# लालच में अंधा बेटा! माँ का 1 करोड़ का बीमा करवाया… पर ईश्वर की लीला देखकर पूरा शहर दंग रह गया |

https://www.youtube.com/watch?v=yKWcfqd3QRM
Translation: en

[00:00] राकेश अभी-अभी ऑफिस से लौटा था।
  Rakesh had just returned from the office.

[00:03] अंदर आकर अभी ढंग से बैठा भी नहीं था कि उसकी पत्नी मोबाइल लेकर सामने आ खड़ी हुई।
  He had barely sat down properly after coming inside when his wife stood in front of him with her mobile.

[00:07] क्या हुआ?
  What happened?

[00:08] राकेश ने थकी आवाज में पूछा।
  Rakesh asked in a tired voice.

[00:10] यह देखो।
  Look at this.

[00:11] पूजा ने फोन उसकी नाक के सामने लहराया।
  Pooja waved the phone in front of his nose.

[00:14] स्क्रीन पर WhatsApp खुला था।
  WhatsApp was open on the screen.

[00:16] उसकी कॉलेज फ्रेंड की तस्वीर थी।
  There was a picture of her college friend.

[00:18] एक बड़े से घर के सामने चमकती गाड़ी के बगल में डिजाइनर साड़ी में देखकर राकेश झुंझलाया तो पूजा की आंखें भर आई।
  Seeing her in a designer saree next to a shining car in front of a big house, Rakesh got annoyed, and Pooja's eyes filled with tears.

[00:27] रिचा है यह।
  This is Richa.

[00:28] वही रिचा जो मुझसे दो साल जूनियर थी।
  The same Richa who was two years junior to me.

[00:31] आज उसकी अपनी कोठी है गुड़गांव के पोश इलाके में और मैं आज भी इस घटिया से मोहल्ले के दो कमरे के छोटे से मकान में सड़ रही हूं।
  Today she has her own bungalow in a posh area of Gurgaon, and I am still rotting in this small two-room house in this lousy neighborhood.

[00:40] राकेश ने चुपचाप जूते उतारे।
  Rakesh quietly took off his shoes.

[00:42] उसे पता था यह बातचीत कहां जाने वाली है।
  He knew where this conversation was going to lead.

[00:45] बस करो पूजा।
  Stop it, Pooja.

[00:46] क्यों बस करूं?
  Why should I stop?

[00:48] पूजा चीखी तुम्हारे दोस्त विक्रम को देखो।
  Pooja screamed, look at your friend Vikram.

[00:51] पिछले महीने नई गाड़ी ली और कोई ऐसी वैसी नहीं।
  He bought a new car last month, and not just any car.

[00:54] Rang Rover ली है Rang Rover और रोहित वह तो अपनी बीवी को दुबई घुमाने ले गया।
  He bought a Range Rover, a Range Rover, and Rohit, he took his wife to Dubai for a trip.

[00:59] तरह-तरह के नजारों का
  Of various sights.

[01:01] मजा लेते हुए रोज फोटो अपलोड करते हैं और एक हम है विदेश घूमना तो दूर महीने के आखिरी हफ्ते में खर्चा भी मुश्किल से निकाल पाते हैं।
  They upload photos every day while having fun, and then there's us; forget about traveling abroad, we can barely manage our expenses in the last week of the month.

[01:10] तो मैं क्या करूं?
  So what should I do?

[01:10] राकेश की आवाज में हताशा उबल पड़ी।
  Frustration boiled over in Rakesh's voice.

[01:13] एटीएम तोड़ दूं?
  Should I break an ATM?

[01:16] बैंक लूट लूं।
  Should I rob a bank?

[01:16] कुछ तो करो।
  Do something.

[01:16] पूजा चीखी कोई रास्ता निकालो।
  Pooja screamed, find a way.

[01:20] देखो अपने आसपास हर कोई तरक्की कर रहा है।
  Look around you, everyone is progressing.

[01:23] सिर्फ हम ही हैं जो एक ढंग का मकान तक नहीं खरीद पाए।
  We are the only ones who haven't even been able to buy a decent house.

[01:26] तुम्हें पता है क्यों?
  Do you know why?

[01:28] क्यों?
  Why?

[01:28] राकेश ने पूछा।
  Rakesh asked.

[01:32] पूजा ने एक गहरी सांस ली।
  Pooja took a deep breath.

[01:32] फिर उसकी उंगली सावित्री देवी के कमरे की ओर उठी।
  Then her finger pointed towards Savitri Devi's room.

[01:34] क्योंकि इस घर में एक फालतू का बोझ है।
  Because there is a useless burden in this house.

[01:37] सुनते ही कमरे में बैठी सावित्री देवी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया।
  Upon hearing this, Savitri Devi, sitting in the room, felt darkness cloud her vision.

[01:42] पूजा ने बोलना बदस्तूर जारी रखा।
  Pooja continued speaking relentlessly.

[01:44] हर महीने इनकी दवाइयां 5000 डॉक्टर की फीस 3000 और खाना पीना अलग कुल मिलाकर 10000 का खर्च है अकेले तुम्हारी मां का और तुम्हारी कुल तनख्वाह 32000
  Every month, her medicines cost 5000, doctor's fees 3000, and food and drink are separate; in total, your mother alone costs 10,000, and your total salary is 32,000.

[01:58] पूजा यह बात करने का तरीका नहीं है।
  Pooja, this is not the way to talk.

[02:02] राकेश ने रोकना चाहा तो क्या करूं?
  Rakesh tried to stop her, so what should I do?

[02:06] पूजा के आंसू अब बह रहे थे।
  Pooja's tears were now flowing.

[02:06] किससे कहूं?
  Who should I tell?

[02:06] तुमसे कहूं तो तुम मां की तरफदारी करते हो।
  If I tell you, you take your mother's side.

[02:09] किसी और से कहूं तो बदनामी होती है।
  If I tell anyone else, it brings shame.

[02:12] मैं घुट रही हूं इस घर में, समझे तुम?
  I am suffocating in this house, do you understand?

[02:14] सावित्री देवी यह सुनकर बाहर आई।
  Savitri Devi came out after hearing this.

[02:17] बेटी, मेरी वजह से?
  Daughter, because of me?

[02:20] हां, पूजा ने बीच में काट दिया, सिर्फ और सिर्फ आपकी वजह से।
  Yes, Pooja interrupted, only and only because of you.

[02:23] अगर आप ना होती तो हम महीने के आखिर में पैसे बचा पाते, ईएमआई भर पाते, अपना घर ले पाते।
  If you weren't here, we could have saved money at the end of the month, paid the EMI, and bought our own house.

[02:29] लेकिन नहीं, यहां तो पहले मां जी, फिर बाकी सब।
  But no, here it is first mother-in-law, then everyone else.

[02:33] अब राकेश कुछ कह नहीं पाया।
  Now Rakesh could not say anything.

[02:36] उसे भी लग रहा था कि पूजा गलत नहीं कह रही।
  He also felt that Pooja was not saying anything wrong.

[02:39] फिर पूजा चीखी, वो तुम्हारी मां है तो क्या मैं तुम्हारी बीवी नहीं?
  Then Pooja screamed, if she is your mother, then am I not your wife?

[02:42] क्या मेरे सपने नहीं, मेरी चाहते नहीं?
  Do I not have dreams, do I not have desires?

[02:45] कहते हुए पूजा सावित्री देवी के करीब आ गई।
  While saying this, Pooja came close to Savitri Devi.

[02:48] एक पल के लिए उसकी आंखों में शर्म आई, लेकिन फिर गुस्से ने उसे डुबो दिया।
  For a moment, there was shame in her eyes, but then anger drowned it.

[02:53] और धीमी आवाज में बोली, मां जी आप ही बताइए अगर आप ना होती तो हम कहां होते?
  And she said in a low voice, Mother-in-law, you tell me, if you were not here, where would we be?

[03:00] सावित्री देवी के होठ।
  Savitri Devi's lips.

[03:03] हिले।
  Hile.

[03:03] बेटी बताइए ना।
  Daughter, tell me.

[03:06] पूजा ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।
  Pooja interrupted her in the middle.

[03:06] हर महीने जो 12,000 आप पर खर्च होते हैं।
  The 12,000 that are spent on you every month.

[03:10] अगर वह बच जाए तो साल में कितने होंगे?
  If that were saved, how much would it be in a year?

[03:13] डेढ़ लाख।
  One and a half lakh.

[03:13] 2 साल में 3 लाख।
  3 lakhs in 2 years.

[03:16] हम एक अच्छा घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट दे सकते थे।
  We could have made a down payment to buy a good house.

[03:19] राकेश ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ा।
  Rakesh stepped forward and held her hand.

[03:22] बस करो पूजा, बहुत हो गया।
  Stop it Pooja, enough is enough.

[03:25] राकेश ने मां को लड़खड़ाते देखा तो सहारा दिया।
  Seeing his mother stumbling, Rakesh supported her.

[03:28] मां आप अंदर चलिए।
  Mother, you go inside.

[03:28] पूजा बस थोड़ी परेशान है।
  Pooja is just a little troubled.

[03:31] थोड़ी परेशान नहीं हूं मैं।
  I am not just a little troubled.

[03:31] बहुत ज्यादा परेशान हूं तुम्हारी मां से।
  I am very troubled by your mother.

[03:34] पूजा पीछे से चिल्लाई।
  Pooja shouted from behind.

[03:36] सावित्री देवी चुपचाप अपने कमरे में चली गई।
  Savitri Devi quietly went into her room.

[03:39] कमरे में पहुंचकर उन्होंने दरवाजा बंद किया और बिस्तर पर बैठ गई।
  Reaching the room, she closed the door and sat on the bed.

[03:43] उनके सीने में एक तीव्र दर्द उठा।
  A sharp pain arose in her chest.

[03:46] वे समझ गई थी कि उनका अपना घर अब उनका नहीं रहा।
  She understood that her own home was no longer hers.

[03:49] वे एक बोझ बन गई थी।
  She had become a burden.

[03:52] बाहर से आवाजें अब भी आ रही थी।
  Voices were still coming from outside.

[03:52] पूजा अब और भी ज्यादा आक्रामक हो गई थी।
  Pooja had now become even more aggressive.

[03:56] तुम जानते हो राकेश मेरे पापा ने शादी में कितना खर्च किया था?
  Do you know Rakesh, how much my father spent on the wedding?

[03:58] लाखों रुपए।
  Lakhs of rupees.

[04:01] कमरे में बैठी।
  Sitting in the room.

[04:04] सावित्री देवी के कानों ने जैसे सुनना ही बंद कर दिया था।
  It was as if Savitri Devi's ears had stopped hearing altogether.

[04:06] उन्हें अपने पति की याद आ रही थी जो 10 साल पहले इस दुनिया से चले गए थे।
  She was remembering her husband who had left this world 10 years ago.

[04:11] सामने दीवार पर टंगी उनकी तस्वीर को देखते हुए बोली देख रहे हो जी आपकी पत्नी आज अपने ही घर में एक अनचाहा बोझ बनकर रह गई है।
  Looking at his picture hanging on the wall in front, she said, 'Are you watching, dear? Today, your wife has become an unwanted burden in her own home.'

[04:20] काश आप मेरे साथ होते तो कम से कम मुझे बोझ तो कोई ना कहता।
  I wish you were with me, then at least no one would call me a burden.

[04:23] वे धीरे से बोली काश बहू समझ पाती कि बुढ़ापा उसका भी आएगा।
  She said softly, 'I wish my daughter-in-law could understand that old age will come for her too.'

[04:29] आज मैं हूं तो कल वो होगी।
  If it is me today, it will be her tomorrow.

[04:33] सावित्री देवी के पति को गुजरे 10 साल हो चुके थे।
  It had been 10 years since Savitri Devi's husband passed away.

[04:35] इकलौता बेटा राकेश और बहू पूजा ही उनके जीने का सहारा थे।
  Her only son Rakesh and daughter-in-law Pooja were her only support for living.

[04:39] कभी यह घर हंसी खुशी से गूंजता था।
  Once, this house used to echo with laughter and happiness.

[04:42] जब राकेश छोटा था और सावित्री की उंगली पकड़ कर चलता था।
  When Rakesh was small and used to walk holding Savitri's finger.

[04:45] अब उसी घर की दीवारें उसे काटने को दौड़ती थी।
  Now, the walls of that same house seemed to haunt her.

