07] आंसर। देखो यार लाइन ऑफ क्रेडिट का मतलब

[06:03:10] होता है कई बार हम जैसे कुछ देशों को

[06:03:12] मालदीव्स को मरीश को अपनी मदद करने के लिए

[06:03:14] उनको एक तरह के लोन देते हैं। ये लोन ऐसा

[06:03:17] नहीं होता कि पूरे के पूरे अमाउंट पे होता

[06:03:19] है। मान लो मैंने आपको 100 करोड़ दे दिया।

[06:03:21] आपको जब मन करे आप उतना पैसा वहां से

[06:03:23] विड्रॉ कर सकते हो। आपको 10 करोड़ की

[06:03:25] जरूरत हुई। आपने 10 करोड़ निकाल लिया। 6

[06:03:28] महीने बाद आपको 5 करोड़ की और जरूरत पड़ी

[06:03:30] तो आपने 5 करोड़ ले लिया। तो जितना अमाउंट

[06:03:32] आप निकालोगे सिर्फ उसके ऊपर ही इंटरेस्ट

[06:03:33] लगता है। ये नॉर्मली हम उन देशों को देते

[06:03:35] हैं जिनके साथ थोड़े हमारे फ्रेंडली

[06:03:36] रिलेशन होते हैं। वहां डेवलपमेंट हम करना

[06:03:38] चाहते हैं। वो होता है। सो दैट इज़ व्हाई

[06:03:41] यहां पे इसका आंसर ऑप्शन बी बन जाएगा।

[06:03:49] ठीक है? क्या यह बात सबको क्लियर है?

[06:03:56] चलो गुड।

[06:04:07] एक बात हमें और जाननी है व्हेन वी टॉक

[06:04:09] अबाउट द एक्सटर्नल सेक्टर एंड वो है आपका

[06:04:13] एक्सचेंज रेट। वो है आपका एक्सचेंज रेट।

[06:04:17] एक्सचेंज रेट का मतलब क्या है सर? देखो

[06:04:20] एक्सचेंज रेट का मीनिंग क्या है यहां पे?

[06:04:22] एक्सचेंज रेट होता है सिंपल कि अगर आपको

[06:04:25] एक करेंसी देनी है तो बदले में दूसरी

[06:04:27] करेंसी कितनी मिलेगी? किस रेट के ऊपर आप

[06:04:30] दो करेंसीज को एक्सचेंज करते हो? वो होता

[06:04:32] है एक्सचेंज रेट। कहने का मतलब जैसे फॉर

[06:04:34] एग्जांपल $1 अगर आपका ₹90 का है। इसका

[06:04:37] मीनिंग पता है क्या है? $1 के बदले में

[06:04:40] आपको ₹90 मिलेंगे। तो एक्सचेंज एक करेंसी

[06:04:45] को दूसरे में एक्सचेंज करना। $1 के बदले

[06:04:47] में आपको ₹90 मिलेंगे। ये है आपका

[06:04:48] एक्सचेंज रेट। ठीक है?

[06:04:54] अब अगर कल को ₹190 से ₹1 ₹100 हो जाए तो

[06:04:59] प्लीज समझ लेना कि यहां पर क्या हुआ है?

[06:05:01] आपका रुपी क्या हुआ है बताओ? इसको बोलते

[06:05:05] हैं हम रूपी हमारा कमजोर हुआ है। रुपी हैज़

[06:05:08] डेप्रिसिएटेड।

[06:05:10] रुपी हैज़ डेप्रिसिएटेड। बट अगर $190 से

[06:05:15] मान लो यह $1 आपका

[06:05:19] ₹70 हो जाए तो यहां पर हम क्या बोलेंगे?

[06:05:22] रुपया मजबूत हुआ है। रुपी हैज़

[06:05:24] एप्रिशिएटेड।

[06:05:26] रुपी हैज़ एप्रिशिएटेड।

[06:05:29] ठीक है? अब रुपी का डेप्रिसिएशन बोल सकते

[06:05:31] हो या आप ऐसा भी कह सकते हो कि डॉलर

[06:05:34] एप्रिशिएट हुआ है। डॉलर मजबूत हुआ है। या

[06:05:37] फिर आप ऐसा भी कह सकते हो इधर कि रुपया

[06:05:39] मजबूत हुआ है मतलब आपका डॉलर कमजोर हुआ

[06:05:42] है। तो ऐसा भी आप यहां पे इनको बोल सकते

[06:05:44] हो इस तरह से।

[06:05:49] इज इट फाइन?

[06:05:51] क्या यह बात सही है?

[06:06:09] अब देखो कई लोगों को लगता है यार ये रुपया

[06:06:11] बड़ा तो है। ये वैसे कुछ लोग लिख लिख भी

[06:06:13] रहे हैं। आर्यांश लिख रहे हैं कि रुपया

[06:06:15] बड़ा तो है तो रुपया एप्रिशिएट नहीं करना

[06:06:17] चाहिए। नहीं आप समझो इस बात को। अगर आपको

[06:06:20] थोड़ा सा आपने मैथ्स पढ़ा होता आर्यांश

[06:06:22] अगर मेरे से पढ़ा होता तो आप ये सवाल ना

[06:06:24] पूछते। किसी और से पढ़ा है आपको। मैं समझ

[06:06:26] गया हूं आपने सीसेट। अब देखो इधर देखो अगर

[06:06:28] आप यहां पे $1 की वैल्यू निकालोगे ना $1

[06:06:31] की वैल्यू यहां पे $190 आएगी यहां पे आज

[06:06:35] के दिन। पर यहां पे कितनी हो जाएगी? $1 की

[06:06:37] वैल्यू 1 / 100 अब नोटिस करो। यहां पर

[06:06:42] इसका डिनोमिनेटर कितना है? 90। इसका

[06:06:44] डिनोमिनेटर छोटा है। डिनोमिनेटर छोटा है।

[06:06:46] मतलब ओवरऑल वैल्यू बड़ी है। इसका

[06:06:48] डिनोमिनेटर बड़ा है। डिनोमिनेटर बड़ा है।

[06:06:50] मतलब ओवरऑल वैल्यू छोटी है। ₹1 की पहले

[06:06:52] कीमत ज्यादा थी। अब ₹1 की कीमत कम हो गई

[06:06:55] है तो क्या रुपया कमजोर नहीं हुआ? बिल्कुल

[06:06:57] हुआ है। ठीक है ना? ऐसे इसको स्टडी किया

[06:07:00] जाता है। ये है एक्सचेंज रेट। पहले रुपए

[06:07:02] की कीमत ज्यादा थी। अब रुपए की कीमत कम हो

[06:07:04] गई है। तो रुपया आपका डेप्रिशिएट कर गया।

[06:07:07] चलो ये बात तो सर समझ आई कि रुपए

[06:07:08] डेप्रिशिएट और एप्रिशिएट करने का मतलब

[06:07:10] क्या होता है? अब सवाल यहां पे ये आता है

[06:07:12] कि यार ये एप्रिशिएट डेप्रिशिएट आखिर करते

[06:07:13] क्यों हैं? एप्रिशिएट डेप्रिशिएट करते

[06:07:16] क्यों हैं? इसका आंसर सिंपल है। इसका आंसर

[06:07:19] सिंपल यही है कि रुपया एप्रिशिएट

[06:07:21] डेप्रिशिएट इसीलिए करेगा क्योंकि रुपए की

[06:07:23] डिमांड या सप्लाई ऊपर नीचे होएगी। जो हमने

[06:07:26] आज के लेक्चर वन मतलब पहले पार्ट में

[06:07:28] डिस्कस किया था। कोई चीज महंगी सस्ती

[06:07:31] क्यों होती है? क्योंकि उसकी डिमांड या

[06:07:33] सप्लाई में कुछ ना कुछ बदलाव आता है। तो

[06:07:35] रुपया मजबूत या रुपया कमजोर क्यों होता

[06:07:37] है? क्योंकि रुपए की डिमांड या सप्लाई में

[06:07:39] कुछ चेंजज़ आए होंगे। समझे मेरी बात को?

[06:07:43] समझे मेरी बात को? हां सर। तो देखो सिंपल

[06:07:46] सी बात है। अगर किसी चीज की डिमांड बढ़ेगी

[06:07:50] लेक्चर का स्टार्टिंग पार्ट याद करो। अगर

[06:07:52] किसी चीज की डिमांड बढ़ेगी।

[06:07:56] एक बच्चा कह रहा है कि इट इज़ आल्सो इफ

[06:07:57] इफ़ेक्ट बाय आरबीआई ऑफ़ अमेरिका। आरबीआई ऑफ़

[06:08:00] अमेरिका भी कुछ नहीं कर रहा। वो भी रुपए

[06:08:02] की डिमांड और सप्लाई को ही बदल रहा है।

[06:08:04] अभी समझाता हूं कैसे।

[06:08:06] अगर किसी चीज की डिमांड बढ़ती है या उसकी

[06:08:09] सप्लाई कम होती है तो उससे आपका रुपया

[06:08:12] मजबूत होता है। मतलब रुपया नहीं जिस चीज

[06:08:15] मतलब जिस चीज की सप्लाई कम होगी जिस चीज

[06:08:17] की डिमांड बढ़ेगी वो उतना ही मजबूत होगा

[06:08:19] उतना ही एप्रिशिएट करेगा। जिस चीज की

[06:08:21] डिमांड कम हो जाएगी और उसकी सप्लाई बढ़

[06:08:23] जाएगी वो उतना ही डेप्रिशिएट कर जाएगा।

[06:08:27] ठीक है ना?

[06:08:30] कोई कंफ्यूजन है यहां पे किसी को? ठीक है?

[06:08:34] कोई कंफ्यूजन है यहां पे किसी को?

[06:08:39] ठीक है? तो इस बात का आपको यहां पर ध्यान

[06:08:41] क्या रखना है? आपको बस इतना याद रखना है

[06:08:43] कि कोई भी चीज एप्रिशिएट डेप्रिशिएट हो

[06:08:45] रही है उसके पीछे जो रिस्पांसिबल पार्ट है

[06:08:47] वो आपका डिमांड एंड सप्लाई का रोल है। ठीक

[06:08:51] है? डिमांड बढ़ेगी

[06:08:53] या फिर सप्लाई कम होगी तो वो मजबूत होगा।

[06:08:57] डिमांड कम हो जाएगी और सप्लाई बढ़ जाएगी तो

[06:09:00] उस चीज में वो चीज कमजोर हो जाएगी। ठीक

[06:09:02] है? ठीक है? डिमांड कम होना या सप्लाई

[06:09:04] बढ़ना उसको हम बोलते हैं डेप्रिसिएट। ठीक

[06:09:07] है? एक एग्जांपल से मैं आपको समझाता हूं।

[06:09:10] देखो अब यहां पे हम बात करेंगे एक टमाटर

[06:09:12] की। बहुत सिंपल एग्जांपल से समझेंगे। फिर

[06:09:14] उसको हम रुपी के लिए अप्लाई करेंगे। देखना

[06:09:17] अगर मान लो मार्केट में टमाटर मान लो रुपी

[06:09:21] है। सिंपल। ये टमाटर की अगर मान लो डिमांड

[06:09:23] बढ़ गई बहुत ज्यादा। तो टमाटर क्या हो

[06:09:25] जाएगा सर? टमाटर की वैल्यू बढ़ जाएगी।

[06:09:27] टमाटर मजबूत हो जाएगा। मानते हो? ऑन द अदर

[06:09:31] हैंड अगर हम बात करें अगर टमाटर लोग

[06:09:33] खरीदना ही नहीं चाहते। टमाटर की डिमांड

[06:09:35] अगर बहुत कम हो गई है तो उस केस में क्या

[06:09:36] हो जाएगा? वो बहुत ज्यादा कमजोर हो जाएगा।

[06:09:38] वो डेप्रिशिएट कर जाएगा। ठीक है? अब

[06:09:41] सप्लाई वाली साइड से देख लो। अगर इसकी

[06:09:43] सप्लाई बहुत कम हो जाएगी। मार्केट में

[06:09:45] सप्लाई बहुत कम है पर डिमांड है। उस केस

[06:09:48] में ये क्या हो जाएगा? ये मजबूत हो जाएगा।

[06:09:50] बट ऑन द अदर हैंड अगर इसकी सप्लाई बहुत

[06:09:52] ज्यादा बढ़ गई। हर घर के बाहर ऐसे सप्लाई

[06:09:54] सप्लाई सप्लाई हो रखी है। बहुत सारे टमाटर

[06:09:56] हो रखे हैं दुनिया के अंदर। तो कोई भी

[06:09:58] टमाटर खरीदना ही नहीं चाहेगा। अकॉर्डिंगली

[06:10:00] टमाटर डेप्रिशिएट कर जाएगा। क्या ये बात

[06:10:03] क्लियर है सबको?

[06:10:10] ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है।

[06:10:11] चलो चलो चलो हो गया। हो गया हो गया। हो

[06:10:13] गया। अब इसको अप्लाई करते हैं। अब इसको

[06:10:16] अप्लाई करते हैं। एक भाई साहब कह रहे थे

[06:10:18] ना कि आरबीआई ऑफ़ अमेरिका से बदल रही हैं

[06:10:20] चीजें। मैं समझाता हूं। आरबीआई ऑफ़ अमेरिका

[06:10:22] क्या होता है? आएंगे। फेड के ऊपर भी

[06:10:23] आएंगे। चिंता ना करो। चिंता ना करो। अब

[06:10:26] प्लीज समझना। ठीक है? जैसे इन्ह पहले इनका

[06:10:29] ही एग्जांपल ले लेते हैं। देखो

[06:10:32] अगर मान लो चलो फेड की बात आएंगे। पहले हम

[06:10:35] एक्सपोर्ट की बात करते हैं। पहले हम

[06:10:37] एक्सपोर्ट से समझेंगे।

[06:10:40] लेट्स से भारत के एक्सपोर्ट बढ़ गए। क्या

[06:10:44] हो गया सर? भारत के एक्सपोर्ट बढ़ गए। अगर

[06:10:48] भारत के एक्सपोर्ट बढ़ गए तो उससे क्या

[06:10:51] होगा? मुझे बताओ। अगर सर हमने बहुत ज्यादा

[06:10:54] एक्सपोर्ट किया ना लॉजिक समझना कुछ नहीं

[06:10:56] रटना आपको यहां पे कुछ रटना ही नहीं है

[06:10:58] लॉजिक समझना सर अगर हम बहुत ज्यादा

[06:11:01] एक्सपोर्ट करेंगे ना हमारे पास हमारे देश

[06:11:04] को बहुत सारे डॉलर मिलेंगे ये बात से सहमत

[06:11:09] हो या नहीं सहमत हो हमारे देश में क्या

[06:11:11] डॉलर की सप्लाई बढ़ नहीं जाएगी क्योंकि सर

[06:11:14] अगर हम बहुत ज्यादा एक्सपोर्ट करेंगे तो

[06:11:17] बदले में हमारे देश में बहुत सारे डॉलर आ

[06:11:19] जाएंगे तो भारत देश में डॉलर की सप्लाई

[06:11:22] इनक्रीज हो जाएगी। और मैंने आपको एक चीज

[06:11:25] बताई है। क्या बताई है? जिस चीज की सप्लाई

[06:11:27] बढ़ जाती है वो चीज कमजोर हो जाती है। तो

[06:11:31] डॉलर की अगर सप्लाई बढ़ गई है ना तो सर

[06:11:33] डॉलर डेप्रिशिएट कर जाएगा। और डॉलर के

[06:11:36] कमजोर होने का मतलब आपका रुपया मजबूत हो

[06:11:40] जाएगा। तो बस आ गया आंसर। तो कल को आपको

[06:11:43] एग्जाम में वो लिखे। क्या लिखे? वो लिखे

[06:11:45] कि भाई एक्सपोर्ट बढ़ गए हैं। रुपए पे

[06:11:47] क्या इंपैक्ट आएगा? डरना बिल्कुल नहीं है।

[06:11:49] लॉजिकली सोचो। लॉजिकली सोचो। आपको पता

[06:11:52] लगेगा रुपया मजबूत होगा। समझे मेरी बात

[06:11:55] को?

[06:11:59] समझे मेरी बात को? एक दूसरा केस देखते हैं

[06:12:02] फिर यहां पे।

[06:12:06] ठीक है? रुपया मजबूत होगा भाई। डॉलर कमजोर

[06:12:08] होगा, रुपया मजबूत होगा। इधर देखो आप लोग।

[06:12:14] मान लो आपके इंपोर्ट बढ़ गए हैं। मान लो

[06:12:17] इंडिया ने इंपोर्ट ज्यादा करवाया। मान लो

[06:12:19] कच्चा तेल हमें बहुत ज्यादा इंपोर्ट

[06:12:20] करवाना पड़ रहा है। अब इसको सोचने के दो

[06:12:22] तरीके हो सकते हैं। देखना इधर अगर हम लोग

[06:12:25] इंपोर्ट ज्यादा करवा रहे हैं। इसका एक तो

[06:12:27] आप ऐसे सोच सकते हो कि यार देखो हमें ना

[06:12:30] इंपोर्ट करवाना पड़ेगा। इंपोर्ट करवाना

[06:12:33] पड़ेगा।

[06:12:35] बाहर से हमें सामान मंगाना है। बाहर से

[06:12:37] सामान मंगाएंगे तो भारत से डॉलर बाहर

[06:12:39] जाएंगे। हां। तो इसका मतलब पता है क्या

[06:12:42] है? डॉलर की जो सप्लाई है ना सर भारत देश

[06:12:44] में वो कम हो जाएगी। क्यों कम हो जाएगी सर

[06:12:47] सप्लाई? अरे सप्लाई इसलिए कम होगी क्योंकि

[06:12:49] जब हमने बाहर से बहुत सारा सामान मंगाया

[06:12:51] हमें उनको पेबैक डॉलर की फॉर्म में करना

[06:12:53] पड़ा। तो डॉलर की सप्लाई कम हो जाएगी।

[06:12:55] डॉलर की सप्लाई मतलब सर जिस चीज की सप्लाई

[06:12:58] कम होती है ना वो उतना ही मजबूत होता है।

[06:13:00] हां और जो चीज जितनी मतलब डॉलर मजबूत होगा

[06:13:03] तो हमारा रुपया सर कमजोर हो जाएगा। हमारा

[06:13:05] रुपी डेप्रिशिएट कर जाएगा। या तो ऐसे देख

[06:13:08] लो या तो ऐसे देख लो या इसको ऐसे भी देख

[06:13:11] सकते हो। देखो दूसरा तरीका भी है सोचने

[06:13:13] का। सोचने का तरीका अलग-अलग हो सकता है।

[06:13:15] पर आंसर सेम आएगा। देखो अगर इंपोर्ट बढ़

[06:13:17] गया। अगर इंपोर्ट बढ़ गया ना सर हमें

[06:13:21] इंपोर्ट ज्यादा करवाना पड़ रहा है। हां

[06:13:23] आपको इंपोर्ट ज्यादा कराना पड़ रहा है।

[06:13:25] इंपोर्ट अगर आप ज्यादा करवा रहे हो आप

[06:13:28] डॉलर डिमांड कर रहे हो नहीं कर रहे हो?

[06:13:30] सोचो मेरी बात यार मुझे बाहर से घड़ी

[06:13:32] मंगानी है। मुझे डॉलर चाहिए होंगे नहीं

[06:13:34] चाहिए होंगे। हां। तो एक्चुअली इंपोर्ट

[06:13:36] बढ़ता हुआ देखकर पता है क्या होता है?

[06:13:38] डॉलर की डिमांड बढ़ती है। लोग लोगों को

[06:13:40] डॉलर चाहिए क्योंकि इंपोर्ट करवाना है ना

[06:13:43] यार। और अगर डॉलर की डिमांड बढ़ेगी तो

[06:13:45] डॉलर मजबूत होगा और डॉलर एक बार मजबूत हो

[06:13:47] गया तो आपका रुपया कमजोर हो जाएगा।

[06:13:51] इज दिस फाइन ऑ नॉट?

[06:13:54] इज दिस फाइन ऑ नॉट?

[06:14:07] ठीक है।

[06:14:08] ओके। ओके।

[06:14:13] ठीक है? अब देखो, पहले हम आरबीआई की बात

[06:14:17] करेंगे। फिर हम यूएस के फेड की बात

[06:14:18] करेंगे। पहले आरबीआई की बात करो। देखो,

[06:14:21] मान लो आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिया।

[06:14:25] भारत में। अब भारत में भी बढ़ा पाएगा और

[06:14:27] कहां बढ़ाएगा? मान लो आरबीआई ने भारत में

[06:14:30] इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिया। अब बताओ इसका

[06:14:32] रुपए पे क्या इंपैक्ट आएगा?

[06:14:35] इसका रुपए पे क्या इंपैक्ट आएगा? अगर

[06:14:37] आरबीआई ने भारत में इंटरेस्ट रेट बढ़ा

[06:14:40] दिया।

[06:14:53] अरे लर्न विद पाल हमारे पास डॉलर्स हैं।

[06:14:55] आरबीआई ने रखे हुए हैं अपनी तिजोरी में।

[06:15:00] देखो अगर भारत में इंटरेस्ट रेट ज्यादा है

[06:15:04] तो तो क्या बहुत सारे लोग भारत में अपने

[06:15:09] डॉलर लेके आ नहीं जाएंगे कि चलो भाई भारत

[06:15:12] चलते हैं भारत में इंटरेस्ट रेट अच्छा

[06:15:13] खासा है तो अगर आपने आरबीआई ने इंटरेस्ट

[06:15:16] रेट बढ़ा दिया ना तो इससे डॉलर का बहुत

[06:15:19] भारी इनफ्लो होगा बहुत सारे विदेशी लोग

[06:15:23] अपना पैसा डॉलर लेकर भारत में आ जाएंगे सर

[06:15:26] जब भारत में डॉलर बहुत ज्यादा आ जाएगा तो

[06:15:29] सर उससे आपकी डॉलर की सप्लाई बढ़ जाएगी।

[06:15:32] एग्जैक्टली बिल्कुल बढ़ेगी। इसमें तो कोई

[06:15:34] दिक्कत ही नहीं है। पर आप हमें यह बताओ कि

[06:15:36] रुपए पे क्या इंपैक्ट आएगा? अरे भाई आंसर

[06:15:38] आ चुका है। डॉलर की सप्लाई बढ़ना मतलब

[06:15:41] डॉलर कमजोर होना और डॉलर कमजोर होने का

[06:15:45] मतलब रुपया मजबूत होना। कोई रटने की जरूरत

[06:15:50] नहीं है कि इससे ये होगा, इससे वो होगा।

[06:15:51] लॉजिक से सॉल्व करो। लॉजिक से सॉल्व करो।

[06:15:54] अरे भाई एग्जांपल ही दे रहा हूं गणेश।

[06:15:56] एग्जांपल ही तो है और क्या है आपके सामने

[06:15:58] ही तो है आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया

[06:16:00] ये एग्जांपल नहीं दो और क्या है

[06:16:07] अब बात कर लेते हैं जो आप कह रहे थे कि

[06:16:10] यूएसए के आरबीआई ने कुछ किया यूएसए के

[06:16:12] आरबीआई को हम फेड बोलते हैं ठीक है यूएस

[06:16:14] फेड ने क्या किया मान लो मान लो यूएस फेड

[06:16:17] ने इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिया ठीक है अब बताओ

[06:16:19] इसका क्या प्रभाव पड़ेगा

[06:16:23] अगर यूएस फेड ने इंटरेस्ट रेट ह कर दिया।

[06:16:26] हक बोलते हैं इसको बढ़ाने को हक। अगर यूएस

[06:16:28] फेड ने इंटरेस्ट रेट ह कर दिया तो बताओ

[06:16:30] इसका क्या इंपैक्ट आएगा?

[06:16:34] यार अनुज आप खुद बताओ मुझे अगर मैं आपको

[06:16:37] 100% इंटरेस्ट रेट दूं क्या आप मेरे पास

[06:16:39] पैसा रखने आओगे नहीं आओगे?

[06:16:50] एग्जैक्टली यार देखो अगर यूएस में

[06:16:53] इंटरेस्ट रेट बढ़ गया है ना तो सब लोग

[06:16:55] भारत से डॉलर निकाल निकाल के बाहर जाएंगे

[06:16:58] जिसको आप लोगों ने बिल्कुल ठीक कहा कि

[06:17:00] भारत में से डॉलर का फ्लाइट हो जाएगा ठीक

[06:17:02] है कैपिटल फ्लाइट जिसको बोलते हैं कि भारत

[06:17:04] से डॉलर बाहर जाने लग जाएंगे भारत से डॉलर

[06:17:07] बाहर जाएंगे तो भारत में डॉलर की सप्लाई

[06:17:09] कम हो जाएगी और जब भारत में डॉलर की

[06:17:11] सप्लाई कम हो गई है भारत में डॉलर्स कम हो

[06:17:13] गए हैं तो जो चीज कम होती है वो मजबूत

[06:17:16] होती है। तो यहां डॉलर मजबूत हो जाएगा।

[06:17:18] डॉलर मजबूत होने से आपका रुपया कमजोर हो

[06:17:22] जाएगा। आप लोग जो रट रहे थे ना आज तक आज

[06:17:25] तक जो आप लोग रट रहे थे इंटरेस्ट रेट

[06:17:27] बढ़ाने से इसका ऐसे हो जाएगा। इसका वो हो

[06:17:29] जाएगा। रटना बिल्कुल नहीं है यार। थोड़ा

[06:17:32] सा यूपीएससी ने ऊपर नीचे किया आपका रटा

[06:17:34] रटाया आंसर गलत। पर अगर आपने लॉजिक समझा

[06:17:36] है कि कोई चीज क्यों मजबूत या कोई चीज

[06:17:38] क्यों कमजोर होती है? आपका आंसर आएगा। अब

[06:17:41] एक बच्चा था जिसने आज तक रटा हुआ था कि

[06:17:43] यार कि इंटरेस्ट रेट चेंज होने से रुपया

[06:17:46] मतलब चेंज होता है। हां होता है। पर कैसे

[06:17:48] होता है? ऐसे होता है।

[06:18:01] ठीक है। इज इट फाइन?

[06:18:04] इज इट फाइन?

[06:18:07] ठीक है। हां। आगे आते हैं। अगर मान लो

[06:18:11] भारत में इनफ्लेशन बढ़ गया। सर क्या

[06:18:13] महंगाई बढ़ने से भी रुपया कमजोर या मजबूत

[06:18:16] हो सकता है? हां, हो सकता है। आप मुझे

[06:18:18] बताओ कि अगर महंगाई बढ़ गई है देश में।

[06:18:21] भारत देश में महंगाई बढ़ गई है तो क्या

[06:18:23] होगा?

[06:18:45] लीगल पंछी मैंने आपसे नाम पूछा था। आपने

[06:18:46] नाम बताया नहीं अपना।

[06:18:56] वेरी गुड वेरी गुड। वेरी गुड। अब देखो इधर

[06:18:59] अगर महंगाई बहुत ज्यादा है। अगर महंगाई

[06:19:02] बहुत ज्यादा है तो क्या होगा?

[06:19:04] अगर महंगाई बहुत ज्यादा है तो सर हमारे

[06:19:08] प्रोडक्ट क्या कोई खरीदना चाहेगा? कोई

[06:19:11] नहीं खरीदेगा। हमारे एक्सपोर्ट्स जो हैं

[06:19:15] वो कम कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे।

[06:19:18] लेस कॉम्पिटिटिव क्योंकि महंगे हैं ना जो

[06:19:20] चीजें महंगी होती हैं वो कम कॉम्पिटिटिव

[06:19:21] होती हैं। ठीक है? और अगर आपके

[06:19:24] एक्सपोर्ट्स जो हैं वो कम कॉम्पिटिटिव बन

[06:19:26] जाएंगे तो उस केस में क्या होगा? उस केस

[06:19:28] में हमारे एक्सपोर्ट्स कम हो जाएंगे। है

[06:19:30] ना? और सर अगर हमारे एक्सपोर्ट्स कम हो

[06:19:33] जाएंगे तो तो उससे क्या हो रहा है? अगर

[06:19:35] हमारे एक्सपोर्ट कम हो जाएंगे। अगर हमारे

[06:19:39] एक्सपोर्ट कम हो जाएंगे उस केस में क्या

[06:19:41] होगा? भारत में डॉलर आने बंद हो जाएंगे।

[06:19:45] डॉलर आएंगे ही नहीं भारत में क्योंकि

[06:19:48] एक्सपोर्ट नहीं ना हो रहे हमारे और डॉलर

[06:19:50] अगर कम हो जाएंगे तो सर हमारा डॉलर मजबूत

[06:19:53] हो जाएगा। हमारा नहीं यूएसए का डॉलर मजबूत

[06:19:55] हो जाएगा और हमारा रुपया कमजोर हो जाएगा।

[06:20:01] समझे इस बात को? हां। ठीक है। ठीक है। समझ

[06:20:03] गया। तो महंगाई बढ़ने से ना आपका रुपया

[06:20:06] कमजोर होता है। समझ आया आपको?

[06:20:10] महंगाई बढ़ने से आपका रुपया कमजोर होता

[06:20:12] है। कोई कंफ्यूजन है? कोई डाउट है यहां पे

[06:20:15] किसी को?

[06:20:23] ठीक है। ठीक है। गुड गुड गुड। गुड गुड

[06:20:25] गुड। ठीक है। ठीक है। ओके ओके ओके ओके बस

[06:20:27] बस बस। चलो क्लियर है यहां तक अंडरस्टुड

[06:20:32] अंडरस्टुड यहां पे तो समझ आया कि रुपया

[06:20:34] ऊपर नीचे क्यों होता है

[06:20:36] ठीक है

[06:20:40] हां अक्षय 5 मिनट रुको अभी आपको समझ आएगा

[06:20:42] अभी आपको 5 मिनट समझ आएगा

[06:20:48] हां हां हां किटी जहां से आपने पढ़ा है

[06:20:50] वहां रट्टा मारने के लिए कहते हैं मुझे

[06:20:51] पता है आप कहां से पढ़ के आए हो मुझे पता

[06:20:53] है वो बात पर पॉइंट पता है क्या है

[06:20:55] यूपीएससी ने अगर थोड़ा सा यहां पे चेंज कर

[06:20:58] दिया। थोड़ा सा भी कुछ क्वेश्चन को हल्का

[06:21:00] सा ट्विस्ट कर दिया। फिर आपका आंसर नहीं

[06:21:02] आएगा। जब तक आपने यह रटा है कि हां यूएस

[06:21:05] फेडरेट बढ़ने से रुपया डेप्रिशिएट हो गया।

[06:21:07] हां, ठीक है। पर कुछ भी आड़ी तिरछी बात कर

[06:21:10] दी यूपीएससी ने फिर नहीं आप कर पाओगे। दैट

[06:21:12] इज़ द होल रीज़न। इसीलिए क्वेश्चन हमारे से

[06:21:14] बनता नहीं है।

[06:21:16] ठीक है? तो ये सर हमने देख लिया रुपया

[06:21:18] कमजोर कब होता है कि रुपया मजबूत कम होता

[06:21:20] है। ये तो हम समझ गए हैं। तो फिर इस

[06:21:23] क्वेश्चन को ट्राई करो एक बार। अब बताओ

[06:21:25] जिसने रटा हुआ था बताओ भाई अब करो इस

[06:21:27] क्वेश्चन को

[06:22:28] बहुत ही बढ़िया। बहुत ही बढ़िया। देखो

[06:22:30] बहुत अच्छा लग रहा है कि आप लोग ये आसान

[06:22:33] क्वेश्चन नहीं है उतना। ठीक है? बहुत सारे

[06:22:35] लोग इनमें क्वेश्चन में फंस जाते हैं। पर

[06:22:37] आप लोगों का सबका मतलब इक्काद-दुक्का छोड़

[06:22:39] के सबका सही आ रहा है। सो दैट इज़ गुड।

[06:22:41] देखो एक चीज़ आप देखना। आई थिंक 2011 का

[06:22:44] यूपीएससी प्रीलिम्स का पेपर था। यहां पर

[06:22:46] ये पहली स्टेटमेंट उस दिन पूछी हुई थी

[06:22:48] 2011 के प्रीलिम्स में। उसमें क्वेश्चन ये

[06:22:50] था कि अगर कॉमनव्थ गेम्स जो हुई थी उसमें

[06:22:53] टूरिस्ट घूमने आते हैं भारत में। देखो अगर

[06:22:55] विदेशी टूरिस्ट भारत घूमने आते हैं ना वो

[06:22:57] एक तरह से हम एक्सपोर्ट कर रहे हैं। हम

[06:22:58] उनको ट्रैवल टूरिज्म सर्विस से हम उनको

[06:23:01] एक्सपोर्ट करते हैं। तो यहां पर ये हमारा

[06:23:03] एक्सपोर्ट ही है। अगर भारत में विदेशी

[06:23:05] टूरिस्ट आएंगे हम उनको टूरिज्म सर्विस एक

[06:23:07] तरह से एक्सपोर्ट कर रहे हैं। और टूरिज्म

[06:23:09] सर्विज एक्सपोर्ट कर रहे हैं। मैंने आपको

[06:23:11] पीछे बताया हमारे जब-जब एक्सपोर्ट बढ़ते

[06:23:14] हैं ना दोस्तों, हमारे जब-जब एक्सपोर्ट

[06:23:15] बढ़ते हैं, उससे हमारे पास डॉलर्स की

[06:23:18] सप्लाई बढ़ती है। डॉलर सप्लाई बढ़ने से

[06:23:21] डॉलर कमजोर होता है और रुपया मजबूत होता

[06:23:24] है। तो बिल्कुल दोस्तों यहां पर आपका

[06:23:26] रुपया मजबूत होगा पहले स्टेटमेंट के अंदर।

[06:23:28] दूसरा कह रहा है अगर भारतीय सिटीजंस

[06:23:32] विदेशी कंट्री में पैसा इन्वेस्ट करें तो

[06:23:34] देखो ये पैसा भारत से बाहर जा रहा है।

[06:23:37] मैंने आपको आउटफ्लो वाला बात बताई थी। जब

[06:23:39] कैपिटल आउटफ्लो होगा उस केस में क्या

[06:23:41] होगा? उस केस में आपको यहां पे नोटिस करने

[06:23:43] को मिलेगा कि हमारा जो रुपया है वो

[06:23:44] डेप्रिशिएट करेगा। ये स्टेटमेंट गलत है।

[06:23:47] ठीक है ना? थर्ड स्टेटमेंट की बात करें।

[06:23:51] थर्ड स्टेटमेंट की बात करें। अगर कच्चे

[06:23:53] तेल का दाम कम हो गया। कच्चे तेल का दाम

[06:23:55] कम हो गया। अब यहां पे हमारे यहां इंपोर्ट

[06:23:57] कम हो गए हैं। पहले के मुकाबले जो हमारे

[06:24:00] डॉलर्स बहुत ज्यादा बाहर जा रहे थे अब

[06:24:01] उतने डॉलर बाहर नहीं जा रहे। तो डॉलर की

[06:24:03] भारत में सप्लाई बढ़ जाएगी पहले के

[06:24:05] मुकाबले। और सप्लाई बढ़ जाएगी। डॉलर कमजोर

[06:24:07] रुपया मजबूत। तो बिल्कुल ठीक बात है। चौथा

[06:24:10] कह रहा है एक्सपोर्ट बढ़ गया यार। मैंने

[06:24:11] तो बताया ही आपको एक्सपोर्ट बढ़ने से

[06:24:13] रुपया एप्रिशिएट होता है। तो इसलिए इसका

[06:24:15] आंसर बनेगा ऑप्शन सी 1 3 एंड फोर।

[06:24:24] मासूम कह रहे हैं कब तक चलेगी क्लास? देखो

[06:24:27] मासूम जब तक प्रभु की इच्छा होगी तब तक

[06:24:29] चलेगी। हां जी। तो यहां पर इसका आंसर

[06:24:32] बनेगा ऑप्शन सी 1 3 एंड फोर। राइट? एक और

[06:24:36] क्वेश्चन ट्राई करो यहां पे। इसको देखो एक

[06:24:38] बार।

[06:25:10] हम

[06:25:30] देखो एक होता है हार्ड करेंसी एक होता

[06:25:32] हम देखो एक होता है हार्ड करेंसी एक होता

[06:25:32] है सॉफ्ट करेंसी जब किसी चीज़ में

[06:25:34] फ्लक्चुएशन बहुत ज्यादा हो उसकी वैल्यू

[06:25:36] बहुत तेजी से ऊपर नीचे गिरे उसको हम बोलते

[06:25:38] हैं सॉफ्ट करेंसी सी तो ऑप्शन सी इसका

[06:25:40] आंसर होगा। जो चीज़ क्या हो जाए? जो चीज़

[06:25:43] में फ्लक्चुएशन काफी ज्यादा होते हैं,

[06:25:44] उसको हम लोग सॉफ्ट करेंसी के जानते हैं।

[06:25:47] जिस चीज़ में फ्लक्चुएशन कम होती है, उसको

[06:25:48] हम बोलते हैं हार्ड करेंसी। तो ऑप्शन सी

[06:25:50] यहां पे हमारा करेक्ट आंसर हो जाएगा।

[06:25:55] बाकी आप लोग एक कांसेप्ट जानते हो? रुपया

[06:25:58] कमजोर होने से एक्सपोर्ट और इंपोर्ट पे

[06:26:00] क्या इंपैक्ट आता है? बताओ जरा मुझे आप

[06:26:02] लोग। अगर रुपया कमजोर होता है, रुपया

[06:26:05] कमजोर होता है तो उससे एक्सपोर्ट को फायदा

[06:26:08] होता है या नुकसान होता है? आप मुझे इस

[06:26:09] क्वेश्चन का आंसर करेंगे सब लोग। सब लोग

[06:26:12] इस क्वेश्चन का आंसर करेंगे कि अगर रुपया

[06:26:14] डेप्रिशिएट हो जाए, अगर रुपया डेप्रिशिएट

[06:26:17] हो जाए, उसका क्या इंपैक्ट आता है इंपोर्ट

[06:26:20] एक्सपोर्ट के ऊपर? बताओ जरा।

[06:26:29] योगेश आप पोल के स्पेलिंग ठीक करो पहले

[06:26:31] तो। ठीक है? फिर मैं पोल लगाऊंगा।

[06:26:39] हां जी।

[06:26:47] देखो जब हम बात करते हैं ना रुपया कमजोर

[06:26:50] होने की जब रुपया कमजोर होता है ना तो

[06:26:53] हमारे जो प्रोडक्ट्स होते हैं वो विदेशी

[06:26:57] धरती पर सस्ते हो जाते हैं। मैं आपको

[06:27:00] एग्जांपल से समझा देता हूं। जैसे मैंने

[06:27:01] एग्जांपल यहां लिखा हुआ है। मान लो आपकी

[06:27:04] कॉफी जो है वो 1 किलो ₹80 की है। ठीक है?

[06:27:08] और आज मान लो $180 का है। ठीक है? अगर

[06:27:12] आपकी कॉफी 1 किलो ₹80 की है और आज $1 ₹80

[06:27:15] का है तो आपकी कॉफी कितने की बिकेगी यूएस

[06:27:17] में? सर 1 किलो ₹80 की। ₹80 $1 के बराबर,

[06:27:21] तो आज $1 की बिकेगी। बट अगर कल को रुपया

[06:27:26] कमजोर हो जाए। रुपए कमजोर होने का मतलब कि

[06:27:29] मान लो $1 ₹160 का हो जाए तो क्या होगा?