[04:51] वक्त ने राकेश को बड़ा और सावित्री को बूढ़ा कर दिया था।
  Time had made Rakesh grow up and Savitri grow old.

[04:54] राकेश एक छोटी सी प्राइवेट कंपनी में काम करता था।
  Rakesh worked in a small private company.

[04:57] तनख्वाह इतनी थी कि घर का गुजारा मुश्किल से हो पाता था।
  The salary was such that it was difficult to make ends meet at home.

[05:02] लेकिन उसकी पत्नी पूजा के सपने
  But his wife Pooja's dreams...

[05:05] बड़े थे।
  They were big.

[05:09] उसे बड़ी गाड़ी, बड़ा घर, महंगे कपड़े और गहनों का शौक था।
  She had a penchant for big cars, a big house, expensive clothes, and jewelry.

[05:12] यह शौक जब पूरे नहीं होते तो घर में कलह का जन्म होता और उस कलह का सारा ठीकरा फोड़ा जाता था सावित्री देवी पर।
  When these desires were not fulfilled, strife was born in the house, and the entire blame for that strife was placed on Savitri Devi.

[05:18] सब कुछ तुम्हारी मां की वजह से है।
  Everything is because of your mother.

[05:21] पूजा अक्सर राकेश के कान भरती।
  Pooja would often poison Rakesh's ears.

[05:24] इनके इलाज का खर्चा, इनके खाने-पीने का तामझाम।
  The expenses for her treatment, the fuss over her food and drink.

[05:27] अगर यह ना होती तो हम भी चार पैसे जोड़ पाते।
  If she weren't here, we would have been able to save some money too.

[05:30] कहने को राकेश अपनी मां का पक्ष लेता।
  For the sake of appearances, Rakesh would take his mother's side.

[05:33] अपनी मां के सामने ऐसे दिखाता कि उसे उनकी बड़ी परवाह है।
  In front of his mother, he would pretend that he cared for her a lot.

[05:36] लेकिन असलियत तो यह थी कि रोज-रोज की चिकचिक और पूजा के आंसुओं ने धीरे-धीरे उसके दिल में भी जहर घोलना शुरू कर दिया।
  But the reality was that the daily bickering and Pooja's tears had slowly started to poison his heart as well.

[05:44] अब उसे भी अपनी मां एक बोझ लगने लगी थी।
  Now, even he had started to see his mother as a burden.

[05:47] सावित्री देवी सब समझती थी।
  Savitri Devi understood everything.

[05:50] वह कम खाती कम बोलती।
  She would eat less and speak less.

[05:54] बस एक कोने में पड़ी रहती ताकि उनके बेटे बहू को कोई शिकायत का मौका ना मिले।
  She would just lie in a corner so that her son and daughter-in-law would not get any chance to complain.

[05:57] बस अपने पति की तस्वीर से बातें करके दिल का बोझ हल्का कर लेती।
  She would just lighten the burden of her heart by talking to her husband's photograph.

[06:02] उनकी आंखों से आंसू झरझर बहने लगे।
  Tears started streaming down from her eyes.

[06:05] लगते।
  They seem.

[06:05] लेकिन वह उन्हें अपने आंचल में छिपा लेती इस डर से कि कहीं उनकी सिसकियों की आवाज बहू के कानों तक ना पहुंच जाए।
  But she would hide them in her pallu for fear that the sound of their sobs might reach her daughter-in-law's ears.

[06:13] उन्हें क्या पता था कि आने वाला तूफान उनकी सिसकियों से भी ज्यादा खामोश और भयानक होने वाला था।
  Little did she know that the coming storm was going to be even more silent and terrifying than her sobs.

[06:17] उस रात की भयानक लड़ाई के बाद घर एक खामोश कब्रगाह में बदल गया था।
  After that night's terrible fight, the house had turned into a silent graveyard.

[06:23] दिन गुजर रहे थे लेकिन वक्त जैसे थम गया था।
  Days were passing, but time seemed to have stood still.

[06:26] सावित्री देवी अब अपने कमरे से तभी निकलती जब या तो उन्हें बाथरूम जाना होता या रसोई से पानी लेना होता।
  Savitri Devi would now only come out of her room when she either had to go to the bathroom or get water from the kitchen.

[06:35] पूजा खाना बनाकर उनके कमरे के दरवाजे के पास रख देती और चली जाती।
  Pooja would cook the food, place it near the door of her room, and leave.

[06:37] दोनों के बीच शब्द खत्म हो गए थे।
  Words had run out between the two.

[06:41] बस एक भारी चुप्पी बची थी जो घुटन पैदा कर रही थी।
  Only a heavy silence remained, which was creating suffocation.

[06:43] राकेश इस चुप्पी के बीच बुरी तरह पिस रहा था।
  Rakesh was being crushed badly in the midst of this silence.

[06:46] एक तरफ मां का मुरझाया हुआ चेहरा उसे अपराध बोध से भर देता तो दूसरी तरफ पूजा का पत्थर जैसा व्यवहार उसे और भी ज्यादा बेबस महसूस कराता।
  On one hand, his mother's withered face filled him with guilt, and on the other, Pooja's stone-like behavior made him feel even more helpless.

[06:57] ऑफिस में भी उसका मन नहीं लगता था।
  He could not focus at the office either.

[07:01] वह जानता था कि पूजा की बातें कड़वी थी लेकिन गलत नहीं थी।
  He knew that Pooja's words were bitter but not wrong.

[07:04] वह सचमुच अपने दोस्तों
  He really [was with] his friends

[07:07] से बहुत पीछे रह गया था।
  He had fallen far behind.

[07:10] उसकी 32,000 की तनख्वाह एक मजाक लगने लगी थी।
  His salary of 32,000 had started to feel like a joke.

[07:13] एक रात दोनों अपने कमरे में थे।
  One night, both were in their room.

[07:16] पूजा मोबाइल पर अपनी सहेलियों की तस्वीरों को खामोशी से स्क्रॉल कर रही थी।
  Pooja was silently scrolling through her friends' photos on her mobile.

[07:21] कोई मालदीव में थी तो कोई अपने नए घर की तस्वीरें पोस्ट कर रही थी।
  Someone was in the Maldives, while someone else was posting pictures of their new house.

[07:24] राकेश बिस्तर पर लेटा छत को घूर रहा था।
  Rakesh was lying on the bed, staring at the ceiling.

[07:26] उसके दिमाग में घर के खर्चों और अगले महीने आने वाले बिलों की लिस्ट चल रही थी।
  A list of household expenses and the bills coming next month was running through his mind.

[07:32] तभी टीवी पर एक विज्ञापन आया।
  Just then, an advertisement appeared on the TV.

[07:35] एक इंश्योरेंस कंपनी का विज्ञापन था जिसमें दिखाया गया था कि कैसे एक आदमी की अचानक मृत्यु के बाद बीमा के पैसों से उसके परिवार की जिंदगी संवर जाती है।
  It was an insurance company advertisement that showed how, after a man's sudden death, the insurance money improves his family's life.

[07:46] उसकी बेटी की शादी धूमधाम से होती है और पत्नी को किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।
  His daughter's wedding takes place with great pomp, and his wife does not have to beg before anyone.

[07:51] विज्ञापन के अंत में एक लाइन आई।
  At the end of the advertisement, a line appeared.

[07:53] अपनों के जाने का दुख तो कम नहीं कर सकते पर उनकी कमी से होने वाली आर्थिक तंगी को जरूर दूर कर सकते हैं।
  We cannot reduce the pain of losing loved ones, but we can certainly remove the financial hardship caused by their absence.

[07:59] पूजा जो अब तक मोबाइल में खोई थी अचानक ठिठक गई।
  Pooja, who was lost in her mobile until now, suddenly froze.

[08:05] उसकी नजरें टीवी स्क्रीन पर जम गई।
  Her eyes became fixed on the TV screen.

[08:05] विज्ञापन में
  In the advertisement

[08:07] मुस्कुराते हुए परिवार को देखकर उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक आई जिसे राकेश पकड़ नहीं पाया।
  Seeing the smiling family, a strange glint appeared in her eyes which Rakesh could not catch.

[08:12] उसने धीरे से टीवी की आवाज बढ़ाई।
  She slowly turned up the volume of the TV.

[08:15] राकेश यह देखो।
  Rakesh, look at this.

[08:16] राकेश ने बेमन से टीवी की तरफ देखा।
  Rakesh looked towards the TV reluctantly.

[08:19] क्या है वही रोज का ड्रामा?
  What is it, the same daily drama?

[08:22] ड्रामा नहीं समाधान है यह।
  It is not a drama, it is a solution.

[08:24] पूजा फुसफुसाई।
  Puja whispered.

[08:26] उसकी आवाज में एक अजीब सी सरसराहट थी।
  There was a strange rustle in her voice.

[08:28] सोचो अगर हमारे पास भी अचानक से एक करोड़ आ जाए तो क्या?
  Think, what if we also suddenly got ten million?

[08:32] मजाक कर रही हो?
  Are you joking?

[08:34] लॉटरी लगने से तो रही।
  It's not like we're going to win the lottery.

[08:36] राकेश ने आंखें फेरते हुए कहा।
  Rakesh said, turning his eyes away.

[08:39] पूजा उसकी ओर घूमी।
  Puja turned towards him.

[08:42] उसकी आंखों में एक शातिर चमक थी।
  There was a cunning glint in her eyes.

[08:45] लॉटरी नहीं राकेश जीवन बीमा।
  Not a lottery, Rakesh, life insurance.

[08:47] उसने धीरे से कहा।
  She said softly.

[08:49] अगर हम मांजी का बीमा करवा दें तो?
  What if we get Manji insured?

[08:52] राकेश का दिमाग शून्य हो गया।
  Rakesh's mind went blank.

[08:54] वह एकदम से उठकर बैठ गया।
  He sat up suddenly.

[08:55] क्या तुम पागल हो गई हो पूजा?
  Have you gone mad, Puja?

[08:58] तुम्हें पता भी है तुम क्या कह रही हो?
  Do you even know what you are saying?

[09:00] अपनी मां का बीमा और वह भी इस नियत से?
  Your own mother's insurance, and that too with this intention?

[09:04] तो क्या गलत कह रही हूं?
  So what am I saying wrong?

[09:06] पूजा ने बेशर्मी से कहा।
  Puja said shamelessly.

[09:07] से तर्क दिया।
  She argued.

[09:10] उसकी आवाज अब फुसफुसाहट नहीं बल्कि एक ठंडी सच्चाई थी।
  Her voice was no longer a whisper but a cold truth.

[09:13] उनकी उम्र हो ही गई है।
  They have reached an age.

[09:17] आज नहीं तो कल भगवान ना करे अगर उन्हें कुछ हो गया तो हमें क्या मिलेगा?
  If not today, then tomorrow, God forbid, if something happens to them, what will we get?

[09:19] सिवाय रोने धोने और अंतिम संस्कार के खर्चे के।
  Except for crying and the expenses of the funeral.

[09:22] अगर बीमा होगा तो कम से कम हमारी जिंदगी तो संवर जाएगी।
  If there is insurance, at least our lives will be improved.

[09:25] राकेश का चेहरा सफेद पड़ गया।
  Rakesh's face turned pale.

[09:27] चुप हो जाओ पूजा भगवान से डरो।
  Shut up, Pooja, fear God.

[09:30] ऐसी बातें मुंह से निकालते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती।
  Aren't you ashamed to say such things?

[09:33] शर्म और हया से पेट नहीं भरता राकेश।
  Shame and modesty do not fill the stomach, Rakesh.

[09:36] पूजा ने उसकी आंखों में आंखें डालकर कहा और मैं उनके मरने की दुआ नहीं कर रही।
  Pooja said, looking into his eyes, and I am not praying for their death.

[09:38] मैं बस एक फाइनेंशियल प्लानिंग की बात कर रही हूं।
  I am just talking about financial planning.

[09:41] वैसे भी कौन सा वह अपनी जिंदगी जी रही हैं।
  Anyway, it's not like she is living her life.

[09:43] बीमार ही तो रहती हैं।
  She just stays sick.

[09:45] इससे तो अच्छा है कि बस राकेश चीखा।
  It is better than this, just— Rakesh screamed.

[09:47] लेकिन उसकी आवाज में गुस्सा कम और हार ज्यादा थी।
  But there was less anger and more defeat in his voice.

[09:50] पूजा समझ गई कि तीर सही निशाने पर लगा है।
  Pooja understood that the arrow had hit the right target.

[09:54] वह उसके ओर करीब आई।
  She came closer to him.

[09:57] राकेश मैं तुम्हारी दुश्मन नहीं हूं।
  Rakesh, I am not your enemy.

[10:00] मैं तुम्हारी पत्नी हूं।
  I am your wife.

[10:03] मैं तुम्हारा भला चाहती हूं।
  I want your well-being.

[10:06] हमारा भला चाहती।
  I want our well-being.

[10:08] हूं।
  Hmm.

[10:08] तुम ना तो प्रमोशन ला पा रहे हो ना कोई साइड बिजनेस कर पा रहे हो?
  You are neither able to get a promotion nor able to do any side business?

[10:14] तुम खुद ही बताओ।
  You tell me yourself.

[10:14] क्या हमारे पास इस तंगी से निकलने का कोई और रास्ता है?
  Do we have any other way to get out of this financial crunch?

[10:19] राकेश के पास कोई जवाब नहीं था।
  Rakesh had no answer.

[10:19] पूजा की हर बात एक कड़वा सच थी।
  Every word of Pooja was a bitter truth.

[10:22] वह सचमुच एक हारा हुआ इंसान था।
  He was truly a defeated person.

[10:26] सोचो राकेश।
  Think, Rakesh.

[10:26] पूजा ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
  Pooja placed her hand on his shoulder.

[10:29] ₹1 करोड़, हमारा घर, अच्छी गाड़ी, मेरी अधूरी ख्वाहिशें, तुम्हारे अधूरे सपने, सब पूरे हो सकते हैं।
  1 crore rupees, our house, a good car, my unfulfilled desires, your incomplete dreams, everything can be fulfilled.

[10:37] यह कहकर पूजा मुंह फेर कर लेट गई।
  Saying this, Pooja turned away and lay down.

[10:40] लेकिन उसने राकेश के मन में लालच का एक ऐसा बीज बो दिया था जो रात भर उसके दिमाग में अंकुरित होता रहा।
  But she had sown such a seed of greed in Rakesh's mind that it kept germinating in his brain all night long.

[10:46] उसे अपनी गरीबी, अपने अधूरे सपने, दोस्तों के ताने और बॉस की डांट सब एक साथ याद आने लगे और उन सब समस्याओं का एक ही समाधान नजर आ रहा था।
  He started remembering his poverty, his incomplete dreams, the taunts of friends, and the boss's scolding all at once, and only one solution to all those problems was visible.

[10:57] एक करोड़ पूजा के तर्क उसके दिमाग में जगह बना रहे थे।
  One crore; Pooja's arguments were making space in his mind.

[11:01] धीरे-धीरे पाप और पुण्य की रेखा धुंधली होने लगी।
  Slowly, the line between sin and virtue began to blur.

[11:05] आधी रात को जब राकेश को लगा कि पूजा सो गई है तो उसने
  In the middle of the night, when Rakesh felt that Pooja had fallen asleep, he...

[11:11] धीरे से अपना मोबाइल उठाया।
  He slowly picked up his mobile.

[11:13] उसने Google पर सर्च किया लाइफ इंश्योरेंस फॉर सीनियर सिटीजंस इन इंडिया।
  He searched on Google for 'life insurance for senior citizens in India'.

[11:16] गरीबी और बेबसी ने उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी थी।
  Poverty and helplessness had blindfolded him.

[11:19] अगले कुछ दिनों तक घर में एक अजीब सी खामोशी छाई रही।
  For the next few days, a strange silence prevailed in the house.

[11:22] राकेश अपनी मां से नजरें चुराता और पूजा मौके की तलाश में रहती।
  Rakesh would avoid eye contact with his mother, and Pooja would look for an opportunity.

[11:28] उसने राकेश को पूरी तरह अपने काबू में कर लिया था।
  She had completely taken control of Rakesh.

[11:33] उसे यह समझाने में सफल हो गई थी कि यह मां के खिलाफ नहीं बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने की एक समझदारी भरी योजना है।
  She had succeeded in convincing him that this was not against his mother, but a wise plan to secure their future.

[11:40] देखो राकेश हम तो बस एक व्यवस्था कर रहे हैं।
  Look Rakesh, we are just making an arrangement.

[11:43] उम्र उनकी हो चुकी है।
  She has reached that age.

[11:46] बीमार भी रहती हैं।
  She also stays ill.

[11:49] स्वाभाविक रूप से भी तो कुछ हो सकता है ना।
  Something could happen naturally too, right?

[11:49] पूजा ने उसे समझाया।
  Pooja explained to him.

[11:52] राकेश का लालच जाग उठा।
  Rakesh's greed awakened.

[11:52] वह तैयार हो गया।
  He got ready.

[11:56] अब सवाल था कि यह सब किया कैसे जाए?
  Now the question was, how to get all this done?

[11:59] बीमार इंसान का इतना बड़ा बीमा कराना आसान तो नहीं था?
  Getting such a large insurance policy for a sick person was not easy, was it?

[12:02] तभी पूजा बोली वह सब मैं देख लूंगी।
  Just then Pooja said, I will take care of all that.

[12:05] आजकल पैसे खिलाकर सब कुछ संभव हो जाता है।
  Nowadays, everything becomes possible by bribing.

[12:07] लेकिन राकेश मेरी एक बात गांठ बांध लो।
  But Rakesh, keep one thing of mine in mind.

[12:11] मां जी को तो इस बात की भनक भी नहीं लगनी चाहिए।
  Mother should not even get a hint of this.

[12:13] सुनकर राकेश अचंभित रह गया।
  Hearing this, Rakesh was left astonished.

[12:15] क्यों?
  Why?

[12:17] मां से यह बात क्यों छिपानी है?
  Why does this matter have to be hidden from Mother?

[12:19] अरे राकेश, मैं जैसे कहती हूं, तुम वैसे ही करो।
  Hey Rakesh, do exactly as I say.

[12:22] कहीं उन्होंने कोई अड़चन डाल दी तो हम बैठे रह जाएंगे।
  If she creates any obstacle, we will be left sitting here.

[12:26] कहकर पूजा ने उसे चुप करा दिया।
  Saying this, Pooja silenced him.

[12:28] लेकिन राकेश नहीं जानता था कि उसके शातिर दिमाग में कौन सी योजना जन्म ले रही है।
  But Rakesh did not know what kind of plan was being born in her cunning mind.

[12:34] पूजा ने अपने एक दूर के रिश्तेदार से बात की जो एक इंश्योरेंस एजेंट था।
  Pooja spoke to a distant relative of hers who was an insurance agent.

[12:39] उसका नाम सुरेश था।
  His name was Suresh.

[12:40] सुरेश भी पैसों का लालची और जोड़तोड़ करने वाला इंसान था।
  Suresh was also a greedy and manipulative person.

[12:43] पूजा ने उसे फोन किया और सारी योजना समझाई।
  Pooja called him and explained the whole plan.

[12:46] सुरेश भाई, एक काम है।
  Suresh brother, there is a job.

[12:48] हो जाएगा।
  It will be done.

[12:49] पूजा ने पूछा, तुम हुकुम करो दीदी।
  Pooja asked, you command me, sister.

[12:53] सुरेश ने लल्लू चप्पो वाले अंदाज में कहा, "ऐसा कौन सा काम है जो तुम्हारा भाई नहीं कर सकता?"
  Suresh said in a flattering tone, "What kind of work is there that your brother cannot do?"

[13:01] पूजा ने उसे मां के नाम पर एक करोड़ का बीमा करवाने की बात बताई।
  Pooja told him about getting a one-crore insurance policy in Mother's name.

[13:03] लेकिन यह भी साफ कर दिया कि मां को इस बारे में पता नहीं चलना चाहिए।
  But she also made it clear that Mother should not know about this.

[13:09] सुरेश पहले तो चौका।
  Suresh was startled at first.

[13:10] फिर हंसा।
  Then he laughed.

[13:12] दीदी, आप भी ना।
  Sister, you too.

[13:16] अरे, यह तो हमारे काम का हिस्सा है।
  Hey, this is part of our work.

[13:18] आप चिंता मत करो।
  Don't you worry.

[13:18] बस कुछ कागजात लगेंगे और एक छोटा सा मेडिकल होगा।
  Just some documents will be needed and there will be a small medical checkup.

[13:21] वह सब मैं संभाल लूंगा।
  I will handle all that.

[13:21] लेकिन मेडिकल, मां जी तो कहींंगी नहीं।
  But the medical, Mother won't agree to it.

[13:24] राकेश ने चिंता जताई।
  Rakesh expressed concern.

[13:27] अरे जीजा जी, आप किस दुनिया में हैं?
  Oh brother-in-law, which world are you living in?

[13:30] आजकल सब हो जाता है।
  Everything is possible these days.

[13:30] बस ऊपर की कमाई लगती है।
  It just takes some extra money.

[13:33] मैं एक डॉक्टर से बात कर लूंगा।
  I will talk to a doctor.

[13:33] वो घर आकर ही चेकअप कर लेगा और मां जी की एकदम ओके रिपोर्ट बना देगा।
  He will come home to do the checkup and will make a perfectly okay report for Mother.

[13:39] सब काम हो जाते हैं आजकल।
  All work gets done these days.

[13:41] बस थोड़े पैसे खिलाने पड़ते हैं।
  You just have to bribe a little.

[13:44] चिंता मत कीजिए।
  Don't worry.

[13:44] आप बस मांझी को यह कहकर तैयार कर लेना कि सरकार की तरफ से बुजुर्गों के लिए कोई नई स्वास्थ्य योजना आई है जिसके लिए यह फॉर्म भरना और जांच करवानी जरूरी है।
  You just prepare Mother by telling her that a new health scheme for the elderly has come from the government, for which filling out this form and getting a checkup is necessary.

[13:55] योजना तैयार थी।
  The plan was ready.

[13:58] अगले दिन पूजा ने बड़ी मिठास घोलकर सावित्री देवी से कहा, मांझी आपके लिए एक खुशखबरी है।
  The next day, Pooja said to Savitri Devi with great sweetness, "Mother, there is good news for you."

[14:04] सरकार ने आप जैसे बुजुर्गों के लिए एक बहुत अच्छी स्कीम निकाली है।
  The government has launched a very good scheme for elderly people like you.

[14:07] उसमें आपका नाम लिखवाना है।
  We have to get your name registered in it.

[14:10] हर महीने आपको कुछ पेंशन
  Every month you will get some pension

[14:12] मिलेगी और इलाज का खर्चा भी सरकार देगी।
  You will get it, and the government will also pay for the treatment expenses.

[14:15] सावित्री देवी का मन बागबाग हो गया।
  Savitri Devi was overjoyed.

[14:19] मेरा बेटा बहू मेरा कितना ध्यान रखते हैं।
  How much my son and daughter-in-law take care of me.

[14:21] उन्होंने गदगद होकर कहा।
  She said, overwhelmed with emotion.

[14:23] उन्हें लगा कि शायद पूजा बदल गई है।
  She felt that perhaps Pooja had changed.

[14:26] उसके मन का मैल धुल गया है।
  The malice in her heart has been washed away.

[14:29] उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे उन कागजों पर अंगूठा लगा दिया।
  Without thinking, she put her thumbprint on those papers.

[14:31] जहांजहां राकेश ने उन्हें कहा।
  Wherever Rakesh told her to.

[14:34] वह अनपढ़ थी।
  She was illiterate.

[14:37] उन्हें क्या पता था कि वह अपनी पेंशन के नहीं बल्कि अपने डेथ वारंट पर निशान लगा रही थी।
  Little did she know that she was not signing for her pension, but for her own death warrant.

[14:39] दो दिन बाद सुरेश एक आदमी के साथ घर आया जिसे उसने डॉक्टर बताया।
  Two days later, Suresh came home with a man whom he introduced as a doctor.

[14:42] उस आदमी ने स्टेथोस्कोप लगाकर दो-चार बार इधर-उधर देखा।
  That man put on a stethoscope and looked around a few times.

[14:45] ब्लड प्रेशर नापा और सब ठीक है कहकर चला गया।
  He checked the blood pressure and left after saying everything is fine.

[14:48] एक हफ्ते बाद सुरेश का फोन आया।
  A week later, Suresh called.