[06:27:33] तो अब यही सेम कॉफी यूएसए में सिर्फ और

[06:27:36] सिर्फ $.5 की बिकेगी क्योंकि $1 ₹10 के

[06:27:40] बराबर हो चुका है। तो पहले कॉफी यूएसए में

[06:27:43] मिल रही थी $1 की। अब कॉफी मिल रही है $.2

[06:27:46] की। क्वालिटी भी सेम है। सब कुछ सेम है।

[06:27:48] तो लोग क्या कहेंगे? लोग कहेंगे चलो

[06:27:50] ज्यादा से ज्यादा हम कॉफी खरीदते हैं यह

[06:27:52] वाली। क्योंकि पहले के मुकाबले सस्ती हो

[06:27:53] गई है। ऐसा नहीं है कि हमें कोई नुकसान हो

[06:27:55] रहा है। हमें तो ₹80 मिलने थे। ₹80 मिल

[06:27:57] रहे हैं। बिल्कुल। पर हमारे प्रोडक्ट की

[06:27:59] डिमांड बढ़ जाएगी। हमारा प्रोडक्ट ज्यादा

[06:28:01] कॉम्पिटिटिव हो जाएगा क्योंकि पहले के

[06:28:03] मुकाबले वह सस्ते में अब आपकी यूएस

[06:28:05] मार्केट में बिक रहा है। सो दैट इज़ व्हाई

[06:28:07] जब-जब आपका रुपया कमजोर होता है ना तो

[06:28:10] एक्सपोर्ट्स हमारे बढ़ते हैं। जबजब हमारा

[06:28:13] रुपया कमजोर होता है हमारे इंपोर्ट्स जो

[06:28:15] हैं वो कम होते हैं। कई बार चाइना के ऊपर

[06:28:17] इल्जाम लगता है ना कि चाइना जानबूझ के

[06:28:19] अपनी करेंसी को डेप्रिशिएट कर रहा है। वो

[06:28:21] इसीलिए इल्जाम लगता है क्योंकि करेंसी

[06:28:23] डेप्रिशिएट होने से एक्सपोर्ट हाई बनते

[06:28:25] हैं और आपके इंपोर्ट कम होते हैं।

[06:28:28] इंपोर्ट महंगे हो जाएंगे ना। इंपोर्ट

[06:28:30] महंगे हो जाएंगे तो आप कम इंपोर्ट करोगे।

[06:28:32] उस कॉन्टेक्स्ट में बात हो रही है। ठीक

[06:28:35] है?

[06:28:37] अब एक क्वेश्चन मैं आपको देता हूं यहां

[06:28:39] पे। रुको।

[06:28:44] हां। इस क्वेश्चन को ट्राई करो एक बार।

[06:28:49] हां सप्ताशी बिल्कुल ठीक बात है आपकी।

[06:28:55] हां कॉस्ट बढ़ेगा जो हम विदेशों से

[06:28:57] मंगाएंगे सामान अगर रुपया कमजोर हो रहा है

[06:29:00] तो

[06:29:02] एक कह रहे हैं कि करेंसी एप्रिशिएट और

[06:29:03] डेप्रिशिएट कैसे करती है? रोमी आपका मैं

[06:29:06] डाउट कल लूंगा। ठीक है? हम कल डिस्कस

[06:29:08] करेंगे आपसे अलग से।

[06:29:40] हां जी देखो पहली स्टेटमेंट अपने आप पे

[06:29:42] बिल्कुल ठीक है। ट्विन डेफिसिट दो तरह के

[06:29:45] डेफिसिट देखो अगर कोई अर्थव्यवस्था ऐसी है

[06:29:49] जिसमें फिसिकल डेफिसिट भी हो सर फिसल

[06:29:51] डेफिसिट क्या अरे सुबह पढ़ा चुका हूं ठीक

[06:29:53] है ना जहां पर आपका टोटल एक्सपेंडिचर

[06:29:55] ज्यादा है एज़ कंपेयर टू टोटल इनकम जहां पर

[06:29:58] आपकी बोरोइिंग होती है होता है फिसलिक

[06:29:59] डेफिसिट और एक होता है करंट अकाउंट डेफिट

[06:30:01] अगर जो करंट अकाउंट वाले कॉम्पोनेंट्स थे

[06:30:03] विज़िबल इनविज़िबल को मिलाके अगर वहां पे

[06:30:05] डेफिसिट आ रहा है उसको बोलते हैं करंट

[06:30:06] अकाउंट डेफिसिट अगर किसी अर्थव्यवस्था में

[06:30:08] आपका फिसिकल डेफिसिट भी है और करंट अकाउंट

[06:30:11] डेफिसिट भी है उनको हम बोलते हैं ट्विन

[06:30:12] डेफिट

[06:30:14] ठीक है ना? ओके सर। ओके। ओके। सेकंड

[06:30:18] स्टेटमेंट क्या कह रहा है? जे कर्व। अब ये

[06:30:20] जे कप बड़ा इंटरेस्टिंग है। देखो अगर रुपया

[06:30:23] कमजोर हुआ। रुपए कमजोर होने से क्या

[06:30:25] इंपैक्ट आएगा हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट के

[06:30:27] ऊपर? देखो नॉर्मली ना हमारे दिमाग में आना

[06:30:30] चाहिए कि यार जब रुपया कमजोर होगा ना सर,

[06:30:33] हमारे एक्सपोर्ट सस्ते हो जाएंगे। हमारे

[06:30:35] एक्सपोर्ट बढ़ जाएंगे और इंपोर्ट महंगे हो

[06:30:37] जाएंगे तो हम इंपोर्ट कम करवाएंगे। यही

[06:30:40] लॉजिक बनता है ना? पर क्या ये सारी बातें

[06:30:42] एक दिन में हो जाएंगी ना। होता पता है

[06:30:45] क्या है? रुपया कमजोर होने का एक्सपोर्ट

[06:30:48] पे इंपैक्ट थोड़ा टाइम लेता है। रुपया

[06:30:50] कमजोर हुआ तो एक्सपोर्ट बढ़ेंगे बट इट विल

[06:30:53] टेक सम टाइम। बट जैसे ही रुपया कमजोर हुआ

[06:30:56] ना आपके इंपोर्ट अचानक से शूट अप कर सकते

[06:30:59] हैं। ठीक है ना? तो यहां पर ना हमारा जो

[06:31:02] हाइप जो बनता है ना वो दरअसल में एक जे

[06:31:04] कर्व बनता है। कहने का मतलब जब रुपया

[06:31:08] कमजोर होगा स्टार्टिंग में हमारा ट्रेड

[06:31:10] बैलेंस नेगेटिवली इंपैक्ट होगा। पर

[06:31:12] धीरे-धीरे करके वो पॉजिटिवली इंपैक्ट होता

[06:31:14] रहेगा। क्योंकि धीरे-धीरे करके हमारे

[06:31:15] एक्सपोर्ट्स जो हैं वो बढ़ते रहेंगे। पर

[06:31:17] शुरुआत में कुछ समय के लिए ऐसा टाइम आएगा।

[06:31:20] जब रुपया कमजोर होने से हमारे जो

[06:31:23] इंपोर्ट्स हैं वो महंगे हो रहे होंगे ना

[06:31:25] तो थोड़े इंपोर्ट्स का कॉस्ट बढ़ जाएगा।

[06:31:27] तो ट्रेड बैलेंस जो है स्टार्टिंग में

[06:31:29] नेगेटिवली इंपैक्ट होगा पर बाद में यहां

[06:31:31] पे वो अच्छा होने लग जाएगा। तो यही है जे

[06:31:33] कर्व। इट स्टेट्स दैट अंडर सर्टेन

[06:31:35] एजम्पशनंस ए कंट्री ट्रेड डेफिसिट।

[06:31:38] स्टार्टिंग में आपका डेफिसिट खराब होगा

[06:31:41] करेंसी डेप्रिशिएट करने पे बिकॉज़ आप

[06:31:43] ज्यादा इंपोर्ट कर रहे हो। बट उसके बाद

[06:31:45] जाके वो यहां पे ठीक होने लग जाएगा। इसी

[06:31:47] को बोलते हैं हम लोग जे कर्व।

[06:31:50] ठीक है? तो जे कर्व का लिंकेज किसके साथ

[06:31:52] है? रुपए के कमजोर होने के साथ। रुपए

[06:31:54] कमजोर होने का क्या इंपैक्ट आता है आपके

[06:31:56] ट्रेड बैलेंस के ऊपर यही है आपका जेक।

[06:32:01] चलिए सर यह बात भी हमारे यहां पे समझ आई।

[06:32:06] इसको ट्राई करो। ये यूपीएससी का पीवाईक्यू

[06:32:08] है ये।

[06:32:23] हां हां शशि देखो अगर जरूरत की चीजें हैं

[06:32:26] तो तो यार इंपोर्ट करवाना ही पड़ेगा ना

[06:32:27] उनका अगर कहीं से कोई चीज मिल नहीं रही है

[06:32:29] तो इंपोर्ट करवाना ही पड़ेगा भले ही महंगा

[06:32:31] क्यों ना हो

[06:33:11] अब अब ये क्वेश्चन उतना भी आसान नहीं है

[06:33:12] जितना देखने में लग रहा है। ये टफ है थोड़ा

[06:33:14] क्वेश्चन। पर अगर आप थोड़ा इसको लॉजिकली

[06:33:16] पढ़ोगे तो कर सकते हो।

[06:33:21] देखो क्या बताना है यहां पे? नॉट द मोस्ट

[06:33:25] लाइकली मेजर टू स्टॉप द स्लाइड ऑफ़ इंडियन

[06:33:27] रूप। व्हाट इज़ स्लाइड? स्लाइड होता है

[06:33:29] गिरना। रुपया गिर रहा है। रुपया गिर रहा

[06:33:33] है तो क्या नहीं करना है? ठीक है ना? बोला

[06:33:36] है अगर रुपया गिर रहा है तो क्या नहीं

[06:33:38] करना है? अब देखो पहली चीज यहां पर यह कह

[06:33:42] रहा है कि आप एक काम करो आप नॉन एसेंशियल

[06:33:46] गुड्स के इंपोर्ट के ऊपर रोक लगा दो। कर्व

[06:33:48] होता है रोक लगाना।

[06:33:50] देखो अगर आप इंपोर्ट कम करवाओगे

[06:33:54] तो रुपया नहीं गिरेगा। मानते हो? इंपोर्ट

[06:33:58] करवाने से रुपया गिर रहा था ना। इंपोर्ट

[06:33:59] नहीं करवाओगे तो रुपया नहीं गिरेगा। और

[06:34:01] दूसरा कह रहा है एक्सपोर्ट बढ़ाओ। भाई

[06:34:02] एक्सपोर्ट बढ़ाने से रुपया बढ़ता है। तो

[06:34:05] भाई ये तो जो है ना जो पहला स्टेप है इससे

[06:34:07] आपका रुपया मजबूत होगा। तो ये तो करना

[06:34:10] चाहिए। दिस इज़ गुड स्टेप।

[06:34:13] ठीक है? इससे रुपया मजबूत होगा। हमें

[06:34:15] बताना है किससे नहीं होगा।

[06:34:18] ठीक है? हां। सेकंड देखो।

[06:34:22] दूसरा कह रहा है इंडियन बोरोअर्स को

[06:34:23] एनकरेज करो कि वो रूपी डिनोमिनेटर मसाला

[06:34:26] बॉन्ड इशू करें। मैं मसाला बॉन्ड आपको

[06:34:28] कराऊंगा फाइनेंसियल मार्केट में। पर अभी

[06:34:30] एक बेसिक चीज समझ लो। मान लो मैं इंडिया

[06:34:33] में हूं। मैंने एक कंपनी खोली। मैं विदेशी

[06:34:36] किसी पर्सन से उधार लेना चाह रहा हूं। ठीक

[06:34:38] है? तो मुझे डॉलर्स में पैसा देगा।

[06:34:43] ठीक है? हां। पर अगर मान लो फिर आगे जाके

[06:34:47] हमें रुपी डॉलर वापस भी करने पड़ेंगे। पर

[06:34:50] अगर आप ये सारा ट्रांजैक्शन रुपीस में कर

[06:34:52] रहे हो ना तो आपको फिर दिक्कत नहीं है।

[06:34:54] अगर रेदर देन रेजिंग मनी एंड डॉलर्स अगर

[06:34:57] आप रुपीस में ही करो तो फिर डॉलर के ऊपर

[06:34:59] आपकी डिपेंडेंसी भी नहीं है। तो इससे भी

[06:35:01] आपका ना कोई दिक्कत नहीं आएगी। ऐसे ही

[06:35:04] तीसरा भी अगर आपने बोरोइंग की कंडीशन आसान

[06:35:07] कर दी बाहर से पैसों की उससे भी रुपए के

[06:35:10] ऊपर कोई दिक्कत नहीं आएगी। पर अगर हम बात

[06:35:12] करें चौथे स्टेटमेंट की अगर आप

[06:35:13] एक्सपेंशनरी मॉनिटरी पॉलिसी एक तरह से

[06:35:15] अडॉप कर रहे हो ना इससे आप एक तरह से रुपए

[06:35:17] की सप्लाई बहुत ज्यादा बढ़ा रहे हो और जब

[06:35:19] रुपया एक तरह से बढ़ता हुआ देखने को

[06:35:21] मिलेगा सप्लाई के कॉन्टेक्स्ट में उस केस

[06:35:23] में यहां पर क्या होगा कि डॉलर के सामने

[06:35:25] वो मजबूत नहीं होगा बल्कि कमजोर हो जाएगा।

[06:35:28] रुपया ऑलरेडी कमजोर था तो उसको कमजोर को

[06:35:31] रोकने के लिए क्या नहीं करना है? ऑप्शन डी

[06:35:34] नहीं करना है। इससे रुपया और कमजोर होता

[06:35:36] रहेगा।

[06:35:39] क्या यह बात क्लियर है? तो ऑप्शन डी विल

[06:35:42] बी द राइट आंसर।

[06:35:47] हम हम

[06:35:49] गुड गुड गुड। हां जी। अब कुछ और

[06:35:53] कांसेप्ट्स भी हमें डिस्कस करने हैं।

[06:35:59] यस। देखो एक कांसेप्ट हमें सीखना है

[06:36:02] नॉमिनल एक्सचेंज रेट का और रियल एक्सचेंज

[06:36:05] रेट का। देखो प्लीज मेरी बात ध्यान से

[06:36:07] सुनना।

[06:36:09] यह नीर और रीर नहीं है। काफी सारे लोग

[06:36:12] इसको नीर रीर समझ लेते हैं। नहीं मैं यहां

[06:36:15] बात किस कर रहा हूं? नॉमिनल एक्सचेंज रेट

[06:36:16] और रियल एक्सचेंज रेट की। ये कांसेप्ट्स

[06:36:18] अलग है। नीर रीर कांसेप्ट अलग है। अभी नीर

[06:36:21] रीर पे भी आऊंगा। अभी फिलहाल मैं आपको

[06:36:23] एनईआर और आरईआर समझा रहा हूं। नॉमिनल

[06:36:26] एक्सचेंज रेट और रियल एक्सचेंज रेट। ठीक

[06:36:29] है? इसका क्या अर्थ है? देखो समझना। अभी

[06:36:33] तक जो हम एक्सचेंज रेट पढ़ते आ रहे हैं

[06:36:35] ना, वही होता है नॉमिनल एक्सचेंज रेट। जो

[06:36:37] ₹185 या $190 से जो चलता है उसी को हम

[06:36:40] बोलते हैं नॉमिनल एक्सचेंज रेट। ठीक है

[06:36:43] सर। ठीक है। ठीक है। फिर सर ये रियल

[06:36:45] एक्सचेंज रेट क्या होता है? व्हाट डू मीन

[06:36:47] बाय टर्म? रियल एक्सचेंज रेट आरआर ये क्या

[06:36:50] होता है? देखो

[06:36:52] मान लो

[06:36:57] मान लेते हैं एक एग्जांपल से। अब जैसे ये

[06:37:00] टमाटर की ही बात कर रहा था मैं।

[06:37:03] ठीक है? मैंने ये आज ठीक है? ठीक है?

[06:37:06] मैंने आज सुबह मैं इन्हें टमाटर खरीदा। तो

[06:37:08] मैंने ये टमाटर खरीदा कितने का? मैंने ये

[06:37:11] टमाटर खरीदा।

[06:37:14] अब टमाटर तो सस्ता ही आएगा। ठीक है ना?

[06:37:16] टमाटर छोड़ो। टमाटर छोड़ो। टमाटर रहने दो।

[06:37:18] हर चीज में टमाटर थोड़ी आएगा। हां जी। अब

[06:37:21] देखो एक एग्जांपल लेते हैं। मान लो हम एक

[06:37:23] बात करते हैं हम खाने की थाली की। ठीक है?

[06:37:26] अब जैसे बीच में हमारा ब्रेक हुआ था आधे

[06:37:28] घंटे का। अब कर लेंगे चाय ब्रेक भी। पर जब

[06:37:30] हमारा लंच ब्रेक हुआ ना तो मैंने जाके

[06:37:32] थाली खाई। अब ये थाली कितने की मिली मुझे?

[06:37:35] देखो इस थाली में दाल थी, सब्जी थी, रोटी

[06:37:40] थी और थोड़े से चावल थे। तो मैंने ये थाली

[06:37:42] खाई। मैंने ये थाली ₹90 की पड़ी मुझे।

[06:37:47] ठीक है। ठीक है। बढ़िया। बढ़िया। बढ़िया। ठीक

[06:37:51] है। क्या था? दो रोटी, थोड़े से चावल, थोड़ी

[06:37:55] दाल और थोड़ी सब्जी। यह ₹90 की पड़ी है। ठीक

[06:37:59] है। अब अभी तो मैं यहां इंडिया में हूं।

[06:38:01] पर नवंबर में मैं यूएसए गया था। नवंबर के

[06:38:05] महीने में मैं यूएसए गया था। ठीक है ना?

[06:38:07] उस दिन क्लास भी नहीं थी। मैंने ली वहां

[06:38:09] से। तो ₹90 मैंने जब मैं यूएसए गया था ना

[06:38:12] तो वहां भी मैंने सेम थाली खाई थी। सेम

[06:38:14] वही दो रोटी, थोड़े से चावल, थोड़ी सी

[06:38:17] दाल, थोड़ी सी सब्जी। अब मैंने जब वहां पे

[06:38:20] थाली खाई थी ना। ठीक है? सॉरी आज। आज थाली

[06:38:24] का चलो ठीक है। चलो कोई नहीं। हां। ठीक

[06:38:25] है। तो तब मैंने थाली वो खाई थी $3 की खाई

[06:38:29] थी। अब प्लीज समझना मेरी बात को। मेरी बात

[06:38:32] को समझना। सेम थाली, सेम क्वालिटी

[06:38:37] इंडिया में मैं खा रहा हूं ₹90 की। यूएसए

[06:38:39] में खा रहा हूं मैं $3 की। अब आपके दिमाग

[06:38:42] में आएगा सर इसका मतलब क्या $3

[06:38:48] इसका मतलब क्या यह है क्या कि $3 ₹90 के

[06:38:51] बराबर हैं।

[06:38:53] हां। दिमाग में तो आना चाहिए कि हां यार

[06:38:56] $3 फिर तो ₹90 के बराबर होंगे। है कि

[06:38:59] नहीं? क्योंकि जब थाली $3 की वहां है, सेम

[06:39:01] थाली यहां पर ₹90 की है, तो क्या $3 ₹90

[06:39:04] के नहीं होने चाहिए? होने तो चाहिए पर

[06:39:07] होता तो नहीं है। इंडिया आज के समय तो $19

[06:39:10] ₹90 का है।

[06:39:12] तो तो क्या ऐसा होना चाहिए क्या कि अगर

[06:39:14] यूएसए वाला बंदा अगर इंडिया में थाली ₹90

[06:39:17] की है तो यूएस में $1 की होनी चाहिए। नहीं

[06:39:18] नहीं जरूरी थोड़ी है। भारत और यूएसए में

[06:39:24] भारत और यूएसए में आपके वस्तुओं के दाम

[06:39:27] अलग-अलग हैं। भारत और यूएसए में वस्तुओं

[06:39:30] के दाम अलग-अलग हैं। भारत में मुझे थाली

[06:39:32] खरीदनी हो मुझे ₹90 में मिल जाएगी। यूएसए

[06:39:35] में थेम सेम थाली के लिए मुझे $3 देने

[06:39:37] पड़ेंगे क्योंकि यूएसए महंगा है। यूएसए

[06:39:39] महंगा है। परचेसिंग पावर हम दोनों की सेम

[06:39:42] नहीं है। भारत में कोई बंदा $1 लाख कमा

[06:39:44] रहा है और यूएसए में कोई बंदा $1 लाख *

[06:39:47] $90 कमा रहा है। ठीक है ना? मतलब वो देख

[06:39:50] लेना जो भी आपका कैलकुलेशन हो वो अलग आंसर

[06:39:53] आएगा। समझे मेरी बात को? क्योंकि यूएसए

[06:39:55] में महंगाई है। यूएसए में महंगाई है।

[06:39:58] यूएसए में वस्तुएं महंगी है। इसीलिए यहां

[06:40:00] पे अगर हम डायरेक्टली एक्सचेंज रेट को

[06:40:03] निकालेंगे तो हमें सही इंफॉर्मेशनेशन नहीं

[06:40:05] मिलेगी। तो जब हम यहां पे क्या करते हैं?

[06:40:07] हम बास्केट को सेम करने की कोशिश करते

[06:40:09] हैं। उसमें हम लोग रियल एक्सचेंज रेट को

[06:40:12] देखते हैं। क्या होता है यहां पे? रियल

[06:40:13] एक्सचेंज रेट के अंदर।

[06:40:17] देखो रियल एक्सचेंज रेट में क्या होता है?

[06:40:19] हम रेशो निकालते हैं इंडियन प्राइसेस की

[06:40:23] और आपके फॉरेन प्राइसेस की। फॉरेन में

[06:40:25] कितने की थाली है? इंडिया में कितने की

[06:40:27] थाली है? उस हिसाब से हम एक्सचेंज रेट को

[06:40:29] एडजस्ट करने की कोशिश करते हैं। तो यहां

[06:40:30] पर हमने ना दोनों देशों में कितनी

[06:40:32] इनफ्लेशन चल रही है, हमने उसको भी एडजस्ट

[06:40:35] कर लिया। सिर्फ ये नहीं देखा कि $1 = ₹90

[06:40:38] है। ना, हमने दोनों देशों के प्राइसेस को

[06:40:41] भी अपनी कैलकुलेशन के अंदर इंक्लूड कर

[06:40:43] लिया। तो, हमने बास्केट ऑफ गुड्स एंड

[06:40:45] सर्विज को एक तरह से इक्वेट करने की कोशिश

[06:40:47] करी है। यह होता है आपका एक्सचेंज रेट के

[06:40:50] अंदर रियल एक्सचेंज रेट समझे आप मेरी बात

[06:40:53] को समझे मेरी आप बात इसको ठीक है ना

[06:40:56] परचेजिंग पावर हम बराबर करने की कोशिश कर

[06:40:59] रहे हैं परचेजिंग पावर हम यहां पे बराबर

[06:41:00] करने की कोशिश कर रहे हैं ठीक है तो ये

[06:41:03] होता है रियल एक्सचेंज रेट अब पॉइंट पता

[06:41:06] है क्या आता है ये परचेसिंग पावर को हम

[06:41:08] यहां पे बराबर कर रहे हैं और एक्चुअल में

[06:41:11] हम जीडीपी को भी इस तरह से नाप सकते हैं

[06:41:14] क्योंकि देखो यार मेरी बात सुनो भारत की

[06:41:16] कुछ जीडीपी है यूएसए की कुछ जीडीपी हां,

[06:41:19] ठीक है।

[06:41:20] पर भारत ने मान लो थाली बनाई एक। भारत की

[06:41:25] जीडीपी में ₹90 ऐड हुए। यूएसए की जीडीपी

[06:41:28] में $3 ऐड हुए। ये तो बात गलत है ना भाई?

[06:41:31] भारत ने भी सेम चीज का प्रोडक्शन किया।

[06:41:32] सेम थाली का। यूएसए ने भी सेम थाली का

[06:41:34] प्रोडक्शन किया। वहां पे $3 ऐड कर रहे हो।

[06:41:37] इंडिया में ₹90 ऐड कर रहे हो और ₹90 $1 के

[06:41:39] बराबर होते हैं। ये तो गड़बड़ है। तो

[06:41:42] पॉइंट पता क्या होता है? जब आप लोग जब आप

[06:41:46] लोग करेंसी कन्वर्ज़ का वो रेट लेते हो

[06:41:48] जिसके माध्यम से परचेसिंग पावर और करेंसीज

[06:41:50] को बराबर करने की कोशिश करते हो। इंडिया

[06:41:52] में अगर मेरे पास ₹90 है ना एक तरह से मान

[06:41:56] के चलो आपके यूएसए के अंदर आपके पास $3

[06:41:58] हैं। लॉजिकली $1 है। पर अगर आप देखोगे

[06:42:01] आपके पास $3 है। क्योंकि भारत में ₹90 से

[06:42:04] जो आप सामान खरीद सकते हो यूएसए में वही

[06:42:06] सामान खरीदने के लिए $3 चाहिए होंगे। तो

[06:42:08] एक्चुअली जब हम इस तरह से जीडीपी देखते

[06:42:10] हैं ना उसको बोलते हैं जीडीपी एट परचेजिंग

[06:42:12] पावर पैरिटी। क्योंकि भारत में वस्तुओं का

[06:42:15] दाम सस्ता है तो परचेजिंग पावर पैरिटी में

[06:42:17] भारत की जो जीडीपी है वो ज्यादा देखने को

[06:42:19] मिलती है। तो एक्चुअली अगर हम पीपीपी

[06:42:21] टर्म्स की बात करें ना तो यहां पर चाइना

[06:42:23] आपको टॉप पे देखने को मिलेगा। यूएसए सेकंड

[06:42:25] नंबर पर है एंड इंडिया है आपका थर्ड नंबर

[06:42:28] के ऊपर। ऐसा क्यों? अरे भाई यूएसए में

[06:42:31] जीडीपी ज्यादा है। मैं मानता हूं पर यूएसए

[06:42:33] महंगा भी तो है। इंडिया में जीडीपी कम है

[06:42:36] पर इंडिया में वस्तुएं सस्ती भी तो हैं।

[06:42:38] बनाया तो मैंने भी थाली ही है। भले ही ₹90

[06:42:41] आप मुझे दे रहे हो। तो एक्चुअली पीपीपी

[06:42:43] टर्म्स के अंदर भारत की जो जीडीपी है वो

[06:42:44] ज्यादा देखने को मिलती है। इसीलिए भारत

[06:42:46] तीसरे नंबर पे आता है जीडीपी एट परचेसिंग

[06:42:48] पर पैरिटी की टर्म्स में। चाइना पहले पे,

[06:42:50] यूएसए दूसरे पे, इंडिया तीसरे पे।

[06:42:55] क्या ये बात आपको समझ आई कि व्हाट इज

[06:42:57] एनईआर? व्हाट इज आरआर?

[06:43:03] व्हाट इज एनईआर? व्हाट इज आरआर?

[06:43:08] कोई कंफ्यूजन है? कोई डाउट है यहां पे?

[06:43:11] नॉमिनल एक्सचेंज रेट, रियल एक्सचेंज रेट,

[06:43:13] जीडीपी एट परचेसिंग पर पैरिटी। क्या ये

[06:43:16] वाले कांसेप्ट आपको समझ आए या नहीं आए?

[06:43:24] ओके ओके ओके ओके ओके।

[06:43:33] अब आएंगे नीर री के ऊपर। अभी तक मैंने

[06:43:36] आपको नीर री नहीं पढ़ाया। अभी तक मैंने

[06:43:39] आपको एनईआर आर इआर पढ़ाया है। अब पढ़ाऊंगा

[06:43:42] नीर री। ये बड़ा ही इंटरेस्टिंग क्वेश्चन

[06:43:45] है और एक्चुअली ना ये क्वेश्चन यूपीएससी

[06:43:48] ने पूछा भी है और पूछना बनता भी है।

[06:43:53] क्यों सर? क्यों पूछना बनता है? क्योंकि

[06:43:55] हमारे फाइनेंस मिनिस्टर आप जानते हैं कौन

[06:43:57] है? निर्मला सीतारमण जी या मैं कह सकता

[06:44:00] हूं श्रीमती निर्मला सीतारमण जी। ठीक है।

[06:44:03] अब क्या है? उन्होंने कई साल पहले एक बयान

[06:44:06] दिया था। पता है आपको कौन सा बयान था?

[06:44:13] पता है आपको?

[06:44:15] पता है आपको कौन सा बयान दिया था?

[06:44:17] उन्होंने एक बयान दिया था कि

[06:44:20] रुपया कमजोर नहीं हुआ। डॉलर मजबूत हो रहा

[06:44:24] है। ठीक है? उन्होंने यहां पे एक बार बयान

[06:44:26] दिया था कई साल पहले कि रुपया कमजोर नहीं

[06:44:30] हो रहा। डॉलर मजबूत हो रहा है। एक प्रेस

[06:44:31] कॉन्फ़ेंस की थी उन्होंने। ठीक है ना? कुछ

[06:44:34] लोग भारत में करते हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस।

[06:44:36] तो हमारी फाइनेंस मिनिस्टर ने एक बार

[06:44:37] प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उसमें उनसे पूछा

[06:44:39] गया था कि रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?

[06:44:40] तो उन्होंने कहा कि भाई रुपया कमजोर नहीं

[06:44:42] हो रहा। डॉलर मजबूत हो रहे हैं। ठीक है?

[06:44:46] अब पॉइंट आता है क्या उनकी बात सच थी या

[06:44:48] गलत थी? समझते हैं इस बात को कि उनकी बात

[06:44:51] सच थी या गलत थी। देखो इसको मैं आपको एक

[06:44:54] एग्जांपल से समझाता हूं ताकि आपको कभी कोई

[06:44:56] दिक्कत ना आए इस चीज को समझने के लिए।

[06:44:58] देखो

[06:45:02] अब जैसे ना मैं आपको समझाता हूं।

[06:45:06] मान लो एक देश है पाकिस्तान।

[06:45:09] ठीक है? अब पाकिस्तान से

[06:45:14] उनके लोगों ने सवाल पूछा कि यार तुम तो

[06:45:17] कितना खराब खेल रहे हो इंडिया के सामने?

[06:45:19] है ना? पाकिस्तान के लोगों ने उनसे सवाल

[06:45:21] पूछा कि कितना खराब खेल के आए हो इंडिया

[06:45:24] के सामने? कितना खराब खेला आप लोगों ने?

[06:45:28] तो पाकिस्तान ने पता है क्या जवाब दिया?

[06:45:30] पाकिस्तान ने कहा कि भाई हमने खराब नहीं

[06:45:33] खेला। इंडिया ने अच्छा खेला है।

[06:45:37] पाकिस्तान को क्रिटिसाइज किया जा रहा था

[06:45:38] कि पाकिस्तान भाई तुम खराब खेल रहे हो।

[06:45:40] पाकिस्तान ने कहा नहीं भाई मैं खराब नहीं

[06:45:42] खेला। इंडिया ने अच्छा खेला।

[06:45:46] अब सवाल आता है कि पाकिस्तान की बात सही

[06:45:48] है या गलत है? ये कैसे प्रूफ करेंगे हम

[06:45:51] लोग? कि इंडिया अच्छा खेला या पाकिस्तान

[06:45:53] खराब खेला? तो पाकिस्तान ने कहा कि भाई

[06:45:56] देखो एक काम करो। एक काम करो आप एक काम

[06:45:59] करो आप आप ना मेरी परफॉर्मेंस सिर्फ

[06:46:02] इंडिया के सामने क्यों चेक कर रहे हो? आप

[06:46:05] यह देखो आप ये देखो कि मैंने श्रीलंका के

[06:46:09] सामने कैसा खेला।

[06:46:12] आप ये देखो कि मैंने साउथ अफ्रीका के

[06:46:15] सामने कैसा खेला। आप ये देखो कि मैंने

[06:46:17] न्यूजीलैंड के सामने कैसा खेला। तो आप ये

[06:46:19] देखो कि आप और जो बाकी देश हैं आप

[06:46:20] ऑस्ट्रेलिया के सामने देखो और ऐसे ही जैसे

[06:46:23] कल रात को नेपाल भी जीत गया तो आप मेरी

[06:46:25] परफॉर्मेंस नेपाल के सामने भी देखो।

[06:46:30] ओके ओके ओके अब देखो अगर अगर अगर ऐसा निकल

[06:46:34] के आए अगर ऐसा निकल के आए कि पाकिस्तान ने

[06:46:39] इन सबको मिलाकर खराब खेला तो भाई

[06:46:42] पाकिस्तान की ही गलती है। अगर पाकिस्तान

[06:46:45] की परफॉर्मेंस हम इन सबके साथ कंपैरिजन

[06:46:47] करें और तब भी पाकिस्तान की परफॉर्मेंस

[06:46:49] खराब आए ना तो इसका मतलब पाकिस्तान खराब

[06:46:52] खेला। बट अगर ऐसा हो अगर ऐसा हो कि यार

[06:46:58] पाकिस्तान ने मतलब इंडिया ने अच्छा खेला,

[06:47:01] नेपाल ने ठीक-ठाक खेला। पाकिस्तान के

[06:47:03] सामने, श्रीलंका ने भी ठीक-ठाक खेला, साउथ

[06:47:06] अफ्रीका ने भी ठीक-ठाक खेला। तो हम पता

[06:47:08] फिर पाकिस्तान को दोष नहीं देंगे। फिर हम

[06:47:10] ये बोल सकते हैं कि इंडिया ने अच्छा खेला।

[06:47:13] है ना? अगर ऐसा निकल के आए कि पाकिस्तान

[06:47:15] ने बाकी सबके मुकाबले ठीक-ठाक खेला। बस

[06:47:18] इंडिया के साथ मतलब इंडिया ने अच्छा खेल

[06:47:20] लिया। तो हम ये बोल सकते हैं। पर अगर ऐसा

[06:47:22] निकल के आए कि पाकिस्तान ने सबके साथ ही

[06:47:24] खराब खेला है तो हम फिर पाकिस्तान को ही

[06:47:27] बोलेंगे कि भाई तुम ही गलत खेल रहे हो।

[06:47:29] समझे मेरी बात को? तो हम लोग भी यहां रुपी

[06:47:32] के सामने यही बात करते हैं। अब रुपी ने

[06:47:35] यहां रुपी है हमारा बेचारा और यहां पे

[06:47:37] डॉलर है।

[06:47:39] अब रुपया कमजोर होता जा रहा है। कमजोर

[06:47:41] होता जा रहा है। कमजोर होता जा रहा है।

[06:47:43] ठीक है? आप रुपी को डांट रहे हो कि भाई

[06:47:46] तुम कमजोर हो रहे हो। तो रुपी क्या

[06:47:47] बोलेगा? रूपी बोलेगा भाई देखो मैं कमजोर

[06:47:50] नहीं हो रहा। ये तो डॉलर मजबूत हो रहा है।

[06:47:53] तो कैसे पता लगेगा कौन सच बोल रहा है? कौन

[06:47:55] झूठ बोल रहा है? तो रूपी ने बोला भाई तुम

[06:47:58] मुझे सिर्फ डॉलर के साथ क्यों कंपैरिजन कर

[06:47:59] रहे हो? आप मुझे भी और करेंसीज के साथ

[06:48:03] कंपैरिजन करो। पॉइंट आता है कौन सी

[06:48:05] करेंसीज? जैसे ये कुछ करेंसीज हैं। रूपी

[06:48:08] ने कहा भाई मुझे आप डॉलर के साथ कंपैरिजन

[06:48:10] करो। आप यूरो के साथ भी करो। चाइनीस रेनवी

[06:48:12] के साथ भी करो। यन के साथ भी करो।

[06:48:13] हांगकांग डॉलर के साथ भी करो। ब्रिटिश

[06:48:15] पाउंड के साथ भी करो। अगर अगर यह निकल के

[06:48:18] आए ना कि मैंने सबके सामने बुरा परफॉर्म

[06:48:21] किया है। फिर आप मुझे बोल देना कि रुपया

[06:48:22] कमजोर हो रहा है। पर अगर यह निकल के आए ना

[06:48:25] कि मैं बाकियों के सामने कमजोर नहीं हुआ।

[06:48:27] सिर्फ अब डॉलर के सामने कमजोर हुआ। फिर आप

[06:48:28] मुझे यह मत कहना कि रुपया कमजोर हुआ है।

[06:48:30] फिर आप यह बोलना कि डॉलर मजबूत हुआ है।

[06:48:32] समझे मेरी बात को? एक इंसान को देख के

[06:48:35] आपने मेरे करैक्टर पे शक कर लिया। डॉलर को

[06:48:37] देख के। रुपया बेचारा यह बोल रहा है। ऐसे

[06:48:39] थोड़ी करेंगे। आप सबके साथ कंपैरिजन करो

[06:48:41] मेरा। तब जाके आप मुझे बताओ कि मैं कमजोर

[06:48:44] हूं या मजबूत हूं। तो आपने रुपए की वैल्यू

[06:48:46] सिर्फ एक के साथ नहीं एक बास्केट ऑफ

[06:48:49] करेंसी के साथ देखी और उस बास्केट में भी

[06:48:51] हमने सबको वेट अलग-अलग दिया। हम डॉलर के

[06:48:53] साथ ज्यादा ट्रेड करते हैं तो डॉलर को

[06:48:55] ज्यादाेंस दे दो। इसके साथ थोड़ी कम करते

[06:48:57] हैं तो इसको कमेंस दो। तो हर किसी को हमने

[06:48:59] अलग-अलग वेट दिया। अब करेंसीज भी देख सकते

[06:49:02] हो। आपको छह करेंसीज देखनी है। छह देख लो।

[06:49:04] एक बड़ी बास्केट के सामने देखनी है तो 40

[06:49:06] करेंसीज ले लेना। तो उससे एक आईडिया मिल

[06:49:10] जाएगा कि रुपया कमजोर हो रहा है या नहीं

[06:49:12] हो रहा। रुपए की वैल्यू कम हुई या नहीं

[06:49:13] हुई। अगर रुपए की वैल्यू कम हुई होगी ना

[06:49:16] वो इन सबके साथ में कम हुई ओवरऑल वैल्यू

[06:49:18] के साथ तो उससे एक आईडिया मिल जाता है कि

[06:49:20] रुपया वाकई में डेप्रिशिएट हो रहा है या

[06:49:21] नहीं हो रहा। समझे मेरी बात को? हां सर।

[06:49:24] ठीक है। ठीक है। तो नीर है क्या सर? नीर

[06:49:27] इज़ अ मेजर ऑफ़ वैल्यू ऑफ़ करेंसी। एक करेंसी

[06:49:30] की कीमत अगेंस्ट वेटेड एवरेज। व्हाट इज़

[06:49:33] वेटेड एवरेज? एक का कंपैरिजन बाकी करेंसी

[06:49:36] के साथ करना। उनके वेट के हिसाब से। किसी

[06:49:38] को ज्यादा वेट देना, किसी को कम वेट देना।

[06:49:40] अगेंस्ट वेटेड एवरेज ऑफ़ अदर फॉरेन करेंसी।

[06:49:42] इंडिया में छह करेंसी के साथ भी कंपैरिजन

[06:49:44] होता है, 40 करेंसी के साथ भी कंपैरिजन

[06:49:46] होता है। तो पॉइंट ये आता है कि सर फिर जो

[06:49:48] हमारी फाइनेंस मिनिस्टर श्रीमती निर्मा

[06:49:50] सीतारमन जी ने बोली थी बात क्या वो बात

[06:49:52] सही थी या गलत थी? आंसर इज़ कुछ हद तक सही

[06:49:54] थी, कुछ हद तक गलत थी। मतलब उस टाइम जो

[06:49:57] रुपया कमजोर हुआ था ना उसमें एक कारण यह

[06:50:00] भी था कि डॉलर ने अच्छा खेला और कुछ कारण

[06:50:03] यह भी था कि रुपया भी अपने आप में कमजोर

[06:50:06] हुआ था। तो दोनों कारण थे उस टाइम। रुपया

[06:50:08] भी कमजोर हो रहा था। डॉलर भी मजबूत हो रहा

[06:50:10] था। इसीलिए रुपया काफी तेजी से नीचे गिर

[06:50:12] रहा था। समझे मेरी बात को? तो बस आपको

[06:50:15] ध्यान ये रखना है कि अगर नीर बढ़ता है ना

[06:50:18] इसका मतलब पता है क्या है? रुपया मजबूत

[06:50:20] हुआ। रुपया मजबूत होने का मतलब क्या होता

[06:50:22] है? वो हमें पता है। रुपए मजबूत होने का

[06:50:25] इंपैक्ट क्या होता है? वो भी हमें पता है।

[06:50:26] ऑन द अदर हैंड अगर नीर कम हुआ इसका मतलब

[06:50:29] होता है आपका रुपया डेप्रिशिएट हुआ। रुपया

[06:50:31] डेप्रिशिएट होने का क्या इंपैक्ट आता है?