[14:51] राकेश और पूजा दोनों ने स्पीकर पर फोन सुना।
  Rakesh and Pooja both listened to the call on speakerphone.

[14:55] दीदी मुबारक हो।
  Congratulations, sister.

[14:57] पॉलिसी पास हो गई है।
  The policy has been approved.

[15:01] बस अब आप लोग पहली किश्त ₹56,000 जमा करवा दीजिए।
  Now you just need to deposit the first installment of ₹56,000.

[15:05] ₹6,000 रकम सुनकर राकेश का दिल बैठ गया।
  Hearing the amount of ₹56,000, Rakesh's heart sank.

[15:09] यह उनकी महीनों की जमा पूंजी थी।
  This was their savings of many months.

[15:12] पूजा ने अपनी थोड़ी बहुत जमा पूंजी
  Pooja [used] her little bit of savings

[15:14] निकाली।
  Took it out.

[15:14] राकेश ने अपने एक दोस्त से ₹00 उधार लिए।
  Rakesh borrowed ₹00 from one of his friends.

[15:21] अगले दिन उन्होंने वह पैसे सुरेश को दे दिए।
  The next day, he gave that money to Suresh.

[15:23] अब उनकी आंखों में बस एक ही इंतजार था उस दिन का जब सावित्री देवी की आंखें हमेशा के लिए बंद हो जाएंगी और उनके घर की तिजोरी ₹1 करोड़ से भर जाएगी।
  Now, in his eyes, there was only one wait: for the day when Savitri Devi's eyes would close forever and their house safe would be filled with ₹1 crore.

[15:32] पॉलिसी के कागजात अलमारी में छिपाने के बाद घर में एक अजीब सा ठहराव आ गया।
  After hiding the policy documents in the cupboard, a strange stillness descended upon the house.

[15:38] राकेश और पूजा का व्यवहार सावित्री देवी के प्रति नाटकीय रूप से बदल गया।
  Rakesh and Pooja's behavior towards Savitri Devi changed dramatically.

[15:41] जो पूजा कल तक उन्हें देखकर मुंह बना लेती थी, अब सुबह शाम उनके पैर छूने लगी।
  Pooja, who until yesterday would make faces at the sight of her, now started touching her feet every morning and evening.

[15:49] जो राकेश अपनी मां से बात तक नहीं करता था, अब उनके पास बैठकर उनका हालचाल पूछने लगा।
  Rakesh, who wouldn't even talk to his mother, now started sitting next to her and asking about her well-being.

[15:54] सावित्री देवी इस बदलाव से हैरान थी।
  Savitri Devi was surprised by this change.

[15:57] शुरू-शुरू में उन्हें लगा कि शायद उनकी प्रार्थना सुन ली गई और उनके बच्चे सुधर गए।
  Initially, she thought that perhaps her prayers had been heard and her children had improved.

[16:01] वह मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा करती।
  She would thank God in her heart.

[16:04] महीने बीतने लगे।
  Months began to pass.

[16:04] एक दो फिर तीन।
  One, two, then three.

[16:09] सावित्री देवी की सेहत वैसी ही बनी रही।
  Savitri Devi's health remained the same.

[16:12] लेकिन राकेश और पूजा का धैर्य अब टूटने लगा।
  But Rakesh and Pooja's patience was now beginning to break.

[16:15] लगा था।
  It felt like it.

[16:17] पॉलिसी का अगला प्रीमियम भरने का समय सिर पर था और उनकी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी।
  The time to pay the next premium of the policy was upon them and their savings were exhausted.

[16:20] 1 करोड़ का सपना अब एक बोझिल इंतजार में बदल गया था।
  The dream of 1 crore had now turned into a burdensome wait.

[16:23] घर में फिर से पैसों को लेकर तनाव बढ़ने लगा।
  Tension regarding money started rising in the house again.

[16:26] लेकिन इस बार वे सावित्री देवी के सामने जाहिर नहीं होने देते थे।
  But this time, they did not let it show in front of Savitri Devi.

[16:28] एक रात जब सावित्री देवी सो गई, पूजा ने कमरे का दरवाजा बंद किया।
  One night when Savitri Devi fell asleep, Pooja closed the room's door.

[16:34] उसकी आंखों में अब हताशा साफ दिख रही थी।
  Desperation was now clearly visible in her eyes.

[16:37] अब पूजा ने अपना दाम खेला।
  Now Pooja played her move.

[16:40] मुझसे अब और इंतजार नहीं होता राकेश।
  I cannot wait any longer, Rakesh.

[16:43] उसने फुसफुसाते हुए कहा, स्वाभाविक रूप से जाने में तो सालों लग जाएंगे।
  She whispered, it will take years for her to go naturally.

[16:48] प्रीमियम का पैसा कहां से आएगा?
  Where will the money for the premium come from?

[16:51] हमें कुछ करना होगा।
  We have to do something.

[16:54] राकेश कांप गया।
  Rakesh trembled.

[16:54] क्या?
  What?

[16:54] क्या मतलब है तुम्हारा?
  What do you mean?

[16:57] क्या करना होगा?
  What has to be done?

[16:57] वही जो तुम समझ रहे हो।
  The same thing that you are thinking.

[17:00] पूजा ने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा, एक छोटा सा हादसा।
  Pooja said, looking into his eyes, a small accident.

[17:03] किसी को शक भी नहीं होगा।
  No one will even suspect.

[17:06] बुढ़ापे में लोग गिर जाते हैं, बीमार हो जाते हैं।
  In old age, people fall down, they get sick.

[17:09] मर भी जाते हैं।
  They even die.

[17:12] राकेश की आत्मा ने उसे धिक्कारा।
  Rakesh's conscience rebuked him.

[17:12] पागल हो गई हो तुम।
  You have gone mad.

[17:12] यह
  This

[17:15] हत्या होगी।
  It will be a murder.

[17:18] हत्या नहीं कहते इसे।
  This is not called murder.

[17:18] इसे खुद की मदद करना कहते हैं।
  This is called helping oneself.

[17:21] पूजा ने उसके दिमाग को जहर से भरना जारी रखा।
  Pooja continued to fill his mind with poison.

[17:24] हम अपनी मदद कर रहे हैं, इस गरीबी से निकलने में।
  We are helping ourselves to get out of this poverty.

[17:27] सोचो अगर इस मौके का हमने फायदा नहीं उठाया तो हम सारी जिंदगी इसी नर्क में सड़ते रहेंगे।
  Think, if we don't take advantage of this opportunity, we will keep rotting in this hell for our whole lives.

[17:32] अपने साथ-साथ हम उनकी भी मदद कर रहे हैं, राकेश इस घुट-घुट कर जीने वाली जिंदगी से आजादी दिलाने में।
  Along with ourselves, we are also helping them, helping Rakesh get freedom from this suffocating life.

[17:42] राकेश की आंखों के सामने उसके बॉस का चेहरा, दोस्तों की चमकती गाड़ियां और पूजा के आंसू घूमने लगे।
  In front of Rakesh's eyes, his boss's face, his friends' shining cars, and Pooja's tears began to swirl.

[17:50] लालच की पट्टी उसकी आंखों पर इतनी मजबूती से बंधी थी कि उसे अब कुछ और सूझ ही नहीं रहा था।
  The blindfold of greed was tied so tightly over his eyes that he couldn't think of anything else now.

[17:55] वह चुप रहा और उसकी चुप्पी पूजा के लिए सहमति थी।
  He remained silent, and his silence was consent for Pooja.

[17:58] अब वह दोनों सिर्फ बेटा बहू नहीं थे।
  Now the two of them were not just son and daughter-in-law.

[18:01] वे शिकारी बन चुके थे और उनके अपने ही घर में उनकी अपनी ही मां उनका शिकार थी।
  They had become hunters, and in their own home, their own mother was their prey.

[18:07] सावित्री देवी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस छत के नीचे वह खुद को सबसे महफूज समझ रही थी, वहीं उनकी मौत की साजिश रची जा रही थी।
  Savitri Devi had no idea that under the very roof where she felt safest, a conspiracy for her death was being hatched.

[18:15] रही थी।
  She was.

[18:15] उनकी पहली योजना थी रसोई गैस।
  Their first plan was the kitchen gas.

[18:19] उस रात सावित्री देवी को खाना देने के बाद पूजा ने रसोई में जाकर गैस का नोब धीरे से घुमा दिया।
  That night, after giving food to Savitri Devi, Pooja went into the kitchen and slowly turned the gas knob.

[18:24] बस इतना कि गैस बहुत धीमी गति से रिसती रहे।
  Just enough so that the gas would leak at a very slow rate.

[18:27] फिर दोनों पति-पत्नी तैयार हुए और घर से निकल गए।
  Then both husband and wife got ready and left the house.

[18:30] सावित्री देवी को उन्होंने बताया कि वे सुबह ही लौटेंगे।
  They told Savitri Devi that they would return only in the morning.

[18:35] पूजा की सहेली के घर जागरण है।
  There is a 'Jagran' (religious vigil) at Pooja's friend's house.

[18:38] ठीक है बेटा ध्यान से जाना।
  Okay child, go carefully.

[18:41] सावित्री देवी ने कहा, "इस अनजान कि उनका बेटा और बहू उन्हें मौत के मुंह में अकेला छोड़कर जा रहे थे।"
  Savitri Devi said, unaware that her son and daughter-in-law were leaving her alone in the jaws of death.

[18:46] राकेश और पूजा पास के ही एक सस्ते से लॉज में रुक गए।
  Rakesh and Pooja stayed at a cheap lodge nearby.

[18:49] दोनों ही सो नहीं पाए।
  Neither of them could sleep.

[18:53] राकेश का जमीर उसे कचोट रहा था।
  Rakesh's conscience was pricking him.

[18:55] हम यह ठीक नहीं कर रहे हैं पूजा।
  We are not doing the right thing, Pooja.

[18:58] चुप रहो राकेश।
  Shut up, Rakesh.

[18:59] अगर कमजोर पड़े तो सब बर्बाद हो जाएगा।
  If we get weak, everything will be ruined.

[19:01] पूजा ने उसे झिड़क दिया।
  Pooja scolded him.

[19:04] भोर होने से ठीक पहले जैसा कि सावित्री देवी की आदत थी, वह उठी।
  Just before dawn, as was Savitri Devi's habit, she woke up.

[19:08] उन्होंने कमरे की बत्ती जलाई और रसोई की तरफ बढ़ी।
  She switched on the room light and moved towards the kitchen.

[19:10] सावित्री देवी रसोई के दरवाजे तक पहुंची ही थी कि उन्हें गैस की हल्की...
  Savitri Devi had just reached the kitchen door when she [smelled] a faint [scent] of gas...

[19:15] सी गंध आई।
  She smelled it.

[19:16] वह ठिठक गई।
  She stopped in her tracks.

[19:19] उन्हें लगा शायद बहू रात में दूध गर्म करके नोब बंद करना भूल गई होगी।
  She thought perhaps the daughter-in-law had forgotten to turn off the knob after heating the milk at night.

[19:25] उन्होंने रसोई की बत्ती नहीं जलाई और सीधा खिड़की की ओर बढ़ी और उसे खोल दिया।
  She did not turn on the kitchen light and went straight towards the window and opened it.

[19:28] फिर उन्होंने सिलेंडर का रेगुलेटर बंद किया।
  Then she turned off the cylinder regulator.

[19:30] ठीक उसी समय दरवाजा खटका।
  Just at that moment, there was a knock on the door.

[19:33] सुबह-सुबह दूध वाला आ गया था।
  The milkman had arrived early in the morning.

[19:36] सावित्री देवी दरवाजा खोलने चली गई।
  Savitri Devi went to open the door.

[19:39] बाहर की ताजी हवा अंदर आते ही गैस का असर और भी कम हो गया।
  As soon as the fresh air from outside came in, the effect of the gas lessened even more.

[19:42] सुबह 7:00 बजे जब राकेश और पूजा डरते-डरते घर लौटे तो उन्होंने दरवाजा खोलते ही सावित्री देवी को दूध वाले से बात करते हुए पाया।
  At 7:00 in the morning, when Rakesh and Pooja returned home fearfully, they found Savitri Devi talking to the milkman as soon as they opened the door.

[19:50] अरे बेटा तुम लोग आ गए।
  Oh son, you guys are back.