[06:50:32] वो भी हमें पता है भाई। रुपया डेप्रिशिएट

[06:50:34] होगा हमारे एक्सपोर्ट बढ़ेंगे। रुपया

[06:50:37] डेप्रिशिएट होने का मतलब हमारे एक्सपोर्ट

[06:50:38] बढ़ेंगे क्योंकि रुपया कमजोर हो रहे हैं।

[06:50:41] ठीक है ना? ओके। ओके सर। ओके। ओके। अच्छा

[06:50:43] एक चीज और सर एक था एन डबल ईआर एक है आर

[06:50:47] डबल ईआर। ये आर क्या आ गया? अब अरे भाई

[06:50:49] एनईआर और आरईआर समझ आया था? नॉमिनल

[06:50:51] एक्सचेंज रेट और रियल एक्सचेंज रेट में

[06:50:53] क्या अंतर था? सर आपने प्राइस उनका

[06:50:54] इंक्लूड कर दिया था। जब प्राइस इफ़ेक्ट भी

[06:50:57] देखने लगे थे यूएस और इंडिया का तो नॉमिनल

[06:50:59] से हम रियल पे आ गए थे। तो यही सेम बात

[06:51:01] है। तो नॉमिनल और रियल में यहां इतना ही

[06:51:03] अंतर है कि आपने प्राइस भी देखने लगे

[06:51:05] देशों के। तो ध्यान क्या रखना है? ध्यान

[06:51:07] ये रखना है चाहे नीर बढ़े चाहे रीर बढ़े

[06:51:10] इसका मतलब है रुपया मजबूत हो रहा है। और

[06:51:12] अगर नीर कम हो या रीर कम हो इसका मतलब

[06:51:15] रुपया कमजोर हो रहा है। समझे मेरी बात?

[06:51:18] समझे मेरी बात? नीर है नॉमिनल इफेक्टिव

[06:51:21] एक्सचेंज रेट। ये ई वर्ड आ गया इफेक्टिव।

[06:51:23] नॉमिनल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट। और री क्या

[06:51:25] है? रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट।

[06:51:29] ठीक है?

[06:51:41] कोई डाउट कोई कंफ्यूजन है यहां पे किसी को

[06:51:54] ठीक है।

[06:52:02] तो इस पर क्वेश्चन आया था। अब आप लोग

[06:52:04] ट्राई करना। मैं आज क्वेश्चन नहीं ला पाया

[06:52:06] यहां पे आपके सामने। ठीक है ना? वो

[06:52:08] क्वेश्चन यहां पे है नहीं। पर इसके ऊपर आई

[06:52:10] थिंक 2000

[06:52:13] 2022 में शायद क्वेश्चन आया था इसके ऊपर।

[06:52:15] ठीक है? शायद यहां पे 2022 में एक

[06:52:17] क्वेश्चन आया था। आप एक बार ट्राई करना।

[06:52:19] आप दे बताना मुझे हुआ आपसे या नहीं हुआ।

[06:52:22] ठीक है? आप मुझे बताना हुआ या नहीं हुआ

[06:52:24] आपसे वो क्वेश्चन।

[06:52:27] हां।

[06:52:28] ठीक है? अच्छा एक टॉपिक हमें और पढ़ना है

[06:52:30] यहां पे एक्सटर्नल सेक्टर के अंदर ही वो

[06:52:33] है आपका स्टेजेस ऑफ ट्रेड इंटीग्रेशन।

[06:52:36] क्या है? स्टेजेस ऑफ ट्रेड इंटीग्रेशन।

[06:52:54] ओके। क्या होता है स्टेजेस ऑफ ट्रेड

[06:52:56] इंटीग्रेशन?

[06:52:59] देखो, मान लो देश हैं। वो आपस में अपना

[06:53:03] रिश्ता बेहतर करना चाहते हैं। ठीक है? तो

[06:53:06] उनके अलग-अलग स्टेजेस होती हैं ट्रेड को

[06:53:09] बेहतर करने की। जैसे पहला स्टेज हमें यहां

[06:53:13] पे देखने को मिलता है पीटीए। व्हाट इज़

[06:53:15] पीटीए? प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट।

[06:53:20] क्या है ये? प्रेफरेंशियल ट्रेड

[06:53:21] एग्रीमेंट।

[06:53:23] ओके?

[06:53:24] यहां पर मान लो दो देश आए। उन्होंने एक

[06:53:31] पॉजिटिव लिस्ट मेंटेन कर ली। ये वर्ड

[06:53:34] सुनना यहां पे। ये वर्ड सुनना यहां पे

[06:53:37] पॉजिटिव लिस्ट। व्हाट डू मीन बाय दिस

[06:53:39] टर्म? पॉजिटिव लिस्ट। पॉजिटिव लिस्ट का

[06:53:42] मतलब क्या होता है? देखो दो देश आए।

[06:53:45] उन्होंने यहां पे एक कागज लिया। ठीक है?

[06:53:47] उस कागज के ऊपर एक आइटम्स की लिस्ट बना

[06:53:49] दी। बहुत सारे आइटम्स थे उसके मान लो 50

[06:53:52] आइटम्स थे। तो उन्होंने कहा कि यार हम एक

[06:53:54] काम करेंगे इन सभी 50 आइटम्स के लिए हम

[06:53:58] ड्यूटी कम कर देंगे। जो भी 50 आइटम्स उस

[06:54:01] लिस्ट पे होंगी ना इन सबके लिए हम ड्यूटी

[06:54:03] कम कर देंगे। बाकियों के लिए नहीं करेंगे

[06:54:05] कम। बस इन 50 के लिए करेंगे। तो ये एक

[06:54:08] बेसिक लेवल ऑफ़ आपका आपस में ट्रेड

[06:54:11] इंटीग्रेट हो गया। सिर्फ उस लिस्ट में जो

[06:54:13] आइटम्स लिखी हुई है, सिर्फ उनके लिए

[06:54:14] ड्यूटी कम करी जा रही है। बाकियों के लिए

[06:54:16] नहीं। यह पहला लेवल है प्रेफरेंशियल ट्रेड

[06:54:19] एग्रीमेंट। फिर

[06:54:22] अगला लेवल आता है उसको बोलते हैं हम प्री

[06:54:24] ट्रेड एग्रीमेंट जिसको हम एफटीए बोलते

[06:54:26] हैं। अब एफटीए में पता है क्या होता है?

[06:54:28] एफटीए में आप मेंटेन करते हो अपनी नेगेटिव

[06:54:31] लिस्ट।

[06:54:33] सवाल आता है नेगेटिव लिस्ट का मतलब क्या?

[06:54:35] आपने एक लिस्ट ली छोटी सी। आपने 20 आइटम

[06:54:38] डाल दिए। आपने कहा भाई यार ये 20 आइटम्स

[06:54:41] के लिए हम ड्यूटी कम नहीं करेंगे। बाकी

[06:54:44] सभी के लिए कम कर देंगे। आप समझ पाए मेरी

[06:54:47] बात? पॉजिटिव लिस्ट में क्या था? जो आइटम

[06:54:50] कागज पर लिखी हैं सिर्फ उनके लिए कम होगा

[06:54:52] बाकियों के लिए कम नहीं होगा। नेगेटिव

[06:54:54] लिस्ट में क्या होगा? सबके लिए कम कर

[06:54:56] देंगे एक्सेप्ट अ फ्यू आइटम्स। तो नेगेटिव

[06:55:00] लिस्ट अपने आप में ज्यादा आपको

[06:55:02] कॉम्प्रिहेंसिव आपको देखने को मिल जाती

[06:55:04] है।

[06:55:06] ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ओके। तो

[06:55:10] यह हो गया हमारा एफटीए।

[06:55:14] ठीक है। फिर तीसरा आता है आपका तीसरा लेवल

[06:55:17] आता है सेसापा।

[06:55:19] सबसे क्या होता है? कॉम्प्रिहेंसिव

[06:55:21] इकोनॉमिक। मैं यहां लिख देता हूं।

[06:55:27] कॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक

[06:55:32] कोऑपरेशन एग्रीमेंट।

[06:55:36] और सेपा का मतलब होता है पार्टनरशिप

[06:55:38] एग्रीमेंट। सेपा में क्या होता है?

[06:55:41] कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप

[06:55:43] एग्रीमेंट।

[06:55:45] ठीक है? एक है आपका कॉम्प्रिहेंसिव

[06:55:47] इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट एक है आपका

[06:55:49] कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप

[06:55:51] एग्रीमेंट

[06:55:56] ठीक है ठीक है ठीक है

[06:55:58] अब यहां पे पहली बात देखो सेसा में क्या

[06:56:01] होता है कॉम्प्रिहेंसिव इकोनमिक कॉपोरेशन

[06:56:03] एग्रीमेंट में इसमें देखो गुड्स के अलावा

[06:56:06] आप सर्विसेस

[06:56:09] आप इन्वेस्टमेंट

[06:56:12] इन सब को भी आप यहां पे देखने लग जाते हो

[06:56:15] इन सब में भी ट्रेड आसानी से होने लग जाता

[06:56:18] है। ठीक है? जो यहां पे सेपा है ना सेपा

[06:56:22] कॉम्प्रहेंसिव इकोनमिक पार्टनरशिप

[06:56:24] एग्रीमेंट ये थोड़ा और भी बड़ा हो जाता है

[06:56:26] उससे। ये सब तो है ही है। गुड सर्विस

[06:56:28] इन्वेस्टमेंट तो है ही है। पर आपके जैसे

[06:56:30] पेटेंट वगैरह हो गया। उसके रिगार्डिंग लॉज़

[06:56:32] वगैरह है, आईपीआर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी

[06:56:33] राइट्स हैं या डिस्प्यूट सेटलमेंट हो गया।

[06:56:35] कैसे अपने झगड़ों को सॉल्व करना है। तो ये

[06:56:37] सब भी इसमें इंक्लूड होने लग जाता है कि

[06:56:39] दोनों देशों ने आपस में इंटीग्रेशन और भी

[06:56:41] बढ़ा लिया। तो लेवल्स हैं ये। ठीक है? तो

[06:56:44] सेसा में आपके गुड्स सर्विस इन्वेस्टमेंट

[06:56:46] ये सब भी आ गया। सेपा उससे भी आगे चला गया

[06:56:49] आपका एक तरह से उसमें आपने इंटेलेक्चुअल

[06:56:50] प्रॉपर्टी राइट्स आपने डिस्प्यूट्स

[06:56:52] मैकेनिज्म ये सब चीजें भी आपने इंक्लूड कर

[06:56:55] ली।

[06:56:58] ये लेवल बढ़ते जा रहे हैं। पहला लेवल ये

[06:57:00] फिर ये फिर ये फिर ये ऐसे लेवल इंप्रूव

[06:57:02] होते जा रहे हैं। ठीक है? इसके ऊपर वाला

[06:57:05] लेवल होता है आपका कस्टम यूनियन। देखो

[06:57:07] कस्टम यूनियन बड़ा ही शानदार है। कस्टम

[06:57:10] यूनियन के अंदर आपको एक वर्ड याद रखना है।

[06:57:14] कस्टम यूनियन के अंदर आपको एक वर्ड याद

[06:57:16] रखना है।

[06:57:19] ठीक है? इसमें वर्ड क्या होता है? कस्टम

[06:57:21] यूनियन में एक वर्ड जो आपको याद रखना है

[06:57:23] वो है

[06:57:27] ज़ीरो टेरिफ इंटरनली।

[06:57:33] ज़ीरो

[06:57:35] या ऐसे लिख लो। ज़ीरो ड्यूटी अमंग

[06:57:37] देमसेल्व्स। ज़ीरो ड्यूटी अमंग देमसेल्व्स।

[06:57:46] प्लस कॉमन एक्सटर्नल टेररिफ।

[06:57:52] ज़ीरो ड्यूटी अमंग देमसेल्व्स प्लस कॉमन

[06:57:55] एक्सटर्नल टेररिफ। लेट अस ट्राई एंड

[06:57:58] अंडरस्टैंड दिस मीनिंग कि आखिर इसका मतलब

[06:58:00] क्या है कस्टम यूनियन का? यह काफी

[06:58:02] स्टूडेंट्स को दिक्कत देता है। तो मैं

[06:58:04] आपको एक एग्जांपल के माध्यम से आपको यह

[06:58:05] समझाना चाहूंगा कि कस्टम यूनियन है क्या?

[06:58:12] देखो एक ना साउथ अफ्रीका कॉन्टिनेंट जो है

[06:58:16] ना सदर्न अफ्रीका की बात कर रहा हूं वहां

[06:58:18] पर पांच देशों ने एसएसीयू बना रखा है।

[06:58:23] व्हाट इज एसएसीयू?

[06:58:26] साउथ अफ्रीकन

[06:58:29] कस्टम यूनियन।

[06:58:31] ठीक है? समझ लेंगे एग्जांपल के थ्रू। यहां

[06:58:33] पे पांच देश हैं। मान लो 1 2 3 4 5 ऐसे

[06:58:37] पांच देश हैं। इन्होंने एक कस्टम यूनिट

[06:58:39] बना रखा है।

[06:58:41] मैं इनके नाम भी आपको बता देता हूं। जैसे

[06:58:43] इन पांचों में एक है आपका बोत्सवाना

[06:58:48] इस्वातनी,

[06:58:51] एक है लिसोथो,

[06:58:54] नमीबिया,

[06:58:57] और साउथ अफ्रीका।

[06:59:00] यह पांच देशों ने अपने आप में एक कस्टम

[06:59:03] यूनियन बना रखा है। साउथ अफ्रीकन कस्टम

[06:59:05] यूनियन। अब पता है क्या होता है? समझना।

[06:59:08] मैंने यहां वर्ड इस्तेमाल क्या किया?

[06:59:10] मैंने इसमें वर्ड इस्तेमाल किया जीरो

[06:59:12] ड्यूटी अमंग देमसेल्व्स

[06:59:23] प्लस

[06:59:25] कॉमन एक्सटर्नल टेरिफ। ये होता है कस्टम।

[06:59:28] समझाता हूं मैं क्या मीनिंग है इसका।

[06:59:34] देखो मान लो यहां पर इंडिया है।

[06:59:38] ठीक है? ठीक है? यहां पे इंडिया है। अब

[06:59:42] देखो यार अगर इंडिया को ना पहली बात तो

[06:59:45] इधर देखो। अगर यहां पे कोई देश हैं। ये

[06:59:48] पांच देश है ना अगर इनको आपस में ट्रेड

[06:59:51] करना है तो ज़ीरो ड्यूटी। आपस में किसी को

[06:59:53] भी किसी को कुछ भेजना है तो ज़ीरो ड्यूटी

[06:59:55] लगेगी। इसका मतलब है ज़ीरो ड्यूटी अमंग

[06:59:57] दैटसेल्फ। यह आपस में ट्रेड कर रहे हैं

[06:59:59] ना, तो ज़ीरो ड्यूटी पे कर रहे हैं। ठीक

[07:00:01] है? कॉमन एक्सटर्नल टेरिफ़ का मतलब क्या?

[07:00:04] समझना। अगर मान लो इंडिया को इस पहले देश

[07:00:07] कुछ भेजना है ना, तो कुछ मान लो 10%

[07:00:09] ड्यूटी लग रही है। मान लो। मान लो 10%

[07:00:11] ड्यूटी है। ठीक है? अगर भारत को सेम

[07:00:13] प्रोडक्ट यहां भेजना है तो यहां भी 10%

[07:00:15] ड्यूटी। अगर तीसरे देश भेजना है यहां भी

[07:00:16] 10%। चौथे देश भेजना है यहां भी 10% और

[07:00:18] पांचवें देश भेजना है यहां भी 10%।

[07:00:21] कॉमन एक्सटर्नल टेरिफ। बाहर के देशों के

[07:00:24] लिए सेम टेररिफ़ रहेगा। जो यहां पे टेरिफ़

[07:00:27] है वही यहां पे, वही यहां पे, वही यहां

[07:00:28] पे, वही यहां पे। भारत देश को लगेगा एक ही

[07:00:31] देश के साथ ट्रेड कर रहा हूं। है ये पांच

[07:00:33] देश आपस में जीरो ड्यूटी। एक्सटर्नल वाले

[07:00:36] देशों के लिए कॉमन टेरिफ। इसको हम बोलते

[07:00:38] हैं क्या? इसको हम बोलते हैं आपका।

[07:00:41] इसको हम बोलते हैं क्या? कस्टम यूनियन।

[07:00:46] ठीक है?

[07:00:48] ठीक है। ओके। ओके। ओके। इसके बाद आ जाएगा

[07:00:51] आपका कॉमन मार्केट। इसके बाद क्या आ जाएगा

[07:00:54] आपका? कॉमन मार्केट। कॉमन मार्केट में

[07:00:57] क्या होता है? कॉमन मार्केट में एक चीज और

[07:00:59] ऐड हो जाती है। देखो ये लेवल बढ़ते जा रहे

[07:01:01] हैं। पहले पीटीए था, फिर एफटीए फिर से

[07:01:02] ससपा फिर कस्टम यूनियन फिर आ गया आपका

[07:01:04] कॉमन मार्केट आ गया। कॉमन मार्केट में

[07:01:06] क्या होगा? बाकी सारी चीजें तो होंगी

[07:01:08] होंगी। बाकी सारी चीजें तो होंगी होंगी।

[07:01:10] कॉमन मार्केट के अंदर आपका लेबर और जो

[07:01:14] कैपिटल की मूवमेंट है वो बहुत इजी हो

[07:01:16] जाएगी

[07:01:19] कि इंसान एक दूसरे से देश से दूसरे देश

[07:01:21] आराम से जा सकते हो। कैपिटल का मूवमेंट भी

[07:01:24] बहुत आराम से हो जाएगा। आप लोगों ने जैसे

[07:01:26] यूरोपियन यूनियन सुना होगा। यूरोपियन

[07:01:28] यूनियन में आपका शैंज़न वीजा होता है। एक

[07:01:31] शज़न वीजा के ऊपर आप मल्टीपल देश आराम से

[07:01:33] जा सकते हो। ऐसे और बहुत सारे वीजा वगैरह

[07:01:35] होते हैं तो लोगों का मूवमेंट, कैपिटल का

[07:01:37] मूवमेंट बहुत आराम से होने लग जाता है।

[07:01:39] उसको हम बोलते हैं आपका कॉमन मार्केट।

[07:01:41] उसके ऊपर आपका आ जाता है आपका इकोनॉमिक

[07:01:43] मार्केट या इकोनमिक यूनियन भी आप कह सकते

[07:01:45] हो। यहां पर आपकी पॉलिसीज में

[07:01:47] हार्मोनाइजेशन आ जाने लगता है। क्या आने

[07:01:49] लग जाता है? पॉलिसीज में। जैसे फॉर

[07:01:51] एग्जांपल

[07:01:53] यूरोपियन में यूरोपियन यूनियन में क्या

[07:01:54] होता है? उनका खुद का यूरोपियन सेंट्रल

[07:01:56] बैंक है। जैसे भारत का आरबीआई ना यूरोपियन

[07:01:59] सेंट्रल बैंक। यूरोप देश के लिए जो

[07:02:00] पॉलिसीज हैं मॉनिटरी पॉलिसीज वो वो बना

[07:02:02] रहा है। तो आपने अपनी नीतियां भी अपने एक

[07:02:04] दूसरे के साथ मिलके बनाने लग गए हो आप

[07:02:06] यहां पे। तो यहां पर पता है क्या हुआ?

[07:02:08] लेवल ऑफ इंटीग्रेशन आपको यहां पे बढ़ता

[07:02:09] हुआ देखने को मिल जाएगा। पीटीए, एफटीए,

[07:02:12] ससपा, कस्टम यूनियन, कॉमन मार्केट और आपका

[07:02:14] इकोनॉमिक यूनियन।

[07:02:17] ये है डिफरेंट स्टेजेस ऑफ

[07:02:20] डिफरेंट स्टेजेस ऑफ

[07:02:23] ट्रेड इंटीग्रेशन।

[07:02:33] यस

[07:02:36] कोई कंफ्यूजन है कोई डाउट है यहां पे आप

[07:02:38] लोगों को किसी को तो पहले ये बताओ

[07:02:43] हम

[07:02:50] क्लियर है यहां पे

[07:02:57] ठीक है। ठीक है। ठीक है। तो दोस्तों, अब

[07:03:00] हम एक्सटर्नल सेक्टर कंप्लीट कर चुके हैं।

[07:03:03] अब हम आ रहे हैं अपने अगले टॉपिक पे व्हिच

[07:03:05] इज़ कॉल्ड एज दी मॉनिटरी पॉलिसी। अब इस

[07:03:07] टॉपिक को हमें पढ़ना है कि आखिर मॉनिटरी

[07:03:09] पॉलिसी क्या होती है? और देखो, यहां से तो

[07:03:11] बहुत क्वेश्चंस आते हैं। आप सबको पता ही

[07:03:12] है। है ना? मॉनिटरी पॉलिसी सबसेेंट टॉपिक

[07:03:15] आपको देखने को मिलता ही है। काफी सारे

[07:03:16] क्वेश्चन आएंगे यहां से। तो। तो, हमारी जो

[07:03:18] आरबीआई की पॉलिसी होती है, है ना? जो

[07:03:20] हमारा सेंट्रल बैंक है वो जो पॉलिसी बनाता

[07:03:22] है उसको हम बोलते हैं मॉनिटरी पॉलिसी। तो

[07:03:24] रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर,

[07:03:26] एसएलआर ये सारी बातें आपको यहां पे मॉनटरी

[07:03:28] पॉलिसी में देखने को मिलेंगी।

[07:03:30] ठीक है? ठीक है? ओके। ओके। कहां से किया

[07:03:34] है फाउंडेशन आपने रश्मिका?

[07:03:36] अब बिफोर मैं आपको एक-एक पॉइंट समझाऊं।

[07:03:40] आपको पहले एक छोटा सा यहां पे टेबल है।

[07:03:43] आपको वो टेबल फिल करना है एक बार।

[07:03:46] ये है आपका टेबल। देखो पहले मैं समझाता

[07:03:49] हूं कि आपको फिल क्या करना है। करोगे आप

[07:03:52] फिर मैं आपको एक्सप्लेन करूंगा पर कोशिश

[07:03:53] पहले आप करोगे। देखो प्लीज सुनना मेरी बात

[07:03:56] को। एक होता है हॉकिश पॉलिसी।

[07:03:59] देखो मॉनिटरी पॉलिसी है ना देखो मेरी बात

[07:04:01] ध्यान से सुनना। मॉनिटरी पॉलिसी का

[07:04:03] ऑब्जेक्टिव क्या है? आरबीआई का काम क्या

[07:04:05] है? सर आरबीआई का सबसेेंट काम है इनफ्लेशन

[07:04:08] कंट्रोल में रहे। सर कितनी कंट्रोल में

[07:04:10] रहे? अरे भाई सुबह बताया था 4 + - 2% अब

[07:04:12] शाम हो गई है। सुबह बताया था। भूल गए

[07:04:14] होंगे कुछ लोग। 4 + - 2% हमारा इनफ्लेशन

[07:04:17] होनी चाहिए। एमपीसी जो हमने देखा था ना

[07:04:18] मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी उसका काम रहता है।

[07:04:21] ठीक है? आरबीआई का काम ये है कि इनफ्लेशन

[07:04:23] कंट्रोल में रहे वाइल प्रमोटिंग ग्रोथ एंड

[07:04:26] एंप्लॉयमेंट। ग्रोथ बढ़े, रोजगार बढ़े वो सब

[07:04:28] भी हो पर मेन काम है प्राइस स्टेबिलिटी

[07:04:30] का। ठीक है? अब आरबीआई पता है क्या कर

[07:04:33] सकता है? आरबीआई के पास अलग-अलग टूल्स

[07:04:35] हैं। रेपो रेट है, सीआरआर, एसएलआर बहुत

[07:04:37] सारी चीजें हैं। अब अगर उसका फोकस है

[07:04:41] ग्रोथ बढ़ाने के ऊपर। अगर आरबीआई चाहता है,

[07:04:43] नहीं यार ग्रोथ पे काम करो। ग्रोथ बढ़ाओ।

[07:04:46] ग्रोथ बढ़ाने के लिए आरबीआई क्या फॉलो

[07:04:49] करता है? आरबीआई एक्सपेंशनरी पॉलिसी

[07:04:51] अडॉप्ट करता है। क्या अडॉप्ट करता है?

[07:04:53] एक्सपेंशनरी मॉनिटरी पॉलिसी। इसको आप लोग

[07:04:56] एक्सपेंशनरी मॉनिटरी पॉलिसी या डोबिश

[07:04:58] पॉलिसी भी आप बोल सकते हो। पर यहां पर

[07:05:00] क्या होगा? ग्रोथ बढ़ेगी। देखो जबजब ग्रोथ

[07:05:03] बढ़ती है ना एक बात समझना यहां पे। जब-जब

[07:05:06] ग्रोथ बढ़ती है, ग्रोथ तो आएगी इकॉनमी की।

[07:05:09] बिल्कुल कोई डाउट की बात नहीं है। बट साथ

[07:05:11] ही साथ आपके यहां पे महंगाई भी बढ़ेगी साथ

[07:05:13] में। इनफ्लेशन भी इनक्रीस होगा। जब ग्रोथ

[07:05:15] बढ़ेगी तो महंगाई भी साथ में आती है। ऑन द

[07:05:18] अदर हैंड एक होता है आपका कंट्रक्शनरी

[07:05:19] मॉनिटरी पॉलिसी। कॉन्ट्रक्शनरी में क्या

[07:05:21] होता है? कॉन्ट्रक्शनरी में उल्टा होता

[07:05:23] है। जैसे मान लो आरबीआई का फोकस है कि

[07:05:25] नहीं यार इनफ्लेशन को कंट्रोल करना है।

[07:05:27] महंगाई हमें कंट्रोल में रखनी है। तो वहां

[07:05:30] पर आरबीआई क्या बोलेगा? फॉलो करेगा

[07:05:31] कॉन्ट्रक्शनरी मॉनिटरी पॉलिसी या जिसको आप

[07:05:33] लोग हॉकिश पॉलिसी बोल सकते हो। तो इसमें

[07:05:35] क्या होगा? हॉकिश पॉलिसी में आपकी

[07:05:38] इनफ्लेशन तो कंट्रोल हो जाएगी।

[07:05:41] इनफ्लेशन तो कम हो जाएगी बट एट द सेम टाइम

[07:05:43] आपकी थोड़ी ग्रोथ भी यहां पर हैंपर हो

[07:05:45] सकती है। समझे मेरी बात को? समझे मेरी बात

[07:05:49] को? अब एक काम करो। आप इस टेबल को फिल

[07:05:53] करने की कोशिश करो। आपको बताना है कि

[07:05:55] हॉकिश पॉलिसी है तो बैंक इंटरेस्ट रेट

[07:05:58] क्या होते हैं? बढ़ते हैं या कम होते हैं?

[07:05:59] मनी सप्लाई क्या होती है? बढ़ती है, कम

[07:06:01] होती है? इनफ्लेशन क्या होती है? बढ़ती

[07:06:03] है, कम होती है? इंटरेस्ट रेट क्या होते

[07:06:05] हैं? बढ़ते हैं या कम होते हैं? हर एक चीज

[07:06:06] को फिल करो। टेक वन टू 2 मिनट्स एंड सॉल्व

[07:06:09] दिस। उसके बाद हम करेंगे ब्रेक लेंगे। पर

[07:06:12] पहले आप यहां पे टेबल से इस टेबल को फिल

[07:06:15] करेंगे।

[07:06:36] पहले टेबल फिल करेंगे। उसके बाद ब्रेक

[07:06:56] आप हॉकिश का फिल कर लो। आप यह वाला फिल कर

[07:06:59] लो। अगर यह फिल हो जाएगा तो वह उसका उल्टा

[07:07:01] ही है।

[07:08:28] सारे भरो भाई सारे लिखो क्या-क्या आएगा

[07:08:30] सबका लिखो

[07:08:40] सबका। हां जी।

[07:08:43] सबका लिखो सबका। हां जी।

[07:08:43] कुछ बच्चे छोड़-छोड़ के जाने लग जाते हैं।

[07:08:45] एक तो कुछ काम दे दो

[07:08:47] तो कह नहीं हमें नहीं काम करना। सर आप ही

[07:08:49] बताओ। अरे भाई एग्जाम में आपको दिमाग

[07:08:52] चलाना पड़ेगा। एग्जाम में आपको दिमाग

[07:08:55] चलाना पड़ेगा थोड़ा। ठीक है ना?

[07:08:58] ठीक है?

[07:09:00] देखो एक बात याद रखना। मैं बातें थोड़ी

[07:09:03] कड़वी बोलता हूं पर सच्ची बातें बोलता

[07:09:06] हूं। आपको मेरी बातें बुरी लग सकती हैं पर

[07:09:08] आपके फायदे के लिए हैं। यह बात ध्यान

[07:09:10] रखना। ठीक है? वरना मीठी-मीठी बातें करने

[07:09:12] वाले बहुत लोग हैं दुनिया में। पर अभी

[07:09:15] आपको बातें मीठी लगेंगी। 5 साल बाद नहीं

[07:09:17] ना मीठी लगेंगी। तो इसीलिए अभी से आप लोग

[07:09:20] काम करना स्टार्ट करो सही ढंग से।

[07:09:33] चलो ट्राई करते हैं इसको। ट्राई करते हैं।

[07:09:36] ठीक है? ट्राई करते हैं। ट्राई करते हैं।

[07:09:41] चलो आ जाओ आ जाओ।

[07:09:45] देखो यहां टेबल बना हुआ है पूरा। पूरा

[07:09:48] टेबल बना हुआ है। ठीक है? हां। करते हैं

[07:09:51] ट्राई। देखो पहली चीज़ देखो यार। साफ-साफ

[07:09:54] लिखा हुआ है हॉकिश। हॉकिश मतलब हमें

[07:09:58] इनफ्लेशन कंट्रोल करनी है। इनफ्लेशन

[07:10:00] कंट्रोल करने का तरीका क्या है? सर

[07:10:02] इंटरेस्ट रेट बढ़ा दो। इंटरेस्ट रेट महंगे

[07:10:04] हो जाएंगे तो लोग लोन कम खरीदेंगे। लोग

[07:10:06] खर्चा कम करेंगे। तो यहां पे आपका क्या हो

[07:10:09] जाएगा? आपका यहां पे इनफ्लेशन कंट्रोल हो

[07:10:11] जाएगा। तो हॉकिश में आपके बैंक के

[07:10:14] इंटरेस्ट रेट बढ़ जाते हैं। बेसिकली पता

[07:10:17] है क्या होता है? आरबीआई आपका जो रेपो रेट

[07:10:19] है ना वह बढ़ा देती है हॉकिश में या

[07:10:22] कंट्रक्शनरी में। ठीक है? रेपो रेट यहां

[07:10:24] बढ़ जाएगा। रेपो रेट बढ़ जाएगा तो मनी

[07:10:27] सप्लाई कम हो जाएगी। लॉजिकल लॉजिकल

[07:10:29] बिल्कुल लॉजिकल। तीसरा देखो इनफ्लेशन। अरे

[07:10:32] भाई इनफ्लेशन कंट्रोल ही तो करना था तो

[07:10:33] यहां इनफ्लेशन कम हो जाएगी। पर हां उससे

[07:10:36] कहीं ना कहीं हो सकता है ज्यादा ही

[07:10:37] इनफ्लेशन कम हो जाए तो डिफ्लेशन भी हो

[07:10:39] सकता है। ओके? इंटरेस्ट रेट ऑन बॉन्ड्स।

[07:10:42] अब इसमें कई बच्चों को कंफ्यूजन आई होगी

[07:10:44] क्योंकि बच्चों को बॉन्ड्स का कांसेप्ट ही

[07:10:45] नहीं पता।

[07:10:47] आप एक बात हमेशा याद रखना अभी मैं आगे

[07:10:49] बताऊंगा अभी आपको पर एक बात हमेशा हमेशा

[07:10:52] हमेशा याद रखना जब भी कभी बॉन्ड का

[07:10:54] क्वेश्चन आए

[07:10:57] इंटरेस्ट रेट एंड बॉन्ड

[07:11:03] यील्ड आर डायरेक्टली प्रोपोर्शनल। ये बात

[07:11:05] याद रखना इंटरेस्ट रेट और बॉन्ड यील्ड

[07:11:08] डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होते हैं। या आप

[07:11:09] इसको ऐसे भी लिख सकते हो कि बॉन्ड यील्ड

[07:11:11] इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू इंटरेस्ट

[07:11:12] रेट। जब-जब आपके इंटरेस्ट रेट बढ़ेंगे

[07:11:14] तब-तब आपकी बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी। जब ये कम

[07:11:17] होगा तो ये भी कम होगा। एक ये बात याद

[07:11:19] रखना बॉन्ड्स के कॉन्टेक्स्ट में आगे समझा

[07:11:21] दूंगा क्यों ऐसा होता है जब हम आएंगे। पर

[07:11:23] एक बात और ध्यान रखना जब भी कभी बॉन्ड की

[07:11:26] डिमांड बढ़ेगी ना जब भी कभी बॉन्ड की

[07:11:29] डिमांड बढ़ती है, मैंने आपको बताया था जब

[07:11:31] भी किसी चीज की डिमांड बढ़ती है, उसका दाम

[07:11:34] बढ़ता है। तो जब-जब बॉन्ड का डिमांड बढ़ेगी,

[07:11:36] बॉन्ड का प्राइस बढ़ेगा। पर जब-जब बॉन्ड का

[07:11:38] प्राइस बढ़ेगा, बॉन्ड यील्ड कम होगी। क्यों

[07:11:41] ऐसा? क्यों? क्योंकि बॉन्ड यील्ड एंड

[07:11:43] प्राइस जो होते हैं ना वो इन्वर्सली

[07:11:44] रिलेटेड होते हैं। अगर आपको ये दो वाले

[07:11:46] कांसेप्ट ही पता है ना तो बॉन्ड ईल्ड

[07:11:48] बॉन्ड प्राइस के सारे क्वेश्चन आंसर कर

[07:11:49] दोगे। पहला क्या है? बॉन्ड यील्ड

[07:11:51] डायरेक्टली प्रोपोर्शन है इंटरेस्ट रेट

[07:11:52] के। मैं समझाऊंगा आगे जाके बॉन्ड यील्ड

[07:11:54] क्या होता है? और बॉन्ड डिमांड जो होती है

[07:11:56] जब बॉन्ड डिमांड बढ़ती है तो बॉन्ड प्राइस

[07:11:58] बढ़ता है और बॉन्ड प्राइस और बॉन्ड यील्ड

[07:12:00] इन्वर्सली होते हैं। तो बॉन्ड प्राइस के

[07:12:02] बढ़ने का मतलब बॉन्ड यील्ड का कम हो जाना।

[07:12:04] ये दो बातें अगर आपको पता है ना तो कहीं

[07:12:06] ना कहीं आप चीजें हैंडल कर लोगे। ये आगे

[07:12:08] समझा भी दूंगा कैसे होता है। बट इधर आओ आप

[07:12:11] इस क्वेश्चन में। अब मैंने आपको बताया

[07:12:14] इंटरेस्ट रेट बढ़ रहे हैं ना तो भाई बॉन्ड

[07:12:16] यील्ड भी बढ़ेगी। ठीक है? बॉन्ड यील्ड भी

[07:12:18] बढ़ेगी यहां पे। ठीक है? फिर कह रहा है

[07:12:20] इंपोर्ट कॉस्ट पे क्या इंपैक्ट आएगा?

[07:12:24] अब ये थोड़ा कंफ्यूजिंग हो सकता है। देखो

[07:12:27] मेरी बात ध्यान से सुनो।

[07:12:30] क्या बताना है? हमें इंपोर्ट करवाना है सर

[07:12:32] सामान। हमें विदेशों से सामान इंपोर्ट

[07:12:34] करवाना है। ठीक है? बाहर से हम सामान मंगा

[07:12:38] रहे हैं। पहले तो ये देखो कि करेंसी के

[07:12:40] ऊपर क्या इंपैक्ट आएगा। अगर इंटरेस्ट रेट

[07:12:41] बढ़ रहा है। यस ये तो हमने पढ़ा था सर।

[07:12:44] अगर इंडिया में इंटरेस्ट रेट बढ़ रहा है।

[07:12:46] बहुत सारे लोग भारत में डॉलर्स लेकर

[07:12:48] आएंगे। डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी। डॉलर कमजोर

[07:12:51] होगा। रुपया मजबूत होगा। तो हमारा रुपया

[07:12:53] मजबूत हो जाएगा। ये तो बात हमें पढ़ी थी।

[07:12:56] हां, पढ़ी थी। और जब रुपया मजबूत होता है,

[07:12:59] रुपया मजबूत होगा, अब हमारे यहां पे क्या

[07:13:02] होगा? इंपोर्ट करवाना सस्ता हो जाएगा।

[07:13:04] जैसे रुपया डेप्रिशिएट करता था ना तो

[07:13:05] एक्सपोर्ट सस्ते हो जाते थे। रुपए मजबूत

[07:13:07] होने पे इंपोर्ट सस्ते हो जाएंगे। तो यहां

[07:13:09] पर इंपोर्ट सस्ता हो जाएगा। आखिरी पॉइंट

[07:13:12] क्या है? इकॉनमी पे क्या इंपैक्ट आएगा?

[07:13:14] भाई जब आप रेपो रेट बढ़ा रहे हो ना तो आप

[07:13:16] कहीं ना कहीं ग्रोथ को हैंपर करने की

[07:13:18] कोशिश कर रहे हो। मतलब ऑब्वियसली इनफ्लेशन

[07:13:20] कंट्रोल करने के लिए कर रहे हो पर साथ-साथ

[07:13:21] ग्रोथ भी थोड़ी दिक्कत में आ सकती है।

[07:13:23] इसीलिए इकॉनमी हो सकता है कॉन्ट्रैक्ट हो।

[07:13:25] और जब इकॉनमी नहीं काम मतलब इकॉनमी का

[07:13:28] उतने तेजी से मूव नहीं करेगी क्योंकि आपने

[07:13:29] इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिया तो उससे आपकी

[07:13:31] अनइंप्लॉयमेंट बढ़ सकती है। अगर आपसे ये

[07:13:34] बन जाएगा तो आपसे ये सामने वाला भी बन

[07:13:35] जाएगा। सिंपल यहां पे जो है उसका उल्टा

[07:13:38] यहां पे जो है उसका उल्टा यहां पे जो है

[07:13:40] उसका उल्टा अब आप मुझे बताओ आपको ये टेबल

[07:13:43] समझ आया या नहीं आया? क्योंकि ना इसमें ना

[07:13:46] एक मोटा-मोटा एक आईडिया आपको मिल गया है

[07:13:48] मन ट्रिपलसी का। मैं हर एक चीज बता जरूर

[07:13:51] दूंगा आपको। पर जो सोचने वाली क्वेश्चंस

[07:13:53] आते हैं ना वो आप यहां से हैंडल कर लोगे

[07:13:55] अगर आपको ये टेबल बन गया। जो सोचने वाले

[07:13:57] क्वेश्चंस होते हैं वो हैंडल कर लोगे।

[07:13:59] बाकी फ़क्चुअल चीजें बता दूंगा कि इसमें ये

[07:14:01] है, इसमें वो नहीं है। वो भी कर लेंगे

[07:14:02] डिस्कस। पर टेबल क्लियर हुआ आपको यहां पे?

[07:14:06] टेबल क्लियर हुआ यहां पे?

[07:14:20] ओके। ओके, ओके, ओके ओके

[07:14:28] ठीक है।

[07:14:30] चलो गुड गुड गुड।

[07:14:36] ठीक है। तो एक काम करते हैं। अब ब्रेक

[07:14:38] लेते हैं थोड़ा सा। 5:00 बज गए हैं शाम के।

[07:14:40] ठीक है? शाम के 5:00 बज गए हैं। थोड़ा

[07:14:42] ब्रेक लेते हैं।

[07:14:44] ठीक है? एक काम करो। 20 मिनट का ब्रेक

[07:14:48] लेते हैं। ठीक है? चाय-वाय पी लो। आराम से

[07:14:49] कुछ खा पी लो। ठीक है? फिर 5:20 पे

[07:14:52] मिलेंगे। ठीक है? वी विल मीट एट 520।

[07:14:57] हां जी दोस्तों कंटिन्यू किया जाए फिर

[07:14:59] आगे। ठीक है? ठीक है। ओके। चलो आ जाओ आगे

[07:15:02] आ जाओ फिर। अब देखो हमने बेसिक आईडिया तो

[07:15:06] समझ लिया।

[07:15:08] मॉनिटरी पॉलिसी की एक बार ना क्विकली

[07:15:10] रिवीजन कर लेते हैं। ठीक है? जल्दी से एक

[07:15:12] बार हमें मॉनिटरी पॉलिसी के रिवीजन हमें

[07:15:14] करनी है। तो एक बार हम मॉनिटरी पॉलिसी की

[07:15:17] रिवीजन कर लेते हैं। देखो

[07:15:20] कुछ फ़क्चुअल चीजें हैं जो यहां लिखी हुई

[07:15:22] हैं। मैं आपको एक्सप्लेन करता हुआ चलूंगा

[07:15:24] उन चीजों को। सबसे पहली चीज तो यहां पे ये

[07:15:27] है कि मॉनिटरी पॉलिसी हमारी जो होती है वो

[07:15:30] डिजाइन की जाती है सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

[07:15:32] यानी कि आरबीआई के द्वारा और ये मनी

[07:15:35] सप्लाई को मैनेज करने का यहां पे काम करता

[07:15:37] है। कुछ फ़क्चुअल बातें आप यहां पे नोटिस

[07:15:39] करिएगा। जैसे कि आरबीआई का जो काम है ना

[07:15:43] वह दरअसल में स्टार्ट हुआ 1 अप्रैल 1935

[07:15:46] से और इसके लिए जो हमारा एक्ट पास हुआ वो

[07:15:50] आरबीआई एक्ट 1934 है। तो प्लीज ध्यान देना

[07:15:53] आरबीआई का कहीं पर भी संविधान में जिक्र

[07:15:56] नहीं है और आरबीआई इनफैक्ट उससे पहले बन

[07:15:58] चुकी थी आरबीआई 19 एक्ट 30 आरबीआई एक्ट

[07:16:01] 1934 के माध्यम से और 1935 पे इनका जो काम

[07:16:04] है वो भी स्टार्ट हो जाता है। ठीक है? अब

[07:16:06] एक तो होते हैं दोस्तों आरबीआई के गवर्नर

[07:16:09] और साथ ही साथ इनके डिप्टी गवर्नर्स भी

[07:16:11] होते हैं। मैक्सिमम चार डेप्टी गवर्नर्स

[07:16:13] हो सकते हैं और इनको अपॉइंट करने का काम

[07:16:16] हमारी सेंट्रल गवर्नमेंट करती है। आरबीआई

[07:16:19] गवर्नर और आरबीआई के जो डेप्टी गवर्नर्स

[07:16:21] होंगे उनको अपॉइंट कौन करता है? आपकी जो

[07:16:24] सेंट्रल गवर्नमेंट है। ठीक है? अब एक बात

[07:16:27] नोटिस करना स्टार्टिंग में जब आरबीआई शुरू

[07:16:30] हुआ तो उसके हेड क्वार्टर्स कोलकाता में

[07:16:33] थे। स्टार्टिंग में जब शुरू हुआ बट आगे

[07:16:36] जाके 1937 के अंदर जो हेड क्वार्टर्स हैं

[07:16:39] वो मुंबई शिफ्ट कर दिए जाते हैं। ठीक है?

[07:16:43] तो आज के समय भी इनफैक्ट आपके हेड

[07:16:45] क्वार्टर्स इसके आरबीआई के मुंबई में ही

[07:16:47] हैं। पर जब स्टार्टिंग हुई थी ना तब वो

[07:16:49] यहां पे आपके कोलकाता में था। इसके साथ ही

[07:16:52] साथ जब आरबीआई स्टार्ट हुआ तो उसकी ओनरशिप

[07:16:56] अलग-अलग प्राइवेट इंडिविजुअल्स और आपके

[07:16:58] बैंक्स के पास थी। बट 1949 में जाके

[07:17:02] आरबीआई का राष्ट्रीयकरण होता है। मतलब

[07:17:05] आरबीआई की मालिक 100% सेंट्रल गवर्नमेंट

[07:17:08] बन जाती है। और आज भी स्टेटस यही है। आजकल

[07:17:11] आरबीआई का कोई प्राइवेट ओनर नहीं है। पहले

[07:17:13] स्टार्टिंग में था बट आज के समय आरबीआई

[07:17:16] नेशनलाइज्ड बॉडी है। आरबीआई सरकार के

[07:17:18] अंतर्गत ही आती है।

[07:17:20] ठीक है? कुछ और बातें कुछ फ़क्चुअल बातें

[07:17:24] हैं यहां पे। जैसे फॉर एग्जांपल

[07:17:26] स्टार्टिंग में कुछ टाइम के लिए आरबीआई

[07:17:29] पाकिस्तान का और म्यांमार का भी कुछ समय

[07:17:32] के लिए सेंट्रल बैंक था। बट आगे जाके

[07:17:34] उन्होंने अपने-अपने सेंट्रल बैंक्स बना

[07:17:35] लिए। तो उसके बाद आरबीआई ने इनका सेंट्रल

[07:17:37] बैंक का काम करना बंद कर दिया। बट फॉर अ

[07:17:39] वेरी ब्रीफ पीरियड ऑफ़ टाइम आरबीआई इन

[07:17:41] दोनों देशों का सेंट्रल बैंक भी था। पहले

[07:17:43] हमारे आरबीआई गवर्नर थे ऑस्बोन स्मिथ। पर

[07:17:45] भारत के मतलब पहले इंडियन आरबीआई गवर्नर

[07:17:48] थे सीडी देशमुख जी। अब इसको जो बनाया गया

[07:17:51] था आरबीआई को उसके लिए एक कमेटी बनी थी

[07:17:54] जिसका नाम है हिल्टन यंग कमीशन। इसको

[07:17:57] हिल्टन यंग कमीशन भी बोल सकते हो या इसका

[07:17:59] एक्चुअल जो नाम है वो है रॉयल कमीशन ऑन

[07:18:01] इंडियन करेंसी एंड फाइनेंस। इनकी

[07:18:03] रिकमेंडेशन थी कि एक सेंट्रल बैंक होना

[07:18:05] चाहिए। एंड उन्हीं को बात को मानते हुए

[07:18:07] हमने यहां पे आरबीआई का गठन किया।

[07:18:10] चलो, ठीक है। अब पॉइंट आता है आरबीआई के

[07:18:13] काम कौन-कौन से होते हैं? पहली चीज तो है

[07:18:15] कि आरबीआई आपके बैंक नोट इशू करता है।

[07:18:18] बैंक नोट कौन से? देखो ₹1 को छोड़ के जो

[07:18:21] बाकी नोट्स होते हैं वो आरबीआई इशू करेगा।

[07:18:24] ₹1 का नोट्स आरबीआई इशू नहीं करता। बाकी

[07:18:26] जितने भी नोट्स होते हैं ₹2, ₹5, ₹10,

[07:18:28] ₹20, 50 सारे नोट्स आपके आरबीआई इशू करता

[07:18:30] है। एक्सेप्ट रुपी वन। ₹1 का नोट कौन इशू

[07:18:34] करता है? वो आपका मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस

[07:18:35] इशू करेगा। ₹1 के नोट्स के अलावा बाकी

[07:18:38] सारे नोट्स आपका आरबीआई इशू करेगा। फिर

[07:18:41] आरबीआई इज बैंकर टू द गवर्नमेंट। बैंकर टू

[07:18:45] द गवर्नमेंट का मतलब क्या है? बैंकर टू द

[07:18:47] गवर्नमेंट मतलब यह है कि गवर्नमेंट की कोई

[07:18:50] भी नीड्स होंगी। जैसे मैं आपको बताता हूं।

[07:18:52] बैंकर मतलब क्या होता है? बैंकर। जैसे

[07:18:54] मुझे कुछ पैसों की जरूरत पड़ती है। मैं

[07:18:55] अपने बैंक के पास जाता हूं। मेरा बैंकर है

[07:18:57] वो। ठीक है? कुछ पैसा चाहिए, कुछ पैसा जमा

[07:19:00] कराना है। हर एक चीज मेरी वही देखता है।

[07:19:02] बट अगर हम बात करेंगे सरकार की।

[07:19:06] सरकार की कुछ जरूरतें होती हैं। सरकार के

[07:19:08] पास कुछ पैसा है, कुछ उनको बोरोइंग करनी

[07:19:11] है। वह कौन देखेगा उनके बिहाफ के ऊपर? वो

[07:19:14] सारा काम आरबीआई देखता है। अब प्लीज ध्यान

[07:19:16] में देखना सेंट्रल गवर्नमेंट का भी और

[07:19:18] स्टेट गवर्नमेंट दोनों का दोनों की

[07:19:21] बैंकिंग जरूरतों का काम आपका आरबीआई ही

[07:19:23] देखेगा दोनों का। इसके साथ ही साथ अगर मैं

[07:19:26] बात करूं तो कुछ वर्ल्ड बैंक आईएमएफ की

[07:19:28] मीटिंग्स वगैरह में भी ये जाता है। दैट इज़

[07:19:30] ओके। पर प्लस एट द सेम टाइम एक बहुतेंट

[07:19:33] चीज है वो है कंट्री का फॉरेन करेंसी

[07:19:36] रिजर्व्स। देखो कोई बच्चा बीच में पूछ भी

[07:19:38] रहा था कि यार ये डॉलर वगैरह कहां जाते

[07:19:40] हैं? देखो जो भी आरबीआई ने यहां पे डॉलर

[07:19:42] वगैरह जो भी देश में डॉलर वगैरह आए ना वो

[07:19:45] दरअसल में आरबीआई के पास होते हैं। समझना

[07:19:48] आरबीआई के पास रिजर्व्स होता है। फॉरेन

[07:19:51] एक्सचेंज रिजर्व जिसको हम बोलते हैं।

[07:19:53] व्हिच वी कॉल एज फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स।

[07:19:57] ठीक है? आज के टाइम लगभग हमारे पास

[07:20:00] 700 बिलियन डॉलर के आसपास का हमारे पास

[07:20:02] रिजर्व है।

[07:20:05] ठीक है? 600 700 के बीच में रहता है।

[07:20:06] थोड़ा बहुत ऊपर नीचे होता रहता है। तो 700

[07:20:08] बिलियन डॉलर के आसपास का हमारे पास रिजर्व

[07:20:10] है जो चार कॉम्पोनेंट को मिला के बना है।

[07:20:12] ये चार कॉम्पोनेंट क्या हैं? आपके फॉरेन

[07:20:15] करेंसी एसेट्स आपके डॉलर्स और अलग-अलग

[07:20:18] करेंसीज। इसके अलावा यहां पे आपका गोल्ड

[07:20:20] भी इसका पार्ट होता है। इसके साथ-साथ अगर

[07:20:23] मैं बात करूं यहां पर आपका

[07:20:28] स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स एसडीआर

[07:20:32] स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स भी इसमें आ जाता

[07:20:34] है।

[07:20:35] एंड सिमिलरली अगर हम बात करें तो यहां पर

[07:20:38] आपका आरटीपी रिजर्व ट्रांसपजीशन यह चार

[07:20:43] चीजें मिलकर

[07:20:47] आपका फॉरेन करेंसी सॉरी फॉरेन एक्सचेंज

[07:20:49] रिजर्व्स का पार्ट बनती हैं। एंड इनफैक्ट

[07:20:52] आपको इनका ऑर्डर भी पता होना चाहिए। सबसे

[07:20:54] ज्यादा इंपॉर्टेंट हमारे लिए यहां पर जो

[07:20:56] है वो फॉरेन करेंसी एसेट्स हैं। फिर गोल्ड

[07:20:58] की वैल्यू आती है। फिर एसडीआर है। फिर

[07:21:00] आरटीपी इनको इसी ऑर्डर में आप याद रखिएगा।

[07:21:02] एक्चुअली पता है पॉइंट क्या है? मान लो

[07:21:04] हमें कुछ कल को इंपोर्ट करवाना है। ठीक

[07:21:06] है? तो हमारे पास इंपोर्ट करवाने के लिए

[07:21:08] डॉलर सही मात्रा में होने चाहिए या नहीं

[07:21:10] होने चाहिए? बिल्कुल होने चाहिए। तो आज के

[07:21:12] समय हमारे पास बहुत अच्छी खासी मात्रा में

[07:21:14] फॉरेन करेंसी एसेट्स हैं। फॉरेन एक्सचेंज

[07:21:16] रिजर्व्स हैं हमारे पास। तो आरबीआई के पास

[07:21:19] एक तरह की तिजोरी है जिसमें ये सारी चीजें

[07:21:22] पड़ी रहती हैं। तो कुछ भी आपको इंपोर्ट

[07:21:24] करवाना हो तो वी डू हैव एनफ रिजर्व्स। जब

[07:21:26] 1991 का क्राइसिस आया था तो यहीं पर

[07:21:29] क्राइसिस आया था कि हमारे पास ये जो

[07:21:31] रिजर्व्स थे ये लगभग 15 से 20 दिन के बचे

[07:21:33] हुए थे। आज के टाइम ये लगभग 1 साल के

[07:21:35] आसपास 11 महीने के आसपास आपको रिजर्व्स

[07:21:38] देखने को मिलेंगे जिसको हम लोग इंपोर्ट

[07:21:39] कवर का नाम भी देते हैं कि अगर हमें

[07:21:41] इंपोर्ट ही करवाना पड़े ना तो 11 महीने तक

[07:21:43] हम इंपोर्ट करवा सकते हैं इस रिजर्व्स का

[07:21:45] इस्तेमाल करके। तो कोई दिक्कत वाली बात

[07:21:47] नहीं है। 1991 के अंदर हमें थोड़ी सी यहां

[07:21:49] पे दिक्कत देखने को मिली थी। पर आज के समय

[07:21:51] यहां पे कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है? ये

[07:21:54] है फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व आकांक्षा कि

[07:21:56] हमारे पास डॉलर्स और बाकी और फॉरेन

[07:21:58] करेंसीज हमारे पास एक तिजोरी में आरबीआई

[07:22:01] के पास पड़ी हुई है। कुछ भी इंपोर्ट

[07:22:03] करवाना हो तो हम इनका इस्तेमाल यहां पे कर

[07:22:05] सकते हैं। तो इसका कस्टडी किसके पास है?

[07:22:08] इनकी कस्टडी आपकी आरबीआई के पास ही है।

[07:22:11] फिर एक कांसेप्ट आता है लेंडर ऑफ लास्ट

[07:22:13] रिसोर्ट। ये भी आरबीआई का एक इंपॉर्टेंट

[07:22:15] फंक्शन है। ध्यान रखना लेंडर ऑफ लास्ट

[07:22:19] रिसोर्ट बैंक्स के पर्सपेक्टिव से होता

[07:22:20] है। जैसे मान लो बैंक्स की कोई समस्या चल

[07:22:22] रही है। बैंक्स की कोई समस्या है। ठीक है?

[07:22:25] बैंक्स की कोई समस्या है। उस समय उसको मदद

[07:22:28] करने वाला कोई नहीं है। लास्ट रिसोर्ट पता

[07:22:31] है क्या होता है? लास्ट होता है आखिरी

[07:22:32] विकल्प। जब आपकी कोई मदद नहीं करता तब

[07:22:35] आपकी मदद कौन करता है? वो होता है आखिरी

[07:22:38] विकल्प। तो जब बैंकों के ऊपर कुछ मुश्किल

[07:22:40] परिस्थिति आ जाती है तो ऐसे केस में

[07:22:43] बैंकों की मदद करने के लिए कौन आएगा? वो

[07:22:45] आगे आएगा आपका आरबीआई। कोई इमरजेंसी है,

[07:22:48] कोई फाइनेंसियल सिचुएशन दिक्कत आ गई है तो

[07:22:49] आरबीआई आपकी मदद के लिए यहां पे आगे आता

[07:22:52] है। उसी तरह से अगर हम बात करें यहां पर

[07:22:55] आप नोटिस कर पाओगे बैंकों को रेगुलेट करना

[07:22:58] एंड कुछ एनबीएफसीस को यहां मैं सारी

[07:23:00] एनबीएफसी नहीं बोलूंगा सम एनबीएफसीस

[07:23:03] एनबीएफसी एक्चुअली मैं बताऊंगा अभी थोड़ी

[07:23:05] देर में नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनीज़

[07:23:07] कुछ एक एनबीएफसीस को रेगुलेट आरबीआई करता

[07:23:09] है बाकी सेबी भी कुछ को रेगुलेट करता है

[07:23:12] कुछ को मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स

[07:23:14] भी रेगुलेट करता है। है ना? अलग-अलग

[07:23:16] रेगुलेटर्स होते हैं एनबीएफसी के। बट एक

[07:23:18] साइजबल नंबर ऑफ एनबीएफसी को रेगुलेट आपका

[07:23:20] आरबीआई करता है। बाकी बैंक्स तो आरबीआई के

[07:23:23] अंतर्गत ही आते हैं। वो रेगुलेट उनको

[07:23:24] आरबीआई ही करता है। बाकी कैश रिजर्व्स जो

[07:23:28] होते हैं जो आपने सीआरआर अभी हम डिस्कस

[07:23:30] करेंगे कैश रिजर्व रेशो जो भी इस तरह से

[07:23:32] रिजर्व रखे हैं बैंकों ने अपने आरबीआई के

[07:23:35] पास उनकी कस्टडी भी आरबीआई के पास ही यहां

[07:23:37] पे होती है। ठीक है? अब जैसे ये एक

[07:23:40] क्वेश्चन आया था। एंड इनफैक्ट पता नहीं

[07:23:42] यूपीएससी को क्या अच्छा लगा इस क्वेश्चन

[07:23:44] में। यूपीएससी ने दो बार ये क्वेश्चन

[07:23:45] पूछा। ये क्वेश्चन एज इट इज़ दो बार आया।

[07:23:48] एक बार 2021 में और अगर मैं गलत नहीं हूं

[07:23:50] तो कुछ चारप साल पहले ये सेम क्वेश्चन आया

[07:23:52] था। सेम क्वेश्चन एज इट इज़। ये पहले एक

[07:23:54] बार आया था। फिर 2021 में एज़ इट इज़

[07:23:56] यूपीएससी ने इसको रिपीट कर दिया। अब क्या

[07:23:58] है इस क्वेश्चन में?

[07:24:00] क्या है इस क्वेश्चन में? यहां पर कह रहा

[07:24:02] है लेंडर ऑफ़ लास्ट रिसोर्ट का मतलब क्या

[07:24:04] है? सिंपल मतलब है लेंडर ऑफ़ लास्ट का मतलब

[07:24:07] है कि अगर आपकी कंपनी सॉरी अगर आपका बैंक

[07:24:09] जो है वह कुछ मुश्किल परिस्थिति से गुजर

[07:24:11] रहा है तो आरबीआई यहां पे उसकी मदद करता

[07:24:13] है। इसीलिए इसका आंसर बनेगा ऑप्शन नंबर बी

[07:24:16] टू ओनली।

[07:24:19] कमर्शियल में ही आएगा भाई। वो भी कमर्शियल

[07:24:21] में ही आता है प्राइवेट सेक्टर। अक्षय

[07:24:24] आरबीआई ₹1 का नोट प्रिंट इसलिए नहीं करता

[07:24:26] क्योंकि ₹1 का नोट लायबिलिटी नहीं माना

[07:24:29] जाता। वो एसेट माना जाता है। ठीक है?

[07:24:32] थोड़ा टेक्निकल कांसेप्ट है ये। पर ₹1 का

[07:24:34] नोट इज़ नॉट एन लायबिलिटी। इट इज़ एन एसेट।

[07:24:36] इसीलिए वो उसका सिस्टम अलग है। इसीलिए ना

[07:24:38] आप कभी ₹1 का नोट उठा के देखना। उसके ऊपर

[07:24:41] कभी यह लाइन लिखी नहीं मिलेगी कि मैं धारक

[07:24:44] को ₹1 अदा करने का वजन देता हूं। आप ₹2

[07:24:46] का, ₹5, ₹10, ₹50 सबका नोट देखना। उस पे

[07:24:49] लाइन लिखी मिलती है। मैं धारक को इतने

[07:24:51] रुपए देने का वजन देता हूं। नीचे आरबीआई

[07:24:53] भरने के साइन होते हैं। ₹1 के नोट के नीचे

[07:24:54] नहीं होते। क्योंकि ₹1 का नोट लायबिलिटी

[07:24:56] नहीं है। इट इज़ एन एसेट।

[07:25:01] ठीक है। ठीक है। ठीक है। अच्छा कुछ

[07:25:03] क्वेश्चंस और भी हैं। दो-तीन क्वेश्चन

[07:25:04] मुझे आपको कराने हैं। पहले आप इसको ट्राई

[07:25:06] करो। इसको ट्राई करो एक बार।

[07:25:47] ध्यान से पढ़ो यार काफी बच्चे गलत दे रहे

[07:25:49] हैं आंसर।

[07:25:58] क्वेश्चन ये इजी था। आप लोगों ने गड़बड़

[07:26:00] कर दी इसमें कई बच्चों ने। देखो यहां पे

[07:26:02] ध्यान से पहला स्टेटमेंट क्या सही है?

[07:26:05] हां। मैंने आपको बताया अभी आरबीआई गवर्नर

[07:26:07] जो है उनको अपॉइंट आपके सेंट्रल गवर्नमेंट

[07:26:08] ही करता है। इसमें कोई डाउट नहीं होना

[07:26:10] चाहिए। बात करें तीसरे स्टेटमेंट की बात

[07:26:12] कर रहा है कि संविधान के अंदर संविधान के

[07:26:16] अंदर कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो बात करते

[07:26:18] हैं कि सेंट्रल गवर्नमेंट आरबीआई को

[07:26:20] इंस्ट्रक्शन दे सकता है इन पब्लिक

[07:26:21] इंटरेस्ट। देखो प्लीज इस बात को समझना।

[07:26:24] सेंट्रल गवर्नमेंट आरबीआई को इंस्ट्रक्शन

[07:26:26] दे सकता है इन पब्लिक इंटरेस्ट। पर ये

[07:26:28] वाली बात संविधान में कहीं नहीं लिखी हुई

[07:26:30] बल्कि संविधान में कहीं आरबीआई का जिक्र

[07:26:31] ही नहीं है। ये वाली जो बात यहां पे है ना

[07:26:34] ये वाली बात लिखी गई है आरबीआई एक्ट के

[07:26:36] अंदर। ठीक है? आरबीआई एक्ट में यह बात

[07:26:39] लिखी गई है कि अगर सरकार चाहे तो आरबीआई

[07:26:42] को कुछ इंस्ट्रक्शन दे सकती है लोगों की

[07:26:44] भलाई के लिए। संविधान में कोई ऐसे बात

[07:26:46] नहीं लिखी हुई। इसलिए सेकंड बात अपने आप

[07:26:49] में गलत है।

[07:26:52] पहला ठीक है, दूसरा गलत है। तीसरे की बात

[07:26:54] करें। कह रहा है जो आरबीआई गवर्नर है उसको

[07:26:56] पावर मिलती है आरबीआई एक्ट। से दैट इज़

[07:26:58] करेक्ट। तो ऑप्शन सी इज़ राइट। तो ऑप्शन सी

[07:27:00] वन एंड थ्री ओनली इज़ करेक्ट। तो एक्चुअली

[07:27:02] पता है पॉइंट क्या है कि ऐसे क्वेश्चंस

[07:27:04] करने का तरीका बहुत अच्छा है एलिमिनेशन

[07:27:06] का। कई बार देखो मुझे पता है कई बार आप

[07:27:08] फर्स्ट स्टेटमेंट में कंफ्यूज हो सकते हो।

[07:27:10] कोई बच्चा हो सकता है थर्ड स्टेटमेंट में

[07:27:12] कंफ्यूज हो जाए। पर सेकंड स्टेटमेंट तो

[07:27:14] भाई गलत ही है ना। संविधान में कोई जिक्र

[07:27:16] नहीं है। तो मेरी एक बात ध्यान से समझ

[07:27:18] लेना। देखो मैंने ना लाइफ में बहुत सारे

[07:27:21] कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स दिए हैं। और मैं

[07:27:23] कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में कभी भी जहां पे

[07:27:26] मतलब एमसीक्यू बेस्ड एग्जाम है। मैंने

[07:27:28] वहां पे बहुत अच्छा स्कोर किया है। उसका

[07:27:30] मैं एक सिंपल मूल मंत्र मैं बताता हूं

[07:27:32] आपको जो मुझे मेरे एक टीचर ने एक बार

[07:27:34] बताया था। उन्होंने कहा था कि क्वेश्चन

[07:27:36] कभी टफ नहीं होता। उसके ऑप्शंस उस

[07:27:39] क्वेश्चन को आसान या टफ बनाते हैं। अब ये

[07:27:41] हो सकता है आपको किसी को क्वेश्चन देखने

[07:27:43] में टफ लगे। पर इसके ऑप्शन इस तरह से सेट

[07:27:45] किए गए हैं कि क्वेश्चन ये काफी इजी है

[07:27:47] अपने आप में। अगर आपने ये क्वेश्चन को

[07:27:50] अप्रोच करने का तरीका जिस दिन सीख लिया ना

[07:27:52] आपका ट्रस्ट मी प्रीलिम्स कभी रुकेगा

[07:27:54] नहीं। मैंने चार प्रीलिम्स दिए थे। मेरे

[07:27:56] चारों में स्कोर 130 140 इस रेंज में आता

[07:27:59] था या उससे भी कई बार ऊपर भी आया। एक बार

[07:28:01] मतलब ऊपर भी आया। तो पॉइंट उसका वही था कि

[07:28:03] मेरी अप्रोच बहुत अच्छी थी क्वेश्चन को

[07:28:05] देखने की। क्वेश्चन देख के नहीं ऑप्शन देख

[07:28:08] के मैं सोचता हूं कि क्वेश्चन आसान है या

[07:28:09] मुश्किल है। तो ये अप्रोच आपको एक दिन में

[07:28:11] नहीं डेवलप होती। ये अप्रोच आपको विद टाइम

[07:28:14] डेवलप करनी होती है। तो क्वेश्चंस की

[07:28:15] प्रैक्टिस करना आप थोड़ा सीखेंगे।

[07:28:18] चलो आगे आएंगे।

[07:28:20] आगे आएंगे यहां पे।

[07:28:23] कुछ बातें मैं आपको बता भी देता हूं यहां

[07:28:25] पे कि आरबीआई गवर्नर अपॉइंट कैसे होते

[07:28:27] हैं? या क्या इनका प्रोसीजर क्या होता है?

[07:28:29] थोड़ा सा ना आरबीआई गवर्नर भी काफी न्यूज़

[07:28:31] में रहते हैं। तो थोड़ा सा हमें पता होना

[07:28:32] चाहिए। एक्चुअली पता है पॉइंट क्या होता

[07:28:34] है? एक हमारे पास ना एक कमेटी होती है ये

[07:28:37] वाली

[07:28:41] एफएसआर

[07:28:43] एएससी फाइनेंशियल सेक्टर रेगुलेटरी

[07:28:47] अपॉइंटमेंट सर्च कमेटी। आई रिपीट

[07:28:49] फाइनेंशियल सेक्टर रेगुलेटरी अपॉइंटमेंट

[07:28:52] सर्च कमेटी। इसमें आपके कौन-कौन होते हैं?

[07:28:55] देखो इसमें एक तो होते हैं कैबिनेट

[07:28:57] सेक्रेटरी जो कि हाईएस्ट आईएएस ऑफिसर होते

[07:28:59] हैं भारत के। उसके अलावा जो करंट आरबीआई

[07:29:02] गवर्नर हैं वो होते हैं। फाइनेंसियल

[07:29:04] सर्विस सेक्रेटरी होते हैं और दो

[07:29:06] इंडिपेंडेंट मेंबर्स होते हैं। तो ये पांच

[07:29:08] लोग मिलकर ये देखते हैं कि अगला आरबीआई

[07:29:11] गवर्नर कौन होना चाहिए। समझे मेरी बात को?

[07:29:14] कैबिनेट सेक्रेटरी हो गए। अभी आज के समय

[07:29:16] जो आरबीआई गवर्नर है वो उनके साथ में आपके

[07:29:19] फाइनेंसियल सेक्रेटरी, फाइनेंसियल सर्विस

[07:29:21] सेक्रेटरी और दो और मेंबर्स। ये सब लोग

[07:29:23] मिलकर डिसाइड करते हैं कि कौन अगला आरबीआई

[07:29:25] गनर होना चाहिए। पर ये अपॉइंट नहीं करेंगे

[07:29:27] उसको। ये एक लिस्ट बनाएंगे कि कौन-कौन

[07:29:29] एलिजिबल है। फिर वो लिस्ट जाएगी आपकी

[07:29:32] कैबिनेट कमेटी ऑफ़ अपॉइंटमेंट के पास।

[07:29:34] किसके पास? कैबिनेट कमेटी ऑफ़ अपॉइंटमेंट

[07:29:36] के पास जो

[07:29:38] जिनके हेड होते हैं प्रधानमंत्री जी। तो

[07:29:40] इन दी एंड फिर मोदी जी डिसाइड करते हैं कि

[07:29:42] कौन आपका अगला आरबीआई गवर्नर यहां पे होना

[07:29:45] चाहिए। अगर हम बात करें कितने साल का

[07:29:47] टेन्योर होता है?

[07:29:49] तो आरबीआई गवर्नर का जो नॉर्मली टेन्योर

[07:29:52] होता है ना वो नॉर्मली हम 3 साल पर सेट

[07:29:54] करते हैं। बट नॉर्मली उनको 2 साल का

[07:29:57] एक्सटेंशन भी मिल जाता है कि 3 साल का है

[07:29:59] प्लस 2 साल का एक्सटेंशन दे दिया तो 5 साल

[07:30:01] के लिए इस तरह से हम कर देते हैं। बट बट

[07:30:04] बट एक बात ध्यान रखना एक बात ध्यान रखना

[07:30:11] जैसे अगर हम बात करें शक्तिका दास जी की

[07:30:14] तो उनका टेन्योर तो छ साल का था। लगभग छ

[07:30:16] साल उन्होंने काम किया। हां, उसका रीज़न यह

[07:30:18] था कि वह 3 साल के लिए अपॉइंट हुए। फिर 3

[07:30:22] साल खत्म होने के बाद उनको वापस अपॉइंट कर

[07:30:23] दिया गया। तो, 3 + 3 वह दूसरी टर्म थी

[07:30:26] उनकी। तो, इस वजह से 6 साल की उनकी टर्म

[07:30:28] थी। ये एक ही टर्म की बात कर रहा हूं। 3

[07:30:30] साल था, 2 साल एक्सटेंड करी तो 5 साल हो

[07:30:32] गया। पर कई बार हम उनको रीअपॉइंट भी कर

[07:30:34] देते हैं कि 3 साल आपके खत्म हुए। एक बार

[07:30:36] दोबारा से आपको टर्म दे रहे हैं। तो 3 + 3

[07:30:38] 6 साल की टर्म भी हो सकती है। ठीक है ना?

[07:30:40] तो ये बात आप यहां पे ध्यान रख सकते हो।

[07:30:44] चलो आगे आते हैं। आगे आते हैं। बाकी यह

[07:30:47] टर्म समय से पहले भी एंड हो सकती है।

[07:30:48] बिल्कुल। अगर राष्ट्रपति चाहे तो आपको

[07:30:50] रिमूव भी कर सकते हैं। बाकी गवर्नर खुद भी

[07:30:52] रिजाइन कर सकते हैं। ठीक है? तो ध्यान

[07:30:55] रखना द गवर्नर इज़ एलिजिबल फॉर

[07:30:56] रीअपॉइंटमेंट। वो रीअपॉइंट भी हो सकते

[07:30:58] हैं। जैसे शक्तिकांत दास जी रीपॉइंट ही

[07:31:00] हुए थे। तीन साल टेन्योर खत्म हुआ। 3 साल

[07:31:02] के लिए और रीपॉइंट कर दिया गया। तो छ साल।

[07:31:04] दूसरी बात है उनका टेन्योर एक्सटेंड भी

[07:31:06] किया जा सकता है। 3 साल का था 2 साल

[07:31:08] एक्सटेंड कर दिया। है ना? ना ये सारी

[07:31:10] चीजें यहां पे हो सकती हैं। आरबीआई एक्ट

[07:31:12] के अंदर इनकी कोई क्वालिफिकेशन नहीं लिखी

[07:31:14] हुई कि आपको ये होना चाहिए। आपको एमबीए

[07:31:16] करी होनी चाहिए। ना ऐसा कुछ नहीं है। ऐसा

[07:31:17] कुछ नहीं है। ठीक है? और बाकी आरबीआई को

[07:31:20] डायरेक्शन दी जा सकती हैं सेंट्रल

[07:31:22] गवर्नमेंट के द्वारा। ऐसा कहां लिखा गया

[07:31:24] है? ऐसा यहां पे लिखा गया है आरबीआई एक्ट

[07:31:26] के द्वारा। बिल्कुल बिल्कुल। यहां पे

[07:31:28] रीअपॉइंटमेंट पॉसिबल है। यहां

[07:31:30] रीअपॉइंटमेंट पॉसिबल है।

[07:31:36] ठीक है सर। ठीक है। ठीक है। ठीक है।

[07:31:42] अब देखो कुछ बातें डिस्कस कर लेते हैं।

[07:31:44] आपको ये पता है। मैं बस आपको रिवाइज

[07:31:46] करवाने आया हूं। ठीक है? यहां पे जैसे अगर

[07:31:49] हम बात करते हैं सीआरआर की। अगर हम बात

[07:31:51] करते हैं कैश रिजर्व रेशो की। अब ये बातें

[07:31:54] आप सबको पता होंगी। चलो पहले आप एक काम

[07:31:57] करो। आप इस टेबल को एक बार फिल करना। आप

[07:32:00] इस टेबल को एक बार फिल करो। आपको बताना है

[07:32:03] कि अगर हमें डिफ्लेशन से लड़ना है।

[07:32:05] डिफ्लेशन से लड़ना आप जानते हो। तो आपको

[07:32:07] बताना ये है कि सीआरआर एसएलआर का क्या

[07:32:09] करना है? फिर रेपो रेट एमएसएफ एसडीएफ का

[07:32:12] क्या करना है? और ओपन मार्केट ऑपरेशन में

[07:32:14] आरबीआई क्या बाय करेगा गवर्नमेंट

[07:32:15] सिक्योरिटी या सेल करेगा? प्लीज इसको फिल

[07:32:17] करो। अगर आप यह फिल करना जान गए तो

[07:32:19] ऑटोमेटिकली दूसरा भी हो जाएगा। इसका आंसर

[07:32:21] बताओ मुझे यहां पे।

[07:32:49] नहीं नहीं नितिन मैं दो ही सब्जेक्ट पढ़ाता

[07:32:51] हूं। इकॉनमी और सीसेट मैं दो ही सब्जेक्ट

[07:32:53] पढ़ाता हूं।

[07:33:27] हम

[07:33:29] वो मैं समझाऊंगा अभी ओपन मार्केट ऑपरेशन

[07:33:31] की बात कर रहा हूं। अभी डिस्कस करेंगे

[07:33:33] डोंट वरी। हां देखो जिन बच्चों का आंसर

[07:33:36] यहां पे आया है

[07:33:38] जिन स्टूडेंट्स का आंसर यह आया है डिक्रीज

[07:33:42] डिक्रीज

[07:33:49] और बायस

[07:33:54] हां जिनका ये आंसर आया है डिक्रीज डिक्रीज

[07:33:56] बाय उनका आंसर सही है। इसके अलावा कुछ और

[07:33:59] आंसर आया है तो गलत है। ठीक है? हां।

[07:34:01] एक-एक करके सबको समझ लेंगे। एक बच्चे ने

[07:34:04] कहा कि सर मुझे एनडीटीएल समझ नहीं आता।

[07:34:06] हां, बिल्कुल समझ नहीं आता। कोई बात नहीं।

[07:34:07] आज आ जाएगा समझ।

[07:34:12] एक बैंक के पर्सेक्टिव सोचना। किसके

[07:34:14] पर्सपेक्टिव से? एक बैंक के पर्सपेक्टिव

[07:34:16] से सोचना। ठीक है सर? एक बैंक के

[07:34:19] पर्सपेक्टिव से सोचेंगे ना, तो इसके सामने

[07:34:21] जो लायबिलिटीज़ होती हैं। पॉइंट आता है सर

[07:34:24] लायबिलिटी क्या होती है? देखो यार

[07:34:26] लायबिलिटी होता है कोई ऐसी चीज जो मेरी

[07:34:29] नहीं है जो मेरे लिए उधार है जो मुझे वापस

[07:34:31] करनी है जो मुझे किसी को बैक करनी

[07:34:32] है। जो मुझे किसी को वापस करनी है। उसको

[07:34:34] बोलते हैं लायबिलिटी। अब बैंक को क्या

[07:34:37] वापस करना है सर? अरे बैंक में मान लो

[07:34:39] मैंने अपना पैसा जमा कराया। मैंने अपना

[07:34:41] पैसा बैंक में जमा कराया तो वो बैंक के

[07:34:43] लिए एक तरह लायबिलिटी हुई या नहीं हुई?

[07:34:45] बिल्कुल हुई। मेरा पैसा था मैंने बैंक में

[07:34:48] जमा करा दिया। अब बैंक की जिम्मेदारी बनती

[07:34:50] है कि वो मुझे पैसा रिटर्न करे विद सम

[07:34:52] इंटरेस्ट। राइट? तो जो डिपॉजिट होता है ना

[07:34:54] वो बैंक के लिए लायबिलिटी होता है। ठीक

[07:34:56] है? उसी तरह से अगर हम बात करें बैंक अगर

[07:34:59] किसी को लोन दे रहा है वो बैंक का एसेट

[07:35:02] होता है। क्योंकि बैंक ने अपना पैसा आगे

[07:35:04] किसी को लोन पे दिया हुआ है। तो लोन इज़ एन

[07:35:07] एसेट फॉर द बैंक। बट डिपॉजिट इज अ

[07:35:10] लायबिलिटी फॉर द बैंक। ठीक है? अब ये जो

[07:35:13] लायबिलिटी होती है ना ये मेजरली दो प्रकार

[07:35:15] की हो सकती है। लायबिलिटी जो है ये मेजरली

[07:35:18] दो प्रकार की हो सकती है। एक होती है आपकी

[07:35:22] डिमांड लायबिलिटी।

[07:35:25] एक होती है आपकी टाइम लायबिलिटी।

[07:35:30] सर एग्जांपल दे सकते हैं। हां जी बिल्कुल।

[07:35:33] देखो

[07:35:35] लायबिलिटी मतलब सामने वाले को पैसा रिटर्न

[07:35:38] करना है। और जब मैंने वर्ड इस्तेमाल किया

[07:35:40] डिमांड लायबिलिटी इसका मतलब सामने वाले को

[07:35:42] उसकी डिमांड के ऊपर पैसा रिटर्न करना है।

[07:35:45] जैसे आप लोगों ने आप लोगों का देखा होगा

[07:35:47] ना आप लोगों ने आप लोगों ने सेविंग अकाउंट

[07:35:49] खुलवाया होगा बैंक के साथ। तो सर सेविंग

[07:35:52] अकाउंट में मेरे पैसे हैं। जब आपका मन करे

[07:35:55] आप तब जाके बैंक से पैसा निकाल सकते हो।

[07:35:57] जब आपकी डिमांड है तो वो लायबिलिटी है

[07:36:01] बैंक के लिए और पैसा कब रिटर्न करना है

[07:36:02] बैंक को जब सामने वाला डिमांड करे। तो

[07:36:04] जैसे आपके लिए सेविंग अकाउंट होता है वैसे

[07:36:06] कंपनीज़ अपने लिए जो है आपका करंट अकाउंट

[07:36:10] खुलवाती हैं यहां पे। ठीक है? ये आता है

[07:36:12] डिमांड लायबिलिटी के अंदर। बट ऑन द अदर

[07:36:16] हैंड अगर हम बात करें हमारे सामने यहां पे

[07:36:18] होता है टाइम लायबिलिटी भी जिसमें आपका

[07:36:20] फिक्स्ड डिपॉजिट यानी कि एफडी और आपका जो

[07:36:25] रेकरिंग डिपॉजिट है दैट इज़ आरडी वो यहां

[07:36:28] पे हमें देखने को मिलता है। एक हो गया

[07:36:30] हमारा एफडी एक हो गया हमारा आरडी। क्या

[07:36:33] अंतर है एफडी आरडी में? देखो फिक्स्ड

[07:36:35] डिपॉज़िट का मतलब क्या? मैंने बैंक के पास

[07:36:38] जमा कराया है 5 साल के लिए। बैंक को मुझे

[07:36:41] पैसा वापस करना है। बट आफ्टर ए सर्टेन

[07:36:43] पीरियड ऑफ टाइम। ऐसे ही होता है रिकरिंग

[07:36:45] डिपॉजिट। यहां पर भी मैं बैंक के पास पैसे

[07:36:47] जमा कराता हूं। पर इकट्ठा नहीं कराता।

[07:36:50] लमसम अमाउंट नहीं कराऊंगा। हर महीने या हर

[07:36:52] 3 महीने पे कुछ ना कुछ कमाऊंगा। फिक्स्ड

[07:36:55] डिपॉजिट में एक बार मेरे पास ₹5 लाख आया।

[07:36:57] मैंने सारा पैसा जमा करा दिया। आरडी में

[07:37:00] इस महीने ₹5,000, अगले महीने ₹5,000, अगले

[07:37:02] महीने ₹5,000। पर मुझे पैसा कब मिलेगा? एक

[07:37:05] सर्टेन स्पेसिफिक पॉइंट ऑफ टाइम के बाद।

[07:37:08] तो बैंक के लिए ये क्या हो जाता है? टाइम

[07:37:10] लायबिलिटी। क्या ये बात समझ आई?