[19:54] मैं चाय बनाने ही जा रही थी।
  I was just about to make tea.

[19:56] सावित्री देवी ने मुस्कुराकर कहा।
  Savitri Devi said with a smile.

[19:59] यह देखकर उनके माथे पर पसीना आ गया।
  Seeing this, sweat appeared on their foreheads.

[20:02] जब पूजा रसोई में गई तो उसने देखा कि खिड़की खुली है और नोब बंद है।
  When Pooja went into the kitchen, she saw that the window was open and the knob was turned off.

[20:05] वह समझ गई कि मां को शक नहीं हुआ।
  She understood that Mother did not suspect anything.

[20:08] उन्होंने इसे बस एक भूल समझा।
  She considered it just a mistake.

[20:11] बाल-बाल बच गई।
  We narrowly escaped.

[20:14] यह तो उसने राकेश से गुस्से में कहा।
  She said this to Rakesh in anger.

[20:14] छोड़ दो यह सब, पूजा।
  Leave all this, Pooja.

[20:17] भगवान नहीं चाहता कि हम यह पाप करें। यह

[20:20] एक इशारा है। राकेश ने डरते हुए कहा,

[20:23] इशारा मैं किसी इशारे को नहीं मानती।

[20:26] किस्मत ने आज साथ नहीं दिया तो कल देगी।

[20:29] लेकिन मैं पीछे नहीं हटने वाली। पूजा ने

[20:31] दृढ़ता से कहा। उसके चेहरे पर हताशा नहीं

[20:34] बल्कि और भी ज्यादा खतरनाक इरादे थे। उस

[20:37] दिन के बाद से सावित्री देवी के मन में एक

[20:40] अनजाना सा डर घर करने लगा। गैस की गंध

[20:43] वाली घटना को उन्होंने पहले एक भूल ही

[20:45] समझा था। लेकिन रहरह कर उनके मन में यह

[20:48] विचार आ रहा था कि पूजा इतनी लापरवाह तो

[20:51] कभी नहीं थी। कुछ तो गलत हो रहा है। उनके

[20:54] बेटे बहू का मीठा व्यवहार अब उन्हें चुभने

[20:57] लगा था। उनकी देखभाल में छिपी बेसब्री अब

[21:00] और भी साफ नजर आने लगी थी। एक दिन राकेश

[21:03] उनके कमरे में आया और बातोंबातों में

[21:05] पूछने लगा। मां तुम्हें कोई परेशानी तो

[21:08] नहीं है? दिल की या सांस की कोई तकलीफ?

[21:11] सावित्री देवी ने उसे घूर कर देखा। क्यों

[21:13] बेटा? आज अचानक मेरी बीमारियों की इतनी

[21:16] चिंता क्यों हो रही है? राकेश हकला गया।

[21:19] नहीं नहीं मां। वह तो बस ऐसे ही पूछ रहा

[21:22] था। तुम्हारी उम्र हो गई है ना? तो ध्यान

[21:25] रखना पड़ता है। लेकिन सावित्री देवी को

[21:28] उसका जवाब तसल्ली नहीं दे पाया। उनके कान

[21:31] खड़े हो गए। उन्हें वह दिन याद आया जब

[21:33] पूजा ने उनसे किसी सरकारी स्कीम के बहाने

[21:36] कागजों पर अंगूठा लगवाया था। फिर वो

[21:39] डॉक्टर का आना जो बस नाटक करके चला गया

[21:42] था। एक-एक करके सारी कड़ियां जुड़ने लगी।

[21:45] लेकिन उनका दिल यह मानने को तैयार नहीं था

[21:48] कि उनका अपना बेटा उनके साथ कुछ गलत कर

[21:51] सकता है। नहीं नहीं मैं ज्यादा सोच रही

[21:54] हूं। वह खुद को समझाती वह मेरा बेटा है।

[21:57] मेरा खून है। वह मेरे साथ कुछ गलत नहीं कर

[22:00] सकता। लेकिन शक का कीड़ा एक बार दिमाग में

[22:03] घुस जाए तो वह चैन से बैठने नहीं देता। अब

[22:06] वह हर चीज को संदेह की नजर से देखने लगी।

[22:09] पूजा जब उनके लिए खाना लाती तो वह पहले

[22:12] उसे चखने का इंतजार करती। जब राकेश उन्हें

[22:15] सहारा देकर सीढ़ियों से उतारता तो वह

[22:17] रेलिंग को कसकर पकड़ लेती। वह अपने ही घर

[22:20] में एक कैदी की तरह महसूस करने लगी थी जो

[22:23] अपने ही पहरेदारों से डर रहा हो। राकेश और

[22:26] पूजा की बेसब्री अब चरम पर थी। गैस लीक

[22:29] वाली योजना की नाकामी ने उन्हें और भी

[22:31] ज्यादा हताश और खतरनाक बना दिया था। हर

[22:34] गुजरता दिन उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव

[22:38] बढ़ा रहा था। पॉलिसी का प्रीमियम भरने की

[22:40] तारीख पास आ रही थी और हाथ में पैसे नहीं

[22:43] थे। पूजा के ताने अब और भी जहरीले हो गए

[22:46] थे। वह राकेश पर चिल्लाती। एक छोटा सा काम

[22:49] ठीक से नहीं कर सकते तुम। अब भरो अगला

[22:52] प्रीमियम। लो दोस्तों से और उधार। राकेश

[22:55] का अपराधब बोध अब गुस्से और लाचारी में

[22:58] बदल रहा था। वह अपनी मां की वजह से खुद को

[23:01] एक पिंजरे में फंसा हुआ महसूस कर रहा था।

[23:04] अब उसने पूजा की अगली योजना का विरोध नहीं

[23:06] किया। उनकी अगली योजना और भी क्रूर और

[23:09] सीधी थी। घर की छत पर जाने वाली सीढ़ियां

[23:12] काफी खड़ी और पुरानी थी और उनकी रेलिंग भी

[23:15] एक जगह से टूटी हुई थी। सावित्री देवी रोज

[23:18] शाम को कपड़े उठाने या कुछ देर टहलने के

[23:20] लिए छत पर जाती थी। एक दोपहर जब राकेश

[23:24] ऑफिस में था और सावित्री देवी अपने कमरे

[23:26] में सो रही थी। पूजा ने चुपके से रसोई से

[23:29] थोड़ा सरसों का तेल एक कटोरी में लिया।

[23:31] उसने तेल को ऊपरी दो-तीन सीढ़ियों पर इस

[23:34] तरह फैलाया कि वह आसानी से नजर ना आए। बस

[23:37] एक चिकनाहट की परत बन जाए। उसने यह काम

[23:40] पूरी सफाई से किया। शाम को जब सावित्री

[23:43] देवी छत पर जाने के लिए उठी तो पूजा ने

[23:46] बड़ी हमदर्दी जताते हुए कहा, मां जी, आज

[23:49] तबीयत ठीक नहीं लग रही आपकी। रहने दीजिए।

[23:52] छत पर मत जाइए। मैं कपड़े ले आती हूं। यह

[23:55] सुनकर सावित्री देवी का शक और भी गहरा हो

[23:58] गया। जो बहू कल तक उनके साए से भी दूर

[24:01] भागती थी। आज अचानक इतनी परवाह कैसे करने

[24:04] लगी? गैस वाली घटना के बाद से उनका मन

[24:06] पहले ही आशंकित था। नहीं बहू कोई बात

[24:09] नहीं। थोड़ी हवा में टहल लूंगी तो अच्छा

[24:12] लगेगा। उन्होंने कहा यह देखने के लिए कि

[24:14] पूजा की प्रतिक्रिया क्या होती है। ठीक है

[24:17] जैसी आपकी मर्जी। पर ध्यान से जाइएगा।

[24:20] पूजा ने नजरें फेरते हुए कहा और रसोई में

[24:23] काम करने का नाटक करने लगी। सावित्री देवी

[24:26] धीरे-धीरे सीढ़ियों की ओर बढ़ी। उनका दिल

[24:29] जोर-जोर से धड़क रहा था जैसे कोई अनहोनी

[24:32] की चेतावनी दे रहा हो। उन्होंने अपनी

[24:34] साड़ी को थोड़ा ऊपर उठाया और पहला कदम

[24:36] रखा। धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ती गई। लेकिन

[24:40] जैसे ही उन्होंने ऊपर सीढ़ी पर पैर रखा।

[24:42] उनका पैर बुरी तरह फिसला। आह! एक दर्दनाक

[24:46] चीख उनके मुंह से निकली और उनका संतुलन

[24:49] बिगड़ गया। वह लुढ़कती हुई नीचे की ओर

[24:51] गिरने लगी। लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही

[24:54] मंजूर था। गिरते हुए उनका हाथ टूटी हुई

[24:57] रेलिंग की बजाय दीवार पर मजबूती से जा

[24:59] टिका। वह पूरी तरह गिर नहीं बल्कि

[25:02] सीढ़ियों से बुरी तरह रगड़ती और टकराती

[25:05] हुई नीचे आ गई। उनके सिर में हाथ और पैरों

[25:08] में गहरी चोटें आई। खून बहने लगा और वह

[25:11] बेहोश हो गई। पूजा जो कोने में छिप कर यह

[25:14] सब देख रही थी। पहले तो यह देखकर खुश हुई

[25:17] कि काम हो गया। लेकिन जब उसने देखा कि मां

[25:19] सिर्फ बेहोश हुई है, सांसे चल रही हैं तो

[25:22] उसका चेहरा उतर गया। वह कुछ पल यूं ही

[25:25] खड़ी रही। साथ वाली छत से पड़ोसन भी यह

[25:28] नजारा देख रही थी। जैसे ही पूजा की नजर उस

[25:31] पर पड़ी, उसने तुरंत शोर मचाना शुरू कर

[25:33] दिया। अरे दौड़ो। मांझी सीढ़ियों से गिर

[25:36] गई। देखो तो कितना खून बह रहा है। उसकी

[25:40] चीख सुनकर पड़ोसी इकट्ठे हो गए। किसी ने

[25:42] एंबुलेंस को फोन किया। राकेश को ऑफिस में

[25:45] खबर की गई। कुछ ही देर में सावित्री देवी

[25:48] को खून से लथपथ हालत में अस्पताल ले जाया

[25:50] गया। राकेश और पूजा एंबुलेंस में बैठे थे।

[25:53] उनके चेहरों पर झूठी ही चिंता का नकाब था।

[25:56] लेकिन दिलों में इस बात की हताशा थी कि

[25:58] शिकार इस बार भी जिंदा बच गया था। अस्पताल

[26:01] पहुंचकर सावित्री देवी को तुरंत इमरजेंसी

[26:04] वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टर ने

[26:06] बताया कि सिर में गहरी चोट है। कई टांके

[26:09] लगेंगे और पैर में फ्रैक्चर है। होश आने

[26:11] पर सावित्री देवी ने खुद को एक ठंडे

[26:14] अपरिचित बिस्तर पर पाया। चारों तरफ मशीनों

[26:17] की बीप बीप और अजनबियों की भागदौड़ थी।

[26:20] उनकी आंखें अपने बेटे और बहू को ढूंढ रही

[26:22] थी। राकेश और पूजा सामने ही खड़े थे।

[26:25] सावित्री देवी ने कांपते हुए हाथ से राकेश

[26:28] को पास आने का इशारा किया। बेटा उनकी आवाज

[26:32] बहुत कमजोर थी। हां मां बोलो। अब कैसा लग

[26:36] रहा है? राकेश ने झुक कर पूछा। सावित्री

[26:39] देवी की आंखों में आंसू भर आए। वह पूछना

[26:41] चाहती थी, बेटा क्या यह सब तुम कर रहे हो?