[07:37:13] क्या बात समझ आई? व्हाट इज डिमांड

[07:37:15] लायबिलिटी? व्हाट इज टाइम लायबिलिटी? हां।

[07:37:18] तो एक्चुअली ना जब हम बात करते हैं एक

[07:37:21] बैंक की तो बैंक के पर्सपेक्टिव से आपको

[07:37:24] एक टर्म समझनी है व्हिच वी कॉल एज

[07:37:27] एनडीटीएल।

[07:37:28] नेट

[07:37:30] डिमांड

[07:37:31] एंड टाइम लायबिलिटी।

[07:37:35] देखो

[07:37:37] अगर हम बात करें ना एनडीटीएल की इसमें पता

[07:37:40] क्या होता है? एक तो आपकी डिमांड

[07:37:43] लायबिलिटी हमने देख ली और हमने अपनी टाइम

[07:37:45] लायबिलिटी जोड़ दी। ये तो टोटल लायबिलिटी

[07:37:47] आ गई ना डिमांड एंड टाइम लायबिलिटी दोनों

[07:37:49] को जोड़ दिया। बट देयर आर सम लायबिलिटीज़

[07:37:54] लाइक इंटर बैंक बोरोइंग्स। बैंकों ने आपस

[07:37:57] में से एक दूसरे का बोरो किया हुआ पैसा।

[07:38:02] यह सब हम हटाते हैं। यह सब हम हटाते हैं।

[07:38:05] तो टोटल लायबिलिटीज हमने देख ली। डिमांड

[07:38:07] लायबिलिटी, टाइम लायबिलिटी। पर उसमें से

[07:38:09] हमने जो बैंकों ने आपस में बोरो किया है

[07:38:11] ना पैसा उसको हमने हटा दिया। तो व्हाट वी

[07:38:13] गेट इज़ एनडीटीएल। नेट डिमांड एंड टाइम

[07:38:15] लायबिलिटी। आप ऐसे समझो कि बैंक के पास

[07:38:18] कितना पैसा है जो वो लोन में दे सकता है।

[07:38:21] उसको बोलते हैं एनडीटीएल। वह देगा नहीं

[07:38:23] उतना। वह दे नहीं पाएगा क्योंकि आरबीआई

[07:38:24] कुछ रेस्ट्रिक्शन लगाएगा। पर अगर हम बात

[07:38:27] करें ये बैंक के पास टोटल पैसा था जो उसके

[07:38:29] पास आया है डिपॉजिट्स की फॉर्म में पर

[07:38:30] उसमें से उन्होंने कुछ आपस में एक दूसरे

[07:38:32] से बोरो किया वो हटा दिया तो जो बच गया

[07:38:34] पैसा वो है एनडीटीएल एनडीटीएल एक बैंक के

[07:38:36] पास पैसा है जो लोन में दे सकता है पर

[07:38:38] आरबीआई कुछ रेस्ट्रिक्शन लगाएगा इनके ऊपर

[07:38:40] और सारा पैसा वो लोन में नहीं दे पाएंगे

[07:38:42] आपको एनडीटीएल क्लियर हुआ यहां पे अरविंद

[07:38:46] कह रहे हैं सर क्या एफडी पे इंटरेस्ट

[07:38:47] मिलता है अरे भाई मिलता है तभी तो लोग

[07:38:49] पैसा जमा कराते हैं एफडी में अगर पैसे

[07:38:51] एफडी पे ही अगर इंटरेस्ट नहीं मिलेगा तो

[07:38:53] लोग क्यों कराएंगे एफडी में पैसा जमा एफडी

[07:38:55] डी में अच्छा खासा इंटरेस्ट मिलता है।

[07:38:56] इसीलिए लोग एफडी में पैसा जमा कराते हैं।

[07:39:01] ठीक है सर। एनडीटी हमें समझ आया। अब आओ हम

[07:39:04] बात करेंगे किसकी? अब हम बात करेंगे यहां

[07:39:07] पे सबसे पहले सीआरआर की। कैश रिजर्व रेशो।

[07:39:11] सुनना इसकी बात। कैश रिजर्व रेशियो में

[07:39:14] पता क्या होता है? एक स्पेसिफिक पोर्शन

[07:39:16] एनडीटीएल का बैंक को आरबीआई के पास रखना

[07:39:20] होता है। एनडीटीएल का कुछ परसेंटेज

[07:39:24] नॉर्मली 3% या 4% रहता है। एनडीटीएल का

[07:39:27] कुछ परसेंटेज आपको यहां आरबीआई के पास

[07:39:30] रखने हैं। आई विल गिव यू वन एग्जांपल। मान

[07:39:33] लो एक बैंक है। उसका एनडीटीएल है 100

[07:39:37] करोड़।

[07:39:38] ठीक है? ये क्या है? एनडीटीएल। क्या ये

[07:39:41] बैंक सारा पैसा लोन में दे सकता है? ना।

[07:39:44] मान लो मैंने कह दिया कि आपका सीआरआर है

[07:39:46] 3% तो क्या करना होगा बैंक को? बैंक को इस

[07:39:51] 100 करोड़ का 3% यानी कि ₹3 करोड़। यह ₹3

[07:39:55] करोड़ कैश की फॉर्म के अंदर आरबीआई के पास

[07:39:58] रखने होंगे। ₹3 करोड़ यहां पे आरबीआई के

[07:40:02] पास कैश की फॉर्म में रखने होंगे। हां जी।

[07:40:06] क्या इसके ऊपर कुछ इंटरेस्ट देगा आरबीआई?

[07:40:08] ना। नो इंटरेस्ट। आरबीआई बोलेगा आपको बस

[07:40:11] पैसा रखना है मेरे पास कैश की फॉर्म में

[07:40:13] कोई इंटरेस्ट आपको यहां पर नहीं मिलेगा।

[07:40:16] ठीक है? अब एक सवाल आता है कि सर ये

[07:40:19] छेड़खानी करी जा सकती है क्या अपने सीएआर

[07:40:22] के साथ? बिल्कुल। अभी जैसे 3% था ना अभी

[07:40:25] जैसे यहां पे मैंने बोला मान लो 3% है तो

[07:40:27] 100 करोड़ का 3% रखना पड़ेगा। पर अगर मान

[07:40:31] लो यहां पे कल को मैंने इसको 10% कर दिया।

[07:40:33] 10% मतलब 10 करोड़। अब सेंट अब आपको बैंक

[07:40:36] को क्या करना पड़ेगा? अब बैंक को ₹1 करोड़

[07:40:39] आरबीआई के पास रखना पड़ेगा। अगर बैंक को

[07:40:41] ₹10 करोड़ आरबीआई के पास रखना पड़ रहा है

[07:40:43] तो भाई जो बैंक पहले 3 करोड़ मतलब पहले

[07:40:47] बैंक ₹97 करोड़ लोन में दे सकता था अब वो

[07:40:50] केवल कितने लोन में दे पाएगा? 10 करोड़

[07:40:53] आरबीआई को दे दिया। अब केवल ₹90 करोड़ लोन

[07:40:56] में दे पाएगा। पहले बैंक के पास बहुत पैसा

[07:40:59] था लोन में देने के लिए। अब बैंक के पास

[07:41:01] लोनेबल फंड्स जिसको हम बोलते हैं वो काफी

[07:41:04] कम हो चुके हैं।

[07:41:06] ठीक है?

[07:41:07] देखो अब जैसे मैं आपको एग्जांपल देता हूं।

[07:41:10] देखो हमारे यहां ना एक फैकल्टी हैं। मैं

[07:41:13] उनका नाम नहीं लूंगा। उनके पास बहुत सारे

[07:41:15] पैसे हैं। वरना वो बुरा मानेंगे। उनके पास

[07:41:17] बहुत सारे पैसे हैं। कोई उनसे पैसा मांगने

[07:41:19] जाता है ना वो उनको ऐसे-ऐसे पैसे पकड़ा

[07:41:21] देगा। ले भाई ले ले कोई बात नहीं। पर मेरे

[07:41:23] पास थोड़े से पैसे हैं। तो मेरे से कोई

[07:41:25] पैसा मांगता है ना मैं उसको बोलता हूं भाई

[07:41:26] पैसा ले तो ले पर इंटरेस्ट ज्यादा दियो।

[07:41:29] तो बैंकों के कॉन्टेक्स्ट में भी यही बात

[07:41:30] है। अगर बैंक्स के पास लोनेबल फंड्स बहुत

[07:41:32] ज्यादा है ना तो बैंक सस्ते में लोगों को

[07:41:34] लोन बांटेगा। पर अगर बैंक्स के पास कम है

[07:41:37] लोनेबल फंड्स, अगर बैंक के पास लोनेबल

[07:41:39] फंड्स कम है, उस केस में वो ज्यादा

[07:41:41] इंटरेस्ट रेट के ऊपर लोन बांटेगा। ठीक है?

[07:41:43] तो जब यहां पे नोटिस करो व्हेन बैंक्स के

[07:41:46] पास लोनेबल फंड्स कम है, तो बैंक यहां पे

[07:41:49] हायर इंटरेस्ट रेट पे लोन बांटेंगे। उस

[07:41:52] केस में क्या होगा? उस केस में लोगों के

[07:41:55] हाथों में जो पैसा है वो यहां पे कम

[07:41:56] पहुंचेगा। एंड लोग खर्चा कम करेंगे। खर्चा

[07:41:59] कम करेंगे तो इनफ्लेशन कंट्रोल में आ

[07:42:02] जाएगा। तो व्हाट आई मीन टू से इज़ कि अगर

[07:42:04] आरबीआई को इनफ्लेशन कंट्रोल करना हो सकता

[07:42:07] है ना तो वो सीआरआर को बढ़ा सकता है।

[07:42:09] सीआरआर बढ़ाना इज़ अ काइंड ऑफ़ अ

[07:42:11] कॉन्ट्रक्शनरी मॉनिटरी पॉलिसी। समझे मेरी

[07:42:14] बात को?

[07:42:16] ठीक है? हां। हां। ठीक है। ठीक है। ओके।

[07:42:19] ओके। और अगर हम सीआरआर को कम कर दें, उसका

[07:42:22] मतलब क्या है? बैंक को आरबीआई के पास कम

[07:42:24] पैसा रखना है। बैंक ज्यादा लोन में दे

[07:42:26] सकता है। बैंक खूब पैसा बांटेगा और उस वजह

[07:42:28] से क्या होगा? आप नोटिस कर पाओगे कि ग्रोथ

[07:42:31] प्रमोट होगी। दैट इज अ एक्सपेंशनरी

[07:42:34] मॉनिटरी पॉलिसी। ठीक है? यह है आपका

[07:42:36] सीआरआर।

[07:42:38] ठीक है? तो ये कहां लिखा हुआ है सर? ये

[07:42:40] लिखा हुआ है आरबीआई एक्ट 1934 के अंदर। और

[07:42:42] साथ ही साथ आप ध्यान में रखना सीआरआर

[07:42:44] बढ़ाना मतलब लैंडिंग कैपेसिटी बैंक की कम

[07:42:47] हो जाना।

[07:42:52] चलिए चलिए चलिए। अब ऐसे ही एक और कांसेप्ट

[07:42:55] आता है जिसको हम बोलते हैं एसएलआर का

[07:42:57] कांसेप्ट। स्टचटरी लिक्विडिटी रेशियो। अब

[07:43:01] इसमें पता क्या है? एसएलआर के केस में पता

[07:43:03] है क्या होता है? सिमिलर कॉन्सप्ट है

[07:43:05] एसएलआर का। बस फर्क पता क्या है कि बैंक

[07:43:08] को जो पैसा यहां पे रखना है ना आरबीआई के

[07:43:10] पास

[07:43:12] नहीं इसमें सॉरी सॉरी सॉरी एसएलआर में

[07:43:14] आरबीआई के पास पैसा नहीं रखना। एसएलआर के

[07:43:17] केस में बैंक को खुद के पास मेंटेन करना

[07:43:19] है। इट इज़ नीडेड टू बी मेंटेन विद

[07:43:21] इटसेल्फ। अपने आप के पास ही पैसा रखना है

[07:43:24] और पैसा भी रखना है ना वह अलग-अलग फॉर्म्स

[07:43:26] में हो सकता है। या तो हो सकता है वह कैश

[07:43:29] की फॉर्म में या हो सकता है वो गोल्ड की

[07:43:31] फॉर्म में या फिर जो सिक्योरिटीज आरबीआई

[07:43:34] अप्रूव करे आरबीआई अप्रूव्ड सिक्योरिटीज़

[07:43:36] के फॉर्म में। ठीक है? इनकी फॉर्म में वो

[07:43:38] पैसा रखेगा अपने पास में।

[07:43:41] ठीक है? बात बट इन द एंड वही है। बात इन द

[07:43:44] एंड वही है। जैसे फॉर एग्जांपल पहले हो

[07:43:46] सकता है ये ज्यादा पैसा लोन में मतलब मान

[07:43:48] लो अगर पहले एसएलआर मान लो 18% है। ठीक

[07:43:51] है? तो पहले वो ज्यादा लोन लिमिट फंड्स थे

[07:43:55] उसके पास। मान लो 100 करोड़ है ना

[07:43:56] एनडीटीएल मान लो सीआरआर को भूल जाओ 1

[07:43:58] सेकंड के लिए। अगर 100 करोड़ पैसा था तो

[07:44:00] 18 करोड़ पहले वो लोन में दे सकता। सॉरी

[07:44:02] 18% उसको साइड में रखना है। वो 82 करोड़

[07:44:04] लोन में दे सकता था। बट अगर मान लो हमने

[07:44:07] यहां पे एसएलआर को बढ़ा दिया। मान लो 40%

[07:44:10] कर दिया। अब यहां पे ये 40 करोड़ नहीं दे

[07:44:12] पाएगा। सिर्फ 60 करोड़ लोन में दे सकता है।

[07:44:15] तो यहां पर लोनेबल फंड्स कम होंगे। जब

[07:44:17] लोनेबल फंड्स कम हो जाएंगे उस केस में

[07:44:19] क्या होगा? उस केस में यहां पे महंगे रेट

[07:44:22] पे इंटरेस्ट देगा और जब एसएलआर ज्यादा

[07:44:24] होगा तो लोगों के पास में पैसा नहीं पहुंच

[07:44:27] पाएगा। एंड अकॉर्डिंगली यहां पे इनफ्लेशन

[07:44:29] कंट्रोल हो जाएगा। ठीक है? तो आपको याद

[07:44:32] क्या करना है?

[07:44:34] याद दोस्तों यह करना है कि जब आरबीआई को

[07:44:38] इनफ्लेशन कंट्रोल करना होता है एसएलआर को

[07:44:40] वो बढ़ा देता है। और अगर ग्रोथ प्रमोट

[07:44:43] करनी है तो एसएलआर को कम कर देगा।

[07:44:47] क्या ये बात समझ आई या नहीं आई? हां। तो

[07:44:50] दो-तीन फर्क है। और ये एक्ट पता कहां पे

[07:44:54] है? ये कौन से एक्ट में लिखा हुआ है?

[07:44:56] बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के अंदर। बैंकिंग

[07:44:58] रेगुलेशन एक्ट में ये बात मेंशन है।

[07:45:02] ठीक है? बैंकिंग

[07:45:04] रेगुलेशन एक्ट इसके अंदर ये बात मेंशंड

[07:45:06] है। तो फर्क समझो। सीआरआर

[07:45:11] आरबीआई के पास रखना है। एसएलआर खुद के पास

[07:45:15] रखना है। सीआरआर के ऊपर कोई इंटरेस्ट नहीं

[07:45:18] मिलता। एसएलआर के ऊपर इंटरेस्ट कमा सकते

[07:45:20] हो। सीआरआर कैश की फॉर्म में रखना है।

[07:45:22] एसएलआर आपका कैश गोल्ड आरबीआई प्रूव्ड

[07:45:25] सिक्योरिटीज की फॉर्म में रखा जा सकता है।

[07:45:27] सीआरआर आरबीआई एक्ट 1934 में मेंशंड है।

[07:45:30] आपका एसएलआर बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के

[07:45:32] हिसाब से यहां पे डिफाइंड है।

[07:45:35] आई होप दैट इज़ क्लियर। हां। हां आर्यांश

[07:45:38] ये प्राइमरी टूल नहीं है। बिल्कुल ठीक बात

[07:45:39] है आपकी।

[07:45:42] ठीक है। तो प्राइमरी टूल क्या है सर? देखो

[07:45:44] मेन जो चीज आपका आरबीआई इस्तेमाल करता है

[07:45:46] जो प्राइमरी टूल है वो है रेपो रेट। सबसे

[07:45:49] ज्यादा इस्तेमाल होने वाला जो आपका टूल है

[07:45:51] आपका आरबीआई के द्वारा वो होता है क्या?

[07:45:53] दैट इज योर रेपो रेट। ठीक है? ठीक है। ठीक

[07:45:55] है। ओके ओके ओके।

[07:45:57] राज पूछ रहे हैं इंटरेस्ट कैसे कमा सकता

[07:45:59] है? अरे भाई जो आपका गोल्ड है मैंने बोला

[07:46:03] कमा सकता है। अगर आपने गोल्ड में इन्वेस्ट

[07:46:06] कर दिया तो क्या आपको कमाई का एक साधन

[07:46:08] नहीं मिल जाएगा वहां से? हां। गोल्ड में

[07:46:10] आप पैसा इन्वेस्ट करके पैसा कमा सकते हो।

[07:46:12] उसी तरह से अगर हम बात करें अगर आपका बैंक

[07:46:15] गोल्ड की जगह गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में

[07:46:17] पैसा इन्वेस्ट कर दे जब आप गवर्नमेंट

[07:46:19] सिक्योरिटी में पैसा इन्वेस्ट करोगे वहां

[07:46:20] से भी आप पैसा कमाने का आपका एक जरिया बन

[07:46:23] जाता है तो गवर्नमेंट सिक्योरिटी में

[07:46:25] इन्वेस्ट करना भी एक कमाई का ही साधन है

[07:46:28] आपके बैंक के लिए समझ गए इस बात को प्यारे

[07:46:31] मोहन समझे या नहीं समझे गवर्नमेंट

[07:46:33] सिक्योरिटी में इन्वेस्ट करोगे तो आपको

[07:46:35] वहां पे इंटरेस्ट मिलेगा सरकार आपको

[07:46:36] इंटरेस्ट देगी

[07:46:39] ठीक है हां नहीं नहीं मोस्ट इफेक्टिव इज़

[07:46:41] सीएलआर नहीं मोस्ट इफेक्टिव रेपो रेट। ठीक

[07:46:43] है? तो सबसे इंपॉर्टेंट जो टूल आपको देखने

[07:46:46] को मिलता है वो होता है आपका रेपो रेट का।

[07:46:48] रेपो रेट आप समझते होंगे। रेपो रेट का

[07:46:50] मतलब होता है रिपर्चेस ऑप्शन।

[07:46:53] ठीक है? रिपर्चेस ऑप्शन। अब इसमें पता है

[07:46:56] क्या होता है? इसमें बहुत सिंपल प्रोसेस

[07:46:57] है। देखो मान लो ये रहा आपका आरबीआई।

[07:47:02] यह रहा आपका बैंक।

[07:47:04] ठीक है? अब यहां पर पता है क्या होता है?

[07:47:08] बैंकों को पैसों की जरूरत है। तो आरबीआई

[07:47:10] कहता है ठीक है हम आपको पैसा दे देंगे। अब

[07:47:13] आरबीआई ने बैंकों को पैसा दिया। ठीक है?

[07:47:16] पर बैंकों को ना यहां पर बदले में कुछ गिर

[07:47:19] भी रखना होता है। दे नीड टू प्रोवाइड अ

[07:47:21] कोलटरल और कोलटरल क्या होता है? आपकी जो

[07:47:24] सिक्योरिटीज़ होती हैं। ठीक है? आरबीआई ने

[07:47:26] बैंकों को पैसा दिया। बैंकों ने बदले में

[07:47:28] कोलटरल दिया। कुछ गिरवी रखा है। ठीक है?

[07:47:31] ये गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ होंगी। फिर कुछ

[07:47:32] दिन बाद क्या होगा? कुछ दिन बाद बैंक इनको

[07:47:35] पैसा रिटर्न कर देगा। है ना? कुछ दिन बाद

[07:47:38] बैंक क्या करेगा? कुछ दिन बाद

[07:47:41] बैंक इनको पैसा रिटर्न कर देगा। और जब ये

[07:47:44] बैंक को पैसा रिटर्न कर देंगे जो इन्होंने

[07:47:46] कोलटरल लिखा दिया था ना उनको वापस से

[07:47:49] रिपर्चेस कर लेंगे। दे विल रिपर्चेस देयर

[07:47:51] कोलैटरल। जो चीज गिरवी रखी गई थी उसको

[07:47:53] वापस से खरीद लेंगे। तो ऐसे काम करता है

[07:47:56] आपका रेपो रेट। तो प्लीज ध्यान से देखना।

[07:47:58] रेपो रेट के अंदर यहां पे कोलटरल इनवॉल्व

[07:48:01] होता है। तो दरअसल में जो वर्ड आया ना

[07:48:04] रिपर्चेस ऑप्शन ये रिपर्चेस ऑप्शन आपके

[07:48:06] रिपर्चेस से ही आया कि हमने आपको कुछ

[07:48:09] गिरवी रखा था पैसा लिया था हमने आपसे। अब

[07:48:12] हम आपको पैसा वापस करने आए हैं विद

[07:48:14] इंटरेस्ट और आप आपसे हमारी जो गिरवी हमने

[07:48:17] कोटरल रखा था उसको हम वापस रिपर्चेस

[07:48:19] करेंगे। बिल्कुल। तो सिक्योरिटी वापस ले

[07:48:20] लेंगे। बिल्कुल ठीक बात है। यह होता है

[07:48:22] रेपो रेट। अब रेपो रेट काम कैसे करता है?

[07:48:25] इसका फायदा कहां पे है? फायदा बहुत सिंपल

[07:48:28] है। देखो फायदा बहुत सिंपल है। कैसे? देखो

[07:48:31] मान लो ये है आरबीआई।

[07:48:34] ठीक है? और ये है बैंक

[07:48:36] और मान लो ये हूं मैं।

[07:48:40] ठीक है? अब मान लो आरबीआई ने मान लो पहले

[07:48:43] रेपो रेट मान लो 6% कर रखा था। तो बैंक हो

[07:48:46] सकता है मुझे 12% पे ब्याज दें। पर अगर

[07:48:48] मान लो आरबीआई रेपो रेट को 4% कर दे। अब

[07:48:51] बैंकों को सस्ते में लोन मिलेगा तो बैंक

[07:48:52] हमें लोन सस्ते में देंगे। हो सकता है 10%

[07:48:55] में दे दें। तो हुआ पता है क्या? जब आपने

[07:48:57] आरबीआई ने रेपो रेट कम किया तो मेरे तक

[07:49:00] लोन सस्ते में पहुंचा। मैं अब खर्चा ही

[07:49:02] खर्चा करूंगा। और इस तरह से ये हो जाएगा

[07:49:04] एक्सपेंशनरी मॉनिटरी पॉलिसी। तो रेपो रेट

[07:49:08] कम करना मतलब एक्सपेंशन होना। ठीक है?

[07:49:11] रेपो रेट कम करना एक्सपेंशनरी मॉनिटरी

[07:49:13] पॉलिसी का एक एग्जांपल आपको देखने को मिल

[07:49:15] जाता है। अब पढ़ना है, पढ़ लो इस चीज़ को।

[07:49:17] यहां पर क्या कह रहा है? रेपो रेट को। इट

[07:49:20] इज़ द रेट।

[07:49:22] इट इज द रेट एट व्हिच बैंक्स बोरो फंड्स

[07:49:26] फ्रॉम आरबीआई। यह वो रेट होता है जिसके

[07:49:28] ऊपर बैंक जो है आरबीआई से पैसा बोरो करते

[07:49:31] हैं। इसका नाम रेपो का फुल फॉर्म क्या है?

[07:49:33] रिपर्चेस ऑप्शन या रिपर्चेस एग्रीमेंट।

[07:49:36] बैंक्स ने अपनी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़

[07:49:38] गिरवी रखी। पैसा लिया ना बैंकों ने आरबीआई

[07:49:42] से। बैंकों ने आरबीआई से पैसा लिया। बदले

[07:49:44] में गवर्नमेंट सिक्योरिटी गिरवी रखी और

[07:49:46] वादा देके गए कि हम आपको पैसा रिटर्न कर

[07:49:49] देंगे विद इंटरेस्ट। और आपके पास जो हमने

[07:49:51] अपनी सिक्योरिटी रखी हुई हैं उनको वापस से

[07:49:54] खरीद लेंगे। तो बैंक्स लेंड देयर

[07:49:56] गवर्नमेंट सिक्योरिटी विद एन अश्योरेंस टू

[07:49:58] बाय देम बैक आफ्टर स्पेसिफाइड टाइम। ठीक

[07:50:00] है? अब एक क्वेश्चन यहां पे ये आता है कि

[07:50:03] सर क्या जो गिरवी रखना है क्या एसएलआर

[07:50:06] वाली सिक्योरिटीज हम गिरवी रख लें? आंसर

[07:50:08] इज़ नो। रेपो रेट के अंतर्गत आपको पैसा

[07:50:11] चाहिए तो एसएलआर के अलावा आपको

[07:50:13] सिक्योरिटीज देनी पड़ेंगी। एसएलआर कोटा

[07:50:15] वाली सिक्योरिटीज जो पीछे हम पढ़ के आए

[07:50:17] एसएलआर वाली वो सिक्योरिटीज यहां पर

[07:50:19] इस्तेमाल नहीं करी जा सकती इन ऑर्डर टू

[07:50:21] बोरो मनी अंडर द रेपो ऑपरेशंस। समझे मेरी

[07:50:24] बात को? तो ध्यान क्या रखना है? ध्यान ये

[07:50:27] रखना है दोस्तों कि अगर रेपो रेट ज्यादा

[07:50:30] है। रेपो रेट ज्यादा कब होता है? जब

[07:50:33] आरबीआई कोशिश करती है महंगाई को कंट्रोल

[07:50:35] करने की। रेपो रेट कम कब किया जाता है? जब

[07:50:38] आरबीआई का ध्यान होता है ग्रोथ को प्रमोट

[07:50:41] करने का। क्या यह बात क्लियर हुआ?

[07:50:47] क्लियर है यह बात?

[07:50:51] हां। एक बच्चा पूछ रहा है बैंक रेट और

[07:50:53] रेपो रेट में क्या फर्क है? देखो समझना

[07:50:56] मेरी बात। रेपो वर्ड ना रेपो इसका मतलब है

[07:51:00] कुछ। ठीक है? मैं अभी आपको 5 मिनट में

[07:51:02] आपको आंसर मिलेगा जो बच्चा पूछ रहा है। अब

[07:51:05] आते हैं रिवर्स रेपो पे। रिवर्स रेपो

[07:51:07] बिल्कुल उल्टा है। रिवर्स रेपो इसका

[07:51:09] बिल्कुल उल्टा है। रिवर्स रेपो में क्या

[07:51:11] होगा? क्या होगा? आप बताओ मुझे रिवर्स

[07:51:13] रेपो का मतलब। देखो कई बच्चे मुझे बोलते

[07:51:15] हैं कि रिवर्स रेपो का मतलब होगा कि रेपो

[07:51:18] में आरबीआई ने बैंकों को लोन दिया तो

[07:51:20] रिवर्स रेपो में बैंक आरबीआई को लोन

[07:51:22] देंगे। बिल्कुल गलत। आरबीआई को कोई लोन की

[07:51:25] जरूरत नहीं है। आरबीआई को लोन लेने की कोई

[07:51:27] जरूरत नहीं है। होता पता है क्या है?

[07:51:30] हमारा फंक्शनंस ऑफ़ आरबीआई। आपने पढ़ा।

[07:51:34] मैंने ही पढ़ाया आपको। फंक्शन ऑफ़ आरबीआई

[07:51:36] में पता है क्या था? आरबीआई इज़ बैंकर टू द

[07:51:38] बैंक्स। तो बैंकों की कुछ जरूरतें होती

[07:51:41] हैं। बैंकों को पैसा जमा कराना है, पैसा

[07:51:43] उधार लेना है तो वो आरबीआई के पास जाएंगे।

[07:51:46] रेपो रेट में क्या हुआ? बैंकों को पैसों

[07:51:48] की जरूरत पड़ी। बैंक गए आरबीआई के पास कि

[07:51:50] भाई हमें लोन दे दीजिए। ठीक है? दे दिया।

[07:51:52] पर अगर बैंकों के पास एक्स्ट्रा पैसा पड़ा

[07:51:54] हुआ है तो भाई वो एक्स्ट्रा पैसा कहां जमा

[07:51:56] कराएं? भाई आरबीआई इज़ द बैंकर टू द

[07:51:58] बैंक्स। तो बैंकों को एक्स्ट्रा पैसा

[07:52:00] आरबीआई में जमा कराना होता है। इसी मतलब

[07:52:03] जमा करवाते हैं। ठीक है? सो इट इज़ द रेट

[07:52:05] एट व्हिच बैंक्स पार्क देयर। पार्क मतलब

[07:52:07] एक्स्ट्रा पैसा जमा कराना। दे पार्क देयर

[07:52:09] एक्सेस फंड्स विद देयर आरबीआई।

[07:52:12] ठीक है ना? यस। और ये जो रेट होती है रेपो

[07:52:14] रेट से कम होती है। तो जैसे आपका रेपो रेट

[07:52:17] काम करेगा वैसे ये काम कर जाएगा।

[07:52:20] ठीक है? और ये सारा जो काम होता है ना

[07:52:22] सारा जो काम होता है ये आरबीआई का जो ईबे

[07:52:25] प्लेटफार्म है ना व्हिच इज़ कोर बैंकिंग

[07:52:26] सॉल्यूशन यह उसके ऊपर काम होता है। सारा

[07:52:28] वहां पे इस प्लेटफार्म के ऊपर काम चलता है

[07:52:30] ईबे प्लेटफार्म के ऊपर।

[07:52:36] हां हां बिल्कुल ठीक है। बिल्कुल ठीक है।

[07:52:40] हां जी। बट आज के टाइम के ऊपर ना आज के

[07:52:44] टाइम के ऊपर क्या रिवर्स रेपो इस्तेमाल

[07:52:46] होता है? आंसर इज़ नो। रिवर्स रेपो रेट

[07:52:48] एग्ज़िस्ट जरूर करता है। रिवर्स रेपो रेट

[07:52:51] एग्ज़िस्ट जरूर करता है बट रिवर्स रेपो रेट

[07:52:55] का अब इस्तेमाल नहीं होता। अब इस्तेमाल

[07:52:57] किस चीज का होता है? अब इस्तेमाल होता है

[07:52:59] स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी का। एस डीf अब

[07:53:03] सवाल आएगा ये स्टैंडिंग डिपॉजिबिलिटी का

[07:53:05] मतलब क्या है? स्टैंडिंग डिपॉजिटिविटी का

[07:53:07] मतलब क्या है? सिंपल है। सिंपल है।

[07:53:09] स्टैंडिंग डिपॉजिबिलिटी का मतलब ये दरअसल

[07:53:12] में ना स्टैंडिंग डिपॉजिबिलिटी इज़ सेम ऐज़

[07:53:14] रिवर्स रेपो रेट। बट यहां पता है क्या

[07:53:16] होता है? स्टैंडिंग डिपॉजिबिलिटी के अंदर

[07:53:18] यहां पर कोई कोलटरल नहीं होता। प्लीज

[07:53:22] समझना इस बात को। जब मैं बात करता हूं ना

[07:53:24] रेपो वर्ड की। रेपो वर्ड कहां से आया?

[07:53:27] रिपर्चेस से। रिपर्चेस का मतलब जो हमने

[07:53:30] गिरवी रखा था, जो कोलैटरल हमने रखा हुआ

[07:53:33] था, उसको हम वापस खरीद रहे थे। वहां से

[07:53:35] वर्ड आया रिपर्चेस ऑप्शन। फिर जब हमने

[07:53:37] रिवर्स रेपो की बात करी, वहां पर भी

[07:53:39] रिपर्चेस वर्ड आया तो वहां पर भी कोलटरल

[07:53:42] होता है। मतलब अगर बैंक आरबीआई के पास

[07:53:44] पैसा जमा कराएंगे तो आरबीआई उनको बदलने

[07:53:46] में कुछ कोलैटरल भी देगा रिवर्स रेपो में।

[07:53:48] बट स्टैंडिंग डिपॉजिटिलिटी के अंदर कहीं

[07:53:51] भी रिपर्चेस वर्ड नहीं आया। क्यों नहीं

[07:53:53] आया रिपर्चेस? क्योंकि स्टैंडिंग

[07:53:55] डिपॉजिटिविटी के अंदर कोलैटरल कुछ होता ही

[07:53:57] नहीं है। आरबीआई ने बोला भाई आप मेरे पास

[07:53:59] पैसा जमा कराओ। मैं आपको कुछ भी गिरवी

[07:54:02] नहीं रख के दूंगा। यही है स्टैंडिंग

[07:54:04] डिपॉजिटिविटी। बैंकों के पास एक्स्ट्रा

[07:54:06] पैसा पड़ा हुआ है। बैंक आरबीआई के पास जमा

[07:54:08] करा देंगे। ठीक है? आरबीआई को कुछ भी

[07:54:10] गिरवी रखने की कोई जरूरत नहीं है। रिवर्स

[07:54:12] रेपो रेट पे कोलटरल होता है। एसडीएफ में

[07:54:14] नहीं होता। समझे मेरी बात को? समझे मेरी

[07:54:17] बात को? अरे आरबीआई इंटरेस्ट देगा भाई।

[07:54:20] तभी तो मतलब उनका फायदा होगा बैंकों को।

[07:54:22] वरना क्यों बैंकों को रखने की क्या जरूरत

[07:54:23] है?

[07:54:25] ठीक है? हां। नहीं रेट सेम नहीं है। नहीं

[07:54:28] नहीं सप सप्ताश नहीं रेट सेम नहीं है। रेट

[07:54:31] अलग-अलग है। नो नो रेट अलग-अलग है। तो ये

[07:54:34] एक टूल है जिसके माध्यम से लिक्विडिटी

[07:54:36] अब्जॉर्ब करी जा सकती है। लिक्विडिटी

[07:54:38] अब्सॉर्ब करने का मतलब बैंकों के पास पैसा

[07:54:40] था। बैंक यहां पे आरबीआई के पास जमा करा

[07:54:42] देंगे तो लिक्विडिटी कम हो जाएगी। ठीक है

[07:54:44] ना? और यहां पे कोई भी कोलटरल नहीं होता

[07:54:46] है। इस बात का आप ध्यान में रखेंगे।

[07:54:51] ठीक है?

[07:54:53] बिल्कुल मिलेगा। इंटरेस्ट तो मिलना ही है

[07:54:55] बैंकों को। भाई इंटरेस्ट तो मिलना ही है।

[07:55:01] एक कांसेप्ट और आता है जिसको हम बोलते हैं

[07:55:02] एमएसएफ रेट। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी

[07:55:04] रेट। अब इसमें पता है क्या होता है?

[07:55:06] आरबीआई से बैंकों को पैसा चाहिए। तो रेपो

[07:55:10] रेट से ले लें। पर नहीं एक तो देखो यहां

[07:55:13] पे आरबीआई से पैसों की अचानक जरूरत पड़ गई

[07:55:15] है। बैंकों को जरूरत पड़ गई है अचानक पैसे

[07:55:17] की। ओवरनाइट फंड्स उनको चाहिए।

[07:55:20] और हो सकता है उनके पास सिक्योरिटीज ना हो

[07:55:23] पूरी क्योंकि रैपो में तो क्या होगा अगर

[07:55:26] आपको पैसा चाहिए आपको सिक्योरिटीज देनी

[07:55:28] पड़ेंगी पर मान लो बैंकों के पास पूरी

[07:55:30] सिक्योरिटीज नहीं है तो यहां पर पता है

[07:55:32] क्या कर सकते हैं वो एमएसएफ रेट का

[07:55:33] इस्तेमाल कर सकते हैं एमएसएफ रेट में पता

[07:55:35] है क्या होगा एमएसएफ रेट में क्या होता है

[07:55:38] यहां पर आप नोटिस कर पाओगे ये बैंक्स अपना

[07:55:42] एसएलआर कोटा की कुछ सिक्योरिटीज इशू कर सक

[07:55:44] मतलब कुछ सिक्योरिटीज को यूज किया जा सकता

[07:55:46] है और यहां पर वो आरबीआई से पैसा उधार ले

[07:55:49] सकते हैं। अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई है

[07:55:52] बैंक को तो बैंक आरबीआई के पास जाएगा।

[07:55:55] एसएलआर कोटा सिक्योरिटीज़ को भी कुछ हद तक

[07:55:57] इस्तेमाल कर सकता है और बैंक आरबीआई से

[07:56:00] शॉर्ट टर्म के लिए बहुत ही ओवरनाइट फंड्स

[07:56:02] यहां पे ले सकता है। पर क्योंकि आप यहां

[07:56:04] पे एसएलआर कोटा सिक्योरिटीज कर रहे हो

[07:56:05] यूज़। प्लस एट द सेम टाइम आपका जो पैसों

[07:56:08] की अचानक आपको जरूरत पड़ी है तो यहां पर

[07:56:10] जो इंटरेस्ट रेट लगेगा वो ज्यादा इंटरेस्ट

[07:56:12] रेट लगेगा। ज्यादा इंटरेस्ट रेट लगेगा।

[07:56:15] समझे मेरी बात को?

[07:56:17] बताऊंगा इनफ्लेशन में कैसे हेल्प करता है

[07:56:19] बताऊंगा। होता पता क्या है यहां पर आप

[07:56:22] समझना देखो एक होता है आपका रेपो रेट ठीक

[07:56:26] है रेपो रेट सिंपली वो रेट है जिस रेट पर

[07:56:30] आरबीआई बैंकों को उधार देते हैं। ठीक है?

[07:56:34] एक होता है मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी

[07:56:37] रेट। यह एक तरह का वह प्रोविजन है जहां पर

[07:56:41] बैंक्स को अचानक ओवरनाइट फंड्स की जरूरत

[07:56:43] पड़ गई है और वहां पर वह इसका इस्तेमाल कर

[07:56:45] सकते हैं और एसएलआर कोटा सिक्योरिटीज भी

[07:56:47] कुछ हद तक इस्तेमाल कर पाएंगे और एक होता

[07:56:50] है आपका स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी।

[07:56:52] इसमें क्या होगा? बैंकों के पास एक्स्ट्रा

[07:56:55] पैसा पड़ा हुआ है। बैंक एक्स्ट्रा पैसा

[07:56:57] आरबीआई के पास जमा करा देते हैं। ये होता

[07:56:59] है आपका स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी।

[07:57:02] ओके ओके ओके ओके।

[07:57:06] अरे एसडीएफ और एमएसएफ में बिल्कुल अलग-अलग

[07:57:08] है भाई। एमएसएफ में बैंक लोन लेते हैं

[07:57:10] आरबीआई से। एसडीएफ में बैंक जमा कराते हैं

[07:57:13] आरबीआई के पास। अब देखो अगर मैं आपको इसके

[07:57:17] रफ आईडिया दूं ना आप यहां पे अंडरस्टैंड

[07:57:20] करना। रेपो रेट अगर मान लो 5.25% है ना

[07:57:23] मान लो तो एमएसएफ ना उससे ज्यादा होता है।

[07:57:26] क्यों? क्योंकि देखो यहां पर क्या है?