[26:45] लेकिन उनके मुंह से शब्द नहीं निकले। वो

[26:48] बस अपने बेटे का चेहरा देखती रही। उस

[26:50] चेहरे में उस मासूमियत को ढूंढने की कोशिश

[26:52] करती रही जो कहीं खो गई थी। राकेश उनकी इस

[26:56] खामोश भेदती हुई नजर से घबरा गया। मां,

[26:59] तुम आराम करो। डॉक्टर ने ज्यादा बोलने से

[27:02] मना किया है। यह कहकर वह पीछे हट गया। तभी

[27:05] पूजा बोली, मां जी, लगता है चोट ज्यादा आई

[27:09] है। आप आराम कीजिए ज्यादा मत सोचिए। इतना

[27:12] कहकर वह भी कमरे से बाहर आ गई। उनकी

[27:15] देखभाल एक युवा और समझदार नर्स के जिम्मे

[27:17] थी जिसका नाम था अंजलि। अंजलि अपना काम

[27:20] बड़ी लगन और ईमानदारी से कर रही थी। उसने

[27:23] पहले दिन से ही एक बात नोटिस की। राकेश और

[27:26] पूजा अपनी मां की बीमारी को लेकर जितने

[27:29] चिंतित नजर आते थे उतने थे नहीं। उनके

[27:32] सवाल हमेशा डॉक्टर से यह होते थे कितना

[27:34] खर्चा आएगा? कब तक छुट्टी मिलेगी? हालत

[27:37] ज्यादा गंभीर तो नहीं है? उन्होंने एक बार

[27:40] भी यह नहीं पूछा कि मां को दर्द तो नहीं

[27:42] हो रहा। उन्हें आराम है या नहीं? अंजलि को

[27:45] उनका यह व्यवहार खटका। उसने कई मरीज और

[27:48] उनके परिवार देखे थे। लेकिन ऐसी बेरुखी

[27:51] पहली बार देख रही थी। एक रात जब सावित्री

[27:54] देवी दर्द से कराह रही थी, अंजलि उनके पास

[27:57] बैठी उनका हाथ सहला रही थी। बहुत दर्द है

[28:00] मां जी। उसने प्यार से पूछा। सावित्री

[28:03] देवी ने रोते हुए कहा, तन का दर्द तो सह

[28:06] लूंगी बेटी पर मन का दर्द नहीं सहा जाता।

[28:09] क्या हुआ मां जी? आप मुझे बता सकती हैं।

[28:12] मन हल्का हो जाएगा। सावित्री देवी

[28:15] हिचकिचाएं। फिर उनकी आंखों से आंसुओं की

[28:17] झड़ी लग गई। उन्होंने अंजलि को सब कुछ बता

[28:20] दिया। बेटे बहू का बदला हुआ व्यवहार, गैस

[28:24] वाली घटना, राकेश और पूजा के अजीब सवाल और

[28:27] आखिर में सीढ़ियों से गिरना। मुझे लगता है

[28:30] बेटी मेरा पैर फिसला नहीं था बल्कि

[28:33] जानबूझकर मुझे गिराया गया था। पर मैं

[28:35] किससे कहूं? कोई मेरी बात पर यकीन नहीं

[28:38] करेगा। वह मेरा अपना बेटा है। कहकर वह

[28:41] फूट-फूट कर रो पड़ी। अंजलि का दिल दहल

[28:44] गया। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई

[28:46] अपनी मां के साथ ऐसा कर सकता है। उसने

[28:49] सावित्री देवी को दिलासा दिया। आप चिंता

[28:51] मत कीजिए मां जी। मैं हूं आपके साथ। अब

[28:54] आपको कुछ नहीं होगा। उस दिन के बाद अंजलि

[28:57] सावित्री देवी के लिए एक नर्स से बढ़कर एक

[29:00] बेटी बन गई। वह उनकी दवा से लेकर उनके

[29:03] खाने तक हर चीज का खुद ध्यान रखती। उसने

[29:06] ठान लिया था कि वह इस मामले की तह तक जाकर

[29:08] रहेगी। इधर सावित्री देवी के इलाज के

[29:11] दौरान डॉक्टरों ने सिर की चोट की गंभीरता

[29:13] जांचने के लिए कुछ रूटीन ब्लड टेस्ट और एक

[29:16] डिटेल्ड बॉडी स्कैन किया। सीनियर डॉक्टर

[29:19] डॉक्टर वर्मा एक अनुभवी और बेहद काबिल

[29:22] इंसान थे। जब उन्होंने सावित्री देवी की

[29:24] रिपोर्ट्स देखी तो उनके माथे पर चिंता की

[29:27] लकीरें खींच गई। चोटों की रिपोर्ट तो

[29:29] सामान्य थी लेकिन स्कैन में कुछ ऐसा दिखा

[29:32] जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने

[29:35] तुरंत राकेश और पूजा को अपने केबिन में

[29:37] बुलाया। देखिए आपकी मां के लिए एक अच्छी

[29:41] खबर भी है और एक बुरी भी। डॉक्टर वर्मा ने

[29:44] अपनी मेज पर रखी रिपोर्ट्स को देखते हुए

[29:46] गंभीर स्वर में कहा। राकेश और पूजा के दिल

[29:49] धड़क उठे। उन्हें लगा शायद मां की हालत और

[29:53] बिगड़ गई है या शायद वह बच नहीं पाएंगी।

[29:56] क्या हुआ डॉक्टर? पूजा ने अपनी आवाज में

[29:59] झूठी घबराहट घोलते हुए पूछा। बुरी खबर यह

[30:02] है कि आपकी मां को जो बार-बार हल्का बुखार

[30:05] और खांसी रहती थी, जिसे आप लोग मामूली

[30:07] इंफेक्शन समझ रहे थे, वह मामूली नहीं है।

[30:10] उनके फेफड़ों में एक शुरुआती स्टेज का

[30:12] ट्यूमर है। यह सुनते ही राकेश और पूजा की

[30:16] आंखों में एक पल के लिए जो चमक आई, उसे डॉ

[30:19] वर्मा की अनुभवी नजरों ने पकड़ लिया।

[30:21] उन्होंने एक दूसरे की तरफ देखा और उनकी

[30:24] आंखों में छुपी क्रूर खुशी लगभग चीख पड़ी।

[30:27] मतलब हमारा काम अब कुदरत खुद कर देगी।

[30:30] लेकिन अच्छी खबर यह है डॉक्टर ने जानबूझकर

[30:33] थोड़ा रुककर उनकी प्रतिक्रिया का अध्ययन

[30:36] करते हुए आगे कहा कि यह ट्यूमर अभी पहली

[30:39] स्टेज में है और इसका पता हमें इसी

[30:41] एक्सीडेंट की वजह से चल पाया। अगर यह

[30:43] एक्सीडेंट ना होता और वह अस्पताल ना आती

[30:46] तो शायद इस बीमारी का पता बहुत देर से

[30:49] चलता जब कुछ करना मुमकिन नहीं होता।

[30:52] डॉक्टर वर्मा ने अपनी कुर्सी पर थोड़ा आगे

[30:54] झुककर कहा, एक तरह से उनका सीढ़ियों से

[30:57] गिरना उनके लिए एक छिपा हुआ वरदान साबित

[30:59] हुआ है। हम जल्द ही उनकी कीमोथेरेपी शुरू

[31:02] करेंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि वह

[31:04] बिल्कुल ठीक हो जाएंगी और एक लंबी स्वस्थ

[31:07] जिंदगी जिएंगी। यह सुनना था कि राकेश और

[31:10] पूजा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके

[31:13] चेहरों का रंग ऐसे उड़ा जैसे किसी ने उन

[31:16] पर तेजाब फेंक दिया हो। एक करोड़ का सपना

[31:19] जो उन्हें कुछ पल पहले सच होता दिख रहा

[31:22] था। अचानक एक लंबे और महंगे इलाज के

[31:24] अंतहीन बिलों के बुरे स्वप्न में बदल गया।

[31:27] जिस हादसे को उन्होंने मौत की सीढ़ी बनाया

[31:30] था वही हादसा उनकी मां के लिए जिंदगी की

[31:32] सीढ़ी बन गया। एक लंबी जिंदगी राकेश

[31:35] हकलाते हुए बोला उसकी आवाज में निराशा साफ

[31:38] झलक रही थी। जी हां बिल्कुल। आप लोगों को

[31:42] तो खुश होना चाहिए कि आपकी मां को एक नई

[31:45] जिंदगी मिली है। डॉक्टर वर्मा ने उनकी

[31:47] प्रतिक्रिया देखकर कहा, उनका शक अब और भी

[31:50] गहरा हो गया था। राकेश और पूजा के पास

[31:53] कहने को कुछ नहीं था। वह शून्य होकर किसी

[31:56] रोबोट की तरह केबिन से बाहर निकले। उनकी

[31:59] बनाई हर योजना, हर साजिश पर कुदरत ने एक

[32:02] ऐसा तमाचा मारा था, जिसकी गूंज दूर तक

[32:05] जाने वाली थी। उनकी एक करोड़ की लॉटरी अब

[32:08] एक कभी ना खत्म होने वाले मेडिकल बिल में

[32:10] बदल चुकी थी। डॉक्टर वर्मा को राकेश और

[32:13] पूजा का व्यवहार बहुत ही संदिग्ध लगा था।

[32:16] कोई भी बेटा अपनी मां की लंबी उम्र की खबर

[32:19] सुनकर ऐसे पत्थर की मूरत नहीं बन जाता।

[32:22] उनका शक नरस अंजलि की बातों से और भी

[32:24] पक्का हो गया जिसने उन्हें सावित्री देवी

[32:27] के डर और उनके द्वारा बताई गई घटनाओं के

[32:29] बारे में बता दिया था। डॉक्टर वर्मा ने

[32:32] फैसला किया कि वह चुप नहीं बैठेंगे।

[32:34] उन्होंने मरीज की गोपनीयता का ध्यान रखते

[32:36] हुए अपने एक दोस्त जो पुलिस में

[32:39] इंस्पेक्टर थे। इंस्पेक्टर शर्मा को फोन

[32:41] किया और पूरा मामला समझाया। किस तरह एक

[32:44] बुजुर्ग मां के साथ लगातार दो संदिग्ध

[32:47] हादसे हुए और उन्हें बेटे बहू पर शक है।

[32:50] इंस्पेक्टर शर्मा ने कहा, डॉक्टर साहब, यह

[32:53] मामला गंभीर लग रहा है। आप मरीज को समझाइए

[32:56] कि वह हिम्मत करके एक बार हमसे बात करें।

[32:59] बिना उनकी शिकायत के हम ज्यादा कुछ नहीं

[33:01] कर सकते। अगले दिन डॉक्टर वर्मा और अंजलि

[33:05] सावित्री देवी के पास बैठे। कीमोथेरेपी के

[33:08] कारण सावित्री देवी और भी कमजोर हो गई थी।

[33:10] लेकिन उनकी आंखों में अब एक नई तरह की

[33:13] स्पष्टता थी। मां जी हम जानते हैं कि आप

[33:15] बहुत डरी हुई हैं। डॉक्टर वर्मा ने नरमी

[33:18] से कहा, लेकिन अगर आप चुप रहेंगी तो आप

[33:21] खुद को और भी बड़े खतरे में डाल देंगी।

[33:23] कैंसर का इलाज तो हम कर लेंगे पर आपके

[33:26] अपनों से आपको कौन बचाएगा? आपको न्याय के

[33:28] लिए आवाज उठानी होगी। हम सब आपके साथ हैं।

[33:32] सावित्री देवी की आंखों में आंसू थे। एक

[33:34] तरफ बेटे का मोह था, दूसरी तरफ अपनी

[33:37] जिंदगी का डर और उन लोगों का विश्वास जो

[33:40] पराए होकर भी उनके अपने बन गए थे। अंजलि

[33:43] ने उनका हाथ पकड़ कर कहा, मां जी, जो आपकी

[33:47] जान लेना चाहता है, उसके लिए कैसा मोह? आप

[33:50] अपनी जान बचाइए। हम सब है ना आपके साथ। इन

[33:53] शब्दों ने सावित्री देवी को वह हिम्मत दी

[33:56] जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी। उन्होंने

[33:58] कामती आवाज में अपनी सहमति दे दी।

[34:00] इंस्पेक्टर शर्मा सादे कपड़ों में अस्पताल

[34:03] आए। उन्होंने सावित्री देवी का बयान दर्ज

[34:06] किया। बयान में सावित्री देवी ने उन

[34:08] कागजों का भी जिक्र किया जिन पर उनसे