[07:57:28] यहां पर क्या था? बैंक आरबीआई से पैसा

[07:57:30] उधार ले रहे हैं। यहां पर भी बैंक आरबीआई

[07:57:32] से उधार ले रहे हैं। पर यहां पर थोड़ी

[07:57:34] दिक्कत में ले रहे हैं। तो यहां पर

[07:57:35] इंटरेस्ट रेट ज्यादा लगेगा। इसलिए यहां पे

[07:57:37] हो सकता है कि आपका एमएसएफ 5.5 हो। मतलब

[07:57:39] ज्यादा होगा ये। और अगर हम बात करेंगे

[07:57:41] एसडीएफ की। एसडीएफ में क्या होगा? अरे

[07:57:44] बैंक आरबीआई के पास पैसा जमा करा रहे हैं।

[07:57:46] पैसा जमा करा रहे हैं तो कम इंटरेस्ट

[07:57:48] मिलेगा। तो यहां पर हो सकता है इंटरेस्ट

[07:57:49] आपका 5% मिले। तो आपको ध्यान पता क्या

[07:57:52] रखना है? एमएसएफ बड़ा होता है रेपो से और

[07:57:55] रेपो बड़ा होता है एचडीएफ से। समझे इस बात

[07:57:58] को? तो यह आपके पास क्या है? दिस इज योर

[07:58:01] एलएफ कॉरिडोर। लिक्विडिटी एडजस्टमेंट

[07:58:04] फैसिलिटी।

[07:58:07] लिक्विडिटी

[07:58:09] एडजस्टमेंट

[07:58:12] फैसिलिटी

[07:58:16] कॉरिडोर। दिस इज़ व्हाट? एलएफ कॉरिडोर। ठीक

[07:58:20] है? ये आपका एलएफ कॉरिडोर होता है। ठीक

[07:58:23] है? ठीक है? ये है आपका एलएफ कॉरिडोर। अब

[07:58:26] इसमें आप नोटिस करना यह है एलएफ कॉरिडोर

[07:58:30] की सीलिंग। सीलिंग मतलब छत और यह है आपकी

[07:58:33] एलएफ कॉरिडोर की फ्लोर। तो आपको कोई पूछे

[07:58:36] ना व्हाट इज द फ्लोर ऑफ़ एलएफ कॉरिडोर? आप

[07:58:38] उसका आंसर दोगे एसडीएफ। व्हाट इज द सीलिंग

[07:58:42] ऑफ़ एलएफ कॉरिडोर? वो आपका आएगा मार्जिनल

[07:58:44] स्टैंडिंग फैसिलिटी और बीच में होता है

[07:58:46] आपका रेपो रेट। नहीं नहीं प्लस वन नहीं

[07:58:49] होता भाई। यह बदलता रहता है पर अभी.25%

[07:58:51] ज्यादा है। ठीक है? अभी 25% ज्यादा है।

[07:58:56] और एक्चुअली ना कई बार आपने न्यूज़पेपर में

[07:58:58] पढ़ा होगा कॉरिडोर इज सिमिट्रिक इन नेचर।

[07:59:01] देखो एक्चुअली पता क्या है? जब मैं बात

[07:59:04] करता हूं ना 1% की 1% का मतलब होता है 100

[07:59:07] बेसिस पॉइंट्स। ठीक है? 1% को हम लोग 100

[07:59:10] बीपीएस या 100 बेसिस पॉइंट्स के नाम से भी

[07:59:13] जानते हैं। ठीक है? तो प्लीज नोटिस करना

[07:59:17] यहां रेपो और एमएसएफ का अंतर पता है कितना

[07:59:19] है? ये अंतर है आपका 25 बेसिस पॉइंट्स का।

[07:59:23] और रेपो और एचडीएफ का अंतर कितना है

[07:59:25] दोस्तों? यह भी 25 बेसिस पॉइंट्स का ही

[07:59:28] अंतर है। तो, इसको हम पता है क्या बोलते

[07:59:30] हैं? द कॉरिडोर इज़ सिमिट्रिक इन नेचर।

[07:59:32] क्या बोलेंगे हम इसको? दैट कॉरिडोर इज़

[07:59:35] सिमिट्रिक इन नेचर।

[07:59:41] कॉरिडोर अपने आप में सिमिट्रिक है।

[07:59:43] सिमिट्रिक। क्यों? क्योंकि जितना ये नीचे

[07:59:46] है उतना ये इससे ऊपर है। जितना ये नीचे है

[07:59:50] वो उतना यहां पे इससे नीचे है। हां राज ने

[07:59:54] बिल्कुल सही कहा। देखो अगर वो आपसे पूछता

[07:59:56] है ना व्हाट इज द विड्थ ऑफ द कॉरिडोर?

[07:59:58] क्या पूछता है आपसे? व्हाट इज द विड्थ ऑफ

[08:00:01] द कॉरिडोर? तो आप क्या आंसर दोगे उसका?

[08:00:05] बोलो। अगर कोई आपसे पूछे व्हाट इज द विड्थ

[08:00:07] ऑफ द कॉरिडोर? विड्थ ऑफ द कॉरिडोर ये पूरा

[08:00:10] होता है। ये पूरा इज़ द विड्थ ऑफ़ कॉरिडोर।

[08:00:12] ये कितना है? ये 50 बेसिस पॉइंट है। ठीक

[08:00:14] है? 1/2% दिस इज़ व्हाट? 50 बीपीएस।

[08:00:17] बेसिकली आपको क्या करना है? एमएसएफ माइनस

[08:00:21] आपका एसडीएफ कर लेना है। जो कि इस केस में

[08:00:23] आपको 50 बेसिस पॉइंट्स आपको देखने को मिल

[08:00:26] जाएगा।

[08:00:35] निमशा ऑलवेज सिमिट्रिक नहीं रहता। अभी

[08:00:37] फिलहाल सिमिट्रिक चल रहा है काफी टाइम से।

[08:00:39] हमेशा सिमिट्रिक होना जरूरी नहीं है। जैसे

[08:00:41] कोविड का समय आया था ना कोविड के समय ये

[08:00:43] सिमिट्रिक नहीं था। उसके बाद सिमिट्रिक कर

[08:00:45] दिया गया। पर कोविड के समय सिमिट्रिक नहीं

[08:00:47] था।

[08:01:01] ठीक है? क्लियर है ये बात?

[08:01:05] देखो ये कांसेप्ट वैसे आपको पता ही है

[08:01:07] थोड़े बस अब हां एक कांसेप्ट और था ओपन

[08:01:11] मार्केट ऑपरेशन का कोई बच्चा पूछ रहा था

[08:01:13] ओएमओ क्या होता है व्हाट इज ओएमओ सिंपल है

[08:01:15] ओएमओ भाई गवर्नमेंट सिक्योरिटीज का

[08:01:18] कांसेप्ट है गवर्नमेंट सिक्योरिटी को

[08:01:21] खरीदना और बेचना वो होता है ओपन मार्केट

[08:01:23] ऑपरेशन आई रिपीट गवर्नमेंट सिक्योरिटी को

[08:01:26] खरीदना और बेचना वो होता है क्या ओपन

[08:01:29] मार्केट ऑपरेशन

[08:01:31] अब देखो सिंपल सी बात है सिंपल सी बात है।

[08:01:35] ये है गवर्नमेंट सिक्योरिटी। ठीक है? मैं

[08:01:37] हूं आरबीआई। आप है लोग। आप है ओपन

[08:01:40] मार्केट। ठीक है? मान लो मेरे पास

[08:01:42] गवर्नमेंट सिक्योरिटीज हैं। ठीक है? मैं

[08:01:44] आपको गवर्नमेंट सिक्योरिटी बेच रहा हूं।

[08:01:46] आपके पास चली गई। आप मुझे बदले में क्या

[08:01:49] दोगे? पैसा पैसा पैसा। देखो क्या किया

[08:01:52] आरबीआई ने? आरबीआई ने

[08:01:57] लोगों को गवर्नमेंट सिक्योरिटी बेच दी।

[08:02:01] आरबीआई ने सेल कर दिया गवर्नमेंट

[08:02:03] सिक्योरिटी को। तो लोगों से बदले में क्या

[08:02:04] लिया होगा? पैसा। अब देखो जब ऐसा ऑपरेशन

[08:02:08] किया ना आरबीआई ने तो लोगों के हाथों में

[08:02:10] जो पैसा था वो कम हो गया। जब लोगों के हाथ

[08:02:13] में पैसा कम हो जाएगा। अब यहां से ये कम

[08:02:15] डिमांड करेंगे और कम डिमांड करने का मतलब

[08:02:17] यहां पर आपका जो इनफ्लेशन है वो यहां पे

[08:02:20] कंट्रोल में आ जाएगा। इनफ्लेशन आपका जो है

[08:02:23] वो कंट्रोल में आ जाएगा। ठीक है? ठीक है?

[08:02:26] ठीक है? ऑन द अदर हैंड अगर हम बात करें।

[08:02:29] ऑन द अदर हैंड अगर हम बात करें मान लो ये

[08:02:31] था आरबीआई और ये थे लोग। आरबीआई ने मान लो

[08:02:35] गवर्नमेंट सिक्योरिटी बाय कर लिया।

[08:02:38] अगर आरबीआई गवर्नमेंट सिक्योरिटी बाय

[08:02:40] करेगा ना तो आरबीआई बदले में उनको पैसा

[08:02:42] देगा। अब लोगों के हाथों में क्या आ चुका

[08:02:44] है सर? लोगों के हाथों में आ चुका है यहां

[08:02:46] पे पैसा। लोगों के हाथों में पैसा आ चुका

[08:02:49] है। तो लोग क्या करेंगे? खूब सारा खर्चा

[08:02:51] करेंगे। खूब सारा खर्चा करेंगे तो इससे

[08:02:53] आपका ग्रोथ प्रमोट होता हुआ देखने को

[08:02:57] मिलेगा। इससे आपकी ग्रोथ बढ़ेगी।

[08:03:00] इससे आपकी ग्रोथ बढ़ती हुई देखने को मिल

[08:03:03] जाएगी।

[08:03:04] क्या ये बात सही है?

[08:03:09] ठीक है। शब्द श्याति आपका हम कहां कैसे

[08:03:13] मना कर सकते हैं? अब पॉइंट आता है सर

[08:03:15] ऑपरेशन ट्विस्ट हमने एक बार सुना था। ये

[08:03:18] क्या होता है? देखो ऑपरेशन ट्विस्ट अब कम

[08:03:20] चांसेस है कि यूपीएससी आपसे पूछे क्योंकि

[08:03:22] यह पुरानी बात हो गई है। पता है क्या होता

[08:03:24] है? आरबीआई ने ना अगर एक ही टाइम के ऊपर

[08:03:31] लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स को बाय किया बट शॉर्ट

[08:03:35] टर्म बॉन्ड को सेल किया साइमलटेनियसली एक

[08:03:38] ही समय के ऊपर उसको बोलते हैं ऑपरेशन

[08:03:40] ट्विस्ट। एक्चुअली ऐसा क्यों करना है सर?

[08:03:43] देखो

[08:03:45] हुआ पता है क्या है? आरबीआई चाहता है।

[08:03:48] देखो मेरी बात ध्यान से सुनना। आरबीआई ने

[08:03:51] क्या किया? शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स को सेल

[08:03:52] किया और लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स को बाय किया।

[08:03:54] अगर हम शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स को सेल कर रहे

[08:03:56] हैं। जैसे मान लो आरबीआई ने सेल किया

[08:03:58] शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स को बेचा तो लोगों से

[08:04:01] पैसा ले लिया।

[08:04:03] ठीक है? एक्चुअल तो पता है क्या हो रखा

[08:04:05] है? मार्केट में बहुत ज्यादा पैसा हो रखा

[08:04:08] है। तो आरबीआई क्या चाहता है? आरबीआई

[08:04:10] चाहता है कि नहीं नहीं यार मार्केट से

[08:04:11] पैसा ले लो। तो कैसे लेंगे? शॉर्ट टर्म

[08:04:13] बॉन्ड्स बेच देंगे और पैसा ले लेंगे। तो

[08:04:16] लिक्विडिटी कम हो जाएगी। हां, ठीक है। बट

[08:04:19] एट द सेम टाइम आरबीआई के दिमाग में एक बात

[08:04:22] और भी है कि यार हमें लॉन्ग टर्म बॉन्ड

[08:04:24] ईल्ड्स का ध्यान रखना है। अब देखो जब

[08:04:28] आरबीआई ने बाय किया ना लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स

[08:04:30] को यार बिल्कुल लॉजिक से समझेंगे। ठीक है?

[08:04:32] कुछ याद कुछ रटने की कोई जरूरत नहीं है

[08:04:34] यहां पे। देखो लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स बाय

[08:04:36] किया। जब आरबीआई लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स को

[08:04:38] बाय करेगा ना। लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स की बात

[08:04:41] कर रहा हूं। जब लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स को

[08:04:42] आरबीआई ने बाय किया ना तो लॉन्ग टर्म

[08:04:44] बॉन्ड्स की डिमांड बढ़ी और लॉन्ग टर्म

[08:04:46] बॉन्ड्स की जब डिमांड बढ़ती है तो सर उसका

[08:04:48] प्राइस बढ़ेगा और जब लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स

[08:04:50] का प्राइस बढ़ेगा तो उनकी जो यील्ड है वो

[08:04:52] कम हो जाएगी। मैंने आपको पहले ही बताया

[08:04:54] प्राइस एंड यील्ड इनवर्सली रिलेटेड होते

[08:04:56] हैं। तो एक्चुअली आरबीआई को एक टाइम था जब

[08:04:59] आरबीआई चाहता था कि लॉन्ग टर्म बॉन्ड

[08:05:01] यील्ड कम हो। तो उस टाइम उसने क्या किया?

[08:05:04] लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स को अपना बाय किया एंड

[08:05:07] शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स को सेल किया। क्योंकि

[08:05:08] आरबीआई को दो ऑब्जेक्टिव थे उस टाइम के

[08:05:10] ऊपर। आरबीआई चाहता था कि लिक्विडिटी जो

[08:05:12] बहुत ज्यादा हो रखी है उसको कम किया जाए।

[08:05:14] एंड एट द सेम टाइम लॉन्ग टर्म वॉल्यूम कल

[08:05:16] कम की जाए। लॉन्ग टर्म बॉन्डिंग कम करने

[08:05:18] के लिए उसने बाय किया लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स

[08:05:20] को।

[08:05:22] ये होता है आपका ऑपरेशन ट्विस्ट। एक ही

[08:05:25] टाइम के ऊपर शॉर्ट टर्म बॉन्ड सेल करना और

[08:05:28] लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स बाय करना। यह है

[08:05:30] ऑपरेशन ट्विस्ट।

[08:05:33] ठीक है? ओके। थोड़ा ज्यादा टफ तो नहीं हो

[08:05:36] रहा यह? ठीक है? ज्यादा टफ तो नहीं हो

[08:05:39] रहा?

[08:05:43] हां गोल्ड्डी लॉक यस आंसर इज यस

[08:05:48] अच्छा एक कांसेप्ट ऐसे और भी होता है

[08:05:50] स्टेरलाइजेशन स्टेरलाइजेशन किसको बोलते

[08:05:52] हैं सेम बात ये एक तरह का ओपन मार्केट

[08:05:55] ऑपरेशन ही है यहां पर आप गवर्नमेंट

[08:05:57] सिक्योरिटी को बाय एंड सेल करते हो ठीक है

[08:06:00] इसका पर्पस पता है क्या था मैं आपको

[08:06:02] एक्सप्लेन कर देता हूं आप लोगों को ना ये

[08:06:03] कॉन्सेप्ट शायद समझ नहीं आए होंगे पहले कई

[08:06:05] बार कई बच्चों को आप लोगों ने यह कांसेप्ट

[08:06:08] सुना होगा स्टेरलाइजेशन का

[08:06:12] या आप लोगों ने मार्केट स्टेबलाइजेशन

[08:06:14] स्कीम करके नाम भी सुना होगा। ये सिमिलर

[08:06:16] कांसेप्ट्स हैं। सिमिलर कांसेप्ट्स हैं।

[08:06:21] इसमें पता क्या होता है? देखो ये कांसेप्ट

[08:06:24] समझना। इनका मतलब ओपन मार्केट ऑपरेशन ही

[08:06:27] है। बट फर्क समझना। पॉइंट पता है क्या है?

[08:06:31] विदेशों से कई बार बहुत ज्यादा डॉलर्स आ

[08:06:34] जाते हैं। ठीक है? आ गए डॉलर। फिर अगर

[08:06:36] विदेशों से बहुत ज्यादा डॉलर आ जाएंगे तो

[08:06:38] भारत में डॉलर की सप्लाई बढ़ जाएगी। समझना

[08:06:42] इस बात को। डॉलर का इनफ्लो हुआ।

[08:06:47] डॉलर का इनफ्लो होने का मतलब डॉलर की

[08:06:50] सप्लाई बढ़ी।

[08:06:52] डॉलर की सप्लाई बढ़ी मतलब डॉलर डेप्रिशिएट

[08:06:55] किया। डॉलर डेप्रिशिएट करने का मतलब रुपया

[08:06:58] एप्रिशिएट किया। ठीक है? अब यार बाकी सब

[08:07:02] तो सही है पर रुपया मजबूत हो चुका है और

[08:07:06] रुपया मजबूत होने से ना आप लोग एक बात

[08:07:08] जानते हैं क्या जानते हैं हम एक्सटर्नल

[08:07:10] सेक्टर पढ़ के आए रुपया मजबूत होगा ना सर

[08:07:13] तो हमारे इंपोर्टर को नुकसान हो जाएगा

[08:07:18] सॉरी नॉट इंपोर्टर आई एम वेरी सॉरी रुपया

[08:07:20] मजबूत होने से आपके एक्सपोर्टर को नुकसान

[08:07:22] हो जाएगा रुपया कमजोर होने से एक्सपोर्टर

[08:07:24] को फायदा होता है और रुपया मजबूत होने से

[08:07:26] आपके एक्सपोर्टर को नुकसान हो जाएगा अब हम

[08:07:28] नहीं चाहते कि रुपया मजबूत हो क्योंकि

[08:07:30] रुपया मजबूत होने से एक्सपोर्टर को नुकसान

[08:07:31] होता है। तो क्या करेंगे ऐसे केस में?

[08:07:34] आरबीआई ने कहा यार एक काम करो।

[08:07:39] आप एक काम करो ना रुपया मजबूत हो गया ना

[08:07:42] आप रुपए को कमजोर कर दो थोड़ा सा। कैसे कर

[08:07:45] सकते हैं? आपने रुपया मार्केट में इसकी

[08:07:48] सप्लाई बढ़ा दी। अब देखो रुपए की अगर

[08:07:51] सप्लाई बढ़ गई ना, रुपए की सप्लाई बढ़ गई।

[08:07:54] ठीक है? रुपए की सप्लाई बढ़ने से रुपया अब

[08:07:57] कमजोर हो जाएगा। जो बहुत ज्यादा मजबूत हो

[08:07:59] गया था ना वह अब नॉर्मल हो जाएगा। ठीक है?

[08:08:02] रुपए की सप्लाई बढ़ने से रुपया तो स्टेबल

[08:08:04] हो गया। रुपया स्टेबल हो गया। अब वो मजबूत

[08:08:07] नहीं रहा। अब वो स्टेबल हो गया। पर हमने

[08:08:09] एक दूसरी समस्या खड़ी कर दी। क्या समस्या

[08:08:11] खड़ी कर दी? जब रुपए की सप्लाई बढ़ चुकी

[08:08:13] है। अब मार्केट में महंगाई हो जाएगी। हो

[08:08:16] जाएगी नहीं हो जाएगी? जब रुपए की सप्लाई

[08:08:18] बढ़ गई है। तो क्या कर सकते हैं यहां पे?

[08:08:20] सर यहां पर हम एक काम कर सकते हैं। जो

[08:08:22] एक्स्ट्रा सप्लाई है उसको कम कर सकते हैं।

[08:08:24] पर वो कैसे करेंगे? अरे सिंपल बात है। मैं

[08:08:27] क्या करूंगा आरबीआई? मैं यहां पर जो बॉन्ड

[08:08:29] है उसको सेल कर दूंगा। आई विल सेल देम। जब

[08:08:32] ये मैं बॉन्ड सेल करूंगा तो बदले में

[08:08:34] मार्केट से पैसा आ जाएगा। तो एक्चुअली

[08:08:36] मैंने क्या किया? यहां पर मैंने सेल किया

[08:08:38] गवर्नमेंट सिक्योरिटी को। आरबीआई ने।

[08:08:40] आरबीआई जब सेल करेगा ना गवर्नमेंट

[08:08:42] सिक्योरिटी को तो कहीं ना कहीं जो

[08:08:44] इनफ्लेशन है वो यहां पे कंट्रोल में आ

[08:08:46] जाएगा।

[08:08:48] समझे मेरी बात को? क्या ये लॉजिक आपको

[08:08:50] क्लियर हुआ? पूरा डायग्राम।

[08:08:54] डायग्राम समझ आया आपको? कैसे किया? तो

[08:08:56] एक्चुअली ना ये ओपन मार्केट ऑपरेशन ही है।

[08:08:58] बस करा क्यों जा रहा है? क्योंकि बहुत

[08:09:00] ज्यादा डॉलर्स आ चुके हैं।

[08:09:05] क्या ये बात क्लियर हुई या नहीं हुई?

[08:09:11] ठीक है।

[08:09:21] एक बच्चा पूछ रहा है कि रुपया एप्रिशिएट

[08:09:24] होने से इनफ्लेशन कैसे आ सकता है?

[08:09:27] देखो इस बात को समझो आप। अगर

[08:09:33] रुपया मजबूत हो जाएगा ना जैसे रुपया कमजोर

[08:09:36] हो रहा था तो आपके एक्सपोर्टर को फायदा

[08:09:38] था। इंपोर्टर को नुकसान था। रुपया मजबूत

[08:09:41] होने से भी आपके लिए दिक्कतें आ सकती हैं

[08:09:42] क्योंकि आपके एक्सपोर्ट्स कॉम्प्रोमाइज हो

[08:09:44] सकते हैं उस कॉन्सेंट को उस कॉन्टेक्स्ट

[08:09:46] में।

[08:09:49] ठीक है? तो ये स्टेरलाइजेशन और मार्केट

[08:09:51] स्टेबिलाइजेशन स्कीम क्या है? ये आपका

[08:09:53] देखने को मिलता है विद रिगार्ड्स टू आपका

[08:09:56] ओपन मार्केट ऑपरेशंस।

[08:10:03] कुछ दो तीन क्वेश्चन ट्राई करते हैं।

[08:10:06] एक जैसे ये क्वेश्चन देखो एक बार।

[08:10:12] हां हां एमएसएस एक स्कीम है भाई। एमएसएस

[08:10:14] स्कीम है जो इसको मैनेज करती है। बिल्कुल

[08:10:17] 20034 में आई थी।

[08:10:26] मार्केट स्टेबलाइजेशन स्कीम

[08:10:31] क्या नहीं होता डॉलर का? क्यों नहीं होता?

[08:11:17] देखो सिंपल है। स्प्रेड का मतलब पता है

[08:11:20] क्या होता है? देखो एक पर्टिकुलर बैंक जो

[08:11:23] होता है ना वो एक होता है लेंडिंग रेट जिस

[08:11:26] रेट पे वो लैंड करता है। जैसे मान लो अगर

[08:11:29] आप बैंक से पैसा उधार लेते हो और बैंक

[08:11:31] आपके ऊपर मान लो 10% चार्ज करे। नाउ 10%

[08:11:33] इज़ योर लेंडिंग रेट। बट ऑन द अदर हैंड एक

[08:11:36] होता है डिपॉजिट रेट। जिस रेट के ऊपर आप

[08:11:38] बैंक में पैसा जमा कराते हो। इन दोनों का

[08:11:41] डिफरेंस लेंडिंग रेट माइनस डिपॉजिट रेट।

[08:11:44] यही होता है आपका क्या? इट इज़ कॉल्ड ए

[08:11:46] स्प्रेट। मान लो आपकी लेंडिंग रेट है मान

[08:11:48] लो 10 10% और मान लो बैंक डिपॉजिट लेता है

[08:11:52] 4% पे तो यहां पर बैंक का स्प्रेड क्या हो

[08:11:55] जाएगा 10 - 4 व्हिच बिकम्स नथिंग बट योर

[08:11:58] 6%

[08:12:00] ठीक बात है

[08:12:03] अच्छा इसको ट्राई करना एक बार

[08:12:32] ठीक है? अगर सेशन अच्छा लग रहा हो तो लाइक

[08:12:34] जरूर कर देना सेशन को। ठीक है? अगर सेशन

[08:12:36] समझ आ रहा हो अच्छे से।

[08:12:58] अब देखो इसमें ट्राई करो। इसमें ना देखो

[08:13:01] आपको एटलीस्ट फर्स्ट और फोर्थ में तो

[08:13:04] बिल्कुल गलती नहीं करनी चाहिए।

[08:13:06] क्या करना है हमें? हमें मनी सप्लाई को

[08:13:08] यहां पे बढ़ाना है। हमें जब मनी सप्लाई को

[08:13:11] दोस्तों बढ़ाना होता है ना तो हम कैसे

[08:13:12] बढ़ा सकते हैं? कैसे बढ़ा सकते हैं? देखो

[08:13:16] हमारा आरबीआई है ना अगर आरबीआई अगर

[08:13:19] सेंट्रल बैंक से कुछ खरीद सॉरी अगर आपका

[08:13:21] आरबीआई लोगों से गवर्नमेंट सिक्योरिटी

[08:13:23] खरीदे तो बदले में पैसा देगा। बिल्कुल

[08:13:25] देगा। तो जब हम परचेस करते हैं ना जब

[08:13:28] आरबीआई परचेस करता है तो उस केस में क्या

[08:13:31] होता है? उस केस में यहां पर आपका मनी

[08:13:33] सप्लाई बढ़ती है। अगर आरबीआई सेल कर रहा

[08:13:35] होता, अगर आरबीआई सेल करता गवर्नमेंट

[08:13:37] सिक्योरिटी तो तो मनी सप्लाई कम हो जाती।

[08:13:39] इसीलिए फर्स्ट स्टेटमेंट इज़ राइट। फोर्थ

[08:13:41] इज़ रॉन्ग। ठीक है? और आप यहां पे थोड़ा

[08:13:44] एलिमिनेशन भी यहां पे लगा सकते हो। समझे

[08:13:47] मेरी बात को? तो अगर ये बात समझ आ गई है।

[08:13:49] अब बस आपको देखना है कि थर्ड स्टेटमेंट

[08:13:51] सही है या गलत है। थर्ड कह रहा है कि अगर

[08:13:53] सरकार बोरो करेगी। बिल्कुल। इससे भी कहीं

[08:13:55] ना कहीं आपका मनी सप्लाई यहां पे बढ़ेगी।

[08:13:57] सो दैट इज़ व्हाई इसका आंसर बनेगा। ऑप्शन

[08:13:59] थ्री इज द राइट आंसर।

[08:14:06] ठीक है?

[08:14:10] हां। एक दो बातें और हैं यहां पे। मैं वो

[08:14:13] भी आपको बता देता हूं।

[08:14:15] ठीक है? ओएमओ आपको समझ आ गया। हां। एक दो

[08:14:17] दो पॉइंट्स और हैं।

[08:14:23] एक है आपका बैंक रेट। देखो प्लीज समझना

[08:14:27] यहां पर इस पॉइंट को।

[08:14:29] प्लीज इस पॉइंट को यहां पर आप समझना।

[08:14:32] बैंक रेट क्या होता है? देखो यहां पर भी

[08:14:35] क्या है ना आरबीआई लोनस ही दे रहा है आपको

[08:14:38] बैंक्स को पर लंबे समय के लिए और बिना

[08:14:40] किसी कोलैटरल के। हमने पीछे डिस्कस किया

[08:14:42] था ना जैसे क्या डिस्कस किया था? रेपो रेट

[08:14:45] के अंदर आपका कोलैटरल इन्वॉल्व होता है।

[08:14:47] बैंक रेट के अंदर कोई कोलैटरल इन्वॉल्व

[08:14:49] नहीं होता। आज के समय इसका ज्यादा

[08:14:51] इस्तेमाल नहीं होता। आज के समय इसका

[08:14:52] मोस्टली इस्तेमाल अपने पेनल्टी रेट्स को

[08:14:54] डिसाइड करने के लिए होता है। वो होता है

[08:14:56] आपका रेपो रेट।

[08:14:58] और

[08:15:00] आगे मैं अगर बात करूं तो यहां पर एक आता

[08:15:04] है रेपो आजकल ना लॉन्ग टर्म भी होता है।

[08:15:06] ठीक है? रेपो रेट जरूरी नहीं है कि आपका

[08:15:08] शॉर्ट टर्म ही हो। रेपो रेट आपका लॉन्ग

[08:15:10] टर्म रेपो ऑपरेशंस भी यहां पे होते हैं

[08:15:12] व्हिच कैन बी फॉर अ पीरियड ऑफ़ वन टू थ्री

[08:15:14] इयर्स। ठीक है? वन एंड थ्री इयर्स के लिए

[08:15:16] आपको यहां पे ये रेपो रेट आपको यहां पे

[08:15:18] देखने को मिल जाता है।

[08:15:24] ठीक बात है।

[08:15:29] किसी को यहां पर कोई डाउट कोई कंफ्यूजन

[08:15:31] है?

[08:15:46] देखो रेपो के अंदर गोल्ड लॉ क्या होता है?

[08:15:48] रेपो के अंदर आपका कोलैटरल इनवॉल्व होना

[08:15:51] जरूरी है। बैंक रेट के अंदर कोई कोलैटरल

[08:15:53] नहीं होता।

[08:15:55] समझ रहे हो? हां। आर्यांश कह रहे हैं,

[08:15:58] "सर, टीएलटीआरओ भी होता है। हां। देखो, यह

[08:16:01] है लॉन्ग टर्म रेपो। तो, यह रेपो ऑपरेशन

[08:16:03] ही हुआ। कोलटरल इनवॉल्व होगा। बस ये एक से

[08:16:06] 3 साल के लिए होता है। अगर हम बात करते

[08:16:09] हैं टीएलटीआरओ की, तो यहां पर वर्ड आ जाता

[08:16:12] है टारगेटेड। यहां पर भी आपका आरबीआई

[08:16:14] बैंकों को पैसा देगा। लॉन्ग टर्म के लिए

[08:16:17] देगा, कोलैटरल के साथ देगा। मतलब कोलैटरल

[08:16:19] लेगा। पर ये जो पैसा दिया जा रहा है ना ये

[08:16:22] कुछ एक स्पेसिफिक सेक्टर की तरफ जाना

[08:16:24] चाहिए। इट शुड बी टारगेटेड। ऐसा नहीं कि

[08:16:26] आपने वो पैसा किसी भी सेक्टर को दे दिया।

[08:16:28] नहीं जबजब आरबीआईओ को लगता है नहीं यार एक

[08:16:30] स्पेसिफिक सेक्टर को पैसा जाना चाहिए और

[08:16:32] लंबे समय के लिए तो वो टारगेटेड लॉन्ग

[08:16:33] टर्म रेपो ऑपरेशन के माध्यम से यहां पे

[08:16:35] देता है। कोलैटरल का मतलब होता है गिरवी

[08:16:38] रखना।

[08:16:44] ओके? इज इट फाइन?

[08:16:46] देखो देखो अभी हमारे पास चैप्टर्स तो कई

[08:16:49] सारे हैं। पर एक काम करते हैं। ठीक है?

[08:16:52] मैं आपको एक्सप्लेन कर देता हूं। अभी हम

[08:16:55] यहां पे क्या करते हैं? कुछ करंट अफेयर्स

[08:16:56] वाले टॉपिक्स एक बार पिक कर लेते हैं।

[08:16:58] जैसे एक एग्रीकल्चर का टॉपिक है।

[08:17:01] एग्रीकल्चर में कुछ एक चीजें हैं जो

[08:17:03] न्यूज़ में रही हैं। तो पहले मैं आपको एक

[08:17:05] काम करता हूं। एग्रीकल्चर पढ़ा देता हूं।

[08:17:07] फिर थोड़े से मुझे आपको जीआई टैग्स और कुछ

[08:17:08] करंट अफेयर्स भी डिस्कस करने हैं। तो पहले

[08:17:11] हम एक काम करते हैं उनको हम पहले डिस्कस

[08:17:13] कर लेते हैं। उसके बाद अगर हमारे पास टाइम

[08:17:15] बचेगा तो हम और भी जो स्टैटिक पोर्शन है

[08:17:18] उसको और भी खर-दर कर लेंगे। बट पहले एक

[08:17:20] काम करते हैं हम यहां पे एग्रीकल्चर और

[08:17:21] अपना जो जीआई टैग के कॉन्टेक्स्ट में कुछ

[08:17:24] मुद्दे हैं उनको हम डिस्कस कर लेते हैं।

[08:17:27] ठीक है?

[08:17:29] समझ गए? नहीं समझ गए?

[08:17:32] ओके।

[08:17:34] हां। तो आप एक काम करो मुझे बस 2 मिनट का

[08:17:37] टाइम दो। ठीक है? मैं पीपीटी लगवा देता

[08:17:39] हूं टीम को बोल के। ठीक है? 5 मिनट नहीं

[08:17:41] यार। पीपीटी लगने में 2 मिनट लगेंगे। तो 2

[08:17:44] मिनट का टाइम दो। ठीक है? हम पीपीटी चेंज

[08:17:46] कर रहे हैं। तब तक आप लोग एक बार जरा पानी

[08:17:48] पी लो। 2 मिनट में मिलते हैं। कोई ब्रेक

[08:17:50] नहीं है ये। बस 2 मिनट का ही आपका छोटा सा

[08:17:52] वो है ताकि पीपीटी लगा पाएं। ठीक है?

[08:17:57] यस। तो दोस्तों एग्रीकल्चर पे आते हैं।

[08:17:59] राइट? पीपीटी आ गई हमारे पास। अब

[08:18:02] एग्रीकल्चर में कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमें

[08:18:04] यहां पे न्यूज़ में देखने को मिली। जैसे इस

[08:18:07] साल मखाना बहुत ज्यादा न्यूज़ में रहा और

[08:18:09] इस साल ही नहीं ये पिछले साल भी न्यूज़ में

[08:18:11] काफी ज्यादा। एक तो हमने मखाना जो बोर्ड

[08:18:14] है ना वो यहां पर हमने सेटअप किया है

[08:18:17] बिहार के अंदर।

[08:18:20] ठीक है? दैट इज़ व्हाई इट इज़ इन द न्यूज़।

[08:18:23] साथ ही साथ अगर हम बात करें जो मिथिला

[08:18:26] मिखाना है। ठीक है? उसको भी यहां पे

[08:18:29] ऑलरेडी जीआई टैग मिला हुआ है। आपको पता

[08:18:31] होगा।

[08:18:33] तो थोड़ा सा हम यहां पे मखाने के बारे में

[08:18:35] हम पढ़ लेते हैं। ठीक है? मखाने आप सबने

[08:18:37] खाए भी होंगे। काफी टेस्टी भी होते हैं।

[08:18:39] और अगर हम बात करें मखाने की तो इसको हम

[08:18:42] इंग्लिश में फॉक्स नट के नाम से जानते

[08:18:44] हैं। और एक्चुअली ना ये पानी में उगता है।

[08:18:46] आप यहां पे नोटिस कर पाओगे इसको उगाना कोई

[08:18:49] आसान काम नहीं है। इनफैक्ट हमारे अलग-अलग

[08:18:51] एमपीज और एमएलए ने भी इसकी वीडियोस बनाई

[08:18:53] कि कितना मुश्किल है मखानों को उगाना।

[08:18:56] राइट? तो इसमें आप नोटिस कर पाओगे।

[08:19:01] हां हां हां इस साल भी न्यूज़ में रहा बहुत

[08:19:04] ज्यादा। तो अगर हम बात करें फ्रेश वाटर

[08:19:06] बॉडीज में आपको देखने को मिलता है अक्रॉस

[08:19:07] साउथ एशिया एंड ईस्ट एशिया। एंड अगर हम

[08:19:11] बात करें इसके वायलेट और वाइट फ्लावर्स

[08:19:13] होते हैं। ये भी आप नोटिस करिएगा।

[08:19:16] अब इसकी ना इसको ना ब्लैक डायमंड के नाम

[08:19:19] से भी जानते हैं। इट इज़ आल्सो कॉल्ड एज

[08:19:21] ब्लैक डायमंड। यह बात आप ध्यान में

[08:19:23] रखेंगे। मखाने को खाने के बहुत सारे फायदे

[08:19:26] हैं। जैसे फैट में कम होता है ये। फैट कम

[08:19:29] होते हैं इसके अंदर। कार्बोहाइड्रेट्स

[08:19:30] अच्छे खासे होते हैं और प्रोटीन का भी एक

[08:19:33] बहुतेंट सोर्स है। तो जो लोग वेजिटेरियन

[08:19:35] हैं और कुछ प्रोटीन खाना चाहते हैं उनके

[08:19:37] लिए मखाना एक बहुत अच्छा ऑप्शन अपने आप

[08:19:39] में देखने को मिल जाएगा। बाकी इसका मखाने

[08:19:41] का इस्तेमाल ट्रेडिशन मेडिसिन में हेल्थ

[08:19:43] वेलनेस प्रोडक्ट्स में स्नैक्स वगैरह के

[08:19:45] अंदर भी आपको देखने को मिल जाएगा। कुछ

[08:19:48] बातें जहां से क्वेश्चन बनने की ज्यादा

[08:19:49] संभावना है। पहला तो यह है बिहार जो है ना

[08:19:54] वो भारत का 90% मखाना प्रोडक्शन करता है।

[08:19:58] देखो पहली चीज तो आप ये समझो कि दुनिया

[08:20:00] में सबसे ज्यादा प्रोड्यूसर कौन है सबसे

[08:20:01] बड़ा मखाने का? वो है भारत। और भारत में

[08:20:04] सबसे बड़ा प्रोड्यूसर कौन है? वो है

[08:20:06] दोस्तों बिहार।

[08:20:08] ठीक है? जैसे आपका दरभंगा, मधुबनी,

[08:20:10] पूर्णिया। ये कुछ आपके इंपॉर्टेंट

[08:20:12] डिस्ट्रिक्ट्स हैं। ठीक है? ओके। ओके। पर

[08:20:15] पॉइंट पता क्या है? पॉइंट पता क्या है

[08:20:17] यहां पे? पॉइंट यहां पर यह है कि और भी

[08:20:19] जगह होता है मखाना। असम में होता है

[08:20:21] मणिपुर, वेस्ट बंगाल। पर मेनली आपका यहां

[08:20:24] पे आपका बिहार के अंदर होता है। बट

[08:20:28] एमएसपी

[08:20:30] नहीं मिलता मखाने के लिए। अच्छा ठीक है।

[08:20:33] और दूसरी बात ना बिहार को कोई खास फायदा

[08:20:35] मिलता नहीं मखाने का। मैं आपको समझाता हूं

[08:20:37] क्यों। मखाना प्रोड्यूस करता है बिहार। पर

[08:20:41] उसका प्रोसेसिंग वग़ैरह का काम बिहार में

[08:20:44] होता ही नहीं। क्योंकि बिहार में

[08:20:45] फैक्ट्रीज की कमी है। इसीलिए पता है क्या

[08:20:47] होता है? मखाने जाते हैं आपके कहां पे?

[08:20:50] मखाने जाते हैं आपके पंजाब और असम। यहां

[08:20:52] पर बड़ी-बड़ी फैक्ट्रीज हैं। वो यहां पे

[08:20:55] इनको यहां पे इनकी प्रोसेसिंग करते हैं

[08:20:57] मखाने की। फिर वो एक्सपोर्ट करते हैं। तो

[08:20:59] एक्चुअली जब हम एक्सपोर्ट की बात करेंगे

[08:21:01] ना तो पंजाब और असम सबसे बड़े एक्सपोर्टर

[08:21:04] हैं मखाने के। प्रोड्यूसर वाकई भले ही

[08:21:06] बिहार है पर एक्सपोर्ट नहीं कर पाता

[08:21:08] बिहार। तो एक्सपोर्ट कौन कर रहे हैं?