[34:11] सरकारी योजना के नाम पर अंगूठा लगवाया गया

[34:14] था। इंस्पेक्टर शर्मा को तुरंत इंश्योरेंस

[34:17] फ्रॉड का शक हुआ। उन्होंने अपनी टीम को

[34:19] राकेश और पूजा के घर की तलाशी लेने के लिए

[34:22] भेजा। तलाशी में अलमारी के अंदर छिपे हुए

[34:25] एक करोड़ के बीमा के कागजात मिल गए।

[34:28] पॉलिसी में नॉमिनी का नाम राकेश कुमार था।

[34:31] अब पूरा खेल शीशे की तरह साफ था। यह कोई

[34:34] पारिवारिक कलह नहीं बल्कि एक सोची समझी

[34:37] साजिश थी। अगले दिन राकेश और पूजा को

[34:41] अस्पताल बुलाया गया। उन्हें लगा कि डॉक्टर

[34:43] ने कीमोथेरेपी के खर्चे के बारे में बात

[34:45] करने के लिए बुलाया है। लेकिन जब वे

[34:47] अस्पताल के एक खाली कमरे में पहुंचे तो

[34:50] वहां डॉक्टर के साथ सादे कपड़ों में बैठे

[34:52] इंस्पेक्टर शर्मा को देखकर उनके होश उड़

[34:54] गए। राकेश कुमार यह क्या है? इंस्पेक्टर

[34:58] शर्मा ने पॉलिसी के कागजात मेज पर पटकते

[35:00] हुए पूछा। उनकी आवाज कमरे की खामोशी में

[35:03] बम की तरह फटी। कागजात देखते ही राकेश और

[35:06] पूजा का बचा खुचा रंग भी उड़ गया। उनके

[35:09] दिमाग शून्य हो गए। यह तो बस एक

[35:11] इन्वेस्टमेंट है सर। मां की सुरक्षा के

[35:14] लिए। पूजा ने हकलाते हुए बहाना बनाने की

[35:16] कोशिश की। उसकी आवाज कांप रही थी। सुरक्षा

[35:20] या सौदा? इंस्पेक्टर शर्मा गरजे तुम्हारी

[35:24] मां ने बयान दिया है कि उन्हें इस पॉलिसी

[35:26] के बारे में कुछ नहीं पता। उनसे धोखे से

[35:29] अंगूठा लगवाया गया है और उसके बाद से उन

[35:32] पर दो बार जानलेवा हमला हो चुका है। क्या

[35:35] यह भी सुरक्षा का हिस्सा है? राकेश पसीने

[35:38] से तर-बतर हो गया। उसके पैर कांपने लगे।

[35:41] उसके पास अब कोई जवाब नहीं था। मुंह खोलो।

[35:44] वरना यही बात मैं अपने तरीके से पूछूंगा।

[35:47] इंस्पेक्टर ने मेज पर हाथ पटकते हुए कहा।

[35:50] उस आवाज से राकेश का पूरा शरीर कांप गया।

[35:53] राकेश की हिम्मत जवाब दी गई। वह जमीन पर

[35:56] गिर पड़ा और इंस्पेक्टर के पैरों में

[35:58] पड़कर बच्चों की तरह रोने लगा। मुझे माफ

[36:01] कर दो साहब। मुझसे गलती हो गई। यह सब यह

[36:05] सब पूजा ने करवाया था। उसी ने मुझे लालच

[36:08] दिया था। मैं तो अपनी मां से बहुत प्यार

[36:10] करता हूं। पूजा ने जब देखा कि राकेश सारा

[36:13] इल्जाम उस पर डाल रहा है तो उसके अंदर का

[36:16] शैतान जाग गया। वह चीख पड़ी। झूठ बोल रहा

[36:20] है यह। यह खुद कर्जे में डूबा हुआ था।

[36:22] दोस्तों की तरक्की से जलता था। इसी ने कहा

[36:25] था कि मां के मरने के बाद हमें कुछ नहीं

[36:28] मिलेगा। इसीलिए बीमा करवाना जरूरी है।

[36:31] मैंने तो बस इसका साथ दिया था। तू झूठी

[36:33] है। तेरे ही बड़े-बड़े सपने थे। तू ही दिन

[36:37] रात मुझे ताने मारती थी जिनकी वजह से

[36:39] मैंने यह पाप किया। राकेश जमीन पर

[36:42] बैठे-बैठे चिल्लाया और तुम तुम तो बड़े

[36:45] दूध के धुले हो। अपनी मां को मरते हुए

[36:47] देखने को तैयार हो गए पैसों के लिए। पूजा

[36:50] ने घृणा से कहा। दोनों पतिपत्नी एक दूसरे

[36:53] पर कीचड़ उछालने लगे। उनके मुंह से निकलते

[36:56] हर शब्द के साथ उनका रिश्ता और उनका

[36:58] इंसानियत का नकाब तार-तार हो रहा था। वे

[37:02] भूल गए कि वे एक पुलिस ऑफिसर के सामने

[37:04] खड़े हैं। वे बस एक दूसरे को नीचा दिखाने

[37:07] में लगे थे। यह साबित करने में कि दूसरा

[37:10] ज्यादा बड़ा गुनहगार है। डॉक्टर वर्मा और

[37:13] इंस्पेक्टर शर्मा घृणा से उन्हें देख रहे

[37:15] थे। इंस्पेक्टर शर्मा ने एक सिपाही को

[37:17] इशारा किया। ले जाओ इन दोनों को। बाकी की

[37:20] कहानी यह हवालात में सुनाएंगे। पुलिस

[37:23] राकेश और पूजा को घसीटते हुए ले गई। उनके

[37:27] जाने के बाद कमरे में एक भारी खामोशी पसर

[37:30] गई जिसे केवल उनके द्वारा किए गए पापों की

[37:32] बदबू भर रही थी। एक करोड़ का सपना अब जेल

[37:36] की अंधेरी कोठरी में खत्म होने वाला था।

[37:38] राकेश और पूजा की गिरफ्तारी की खबर

[37:41] अस्पताल में और मोहल्ले में जंगल की आग की

[37:44] तरह फैल गई। लोग तरह-तरह की बातें बना

[37:47] रहे। हर कोई उस कलयुगी बेटे और बहू को कोस

[37:50] रहा था। जिन्होंने थोड़े से पैसों के लिए

[37:52] अपनी मां की जान लेने की कोशिश की। जब

[37:55] सावित्री देवी को यह पता चला तो वह पत्थर

[37:57] की तरह शून्य हो गई। कीमोथेरेपी के दर्द

[38:00] से ज्यादा दर्द उन्हें अपने दिल में महसूस

[38:02] हो रहा था। उन्हें न्याय तो मिला था लेकिन

[38:05] इस न्याय की कीमत बहुत भारी थी। उनका अपना

[38:08] बेटा अब एक मुजरिम था सलाखों के पीछे। जिस

[38:12] बेटे की लंबी उम्र के लिए वह हमेशा दुआ

[38:14] करती थी, आज उसी को उन्होंने जेल भिजवा

[38:17] दिया था। एक मां का दिल। यह सब जानने के

[38:20] बाद भी कि उसी बेटे ने उनकी जान लेने की

[38:23] कोशिश की। उनके दिल के किसी कोने में एक

[38:26] टीस उठ रही थी। मेरा राकेश ऐसा नहीं था।

[38:29] वो नर्स अंजलि का हाथ पकड़ कर रोती। उसे

[38:32] उस लड़की ने बिगाड़ दिया। पैसों के लालच

[38:34] ने उसे अंधा कर दिया। मेरा बच्चा तो बहुत

[38:37] अच्छा था। अंजलि उन्हें समझाती। मां जी जो

[38:41] हुआ उसमें आपकी कोई गलती नहीं है। आपने जो

[38:45] किया अपनी जान बचाने के लिए किया। अगर आप

[38:48] कमजोर पड़ जाती तो वह लोग अपने मकसद में

[38:51] कामयाब हो जाते। डॉक्टर वर्मा ने भी

[38:53] उन्हें हिम्मत बंधाई। सावित्री जी अब आपको

[38:56] अपने बारे में सोचना है। आपका इलाज अभी

[38:59] बाकी है। आपको ठीक होना है। उन लोगों को

[39:03] उनके कर्मों की सजा कानून देगा। धीरे-धीरे

[39:06] सावित्री देवी ने खुद को संभाला। अस्पताल

[39:09] का स्टाफ खासकर अंजलि उनकी देखभाल एक

[39:12] परिवार की तरह कर रही थी। उनके मोहल्ले के

[39:15] लोग उनसे मिलने आने लगे। हमदर्दी जताने

[39:17] लगे और उनके लिए घर से खाना बनाकर लाते।

[39:20] सावित्री देवी को पहली बार महसूस हुआ कि

[39:23] खून के रिश्तों से बड़े इंसानियत के

[39:25] रिश्ते भी होते हैं। उनका बेटा, बहू, उनके

[39:28] सगे होकर भी पराए निकले और अंजलि जैसे लोग

[39:31] पराए होकर भी उनके अपने बन गए थे।

[39:34] उन्होंने फैसला किया कि वह अब कमजोर नहीं

[39:36] पड़ेंगी। उन्हें अपनी जिंदगी के लिए लड़ना

[39:39] था ना सिर्फ कैंसर से बल्कि उन यादों से

[39:42] भी जो उन्हें पल-पल तोड़ रही थी। उनका

[39:45] संघर्ष अब दोगुना हो गया था। मामला कोर्ट

[39:48] में पहुंचा। इंश्योरेंस एजेंट सुरेश

[39:50] सरकारी गवाह बन गया। उसने अदालत में कबूल

[39:53] किया कि कैसे राकेश और पूजा ने उसे ज्यादा

[39:56] कमीशन का लालच देकर इस धोखाधड़ी में शामिल

[39:59] किया था। उसने यह भी बताया कि डॉक्टर को

[40:02] घूस देकर झूठी मेडिकल रिपोर्ट बनवाई गई

[40:05] थी। राकेश और पूजा के खिलाफ धोखाधड़ी,

[40:08] हत्या का प्रयास और साजिश रचने के मजबूत

[40:11] सबूत थे। सावित्री देवी का बयान, बीमा के

[40:14] कागजात, सुरेश और उस खरीदे हुए डॉक्टर का

[40:17] कबूलनामा सब कुछ उनके खिलाफ जा रहा था।

[40:20] मुकदमे के दौरान कीमोथेरेपी से कमजोर हो

[40:23] चुकी सावित्री देवी को भी व्हीलचेयर पर

[40:26] गवाही के लिए आना पड़ा। कटघरे में अपने

[40:29] बेटे को एक मुजरिम की तरह खड़ा देखना उनके

[40:32] लिए किसी सजा से कम नहीं था। उनकी आंखों

[40:35] से आंसू बह रहे थे। लेकिन उन्होंने कांपती

[40:38] आवाज में सच बयान किया। उन्होंने अदालत को

[40:40] बताया कि कैसे उनसे धोखे से सरकारी योजना

[40:44] के नाम पर अंगूठा लगवाया गया और कैसे

[40:46] उन्हें लगा कि उनकी जान लेने की कोशिश की

[40:48] जा रही है। राकेश अपनी मां की तरफ देख भी

[40:51] नहीं पाया। उसकी नजरें शर्म और अपराध बोध

[40:54] से झुकी हुई थी। वह अब समझ चुका था कि

[40:57] उसका लालच उसे किस अंधेरी खाई में ले आया

[41:00] है। पूजा अभी भी खुद को बेकसूर साबित करने

[41:03] की नाकाम कोशिश कर रही थी और सारा दोष

[41:06] राकेश पर मड़ रही थी। अदालत ने सारे

[41:10] सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर

[41:12] अपना फैसला सुनाया। यह अदालत राकेश कुमार

[41:16] और पूजा को अपनी मां अथवा सास की हत्या का

[41:18] प्रयास करने, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश

[41:21] रचने का दोषी पाती है। जज ने अपने फैसले

[41:24] में कहा, "यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं

[41:27] बल्कि रिश्तों के पतन और लालच की

[41:29] पराकाष्ठा को दर्शाता है। ऐसे अपराध के

[41:32] लिए कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती।

[41:35] राकेश और पूजा को हत्या के प्रयास और

[41:37] धोखाधड़ी के जुर्म में 5-प साल की सख्त

[41:40] कैद की सजा सुनाई गई। इंश्योरेंस एजेंट और

[41:44] फर्जी डॉक्टर को भी उनकी भूमिका के लिए