[08:21:10] पंजाब और असम यहां पे आपका एक्सपोर्ट करते

[08:21:14] हैं। इसके अलावा अगर हम बात करें तो मखाना

[08:21:17] के लिए टेंपरेचर जो चाहिए वह 20 से 35°

[08:21:19] सेंटीग्रेड चाहिए। ह्यूमिडिटी 50 से 90%

[08:21:22] और आपका रेनफॉल जो है वो 100 से 200

[08:21:24] सेंटीमीटर के बीच में यहां पे होना चाहिए।

[08:21:26] आपकी जो रुकी हुई खड़ी हुई वाटर बॉडीज

[08:21:29] होती हैं जैसे पोंड्स लेकक्स वहां पर ये

[08:21:31] ग्रो किया जाता है। ठीक है ना? एंड

[08:21:33] सिमिलरली अगर हम बात करें तो मखाना बोर्ड

[08:21:36] यहां पे बनाया जा रहा है। ठीक है? ताकि ये

[08:21:37] प्रोडक्शन जो है यहां पे बढ़ाई जा पाए।

[08:21:40] मखाने का कुछ दिक्कत पता क्या है कि यहां

[08:21:42] पर ये काफी लेबर इंटेंसिव काम है। जो

[08:21:44] हमारे किसान होते हैं उनको यहां पे पानी

[08:21:48] में जाना पड़ता है और काफी कॉस्टली है

[08:21:50] इसका जो प्रोडक्शन होता है। ठीक है? और

[08:21:52] इनफैक्ट कुछ हमारे पास कुछ हाई यील्डिंग

[08:21:55] वैरायटी जैसे स्वर्ण वैदेही से मखाना इनको

[08:21:58] हमने बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया है।

[08:22:00] वो भी एक अपने आप में एक चिंता की बात है।

[08:22:03] ठीक है? हां। तो ये कुछ बातें हैं मखाने

[08:22:05] के बारे में जो हमें यहां पे पता होनी

[08:22:07] चाहिए। बाकी देखो पीछे मैंने आपको ऑलरेडी

[08:22:09] जब मैंने बजट पढ़ाया ना तो मैंने बजट के

[08:22:11] अंदर आपको यहां पे भारत विस्तार के बारे

[08:22:14] में समझा दिया क्योंकि इस बार के बजट के

[08:22:17] अंदर भारत विस्तार की बात हुई है कि जो जो

[08:22:19] लोग सुबह से जुड़े हुए हैं ना मैंने सुबह

[08:22:21] आपको यहां पे बहुत अच्छे से एक्सप्लेन

[08:22:22] किया था कि भारत विस्तार क्या है? तो ये

[08:22:24] चीज हमने वहां पे डिस्कस की थी। बाकी इस

[08:22:26] बार के बजट के अंदर भारत विस्तार की तो

[08:22:29] बात हुई ही हुई है। इसके अलावा फिशरी

[08:22:30] सेक्टर की भी बात हुई है। फिशरी सेक्टर

[08:22:32] में कैसे बात करी गई है इस बार के बजट

[08:22:34] में? इस बार के बजट में बात करी गई है

[08:22:39] कि एक तो अमृत सरोवर हम यहां पे बनाएंगे।

[08:22:43] हर एक डिस्ट्रिक्ट के अंदर ठीक है? हर एक

[08:22:46] डिस्ट्रिक्ट में 75 वाटर बॉडीज बनाई

[08:22:48] जाएंगी। आपके जैसे पोंड्स वगैरह यहां पे

[08:22:49] बनाए जाएंगे ताकि जो कोस्टल फिशरीज हैं

[08:22:52] उनको हम यहां पे स्ट्रेंथन कर पाएं। है

[08:22:54] ना? तो उसके लिए काम है। सिमिलरली अगर हम

[08:22:57] बात करें मैरीन फिशरीज के लिए आपके

[08:22:59] एक्सपोर्ट के लिए इंसेंटिव्स दिए जा रहे

[08:23:00] हैं। तो ये जो सेक्टर है ना फिशरी सेक्टर

[08:23:02] ये अपने आप में लगभग 8% हर साल ग्रो करता

[08:23:06] है और लगभग 3 करोड़ परिवारों को यहां पे

[08:23:09] ये आपका एक तरह से रोजगार प्रोवाइड करता

[08:23:10] है। ठीक है ना? तो ये कुछ बातें हैं और

[08:23:14] ध्यान रखना यह भी एक सनराइज सेक्टर है।

[08:23:16] सनराइज़ सेक्टर का अर्थ ये होता है कि जो

[08:23:18] सेक्टर अभी स्टार्टिंग फज़ के अंदर है

[08:23:21] इनिशियल फसेस में है पर इसका ग्रोथ

[08:23:23] पोटेंशियल अपने आप पे बहुत ज्यादा है। वो

[08:23:25] होता है सनराइज़ सेक्टर। तो फिशरीज़ के

[08:23:27] कॉन्टेक्स्ट में ये चीजें देखने को मिल

[08:23:29] जाएंगी। ठीक है? बाकी हमने यहां पे 2019

[08:23:32] में एक अलग से मिनिस्ट्री बना दी।

[08:23:33] मिस्ट्री ऑफ़ फिशरीज़, एनिमल हस्बेंडरी एंड

[08:23:35] डेरिंग। यह हमने यहां पे बनाया। एंड इस

[08:23:37] तरह से हम यहां पे फिशरीज़ के लिए भी यहां

[08:23:39] पे काम डेफिनेटली कर रहे हैं।

[08:23:43] ठीक है? अच्छा पिछले साल में एक और स्कीम

[08:23:45] इंपॉर्टेंट आई वो थी आपकी प्रधानमंत्री

[08:23:48] धनधान्य कृषि योजना। अब ये स्कीम भी अपने

[08:23:51] आप में काफी इंपॉर्टेंट है। पॉइंट आता है

[08:23:53] ये क्या है सर? प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि

[08:23:56] योजना। देखो आप सब लोगों ने एस्पिरेशनल

[08:23:59] डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम स्कीम आपने सुना

[08:24:00] होगा जो नीति आयोग रन करता है। एस्पिरेशन

[08:24:02] डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम उसमें पता है बात

[08:24:04] क्या होती है? जो हमारे डिस्ट्रिक्ट थोड़ा

[08:24:07] पिछड़ जाते हैं उनके ऊपर हम स्पेशल ध्यान

[08:24:10] देते हैं। जैसे फॉर एग्जांपल किसी जगह पर

[08:24:12] मान लो एजुकेशन कम है या हेल्थ इंडिकेटर

[08:24:14] अच्छे नहीं है। सोशियो इकोनॉमिक डेवलपमेंट

[08:24:16] उतनी अच्छी नहीं है। उनके ऊपर स्पेशल

[08:24:18] ध्यान दिया जाता है। हमने वहीं से ये बात

[08:24:20] सीखी और हमने सोचा कि क्यों ना यही सेम

[08:24:23] काम हम एग्रीकल्चर के अंदर करें। कैसे?

[08:24:25] कुछ ऐसे डिस्ट्रिक्ट जो कहीं ना कहीं

[08:24:27] पिछड़ गए हैं उनको आगे बढ़ने में हम मदद

[08:24:29] करें। अब पहली बात तो आती है कि सर यहां

[08:24:33] पर कौन से डिस्ट्रिक्ट पिछड़ गए हैं? हमें

[08:24:35] पता कैसे लगेगा? कैसे पता लगेगा? कौन से

[08:24:37] डिस्ट्रिक्ट पिछड़ गए हैं? देखो, यह पता

[08:24:40] लगेगा जब हम यहां पे नोटिस करेंगे। ये पता

[08:24:43] लगेगा जब हम पता लगेगा कि कहां पर

[08:24:46] फाइनेंशियल एक्सेस कम है। मतलब किसानों को

[08:24:48] लोन-वोन कम मिलाता है। दूसरी बात वहां पे

[08:24:51] क्रॉप यील्ड कम है। मतलब आउटपुट उतना

[08:24:55] अच्छा नहीं आ पाता। इनपुट आप दे रहे हो पर

[08:24:58] उतनी अच्छी प्रोडक्टिविटी नहीं है। जैसे

[08:25:00] पंजाब हरियाणा में प्रोडक्टिविटी काफी

[08:25:02] अच्छी है। कई और पार्ट्स ऑफ द कंट्री में

[08:25:03] प्रोडक्टिविटी अच्छी नहीं है। तो यहां पर

[08:25:05] हम उसी के ऊपर फोकस करते हैं कि ऐसे

[08:25:08] डिस्ट्रिक्ट जो थोड़े पिछड़ गए हैं जहां

[08:25:10] प्रोडक्टिविटी कम है। वहां पे किसानों को

[08:25:12] पैसा नहीं मिल पाया, लोन वगैरह नहीं मिल

[08:25:14] पाया उनके ऊपर हम यहां पे ध्यान देंगे। तो

[08:25:16] हम यहां पे कोई अलग से पैसा नहीं देंगे।

[08:25:18] हम यहां पे ऑलरेडी हमारे पास तो पैसा जो

[08:25:20] अलग-अलग स्कीम्स के माध्यम से हैं उन्हीं

[08:25:22] से हम यहां पे पैसा लेके इस चीज को हम

[08:25:24] यहां पे इंप्लीमेंट करेंगे। तो कोशिश यही

[08:25:26] है कि कैसे हम यहां पे इंश्योर करें

[08:25:28] एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी बेहतर हो, क्रॉप

[08:25:30] डायवर्सिटी बेहतर हो। ये सारी चीजों की

[08:25:32] तरफ यहां पे हमारा ध्यान है। तो 100

[08:25:34] डिस्ट्रिक्ट्स जहां पर प्रोडक्टिविटी कम

[08:25:36] है, क्रॉपिंग डेंसिटी मॉडरेट है और

[08:25:39] क्रेडिट कम मिला है उनको यहां पर चूज़ किया

[08:25:42] जाता है। एंड इस तरह से लगभग 1 करोड़ 70

[08:25:45] लाख हमारे किसानों को यहां पे हम इसका

[08:25:47] बेनिफिट यहां पे देंगे। यह है

[08:25:49] प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना।

[08:25:53] बाकी इस साल बहुत ज्यादा बात हुई पल्ससेस

[08:25:56] की। दालों की बात हुई बहुत ज्यादा क्योंकि

[08:25:59] देखो पल्ससेस के केस में ना थोड़ी चिंता

[08:26:01] है। पता है क्यों चिंता है? क्योंकि

[08:26:03] पल्ससेस में भारत अभी भी सेल्फ सफिशिएंट

[08:26:06] नहीं है। भारत आत्मनिर्भर नहीं है। फॉर

[08:26:09] एग्जांपल अगर हम बात करें पल्ससेस की तो

[08:26:12] आप नोटिस कर पाओगे कि पल्ससेस में हमारा

[08:26:15] जो प्रोडक्शन है वो सबसे ज्यादा होता है

[08:26:17] मध्य प्रदेश के अंदर। उसके बाद

[08:26:19] महाराष्ट्र, फिर राजस्थान इस तरह से। अब

[08:26:22] भारत में पल्ससेस जो है ना वो खारीफ सीजन

[08:26:25] में भी लगाई जाती हैं और राबी सीजन में

[08:26:27] भी। पर जो राबी सीजन में जो पल्ससेस लगाते

[08:26:29] हैं ठीक है? जैसे आपका जो नवंबर अक्टूबर,

[08:26:33] नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी जिनको हम

[08:26:35] मार्च के आसपास कल्टीवेट करते हैं वो मेजर

[08:26:37] प्रोडक्शन हमारे यहां पे देखने को मिलती

[08:26:38] है राबी में। हालांकि दोनों सीजन में होती

[08:26:41] है। खारिफ में भी, राबी में भी और मेजरली

[08:26:42] आपको राबी में देखने को मिलेगी। आपको एक

[08:26:45] लाइन पल्ससेस के बारे में ध्यान रखनी है।

[08:26:47] वो पता है क्या है? वो यह है। इंडिया इज

[08:26:50] करेंटली द लार्जेस्ट प्रोड्यूसर,

[08:26:51] लार्जेस्ट कंज्यूमर एंड लार्जेस्ट

[08:26:53] इंपोर्टर ऑफ पल्ससेस इन द वर्ल्ड। दुनिया

[08:26:55] में सबसे ज्यादा दालें प्रोड्यूस भी हम ही

[08:26:57] करते हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा दालें

[08:26:59] खाते भी हम लोग ही हैं और दुनिया में सबसे

[08:27:01] ज्यादा इंपोर्ट भी दालें हम ही करते हैं।

[08:27:04] ऐसा कैसे हो गया सर? अरे भाई हम प्रोड्यूस

[08:27:07] करते हैं। बिल्कुल ठीक है। पर हमारे यहां

[08:27:09] जरूरत ज्यादा होती है। तो इसीलिए हमें

[08:27:11] यहां पे कंजमशन हमारी बहुत ज्यादा है।

[08:27:13] इसीलिए हमें जो अपनी जरूरत है उसको मीट अप

[08:27:15] करने के लिए हमें इंपोर्ट करवाना पड़ता

[08:27:17] है। ठीक है ना? इंडिया सबसे बड़ा

[08:27:19] प्रोड्यूसर है। उसके बाद कनाडा, चाइना ये

[08:27:22] सब देश आपको यहां पे देखने को मिल जाएंगे।

[08:27:24] जैसे अगर हम बात करें ना

[08:27:27] चिक पीस यह मेजर आपका दाल आपको देखने को

[08:27:30] मिलेगी। फिर पिजन पी हो गया, काला चना हो

[08:27:32] गया। ठीक है? ये सारे आपको मेजर आपको

[08:27:34] देखने को मिल जाएंगे। अब पल्ससेस का फायदा

[08:27:36] क्या है? देखो पल्ससेस एक तो प्रोटीन

[08:27:38] अच्छा खासा होता है पल्ससेस के अंदर। बाकी

[08:27:40] विटामिंस मिनरल्स भी आपको इसके अंदर देखने

[08:27:42] को मिल जाएंगे। और इनफैक्ट ना पल्ससेस

[08:27:44] क्योंकि लेग्यूम क्रॉप है ना ये एक तरह की

[08:27:46] लेगम क्रॉप है। तो इससे कहीं ना कहीं आप

[08:27:48] नोटिस कर पाओगे कि आपकी जो फर्टिलिटी होती

[08:27:50] है वो भी यहां पे ठीक-ठाक मेंटेन यहां पे

[08:27:52] रहती है। तो पल्ससेस के भी ये न्यूज़ में

[08:27:55] रहेंगे क्योंकि इंपोर्ट डिपेंडेंसी है

[08:27:57] हमारे यहां पे। दैट इज़ आल्सो देयर।

[08:28:01] ठीक है? और ये बात ध्यान में रखिएगा सोॉइल

[08:28:03] फर्टिलिटी में भी इनका इंपॉेंट रोल है।

[08:28:05] पल्ससेस जो होती हैं वो एटमॉस्फेरिक

[08:28:08] नाइट्रोजन को फिक्स करती हैं। फिक्सिंग द

[08:28:10] एटमॉस्फेरिक नाइट्रोजन। उससे आपकी सोॉइल

[08:28:13] की फर्टिलिटी जो है बायोडायवर्सिटी जो है

[08:28:15] वो यहां पर बेहतर होती है।

[08:28:19] ठीक है?

[08:28:21] हां। देखो कुछ बातें एग्रीकल्चर की चलती

[08:28:23] रहती हैं। ठीक है ना? कुछ बातें

[08:28:25] एग्रीकल्चर में चेंज होती हैं।

[08:28:28] बाकी एक कांसेप्ट आपको जो यहां पे और यह

[08:28:31] पिछले साल भी हुआ था कार्बन बॉर्डर

[08:28:33] एडजस्टमेंट मैकेनिज्म पर ये इस बार से

[08:28:35] इंप्लीमेंट होना स्टार्ट हो चुका है।

[08:28:37] एक्चुअली पता है पॉइंट पता है क्या है? ये

[08:28:39] कांसेप्ट आया है सीबीएम का रिगार्डिंग

[08:28:42] यूरोपियन यूनियन। ईयू के कॉन्टेक्स्ट में

[08:28:45] न्यूज़ में है। क्या है न्यूज़ में? कार्बन

[08:28:48] बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म। ये फाइनली

[08:28:51] स्टार्ट हो चुका है। पहले बातें हो रही थी

[08:28:53] कि कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म

[08:28:56] स्टार्ट होगा। पर अब ये स्टार्ट हो चुका

[08:28:57] है। अब क्या है इसके अंदर? देखो अब यहां

[08:29:00] पे ईयू ने पता है क्या बोला है

[08:29:05] कि देखो

[08:29:07] अगर मान लो कोई सामने वाला देश है। जैसे

[08:29:09] फॉर एग्जांपल इंडिया।

[08:29:14] अब मान लो इंडिया ने क्या किया? कोई चीज़

[08:29:16] प्रोड्यूस करी। उस चीज के प्रोडक्शन में

[08:29:19] उसने यहां पे मान लो पेड़ काटे। जैसे मान

[08:29:21] लो हमने कॉफी लगाई किसी जगह पे पेड़ काट

[08:29:24] के लगाई। तो हमने वहां पे पता है क्या

[08:29:25] किया? हमने यहां पे एनवायरमेंट को नुकसान

[08:29:28] पहुंचाया। हम ऐसा कोई भी एक्टिविटी अगर हम

[08:29:30] कर रहे हैं जहां पर हम यहां पे एनवायरमेंट

[08:29:33] को नुकसान पहुंचा रहे हैं। एंड अगर वो हम

[08:29:35] प्रोडक्ट यहां पे ईयू भेजने की कोशिश कर

[08:29:37] रहे हैं तो ईयू या तो उस चीज को एक्सेप्ट

[08:29:39] नहीं करेगा या फिर वहां पर एक टैक्स

[08:29:41] लगाएगा। अब यहां पर पता है क्या होगा?

[08:29:43] हमारे जो प्रोड्यूसर हैं उनको बड़ी दिक्कत

[08:29:45] आ जाएगी। उनको हर एक चीज अप्रूवल करवानी

[08:29:47] पड़ेगी। अप्रूवल करवाना पड़ेगा। बड़ा

[08:29:49] मुश्किल हो जाएगा वो प्रोसेस उसको चेक

[08:29:50] करना कि हां वाकई में इसमें कोई

[08:29:52] एनवायरमेंट का नुकसान नहीं हुआ। तो वो

[08:29:55] प्रोडक्ट अपने आप में ईयू तक जाते-जाते

[08:29:56] बड़ा ही एक्सपेंसिव हो जाएगा। तो हमारे

[08:29:58] एक्सपोर्टर को एक बहुत नुकसान यहां पे

[08:30:00] इससे झेलना पड़ सकता है। बिकॉज़ ऑफ़ दिस

[08:30:02] कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म। यह

[08:30:05] फाइनली यहां पे स्टार्ट हो चुका है और ईयू

[08:30:07] इसको बोल रहा है कि जो उनका फिट फॉर 55

[08:30:09] पैकेज है या जो चाहते हैं वो एनवायरमेंट

[08:30:11] के लिए काम करना उसके लिए यहां पे ये

[08:30:13] हेल्पफुल होगा। तो प्लीज एक बार इस लाइन

[08:30:15] को ध्यान में पढ़िएगा। जिनको नहीं दिख रहा

[08:30:17] मैं आपको पढ़ के बोल देता हूं। ध्यान से

[08:30:19] देखो। सीबीएम या कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट

[08:30:23] मैकेनिज्म इज अ ईयू रेगुलेशन। ठीक है?

[08:30:27] यूरोपियन यूनियन का एक रेगुलेशन है। जहां

[08:30:29] पर क्या करते हैं? हम लोग हम लोग मतलब ईयू

[08:30:33] कि जितना भी आइटम्स को प्रोड्यूस करते समय

[08:30:36] जो भी उनके ऊपर आपने कार्बन को एमिट किया

[08:30:39] है उसके ऊपर एक प्राइस डाला जाएगा। एक

[08:30:42] प्राइस डाला जाएगा एंड उस बेसिस के ऊपर

[08:30:44] यहां पे उसकी जो कॉस्ट है वो यहां पे बढ़ा

[08:30:46] दी जाएगी। यह है कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट

[08:30:49] मैकेनिज्म। ठीक है? जैसे फॉर एग्जांपल अगर

[08:30:52] हम बात करें सीमेंट, आयरन एंड स्टील,

[08:30:54] एलुमिनियम, फर्टिलाइज़र्स, पावर,

[08:30:55] हाइड्रोजन इन सबके ऊपर हो गया। है ना? तो

[08:30:58] ये सारी चीजें आपको यहां देखने को

[08:31:00] मिलेंगी।

[08:31:02] बाकी देखो ये चीजें तो ठीक है। इसमें और

[08:31:04] कुछ ज्यादा कुछ नहीं है। हां। बट एक दो

[08:31:06] बातें और भी हैं। जैसे आप लोगों ने नोटिस

[08:31:09] किया होगा।

[08:31:13] आप लोगों ने नोटिस किया होगा। इसके अलावा

[08:31:15] एक होते हैं आपके

[08:31:17] प्रॉपर्टी कार्ड्स।

[08:31:19] देखो होता पता क्या है? आपके सिलेबस में

[08:31:24] जो मेंस का सिलेबस है उसमें लैंड

[08:31:25] रिफॉर्म्स का टॉपिक भी लिखा हुआ है। और

[08:31:27] उसी कॉन्टेक्स्ट में एक टॉपिक आ जाता है

[08:31:29] आपका स्वमित्व स्कीम का। स्वमित्व स्कीम

[08:31:32] क्या है? इट इज़ सर्वे ऑफ़ विलेजेस एंड

[08:31:34] मैपिंग विद इंप्रोवाइज टेक्नोलॉजी इन

[08:31:36] विलेज एरियाज़। मेरा पहला क्वेश्चन आपसे

[08:31:39] यही है। क्या इसमें हम लोग एग्रीकल्चर

[08:31:42] लैंड की मैपिंग की बात कर रहे हैं या

[08:31:43] नहीं? क्या इसमें एग्रीकल्चर लैंड इंक्लूड

[08:31:45] होती है या नहीं होती? आप मुझे इस

[08:31:47] क्वेश्चन का आंसर दें।

[08:31:57] ठीक है? अब ये जो स्कीम है ना ये एक

[08:32:00] सेंट्रल सेक्टर स्कीम है जो कि 2020 में

[08:32:04] इसको यहां पे ल्च किया गया था। अब ध्यान

[08:32:06] से सुनना। यह जो स्वामित्व वाली स्कीम है

[08:32:08] ना इसमें ना एक वर्ड आता है दैट इज आबादी

[08:32:11] एरियाज। आबादी एरियाज का मतलब पता है क्या

[08:32:14] है? रेजिडेंशियल एरियाज। जो आपकी

[08:32:16] स्वामित्व स्कीम है इसमें एग्रीकल्चर लैंड

[08:32:20] को कवर नहीं किया जाता। प्लीज इस बात को

[08:32:21] समझना। यहां पर आपका क्या होता है? आपकी

[08:32:25] स्वामित्व स्कीम के अंदर केवल और केवल

[08:32:28] आपकी जो रेजिडेंशियल लैंड है, सिर्फ उसको

[08:32:30] किया जाता है। तो यहां पर आपको प्रॉपर्टी

[08:32:32] कार्ड मिलते हैं। तो इसका आंसर है नो। आप

[08:32:34] लोग यस लिख रहे हो पर नहीं। यहां पर

[08:32:36] प्रॉपर्टी कार्ड्स जो मिलते हैं वो यहां

[08:32:38] पर आपके घर के लिए मिलते हैं। आपके यहां

[08:32:40] पे एग्रीकल्चर लैंड के लिए यहां पे नहीं

[08:32:43] मिलते। इस बात को आप यहां पे ध्यान में

[08:32:45] रखिएगा। ठीक है? तो इस स्कीम के अंतर्गत

[08:32:48] क्या होता है? जो भी अब आबादी एरियाज हैं

[08:32:50] ना उनको यहां पे देखा जाता है। तो

[08:32:52] इनहैबिटेड एरियाज जो आपके गांव के अंदर

[08:32:54] आपके इनहबिटेड एरियाज हैं उनकी हम यहां पे

[08:32:56] बात करते हैं। ठीक है? तो प्रॉपर्टी

[08:32:59] गार्ड्स मिलते हैं और इसको यहां पे

[08:33:00] इंप्लीमेंट कौन करता है? यहां पर

[08:33:04] मिनिस्ट्री ऑफ पंचायती राज मेजर काम करती

[08:33:06] है। इसके अलावा जो सर्वे ऑफ इंडिया है।

[08:33:08] ठीक है? और साथ-साथ आपका जो एनआईसी है

[08:33:10] नेशनल इनफेटिव सेंटर ये आपको यहां पे

[08:33:12] देखने को मिलेगा। तो इनके अलग-अलग नाम है

[08:33:14] अलग-अलग स्टेट्स में जैसे हरियाणा में

[08:33:16] इसको टाइटल डीड बोलते हैं। कर्नाटका में

[08:33:18] इसको रूरल प्रॉपर्टी ओनरशिप रिकॉर्ड बोलते

[08:33:20] हैं। मध्य प्रदेश में अधिकार अभिलेख बोलते

[08:33:22] हैं। महाराष्ट्र में सनद इसको बोलते हैं।

[08:33:24] ऐसे अलग-अलग नाम हैं। यूपी में इसको घौनी

[08:33:26] के नाम से बोला जाता है। तो देयर आर

[08:33:28] डिफरेंट नेम्स। बट हम चाहते पता है क्या

[08:33:30] हैं कि आपकी जो गांव की जमीन है ना उसके

[08:33:32] लिए आपके पास प्रॉपर एक डॉक्यूमेंट आपका

[08:33:34] ओनरशिप यहां पे रिकॉर्ड जो है वो यहां पे

[08:33:36] आ जाए। ठीक है? तो ये यहां पे आपको देखने

[08:33:39] को मिलेगा सुमित्र स्कीम के कॉन्टेक्स्ट

[08:33:40] में और इसका आप इस्तेमाल कर सकते हो।

[08:33:42] बैंकों से लोन लेने के लिए इस्तेमाल कर

[08:33:44] सकते हो क्योंकि आपके पास अब एक प्रॉपर्टी

[08:33:46] कार्ड आ चुका है। हां। ये गांव की बात है।

[08:33:48] यस। यह गांव की बात है। ठीक है ना? गुड।

[08:33:53] ऐसी ही एक स्कीम पिछले साल स्टार्ट हुई।

[08:33:55] नक्शा स्कीम। नक्शा क्या है? नक्शा है

[08:33:58] दोस्तों आपका नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज

[08:34:03] बेस्ड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशंस। अब यहां

[08:34:06] पर बात आ चुकी है अर्बन एरियाज की। जैसे

[08:34:08] सुमित्र स्कीम थी ना आपकी गांव के लिए जो

[08:34:11] यहां पर आपका जो नक्शा स्कीम है ये शहरों

[08:34:13] के लिए है। ये अर्बन एरियाज के लिए है।

[08:34:15] हालांकि इसमें थोड़ा बहुत आपके अर्बन

[08:34:17] एरियाज के आसपास का एरिया भी यहां पे कवर

[08:34:19] हो जाएगा। तो दैट पार्ट इज़ आल्सो देयर बट

[08:34:21] मेजर इनका फोकस कहां रहेगा? अर्बन एरियाज

[08:34:23] के ऊपर। तो इसमें आपकी 152 अर्बन लोकल

[08:34:26] बॉडीज को हम कवर करेंगे। एंड इसमें देखो

[08:34:29] ध्यान देना इसमें जो मिनिस्ट्री है ना वो

[08:34:30] मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट ही है।

[08:34:32] एक्चुअली इसकी नक्शा स्कीम की जो

[08:34:34] मिनिस्ट्री है दैट इज़ मिनिस्ट्री ऑफ रूरल

[08:34:35] डेवलपमेंट उसके अंतर्गत आपका जो

[08:34:37] डिपार्टमेंट ऑफ लैंड रिसोर्सेज हैं। तो ये

[08:34:39] क्या करेंगे? आपके अर्बन एरियाज के जो

[08:34:40] रिकॉर्ड्स हैं उनको क्रिएट करना, उनको

[08:34:42] अपडेट करना। ये इनकी यहां पे जिम्मेदारी

[08:34:44] बनेगी। एंड इसके लिए भी सर्वे ऑफ़ इंडिया

[08:34:46] यहां पे इनकी मदद कर रहा है। तो कल को कोई

[08:34:48] पूछे कि नक्शा स्कीम किसके साथ लिंक्ड है?

[08:34:50] यह भी आपकी यहां पे इस तरह से आपकी लैंड

[08:34:52] को अपना देखना अर्बन एरियाज के अंदर एंड

[08:34:55] उस तरह से उनके प्रॉपर इमेज बनाना एंड उस

[08:34:57] बेसिस के ऊपर यहां पे प्रॉपर्टी कार्ड्स

[08:34:59] यहां पे जो है वो यहां पे देना वो इस

[08:35:01] नक्शा स्कीम का आपको काम देखने को मिल

[08:35:03] जाएगा।

[08:35:10] बाकी जो सर्वे ऑफ इंडिया की मैं बात कर

[08:35:12] रहा था यह डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड

[08:35:14] टेक्नोलॉजी के अंतर्गत काम करता है। एंड

[08:35:16] ये काफी पुरानी साइंटिफिक डिपार्टमेंट है

[08:35:19] सरकार का जो 1767 में यहां पे बना था। ठीक

[08:35:22] है? हां जी। चलो बाकी स्कीम्स तो ठीक है।

[08:35:26] इतना कुछ नहीं है। पीएम आशा तो मैंने कई

[08:35:27] बार आपको पढ़ा चुका हूं। ठीक है। हम कुछ

[08:35:31] क्वेश्चंस ट्राई करते हैं। उससे आपको

[08:35:33] थोड़ा और आईडिया मिलेगा।

[08:35:35] ट्राई करो इस क्वेश्चन को।

[08:35:37] पढ़ा जा रहा है क्वेश्चन या नहीं? आई थिंक

[08:35:40] इसमें दिक्कत होएगी। इसको रहने दो। कोई

[08:35:41] बात नहीं। आपको ना देखो एक काम करना। आपको

[08:35:44] मैं एक बात बताता हूं। ये ट्राई करो। आप

[08:35:47] एक बात समझना यहां पे देखो लेक्चर के खत्म

[08:35:49] होते ही ना मैं आपको

[08:35:57] इस चैनल पर पीपीटी शेयर कर दूंगा।

[08:36:02] तो वहां पर आप एक बार गो थ्रू कर लेना।

[08:36:51] हां Telegram पे मैं शेयर कर दूंगा

[08:36:52] बिल्कुल ठीक है और लेक्चर एंड होने पे

[08:36:55] मुझे एक बार नीचे कमेंट्स में बताना जरूर

[08:36:57] कि आपको लेक्चर कैसा लगा। आफ्टर द लेक्चर

[08:36:59] हैज़ एंडेड। एंड अगर पसंद आया तो लाइक जरूर

[08:37:01] करना आप इस लेक्चर को। हां जी। देखो ट्राई

[08:37:05] करते हैं। पहले मैं आपको थोड़ा स्कीम के

[08:37:07] बारे में समझा देता हूं। पीएम स्ानिधि

[08:37:08] स्कीम के बारे में। पीएम स्ानिधि स्कीम

[08:37:10] क्या है? देखो स्वामित्व स्कीम अलग थी।

[08:37:13] स्वामित्व स्कीम अलग थी। स्वामित्व स्कीम

[08:37:16] अलग थी और स्ानिधि स्कीम अलग है।

[08:37:18] स्वामित्व क्या है? प्रधानमंत्री स्ट्रीट

[08:37:21] वेंडर आत्मनिर्भर निधि। यह स्कीम एक अलग

[08:37:24] स्कीम है। पीएम स्वामित्वा अलग थी। यहां

[08:37:27] पर क्या है? पीएम स्वानिधि स्कीम के

[08:37:28] अंतर्गत देखो स्ट्रीट वेंडर है ना स्ट्रीट

[08:37:31] वेंडर। ठीक है? उसको अपना बिजनेस मान लो

[08:37:35] इसका जैसे कोविड-19 के समय ये स्टार्ट

[08:37:37] हुई। अब उसका बिज़नेस एक तरह से चौपट हो

[08:37:39] गया। अब वो चाहता है कि नहीं यार मुझे

[08:37:41] अपना वापस बिज़नेस खड़ा करना है। अब उसको

[08:37:43] लोन मिल नहीं रहा क्योंकि उसके पास कुछ

[08:37:45] कोलटरल नहीं है। तो तब हमने ये स्कीम

[08:37:47] स्टार्ट करी थी पीएम स्ट्रीट वेंडर

[08:37:49] आत्मनिर्भर निधि। इसके माध्यम से क्या हुआ

[08:37:52] कि हमने यहां पे इनको यहां पे पहली बार के

[08:37:55] लिए ₹10,000 का लोन हमने दिया। ठीक है? कि

[08:37:58] आप इनको यहां पे आराम से 1 साल के अंदर

[08:38:00] मंथली इंस्टॉलमेंट से आप इनको पे कर देना।

[08:38:03] ठीक है? तो ये बात तो अपने आप में जो पहली

[08:38:06] बात ये जो कह रहा है ना 1 लाख वाली ये बात

[08:38:08] अपने आप में गलत है। एक्चुअली पता है क्या

[08:38:10] होता है? पहले 10,000 मिलता है। फिर आपको

[08:38:13] उसको रिटर्न अगर कर देते हो ना तो दूसरी

[08:38:15] बार में आपको 20,000 मिल जाएगा। अगर आप

[08:38:18] उसको भी रिटर्न कर देते हो, अगली बार लोन

[08:38:20] लेते हो तो आपको ₹00 यहां पे मिल सकता है।

[08:38:23] ठीक है ना? तो आपका पुराना स्कोर कैसा

[08:38:25] रहा? पहली बार आप लेने जाओगे तो आपको

[08:38:27] ₹10,000 मिल जाएगा। अगर आप उसको रिटर्न कर

[08:38:29] दोगे, फिर अगली बार लोन लेने जाओगे तो

[08:38:30] आपको ₹00 मिल जाएगा। अगर अगली बार वो भी

[08:38:33] रिटर्न कर दिया और अगली बार लोन लेने गए

[08:38:35] तो वहां पर आपको ₹00 तक का आपको यहां पे

[08:38:37] लोन मिल जाता है। और ध्यान रखना यहां पर

[08:38:41] आपको 7% की इंटरेस्ट सब्सिडी मिल जाएगी।

[08:38:44] मतलब इंटरेस्ट रेट आपको यहां पे काफी कम

[08:38:45] मिलेगा। ठीक है ना? और ये सारी बातें हैं।

[08:38:49] तो ये जो बात करें ना यहां पे ₹1 लाख वाली

[08:38:51] इस वजह से स्टेटमेंट गलत हो जाएगा। सेकंड

[08:38:53] कह रहा है ये स्कीम आपका सिडबी इंप्लीमेंट

[08:38:55] करता है। यस ये बात अपने आप में करेक्ट

[08:38:57] है। ये सिडबी के अंतर्गत ही आती है। दैट

[08:38:59] इज़ फाइन। बट ये जो तीसरा स्टेटमेंट यहां

[08:39:01] पे कह रहा है ना कि मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस

[08:39:02] इसकी नोडल मिनिस्ट्री है। गलत। ये दरअसल

[08:39:04] में आपका मिनिस्ट्री ऑफ़ हाउसिंग एंड अर्बन

[08:39:07] अफेयर्स इस मिनिस्ट्री के अंतर्गत आएगा।

[08:39:09] इसलिए थर्ड आपका यहां पे गलत हो जाएगा। तो

[08:39:11] पहला स्टेटमेंट आपका ठीक है। बाकी दोनों

[08:39:13] गलत है। इसलिए आपका आंसर बनेगा ऑप्शन ए वन

[08:39:16] ओनली इज द राइट आंसर।

[08:39:22] कुछ क्वेश्चंस मैं आपको प्रैक्टिस करवाता

[08:39:23] हूं और ठीक है? ताकि आपको दिक्कत ना आए।

[08:39:26] ट्राई करो इन क्वेश्चंस को।

[08:40:48] यस गुड गुड गुड देखो ऐसे क्वेश्चंस ना कई

[08:40:50] बार हमें वैसे तो पढ़े होते हैं। कई बार

[08:40:53] मान लो नहीं भी पढ़े होते या याद नहीं

[08:40:55] होते। कोई घबराने वाली बात नहीं। थोड़ा सा

[08:40:58] शांत मन से ऐसे क्वेश्चन अटेम्प्ट करने की

[08:41:00] कोशिश करो तो बिल्कुल आंसर आएगा। देखो

[08:41:03] होता पता है क्या है? आपको यहां पर नोटिस

[08:41:05] करने को मिल रहा होगा। कुछ ऑप्शंस हैं

[08:41:07] आपके पास। यहां पे छह ऑप्शंस दे रखे हैं।

[08:41:09] छह स्टेटमेंट्स। कुछ स्टेटमेंट्स ऐसे हैं

[08:41:12] जो कहीं ना कहीं एक्चुअल में आपके

[08:41:14] खेतीबाड़ी के अंदर एग्रीकल्चर के अंदर एक

[08:41:16] तरह से लॉन्ग टर्म कुछ क्रिएट करने की

[08:41:18] कोशिश कर रहे हैं। वो एक तरह का

[08:41:20] इन्वेस्टमेंट होता है। जब आप कुछ लॉन्ग

[08:41:22] टर्म कुछ क्रिएट करने की कोशिश कर रहे हो।

[08:41:25] बट ऑन द अदर हैंड अगर आप एक बस एक

[08:41:28] टेंपरेरी लीफ देने की कोशिश कर रहे हो। एक

[08:41:30] शॉर्ट टर्म एक कुछ मेजर आप देने की कोशिश

[08:41:32] कर रहे हो वो आपका एक सब्सिडी के अंदर

[08:41:34] काउंट किया जाता है। तो अगर आपने यह बात

[08:41:36] अंडरस्टैंड करी ना आपको खुद समझ आ जाएगा

[08:41:38] कि जैसे हम बात करते हैं एमएसपी देना ये

[08:41:42] आपका एक सब्सिडी है।

[08:41:45] राइट? फ्री बिजली देना ये एक सब्सिडी है।

[08:41:49] एग्रीकल्चर लोन माफ़ कर देना ये एक तरह की

[08:41:52] सब्सिडी है। बट अगर हम बात करते हैं अपने

[08:41:55] कंप्यूटराइजेशन करना पीएसीएस की पैक्स की

[08:41:58] वो एक इन्वेस्टमेंट होगा। सोशल कैपिटल

[08:42:00] डेवलपमेंट ये एक इन्वेस्टमेंट होगा और अगर

[08:42:02] आप अपने गांव वगैरह के अंदर स्टोरेज

[08:42:04] फैसिलिटीज अपनी सेटअप करते हो उससे

[08:42:06] स्टोरेज के लिए लंबे टाइम तक आप

[08:42:07] इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट कर रहे हो तो वो

[08:42:09] सब इन्वेस्टमेंट में आएंगे। तो एक होता है

[08:42:11] इन्वेस्टमेंट एक होता है सब्सिडी। ये कहीं

[08:42:12] ना कहीं उनका इंपैक्ट क्या हो रहा है?

[08:42:14] उसके ऊपर आपका डिपेंड करता है। तो

[08:42:16] क्लियरली आप नोटिस कर पाओगे कि वन फोर एंड

[08:42:19] फाइव ये आपके क्या हैं? ये एक तरह की

[08:42:21] सब्सिडीज हैं। बट टू थ्री एंड सिक्स जो है

[08:42:23] वो अपने आप में आपकी इन्वेस्टमेंट देखने

[08:42:25] को मिल जाएंगी।

[08:42:28] ठीक है।

[08:42:30] क्या ये बात क्लियर है?