[41:46] सजा मिली। फैसला सुनकर पूजा अदालत में ही

[41:49] चीखने चिल्लाने लगी। जबकि राकेश मूर्ति की

[41:51] तरह खड़ा रहा। शायद उसे अपने किए पर

[41:54] पछतावा हो रहा था। लेकिन अब बहुत देर हो

[41:57] चुकी थी। वे लोहे के दरवाजों के पीछे बंद

[42:00] हो गए और उनकी जिंदगी के 5 साल लालच की

[42:02] कीमत चुकाने के लिए अंधेरी कोठरी के नाम

[42:05] हो चुके थे। सावित्री देवी का इलाज पूरा

[42:08] हो गया। कैंसर को मात देकर वह अस्पताल से

[42:10] बाहर तो आ गई लेकिन उनके सामने एक बड़ा

[42:13] सवाल खड़ा था। अब वह कहां जाएंगी? अस्पताल

[42:16] से छुट्टी मिलने के दिन नर्स अंजलि और

[42:18] डॉक्टर वर्मा उनके पास खड़े थे। मां जी अब

[42:22] आप कहां जाएंगी? अंजलि ने धीरे से पूछा।

[42:25] यही सवाल तो वह खुद से पूछ रही थी। कहां

[42:27] जाएंगी वो? उस घर में जिसकी दीवारें अब भी

[42:30] उनकी बहू की चीखों और बेटे के विश्वासघात

[42:33] की गवाही देती थी। उस घर में जहां उनकी

[42:36] अपनी ही मौत का सौदा हुआ था। नहीं, अब वह

[42:40] एक मकान तो था पर घर नहीं रहा था। वह एक

[42:43] कब्रगाह बन चुका था। जहां उन्होंने अपने

[42:45] रिश्तों को दफन होते देखा था। उनकी आंखों

[42:48] से आंसू बहने लगे। लेकिन इस बार इन आंसुओं

[42:51] में बेबसी नहीं एक फैसला था। उन्होंने

[42:54] अपने आंचल के छोर से आंखें पछी और एक दृढ़

[42:57] आवाज में बोली, वृद्धाश्रम यह सुनकर अंजलि

[43:00] और डॉक्टर वर्मा सन्न रह गए। नहीं मां जी

[43:03] आप मेरे साथ। अंजलि ने कहना चाहा लेकिन

[43:07] सावित्री देवी ने बीच में ही उन्हें रोक

[43:09] दिया। एक हल्की सी मुस्कान उनके होठों पर

[43:11] आई जिसमें ढेर सारा दर्द छुपा था। नहीं

[43:15] बेटी तुम लोगों ने मेरे लिए जो किया उसका

[43:17] कर्ज मैं सात जन्मों में नहीं चुका सकती।

[43:20] पराए होकर भी तुमने अपनों से बढ़कर मेरा

[43:22] साथ दिया। लेकिन अब मुझे किसी पर बोझ नहीं

[43:26] बनना। वृद्धाश्रम में मेरे जैसे और भी

[43:28] होंगे जिनके अपनों ने उन्हें छोड़ दिया।

[43:31] हम सब एक दूसरे का दर्द बांटकर अपनी बची

[43:34] हुई जिंदगी गुजार लेंगे। सावित्री देवी ने

[43:37] अंजलि की मदद से उन्होंने एक प्रॉपर्टी

[43:39] डीलर को बुलाया और अपने उस दो कमरों के घर

[43:42] को किराए पर चढ़ा दिया। घर उनके पति की

[43:45] आखिरी निशानी थी। लेकिन अब वह समझ चुकी थी

[43:48] कि निशानानियों से ज्यादा जरूरी जिंदगी

[43:50] होती है। मकान किराए पर देने से जो एडवांस

[43:54] के ₹00 मिले उसे उन्होंने अपनी साड़ी के

[43:57] पल्लू में मजबूती से बांध लिया। वह सिर्फ

[44:00] रुपए नहीं थे। वह उनका स्वाभिमान था। वह

[44:03] रुपए लेकर वह एक अच्छे वृद्धाश्रम में चली

[44:06] गई। एक बेचारी बनकर नहीं बल्कि एक

[44:08] स्वाभिमानी स्त्री की तरह। जब वह उस

[44:11] वृद्धाश्रम में अपना सामान लेकर पहुंची तो

[44:13] उनका मन थोड़ा भारी था। लेकिन वहां का

[44:16] माहौल देखकर उन्हें अच्छा लगा। वहां उनके

[44:19] जैसे और भी बुजुर्ग थे। जिन्होंने जिंदगी

[44:22] के अलग-अलग थपड़े खाए थे। लेकिन उनके

[44:24] चेहरों पर एक अजीब सी शांति थी। उन्होंने

[44:27] एक दूसरे के साथ अपना दुख सुख बांटना शुरू

[44:30] किया। अंजलि उनसे हर हफ्ते मिलने आती। वह

[44:33] उनके लिए फल और उनकी पसंद की किताबें

[44:35] लाती। धीरे-धीरे सावित्री देवी उस माहौल

[44:38] में रम गई। वो वहां के छोटे-मोटे कामों

[44:41] में हाथ बंटाती। अनाथालय के बच्चों के लिए

[44:44] स्वेटर बुनती और शाम को बाकी लोगों के साथ

[44:46] बैठकर बातें करती। उनके चेहरे पर

[44:49] धीरे-धीरे वही पहले वाली शांति और सुकून

[44:51] लौटने लगा था जो उनके बेटे बहू ने छीन

[44:54] लिया था। उन्होंने सीखा कि परिवार सिर्फ

[44:56] खून के रिश्तों से नहीं बनता बल्कि प्यार,

[44:59] सम्मान और इंसानियत से बनता है। उधर जेल

[45:02] की चार दीवारी में राकेश को हर पल अपनी

[45:05] गलती का एहसास हो रहा था। उसे अपनी मां का

[45:08] भोलाभाला चेहरा, उनका प्यार, उनका त्याग

[45:11] सब याद आता था। उसे याद आता था कि कैसे

[45:14] बचपन में जब वह बीमार पड़ता था, तो मां

[45:17] पूरी-पूरी रात उसके पास बैठकर उसका ख्याल

[45:19] रखती थी और उसने उसी मां की जान लेने की

[45:22] कोशिश की। यह सोचकर ही उसकी आत्मा कांप

[45:26] उठती। उसका पूजा से भी मोह भंग हो चुका

[45:28] था। वह समझ गया था कि पूजा ने उसे सिर्फ

[45:32] अपने सपनों को पूरा करने की एक सीढ़ी के

[45:35] तौर पर इस्तेमाल किया था। जेल में भी वह

[45:37] दोनों अलग-अलग बैरकों में थे और एक दूसरे

[45:40] से बात तक नहीं करते थे। वक्त का पहिया

[45:43] घूमता रहा। कई साल बीत गए। अच्छे व्यवहार

[45:46] के कारण राकेश की सजा कुछ कम कर दी गई थी।

[45:49] वह जेल से बाहर आया। जेल की सलाखों ने

[45:52] उसके शरीर से ज्यादा उसकी आत्मा को तोड़ा

[45:55] था। पश्चाताप की आग में जलकर उसका घमंड और

[45:58] लालच खाक हो चुका था। बाहर आकर उसने सबसे

[46:01] पहला काम पूजा को तलाक देने का किया। उस

[46:04] रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर दिया

[46:07] जिसने उसे हैवान बना दिया था। अब वह एक

[46:09] टूटा हुआ अकेला इंसान था जिसकी आंखों में

[46:12] बस एक ही तलाश थी अपनी मां की। सावित्री

[46:16] देवी के मकान में रहने वाले किराएदारों से

[46:18] उसे उस वृद्धाश्रम का पता मिल गया। वह मन

[46:21] में आत्मग्लानी लिए गेट के अंदर दाखिल

[46:24] हुआ। सामने बगीचे में कुछ बुजुर्ग औरतें

[46:26] बैठी हंस बोल रही थी। उन्हीं के बीच सफेद

[46:30] साड़ी में उसकी मां बैठी थी। उनके चेहरे

[46:32] पर एक ऐसी शांति और सुकून था जो राकेश ने

[46:36] सालों से नहीं देखा था। राकेश उन्हें

[46:38] देखता ही रह गया। वो इंसान जिसे उसने बोझ

[46:42] समझकर मौत के मुंह में धकेल दिया था। वह

[46:44] तो अपनी दुनिया में खुश थी और वह खुद जो

[46:47] सब कुछ पाना चाहता था। आज बिल्कुल अकेला

[46:50] और बर्बाद खड़ा था। वह धीरे-धीरे उनके पास

[46:53] गया और मां कहकर उनके पैरों में गिर पड़ा।

[46:56] उसकी आवाज भर्रा रही थी। सावित्री देवी ने

[46:59] आंखें खोली और अपने सामने अपने बेटे को इस

[47:02] हालत में देखकर एक पल के लिए सन्न रह गई।

[47:05] राकेश बच्चों की तरह फूट-फूट कर रो रहा

[47:08] था। उसके आंसू उनकी चप्पलों को भिगो रहे

[47:11] थे। मुझे माफ कर दो मां। मुझसे बहुत बड़ा

[47:14] पाप हो गया। मैं हर रोज उस दिन के लिए

[47:16] मरता हूं। हर पल उस आग में जलता हूं। बस

[47:19] एक बार बस एक बार कह दो कि तुमने मुझे माफ

[47:22] कर दिया। सावित्री देवी की आंखों से भी

[47:25] आंसू बह निकले। पर आज इन आंसुओं में दर्द

[47:28] के साथ एक अजीब सी करुणा थी। उन्होंने

[47:31] कांपते हाथों से उसे उठाया। उसके सिर पर

[47:34] हाथ फेरते हुए बोली, उठ बेटा। एक मां अपने

[47:37] बच्चे से ज्यादा देर नाराज नहीं रह सकती।

[47:40] तुझे कानून ने सजा तो दे दी पर असली

[47:42] पश्चाताप तू अब कर रहा है और यही तेरी

[47:45] सबसे बड़ी सजा और सबसे बड़ी शुद्धि है।

[47:48] राकेश ने उम्मीद भरी नजरों से उन्हें

[47:50] देखा। मां घर चलो। मैं तुम्हें लेने आया

[47:54] हूं। सावित्री देवी ने एक फीकी मुस्कान के

[47:57] साथ अपना सिर न में हिलाया। बेटा मैंने

[48:00] तुझे माफ कर दिया है। लेकिन मैं अब वहां

[48:02] वापस नहीं लौट सकती। अब मेरे पास एक नया

[48:05] परिवार है। एक नई जिंदगी है। तुम अपनी

[48:08] जिंदगी जियो और अगर सचमुच पछतावा है तो एक

[48:11] अच्छा इंसान बनो। यही मेरी तुम्हारे लिए

[48:14] आखिरी दुआ है। मेरा घर अब यही है इन लोगों

[48:17] के बीच जहां मुझे बोझ नहीं एक इंसान समझा

[48:20] जाता है। राकेश अपनी मां के चेहरे को

[48:23] देखता रहा। जहां अब बेटे के लिए मोह नहीं

[48:25] बल्कि एक असीम शांति थी। वह समझ गया था कि

[48:28] उसने सिर्फ एक घर और पैसा नहीं बल्कि अपनी

[48:31] जन्नत खो दी है जिसे वह अब कभी वापस नहीं

[48:34] पा सकता। वह चुपचाप मुड़ा और भारी कदमों

[48:37] से वापस चला गया। अपने पापों का बोझ उठाए।

[48:40] लेकिन दिल में मां की माफी का एक छोटा सा

[48:42] दिया जलाए जो शायद उसे जिंदगी के अंधेरे

[48:45] में इंसानियत का रास्ता दिखा सके। तो

[48:48] दोस्तों, अपने बेटे बहू को सबक सिखाकर

[48:51] क्या सावित्री देवी ने सही किया? अपनी राय

[48:54] कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और यह भी

[48:57] बताएं कि आप हमारी कहानियां भारत के किस

[49:00] शहर से सुन रहे हैं और दोस्तों अगर आपकी

[49:03] जिंदगी में भी कोई ऐसी घटनाएं या कोई

[49:05] अनुभव हुए हैं जिसे आप चाहते हैं कि हम

[49:07] कहानी के रूप में सबके सामने लाएं तो आप

[49:10] हमें जरूर लिख भेजें। आप कमेंट कर सकते

[49:12] हैं या फिर डिस्क्रिप्शन में दी गई ईमेल

[49:15] आईडी पर मेल भी कर सकते हैं। धन्यवाद।