[08:42:32] अच्छा एक क्वेश्चन यह भी ट्राई करो।

[08:43:44] देखो मैंने आपको एक बात बोली थी पहले 1

[08:43:48] घंटा पहले शायद कि क्वेश्चन कभी टफ या

[08:43:51] मुश्किल नहीं होता। ऑप्शंस उस क्वेश्चन को

[08:43:53] टफ या मुश्किल बनाते हैं। कोई इंसान कह

[08:43:56] सकता है कि क्वेश्चन बड़ा टफ है।

[08:43:59] बट नहीं, यह क्वेश्चन शायद बहुत इजी

[08:44:02] क्वेश्चन है। अगर आप थोड़ा सा ध्यान से

[08:44:04] पढ़ो। यार देखो, कोई ऐसे पढ़ के नहीं जा

[08:44:06] सकता कि किसान क्रेडिट कार्ड के अंदर

[08:44:08] क्या-क्या बातें शॉर्ट टर्म है, क्या-क्या

[08:44:10] चीजें लॉन्ग टर्म है। पर अगर आप क्वेश्चन

[08:44:12] को ध्यान से पढ़ोगे, आपको खुद अब ये समझ आ

[08:44:14] जाएगा।

[08:44:15] कैसे समझ आ जाएगा? देखो ना, इसके लिए बोला

[08:44:17] है शॉर्ट टर्म क्रेडिट सपोर्ट। कम समय के

[08:44:21] लिए क्रेडिट सपोर्ट जो मिलती है

[08:44:23] कम समय के लिए। सर मतलब मैंने लोन आज लिया

[08:44:27] तो मुझे छोटे समय के अंदर उसको वापस करना

[08:44:28] होगा। हां बिल्कुल। अब मुझे एक चीज बताओ

[08:44:32] अगर आपने ट्रैक्टर खरीद लिए, आपने

[08:44:34] हार्वेस्टर खरीदे, ट्रक खरीद लिए, क्या आप

[08:44:37] उस चीज को कम समय के अंदर रिटर्न कर

[08:44:39] पाओगे? मुझे बस इस क्वेश्चन का आंसर कर

[08:44:40] दो। तो, क्या यह छोटे समय का लोन हो सकता

[08:44:43] है? बिल्कुल भी नहीं हो सकता।

[08:44:51] आपका डायरेक्ट आंसर आ जाएगा। यहां पे

[08:44:53] डायरेक्ट आंसर आ जाएगा। बाकी भी देख लो।

[08:44:55] जैसे फॉर एग्जांपल अगर मान लो आपने घर

[08:44:57] बनाने के लिए बाकी सब चीजों के लिए भाई ये

[08:45:00] भी लॉन्ग टर्म वाली बात है। तो क्लियरली

[08:45:02] वर्किंग कैपिटल वर्किंग कैपिटल क्या होता

[08:45:04] है भाई? बताओ मुझे। वर्किंग कैपिटल होता

[08:45:06] है रोजमरा के खर्चे। डेली एक्सपेंसेस जो

[08:45:08] होते हैं। तो यस दैट इज़ करेक्ट। कंसमशन

[08:45:10] रिक्वायरमेंट भी उसी को बोलते हैं। पोस्ट

[08:45:11] हार्वेस्ट एक्सपेंस भी आपका शॉर्ट टर्म हो

[08:45:13] सकता है। तो दैट इज़ व्हाई इसका आंसर क्या

[08:45:15] बनेगा? ऑप्शन बी वन थ्री एंड फोर

[08:45:19] क्लियर है

[08:45:35] इसको ट्राई करेंगे एक बार।

[08:46:34] हां

[08:46:37] देखो

[08:46:44] इस स्टेटमेंट को एक बार बस पढ़ो।

[08:46:47] इस स्टेटमेंट को एक बार पढ़ो। क्या कह रहा

[08:46:50] है?

[08:46:52] यार देखो कुछ ना स्टेटमेंट्स ना

[08:46:54] चिल्ला-चिल्ला के आपको बोलती हैं कि भाई

[08:46:56] मैं गलत हूं, मैं गलत हूं, मैं गलत हूं।

[08:46:58] मुझे गलत मार्क कर दो। और ये स्टेटमेंट

[08:47:00] यही चिल्ला-चिल्ला के बोल रही हैं। कैसे

[08:47:02] चिल्ला के बोल रही हैं? देखो वो कह रहा है

[08:47:05] भाई जितने भी दुनिया भर में सीरियल्स हैं

[08:47:07] जितने भी पल्ससेस हैं जितने भी ऑयल सीड्स

[08:47:09] हैं उनका जितना भी प्रक्योरमेंट होगा

[08:47:11] एमएसपी के अंदर वो अनलिमिटेड होगा हर

[08:47:15] स्टेट में हर यूटी में हर जगह समझ पा रहे

[08:47:19] हो आप

[08:47:21] ठीक है

[08:47:24] देखो हमारे यहां पे ना होता है ओपन एंड

[08:47:26] प्रिक्योरमेंट मैं मानता हूं पर वो

[08:47:28] मोस्टली आपका वीट और राइस के लिए होता है

[08:47:29] बाकियों के लिए ऐसा कुछ नहीं है अगर ऐसा

[08:47:32] होता तो हमारे हमारे बेचारे किसान ऐसे

[08:47:34] क्यों बेचारे दिक्कत में होते? लॉजिकली एक

[08:47:36] बात समझो।

[08:47:38] ठीक है? तो वन इज़ नॉट राइट। वन इज़

[08:47:40] कंप्लीटली रॉन्ग।

[08:47:43] और सेकंड देखो। सेकंड हो सकता है सेकंड

[08:47:45] में किसी को डाउट हो कि सर सीरियल और

[08:47:49] पल्ससेस में

[08:47:51] एमएसपी जो फिक्स किया गया किसी भी स्टेट

[08:47:53] के अंदर वो वो लेवल होता है जहां तक

[08:47:55] मार्केट प्राइस कभी राइज़ नहीं करेगा।

[08:47:58] यार एमएसपी कौन डिसाइड करता है? पहले मुझे

[08:48:00] यह बताओ।

[08:48:03] सर एमएसपी जो होता है ना एमएसपी देखो

[08:48:08] एमएसपी जो आपका

[08:48:11] रिकमेंड किया जाता है ना

[08:48:15] वो होता है आपका सीएसीपी के द्वारा कमीशन

[08:48:19] ऑन एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइस जो कि

[08:48:22] मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर के अंतर्गत आता

[08:48:23] है अटैच्ड ऑफिसर्स के अंतर्गत और जो

[08:48:26] एमएसपी का अप्रूवल का काम होता है कौन

[08:48:28] इसको अप्रूव करता है फाइनल अप्रूवल तो

[08:48:31] फाइनल अप्रूवल आपका आपका कैबिनेट कमेटी ऑन

[08:48:33] इकोनमिक अफेयर्स देता है जो कि

[08:48:35] प्रधानमंत्री जी जिसको हेड करते हैं। इट

[08:48:37] इज़ हेडेड बाय प्राइम मिनिस्टर। रिकमेंड

[08:48:39] करते हैं सीएसीपी अप्रूवल दिया जाता है

[08:48:41] सीसीए के द्वारा। कैबिनेट कमिटी ऑन

[08:48:42] इकोनमिक अफेयर हेडेड बाय द प्राइम

[08:48:44] मिनिस्टर। अब सर ये रिकमेंड कैसे करते

[08:48:46] हैं? देखो इनके पास अपने-अपने टेक्निक्स

[08:48:48] हैं। ये चेक करेंगे कि यार एग्रीकल्चर

[08:48:50] कॉस्ट कितनी है? या एक्चुअल कॉस्ट कितनी

[08:48:52] है? सॉरी। जैसे आपका A2 चेक करेंगे ये

[08:48:54] जिसको बोलते हैं हम एक्चुअल कॉस्ट।

[08:48:59] एक होता है एक्चुअल क्लॉज़ प्लस फैमिली

[08:49:02] लेबर A2 + FL यह इवन कॉम कॉम्प्रिहेंसिव

[08:49:07] कॉस्ट C2 भी एक कॉमसेप्ट होता है यहां पे।

[08:49:10] ठीक है? और हमने जो भी ये कॉस्ट लगी ना

[08:49:13] इसका डेढ़ गुना हम यहां पे एमएसपी डिसाइड

[08:49:15] करते हैं। है ना? जो भी कॉस्ट हुई एक्चुअल

[08:49:19] कॉस्ट या फिर एक्चुअल कॉस्ट ऑफ़ फैमिली

[08:49:20] लेबर प्लस कम कॉम्प्रिहेंसिव कॉस्ट। इनमें

[08:49:23] से जिसका भी हमें देखना है उसका डेढ़ गुना

[08:49:24] लिया जाए। आमतौर पर जो सरकार आपको देती है

[08:49:27] ना वो इसका डेढ़ गुना देती है। 1.5 टाइम्स

[08:49:30] A2 + FL अब ये कैसे डिसाइड हुआ? ये सर्वे

[08:49:33] हुए बहुत सारे खर्चा वगैरह देखा गया। तो

[08:49:35] इन्होंने सर्वे से एक प्राइस बता दिया।

[08:49:38] ठीक है? कितना दाम होना चाहिए? अच्छा। और

[08:49:41] मार्केट प्राइस कैसे डिसाइड होता है? सर

[08:49:43] मार्केट प्राइस डिसाइड होता है बेस्ड ऑन

[08:49:45] डिमांड एंड सप्लाई। डिमांड सप्लाई ऊपर

[08:49:48] नीचे होगी तो आपके चीजों का दाम ऊपर नीचे

[08:49:51] हो जाएगा। बिल्कुल सही बात है। तो मुझे

[08:49:53] बताओ मार्केट प्राइस पे हमारा क्या

[08:49:55] कंट्रोल? वो तो डिमांड सप्लाई ऊपर नीचे

[08:49:56] होगी तो वो अकॉर्डिंगली चेंज हो जाएगा। तो

[08:49:58] इनका कोई लेना देना नहीं है एक दूसरे के

[08:50:00] साथ। ये अपने आप में सेकंड स्टेटमेंट अपने

[08:50:02] आप में गलत है। ये जो नेवर राइज़ देखो ना

[08:50:04] कैसे बोल रहा है? नेवर राइज़ एनी स्टेट। तो

[08:50:07] अपने आप में स्टेटमेंट गलत हो जाएगी।

[08:50:09] ऑप्शन डी नीदर वन नॉर टू।

[08:50:12] होना चाहिए C2 पर फिलहाल A2 + FL का डेढ़

[08:50:15] गुना ही यहां पे मिलता है।

[08:50:27] ठीक है।

[08:50:43] चलो ठीक है। बस थोड़ा सा ही और डिस्कस

[08:50:45] करेंगे। ठीक है?

[08:50:47] अब देखो कुछ मैं आपको मिसलेनियस क्वेश्चन

[08:50:49] को डिस्कस कर देता हूं। ठीक है? थोड़ा सा

[08:50:51] और डिस्कस करेंगे। ज्यादा लंबा नहीं

[08:50:52] खींचेंगे। अब लंबा हो गया आज का दिन।

[08:50:58] ये कांसेप्ट ना माइक्रोइकोनॉमिक्स से

[08:51:00] इंपॉर्टेंट है। तो बस अब 15-20 मिनट और हम

[08:51:03] करेंगे। ठीक है? 15-20 मिनट का डिस्कशन और

[08:51:06] रहेगा। अरे ब्रेक ब्रेक छोड़ो। अब खत्म कर

[08:51:08] देंगे सीधा।

[08:51:54] देखो

[08:51:58] यस यस यस

[08:52:01] अब इसमें देखेंगे आप लोग

[08:52:03] क्या कह रहा है? कह रहा बाकी सारी स्टेट

[08:52:06] बाकी सारी चीजें सेम मान के चलो।

[08:52:10] तो बताओ कि डिमांड कब बढ़ेगी?

[08:52:19] अब आपको ये दिख नहीं रहा होगा। कोई नहीं।

[08:52:20] देखो या इधर ही समझा देता हूं आपको।

[08:52:26] सब्स्टट्यूट का मीनिंग आप लोग समझते हैं।

[08:52:28] डू यू अंडरस्टैंड द मीनिंग ऑफ़ द टर्म

[08:52:30] सब्स्टट्यूट? देखो जब नहीं कुछ भी याद रहे

[08:52:32] ना आप लॉजिक लगाओ बस। सब्स्टिट्यूट का

[08:52:35] मतलब होता है जब एक चीज किसी दूसरी चीज को

[08:52:37] रिप्लेस कर सकती है। फॉर एग्जांपल

[08:52:41] चाय एंड कॉफी या चाय और कॉफी। एक चीज

[08:52:46] दूसरे को रिप्लेस कर सकती है। अगर आप चाय

[08:52:48] नहीं पियोगे तो आप कॉफी पियोगे। तो टी और

[08:52:51] कॉफी ना अपने आप में क्या होते हैं? एक

[08:52:53] सब्स्टिट्यूट होते हैं। अगर आप पहला

[08:52:55] कंज्यूम नहीं करोगे, आप दूसरा कर लोगे।

[08:52:56] दूसरा कर लिया तो पहला नहीं करोगे। राइट?

[08:53:00] यस। अब इसमें नोटिस करना अगर हम ना चाय को

[08:53:04] मान के चलते हैं। वी आर लुकिंग एट टी। अब

[08:53:08] वो कह रहा है कि मान लो सब्स्टट्यूट का

[08:53:10] दाम बढ़ गया। दोस्तों अगर कॉफी का दाम बढ़

[08:53:12] गया ना तो कॉफी महंगी हो चुकी है। कॉफी

[08:53:15] महंगी हो चुकी है तो लोग कॉफी कम पिएंगे।

[08:53:18] और अगर लोग कॉफी कम पिएंगे तो ऑब्वियसली

[08:53:21] चाय ज्यादा पिएंगे।

[08:53:24] इसीलिए पहला स्टेटमेंट अपने आप में सही

[08:53:26] है।

[08:53:28] ठीक है? तो फर्स्ट इज राइट। सेकंड आएंगे।

[08:53:31] सेकंड कह रहा है कि प्राइस ऑफ सब्सिट सॉरी

[08:53:35] कॉम्प्लीमेंट इनक्रीजसेस। कॉम्प्लीमेंट

[08:53:37] क्या होता है? जो चीजें इकट्ठी अच्छी लगती

[08:53:40] हैं। जैसे फॉर एग्जांपल आपका

[08:53:44] टी एंड बिस्किट।

[08:53:49] अब देखो यहां पर

[08:53:52] अगर लोग

[08:53:55] बिस्किट ज्यादा खाएं सॉरी सॉरी बिस्किट

[08:53:57] अगर महंगा हो गया अगर दोस्तों बिस्किट

[08:53:59] महंगा हो जाएगा तो लोग बिस्किट कम खाएंगे

[08:54:02] बिस्किट कम खाएंगे तो चाय भी कम पिएंगे तो

[08:54:04] यहां पर चाय की डिमांड बढ़ेगी नहीं बल्कि

[08:54:07] चाय की डिमांड कम हो जाएगी तो सेकंड इज़

[08:54:09] रॉन्ग

[08:54:11] ओके ओके ओके तीसरा स्टेटमेंट कह रहा है द

[08:54:14] गुड इज़ एन इनफीरियर गुड एक खराब वस्तुएं

[08:54:18] देखो खराब वस्तु पता क्या होती है? जैसे

[08:54:21] फॉर एग्जांपल अगर आप लोग

[08:54:25] पहले लेट्स से

[08:54:28] ट्रैवल करते थे

[08:54:31] एक बस के साथ। एक बस से ट्रैवल करते थे।

[08:54:35] पर अब आपकी इनकम बढ़ गई है। तो अब आप अपनी

[08:54:38] कैब में ट्रैवल करना पसंद करेंगे और बस

[08:54:41] में ट्रैवल कम करेंगे। राइट? तो यहां पर

[08:54:44] बस आपके लिए क्या हुई? इनफीरियर गुड।

[08:54:46] जैसे-जैसे आपकी इनकम बढ़ेगी ना तो आप

[08:54:48] इंफीरियर गुड को कम कंज्यूम करोगे। इसीलिए

[08:54:52] स्टेटमेंट जो थर्ड है वो गलत है। यहां पे

[08:54:54] अगर आपकी इनकम बढ़ेगी ना तो आप इनफीरियर

[08:54:57] गुड का कंजमशन बढ़ाओगे नहीं बल्कि कम

[08:55:00] करोगे। तो थर्ड इज़ रॉन्ग। फोर्थ स्टेटमेंट

[08:55:02] की बात करें। कह रहा है अगर उसका दाम

[08:55:04] गिरे। बिल्कुल। यही तो है लॉ ऑफ़ डिमांड।

[08:55:06] जब किसी चीज का दाम कम होता है तो उसका

[08:55:10] डिमांड जो है बढ़ती है। तो फर्स्ट इज़ राइट।

[08:55:12] ऑप्शन ए वन एंड फोर। पर मेरी बात ध्यान से

[08:55:15] सुनना। लॉ ऑफ डिमांड यूनिवर्सल नहीं है।

[08:55:18] हमेशा ऐसा नहीं होता कि आपका दाम कम होने

[08:55:20] से डिमांड बढ़े। ठीक है ना? ऐसा भी हो सकता

[08:55:23] है अगर खराब वस्तु है तो नहीं बढ़ेगी

[08:55:25] डिमांड। ठीक है? तो इस तरह से आपका जो

[08:55:27] आंसर बनेगा वो ऑप्शन ए वन एंड फोर यहां पे

[08:55:30] आंसर बन जाएगा।

[08:55:32] क्या ये बात क्लियर है?

[08:55:41] ठीक है? देखो, पिछले साल में ना कुछ

[08:55:43] इंपॉर्टेंट जीआई टैग्स मिले हैं। एक बार

[08:55:46] मैं क्विकली इनको आपको यहां पर बता देता

[08:55:47] हूं इनके बारे में। एक्चुअली पता है पॉइंट

[08:55:50] क्या है?

[08:55:52] जीआई टैग्स का आपको मीनिंग पता होगा। ऑल

[08:55:55] ऑफ यू आर अवेयर अबाउट जीआई टैग्स। देखो

[08:55:58] जीआई टैग होते हैं आपके ज्योग्राफिकल

[08:55:59] इंडिकेशन टैग। एक सर्टेन जगह में कोई चीज

[08:56:02] मिलती है। तो वहां पर उस जगह में कुछ ना

[08:56:05] कुछ क्वालिटीज आ जाती हैं। जैसे फॉर

[08:56:07] एग्जांपल डार्जलिंग की चाय। अब वो चाय वही

[08:56:10] बन सकती है।

[08:56:12] ठीक है? ओके। ओके। ओके।

[08:56:15] तो वहां पर जो चाय बन रही है वहां के लोकल

[08:56:18] लोगों को उसका बेनिफिट मिलना चाहिए।

[08:56:20] इसीलिए हम यहां पर जीआई टैक्स देते हैं।

[08:56:23] ठीक है? और एक्चुअली ना जीआई टैक्स देने

[08:56:26] के पीछे एक और भी कारण है क्योंकि हम

[08:56:28] डब्ल्यूटीओ वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के

[08:56:30] जो ट्रिप्स हैं उसके साथ हम यहां पे

[08:56:32] कंप्लाइंड हैं।

[08:56:34] ठीक है? तो भारत ने भी अपने देश में जीआई

[08:56:37] टैग एक्ट लेकर आए हैं। वी हैव दिस एक्ट

[08:56:39] जीआई एक्ट 1999। इसके माध्यम से हम यहां

[08:56:43] पे ये चीज इंश्योर करते हैं। तो हमारे पास

[08:56:45] जोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री है अंडर द

[08:56:48] मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री वो

[08:56:50] यहां पे जीआई टैग्स देती है। ठीक है? अब

[08:56:53] ये जो जीआई टैग होता है ना ये नॉर्मली

[08:56:56] आपको

[08:56:57] 10 साल के लिए होता है। इट इज़ फॉर अ

[08:57:00] पीरियड ऑफ़ 10 इयर्स। उसको आप फर्दर आप

[08:57:02] रिन्यू करवा सकते हो। फिर टाइम खत्म हो

[08:57:05] गया। फिर से रिन्यू करा सकते हो। पर वैसे

[08:57:06] ये 10 साल के लिए होता है। चलो ठीक है। अब

[08:57:10] कुछ इंपॉर्टेंट चीजों को इस बार जीआई टैग

[08:57:12] मिला। जैसे फॉर एग्जांपल वारंगल की चपाता

[08:57:15] चिल्ली। यहां पर आप देख पा रहे होंगे ये

[08:57:18] आपके टमाटर नहीं है। ठीक है? ये आपका

[08:57:21] टमाटर नहीं है। टमाटर देखो ऐसा होता है।

[08:57:23] ये है टमाटर। ये आपकी मिर्ची है। तो यहां

[08:57:26] पे जो वारंगल की ये पाता चिल्ली है जो है

[08:57:28] तो इसको यहां पर तेलंगाना स्टेट से यहां

[08:57:32] पे इसको यहां पे मिला है जीआई टैग क्योंकि

[08:57:34] इसका जो कलर है वो बहुत ही ब्राइट रेड कलर

[08:57:36] होता है और टोमेटो जैसा इसका शेप होता है

[08:57:38] टमाटर जैसा। ठीक है ना? प्लस एट द सेम

[08:57:42] टाइम यहां पर ये इसका फ्लेवर ज्यादा अच्छा

[08:57:44] होता है। एंड ये 80 से 100 साल के लिए

[08:57:47] कल्टीवेट यहां पे होती है। तो इस वजह से

[08:57:49] ये न्यूज़ में थी। तो थोड़ा-थोड़ा बस

[08:57:50] आईडिया ले लो इसके अलावा। इसके अलावा ये

[08:57:53] जो बिगुल आप देख रहे हो पिक्चर में मेरठ

[08:57:55] का बिगुल। ठीक है? ये है मेरठ बिगुल। अब

[08:57:58] मेरठ बिगुल पता है क्यों पॉपुलर है?

[08:57:59] क्योंकि ये बहुत लंबे टाइम से है। जब भी

[08:58:01] कभी युद्ध की शुरुआत होती है तो बिगुल

[08:58:03] बजाया जाता है वहां पे। है ना? किसी चीज

[08:58:05] का आगमन होता है तो बिगुल बजाया जाता है।

[08:58:07] परेड के समय भी आपका बिगुल बजाया जाता है।

[08:58:09] तो मेरठ के पास ना बहुत लंबे टाइम से यहां

[08:58:11] पे बिगुल बजाने की जो है आपका एक हिस्ट्री

[08:58:15] रही है। तो लेट 19 सेंचुरी के अंदर यहां

[08:58:18] पर आप नोटिस कर पाओगे। यहां पे इस तरह से

[08:58:20] बिगुल बनाने का प्रोसेस वहां पे स्टार्ट

[08:58:22] हुआ। तो भारत के मिलिट्री कल्चर का भी

[08:58:23] बहुत इंपॉर्टेंट रोल यहां पे रहा है। एंड

[08:58:25] इस तरह से आप नोटिस कर पाओगे कि

[08:58:27] ब्रिटिशर्स के समय के ऊपर भी था। ठीक है

[08:58:29] ना? आज भी आर्मी, पैरामिलिट्री पुलिस

[08:58:31] यूनिट्स को यहां पे जो बिगुल सप्लाई किए

[08:58:33] जाते हैं वो यहां पे मेरठ से ही बनते हैं

[08:58:35] जो कि ब्रास से आते हैं। मेरठ आप सबको पता

[08:58:37] होगा यूपी में है। ठीक है? दिल्ली से

[08:58:39] हार्डली 1ढ़ घंटे की दूरी पे है। तो मेरठ

[08:58:41] तो आपको इसके बारे में पता ही होगा मेरठ

[08:58:44] के बारे में। फिर एक बहुत बड़ी

[08:58:46] कंट्रोवर्सी हुई थी कोलापुरी चप्पल्स के

[08:58:49] रिगार्डिंग। देखो इनको जीआई टैग अभी नहीं

[08:58:51] मिला। इनको जीआई टैग मिले कई साल हो गए

[08:58:53] हैं। ठीक है? इनको जीआई टैग मिला था। आई

[08:58:56] थिंक 2019 में मिला था। काफी टाइम हो गया

[08:58:58] मतलब जीआई टैग मिले हुए। कंट्रोवर्सी पता

[08:59:00] है क्या हुई? अब ये महाराष्ट्र के

[08:59:02] कोल्हापुर से हैं। चप्पल जो है ये वाली

[08:59:04] कोलापुरी चप्पल जिसको हम बोलते हैं। ये

[08:59:06] कुछ 100 200 ₹500 की मिल जाती है वहां पे।

[08:59:10] ठीक है ना? बट इस साल पता है क्या हुआ? आप

[08:59:12] लोगों ने पराडा के बारे में सुना होगा।

[08:59:14] ठीक है? पराडा के ऊपर गाने भी बहुत सारे

[08:59:15] बने हैं। अगर आप पंजाबी सॉन्ग्स अगर आपको

[08:59:17] पसंद होंगे तो pाडा जो एक बहुत ही फेमस

[08:59:20] आपका लग्जरी ब्रांड है ना वो यहां पे इन

[08:59:22] चप्पलों को बेच रहा था अपने नाम से। मतलब

[08:59:27] वहां पर बिक रही हैं यह चप्पलें ₹00 70000

[08:59:30] 80 ₹1 लाख की इस तरह से और पराडा बोल रहा

[08:59:33] है कि नहीं नहीं हमने यह डिजाइन करी हैं।

[08:59:35] हमने ये पूरा पूरा डिजाइन जो है हर एक चीज

[08:59:37] वो हमने बनाई है। जबकि अगर आप कोल्हापुर

[08:59:40] जाओगे तो ऐसी चप्पलें बहुत आराम से मिल

[08:59:41] जाती हैं। समझे मेरी बात को? तो दैट इज़

[08:59:44] व्हाई कोल्हापुरी चप्पल वाज़ इन द न्यूज़।

[08:59:46] तो थोड़ा सा मैं बता देता हूं कि जो चप्पल

[08:59:48] हैं ये आपकी कोल्हापुर महाराष्ट्र से

[08:59:50] बिलोंग करती हैं। और आसपास का एरिया जो है

[08:59:52] सांगली हो गया, सोलापुर हो गया, सतारा हो

[08:59:55] गया। तो वहां पर भी आपको यह प्रोड्यूस

[08:59:56] करती हुई देखने को मिल जाएंगी। इनफैक्ट ना

[08:59:59] यह कोई आज से नहीं है। यह 12वीं 13वीं

[09:00:01] सेंचुरी से यहां पे बनाई जाती हैं। एंड इस

[09:00:03] तरह से जो रॉयल्टी है वहां की वो पहनती थी

[09:00:05] इसको। अभी भी लोग पहनते हैं। जीआई टैग

[09:00:07] इसको 2019 में यहां पे मिल गया था। एंड

[09:00:09] अगर हम बात करें तो जब किंग शाहू महाराज

[09:00:12] जी ठीक है? इन्होंने जब यहां पे इसका

[09:00:15] पैटर्न एज किया तो उसके बाद से आप नोटिस

[09:00:17] कर पाओगे कि यह बहुत ज्यादा पॉपुलर होगी

[09:00:19] कोल्हापुरी चप्पल। ठीक है ना? तो वहां पे

[09:00:22] वेजिटेबल टैंड लेदर से ये बनती है जो कहीं

[09:00:25] ना कहीं गाय से, बफेलो से और गोट से यहां

[09:00:27] पे जो मटेरियल है इसका यहां पे आता है। सो

[09:00:30] दैट इज़ व्हाई कोल्हापुरी चप्पल इन द

[09:00:32] न्यूज़। बाकी एक बहुत ही फेमस डिश है

[09:00:35] राजस्थान की केर सांगरी। ठीक है? मैंने भी

[09:00:37] खुद भी खाई है केर सांगरी। तो यहां पर आप

[09:00:39] नोटिस कर पाओगे। एक होते हैं केर। एक होती

[09:00:41] है सांगरी। ये पिक्चर में केर और सांगरी

[09:00:43] आप यहां पे देख पाओगे। तो इनको भी यहां पे

[09:00:45] जीआई टैग मिला है। राजस्थान की फेमस डिश

[09:00:47] है ये। ठीक है? तो ये काफी ज्यादा फैट में

[09:00:51] कम होते हैं और न्यूट्रिएंट्स काफी अच्छे

[09:00:53] खासे होते हैं इसके अंदर और फाइबर में

[09:00:54] इसमें अच्छा कंटेंट आपको यहां पे देखने को

[09:00:56] मिल जाता है। एक्चुअली ना पता है क्या

[09:00:58] होता है ये आपके डेजर्ट एरिया में ग्रो कर

[09:01:00] जाती है आराम से डेजर्ट एरिया में ग्रो कर

[09:01:02] जाएगी तो जहां पर सूखा भी पड़ा हुआ है ना

[09:01:04] जहां पर बाकी आप वेजिटेबल्स को ग्रो नहीं

[09:01:06] कर पाएंगे वहां पर आप केयर सांगरी को ग्रो

[09:01:08] कर सकते हैं। तो थार डेजर्ट के काफी सारे

[09:01:10] एरियाज में यहां पे केयर सांगरी को यहां

[09:01:12] पे खाया जाता है। तो इसको भी यहां पे जीआई

[09:01:14] टैग यहां पे मिला है। राइट? तो ये सारी

[09:01:17] कुछ बातें थी जो आज हमें ये डिस्कस करनी

[09:01:20] थी। बाकी ठीक है। ठीक है? तो आप यहां पे

[09:01:23] एक बार स्लाइड्स को भी गो थ्रू कर सकते

[09:01:24] हो। ये सारे पॉइंटर्स मैंने यहां पे मेंशन

[09:01:26] भी करे हुए हैं।

[09:01:30] हां देखो कई जगह से जीआई टैग्स मिले हैं।

[09:01:33] बिल्कुल मैं मना नहीं कर रहा। कई जगह को

[09:01:34] जीआई टैग्स मिले हैं। पर अभी रिसेंटली जो

[09:01:36] न्यूज़ में थे मैंने आपको यहां पे वो बताने

[09:01:38] की कोशिश करी है। ठीक है। रतलाम की सेव को

[09:01:41] भी हो सकता है मिला हो। ठीक है। ठीक है।

[09:01:43] हां जी।

[09:01:47] ठीक है? तो देखो यहां तक हम अपने सेशन को

[09:01:50] रखेंगे। ठीक है? यहीं तक आज अपने सेशन को

[09:01:53] यहीं तक रखेंगे। ठीक है?

[09:01:57] बाकी आप लोग बताओ कैसा लगा आपको सेशन? समझ

[09:01:59] आया सारी चीजें?

[09:02:04] ठीक है? अगर आपको सेशन पसंद आया होगा

[09:02:06] डेफिनेटली आप वीडियो को लाइक जरूर कर

[09:02:07] देना। और मैं चाहूंगा कि आपके जो भी जैसा

[09:02:09] भी आपको सेशन लगा इस वीडियो खत्म होने के

[09:02:11] बाद आप कमेंट्स में उसको जरूर लिखना।

[09:02:14] ठीक है? कमेंट्स को यहां पे जरूर लिखना।

[09:02:16] हां, अंबाजी मार्बल को भी मिला है। अंजली

[09:02:18] अंबाजी मार्बल को भी मिला है। यू आर राइट।

[09:02:22] ठीक है? बाकी देखो, मैं एक काम आपको और

[09:02:24] बताता हूं। एक बात मैं आपको और बताता हूं।

[09:02:26] नोट्स अभी आपको सुनो मेरी बात। नोट्स आपको

[09:02:28] ऐप पर भी मिल जाएंगे। एंड एट द सेम टाइम

[09:02:30] मेरा जो Telegram चैनल है ना,

[09:02:38] यह जो मेरा Telegram चैनल है, इसके ऊपर भी

[09:02:40] आपको यहां पर नोट्स मिल जाएंगे।

[09:02:42] ओके। ओके ओके हां एक काम मैं और करूंगा

[09:02:48] आने वाले दिनों के अंदर मैं अपने tlegram

[09:02:51] के ऊपर एक लाइव सेशन भी कंडक्ट करूंगा

[09:02:53] आपके कुछ भी डाउट्स वगैरह होंगे ना कोई

[09:02:56] कांसेप्ट आपको नहीं समझ आया होगा तो आई

[09:02:58] विल बी कंडक्टिंग अ लाइव सेशन ओवर देयर

[09:03:00] आल्सो हमारे ऑडियो के अंदर मैंने पहले भी

[09:03:02] इस लाइव सेशन लिए हैं। बहुत सारे बच्चे

[09:03:03] वहां पर मेरे से डाउट्स पूछते भी रहते

[09:03:05] हैं। तो एक दिन मैं लाइव सेशन ले लूंगा ये

[09:03:07] मे बी इस वीकेंड या आने वाले डेज के अंदर

[09:03:10] तो वहां पर हम क्या करेंगे आपके कुछ

[09:03:13] डाउट्स हैं या आपको कुछ समझ नहीं आता या

[09:03:15] फिर आपका एग्जाम ओरिएंटेड कुछ भी कंसर्न्स

[09:03:17] हैं तो एक बार हम लाइव सेशन के अंदर भी

[09:03:20] उनको डिस्कस कर लेंगे। तो यहां पर आप

[09:03:22] कनेक्ट जरूर रहना क्योंकि यहीं पर मैं

[09:03:24] आपके साथ यहां पे डिस्कशन में आगे फर्दर

[09:03:25] आपका करता रहूंगा।

[09:03:28] ठीक है? तो एक आल्सो थैंक यू सो मच आप

[09:03:31] सबके लिए कि आप सब लोग सुबह से लेकर अभी

[09:03:34] तक जुड़े रहे। कुछ लोग नहीं भी जुड़े रहे

[09:03:36] होंगे बट ठीक है कोई बात नहीं आई कैन

[09:03:37] अंडरस्टैंड और मैं खुद भी बोलता हूं देखो

[09:03:40] सबसे पहले आती है हमारी हेल्थ ठीक है और

[09:03:42] इनफैक्ट मैंने सुमित सर से भी बात की थी

[09:03:44] इसके रिगार्डिंग तो सुमित सर ने भी यही

[09:03:46] बोला था कि देखो कुछ भी हो डेफिनेटली

[09:03:48] बच्चों को अच्छा से अच्छा कंटेंट डिलीवर

[09:03:50] करो पर उस वजह से किसी की सेहत खराब नहीं

[09:03:52] होनी चाहिए। कई बार पता है क्या होता है

[09:03:54] कि मैंने देखा है कई बार कि हम लोग 10

[09:03:56] घंटे 12 घंटे पढ़ाने की कोशिश करते हैं और

[09:03:58] उस चक्कर में क्या हो जाता है कि ना हमारी

[09:04:00] हेल्थ कॉम्प्रोमाइज हो जाती है और हेल्थ

[09:04:02] कॉम्प्रोमाइज होने का मतलब आने वाले दो-ती

[09:04:03] दिन वेस्ट हो जाते हैं। तो वो चीज नहीं

[09:04:05] होनी चाहिए। ठीक है ना? तो हेल्थ का भी

[09:04:06] ध्यान देना जरूरी है। एंड एट द सेम टाइम

[09:04:08] पढ़ाई करना भी और पढ़ाई कराना भी जरूरी

[09:04:10] है। तो दोनों का एक बैलेंस हमारे पास यहां

[09:04:12] पे होना चाहिए।

[09:04:18] ठीक है? थैंक यू सो मच आदित्य। थैंक यू सो

[09:04:20] मच।

[09:04:24] नहीं देखो मेंस के लिए तो देखो सैमुअल और

[09:04:26] भी चीजें होती हैं। मेंस के लिए तो आपका

[09:04:27] जैसे एग्रीकल्चर से कई सारे क्वेश्चंस

[09:04:30] बनते हैं। आपके फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री

[09:04:32] हो गया, लैंड रिफॉर्म्स हो गया। तो

[09:04:33] एग्रीकल्चर के लिए कंटेंट एक थोड़ा सा

[09:04:35] मतलब और बाकी सब्जेक्ट मतलब बाकियों के

[09:04:36] लिए भी मेंस के लिए कंटेंट थोड़ा सा

[09:04:38] डिफरेंट भी रहता है।

[09:04:42] अ सरीन वो रिकॉर्डेड रहता है। ठीक है ना?

[09:04:45] हां।

[09:04:50] ठीक है।

[09:04:56] ओके ओके ओके देखो बाकी ना चिंता बिल्कुल

[09:04:59] नहीं करनी है। ठीक है ना? हमारे पास जैसे

[09:05:01] अभी क्या है? अभी हम फरवरी में हैं। हमारे

[09:05:03] पास रफली तीन महीने हैं। अगर आप सही ढंग

[09:05:06] से इन तीन महीने का यूटिलाइजेशन करोगे, आप

[09:05:08] डेफिनेटली प्रीलिम्स को क्लियर करोगे। ठीक

[09:05:10] है? मैं हमेशा एक बात बोलता हूं। नॉलेज

[09:05:12] होना अच्छी बात है। नॉलेज होनी भी चाहिए।

[09:05:15] बट अगर जिस दिन आपने प्रीलिम्स का

[09:05:18] ऐपटीट्यूड सीख लिया ना प्रीलिम्स के

[09:05:19] क्वेश्चन को अटेम्प्ट करने का जिस दिन

[09:05:22] आपको तरीका आ गया ना कि यार ये ऐसे

[09:05:24] प्रीलिम्स अटेम्प्ट किया जाता है फिर कभी

[09:05:26] भी आपका लाइफ में कभी प्रीलिम्स नहीं

[09:05:27] रुकेगा ट्रस्ट मी ऑन दिस पर वो ऐपटीट्यूड

[09:05:29] बनना इतना आसान भी नहीं होता ऐसा नहीं कि

[09:05:31] एक दिन में आ जाएगा 2 दिन में आ जाएगा

[09:05:33] क्योंकि ना देखो ये वाली बात मैं ऐसे ही

[09:05:35] नहीं बोल रहा ये वाली बात मैंने भी

[09:05:37] रियलाइज़ करी है और मैंने 100 से ज्यादा

[09:05:39] लोगों से बात करके ये मैं आपको बता रहा

[09:05:40] हूं इंक्लूडिंग अ लॉट ऑफ़ टॉपर्स कई लोगों

[09:05:43] को दिक्कत आती है क्योंकि वो समझ समझ नहीं

[09:05:44] पाते कि कैसे यार वो कैसे अटेम्प्ट करें।

[09:05:47] ठीक है ना? बट कुछ क्वेश्चन ऐसे होंगे जो

[09:05:49] आपको बाद में लगगा कि यार ये एग्जाम में

[09:05:52] हो सकते थे पर एग्जाम टाइम हिट नहीं

[09:05:54] करेंगे। इस अप्रोच को हमें यहां पे थोड़ा

[09:05:55] सीखना होगा कि हां यार कैसे हम एश्योर

[09:05:57] करें कि एग्जाम में भी वो क्वेश्चंस ठीक

[09:05:59] करके आए।

[09:06:01] ठीक है? बाकी देखो मैं एक्सपेक्ट करूंगा

[09:06:03] आप में से बहुत सारे बच्चे ऐसे होंगे जो

[09:06:05] नेक्स्ट ईयर रिजल्ट लेकर आएंगे। ठीक है

[09:06:07] ना? और मेरा देखो हमेशा फोकस इसी बात के

[09:06:09] ऊपर रहा है कि जो मैं पढ़ा रहा हूं उससे

[09:06:12] क्वेश्चंस आने चाहिए। आई होप आए भी नहीं

[09:06:14] भी आए तो आई एम एक्सट्रीमली सॉरी फॉर दैट

[09:06:16] बट कोशिश यहां पे रहेगी बट आप लोगों को

[09:06:19] बेस्ट से बेस्ट कंटेंट मैं डिलीवर कर पाऊं

[09:06:21] एंड आप अपनी तरफ से भी कंप्लीट बेस्ट दो

[09:06:22] सो दैट कि हम हमारा जो टारगेट है वो है कि

[09:06:26] आपको अपनी ड्रीम डेस्टिनेशन तक पहुंचने का

[09:06:28] वो वहां तक आप पहुंच पाओ ठीक है तो चलिए

[09:06:31] दोस्तों हां हां सीसेट का भी मैं ही

[09:06:33] करूंगा सीसेट बट अभी 1 महीने का गैप है

[09:06:36] सीसेट आपका आएगा 21 मार्च को ठीक है वो

[09:06:38] डेट फिक्स है 21 मार्च को हम लोग करेंगे

[09:06:41] अह सीसेट का जो डिस्कशन है उसको हम वहां

[09:06:44] पे उस टाइम करेंगे।

[09:06:48] हां हां सी जीआई टैग जो होते हैं वो

[09:06:51] मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के

[09:06:52] अंतर्गत आते हैं।

[09:06:58] अरे कल नहीं है भाई आर्य मतलब इतना भी मत

[09:07:00] कराओ कि कल ही सीसेट हो जाए। सीसेट अभी एक

[09:07:02] महीने बाद है। अगर आप पूछ रहे हो हां

[09:07:04] सीसेसट की क्लास है क्या कल? हां जो पेड

[09:07:06] बैचेस वाले बच्चे हैं उनके लिए डेफिनेटली

[09:07:07] सीट की क्लास तो होगी ही होगी। बिल्कुल

[09:07:09] होगी। हां जी। हां जी। हां जी। चलो ठीक

[09:07:12] है। हां, नोट्स अभी सेंड कर रहा हूं 5

[09:07:14] मिनट के अंदर। कृष् डोंट वरी। ठीक है।

[09:07:15] थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग। इसी तरह से आप

[09:07:17] सब लोग हार्ड वर्क करते रहिए। बहुत अच्छा

[09:07:18] लगा आप लोगों से आज कनेक्ट करके। एंड इसी

[09:07:21] तरह से हार्ड वर्क करिए। आई विश यू द वेरी

[09:07:23] बेस्ट। एंड आई होप कि आप सबका एग्जाम

[09:07:24] अच्छे से क्लियर हो। थैंक यू सो मच। ऑल द

[09:07:26] बेस्ट।
